अगर वह कोई विरोध या आश्चर्य नहीं करती तो दोनों माँ-बेटी की चूत का दरवाजा उसके लिए आराम से खुल जाएगा और दोनों माँ-बेटी को एक साथ चोद सकेगा, या फिर बिना डरे, वह कभी भी उसके घर में आके दोनों में से किसी को भी चोद सकेगा।
अब आगे.................
प्रभा के कान में पड़े शब्द “सलौनी की चूत की कसम” से उसको एक बड़ा झटका लगा। उसने अपने पैर क्रॉस कर दिए, फिर उसने सोचा की कल पूरी रात सलौनी बाहर थी, और उसकी चूत एक पाँव की तरह सूजी पड़ी है। क्या पता किसी ने उसकी चूत का उद्घाटन कर दिया हो। और वैसे भी परम मुझे पसंद है और शायद सलौनी को भी पसंद है, मुझे अब कोई विरोध नहीं करना चाहिए। कभी ना कभी तो सलौनी को किसी के भी लंड के निचे तो जाना ही है। परम ही वह आदमी क्यों ना हो! वैसे भी माँ-बेटी का समबन्ध में कोई कचाश तो नहीं आएगी। परम का सलौनी की चूत की कसम खाना मतलब परम सलौनी को पसंद तो करता ही है। इतना तो पक्का हो गया।
“क्या हुआ प्रभाकाकी? कहा खो गई?” फनलवर की पेशकश।
“अरे, कुछ नहीं, तू अपना काम कर।” उसने परम को निचे की और धकेलते हुए कहा।
प्रभाने फिर से अपने पैर खोल दिए और परम ने कपड़े पूरे ऊपर कर लिए थे। उसने उस औरत की चूत देखी, जिसकी माँ उस लड़की की थी जिसे उसने सुबह दो बार चोदा था।
"बोला ना काकी, देखो कितनी प्यारी चूत है! आपकी।" वह झुका और चूत पर चुम्बन किया और साड़ी और पेटीकोट खोल दिया। उसने कपड़े नीचे कर दिए और अब प्रभा कमर से नीचे नंगी थी।
प्रभा ने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया था और परम ने ब्लाउज उतार दिया। प्रभा नंगी थी। यह पहली बार था जब परम को किसी औरत से ज़रा भी विरोध नहीं मिला, जिसे उसने चोदने की कोशिश की थी। हाँ, सुंदरी ने खुशी-खुशी अपने बेटे के साथ चुदवाया था और ज़ाहिर है सेठजी के घर की औरतें परम के लिए पागल हैं।
वह सीधा खड़ा हुआ, अपने कपड़े उतारने लगा और सामने बिस्तर पर लेटी हुई प्रभा नामक महिला को गौर से देखने लगा।
करीब 5’3” लंबा, दुबला-पतला, बिल्कुल भी मांसल नहीं, चूची 34” साइज़ की, कमर 24”। उसने उसे उल्टा किया और कूल्हों को सहलाया, शायद 34” के.... लेकिन सबसे आकर्षक हिस्सा उसकी छोटी बहू जैसी लंबी पतली जांघें थीं।
परम ने फिर प्रभा को सीधा घुमाया और उसके ऊपर लेट गया। उसने उसे एक बार, दो बार चूमा और तीसरी बार प्रभा ने उसे कसकर गले लगाया और उसे जोश से चूमा।
परम ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में प्रभा को प्यार किया। उसने अपने होंठ उसके शरीर पर होंठों से बोबले तक फिराए, निप्पल, जघन क्षेत्र, जांघों को चूसा और चूत को तब तक चाटा और चूसा जब तक कि वह उत्तेजना से चीखने न लगी।
“बस परम,पागल हो जाउंगी! चोद मुझे पेल डाल जैसे रजनी को चोदता है।” उसकी चूत ने अब जवाब दे दिया था। बिना चुदे ही वह झड रही थी। उसकी चूत से धीरे धीरे रस का बहाव हो रहा था।
थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा और परम ने अपना अंदाज बदला और अब उसका लंड भी खड्डे में जाने को बेताब था। उसने प्रभा के पैरो को थोडा चौड़ा किया और लंड को चूत द्वार पर टिका दिया। चूत तो वैसे भी तैयार ही थी और अपनी हर सतह को चिकना कर चुकी थी। लंड बड़े आराम से प्रवेश कर गया। जब पूरा लंड अन्दर जाने को था तब प्रभा से सहन नहीं हो सका क्यों की परम का लंड कुछ ज्यादा ही उसकी चूत को चिर रहा था जो की प्रभा के लिए सामान्य से कही ज्यादा था। वह थोडा कराह उठी लेकिन लंड को बहार निकाल ने की कोशिश नहीं की। परम ने उसके पैर को उठा के लंड के लिया कुछ ज्यादा जगह बनायी। और लंड को धीरे से पूरा सरका दिया। अब प्रभा के लिए थोडा असह्य था। उस ने उसकी गांड को थोडा आगे की ओर खिसकाने की चेष्टा की पर सफल नहीं रही और लंड ने अपना काम कर दिया और वह अपने पुरे जड़ तक समा चुका था। मतलब प्रभा की चूत ने परम के लंड को उसके जड़ तक पहुचा दिया था जो शायद उसके गर्भाशय द्वार प्र तकरया था। वह थोडा चिल्लाई “बस परम हो गया”।
परम ने उसे अनसुना कर के लंड को बाहर की ओर खीच के फिर से अन्दर झटक दिया। अब प्रभा नहीं सह पायी और उसके मुंह से “आह... “ निकल गई। लेकिन परम अब मास्टर था उसने चोदना शुरू किया। प्रभा अब उसके लंड हर झटके को साथ दे रही थी और लगता था की उसकी चूत अब और ज्यादा लंड को समाने को बेताब है। फनलवर निर्मित।
परम ने स्पीड बढाई और प्रभा की चूत को जबरजस्त तरीके से चोदना चालू कर दिया।
और परम ने प्रभा को 30-35 मिनट तक जम कर चोदा, प्रभा जम कर सिसकारी मारती रही और चुदाई का पूरा मजा लिया। आखिर कर वो थक गई।
“बस परम, अब निकाल ले तेरा लंड, मेरी चूत को खाली कर, मैं तेरी रखैल बन गई…” उसने हाथ-पैर कस लिए…और पूछा।।
“बोल राजा,किसकी चूत ज्यादा मस्त है,मेरी या रजनी की?”
“तुम दोनों रखैल को एक ही बिस्तर पर लेटा कर चोदूंगा तब ही बता पाऊंगा कि कौन ज्यादा बड़ी चुदास है…!” परम ने कहा। ” वैसे काकी, तेरी सहेली रजनी बहुत मस्त हो कर चुदवाती है तेरे जैसा। मुझे तो मजा आ गया…। देख काकी हर चूत का एक अलग नशा होता है, रजनी भी मस्त माल की मालकिन है और तेरी चूत का भी जवाब नहीं। और सलौनी की चूत भी।”
परम और जोर जोर से धक्का मारने लगा और कुछ देर में चूत को रस से भर दिया। “सलौनी की चूत भी” सुनकर प्रभा की चूत ने तीसरी बार अपना चुतरस छोड़ दिया।
“ओह परम, आज पहली बार चुदाई का मजा मिला है। आह्ह्ह्ह मजा आ गया। अब उतर जा। सलोनी देखेगी तो क्या बोलेगी? क्या समजेगी?”
“रानी चिंता मत करो…उसे भी तेरे सामने जम कर चोदूंगा…लेकिन तुम फिर चोदने दोगी ना!”
“राजा, मैं तेरी रखैल हूं…तेरे लंड की दीवानी हूं। जब मन करे, आकर चोद डाल…” उसने लंड बाहर खींच लिया।
“जरा देखो तो, रजनी क्यों इस बेटे को इतना प्यार करती है।” प्रभा ने लंड को दोनों हाथों से पकड़ा और सुपाड़े को चबाने लगी। परम का लंड अब प्रभा के मुंह में था और वह दोनों ने रस को चाट कर साफ़ कर रही थी।
“काकी, कितना खुशामद करने के बाद तेरी सहेली रजनी ने लंड को मुँह में लिया था लेकिन तू ने मुझे मस्त कर दिया।” परम ने कहा “रानी,यह लोडा भी तेरा गुलाम हो गया।”
प्रभा ने लौड़े को चूसकर फिर टाइट किया और दुबारा चुदवाई। लेकिन इस बार परम को वो ठंडा नहीं कर पाई।
‘बेटा, मैं तो अब पूरी थक गई, मेरी चूत में अब जलन हो रही है। शायद सुजेगी।’ मैत्री की लिखावट।
परम ने उसे चूमा, कपड़े पहने और प्रभा को आराम करने और उसका इंतज़ार करने के लिए कहा और “अब जब फिर से आऊंगा तो तुम माँ-बेटी को साथ ही चोदुंगा यह मेरा पका वादा है डार्लिंग” कहकर बाहर चला गया।
प्रभा उसे जाते हुए देख रही। और बस वही सोच रही थी की सलौनी की चूत ऐसी हालत परम के अलावा और कोई नहीं कर सकता। वह हंसी और फिर से परम के शब्दों को याद करने लगी। “अब जब फिर से आऊंगा तो तुम माँ-बेटी को साथ ही चोदुंगा यह मेरा पका वादा है डार्लिंग”...................... और खुद की चूत सुजन को पकडती हुई देखती रही और खुश होती रही।
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दोस्तों आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए फनलवर की ओर से जय भारत।।