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- Dec 5, 2013
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ऐसा मैं मई कहते हुई नवाज़ आरती की गोरी कमर अपने हाथ से और ज़्यादा कसता है…
तब आरती के मन से ahhhh….ye हलकी सिसकारी निकलती है.... उसकी ऑंखें अभी भी बंद थी.... अब जब नवाज़ ने उसके कमर से उसे आपने और दबाया तब आरती ने आपने सर ऑटोमेटिकली नवाज़ के शोल्डर पर रख diya..udhr नवाज़ ने आरती की पतली गोरी कमर को अचे से जड़के हुई था…
वैसे आज पहली बार नवाज़ को आरती को चुने को मिला था.. और वो भी इतने अच्छे तरीके से .. इतने बड़े घर की एकलौती बहु इस वक़्त नवाज़ के बहो मई थी ..खेत में काम करने वाले एक गरीब बदसूरत नौकर को इतनी जवान खूबसूरत शादीशुदा ाव्रत के इतना नज़दीक आने का मौका कहाँ से मिलता.... चुने का भी नहीं बहो मई लेने का मौका मिला था .. और इधर आरती को ये ख्याल नहीं था के वो आपने नौकरानी के आशिक़ से अपना जवान गरम जिस्म चिपकाये हुई कड़ी है..
उसने नवाज़ के शोल्डर मई आपने सर रख diya..pahle hi नवाज़ आरती से आ रही खुशबु को अपने अंदर ले रहा tha....aur जैसे hi उसने सर नवाज़ के शोल्डर पर रखा वैसे hi नवाज़ को लगा आरती ने सरेंडर कर दिया .. इस वजह से वो जोश मई आ गया .. उसने जोश मई आके उसके कमर को जोर से आपने अंदर दबा देता है उस वजह से उसके मम्मी जोर से नवाज़ के छथि के अंदर डाब जाते है ..
तब आरती के मन से फिर से एक बार सिसकारी निकलती है
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह...
नवाज़ के ऐसा करने से उसके
पुरे जिस्म में एक झटका सा लगता hai...kamp उठता है उसका पूरा जिस्म... अब तक नवाज़ ने न जाने किस तरह से खुद को कण्ट्रोल किये हुई .. इतना हॉट माल अपनी बाँहों में होने के बाद भी नवाज़ ने कुछ नहीं किया था .. पर अब उसको बर्दास्त नहीं हो रहा था .. इसलिए उसने ये हरकत की ... उसको लगा अगर वो थोड़ा आगे बाद तो ये जवान शादीशुदा ाव्रत उसके निचे आ सकती है ...
पर इधर अब आरती को अहसास होने लगता है के वो किस हालत में hai…aarti ने ऑंखें अभी भी बंद किये हुई थे .. किचन मई अब सन्नाटा सा चाय हुआ था.. अब उसे अहसास होता है के नवाज़ के बड़े खुरदुरे हाथ उसकी गोर मुलायम कमर पर hain...aur वो नवाज़ के बहो मई है . . उसको वो चिपक कर कड़ी
है…
आरती को अब अहसास होता है के ये सब ठीक नहीं है .. इसलिए वो झट से पीछे होती है और नवाज़
भी उसे चोरर देता hai…aarti नवाज़ स से नज़र नहीं मिला प् रही thi....use बोहत शर्म आ रही थी .. इसलिए नवाज़ को बिना देखे वो वह से चली गयी ..जाते हुई आरती की गांड को देख के नवाज़ अपना लौड़ा पंत के ऊपर से मसलता है ...
कब तक बचेगी मुझसे आरती रानी .. तेरी बदन का नशा मेरे लौड़े को लग गया hai....ab तो ये शांत होने से raha....ab तो तेरी गुलाबी छूट या तेरे गांड के छेद में जाकर hi शांत होगा.....
और फिर उसके बदसूरत चेहरे पर एक घिनौनी हसी आ जाती hai…udar आरती सीधा किचन से अपने बैडरूम मई चली जाती है और दरवाज़ा बंद करके सीधा दरवाजे को सात के कड़ी हो जाती hai...wo जोर जोर से साँस लेने लगती hai....jaise किसी चुंगुल से बहार निकली ho..waise भी वो अभी अभी एक शैतान के चुंगुल से निकली लेकिन कब तक बची रहेगी पता nahi...wo अपनी सांसों पर अभी भी काबू पाने की कोशिश कर रही थी....
क्या था ये ...मैं कैसे इतना लापरवाह हो सकती hun....mana के मैं गिराने वाली थी लेकिन यूँ नवाज़ से चिपकना.... वो नीता का प्यार है और मई उससे चिपक गयी ..
ये सब सोच के आरती की धड़कन तेज़ हो जाती है....
सिर्फ नवाज़ के चुने से मुझे ऐसा क्यों हो रहा hai….usne ये सब गलती से किया या मुझे बचने के लिए किया या जानबूझकर किया … नहीं नहीं नवाज़ ऐसा लड़का नहीं है .. मैंने अभी अभी तो माँ को कहा ..और मई अब ये क्या सोच रही हु .. उसने मुझे गिराने से बचने के लिए hi पकड़ा और आपने से सत्ता diya.par नवाज़ ने जैसे hi मेरे कमर पाई हाट रखते hi.. हाथ लगाने से ऐसे क्यों हुआ मुझे .. मैंने ओपपोसे क्यों नहीं किया .. मुझे आपने खुद के जिस्म के रिएक्शन पर यकीन नहीं हो रहा है .... मई ऑटोमेटिकली उसकी और क्यों चली गयी .. और तो और उसके शोल्डर पर मैंने आपने सर रख लिया .. जैसे की वो मेरा हस्बैंड हो ..
फिर स्माइल करते है और फिर वो जाकर बीएड पर लेट जाती hai....tabhi उसे अपनी पंतय में चिपचिपापन महसूस होता है और वो हैरान हो जाती है के कैसे आखिर बिना कुछ किये उसकी छूट गीली हो गयी .... आरती असमंजस में थी ....वो अपना हाथ साड़ी के ऊपर से पंतय पर लेजाती hai....uski पंतय चिपकी हुई थी छूट से चिपचिपाजात की वजा se...aart को बोहत शर्म आरही thi....uske साथ
आजतक ऐसा कभी नहीं हुआ tha....usne ऐसा एक्सपीरियंस कभी नहीं किया था.
वह बीएड से उठ कर वाशरूम चली जाती है और फ्रेश होने लगती है...
फिर कहते है ..
ये सब इस आयल की वजह से हुआ .. न वो मेरे हर से गिरता ..और न hi मई फिसल जाती .. फिर मिरर में देखते हुई वो अपनी साडी उतर देते है .. फिर आपने कमर को देखती है .. उसे अपनी कमर पर नवाज़ के कठोर बड़े हाथों का अहसास यद् अत है.... जैसे hi कमर पर नवाज़ का हाट कमर पर आया तब कैसे उसके जिस्म में झटका सा लगा था.... वो उसे याद करती है .. आरती अब खुद की हालत को समझ नहीं प् रही थी के आखिर उसके साथ ऐसा हो
क्यों रहा है ...
फिर वो बाथरूम से बहार आयी और बीएड पर वैसे hi बैठ गयी .. बिना साड़ी के .. सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पाई .. लेकिन उसके दिमाग में बार बार वही ख्याल आ रहा था जब वो नवाज़ के बहो मई थी और नवाज़ ने उसकी कमर को पकड़ के आपने और आरती को दबा दिया और उसके मम्मी नवाज़ के छथि मई डाब गए .. ....यही सब सोचते हुई वो कब गहरी नींद में चली गयी उसे पता hi नहीं चला...
अगली सुबह विंडो से आती हुवली सूरज की किरण से उसकी आंख खुलती hai...wo अपने ऑंखें मलते हुई बैठ जाती है बीएड में और टाइम देखती hai....fir बीएड से उतर
कर फ्रेश होने जैसे hi मिरर मई जाने लगाती है तब उसे याद आता है की रात मई उसने साड़ी पहनी hi नहीं .. फिर खुद को hi कहती है
इस नवाज़ के चक्कर मई बिना साड़ी के मई सो गयी .. ओह्ह्ह गोड़ .. ये लड़का मुझे पागल कर देगा .. अच्छा हुआ अरविन्द नहीं थे ..नहीं तो वो क्या बोलते .. क्या इज़्ज़त रह जाती मेरे ..
तब आरती के मन से ahhhh….ye हलकी सिसकारी निकलती है.... उसकी ऑंखें अभी भी बंद थी.... अब जब नवाज़ ने उसके कमर से उसे आपने और दबाया तब आरती ने आपने सर ऑटोमेटिकली नवाज़ के शोल्डर पर रख diya..udhr नवाज़ ने आरती की पतली गोरी कमर को अचे से जड़के हुई था…
वैसे आज पहली बार नवाज़ को आरती को चुने को मिला था.. और वो भी इतने अच्छे तरीके से .. इतने बड़े घर की एकलौती बहु इस वक़्त नवाज़ के बहो मई थी ..खेत में काम करने वाले एक गरीब बदसूरत नौकर को इतनी जवान खूबसूरत शादीशुदा ाव्रत के इतना नज़दीक आने का मौका कहाँ से मिलता.... चुने का भी नहीं बहो मई लेने का मौका मिला था .. और इधर आरती को ये ख्याल नहीं था के वो आपने नौकरानी के आशिक़ से अपना जवान गरम जिस्म चिपकाये हुई कड़ी है..
उसने नवाज़ के शोल्डर मई आपने सर रख diya..pahle hi नवाज़ आरती से आ रही खुशबु को अपने अंदर ले रहा tha....aur जैसे hi उसने सर नवाज़ के शोल्डर पर रखा वैसे hi नवाज़ को लगा आरती ने सरेंडर कर दिया .. इस वजह से वो जोश मई आ गया .. उसने जोश मई आके उसके कमर को जोर से आपने अंदर दबा देता है उस वजह से उसके मम्मी जोर से नवाज़ के छथि के अंदर डाब जाते है ..
तब आरती के मन से फिर से एक बार सिसकारी निकलती है
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह...
नवाज़ के ऐसा करने से उसके
पुरे जिस्म में एक झटका सा लगता hai...kamp उठता है उसका पूरा जिस्म... अब तक नवाज़ ने न जाने किस तरह से खुद को कण्ट्रोल किये हुई .. इतना हॉट माल अपनी बाँहों में होने के बाद भी नवाज़ ने कुछ नहीं किया था .. पर अब उसको बर्दास्त नहीं हो रहा था .. इसलिए उसने ये हरकत की ... उसको लगा अगर वो थोड़ा आगे बाद तो ये जवान शादीशुदा ाव्रत उसके निचे आ सकती है ...
पर इधर अब आरती को अहसास होने लगता है के वो किस हालत में hai…aarti ने ऑंखें अभी भी बंद किये हुई थे .. किचन मई अब सन्नाटा सा चाय हुआ था.. अब उसे अहसास होता है के नवाज़ के बड़े खुरदुरे हाथ उसकी गोर मुलायम कमर पर hain...aur वो नवाज़ के बहो मई है . . उसको वो चिपक कर कड़ी
है…
आरती को अब अहसास होता है के ये सब ठीक नहीं है .. इसलिए वो झट से पीछे होती है और नवाज़
भी उसे चोरर देता hai…aarti नवाज़ स से नज़र नहीं मिला प् रही thi....use बोहत शर्म आ रही थी .. इसलिए नवाज़ को बिना देखे वो वह से चली गयी ..जाते हुई आरती की गांड को देख के नवाज़ अपना लौड़ा पंत के ऊपर से मसलता है ...
कब तक बचेगी मुझसे आरती रानी .. तेरी बदन का नशा मेरे लौड़े को लग गया hai....ab तो ये शांत होने से raha....ab तो तेरी गुलाबी छूट या तेरे गांड के छेद में जाकर hi शांत होगा.....
और फिर उसके बदसूरत चेहरे पर एक घिनौनी हसी आ जाती hai…udar आरती सीधा किचन से अपने बैडरूम मई चली जाती है और दरवाज़ा बंद करके सीधा दरवाजे को सात के कड़ी हो जाती hai...wo जोर जोर से साँस लेने लगती hai....jaise किसी चुंगुल से बहार निकली ho..waise भी वो अभी अभी एक शैतान के चुंगुल से निकली लेकिन कब तक बची रहेगी पता nahi...wo अपनी सांसों पर अभी भी काबू पाने की कोशिश कर रही थी....
क्या था ये ...मैं कैसे इतना लापरवाह हो सकती hun....mana के मैं गिराने वाली थी लेकिन यूँ नवाज़ से चिपकना.... वो नीता का प्यार है और मई उससे चिपक गयी ..
ये सब सोच के आरती की धड़कन तेज़ हो जाती है....
सिर्फ नवाज़ के चुने से मुझे ऐसा क्यों हो रहा hai….usne ये सब गलती से किया या मुझे बचने के लिए किया या जानबूझकर किया … नहीं नहीं नवाज़ ऐसा लड़का नहीं है .. मैंने अभी अभी तो माँ को कहा ..और मई अब ये क्या सोच रही हु .. उसने मुझे गिराने से बचने के लिए hi पकड़ा और आपने से सत्ता diya.par नवाज़ ने जैसे hi मेरे कमर पाई हाट रखते hi.. हाथ लगाने से ऐसे क्यों हुआ मुझे .. मैंने ओपपोसे क्यों नहीं किया .. मुझे आपने खुद के जिस्म के रिएक्शन पर यकीन नहीं हो रहा है .... मई ऑटोमेटिकली उसकी और क्यों चली गयी .. और तो और उसके शोल्डर पर मैंने आपने सर रख लिया .. जैसे की वो मेरा हस्बैंड हो ..
फिर स्माइल करते है और फिर वो जाकर बीएड पर लेट जाती hai....tabhi उसे अपनी पंतय में चिपचिपापन महसूस होता है और वो हैरान हो जाती है के कैसे आखिर बिना कुछ किये उसकी छूट गीली हो गयी .... आरती असमंजस में थी ....वो अपना हाथ साड़ी के ऊपर से पंतय पर लेजाती hai....uski पंतय चिपकी हुई थी छूट से चिपचिपाजात की वजा se...aart को बोहत शर्म आरही thi....uske साथ
आजतक ऐसा कभी नहीं हुआ tha....usne ऐसा एक्सपीरियंस कभी नहीं किया था.
वह बीएड से उठ कर वाशरूम चली जाती है और फ्रेश होने लगती है...
फिर कहते है ..
ये सब इस आयल की वजह से हुआ .. न वो मेरे हर से गिरता ..और न hi मई फिसल जाती .. फिर मिरर में देखते हुई वो अपनी साडी उतर देते है .. फिर आपने कमर को देखती है .. उसे अपनी कमर पर नवाज़ के कठोर बड़े हाथों का अहसास यद् अत है.... जैसे hi कमर पर नवाज़ का हाट कमर पर आया तब कैसे उसके जिस्म में झटका सा लगा था.... वो उसे याद करती है .. आरती अब खुद की हालत को समझ नहीं प् रही थी के आखिर उसके साथ ऐसा हो
क्यों रहा है ...
फिर वो बाथरूम से बहार आयी और बीएड पर वैसे hi बैठ गयी .. बिना साड़ी के .. सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पाई .. लेकिन उसके दिमाग में बार बार वही ख्याल आ रहा था जब वो नवाज़ के बहो मई थी और नवाज़ ने उसकी कमर को पकड़ के आपने और आरती को दबा दिया और उसके मम्मी नवाज़ के छथि मई डाब गए .. ....यही सब सोचते हुई वो कब गहरी नींद में चली गयी उसे पता hi नहीं चला...
अगली सुबह विंडो से आती हुवली सूरज की किरण से उसकी आंख खुलती hai...wo अपने ऑंखें मलते हुई बैठ जाती है बीएड में और टाइम देखती hai....fir बीएड से उतर
कर फ्रेश होने जैसे hi मिरर मई जाने लगाती है तब उसे याद आता है की रात मई उसने साड़ी पहनी hi नहीं .. फिर खुद को hi कहती है
इस नवाज़ के चक्कर मई बिना साड़ी के मई सो गयी .. ओह्ह्ह गोड़ .. ये लड़का मुझे पागल कर देगा .. अच्छा हुआ अरविन्द नहीं थे ..नहीं तो वो क्या बोलते .. क्या इज़्ज़त रह जाती मेरे ..