Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 123 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

शुक्रिया दोस्त

मुझे भी गाँव की पृष्ठ भूमि अच्छी लगती है

अगली कहानी में भी शायद ऐसा ही रहेगा
 
जी बिलकुल अब सेठजी महक से खेल रहे है या महक सेठजी से पता लगाना शायद मुश्किल है

देखते है आगे

शुक्रिया दोस्त
 
जी बिलकुल ऐसा ही चलनेवाला है, पूरा गाँव ही .....

शुक्रिया दोस्त
 
चलिए अब कहानी में कुछ आगे जाने ने की कोशिश करते है
 
अब महक लम्बा खीचने के मूड में नहीं थी। वह सेठजी के पकड़ से छूटने की नाकाम और अनिच्छा से उठने की कोशिश करी ताकि सेठजी उसे और सही तरीके से पकड़ में ले। उसने अपने पैरो को इस तरह से फैलाया ताकि सेठजी को लगे की वह उठने जा रही है और वह पकड़ ने के लिए उसकी चूत से छेद्छानी करे।

****

अब आगे......

“देखिए सेठजी, उस दिन आपने मेरा माल बहोत अच्छी तरह परख कर देखा था उसके बाद में आपने ही कहा था की माल अच्छा है, और आपने ही कहा था की कोशिश करूँगे ज्यादा से ज्यादा मेरे माल को बेच ने का, और खास कर मेरा सिल, आपके निर्देशानुसार मैंने वह सब किया जो एक माल को करना चाहिए। और सौदा तय होने पे मैंने भी उसे खुश कर दिया था और तीन बार उसका लंड ले लिए था। लेकिन वह सिर्फ एक बार का सौदा था अब आप भी जानते हो की मैं किसी और की अमानत बनी हुई हूँ।“

“हां बेटी,मुझे सब याद है। मैंने ही तेरा माल देखा था और सौदा भी अच्छा किया था, मैंने तेरे सिल का अच्छा सौदा भी किया था। लेकिन अब वह तुम्हे ज्यादा से ज्यादा बार चोदना चाहता है। यही तो खूबी है बेटी, की तुमने उसे बहोत अच्छे से शांत किया और तभी तो वह दूसरी बार तेरी चूत को चोदना चाहता है, हो सकता है की अब वह बार-बार तेरी चूत मांगे, और उसमे गलत भी क्या है तुमने बहोत अच्छे से उसकी सेवा की है, मस्त तरीके से उसे और उसका लंड को ठंडा किया है तभी तो वह.....।“ फनलवर की ओर से।


"ठीक है...ठीक है,आप पहले उससे रुपया लेकर परम को दे दीजिए। फिर मैं आप के ऑफिस आ जाउंगी।" पैसो की बात और उसकी चूत की सराहना सुन के महक सहमत हो गई लेकिन सेठ से अनुरोध किया;

"लेकिन आप तो छोड़िए मुझे। अब आप भी शायद कुछ आआगे बढ़ रहे है माँ और बेटी को चोदना अच्छा है क्या?"

सेठजी ने मुश्किल से महक को उल्टा घुमाया और दोनों हाथों से दोनों मस्त स्तन को मसलने लगे।

“ओफ़…बहुत मस्त और कर्कश बोबला है…। आहह मजा आ गया दबाने में…। बेटी माँ और बेटी में क्या फर्क है? आखिर है तो एक चूत और गांड जिस को मारने और मरवाने में मजा आता है। मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ता अगर मेरी बीवी और रेखा एक साथ परम से चुदे।” सेठजी ने जान के मुनीम का नाम नहीं लिया।

“सेठजी, प्लीज़ अब छोड़ दीजिये,माँ, सुंदरी बहुत गुस्सा करेगी। जब उसे पता चलेगा की सेठजी का लंड मेरी चूत मार गया है।” महक सेठ की पकड़ से छूटने की बेताब कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी बोब्लो पर उसकी मजबूत पकड़ उसे आज़ाद नहीं होने दे रही थी। या फिर क्या पता खुद आज़ाद होना नहीं चाहती थी।
फनलवर की पेशकश।

"सुंदरी को पता चलेगा कि आपने उसकी बेटी को छुआ है फिर वो आपसे कभी बात नहीं करेगी।" महक ने उसे चेतावनी दी।

अब सेठजी ने और जोर से दबाया और महक के कानों को चाटने लगे। उन्हें महिलाओं के जी-स्पॉट के बारे में पता था। कान के नीचे का यह स्थान क्लिट की तरह संवेदनशील होता है।

“ओह्ह्ह्ह…सेठजी नहीं…आआह्ह्ह्ह। क्या माँ छोड़ते हो मुझे कुछ हो रहा है। आप दूर हटिये।”

“महक, सुंदरी तो मेरी रखैल है, सिर्फ मेरा माल है…जो बोलूंगा वो करेगी।”

सेठ को सुंदरी पर पूरा भरोसा था। "वो कभी मुझसे नाराज नहीं होगी। बस अब तुम भी मुझे चोदने दो, मेरी माल बन जाओ।"

महक ने सोचा कि इस तरह वह सेठजी की पकड़ से बाहर नहीं आ सकती, इसलिए उसने अपना शरीर ढीला कर दिया और विरोध करना बंद कर दिया। यह देखकर सेठजी को लगा कि अब महका झुक गई है, उसने महक को अपने शरीर पर खींच लिया और साथ ही महक बिस्तर पर लेट गई। अब महक भी पलट गई और उसकी एक निपल सेठजी के सामे ले गई और दबाने लगी सेठजी मुस्कुराए।

“अपने दोस्त को बोलिए कि अगर मुझे फिर से चोदना है तो कम से कम 5 लाख नकद (केश) लगेगा वो भी सिर्फ 2 घंटे का…मेरी चूत फ़ालतू नहीं है। और गांड नहीं मरवाउंगी।” वह सेठ के दोस्त से चुदाई करवाने के लिए तैयार हो गई, क्योंकि उसने पहली बार उसे चोदा था। उसके सामने नंगी होना जायज भी था। और महक को भी एक लंड अतिरिक्त चाहिए था, जो पिआसा भी दे और उसके छेदों को भी भरे।

“नहीं रानी…अब वो गलती नहीं…।” सेठजी ने महक के होंठ चूसते हुए कहा; “अब मैं ही सिर्फ महक को चोदुंगा और प्यार करेंगे तेरे दोनों छेदों का पूरा सन्मान मेरे लंड से करूँगा।“

“अब तुम दोनो माँ-बेटी को सिर्फ मैं ही चोदूंगा…।” उसने उसकी कोमलता को सहलाया।

महक ने हाथ नीचे ले जाकर देखा, सेठ का लंड कपड़े के नीचे फनफना रहा था, उसने उसे धोती के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगी।
आप फनलवर की रचना पढ़ रहे है।

"नहीं बेटी नहीं!" सेठजी कराह उठे, चूची दबाई लेकिन महक ने क्या किया, वह समझ नहीं पाए, वह स्खलित होने लगे और ढीले पड़ने लगे। उन्होंने अपनी पकड़ ढीली कर दी और महक नीचे कूद गई।

“क्या सेठ, अभी तो मैं गरम होने लगी थी और आपने अपना पानी छोड़ दिया…!” उसने लंड को कुछ बार दबाया और कहा,

“राजा, मैं सुंदरी नहीं हूँ…मुझे चोदने के लिए बहुत दम चाहिए…। आप तो बस सुंदरी जैसी सालो से चुदी औरत को चोदिये, उसके सुंदर बदन को चाटिये।” उसने अपनी जलन स्पष्ट रूप से दिखा ही दी।

महक सीधी खड़ी होकर देखने लगी सेठजी अब बहुत शर्मिंदा लग रहे थे। उसे उस पर दया आ गई और उसने उसे उसके प्रयासों के लिए कुछ इनाम देने के बारे में सोचा। आख़िरकार महक भी नया अनुभव चाहती थी।

“ओह सेठ, आपने बहुत मेहनत की है और आप मेरी माँ के चोदु यार है, तो मेरा फर्ज बनता है, चलो मैं आपको अपनी जवानी दिखा देती हूँ। लेकिन इस बार लंड को काबू में रखे और पूरी जवानी का आनंद लीजिये। यह माल सब के लिए नहीं है सिर्फ कुछ चुने हुए लोगो के लिए है और हां यह बात किसी को बताना नहीं वर्ना विनोद तक पहुच जाएगी तो आपको तकलीफ होगी। आप तो जानते ही हो उसे।”

“हाँ बेटी जानता हु तुम्हे और तुम्हारे विनोद को भी और मैं यह भी जानता हु की विनोद इस गाँव में सिर्फ एक ही आदमी से डरता है और वह है तेरा बाप। और तेरा बाप मेरा नौकर है।“

वह झुकी और सेठजी के कपड़े उतारने लगी…।

”मेरे जैसी मस्त जवान लड़की को देखने का मजा सुंदरी जैसी रखैल की चुदाई से बहुत ज्यादा आएगा। मेरी छुट बहोत मस्त है ऐअसा उस सेठ ने भी कहा था। ताजा माल हूँ मैं।”

सेठ ने नम्रतापूर्वक विरोध किया लेकिन महक ने उसे नग्न कर दिया। वह लंगड़े लंड को देखकर मुस्कुराई और सेठ को आश्चर्यचकित करते हुए, उसने कुछ सेकंड के लिए लंड की मुठ मारी और चूसा।

“ऐसे लंड से मेरी माँ को क्या मजा आता होगा!” वह मन ही मन सोच रही थी, इस से कही अच्छा तो मेरा मुनीम यार या बाप का लंड है जो किसी भी चूत को चोद-चोद कर बड़ा भोसदा बना देता है। उसे सुधा की चूत और पूनम की चूत जो अब मुनीमजी के लंड बराबर हो गई थी। वो तो अच्छा है की दोनों कुछ अंतराल पर चुदवाती है तो उनकी चूत अपनी ओरिजिनल शेप में आ जाती है।

उसने उसे सुंदरी को चोदते हुए देखा था और उसे सेठ का धड़कता हुआ लंड पसंद आया था। हालाँकि यह परम या मुनीम जैसा मस्त तो नहीं था, लेकिन विनोद के लंड जैसा ही था।

“बोलिये, पहले क्या देखियेगा…?” उसने कपड़ों के ऊपर से निपल को सहलाया, थोडा खिंचा और पैरों से लंड को दबाया। सेठ शांत था।

“चलो, आप भी क्या याद रखेंगे,कि कोई मस्त माल देखी थी।” उसने कुर्ता टॉप उतार दिया और ब्रा के ऊपर से चूची भींच ली।

“ब्रा भी निकल दू…?” महक पीछे मुड़ी और सेठजी को पीछे की ओर धकेल दिया।

"राजा आंख फट जाएगी। ऐसा माल पूरे गांव में किसका नहीं है। सुंदरी का भी नहीं। मेरा माल ही कुछ ऐसा है। मैं कुछ अलग लोड़ो के लिए बनी हूँ।" वह हंसी।

सेठ महक की चमकती त्वचा को पसंद कर रहा था, उसने देखा कि उसका कंधा चौड़ा था लेकिन दोनों सिरों पर एकदम गोलाई थी, ऊपरी भुजाएँ मोटी थीं लेकिन बिल्कुल भी ढीली नहीं थीं। महक स्वस्थ थी और पीठ ऊपर से कमर तक बहुत पतली थी।

“राजा देख क्या रहे हो…जल्दी हुक खोलो…डरो मत सुंदरी से कुछ नहीं कहूंगी। जब मैं मर्जी से उतार रही हूँ तो डरने की कोई बात नहीं।”

सेठ ने अपना हाथ हटाया और कांपती उंगलियों से ब्रा का हुक खोल दिया। महक ने ब्रा को नीचे नहीं गिरने दिया। वह सेठजी की ओर सामने आई।
फनलवर की रचना।

“बोबला देखोगे?” उसने पूछा।

सेठ ने हकार में सिर हिलाया। अब एक अच्छा और छोटा माल सामने से अपनी जवानी को दिखया कौन पागल ना बोलेगा। उसके लंड ने अब गति पकड़ ली थी।

“एक या दोनों…?” उसने पूछा।

“महक, अब तड़पाओ मत, जल्दी से जल्दी दिखा दो…।” उसने विनती की। महेक ने लंड की ओर देखा, वह अभी भी थोडा लंगड़ा रहा था।

“एक माल लाख रुपये की है...2 लाख लूँगी....दोगे?" महक ने सोचा की मुनीम को यह पैसा दूंगी तो वह भी खुश होकर मेरी चूत का सौदा होने देगा।

“हा, दूंगा…अब दबाने दो…।”

सेठ बेशर्म था। जो आदमी अपनी उपस्थिति में अपनी बहू को दूसरों से चुदवा सकता है, वह किसी भी औरत के साथ कुछ भी कर सकता है।

महक ने पकड़ ढीली कर दी और सेठ ने ब्रा खींच लिया। दोनों बोबले उछल कर सेठ के चेहरे पर आ के टिक गए।


*****

आज के लिए बस यही तक कल एक नए एपिसोड के साथ आपके सामने आउंगी। अगर आपको एस एपिसोड के बारे में कोमेंट करना हो तो कीजिये। अच्छा लगेगा।


तब तक के लिए........

फनलवर की ओर से।


।। जय भारत ।।
 
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