Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 173 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

पूनम के घर पर

खाने-पीने के बाद पूरा घर शांत हो गया। रात के 11:30 बज चुके थे।

“माँ आज तो काफी थक गए है।“ पूनम ने बगसा खाते हुए कहा।
फनलवर की पेशकश।

“हाँ बेटी, सच ही कह रही हो, आज्काफी थक गए है। अगर तुम्हे सोना है तो जाके सो जाओ।“ पुष्पा जल्द ही अपनी दोनों बेटियो को सुलाने पे तुली हुई थी। वैसे आम तौर पर सब बाते करते और घर का काम निपटाते पर आज पुष्पा कुछ अलग ही मूड में लग रही थी।

पूनम माँ के पास गई और बड़े आराम से पूछा; “क्या बात है माँ आज कुछ खास तो नाह है न?”

“खास बात? कौनसी खास बात अब इस उमर में खास बात क्या होगी बेटी?” उसने पूनम को घूरते हुए कहा।

“वैसे अब खास बाते तुम जैसी मस्त लडकियों के पास होती है बेटी, हम जैसी औरतो के पास नहीं।“ उसने अपनी आँखे नचाते हुए बोला।

लेकिन इन सब बातो में पूनम को कोई रूचि नहीं थी। वह बस सोना चाहती थी। उसकी काफी चुदाई हो चुकी थी। और वह अब ज्यादा कुछ भी सोचने के लिए तैयार नहीं थी। फिर भी उसको महक को कहे लास्ट शब्द याद आ गए। “मैं तेरे बाप से चुदती हूँ, समज सको तो अच्छा।“ वह थोडा मुस्कुराई और मन ही मन में बोली;

“माँ, अब तुम्हे क्या बताऊ? तुम्हे क्या पता मेरे अन्दर एक ऐसा लोडा गया है जिसने मुझे और मेरे सभी छेदों को जित लिया है।“

पूनम और पूमा हमेशा की तरह एक ही कमरे में एक बिस्तर पर सो गईं। पंडितजी दूसरे कमरे में अपनी पत्नी पुष्पा के साथ लेट गए।

पुष्पा ने जैसे ही दरवाजा बंद किया, वह शेरनी बन गई। उसने झटके से अपना सारा कपड़ा उतार फेंका। उसके भारी, ढीले पड़ चुके लेकिन अभी भी आकर्षक स्तन बाहर आ गए। वह पंडितजी के पास गई और उनके कपड़े भी जबरदस्ती उतारने लगी।

“आज छोड़ो पुष्पा... थक गया हूँ...” पंडितजी ने विरोध किया।

लेकिन पुष्पा ने एक नहीं सुनी। उसने पति का लंड पकड़कर जोर से दबाया और बोली,

“थक गए हो तो आराम से लेट जाओ... मैं ऊपर से चुद लूँगी। आज मैं आपको चोदूंगी। आप बस आराम कीजिये और मुझे आपके लंड को खाली करने दे। आज निचे बहोत बड़ी आग लगी हुई है।”
फनलवर रचित।

पुष्पा ने पंडितजी को लिटाया, उनके लंड को मुंह में लेकर अच्छे से चूसा, अब किसी मस्त औरत का मुंह लंड पर आये और उसकी गरम-गरम लार लंड पर हमला करे तो कौनसा लंड ढीला रहेगा? पंडितजी का लंड भी धीरे-धीरे अपनी औकात पर आने लगा। और थोड़ी देर पुष्पा ने मुख चोदन करके उनका लंड को खड़ा कर ही दिया। वह अपनी इस विजय पर मुस्कुराई और पंडितजी के सामने अपनी कामुक आँखे दाल के बोली;

“बडे आये आज तो छोड़ दो, लंड पर काबू तो रख नहीं पाते।देखा न मैंने कैसे उसे खड़ा कर दिया है अब उसे मेरी चूत में ही ढीला होना पड़ेगा। “ फिर खुद उनकी गोद में बैठकर एक झटके में पूरा लंड अपनी चिकनी चूत में उतार लिया।

“आह्ह्ह... finally... आज कितने दिनो बाद मेरी चूत ने लंड लिया है...” पुष्पा ने आँखें बंद करके कूल्हे हिलाने शुरू कर दिए।

उसने अपने दोनों कुलहो को फैलाया ताकि चूत में जगह बने, और उसकी गांड को थोडा उजागर किया। और वह जोर-जोर से उछल-उछलकर खुदकी चूत को चोद रही थी। उसके भारी बोबले ऊपर-नीचे आगे-पीछे उछल रहे थे।

लेकिन यह परम या मिनुम तो था नहीं, फिर भी थोडा समय पुष्पा ने पंडितजी को चोदा और पंडितजी के डिस्चार्ज हो गए। उनके लंड ने पुष्पा की चूतमें अपने माल की उलटी कर ही दी। पंडितजी के स्खलन होने के बाद पुष्पा अभी भी उनकी छाती पर बैठी थी।


पंडितजी ने हाँफते हुए कहा, “पुष्पा... देख रहा हूँ... कुछ दिनों से तुम बहुत गंदी हो गई हो। अब हमारी बेटियाँ बड़ी हो गई हैं। हमें अब चुदाई बंद कर देना चाहिए।”
निर्मात्री फनलवर।


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जुड़े रहिये..


Funlove.
 
पूनम के घर पर

खाने-पीने के बाद पूरा घर शांत हो गया। रात के 11:30 बज चुके थे।

“माँ आज तो काफी थक गए है।“ पूनम ने बगसा खाते हुए कहा।
फनलवर की पेशकश।

“हाँ बेटी, सच ही कह रही हो, आज्काफी थक गए है। अगर तुम्हे सोना है तो जाके सो जाओ।“ पुष्पा जल्द ही अपनी दोनों बेटियो को सुलाने पे तुली हुई थी। वैसे आम तौर पर सब बाते करते और घर का काम निपटाते पर आज पुष्पा कुछ अलग ही मूड में लग रही थी।

पूनम माँ के पास गई और बड़े आराम से पूछा; “क्या बात है माँ आज कुछ खास तो नाह है न?”

“खास बात? कौनसी खास बात अब इस उमर में खास बात क्या होगी बेटी?” उसने पूनम को घूरते हुए कहा।

“वैसे अब खास बाते तुम जैसी मस्त लडकियों के पास होती है बेटी, हम जैसी औरतो के पास नहीं।“ उसने अपनी आँखे नचाते हुए बोला।

लेकिन इन सब बातो में पूनम को कोई रूचि नहीं थी। वह बस सोना चाहती थी। उसकी काफी चुदाई हो चुकी थी। और वह अब ज्यादा कुछ भी सोचने के लिए तैयार नहीं थी। फिर भी उसको महक को कहे लास्ट शब्द याद आ गए। “मैं तेरे बाप से चुदती हूँ, समज सको तो अच्छा।“ वह थोडा मुस्कुराई और मन ही मन में बोली;

“माँ, अब तुम्हे क्या बताऊ? तुम्हे क्या पता मेरे अन्दर एक ऐसा लोडा गया है जिसने मुझे और मेरे सभी छेदों को जित लिया है।“

पूनम और पूमा हमेशा की तरह एक ही कमरे में एक बिस्तर पर सो गईं। पंडितजी दूसरे कमरे में अपनी पत्नी पुष्पा के साथ लेट गए।

पुष्पा ने जैसे ही दरवाजा बंद किया, वह शेरनी बन गई। उसने झटके से अपना सारा कपड़ा उतार फेंका। उसके भारी, ढीले पड़ चुके लेकिन अभी भी आकर्षक स्तन बाहर आ गए। वह पंडितजी के पास गई और उनके कपड़े भी जबरदस्ती उतारने लगी।

“आज छोड़ो पुष्पा... थक गया हूँ...” पंडितजी ने विरोध किया।

लेकिन पुष्पा ने एक नहीं सुनी। उसने पति का लंड पकड़कर जोर से दबाया और बोली,

“थक गए हो तो आराम से लेट जाओ... मैं ऊपर से चुद लूँगी। आज मैं आपको चोदूंगी। आप बस आराम कीजिये और मुझे आपके लंड को खाली करने दे। आज निचे बहोत बड़ी आग लगी हुई है।”
फनलवर रचित।

पुष्पा ने पंडितजी को लिटाया, उनके लंड को मुंह में लेकर अच्छे से चूसा, अब किसी मस्त औरत का मुंह लंड पर आये और उसकी गरम-गरम लार लंड पर हमला करे तो कौनसा लंड ढीला रहेगा? पंडितजी का लंड भी धीरे-धीरे अपनी औकात पर आने लगा। और थोड़ी देर पुष्पा ने मुख चोदन करके उनका लंड को खड़ा कर ही दिया। वह अपनी इस विजय पर मुस्कुराई और पंडितजी के सामने अपनी कामुक आँखे दाल के बोली;

“बडे आये आज तो छोड़ दो, लंड पर काबू तो रख नहीं पाते।देखा न मैंने कैसे उसे खड़ा कर दिया है अब उसे मेरी चूत में ही ढीला होना पड़ेगा। “ फिर खुद उनकी गोद में बैठकर एक झटके में पूरा लंड अपनी चिकनी चूत में उतार लिया।

“आह्ह्ह... finally... आज कितने दिनो बाद मेरी चूत ने लंड लिया है...” पुष्पा ने आँखें बंद करके कूल्हे हिलाने शुरू कर दिए।

उसने अपने दोनों कुलहो को फैलाया ताकि चूत में जगह बने, और उसकी गांड को थोडा उजागर किया। और वह जोर-जोर से उछल-उछलकर खुदकी चूत को चोद रही थी। उसके भारी बोबले ऊपर-नीचे आगे-पीछे उछल रहे थे।

लेकिन यह परम या मिनुम तो था नहीं, फिर भी थोडा समय पुष्पा ने पंडितजी को चोदा और पंडितजी के डिस्चार्ज हो गए। उनके लंड ने पुष्पा की चूतमें अपने माल की उलटी कर ही दी। पंडितजी के स्खलन होने के बाद पुष्पा अभी भी उनकी छाती पर बैठी थी।


पंडितजी ने हाँफते हुए कहा, “पुष्पा... देख रहा हूँ... कुछ दिनों से तुम बहुत गंदी हो गई हो। अब हमारी बेटियाँ बड़ी हो गई हैं। हमें अब चुदाई बंद कर देना चाहिए।”
निर्मात्री फनलवर।


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Funlove.
 
पुष्पा ने पति का अभी भी अंदर पड़ा लंड कसकर दबाया और रंडी वाली नजरों से देखते हुए बोली,

“अरे जाओ जी... तुम्हें नहीं चोदना है तो मत चोदो। लेकिन मुझे तो हर समय चूत में मोटा और लंबा लंड चाहिए। वो भी सिर्फ तुम्हारा। तुम चाहो या न चाहो... जब मैं बोलूँगी, तो मुझे चोदना ही पड़ेगा। हम बेटियों के साथ तो सो नहीं रहे हैं ना? मैं अपने पति से चुदवा रही हूँ, इसमें उन्हें क्या एतराज होना चाहिए? और देखिये जी अब हमारी बेटिया बड़ी हो चुकी है। उन्हें पता है सब, और नहीं भी पता होगा तो पता चल जाएगा, कोई और उन्हें सिखा देगा। नाहक में उनकी चिंता करके आप मेरा मूड भी ख़राब कर रहे है और मेरी चूत का भी। छेद तैयार है बस उन्हें आपको भरना है।”

पंडितजी ने समझाने की कोशिश की, “पुष्पा, अब तुम्हें कपड़े उतारना भी बंद कर देना चाहिए। पूरा समय पूजा-पाठ में बिताओ, ताकि मन और शरीर दोनों को ठंडक मिले। और बेटियों का तो क्या है वह अभी जवान हुई है, उनमे जवानी का नशा तो आएगा ही लेकिन समय पर सब हो तो अच्छा है। मैं जानता हूँ की हम उस समाज में है जहा चुदाई आम है और हमारा फर्ज भी है की हमें बेटा-बेटी को सिखाना भी पड़ता है। फिर भी समजा करो,,, रानी।” फनलवर की प्रस्तुति।

पुष्पा जोर से हँसी। उसने पति का लंड फिर से दबाते हुए साफ-साफ कहा,

“गांड आपकी,मुझे पूजा-पाठ नहीं करना है जी...अभी मेरी उमर ऐसी नहीं है और आपके माँ कब तक करती थी याद है न? वह भी पूजा-पाठ के साथ–साथ सब तो करती थी। मुझे तो आपने नहीं करने दिया, लेकिन आप से तो कर ही सकती हूँ और कोई मुझे रोक भी नहीं सकता। आखिर आपका लंड मेरी मालिकी है। और हाँ, मुझे तो बस हर समय हाथ और मुंह में लंड चाहिए... और रात को जमकर चुदाई चाहिए। मेरी चूत अब शांत नहीं बैठ सकती। मुंह में लंड का माल होना चाहिए। कौन देगा यह सब बताइये?”

पंडितजी ने सुझाव दिया, “ठीक है... मैं तुम्हारे लिए एक मजबूत, जवान नौकर ला दूँगा। दिन भर काम करेगा और रात को तुम्हारी शारीरिक जरूरतें पूरी करेगा। और किसी को कोई भनक नहीं आएगी। तुम बड़े आराम से चुदवाती रहना उस से।”

पुष्पा का चेहरा तुरंत बदल गया। वह तो परम को ही चाहती थी।

“और वो नौकर मेरी चुदाई के साथ-साथ तुम्हारी दोनों बेटियों को भी चोदने लगेगा तो क्या करोगे? वो तुम्हारी बीवी और बेटियों को चोदेगा तो तुम्हें शर्म नहीं आएगी? मुझे माँ भी बना सकता है, खेर मैं तो शादीशुदा हूँ बच्चा रहेगा तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता, पर आप सोचो पूनम या फिर पूमा की चूत भर दे और माल फलित हुआ तो?”

उसने पति की छाती पर थपकी मारते हुए कहा, “बस मुझे सिर्फ ये प्यारा लंड चाहिए... तैयार रहो। सिर्फ तुम्हारा लंड ही मेरी प्यास बुजाउंगी।”

पंडितजी चुप हो गए। उन्हें पता था कि कोई भी नौकर पुष्पा को चोदने के बाद पूनम और पूमा को भी नहीं छोड़ेगा। और चोदेगा भी, आखिर वह भी तो एक मर्द होगा। और मेरी बेटियों की चूत में माल गिरा भी सकता है। और तो और शायद हो सकता है मेरी जवान बेटियों भी उसके लंड से आकर्षित हो। और हो सकता है की बहार जाके किसी को बोल भी दे। बड़ा रिस्क था।

थोड़ी देर बाद उन्होंने पत्नी को खुश करने के लिए और विषय बदलने के इरादे से कहा,

“पुष्पा... तुझे गुरुजी याद हैं?” फनलवर की लिखावट।

“हाँ... करीब 20 साल हो गए, उन्हें देखा ही नहीं... कुछ खबर आई क्या?”

पंडितजी ने पत्नी की नंगी कमर पर हाथ फेरते हुए बताया, “खबर नहीं रानी... आज सुबह अचानक आश्रम से घर आ गए हैं। पहले से भी ज्यादा मजबूत और सुंदर लग रहे हैं। लोग कहते हैं 80 के ऊपर होंगे, लेकिन देखो तो क्या गठा हुआ शरीर है...”

पुष्पा की आँखों में एक पुरानी याद कौंध गई।

शादी के 7-8 दिन बाद गुरुजी उनके घर आए थे। पूरे परिवार के सामने उन्होंने पुष्पा को अपनी गोद में 30-40 मिनट तक बैठाए रखा था। लेकिन उस रिवाज की आड़ में गुरुजी ने उसके स्तनों के साथ बहुत खिलवाड़ किया था- उन्हें दबाया, सहलाया और निप्पलों को छेड़ा भी था।

पुष्पा अचानक अपने अतीत में खो गई। उसकी चूत फिर से गीली होने लगी थी।



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बस यही तक दोस्तों.


Funlover की तरफ से
जय भारत।।
 
चलो अच्छा लगा की आपकी जानकारी बढ़ि।

जी हां बात तो सच है कि पुरुषों से ज्यादा स्ट्रियो में सेक्स स्टैमिना ज्यादा होता है। लेकिन शर्म, डर, या फिर कुछ और पर बोलती बहुत कम है। और ज्यादा एक्टिव भी नहीं होती. बस जो होता है सही समझती है।

मुझे बहुत अच्छा लगा कि आपकी कहानी का पिछला हिस्सा याद है। जी हां वही पंडितजी हैं.

जी कोशिश करूंगी कि अपडेट्स जल्दी पोस्ट कर पाऊं।


लेकिन आप जानते हैं कि बहुत सी कहानियों को न्याय देना थोड़ा मुश्किल है।
शुक्रिया दोस्त.
 
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