प्रभा उसे जाते हुए देख रही। और बस वही सोच रही थी की सलौनी की चूत ऐसी हालत परम के अलावा और कोई नहीं कर सकता। वह हंसी और फिर से परम के शब्दों को याद करने लगी। “अब जब फिर से आऊंगा तो तुम माँ-बेटी को साथ ही चोदुंगा यह मेरा पका वादा है डार्लिंग”...................... और खुद की चूत सुजन को पकडती हुई देखती रही और खुश होती रही।
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अब आगे............
इधर परम अपनी माँ की उम्र की प्रभा को रिझाने में लगा था और घर पर सुंदरी किरण के साथ रुकी थी। सुंदरी ने पहले खाना बनाया और उसके बाद नहाया। नहाते समय किरण ने अपने शरीर पर साबुन लगाने की इच्छा जताई। सुंदरी ने किरण को साबुन लगाने दिया। किरण ने सुंदरी के शरीर के हर हिस्से पर हाथ फेरा। उसने सुंदरी के बोब्लो को सहलाया, पेट को सहलाया और चूत पर साबुन लगाया। वह सुंदरी के पीछे खड़ी हो गई और उसके गोल सुडौल कूल्हों को सहलाया। उसने कूल्हों को दबाया और कहा,
“ओह दीदी, काश मेरी माल (चूत) भी ऐसी होती और मेरा शरीर भी तेरे जैसा चमकता....”
किरण चाहती थी.....” आपने क्या किया है ऐसा माल जमा ने के लिए?”
“किरण बहुत आसान है, खूब खाओ, खूब चुदवाओ,और पूरी मस्ती लो…। भगवान् ने जो बी कुछ दिया है उसका सही तरीके से उपयोग करो,और अपनी मर्यादा भी समजो।” सुंदरी ने किरण को सलाह दी कि “तुम्हे वीर्य की एक बूंद भी कमर तक नहीं जाने देनी चाहिए। हर लंड का वीर्य पीते रहना चाहिए, लंड के वीर्य की सिर्फ 3 जगह है, चूत, गांड और मुंह। जी भर के वीर्य पीयेगी तो चमकेगी, और नए-नए लंड तेरे सामने कुत्ते की पूंछ की तरह हिलते रहेंगे। मैं तुम्हे मस्त कर दूंगी चिंता मत कर। मेरे शरण में हो अब और तुम्हे लंड की कमी नहीं रहेगी।“
“मर्दो का रस पियोगी तो तेरा शरीर भी मेरे जैसा चमकेगा और गरम रहेगा, मर्द चोदते हुए थक जायेंगे लेकिन तू नहीं थकेगी,तेरी चूत नये–नये लंड के लिए हमेशा तैयार रहेगी। बस तेरा मन होना चाहिए। और समय-समय पर अपने माल की सर्विस करवानी रहेगी।”
सुंदरी को पहली बार में ही किरण पसंद आ गई और उसे गांड में उंगली करने में मजा आया। परम पहले भी कई बार गांड मार चुका है। उसने किरण को गांड में भी लंड का मजा लेने की सलाह दी।
“चूत के साथ-साथ गांड भी मरवाओगी तो और भी मजा आएगा। देखो भगवान ने हमें काने (holes) दिए है और उसी खजाने का सही इस्तमाल करना चाहिए। मर्दों के वीर्य में बहोत दम होता है, वह बहोत ही पौष्टिक होता है इसे जाया नहीं कर सकते, मुझे लगता है यह सब तेरी माँ को तुम्हे सिखाना चाहिए था।”
इसी तरह उनकी बातें हुईं और किरण ने सुंदरी की गदराई जवानी का मजा लिया। और खेल-खेल में सुंदरी ने अपना चुतरस किरण में मुंह में खाली कर दिया। सामने सुंदरी ने भी किरण को झाड दिया और उसका चुतरस अपने पेट में जमा कर दिया।
सुंदरी स्नान समाप्त करने के बाद कपड़े पहनना चाहती थी लेकिन किरण ने रोक दिया और सुंदरी से नग्न रहने का अनुरोध किया। सुंदरी ने किरण को भी नंगा कर दिया। उसने देखा कि किरण को घना हो रहा है जघवास्थि के बाल (झांटे)। सुंदरी ने किरण की चुचियों को सहलाते हुए कहा,
“चल, झांट साफ़ कर देती हूँ, परम और आज कल के मर्दों को चिकनी चूत ज्यादा पसंद आती है। माल हमेशा चीकना होना चाहिए, जिस से हर लंड आराम से सरक जाए अपने खजाने में। और हां, जब भी गीली हो रस अपनी गांड को भी पिलाती रहना जिस से लंड को गांड मारने में आराम रहे, ना लंड छिले और नाही अपनी गांड। समजी! जब गांड मराएगी तो टट्टी भी बड़े आराम से सरक जायेगी, ज्यादा जोर नहीं लगना पड़ेगा।”
20 मिनट में सुन्दरी ने प्यूबिक हेयर पर क्रीम लगा कर साफ़ कर दिया। उसने अपनी चूत को गर्म पानी से धोया और फिर सुंदरी ने किरण को अपनी बाहों में उठाया और बिस्तर पर ले गई। सुंदरी ने किरण को 69 पोजीशन में अपने ऊपर खींच लिया। बिना एक शब्द बोले दोनों ने एक दूसरे की चुंचिया (निपल्स) चबायी और चाटी।
सुंदरी अब अनुभवी थी। शादी से पहले उसने अपने मायके में पाँच लंड चखे थे, लेकिन शादी के बाद वह अपने पति के प्रति वफ़ादार रही। परम द्वारा माँ की चूत में अपना मोटा लंड डालने के बाद ही सुंदरी और भी लंडों की भूखी हो गई। पिछले दो महीनों में उसने विनोद, सेठजी, सेठजी के मेहमानों, दूसरे सेठों, उसकी बेटी का कौमार्य भंग करने वालों और सुधा के पिता का लंड लिया था।
सुंदरी एक और लंड चाहती थी। वह सोच रही थी कि सेठजी ने उसे अपने मेहमान के स्वागत के लिए क्यों नहीं बुलाया। उसने विनोद का इंतज़ार किया और उसे जबरदस्त संतुष्टि मिली। किरण अपनी जीभ से सुंदरी को चोद रही थी और उंगली से उसकी गांड भी चोद रही थी। सुंदरी की गांड चाट के साफ़ करने में अब किरण को बहोत मजा आता था और इसी प्रक्रिया से उसकी चूत अपना रस निरंतर बहा रही थी। वह खुद बहुत उत्तेजित थी।।। और चिल्लाई
“दीदी तेरा लंड कहा है! मेरी चूत में आग लगी है।”
“हाँ रे, पता नहीं साला आया क्यों नहीं....?” सुंदरी भी चिंतित हो गई।
सुंदरी ने जवाब दिया, लेकिन उसी समय दरवाज़े पर दस्तक हुई। उसने किरण को एक तरफ़ धकेला और उसे ऐसे ही रहने को कहा, टाँगें चौड़ी करके ताकि मर्द चुदाई के लिए उसकी टाँगें खोलने में समय बर्बाद न करे। सुंदरी ने पेटीकोट अपनी चुची तक खींचा और गाँठ पकड़कर दरवाज़ा खोला। उसने तय कर लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, वो मर्द को अंदर खींचकर किरण से चुदवाएगी। शुक्र है, वो तो मुनीम था। उसने मुनीम को अंदर खींचा और उसका पेटीकोट नीचे कर दिया।
मुनीम अपनी पत्नी की बदतमीज़ी पर मुस्कुराया और बोला,
"क्या बात है रानी... बहुत गर्मी लग रही है.... चल चोद कर ठंडा कर देता हूँ। सेठजी ने तेरी मारी नहीं?" मुनीम ने पत्नी को गले लगा लिया।
सुंदरी ने सेठजी का नाम सुनते ही अपनी नाक पर ऊँगली रख के चुप रहने का सन्देश दिया और दुसरे हाथ से अन्दर कोई ओर भी है का इशारा किया। "मुझे बाद में चोदना" कहकर उसने मुनीम को बेडरूम में खींच लिया।
“आपके लिए बस अब मेरी गांड ही बची है, आप मुझे चोदते है तो मेरी ज्यादा बड़ी हो जाती है और मेरे ग्राहकों को मजा नहीं आती इसलिए आप से दूर रहते हुए मैं दूसरी कमसिन भेंट देती रहूंगी।“ उसने मुनीम के कानो में दबी आवाज में कहा “ छोटी चुतो को बड़ी करते रहिये ताकि वह दुसरे लंड को बड़े आराम से ले सके, शायद आपका यही काम रह गया है।” और वह बड़ी जोर से हंसने लगी।
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दोस्तों आज के लिए बस यही तक।
फिर मिलेंगे अगली कड़ी के साथ तब तक के लिए फनलवर की तरफ से जय भारत।।