Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 174 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

वे बेटी के कान में फुसफुसाए, “बेटी... तूने ठीक कहा है। जब मैं हर महीने नई-नई चूतों का मजा लेता हूँ... तब प्रभा भी क्यों न मस्ती मारे...उसका क्या कसूर और उसनका भी मन होता है नए-नए लंड से मजा लेना।”

सलोनी चुप रही, लेकिन उसके होंठों पर एक विजयी मुस्कान आ गई। उसने जानबूझकर अपना नितंब पीछे करके पिता के खड़े लंड पर रगड़ा।

यहाँ से आगे........................


पिताजी ने अपना मोटा लंड बेटी के गोल-गोल नितंबों के बीच की तिराद में धकेला और सुपारे को उसकी चूत की फाँक पर रगड़ते हुए कहा, “तेरी माँ को बोल देना कि अगर किसी से चुदना ही है तो ऐसे आदमी से चुदे जो हमारी बदनामी ना करे...मुझे बदनामी बिलकुल पसंद नहीं और नाही मेरी मर्दानगी पर कोई शक करना चाहिए। बाकी वह जिस से चुदवाना चाहती है चुदे, और नए लंड लेने के शोख पूरा करे।”

सलोनी ने बाएँ पैर को ऊपर उठाकर चूल्हे के किनारे पर रख दिया, अपनी चूत को पूरी तरह खोल दिया और कामुक आवाज में बोली, “ओह्ह्ह बाबूजी... इस माल की चूत अब हमेशा के लिए आपकी है। आपकी बेटी आज से आपकी personal चुदास बन गई है... अब आपको बाहर किसी रंडी के पीछे जाने की जरूरत नहीं। घर में ही आपकी जवान, टाइट और गीली रंडी तैयार खड़ी है... जब मन करे चोद लीजिए। और जिस से चुदवाना चाहे चुदवा दे। आपके कहने से मेरे ये तीनो छेद खुल जायेंगे, और वह भी बिना शर्त। लेकिन मैं चाहूंगी की मेरा भाव या फिर मेरी बोली भी लगे। दो पैसे मैं भी कमाना चाहूंगी। मुफ्त में माल बस सिर्फ आप ही चोदेंगे।”

सलोनी अभी भी खाना बना रही थी, लेकिन उसकी चूत अब पूरी तरह पसीने और वीर्य से भीगी हुई थी।
फनलव लिखित रचना।

पिताजी ने बेटी की कमर को कसकर पकड़ लिया, अपनी टाँगें फैलाईं और एक जोरदार धक्का मारकर पूरा लंड पीछे से बेटी की चूत में ठेल दिया।

“आआह्ह्ह... ओह्ह रानी... बहुत टाइट चूत है तेरी...!” पिताजी ने कराहते हुए कहा।

“हाँ बाबूजी... फाड़ दो अपनी बेटी की चूत को...!” सलोनी चीखी।

पिताजी तेज-तेज धक्के मारने लगे। हर धक्के के साथ सलोनी के गोल नितंब लहरा रहे थे और उसके भारी स्तन नीचे लटककर हिल रहे थे।

सलोनी ने हाँफते हुए पूछा, “बाबूजी... मेरे जैसी रंडी को कितना देते हैं चुदाई का...? मेरे माल का क्या भाव हो सकता है रंडी बाजार में?”

पिताजी ने बेटी की कमर पकड़कर और जोर से चोदते हुए कहा, “बेटी, तेरी जैसी जवान, टाइट और कमसिन चूत बहुत मुश्किल से मिलती है... कम से कम 5000 तो लोग आसानी से दे देंगे... कुछ तो 8000-10,000 तक भी देने को तैयार हो जाएंगे। माल को बेचने की भी एक टेक्निक होती है बेटी। किसकी कितनी गरज है उस पर रंडी अपा भाव बोलती है। वैसे माल भी तो बढ़िया रखना पड़ता है। कुछ ग्राहक क्लीन माल को पसंद करते है और ज्यादा पैसे भी देते है।”
रचयिता फनलव है।

सलोनी ने अपनी चूत को कसकर पिता के लंड पर दबाते हुए बोली, “जितना पैसा आपने बाहर रंडियों पर लुटाया है, उससे कहीं ज्यादा मुझे चुदवाकर वसूल कर लीजिए बाबूजी... अपनी बेटी को जितना मर्जी चुदवाइए और पैसा कमाइए...”

सलोनी ने अचानक पिता के लंड को चूत में ही रखते हुए अपना पैर नीचे किया, घूमकर पिता को बेडरूम की तरफ धकेलना शुरू कर दिया। बेडरूम पहुँचते ही उसने पिता को जोर से धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद ऊपर चढ़ गई।

उसने पिता का लंड अपनी चूत में फिर से घुसाया और जोर-जोर से कूल्हे हिलाकर चोदने लगी। लगभग 10 मिनट तक वह पिता को ऊपर बैठकर चुदाती रही। उसके बोबले हर दिशा में उछल-उछलकर पिताजी के चेहरे पर पड़ रहे थे।

फिर अचानक उसने लंड को चूत से बाहर निकाला और पिता के ऊपर 69 पोजीशन में लेट गई - बिल्कुल वैसी ही जैसी सुबह परम ने उसके साथ की थी और दोपहर में माँ प्रभा के साथ की थी।

अब सलोनी की भीगी, चुदाई हुई चूत सीधे पिता के मुँह पर थी। उसकी चूत की तेज़, गाढ़ी और कामुक गंध पिताजी के नथुनों में घुस रही थी।

सलोनी ने पिता के लंड को हाथ में पकड़ा, सहलाया और बोली, “बाबूजी... आप मेरी पहली शर्त भूल गए... हर बार चोदने से पहले और बाद में चूत चाटनी है...”

यह कहते हुए उसने पिता का लंड मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। उसने पहली बार पिता के लंड को गौर से देखा - परम के मुसल जैसे मोटे और लंबे लंड से यह छोटा था, सुपारा भी कम मोटा था। फिर भी वह उसे चूसती रही। वह थोड़ी निराश तो हुई। उसके मस्तिस्क में मुनीमजी का लंड की छाप उभर आई। मन ही मन मुस्कुराती हुई बोली,


“मुनीमजी आप हर जगह और हर वक़्त मेरे मन पर क्यों छाये रहते है?” फनलवर लिखित।

दूसरी तरफ पिताजी की जीभ अभी भी हिचकिचा रही थी। उन्होंने कभी अपनी पत्नी की चूत भी नहीं चाटी थी। लेकिन सलोनी ने अपनी चूत उनके मुँह पर जोर-जोर से रगड़नी शुरू कर दी।

आखिरकार पिताजी ने हार मान ली। उन्होंने बेटी की चूत के गुलाबी त्रिकोण को मुँह में ले लिया और चबाने लगे। गाढ़ा, नमकीन चुतरस उनकी जीभ पर फैल गया। पहले तो उन्हें अजीब लगा, लेकिन कुछ सेकंड बाद स्वाद और गंध उन्हें पसंद आने लगी।

वे जोर-जोर से चूत चाटने लगे - जीभ अंदर डालकर घुमाने लगे, क्लिटोरिस को चूसने लगे।

सलोनी मुंह में लंड लिए कराह रही थी, “हाँ बाबूजी... इसी तरह चाटो... अपनी बेटी की चूत को खाओ... आह्ह्ह...!”

पिताजी बेटी की चूत चाटते-चाटते मन ही मन फैसला कर चुके थे - आज रात वे अपनी पत्नी प्रभा की चूत भी इसी तरह चूसेंगे और खाएंगे। और प्रभा को भी मजबूर करेंगे कि वह सलोनी की तरह उनका लंड चाटे और चूसे।


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आज के लिए बस यही तक दोस्तों।

फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ और देखेंगे आगे आलोक और सलौनी प्रभा से क्या कर सकते है.....................


तब तक के लिए
Funlover की ओर से जय भारत।।

358.
Waah!
 
रात को सलोनी के घर पर।

रात को सलोनी के घर पर

रात का खाना खत्म होने के बाद पूरा घर शांत हो गया। सब अपने-अपने कमरे में चले गए। लेकिन पिताजी के मन में आज आग लगी हुई थी।

प्रभा के लाख मना करने के बावजूद पिताजी ने अपनी पत्नी को पलंग पर धकेल दिया और उसके सारे कपड़े एक-एक करके उतार दिए। प्रभा जब तक कुछ समझ पाती, तब तक वह पूरी तरह नंगी हो चुकी थी।

पिताजी ने प्रभा की टाँगें फैलाकर उसके बीच में मुँह रख दिया और बिना किसी हिचकिचाहट के उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया - ठीक वैसे ही जैसे सलोनी ने सिखाया था।

“आआह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ... क्या कर रहे हो तुम...?” प्रभा की आँखें फैल गईं। “ओह्ह माँ... आह्ह्ह... बहुत मजा आ रहा है... आपकी तबियत तो ठीक है ना?”

पिताजी ने जवाब नहीं दिया। उसने अपनी जीभ प्रभा की चूत के अंदर डालकर घुमानी शुरू कर दी, क्लिटोरिस को चूसने लगा और चूत का गाढ़ा रस चूस-चूसकर पीने लगा।

प्रभा कराह उठी, “सलोनी ने सिखाया क्या...? ओह्ह्ह... बेटी ने तुम्हें चूत चाटना भी सिखा दिया...?”

प्रभा को पूरा यकीन था कि जब वह और मुन्ना बाहर थे, तब सलोनी ने अपने पिता को पूरी सेक्स ट्रेनिंग दी होगी। उसे शक नहीं था कि पिताजी ने अपनी बेटी को जरूर चोदा होगा।

पिताजी ने चूत चाटते-चाटते 69 पोजीशन ले ली। प्रभा ने भी बिना कुछ कहे पति का लंड मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। वह पहली बार किसी की चूत चूस रहा था और प्रभा पहली बार पति का वीर्य पी रही थी।

पिताजी ज्यादा देर नहीं टिक सका। उसने प्रभा के मुंह में ही जोर से अपना लंड ठेला और गरम-गरम वीर्य की मोटी धार छोड़ दी।

“ग्लक... ग्लक...” प्रभा पहली बार पति का वीर्य निगल रही थी। कुछ उसके गले में चला गया, कुछ होंठों और चेहरे पर बह गया।

पिताजी ने सन्तुष्ट होकर कहा, “आह्ह्ह... देखो तो... तेरे इन गंदे होंठों पर मेरा वीर्य कितना प्यारा लग रहा है। स्वाद कैसा है रानी?”

प्रभा ने लंड को चूसते हुए ही आँखें ऊपर कीं और लंड की मुठ मारते हुए सीधा सवाल किया, “आज बहुत जल्दी झड़ गए... लगता है बेटी ने पूरा दम निकाल दिया है... बोलो, तुमने आज सलोनी को चोदा ना? बेटी चोद बन गए हो तुम!”

पिताजी ने कुछ पल चुप रहने के बाद मान लिया, “हाँ... मुझे माफ कर दो। सलोनी की मस्त बातें सुनकर मैं बहुत गर्म हो गया था। वो भी पूरी तरह गरम थी... मैं उसे चोद ही दिया। रानी... ऐसा लगा जैसे 18 साल पहले वाली प्रभा को चोद रहा हूँ। उसकी चूत बहुत टाइट और रसीली है।”
फनलवर की प्रस्तुति।

प्रभा को यह बात पसंद नहीं आई, लेकिन अब अनहोनी हो चुकी थी। उसने उदास स्वर में कहा, “ये तुमने बहुत बड़ा पाप किया... लेकिन बोलो, वो वर्जिन थी या उसकी चूत पहले ही फटी हुई थी?”

पिताजी ने झूठ बोलते हुए कहा, “नहीं रानी... बिल्कुल कुंवारी थी। उसका माल मैंने पूरी तरह तराशा। मुझे वो पक्का पैक माल लगी।”

प्रभा ने पति को धक्का देते हुए कहा, “मैं देखना चाहती हूँ... कि बाप अपनी बेटी के साथ सुहागरात कैसे मनाता है। जाओ... उस रंडी को बुलाकर ले आओ।”

पिताजी पत्नी के सामने बेटी को चोदना नहीं चाहता था, लेकिन प्रभा की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा। वह उठा और कुछ देर बाद सलोनी को गोद में उठाकर ले आया।

उसने बेटी को पत्नी के बगल में बिठाया और बिना एक शब्द बोले सलोनी के सारे कपड़े उतार दिए। अब माँ-बेटी दोनों नंगी बिस्तर पर लेटी थीं।

पिताजी ने सबसे पहले बेटी की चूत को खूब जोर से चाटा, फिर अपना लंड पूरी तरह खड़ा करके बेटी की टाँगें फैलाईं और उसके सामने ही अपनी बेटी को चोदना शुरू कर दिया।

“आह्ह्ह... बाबूजी... जोर से... अपनी बेटी की चूत फाड़ दो...!” सलोनी चीख रही थी।

पिताजी ने कुछ देर बेटी को जोर-जोर से चोदा, लेकिन अंदर वीर्य नहीं छोड़ा। उसने लंड बाहर निकाला और सीधा सलोनी के मुंह में ठूँस दिया।

सलोनी ने पिता के अंडकोष पकड़कर पूरा लंड गले तक ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।

“बाबूजी... मजा आया? इस चुदास को चोदने में?” सलोनी ने लंड चूसते हुए पूछा।
रचयिता फनलवर है।

पिताजी ने बेटी के बाल पकड़कर लंड और गहरा मुंह में ठेलते हुए कहा, “हाँ रानी... बहुत मजा आया... तू मेरी सबसे अच्छी रंडी है।”

प्रभा चुपचाप सब देख रही थी। उसकी चूत फिर से गीली हो चुकी थी।

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बने रहिये दोस्तों..................

FunLove.
Badhiya update.
 
पिताजी ने सलोनी को जोर-जोर से चोदने के बाद अपना लंड उसके मुंह से निकाला। सलोनी के होंठ पिता के वीर्य से चिपचिपे हो रहे थे।

प्रभा चुपचाप सब देख रही थी। उसकी चूत अब बुरी तरह भीग चुकी थी। सलोनी ने माँ की तरफ देखा, फिर शैतानी मुस्कान के साथ बोली, “माँ... आप चुप क्यों हो? डर रही हो क्या?”
रचयिता फनलवर है।

प्रभा ने कुछ नहीं कहा। सलोनी ने खुद को माँ के पास सरकाया, अपनी नंगी देह को माँ की नंगी देह से सटा दिया। दोनों की भारी-भारी चूचियाँ एक-दूसरे से दब गईं।

सलोनी ने माँ के गाल पर kiss किया और कान में फुसफुसाया, “माँ... आज सुबह तुमने मेरी चूत चाटी थी... अब मैं तुम्हारी चूत चाटना चाहती हूँ।”

प्रभा की साँसें तेज हो गईं। सलोनी ने माँ के होंठों को चूस लिया। दोनों माँ-बेटी गहरी, लार टपकाती हुई किस करने लगीं। उनकी जीभें एक-दूसरे के मुंह में घुस रही थीं।

सलोनी ने किस करते हुए माँ की एक चुची को जोर से दबाया और बोली, “माँ, तुम्हारी चूचियाँ आज भी इतनी भारी और नरम हैं... मुझे बहुत पसंद हैं।”

प्रभा ने हाँफते हुए कहा, “सलोनी... तू मेरी बेटी है... ये सब गलत है...”
फनलवर की प्रस्तुति।

सलोनी ने मुस्कुराते हुए माँ की दूसरी चुची का निप्पल मुँह में ले लिया, जोर-जोर से चूसते हुए बोली, “गलत तो तब था जब पापा ने मुझे चोदा... लेकिन तुमने खुद सुबह मेरी चूत में अपनी जीभ डाली थी। अब शर्म कैसी माँ?”

सलोनी ने माँ को लिटा दिया और उसकी टाँगें फैला दीं। प्रभा की चूत अब पूरी तरह खुली हुई थी - गीली, लाल और सूजी हुई।

सलोनी ने माँ की जाँघों के बीच मुँह रख दिया और पहले तो चूत की खुशबू सूँघी, फिर बोली, “माँ... तुम्हारी चूत की सुगंध आज बहुत तेज है... पापा ने चाटी होगी ना?”

प्रभा शर्म से कराह उठी, “आह्ह्ह... सलोनी... मत बोल ऐसी गंदी बातें...”

सलोनी ने जीभ निकालकर माँ की चूत की पूरी लंबाई चाट ली और बोली, “क्यों माँ? गंदी बातें करने में ही तो मजा है। देखो ना... तुम्हारी चूत कितनी गीली हो रही है।”

उसने माँ की चूत के होंठों को उँगलियों से अलग किया और अंदर गुलाबी मांस को देखते हुए कहा, “माँ, तुम्हारी चूत अभी भी बहुत सुंदर है... परम ने इसे आज सुबह फाड़ा था ना? कितना मोटा लंड था उसका?”

प्रभा ने शर्माते हुए सिर हिलाया।

सलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब मैं तुम्हें दिखाती हूँ कि लड़कियाँ एक-दूसरे को कैसे चोदती हैं...”

यह कहकर सलोनी ने माँ की चूत में अपनी जीभ पूरी तरह डाल दी और जोर-जोर से चाटने लगी। प्रभा की कमर उछलने लगी।

“आआह्ह्ह... सलोनी... बेटी... उफ्फ... क्या कर रही है तू... आह्ह्ह... बहुत अच्छा लग रहा है...”

सलोनी ने चूत चाटते हुए माँ की क्लिटोरिस को चूसना शुरू कर दिया और बीच-बीच में बोलती रही,

“माँ... बोलो ना... मेरी जीभ अच्छी लग रही है तुम्हारी चूत में? फनलवर लिखित।

मैं तुम्हारी बेटी हूँ फिर भी तुम्हारी चूत चूस रही हूँ... कैसा लग रहा है?”

प्रभा ने सलोनी के बाल पकड़कर उसका मुँह अपनी चूत पर और जोर से दबाते हुए कराहा,

“बहुत मजा आ रहा है बेटी... चूस... और जोर से चूस मेरी चूत को... आह्ह्ह... तू मेरी अच्छी रंडी है...”

सलोनी ने दो उँगलियाँ माँ की चूत में डालकर तेजी से हिलानी शुरू कर दीं और बोली, “माँ... अब तुम भी मेरी चूत चाटोगी ना? हम दोनों एक-दूसरे की चूत चाटेंगे... फिर पापा हमें दोनों को साथ में चोदेंगे...”

प्रभा उत्तेजना से काँप रही थी। उसने सलोनी को खींचकर अपनी तरफ किया और बोली, “आ जा... मेरी जान... आज तुझे भी चाटती हूँ...”

दोनों माँ-बेटी 69 पोजीशन में लेट गईं। सलोनी की चूत माँ के मुँह पर और प्रभा की चूत बेटी के मुँह पर।

दोनों एक-दूसरे की चूत जोर-जोर से चाटने लगीं। कमरे में चूत चाटने की चप-चप की आवाजें और उनकी कामुक कराहें गूँज रही थीं।

सलोनी ने माँ की चूत में उँगलियाँ डालते हुए कहा, “माँ... तुम्हारी चूत का स्वाद बहुत अच्छा है... मैं रोज तुम्हारी चूत चाटूँगी...”

प्रभा ने बेटी की चूत चूसते हुए जवाब दिया, “हाँ बेटी... तू भी मेरी चुदास है... हम दोनों अब साथ में चुदेंगी... पापा के लंड के साथ-साथ...”

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FunLove की तरफ से
जय भारत।।.
जय भारत!
 
रात को सलोनी के घर पर



रात के खाने के बाद तीनों कमरे में थे। प्रभा अचानक उठी, अलमारी खोली और एक मोटा बंडल निकाला। उसने गिनकर पाँच सौ के नोट पति को थमा दिए।

“इसे दे दो... इसे धंधे का बहोत शौक है न!” प्रभा ने सख्त लेकिन कामुक स्वर में आदेश दिया, “अब अगर तुम सिर्फ अपनी बेटी की चूत चोदोगे, तो हर बार चुदाई की कीमत देनी पड़ेगी। कम से कम दो हजार रुपये हर चुदाई का।”
लेखिका फनलवर है

पिताजी ने पैसे गिने और सलोनी की तरफ बढ़ा दिए। सलोनी ने बिना किसी शर्म या विरोध के पैसे ले लिए, उन्हें अपनी भारी चूचियों के बीच दबाते हुए मुस्कुराई और बोली,

“और आपके दोस्तों से मैं कम से कम पाँच हजार रुपये लूँगी हर चुदाई का। अगर माँ को भी आप अपने दोस्तों या बॉस से चुदवाएंगे, तो उन्हें भी कम से कम तीन हजार रुपये दिलवाने पड़ेंगे।”

प्रभा बिच में बोली; " लेकिन बेटी एक बात समज लो धंधा करना इतना आसन नहीं है। वहा खद की नहीं पर ग्राहक की मनमानी चलती है। जो पैसा फेंकता है उसे तमाशा भी देना पड़ता है। यह तो बाप है लेकिन हर कोई तुम्हारा बाप नहीं होता। अच्छा है अपनी मर्जी से चुदवा लो और सामने से पैसे मिलते है तो इकठ्ठा कर लो।"

सलोनी ने पिता की तरफ देखकर शरारत से पूछा, “बाबूजी, अब आप माँ को क्या बताना चाहते हैं?”

पिताजी ने गहरी साँस ली और प्रभा की तरफ देखा।
फनलवर की प्रस्तुति

“प्रभा... अब से तुम अपनी मर्जी से किसी भी मर्द के साथ सेक्स कर सकती हो। मेरे दोस्तों के साथ, मेरे बॉस के साथ... जो भी तुम्हें पसंद आए। बस इतना ध्यान रखना कि वो हमारे परिवार की बदनामी न करे।”

प्रभा की आँखें चमक उठीं। वह बहुत खुश हुई। मन ही मन सोचने लगी - “कल ही परम को बुलाकर पूरा दिन अपनी चूत और गांड मरवाऊँगी।” उसने सलौनी का दिसल से शुक्रिया अदा किया।

लेकिन उसने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराकर दूसरी तरफ मुड़ गई।

सलोनी तुरंत पापा से लिपट गई, अपनी नंगी देह को उनके शरीर से चिपकाते हुए। फिर वह माँ के पास लेट गई।

पिताजी ने दोनों को देखते हुए कहा, “बेटी, अब तुम और माँ - जब मुन्ना घर पर न हो, तब तक घर में कपड़े पहनने की कोई जरूरत नहीं है। दोनों पूरी तरह नंगी रहोगी।”

प्रभा और सलोनी दोनों खुश हो गईं।
फनलवर की रचना

प्रभा पीछे मुड़ी हुई थी। सलोनी ने उठकर माँ के कपड़े उठाए और बोली, “माँ, सुनाई नहीं दी? अब घर में हमें कपड़ों की जरूरत नहीं है।”

प्रभा मुस्कुराई, उठी और बाकी बचे कपड़े भी उतारकर फेंक दिए। अब तीनों पूरी तरह नंगे थे।

पिताजी ने प्रभा को देखते हुए कहा, “प्रभा... अपनी बेटी का रस नहीं चखोगी?”

प्रभा ने शर्माते हुए लेकिन मुस्कुराते हुए कहा, “अभी तो मूड नहीं है राजा... वैसे भी अब सलोनी कहाँ जाने वाली है। जब मन करेगा, हम माँ-बेटी एक-दूसरे की चूत खाली कर देंगे।”

पिताजी ने प्रभा के पास आकर उसके नंगे बदन को सहलाते हुए कहा, “हाँ प्रभा, मुझे तुमसे माफी माँगनी चाहिए। अब तक मैंने तुम्हारी चूत को पूरी आजादी नहीं दी। मुझे माफ कर दो।”

प्रभा ने पति का लंड पकड़कर सहलाया और बोली, “चलो, जब देर से ही सही, लेकिन सवेरा तो हो ही गया।”

फिर वह सलोनी की तरफ मुड़ी और बोली, “बेटी, तुम्हारी वजह से आज मेरी चूत को आजादी मिल गई है। अब मुझे पति की चिंता नहीं रहेगी। मैं बेझिझक मनमोहक लंडों से खेलूँगी और अपनी चूत का भोसड़ा बनवाती रहूँगी। क्यों जी... सही है ना?”

पिताजी ने जवाब दिया, “हाँ प्रभा, अब तुम अपनी गांड और चूत मनचाहे लंड से चुदवा सकती हो। अगर भरोसेमंद आदमी हो तो मेरे सामने भी चुदवा सकती हो। सलोनी का मजा मैं लेता रहूँगा। आज से सलोनी का माल मेरा है, मैं ही चोदूँगा और मैं ही चुदवाऊँगा। काफी पैसा इकट्ठा कर लेंगे। तुम्हारा माल भी बेचेंगे।”

तीनों इस तरह गंदी-गंदी बातें करते रहे, चुदाई के प्लान, पैसे, दोस्तों के लंड, बॉस की चुदाई... सब कुछ।

धीरे-धीरे तीनों थककर सो गए।
निर्मात्री फनलवर

लेकिन कोई और के कान भी उनकी सारी बातें सुन रहा था...

मुन्ना!

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जुड़े रहिये।


क्रमश:


FunLove.
बहुत सुन्दर.
 
यहाँ सलौनी की चुदाई हो रही थी और प्रभा की चूत से रस छुट रहा था, परम से काल्पनिक चुदाई में। उधर सेठजी के घर पर......

नृत्य और संगीत का कार्यक्रम खत्म होने के बाद बड़ी बहू ने सबको खाने-पीने का सामान बाँट दिया। पूनम और सुंदरी के परिवार समेत सभी लोग रात का खाना खाने बैठे। रात के 11 बज चुके थे। फनलवर की प्रस्तुति

खाने की मेज पर छोटे भाई को पूनम के पास बैठने का मौका मिल गया। वह बार-बार पूनम की भरी-भरी चूचियों और उसके गले में लटकती मंगलसूत्र की तरफ देख रहा था। पूनम ने भी उसे मीठी-मीठी बातें कीं, मुस्कुराकर जवाब दिए, हालाँकि उसे अच्छी तरह याद था कि सुंदरी ने सुबह क्या चेतावनी दी थी;

“छोटे भाई से ज्यादा रिश्ता मत बढ़ाना।”

छोटे भाई ने पूनम को कोलकाता अपने घर बुलाया। पूनम ने शरमाते हुए मुस्कुराकर सिर हिला दिया और आमंत्रण का सहर्ष स्वीकार किया।

सेठाजी मेज के दूसरे छोर पर बैठे सब कुछ देख रहे थे। उनकी नजरें पूनम की जवान देह पर घूम रही थीं। उन्हें याद आ गया कि दोपहर में पूनम ने उनसे कहा था;

“आपका छोटा बेटा मुझसे शादी करना चाहता है।”
संपादिका मैत्री

सेठाजी की नजरें फिर रेखा और दूसरी औरतों के पास बैठी छोटी बहू पर पड़ीं। उनकी और छोटी बहू की नजरें मिलीं। सेठजी मुस्कुरा दिए। उनकी मुस्कान में छुपी हुई कामुकता साफ झलक रही थी।

सेठजी मन ही मन परम को धन्यवाद दे रहे थे; “इस हरामी की वजह से मुझे छोटी बहू और सुंदरी की नियमित चुदाई मिल रही है। अब ये पूनम को भी मेरे पास ले आया है। रेखा और सेठानी के मुकाबले सौदे में सफल हूँ।”

सुंदरी खाना सर्व कर रही थी। साड़ी का पल्लू उसके भारी, दूध जैसे स्तनों पर ढीला पड़ा हुआ था। हर बार झुकते ही उसके गहरे ब्लाउज से स्तनों की गहराई और काले निप्पल्स की हल्की झलक दिख रही थी।

सुंदरी को महसूस हो रहा था कि चार जोड़ी आँखें उसे घूर रही थीं। सेठजी के दोनों बेटों के अलावा, सेठजी के भाई भी उसकी कमर, नितंब और स्तनों को अपनी नजरों से चोद रहे थे। लेकिन उसे परवाह नहीं थी। बल्कि लोगो की नजरो से चुदवाना उसे अच्छा भी लग रहा था।

सेठानी ने दोपहर में ही सुंदरी का इन सबसे परिचय कराया था। वे सेठजी के छोटे भाई थे- अलग-अलग शहरों में अच्छा-खासा कारोबार करते थे। अपनी बीवियों और बच्चों के साथ आज ही आए थे। उनकी नजरें सुंदरी की गोरी, चिकनी त्वचा और भरे-भरे बदन पर बार-बार अटक रही थीं। मन ही मन सोच रहा था की ऐसी अप्सरा मेरे लंड के निचे आये तो लंड का मान बढेगा।

रात का खाना खत्म होने के बाद छोटी बहू ने सेठजी से कहा कि महक और पूनम को कार से उनके घर छोड़ने का इंतजाम कर दें।

पिछली रातों की तरह परम और सुंदरी सेठजी के घर पर ही रुक गए। बाकी लोग अपने-अपने घर चले गए।

पूनम और उसके परिवार को छोड़ने के बाद महक कार में बैठी। उसने देखा कि पिता मुनीम के अलावा आगे की सीट पर एक और आदमी बैठा है। उम्र करीब 20-22 साल रही होगी। लंबा, गोरा और तगड़ा शरीर। महक सोचने लगी;

“ये कौन है? आज रात ये भी हमारे घर पर ही रहेगा क्या?”
फनलवर की रचना

आज रात भी महक ने पूनम को अपने साथ रुकने की कोशिश की, लेकिन पूनम ने मना कर दिया। आज उसकी जानदार चुदाई हुई थी।

“अगर मैं रोज रात को तुम्हारे घर रुकने लगी, और वो भी तब जब काकी (सुंदरी) घर पर नहीं होतीं, तो पंडितजी को शक हो जाएगा। वे सोचेंगे कि मैं मुनीमजी से चुदवा रही हूँ। और बेकार का बख्दा खड़ा हो जायेगा और नुकशान मुझे झलना पद सकता है। फिर कभी तेरे पापा का लंड मेरी चूत में नहीं जाएगा और यह मेरे लिए सब से बड़ा नुकशान साबित हो सकता है। और मैं यह नुकशान किसी भी हालत में सहन नहीं कर पाउंगी। मेरे तन को तो सब चोदेंगे लेकिन मैं सिर्फ तेरे पापा से चुदती हूँ समज में आये तो अच्छा है।”

महक ने निराश होकर सिर हिला दिया, लेकिन उसकी नजरें बार-बार आगे बैठे उस अनजान युवक की चौड़ी पीठ और मजबूत कंधों पर जा रही थीं।
फनलवर लिखित

कार अंधेरी सड़क पर चल रही थी और महक के मन में नई-नई कामुक कल्पनाएँ घुमड़ रही थीं...

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आज के लिए बस यही तक दोस्तों



Funlove की तरफ से जय भारत।।

361.
बहुत खूब.
 
पूनम के घर पर

खाने-पीने के बाद पूरा घर शांत हो गया। रात के 11:30 बज चुके थे।

“माँ आज तो काफी थक गए है।“ पूनम ने बगसा खाते हुए कहा।
फनलवर की पेशकश।

“हाँ बेटी, सच ही कह रही हो, आज्काफी थक गए है। अगर तुम्हे सोना है तो जाके सो जाओ।“ पुष्पा जल्द ही अपनी दोनों बेटियो को सुलाने पे तुली हुई थी। वैसे आम तौर पर सब बाते करते और घर का काम निपटाते पर आज पुष्पा कुछ अलग ही मूड में लग रही थी।

पूनम माँ के पास गई और बड़े आराम से पूछा; “क्या बात है माँ आज कुछ खास तो नाह है न?”

“खास बात? कौनसी खास बात अब इस उमर में खास बात क्या होगी बेटी?” उसने पूनम को घूरते हुए कहा।

“वैसे अब खास बाते तुम जैसी मस्त लडकियों के पास होती है बेटी, हम जैसी औरतो के पास नहीं।“ उसने अपनी आँखे नचाते हुए बोला।

लेकिन इन सब बातो में पूनम को कोई रूचि नहीं थी। वह बस सोना चाहती थी। उसकी काफी चुदाई हो चुकी थी। और वह अब ज्यादा कुछ भी सोचने के लिए तैयार नहीं थी। फिर भी उसको महक को कहे लास्ट शब्द याद आ गए। “मैं तेरे बाप से चुदती हूँ, समज सको तो अच्छा।“ वह थोडा मुस्कुराई और मन ही मन में बोली;

“माँ, अब तुम्हे क्या बताऊ? तुम्हे क्या पता मेरे अन्दर एक ऐसा लोडा गया है जिसने मुझे और मेरे सभी छेदों को जित लिया है।“

पूनम और पूमा हमेशा की तरह एक ही कमरे में एक बिस्तर पर सो गईं। पंडितजी दूसरे कमरे में अपनी पत्नी पुष्पा के साथ लेट गए।

पुष्पा ने जैसे ही दरवाजा बंद किया, वह शेरनी बन गई। उसने झटके से अपना सारा कपड़ा उतार फेंका। उसके भारी, ढीले पड़ चुके लेकिन अभी भी आकर्षक स्तन बाहर आ गए। वह पंडितजी के पास गई और उनके कपड़े भी जबरदस्ती उतारने लगी।

“आज छोड़ो पुष्पा... थक गया हूँ...” पंडितजी ने विरोध किया।

लेकिन पुष्पा ने एक नहीं सुनी। उसने पति का लंड पकड़कर जोर से दबाया और बोली,

“थक गए हो तो आराम से लेट जाओ... मैं ऊपर से चुद लूँगी। आज मैं आपको चोदूंगी। आप बस आराम कीजिये और मुझे आपके लंड को खाली करने दे। आज निचे बहोत बड़ी आग लगी हुई है।”
फनलवर रचित।

पुष्पा ने पंडितजी को लिटाया, उनके लंड को मुंह में लेकर अच्छे से चूसा, अब किसी मस्त औरत का मुंह लंड पर आये और उसकी गरम-गरम लार लंड पर हमला करे तो कौनसा लंड ढीला रहेगा? पंडितजी का लंड भी धीरे-धीरे अपनी औकात पर आने लगा। और थोड़ी देर पुष्पा ने मुख चोदन करके उनका लंड को खड़ा कर ही दिया। वह अपनी इस विजय पर मुस्कुराई और पंडितजी के सामने अपनी कामुक आँखे दाल के बोली;

“बडे आये आज तो छोड़ दो, लंड पर काबू तो रख नहीं पाते।देखा न मैंने कैसे उसे खड़ा कर दिया है अब उसे मेरी चूत में ही ढीला होना पड़ेगा। “ फिर खुद उनकी गोद में बैठकर एक झटके में पूरा लंड अपनी चिकनी चूत में उतार लिया।

“आह्ह्ह... finally... आज कितने दिनो बाद मेरी चूत ने लंड लिया है...” पुष्पा ने आँखें बंद करके कूल्हे हिलाने शुरू कर दिए।

उसने अपने दोनों कुलहो को फैलाया ताकि चूत में जगह बने, और उसकी गांड को थोडा उजागर किया। और वह जोर-जोर से उछल-उछलकर खुदकी चूत को चोद रही थी। उसके भारी बोबले ऊपर-नीचे आगे-पीछे उछल रहे थे।

लेकिन यह परम या मिनुम तो था नहीं, फिर भी थोडा समय पुष्पा ने पंडितजी को चोदा और पंडितजी के डिस्चार्ज हो गए। उनके लंड ने पुष्पा की चूतमें अपने माल की उलटी कर ही दी। पंडितजी के स्खलन होने के बाद पुष्पा अभी भी उनकी छाती पर बैठी थी।


पंडितजी ने हाँफते हुए कहा, “पुष्पा... देख रहा हूँ... कुछ दिनों से तुम बहुत गंदी हो गई हो। अब हमारी बेटियाँ बड़ी हो गई हैं। हमें अब चुदाई बंद कर देना चाहिए।”
निर्मात्री फनलवर।


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जुड़े रहिये..


Funlove.
शानदार अपडेट.
 
पूनम के घर पर

खाने-पीने के बाद पूरा घर शांत हो गया। रात के 11:30 बज चुके थे।

“माँ आज तो काफी थक गए है।“ पूनम ने बगसा खाते हुए कहा।
फनलवर की पेशकश।

“हाँ बेटी, सच ही कह रही हो, आज्काफी थक गए है। अगर तुम्हे सोना है तो जाके सो जाओ।“ पुष्पा जल्द ही अपनी दोनों बेटियो को सुलाने पे तुली हुई थी। वैसे आम तौर पर सब बाते करते और घर का काम निपटाते पर आज पुष्पा कुछ अलग ही मूड में लग रही थी।

पूनम माँ के पास गई और बड़े आराम से पूछा; “क्या बात है माँ आज कुछ खास तो नाह है न?”

“खास बात? कौनसी खास बात अब इस उमर में खास बात क्या होगी बेटी?” उसने पूनम को घूरते हुए कहा।

“वैसे अब खास बाते तुम जैसी मस्त लडकियों के पास होती है बेटी, हम जैसी औरतो के पास नहीं।“ उसने अपनी आँखे नचाते हुए बोला।

लेकिन इन सब बातो में पूनम को कोई रूचि नहीं थी। वह बस सोना चाहती थी। उसकी काफी चुदाई हो चुकी थी। और वह अब ज्यादा कुछ भी सोचने के लिए तैयार नहीं थी। फिर भी उसको महक को कहे लास्ट शब्द याद आ गए। “मैं तेरे बाप से चुदती हूँ, समज सको तो अच्छा।“ वह थोडा मुस्कुराई और मन ही मन में बोली;

“माँ, अब तुम्हे क्या बताऊ? तुम्हे क्या पता मेरे अन्दर एक ऐसा लोडा गया है जिसने मुझे और मेरे सभी छेदों को जित लिया है।“

पूनम और पूमा हमेशा की तरह एक ही कमरे में एक बिस्तर पर सो गईं। पंडितजी दूसरे कमरे में अपनी पत्नी पुष्पा के साथ लेट गए।

पुष्पा ने जैसे ही दरवाजा बंद किया, वह शेरनी बन गई। उसने झटके से अपना सारा कपड़ा उतार फेंका। उसके भारी, ढीले पड़ चुके लेकिन अभी भी आकर्षक स्तन बाहर आ गए। वह पंडितजी के पास गई और उनके कपड़े भी जबरदस्ती उतारने लगी।

“आज छोड़ो पुष्पा... थक गया हूँ...” पंडितजी ने विरोध किया।

लेकिन पुष्पा ने एक नहीं सुनी। उसने पति का लंड पकड़कर जोर से दबाया और बोली,

“थक गए हो तो आराम से लेट जाओ... मैं ऊपर से चुद लूँगी। आज मैं आपको चोदूंगी। आप बस आराम कीजिये और मुझे आपके लंड को खाली करने दे। आज निचे बहोत बड़ी आग लगी हुई है।”
फनलवर रचित।

पुष्पा ने पंडितजी को लिटाया, उनके लंड को मुंह में लेकर अच्छे से चूसा, अब किसी मस्त औरत का मुंह लंड पर आये और उसकी गरम-गरम लार लंड पर हमला करे तो कौनसा लंड ढीला रहेगा? पंडितजी का लंड भी धीरे-धीरे अपनी औकात पर आने लगा। और थोड़ी देर पुष्पा ने मुख चोदन करके उनका लंड को खड़ा कर ही दिया। वह अपनी इस विजय पर मुस्कुराई और पंडितजी के सामने अपनी कामुक आँखे दाल के बोली;

“बडे आये आज तो छोड़ दो, लंड पर काबू तो रख नहीं पाते।देखा न मैंने कैसे उसे खड़ा कर दिया है अब उसे मेरी चूत में ही ढीला होना पड़ेगा। “ फिर खुद उनकी गोद में बैठकर एक झटके में पूरा लंड अपनी चिकनी चूत में उतार लिया।

“आह्ह्ह... finally... आज कितने दिनो बाद मेरी चूत ने लंड लिया है...” पुष्पा ने आँखें बंद करके कूल्हे हिलाने शुरू कर दिए।

उसने अपने दोनों कुलहो को फैलाया ताकि चूत में जगह बने, और उसकी गांड को थोडा उजागर किया। और वह जोर-जोर से उछल-उछलकर खुदकी चूत को चोद रही थी। उसके भारी बोबले ऊपर-नीचे आगे-पीछे उछल रहे थे।

लेकिन यह परम या मिनुम तो था नहीं, फिर भी थोडा समय पुष्पा ने पंडितजी को चोदा और पंडितजी के डिस्चार्ज हो गए। उनके लंड ने पुष्पा की चूतमें अपने माल की उलटी कर ही दी। पंडितजी के स्खलन होने के बाद पुष्पा अभी भी उनकी छाती पर बैठी थी।


पंडितजी ने हाँफते हुए कहा, “पुष्पा... देख रहा हूँ... कुछ दिनों से तुम बहुत गंदी हो गई हो। अब हमारी बेटियाँ बड़ी हो गई हैं। हमें अब चुदाई बंद कर देना चाहिए।”
निर्मात्री फनलवर।


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बेचारे पंडित जी.
 
पुष्पा ने पति का अभी भी अंदर पड़ा लंड कसकर दबाया और रंडी वाली नजरों से देखते हुए बोली,

“अरे जाओ जी... तुम्हें नहीं चोदना है तो मत चोदो। लेकिन मुझे तो हर समय चूत में मोटा और लंबा लंड चाहिए। वो भी सिर्फ तुम्हारा। तुम चाहो या न चाहो... जब मैं बोलूँगी, तो मुझे चोदना ही पड़ेगा। हम बेटियों के साथ तो सो नहीं रहे हैं ना? मैं अपने पति से चुदवा रही हूँ, इसमें उन्हें क्या एतराज होना चाहिए? और देखिये जी अब हमारी बेटिया बड़ी हो चुकी है। उन्हें पता है सब, और नहीं भी पता होगा तो पता चल जाएगा, कोई और उन्हें सिखा देगा। नाहक में उनकी चिंता करके आप मेरा मूड भी ख़राब कर रहे है और मेरी चूत का भी। छेद तैयार है बस उन्हें आपको भरना है।”

पंडितजी ने समझाने की कोशिश की, “पुष्पा, अब तुम्हें कपड़े उतारना भी बंद कर देना चाहिए। पूरा समय पूजा-पाठ में बिताओ, ताकि मन और शरीर दोनों को ठंडक मिले। और बेटियों का तो क्या है वह अभी जवान हुई है, उनमे जवानी का नशा तो आएगा ही लेकिन समय पर सब हो तो अच्छा है। मैं जानता हूँ की हम उस समाज में है जहा चुदाई आम है और हमारा फर्ज भी है की हमें बेटा-बेटी को सिखाना भी पड़ता है। फिर भी समजा करो,,, रानी।” फनलवर की प्रस्तुति।

पुष्पा जोर से हँसी। उसने पति का लंड फिर से दबाते हुए साफ-साफ कहा,

“गांड आपकी,मुझे पूजा-पाठ नहीं करना है जी...अभी मेरी उमर ऐसी नहीं है और आपके माँ कब तक करती थी याद है न? वह भी पूजा-पाठ के साथ–साथ सब तो करती थी। मुझे तो आपने नहीं करने दिया, लेकिन आप से तो कर ही सकती हूँ और कोई मुझे रोक भी नहीं सकता। आखिर आपका लंड मेरी मालिकी है। और हाँ, मुझे तो बस हर समय हाथ और मुंह में लंड चाहिए... और रात को जमकर चुदाई चाहिए। मेरी चूत अब शांत नहीं बैठ सकती। मुंह में लंड का माल होना चाहिए। कौन देगा यह सब बताइये?”

पंडितजी ने सुझाव दिया, “ठीक है... मैं तुम्हारे लिए एक मजबूत, जवान नौकर ला दूँगा। दिन भर काम करेगा और रात को तुम्हारी शारीरिक जरूरतें पूरी करेगा। और किसी को कोई भनक नहीं आएगी। तुम बड़े आराम से चुदवाती रहना उस से।”

पुष्पा का चेहरा तुरंत बदल गया। वह तो परम को ही चाहती थी।

“और वो नौकर मेरी चुदाई के साथ-साथ तुम्हारी दोनों बेटियों को भी चोदने लगेगा तो क्या करोगे? वो तुम्हारी बीवी और बेटियों को चोदेगा तो तुम्हें शर्म नहीं आएगी? मुझे माँ भी बना सकता है, खेर मैं तो शादीशुदा हूँ बच्चा रहेगा तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता, पर आप सोचो पूनम या फिर पूमा की चूत भर दे और माल फलित हुआ तो?”

उसने पति की छाती पर थपकी मारते हुए कहा, “बस मुझे सिर्फ ये प्यारा लंड चाहिए... तैयार रहो। सिर्फ तुम्हारा लंड ही मेरी प्यास बुजाउंगी।”

पंडितजी चुप हो गए। उन्हें पता था कि कोई भी नौकर पुष्पा को चोदने के बाद पूनम और पूमा को भी नहीं छोड़ेगा। और चोदेगा भी, आखिर वह भी तो एक मर्द होगा। और मेरी बेटियों की चूत में माल गिरा भी सकता है। और तो और शायद हो सकता है मेरी जवान बेटियों भी उसके लंड से आकर्षित हो। और हो सकता है की बहार जाके किसी को बोल भी दे। बड़ा रिस्क था।

थोड़ी देर बाद उन्होंने पत्नी को खुश करने के लिए और विषय बदलने के इरादे से कहा,

“पुष्पा... तुझे गुरुजी याद हैं?” फनलवर की लिखावट।

“हाँ... करीब 20 साल हो गए, उन्हें देखा ही नहीं... कुछ खबर आई क्या?”

पंडितजी ने पत्नी की नंगी कमर पर हाथ फेरते हुए बताया, “खबर नहीं रानी... आज सुबह अचानक आश्रम से घर आ गए हैं। पहले से भी ज्यादा मजबूत और सुंदर लग रहे हैं। लोग कहते हैं 80 के ऊपर होंगे, लेकिन देखो तो क्या गठा हुआ शरीर है...”

पुष्पा की आँखों में एक पुरानी याद कौंध गई।

शादी के 7-8 दिन बाद गुरुजी उनके घर आए थे। पूरे परिवार के सामने उन्होंने पुष्पा को अपनी गोद में 30-40 मिनट तक बैठाए रखा था। लेकिन उस रिवाज की आड़ में गुरुजी ने उसके स्तनों के साथ बहुत खिलवाड़ किया था- उन्हें दबाया, सहलाया और निप्पलों को छेड़ा भी था।

पुष्पा अचानक अपने अतीत में खो गई। उसकी चूत फिर से गीली होने लगी थी।



******************************************.
बस यही तक दोस्तों.


Funlover की तरफ से
जय भारत।।
आगे बढिए. जय भारत.
 
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