“घर की बात है पिताजी, अब माँ अपने बेटे से चुदवा रही है तो बाप भी तो अपनी बेटी की चूत से खेलता था। आप उन दोनों पर ध्यान ना दे और यहाँ अपनी बेटी की चूत से खेले। बाबूजी माँ कहती है की मेरा माल भी बहोत अच्छा है, और वैसे भी कल आपने भी तो चखा हुआ है। कैसा था मेरे माल का स्वाद?“
“बेटी, एक तो चूत का स्वाद ऊपर इ बेटी की चूत वाह भाई मजे ही मजे!”
अब आगे............
“तो फिर बस बाबूजी, अपनी बेटी की चूत से खेलो और लड़ो अपनी तलवार से वार करते रहो और मेरी चूत के किल्ले को तोड़ो,बाकी दुनिया को छोडो, भाई अपनी माँ का किल्ले पर हमला किया तो आप भी तो बेटी के किल्ले पर अपना महोर लगा ही सकते हो। और किसी पता चलने वाला है की बाप और बेटी कहा सोते है! बस आप अपना काम कीजिये पिताजी।“ महक ने माँ और भाई के लिए भी दरवाजे खोल दिए और अपना दरवाजा बापने बाप के लिए खोल रही थी।
बेटी ने चुतर ऊपर उछाला और बाबूजी का चुतर को अपनी चुतर पर दबाया। इधर बाप ने भी एक आखिरी बार खूब जम कर जोर से धक्का दिया और पूरा लंड समां गया। अचानक हुए हमले की वजह से बेटी अपने बाप का लंड पूरा नहीं ले सकी और थोड़ी ऊपर खिसक के बाप के लंड को थोडा बहार निकाल दिया। पर बाप भी कमाल का चोदु था, उसने फिर से एक धक्का मारा और इस बार वह खुद ही आगे की ओर चढ़ गया ताकि बेटी और ज्यादा ना खिसक सके। दुसरे प्रयत्न में बाप का पूरा लंड बेटी के अंदर घुसने के बाद मुनीम बेटी की निपल पर चिपक गया। बेटी बाप के नंगे बदन को सहलाने लगी।
“बाबूजी कल आपने पूरा लंड अन्दर क्यों नहीं डाला था!”
“बेटी मैंने सुपारा अन्दर डाला था तो तुमने चाँटा मार दिया तो मैं कैसे चुदाई करता।” फिर मुनीम धीरे-धीरे बेटी की चूत में धक्का लगाना लगेगा।
“वो तो मैं आपका महान सुपारा अन्दर गया तो मैं डर गयी, लेकिन आप अगर पूरा लंड अन्दर घुसेड़ देते तो क्या मैं नहीं चुदवाती!, “ महक ने प्यार से बाप को चूमा और कहा “मैं जम कर चुदवाती….बा...बू....जी” महक ने चूमा और फिर कहा “अब जम कर चोदिये…किसी भी डर रखे बिना बस अपनी बेटी की चूत फाडीये और मजे लीजिये।”
मुनीम धक्के पे धक्का लगाने लगा, मुनीम ने बेटी की सूखी चूत में ही लंड घुसेड़ दिया था और इतना धक्का लगाने के बाद भी चूत गीली नहीं हुई थी, होती भी कहा से साली 4 बार चूदी थी और ना जाने कितनी बार झड़ी थी। मुनीम को लगा कि बेटी कुंवारी है, किसी ने अभी तक बेटी की चूत को छेदा नहीं है। यह जान कर मुनीम बहुत खुश हुआ और फिर जोर से धक्का मारा। महक ने जोर से सिस्कारी मारी...
“माँ..... म...र..... ग....यी…, लंड ब...डा...है बा...बू...जी....थोडा धीरे मारये।” नीता की प्रस्तुति
महक को लग रहा था कि वो पहली बार चुदवा रही है। महक को वैसा ही दर्द हो रहा था जैसा कल शाम को पहली बार सिल को तुड़वाने और चुदवाने में हुआ था...मुनीम को भी
“बाबूजी… धीरे धीरे….. दर्द कर रहा है….थोड़ा चूत को गीला होने दे तो आपको चोदने में ज्यादा मजा आएगा..”
मुनीम ने लंड को पूरा बाहर निकाल लिया और खूब जोर से धक्का दिया। मुनीम करीब 44-45 साल का जवान था, 70-75 किलो वजन, कसरती बदन। इतना जोर से धक्का दिया कि सुपारा के साथ पूरा लंड बेटी के चूत के नीचे घुस गया…
“ओह्ह्ह्ह….माँ….अब तो मैं गई.....” महक ने थोड़ा जोर से सिस्कारी मारी… “आह्ह्ह ..बाबूजी….मर गई…मेरी माँ चुद गई बाबूजी...थोडा छोडो मुझे।”
मुनीम को बेटी को चोदने में बहुत मजा आ रहा था..“बेटी मुझे तो बहुत मजा आ रहा है… इतना मजा तो पूनम की चूत में नहीं आया था…।”
महक ने अपना दोनो टांगो को बाप के कुलहो पर कस कर दिया,
“साली आज भी आई थी क्या…?” उसने पूछा। मैत्री और नीता की प्रस्तुति।
"बेटी, पूनम को तो खूब चोदा लेकिन उससे पहले तुम्हारी दूसरी सहेली सुधा को भी जोरदार पूनम के सामने चोदा।" मुनीम अब बेटी की चूत पर एक के बाद एक करारा धक्का लगा रहा था ..और निपलो को मसल रहा था।
…”कल की तरह दोनों ने एक दूसरे का चूत चाटा और मेरा लंड भी चूसा…।” मुनीम ने जोर से निपल को चूसा और कहा “तुम भी रहती तो और मजा आता…बेटी।”
सुधा उसके बाप से चुदवाने आई थी सुन कर महक को जलन हुई,अब्माहक अपने बाप का लंड अपनी मिल्कत समजने लगी थी, महक अपने ही बाप के लंड के प्रेम में पड गई थी। "साली कुतिया का 'सील' / वर्जिनिटी भैया ने तोड़ा था। फिर भी वो आप से चुदवाने आई... साली कुतिया लंड की भूखी है मादरचोद।"
“तो क्या है, कल भी तो पूनम की सील मैंने तोड़ा और वो भी रात भर तुम्हारे भाई से चुदवाती रही थी।”
मुनीम ने बेटी को जोर से दबाया तो महक चीख पड़ी.. “साला मार डालोगे क्या.. मैं अभी सुंदरी जैसी नहीं हुई हूं, अभी छोटी हूं…धीरे धीरे प्यार करो और आराम से मेरी चूत को फाड़ो, मैं कही नहीं जानेवाली, जब चाहो यह चूत खुली रहेगी आपके लंड के लिए पिताजी।” उसने ना कहने की बात इशारों क=में कह दी की वह अपने बाप के लंड से प्रेम करने लगी है।
महक ने हाथ आगे बढ़ा कर बाबूजी के लंड को सहलाया जो उसकी चूत के पानी से बिल्कुल गिला हो गया था और कहा,
“जानते हैं बाबूजी, भैया मुझे भी चोदना चाहते हैं और माँ को भी…” महक ने थोड़ा शरमाते हुए कहा। अब तक महक की चूत गिली हो गई थी, और बाप का लंड आराम से अंदर बाहर हो रहा था, बेटी की चूत को बाप का लंड बहोत गहराई तक खोजबीन कर रहा था और उसे ठोके जा रहा था।
मुनीम को यह सुनकर बहुत मजा आया कि उसका बेटा अपनी बहन और मां को चोदना चाहता है। मुनीम को क्या मालूम था कि वो दोनों को चोद चुका था और उसकी बीबी पूरी तरह से रंडी बन गई थी।
“तो क्या हुआ, बाप जब बेटी चोद सकता है तो माँ अपने बेटे से क्यों नहीं चुदवा सकती है और तू भी भैया से चुदवा सकती है।”
फिर महक ने तुक्का फेंका, "बाबूजी आप बड़े किस्मतवाले हैं कि, बेटी पहले आप से चुदवा रही है... मुझे बहुत मजा आ रहा है... आपने कल ही क्यों नहीं चोद डाला...!" इतना कहते ही महक ने अपना चूतरस त्याग दिया था।
यही तक .
लेकिन जाना मना है...............
आगे है ............और आपको अपनी राय देना है..............
।। जय भारत ।।