Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 75 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

यह तो मुझे करना चाहिए दोस्त.............

मैं नेपस्टर भाई को काफी समय से जानती हूँ .....................हर पोस्ट में उनकी हाजरी होती है..................

मैं भी उनका आभार व्यक्त करती हूँ

Napster
 
जी सच है

अब घर का वातावरण ही कुछ ऐसा हो जाये तो कोई कुछ नहीं कर सकता, फिर बाप हो या बेटी..........
 
आपका बहोत बहोत धन्यावाद
 
जब आप जैसे पाठको हो तो बेहतर और बेहतर तो अपने आप होता जायेगा..............

धन्यावाद आपका............. अच्छा लगा की मेरा प्रयास पाठको को पसंद आया...............

सच कहू तो जब यह प्लाट ध्यान में आया तब मुझे लगता था की मैं बेहतर नहीं कर पाऊँगी और यह प्लाट को साइड में रख दिया था, मुझे ऐसा था की एक गाँव और सभी ऐसे.......पाठको को रूचि नहीं रहेगी.................पर आखिर एक डर के साथ और सोच के साथ की अगर गालिया पड़ी तो बंद कर दूंगी लेकिन प्रयास तो करना चाहिए...............

बस सब कुछ आपके सामने है..........
 
चलिए अब थोडा आगे बढ़ने की कोशिश करते है...............

आज शाम गेस्ट है तो रात को अपडेट नहीं दे पाऊँगी.................माफ़ी...................
 
“घर की बात है पिताजी, अब माँ अपने बेटे से चुदवा रही है तो बाप भी तो अपनी बेटी की चूत से खेलता था। आप उन दोनों पर ध्यान ना दे और यहाँ अपनी बेटी की चूत से खेले। बाबूजी माँ कहती है की मेरा माल भी बहोत अच्छा है, और वैसे भी कल आपने भी तो चखा हुआ है। कैसा था मेरे माल का स्वाद?“

“बेटी, एक तो चूत का स्वाद ऊपर इ बेटी की चूत वाह भाई मजे ही मजे!”

अब आगे............

“तो फिर बस बाबूजी, अपनी बेटी की चूत से खेलो और लड़ो अपनी तलवार से वार करते रहो और मेरी चूत के किल्ले को तोड़ो,बाकी दुनिया को छोडो, भाई अपनी माँ का किल्ले पर हमला किया तो आप भी तो बेटी के किल्ले पर अपना महोर लगा ही सकते हो। और किसी पता चलने वाला है की बाप और बेटी कहा सोते है! बस आप अपना काम कीजिये पिताजी।“ महक ने माँ और भाई के लिए भी दरवाजे खोल दिए और अपना दरवाजा बापने बाप के लिए खोल रही थी।


बेटी ने चुतर ऊपर उछाला और बाबूजी का चुतर को अपनी चुतर पर दबाया। इधर बाप ने भी एक आखिरी बार खूब जम कर जोर से धक्का दिया और पूरा लंड समां गया। अचानक हुए हमले की वजह से बेटी अपने बाप का लंड पूरा नहीं ले सकी और थोड़ी ऊपर खिसक के बाप के लंड को थोडा बहार निकाल दिया। पर बाप भी कमाल का चोदु था, उसने फिर से एक धक्का मारा और इस बार वह खुद ही आगे की ओर चढ़ गया ताकि बेटी और ज्यादा ना खिसक सके। दुसरे प्रयत्न में बाप का पूरा लंड बेटी के अंदर घुसने के बाद मुनीम बेटी की निपल पर चिपक गया। बेटी बाप के नंगे बदन को सहलाने लगी।

“बाबूजी कल आपने पूरा लंड अन्दर क्यों नहीं डाला था!”

“बेटी मैंने सुपारा अन्दर डाला था तो तुमने चाँटा मार दिया तो मैं कैसे चुदाई करता।” फिर मुनीम धीरे-धीरे बेटी की चूत में धक्का लगाना लगेगा।

“वो तो मैं आपका महान सुपारा अन्दर गया तो मैं डर गयी, लेकिन आप अगर पूरा लंड अन्दर घुसेड़ देते तो क्या मैं नहीं चुदवाती!, “ महक ने प्यार से बाप को चूमा और कहा “मैं जम कर चुदवाती….बा...बू....जी” महक ने चूमा और फिर कहा “अब जम कर चोदिये…किसी भी डर रखे बिना बस अपनी बेटी की चूत फाडीये और मजे लीजिये।”

मुनीम धक्के पे धक्का लगाने लगा, मुनीम ने बेटी की सूखी चूत में ही लंड घुसेड़ दिया था और इतना धक्का लगाने के बाद भी चूत गीली नहीं हुई थी, होती भी कहा से साली 4 बार चूदी थी और ना जाने कितनी बार झड़ी थी। मुनीम को लगा कि बेटी कुंवारी है, किसी ने अभी तक बेटी की चूत को छेदा नहीं है। यह जान कर मुनीम बहुत खुश हुआ और फिर जोर से धक्का मारा। महक ने जोर से सिस्कारी मारी...

“माँ..... म...र..... ग....यी…, लंड ब...डा...है बा...बू...जी....थोडा धीरे मारये।”
नीता की प्रस्तुति

महक को लग रहा था कि वो पहली बार चुदवा रही है। महक को वैसा ही दर्द हो रहा था जैसा कल शाम को पहली बार सिल को तुड़वाने और चुदवाने में हुआ था...मुनीम को भी

“बाबूजी… धीरे धीरे….. दर्द कर रहा है….थोड़ा चूत को गीला होने दे तो आपको चोदने में ज्यादा मजा आएगा..”

मुनीम ने लंड को पूरा बाहर निकाल लिया और खूब जोर से धक्का दिया। मुनीम करीब 44-45 साल का जवान था, 70-75 किलो वजन, कसरती बदन। इतना जोर से धक्का दिया कि सुपारा के साथ पूरा लंड बेटी के चूत के नीचे घुस गया…

“ओह्ह्ह्ह….माँ….अब तो मैं गई.....” महक ने थोड़ा जोर से सिस्कारी मारी… “आह्ह्ह ..बाबूजी….मर गई…मेरी माँ चुद गई बाबूजी...थोडा छोडो मुझे।”

मुनीम को बेटी को चोदने में बहुत मजा आ रहा था..“बेटी मुझे तो बहुत मजा आ रहा है… इतना मजा तो पूनम की चूत में नहीं आया था…।”

महक ने अपना दोनो टांगो को बाप के कुलहो पर कस कर दिया,

“साली आज भी आई थी क्या…?” उसने पूछा।
मैत्री और नीता की प्रस्तुति।

"बेटी, पूनम को तो खूब चोदा लेकिन उससे पहले तुम्हारी दूसरी सहेली सुधा को भी जोरदार पूनम के सामने चोदा।" मुनीम अब बेटी की चूत पर एक के बाद एक करारा धक्का लगा रहा था ..और निपलो को मसल रहा था।

…”कल की तरह दोनों ने एक दूसरे का चूत चाटा और मेरा लंड भी चूसा…।” मुनीम ने जोर से निपल को चूसा और कहा “तुम भी रहती तो और मजा आता…बेटी।”

सुधा उसके बाप से चुदवाने आई थी सुन कर महक को जलन हुई,अब्माहक अपने बाप का लंड अपनी मिल्कत समजने लगी थी, महक अपने ही बाप के लंड के प्रेम में पड गई थी। "साली कुतिया का 'सील' / वर्जिनिटी भैया ने तोड़ा था। फिर भी वो आप से चुदवाने आई... साली कुतिया लंड की भूखी है मादरचोद।"

“तो क्या है, कल भी तो पूनम की सील मैंने तोड़ा और वो भी रात भर तुम्हारे भाई से चुदवाती रही थी।”

मुनीम ने बेटी को जोर से दबाया तो महक चीख पड़ी.. “साला मार डालोगे क्या.. मैं अभी सुंदरी जैसी नहीं हुई हूं, अभी छोटी हूं…धीरे धीरे प्यार करो और आराम से मेरी चूत को फाड़ो, मैं कही नहीं जानेवाली, जब चाहो यह चूत खुली रहेगी आपके लंड के लिए पिताजी।” उसने ना कहने की बात इशारों क=में कह दी की वह अपने बाप के लंड से प्रेम करने लगी है।

महक ने हाथ आगे बढ़ा कर बाबूजी के लंड को सहलाया जो उसकी चूत के पानी से बिल्कुल गिला हो गया था और कहा,

“जानते हैं बाबूजी, भैया मुझे भी चोदना चाहते हैं और माँ को भी…” महक ने थोड़ा शरमाते हुए कहा। अब तक महक की चूत गिली हो गई थी, और बाप का लंड आराम से अंदर बाहर हो रहा था, बेटी की चूत को बाप का लंड बहोत गहराई तक खोजबीन कर रहा था और उसे ठोके जा रहा था।

मुनीम को यह सुनकर बहुत मजा आया कि उसका बेटा अपनी बहन और मां को चोदना चाहता है। मुनीम को क्या मालूम था कि वो दोनों को चोद चुका था और उसकी बीबी पूरी तरह से रंडी बन गई थी।

“तो क्या हुआ, बाप जब बेटी चोद सकता है तो माँ अपने बेटे से क्यों नहीं चुदवा सकती है और तू भी भैया से चुदवा सकती है।”


फिर महक ने तुक्का फेंका, "बाबूजी आप बड़े किस्मतवाले हैं कि, बेटी पहले आप से चुदवा रही है... मुझे बहुत मजा आ रहा है... आपने कल ही क्यों नहीं चोद डाला...!" इतना कहते ही महक ने अपना चूतरस त्याग दिया था।

यही तक .

लेकिन जाना मना है...............

आगे है ............और आपको अपनी राय देना है..............

। जय भारत
 
फिर महक ने तुक्का फेंका, "बाबूजी आप बड़े किस्मतवाले हैं कि, बेटी पहले आप से चुदवा रही है... मुझे बहुत मजा आ रहा है... आपने कल ही क्यों नहीं चोद डाला...!" इतना कहते ही महक ने अपना चूतरस त्याग दिया था।

अब आगे...............

“कोई बात नहीं रानी, अब रोज चोदूंगा तेरी मां के सामने भी और भैया के सामने भी।” मुनीम अब झरने बाला था और जोर-जोर से लंड चूत के अंदर बाहर करने लगा जैसे अभी और आज ही बेटी की चूत को एक भोसड़ा बना देगा।


“आह्ह्ह्ह….. बाबूजी….बहुत…..अच्छा…आह्ह्ह….पेलो…अपनी बेटी का माल चूस लो…..और सिसकारी मार कर बाप से चुदवा रही है…छोड़ो पिताजी बस चोदते रहो पिताजी.....मुझे और मेरी चूत को निचोड़ लो...सब रस निकाल दो.....बस चोदो वह अब तीसरी बार झड ने को थी।

"बेटी, पूनम और सुधा जैसी और कोई सहेली हो तो उसे ले आ, तेरे सामने उनका चूत फाडून्गा और तुझे उनके सामने चोदूंगा। "कहते हुए मुनीम ने लंड बाहर निकाल लिया...

महक को बहुत गुस्सा आया.. “हरामी…बेटीचोद…लंड बाहर क्यों निकाला….दम नहीं क्या…दम नहीं था तो मादरचोद…चोदना क्यों शुरू किया…. “

“रानी घबराओ मत, अब कुतिया बन जा, पूरा मजा तो पीछे से धक्का लगाने में आता है।मेरा दम की मजा अब ले, तू कई बार झादेगी बेटी। “

कहते हुए मुनीम ने बेटी को पलटा और उसका लंड पकड़ कर अपनी ओर खींचा और फर्श पर पैरों को जमा कर दिया लंड को चूत के एंट्री पर रख कर खूब जोर से धक्का मारा और लंड स्लाइड करते हुए रसीले चूत के अंदर घुस गया। फिर तो मुनीम कुत्ता की तरह खूब जोर-जोर से कुटिया बनी बेटी को चोदने लगा। फच्च...फच्च....फ़च्छ....कीमधुर संगीत कमरे में गूंजने लगा। महेक को पहले से ज्यादा मजा आ रहा था। उसे लग रहा था कि लंड पेट को फाड़ कर मुंह से बाहर निकल जाएगा। बाप के एक-एक धक्के से उसका शरीर भी आगे-पीछे होता रहा, और मधुर संगीत और तेजी से बजने लगा। महक अब रुक नहीं सकी और उसकी चूत फिर से झड गई।

लेकिन यह बाप था या चूत का कसाई... चुदाई कराती महक परेशान हो गयी थी और चूतरस से भर गया था। अब दोनो आराम से चोद रहे थे, अचानक महक को लगा कि फिर से उसका शरीर एक जैसा हो गया है, चूत फटने बाला है और फिर सब शांत हो गया, इससे पहले कि महक नीचे बिस्तर पर गिरती उसके बाप ने लंड फिर से बाहर निकला और खूब जोर से धक्का मारा। लंड ने अन्दर जाते-जाते पानी छोड़ दिया। महक की चूत बाप के वीर्य से भर रही थी। महक बिस्तर पर गिरी और उसके ऊपर उसका बाप धीरे-धीरे चूत में लंड हिलाता रहा, जब तक कि लंड से लास्ट बूंद पानी बेटी के शरीर में चला नहीं गया। मुनीम ऊपर से हाथ नीचे से लेकर बेटी की मस्तानी बोबले को जकड़े हुए थे। दोनो थक गये थे। फिर कुछ देर के बाद महकने बाप को शरीर से अलग किया और चूमते हुए कहा,

“बाबूजी, मुझे बहुत मजा आया… कल पूनम को भी बहुत मजा आया होगा, इसलिए आज फिर मेरे बाप का लंड खाने आई थी… जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती, मैं तो बाबूजी से रोज चुदवाऊंगी, आपसे और शादी के बाद भी आपका लंड चूत के अंदर लेती रहूंगी…आपका बच्चा भी पैदा करुँगी।”

“शादी की क्या जरूरत है.. मैं हूं, तेरा भैया है.. दोनों तुम्हें चोद चोदकर खुश रखेंगे…।”
मैत्री की पेशकश

“बाबूजी अब हर रात आपके पास सो जाया करुँगी और माँ को भैया के साथ सोने दीजिये…उसे भी छोड़ने दीजिये और आप भी मुझे चोदते रहिये।”

मुनीमने बेटी की चुचियो को सहलाते हुए कहा “ठीक है, आज से तू मेरी दूसरी पत्नी (नयी घरवाली) है…।”

“नहीं बाबूजी, मैं नयी घरवाली या दूसरी पत्नी सिर्फ हमारे बिस्तर तक ही रहूंगी, सच कह रही हु पापा मुझे आपके लंड से प्रेम हो गया है और मैं आप के लंड को अपना मान रही हु। शादी की बात तो ओर ही है।“ महक ने देखा की बाबुजी का मूड सही है तो गरम लोहे पर घा कर देना चाहिए।

महकने बाप का लंड जो ढीला हो गया था उसे मसला और कहा "बाबूजी एक बात कहू? अगर अआप नाराज ना हो तो?

“हां बेटी, अब तो तू मेरी पत्नी की जगह पर है, तुम्हे हक है की तुम जो कहना चाहती हो कह सकती हो। कहो जो कहना है मैं बिलकुल गुस्सा नहीं करुगा।“

महक ने पापा के लंड को हाथ में लिया और सहलाते और थोडा डर के साथ कहा “मेरी शादी विनोद से करवा दो। मुझे विनोद बहुत पसंद है।"

“तु उस से चुदवाई है?” मुनीम ने बेटी की क्लिट को मसल_ते हुए पुछा।
मैत्री और नीता की पेशकश

“क्या पुछ रहे हो बाबूजी… आपको मुझे चोदते हुए पता नहीं चला कि मैं पहली बार चुदवा रही हूँ! आपको माल तराशने नहीं आता?”

यह कह कर महक ने बाप का लंड छोड़ दिया और दूसरी तरफ घूम कर दूर हट गई। लेकिन मुनीम ने अपना ढीला लंड बेटी के गांड से सटाया और उसके कमर पर एक टांग चढ़ा दी। और फिर चुचियो को मसलते हुए कहा” नाराज गई रानी! मैं तो मजाक कर रहा था..मैं किस्मतवाला हूं कि तेरी मस्त चूत को मैंने पहली बार चोदा है..।''

“देखो बाबूजी, विनोद से मेरी शादी करा दोगे तो मैं गांव में ही रहूंगी और तुम जब बोलोगे या बुलाओगे मैं आकर तुम्हारे लंड का मजा ले सकती हु और आप मेरी चूत और गांड का भोस बना सकते है…और लगे हाथ किसी को पता भी नहीं चलेगा की मेरे आनेवाले बच्चो का बाप कौन है।”

“बेटी, बात तो सही है पर.....शादी के बाद.....मुझे तेरा माल खूब चाहिए।“

अरे, मेरे बुद्धू पापा, कल ही शादी करने को नहीं कह रही हु। जब तक हु मेरा माल मस्त खाओ और मुझे अपना वीर्य देय करो। कौन मन करेगा इस घर में अब! माँ? जो खुद ही बेटे से चुदवा रही है, या भाई जो अपनी ही माँ और बहन को चोदेगा! आप निश्चिन्त रहिये पापा बस आप मुझे और मेरे छेदों को भरते रहिये। दुनिया सब जाए माँ चुदाने।”

महेकने बाप का हाथ को अपनी चूत से रगड़ते हुए कहा “और अपनी सहेलियों को लाकर तुम्हारे लंड से चुदवाऊंगी… आपको छुट की कमी कभी रहने नहीं दूंगी यह मेरा वादा है। लेकिन एक बात का ध्यान रखना.. भैया और मां को छोड़ कर किसी ओर के सामने मुझे मत चोदना…थोड़ी बहुत मस्ती लेने दूंगी.. । ठीक है पापा! मैं नहीं चाहती की अपने घर की इज्जत बहार बाजार में खुले आम लोग उछाले।”


महक ने अपनी चूत के फांके को ओर थोड़ी फैला दी और अपने बाप का लंड को उसके साथ सटा के बोली: “और एक बात कहू बाबूजी।“

आज के लिए यही तक............

राय देना ना भूलिए.

।। जय भारत ।।
 
जी बिलकुल आपने सही कहा

महक तो जानती नहीं की मुनीम और सुंदरी के बिच में क्या है......पर वह यह सुनिश्चित करना चाहती थी की घर में सब नंगा नाच हो जाए जिस से कोई शर्म या किसी भी प्रकार का परदा ना रहे...............और नारिया जानती है की उआकी मन की बात अपने मुखिया से कैसे और कब कहना और करवाना चाहिए. जब पुरुष उत्तेजित होता है तब वह दुनिया कोभूल जाता है. और वही सब से अनुकूल समय है पार्टनर के लिए. महक ने भी यही समय का सदुपयोग किया. और घर में नंगेपन का मंच रेडी कर दिया. अब माँ-बेटी कभी भी अपने पैरो को फैला सकती है. बेशक अभी उतनी परमिशन नहीं मिली पर शुरुआत हुई तो. अब हर शुरुआत का अंत भी है.........

खेर देखेंगे आगे.............

शुक्रिया दोस्त
 
शुक्रिया दोस्त

आप सब की इच्छाओ से सम्पान्न हो रहा है
 
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