Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

hotaks

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नमस्कार दोस्तों.

मैं एक इन्सेस्ट कहानी शुरू करना चाहती हूँ. चूँकि मैं कोई प्रोफेशनल राइटर नहीं हूँ इसलिए मैं ये उम्मीद करती हूँ की आप सभी बड़े बुजुर्ग लोग मुझे पूरा सहयोग देंगे और जहाँ मुझे कुछ कठिनाई होगी वहां मेरा मार्गदर्शन भी करेंगे.

कहानी का फर्स्ट अपडेट बहुत जल्द hi अपलोड कर दूंगी.
 
अपडेट- 1

मेरा नाम अभिषेक है. लोग प्यार से मुझे अभी कहते हैं. मेरी उम्र 25 वर्ष है मैं रोज़ाना जिम करता हूँ. जिसके कारन मेरा शरीर गठीला हो गया है. मैं दिखने में ठीक थक हूँ. मेरी हिघ्त 5 फ़ीट 7 इंच है. मेरे लुंड का साइज 7” लम्बा और 2.5” मोटा है. यही कारन है की जो लड़की एक बार मेरे निचे आ जाती है वह बार बार आना चाहती है.

मुझे डर्टी सेक्स बहुत पसंद है. मसलन चुदाई करते वक्त गन्दी गन्दी बाटे करना. गन्दी गन्दी गालिया देना. रैंड रखैल कुटिया जैसे सब्दो का प्रयोग मैं छोड़ते समय करता हूँ.

अब मेरे परिवार के बारे में बात करते हैं.

पापा- श्री राजेंद्र हरम. ये बैंक में काम करते हैं. उम्र 56 वर्ष है.

मां- शमत. रजनी शर्मा. ये एक सरकारी टीचर हैं. उम्र 53 वर्ष है.

बड़ी दीदी- सविता शर्मा. इनकी पडाहै पूरी हो चुकी है. इनकी उम्र 30 वर्ष hai.inka रंग सांवला है लेकिन नैन नक्स बहुत hi तीखे हैं. इनकी शादी 4 वर्ष पहले हो चुकी है. इनको 2 साल की एक बेटी भी है. ये देखने में एकदम मस्त पटाखा आइटम लगती हैं. इनका साइज 36 30 36 है. किसी और का तो नहीं पता लेकिन जब भी मैं इनको देखता हूँ तो मन बहुत बचें हो जाता है. स्वाभाव से एकदम तेज़ हैं. ये मुझसे हमेशा नाराज़ रहती हैं. कभी सीधे मुंह बात नहीं करती. कारन बाद में पता चलेगा.

मझली दीदी- सरिता शर्मा. ये अभी घर में रहकर P.Hd कर रही हैं. इनकी उम्र 27 वर्ष है. इनकी इंगेजमेंट हो चुकी है. इनका रंग दूध की तरह गोरा है. इनका साइज 34 30 36 है. देखने में बहुत hi मस्त लगती है. ये बहुत hi ज़िद्दी है और मुझसे हमेशा hi खुन्नस खाये रहती है और अपनी भड़ास मुझ पर निकलती रहती है.

छोटी- मनीषा शर्मा. इनकी उम्र अभी 22 वर्ष है. ये अभी M.Sc. फाइनल ईयर में है. इसका साइज 34 28 34 है. देखने में अच्छी है तीखे नैन नक्स हैं. घर में सबकी दुलारी है और मुझसे बहुत प्यार करती है.

जीजा जी- रघुवेन्द्र सिंह. उम्र 33 वर्ष. ये भी बैंक में जॉब करते हैं देखने में ठीक थक हैं और सविता दीदी इनसे बहुत खुस हैं. ये आगरा में जॉब करते हैं. इसलिए दीदी ज्यादातर हमारे यहाँ hi रहती है.

नताशा ठाकुर, मेरी गिर्ल्फ्रेंड. उम्र 26 वर्ष. ये मुझसे 1 वर्ष बड़ी है. साइज 36 30 36. इसके साथ में हफ्ते में 3 से 4 बार डर्टी चुदाई कर लेता हूँ. और ये भी एकदम मस्त रंडी की तरह मुझसे चुदवाती है.

आगे आने वाले पत्रों का इंट्रोडक्शन समय आने पर दिया जाएगा.

तो ये था सभी पत्रों का परिचय. कहानी को शुरुवात अगले भाग में.
 
अपडेट-2

जैसा की मैंने बताया है की मैं अभी 25 वर्ष का गबरू नौजवान हूँ. मैं अल्लाहाबाद सिटी में रहता हूँ. मेरी पढाई पूरी हो चुकी है. चूँकि मेरे मां पापा दोनों जॉब करते हैं इसलिए घर में पैसे की कोई कमी नहीं है. मां पापा के जॉब करने के कारन मुझ पर नज़र काम रख पते हैं इसलिए मैं थोड़ा आवारा किस्म का हो गया हूँ और कभी कभी शराब और सिगरेट भी पिने लगा हूँ. जिसकी शिकायत दोनों बड़ी बहनो ने मां पापा से की है. तो पापा ने मुझे बहुत मारा. जिसके कारन मेरा गुस्सा अपनी दोनों बड़ी बहनो के लिए बढ़ता जा रहा था.

उठ जा. सुबह हो गई है और तुम सेये पड़े हो. ये आवाज़ मेरी मम्मी की थी जो मुझे उठा रही थी.

मैं- सोने दो न माँ. अभी तो 6 hi बजे हैं अभी थोड़ी देर और सोने दो.

मां- नहीं अब उठ जा और नहाकर फ्रेश हो कर नाश्ता कर मैं लगा रही हूँ.

मैं बेमन से था और नाहा धोकर निचे चला गया नाश्ता करने के लिए.

(मैंने अपने घर के बारे में बताया hi नहीं. मेरा घर 2 फ्लोर का है जिसमे कुल मिलकर 8 कमरे, 1 बड़ा सा हॉल, एक स्टोर रूम और एक गेस्ट रूम भी है 5 कमरे 2 फ्लोर पर है बाकि सब ग्राउंड फ्लोर पर है. घर में 3 बाथरूम है सभी उसे बरी बरी से उसे करते हैं.)

तो मैं जब नाश्ता करने के लिए हॉल में आया तो सभी वहां पर पहले से hi बैठे हुए नाश्ता करने की शुरुवात करने जा रहे थे. मैं भी जाकर चुपचाप अपनी जगह पर बैठ गया और नाश्ता करने लगा.

पापा- और बरखुरदार क्या हल है आपके.

मैं- ठीक हूँ पापा.

पापा- और पढाई तो पूरी हो चुकी है तुम्हारी. आगे क्या करने का सोचा है.

मैं- बस पापा अभी तो कुछ सोचा नहीं है.

पापा- क्या मतलब अभी नहीं सोचा. कितनी बार बोलै है की पढाई हो गई है तो कुछ काम धाम करो कही, या तो प्रतियोगी परीक्षाओ की तयारी करो. लेकिन तुमको तो समझ में hi नहीं आता.

मैं पापा की इस बात पर शांत hi बैठा रहा.

पापा- अब कुछ बोलेगा भी या ऐसे hi बैठा रहेगा. तुम्हे अपने फ्यूचर की कोई चिंता है भी या नहीं.

इतने में सरिता दी जो कुछ दिन पहले hi अपनी ससुराल से आई थी और साथ में नाश्ता कर रही थी बोल पड़ी.

सविता दी- इसे जब अपने आवारा दोस्तों से फुर्सत मिलेगी तभी तो ये कुछ अपने फ्यूचर के लिए करेगा न.

दीदी की इस बात को सुनकर मैंने उन्हें घूर कर देखा तो वो मंद मंद मुश्कुरा रही थी.

पापा- (गुस्से में) ये मैं क्या सुन रहा हूँ. मेरे मन करने के बावजूद भी तुम उन आवारा लड़को के साथ अभी भी घूमते हो.

मैं- नहीं पापा दीदी झूठ बोल रही है मैं तो उनसे अब मिलता भी नहीं ( जो मैंने एकदम साफ़ झूठ बोलै था)

पापा- बस बहुत हुआ. अब तुम मुझसे झूठ भी बोलने लगे हो. ख़बरदार जो आज के बाद मुझे तुम्हारी कोई शिकायत मिली तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

मां- ये क्या लगा रखा है आप सबने. चुपचाप नाश्ता नहीं कर सकते हो क्या.

पापा- आरा भाग्यवान तुम अपने bête को समझाओ की यही उम्र है कुछ करने की कुछ बनने की. एक बार ये उम्र निकल गई तो हाथ कुछ नहीं आएगा.

मां- अच्छा अच्छा ठीक है मैं इसे समझाउंगी. अब चुपचाप सभी नाश्ता करो.

फिर सभी नाश्ता करने में जुट गए. लेकिन मैं सविता दीदी को hi घूर रहा था और उनके चेहरे पर मुश्कान थी वो मुझे देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

मैं- (मन में) हंस लो अभी जितनी मर्जी हो. मेरे भी दिन आएँगे कभी तब मैं गईं गईं कर बदला लूँगा.

(जैसा की मैंने कहानी की शुरुवात में hi बताया था की सविता दीदी मुझसे हमेशा नाराज़ रहती हैं तो इसका कारन यह है की मेरा पैदा होने से पहले मां हमेशा दीदी का ख्याल रखती थी, हर छोटो छोटी बातो का. लेकिन जब से मैं पैदा हुआ. मां का ध्यान दीदी पर से काम हो गया. जिसका जिम्मेदार दीदी मुझे मानती हैं और इसलिए वो हमेशा मुझसे नाराज़ रहती है. इसका पता मुझे बाद में चला जब मैंने अपनी सविता दीदी को अपनी रंडी बनाकर छोड़ा. इसके आलावा भी वो सुरु के लेकर मेरी रुंडी बनकर छोड़ने तक उन्होंने Kya-Kya सोचा. वो सब मुझे उनकी चुदाई के बाद hi पता चला. जब उन्होंने मुझे बताया.)

नाश्ता करने के बाद जब सभी अपने अपने कमरे में चले गए (यहाँ मैं एक बात बताना भूल hi गया की हम सभी भाई बहनो को अलग अलग कमरे मिले हुए थे और सभी के कमरे 2 फ्लोर पर hi थे) तो मां मेरे पास आई और बोली.

मां- बीटा और कितना तंग करेगा अपने पापा को. उनकी बात मान क्यों नहीं लेता कही अच्छी सी जॉब hi देख ले या फिर सरकारी नौकरी की hi तयारी कर.

मैं- क्या मां अब आप भी मत शुरू हो जाओ अभी मेरी उम्र hi कितनी हुई है. अभी तो मेरे खेलने कूदने के दिन हैं. और आप दोनों जो पैसा कमा रहे हैं वह आगे चलकर मेरा hi होगा न. तो अब आप इन सब के लिए मुझे फिर मत कहिएगा मम्मी.

मम्मी- (थोड़ा नाराज़ होकर) बीटा मैं तो तेरे भले के लिए hi बोल रही हूँ. और तू है की मेरी बात सुनता hi नहीं है.

मैं मां को नाराज़ देख कर

मैं- अच्छा अब आप नाराज़ मत हो मैं कुछ सोचता हूँ इसके बारे में.

मां- (खुस होकर) तू सच बोल रहा है.

मैं- हाँ मां मैं सच बोर रहा हूँ.

इसी तरह दिन गुजरते रहे. मेरी आदत में कोई सुधर नहीं आया. अब तो रोज कभी सरिता दीदी तो कभी सविता दीदी मेरी कोई न कोई शिकायत पापा से करती रहती और जिसके कारन कभी कभी मुझे पापा से मार भी पद जाती थी. जिसके कारन मेरा गुस्सा अपनी दोनों बड़ी बहनो के लिए दिन / दिन बढ़ता hi जा रहा था.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
अपडेट-3

एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ बैठा शराब पि रहा था. तो बातो hi बातो में दोस्तों ने चुदाई की बाटे शुरू कर दी.

पहला दोस्त- यार सुना है की संतोष की गिर्ल्फ्रेंड उसको छोड़कर चली गई है.

दोसरा दोस्त- हाँ यार मैंने भी यही सुना है. लेकिन इसके पीछे की बात तुझे पता है की वो क्यों उसे छोड़कर गई है.

पहला दोस्त- नहीं यार मुझे तो नहीं पता.

दोसरा दोस्त- अरे यार वो मेरी गिर्ल्फ्रेंड से बता रही थी की उसका लुंड तो अच्छी खाशा बड़ा है लगभग 6” का लेकिन चुदाई करते हुए जल्दी झाड़ जाता है. और तो और वह अपनी गिर्ल्फ्रेंड के साथ तरह तरह के इन्सेस्ट रोलप्ले भी करता था.

पहला दोस्त- रोलप्ले? किस तरह का रोलप्ले.

दोसरा दोस्त- उसकी गर्लफ्रेंड बता रही थी की वह चुदाई के दौरान कभी माँ bête का रोलप्ले करने को कहता था तो कभी बाप बेटी के रोलप्ले करने को कहता था और कभी कभी भाई और बहन के रोलप्ले करने के लिए कहता थे. और जब भी कभी वो मन करती थी तो वो उसे मरता था और गन्दी गन्दी गालिया देता थे. कुछ दिन तो उसने बर्दास्त किया लेकिन जब पानी सर के ऊपर से गुजर गया तो वह उसे छोड़कर चली गई.

उन दोनों की इस बात को सुनकर मेरे तो कान खड़े हो गए. खासकर भाई बहन वाला रोलप्ले सुनकर.

पहला दोस्त- क्या फालतू की बकवास कर रहा है. ये सब थोड़े hi होता है.

मैं- हाँ ये सही तो कह रहा है. ये सब फालतू बात है. ऐसे रिश्ते में छुड़ाई की बाटे नहीं होती कभी भी.

दोसरा दोस्त- किस तरह की फालतू बात कर रहा हूँ मैं.

मैं- यही की भाई बहन, माँ बीटा, बाप बेटी का रोलप्ले करते हुए चुदाई करना. कहे लिए फालतू की बाटे कर रहा है.

पहला दोस्त- और नहीं तो क्या. ये सब फालतू की बाटे hi तो हैं.

दोसरा दोस्त- वो तो केवल रोलप्ले करने को कहता था चुदाई करते समय. लेकिन बहुत से भाई बहन, माँ बीटा, बाप बेटी ऐसे हैं जो आपस में चुदाई करते हैं. मज़ा का मज़ा भी मिलता है और बात बहार भी नहीं जाती.

मैं- क्या बे देख रहा हूँ तू कब से बकचोदी पेल रहा है. अगर अब तूने मुंह बंद नहीं किया तो तेरी गांड यहीं मरूंगा वो भी बिना थूक लगाए. बड़ा आया फालतू की बात करने वाला.

दोसरा दोस्त- अबे मैं सही कह रहा हूँ. तुझे मेरी बात का भरोषा नहीं है न.

मैं- सेल अगर सही बात करेगा तो hi भरोषा करूँगा न. कब से देख रहा हूँ फालतू की बाटे पेले पड़ा है.

पहला दोस्त जो अब तक शांत बैठा थी वो बोल पड़ा- अबे इसकी तो आदत है बकवास करने की. जब देखो तब इसके दिमाग में उलटी सीधी बाटे आती रहती हैं.

दोसरा दोस्त- मैं फालतू की बात नहीं कर रहा हूँ. जो सही है वही कह रहा हूँ.

Main-Abe भोसड़ीवाले क्या सही कह रहा है तू. ये इन्सेस्ट चुदाई जैसी कोई चीज़ नहीं होती. अब अपना मुंह बंद कर और चुपचाप बैठ कर दारू पि.

दोसरा दोस्त- अबे मादरचोद मई जो कह रहा हूँ वो सही कह रहा हूँ. रुको तुम दोनों भोसड़ीवाले में तुम्हे कुछ दिखता हूँ.

फिर दूसरे दोस्त ने अपने मोबाइल पर कुछ गूगल में कुछ सर्च किया और हम दोनों के सामने कर दिया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
अपडेट-4

जैसे hi हम दोनों ने मोबाइल की स्क्रीन में देखा तो दोनों की आँखे फटी की फटी रह गई. क्योंकि उसने जो सर्च किया था और जो पेज ओपन हुआ था उसमे एक इन्सेस्ट कहानी थी जिसका टाइटल थे- बाप ने अपनी बेटी को अपनी रखैल बनाया.

दोसरा दोस्त- अबे सालो अब क्या हुआ. मैंने जो कहा था वह सही कहा था या नहीं.

मैं- अबे ये कैसे हो सकता है.

फिर दूसरे दोस्त ने उस पेज को आगे ड्रैग किया तो उसमे एक दूसरी स्टोरी थी जिसका टाइटल the-Maa को मैंने गर्भवती किया. उसने फिर आगे पेज को ड्रैग किया तो जो स्टोरी मेरे सामने खुल कर आई उसका टाइटल पढ़कर मुझे बहुत बड़ा झटका लगा. टाइटल था- बहन को रंडी बनाकर छोड़ा और उसे गर्भवती किया.

इसी तरह की उसने कई और स्टोरी पेज को ड्रैग करके दिखाई. सभी स्टोरी बाप बेटी, माँ बीटा, भाई बहन के ऊपर hi थी. जिसे देखने के बाद मेरा दिमाग सुन्न हो गया और सोचने समझने की शक्ति hi खो बैठा. अब मेरे जेहन में मेरी बहनो को लेकर तरह तरह के अजीब अजीब खाल आ रहे थे. मेरा शराब का नशा ये सब देखकर गायब हो चुक्का था.

तभी दूसरे दोस्त की आवाज से मैं चौक गया और उसकी तरफ देखने लगा.

दोसरा दोस्त- क्यों क्या हुआ बे. तू इतना शांत कैसे हो गया है बे. अभी तो तू मेरी माँ बहन एक करने पे तुला हुआ थे. पर लगता है की अभी तेरी माँ बहन एक हुई पड़ी है.

मैंने उसकी बातों का कोई जवाब नहीं दिया. मेरे दिमाग में इस समय वही दोस्तों की बाटे और गूगल सर्च पर देखि गई कहानिया hi गुम रही थी.

मैं सोचने लगा की क्या वाकई में ऐसा हो सकता है. क्या कोई भाई बहन आपस में चुदाई कर सकते हैं. क्या कोई बाप अपनी बेटी को छोड़ सकता है. क्या कोई माँ अपने bête सा छुड़वा सकती है.

यही सब बाटे सोच सोच कर मेरा दिमाग ख़राब हो रहा था और मेरा hi नहीं मेरे लुंड का भी दिमाग ख़राब हो चुक्का था. अब मुझे चुदाई की जबरदस्त तालाब महसूस हो रही थी.

इसीलिए मैं अब अपने दोस्तों के साथ बैठना मुनासिब नहीं समझा और वह से निकर गया. जब मैं वह से निकला तो शाम को 7 बजने वाले थे. वह से निकलने के बाद मैंने अपनी गिर्ल्फ्रेंड नताशा को फ़ोन किया.

मैं- hello

नताशा- हाँ बोलो

मैं- कहा है तू.

नताशा- घर पर हूँ

मैं- जल्दी से मुझे ………….जगह मिलो.

नताशा- क्या काम है ये तो बताओ.

मैं- पहले तू मिल तो सही फिर बताता हूँ.

नताशा- नहीं पहले काम बताओ तभी मैं मिलूंगी.

एक तो दोस्तों की बातो और कहानियों की वजह से मेरा दिमाग पहले hi घूमा हुआ था और ऊपर से नताशा के नखरे ने मेरे गुस्से को और भड़का दिया.

मैं- रंडी, मादरचोद तू आती है या मैं hi औ तेरे घर.

नताशा- इतना गुस्सा क्यों हो रहे हो.

मैं- गुस्सा न हो तो क्या करू रंडी. यहाँ मेरा लुंड खड़ा है चुदाई के लिए और वह तू नखरे छोड़ रही है. अब मेरा गुस्सा और न बढ़ा और जल्दी से मेरी बताई जगह पर पहुंच.

नताशा- पर घर में क्या कहूँगी की कहा जा रही हूँ

मैं- वो सब मई नहीं जनता. अगर आधे जानते में तू वहां नहीं पहुंची तो मैं तेरी माँ छोड़ दूंगा.

नताशा- ठीक है मैं कोसिस करती हु.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
अपडेट-5

नताशा से बात करने के बाद मैंने फ़ोन कट किया और नताशा की चुदाई करने अपनी बताई हुई जगह पर जा रहा थे जो मुश्किल से 10 मिनट की पैदल दूरी पर था. अभी मैं रस्ते में hi था की मेरे मोबाइल पर सरिता दीदी की कॉल आ गई.

मैं- hello दीदी.

सरिता दी- हाँ अभी कहा हो तुम

मैं- हाँ दी मैं अपने दोस्तों के साथ में हूँ

सरिता दी- दोस्तों के साथ क्या कर रहा है.

मैं- बस थोड़ा gup-sup हो रही है.

सरिता दी- आजकल बहुत आवारा होता जा रहा है. घर आ तब तुझे बताती हूँ.

इतना कहने के बाद सरिता दी ने फ़ोन कट कर दिया.

जब मैं अपनी बताई जगह पर पंहुचा तो मुझे ज्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा. क्योंकि थोड़ी देर बाद नताशा भी आ गाइट hi. नताशा आज क्या लग रही थी एकदम पटाखा. एकदम बन थान का आई थी.

मैं नताशा को देखकर जो थोड़ा बहुत होश में था उसको भी खो बैठा. क्योंकि आज वो एकदम सेक्सी लग रही थी. उसने एक तीते फिटिंग की t-shirt पहनी हुई थी जो की उसके शरीर से पूरी तरह चिपकी हुई थी जिसके कारन उसके 36”की चुकी बहार आने को बेताब हो रही थी. और उसके निप्पल भी ध्यान से देखने पर हल्का हल्का नज़र आ रहे थे. निचे उसने एक फिटिंग की लेग्गी पहनी हुई थी जिसमे उसके गांड का शेप पूरा नजर आ रहा था. कुल मिलकर वो एकदम क़यामत लग रही थी. मैं तो उसे देखने के बाद किसी और hi दुनिया में चला गया था.

नताशा- हैल्लो अभी

मैंने कोई जवाब नहीं दिया

नताशा- hello अभी कहा खो गए.

मैं- (हड़बड़ा कर)- नहीं कही भी तो नहीं.

नताशा- तुम्हे देखकर तो लग रहा है की तुम्हारी हालत बहुत hi ख़राब है.

मैं- हाँ नताशा आज चुदाई का बहुत मन कर रहा है तभी तो तुम्हे बुलाया.

नताशा- वो तो तुम्हारा मन रोज hi चुदाई को करता है. लेकिन इतने उतावले तो तुम कभी नहीं थे.

मैं- हाँ आज बहुत तालाब लगी है चुदाई की. बात hi कुछ ऐसी हुई है की मुझसे और ज्यादा इंतज़ार नहीं हो रहा है.

नताशा- बताओ तो क्या बात है.

(मैं नताशा से लगभग हर बात शेयर करता tha.Kyonki हम दोनों बचपन से ek-dusre को जानते थे. वो भी मुझसे अपनी कुछ बाटे शेयर करती थी. लेकिन मेरे जितना नहीं. वो मुझसे एक साल सीनियर थी पढाई में भी लेकिन हमेशा एक अच्छे दोस्त की तरह मेरे साथ पेश आती थी. फिर धीरे धीरे हम दोनों का झुकाव ek-dusre की तरग हो गया और हम दोनों बर्फ गफ बन गए)

मैं- बताऊंगा लेकिन पहले चुदाई करते है उसे बाद. अब मुझसे और बर्दास्त नहीं हो रहा है.

इस समय रत के 07.30 बज रहे थे और मैंने जहा नताशा को बुलाया था उस जगह बुलाया था वह थोड़ा शांत इलाका था और शहर से आउटर में पड़ता था. मैं अक्सर नताशा को इसी जगह पर चुदाई के लिए बुलाता था. यहाँ पर शाम के बाद लोगो का आना जाना लगभग न के बराबर hi होता था.

मैंने नताशा का हाँथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया. जिसके कारन वह मेरे से पूरी तरह से सात गई. मैंने उसके चेहरे को अपने हांथो में लिया और एक तक उसकी आँखों में देखने लगा.

नताशा- ऐसे क्या देख रहे हो.

मैं- देख रहा हूँ की तुम दिन पे दिन और भी ज्यादा खूबसूरत होती जा रही हो.

ऐसा बोलकर मैंने उसके गलो को चूमने लगा. उसके गलो को चूमते चूमते उसके माथे को भी चुम लिया. नताशा ने भी अपने बहे मेरे गले में दाल दी. फिर मैंने अपने होंठ आहिस्ता से उसके होंठों पर रख दिए और उसके होंठों का राषपन करने लगा. इसमें नताशा ने भी मेरा साथ दिया. मैंने उसके निचले होंठ को अपने मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगा. लगभग 5 मिनट उसके निचले होंठो को चूसने ने बाद मैंने उसके ऊपर के होंठ को भी लगभग 5 मिनट तक चूसा. जिसमे नताशा ने भी मेरा पूरा साथ दिया.

नताशा के होंठ चूसने के बाद मैं उससे थोड़ा अलग हुआ और उसके चेहरे को देखने लगा. उसका चेहरा हल्का हल्का सुर्ख हो गया था. कुश देर उसे देखने के बाद मैं फिर से नताशा के होंठो पर टूट पड़ा और बड़ी बेरहमी से उसमे होंठ चूसने लगा. चूँकि नताशा को भी रफ़ सेक्स बहुत पसंद थे इसलिए वो भी मेरा साथ देने लगी. लगभग 10 मिनट एक दूसरे के होंठ चूसने के बाद मैंने अपनी जुबान नताशा के मुंह में दाल दी. जिसे नताशा ने बड़े चाव से चूसना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर बाद नताशा ने अपनी जीभ मेरे मुंह में दाल दी जिसे मैंने बड़ी बेरहमी से चूसना शुरू कर दिया. लगभग 10 मिनट बाद जब दोनों की सांसे उखाड़ने लगी तब जा कर हम दोनों अलग हुए.

फिर मैं नताशा को घुमा कर उसके पीछे हो गया और उसकी गार्डन पर जीभ फिरने लगा. मेरा लौड़ा जो की अब अपने पुरे आकर में आ चुक्का था उसकी गुदाज़ गांड से टच होने लगा. मैंने उसकी गार्डन को चाटते हुआ अपना हाँथ उसके कंधो पर रखा और dhire-dhire उसे नीच उसकी चूचियों की तरफ सरकने लगा. मैं नताशा की गार्डन पर बाईट करने लगा जिससे नताशा के मुंह से हलकी हलकी सिसकारियां निकलने लगी. फिर मैंने अपना हाँथ सरकते हुए उसकी गदरायी 36” की चूचियों पर कपडे के ऊपर से रख दिया और हलके हलके सहलाने लगा. मेरे ऐसा करने से नताशा ने मदहोशी में अपनी आंके बंद कर ली और हलकी हलकी सिसकारी लेने लगी.

मई पहले से hi फुल गरम था और नताशा जैसी लड़की की मस्त चूचिया मेरा हांथो में थी. इसलिए अब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने उसकी चूचियों को दोनों हांथों में थामकर बेरहमी से मसलने लगा.

नताशा- आआह्ह्ह्हह हहहह धीरे दबाओ दर्द होता है.

मैं- ाः मेरी जान धीरे दबाने में वो मज़्ज़ा कहा जो जोर से दबाने में आता है. और ऐसा कहकर मैंने फिर से उसकी दोनों चूचियों को और भी बेरहमी से मसल दिया.

नताशा- आआआअह्हह्ह्ह्हह मायआ. आआआहहह धीरे दबाओ न. मैं कही भागी नहीं जा रही हूँ जो इतनी बेरहमी से दबा रहे हो.

मैंने उसकी बातो पर कोई ध्यान नहीं दिया और पूरा जोर लगाकर उसकी चूचियों को दबाता रहा और साथ hi साथ उसकी कान की लाओ को भी हलके हलके दातो से काटने लगा. जिसके कारन नताशा पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी. उसकी आँखे मदहोशी में बंद हो गई थी. उसका चेहरा माधोसी के कारन सुर्ख हो गया था.

करीब 15 मिनट उसकी चूचियों को दबाने के बाद मैंने एक हाथ को चूचियों के निचे सरकते हुए उसकी नाभि पर आया और वह अपनी उँगलियों को गोल गोल घूमने लगा. जिसके कारन उसकी सिसकारियां बढ़ती जा रही थी.

फिर मैंने अपने हाथ को उसकी नाभि से उठाकर सीधे लेग्गी के ऊपर से उसकी छूट पर रख दिया, जो बहुत पानी छोड़ने के कारन गीली हो गाइट hi. मेरे हाँथ रखते hi नताशा ने जोर की सिसकारी ली.

नताशा- आआआहहहहहहह अभी क्या जादू कर दिया है तुमने मुझ पर. जो तुम्हारे छूटे hi मैं पिघल जाती हूँ.

मैंने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और अपने काम में लगा रहा. उसकी छूट पर रखे हांथो से मैंने उसकी छूट को पूरी मुट्ठी में भर लिया साथ hi उसकी चुकी क ीक निप्पल को अंगुली और अंगूठे के बिच में मसल दिया और पीछे से अपने खड़े लुंड को उसकी गांड की दरार में फिट करके एक जोर दर धक्का मारा.

इस 3 तरफ़ा हमले से नताशा की हालत बहुत hi ख़राब हो गई. अब वो पूरी तरह गरम हो गाइट hi. वह लगातार सिसकिया ले रही थी.

फिर मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और उसकी t-shirt उतर कर फेक दी. उसने अंदर एक ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई थी. मैंने झटके में उसकी ब्रा भी उतर के फेक दी. अब उसकी दूध जैसी ठोस चूचियां चालक कर मेरे सामने आ गई, जिसे देखकर मैं और बर्दास्त नहीं कर पाया और उन पर भूखे कुत्ते की तरह टूट पड़ा. मैं उसकी चूचिया पिने के साथ साथ उसकी लेग्गी को भी नीच उतर दिया. और उसकी गुदाज़ गांड को दबाने लगा. नताशा ने मेरे सर को अपनी चूचियों पर दबा लिया और कहा.

नट्सः- आआअह्हह्ह्ह्ह अभी. हाँ ऐसे hi पि जाओ मेरी चूचियों का रास निचोड़ डालो मेरी चूचियों को aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh कुत्ते.

मैं- हैं मैं आज तेरी चूचियों को अच्छे से निचोड़ दूंगा साली. बहुत रास भरा है तेरी चूचियों में.

मैं उसकी चूचियां पिने के साथ साथ उसके गुदाज चूतड़ को भी बहुत तेज़ तेज़ दबा रहा था. जिसके कारण वह और भी गरम होती जा रही थी. फिर मैंने उसकी पंतय को भी उसकी टैंगो से निकल कर उसकी छूट को आज़ाद कर दिया. अब नताशा सर से लेकर पांव तक मेरे सामने नंगी कड़ी थी.

फिर मैंने नताशा की चूचियों को छोड़कर उसके पेट को चूमे हुआ उसकी छूट तक गया. और छूट को बड़े ध्यान से देखने लगा. उसको मैंने अनगिनत बार रंडी की तरह छोड़ा था. परन्तु उसकी छूट को देखने के बाद कोई नहीं कह सकता था की इसको सैकड़ो बार बजाय गया है. उसकी छूट की फांके बस हलकी सी खुली थी जिससे उसके अंदर का गुलाबी बैग नजर आ रहा था.

मैंने देर न करते हर अपनी मुंह नताशा की छूट पर रख दिया. जैसे hi मेरे मुंह को नताशा ने अपनी छूट पर महसूस किया उसके मुंह से एक आनंद दायक सिसकारी निकल गई.

नताशा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ा aaaahhhhhhhhhh मम्मी. हैं अभी ऐसे hi चुसो मेरी छूट को. खा जाओ मेरी छूट को मेरे कुत्ते. ये बस तेरे लिए hi बानी है. खा जा इसको कुत्ते.

नताशा की बात सुनकर मैं और भी जोश में आ गया और उसकी छूट में अपनी जीभ डालकर उसे छोड़ने लगा. मेरा ऐसा करने से नताशा बिन जल मछली की तरह तड़पने लगी और मेरे सर को अपनी छूट पर दबाने लगी और चिल्लाने लगी.

नताशा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सेल हरामी. क्या छूट चुस्त है तू. चूस सेल और तेज़ी से चूस मेरी छूट. पि जा मेरी छूट का सारा राश.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-6

मुझसे अब और ज्यादा बर्दास्त नहीं हो रहा था मैं जल्द से जल्द नताशा की छूट को छोड़ना चाहता था. इसलिए मैं नताशा की छूट से अपना मुंह हटाया और फटाफट अपने सरे कपडे उतर कर नंगा हो गया और नताशा का सर पकड़कर निचे दबाने लगा. नताशा भी मेरा इशारा समझ गई की मैं क्या चाहता हूँ. नताशा झट से निचे बैठ गई और मेरे लुंड को हाँथ में लेकर सहलाने लगी उसके हाँथ लगते hi मेरे मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh की सिसकारी निकर गई.

कुछ देर तक लुंड सहलाने के बाद उसने मेरे लुंड के सुपडे पर अपनी जीभ से चाटने लगी. उसके जीभ लगते hi तो मैं जैसे जन्नत में पहुंच गया और मेरे मुंह से आआअह्हह्ह्ह्हह साली की आवाज़ निकल गई.

नताशा- क्या हुआ अच्छा नहीं लगा क्या.

मैं- बहुत अच्छा लगा कुटिया. अब बकचोदी न कर और जल्दी से लुंड को पूरा मुंह में लेकर चूस.

मेरे ऐसा कहते hi नताशा भूखे कुत्ते की तरह मेरा लुंड पर टूट पड़े और जितना हो सकता था मेरे लुंड को मुंह के अंदर लेकर अंदर बहार करने लगी. लुंड के चूसने से sapad-sapad की आवाज़ निकर रही थी.

मैं- आआअह्हह्ह्ह्ह राआनंददददियइ क्या लुंड चुस्ती है तू. एकदम कोठे की रुंडी की तरह. मैं तो कहता हूँ की तू उनसे भी अच्छा लुंड चुस्ती है. कहाँ से सीखा है ऐसे लुंड चूसना रांड़ी.

नताशा- सेल भड़वे इतने साल से मुझे रंडी की तरह छोड़ रहा है. और छोड़ने से पहले लुंड को चुसवाते है और पूछ रहा है की कहाँ से सीखा. कुत्ते तूने hi सिखाया है मुझे ऐसे लुंड चूसना.

(नताशा की चुदाई से समय सबसे अच्छी बात यही होती थी की वह लुंड को पूरा मन लगाकर चुस्ती थी.)

इतना बोलकर नताशा ने फिर से मेरे लुंड को अपने मुंह में ले किया और सपद सपद चूसने लगी. अब मुझसे सहन करना मुश्किल होता जार अहा था तो मैंने उसके सर को दोनों हाँथ से पकड़ा और लुंड पर दबाने लगा और अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर धीरे धीरे धक्का लगाने के बाद मैंने धक्को की राफ्तेर तेज कर दी.

मैंने जैसे hi धक्को की राफ्तेर तेज़ की. वैसे hi नताशा के मुंह से gu……gu… की आवाज़ निकलने लगी. फिर मैंने उसके सर को अपने लुंड पर दबा दिया. और 1…2…3…4…5…6..7…8….9….10………….सेकंड तक दबा कर रखा. लुंड मुंह में दबा होने के कारन उसकी सांसे उखड़ने लड़ी. उसको साँस लेने में तकलीफ होने लगी. और वो goo..gooo… की आवाज़ करने लगी. नताशा ने मेरे जांघ पर हाथ रख कर मुझे दूर धकेलने की कोसिस की लेकिन मेरी पकड़ मज़बूत थी. मैंने अपने लुंड का प्रेशर और बढ़ा दिया था. जिससे नताशा की आँखे बहार आने को हो गई और उनमे आँशु भी आ गए उसके मुंह से थूक की एक लकीर जमीन पर गिरने लगी. फिर मैंने लुंड सुपडे तक बहार निकल लिया. जिससे उसको थोड़ा सुकून मिला. इससे पहले की वह कुछ बोलती मैंने दोबारा से जड़ तक अपना लुंड उसके मुंह में पेल दिया और उसके सर को अपने लुंड पर दबा लिया.

उसके मुंह से लगातार guuu……..guuuu…………. की आवाज़ निकलती रही. जब फिर उसकी साँस अटकने लगी. उसकी आँख बहार आने को हुई और आँखों में आंसू आ गए तो मैं फिर से दोबारा लुंड टोपे तक उसके मुंह से बहार खींच लिया. जब वह फिर थोड़ी नार्मल हुई तब फिर मैंने अपने लुंड एक hi धक्के में जब तक उसके मुंह में पेल दिया..

ये मैंने लगभग 7 या 8 मिनट लगातार करता रहा. जब मुझे लगा की मेरा पानी कभी भी निकर सकता है तब मैंने एक तेज़ झटका मार्कर अपना लुंड उसके मुंह से निकल लिया.

मेरा लुंड बहार निकलने के बाद लुंड और उसके मुंह के बिच लार की एक पतली से लकीर बानी हुई थी. जैसे hi मैंने लुंड बहार निकला. नताशा हफ्ते हुए जमीन पर बैठ गई और kho..kho… करने लगी और मुझे गालिया देने लगी.

नताशा- मादरचोद, भड़वे मेरी जान लेने का इरादा है क्या. सेल धीरे नहीं कर सकता था.

(ये उसकी हमेशा की आदत थी. मैं उसके साथ हमेशा ऐसा hi करता था और वो मुझको हमेशा गालिया देती थी)

मैंने उसकी बात को नजरअंदाज करते हुए उसको बालो से पकड़कर खड़ा किया और पाद में hi एक पेड़ के पास उसे खींचकर ले गया और उसे उसके सहारे खड़ा कर दिया. और नताशा की छूट को भोषड़ा बनाना के उसका एक पेअर अपने हाँथ में रखकर अपने हाँथ उसके कंधे पर रखा. जिससे उसकी छूट ठीक मेरे लुंड के सामने आ गई.

मैंने- चल मादरचोद साली अब मैं तुझे छोडूंगा.

फिर मैंने अपने लुंड को उसकी छूट पर सेट किया और एक करारा धक्का दे दिया. इस धक्के से मेरा आघा लुंड नताशा की छूट में घुस गया. जिससे उसके मुंह से एक हलकी सी चीख निकल गई.

नताशा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मादरचोद आराम से.

मैं- भोसड़ी वाली मुझे गली देती है. तो ये ले

इतना बोलकर मैंने अपना लुंड सुपडे तक बहार खींचा और एक करारा धक्का लगा दिया. जिससे मेरा लुंड उसकी बुर को चीरता हुआ जड़ तक अंदर चला गया. मेरा इस धक्के से नताशा के मुंह से दर्द भरी चीख निकल गई.

नताशा- aaaaahhahhhhhh………….aahahhhhaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh.. माँ. मार डाला सेल कुत्ते. धीरे से नहीं दाल सकता था kya.bhosadi वाले मैं कोई कोठे की रुंडी नहीं हूँ.

मैं- साली तू बहुत नौटंकीबाज़ है. कितनी बार तुझको छोड़ा है. लेकिन फिर भी हमेशा तुझको दर्द hi होता है भोसड़ीवाली.

इतना बोलकर मैंने एक बार फिर लुंड को टोपे तक बहार निकला और एक करारा धक्का उसकी कट पर दे मारा.

नताशा- ayeeeeee……..mummmy……aaaaaahhhhhhhhhhhhhhh मर गई मादरचोद, भोसड़ी वाली थोड़ा धीरे कर. बहुत दर्द हो रहा है.

मैं- साली तेरी छूट बहुत कमल की है. तुझे जितनी बार भी छोड़ता हूँ ऐसा लगता है जैसे मैं कोई नै छूट छोड़ रहा हूँ.

नताशा- तुमने मेरी छूट इतने सालो से छोड़ छोड़ कर कबाड़ा कर दिया है और कह रहा है की तुझे मेरी छूट नै लग रही है.

मैं- मैं सही कह रहा हूँ rundi.jitni बार भी तुझे छोड़ता हूँ मुझे ऐसा लगता है की कोई कोरी छूट hi छोड़ रहा हूँ.

इतना कहने के बाद मैंने लुंड उसकी छूट से बहार निकर लिया और उसे कंधे से दबाकर निचे बैठाया और लुंड को उसके मुंह में पेल दिया.

नताशा सपद सपद लुंड को चूसने लगती है और मेरे मुंह से आनंद दायक सिसकारियां निकलने लगती है. थोड़े देर लुंड चूसने के बाद मैंने नताशा को खड़ा किया और पलटकर डोगग्य स्टील में होने के लिए कहा. नताशा ने भी मेरी बात मन ली और पेड़ को पकड़कर डौगी स्टाइल में कड़ी हो गई.

मैंने अपने मुंह से थूक निकला और उसके छूट पर लगा दिया और लुंड को अपने हाँथ में पकड़कर उसकी छूट के मुहाने पर सेट करके एक करारा धक्का लगा दिया. जिसके कारन पूरा लुंड एक hi बार में उसकी छूट में समां गया. मेरा धक्का इतनी तेज़ था की उसका हाँथ पेड़ से फिसल गया और वह पेड़ से लग गई. जिसके कारण उसके मुंह से जोर से चीख निकल गई.

नताशा- aaaaayyyyyyyyyeeeeeeeeee………..mummmy…………. मर गई आआअह्हह्ह्ह्हह……….. बचाओ मुझे ये कुत्ते मादरचोद. आज मेरी जान ले लेगा . सेल ने एक hi बार में पूरा पेल दिया.

मुझे उसकी बात सुनकर बहुत जोश आ गया मैंने अपना हाँथ आगे बढाकर उसकी दोनों चुकी को कसकर पकड़ लिया और ताबड़तोड़ दक्का लगाने लगा. मेरी चुदाई इतनी जोरदार थी की उसकी चीखे आसमान में उड़ने लगी. उसको भी अब मज़ा आ रहा था मेरी रफ़ चुदाई से.

नताशा- aaahhhh….ahhhhhh….. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह… कुत्ते छोड़ो मुझे आअह्हह्ह्ह्ह. बहुत मज़ा आ रहा है और तेज़ से छोड़ो मुझे…..

मैं- हाँ randiiiiiii…….le और ले.. और अंदर तक ले.. तू तो बहुत बड़ी रुंडी है मादरचोद. देख कैसे गांड उछाल उछाल कर चुद रही है..

नताशा- आआह्ह्ह्हह्ह.. हैं मैं हूँ रंडी वो भी बस तेरी hi. तेरा hi लैंड अभी तक मेरी छूट में गया है. छोड़ मुझे और छोड़ बोशदा बना दे मेरी छूट का.

मैं- हाँ रंडी ये ले मेरा लुंड अपनी छूट में.

इतना बोलकर मैं उसकी चूचियों को दबाने लगा और उसके कन्धों पर दन्त गड़ाकर ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा.

Natasha-aaahhhhh…….uuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhh…. कुत्ते फाड़ दे मेरी छूट ko…..aaaaahhhhhhhhhhhhh.bahut खुजली मची रहती है इसमें. मिटा दे साडी खुजली इसकी. फाड् दे मेरी छूट को भोषड़ा बना दे इसे आज.

मैं- हाँ रंडी. आज तेरी छूट को छोड़कर इसका कचूमर निकल दूंगा. इतनी बुरी तरह तेरी छूट फाड़ूंगा की तू चल नहीं पायेगी.

फिर मैं ताबड़तोड़ नताशा की चुदाई करने लगा और नताशा मस्ती में न जाने क्या अनाप स्नेप बड़बड़ाने लगी. लगभग 15 मिनट की धुँवाधार चुदाई के बाद नताशा का जिस्म अकड़ने लगा. तो मैं समझ गया की उसका पानी निकलने वाला है इसलिए मैंने एक हाँथ लुंड के निचे उसकी छूट पर रख दिया और रगड़ने लगा. जिससे वो झड़ने के और नज़दीक पहुंच गई और झाड़ गई. मैं भी उसके छूट का पानी अपने लुंड पर महसूस करने के बाद ज्यादा देर टिक नहीं पहा और 5 से 6 जबरदस्त धक्के मार्कर उसकी छूट में hi झाड़ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 7

झाड़ जाने के बाद दोनों कुछ देर अपनी सांसे दुरुस्त होने का इंतज़ार करते रहे. जब दोनों की सांसे दुरुस्त हो गई तब नताशा मेरे होंठ चूमे और मेरे चेहरे पर ऊँगली फिरते हुए कहा.

नताशा- वाह अभी. मज़ा आ गया.

मैं- हाँ तू रंडी है तुझको तो मज़ा आएगा hi न.

नताशा- (मुंह फुलाकर) हाँ तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे तुमको मज़ा आया hi नहीं.

नताशा ने इतना बोलकर अपना मुंह गुस्से से दुअरी तरफ कर लिया. जब मैंने उसकी तरफ देखा तो मुझे लगा शायद मैंने कुछ ज्यादा hi बोल दिया इसलिए वह नाराज़ हो गई.

(और वीएस भी शायद आप सभी जानते हो की जब किसी लड़की पर छुडास हावी होती है तो उसको चाहे जितनी भी गन्दी गन्दी गालिया दो या गन्दी गन्दी बाटे करो वो जल्दी बुरा नहीं मानती. लेकिन चुदाई के बाद जब छुडास ख़तम हो जाती है तो वो साली.. जैसे शब्द से भी नाराज़ हो जाती है)

मैं- अरे यार मैं तो मज़ाक कर रहा था. मुझको भी तुम्हारी चुदाई करके बहुत मज़ा आया.

नताशा- अच्छा ये बताओ, आज तुमको चुदाई की इतनी तालाब क्यों लगी थी जो तुमसे बर्दास्त नहीं हुआ. आज से पहले तो ऐसा कभी नहीं हुआ तो आज ऐसी क्या बात हो गई.

मैं नताशा की इस बात को तत्न चाहता था क्योंकि चुदाई लगभग एक घंटे चली थी और रात के लगभग 8.30 हो रहे थे और मुझे घर भी जाना था. और मुझे ये भी मालूम था की आज घर में मेरी अच्छे से खातिरदारी होने वाली है.

मैं- नहीं नताशा ऐसी कोई बात नहीं है. बस आज मन कुछ ज्यादा hi चुदाई के लिए कर रहा था इसलिए तुम्हे बुला लिया.

Natasha-(Munh फुलाकर) अगर न बताना हो तो मत बताओ, लेकिन ऐसे झूठ तो मत बोलो.

नताशा के साथ इतनी रोमांचक चुदाई के बाद मेरे दिमाग से दोस्तों वाली साडी बाटे निकल गई थी. लेकिन नताशा के बात छेड़ने के बाद वो साडी बाते मुझे फिर से याद आने लगी.

मैंने जब नताशा को नाराज़ और मुंह फुलाकर बैठे देखा तो मैंने उसे बताना hi उचित समझा.

मैं- देखो नताशा मैं तुमसे जो बात कहने जा रहा हूँ. ये बात मुझे फालतू की लगती है लेकिन दोस्तों ने कुछः ऐसा दिखा दिया है जिसके कारन ये सच भी लग रहा है. मैं बहुत कंफ्यूज हूँ. क्या सही है और क्या गलत है मुझे कुछ समझ में hi नहीं आ रहा है.

नताशा- अभी ऐसी कौन सी बात है जिसने तुम्हे इतना कंफ्यूज करके रखा हुआ है.

फिर मैंने नताशा को अपने और अपने दोस्तों के बिच हुई बातचीत के बारे में बताया और साथ hi दोस्त ने जो मोबाइल पर दिखाया था उसके बारे में भी बताया. नताशा ने पूरी बात सुनाने के बाद कहा.

नताशा- तो इसमें इतना कंफ्यूज होने की क्या बात है. चुदाई की दुनिया एक ऐसी दुनिया है जहा कुछ भी असंभव नहीं है.

मैं- मतलब… तुम कहना क्या चाहती हो.

नताशा- यही की जॉब hi तुमने सुना और देखा वो बिलकुल सही है. आज कल कई घरो में इन्सेस्ट चुदाई होती है.

मैं- क्या बकवास कर रही हो यार तुम भी.

नताशा- मैं सच कह रही हूँ. मेरी जो सहेली है मोनिका. उसका बॉयफ्रेंड भी अपनी बहन को छोड़ता है.

मैं- क्या?

नताशा- हाँ. मोनिका ने मुझे खुद बताया है.

मैं- लेकिन ये सब kaise…………mera मतलब है की……………….. मेरी बात बिच में काटकर.

नताशा- अच्छा ये सब छोडो. टाइम बहुत हो गया है अब हम लोगो को घर चलना चाहिए. कैसे आए हो तुम.

मैं- मैं तो पैदल आया हूँ.

नताशा- चलो मैं तुम्हे घर छोड़ देती हूँ.

उसके बाद मैं और नताशा उसकी स्कूटी से मेरे घर की तरफ निकल गए. रस्ते में हम दोनों के बिछ कोई बातचीत नहीं हुई. मैं सरे रस्ते इन्सेक्ट चुदाई के बारे में सोचता रहा. नताशा ने मेरे घर से थोड़ी दूर पहले hi मुझे उतर दिया और bye बोलकर वो अपने घर को चली गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-8

मैं कुछः देर वही बहार खड़ा इन्सेस्ट चुदाई के बारे में सोचता रहा. फिर अपने सर को झटक कर अपने मन को मनाया की ये सब गलत है ऐसा कुछ नहीं होता है. और घर के अंदर चला गया.

जब मैं घर के अंदर गया तो रात के 9.30 बज रहे थे और घर के सभी सदस्य हॉल में बैठकर खाना खा रहे थे. जैसे hi मैं हॉल में पंहुचा सभी की नज़र मुझपर पड़ी. सविता दीदी और सरिता दीदी दोनों ने मुझे घूर कर देखा. मैं chup-chap जाकर अपनी जगह पर बैठ गया और अपने हांथों से खाना निकल कर खाने लगा.

पापा- क्यों बरखुरदार कहाँ थे अभी तक. और क्या कर रहे थे.

मैं- कुछ नहीं पापा वो बस मन नहीं लग रहा था तो बहार घूमने के लिया चला गया था.

पापा- कितनी बार कहा है की कुछः काम धाम कर लो. ताकि तुम्हारा मन भी लगा रहे और चार पैसे भी घर में आए.

मैं- जी पापा.

तभी सविता दीदी बोल पड़ी.

सविता दी- पापा ये अपने आवारा दोस्तों के साथ था अभी तक.

पापा- अभी क्या ये सच है.

मैं सर झुकाये खाना खता रहा. पापा की बात का कोई जवाब नहीं दिया. ऐसा मौका सरिता दीदी कैसे छोड़ सकती थी. उन्होंने भी तुरंत मौके पे चौका मरते हुए कहा.

सरिता दी- हाँ पापा ये अपने आवारा दोस्तों के hi साथ था अभी तक.

दोनों दीदियों की बात सुनते hi पापा को गुस्सा आ गया और उन्होंने मुझ पर चिल्लाना सुरु कर दिया.

पापा- (गुस्से से) तुझको कितनी बार कहा है की अपने आवारा दोस्तों के चक्कर में अपना फ्यूचर बर्बाद मत कर लईकिन तुझे तो मेरी बात समझ में hi नहीं आती.

(दोस्तों ऐसा नहीं है की पापा मुझसे प्यार नहीं करते थे. वो मुझसे बहुत प्यार करते थे, बूत मेरी ऐसी हरकतों के कारन मेरे फ्यूचर के प्रति चिंचित भी बहुत थे . इसीलिए मुझे डाटते और मरते थे. इसके अलावा वो मुझसे बहुत प्यार करते थे.)

मैं पापा की डाटा को चुपचाप सुनता रहा. जब मैंने दोनों दीदियों की तरफ देखा तो वो दोनों मुस्कुराते हुए खाना खा रही थी. मुझे उनकी मुस्कराहट पर बहुत गुस्सा आ रहा था. मन कर रहा था की अभी दोनों का मुंह नोच लून.

खाना खा कर सभी अपने कमरे की तरफ चले गए. जबा हाल में कोई नहीं बचा तो मैंने चुपचाप काना ख़तम किया और हाँथ धोकर अपने रूम में चला गया.

(अब थोड़ा रूम की स्थिति और उसमे कुन रहता है. तो सबसे पहले जब जीने से ऊपर चढ़ने के बाद पहला रूम मनीषा का था, उसके बाद दूसरा रूम सरिता दीदी का था, उसके बाद का तीसरा रूम सविता दीदी का था. ये रूम तभी उसे होता था जब सविता दीदी अपने ससुराल से हमारे यहाँ रहने आती थी. उनसे कमरे के ठीक सामने मेरा कमरा था, मेरे कमरे के बगल वाला रूम खली था. उस खली रूम के बगल वाला रूम थोड़ा बड़ा था और उसको स्टोर रूम बना दिया गया था. घर की रूफ पर एक 12/12 का कमरा बना हुआ था जिसमे मैंने अपना जिम खोला हुआ था. उसमे मेरे जिम के सामान के आलावा एक सिंगल बीएड लगा हुआ था. जिसमे में जिम करने के बाद 15-20 मिनट आराम करता था. और उसी से लगा हुआ एक बड़ा सा बाथरूम बना हुआ था. जो कपडे धोने के समय ज्यादातर उसे होता था.)

तो अब स्टोरी पर आते है.

जब मैं अपने कमरे में पंहुचा तो मैंने अपने कपडे बदले और अपने बीएड पर आराम करने के लिए बैठ गया. अभी थोड़ी hi देर हुई थी की दरवाज़े पर नॉक हुआ.

मैं- कौन है अंदर आ जाओ.

मनीषा- मैं हूँ भैया. ये महिषा थी. मेरी बहनों में यही थी जो मुझे बहुत प्यार करती थी.

मैं- अरे मनीषा तुम हो. आ जाओ अंदर आ जाओ.

मनीषा जल्दी के कमरे में आकर बीएड पर बैठ गई और बोली.

मनीषा- क्या भैया आप दोनों दीदी को कुछ कहते क्यों नहीं वो दोनों जब देखो तब आपको पापा से डट दिलाते रहती हैं.

मैं- अरे उनकी छोड़. तुम ये ाबाओ तुम अभी मेरे पास क्यों आई हो.

मनीषा- नीड नहीं आ रही थी भैया इसलिलिए सोचा थोड़ा आपसे बात hi कर लून.

मैं- अच्छी किया जो चली आई तुम. मुझे भी अभी नींद नहीं आ रहे थी. और बताओ क्या चल रहा है आजकर.

मनीषा- सब ठीक चल रहा है भैया.

मैं- और पढाई कैसे चल रही है तुम्हारी.

मनीषा- वो भी बहुत बढ़िया चल रही है भैया.

इसी तरह मैं और मनीषा ने काफी देर ढेर साडी बाते की और जब उसे नींद आने लगी तो वह गुड नाईट बोलकर सोनो चली गई. मैं भी आज बहुत थका था और सोने की कोशिश कर रहा था परन्तु नींद नहीं आ रही थी तो मैंने अपना मोबाइल उठाया और नताशा को फ़ोन किया. लेकिन उसने भी फ़ोन नहीं उठाया शायद सो गई थी. फिर मैंने मोबाइल साइड में रखा और मैं भी सोने की कोसिस करने लगा और कुछ hi देर बाद मैं भी नींद की आगोश में चला गया.

आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-9

सुबह मैं तड़के 5 बजे उठा और ऊपर बने जिम वाले कमरे में चला गया. मैंने करीब 1 घंटे तक जिम किया और फिर 15-20 मिनट आराम किया. जब मैं जिम करके कमरा से बहार निकला थो सुबह के 6.30 हो रहे थे और सभी घरवाले उठ गए थे.

जब मैं जिम करके बहार निकला तो सविता दीदी ऊपर चाट पर टहल रही थी. उन्होंने रोज़ की तरह एक निघ्त्य पहनी हुई थी जिसका गाला ज्यादा तो नहीं बस हल्का सा बड़ा था जिसमे से उनकी दोनों चूचियों का मिलान होता है वह से हलकी से दरार नज़र आ रही थी. उनकी निघ्त्य थोड़ी पतली थी जिससे उनकी ब्रा की पत्तियां भी नज़र आ रही थी. उनकी 36”की चूचियां एकदम पहाड़ के दो गुम्बद की तरह लग रही थी. जिसे देखने के बाद मेरे मन में हलचल होने लगी. मैं उनकी चूचियों को लगातार घूरता रहा.

(ऐसा नहीं था की दीदी ने पहली बार निघ्त्य पहनकर मेरे सामने आयी थी. दोनों दीदी रात में हमेशा निघ्त्य hi पहनती थी. और सुबह नहाने के बाद hi उसे बदलती थी. सुबह उठने सा लेकर नहाने तक वो मेरे सामने निघ्त्य में hi रहती थी. लेकिन मेरे लिए ये सामान्य बात थी. मेरे मन में उन दोनों के लिए कभी गंदे विचार नहीं आये थे. लेकिन कल दोस्तों के साथ हुई बातचीत और मोबाइल पर इन्सेस्ट कहानिया देखि थी और फिर रही सही कसार नताशा ने ये कहकर पूरी कर दी थी की उसकी सहेली का बॉयफ्रेंड अपनी hi बहन को छोड़ता है. ये सब बातो के बाद मेरा अपनी बहनों के प्रति नजरिया थोड़ा बदलने लगा था और यही कारन था की आज मैंने अपनी सबसे बड़ी बहन जिसकी शादी हो चुकी थी और एक 2 साल का बच्चा भी था उसको गन्दी नज़र से देखने लगा.)

कुछ देर तक वो चाट पर टहलती रही और मैं उसकी पहाड़ जैसी चूचियों को तदाता रहा. जब काफी देर बाद मैंने उसकी चूचियों से नज़र हटा कर उसके चहरे की तरफ देखा तो वो मुझे गुस्से से देख रही थी. जिसे देखकर मैं दर गया और अपनी नज़्ज़ार उसकी चूचियों पर से हटा ली.

सविता दी- अभी तेरी नज़र कहा थी.

मैं- कहीं तो नहीं दीदी. मैं तो आपको hi देख रहा था.

सविता दी. मुझे देख रहा था की कुछ और देख रहा था (गुस्से में)

मैं- नहीं दीदी मैं तो आपको hi देख रहा था.

सविता दीदी ने चूँकि मुझे अपने चूचिया ताड़ते हुए देख लिया था इसलिए मेरे बहनो का उनपर कोई असर नहीं हो रहा था. तो उन्होंने चिल्ला कर कहा.

सविता दी- तू कितना आवारा हो गया है. बहार तक तो फिर भी ठीक था लेकिन अब तू इतना ठरकी हो गया है की अपनी बहन को भी गन्दी नज़र से देखने लगा है. रुक जा अभी पापा को बताती हूँ तेरी ये करतूत.

मैं- नहीं दीदी मैं सच कह रहा हूँ. आप घूम रही थी तो मैं आपको देख रहा था बस और कुछ नहीं.

सविता दीदी- मैं सब जानती हु, मैं तेरी राग राग सा वाकिफ हूँ. तू क्या देख रहा था ये मुझसे छुपा नहीं है. मैं अभी पापा को सब बताती हूँ.

जब मैंने देखा की मेरी किसी बात पर दीदी को भरोषा नहीं हो रहा है और वो अब पापा को बताकर hi मानेंगी तो मैंने सॉरी मांग लेने में hi अपनी भलाई समझी.

मैं- (उनके पेअर पकड़कर) प्ल्ज़….. दीदी पापा को मत बताना.

सविता दीदी- क्यों न बताऊ तूने हारकर hi ऐसी की है. मैं पापा से बताकर hi रहूंगी.

मैं- सॉरी… दीदी गलती हो गई जो मैंने ऐसे देखा आपको अब आगे से ऐसी गलती नहीं होगी (मैं लगभग रोने वाला हो गया था. शायद दीदी को मेरे ऊपर तराश आ गया था तो उन्होंने कहा)

सविता दी- ठीक है ये पहली और आखिरी बार है जो मैंने तुझे माफ़ किया. लेकिन आगे से तूने ऐसी कोई भी हारकर की तो मैं पापा को बताने में तनिक भी देर नहीं करुँगी.

( और इतना कहकर वह वह से निचे चली गयी. मैं उन्हें जाते हुए पीछे से देखता रहा. मेरी नज़र उनके पहाड़ जैसे चूतड़ों पर पड़ी तो मेरा मुंह खुला का खुला रहा गया. थोड़ी दूर जाने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो मैंने अपनी नाज़ह उनके चूतड़ों से हटा ली. लेकिन शायद उन्होंने ये भी देख लिया की मैं उनके चूतड़ों को घर रहा था. तो उन्होंने गुस्से से कहा.

सविता दीदी. तू अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आएगा न. रुक अब तो पापा को बताकर hi रहूंगी.

मैंने रोनी सूरत बनाकर हांथो से कण को पकड़कर इशारे से सॉरी बोलै और पापा को न बताने के लिए कहा. लेकिन दीदी बिना कोई जवाब दिए hi निचे चली गई. और मैं अपनी हालत पर ऊपर hi खड़ा रहा. अब मुझे निचे जाते हुए भी दर लग रहा था. की कही पापा की मार न पड़े. इसलिए मैं वापस छत पर hi बने कमरे आ गया और बीएड पर बैठ गया.

सुबह के लगभग 8 बजे तक मैं ऊपर hi बैठा रहा. जब मैं निचे नहीं गया तब. सरिता दीदी मुझे ढूढ़ते हुए ऊपर आई. शायद मां ने उन्ही मुझे बुलाने भेजा था. जब वह ऊपर मेरा कमरे में आई और बोलो.

सरिता दी- तू अभी तक यहाँ क्या कर रहा है.

जब मैंने अपनी नज़र आवाज़ की दिशा में घुमाई तो मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो gai.kyoni आज सरिता दीदी ने एक t-shirt और कापरी पहनी हुई थी उनकी t-shirt इतनी तीते थी की उनकी 34”की चूचियां t-shirt फाड़कर बहार आने को हो रही थी.

(सरिता दीदी ऐसे कपडे रोज़ hi पहनती थी और मैं उन्हें रोज hi ऐसे कपड़ो में देखता था लेकिन अभी तक कभी भी मेरे मन में गलत विचार नहीं थे मैं उन्हें बहन की नज़र से hi देखता था लेकिन कल के बाद सबकुछ लगभग बदल रहा था.)

मेरे जवाब न देने पर उन्होंने दोबारा कहा.

सरिता दी- अभी……. तू अभी तक यहाँ क्या कर रहा है. और दीदी के साथ तूने क्या किया. वो बहुत गुस्से में निचे गाइट hi.

मैं- (उसकी चूचियों को तिरछी नज़रो से देखते हुए) मैंने क्या किया. कुछ व्ही तो नहीं.

शायद उन्होंने भी मेरे नज़रो को अपनी चूचियों पर महसूस कर लिया और इसलिए मुड़कर बहार जाते हुए उन्होंने गुस्से से कहा.

सरिता दी- जल्दी से निचे आ पापा बुला रहे है.

पापा बुला रहे हैं ये सुनकर मेरी तो गांड hi फैट गई. मुझे लगाने लगा की शायद दीदी ने उन्हें सबकुछ बता दिया है और आज मेरी अच्छी तरह से ठुकाई होने से कोई नहीं रोक सकता. मैं उस समय को कोसने लगा जब मैंने दोस्तों की बाते सुनी और मोबाइल में ऐसी गन्दी कहानिया देखि और नताशा से इन्सेस्ट के बारे में बात की. मैं मन hi मन भगवान् का नाम लेकर निचे की तरफ चल पड़ा.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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