Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 173 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

पूनम के घर पर

खाने-पीने के बाद पूरा घर शांत हो गया। रात के 11:30 बज चुके थे।

“माँ आज तो काफी थक गए है।“ पूनम ने बगसा खाते हुए कहा।
फनलवर की पेशकश।

“हाँ बेटी, सच ही कह रही हो, आज्काफी थक गए है। अगर तुम्हे सोना है तो जाके सो जाओ।“ पुष्पा जल्द ही अपनी दोनों बेटियो को सुलाने पे तुली हुई थी। वैसे आम तौर पर सब बाते करते और घर का काम निपटाते पर आज पुष्पा कुछ अलग ही मूड में लग रही थी।

पूनम माँ के पास गई और बड़े आराम से पूछा; “क्या बात है माँ आज कुछ खास तो नाह है न?”

“खास बात? कौनसी खास बात अब इस उमर में खास बात क्या होगी बेटी?” उसने पूनम को घूरते हुए कहा।

“वैसे अब खास बाते तुम जैसी मस्त लडकियों के पास होती है बेटी, हम जैसी औरतो के पास नहीं।“ उसने अपनी आँखे नचाते हुए बोला।

लेकिन इन सब बातो में पूनम को कोई रूचि नहीं थी। वह बस सोना चाहती थी। उसकी काफी चुदाई हो चुकी थी। और वह अब ज्यादा कुछ भी सोचने के लिए तैयार नहीं थी। फिर भी उसको महक को कहे लास्ट शब्द याद आ गए। “मैं तेरे बाप से चुदती हूँ, समज सको तो अच्छा।“ वह थोडा मुस्कुराई और मन ही मन में बोली;

“माँ, अब तुम्हे क्या बताऊ? तुम्हे क्या पता मेरे अन्दर एक ऐसा लोडा गया है जिसने मुझे और मेरे सभी छेदों को जित लिया है।“

पूनम और पूमा हमेशा की तरह एक ही कमरे में एक बिस्तर पर सो गईं। पंडितजी दूसरे कमरे में अपनी पत्नी पुष्पा के साथ लेट गए।

पुष्पा ने जैसे ही दरवाजा बंद किया, वह शेरनी बन गई। उसने झटके से अपना सारा कपड़ा उतार फेंका। उसके भारी, ढीले पड़ चुके लेकिन अभी भी आकर्षक स्तन बाहर आ गए। वह पंडितजी के पास गई और उनके कपड़े भी जबरदस्ती उतारने लगी।

“आज छोड़ो पुष्पा... थक गया हूँ...” पंडितजी ने विरोध किया।

लेकिन पुष्पा ने एक नहीं सुनी। उसने पति का लंड पकड़कर जोर से दबाया और बोली,

“थक गए हो तो आराम से लेट जाओ... मैं ऊपर से चुद लूँगी। आज मैं आपको चोदूंगी। आप बस आराम कीजिये और मुझे आपके लंड को खाली करने दे। आज निचे बहोत बड़ी आग लगी हुई है।”
फनलवर रचित।

पुष्पा ने पंडितजी को लिटाया, उनके लंड को मुंह में लेकर अच्छे से चूसा, अब किसी मस्त औरत का मुंह लंड पर आये और उसकी गरम-गरम लार लंड पर हमला करे तो कौनसा लंड ढीला रहेगा? पंडितजी का लंड भी धीरे-धीरे अपनी औकात पर आने लगा। और थोड़ी देर पुष्पा ने मुख चोदन करके उनका लंड को खड़ा कर ही दिया। वह अपनी इस विजय पर मुस्कुराई और पंडितजी के सामने अपनी कामुक आँखे दाल के बोली;

“बडे आये आज तो छोड़ दो, लंड पर काबू तो रख नहीं पाते।देखा न मैंने कैसे उसे खड़ा कर दिया है अब उसे मेरी चूत में ही ढीला होना पड़ेगा। “ फिर खुद उनकी गोद में बैठकर एक झटके में पूरा लंड अपनी चिकनी चूत में उतार लिया।

“आह्ह्ह... finally... आज कितने दिनो बाद मेरी चूत ने लंड लिया है...” पुष्पा ने आँखें बंद करके कूल्हे हिलाने शुरू कर दिए।

उसने अपने दोनों कुलहो को फैलाया ताकि चूत में जगह बने, और उसकी गांड को थोडा उजागर किया। और वह जोर-जोर से उछल-उछलकर खुदकी चूत को चोद रही थी। उसके भारी बोबले ऊपर-नीचे आगे-पीछे उछल रहे थे।

लेकिन यह परम या मिनुम तो था नहीं, फिर भी थोडा समय पुष्पा ने पंडितजी को चोदा और पंडितजी के डिस्चार्ज हो गए। उनके लंड ने पुष्पा की चूतमें अपने माल की उलटी कर ही दी। पंडितजी के स्खलन होने के बाद पुष्पा अभी भी उनकी छाती पर बैठी थी।


पंडितजी ने हाँफते हुए कहा, “पुष्पा... देख रहा हूँ... कुछ दिनों से तुम बहुत गंदी हो गई हो। अब हमारी बेटियाँ बड़ी हो गई हैं। हमें अब चुदाई बंद कर देना चाहिए।”
निर्मात्री फनलवर।


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जुड़े रहिये..


Funlove.
 
पूनम के घर पर

खाने-पीने के बाद पूरा घर शांत हो गया। रात के 11:30 बज चुके थे।

“माँ आज तो काफी थक गए है।“ पूनम ने बगसा खाते हुए कहा।
फनलवर की पेशकश।

“हाँ बेटी, सच ही कह रही हो, आज्काफी थक गए है। अगर तुम्हे सोना है तो जाके सो जाओ।“ पुष्पा जल्द ही अपनी दोनों बेटियो को सुलाने पे तुली हुई थी। वैसे आम तौर पर सब बाते करते और घर का काम निपटाते पर आज पुष्पा कुछ अलग ही मूड में लग रही थी।

पूनम माँ के पास गई और बड़े आराम से पूछा; “क्या बात है माँ आज कुछ खास तो नाह है न?”

“खास बात? कौनसी खास बात अब इस उमर में खास बात क्या होगी बेटी?” उसने पूनम को घूरते हुए कहा।

“वैसे अब खास बाते तुम जैसी मस्त लडकियों के पास होती है बेटी, हम जैसी औरतो के पास नहीं।“ उसने अपनी आँखे नचाते हुए बोला।

लेकिन इन सब बातो में पूनम को कोई रूचि नहीं थी। वह बस सोना चाहती थी। उसकी काफी चुदाई हो चुकी थी। और वह अब ज्यादा कुछ भी सोचने के लिए तैयार नहीं थी। फिर भी उसको महक को कहे लास्ट शब्द याद आ गए। “मैं तेरे बाप से चुदती हूँ, समज सको तो अच्छा।“ वह थोडा मुस्कुराई और मन ही मन में बोली;

“माँ, अब तुम्हे क्या बताऊ? तुम्हे क्या पता मेरे अन्दर एक ऐसा लोडा गया है जिसने मुझे और मेरे सभी छेदों को जित लिया है।“

पूनम और पूमा हमेशा की तरह एक ही कमरे में एक बिस्तर पर सो गईं। पंडितजी दूसरे कमरे में अपनी पत्नी पुष्पा के साथ लेट गए।

पुष्पा ने जैसे ही दरवाजा बंद किया, वह शेरनी बन गई। उसने झटके से अपना सारा कपड़ा उतार फेंका। उसके भारी, ढीले पड़ चुके लेकिन अभी भी आकर्षक स्तन बाहर आ गए। वह पंडितजी के पास गई और उनके कपड़े भी जबरदस्ती उतारने लगी।

“आज छोड़ो पुष्पा... थक गया हूँ...” पंडितजी ने विरोध किया।

लेकिन पुष्पा ने एक नहीं सुनी। उसने पति का लंड पकड़कर जोर से दबाया और बोली,

“थक गए हो तो आराम से लेट जाओ... मैं ऊपर से चुद लूँगी। आज मैं आपको चोदूंगी। आप बस आराम कीजिये और मुझे आपके लंड को खाली करने दे। आज निचे बहोत बड़ी आग लगी हुई है।”
फनलवर रचित।

पुष्पा ने पंडितजी को लिटाया, उनके लंड को मुंह में लेकर अच्छे से चूसा, अब किसी मस्त औरत का मुंह लंड पर आये और उसकी गरम-गरम लार लंड पर हमला करे तो कौनसा लंड ढीला रहेगा? पंडितजी का लंड भी धीरे-धीरे अपनी औकात पर आने लगा। और थोड़ी देर पुष्पा ने मुख चोदन करके उनका लंड को खड़ा कर ही दिया। वह अपनी इस विजय पर मुस्कुराई और पंडितजी के सामने अपनी कामुक आँखे दाल के बोली;

“बडे आये आज तो छोड़ दो, लंड पर काबू तो रख नहीं पाते।देखा न मैंने कैसे उसे खड़ा कर दिया है अब उसे मेरी चूत में ही ढीला होना पड़ेगा। “ फिर खुद उनकी गोद में बैठकर एक झटके में पूरा लंड अपनी चिकनी चूत में उतार लिया।

“आह्ह्ह... finally... आज कितने दिनो बाद मेरी चूत ने लंड लिया है...” पुष्पा ने आँखें बंद करके कूल्हे हिलाने शुरू कर दिए।

उसने अपने दोनों कुलहो को फैलाया ताकि चूत में जगह बने, और उसकी गांड को थोडा उजागर किया। और वह जोर-जोर से उछल-उछलकर खुदकी चूत को चोद रही थी। उसके भारी बोबले ऊपर-नीचे आगे-पीछे उछल रहे थे।

लेकिन यह परम या मिनुम तो था नहीं, फिर भी थोडा समय पुष्पा ने पंडितजी को चोदा और पंडितजी के डिस्चार्ज हो गए। उनके लंड ने पुष्पा की चूतमें अपने माल की उलटी कर ही दी। पंडितजी के स्खलन होने के बाद पुष्पा अभी भी उनकी छाती पर बैठी थी।


पंडितजी ने हाँफते हुए कहा, “पुष्पा... देख रहा हूँ... कुछ दिनों से तुम बहुत गंदी हो गई हो। अब हमारी बेटियाँ बड़ी हो गई हैं। हमें अब चुदाई बंद कर देना चाहिए।”
निर्मात्री फनलवर।


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जुड़े रहिये..


Funlove.
 
पुष्पा ने पति का अभी भी अंदर पड़ा लंड कसकर दबाया और रंडी वाली नजरों से देखते हुए बोली,

“अरे जाओ जी... तुम्हें नहीं चोदना है तो मत चोदो। लेकिन मुझे तो हर समय चूत में मोटा और लंबा लंड चाहिए। वो भी सिर्फ तुम्हारा। तुम चाहो या न चाहो... जब मैं बोलूँगी, तो मुझे चोदना ही पड़ेगा। हम बेटियों के साथ तो सो नहीं रहे हैं ना? मैं अपने पति से चुदवा रही हूँ, इसमें उन्हें क्या एतराज होना चाहिए? और देखिये जी अब हमारी बेटिया बड़ी हो चुकी है। उन्हें पता है सब, और नहीं भी पता होगा तो पता चल जाएगा, कोई और उन्हें सिखा देगा। नाहक में उनकी चिंता करके आप मेरा मूड भी ख़राब कर रहे है और मेरी चूत का भी। छेद तैयार है बस उन्हें आपको भरना है।”

पंडितजी ने समझाने की कोशिश की, “पुष्पा, अब तुम्हें कपड़े उतारना भी बंद कर देना चाहिए। पूरा समय पूजा-पाठ में बिताओ, ताकि मन और शरीर दोनों को ठंडक मिले। और बेटियों का तो क्या है वह अभी जवान हुई है, उनमे जवानी का नशा तो आएगा ही लेकिन समय पर सब हो तो अच्छा है। मैं जानता हूँ की हम उस समाज में है जहा चुदाई आम है और हमारा फर्ज भी है की हमें बेटा-बेटी को सिखाना भी पड़ता है। फिर भी समजा करो,,, रानी।” फनलवर की प्रस्तुति।

पुष्पा जोर से हँसी। उसने पति का लंड फिर से दबाते हुए साफ-साफ कहा,

“गांड आपकी,मुझे पूजा-पाठ नहीं करना है जी...अभी मेरी उमर ऐसी नहीं है और आपके माँ कब तक करती थी याद है न? वह भी पूजा-पाठ के साथ–साथ सब तो करती थी। मुझे तो आपने नहीं करने दिया, लेकिन आप से तो कर ही सकती हूँ और कोई मुझे रोक भी नहीं सकता। आखिर आपका लंड मेरी मालिकी है। और हाँ, मुझे तो बस हर समय हाथ और मुंह में लंड चाहिए... और रात को जमकर चुदाई चाहिए। मेरी चूत अब शांत नहीं बैठ सकती। मुंह में लंड का माल होना चाहिए। कौन देगा यह सब बताइये?”

पंडितजी ने सुझाव दिया, “ठीक है... मैं तुम्हारे लिए एक मजबूत, जवान नौकर ला दूँगा। दिन भर काम करेगा और रात को तुम्हारी शारीरिक जरूरतें पूरी करेगा। और किसी को कोई भनक नहीं आएगी। तुम बड़े आराम से चुदवाती रहना उस से।”

पुष्पा का चेहरा तुरंत बदल गया। वह तो परम को ही चाहती थी।

“और वो नौकर मेरी चुदाई के साथ-साथ तुम्हारी दोनों बेटियों को भी चोदने लगेगा तो क्या करोगे? वो तुम्हारी बीवी और बेटियों को चोदेगा तो तुम्हें शर्म नहीं आएगी? मुझे माँ भी बना सकता है, खेर मैं तो शादीशुदा हूँ बच्चा रहेगा तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता, पर आप सोचो पूनम या फिर पूमा की चूत भर दे और माल फलित हुआ तो?”

उसने पति की छाती पर थपकी मारते हुए कहा, “बस मुझे सिर्फ ये प्यारा लंड चाहिए... तैयार रहो। सिर्फ तुम्हारा लंड ही मेरी प्यास बुजाउंगी।”

पंडितजी चुप हो गए। उन्हें पता था कि कोई भी नौकर पुष्पा को चोदने के बाद पूनम और पूमा को भी नहीं छोड़ेगा। और चोदेगा भी, आखिर वह भी तो एक मर्द होगा। और मेरी बेटियों की चूत में माल गिरा भी सकता है। और तो और शायद हो सकता है मेरी जवान बेटियों भी उसके लंड से आकर्षित हो। और हो सकता है की बहार जाके किसी को बोल भी दे। बड़ा रिस्क था।

थोड़ी देर बाद उन्होंने पत्नी को खुश करने के लिए और विषय बदलने के इरादे से कहा,

“पुष्पा... तुझे गुरुजी याद हैं?” फनलवर की लिखावट।

“हाँ... करीब 20 साल हो गए, उन्हें देखा ही नहीं... कुछ खबर आई क्या?”

पंडितजी ने पत्नी की नंगी कमर पर हाथ फेरते हुए बताया, “खबर नहीं रानी... आज सुबह अचानक आश्रम से घर आ गए हैं। पहले से भी ज्यादा मजबूत और सुंदर लग रहे हैं। लोग कहते हैं 80 के ऊपर होंगे, लेकिन देखो तो क्या गठा हुआ शरीर है...”

पुष्पा की आँखों में एक पुरानी याद कौंध गई।

शादी के 7-8 दिन बाद गुरुजी उनके घर आए थे। पूरे परिवार के सामने उन्होंने पुष्पा को अपनी गोद में 30-40 मिनट तक बैठाए रखा था। लेकिन उस रिवाज की आड़ में गुरुजी ने उसके स्तनों के साथ बहुत खिलवाड़ किया था- उन्हें दबाया, सहलाया और निप्पलों को छेड़ा भी था।

पुष्पा अचानक अपने अतीत में खो गई। उसकी चूत फिर से गीली होने लगी थी।



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बस यही तक दोस्तों.


Funlover की तरफ से
जय भारत।।
 
चलो अच्छा लगा की आपकी जानकारी बढ़ि।

जी हां बात तो सच है कि पुरुषों से ज्यादा स्ट्रियो में सेक्स स्टैमिना ज्यादा होता है। लेकिन शर्म, डर, या फिर कुछ और पर बोलती बहुत कम है। और ज्यादा एक्टिव भी नहीं होती. बस जो होता है सही समझती है।

मुझे बहुत अच्छा लगा कि आपकी कहानी का पिछला हिस्सा याद है। जी हां वही पंडितजी हैं.

जी कोशिश करूंगी कि अपडेट्स जल्दी पोस्ट कर पाऊं।


लेकिन आप जानते हैं कि बहुत सी कहानियों को न्याय देना थोड़ा मुश्किल है।
शुक्रिया दोस्त.
 

“लेकिन जब मैं अपना लंड इस चूत के अंदर डालूंगा तो सिर्फ 10-15 दिन में ही तुम जवान हो जाओगी... महक जैसी मोटी चूचियों वाली, भरी-भरी गांड वाली और रसीली चूत वाली।” पिताजी ने बेटी की चूत को उँगलियों से खोलते हुए कहा।

सलोनी की चूत अब जल रही थी। उसने अधीर होकर कहा, “फिर पूछ क्या रहे हैं बाबूजी! लौड़ा पेलिए, उंगली पेलिए या चाटिए... जो करना है जल्दी कीजिए। मेरी चूत बहुत गरम हो रही है... बहुत खुजली हो रही है। मुझे अब कुछ हो रहा है। समज में नहीं आ रहा है की कुछ हो रहा है या रहा नहीं जा रहा!”

पिताजी ने बेटी को अपनी गोद से उठाया और उसे मास्टर बेडरूम के बड़े बिस्तर पर लिटा दिया - उसी बिस्तर पर जहाँ वे अपनी पत्नी प्रभा को सालों से जोर-जोर से चोदते आए थे।

“लौड़ा देखेगी? चूत में लेगी?” पिताजी ने पूछा।

"बेटी, तुमने कभी लंड को देखा है?" पिताजी ने उसकी कमर को सहलाते हुए पूछा।

सलौनी को बड़ा झटका लगा। अब इस का क्या जवाब दूँ! ऐसा तो कह नहीं सकती की देखा क्या मेरी चूत दो लंडो को चबा चुकी है। पर बिना देरी किये उसके मगज के तरंगो ने जवाब दे दिया।

"आपने कभी ऐसा मौक़ा ही नहीं दिया पापा।"

"फिर भी कभी कुछ तो देखा होगा?" पिताजी ने उत्सुकता से पूछा। " आजकल की लोंडिया कही ना कही लंड को देख तो लेती ही है।"

"हाँ वैसे पिताजी आपका लंड देखा है लेकिन पूरा नहीं, जब आप नहाके आते थे और कभी कभी मम्मी से मस्ती करते थे तब कुछ हद तक आपका ही तो लंड देखा है लेकिन ज्यादा और करीबी से नहीं। नाही मैंने लम्बाई देखि है ना मोटाई बस आगे का सुपारा देखा है। जो की मुझे आकर्षित करता था।" सलौनी ने मादकता बढाई।

"कोई बात नहीं बेटी अब लंड को देखोगी?" पिताजी सलौनी के जवाब से खुश होते हुए बोले। बेटी ने सिर्फ मेरा सुपारा ही देखा है मतलब लंड को वे बड़े आराम से दिखा सकते है।

“हाँ...जो दिखाओगे देखूंगी भी और चूत में लुंगी भी। आप जल्दी कीजिये।” सलोनी ने साँसें फुलाते हुए कहा।

पिताजी खड़े हो गए और अपने सारे कपड़े उतार दिए। उनका मोटा, 7 इंच से ज्यादा लंबा और अच्छी मोटाई वाला लंड पूरी तरह खड़ा होकर तना हुआ था। सुपारा चमक रहा था। लेकिन मुनीमजी से कही कम था।
फनलव रचित कहानी।

सलोनी ने पिता का लंड देखा तो उसकी आँखें फैल गईं। उसे उम्मीद थी कि पापा का लंड परम और मुनीमजी (जिसने कल रात महक को चोदा था) जितना बड़ा और मोटा नहीं होगा, लेकिन यह काफी मोटा और लंबा था। लेकिन जैसे की उसे उम्मीद थी पिताजी का लंड मुनीमजी जैसा तो बिलकुल भी नहीं था। लेकिन कुछ हद तक चले ऐसा था। मानो की अगर कोई लड़की पहली बार चुदवाती है तो उसे यह लंड अच्छा, बड़ा और मोटा लगेगा लेकिन जो लड़की मुनीमजी के निचे से गुजरी है उसे यह लंड उतना बड़ा नहीं लगेगा। अब यह तो स्वाभाविक था।

उसने आगे बढ़कर पिता के लंड को दोनों हाथों में पकड़ लिया और सहलाने लगी। “बाप रे... इतना मोटा और लंबा... ये मेरी चूत में कैसे जाएगा?” उसने ऐसा सोचा की ऐसे बोलने से पिताजी ज्यादा उत्साहित होंगे और वह उसकी सूजी हुई चूत के बारे में ज्यादा सवाल नहीं करेंगे।

उसने कुछ बार मुठ मारते हुए बोली, “माँ कैसे इसे रोज लेती है...?”
फनलव रचित कहानी।

पिताजी ने मुस्कुराते हुए बेटी के क्लिटोरिस पर चुटकी काटते हुए कहा, “इससे भी मोटा और लंबा लंड तेरी चूत में जाएगा बेटी।”

फिर उन्होंने सलोनी की चूत को उँगलियों से फैलाते हुए कहा, “लगता है तू बिल्कुल कुंवारी है... किसी ने इसे अब तक नहीं चोदा है, है ना?”

सलोनी ने सीधे पिता की आँखों में देखकर ऐलान किया, “चोदा है बाबूजी...”
रचयिता फनलव है।

ये सुनकर पिताजी का चेहरा उतर गया। वे दुखी हो गए। भारी मन से उन्होंने पूछा, “किसने चोदा? और कब?”

“अरे बाबूजी... कल रात पूनम और महक रात भर मेरी चूत में उंगलियाँ घुसा-घुसाकर मुझे चोदती रहीं...” सलोनी ने कहा।

पिताजी का चेहरा तुरंत चमक उठा। “मेरी जान, वो चुदाई नहीं होती बेटी...” वह खुश थी की वह अपने पापा को चुतिया बनाने में सफल हुई थी।


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बने रहिये दोस्तों............

FunLove.


Good that you are posting your story.
 
उन्होंने राहत की साँस ली, “बहुत सी लड़कियाँ आपस में एक-दूसरे की चूत में उंगलियाँ पेलकर मजा लेती हैं। कभी-कभी माँ-बेटी या दो बहनें भी घर में ऐसा कर लेती हैं। उसे चुदाई नहीं कहते। वो सिर्फ एक प्रकार का जातीय आनंद होता है। असली चुदाई तो किसी मोटे लंड को चूत में घुसने से कहते हैं। जब लंड की मार चूत पर पड़ती है बेटी तब उसे असली चुदाई कहते है।” पिताजी खुश हो गए की एक कच्चा माल आज पक्का बनाने का मौक़ा मिला है।

सलोनी ने अपनी टाँगें ऊपर उठाकर चूत को पूरी तरह उजागर करते हुए मासूमियत से पूछा, “फिर कैसे होता है असली चुदाई...? देखो उन दोनों ने मेरी चूत की क्या हालत बना रखी है, कोई देखे तो उसे तो यही लगे की यह तो चूत नहीं है पर भोस बनी हुई है। उन्हें ऐसा नहीं खेलना था।” फनलव रचित कहानी

“मैं दिखाता हूँ बेटी... चुदाई कैसी होती है। और येसा ख्हेल तू अपनी माँ से खले सकती है, बेटी, लंड से ही एक चूत भोंस बन सकती है।” पिताजी ने कहा।

सलौनी ने पिताजी के सामने देखा और एक संतुष्टि हुई की पापा को पक्का यकीं हो गया है की उनकी बेटी कभी लंड से नही चुदी। उसका यह कॉन्फिडेंस से कहना काफी काम कर गया था। एक बला टल गई थी।

वे बेटी की टाँगों के बीच आ गए। अपना मोटा लंड हाथ में पकड़कर उसकी गीली चूत पर रख दिया और दबाव डालने लगे।

सलोनी अपने पिता को बेवकूफ बनाना चाहती थी। उसे पहली बार की चुदाई का दर्दनाक अनुभव याद आ गया। उसने अपनी कमर हिलाई और जोर-जोर से चिल्लाई, “बाबूजी... बाप रे... बहुत दर्द कर रहा है... मर गई... लौड़ा निकालो... बाप रे...!”

उसने अपनी जाँघें और जघन क्षेत्र को कसकर बंद कर लिया। मैत्री द्वारा एडिटेड

“साली कुतिया! भोसडिकी, चिल्ला मत... कोई सुन लेगा तो तेरी और मेरी माँ चुद जायेगी! भोस बन ना है तो सहन कर ना भी सिख।” पिताजी ने गुस्से और उत्तेजना के साथ कहा।

“बा...प...रे... मर गई...!” सलोनी अभी भी चीख रही थी। मन ही मन हस रही थी की चलो वह कामयाब हो रही है।

लेकिन पिताजी ने बेटी के कंधों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और बिना रुके खूब जमकर चुदाई शुरू कर दी। वे बहुत खुश थे कि वे अपनी बेटी की “कुंवारी” चूत को चोद रहे हैं - बीबी के बाद अब बेटी की चूत।

वे नहीं जानते थे कि मुनीम और परम के मुसल जैसे मोटे लौड़े ने पहले ही इस चूत को दो बार फाड़ चुका है। और चूत पर सुजन उन दो लोंड़ो की वजह से बनी हुई है।

पर उसे अब,सलोनी को असली दर्द हो रहा था क्योंकि कल रात माँ प्रभा के साथ लेस्बियन करते समय प्रभा के दाँतों से उसकी चूत के अंदरूनी हिस्से में कट लग गई थी। अब जब पापा का मोटा लंड उसी जगह पर जोर-जोर से घुस रहा था तो दर्द और बढ़ गया।

जैसे-जैसे बेटी को ज्यादा दर्द हो रहा था, पिताजी को और मजा आने लगा। उन्होंने दो जोरदार धक्के मारे और उनका पूरा लौड़ा सलोनी की चूत की सबसे गहरी तह तक पहुँच गया।

“आआह्ह्ह... बाबूजी... फट गई मेरी चूत...!” सलोनी चीखी।

पिताजी ने बेटी की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और तेज-तेज धक्के मारने लगे। हर धक्के के साथ सलोनी के भारी स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे। कमरे में चप-चप... थप-थप... की आवाजें गूँजने लगीं। फनलव का निर्माण

पिताजी की आँखों में अब पिता का प्यार नहीं, बल्कि बेटी की जवानी को रौंदने की भूख थी। एक भूखा जानवर अब शिकार को खा रहा था। वासना ने सब भुला दिया था और अब सिर्फ वह दो शरीर ही थे जो मिल के एक हो रहे थे।



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आज के लिए बस यही तक दोस्तों।


फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ।


तब तक के लिए FunLove का जय भारत।।
Good.
 
दस मिनट तक पिताजी ने अपनी बेटी सलोनी को ज़ोर-ज़ोर से और बेहद तेज़ गति से चोदा। हर धक्का इतना जोरदार था कि सलोनी का पूरा शरीर हिल रहा था। उसके भारी स्तन ऊपर-नीचे जोर-जोर से उछल रहे थे। कमरे में चूत की चप-चप की आवाज़ और दोनों की साँसों की हाँफती हुई आवाज़ गूँज रही थी। फनलव रचित

शुरुआत में दर्द के कारण चीख रही सलोनी अब चुदाई का पूरा मजा ले रही थी। उसकी चूत अब पिता के मोटे लंड के आकार में ढल चुकी थी। हर धक्के के साथ उसे गहरा सुख मिल रहा था।

उसे इस बात का गहरा संतोष था कि उसने अपने पिता के साथ चुदाई का फैसला सही लिया था। अब जब भी उसकी चूत में आग लगे, घर पर ही एक मोटा और तैयार लंड उपलब्ध था। उसे अब किसी बाहर के मर्द की जरूरत नहीं थी। जब चाहे वह अपनी चूत को विर्यपान करवा सकती थी, और वह भी बिना रोक-टोक। आज घर में उसकी चुदाई के श्री गणेश हो चुके थे।

दस मिनट की इस जोरदार चुदाई के बाद पिताजी बेटी के बदन पर पूरी तरह टिक गए। उनका लंड सलोनी की चूत के सबसे गहरे हिस्से में धँसा हुआ था। लेकिन सलोनी अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई थी। वह और चुदाई चाहती थी।

उसने पिता की पीठ पर हाथ फेरते हुए प्यार भरी, लेकिन कामुक आवाज में पूछा, “बाबूजी... थक गए क्या? मुझे तो बहुत मजा आ रहा है...”

पिताजीने हाँफते हुए मुस्कुराकर कहा, “तेरी माँ की भोसड़ी... नहीं रानी, अभी तो बहुत चोदना है तुझे। अब मेरे लिये तेरी यह चूत का दरवाजा खुल चूका है। बेटी बहोत चोदुंगा तुम्हे।”

यह कहते हुए उन्होंने फिर से अपनी बेटी को धीमी गति से चोदना शुरू कर दिया। अब धक्के गहरे और लंबे थे। सलोनी की आँखें बंद हो गईं। उसे और भी ज्यादा मजा आने लगा।
संपादिका मैत्री.

सुबह परम ने उसे दो बार 15-15-20 मिनट तक चोदा था, लेकिन पापा की चुदाई में कुछ और ही बात थी। पापाजी को झड़ने में काफी समय लग रहा था। लेकिन उफ्फ्फ बहनचोद वह मुनीमजी की चुदाई सब से बेस्ट थी। पिताजी ने गति धीमी की, फिर अचानक तेज कर दी। सलोनी की चूत से लगातार रस निकल रहा था।

आखिरकार पूरे 26 मिनट की लगातार चुदाई के बाद पिताजी जोर से गरजे और अपने गरम-गरम वीर्य की मोटी धार सलोनी की चूत की गहराई में छोड़ दी। हालाकि परम की धार और उसे भी अच्छी मुनीमजी के लंड की धार बढ़िया थी। उन दोनों बाप-बेटे के लंड की धार काफी घाटी थी। जब की पापा ने अन्दर छोड़ा तो असर तो हुई पर उतनी नहीं।

सलोनी भी उसी समय चीखकर दो बार झड़ गई। उसका चुतरस पिता के लंड के साथ मिलकर बिस्तर पर बहने लगा।

दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से कसकर लिपटे रहे। जब उनकी साँसें थोड़ी सामान्य हुईं, तब पिताजी ने बेटी को चूमते हुए अपनी बात शुरू की। उन्होंने सलोनी को बताया कि अपनी नौकरी के सिलसिले में वे अलग-अलग शहरों में वेश्याओं और कॉल गर्ल्स के साथ कैसे संबंध बनाते रहे।

सलोनी को सबसे ज्यादा खुशी तब हुई जब पिता ने कहा, “लेकिन अब तक तेरी माँ के अलावा तू ही एकमात्र कुंवारी लड़की है जिसे मैंने चोदा है।”

ये सुनकर सलोनी के मन में गुदगुदी हुई। उसे खुशी थी कि पिता अभी भी उसे कुंवारी समझ रहे हैं। उसने पिता को जोर से चूमा।

थोड़ी देर बाद सलोनी ने पिता को धक्का देकर खुद को अलग किया और नंगी ही कमरे से बाहर चली गई।

वह रसोई में गई और रात के खाने की तैयारी करने लगी। दाल-चावल के बर्तन चूल्हे पर रखने के बाद वह सब्जियों की ट्रे, प्याज और चाकू लेकर वापस पिता के पास आई।

अब सलोनी पूरी तरह नंगी थी। वह पिता के पास ऐसे बैठ गई कि उसकी टाँगें चौड़ी थीं और उसकी अभी-अभी चुदाई हुई, वीर्य से भरी चूत पूरी तरह खुली हुई पिता के सामने थी। चूत में से अभी भी उन दोनों की चुदाई का मिश्रण टपक रहा था।

पिताजी बेटी को सब्जियाँ काटते हुए देख रहे थे, लेकिन उनकी नजरें बार-बार सलोनी की खुली चूत पर जा रही थीं। उन्होंने एक हाथ बढ़ाकर बेटी की चूत को धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया। उँगलियाँ चूत के होंठों पर घूम रही थीं और बीच-बीच में अंदर भी जा रही थीं।

अचानक पिताजी को गहरा अपराधबोध हुआ।
फनलव की प्रस्तुति

वे एक पिता थे और उन्होंने अपनी इकलौती जवान बेटी का कौमार्य भंग कर दिया था। उनका चेहरा उदास हो गया। उन्होंने हाथ सलोनी की चूत से हटा लिया और बोले, “सलोनी... बेटी, मुझे माफ कर दो। मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया। मैंने बहुत बड़ा पाप कर दिया। एक बाप होकर मैंने अपनी बेटी को चोदा... यह बहुत गलत है।”

उनकी आवाज़ में पछतावा साफ झलक रहा था।

“किसी को भी यह कभी पता नहीं चलना चाहिए कि हमने चुदाई की है। यह हमारे बीच का राज रहेगा।” पिताजी ने पूरी तरह हाथ हटा लिया और सलोनी की तरफ देखा, इंतजार करते हुए कि बेटी क्या कहेगी।

सलोनी अभी भी नंगी, टाँगें फैलाए बैठी थी। उसकी चूत से पिता का वीर्य धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था...




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FunLove.

जय भारत।।

355
Good.
 
घर पर सलोनी की चुदाई का आखिरी भाग

पिता का चेहरा पछतावे से भरा हुआ था। उन्होंने गहरी साँस ली और बोले, “बेटी... मैं संभल नहीं सका। मैंने सबसे बड़ा पाप कर दिया। एक बाप होकर अपनी जवान बेटी की चूत में लंड डाल दिया। मुझे माफ कर दो सलोनी।”
फनलवर की पेशकश।

वे भावुक हो गए और फिर से बोले, “किसी को भी यह कभी पता नहीं चलना चाहिए कि हमने चुदाई की है।”

यह कहते हुए उन्होंने अपना हाथ सलोनी की चूत से दूर खींच लिया।

सलोनी ने तुरंत पिता का हाथ पकड़कर फिर से अपनी गीली, वीर्य से भरी चूत पर रख दिया। उसकी उँगलियाँ पिता की उँगलियों में फँस गईं।

“बाबूजी... मैंने कहा था ना कि आप मुझसे प्यार नहीं करते...” सलोनी ने उदासी भरी आवाज में कहा, “मेरी कुंवारी चूत भी आपको पसंद नहीं आई... क्योंकि मैं रंडी नहीं हूँ ना... मुझे क्या मालूम कि रंडियाँ कैसे चुदवाती हैं।”

“नहीं बेटी... नहीं...” पिताजी ने तुरंत बेटी को सीने से लगाते हुए उसके गाल, होंठ और गर्दन चूम ली। “तू मुन्ना की कसम ले ले... आज तक ऐसी बढ़िया, कसकती, गीली और कमसिन चूत मैंने नहीं चोदी। मेरा लंड धन्य हो गया तेरी इस प्यारी, टाइट चूत का मजा लेकर... लेकिन...”

“लेकिन क्या...?” सलोनी ने पिता के ढीले पड़ रहे लंड को मुट्ठी में पकड़कर जोर से दबाया और मुठ मारने लगी।

“यही कि... बाप को बेटी की चूत देखना भी नहीं चाहिए... और मैंने तो पूरा लौड़ा पेल दिया। मैं बहुत बड़ा पापी हो गया बेटी। अब तक लोग मुझे ‘बेटी चोद’ कहकर गालियाँ देते थे... लेकिन आज तो मैं सचमुच का बेटी चोद बन गया हूँ।”

सलोनी ने पिता के लंड को और जोर से सहलाते हुए कहा, “बाबूजी, आपने कितना बढ़िया काम किया है, आपको मालूम भी नहीं! आपने मुझे नया जन्म दिया है। मुझे तो ये लौड़ा रोज-रोज चाहिए... इस मेरी चूत में... मुझे एक अच्छा माल बनाना है।”

वह पिता की गोद में बैठकर उनकी छाती से सट गई और लंड पर मुठ मारती रही।
रचयिता फनलवर है।

“आप अगर जबरदस्ती से चोदते तो पाप होता... लेकिन आपने तो कितना प्यार से, कितनी देर तक मुझे चोदा... बहुत मजा आया मुझे... मेरी चूत अभी भी काँप रही है।”

पिताजी की आँखों में फिर से चमक आ गई। उन्होंने बेटी के स्तन दबाते हुए पूछा, “फिर... चोदने दोगी...?”

सलोनी ने पिता के लंड को नीचे झुकाकर उसका चुम्बन लिया और बोली, “बाबूजी, ये भी आपका माल है... वो भी बिना पैसे के। आपको जब मन करे चोदिए... लंड चुसवाइए... माँ के सामने भी... मुझे ये लंड बहुत पसंद आया है।”

फिर उसने कुछ शर्तें रखीं, “जब बोलिएगा, चूत खोल दूँगी... लेकिन पहले आपको मेरी कुछ शर्तें माननी पड़ेंगी...”

पापा ने अभी-अभी चुदाई हुई बेटी की चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं और अंदर घुमाने लगे।

“बोल बेटी... तेरी इस प्यारी, रसभरी चूत के लिए मैं सब शर्तें मान लूँगा...”

उन्होंने उँगलियाँ और गहरी डाल दीं।

सलोनी ने कूल्हे उचकाते हुए पहली शर्त रखी, “हर बार चोदने के पहले और बाद में आप मेरी चूत चाटेंगे... अच्छे से चूसेंगे... कुत्ते की तरह।”

पिताजी ने उँगलियाँ अंदर-बाहर करते हुए और बेटी की चूची दबाते हुए कहा, “बेटी, इससे बढ़िया शर्त हो ही नहीं सकती। आज तक ना तेरी माँ की चूत को कभी चूसा, ना किसी रंडी की... लेकिन आज से तेरी चूत को कुत्ते जैसा चाटूँगा... पूरा मुंह लगा दूँगा।”

सलोनी ने दूसरी शर्त रखी, “मैं दूसरे आदमी से चुदूँगी तो आप मना नहीं करेंगे...”

पिताजी ने बेटी की चूत में तीसरी उँगली डालते हुए कहा, “मेरे सामने भी कोई चोदेगा तो मैं मना नहीं करूँगा। तेरी जवानी को लुटते हुए देखकर मैं मजा लूँगा। और ये जायज भी है बेटी। तू अपनी मन की रानी है। किसी से भी चुदवा... मेरे सामने भी चुदवा सकती है। बस मुझे तेरी चूत चोदने और चाटने को मिलता रहे, इससे ज्यादा और क्या चाहिए!”
फनलवर की प्रस्तुति।

सलोनी मुस्कुराई। उसने पिता के लंड को फिर से कसकर पकड़ा और बोली, “तो अब से ये चूत आपकी है बाबूजी... जब मन करे चोदिए, चाटिए, भर दीजिए...”

पिताजी ने बेटी को जोर से चूम लिया। उनकी उँगलियाँ अभी भी सलोनी की चूत में घूम रही थीं।

सलोनी की चूत फिर से गीली होने लगी थी। पिता का लंड भी धीरे-धीरे फिर से खड़ा हो रहा था।



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बाकी बाद में दोस्तों।



जय भारत।।
Waah!
 
घर पर सलोनी की चुदाई का आखिरी भाग चालु....


सलोनी पिता की गोद में बैठी हुई, उनकी उँगलियों को अपनी चूत में घुमाते हुए बोली, “लेकिन बदले में... आप भी मुझे जिससे चाहे चुदवाइए। चाहे वो आपका दोस्त हो, दोस्त का बाप हो, या कोई और... आप मुझसे धंधा करवाएँगे तो भी मैं तैयार हूँ बाबूजी... पैसे लेकर या मुफ्त में... मेरी चूत आपकी मर्जी से किसी की भी हो सकती है।”

पिताजी की आँखें चमक उठीं। उन्होंने बेटी की चूत में तीसरी उँगली भी ठेल दी और जोर से घुमाते हुए पूछा, “मेरे बॉस से चुदवाऊँगा तो चुदेगी...?”
फनलवर की प्रस्तुति।

सलोनी ने कूल्हे उचकाकर उनकी उँगलियों पर अपनी चूत दबाई और कामुक स्वर में बोली, “अभी बुला लीजिए बाबूजी... रात भर आप दोनों मुझे बारी-बारी से चोद सकते हो... मेरी चूत, मेरी गांड, मेरा मुंह... सब आप दोनों के लंड के लिए खुला रहेगा।”

पिताजी उत्तेजित हो गए। उन्होंने उँगलियाँ और तेजी से अंदर-बाहर करने लगे और बोले, “अगली शर्त बोल...”

सलोनी ने साँसें फुलाते हुए कहा, “आप माँ को दूसरे मर्द से चुदवाने की इजाजत देंगे...”

यह सुनते ही पिताजी की उँगलियाँ रुक गईं। उन्होंने उंगलिया बाहर निकाल लीं और सख्त स्वर में बोले, “नहीं! ये नहीं हो सकता!”

“क्यों बाबूजी... इसमें बुराई क्या है?” सलोनी ने पिता की छाती पर हाथ फेरते हुए समझाने की कोशिश की, “आपने खुद बताया कि आपने 100 से ज्यादा औरतों और लड़कियों की चूत मारी है... अब अपनी बेटी की चूत भी फाड़ दी है। फिर माँ जैसी भरी-भरी, मोटी गांड वाली औरत को सिर्फ एक लंड से क्यों दूर रखना चाहते हो?” उसने पापा की छाती से पेट तक हाथ फेराते हुआ पूछा।

“यह तो आप जान लीजिये की, माँ बहुत अच्छी हैं कि जिंदगी भर सिर्फ आपके लंड से काम चला रही हैं। लेकिन कितनी घरेलू औरतें दूसरों के लंड चूसती और चुदवाती हैं, उनके पति को कुछ पता भी नहीं चलता।” लेखिका फनलवर है।

पिताजी ने नकार में सिर हिलाया,

“नहीं बेटी... प्रभा को दूसरे से चुदवाना मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। अगर किसी को पता चल गया तो परिवार की बदनामी हो जाएगी। लोग कहेंगे कि आलोक नामर्द है, अपनी बीवी को संतुष्ट नहीं कर पाता, इसलिए वो दूसरों से चुदवा रही है। मैं ये इज्जत नहीं गँवा सकता।”

सलोनी ने बहुत समझाया, लेकिन पिता अड़े रहे।

आखिर में पिताजी ने फैसला सुनाया,

“बेटी, तू रंडी भी बन जा, मैं मना नहीं करूँगा। जितने मर्द चाहे, जितनी बार चाहे, तेरी चूत, गांड और मुंह सब खुला रहेगा। लेकिन प्रभा... तेरी माँ सिर्फ मेरे लंड से ही संतुष्ट रहेगी।”

सलोनी को गुस्सा आ गया। उसे लगा कि मर्द कितने मतलबी और पजेसिव होते हैं।

वह तुरंत पिता की गोद से उठ खड़ी हुई। नंगी ही, चूत से वीर्य टपकाते हुए बोली, “तो फिर आप भी मुझे और अपनी बेटी की चुदाई को भूल जाइए। भूल जाइए कि आपने अपनी बेटी को नंगा देखा था, उसकी चूत चाटी थी, उसके बोबले चूसे थे और अपना मोटा लंड उसकी चूत में घुसाया था।”

वह रसोई की तरफ जाते हुए चिल्लाई, “फिर कभी मुझे छूने की कोशिश भी मत करना... बेटी-चोद साले! अपनी बेटी को तो चोदना और चुदवाना है, लेकिन बीवी को शेयर नहीं करना है? भोसड़ीके!”

सलोनी नंगी ही रसोई में चली गई और खाना बनाने लगी। उसका मन बहुत गुस्से भरा था। उसे घिन आ रही थी कि “मर्द दूसरों की चूत तो चोदते हैं, लेकिन अपनी औरत को किसी और का लंड लेते देखना बर्दाश्त नहीं कर पाते। ऐसा क्यों? सिर्फ मर्दों को चुदाई का आनंद मिलता है? हम औरतो को नहीं? क्या उनको ही नए नए माल चाहिए हम औरतो को ऐसी कोई इच्छा नहीं होनी चाहिए? क्या भड़वाखानी है यह? समाज चुटिया जैअसा है या फिर घर के मर्द अपनी प्रोपर्टी किसी और के साथ आनंद लेते सहन नहीं कर पाते? इतने कमजोर है यह मर्द? हम औरतो तो कभी भी उस्नको नहीं रोकती! क्या मैंने अपने बाप को रोका? क्या वह रुका? साले ने फटाक से अपना लंड मेरी चूत में धुसा दिया थातब उसको याद नहीं आ रहा था की वह किस को चोदे जा रहा है? भोसड़ीके है सभी मर्दों।“ वह उसका गुस्सा मन ही मन उतार रही थी।

उसने मन ही मन तय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह परम को अपनी माँ प्रभा को चोदने के लिए जरूर राजी करेगी।

लगभग 40-45 मिनट बाद उसे पीछे पैरों की आहट सुनाई दी। सलोनी ने मुड़कर नहीं देखा। उसे पता था की वही साला बेटी-चोद होगा।
फनलवर रचित कहानी।

अचानक पिताजी ने उसके पीछे से दोनों हाथ बाँहों के नीचे डालकर भारी-भारी चूचियों को जोर से दबा लिया। उनके मोटे लंड ने सलोनी के छोटे, गोल नितंबों को ठेला मारा। उसके कुलहो के बिच का छेद अपने लंड से ढूंढने की कोशिश कर रहे थे।

वे बेटी के कान में फुसफुसाए, “बेटी... तूने ठीक कहा है। जब मैं हर महीने नई-नई चूतों का मजा लेता हूँ... तब प्रभा भी क्यों न मस्ती मारे...उसका क्या कसूर और उसनका भी मन होता है नए-नए लंड से मजा लेना।”

सलोनी चुप रही, लेकिन उसके होंठों पर एक विजयी मुस्कान आ गई। उसने जानबूझकर अपना नितंब पीछे करके पिता के खड़े लंड पर रगड़ा।

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जुड़े रहिये दोस्तों....................


Funlover.
Great.
 
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