Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 118 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

“अब तक हज़ारों बार आपके इस मस्त लंड का मजा ले चुकी हूँ…। आह बाबूजी चोदते रहो।”

उसने पापा को सहलाते हुए कहा…”और लौड़ा रगड़ने की क्या जरुरत थी…किसी रंडी को चोद लेते…रजनी काकी बोलती है कि कोलकाता में सबसे मस्त लौंडिया है। हमेशा चुदने को तैयार…।”

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अब आगे................

“अरे बेटी, कोई तेरे जैसी माल मिले तब ना…।” पापा ने कहा…”तू मान या मान,तू मुझे पूनम और सुधा से ज्यादा मजा देती है…। तेरी चूत में जो मजा है वो ओर कहा मिल सकती है बेटी! अगर मेरे बस में होता तो मैं तुजे अपनी पत्नी बना लेता।”


उन्होंने महक की छुट को पीटना जारी रखा और कहा; "कोलकाता में मै यही सोचता रहा कि साला विनोद मेरी माल का खूब मजा लेता होगा।"

विनोद का नाम सुनते ही महक और मस्त हो गई, बाप को बहुत कसकर पकड़ा और चुदवाने लगी।

“बाबूजी, विनोद का लौड़ा आप और परम के लंड जैसा और लम्बाई में और मोटा नहीं है…लेकिन बहू मस्ती से चुदाई करता है…बहुत मजा आती है…। आखिर वह मेरा पति बनने वाला है।” उसने फिर से बाप के सामने अपनी ख्वाहिश रखी।

"बेटी, तेरे कारण मैं सुंदरी को ठीक से नहीं चोदता हूं।" बाप ने 2-4 बार जोर से धक्का मारा और कहा,

“अगर विनोद इतना मज़ा देता है,तो उससे अपनी माँ सुंदरी को भी चुदवा दे। तुम दोनो माँ-बेटी मिलकर चुदवाओ…मैं कुछ नहीं बोलूंगा…।लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए की यह सब मेरी जानकारी में हो रहा है।” मुनीम ने अपने धक्के को जारी रखते हुए कहा।

“ना बाबूजी…।” महक ने कहा, “अगर एक बार विनोद ने माँ को चोद लिया तो फिर हमेशा माँ के चूत में ही घुसा रहेगा…।आप तो जानते ही है की माँ का माल पुरे गाँव में चर्चा का विषय बना रहता है। यह तो आप है की आप मेरे माल के दीवाने हो गए और सुंदरी को ज्यादा चोदते नहीं है। आप के लंड की कृपा मेरी चूत पर सदा बनी रहे।”
फनलवर की पेशकश

उसे दूसरे सेठ के साथ अपना पहला सेक्स याद आया, सुंदरी को देखने के बाद, उसने तुरंत माँ की चूत को भेद लिया था। उसे अभी भी वह प्रसंग पसंद नहीं आ रहा था। आता भी कैसे सुंदरी के प्रति जलन जो थी।

“आप ही माँ के लिए कोई लंड ढूढ़ कर उसे मजा दो…। बाबूजी यह आपकी फर्ज में भी आता है। वरना परम तो है ही। बस मेरी इस नादान चूत को अपनेलोडे से समजाते रहिये और खुश होती रहेगी बेचारी। विनोद की बारी आएगी तब विनोद चोदेगा, मेरे माल को तो बस लंड चाहिए बाबूजी।” महक में अब अपने बाप का लंड पूरा अन्दर तक समा रही थी।

बेटी और पिता दोनों नहीं जानते थे कि सुंदरी विनोद से चुदाई के लिए तैयार है।

अब मुनीम के लंड की नसे तंग हो रही थी, और उसका लंड अब अपने अधिकतम धक्के की सफ़र में था, अगर आप देखते तो महक तक़रीबन 6इंच तक हर धक्के के साथ आगे-पीछ हो रही थी।

“बेटी, मेरा निकलने वाला है…।”

“लौड़ा इस कुतिया के मुँह में डाल दो।” महक ने मुनीम को पूनम के मुँह को चोदने का सुझाव दिया।

मुनीम ने पूनम का सर पकड़ा और अपने लंड की ओर ले आया, लंड बाहर निकाला, करवट ली और पूनम के होंठों के बीच सुपारा दबा दिया। उसने बिना आँखें खोले मुँह खोला, सुपाड़ा चूसा और बाहर धकेल दिया। उसे महक की चूत और गांड का स्वाद आया। वह खुश हो गई और अपना मुंह को ऊपर तक ले के मुंह में लंड को समा ने लगी। उसने आँखें खोलीं और चिल्लाई:

“साली, बाप से चुदवा रही थी…तो मुझे बोलती,मैं भी देखती हूं कि एक हरामी अपनी बेटी को रंडी कैसे बनाता है…।”

महक ने चुची को दबाते हुए कहा, “बहना जब भी बाप या परम से चुदवाऊंगी, सबसे पहले तुझे ही दिखाऊंगी। अभी तो लौड़ा ठंडा कर बाद में इस लिए चूत से रगड़ कर टाइट कर दिया…।” पूनम ने भी बाप के लंड को दोनों तरफ से चाट के साफी में लग गई। अंडकोष भी अब बड़े आराम से चाट रही थी। महक यह सब कर के मुनीम का लंड फिर से टाईट करने की कोशिश कर रही थी ताकि पूनम अपने बाप के लंड से चुदवा सके।

महक ने पूनम की चूत को थोड़ी फैलाई और ऊपर लंड के टोपे को रख कर खुद ही पकड़ कर चूत से रगड़ ने लगी। अब मुनीम का लंड भी कितनी देर तक मुरझाये बैठा रहता भला! मुनीम का लंड ने पूनम की चूत का द्वार देखा और अपनी हरकत में आने लगा। यह देख कर महक अवाक रह गई। इस उम्र में भी बाबूजी का लंड में कितना दम है, तुरंत खड़ा हो रहा था। त्ताज्जुब है साली सुंदरी का लंड की कीमत पता ही नहीं। घर में ही इतना जबरजस्त लंड पड़ा है और वह बहार मुंह मारती फिर रही है और बहारवाली यहाँ मेरे बाबूजी का लंड के लिए मर रही है, खुद ने सोचा मैं भी तो बाबूजी के लंड के लिए तरस ही रही हूँ।
फनलवर की रचना

“बाबूजी,चोदो इसे जम कर…साली रात भर आप के लंड के लिए रो रही थी और मेरी चूत और गांड चाट-चाट कर पागल कर दिया…।”

महक ने पिता के साथ पूनम की चुदाई देखी। उसे पूनम में मुनीम के लिए स्नेह और प्यार दिखाई दिया जो महक के पास अपने पिता के साथ नहीं था। वह परम और विनोद के साथ चुदाई में बहुत अधिक स्नेही थी। लेकिन बाप का लंड तो बाप का लंड होता है कभी भी वह चूत की मरामत कर सकता है।

दोनों व्यस्त रहे और महक नंगी बाहर आई, वह खाट पर आराम कर रही थी। कुछ देर बाद उसे माँ और परम की आवाज सुनाई दी। दस्तक का इंतज़ार किये बिना उसने दरवाज़ा खोल दिया। दोनों अंदर आये और धक्का देकर दरवाज़ा बंद कर दिया।

“साली, कोई नंगा देखेगा भी…” परम ने बहन को बाहों में ले लिया।

“बाप तो नहीं है फिर किस से चुदवाई?” सुंदरी ने पूछा, “विनोद आया था क्या…?”

“नहीं माँ, रात भर साली पूनम ने चूत को चाटा और सुबह-सुबह तेरे पति ने चोद कर मस्त कर दिया।” सुंदरी ने महक की चूत के फांको को फैलाया और उसे पता चल गया की बाप लंड अंदर तक जा चूका है, और अभी तो चूत का भोसड़ा बन चूका है।

“ठीक है चल अच्छा किया बाप के लंड से आराम ले लिया। ध्यान रखना और दवाई ले लेना तेरे बाप का माल से तेरा पेट में फुग्गा ना फुल जाए।“ सुंदरी ने उसकी चूत के फांको से अपना हाथ हटाया तो देखा उसकी चूत पहले से ज्यादा ही सूजी हुई पड़ी थी। वह सिर्फ मुस्कुराई और अपने पति के लंड पर गर्व महसूस करती रही। भले ही बेटी है पर चूत तो है घर में चुदवाना अच्छा भी है। मेरे पति का लंड को शांत करती रह और तेरी चूत की सुजन बढाती रह। उसने मन ही मन सोचा।

महकने भाई का हाथ चूत पर खींच लिया। ”परम, जब से विनोद ने चोदना शुरू किया, तूने मुझे अपना लंड नहीं दिखाया…। तू नाराज है…बहन का वो दूसरे का लौड़ा पसंद करती है! जलन?”

“अरे नहीं रानी, तुमसे मैं कभी नाराज हो सकता हूं?” परम ने जवाब दिया…,”विनोद तो तेरा यार है, तेरे साथ विवाह करेगा, अगर सुंदरी को भी चोदेगा तो मैं अपने सामने चुदवाऊंगा।”

उसने माँ की ओर देखा, “माँ, विनोद को चोदने देगी...?” परमने माँ को आँख मारी। वह छठा था की माँ बेटी एक दुसरे के सामने विनोद के लिए नंगी हो, जैसे विनोद की माँ और बहन विनोद के सामने होती है।

“बेटा, अब मैं तेरी माल हूं…। तू जिस से बोल उसका लंड खा लुंगी।” सुंदरी ने जवाब दिया, “और विनोद तो मेरा होने बाल दामाद है…वो अगर मेरा चूत मांगेगा तो क्या मैं उससे मना कर सकती हूँ…? आखिर वह जमाई जो है, उनकी सभी बात को मानना हमारी फर्ज है। और यह सब घर की बात है कोई क्या जानेगा!”

"नहीं माँ," महक ने फिर डर जताया; "साला एक बार तुझे चोद लेगा तो फिर मुझे बिल्कुल भूल जाएगा। मुझे पता है वह तेरे माल के पीछे है, वह तेरी गांड को चोदना चाहता है।"

तीनो ने बात की और पूनम और मुनीम नंगे होकर बाहर आये।

"क्यों जी, मेरी बेटी पूनम की जवानी बरबाद करने पे क्यों तुले हुए हो?" उसने पति पर आरोप लगाया और पूनम को अपनी गोद में खींच लिया।

“गाँव की सबसे सुंदर माल का मजा ले लिया! अब इस से बढ़िया माल कहा से लाऊ आपके लिए!” सुंदरी ने कहा। उसने पूनम को शरमाते हुए देखा।

"बेटी डरो मत," सुंदरीने पूनम से कहा; "मुझे सब मालूम है, कैसे मुनीमजी ने तेरी 'सील' तोड़ी और फिर उसी रात परम ने भी चोदा।"

सुंदरीने पूनम को दुलारते हुए कहा; मैं तो कब से पूनम को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार कर चुकी हैं। बेटा, तेरा जब मन करे दोनो बाप-बेटे के लंड से खेलने आ जाओ,किसी बाहर बाले को कभी खबर नहीं होगी। बाप का लंड बहोत बड़ा है तेरी चूत शांत रहेगी बेटी।''

“काकी, मुझे दुनिया की सबसे सुंदर और मस्त माल की जवानी से खेलना है।” पूनम ने कहा, कि वह सुंदरी के नग्न शरीर को सहलाना और सहलाना चाहती है।

“जब बोलोगी, नंगी हो जाउंगी…या फिर ऐसा कर जब तेरा मन करे मेरा घाघरा ऊपर उठा दिया कर।” सुंदरी ने पूनम को आश्वासन दिया, "तू भी मुझे बहुत पसंद है। तेरा माल भी तो चखने जैसा है। तेरी चूत अच्छा माल देती होगी कभी मेरे मुन्ह्मे भी छोड़ देना।" उसने पूनम को आश्वासन देते हुए कहा ताकि पूनम अब जी भर के मुनीम के लंड को ले सके बिना किसी रोकटोक।


"बेटी मुनीम जी को अना बाप मान ले या अपना पति जिस तरीके से तुजे और तेरी इस चूत को पसंद हो, बस मेरे पति के लंड को कही बाहर ना जाना पड़े।" उसने उसकी सूजी हुई चूत पर एक ऊँगली फिरा दी

सुबह के काम खत्म होने के बाद, सबने सादा नाश्ता किया जो सुंदरी ने बनाया था, और फिर मुनीम पूनम को अपने साथ ले गया। रास्ते में उसने उसे उसके घर छोड़ा और खुद सेठजी के ऑफिस चला गया।


*****

बस आज के लिए यही तक परसों फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए

फनलवर की ओर से..........


। जय भारत
 
Shukriya dost

Ji bilkul gaadi me gulabo ka chut bhedan dono bhai ne kar diya aur wah bhi uske pati ke samne aur uski ichchha anusaar.

Kher gulabo ka role bahot kam hai ho sakega to use aage kahi kaam denge.

Abhar dost...
 
Shukriya dost

Original track par aane ke liye ek madak aur rochak episode ki jarurat thi.

Lagta hai sab ko pasand aayi.

Shukriya dost
 
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