पुष्पा ने पति का अभी भी अंदर पड़ा लंड कसकर दबाया और रंडी वाली नजरों से देखते हुए बोली,
“अरे जाओ जी... तुम्हें नहीं चोदना है तो मत चोदो। लेकिन मुझे तो हर समय चूत में मोटा और लंबा लंड चाहिए। वो भी सिर्फ तुम्हारा। तुम चाहो या न चाहो... जब मैं बोलूँगी, तो मुझे चोदना ही पड़ेगा। हम बेटियों के साथ तो सो नहीं रहे हैं ना? मैं अपने पति से चुदवा रही हूँ, इसमें उन्हें क्या एतराज होना चाहिए? और देखिये जी अब हमारी बेटिया बड़ी हो चुकी है। उन्हें पता है सब, और नहीं भी पता होगा तो पता चल जाएगा, कोई और उन्हें सिखा देगा। नाहक में उनकी चिंता करके आप मेरा मूड भी ख़राब कर रहे है और मेरी चूत का भी। छेद तैयार है बस उन्हें आपको भरना है।”
पंडितजी ने समझाने की कोशिश की, “पुष्पा, अब तुम्हें कपड़े उतारना भी बंद कर देना चाहिए। पूरा समय पूजा-पाठ में बिताओ, ताकि मन और शरीर दोनों को ठंडक मिले। और बेटियों का तो क्या है वह अभी जवान हुई है, उनमे जवानी का नशा तो आएगा ही लेकिन समय पर सब हो तो अच्छा है। मैं जानता हूँ की हम उस समाज में है जहा चुदाई आम है और हमारा फर्ज भी है की हमें बेटा-बेटी को सिखाना भी पड़ता है। फिर भी समजा करो,,, रानी।” फनलवर की प्रस्तुति।
पुष्पा जोर से हँसी। उसने पति का लंड फिर से दबाते हुए साफ-साफ कहा,
“गांड आपकी,मुझे पूजा-पाठ नहीं करना है जी...अभी मेरी उमर ऐसी नहीं है और आपके माँ कब तक करती थी याद है न? वह भी पूजा-पाठ के साथ–साथ सब तो करती थी। मुझे तो आपने नहीं करने दिया, लेकिन आप से तो कर ही सकती हूँ और कोई मुझे रोक भी नहीं सकता। आखिर आपका लंड मेरी मालिकी है। और हाँ, मुझे तो बस हर समय हाथ और मुंह में लंड चाहिए... और रात को जमकर चुदाई चाहिए। मेरी चूत अब शांत नहीं बैठ सकती। मुंह में लंड का माल होना चाहिए। कौन देगा यह सब बताइये?”
पंडितजी ने सुझाव दिया, “ठीक है... मैं तुम्हारे लिए एक मजबूत, जवान नौकर ला दूँगा। दिन भर काम करेगा और रात को तुम्हारी शारीरिक जरूरतें पूरी करेगा। और किसी को कोई भनक नहीं आएगी। तुम बड़े आराम से चुदवाती रहना उस से।”
पुष्पा का चेहरा तुरंत बदल गया। वह तो परम को ही चाहती थी।
“और वो नौकर मेरी चुदाई के साथ-साथ तुम्हारी दोनों बेटियों को भी चोदने लगेगा तो क्या करोगे? वो तुम्हारी बीवी और बेटियों को चोदेगा तो तुम्हें शर्म नहीं आएगी? मुझे माँ भी बना सकता है, खेर मैं तो शादीशुदा हूँ बच्चा रहेगा तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता, पर आप सोचो पूनम या फिर पूमा की चूत भर दे और माल फलित हुआ तो?”
उसने पति की छाती पर थपकी मारते हुए कहा, “बस मुझे सिर्फ ये प्यारा लंड चाहिए... तैयार रहो। सिर्फ तुम्हारा लंड ही मेरी प्यास बुजाउंगी।”
पंडितजी चुप हो गए। उन्हें पता था कि कोई भी नौकर पुष्पा को चोदने के बाद पूनम और पूमा को भी नहीं छोड़ेगा। और चोदेगा भी, आखिर वह भी तो एक मर्द होगा। और मेरी बेटियों की चूत में माल गिरा भी सकता है। और तो और शायद हो सकता है मेरी जवान बेटियों भी उसके लंड से आकर्षित हो। और हो सकता है की बहार जाके किसी को बोल भी दे। बड़ा रिस्क था।
थोड़ी देर बाद उन्होंने पत्नी को खुश करने के लिए और विषय बदलने के इरादे से कहा,
“पुष्पा... तुझे गुरुजी याद हैं?” फनलवर की लिखावट।
“हाँ... करीब 20 साल हो गए, उन्हें देखा ही नहीं... कुछ खबर आई क्या?”
पंडितजी ने पत्नी की नंगी कमर पर हाथ फेरते हुए बताया, “खबर नहीं रानी... आज सुबह अचानक आश्रम से घर आ गए हैं। पहले से भी ज्यादा मजबूत और सुंदर लग रहे हैं। लोग कहते हैं 80 के ऊपर होंगे, लेकिन देखो तो क्या गठा हुआ शरीर है...”
पुष्पा की आँखों में एक पुरानी याद कौंध गई।
शादी के 7-8 दिन बाद गुरुजी उनके घर आए थे। पूरे परिवार के सामने उन्होंने पुष्पा को अपनी गोद में 30-40 मिनट तक बैठाए रखा था। लेकिन उस रिवाज की आड़ में गुरुजी ने उसके स्तनों के साथ बहुत खिलवाड़ किया था- उन्हें दबाया, सहलाया और निप्पलों को छेड़ा भी था।
पुष्पा अचानक अपने अतीत में खो गई। उसकी चूत फिर से गीली होने लगी थी।
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बस यही तक दोस्तों.
Funlover की तरफ से जय भारत।।