Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 151 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

दोस्तों लूई के पन्ने पर एक नया अपडेट दिया हुआ है

पढने की तकलीफ उठाये..............

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Fantasy - लुइ के पन्ने!

ab aage............ ab jaanakee ke pair looee ke taraph jaane ko betaab the. aur kuchh hee pal gujare the kee vah kuchh mahilae unakee taraph aate dikhee. maan: “lo ab yah sab bhee aa gae.“ jaanakee: “abhee yah sab kyon aaee hai!” “phir se nyota dene.“ maan ne jaanakee ko uthaaya aur...

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जी शायद यह एपिसोड बेकार ही रहा था....................
 
जी शुरूआती तकलीफ के बाद.........................मुनीम को कुछ अच्छा मिलेगा
 
जी बिलकुल

अब क्या बताऊ यह गाँव ही कुछ अजीब है................
 
शायद परम को लोटरी लगनेवाली है ........................
 
जी अवश्य

लिख रही हूँ थोडा सा धीरज....................
 
चलिए कहानी को थोडा आगे समजने की कोशिश करते है
 
“लेकिन ये लड़की आख़िर इतना क्या बात करती है…?” मन ही मन सोच रही थी की अगर परम सेठजी के वहा था तो फिर सलौनी को कौन चोद गया होगा? क्या उसकी गांड भी...................नहीं नही............गलत मत सोच प्रभा। अपने आप से मन ही मन बाते करते हुए।

परम अब प्रभा के पास बैठ गया.....परम को चिढ़ाते हुए पूछा।

“रेखा के साथ खूब मस्ती मारा रात भर…।”

*****

अब आगे...............



“अरे, कहा, काकी!” परम ने उदास होकर कहा कि इतने सारे मेहमानों के बीच उसे रेखा के साथ रहने का समय नहीं मिल रहा है।

“लेकिन सारे गाँव बाले तो यही समजते है कि रेखा को तू अपनी घरवाली बना चुका है। उसका माल को बहोत खाता है!” प्रभा ने अपनी आँखे नचाते हुए कहा।

“काकी, वो अभी तक कुंवारी है…और उसका पति ही उसकी मस्त ‘चूत’ का पहला मजा लेगा। मेरे नशीब उतने अच्छे नहीं है।“

परम के मुँह से 'चूत' सुनकर प्रभा का पूरा शरीर कांप उठा। उसकी चूत में तुरंत गीलापन आ गया। अन्दर ही अन्दर खुश भी हुई।

उसने उसकी जाँघों पर हाथ रखा और बोली:

“क्या बात है, रजनी तेरी बहुत तारीफ करती है।”
फनलव की पेशकश

(रजनी को याद रखें, वह सुधा की मां है। परम ने माँ और बेटी दोनों को चोदा है और सुंदरी को रजनी के पति से चुदवाने के लिए लाया था)।



“वो मुझे बहुत अच्छी लगती है।” परम ने कहा, “क्या बोलती है वह?”

उस लडके को रजनी के साथ अपनी चुदाई याद आ गई, वो दुबली-पतली औरत जिसने उसे चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने पर मजबूर कर दिया था और परम के सुंदरी को उसके पति से चुदवाने के लिए राज़ी होने के बाद ही उसने हार मानी। रजनी के बारे में सोचते ही उसका लंड खड़ा हो गया। उसने सोचा कि आज ही रजनी की फिर से चुदाई कर दूँ। उसने उसे दो हफ़्तों से ज़्यादा समय से नहीं चोदा था।

“वो कह रही थी की, परम बहुत प्यारा है और उसको मालूम है कि औरत को कैसे खुश करते है।”

प्रभाने उसकी ऊपरी जांघों पर हाथ फेरा और आँख मारी,

“बेटा, क्या किया उसके साथ! वो रजनी तुमसे बहुत खुश है। कुछ तो बात होगी तभी तो वह तुमसे हारी बैठी हुई लगती है।”

परम ने प्रभा की आँखों में देखा। वह सुंदरी और पुष्पा से काफ़ी छोटी थी। परम ने सोचा कि जब वो पुष्पा जैसी परिपक्व औरत को संतुष्ट कर सकता है तो क्यों न किसी और औरत को चोदने की कोशिश करे। वो रजनी से थोड़ी ज़्यादा भरावदार थी, उसका वज़न लगभग 55-56 किलो। उसने उसके स्तनों को देखा जो साड़ी से ढके हुए थे। उसने जांघों को देखा और निष्कर्ष निकाला कि उसकी सबसे आकर्षक विशेषता उसकी जांघें हैं, जो मज़बूत और काफी मोटी लग रही थीं। अपनी किस्मत आजमाने में क्या बुराई है?

लेकिन रजनी के विचार ने उसे उत्तेजित कर दिया। उसने सोचा कि इस औरत को रिझाने में समय बर्बाद करने के बजाय, वह सीधे रजनी या उसकी नौकरानी के साथ जाकर मज़े कर सकता है। उसका लंड शांत हो सकता है।

वह अचानक उठ गया.... "काकी, मै जा रहा हूँ... रजनी काकी से मिलने।"

लेकिन प्रभा ने उसे बिठा दिया... "अरे बैठ ना..... रजनी तो अभी कॉलेज में होगी।"

दोनों कुछ मिनट तक चुप रहे। अचानक परम उठा, और महिला को बाहों में उठा लिया।
फनलवर की लेखनी



"परम क्या कर रहा है?" उसने अपने हाथ उसकी गर्दन पर रख दिये....उतार दे!''

वह उसे शयनकक्ष में ले गया और धीरे से उसे लिटा दिया।

उसने परम की ओर कामुक दृष्टि से देखा और उसे रजनी की बात याद आ गई। जैसे पूनम की माँ और सुंदरी सबसे अच्छी दोस्त थीं, रजनी, प्रभा की सबसे अच्छी दोस्त थी। और रजनी ने प्रभा को परम के मस्त लंड के बारे में बताया था। उसे रजनी की कही बात याद आ गई।

“प्रभा पूछ मत, परम पेशाब कर रहा था और मैंने झाँक कर देखा। बाप रे उसका लंड देख कर ही मेरी चूत पनिया गई। कितना मोटा और लंबा! और उसके लंड से इतनी मोटी मूत की धार देख कर मैं समज गई की लंड में काफी डीएम है। अगर सुधा के बाबूजी घर में नहीं होते तो मैं जरूर चुदवाती। रातको जब भी सोती हूँ, बस परम का लौड़ा ही दिखता है। मैं तो परम की बिना पैसे की रखैल बनने तैयार हुं…।”

रजनी ने प्रभा से कहा था कि उस रात उसे परम का सपना आया था और जब उसका पति रजनी को चोद रहा था, तो उसने सपना देखा कि वह परम के साथ चुदाई कर रही है। प्रभा ने उससे पूछा कि जब परम उससे अक्सर मिलने आता है और उसकी बेटी सुधा के साथ उसका इतना दोस्ताना व्यवहार है, तो वह परम को अपनी चूत में क्यों नहीं समा लेती? इस पर रजनी ने जवाब दिया कि वह चाहती है कि परम अपना लंड उसकी चूत में डाले, लेकिन वह उसे कैसे रिझा सकती है? वह उसकी बेटी का दोस्त है। और क्या पता सुधा भी..........

रजनी ने प्रभा को यह नहीं बताया कि परम ने न केवल सुधा का कौमार्य भंग किया, बल्कि रजनी के पति और उनकी नौकरानी रेणु की मौजूदगी में सुधा और रजनी, दोनों के साथ संभोग किया। सब के सामने माँ-बेटी को एक साथ चोदा है।

जब परम ने उसे अपने पति के साथ सोते बेडरूम के अंदर बिस्तर पर खींच लिया, तो प्रभा ने कोई विरोध नहीं किया।

“परम,जाने दे” उसकी आवाज़ बहुत धीमी थी।

प्रभाने कहा, लेकिन परम ने उसके कंधे को धक्का दिया और वह बिस्तर पर सीधी लेट गई। परम उसके पैरों के पास बैठ गया और दबाने लगा। दबाते हुए परम ने कहा कि इस उम्र में भी वह बहुत... जवान। परम ने कहा कि जब भी वह उसे सलोनी के साथ चलते देखता है, तो वह माँ नहीं, बल्कि बड़ी बहन लगती है।

परम उसके पास बैठ गया और उसके पैरों पर कपड़े को चढ़ाने लगा। उसने घुटनों तक कपड़े चढ़ा दिए।

“ओह काकी, मुझे कुछ हो रहा है.....” परम ने हाथ अंदर डाला और रेशमी जांघों को सहलाया।

“परम, सलौनी जाग जाएगी!” उसने फुसफुसाते हुए कहा और परम के चेहरे पर ढेर सारा पसीना देखा।

“क्या हुआ बेटा! पसीना क्यों आने लगा? अभी तो तुमने कुछ देखा ही नहीं।”

उसने फिर पूछा और उसके चेहरे पर पसीने की बूँदें देखकर हैरान रह गई, हालाँकि अंदर से सब कुछ काफी आरामदायक था। परम को पसीना इसलिए नहीं आ रहा था क्योंकि वह किसी औरत को छू रहा था और उसे चोदना चाहता था (वह पहले ही कई औरतों को चोद चुका था), बल्कि वह अपनी पतलून के अंदर तने हुए और धड़कते हुए लंड से असहज था, जो एक नई चूत चोदने के लिए बेताब था।

“काकी, बहुत गर्मी है…।” उसने कपड़ों को और ऊपर सरका दिया और दोनों पैरों को अलग कर दिया।

“बेटा, मुझे नंगा क्यों कर रहे हो?” वह फुसफुसाई।
फनलवर की प्रस्तुति

“काकी, तुम औरते भले ही कितना भी ढीला कपड़ा पहनो, ऊपर से ही पता चल जाता है कि कितनी मस्त जांघ और बोबले है…।”

परम ने अपने अनूठे अंदाज में टाँगों और जाँघों को दबाना शुरू कर दिया। परम द्वारा जाँघों की मांसपेशियों को सहलाना और मरोड़ना प्रभा को ऐसे रास्ते पर ले गया जहाँ से वापसी संभव नहीं थी। उसे अपनी बेटी की कोई परवाह नहीं थी, वह पूरी तरह से भरी, अभी भी अच्छी नींद ले रही थी।

'काकी, बहुत मस्त जंघे है तुम्हारी....!'

उसने जाँघों के अंदरुनी भाग पर हाथ रख दिया। "मुझे बस ऐसी ही औरतें और लड़की पसंद है, जिनकी जाँघें मस्त और सेक्सी हो,मुझे बहुत मोटी ढीली और थुल-थुल जाँघें बाली लड़की बिल्कुल पसंद नहीं हैं।"

वह दबाता और मरोड़ता रहा और बोला।।

“काकी, सलौनी की चूत की कसम, ये झांगे सुंदरी और पूनम के झांगो से भी मस्त है, और जानती हो! जिस औरत की जंघे मस्त होती है, उनकी चूत भी बहुत मस्त होती हैं और वैसी चूत को चोदने में बहुत मजा आता है। एक के बाद एक मर्द उसे चोदते हुए थक जायेंगे लेकिन वो कभी भी नहीं थकेगी।” परम “सलौनी की चूत की कसम” इरादे से बोला ताकि उसकी माँ का रिएकशन का पता चले।

अगर वह कोई विरोध या आश्चर्य नहीं करती तो दोनों माँ-बेटी की चूत का दरवाजा उसके लिए आराम से खुल जाएगा और दोनों माँ-बेटी को एक साथ चोद सकेगा, या फिर बिना डरे, वह कभी भी उसके घर में आके दोनों में से किसी को भी चोद सकेगा।



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आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए फनलवर की तरफ से जय भारत
 
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