Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 13 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-104

सरिता di-pahla थप्पड़ इसलिए था की तुमने मुझे धोखा देकर छुड़वाने पर मज़बूर किया और दूसरा थप्पड़ इसलिए था की जब तुझको पता था की मैं तुझसे छुड़वाने के लिए इतनी तड़प रही हूँ तो तुमने मुझको छोड़ने में इतनी देरी क्यों की.

दीदी की बात सुनकर मैं हंसने लगा और दीदी भी अपने कण पकड़कर सॉरी का इशारा करते हुवे मुस्कुराने लगी.

अब आगे.

थोड़ी देर हम दोनों ऐसे hi घंटे और मुस्कुराते रहे तभी दीदी ने कहा.

सरिता दी- दूसरी बात अभी रह गयी है वो क्या है.

मैं- वो तो मैं कभी नहीं बताउगा आपको. आप फिर गुस्सा हो जाओगी और मरोगी मुझे.

सरिता दी- अब ज्यादा नाटक मत कर. जब तुमने मेरे साथ गेम खेलकर मुझे छोड़ दिया तब मैं तुझसे नाराज़ नहीं हूँ. तो वो बात इससे बड़ी और शॉकिंग तो नहीं हो सकती न.

मैं- वही तो. ये बात उससे भी ज्यादा बड़ी और शॉकिंग है. इसीलिए तो नहीं बता रहा हूँ.

सरिता दी- बता न अभी. देख तुमने जो चाहा मुझसे मैंने तुझको दिया. और तुमने भी बोलै था की गांड मिल जाने के बाद तू मुझे दोनों बात बताएगा. प्ल्ज़ बताओ न मैं सच में नाराज़ नहीं होऊंगा.

मैं- ऐसे नहीं. पहले एक जोरदार किश देखर मुझे यकीं दिलाओ की तुम मुझसे नाराज़ नहीं होगी.

मेरी बात सुनकर दीदी ने तुरंत अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिया और चूसने लगी. मैं भी दीदी के होंठ चूसने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी मेरे होंठ छोड़कर मुझसे अलग हुई तो मैं सोफे से उठ गया और किचन की तरफ जाने लगा तो दीदी ने कह.

सरिता दी- क्या हुवा अभी कहा जा रहा है.

Main-bas एक मिनट में आया.

मैं किचन में जाकर दो गिलास पानी लिया और वापस हॉल में आ gaya.ek गिलास मैंने दीदी को दिया और दूसरा मैं पिने लगा. पानी पिने के बाद मैंने दोनों गिलास डाइनिंग टेबल पर रख दिए और आकर सोफे पर बैठ गया. और दीदी से कहा.

मैं- आप निचे क्यों बैठी हैं यहाँ मेरी गॉड में बैठ जाओ.

इतना कहकर मैंने दीदी को उठाकर अपनी जांघो पर बैठा लिया और दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी में मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रखकर कहा.

सरिता दी- अब बता कौन सी बात है.

मैं- आपने उस दिन कहा था की आपके और नताशा के अलावा 3ऋ कौन है जिसको मैंने छोड़ा है.

सरिता दी- हाँ मुझे जानना है की वो कौन है.

Main-main बता तो रहा हूँ लेकिन आप वडा करिये की आप इस बात का जीकर किसी से नहीं करेंगी. किसी से नहीं मतलब किसी से नहीं. और जिसके बारे में बता रहा हूँ अगर वो आपके सामने आ जाएगी तो आप उसे उसी तरह प्यार और सम्मान देंगी. जिस तरह अब तक देती आई हैं. उसके लिए अपने मन में कोई नफरत का भाव मत रखना.

सरिता दी- मैं ऐसा क्यों करुँगी. आखिर वो है कौन जो तू ऐसा बोल रहा है.

मैं- पहले वडा करो. फिर बताऊंगा.

सरिता दी- मैं तेरी कसम कहती हूँ. तू जैसा बोलेगा मैं वैसा hi करुँगी.

मैं- अपनी सविता दीदी

मेरी बात सुनकर दीदी आखे फाड़कर मुझे देखने लगी. जैसे उनको विस्वाह hi न हो की कयने सावता दीदी ऐसा कुछ किया है. वो आश्चर्य चकित होकर मुझसे बोली.

सरिता दी- देख अभी. मैं इस समय मज़ाक के मूड में बिलकुल भी नहीं हूँ. ये तू क्या अनाप सनाप बोल रहा है दीदी के बारे में. कुछ तो शार्क कर. कमीनेपन की भी एक हद होती हैं.

दीदी की बात सुनकर मैंने टाइम देखा तो 12.00 बज गए थे. तो मैंने सविता दीदी को फ़ोन करने का सोचा और मोबाइल उठाकर उनका no. पर कॉल करने लगा और दीदी से कहा.

मैं- अब बताना क्या है. तुम उसकी आवाज़ सुन लो खुद समझ जाओगी, लेकिन एक शब्द भी बोलना मत. कोई आवाज़ मत करना. नहीं तो उसे पता चल जाएगा की कोई मेरे साथ है.

दीदी ने अपना सर सहमति में हिलाया तो मैंने कॉल वाली बत्तों पर प्रेस कर दिया और मोबाइल स्पीकर में दाल दिया. 5 रिंग के बाद दीदी ने फ़ोन उठा लिया और कहा.

सविता दी- hello अभी. इतनी रात को कैसे याद किया.

मैं- ही जानेमन. बस तुम्हारी याद आ गयी तो मैंने याद कर लिया.

जब सविता दीदी ने उधर से सरिता दीदी की की आवाज़ सुनी तो उन्हें बिलकुल भी विस्वास नहीं हो रहा था की ये सब क्या हो रहा है. वो आँखे फाड़ फाड़ कर मुझे देखे जा रही थी. मैंने अपने बात आगे बढ़ाते हुवे कहा.

मैं- क्या कर रही हो सविता जो अभी तक जग रही हो.

सविता दी- कुछ नहीं बस मूवी देख रही थी. और तुम बताओ क्या कर रहे हो.

मैं- कुछ नहीं सविता. सरिता दीदी ने तरबूज खाने को दिया था. थोड़ा ज्यादा हो गया तो उसी को पचा रहा hoon.(ye बात मैंने सरिता दीदी की गांड को सहलाते हुवे कहा.)

सविता दी- इतनी रत को तरबूज खाने की क्या जरूरत थी. दिन में खाना चाहिए था.

मैं- मैं क्या करू सरिता दीदी से बोलै था तो वो बोली दिन में कुछ और खा लो तरबूज रत में खिलाऊंगी.

सविता दी- चल ठीक है. और बताओ क्या चल रहा है.

मैं- अपना क्या चलना है सविता. चल तो तुम्हारा रहा होगा. दिन रात जीजा जी के साथ लगी रहती होगी.

सविता दी- उनका तो पूछ hi मत. जब से तुमने मुझे छोड़ा है तब से उनके छुड़वाने में मज़ा hi नहीं आता अब.

ये बात सुनकर सरिता दीदी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने चकित होकर अपने मुंह पर हाँथ रख लिया और मेरी तरफ घूर घूर कर देखने लगी. मैंने अपनी बात जारी रखते हुवे कहा.

मैं- ऐसा क्या. लेकिन तुम hi तो मुझे छोड़कर चली गई थी जीजा जी के साथ.

सविता दी- तो क्या करती. आखिर पति हैं मेरे वो. भले नाम के hi हो. अच्छा ये बता कब आ रहा है मेरे पास. मैं तेरे लुंड के बिना बड़ी बचें हूँ. अब रहा नहीं जा रहा है.

मैं- कैसी बात कर रही हो सविता. मैं तुम्हारा भाई हूँ और तुम मेरी बहन हो. तो मुझसे ऐसी बाते मत करो.

सविता दी- चल हैट सेल. जब मुझे छोड़ा था तब ये ख्याल नहीं आया की मैं बहन हूँ तेरी. अब मैं तेरी बहन नहीं रह गई हूँ. मैं तेरी और तेरे लुंड की गुलाम हो चुकी हूँ.

दीदी की बात सुनकर सरिता दीदी ने अपना एक हाँथ मिक पर रख दिया और धीरे से कहा.

सरिता दी- बाप रे बाप. ये सब क्या हो रहा है.

मैंने उन्हें चुप रहने का इशारा किया और सविता दीदी से बोलै.

मैं- चलो ठीक है बहुत जल्दी मैं आने की कोशिश करता हूँ. अच्छा तब टेक 1-2 फोटो भेज दो उसी से काम चला लूंगा.



मेरे कहने के बाद दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे उन्होंने ब्रा पहनी हुई थी. मैंने उस फोटो को सरिता दीदी को दिखाया और दीदी से बोलै.

एक और फोटो भेजो अच्छी वाली कोई.

इसके कुछ देर बाद दीदी ने अपनी एक और फोटो भेजी जिसमे उन्होंने अपनी नंगी चूचियों पर पल्लू डाला हुवा था लेकिन कपडा इतना पतला था की उनकी चूचिया नज़र आ रही थी.



मेरे फिर से कहने पर दीदी ने एक और फोटो भेजी जिसमे वो पूरी नंगी थी. और मुस्कुरा रही थी. इन सभी फोटो को मैंने सरिता दीदी को दिखाया और दीदी को bye बोलकर फ़ोन कट कर दिया.



जब मैंने दीदी की तरफ देखा तो उन्होंने मुझे तीन चार थप्पड़ खींचकर जड़ दिया और गुस्से से मेरी तरफ देखते हुवे कहा.

सरिता दी- सेल कुत्ते कमीने. तू सच में छूट के लिए वहसि हो गया है. तुझे शर्म नहीं आई ऐसा करते हुवे. अरे ये तो सोच लेता की वो बहन है तेरी. उनकी शादी हो गई है. क्यों उनकी शादीशुदा ज़िन्दगी तबाह करने पर तुला हुवा है. तू छूट के लिए इतना अँधा हो गया है की तूने अपने घर में hi डाका दाल दिया. अरे जब इतनी hi आग लगी थी तेरे लुंड में तो जाकर कही रंडी छोड़कर अपनी आग शांत कर लेता बहनचोद.

दीदी इस समय बहुत गुस्से से बोल रही थी. वो मेरी गॉड से उठकर कड़ी हो गई थी. मैंने दीदी की तरफ देखा तो उनकी आँखे गुस्से से लाल हो रही थी. मुझे थोड़ा बहुत अंदाज़ा था की दीदी का रिएक्शन इस तरह से हो सकता है इसलिए मैंने अपने आपको पहले से hi तैयार कर लिया था. मैं अपना सर झुकाये बैठा रहा दीदी की बात सुनकर भी जब मैंने कुछ नहीं कहा तो दीदी ने फिर कहा.

सरिता दी- बोलता क्यों नहीं सेल. क्या मैं काफी नहीं थी क्यात ेरे लिए जो तूने दीदी के साथ इतना गलत काम किया. तुझे तो चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना सर उठाया और एकदम शांत आवाज़ में दीदी से कहा.

मैंने- पहले आप शांत हो जाओ और शांति से मेरी बात सुनो. उसके बाद hi किसी निष्कर्ष पर पहुंचना.

सरिता दी- इतना सब करने के बाद बोल रहा है शांत हो जाऊ. चल ठीक है. बता मैं भी तो सुनु की कौन सी मनगढंत कहानी तू मुझे सुनना चाहता है अपने बचाव में.

मैं- देखो दीदी में जो कहने जार अहा हूँ. उसको एकदम ध्यान से सुनो और अपना गुस्सा थूककर ठन्डे दिमाग से मेरी बात को सोचना. तुम्हे खुद पता चल जाएगा की मैंने सही किया या गलत किया.

इतना कहकर मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो मुझे गुस्से से hi घूरे जा रही थी. मैंने फिर अपनी गार्डन निचे करके कहना शुरू किया.

मैं- आपको तो अच्छी तरह से याद है की दीदी की शादी को 4 साल हो चुके हैं. और इन चार सालो में वो कितने दिन अपने ससुराल में रही हैं. मुझे बताओ.

सरिता di(ghor कर)- इन सब का उस बात से क्या लेना देना.

मैं- अरे यार. लेना देना है तभी तो बता रहा हूँ. पहले मेरी बात पूरी सुन तो लो.

सरिता दी- लगभग 1 साल

मैं- और जीजा जी के साथ कितने दिन रही हैं.

सरिता दी- यही कोई 2-2.5 महीना.

मैं- हाँ तो सुनो अब. किसी लड़की की जब तक शादी नहीं हुई होती तब तक वो अपने जिस्म की प्यास बर्दास्त कर सकती है. लेकिन एक बार शादी हो जाने के बाद पति से अगर चुदाई हो जाये तो उसे नियमित चुदाई की जरुरत महसूस होती है. और यही जरुरत दीदी को भी महसूस होती थी, लेकिन उन्होंने ये बात किसी से शेयर नहीं किट hi. उन्होंने अपने जिस्म की प्यास को अपने अंदर अभी तक दबा कर रखा था. लेकिन कब तक दबा कर रखती. उस दिन जब कंप्यूटर खरीदने जा रहे थे दोनों लोग तो सामने जानवर आ जाने के कारन मैंने अचानक ब्रेक लगाया तो दीदी का हाँथ गलती से मेरे लुंड पर आ गया.

इतना कहकर मैंने दीदी की तरफ देखा जो मुझे घूरते हुवे मेरी बात सुन रही थी मैंने आगे कहना शुरू किया.

मैं- उसी दिन उनको मेरे लुंड को लम्बाई और मोटाई के बारे में पता चला, क्योंकि जीजा का लुंड मुझसे 3 इंच छोटा है, जो दीदी ने मुझको बताया. दीदी पहले से hi प्यासी थी और बहार किसी और से छुड़वाने में उनको बदनामी का डार्ट है. इसलिए उन्होंने मुझसे छुड़वाने की सोची, उसके बाद से दीदी एकदम बदल गई. तुम्हारी तरह वो भी मुझे अपना अधनंगा जिस्म दिखने लगी. अब यहाँ पर मेरे पास दो रस्ते थे. या तो मैं दीदी को छोड़कर उनकी प्यास भुजाउ. या फिर दीदी को किसी और से छुड़वाने के लिए छोड़ दूँ.

इतना कहकर मैंने दीदी की तरफ फिर से देखा तो वो अभी भी मुझे घूरते हुवे मेरी बाते सुन रही थी. मैंने अपनी बात जारी रखते हुवे कहा.

मैं- मैंने भी बहुत सोच विचार किया इस बारे में तो मुझे पहला hi रास्ता सही लगा, नताशा के चले जाने के बाद मुझे भी किसी के साथ की जरूरत थी और दीदी को भी किसी के साथ की जरूरत थी. तो अगर हम दोनों ने एक दुसरे का साथ देकर अपनी जरूरतों को पूरा किया तो इसमें क्या गलत किया.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी किसी सोच में डूब गई. लगभग 10 मिनट तक हॉल में शांति छै रही. इस शांति को दीदी ने तोड़ते हुवे कहा.

सरिता दी( थोड़ा गुस्से भरे स्वर में.)- फिर भी मैं यही कहूँगी की तुमने जो दीदी के साथ किया वो गलत है. चलो तुम्हारी तो ठीक है मर्द सेल ठरकी होते hi हैं. लेकिन दीदी को तो सोचना चाहिए था की तू उनका भाई है. वो कैसे एक भाई के साथ ऐसी गन्दी हरकत कर सकती हैं.

Main-Achha. अगर मैं उनका भाई हूँ तो आपका क्या लगता हूँ मैं.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी एकदम खामोश हो गई और मेरी तरफ देखने लगी. मेरी इस बात से उनका गुस्सा कुछ हद तक काम हो गया था. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- देखो दीदी. अगर आपको लगता है की सविता दीदी ने गलत किया है तो फिर आपने भी तो गलत किया है. अगर मैं उनका भाई हूँ तो आपका भी तो भाई hi हूँ. और एक बात और जब आप कुंवारी होकर भी अपने प्यासे जिस्म के हांथो मजबूर होकर मेरे साथ सो गई. तो आप सोचो वो तो शादीशुदा हैं और वो पहले से hi जीजा जी से चुद चुकी थी. तो उनके जिस्म में आपसे ज्यादा प्यास है. एक भाई बहन के रिश्ते से अगर देखा जाये तो हम तीनो ने गलत किया है, लेकिन अगर एक औरत और मर्द के नजरिये से अगर देखे तो न अपनी कोई गलती की है, न सविता दीदी ने और न hi मैंने. बाकि अगर आपको अब भी लगता है की मैंने और दीदी ने गलत किया है तो आप ने भी गलत किया है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी का गुस्सा एकदम शांत हो गया. वो आकर मेरे बगल सोफे पर सर झुककर बैठ गई और सोचने लगी. थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना सर ऊपर किया और मेरी तरफ देखते हुवे कहा.

सरिता दी- सच में अभी तू बहुत बड़ा कमीना है. लेकिन फिर भी मैं पूरी परिस्थिति को जानते हुवे तुझे और दीदी को गलत भी नहीं ठहरा सकती. अभी मैं तुमसे नाराज़ भी नहीं हो सकती लेकिन दीदी कैसे, मेरा तो इस समय दिमाग hi काम नहीं कर रहा है. मुझे तो कुछ समझ में hi नहीं आ रहा है. की ऐसा कुछ हुवा है.

मैंने जब देखा की दीदी अब गुस्सा नहीं हैं और नार्मल बाते कर रही हैं तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी कैसे का क्या मतलब, और इसमें समझने और न समझने वाली क्या बात है. जैसे तुम पैट गई मुझसे वैसे दीदी भी पैट गई.

सरिता दी- सेल तू बहुत बड़ा कमीना है. मुझे तो तूने पटाया hi. तूने इतनी स्ट्रिक्ट दीदी को भी पता लिया. मन्ना पड़ेगा कमीने तेरे दिमाग को. तेरे से तो कोई भी नहीं बच सकती अब. जो लड़का अपनी दो बड़ी बहनो को पाटकर छोड़ सकता है वो दुनिया की किसी भी लड़की को पता सकता है.

मैं- तारीफ के लिए धन्यवाद सरिता. तुम नाराज़ तो नहीं हो न दीदी के बारे में जानकर.

सरिता दी- चलो अच्छा hi हुवा जो दीदी को तुमने पता लिया. नहीं तो दीदी हमेशा दुखी रहती थी जीजा जी के कारन. मुझे दीदी ने इस जीजा जी के बारे में पहले hi बता रखा था. लेकिन मुझे अंदाज़ा नहीं था की इस सेतुएशन में हैं. चलो अच्छा hi हुवा जो सुख उन्हें जीजा जी से नहीं मिला वो तुमने उनको दिया.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने कहा.

सरिता दी- ऐसे क्या देख रहा है. दीदी मुझे हर बात शेयर करती थी. बस इस बात को उन्होंने छिपा लिया.

मैं- चालो अच्छा हुवा की तुमको बुरा नहीं लगा. मैं तो समझ रहा था की तुम नाराज़ हो जाओगी.

सरिता दी- बुरा तो मुझे बहुत लगा अभी. और मेरा मन तो कर रहा था की मैं तेरा मुंह नोच लूँ लेकिन साडी सेतुएशन jan-ne के बाद मैं दीदी के लिए मैं बहुत खुश हूँ. मेरी तरह उन्होंने भी बहार जाने के बजाय घर में hi ये सब किया.

मैं- उन्होंने आपकी तरह नहीं किया अआपने उनकी तरह किया है (हँसते हुवे)

मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराते हुवे मुझे मरने लगी. थोड़ी देर तक हॉल में बैठने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अब साडी रात यही बैठे रहने का इरादा है क्या. चलो कमरे में. मुझे बहुत जोर की नींद आ रही है.

मैंने दीदी को शहर देकर उनके कमरे में ले गया और उन्हें बीएड पर लिटाकर उन्ही बगल में मैं भी सो गया. सुबह मेरी नींद पहले खुली तो मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो गहरी नींद में सो रही थी, उनके चेहरे पर सुकून था. दीदी बहुत hi प्यारी लग रही थी. मैंने दीदी के ऊपर झुककर माथे पर किश कर लिया और उनके कमरे सी निकलकर ऊपर अपने कमरे में चला गया. और बिस्टेर पर लेट गया. और सोचने लगा.

Main-(man में)- मैंने सरिता दीदी को भी छोड़ लिया. अब मेरा नेक्स्ट टारगेट मनीषा है, लेकिन उसको तो पहले से hi सब पता है. तो क्या वो आसानी से मुझसे मन जाएगी ये वो अपनी हरकतों से मुझे तैसे कर रही है. जो भी हो. मुझे जल्द से जल्द मनीषा को भी अपने निचे लाना होगा. ताकि कभी कोई रुकावट न आये चुदाई करने में.

मैं यही सब सोच रहा था की तभी सरिता दीदी की कॉल आई उन्होंने मुझे अपने कमरे में बुलाया था. जब मैं दीदी के कमरे में पंहुचा तो दीदी बिस्तर पर बैठी हुई थी मैंने उनसे कहा.

मैं- क्या हुवा दीदी. आपने बुलाया.

सरिता दी- मुझे दर्द हो रहा है भाई. ठीक से कड़ी नहीं हो प् रही हूँ.

सरिता di(thoda गुस्से में) सेल मेरी छोटी सी गांड में इतना बड़ा लुंड दाल दिया. तूने सोचा भी की मेरी गांड का क्या हॉल हुवा होगा.

मैं- वो तो ठीक है, लेकिन कर रत उसी छोटी सी गांड में तुम मेरा पूरा लुंड लेकर मजे से छुड़वा रही थी. गलत कह रहा हूँ क्या मैं.

सरिता दी- हाँ ठांण उसी गलती की सजा मैं भुगत रही हूँ कमीने. दो कदम भी चलना मुश्किल हो रहा रहा है. टंगे फैला फैला कर भी ठीक से नहीं चल प् रही हूँ. मेरी छूट अभी भी सूजकर कुप्पा बानी हुई है और गनद के तो पूछो hi मत. वो इतना दर्द कर रही है की लैट्रिन भी करना मुश्किल लग रहा है. नष्पिते तू बहुत बुरी तरह छोड़ता है. कोई और लड़की होती तो मर hi जाती तेरी इस चुदाई से.

मैं- अरे दीदी क्या बात लेकर बैठ गाइट ुम. छोडो न रात गए बात गए. चलो मैं तुमको बाथरूम तक लेकर चलता हूँ. उसके बाद फ्रेश होकर दवा खा लेना और आराम करना. मैं बहार से खाना आर्डर कर दे रहा हूँ.

इतना कहकर मैं दीदी को सहारा देकर बाथरूम तक ले गया और फ्रेश होने के बाद दीदी को उनके कमरे में पहुंचकर किचन में आया और चाय बनाकर बिस्किट और नमकीन लेकर दीदी के कमरे में गया. उन्होंने चाय नास्ता किया तो मैंने उन्हें पेनकिलर खिलाकर निचे आ गया और खाने के टाइम में खाना आर्डर किया. दोनों ने मिलकर दीदी के hi कमरे में खाना खाया. दीदी ने फिर से एक पेनकिलर ले कर आराम करने के लिए लेट गई.

उन दिन कुछ नहीं हुआ क्योंकि दीदी इस स्थिति में नहीं थी. तो मैं भी अपने मोबाइल और t.v. में व्यस्त रहा. शाम को बेल्ल बजी तो मैंने दरवाज़ा खोला. सामने मां, पापा और मनीषा खड़े थे. मैंने उन्हें अंदर आने के लिए रास्ता दिया. मां पापा और मनीषा आकर हॉल में बैठ गए. मैंने उन्हें पानी ला कर दिया. बेल्ल की आवाज़ सुनकर सरिता दीदी भी अपने कमरे से लंगड़ाते हुवे निचे आने लगी तो मैंने आगे बढ़कर सीढ़ियों से उन्हें निचे लेकर आया. उसको देखकर मम्मी ने पूछा.

मम्मी- तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही हो सरिता. क्या हुवा तुम्हे.

सरिता दी- कुछ नहीं मम्मी वो सीढ़ियों से उतारते हुवे कल रात मोच आ गाइट hi. अभी दवा ले आया है. अभी खाई है मैंने.

जिसका जवाब हमने पहले से hi तैयार रखा था की अगर पापा लोगो के आने तक अगर दीदी ठीक नहीं हुई तो क्या बहाना करना है. जब दीदी ने ये बात कही तो मेरी नज़र मनीषा पर thi.didi की बात सुनकर वो मुझे देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी. तभी मां ने कहा.

मम्मी- कितनी बार तुम सब से कहा है की सीढ़ियों पर आराम से आया जाया करो लेकिन तुम सब घोड़े की तरह दौड़ते रहते हो. अब भुगतो.

इतना कहकर मम्मी और पापा वह से अपने कमरे की तरफ चले गए. अब हॉल में हम तीनो hi बचे थे. मनीषा अभी भी मुस्कुरा रही थी जब दीदी ने उसको मुस्कुराते हुवे देखा तो उन्होंने कहा.

सरिता दी- तुझे क्या हुवा तू क्यों मुस्कुरा रही है.

मनीषा- मैं भैया के बारे में सोचकर मुस्कुरा रही हूँ. कहा तो रात को आप उनको तरबूज खिलने वाली थी. लेकिन उल्टा भैया को तरबूज मिला hi नहीं उल्टा उन्हें आपको दवा खिलने पद रही है.

मनीषा की बात सुनकर सरिता दीदी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी. फिर मनीषा को देखकर जवाब दिया.

सरिता दी- नहीं मनीषा ये तरबूज अभी को देने के बाद हुवा. ये तरबूज देखकर एकदम जानवर बन गया था. इसी चक्कर में मेरा ये हॉल हुवा है.

मनीषा- (मुस्कुरा kar)Chalo ठीक है अब जो हो गया वो हो गया अब दवा खाओ और कुछ दिन आराम करो. किचन का काम मैं देख लूंगी.

मनीषा इतना बोलकर अपने कमरे में चली गई. दीदी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी की उन्होंने मनीषा को कैसे बेवकूफ बनाया और मैं मुस्कुरा रहा था की मनीषा ने दीदी को कैसे बेवकूफ बनाया. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को उनके कमरे में पहुंचकर अपने कमरे की तरफ जाने लगा. अभी मैं मनीषा के कमरे के सामने पंहुचा hi था की मेरे मन में एक ख्याल आया की क्यों न मनीषा के कमरे में चला जाये. यही सोचकर मैंने मनीषा के कमरे के दरवाज़े पर हाँथ रख. तो दरवाज़ा खुल गया और मैं अंदर आ गया. अंदर आने के बाद सामने का नज़ारा देखकर मैं तो जैसे दरवाज़े के पास जैम सा गया. और मेरे मुंह से निकला.

मैं- आईये टेरिइइइ kiiiiiiiiii. ये क्याआ.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
अपडेट-105

जैसे hi मैं मनीषा के कमरे का दरवाज़ा खोलकर अंदर गया. मनीषा अपने बिस्टेर पर एक झीना सा कपडा पहन कर बैठी थी.



मैं दरवाज़े पर hi ठगा सा खड़ा रहकर उसे निहारे जा रहा था. उसने भी मुझको कमरे में आता देख लिया लेकिन उसकी तरफ से अपने बदन थकने की कोई कोशिश नहीं की गई. मैं उसकी चूचियों को देख रहा था और वो मुझे. उसकी चूचियों के देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया था. जिसको मैंने अपने हाँथ से अपने ुन्दरवरे के ऊपर से ुदजूस्ट करने लगा. वो मेरे लैंड को देखने लगी और अपने होंठ पर जीभ फिरने लगी. थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा.

मनीषा- क्या हुवा भैया. ऐसे क्या देख रहे हो.

मैं- सामने बड़ा और सुन्दर नज़ारा है उसी को देख रहा था.

मनीषा- अरे भैया दूर से अच्छा नज़ारा नहीं दिखेगा. नजदीक आकर देखिये. बहुत hi सुन्दर है.

मनीषा ने ये बात मेरे लुंड को देखते हुवे बोली थी. उसकी नज़रो में hi इतना जादू था की मेरा लुंड लोअर में hi उछलने लगा था. मनीषा की बात सुनकर मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया और उसकी चूचियों को देखने लगा. मनीषा ने भी एक ऐडा के साथ ूँगी अपने कपडे के फंसकर अपना हाँथ अपने सर पर रख लिया



वो बिस्तर पर बैठी थी इसलिए उसके आँखों के ठीक सामने मेरा कड़ा लुंड झटके मार रहा था. मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो मेरे लुंड को hi देख रही थी तो मैंने उसकी चूचियों को देखते हुवे अपने लैंड को सहलाने दिया. थोड़ी देर लुंड देखने के बाद मनीषा ने मेरे चेहरे की तरफ देखते हुवे कहा.

मनीषा- क्या हुवा भैया खुजली हो रही है क्या.

मैं- (मनीषा की आँखों में देखकर लुंड मसलते हुवे) हाँ मनीषा इतना सुन्दर नज़ारा पास से देखकर खुजली होने लगी है.

मनीषा- आप कहो तो मैं आपकी खुजली मिटा दूँ.

मैं – ये भी कोई पूछने की बात है मनीषा. जल्दी मिटा दो मेरी खुजली.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपने डरोएर से निकिल पाउडर दिया और कहा.

मनीषा- लो भैया इसको लगा लो थोड़ी देर बाद खुजली मिट जाएगी. वैसे इतना बड़ा है की खुजली होने पर आपको दिक्कत होती होगी.

मैं- क्या बड़ा है मनीषा.

मनीषा- अरे आपके लोअर का नधा. खुजली करते समय उंगलियों में फंस जाता होगा. तो आपको खुजलाने में दिक्कत होती होगी.

मनीषा की बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई और मनीषा भी मुस्कुराने लगी. थोड़ी देर बाद मनीषा ने कहा.

मनीषा- वैसे भैया. दीदी ने जो तरबूज आपको खिलाया था. वो बहुत टेस्टी रहा होगा न.

मैं- हाँ मनीषा. बहुत hi ज्यादा टेस्टी था. मुझे दीदी का तरबूज खाने में बहुत मज़ा aaya.main तो दोबारा खाना चाहता था, लेकिन दीदी ने मन कर दिया.

मनीषा- हाँ दीदी ने बताया की आप जानवरो की तरह कहते हैं. इसलिए उनको मोच आ गई है.

इतना कहकर मनीषा बीएड से उठकर ड्रेसिंग टेबल से पास जाकर कड़ी हो गई. अब नज़ारा और भी जानलेवा था. उसके खड़ा होने के बाद उसकी भरी भरकम गांड बहार की तरफ निकल आई. उसकी गांड देखकर मेरा लुंड और जोर जोर से झटके मरने लगा. मनीषा ने बिना पीछे मुझे hi मुझसे कहा.



मनीषा- भैया अब आप जाइये मुझे कपडे बदलने है.

मैं- तू कपडे बदल न मैं तुझे डिस्टर्ब थोड़ी कर रहा हूँ.

इतना कहकर मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपना हाँथ उसके कंधे पर रख दिया. मेरा हाँथ कंधे पर लगते hi मनीषा का जिस्म कैंप गया. उसने तुरंत पीछे गार्डन करके मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

मनीषा- लेकिन मैं आपके सामने कैसे कपडे बदल सकती हूँ. मुझे शर्म आएगी.

उसकी बात सुनकर मैंने अपना मुंह आगे बढाकर मनीषा के गलो को चुम लिया और उसके कण में कहा.

मैं- तो क्या हुवा मनीषा मैं तुम्हारा बड़ा भाई hi तो हूँ. कौन से कोई गैर हूँ.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने कुछ नहीं कहा बस आगे देखने लगी और कंघी अपने हेयर में फिरने लगी. मैंने अपने होंठ उसके कंधे पर रख दिए और पीछे से एकदम सत्कार उसके साथ खड़ा हो गया. जिससे मेरा लुंड उसकी गांड में घुस गया. मेरा लुंड अपनी गांड में कपडे के ऊपर से महसूस करके उसके शरीर में झुरझुरी हुई और उसके अपने बालो पर चलते हाँथ वही रुक गए. मैं अपना हाँथ उसके कंडे से हटाकर उसके पेट पर रखा और उसके पेट को सहलाने लगा. और अपने होंठ से उसकी गार्डन को किश करते हुवे कहा.



मैं- एक बात बोलू मनीषा.

मनीषा( हलकी आवाज़ में)- बोलो भैया.

मैं- तू भी मुझे किसी दिन अपने तरबूज खिला दे. मेरा बहुत मन करता है.

मनीषा- (मेरी तरफ दर्दन घुमाकर मुझको देखते हुवे) क्यों दीदी ने अपना तरबूज आपको खिलाया था. उसे खा कर आपका मन नहीं भरा है क्या. जो मुझसे मांग रहे हो.

मैं- अभी कहा मन भरा है मेरा. उन्होंने एक hi बात खिलाया उसके बाद मन करने लगी.

इतना बोलकर मैंने अपना हाँथ उसके पेट से सहलाते हुवे उसकी चूचियों के एकदम निचे ले आया और वह सहलाने लगा और पीछे से अपने लुंड का दबाव लगातार मनीषा की गांड में देने लगा. मनीषा मुझे रोकने की कोई कोशिश नहीं कर रही थी. थोड़ी देर बाद मनीषा ने कहा.

मनीषा- मुझे नहीं खिलाना आपको तरबूज. देख नहीं रहे हैं आपको तरबूज खिलने के बाद hi दीदी लगदा कर चल रही हैं. उनको मोच आ गई है.

मैं- तुम्हे तो अपने भाई की कोई फिकर hi नहीं है. चलो ठीक है. तरबूज बाद में खिला देना. लेकिन मुझे रोज दूध पिलाओगी न मनीषा.

इतना सुनकर मनीषा की सांसे भरी होने लगी. वो तेज़ तेज़ सनस लेने लगी. मैंने भी अपना हाँथ उठाकर उसकी चूचियों पर रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा ने मेरे हाँथ के ऊपर अपना हाँथ रख दिया और हटाने की कोशिश करने लगी. लेकिन मैंने अपना हाँथ नहीं हटाया और उसकी चूचियों को सहलाता रहा. थोड़ी देर सहलाने के बाद मनीषा को भी शायद अच्छा लगने लगा था इसलिए उसने अपने हाँथ की हरकत बंद कर दी.

मैं अब मनीषा की गांड पर हल्का हल्का अपनी कमर चलने लगा. और अपने होंठ उसकी गार्डन और कंधे पर लगातार फिरने के साथ साथ उसकी चूचियों को भी धीरे धीरे दबाने लगा. जिससे मनीषा के ऊपर भी मस्ती चढ़ने लगी और उसने अपने हाँथ मेरे हांथो से हटा लिए. अब मैंने उसकी चूचियों को बहार की तरफ खींचने लगा और उससे बोलै.

मैं- बोलो मनीषा. मुझे दूध पिलाओगी न.

Manisha(madhosi में)- वो तो आपको रोज सरिता दीदी पिलाती hi हैं.

मैं- लेकिन अब सरिता दीदी को मोच गई है तो मैं ये जिम्मेदारी तुमको देता हूँ. तुम रोज मुझे दूध पीला देना.

इतना कहकर मैंने अपनी कमर पीछे कर ली और उसकी दोनों चूचियों को कसकर पकड़ लिया और जोर से दबाकर एक झटका अपनी कमर को दिया. मनीषा की सिसकारी निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuucccccccccchhhhhhhhhhhhhhhh भैया. क्याआ कररर रहईये हैंन आपपपपपपप.

मैं- कुछ नहीं मनीषा अपनी बहन को प्यार कर रहा हूँ.

इतना बोलकर मैंने एक हाँथ से मनीषा के चेहरे को पकड़कर पीछे किया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे इस वक्त सुर्ख हो चुकी थी. चेहरा हल्का लाल हो गया था. उसकी आँखों में मुझे प्यास नज़र आ रही थी. मैंने मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपनी होंठ बढाकर मनीषा के होंठो पर रख दिया और चूमने लगा. मनीषा ने अपना मुंह घूमने की कोशिश की लेकिन मैंने उसके चेहरे को पकड़ रखा था. इसलिए वो अपनी गार्डन आगे नहीं कर पाई.



मैं मनीषा के होंठ चूमते हुवे अपने एक हाँथ से उसकी चूचिय को दबाने लगा और पीछे से लुंड उसकी गांड में पेलने लगा. मनीषा इस हमले से गरम हो गई थी. उसने भी अब किश में साथ देना शुरू कर दिया और अपने हाँथ उठाकर मेरी गार्डन में दाल दिया. ये देखकर मैं मनीषा के होंठ को चूसने लगा. मनीषा भी चुपचाप कड़ी होकर अपने होंठ चुसवा रही थी. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मैंने उसके होंठो को मुंह में भर लिया और दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर अपनी कमर को पीछे करके एक साथ तीनो हमले कर दिया. उसके होंठ को काट लिया. दोनों चूचियों को मसल दिया और अपने लुंड को उसकी गांड में पेल दिया. मनीषा दर्द और आनंद से चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhhhh bhaaiiiiiiiiiii क्याआ करररररररर राहीईई हैंन aapppppppppppp. मेंनननन बहनणननणणन होऊणन्न आपकीइ. ये गलतततततततत ही.

मैंने मनीषा की बात सुनाने के बाद उसके गलो को चाटने लगा. और दोनों चूचियों को फिर से मसलकर अपने लुंड उसकी गांड में पेल दिया. मनीषा फिर से सिसक पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuuuucccccccccccchhhhhhhhhhhhhhhh. Ooooooooooohhhhhhhhhh भाइयाँआ. क्या कर रही हैं आपपपप. मुझे ड़ड़ड़ड़ड़ड़ हूँ रहा है.

इतना कहकर मनीषा पलटकर मेरे सामने कड़ी हो गई और मेरी आँखों में देखने लगी. मैंने भी उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- बताओ न मनीषा. मुझे दूध पिलाओगी न अपना.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मुझसे कहा.

मनीषा- या क्या कह रहे हैं आप मुझसे. मैं आपकी बहन हूँ और आप मुझसे ऐसी बात कर रहे हैं.

मैंने मनीषा की बात सुनकर उसे अपनी बहो में भर लिया और अपने होंठ उसके होठो पर रखकर चूसने लगा और एक हाँथ से उसकी गांड को पकड़कर दबाने लगा. मनीषा थोड़ी देर कसमसाई और फिर शांत होकर होंठ चूसै में मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर उसके होंठ चूसने और उसकी गांड दबाने के बाद कहा.

मैं- एक बात कहु मनीषा. बुरा तो नहीं मानोगी.

मेंशा( मेरी आँखों में देखते हुवे)- मेरे मन करने से आप मान जाएंगे क्या.

मैं- वह मनीषा तुम तो बहुत समझदार हो गई हो. मुझे अचे सा समझने लगी हो तुम.

मनीषा- हाँ भैया मैं 1.5 महीने पहले hi समझदार हो गाइट hi. लेकिन आपको आज पता चल रहा है. वैसे बोलिये क्या बात है.

मैं- तुमको मालूम नहीं है मनीषा किट ुम एकदम जवान हो गई हो. और तुम भी अब लेने लायक हो गई हो.

मनीषा( मेरी आँखों में घूरकर)- क्या मतलब है लेने लायक हो गई हूँ.

मैं- अरे मेरा मतलब था की तुम मुझसे कोई भी मदद लेने लायक हो गई हो.

मनीषा- अच्छा आप मेरी मदद करेंग. अगर मैं कहूँगी तो.

मैं- मैं तो तुमको कब से देना चाहता हूँ अपनी मदद.

Manisha(muskura कर)- अच्छा ठीक है. मुझे डांस सिखने है तो आप उसमे मेरी मदद करेंगे.

इतना सुनकर मैंने अपना एक हाँथ बढाकर उसकी चुकी पर रख दिया और उसको दबाने लगा. एक हाँथ से उसकी गांड को दबाने लगा और अपने होंठ उसके होंठो पर रखकर उसको किश करने लगा. मनीषा तो पहले से hi गरम पड़ी थी. उसने भी मेरा सहयोग करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद मैंने उसको होंठो को छोड़कर उसके गाल को चाटने लगा और उसके गाल को दांतो से काटकर उसकी चुकी और गांड को दबा दिया जिससे मनीषा सिसक पड़ी.



मनीषा- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh Bhaiiiiyaaaaaaaaaaa. aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh धीरीईईई seeeeeeeeeeee. Auuuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii mummyyyyyyyyyyyy.

मैं- लेकिन मुझे तो डांस आता hi नहीं है. तो मैं कैसे तुम्हारी मदद करूँगा.

मनीषा- बस आप मेरे साथ रहना. मैं डांस करुँगी तो आप ये बताना की मैंने ठीक से डांस किया या नहीं.

मैं- ठीक है मनीषा मैं तुम्हारी मैडम करूँगा. लेकिन पहले ये बताओ की तुम मुझे अपना दूध पिलाओगी या नहीं.

Manisha(meri आँखों में देखते हुवे)- ठीक है जब सबको पिलाऊंगी तो आपको भी पीला दूंगी.

मैं- (उसकी चुकी को सहलाते हुवे) लेकिन मुज्झे ताज़ा दूध पीना है.

मेरी बातो को सुनकर मनीषा ने मुझे साइन पर मारा और कहा.

मनीषा- आप बहुत गंदे हो भैया. अपनी बहन से कोई ऐसे बात करता है क्या.

मैं- दुसरो का तो पता नहीं, लेकिन मैं तो तुझसे ऐसी hi बात करूँगा. तुझे पसंद नहीं आती क्या मेरी बाटे.

मरी बात सुनकर मनीषा ने शर्माकर अपनी नज़र निचे झुका ली, लेकिन बोली कुछ नहीं. तो मैंने उसका चेहरा पकड़कर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखने लगा. उसकी आँखे शर्म से झुकी जा रही थी. मैंने उसको देखते हुवे उसको पीछे धकेलकर ड्रेसिंग टेबल से सत्ता दिया और उसकी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकली और उसकी झुककर उसकी गार्डन को चाटने लगा. मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaahhhhhhh sssssssssssss ssssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. मैं उसकी गार्डन को चाटते हुवे निचे की तरफ बढ़ने लगा और उनकी चूचियों के ऊपर पहुंच कर जब मैंने छठा तो मनीषा oooooooooohhhhhhhhhhh भैया बोली और मेरी सर को अपने हाँथ से पकड़कर ऊपर उठा लिया और मेरी आँखों में देखते हुवे अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिया और चूसने लगी.

मैं मनीषा के इस हरकत पर बहुत खुश हुवा और अपने एक हाँथ को फिर से उसकी गांड पर रखकर अपनी कमर को पीछे किया और एक हाँथ से उसकी चुकी दबाने लगा. एक हाँथ से गांड बढ़ाते हुवे मैंने अपनी कमर को आगे पुश किया. जिससे मेरा लुंड मनीषा की छूट के ऊपर लगा. मनीषा ने मेरे होंठ छोड़कर माधोसी में चीख पड़ी

मंशा- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh bhaiyyaaaaaaaaaa मत्तत्तत्त करूऊऊ aisaaaaaaaaaa. मैंनं बहनणणन हूंणंन्न आपकीइइइइइइइइ. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh धीरीईई सीएएएएएएए.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसको देखते हुवे कहा.

मैं- तो बोलो मुझे अपना ताज़ा दूध पिलाओगी तुम. या नहीं.

Manisha(garden झुककर शरमाते हुवे)- ठीक है भैया पीला दूंगी आपको ताज़ा दूध.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपने दोनों हांथो से उसकी चूचिया पकड़ी और जोरदार तरीके से मसल दिया. मनीषा चीख पड़ी और मुझे धक्का देकर बोली.



मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भैयाआआ. Hhhhhheyyyyyyyyyyyy mummyyyyyyyyyyyy. आपपप बिल्कूलललललल जँवारररररर हीिन्नननननन जउओ यहां सीए मैंन कुछः नाहीइ पिल्लाऊंगीए आपको.

मैंने सोचा की आज के लिए इतना बहुत हो गया. बाकि फिर बाअद में देखूंगा. इसलिए मैं कमरे से बहार जाने से पहले मनीषा अपना मुंह मनीषा के कण के पास ले गया और उसके कण के कहा.

मैं- सच में मनीषा. तुम एकदम गदरायी और तूंच मॉल बन गई हो.

और इतना बोलकर मैं मनीषा के कमरे से भाग गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-106

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भैयाआआ. Hhhhhheyyyyyyyyyyyy mummyyyyyyyyyyyy. आपपप बिल्कूलललललल जँवारररररर हीिन्नननननन जउओ यहां सीए मैंन कुछः नाहीइ पिल्लाऊंगीए आपको.

मैंने सोचा की आज के लिए इतना बहुत हो गया. बाकि फिर बाअद में देखूंगा. इसलिए मैं कमरे से बहार जाने से पहले मनीषा अपना मुंह मनीषा के कण के पास ले गया और उसके कण के कहा.

मैं- सच में मनीषा. तुम एकदम गदरायी और तूंच मॉल बन गई हो.

और इतना बोलकर मैं मनीषा के कमरे से भाग गया.

अब आगे.

जब मैंने मनीषा के कण में बोलै की वह एकदम तूंच मॉल बन गई है तो वह मुझे मरने के लिए दौड़ी लेकिन तब तक मैं बहार भाग गया. तो उसने दरवाज़े के पास से मुझे कहा.

मैं- अभी मैं पापा से आपकी शिकायत करती हूँ भैया.

मनीषा के कमरे से निकल कर मैं अपने कमरे में चला गया. खाना खाने का समय होने पर मैं निचे आया तो पापा वही बैठे थे साथ में मनीषा भी थी. मुझे देखते hi मनीषा ने पापा से कहा.

मनीषा- देखो न पापा भैया मुझे बहुत परेशां करते हैं.

पापा- क्यों अभी क्यों परेशां करता है मेरी बच्ची को.

Main-ye आपकी hi बच्ची नहीं है पापा. मेरी भी बच्ची है. और इसको परेशां करने में सच बताऊ पापा बहुत मज़ा आता है मुझको.

मेरी बात सुनकर पापा हंसने लगे. तो मनीषा ने मुंह बना लिया फिर पापा ने मुझसे कहा.

पापा- देखे अभी मेरी बच्ची को दोबारा परेशां मत करना. नहीं तो अच्छा नहीं hoga(manisha को दिखने के लिए)

मैं- ठीक है पापा अब मैं मनीषा को और परेशां करूँगा.

इतना कहकर मैं किचन में चला गया और सरिता दीदी और अपना खाना लेकर दीदी के कमरे में गया और दोनों ने मिलकर खाना खाया और बर्तन किचन में रखकर अपने कमरे में चला गया. और लोअर उतर कर उव में hi बीएड पर लेट गया. लगभग 1.5 हॉर्स बाद मनीषा ऊपर आई और मुझे आवाज़ दी और अंदर आ गई. वो दूध लेकर आई थी.

उसको देखते hi मेरा लुंड झटके मरने laga.wah एक निघ्त्य पहनकर आई थी. उसका गाला इतना बड़ा था की उसकी आधी चूचिया बहार चालक रही थी और वो घुटने के बहुत ऊपर तक था.



अगर वो बैठ जाती तो उसकी पंतय दिखाई देने लगती. उसको इस रूप में देखकर मेरे लुंड उव में टैंकर खड़ा हो गया. मैं उसकी चूचियों को देखते हुवे अपने लैंड को मसलने लगा. वो भी मेरा लुंड को hi देख रही थी. थोड़ी देर बिट जाने के बाद मैंने उससे कहा.

मैं- अब देखती hi रहोगी या मुझे दूध भी पिलाओगी.

मेरी बात सुनकर मनीषा झेप गई. हम दोनों के बिच इतना कुछ हो गया था जिसके कारन मैं मनीषा की मंशा भी समझ गया था. इसलिए मैं अब बेशरम बन चुक्का था. लेकिन मनीषा ठहरी लड़की और लड़किया होती hi ऐसी है की उनको अगर छोड़ भी लो तो भी अगली बार वो जरूर शर्माएंगी. इसलिए मनीषा ने शर्माकर अपनी नजर मेरे लुंड से हाथ ली और मुझे देखने लगी. मैं अब भी उसकी चूचियों को hi देख रहा था तो मनीषा ने मुझसे कहा.

मनीषा- ऐसे क्या देख रहे हो भैया.

मैं- दूध देख रहा हूँ मनीषा. मुझको पीना है न. अब जल्दी से पीला दो मनीषा तुम्हारी दूध को देखकर मेरी प्यास बहुत बढ़ गई है.

मरी बात सुनकर मनीषा झुककर मुझे दूध का गिलास पकड़ने लगी. झुकने के कारन मनीषा की चूचिया उसकी निघ्त्य से आधे से ज्यादा बहार दिखने लगी थी. एक बार तो मुझे उसके निप्पल भी बहार नज़र आ गए थे.



मैंने गिलास को नहीं पकड़ा और उसकी चूचियों को hi देखता रहा. मनीषा भी जान रही थी की मैं उसकी चूचियों को देख रहा हूँ लेकिन उसने मन नहीं किया और अपनी चूचियों के भरपूर दर्शन करवाती रही. लगभग 2 मिनट तक झुककर अपनी चूचियों को दिखने के बाद उसने झुके झुके hi कहा.

मनीषा- क्या कर रहे हो भैया पकड़ो दूध. कब तक मैं झुकी रहूंगी.

मैं- मैं तो दूध पकड़ना चाहता हूँ, लेकिन तुम बहुत दूर कड़ी हो. थोड़ा पास आओ तो पकडू.

गिलास मेरे एकदम पास था और मैं उसे आसानी से पकड़ सकता था, लेकिन मेरे कहने पर मनीषा झुके झुके hi और मेरे पास आ गई. तो मैं उसकी आँखों में देखने लगा. उसकी आँखों में मस्ती hi मस्ती दिख रही थी. वो भी मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.

मनीषा- अब ठीक है न भैया. अब तो आप दूध पकड़ सकते हो. अब जल्दी पकड़ो. मेरी कमर दर्द करने लगी है.

मनीषा की बात सुनकर मैं हाँथ बहकर उसके निघ्त्य से बहार झांकती एक चुकी को मैंने पकड़ लिया और हल्का सा बड़ा दिया. जिससे मनीषा थोड़ा हिल गई. लेकिन उसने दूध का गिलास गिरने नहीं दिया और न hi वो सीधी कड़ी हुई. मैं उसकी चूचियों को हौले हौले दबाने लगा तो मनीषा ने कहा.



मनीषा- क्या कर रहे हो भैया. दूध पकड़ो. मेरी कमर दर्द कर रही है.

Main-(uski चुकी दबाते हुवे)- वही तो पकडे हुवे हूँ.

मेरे ऐसा कहने पर उसने मेरी आँखों में देखा. और कुछ देर और अपनी चूचिय दबवाने के बाद अपने हाँथ से मेरा हाँथ पकड़कर अपनी चुकी से हटा दिया और कड़ी होकर दूध का गिलास मुझे थामकर बोली.

मनीषा- क्या भैया. मेरी तो कमर दुखने लगी आपको दूध देने के चक्कर में.

मैं- लेकिन मुझे ये दूध नहीं पिने है. मुझे ताज़ा दूध चाहिए.

मनीषा- अब जो दूध था वही मैं लेकर आई हूँ. जब दीदी आएंगी तो आप उनसे ताज़ा ताज़ा दूध पीना मैं जा रही हूँ सोने.

इतना कहकर मनीषा जाने के लिए मुड़ी और मेरे ऊपर गिर पड़ी. अब वह जानबूझकर मेरे ऊपर गिरी थी या अनजाने में गिरी थी वो तो मनीषा hi जाने, लेकिन मुझे तो मज़ा आ गया. वो मेरे पेट पर पीठ के बल गिरी थी. उसने नजर उठाकर मेरी तरफ देखा, लेकिन उठने की कोई कोशिश नहीं की तो मैंने भी उसकी आँखों में देखते हुए अपना एक हाँथ उसके कपडे के अंदर डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा. और एक हाँथ से उसका पेट सहलाने लगा.



मेरे ऐसा करने से वो मचलने लगी और मेरे मेरी आँखों में देखते हुवे अपने हाँथ पलटकर मेरे लुंड पर रख दिया. उसका हाँथ लुंड पर लगते hi मैंने मस्ती में उसकी चुकी को जोर से दबा दिया. जिससे उसके मुंह से ssssssssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैयाआआ निकल गया और उसने अपना हाँथ सीधा करके मेरे लुंड को दबा दिया और उठकर कड़ी हो गयी और भागकर कमरे के बहार चली गई. मैं भी अपने लुंड को सहलाते हुवे सो गया.

अगली सुबह मैं सोकर उठा थोड़ी देर जिम किया और बाथरूम में जाकर फ्रेश होने लगा. थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम से बहार आया और निचे हॉल में आ गया. हॉल में आकर मां पापा के साथ बैठ गया. नाश्ते के समय नाश्ता करके मैं अपने कमरे में चला गया और पापा मम्मी अपनी जॉब पर चले गए. सरिता दीदी आज भी अपने कमरे में hi नाश्ता किया था. अब वो ठीक हो गई थी, लेकिन मम्मी ने उन्हें 2 दिन और काम करने का लिए मन किया था.

मैं भी कुछः देर बाद तैयार होकर अपने काम पर चला गया और 1.5 हॉर्स में अपना काम समेत कर बहार निकला और मार्किट में जाकर एक ब्रा पंतय एकदम विसिबले टाइप की ले ली और उसे लेकर मैं घर आ गया. मैं सीधा अपने कमरे में चला गया और काम फिनिश करने के बाद सीधे सरिता दी के कमरे में गया. दीदी अपने बिस्टेर पर लेती हुई थी. वह मनीषा भी उनके साथ बैठी थी. मुझे देखते hi उठकर बैठ गई. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- कैसी हो दीदी अब दर्द कैसा है.

सरिता दी- अब दर्द पहले से बेहतर है, लेकिन कभी कभी उठते बैठते होने लगता है.

मैं- ठीक है दीदी आप दवा खाकर आराम करिये और कमरे से बहार बिलकुल भी मत निकालिये. किसी चीज़ की जरुरत हो तो मनीषा या मुझे कॉल कर देना.

इतना बोलकर मैं दीदी के कमरे से बहार आ गया. मेरे पीछे पीछे मनीषा भी कमरे से बहार आ गई और अपने कमरे में पहुंच चली गई. मैं भी अपने कमरे में आकर मनीषा के लिए जो कपडे और ब्रा पंतय लाया था उसे लेकर मनीषा के पास चला गया. मनीषा के कमरे में जाकर मनीषा से कहा.

मैं- क्या कर रही हो बहना रानी.

मनीषा- कुछ नहीं सोच रही हूँ की डांस की प्रैक्टिस hi कर लू.

मैं- हाँ ठीक है फिर ऊपर आ जाओ मेरे कमरे में वही करते हैं. यहाँ पर दीदी डिस्टर्ब हो जाएंगी.

Manisha-Thik है भैया मैं नाहा लून. फिर आती हूँ आपके कमरे में.

मैं- ठीक है मनीषा. ये लो गिफ्ट मैं तुम्हारे लिए लाया हूँ.

Manisha(khus होते हुवे). वाओ. थैंक यू भैया.

इतना कहकर मनीषा वो गिफ्ट देखने लगी. पहला कपडा उसने निकला और अलाट पलट कर देखने लगी. उसके बाद उसने थैले में हाँथ डाला तो ब्रा पंतय का सेट उसके हाँथ में आ गया. उसे निकलकर देखने के बाद उसकी आँखों बड़ी हो गई. वो कभी मुझे देखती तो कभी ब्रा पंतय को देखती. ब्रा पंतय को देखते हुवे उसने मुझसे कहा.

मनीषा- ये क्या लाये हो भैया. आपको शर्म नहीं आती.

मैं- क्या हुवा तुमको मेरे गिफ्ट पसंद नहीं आया क्या.

मनीषा- ये क्या है. मैं आपकी बहन हूँ, और आप मेरे लिए इसको लेकर आये हैं. शर्म आणि चाहिए आपको.

अब पता नहीं उसका गुस्सा बनावटी था या वो सच में गुस्से में थी. उसकी बात सुनकर मेरा चेहरा उदास हो गया और मैंने मुंह बनाते हुवे कहा.

Main-main तुम्हारे लिए इतने प्यार से लाया था. की तुमको अच्छा लगेगा लेकिन तुम मुझे सुना रही हो. लाओ ये मैं किसी और को दे दूंगा.

मैंने हाँथ बढाकर ब्रा पंतय और दूसरा कपडा उठा लिया और बहार जाने लगा. तो मनीषा आकर मेरे सामने कड़ी हो गई और बोली.

Manisha-wo बात नहीं है भैया. मुझे अच्छा लगा की आप मेरे लिए ये लेकर आये हैं. लेकिन आप सोचिये की मैं इसे कैसे पहन सकती हूँ.

मैं- क्यों नहीं पहन सकती. क्या खराबी है इसमें.

मनीषा- आप खुद hi देखिये भैया. ये कितनी ट्रांसपेरेंट है. इसको पहनने का कोई मतलब है क्या.

मैं- तो कौन सा तुम इसे पहनकर बहार जा रही हो. इसके ऊपर तो t-shirt और शूट तो पहनोगी hi न. और वैसे भी अगर तुम्हारा मन हो तो मेरे सामने केवल इसे hi पहन कर आ सकती हो मुझे बिलकुल भी बुरा नहीं लगेगा.

मेरी बात सुनकर मनीषा मुज्झे मरने लगी और बोली.

मनीषा- आप सच में बहुत गंदे हैं भैया. कोई अपनी बहन के लिए ये गिफ्ट लता है क्या.

मैं- सब की बहन तुम्हारी तरह गदरायी और तूंच मॉल थोड़े hi है. जो वो ऐसा गिफ्ट दे. मैं hi खुशनसीब हूँ जो मेरी बहन इतनी गदरायी और तूंच मॉल है. तुमपर ये बहुत अच्छा लगेगा.

मनीषा- सच में आप बहुत गंदे हैं. अपनी बहन पर hi गन्दी नज़र रखते हैं आप.

मैं- मैं तुमपर गन्दी नज़र नहीं रखता मनीषा. मैं तो बस तुमसे प्यार करना चाहता हूँ. अच्छा ये सब छोडो. ये बताओ की इसको पहन कर कब दिखा रही हो.

मनीषा- मैं पागल हूँ क्या जो इसको पहनकर आपको दिखाउंगी.

मैं- अगर मनीषा. मैं इसलिए बोल रहा हूँ की पहनकर इसकी फिटिंग देख लो अगर छोटी हो तो मैं वापस करके नै ला दू. मैं तो अंदाजे से hi ले आया हूँ.

मनीषा- ठीक है मैं पहन कर आपको बता दूंगी की फिटिंग ठीक है या नहीं. अब आप जाइये मैं भी नहाकर आती हूँ.

मैं- अरे पहले डांस कर ले. उसके बाद नाहा लेना नहीं तो पसीना आ जाएगा तो फिर से नहाना पड़ेगा.

मेरी बात मनीषा को सही लगी उसने मुझे ऊपर चलने के लिया मैं ऊपर चला गया. थोड़ी देर बाद मनीषा जब कमरे में आयी तो मैंने देखा की उसने मेरी आज दी हुवी ड्रेस hi पहनी है. इस ड्रेस का गाला भी बड़ा था. जिसमे से उसकी चूचिया बहार निकल रही थी. मैं तो बस उसे देखे जा रहा था. वो मेरे पास आई और बोली



मनीषा- बताओ भैया मैं कैसी लग रही हूँ.

मैं- तू एकदम मॉल लग रही है. और बहुत खूबसूरत भी लग रही है.

Manisha(sharmakar)- क्या भैया आप भी न. हर समय उल्टा पुल्टा बोलते रहते हैं.

मैं- अच्छा ये सब छोड़. ये बता कौन से गाने पर डांस करेगी.

मनीषा- कोई भी बढ़िया सा गण डांस वाला. 90’स वाले गाने ज्यादा ठीक रहेंगे.

मैंने एप मोबाइल में लहू के दो रैंड फिल्म का लम्बा लम्बा घूंघट काने को डाला गण प्ले किया और ब्लूटूथ से स्पीकर में कनेक्ट का दिया. गण शुरू होने के बाद मनीषा ने डांस करना शुरू कर दिया. मनीषा बहुत सेडक्टिव तरीके से डांस कर रही थी उसकी हर स्टेप के साथ कपडे में उछाल रही थी. जो गले से बहार आने को बेताब थी. उसकी उछलती हुई चूचियों को देखकर मेरा लुंड भी खड़ा होने लगा था. उसके डांस का हरे क स्टेप जानलेवा था. हर स्टेप के साथ ऐसा लगता था की उसकी चूचिया अब बहार निकली की तब बहार निकली. वो डांस करते करते मेरे पास आई और मुझे भी उठालिया. और डांस करने के लिए कहने लगी.

लेकिन मैं अभी उसकी मस्त चूचियों की थिरकन और भी देखना चाहता था इसीलिए मैं वापस आकर बिस्तर पर बैठ गया. अब तक मेरा लुंड पूरी तरह से तन चुक्का था तो मैं उसका डांस देखते हुवे अपने लुंड पर हाँथ रखकर उसे दबाकर छोड़ दिया मनीषा ने भी मुझे ऐसा करते हुवे देखा. लेकिन बोली कुछ नहीं और अपना डांस करती रही. वो डांस तो बढ़िया कर रही थी लेकिन अपनी चूचिया कुछ ज्यादा उछाल रही थी. मैं बार बार अपने हाँथ से अपना लुंड दबाकर छोड़ रहा था. वो डांस करते करते मेरे पास आई और झुककर मेरे गले में बहे डालकर अपनी गांड हिलने लगी. झुकने की वजह से उसकी चूचिया मुझे अंदर तक दिख रही थी.

थोड़ी देर में वो गण ख़तम हो गया तो वो जाकर मेरे सामने hi कुर्सी पर बैठ गई. मैंने उसको देखा तो उसके चेहरे पर पसीना आ गया था. कुछ पसीना बहकर उसकी चूचियों की घाटी में गायब हो रहा था. मैं बार बार अपना लुंड दबाते हुवे उसकी चूचियों को hi देख रहा था. थोड़ी देर बाद उसने मुझसे पूछा.



मनीषा- कैसे डांस किया मैंने भैया.

मैं- बहुत hi जबरदस्त डांस था यार. हर स्टेप के साथ मेरे दिल की धड़कन बढ़ जाती थी.

मनीषा- (मेरे लुंड को देखते हुवे). हाँ भैया बहुत बढ़ गया है.

मैं- अब क्या करू मनीषा. सामने इतनी मस्त और सेक्सी लड़की डांस कर रही थी तो उसे देखकर बहुत बढ़ गया है.

मनीषा- हाँ बहिया वो तो दिख रहा है.

इतना कहकर वो कुर्सी से निचे की तरफ झुकी उसके झुकते hi उसकी चूचिया मुझे फिर से अंदर तक दिखने लगी. वो लगबहार 20 सेकंड तक वैसे hi झुकी मुझे अपनी चूचियों का नज़ारा करवाती रही. मैं उसकी चूचियों को देखते हुवे अपने हाँथ से अपना लुंड रगड़ने लगा. तो उसने सर ऊपर करके मुझे देखा और बोली.



मनीषा- सच में भैया आप बहुत बेशरम हो. अपनी बहन के सामने hi ऐसी हरकत करते हो आप.

मैं- अब क्या करू. तू है hi ऐसी चीज़ की तुझे देखकर तो तेरे सोल्लगे के सभी लड़के तेरे आगे पीछे चक्कर लगते होंगे.

Manisha-(sharmakar). क्या भैया आप भी न. मैं कोई ऐसी वैसी लड़की नहीं हूँ जो किसी के चक्कर में पद जाऊ.

मैं- मुझे पता है की तू कैसी है. और तू सोल्लगे में किसी के चक्कर में नहीं पड़ेगी तो मेरे hi चक्कर में पद जा.

मनीषा- कैसी हूँ मैं और ये कैसी बात करते हो आप. आप मेरे भाई हो.

मैं- तू बहुत hi सेक्सी और तूंच मॉल है और मैं भाई हूँ इसीलिए तो मुझे तुम्हारी फ़िक्र है. इसीलिए मैं तुम्हारी ज्यादा केयर करना लगा हूँ की तुम बहार इन सब चककरो में मत पदों.

मनीषा- क्या भैया कुछ भी बोलते हो आप. अच्छा ये सब छोडो दूसरा गण मेरी पसंद का प्ले होगा और इसमें आपके मेरे साथ डांस करना होगा.

इतना कहकर मनीषा ने खलनायक फिल्म का चोली के पीछे क्या है चोली के पीछे प्ले कर दिया. मैं तो मनीषा को hi देखे जा रहा था की ये एकदम खुलकर मैदान में आ गयी है. उसने मुझे अपनी तरफ देखता हुवा पाया तो मुझसे कहा.

मैं- क्या हुवा भैया. चलो गण शुरू हो गया है.

इतना कहकर मनीषा ने डांस करना शुरू कर दिया. जैसे hi चोली के पीछे क्या है चोली के पीछे बजता वैसे hi मनीषा अपने दोनों हांथो से अपनी चूचियों को दोनों तरफ से दबाने लगती. मैं ये देखकर उत्तेजित हो गया. मेरा लुंड झटका मरने लगा और मैं मनीषा के पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी गांड से अपना लुंड सटाकर उसके साथ थिरकने लगा. मुझे डांस बिलकुल नहीं आता था. इसलिए मैं उल्टा सीधा थिरक रहा था.



उसकी चूचिया हर स्टेप के साथ चालक रही थी. फिर जैसे hi चोली के पीछे क्या है चोली के पीछे मैंने भी अपना हाँथ मनीषा की दोनों बगलो से डालकर उसकी चूचियों को उसके हाँथ के ऊपर से पकड़ लिया और उसके हाँथ सहित उसकी चूचियों को दबाने लगा. कुछ स्टेप बाद मनीषा ने अपना हाँथ अपनी चूचियों से हटा लिया. और डांस करने लगी.

थोड़ी देर बाद जब फिर से जैसे hi चोली के पीछे क्या है चोली के पीछे बजा तो मनीषा ने अपना हाँथ ऊपर नहीं किया. मतलब अब मुझे hi उसकी चूचिया दबनी थी. तो मैं उसकी चूचिया दोनों बगल से ठीक से पकड़कर आपस में दबाने लगा. मैं लगातार उसकी चूचिया बगल से hi दबा रहा था. कुछ देर बाद गण ख़त्म हो गया. लेकिन मैं नहीं रुका और उसकी चूचियों को दबाता रहा. मनीषा भी अब मशोषी में कड़ी अपनी चूचिया दबा रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने मनीषा की चूचियां अपनी मुठी में भरकर दबाने लगा और अपना होंठ उसकी गार्डन पर रखकर चूमने लगा. मनीषा भी गरम हो गाइट hi और जोर जोर से साँस ले रही थी.

उसकी चूचियों को दबाते हुवे मैंने अपना मुंह उसके कण के पास ले जाकर कहा.

मैं- बहुत अच्छा डांस करती हो तुम मनीषा.

मनीषा( माधोसी me)aap भी बहुत अच्छा करते हैं भैया.

उसकी बात सुनकर मैंने उसकी चूचियों को जोर से मसल कर पीछे हैट गया. चूचिया मसले जाने से उसकी मुंह से sssssssssssssshhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhh भैया की आवाज़ निकली. जब मैंने उसे छोड़ा तो वो बिना कुछ बोले मेरे कमरे से बहार चली गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-107

मनीषा के बहार जाने के बाद मैंने भी बाथरूम में जाकर अपने लुंड को शांत किया और जाकर बीएड पर लेते गया. 30 मिनट बाद सरिता दीदी ने मुझे फ़ोन करके अपने कमरे में बुलाया. जब मैं वह गया तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- मुझे बहुत प्यास लगी है अभी.

मैं- ठीक है दीदी. मैं अभी तुम्हारी प्यास बुझा देता हूँ.

इतना कहकर मैं दीदी के पास बैठ गया और अपने होंठ दीदी के होंठो पर रखकर उन्हें चूसने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. होंठ चूसते हुवे मैं अपने हांथो से दीदी की चुकी भी दबाने लगा. थोड़ी देर हलके हलके चूचियों को दबाने के बाद मैंने दीदी की दोनों चूचियों को मुठी में भरकर जोर से दबा दिया. दीदी aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiii करके सिसक उठी और मुझे अपने से दूर करते हुवे बोली.

सरिता दी- तू ये क्या कर रहा है अभी. मुझे प्यास लगी है और तुझे मस्ती सूझ रही है.

मैं- तुम्हारी प्यास hi तो बुझा रहा हूँ मैं.

सरिता दी- अभी. अब मार खायेगा मुझसे. जाकर पानी ले कर आ.

मैंने दीदी के लिए पानी लेन किचन में चला गया. पानी लेकर मैंने दीदी को दिया और अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाब मुझे मनीषा की कॉल आई.

मैं- हाँ बोलो.

मनीषा- भैया वो बाथरूम के नल से तो पानी आ रहा है लेकिन शावर में पानी नहीं आ रहा है. थोड़ा देख लो न.

मैं- अरे तो नल से नई नाहा ले न. मैं सोने जा रहा हूँ.

मनीषा- प्ल्ज़ भैया देख लीजिये आकर. प्ल्ज़ भैया.

मनीषा की बात सुनकर मैं बाथरूम के दरवाज़े के पास पहुंच गया. मैंने आवाज़ लगाई तो मनीषा ने कहा.

मनीषा- दरवाज़ा खुला है भइया. अंदर आ जाओ.

उसकी आवाज़ सुनकर जैसे hi मैंने बाथरूम का दरवाज़ा खोला. सामने का नज़ारा देखकर मैं वही खड़ा रह गया. मनीषा ने इस वक्त एक नेट वाला कपडा पहना हुवा था जो उसकी जांघो तक आता था. और खास बात ये थी की उसमे 1-1 इंच का गैप था और उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी. जिसमे से उसकी चूचिया दिख रही थी और नेट के 1’ के छेड़ से उसकी चूचियों की दोनों घुंडीया बहार निकली हुई थी. वो एक ऐडा से अपने दोनों हाँथ अपने दोनों चूचियों के उभारो के ऊपर रखकर अपने बालो को पकड़कर कड़ी तीरछहि कड़ी मुझे देख रही थी.



उसके इस रूप को देखकर मेरे लुंड भी एक झटके में खड़ा हो गया. मैं इस समय केवल लोअर hi पहने हुवे था. अंदर उव नहीं थी. इसलिए लोअर में तम्बू बन गया था. मनीषा ने आज मेरी जान निकलने का पूरा बंदोबस्त करके रखा था.

मैं बस आँख फाड़े उसकी लगभग नंगी चूचियों को देखने लगा. मेरा हाँथ अपने आप मेरे लुंड पर चला गया और मैं उसे दबाने लगा. मनीषा भी मुझे मेरे लुंड को दबाते हुवे देखती रही. थोड़ी देर अपनी मदमस्त जवानी का दीदार करवाने के बाद मनीषा ने सीधा खड़े होकर कहा.

मनीषा- क्या हुवा भैया. आप ऐसे क्यों देख रहे हैं मुझे शर्मा आ रही है.

Main-ek बात सच काहू बुरा तो नहीं मानोगी.

मनीषा- मेरे बुरा man-ne से आपको कोई फर्क पड़ता है क्या. बोल दो जो बोलना है.

मैं- सच में मनीषा. तू एकदम गदरा गई है. तेरी जवानी इस समय एकदम उफान पर है. बहुत जल्दी मुझे तेरे लिए कुछ करना पड़ेगा.

मनीषा (शर्माकर या नाटक करते हुवे)- क्या भैया आप कुछ भी बोलते रहते हो. मुझे शर्म आती है.

मैं- मैं तेरा भाई हूँ. मुझसे क्यों शर्माती है तू. मैं सच कह रहा हूँ. देख अपने आपको इस समय तेरा हर एक अंग अंग से भरपूर जवानी टपक रही है. तेरे इस मस्ताने रूप को देखकर देख मैं भी खड़ा का खड़ा रह gaya.(maine ये बात अपने लुंड की तरफ इशारा करते हुवे कहा).

मेरे ऐसा बोलने पर मनीषा ने फिर से मेरे लुंड की तरफ देखा जो एकदम टैंकर खड़ा था. थोड़ी देर मेरा लुंड देखने के बाद उसने मेरी आँखों में देखते हुवे अपने होंठ पर जीभ फिराई और मुझसे बोली.



मनीषा- अरे भैया. जल्दी से देखो न. मुझे नहाना भी है.

मैं- देख तो रहा हूँ. तू चुपचाप से कड़ी रह.

Manisha(halka मुस्कुराकर)- मैं ऍन्ड को नहीं शावर को देखने की बात कर रही हूँ.

मैं- (मुस्कुरा कर) अच्छा शावर देखने के लिए बुलाया था तुमने. मुझे लगा की तुमने कुछ दिखने के लिए मुझे बुलाया है.

इतना कहकर मैं अंदर बाथरूम के अंदर आ गया और शावर को देखने के लिए आगे बढ़ा. मैंने हर जगह से चेक किया लेकिन शावर में पानी नहीं आया अब बचा था शावर की टोटी. लेकिन वो मनीषा जहा कड़ी थी वह पर था. लेकिन मेरा हाँथ नहीं पहुंच प् रहा था तो मैंने मनीषा से कहा.

मैं- तुम मुझे उठाओ मैं टोटी खोलकर देखता हूँ कही उसमे तो कुछः नहीं फंस गया.

मनीषा- (मेरे लुंड को देखते हुवे)- मैं आपको कैसे उठाओ. एक तो आप इतने मोठे और इतना बड़ा है आपका. मैं तो मर जाउंगी.

मैं- (उसके गलो को सहलाकर) मैं कहा से मोटा हूँ. और क्या बोलै क्या बड़ा है मेरा.

Manisha(mere लुंड को देखकर मेरी आँखों में देखते हुवे)- मेरा मतलब है की आपने अपनी बॉडी इतनी सॉलिड बनाई हुई है की आपका वजन मैं नहीं झेल पाऊँगी.

मैं- (उसके होंठो पर ऊँगली फिरते हुवे) ठीक है फिर मैं तुमको उठता हूँ तुम शावर की टोटी खोलकर लाओ.

मेरे कहने के बाद मनीषा ने अपने दोनों बहे हवा में लहरा दी. मैंने अपने दोनों हाँथ मनीषा की गांड के दोनों पतों पर रखा और उसे अपनी तरफ खींच लिया. वो सीधे मेरे साइन से आ कर लिपट गयी. मेरा लुंड सीधा उसकी छूट पर लगा और उसकी दोनों चूचिया मेरे साइन में डाब गई. मनीषा के मुंह से aaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकली. उसने मेरी तरफ देखते हुवे कहा.

मनीषा- क्या करते हो भैया. इतनी जोर से क्यों खींचा.

मैं- अरे मेरी जान. ऊपर उठाने के लिए पोजीशन बना रहा था.

मनीषा- एक मिनट. मैं आपकी जान कब से बन गई.

मैं- जब से तू मेरी मॉल बानी है. तब से तू मेरी जान भी बन गई है.

मनीषा( मेरे कंधे पर मरते हुवे). आप बहुत कमीने हो भैया. आपको शर्म नहीं आती अपनी बहन को मॉल बोलते हुवे.

मैं- नहीं बिलकुल नहीं. मैं तो तुझको भी बेशरम बनाना चाहता हूँ.

मनीषा- जैसे आपने सविता दीदी और सरिता दीदी को बेशरम बना दिया है न भैया.

मैं- (उसे झूठी आँखे दिखाकर) मतलब क्या है तुम्हारा मनीषा. आजकर तुम कुछ ज्यादा hi उड़ रही हो. लगता है मुझे तुम्हारे पंख कतरने पड़ेंगे.

मनीषा- बड़े आये मेरे पंख कतरने वाले. पहले जिस काम के लिए बुलाया है मैंने वो करो.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मंशा की गांड को मुठी में दबाकर अपने से कास लिया और उसे बहो में भरकर ऊपर उठाने लगा. अब मनीषा की दोनों चूचिया मेरी आँखों के सामने थी. मैंने देर न करते हुवे अपने होंठ मनीषा की चूचियों के ऊपर रख दिया और चूमने लगा. मेरे होंठ अपनी चूचियों पर महसूस करके मनीषा का जिश्म काँप गया. मेरी इतनी गरम बातो से वो पहले से hi मस्त हो गाइट hi. मेरे होंठ चूचियों पर लगते hi उसके मुंह से सिसकी निकल गई. उसने मुझसे कहा.

मनीषा- aaaaaahhhhhhhhhhhhhh भैईयाआआ क्या कर रहे हो. मुझे गुग्गुड़ी हो रही है. ऐसा मत करिये नहीं तो मैं गिर जोगी.

मैं- मैं क्या करून मनीषा. तू कही कही से इतनी मोती हो गई हो की मुझे बैलेंस बनाना के लिए एक सहारे की जरुरत है. इसीलिए मैंने सहारा लिया हुवा है.

मनीषा- भैया किसी दिन आप मुझसे मार खाओगे. मैं कहा से मोती हो गई हूँ. मेरे जैसी स्लिम लड़की आपको पुरे सिटी में भी देखने से नहीं मिलेगी. थोड़ा और ऊपर उठाओ अभी मेरा हाँथ नहीं पंहुचा.

मनीषा की बायत सुनकर मैंने सोचा की शावर इतना ज्यादा हिघ्त पर तो नहीं है. मनीषा को वह तक तो पहुंच जाना चाहिए था. इसका मतलब ये भी मज़ा लेना चाहती है. तो मैंने मनीषा की गांड को जोर से दबाते हुवे उसे अपने चेहरे से रगड़ते हुवे और ऊपर उठा दिया. अपनी गांड दबाये जाने से वो ssssssssssssssssss की आवाज़ निकली. अब मेरे सामने उसका लगभग खुला पेट था. मैंने कुछ देर उसके पेट को चूसा फिर अपनी जीभ निकलकर उसके पैट को चाटने लगा. मनीषा मेरी गॉड में कसमसाने लगी. और मदहोश आवाज़ में बोली.

मनीषा- ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो भैया. मुझे गुदगुदी हो रही है. लो ये टोटी खुल गई है अब मुझे निचे ुटतो.

मैं- निचे नहीं उतर रहा तुझ मैं. लगाने के लिए इतनी मोती भैस को फिर कौन उठाएगा. देख उसमे कोई कचरा तो नहीं फंस गया है.

मनीषा- क्या बोलै मुझे मोती भैस. आज आपकी खैर नहीं है भैया. बस एक बार मुझे निचे उतरो फिर देखना. हाँ भैया इसमें कचरा फंसा हुवा था. जिसे मैंने निकल दिया है. अब मैं इसे लगा रही हूँ.

इतना कहकर मनीषा टोटी को दोबारा लगाने लगी और मैं फिर से उसका पेट चाटने लगा. वो मेरी बाँहों में कसमसाती हुई टोटी लगाने लगी. जब उसने टोटी लगाकर निचे उतरने के लिए बोली तो मैंने मौका देखकर शावर ों कर दिया. शावर ों होते hi पानी मनीषा के ऊपर फिर मेरे ऊपर गिरने लगा. ये देखकर मनीषा ने कहा.

मनीषा- क्या कर रहे हो भैया. शावर क्यों खोल दिया. मुझे निचे उतरो. मुझे शर्म आ रही है.

मैं- मैंने सोचा अपनी प्यारी बहन को मैं अपनी गॉड में लेकर नहला दूँ आज.

इतना बोलकर मैं मनीषा को धीरे धीरे निचे उतरने लगा और अपनी जीभ को बहार निकल कर उसके जिस्म को चैहटन लगा. जब उसकी चूचिया मेरे चेहरे के सामने आ गई तो मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसकी आँखे नशीली हो चुकी थी. वो भी मेरी आँखों में देखने लगी. पानी गिरने के कारन मैंने तुरंत hi अपनी नज़ारे उसकी चूचियों पर जमा दी और अपनी जीभ से उसकी नेट से बहार निकली चूचियों की घुंडी को कुरेदने लगा. मेरे ऐसा करने से उसकी सिसकी निका गई. वो सिसकते हुवे मुझसे बोली.

मनीषा- मत करो न बहिया. मुझे कुछः अजीब से हो रहा है. रुक जाओ न मेरे अचे भैया.

मैं मनीषा की बात सुनकर उसे निचे उतरने लगा अब पोजीशन ये थी की उसने अपने पांव मेरी कमर के ird-gird लपेटे थे. और मेरा खड़ा लुंड उसकी छूट और गांड के निचे लहरा रहा था. उसका चेहरा मेरे चेहरे के सामने था. मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसमे वासना के डोरे तैर रहे थे. उसके होंठ फड़फड़ा रहे थे. मैंने उसकी आँखों में देखते हुवे अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा.



मनीषा भी गरम हुई पड़ी थी इसलिए उसने भी होंठ चूसै में मेरा साथ देना शुरू कर दिया. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ निकलकर उसके होंठो पर फिरने लगा. ऐसा करने से मनीषा ने कुछ देर अपना मुंह नहीं खोला, लेकिन कुछ देर बाद उसने अपना मुंह खोलकर मेरी जीभ अपने मुंह में ले ली और चूसने लगी. थोड़ी देर मेरी जीभ चूसने के बाद उसने अपनी जीभ भी मेरे मुंह में दाल दी. मैं भी उसकी जीभ खींच खींच कर चूसने लगा. थोड़ी देर जीभ चूसने के बाद मैंने उसके मुंह से अपने मुंह हटाया और उसके गलो को चाटने लगा. शावर का पानी भी हम दोनों के पेट में जा रहा था. मैंने गाल चाटते हुवे मनीषा को थोड़ा सा निचे किया और अपने लुंड को एक झटका मार्कर ऊपर की तरफ उछाल दिया. मेरा लुंड सीधा मनीषा की गांड की दरार में घुसकर उसके ासशोले से टकराया. जिससे मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhh भैया निकल गया.

इसी तरह मैंने दो तीन बार मनीषा को थोड़ा निशा करके अपना लुंड ऊपर उछाल देता जो सीधा मनीषा के ासशोले पर जा कर टकराता और मनीषा aaaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआआआ करती. थोड़ी देर मनीषा भी लुंड का मज़ा लेती रही. फिर उसने मुझे देखते हुवे कहा.

मनीषा- मेरे अच्छे भैया प्ल्ज़ मुझे निचे उतर दो न मुझे नहाना भी है.

मनीषा की बात मानकर मैंने आखिरी बार लुंड उसकी गांड में पेलकर उसे निचे उतरा. लेकिन निचे का नज़ारा भी अब बदल चुक्का था. मेरा लोअर जो की हलके कपडे का था. वो शावर के पानी से पूरा भीग गया था और एकदम टैंकर खड़ा था. जिसकी व्यू लोअर के ऊपर से hi मनीषा को मिल रहा था. मनीषा निचे उतरने के बाद से लगातार मेरा लुंड देखे जा रही थी. मैं भी उसकी चूचियों को देख रहा था. थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा.

मैं- अब कहाँ खो गई मनीषा. नहाना नहीं है क्या.

Manisha(jhepte हुवे). वैसे एक बात तो है भैया. बहुत hi दमदार और सख्त है आपका हाँथ

उसने ये बात मेरे लुंड को घूरते हुवे कहा था और लास्ट में कवर के लिए हाँथ बोल दिया था. उसको उतर कर मैं भी वही खड़ा रहा. अब शावर का पानी उसके ऊपर गिर रहा था और उसके छींटे मेरे ऊपर पद रहे थे. उसने अपने हाँथ अपने बालो पर फिरते हुवे मुस्कुरा कर मुझे देखते हुवे कहा.

मनीषा- आपको शर्म तो आ नहीं रही है. जो अपनी बहन को नहाते हुवे देख रहे हैं.

मैं- कैसी बात करती हो मनीषा. मुझे यहाँ पर तुम्ही ने कुछ देखने के लिए बुलाया था और बी सारा दोष मुझपर लगा रही हो. भलाई का तो जमाना hi नहीं रहा अब तो.

मनीषा- मैंने जिस काम के लिए आपको बुलाया है वो काम हो गया है. अब मुझे नहाना है आप बहार जाइये.

मैं- तो मैं कहाँ तुमको मन कर रहा हूँ नहाने से. अब तुम्हारा काम करते हुवे मैं भी भीग गया हूँ. तो सोच रहा हूँ मैं भी नाहा हो लेता हूँ तुम्हारे साथ.

मनीषा- कुछ तो शर्म करो या उसे बेच खायी है. बहन के साथ नहाना चाहते हो.

मैं- तुझे नहीं मालूम मनीषा जवान होने के बाद हर काम बहन के साथ करने में hi ज्यादा मज़ा आता है. वैसे hi जवान होने के बाद बहन को भी हर काम भाई के साथ करने में ज्यादा मज़ा आता है.

इस पूरी बातचीत के दौरान मनीषा लगातार मेरे लुंड को hi देख रही थी. मैंने भी उसकी चूचियों को देख रहा था जिसपर से पानी की धार निचे उसके पैरो के पास गिर रही थी. मेरी बात सुनकर मनीषा ने मुंह बहते हुवे कहा.



मनीषा- आप कहना क्या चाहते हैं. साफ साफ कहो.

मैं- वैसे तो बोलती हो की बड़ी समझदार हो गई हो. और ये मामूली बात समझ में नहीं आ रही है. मेरा कहने का मतलब ये है की जब हम छोटे होते हैं तो सारा काम मां पापा करते हैं, लेकिन जब जवान होते हैं तो मां पापा ध्यान नहीं देते. फिर कौन बचा. Bahan-bhai hi बचे. तो वो साथ में हसना, बोलना, रहना, khana,pina करते हैं और भी काम जो समय के साथ जरुरत पड़े.

मनीषा- अच्छा ठीक है ठीक है. अब जाओ यहाँ से. मुझे नहाने के लिए देर हो रही है.

मैं- बहुत कठोर है तू. अपना काम निकल गया तो मुझे भगा रही है. थोड़ी देर और रहने दे न.

मनीषा- नहीं एक मिनट भी नहीं. अभी के अभी बहार जाओ.

मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपने हाँथ उसके कंधे पर रखकर उससे एकदम सात गया और कंधे से हाँथ सरकते हुवे उसकी चूचियों पर रख दिया. निचे से मैंने अपना लुंड उसकी गांड में एक झटके के साथ पेल दिया और उसकी गार्डन को काटकर दोनों चूचियों को जोर से दबा दिया. मनीषा की मस्ती भरी चीख निकल गई.

मनीषा- oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh aaaahhhhhhhhhhhhhhhh भाइय्य्य्यय्यआआअ. क्या कररर रही होओओओ एई. बहुत्त कामिनी हूँ आआपपपपपपपप. गांद्दी भाआईईयाआ.

मैंने- ये मुझे बहार भागने के लिए था. (फिर अपने लुंड की तरफ इशारा करके) मुझे लगता है शायद ये तुमको बहुत पसंद आया है.

इतना कहकर मैं बाथरूम से बिना उसका जवाब सुने जाने लगा. फिर दरवाज़े पर पहुंचकर मैंने पीछे मुड़कर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कान थी. उसने अपने हाँथ को उठाकर अपने सर पर बालो के साथ खेल रही थी. उसकी चूचिया मेरे ऊपर कहर ध रही थी.



तो मैंने भी थोड़ा तिरछा होकर अपने लुंड को उसको दिखाया और लुंड को मसल दिया और एक आँख मार्कर बाथरूम से बहार निकल गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-108

मैंने- ये मुझे बहार भागने के लिए था. (फिर अपने लुंड की तरफ इशारा करके) मुझे लगता है शायद ये तुमको बहुत पसंद आया है.

इतना कहकर मैं बाथरूम से बिना उसका जवाब सुने जाने लगा. फिर दरवाज़े पर पहुंचकर मैंने पीछे मुड़कर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कान थी. उसने अपने हाँथ को उठाकर अपने सर पर बालो के साथ खेल रही थी. उसकी चूचिया मेरे ऊपर कहर ध रही थी. तो मैंने भी थोड़ा तिरछा होकर अपने लुंड को उसको दिखाया और लुंड को मसल दिया और एक आँख मार्कर बाथरूम से बहार निकल गया.

अब आगे.

बाथरूम से निकलकर मैं सीधा ऊपर चला गया और बाथरूम में जाकर नहाया और कपडे चेंज किया. फिर अपने कमरे में आकर मनीषा के साथ आज दिनभर हुई घटना के बार में सोचने लगा. फिर मैंने ये निष्कर्ष निकला की अगर सब ठीक रहा तो हफ्ते-10 में मेरी तीसरी बहन भी मेरे लुंड के निचे होगी. यही सब सोचते हुवे मैं सो गया.

शाम को मम्मी पापा के आने के बाद मेरी आँख खुली तो मैं फ्रेश होकर निचे आया तो वह सरिता दीदी पहले से hi बैठी हुई thi.main भी उनके पास जाकर बैठ गया और उनके पूछा.

मैं- अब कैसी हो दीदी. दर्द ठीक हो गया.

सरिता दी- हाँ अब ठीक hi है. आज रत और दवा खाकर आराम करुँगी तो एकदम ठीक हो जाउंगी.

मैं- आप जल्दी से ठीक हो जाओ. फिर मज़ा करेंगे.

सरिता दी- तेरा दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया है. घर में सबके रहते हुवे ये कैसे पॉसिबल है.

मैं- जैसे आप पहले अधनंगी मेरे पास आती थी अपना जलवा दिखने, एक्सेरसीज़े करने. उसी तरह अब भी पॉसिबल है.

सरिता दी- वो बात दूसरी थी. मैं कोई रिक्स नहीं लेना चाहती. दिन में जब मौका मिलेगा तब देखेंगे.

अभी हम बात कर hi रहे थे की मां पापा और मनीषा भी आ गए. मनीषा मेरे बगल आकर बैठ गई और सरिता दीदी को देखकर बोली.

मनीषा- क्या भैया जब देखो तब दीदी के साथ चिपके रहते हो. मुझे तो आप भूल hi गए हो. जैसे मैं घर में रहती hi नहीं हूँ.

मैं- अब मैं क्या करू. तू दिनभर अपने कमरे में घुसी रहती है. बहार आती hi नहीं, इसलिए मुझे दिखाई hi नहीं देती, और जो दिखाई नहीं देता उससे कैसे चिपका जाये. ये बताओ मुझे.

मेरी बात सुनकर सब हंसने लगे. मनीषा ने मुंह बनाकर कहा.

मनीषा- पहले hi बढ़िया था. जब दीदी और आप में हमेशा 36 का आंकड़ा रहता था. तब आप भागकर मेरे पास आते थे. जब से दीदी से ये आंकड़ा 63 का हो गया है तब से मुझे भूल गए हो आप.

सरिता दीदी- 63 मतलब.

मनीषा- क्या दीदी. आप न एकदम बुद्धू हो. अरे 36 का उल्टा 63 होता है की नहीं.

मनीषा की बात सुनकर एक बार फिर सब हंस पड़े. ऐसे hi हंसी ख़ुशी के माहौल में hi खाना बना और सब ने मिलकर खाना खाया और मम्मी पापा अपने कमरे में. सरिता दीदी अपने कमरे में चली गई. मैंने t.v. ों कर लिया. मनीषा ने पूरी रसोई समिति. दूध गरम किया ूर अपने कमरे में चली गई. तब मैं भी अपने कमरे में चला गया. t-shirt और लोअर उतर कर उव में आ गया. लगभग 1 हॉर्स बाद मनीषा दूध लेकर मेरे कमरे में आई. उसने आज भी कल की hi तरह निघ्त्य पहन राखी थी. इसका गाला भी कल hi की तरह बड़ा था. वो आकर मेरे सामने कड़ी हो गयी. और झुककर दूध का गिलास देने लगी. मैंने भी कल की तरह ज्यादा नखरे न करते हुवे दूध ले लिया और पिने लगा. वो अभी भी झुकी हुई मुझे अपनी चूचियों का दीदार करवा रही थी. दूध ख़तम हो जाने के बाद मैंने उसे गिलास दिया तो वो जाने लगी. मैंने उससे कहा.



मैं- नींद आ रही है क्या तुमको मनीषा.

मनीषा- नहीं भैया अभी तो नहीं आ रही है.

मैं- तो आओ न कुछ देर छत पर टहलते हुवे बाटे करते हैं.

मनीषा- सुबह से कितनी बाटे तो कर चुके हैं आप. अभी मन नहीं भरा क्या आपका.

मैं( थोड़ा रोड होकर)- क्या यार हर समय नखरे करती रहती हो. तुम जाओ यार. मैं जा रहा हूँ सोने.

मनीषा- अरे भैया आप तो नाराज़ हो गए. मेरा मतलब ये था की कही कोई ऊपर आ गया तो क्या सोचेगा वो.

मैं- कोई नहीं आएगा. मां पापा तो ऊपर आएँगे नहीं. और सरिता दीदी सो गई होंगी.

इतना कहकर मैं कमरे से बहार आ गया. मेरे पीछे पीछे मनीषा भी बहार आ गई. मैं जाकर रेलिंग के पास खड़ा हो गया. मनीषा भी मेरे पास आकर कुछ दूरी पर कड़ी हो गई और बहार देखने लगी. थोड़ी देर तक बहार देखने के बाद मनीषा ने कहा.

मनीषा- भैया. एक बात पुछु आपसे.

मैं- हाँ पूछो. क्या पूछना है.

मनीषा- सच सच बताना. आपके मन में मेरे लिए क्या है.

मैं- (उसकी बात समझते हुवे) क्या है का क्या मतलब.

मनीषा- मतलब आप मुझे किस नजर से देखते हैं.

मैं- तू मेरी बहन है, तो बहन की hi नज़र से देखूंगा तुझे.

मनीषा- लेकिन आपकी हरकतों को देखकर ऐसा लगता तो नहीं है की मुझे आप बहन की नज़र से देखते हैं

मैं- तो तुझे क्या लगता है.

मनीषा- मुझे लगता है की मुझे आप एक बहन की नज़र से नहीं बल्कि एक गफ की नजर से देखते हैं.

मैं- बड़ी तेज़ है तेरी नज़र. लेकिन फ़िलहाल ऐसा कुछ नहीं है. फिर भी अगर तू मेरी गफ ban-na चाहती है तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है.

मनीषा- ये क्या भैया आप को मैं अपना बर्फ क्यों बनाउंगी आप मेरे भाई हो.

मैं- हाँ अगर तेरा कोई बर्फ है कॉलेज में तो तू मेरी गफ क्यों बनेगी.

मनीषा- मेरा कोई बर्फ नहीं है कॉलेज me.Samjhe आप.

मैं- तो मुझे hi अपना बर्फ बना ले. तेरे लिए तवो इन ओने एक साथ मिल जाएगा. भाई भी और बर्फ भी.

मनीषा- आप न भाई एकदम बेशरम हो. अपनी बहन का बर्फ ban-na चाहते हो.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसके नजदीक जाकर खड़ा हो गया. और उसके हाँथ पर अपना हाँथ रख दिया. मनीषा ने नजर घुमाकर मेरी तरफ देखा और अपना हाँथ खींच लिया. मैंने फिर उसके हाँथ पर हाँथ रखा. इस बार उसने हाँथ नहीं हटाया. फिर मैंने अपने दूसरा हाँथ उसके कंडे पर रखते हुवे कहा.

मैं- तू है hi ऐसी मनीषा की तुंझे कोई भी अपनी गफ बनाना चाहे. सच कहूँ तो तू जब सड़को पर चलती होगी तो सभी की नज़ारे तेरे ऊपर से नहीं hat-ti होंगी. तेरे जिस्म का हर एक अंग मर्दो को अपनी और आकर्षित करता है. तू सच में बहुत hi हॉट & सेक्सी है मनीषा

इतना कहकर मैंने मनीषा का हाँथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपनी बहो में भर लिया. मनीषा ने मेरी बाँहों से निकलने की थोड़ी देर कोशिश की. लेकिन फिर शांत होकर कड़ी रही. उसने अपनी गार्डन निचे झुके हुई थी. मैंने उसकी ठुड्डी को पकड़ कर उसका सर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखा. उसके आँखों में शर्म की लाली नज़र आ रही थी. मैंने उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- बताओ न मनीषा. तुम हॉट & सेक्सी हो न. मैं सही कह रहा हूँ न.

मनीषा- मुझे नहीं पता bhaiya(apni नजर निचे करते हुवे)

मैं- तुम इतना शर्मा क्यों रही हो मनीषा. तुम सच में बहुत हॉट & सेक्सी हो. तुमने अभी अपनी सुंदरता को ठीक से देखा hi नहीं है.

मनीषा- (मेरी आँखों में देखकर) आपको कैसे पता भैया की मैं ऐसी हूँ.

मैं- कैसी हो.

Manisha(najar झुककर)- हॉट एंड सेक्सी.

मैं- सच बताऊ तो मैंने कभी तुमको नोट hi नहीं किया, लेकिन पिछले कुछ दिनों से जब मैंने तुम्हे ऑब्सेर्वे किया तो पता चला की तुम कितनी खूबसूरत हो, कितनी हॉट & सेक्सी हो

मनीषा- (मेरी आँखों में देखकर)- अच्छा. ऐसे क्या हो गया इन कुछ दिनों में जो आपको मुझे ऑब्सेर्वे करना पड़ा.

मैंने मनीषा की बात सुनकर अपने हाँथ उसकी कमर में रखकर सहलाने लगा. और उसके माथे को चुम लिया. फिर मैंने उसकी दोनों आँखों को चूमा. और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखों में अब शर्म के साथ साथ वासना भी दिखने लगी थी. मैंने अपने हाथ उसकी पीठ कमर को सहलाते हुवे उसकी गद्देदार बड़ी गांड पर रख कर दबा दिया. मेरे ऐसा करने पर उसके शरीर में झुरझुरी हुई लेकिन वो शांत कड़ी रही. मैंने उसकी तरफ देखते हुवे कहा.

मैं- कुछ खास नहीं. बस तुम्हारे साथ वॉक बिताने पर पता चला की तुम कितनी जवान और खूबसूरत हो गई हो. तुम्हारी आँखे. तुम्हारे होंठ. तुम्हारी गार्डन . और तुम्हारी……………………. बात अधूरी छोड़ दी.

Manisha-aur आएगी क्या भैया.

उसके पूछने पर मैंने अपने हांथो का दबाव उसकी एंड पर बढ़ा दिया और उसको कसकर अपने से चिपका लिया जिससे उसकी चूचिया मेरे साइन में डाब गई और मेरा लुंड उनकी छूट के ऊपर ठोकर मरने लगा. जिससे मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भाईईईईआआए निकल गया. जिसको सुनकर मैं उसको दोनों गलो को चूमने laga.manisha मदहोश होने लगी. गाल चूमने के बाद मैंने अपनी जीब निकल कर उसके गलो को चाटते हुवे उसकी गार्डन और कंधे को भी चाटने लगा. थोड़ी देर के बाद मैंने अपना मुंह उसके कण के पास ले जाकर कहा.



मैं- मत पूछो आगे मनीषा. मैं नहीं बता पाउगा. और अगर बता दिया तो तुम नाराज़ हो जाओगी.

मनीषा( माधोसी में). बताऊओं भैया. मैंन jan-na चाहती हूँ मैं नाराज़ नहीं होउंगी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपने एक हाँथ से उसकी गांड मसलते हुवे अपना एक हाँथ उठाकर उसकी चुकी पर रख दिया और दबाने लगा. जिससे मनीषा के बदन में करंट दौड़ गया और उसने मेरी आँखों में देखा. उसकी आँखे अब लाल होने लगी थी. मैंने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिया और चूमने लगा. मेरा होंठ अपने होंठ पर पड़ते hi मनीषा ने अपनी आँखे बंद कर li.aur मुझे किश करने की छोट दे दी. थोड़ी देर उसके होंठ चूसने. चुकी दबाकर और उसकी गांड को मसलने के बाद मैंने उससे कहा.

मैं- और तुम्हारी ये चूचिया इतनी जालिम हो गई हैं की जब तुम चलती हो तो ये थिरकती हैं. इसकी थिरकन देखर लोगो के दिल की धड़कन बढ़ जाती है. सच कहता हूँ मनीषा तुम जवान हो कर एकदम गदरायी हुई मॉल बन गई हो. तुम एकदम कातिल लगती हो. तुम्हारी जवानी अपने पुरे उफान पर है इस समय. और तुम्हारी गांड का तो जवाब hi नहीं. तुम्हारी गांड एकदम कातिल हो गई है. जिसे देखकर लोगो के दिल पर छुरिया चलती हैं.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपनी आँखे खोलकर मेरी आँखों में देखा और मुझे अपने आपसे छुड़ाकर पीछे हैट गई और गहरी साँस लेते थोड़ा नाराज होते हुवे बोली.

मनीषा- कितने बेशरम हो गए हो आप भैया. अपनी बहन के शरीर को ताड़ते हो आप. उसके शरीर के अंगो का नाम लेते हो. छही. आप बहुत गंदे हो. मुझे आपसे बात नहीं करनी अब.

इतना कहकर वो मेरी तरफ पीठ करके कड़ी हो गई, लेकिन वो छत से निचे नहीं गई. मैं भी उसकी तरफ नहीं गया और पीछे जाकर दीवाल पर टेक उसकी गांड को देखते हुवे खड़ा हो गया. जब मनीषा ने कुछ देर तक मेरी कोई आहात नहीं सुनी तो उसने पीछे मुड़कर देखा और मुझे दिवार के सहारे खड़ा होकर अपनी गांड को घूरते हुवे पाया तो वो गुस्से से भरकर मेरे पास आई और मुझे मरते हुवे बोली.

मनीषा- भाई सच में आप बहुत गांड हो. यहाँ मैं आपसे नाराज़ हूँ और आप मुझे मानाने के बजाय खड़े होकर मुझे घूर रहे हैं. जाओ मैं सच में आपसे बात नहीं करुँगी.

इतना कहकर मनीषा छत से जाने लगी तो मैंने उसका हाँथ पकड़ लिया तो वो रुक गई. मैं चलता हुवा उसके पीछे आकर खड़ा हो गया और अपना हाँथ उसके कंधे पर रखकर अपने होंठ उसके कण के पास ले जाकर उससे कहा.



मैं- क्या मेरी प्यारी बहन सच में मुझसे नाराज़ है.

Manisha(itrakar)- हाँ बहुत नाराज़ हूँ.

मैं- लेकिन मैंने क्या किया है जो तुम मुझसे नाराज़ हो गई हो.

मनीषा- आप बहुत गंदे हो और मुझसे गन्दी गन्दी बाटे करते हो. मैं बहन हूँ आपकी.

मनीषा से बात करते हुवे मैंने अपना हाँथ उसके कंधे से हटाकर उसके पैट पर रख दिया और सहलाने लगा. और अपने होंठो से उसके कंधे और गार्डन को चूमने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाँथ उसकी कमर पर रख दिया और उसकी कमर को प्रेस करने लगा और उसके कंधे को चूमने लगा. जिससे एकबार फिर से मनीषा मदहोश होने लगी और अपनी आँखे बंद कर अपने होंठ काटने लगी. थोड़ी देर उसकी कमर दबाने के बाद मैंने अपना हाँथ उठाकर उसकी चूचियों पर रख दिया और दबने लगा. मैंने अपना मुंह उसके कान के पास लेजाकर उससे कहा.

मैं- अब इसमें गन्दी बात क्या हो गयी. अब तुम्हारे हाँथ को हाँथ hi बोलेंगे पेअर थोड़ी hi बोलेंगे. तो जिसका जो नाम है मैंने वही नाम तो लिया. दूसरी लड़कियों के भी उन अंगो को उसी नाम से बोलेंगे. और तुम बहन हो तो क्या हुवा उनके नाम थोड़ी hi बदल जाएंगे. लेकिन तुम फ़ालतू में मुझसे नाराज़ हो गई.

Manisha(madhoshi भरी आवाज़ में)- वो तो ठीक है भैया लेकिन मुझे शर्म आती है जब आप इनका नाम लेते हैं.

मिनिषा की बात सुनकर मैंने उसकी चकहीयो को जोर डोर से दबाना शुरू कर दिया और अपनी कमर को पूरी तरह मनीषा की कमर से चिपका लिया जिससे मेरा लुंड मनीषा के ासशोले से चिपक गया. मनीषा के मुंह से oooooooooooohhhhhhhhhhhh bhaiyaaaaaaaaaa ssssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. मैंने मनीषा के कण में सरगोशी करते हुवे कहा.

Main-main तुम्हारा भाई हूँ. तुम मुझसे क्यों शर्माती हो. तुम कोई भी बात मुझसे खुलकर कर सकती हो जैसे मैं तुमसे हर बात खुलकर करता हूँ.

मनीषा- मैं आपकी तरह बेशरम नहीं हूँ भैया. जो िथि गन्दी गन्दी बाते करू आपसे.

मैं (उसकी चूचियों को दबाते हुवे)- अब इसमें बेशरमी की बात कहा से आ गई. मैं वही बोलता हूँ जो सही होता है मनीषा. मैं सच कह रहा हूँ तेरा ये गदराया बदन देखकर मेरा भी खड़ा हो जाता है.

मनीषा ने मेरी बात सुनकर गार्डन घुमाकर मेरी तरफ देखा. उसकी आँखे वासना के कारन लाल हो गई थी. होंठ फड़फड़ा रहे थे. सांसे तेज़ तेज़ चल रही थी. मैंने उसकी आँखों में देखते हुवे अपने होंठ उसके होंठो पर रखकर चूसने लगा.



मनीषा भी गरम थी. वो भी होंठ चूसने में मेरा साथ देने लगी. मैंने होंठ चूसते हुवे अपनी जीभ बहार निकली तो मनीषा ने भी अपना मुंह खोलकर मेरी जीभ अपने मुंह में ले ली. थोड़ी देर मेरी जीभ चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ मेरे मुंह में दाल दी. मैं भी उसकी जीभ चूसने लगा. उसकी जीभ चूसते हुवे मैंने उसकी चूचियों को मींजने शुरू कर दिया और निचे से अपनी कमर का धक्का उसकी गांड पर देने लगा. मनीषा मस्ती ggggggggguuuuuuuuuu ggggguuuuuuuuuuu करने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने उसकी जीभ अपने मुंहसे निकल दी तो मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे बहुत hi कामुक आवाज़ में मुझसे कहा.

मनीषा- आपका क्या खड़ा हो जाता है भैया.

मैंने मनीषा की बात सुनकर उसका एक हाँथ पकड़कर उव के ऊपर से अपने लुंड पर रखते हुवे उसके कण में कहा.

मैं- तुम्हारे भैई का लुंड.

जब मैंने मनीषा का हाँथ अपने लुंड पर रखा तो उसने झटके से अपना हाँथ खींच लिया और मुझसे छिटककर दूर हो गई और आँखे तरेर कर मुझसे बोली.

मनीषा- छहहीइइइइइइइ भैयाआ. कितने गंदे हो आप. अपनी बहन के साथ ऐसा करते हुवे आपको शर्म नहीं आती. इसकी सजा आपको मिलेगी. और सजा ये है की कल आप मुझे शॉपिंग करवाने ले जाएंगे.

और इतना कहकर वो बिना मेरा जवाब सुने छत से निचे चली गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-109

मनीषा के निचे चले जाने के बाद मैं भी अपने कमरे में आकर सोचने लगा की कभी तो मनीषा खुलकर सामने आ जाती है और जब मैं कुछ करने की कोशिश करता हूँ तो सिमटने लगती है. चलो जॉब hi हो बहुत जल्दी hi इसका भी गेम बजा दूंगा. यही सब सोचते हुवे मैं बिस्टेर पर लेटकर सो गया. सुबह मेरी आँख देर से खुली जब मुझे किसी के ऊपर आने की आहात महसूस हुई. मैं आँख बंद करके लेता रहा. थोड़ी देर बाद मनीषा कमरे में आई और मुझे सोता हुवा देखकर धीरे से बोली.

मनीषा- ये देखो अभी तक घोडा बेचकर सो रहे हैं. चेहरा देखो तो सोते हुवे कितना मासूम सा है. जैसे कुछ जानते hi नहीं हैं. और रात में मेरे साथ कितनी गन्दी हरकते कर रहे थे. अच्छा है भैया. खूब मजा ले रहे हो अपनी बहनो से. आपका नसीब बहुत अच्छा है. जो इतनी हॉट बहने मिली हैं आपको. दोनों दीदियों को तो पता लिया है आपने. अब मेरे पीछे बड़े हुए हो. देखती हूँ कब तक मैं बच पति हूँ आपसे. वैसे हो तो बहुत क्यूट आप. ममममममूउऊउउउआअआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

(मनीषा की बात सुनकर मेरा जो भी डाउट था वो अब क्लियर हो चुक्का था अब मुझे 100% पता चल गया की उसे हम तिने के बारे में सब पता है. और वो ये भी जानती है की मैं उसको भी पटना चाहता हूँ. मेरे लिए तो ये ख़ुशी की बात थी.)

इतना कहकर मनीषा ने झुककर मेरे दोनों गलो को पकड़ा और खींचने लगी. तो मैंने हड़बड़ा कर उठने का नाटक किया और उठकर बैठ गया और उससे कहा.

मैं- ये क्या है मनीषा. मेरे गल्ल क्यों खींच रही हो.

मनीषा- ये रात का बदला है. मैं कब से आपको जगा रही हूँ लेकिन आप घोड़े बेचकर सो रहे हो. चलो उठो. सुबह हो गई hai.main निचे जा रही हूँ. आपको याद है न की आज आपको मुझे शॉपिंग पर ले कर चलना है.

मैं- मुझे बहुत काम है. मैं नहीं जाने वाला हूँ कहीं पर. और तू सोल्लगे नहीं जाएगी क्या आज.

मनीषा- नहीं आज नहीं जा रही हूँ. कल जाउंगी. आज ओनली शॉपिंग. और क्यों नहीं चलोगे मेरे साथ.

Main-main क्यों जाऊ. मैंने इतने प्यार से तुम्हारे लिए कपडे लाये थे. लेकिन तुमने नहीं पहना उसे.

मनीषा- आप समझिये न. आप ने मुझे क्या दिया था. वो कपडे भाई अपनी बहन को नहीं देते.

मैं- चलो ठीक है मन लेता हूँ. लेकिन तुम उसे बर्फ का दिया हुवा गिफ्ट समझ कर hi पहन लेती.

Manisha(mujhe घूरकर)- आपको ऐसा नहीं लगता की आपकी स्पीड बहुत तेज़ है.

मैं- (मनीषा की चूचियों को ताड़कर) मुझे हर काम तेज़ तेज़ और स्पीड में करने माँ मज़ा अत है. तुम्हे भी बहुत जल्दी पता चल जायेगा.

मनीषा- मुझे पता चल गया है आपको स्पीड का. संभल जाइये नहीं तो एक्सीडेंट हो सकता है.

मैं- ऐसे हसीं एक्सीडेंट के लिए मैं हमेशा तैयार रहता हूँ.

मनीषा- आप फालतू की बाते बहुत करते हैं. अब जल्दी से नहाकर रेड्डी होकर निचे आइये. फिर हमको शॉपिंग पर भी तो चलना है.

मैं- फिलहाल तो मुझे नहीं जाना कही. और अगर तुम चाहती हो की मैं तुम्हारे साथ शॉपिंग पर चालू तो मेरी एक शर्त है.

मनीषा- अच्छा. और वो शर्त क्या है भला.

मैं- शर्त ये है की मैं तुम्हे सरे कपडे अपनी पसंद के दिलाऊंगा. और वो सब तुम्हे तरय करके मुझे दिखाना पड़ेगा.

मनीषा- (आँख बड़ी करके) ये कैसी शर्त है. और आप कितने बेशरम हो जो अपनी छोटी बहन के सामने ऐसी शर्त रख रहे हो. लेकिन मैं आपकी तरह बेशरम नहीं हूँ. मुझे शर्म आएगी.

मैं- ठीक है फिर जाओ अपनी शॉपिंग कर लो. मुझे नहीं जाना भैया.

मनीषा- क्या यार भैया. बेशर्मी की भी हद होती है. मत जाओ मुझे भी नहीं जाना आपके साथ शॉपिंग करने.

उसने ये बात थोड़ा गुस्से में कही और कमरे से जाने लगी तो मैंने सोचा की कितने नखरे करती है ये लड़की चलो शर्त थोड़ा बदल कर देखता हूँ क्या कहती है ये. एहि सोचकर मैंने उसका हाँथ पकड़ लिया और कहा.

मैं- अरे यार मनीषा तुम तो नाराज़ हो गई. मैं तो मज़ाक कर रहा था. अच्छा सुन तो मैं चलूँगा तेरे साथ

Manisha-(khushi से) सच में भैया. यू अरे सो स्वीट.

मैं- पहले मेरी पूरी बात तो सुन ले. मैं चलूँगा तेरे साथ. और तो अपने पसंद का ले लेना, लेकिन उसमे से 2 कपडे जो मैं कहूंगा तुझे पहन कर मुझे दिखाना होगा.

मनीषा- क्या भैया फिर वही bat.mujhe आपके सामने pahan-ne में शर्म आएगी.

Main-tu मेरे सामने मत pahan-na, तू सिर्फ पहनकर मुझे दिखाना. अगर ये मंजूर है तो मैं चलता हूँ तेरे साथ.

मेरी बात सुनकर उसने थोड़ी देर सोचा फिर नौगहत्य स्माइल के साथ बोली.

मनीषा- सच में आप बहुत कमीने हो, चलो ठीक है जब आप इतना मेरे लिए कर रहे हो तो मैं भी आपको लिए इतना कर सकती हूँ.

मनीषा के इतनाकहने पर मैंने मनीषा को एक झटके से अपने पास खींच लिया और उसके होंठो को चूसने लगा. मनीषा इस एकाएक हमले से कसमसाने लगी और मुझसे खुद को छुड़ाकर बोली.

मनीषा- क्या भैया. आपने अभी तक ब्रश भी नहीं किया. मेरा मुंह गन्दा कर दिया आपने. जाओ जल्दी से फ्रेश होकर आओ. मैंने निचे जा रही हूँ.

इतना बोलकर मनीषा अपनी गांड मटकते हुवे जाने लगी. मैं मनीषा की मटकती हुई गांड को देखने लगा. निचे जाने से पहले मनीषा ने पलटकर मुझे देखा और अपनी गांड को घूरता हुआ पाकर बोली.



मनीषा- सच में भैया आप बहुत गंदे हो.

इसके बाद मनीषा निचे चली गई और मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश हुआ और निचे चला गया. निचे आकर मां पापा के साथ बैठ कर नाश्ता किया, फिर मम्मी पापा के जाने के बाद मैं भी अपने कमरे में जाकर तैयार हुवा और हॉल में आकर बैठ गया और मनीषा का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर बाद मनीषा तैयार होकर निछा आई और बोली.

मनीषा- मैं कैसी लग रही हूँ भैया.

मनीषा सच में बहुत खूबसूरत लग रही थी. उसने सलवार शूट पहना हुवा था जो उसपर बहुत hi अच्छा लग रहा था. थोड़ी देर मैंने उसे देखने के बाद कहा.



मैं- एकदम बंदरिया लग रही हो. मतलब बहुत सुन्दर लग रही हो. अब जाओ दीदी को बोलकर आओ तबतक मैं गाड़ी निकलता हूँ.

इतना कहकर मैं बहार आ गया और बाइक निकल कर मनीषा का वेट करना लगा. थोड़ी देर बाद मनीषा बहार आई और दोनों तरफ पेअर करके वो बाइक पर बैठ गई. उसके बैठने के बाद मैंने बाइक आगे बढ़ा दी. थोड़ी दूर जाने के बाद मैंने एक जोर की ब्रेक मरी. जिससे मनीषा की चूचिया जोर से मेरी पीठ पर टकराई. मनीषा ने मुझे मरते हुवे कहा.

मनीषा- ठीक से चलाओ न भैया नहीं तो मैं गिर जाउंगी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने कुछ दूर तक गाड़ी आगे बधाई. उसके बाद मैंने और ज्यादा जोर से ब्रेक मर दी. जिससे मनीषा मेरे ऊपर लड़ गई और उसके मुंह से aaaaaaaaaaaaauuuuuuuuchhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई. मनीषा थोड़े पीछे हुई और मुझे मरते हुवे बोली.

मनीषा- ठीक से चलाओ न. ये बार बार ब्रेक क्यों मर रहे हो.

Main-are यार तुमको तो पता है अपने यहाँ रोड पर कितने गड्ढे हैं. इसलिए ब्रेक मारनी पद रही है.

Manisha-gadde रोड पर नहीं. आपके दिमाग में हो गए हैं. मुझे पता है बार बार ब्रेक मरने का क्या मकसद है आपका.

मैं- हाँ तू hi सबकुछ जानती है. मुझे तो जैसे कुछ पता hi नहीं है. अगर तुझे मेरे मकसद के बारे में पता चल गया है तो मेरे मकसद को पूरा कर दे.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरे कंधे पर दो चपत लगाई और मेरे साथ एकदम चिपककर बैठ गई और अपने दोनों हाँथ मेरी इनर हैंड से डालकर दोनों कंधो को पकड़ लिया थोड़ी देर बाद मैं अपने काम पर पहुंच गया वह पर आपने काम समेटा और मनीषा को लेकर एक मॉल में चला gaya.waha पहुंचने के बाद मैं उसे एक लेडीज शॉप पर ले गया. वह पर एक 22-23 साल की सेल्स गर्ल बैठी हुई थी उसने हम दोनों को hello किया और मुझसे कहा.

लग- hello सर, क्या दिखाऊ मम के लिए.

मैं- आप इनकी पसंद को जो भी ये चाहे दिला दीजिये.

लग- हाँ तो मैडम बोलिये क्या दिखाऊ आपके लिए.

मनीषा- कोई अच्छा सा जींस टॉप और t-shirt दिखा दीजिये.

उसके बाद उस लग ने मनीषा को कई तरह की देसिने में जींस, टॉप और t-shirt दिखाया उसमे से मनीषा ने कुछ को सेलेक्ट किया और चेंजिंग रूम में चली गई. उसके जाने के बाद सेल्स गर्ल ने मुझसे कहा.

लग- वैसे एक बात तो है सर, आपकी गफ बहुत सुन्दर है. आप भी जाइये चेंजिंग रूम के पास.

मैं- थैंक्स मिस. उसको जो लेना है ले ले. अभी वह जाने का कोई मतलब नहीं है. वो बहुत शर्मीली है. बस आप एक काम करियेगा की उसे नई देसिने के उन्देर्गर्मेन्ट्स लेने के लिए बोले दीजिएगा. बाकि मैं मैनेज कर लूँगा. और मैं उसे एक अपनी पसंद का कुछ देना चाहता हूँ. अगर आप मेरी हेल्प कर दे तो मेहरबानी होगी आपकी.

लग- वह सर जी. क्या बात है. कितना ख्याल है आपको अपनी गफ का. मैं हेल्प करती हूँ आपकी.

फिर उसने एक कपडा लेकर मेरे सामने रख दिया. वो बहुत बारीक कपडा था जिसमे गले के पास बहुत वूलन छोड़ दिया गया था. इसके साथ उसने एक और भी कपडा रखा जो एकदम फिटिंग का था लेकिन थोड़ा ट्रांसपरेंट्स था. कपडे रखने के बाद उसने कहा.

लग- सर ये दोनों कपडे आपकी गफ के ऊपर बहुत शूट करेंगे.

मैंने उसको कहकर दोनों कपडे पैक करवा लिए. इतने में मनीषा चेंजिंग रूम से आ गई और उसने 3 सेट जींस टॉप और t-shirt सेलेक्ट किया. और सेल्स गर्ल को पैक करने के लिए दे दिया. सेल्स गर्ल ने मेरी तरफ देखते हुवे कहा.

लग- मम अंदर गारमेंट्स का एकदन नई कलेक्शन आया है. एकदम बेहतरीन और अलग अलग देसिने के हैं. आप भी एक बार तरय कीजिए न.

लग की बात सुनकर वो शर्माने लगी और मुझे देखने लगी. मैंने भी उसे देखते हुवे कहा.

मैं- ले लो मनीषा. अब शॉपिंग पर आई हो तो उसे भी ले लो. बाद में मुझे मत कहना.

मनीषा- लेकिन भैया मैं आपके सामने ये कैसे मतलब.

उसके मुंह से भैया सुनकर लग की आँखे बड़ी हो गई. वो कभी मुझे देखती तो कभी मनीषा को. मैंने भी सोचा की मनीषा ने मेरी सेल्स गर्ल के सामने लंका लगा दी. सेल्स गर्ल ने मुझे अजीब नज़रो से देखते हुवे कहा.

SG-le लीजिए न मम. जब आपके बर्फ आपको दिलाना चाहते हैं तो आपको लेने में क्या पॉब्लम है.

मनीषा ने जब ये सुना तो वह मेरी तरफ देखने लगी, मैंने उसे इशारे से शांत रहने के लिए कहा. और लग से ब्रा पंतय दिखने के लिए कहा. मेरी बात सुनकर सेल्स गर्ल ने मनीषा की तरफ देखते हुवे कहा.

लग- मम अपना साइज बता दीजिये.

मनीषा उसकी बात सुनकर मुझे देखने लगी, लेकिन बोली कुछ नहीं. तो मैंने सेल्स गर्ल से कहा.

मैं- इनको मेरे सामने शर्म आ रही है. मैं उधर जाता हूँ आप इनसे पूछकर अंडर गारमेंट्स दिखा दीजिए.

इतना कहकर मैं उसे थोड़ा दूर हटकर खड़ा हो गया. लग ने मनीषा का साइज पूछ कर कई नई ब्रांड की ब्रा पंतय निकल कर उसे दिखाई.



जिसमे से मनीषा ने कुछ पसंद किया और पैक करने के लिए बोल दिया. उसके बाद मनीषा बहार आ गई और मैं काउंटर पर पैसे पाय करने के लिए पंहुचा तो लग अजीब नज़रो से मुझे देखते हुवे बोली.

लग- वैसे एक बात पुछु. वो आपकी बहन है क्या.

मैं- नहीं तो. मेरी गफ है.

लग- तो उसने आपको भैया क्यों कहा.

मैं- (मुस्कुराते हुवे)- अब इसमें मेरी क्या गलती. साडी गलती मेरे माँ बाप की है.

SG-(Aascharya से)- वो कैसे मैं समझी नहीं.

मैं- अब देखिये न. मेरे मान बाप ने बड़े प्यार से मेरा नाम भैयालाल रखा था. लेकिन अब मुझे ये नाम अच्छा नहीं लगता. गफ भी मुझे भैया भैया कहकर बुलाती है. अब तुम hi बताओ मुझे कितना बुरा लगता है और लोग भी गलत मतलब निकलते hain(thoda मुंह लटककर बोलै)

लग- (मुस्कुराकर) सॉरी सर, उसने आपको भैया कहा तो मुझे लगा आप उसके भाई हो. सूर्य्य.

मैं- कोई बात नहीं मैडम, मेरी किस्मत hi ऐसी है.

फिर मैंने पेमेंट किया और निचे बैग लेकर मनीषा के पास आ गया और बहार निकल आया. बहार आते hi मनीषा मुझसे बोली.

मनीषा- ये क्या है भैया. उस लड़की को जरा भी तम्मीज नहीं. कैसे आपके सामने मुझसे मेरा साइज पूछ रही थी. और तो और आपको मेरा बर्फ समझ रही थी.

मैं- अब उसको क्या पता की तुम मेरी बहन हो. लेकिन एक बात तो है. तुमको छोड़कर हर कोई ये मंटा है की तुम मेरी गफ हो. लेकिन तुम नहीं मानती. हम दोनों की जोड़ी भाई बहन की जोड़ी लगती hi नहीं. अब अगर सब ने मान लिया है तो तुम भी मान जाओ.

Manisha-(aankh तरेर कर)- बड़े आये बर्फ ban-ne वाले. आप मेरे भाई hi ठीक हो.

मैं- बर्फ वाले हर काम मुझसे करवा रही हो. बस बर्फ नहीं बना रही हो.

मनीषा- मैंने कौन सा सब काम बर्फ वाला करवाया आपसे.

मैं- एक काम को छोड़कर सारा काम तो बर्फ वाला करवा लिया तुमने मुझसे.

पहले तो मनीषा को मेरी बात समझ में नहीं आई, लेकिन जब समझ आई तो उसने मुझे आँखे दिखाई और मेरे कंधे पर 2 चपत मार्कर बोली.

मनीषा- सच में भैया आप बहुत गंदे हैं. आप मुझे हमेशा परेशां करते हैं. जाओ मैं आपसे बात नहीं करती.

इतना कहकर मनीषा ने अपना मुंह दूसरी तरफ फिर लिया. मैंने उससे कण पकड़कर सॉरी बोलै और बाइक पार्किंग से निकलने चला गया. बाइक निकलकर मैंने मनीषा को पीछे बैठाया, लेकिन इस बार बिच में शॉपिंग बैग था तो जाते समय जो मस्ती मनीषा के साथ हुई थो वो नहीं हो पायी और हम लोग घर आ गए.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका.

देखिये वो किसी और की लिखी हुई स्टोरी है.

मैं उसको आगे कैसे लिख सकती हूँ.

और जहाँ तक मुझे याद है तो दिल्ली जाने के बाद शॉपिंग के समय बाप बेटी के बिच जो घटना घाटी थी फिर दोनों बाप बेटी का मन मुताब शुरू हुवा था.

वहां तक स्टोरी पहले लिखी गई थी. उसके बाद किसी दूसरे राइटर ने इस स्टोरी को पूरा किया था.

तो फिर एक hi स्टोरी को बार बार लिखना सही नहीं होगा न.

फिर भी अगर सभी पाठको की यही राइ होगी तो मैं लिखने की कोशिश करुँगी, लेकिन अगर समय मिलेगा तब.
 
अपडेट-110

मनीषा- सच में भैया आप बहुत गंदे हैं. आप मुझे हमेशा परेशां करते हैं. जाओ मैं आपसे बात नहीं करती.

इतना कहकर मनीषा ने अपना मुंह दूसरी तरफ फिर लिया. मैंने उससे कण पकड़कर सॉरी बोलै और बाइक पार्किंग से निकलने चला गया. बाइक निकलकर मैंने मनीषा को पीछे बैठाया, लेकिन इस बार बिच में शॉपिंग बैग था तो जाते समय जो मस्ती मनीषा के साथ हुई थो वो नहीं हो पायी और हम लोग घर आ गए.

अब आगे.

घर पहुंचकर मनीषा अपने कमरे में चली गई. मैं भी बाइक पार्क करके अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर अपना काम फिनिश किया और सोने के लिए लेते गया. शाम को लगभग 2 बजे सरिता दीदी मेरे कमरे में आयी. उन्होंने आकर मुझे जगाया. मेरी आंख खुलने पर मेरी नज़र दीदी की झूलती चूचियों कर पड़ी. दीदी ने एक डीप गले की t-shirt पहनी हुई थी. जिसमे से उनकी पहाड़ जैसी चूचिया आधी बहार निकली हुई तीर की तरह तानी हुई थीः.



मैंने दीदी को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया और उनके होंठो को किश करने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. दीदी के होंठो को किश करते हुवे मैंने हाँथ बढाकर दीदी की गांड पर रख दिया और उन्हें दबाने लगा. दीदी ने अपनी जीभ निकलकर मेरे मुंह में घुसा दी और मेरी जीभ से खेलने लगी. मैंने भी दीदी का भरपूर साथ दिया. थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरे होंठो को आज़ाद किया और कहा.

सरिता दी- अभी एक बात पुछु.

मैं- हाँ दीदी पूछो.

सरिता दी- तुमने मुझे और सविता दीदी को तो छोड़ दिया. तेरे मन में मनीषा के लिए कभी ऐसा ख्याल आया है.

मैं- सच कहूँ आप नाराज़ तो नहीं होंगी.

सरिता दी- अब तुझसे नाराज़ होकर मैं कहाँ जोगी.

मैं- ठीक है तो सुनो. मैं मनीषा को भी छोड़ना चाहता हूँ. बसर्ते वो छुड़वाने के लिए तैयार हो तो.

सरिता di-(naraz होते हुवे) तू तो बहुत बड़ा कमीना है. मनीषा को तो काम से काम छोड़ दे.

मैं- देखो दीदी. अब मनीषा भी जवान हो गयी है. तो जाहिर सी बात है की उसकी छूट भी लुंड मांगती होगी. ऊपर से वो सोल्लगे भी जाती है. कही उसने सोल्लगे में कोई बर्फ बनाकर usa-se छुड़वा लिया और उसने उसका वीडियो बनाकर मनीषा को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया तो जरा सोचो की कितनी बड़ी परेशानी कड़ी हो जाएगी.

सरिता दी- हाँ कह तो तू ठीक रहा है, लेकिन फिर भी मुझे ये सही नहीं लग रहाहै.

मैं- जलन हो रही है क्या मनीषा से.

सरिता दी- मुझे कोई जलन वालन नहीं हो रही है. वो बहन है मेरी. मैं us-se क्यों जलूँगी. मुझे बस कुछ ठीक नहीं लग रहा था इसलिए मैंने ऐसा कहा.

मैं- देखो दीदी. अगर हम दोनों को इस घर में रहते हुवे लम्बी चुदाई का खेल रोज खेलना है तो उसके लिए मनीषा को हम लोगो के साथ होना बहुत जरूरी है. आप खुद सोचो की अगर उसने कही हम दोनों को देख लिया चुदाई करते हुए तो क्या हो सकता है.

सरिता दी- हाँ बात तो तू सही कह रहा है. लेकिन सोच वो अभी बच्ची है. जब तारा हथियार लेने में मेरी ये हालत हो गई तो तू सोच मनीषा का क्या होगा.

मैं- उसका कुछ नहीं होगा दीदी. वो अब बच्छी नहीं रही. एकदम जवान हो गई है. मुझे कुछ न कुछ करके उसे भी अपने निचे लाना hi होगा. तभी हम खुलकर इंजॉय कर पाएंगे.

सरिता दी- तू सच में बहुत बड़ा बहनचोद है. जिसकी नज़र अपनी सभी बहनो की जवानी पर है.

मैं- अब इसमें मैं क्या कर सकता हूँ. जिसकी इतनी मस्त, गरम, गदरायी और चुड़क्कड़ बहाने हो. तो उसे बहनचोद ban-na hi पड़ता है.

सरिता दी- ठीक है. तुझे जैसा करना है तू कर. लेकिन मनीषा की लेने के बाद मुझे मत भूल जाना.

मैं- कैसी बात करती हो दीदी डार्लिंग. तुम भी कोई भूलने की चीज़ हो.

ये बोलकर मैं दीदी को फिर से चूमने लगा और दीदी की गांड को दबाने लगा. दीदी भी मुझे किश करने लगी. थोड़ी देर किश करने के बाद दीदी अपनी जीभ निकलकर मेरे चेहरे को चाटने लगी. ऐसा करते हुवे वो अपना एक हाँथ दोनों के शरीर के भींच डालकर मेरे लुंड को पकड़ लिया और दबाने लगी. लुंड पकड़ते hi मेरे मुंह sassssssssssssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. थोड़ी देर मैंने दीदी की गांड दबाई और फिर दीदी को पलटकर बिस्तर पर लिटा दिया और दीदी से कहा.

मैं- क्या बात है दीदी. बहुत गरम हुई पड़ी हो.

सरिता दी- सच में अभी. जब से तुमने मुझे छोड़ा है मेरे जिस्म की प्यास और बढ़ गई है. मन करता है की तू मुझको हमेशा छोड़ता रहे.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपने दोनों हाँथ दीदी की चूचियों पर रख दिया और दबाने लगा और अपने होंठो से दीदी की गार्डन और कन्धा चूमने लगा. दीदी ने अपना हाथ मेरी गार्डन के इर्द गिर्द लप्पेट दिया और अपने जिस्म पर दबा लिया. मैं दीदी की गार्डन चूमते हुवे बोलै.



मैं- इसीलिए तो मैं कह रहा हूँ की मनीषा को अपनी तरफ मिलाना बहुत जरूरी है. और इसमें आपको भी मेरी मदद करनी होगी.

सरिता दी- ठीक है जैसा तुझे ठीक लगे. मुझसे जो भी मदद हो सकेगी मैं करुँगी.

मैं- उसके लिए अब आप रात में ऊपर नहीं आएंगी. मनीषा को hi किसी भी काम के लिए भेजेंगी. मैं कोशिश करूँगा उसे जल्दी से जल्दी अपने निचे लेन की.

सरिता दी- ठीक है. तुझे जो करना है कर, लेकिन अभी मेरे बारे में तो सोच.

मैं- आपके बार में भी सोच लिया है. कल सब के बहार जाने के बाद आपकी hi सेवा करूँगा.

इतना कहकर मैं दीदी की चूचियों को जोर जोर से मींजने लगा और अपना मुंह दीदी की क्लीवेज में रख दिया और चूमने लगा. थोड़ी देर क्लीवेज चूमने के बाद मैंने अपने हाँथ में दीदी की चूचियों को भरकर जोर से मसल दिया दीदी की सिसकी निकल गई.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii. मेरे भाईईईईई थोड़ा धीरीईए कररर. बहुत्त अछ्हा लगगगग रहा हैईईई.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपनी जीभ दीदी के होंठो पर चलने लगा. दीदी ने मुंह खोलकर मेरी जीभ अपने मुंह में ले ली और जोर जोर से चूसने लगी. मैं दीदी की चूचियों को जोर जोर से मसलने लगा. थोड़ी देर तक दीदी की चूचियों को मसलने और जीभ चुसवाने के बाद मैंने दीदी को पलटकर पीठ के बल अपने ऊपर लिटा लिया. दीदी ने अपनी गार्डन मेरे कंधे से निचे की तरफ लुढ़का दी. मैंने भी अपने हाँथ दीदी की दोनों चुच्चियो पर रखकर जोर जोर से मसलने लगा. नीचे मेरा लुंड एकदम तीते होकर दीदी की छूट और गांड पर ठोकर मार रहा था. थोड़ी देर बाद मैंने अपने मुंह में दीदी की गार्डन पकड़कर दबाया दोनों चूचियों को दोनों हांथो में भरकर मसला अपनी कमर को एक झटका दिया. दीदी चीख पड़ी.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh ाभीईई uuuuuuuiiiiiiiiiii mummmyyyyyyyyyy. धीरीईई से दबाओओओओओओओ bhaaiiiiiiiii.dantt मैट काटो अभी. निशाँ पद जाएंगे. कीसीई ने दीखहह लिया तू क्या जावब्ब डोंगीइ.

मैं- आआह्ह्हह्ह्ह्ह सरिता. तुम्हारिई चूचिया राष्ठ्भारई हैं. बहुतत्त दूढः भरा ही इनमे. मुझी अपना दूध पिलाओगी ना तुम.

इतना बोलकर मैं दीदी की चूचियों को और जोर जोर से मसलने लगा. दीदी एकदम गरम होकर आआअह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह करती रही. मैं चूचियों को दबाने के साथ साथ उनकी गार्डन को भी चुम रहा था और अपनी कमर उछाल उछाल कर उनकी छूट और गांड में लुंड दबा रहा था. मेरी बात सुनकर दीदी ने कहा.

सरिता दी- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह अभियई. हैं मैं रुज्ज्ज्ज तुज्झी अपना दूढः पिलाऊंगीए. पीई जा मेरीए चूचियों को आऊर ख़ालिई कररर दी इन्ही. आआह्ह्ह्हह भैई.

अब दीदी एकदम गरम हो गई थी तो मैंने दीदी को उठाकर बीएड पर लिटा दिया और ुकि टैंगो के के पास आकर उनकी लोअर एक झटके में उतर कर निचे फेक दी. और पंतय को साइड में करके दीदी की छूट पर अपना मुंह रख दिया और उनकी छूट चूसने लगा. छूट चूसते हुवे मैंने अपना हाँथ बढाकर दीदी की t-shirt को उनकी चूचियों तक ऊपर कर दिया और उनकी पेट को सहलाने लगा. थोड़ी देर छूट चाटने के बाद मैंने अपना मुंह उनकी छूट से हटाकर दीदी की पंतय को पकड़कर निचे खींच दिया. अब दीदी मेरे बिस्टेर पर मेरे सामने नंगी लेती हुई थी.

मैं दीदी की नंगी छूट को निहारने लगा. दीदी अब तक 4 बार मुझसे छुड़वा चुकी थी तो उनकी छूट हलकी सी खुली हुई दिख रही थी. दीदी की छूट को देखने के बाद मैंने दीदी की छूट पर अपने मुंह रख दिया और चूसने लगा और अपने एक हाँथ से दीदी की चुकी को चूसने लगा और एक हाँथ निचे लेकर दीदी अपनी ऊँगली दीदी की छूट में दाल दी. मेरी ऊँगली छूट में घुसते hi दीदी आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अभी करने लगी. लेकिन मैं अपनी ऊँगली जल्दी जल्दी अंदर बहार करने लगा. जिससे दीदी की सिसकारी निकलने लगी और वो बोलने लगी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaahhhhhhhhhh ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीयी. हाँ बॉस ऐसे ही करूओ मुझी बहुत्त अछ्हा लाजगगगग रहा हैई. थोड़ा और तेज़ चाटो मेरी छूट. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

दीदी की आवाज़ सुनकर मैं और जोर जोर से दीदी की छूट चाटने लगा और एक हाँथ से चुकी दबाते हुवे दी की छूट में अपनी ऊँगली पेलता रहा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की छूट को पूरा मुंह में भरकर पूउउउछहहहहह puchhhhhhhhhhh करके दीदी की छूट चूसने लगा. दीदी अब अपने चरम पर पहुंच गई थी. वो बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhh ooooohhhhhhhhhhh अभीयी. ऑरररर तेइज़्ज़ज़ चुस्स्स मीरीई चुउत्त्तत कोऊ. बहुउट्ठ माज़आ अअअअअ रहा हैई भाईई. Ooooooohhhhhhhhhhhh और तेज़. मैंन किसीसी भी समायियीय आनी ववालीईई हूँ.. Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh. तूतुउउउ बहुउउउत्तत ाछठीई चूऊउत्तत छूओसत्ता हैईईई. कहा जाआ मेरिइइइ चूऊउत्तत कोऊ. निछोड़ड़ड़ लूओ इसक्का पुररररा राश्ठ्ठ. बहुत्तट्ठ जाल रहीए हीी एई.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को बिस्टेर से उठाकर जमीन में खड़ा कर दिया और उनके पीछे कड़े होकर एक झटके से दीदी की t-shirt उतर कर जमीन पर फेंक दी और अपने होंठ को उनकी गार्डन पर रखकर चूसते हुवे एक हाँथ से दीदी की चुकी को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा और एक हाँथ से दीदी की छूट की क्लीट को मसलने लगा. दीदी मस्ती से सातवे आसमान पर पहुंच गई थी. मैंने दीदी की गार्डन को चूमते chata-te हुवे निचे की तरफ जाने लगा और दीदी की पीठ chata-te हुवे उनकी ब्रा के स्ट्रेप को दांतो में भरकर खोलने लगा. साथ सेहत दीदी की छूट को भी मसलता रहा. मैंने दांतो से जोर लगाकर दीदी की ब्रा खोल दी. चूचियों के बोज के कारन जैसे hi ब्रा खुली. उसकी पट्टी उनकी पीठ के दोनों तरफ लटक गई. मैंने उनकी पीठ को chat-te हुवे अपने होंठ दीदी के कण के पास लेकर दीदी से कहा.

मैं- कैसा लग रहा है सरिता डार्लिंग.

सरिता di(masti में). Aaaaaaaooooohhhhhhhhhhh अभीयी. पूछो मत बॉस करते राहु बहुत hi अच्छा लग रहा है.

दीदी की बात सुनकर मैं उनकी चूचियों को जोर जोर से बदल बदल कर दबाने लगा और अपने हाँथ दी की छूट पर तेज़ तेज़ चलने लगा. थोड़ी देर उनकी चूचियों को दबाने के बाद मैंने अपने हाँथ से दीदी की गार्डन को पकड़ा और अपने हांथो की स्पीड दीदी की छूट पर बढ़ा दी. साथ hi दीदी की गार्डन को भी चूमने लगा.



दीदी अब झड़ने की एकदम निकट आ गई थी इसलिए उन्होंने एक हाँथ से मेरे हाँथ को जो उनकी छूट मसल रहा था. उसको पकड़ा और अपनी छूट पर दबाकर मेरे हांथो की स्पीड और बढ़ने लगी. दीदी के हांथो का सेहत पाकर मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और उनकी गार्डन को चूमते हुवे उनकी छूट और जोर जोर से मसलने लगा. दीदी भी एकदम झड़ने के नजदीक पहुंच गई और वो बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- ooooooooooooohhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh Abhhiiiiiiiiiiiii ऑर्डर तेइज़्ज़्ज़्ज़ मासलल्ल मीरीईई चूठ्टटट कोऊ सललीई. Uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ममममियययययययह. मैंन झडंनी वल्लीइइइइइ होऊणननननन मुझेईईई सम्भाएललललललललल लोओओओओओ अभियई. मरीईईई जिसममममम सीई कुछःह निक्कललनी वाला हैईईई. ऑर्डर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ सीईई अभीयी ाऊररर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ मसलललल मेरीए चूठ्टटट कोऊ. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh मैंन गईइइइइइइइ ाभ्हीईईईई मैईन gaiiiiiiiiiii. Sambhaallllllllll मुझेईईई oooooooooohhhhhhhhhhhhhh.

इतना काहदर दीदी झाड़ गई. जहाजाते हुवे दीदी के पेअर कम्पनी लगे और वो निढाल होकर वही जमीन पर बैठ gai.mera पूरा हाँथ दीदी के चुतरस से भीग गया था. जिसे मैं जीभ निकल कर चाट रहा था. थोड़ी देर चाटने के बाद मैं दीदी के सामने आकर अपने हाँथ दी के मुंह में दाल दिया जिसे दीदी मेरी आँखों में देखते हुवे चाटने लगी. थोड़ी देर ऊँगली चटवाने के बाद मैं दीदी से कहा.

मैं- सरिता डार्लिंग. अब अपने मुंह में मेरे लुंड को लेकर इसे जन्नत का मज़ा दो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी लोअर को पकड़कर उतरना शुरू कर दिया. लोअर उतरने के बाद दी ने उव के ऊपर से hi मेरे लुंड को चाटने लगी. मैंने दीदी के सर पर अपना हाँथ रख दिया. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद दीदी ने लुंड को उव सहित अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मेरे मुंह से आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सरिता डार्लिंग निकल रहा था. कुछ देर धीरे धीरे लुंड चूसने के बाद दीदी ने डैम लगाकर लुंड चूसना शुरू कर दिया. मैं तो मज़े के सातवे आसमान पर पहुंच गया था. थोड़ी देर मेरा लुंड उव के ऊपर से चूसने के बाद दीदी ने मेरी उव निचे खिसका दी. जिससे मेरे लुंड की ठोकर दीदी के ठुड्ढी पर लगी और लुंड दीदी की आँखों के सामने लहराने लगा.

दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे लुंड अपने हांथो में भरकर सहलाना शुरू कर दिया और जीभ निकलकर लुंड के टोपे को चाटने लगी. मैं मस्ती में आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सरिता ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह सरिता करता जा रहा था. थोड़ी देर मेरे टोपे को चाटने के बाद दीदी अपनी जीभ पुरे लुंड पर फिरने लगी. जिससे मेरे शरीर में झुरझुरी दौड़ने लगी. मैंने अपने हाँथ से दीदी के सर को अपनी जांघो पर दबाने लगा. दीदी मेरा इशारा समझ गई और अपना मुंह खोलकर लुंड अपने मुंह में ले लिया. लुंड दीदी के मुंह में जाते hi मेरे मुंह से सिसकी निकल गई.



मैं- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh सरिता मेरीए बहनणननणणन. मेरा लुंडडडड चूस.

मेरे इतना बोलने से दीदी मेरे लुंड को चूसने लगी. कभी वो तेज़ तेज़ लुंड चुस्ती तो कभी लुंड चूसने की स्पीड काम कर देती मैं तो मस्ती से सातवे आसमान में पहुंच गया था. थोड़ी देर ऐसे hi लुंड चुसवाने के बाद मुझे जोश आ गया और मैंने दीदी के सर को दोनों हांथो से पकड़ कर अपने लुंड पर दबा लिया. जिससे मेरा लुंड दीदी की हलक तक पहुंच गया. थोड़ी देर दीदी के सर को दबाये रखने के पश्चात दीदी की साँस रुकने की स्थिति में मैंने उनके सर से अपनी पकड़ ढीली कर ली. दीदी ने मेरे मुंह से लुंड निकल लिया. दीदी के मुंह से मेरे लुंड तक दीदी के थूक की एक पतली धार बानी हुई थी. लुंड निकलने के बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अभी थोड़ा आराम से कर. जानवर तो मत बन.

इतना कहकर दीदी ने फिर से मेरा लुंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी मैं भी दीदी से सर को पकड़कर धक्का लगाने लगा. थोड़ी देर हल्का हल्का धक्का लगाने के बाद मैंने दीदी के सर को मजबूती से पकड़कर लम्बे लम्बे धक्के लगाने शुरू कर दिए. दीदी के मुंह से gggggggggguuuuuuuu गगगगगगू की आवाज़ निकल रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने एक हाँथ से दीदी के सर को और दुसरे हाँथ से दीदी की गर्दन को पकड़कर ताबड़तोड़ दीदी का मुंह छोड़ने लगा. अब मैं भी बहुत जोश में आ गया था. इसलिए दीदी का मुंह छोड़ते हुवे बड़बड़ाने लगा.



मैं- aaaaaaaaaaaaahhhhhh सरिताआआआआ. Kyaaaaaaaaaa कड़ककककककक मालललललललल है तू. ली मेराआआ लुंडडडड अपनीई गरम मुंह मी ऑरररर निचूडड़डडडड लिए इसका सराआआआ राश. टूउउउउ बहुत्तत्तत्त पीएसीईई हैईईई सरिताआए. पीईईई जायआ मेराआआ पणीइइइइइइ टेरिइइइइ सरीईई प्यास मिटत जाएगीइ. Oooooooooooohhhhhhhh सरिताआआआ.

ये सब बोलते हुवे मैं हचक हचक कर दीदी का मुंह किसी छूट की तरह पेल रहा था. थोड़ी देर दीदी का मुंह पेलने के बाद मैं झड़ने के करीब पहुंच गया था. इसलिए मैं दीदी के मुंह को छोड़ते हुवे एक करारा धक्का मार्कर दीदी के मुंह को अपने लुंड पर पूरी जोर से दबाकर बड़बड़ाने लगा.

मैं- oooooooooooooohhhhhhhhh सरिताआए. मेरीए चूडाकककड़द्द बहाननननन. लिए मेरा लुंदड़ ऑर्डर गहराईई मी अपनी मुँहहह के ांदाअररररर. बहुतत्त कदककक मालललल हैई री तू. तुझी तू रूजजजज पताक पत्ताक कार छोड़ना चाहियेए. Aaaaaaaaaahhhh सरिता मैंनं जानी वाला होऊं. पि जैम एरा पानीई और बुज्झा लिए अपनी प्यासस रनडीईई. एई लिए. आआआआअह्ह्ह्हह मैंन गयाआआआ.

इतना कहकर मैं दीदी के मुंह में झाड़ गया और तब तक दीदी के मुंह को नहीं छोड़ा जब तक दीदी ने मेरे लुंड का एक एक बूँद नहीं निचोड़ लिया. जब मैंने दीदी के मुंह से अपना लुंड निकला तो दीदी जोर जोर से हांफ रही थी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
अपडेट-111

मैंने झाड़कर दीदी के सर को पकड़े निढाल खड़ा था. और अपनी सांसो को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा था. तभी मुझे दरवाज़े की झिरी से एक हलकी सी परछाई दिखी. मुझे ऐसा लगा जैसे वह पर कोई था. मैं जल्दी से अपने कपडे pahan-ne लगा और दीदी को भी कपडे pahan-ne के लिए कहा. कपडे पहनकर मैंने हल्का सा दरवाज़ा खोलकर देखा तो मनीषा निचे से ऊपर आ रही thi.usne मुझे नहीं देखा. मुझे लग गया की मनीषा hi थी जो वापस जाकर फिर से ऊपर आ रही है. मैं अपने कमरे के अंदर आ गया. तब तक दीदी ने अपने कपडे ठीक कर लिए थे. मनीषा दरवाज़े पर आकर मुझे आवाज़ देती हैं.

मनीषा- भैया. जग रहे हो या सोये हुवे हो.

मैं- जग रहा हूँ मनीषा. आ जाओ.

मेरे कहने के बाद जब मनीषा अंदर आई तब वह दीदी को देखकर मेरी तरफ देखा और रहश्यमई मुस्कान मुस्कुराते हुवे उसने कहा.

मनीषा- लो गई. जिसको मैंने सरे घर में छान मारा. वो मुझे भैया के कमरे में मिली.

सरिता दी- कौन मिली.

मनीषा- आप और कौन. मैं आपको कब से ढूंढ रही हूँ और आप भैया के साथ में हो.

सरिता di-Haan वो क्या है की मैं बोर हो रही थी तो अभी के पास चली आई.

मैं- मुझे भी बता देती तो मैं भी आती. तीनो लोग साथ में रहते तो कितना मज़ा आता.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसकी तरफ देखा तो वो हल्का हल्का मुस्कुरा रही थी. दीदी ने उससे पूछा.

सरिता दी- क्यों ढूंढ रही थी मुझे कोई काम था क्या.

मैं- हाँ दीदी. मैं जो शॉपिंग से ले थी उसे आपको दिखाना था.

सरिता दी- अभी तो मैं बहुत थकी हुई हूँ. मैं निचे जा रही हूँ आराम करने. रात में ये कल जरूर देखूंगी तुम्हारी चॉइस.

इतना कहकर दीदी बहार जाने लगी तो मनीषा ने अचानक दीदी को रोक लिया और उनसे कहा.

मनीषा- अरे दीदी रुको तो. ये आपके मुंह पर क्या लगा है सफ़ेद सफ़ेद.

मनीषा की बात सुनकर मुझे तो ज्यादा शॉक नहीं लगा, लेकिन सरिता दीदी एकदम शॉक रह गई. उन्हें अब दर सताने लगा था की वो मनीषा की बात का क्या जवाब दे. मैंने भी जब दीदी की तरफ देखा तो सच में उनके होंठो पर मरे प्रेकमे लगा हुवा था. मनीषा सब जानती थी लेकिन वो ये सब दीदी को परेशां करने के लिए कर रही थी. दीदी ने हड़बड़ाकर अपने हाँथ से अपना मुंह पोछते हुवे कहा.

सरिता दी- वो कुछः तो नहीं…. कुछः भी तो नहीं. वो अभी को दूध पिलाने आई थी. तो इसने ज़िद करके मुझे पीला दिया वही लग गया होगा.

मनीषा- लेकिन इस समय तो दूध पिने का समय है hi नहीं. तो इस समय कैसे.

सरिता दी- अब तू ज्यादा सीड की नानी मत बन. और मुझे जाने दे. मुझे आराम करना है. नहीं तो मेरी तबियत फिर से ख़राब हो जाएगी.

इतना कहकर दीदी बिना किसी को देखे और बिना किसी का जवाब सुने तुरंत मेरे कमरे से निचे भाग गई. दीदी के जाने के बाद मनीषा मुस्कुराते हुवे मुझे देखने लगी. मैं भी हल्का हल्का मुस्कुराने लगा तो मनीषा ने कहा.

मनीषा- ऐसे क्यों मुस्कुरा रहे हो भैया.

मैं- कुछ नहीं. आजकल तू कुछ ज्यादा hi सायानी हो गई है. तेरा कोई इलाज करना पड़ेगा मुझे.

मनीषा- (तुनककर), बड़े आये मेरा इलाज करने वाले.

मैं- अच्छा मनीषा. अपने कपडे मुझे नहीं दिखाएगी. क्या क्या लिया है तुमने.

मनीषा- आप को क्यों दिखाऊ. और वैसे भी बहनो के कपडे भाई को नहीं देखने चाहिए.

मैं- यहाँ भाई बहनो के पता नहीं क्या क्या देख लेते हैं. और तू कपडे नहीं दिखाना चाहती है.

मनीषा- (मेरे और करीब आकर) और क्या क्या देख लेते हैं भाई बहनो के.

मैं- चल भाग यहाँ से. तुझे बताने का कोई मतलब hi नहीं है. फालतू यहाँ टाइम पास करने आई है.

मनीषा- बताओ न भैया. भाई और क्या देख लेते हैं बहनो को.

मैं- तुझे उससे क्या. कुछ भी देखते हो. मैंने तेरे लिए इतना कुछ kiya.lekin तू है की मेरी एक बात नहीं मान सकती .

मनीषा- मैंने आपकी कौन सी बात नहीं मणि अभी तक बताइये.

मैं- मैंने कहा था की शॉपिंग के बाद तुम मुझे शॉपिंग वाले सरे कपडे पहनकर दिखाओगी. लेकिन तुम तो बड़ी मतलबी निकली, अपना काम निकल गया तो मुझे तर्क रही हो.

मनीषा- ऐसी बात नहीं है भैया. लेकिन मैं अपने सरे कपडे आपको कैसे….. मतलब… आप समझ जाइये न.

मैं- ठीक है मैं समझ गया. तुम बहुत मतलबी हो.

इतना कहकर मैं छत पर चला गया. मनीषा भी मेरे पीछे पीछे आ गई और बात करने की कोशिश करने लगी. लेकिन मैंने उसकी बातो को इग्नोर करता रहा. थोड़ी देर तक जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उसने मेरे पीछे से झप्पी दाल दी और मेरे कानो में फुसफुसाते हुवे कहा.

मनीषा- क्या भैया. आप तो नाराज़ हो गए मुझसे. लेकिन मुझे शर्म आएगी भैया. आपके सामने ऐसे कपड़ो में.

मैं- मैं तुम्हारा भाई हूँ मनीषा. मुझसे कैसी शर्म. कभी मैंने तुम्हारे साथ कोई बदतमीज़ी की है क्या जो तुम मुझसे शर्मा रही हो. मैं तो बस ये देखना चाहता हूँ की मेरी जवान और खूबसूरत बहन उन कपड़ो में कैसी लगती है. देख और लड़कियों को कैसे इससे छोटे छोटे कपडे पहनकर अपनी जवानी और सुंदरता लोगो को दिखती फिरती हैं. लेकिन मैं तो तुझसे घर में सिर्फ मेरे सामने pahan-ne के लिए कह रहा हूँ, लेकिन लगता है की तू उनकी तरह जवान और सुन्दर नहीं है तभी तू अपनी जवानी और सुंदरता छुपा के रखती है. ठीक है मैं बहार hi जाकर देख लेता हूँ.

मनीषा- नहीं भैया ऐसा नहीं है. मैं भी किसी से काम नहीं हूँ, लेकिन आपके सामने मुझे शर्म आती है और कुछ नहीं.

मैं- मुझसे कैसी शर्म मनीषा. आखिर मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूँ. तुम जितना सेफ मेरे साथ हो उतना किसी के साथ नहीं होगी. मेरी बात मन ले मनीषा.

मनीषा- चलो ठीक है भैया मैं आपको अपने कपडे पहनकर दिखाउंगी, लेकिन अभी अभी निचे दीदी हैं, अगर उन्होंने देख लिए तो.

मैं- अच्छा एक काम कर अपने सरे कपडे. जो मैंने तुझे गिफ्ट किया था वो और आज के शॉपिंग वाला यही लेकर आ जा. और यही तरय करके मुझे दिखा दे.

मनीषा- लेकिन आपने जो गिफ्ट दिया था. वो बहुत hi ौड है भैया. मैं उसको कैसे पहनूंगी.

मैं- कुछ नहीं होता यार. बस तू ला जल्दी जाकर.

मेरी बात सुनकर मनीषा निचे चली गई और थोड़ी देर बाद अपने सरे कपडे लेकर मेरे रूम में आ गई. और बिस्टेर पर रख दिया. और मेरी तरफ देखने लगी. उसके बाद उसने शॉपिंग बैग मेरे बिस्टेर पर पलट दिया और उसे देखने लगी. मैंने जो उसके लिए 2-3 कपडे किये थे वो भी उसी के साथ निकल आये. उसे देखकर मनीषा ने मेरी तरफ देखते हुवे कहा.

मनीषा- ये किसका है भैया. लगता है उसने गलती से मेरे बैग में दाल दिया.

मैं- चलो अच्छा हुवा. बिना ख़रीदे तुम्हे इतना अच्छा कपडा मिल गया. इसे भी पहनकर दिखाना मुझे

मनीषा- लेकिन ये तो मैंने नहीं लिया और आपने कहा है की जो मैंने ख़रीदा है उसे और आपका गिफ्ट जो है उसे पहन कर दिखाना है.

मैं- तो यही समझ लो की ये मेरी तरफ से तुम्हारे लिए गिफ्ट है. चलो अब जल्दी करो नहीं तो मां, पापा के आने का समय हो रहा है.

मेरे इतना कहने के बाद मनीषा ने बिल निकल कर देखा तो वो मेरी तरफ देखकर बोली.

मनीषा- सच में भैया आप बहुत कमीने हो. अपनी बहन के लिए कैसे कैसे कपडे खरीद कर लेट हो

मैं- मुझसे अच्छा भाई किसी का नहीं होगा जो अपनी बहनो का इतना ख्याल रखता है. चलो अब पहनकर दिखाओ जल्दी.

मनीषा- कितने बेशरम हो आप भैया. मैं आपके सामने कपडे उतारू. आप बहार जाओ. पहन लेने के बाद मैं आपको बुला लुंगी.

मैं- मैं बहार जाऊँगा और तुम बार बार बुलाओगी. तो ये अच्छा नहीं लगेगा. मैं ऐसा करता हूँ की यहाँ बिच से चादर लगा देता हूँ तुम उसके पीछे कपडे चेंज कर कर के इधर आकर दिखा देना.

मनीषा- लेकिन आप यहाँ पर रहेंगे तो मुझे शर्म लगेगी और अगर आप इधर आ गए तो.

मैं- मैं वडा करता हूँ की मैं चद्दर के उस पर नहीं आऊंगा. और मैं पीछे मुंह करके खड़ा होऊंगा. जब तू मुझे बुलाएगी तभी मैं तुम्हारी तरफ देखूंगा.

मैंने इतना कहकर एक चद्दर रूम के बिच में फैलाकर एक पर्दा बना दिया उसके बाद मनीषा ने अपने पुरे कपडे परदे के एक तरफ रख कर कपडे चेंज करने लगी. मैं दूसरी तरफ खड़ा होकर उसका वेट करने लगा. थोड़ी देर बाद मनीषा एक जींस टॉप पहनकर परदे के पीछे से बहार आई और बोली.

मनीषा- मैं कैसी लग रही हूँ इन कपड़ो में.

मैंने जब मनीषा की तरफ देखा तो देखता hi रह गया. मनीषा ने जो टॉप पहना था उसका गाला डीप था. जिसमे से उसकी चूचिया ब्रा के जोड़ तक दिखाई दे रही थी. मैं तो उसकी चूचियों को hi देखने लगा. उसकी चूचियों की झलक देखकर मेरा लुंड खड़ा होने लगा. मैंने मनीषा को देखते हुवे कहा.



मैं- तुम बहुत hi सुन्दर लग रही हो इन कपड़ो में मनीषा. बहुत hi प्यारी लग रही हो तुम मनीषा.

मेरी बात सुनकर मनीषा बहुत खुश हुई और थोड़ी देर मुझे अपने कपडे दिखने के बाद दुसरे कपडे पहनने के लिए अंदर चली गई. थोड़ी देर बाद मनीषा एक और और जींस और टॉप पहनकर बहार आई और मुझसे पूछा.

मनीषा- देखो भैया इन ये कपडे कैसे लग रहे हैं.

मैंने पलट कर देखा तो. मनीषा ने जो टॉप पहना था उसमे गले से लेकर निचे तक डोरी से बंधा हुवा था जिसमे दोनों कपडे के छोर के बिच लगभग 4 इंच का गैप था और डोरी लगभग 1-1.5 इंच की दूरी पर ऊपर से निचे तक बंधी हुई थी जिसमे से मनीषा की चूचिया बहुत hi मस्त दिखाई दे रही थी.



उसकी चूचियों को देखकर मेरा लैंड खड़ा हो गया. मैंने मनीषा की चूचियों को देखते हुवे अपने लैंड को एकबार दबाकर निचे किया, परन्तु छोड़ने पर वह तन्न से लोअर समेत ऊपर उठ गया जिससे उसका तम्बू मनीषा की आँखों के सामने था. मनीषा भी मेरे लुंड को देखने लगी. मैं मनीषा की चूचियों को देखते हुवे कहा.

मैं- वाह मनीषा. बहुत hi खूबसूरत और सेक्सी लग रही हो इन कपड़ो में. तुम्हारे सामने तो रोड पर चलने वाली साडी लड़किया पानी काम चाय हैं.

Manisha(sharmakar)- क्या भैया आप भी मेरी झूठी तारीफ कर रहे हैं.

मैं- मैं सच कह रहा हूँ मनीषा. तू सच में बहुत खूबसूरत लग रही है. आखिर मेरी बहन है hi कितनी प्यारी.

मेरी बात सुनकर मनीषा बहुत खुश हुई. आखिर वो भी एक लड़की थी और खून सी लड़की को अपनी तारीफ पसंद नहीं होती. अपनी तारीफ सुनते हुवे वो मेरे लुंड को hi देख रही थी. थोड़ी देर मेरे लुंड को देखने के बाद मनीषा अंदर चली गई और थोड़ी देर बाद फिर एक कपडा पहन कर आई और मुझसे बोली.

मनीषा- ये कपड़ा कैसा लग रहा है भैया.

मैंने मुड़कर मनीषा को देखा तो मैं उसे देखता hi रह गया. मनीषा ने एक ऐसा कपडा पहना था जो उसकी चूचियों से होकर निचे जाता था. वो स्लीवलेस से भी ज्यादा लेस्स था मतलब की एकदम ब्रा की तरह था और उसकी चूचियों के निचे पूरा था लेकिन चूचियों के ऊपर जैसे उसको काटकर गांठ मरी गई हो. और वो मनीषा की चूचियों में एकदम घुसा हुआ था. जिससे मनीषा की चुच्या उभरकर बहार आ गई थी. उसे देखते hi मेरा लुंड झटके मरने लगा. मैं अपने लुंड को सहलाने लगा. जिसे मनीषा भी देखने लगी . लेकिन वह कड़ी अपनी चूचिया मुझे दिखती रही. मैंने मनीषा की चूचियों को देखते हुवे कहा.



मैं- वह मनीषा. क्या कपडे सेलेक्ट किये हैं तुमने. ऐसा लगता है की ये कपडे तुम्हारे लिए hi बनाये गए हों. एकदम फिटिंग के कपडे हैं. तुम्हारे शरीर की बनावट इस कपडे में खुलकर सामने आ रही है. तुम बहुत hi हॉट, सेक्सी और तूंच मॉल लग रही हो इन कपड़ो में.

मरी बात सुनकर मनीषा खुश भी हुई और शर्मा गई. मैंने उसे और कपडे पहनकर दिखने के लिए कहा तो उसने नखरा करते हुवे कहा.

मनीषा- इतने hi ख़रीदे थे भैया मैंने. हो गया अब.

मैंने- लेकिन तुमने शॉपिंग बैग के सरे कपडे पहनकर दिखने के लिए कहा था. अब चीटिंग मत करो मेरे साथ.

मनीषा- लेकिन मैं उसे कैसे पहन सकती हूँ वो तो अंडर गारमेंट्स हैं.

मैं- तो क्या हुवा. मुझसे क्यों शर्मा रही हो तुम. अब चुपचाप जाओ और पहन कर दिखाओ. मैं भी तो देखु उन कपड़ो में मेरी बहन की फिटिंग कैसी hai.(ye बात मैंने अपने लुंड को दबाते हुवे कही थी. मनीषा ने भी ये देख लिए. ) वो गरम भी हो गई मेरी सेक्सी बातो से तो उसने शरमाते हुवे कहा.

मनीषा- लेकिन मैं एक hi पहनकर दिखाउंगी. मंजूर हो तो बोलो.

मैं- ठीक है एक hi पहनकर दिखा दो.

मेरी बात सुनकर मनीषा अंदर चली गई. और थोड़ी देर बाद भी जब वो नहीं आई तो मैंने मनीषा से कहा.

मैं- क्या हुवा मनीषा और कितनी देर लगेगी. अब बहार आ भी जाओ न.

मेरी बात सुनकर मनीषा हलके हलके कदमो से बहार आई और मुझसे कहा.

मनीषा- भैया. इधर देखो.

मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा की तरफ घूम गया और मेरी नज़र मनीषा पर पड़ी तो मैं उसे बस एकटक्क देखता रह तय. मनीषा ने एक ब्लू रंग की ब्रा और पंतय पहनी हुई थी. उसने शर्म से अपनी गार्डन निचे झुके हुई थी और एक हाँथ अपनी चूचियों के ऊपर से डालकर अपने कंडे को पकड़ा था. मैं मनीषा को ब्रा पंतय में देखकर अपना लुंड मसलते हुवे आगे बढ़ने लगा. जिसे मनीषा ने देख लिया और मुझसे बोली.



मनीषा- वही रुक जाइये भैया. अगर आप मेरे पास आये तो मैं अभी यहाँ से चली जोगी और दुसरे कपडे भी नहीं दिखाउंगी पहनकर.

मैं- मैं यही रुकता हूँ, लेकिन तुमको अपना एक और अंदर गारमेंट्स पहन कर दिखाना होगा.

उसकी बात सुनकर मैं वही रुक गया और उपर्युक्त बात मनीषा से कही., मनीषा ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. मैं भी खड़ा होकर मनीषा के इस मादक रूप का दीदार करना लगा. थोड़ी देर मुझे अपनी चूचियों का दीदार करवाकर और मेरे लुंड का दीदार कर वो वापस अंदर चली गई.

थोड़ी देर बाद मनीषा एक ब्रा और पंतय पहकर बहार आई. इस बार उसकी चूचिया ब्रा से और बहार झांक रही थी.



मैं तो बस उसकी चूचियों में hi खो गया. मैं उसकी चूचियों के दीदार करने में इतना खो गया की कब वो अंदर चली गयी मुझे पता hi नहीं चला.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
ोककक.

आप एक बार रीड करिये फिर से. सेडक्टिव का तरीका तीनो का अलग अलग है.

हाँ कन्वर्सेशन में थोड़ी बहुत समानता है, लेकिन शामे तो शामे नहीं है.

अब अगर हार्डकोर चुदाई होगी तो जो भी डायलाग उस वक्त बोले जाएंगे. उसमे तो थोड़ी बहुत समानता रहेगी hi.

अब हम चुदाई वाले शब्दों की खोज तो नहीं कर सकते न. जो अवेलेबल शब्द हैं उन्ही से काम चलना पड़ता है.

फिर. भी आपका वैल्युएबल कमेंट के लिए धन्यवाद.

आगे से हम इस बात का ध्यान रखेंगे.

साथ बने रहिये.
 
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