महक ने उसके बदन को सहलाया और पूछा।
“किसका माल अच्छा है…मेरा आपकी रंडी सुंदरी।का...?”
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अब आगे.....................
इस घटनाक्रम से सेठजी बहुत प्रसन्न हुए। वह महक को चोदने की इच्छा से घर आया था। वह अच्छी तरह जानता था कि सुंदरी और परम उसके घर पर होंगे। उन्होंने मुनीम को बहुत सारा कार्यभार सौंपकर मुनीम को छोड़ दिया था ताकि वो भी यहाँ तक ना आ पहुंचे।
पहले तो उसे बहुत शर्म आई जब महक ने सिर्फ लंड को सहलाकर उसे डिस्चार्ज कर दिया, लेकिन फिर जब उसने खुद उसे अपनी जवानी दिखाई और उसे चूत के अंदर ले गई तो उसने खुद को बहुत भाग्यशाली महसूस किया।
“बेटी, सच कहू तो सुंदरी मेरी मनोकामना है, मैं चाहता तो तेरा सिल तोड़ने के लिए मैं ही तेरी चूत का सौदा मेरे लंड से कर देता, और सुंदरी कुछ भी नहीं बोलती क्यों की उसे तेरी सिल का पैसा चाहिए था और कुछ नहीं, उसे यह नही था की कौन तुजे औरत बनाएगा। और आज भी वह मेरी रखैल नहीं है मेरा प्रेम है, अगर मुझे मुनीम इजाजत दे तो मैं उसे सेठानी की जगह दे सकता हु।“ सेठजी ने महक के निपल को मसलते हुए कहा। उसने आगे कहा:
“बेटी, ना तो सुंदरी जैसी कोई भी मस्त औरत है और ना ही तेरे जैसी कोई मस्त माल…आखिर तू भी तो सुंदरी की भोस का सर्जन है, तेरे माल में भी वही खुशबु है जो सुंदरी की चूत और गांड में है।” उसने पूरे जोर से उसे ठोका और बोला,
“अगर कोई सुंदरी की एक चुदाई 50000/- देगा तो तेरी एक चुदाई के लिए 5 लाख भी कम है…।” फनलवर की रचना।
“और छोटी भाभी को कितना देगा…?” महक ने पूछा और कूल्हे को ऊपर की ओर झटका दिया। लेकिन सेठजी उस पर बहुत भारी थे।
“देख रानी,” सेठ ने उत्तर दिया, “मैं सुंदरी को हर महिने 50000/- देता हूं और जब भी चोदता हूं तो अलग से 20-25 000/- देता हूं, लीला को हर महिने एक लाख और तुम्हें 10 लाख और 5 एकड़ जमीन के अलावा हर महिने को 5.00 लाख दूंगा। लेकिन तेरी चूत भी मेरे लंड के अलावा कही नहीं चुदेगी, या फिर मेरी मर्जी से मैं कहू वह चुदेगी। आखिर मैं भी तो एक व्यापारी हूँ माल के पैसे तो वसूल करूंगा ही।”
महक ने उसे पूरी शिद्दत से चूमा, उसे अब उसकी कीमत पता चली।
"तुम अगर सुंदरी की बेटी नहीं होती तो मैं तुम्हें अपने घर में रख लेता और तुम जो मांगती सब देता। लेकिन सुंदरी मेरी प्राथमिकता है।"
सेठ ने उस हॉट लड़की को पंप किया और कहा,
“लेकिन एक बात है…”
“”क्या?” महक ने पूछा फनलवर की रचना।
“यही की,” सेठ ने जवाब दिया, “कोई भी आदमी चाहे वो कितना भी बड़ा मर्द हो,तुम्हें रोज़ संतुष्ट नहीं कर सकता। तेरा माल बहोत सख्त है। तेरी चूत में जवानी की वो आग है जोआम लंड की ताकत से बाहर है, और मैं तो वैसे भी थोडा बुड्डा भी तो हूँ।”
सेठ ने आगे कहा, “सिर्फ तुम्हारी चूत नहीं …पर तुम्हारा एक एक अंग आग का गोला है…।ओह्ह्ह…लग रहा है कि मेरा लंड अंदर पिघल गया है…।”
सेठ ने जोर का धक्का मारा, महक ने सेठ को कस कर बाहों मे दबोचा और करीब 5-6 मिनट की चुदाई मे सेठजी पास्ट हो गए और पानी छोड़ दिया। सेठजी का लंड वही उसकी चूत में अपना वीर्यदान उगल लिया।
हालाँकि महक संतुष्ट नहीं हुई, उसने वीर्य को अवशोषित (Absorbed) कर लिया और कहा,
“कोई बात नहीं सेठजी, पहला मौका था, अगली बार आप मुझे घंटो चोद पाएंगे…। हमारा माल ही तो है लंड की ढीला कर ने के लिए चाहे वह मेरी चूत हो या सुंदरी की या रेखा की।” महक सेठजी को जानबुज के उसकी बेटी और बहु की बात के उसे प्रोत्साहित कर रही थी की घर के माल पर भी अधिकार जताओ। या फिर मेरे बाप को दे दो, या मेरे भाई को दे दो, दोनों ही बड़े महान चोदु और पक्के लंड के मालिक है तुम्हारी घर की सभी औरतो को वह एक साथ ही चूत से पानी छूटा देंगे।
सेठजी ने उसे गहराई से चूमा और कहा, “मुझे बहुत मजा आया…” उसने कहा, “बेटी तुमको मालूम है कि दूसरे को कैसे खुश करते हैं।”
महक ने सेठजी की कलाई घड़ी की ओर देखा, 5 बजने में 10 मिनट हुए थे, पूनम किसी भी समय आ सकती है।
उसने सेठ को जल्दी से तैयार होने की सलाह दी क्योंकि उसका एक दोस्त किसी भी समय आ सकती है।
“लेकिन मैं पहनूं क्या, धोती और अंडरवियर तो गीला है!”
महक मुस्कुराई और अपने कपड़े बाथरूम में ले गई और जल्द ही मुनीम की नई प्रेस की हुई धोती और अंडरवियर के साथ वापस आ गई। लेकिन अंडरवियर उन्हें फिट नहीं था, उन्होंने सिर्फ धोती और अपना कुर्ता ही पहना।
"सच बेटी, आज मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा दिन है। तेरी गांड का हिसाब फिर कभी लेंगे, मुझे तेरी गांड का स्वाद चखने का मौक़ा भी देना।"
“अब मेरी चूत ने आपके लंड को पहचान लिया है, जब मन करे घुसा दीजिए, बस विनोद को पता नहीं चलना चाहिए, और बाबूजी को भी, पैसा मिलता रहेगा तो यह माल भी आपका ही हुआ।'' महक ने कुर्ता सलवार का दूसरा सेट पहन लिया।
“लेकिन एक बार आपकी लीला भाभी को मेरे सामने चोदना होगा।” फनलवर की लेखन।
“जब बोलो…चलो आज रात मेरे घर पर रहो…तुम्हारे बगल में सुलाकर सुंदरी और छोटी बहू दोनों को चोदूंगा। छोटी बहु भी मस्त माल है।”
उनके कपड़े पहनने के बाद महक ने बाहर का दरवाज़ा खोला। सेठजी जाना चाहते थे। लेकिन तभी....पूनम चिल्लाते हुए घर में दाखिल हुई।
“साली, बहनचोद,कुतिया महक…।” पूनम चिल्लाते हुए घर में घुसी।
“साली, कुतिया महक…।।।”
और उसने सेठजी को घर पर देखकर अपना चेहरा ढक लिया।
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सेठजी मुस्कुराये और पूनम का सिर सहलाया।
“कोई बात नहीं बेटी…।”
पूनम ने झुक कर सेठजी के पैर छुए… और सेठजी ने ब्लाउज के ऊपर से अच्छी दिखने वाली मांसल चुची की झलक देखने से नहीं चूके। पूनम ने तुरंत आँचल सही कर दिया।
सेठजी बिस्तर पर बैठ कर आंखो से पूनम की सुंदरता का रस पी रहे थे और सोच रहे थे कि कौन ज्यादा सुंदर है। "सुंदरी" या "पूनम!"
पूनम ने अच्छे प्रिंट और स्लीवलेस ब्लाउज वाली साड़ी पहनी थी, ब्लाउज उस पर बहुत टाइट था, उसका निचला हिस्सा नेवल पॉइंट से लगभग 2 इंच ऊपर था और साड़ी उससे लगभग 3″ नीचे बंधी हुई थी। 5’4″ लंबा, पतला, लगभग 34″ चुची, 22″ कमर और कूल्हे 34″। वह बहुत सुंदर दिखनेवाली आकर्षक चेहरे वाली गोरी थी।
सुंदरी का चेहरा मधुबाला की तरह गोल है, जबकि पूनम का अंडाकार चेहरा है, लेकिन छोटे होंठ, तीखी नाक, काली बड़ी आंखों वाली पूनम देखने लायक है। क्या पता उसकी चूत कितनी मस्त दिखती होगी। एकदम ताज़ा माल और लंड को वैसे ही ख़ुशी दे सकती है यह लड़की।
सेठ निर्णय नहीं कर सका कि कौन बेहतर है। फनलवर का सर्जन।
“क्या रे महक…भूल गई कल बड़ी भाभी ने क्या कहा था…!” पूनम ने महक से गुस्से में कहा।
“क्या?”
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आज के लिए बस यही तक कल फिर मिलेंगे
तब तक के लिए फनलवर की ओर से......
।। जय भारत ।।