KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION - Page 13 - SexBaba
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KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION

आरती- तुम मेरे लवर नहीं हो ...... तुम नीता के लवर हो

नवाज- उसका लवर मई नहीं हूँ...

आरती - मेरा लवर मेरा पति है .... मई शादीशुदा हूँ

नवाज - मई भी हूँ न तुम्हारा लवर

आरती - फिर नीता का कोण हो

नवाज - उस से तो मेरा सिर्फ छोड़ने के लिए नाता है

आरती- तुम बहोत गंदे हो

नवाज - यस... माय डार्लिंग

आरती - मालकिन और नौकर का लवर का रिस्ता नहीं होता है

नवाज- फिर क्या छोड़ा छोड़ी का होता है के

ये कहते हुई नवाज आरती के नैक को किश करता है

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और आपने दोनों हटो को आगे पथ से सरकते हुई नवल तक ले जाता है

आरती - तुम बहोत अश्लील भाषा उसे करते हो

नवाज - क्या

आरती- गन्दी भाषा

तब आरती आपने दोनों हाथ नवाज के दोनों हटो पर रखती है और बोलती है

आरती- प्ल्ज़ स्टॉप आईटी नवाज ... आगे नहीं .. मेरे मर्यादा है..... मई शादीशुदा हूँ

नवाज - फिर क्या हुआ

ये कहते हुई आपने हैट थोड़ा ऊपर बूब्स की तरफ ले जाता है..

आरती - फिर क्या हुआ मतलब? मई शादीशुदा हूँ....... तुम कैसे पता नहीं है की मेरे मजबूरी..... मेरे शरीर पर सिर्फ और सिर्फ मेरे पति का अधिकार है और दूसरे किसीको मई मेरे बॉडी छु नहीं दे सकते...

तभी नवाज आपने एक हाट आरती के बूब्स की तरफ ले जा रहा था वो हाट लेफ्ट बूब्स पर रख कर जोरदार दबाता है और दूसरा हाट जो निचे सदी के पास था वो सदी के अंडर से पेटीकोट के अंडर से होते हुई पंतय तक ले जाता है और तीसरी तरफ अपनी जीब से आरती के नैक और बैक को चेतना सुरु कर देता है जो भाग बैकलेस ब्लाउज के वजसे ओपन था ..

इस थी तरफा हमले से आरती और मदहोश हो जाती है

आरती - ोोोोूँछहःछः...... दर्द होता है रे

नवाज - आप जूट बोल रही हो

आरती - क्या झूट

एक तरफ बूब्स को मसल रहा था और दूसरी तरफ पैंटी के ऊपर से दूसरे हाट से छूट को मसल रहा था

नवाज - यही की तुम्हारे बॉडी पर सिर्फ हस्बैंड का अधिकार है

आरती - इसमें क्या झूट है

नवाज - क्या मुलायम आम है और उतनी hi पानीदार छूट लग रही है ..

ऐसे लगता है कॉलेज मई आपके बहुत लवर रहे होंगे .. आपके पति के पहले आपके लवर ने छोड़ा होगा

आरती - मई क्या तुम ऐसे वैसे लगते हूँ

तभी नवाज अपना एक उंगली पंतय के उप्पेर से हे छूट मई डालता है ..

आरती - उउउउइइइइइइइ म्मम्माआआ.......... आआआअह्ह्हह्हआआआ

नवाज - शादी से पहले आपको किसने छोड़ा नहीं था क्या ..

आरती - मेरे शरीर को सबसे पहले मेरे हस्बैंड ने hi छुआ था .... मई एक शालीन लड़की रही हूँ....... पहलेसे मई आपने दाहिलासे लगती नहीं हूँ

तभी आरती को एक पीछे से नवाज जोरदार जतका देता है उससे उसका 9' लौड़ा जो बहुत कड़क एक रोड की तरह बना हुआ था चुबता है

इस हमले के लिए आरती बिलकुल तैयार नहीं थी

आरती - ा आ ा आ आए ..... आआआआअह्हह्ह्ह्हह्हआआआधीरे से चूब रहा है..

तब नवाज़ उसे घूमता है और किश करने लगता है..

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नवाज - मतलब तेरे ओपनिंग तेरे हस्बैंड ने की है

इससे आरती और शर्मा जा टी हे

नवाज - तेरे ओपनिंग तेरे हस्बैंड ाचे से की है या नहीं

तभी नवाज का जो लेफ्ट हैंड बूब्स पर रखा था वो निकल लेता है और पीछे ले जा कर एक झट के से ब्लाउज खोल था है..... लगभग थोड़ hi देता है और इस पर आरती उस से कहते है

तोड़ डोज क्या.. धीरे से निकालो न

उसपर नवाज कहता है

मई धीरे से खेलने वाला खिलड़ी नहीं हूँ

वो तो पता लग गया है मुझे

नवाज - तो तेरे ओपनिंग ाचे से हुई या नहीं

आरती -(न समजते हुई) मतलब

नवाज - तेरा ये सील ाचे से टूटा या नहीं

ये कहते हुई पंतय के अंडर से हाट डालते हुई छूट मई एक उंगली खुसा देता है

इससे आरती बहोत तड़पती है

आरती - ाहहाआ....

एक लम्भी सांस छोड़ती है

नवाज - लगता तो नहीं तेरे सील ाचे से तेरा पति ने तोड़ी होगी

आरती - मई मेरे पति से सटिस्फी हूँ

नवाज - लगता तो नहीं

आरती - तेरा मतलब क्या है

नवाज तब एक हाट ऊपर जो बूब्स की तरफ था वो ब्लाउज के निचे से ब्रा के उप्पेर से दोनों बूब्स को मसल रहा था और दूसरे हाट से छूट के मालिश कर रहा था और दूसरी और उसके चीक्स, नैक पीठ पर किश करते झा रहा था

नवाज - मैडम आपके ससुर जी मतलब हमारे शेठ जी बोल रहे थे की मेरे बहु को मेरा बीटा ाची तरह से छोड़ता नहीं है, वो बहोत ज्यादा शर्मीला है. उसको अच्छे से छोड़ो

( अरविन्द बहोत शर्मीला है ये सब जानते थे, इस का फायदा नवाज उतना चाहता था)

आरती - आआअह्ह्ह्हह्हआआअस............

धीरे से.... ऐसे hi......... Maaaaaaaaaaaa

Heeeeeeeeeeeeeee bhagwannnnnnnnnn

मुझे yyyyyyyyyyeeeeeeee क्या हो राहाआआ

है............. Mujeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee

बचालो

तब नवाज एक हाट से छूट मसल रहा था और दूसरा लेफ्ट हैंड पीछे ले जाते हुई पंत मई से hi लैंड आरती के गांड पे मसल रहा था

नवाज - तुम्हारी माँ और तुम्हारा भगवन तुम बचने नहीं आएंगे .. बचाएगा तो नवाज hi

आरती - तुम बहोत बदमाश हूँ ..मेरे ससुरजी ऐसे बाटे तुम क्यों करेंगे .. कमीने कही के..

अब पीछे वाला हाट नवाज सदी में पीछे से दाल के गांड मसल रहा था..

नवाज - मई थो कमीना हूँ hi और चुदकड़ भी

आरती - तुम और कुछ नहीं मिलेगा जो मिल रहा है उसमे सटिस्फी रहो

नवाज - क्यों तुम मजा नहीं आ रहा है क्या

आरती - मजे की सजा माइलेज न

नवाज - क्या मतलब

आरती - मई शादीशुदा हूँ, किसकी बीबी हूँ, इस बड़े घर की बहु हु. हमारे खंडन का नाम है नवाज .. किसी को पता चला तो मई बदनाम हो जाउंगी .. मई बर्बाद हो जाउंगी ...

तभी आपने लेफ्ट हैंड जो पीछे आरती के गांड पे था उसको फिर से आगे ले जा के पहले ब्लाउज निकल देता है और ब्रा के ऊपर से दोनों बूब्स को मसल रहा था नवाज बरी बरी. तभी नवाज दूसरी तरफ आपने किश आपने फेस आगे करके बूब्स की ऊपर वाली साइड और नैक की निचे वाली साइड को किश कर रहा था...

नवाज - तुम क्या पहले शादीशुदा औरत नहीं हो जिसको मई छोड़ने जा रहा हूँ .. सब आपने दोनों मई hi रहेगा इस लिए बदनाम होने का सवाल hi नहीं है... किसी को कुछ पता नहीं चलेगा ..

आरती - है मुझे पता है नीता के साथ यही करते हो

नवाज - वो तो एक है

तभी नवाज लेफ्ट हैंड से ब्रा के ऊपरी साइड से ब्रा के अंडर हाट डालता है और उसके मुलायम आम को मालिश कर रहा होता है ..

उसके निप्पल को निचोड़ रहा था उंगली और ाँगता के बिच में ले कर

आरती - उउउउइइइइइइइ म्मम्माआआ ... धीरे से न दर्द होता है न ..

नवाज - मई ने बोलै था न तेरे पते ने तेरे अच्छे से सेवा नहीं की है ...

आरती - है सेवा अच्छे से की है

तभी वो अपनी एक उंगली छूट मई दाल कर रब कर था है और जोर से बूब्स मसल था है

नवाज - फिर चीला क्यों रही हो आरती डार्लिंग ..

आरती - क्या...... डायरेक्ट मालकिन और मैडम से आरती डार्लिंग पर ...

नवाज - क्या करो मालकिन कुछ करने hi नहीं दे रही है तो सोचा अपनी आरती डार्लिंग से hi काम चला लेता हु ...

आरती - वो सब कुछ करने देगी क्या ..

नवाज- हां..

आरती - बहोत स्मार्ट हो

फिर नवाज दो उंगली छूट में डालता है

नवाज - बहोत कासी हुई छूट है तेरे

शादी को कितने साल हुई

आरती - 6 महीने........... क्यों

नवाज - फिर बे अगर मई होता तो तेरे छूट का ाचे से ओपनिंग करता

इस से आरती फिर एक बार शर्मा जाती है

नवाज - आरती डार्लिंग तेरे शादीशुदा जिंदगी अच्छे से चल रही है ऐसे मुझे नहीं लग रहा है

आरती - मेरे शादीशुदा जिंदगी अचे से चल रही है और मई कोई तुम्हारी डार्लिंग नहीं hoo..mai तुम्हारी शादीशुदा मालकिन हूँ

नवाज - ठीक है मालकिन डार्लिंग

आरती - मई कोई तुम्हारी डार्लिंग नहीं हु

ओनली मालकिन हु... तुम्हारी डार्लिंग तो नीता है

नवाज एक बार फिर बूब्स दबाता है

नवाज - वो तो सिर्फ छोड़ने के लिए है

आरती - यहाँ कोई आ जायेगा.. दूर ओपन है.. मेरे बारे मई सोचो मई बदनाम हो जाउंगी

नवाज - नहीं होगी.. तुम पहली नहीं हूँ जिसको मई छोड़ने वाला हूँ

आरती - तो ऐसे कितने है

नवाज - काउंट नहीं की है

आरती - फिर बी कितनी है

नवाज - 12 हो गई है.. तेरा नंबर 13 है

आरती - क्या.. कैसे पॉसिबल है.. तुम्हारी उम्र कितने है

तभी वो छूट को जोरदार मसल देता है

आरती - एआईईईई धीरे से न बाबा

नवाज - 21..बाबा नहीं नवाज डार्लिंग

आरती - मई 24 की हूँ.. तुमसे बड़ी हूँ.. और तुम मुज से क्या उम्मीद रख रहे हो

नवाज- आरती डार्लिंग तुम्हारा पति तुमसे बड़ा है न फिर बे तुम्हारी छूट खोल नहीं पाया था न.. उम्र से कुछ नहीं होता.. लौड़े के साइज पर निर्भर करता है.. मेरे इस 9' लौड़े ने ाचे ाचे छूट का भोसड़ा बना दिया है.. और ये गांड.. कातिल है.. गांड का हाल तो पूछो hi मत.. लगता है सबसे पहले तुम्हारी गांड मरने पड़ेगी.. तुम्हारा पति तुम्हारी गांड मरता है की नहीं..

इस से आरती और ज्यादा शर्मा जाती है

आरती - तुम अब तक जितना मिला बहोत है.. अब मुझे जाने दो.. कोई आ जायेगा दूर ओपन है

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नवाज - आरती डार्लिंग चलो इसे लगा लेते है

आरती - मई कोई तुम्हारी डार्लिंग नहीं हु तुम्हारी डार्लिंग तो नीता है और बची हुई और भी होगी

नवाज - तो तुम कोण हो

आरती - मालकिन

नवाज - मालकिन इतना कुछ करने देगी हर नौकर को

आरती - पागल हो क्या कुछ भी बोले जा रहे हो

मई क्या तुम ऐसे वैसे लगते हूँ क्या

मई एक अच्छे घर की पड़ी लिखी बहु hu..tum आपने आप को क्या समजते ho..mere साथ कुछ भी किये जा रहे हो और कुछ भी बोले जा रहे हो

नवाज - मई तो आपने आप को आप का लवर समझता हूँ

आरती - लवर नहीं हो

नवाज - तो क्या हो

ये बोल के आरती सोचती है मई क्या बोल गई

नवाज - बोलो न क्या हो मेरी.. पत्नी नहीं हो, लवर नहीं हो...

आरती कुछ नहीं बोलती है

नवाज - लगता अभी एक hi रिलेशनशिप बची है

तब आरती बोल पड़ती है

आरती - क्या

नवाज - तुम मेरे रांड या रखेल होगी

इस पैर आरती बहोत गुस्से मई आ जाती है.. और नवाज के हटो से छूटने की कोशिश करती है

नवाज - बोलो न मेरे आरती रांड

आरती - तुम खुद को क्या समजते हो.. दूर हैट जाव मुझसे.. मई तुम्हारी मालकिन हु

नवाज - ठीक है मेरे रखेल मालकिन या मेरे रांड मालकिन

आरती - मुझे यहाँ एक मिनट नहीं रुकना है

और एक जोर का जतका देखे नवाज के हटो से छूट जाती है..
 
नवाज - तुम मेरे रांड या रखेल होगी

इस पैर आरती बहोत गुस्से मई आ जाती है.. और नवाज के हटो से छूटने की कोशिश करती है

नवाज - बोलो न मेरे आरती रांड

आरती - तुम खुद को क्या समजते हो.. दूर हैट जाव मुझसे.. मई तुम्हारी मालकिन हु

नवाज - ठीक है मेरे रखेल मालकिन या मेरे रांड मालकिन

आरती - मुझे यहाँ एक मिनट नहीं रुकना है

और एक जोर का जतका देखे नवाज के हटो से छूट जाती है..

तभी आरती के कानो मई आरती आरती आवाज़ आती है ..तब आरती आँख खोलती है तब उसके आँखों के सामने उसका हस्बैंड अरविन्द था .. आपने सामने अरविन्द को देख के आरती को बहुत बड़ा झटका लगा .. वो सोचने लगी ..

मई तो नवाज़ के साथ मई थी .. किचन में तो ये अरविन्द कहा से आ गए ..और मई बैडरूम मई कब आ गयी..

ऐसा वो सोचने लगी तब अरविन्द कहता है ..

आरती कब से मई तुम आवाज दे रहा हु .. और तू इतनी गाड़ी नींद मई .. ऐसा तो कभी नहीं होता .. और इतने लेट तो तो सोती नहीं है ..

तब आरती सोचते है ..

क्या मई नींद मई.. मतलब ये सपना था ..

तब चहरे पर स्माइल लेट हुई कहते है

हां ..वो नींद कब लग गयी पता hi नहीं चला ..

चलो उठो ..मई फ्रेश होक आता हु ..

जैसे hi अरविन्द बाथरूम में जाता है आरती मिरर के सामने जाती है और शर्माती हैं..

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मई और सपना ..और वो भी नवाज़ का ..ऐसे कैसे ..

फिर आरती थोड़ी देर वैसे hi कड़ी रहती है .. नवाज़ के बारे मई सोचते हुई .. फिर जब उसका पति बाथरूम से बहार आता तब बैडरूम मई की इधर उधर की चीज़े ठीक करने लगती है… आरती का ध्यान सफाई पर काम और नवाज़ पर ज़्यादा था… वो चीज़े ठीक करते हुई नवाज़ के बारे मई सोच रही थी …

फिर जब उसका पति आरती को कहता है..

भूख लगी है .. नास्ते मई बनाया है

तब उसे याद आता है आज नास्ता तो बनाया hi नहीं इस नवाज़ और नीता के चक्कर..

तब वो कहती है..

अभी बना लेती हु

अरविन्द उसे आगे बोलनेवाला था अभी तक नहीं बनाया क्या तब तक उसको किसी का कॉल आया ..तब वो सिर्फ इतना hi कहता है ..

जल्दी बनाओ

इतना कह के कॉल उठता है ..

इधर आरती जल्दी से फ्रेश होने वाशरूम मई गयी और जल्दी फ्रेश होक बहार आ जाती है और किचन मई जेक आज सुबह का नाश्ता बनाने लगी ..
 
तब वो कहती है..

अभी बना लेती हु

अरविन्द उसे आगे बोलनेवाला था अभी तक नहीं बनाया क्या तब तक उसको किसी का कॉल आया ..तब वो सिर्फ इतना hi कहता है ..

जल्दी बनाओ

इतना कह के कॉल उठता है ..

इधर आरती जल्दी से फ्रेश होने वाशरूम मई गयी और जल्दी फ्रेश होक बहार आ जाती है और किचन मई जेक आज सुबह का नाश्ता बनाने लगी

कुछ 10 मिनट बाद उसे क्या सज़ा पता नहीं वो बहार हाल मई आयी और आपने पति को देखने लगी .. उसका पति अभी भी फ़ोन पाई बात करने लगा था .. तब वो कहती है ..

क्या मई नहीं साड़ी पहनो क्या

ये कहते हुई वो शर्मा गयी

..

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फिर वो कुछ न बोलते हुई आपने बैडरूम मई गयी .. आपने वार्डरॉब के पास आयी और आरती ने नई साड़ी पहनी जो अपने पति के साथ गुमने टाइम उसने खरीदी थी ... उसने पिंक साड़ी के साथ डीपनैक स्लीवलेस ब्लाउज पहना .. हल्का सा मेकअप उप किया .. मेकअप करने के बाद मनो वो एकदम किसी हॉट हीरोइन जैसे हॉट लग रही थी …

आरती इस वक़्त किचन मई हर रोज़ की तरह नास्ता बना रही थी ..पर किस के लिए … आपने हस्बैंड के लिए या नवाज़ के लिए .. क्या वो नवाज़ के आने का इंतज़ार कर रही थी क्या ?? उसके अभी जो साड़ी पहनी थी क्या वो नवाज़ के लिए पहनी थी क्या .. आज उसने अपने आपको थोड़ा मेके उप भी किया हुआ था....... क्या ये सब नवाज़ के लिए था ..

अब थोड़ी देर बाद आरती का हस्बैंड किचन मई आके दिंनिंग टेबल पाई बैठ गया था और आरती से बाते कर रहा था .. और उसके ट्रिप के बारे मई बता रहा था पर आरती का ध्यान हॉल के मैं दूर पर hi था .. बार बार वो पलट के उधर hi देख रही थी .. तब अरविन्द पूछता है

कोई आनेवाला है क्या

तब आरती हड़बड़कर कहते है

नहीं तो

वक़्त तेज़ी से गुज़र रहा था .......... अब उसका नास्ता तैयार हो गया तह और उसने आपने पति को नास्ता दे दिया था .. वक़्त जैसे गुज़र रहा था वैसे वैसे नवाज़ को लेकर आरती बेचैन हो उठी थी ........ वो सोचने लगी थी .. अब तक क्यों नहीं आया है .. क्या उसे भूक नहीं लगी होगी क्या ..

घडी की टिक टिक करती सुई उसकी बेचैनी को पल पल बढ़ा रही थी......... रह रहकर उसके दिल में नवाज़ की साडी बाते याद आ रही थी .. जो वो उसके साथ फ़्लर्ट करने के उदेश से कर रहा था ....... जिस से वो और बेचैन हो उठाती है ..... फिर उसे उसके तरफ देखना याद आता है .. तब वो शर्मा जाती है..

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और शर्म से अपनी आँखे बंद कर देती है ..नवाज़ का ऐसे देखना अब उसे ाचा लगने लगा था..... जब अब अचानक दरवाज़े की बेल्ल बजी तो आरती ने आँख खोली और बेल्ल की वजह से आरती के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर गयी.......

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और उसकी नज़र हॉल के मैं दूर पर जाकर टिक गयी ........ वो बड़ी बेसब्री से नवाज़ के आने का इंतज़ार करने लगी थी ....... बेल्ल बजने के बाद उसे लगा जिस पल का वो बड़ी शिद्दत से इंतज़ार कर रही थी वो पल आ गया है ....... धड़कते दिल से वो फ़ौरन तेज़ी से मैं दूर के तरफ भाग पड़ती हैं ....... दरवाज़ा खोलने .......... और जैसे hi वो दरवाज़ा खोलती हैं उसके चेहरे पर आयी मुस्कान एक hi पल में जैसे गायब हो जाती hain........kaleja ज़ोरों से धड़क उठता hain..........jitni उमीदें जितनी आस लगाए वो बैठी थी सब एक पल में टूट गया था ......क्यों की सामने इस वक़्त दरवाज़े पर नवाज़ नहीं बल्कि उसकी ससुर थे ......... शेठ जी थे ..

आपने ससुर को देखते hi फ़ौरन बोल पड़ती हैं ......

आआपपपपपप ..........

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तब उसका ससुर कहता है

हाँ मई .. और कोण हो सकता है

और अंदर आने के बाद कहता है

कोई दूसरा आने वाला था क्या

तब आरती अपनी नज़रे नीचे की तरफ झुका लेते हैं....... और शर्मा के कहती है

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नहीं तो पापा.. इस वक़्त कोण आ सकता है

मई भी वही कह रहा हु

हाँ पापा चलिए आप उनके साथ नास्ता कीजिये

अरविन्द कब आया

1 -2 घंटे पहले

फिर वो किचन मई आके आपने ससुर को नास्ता देती है और इधर बाप बेटे बाते करते हुई नास्ता करने लगे थे .. गुज़रते वक़्त के साथ साथ अब उसकी बेचैनी भी बढ़ती जा रही थी.....
 
फिर वो किचन मई आके आपने ससुर को नास्ता देती है और इधर बाप बेटे बाते करते हुई नास्ता करने लगे थे .. गुज़रते वक़्त के साथ साथ अब उसकी बेचैनी भी बढ़ती जा रही थी..... ाअब उसके ससुर को आके आधा घंटा हुआ था .. तब नवाज़ घर पहुंचा .. और वो घर के बेल बजता है .. बेल्ल बजाते hi आरती जान गयी की इस बार नवाज़ hi होगा .. और इस बात से आरती भहुत खुस हो गयी … उसका चेहरा खिल उठता है ……

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फिर वो बहार आती है हाल mai..bahar आके आरती हाल मई के मिरर के सामने कड़ी होक आपने हाथ मई कंगी ली और आपने बाल को कंगी करने लगी

.. तभी आरती के दिमाख मई थोड़े देर पहले का सपना आता hai..wo याद आते hi .. एक नौकर की भाव मैं मई .. ये याद कर के आरती को एक अजीब सी फीलिंग आ रही थी…… और शर्म भी ..

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वो शर्मा के कहती है..

कमीने की किस्मत hi कमल की है .. उसको आलरेडी 2 खूबसूरत लड़किया मिल चुकी है ….. जिनके साथ जब चाइये वो मज़ा कर सकता है…… और अब ...

कह के शर्मा जाती है.. आरती सरम के मारे मरी जा रही थी .. फिर कुड्को मिरर के सामने कड़ी होक निहारते हुई कहते है ..

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नहीं ऐसा नहीं हो सकता .. मई इतनी हॉट और वो ..

तभी नवाज़ फिर से दूर बेल्ल बजता है..

इसको तो सबर hi नहीं है..

आ रही हु बाबा

ऐसा कह के आरती दूर ओपन करती है और पलट जाती है .. जैसे वो नवाज़ के नज़र से अपनी नज़र नहीं मिलाना चाहती हो ..जैसे hi नवाज़ आरती को देखता है उसका लैंड एकदम से रोड के तरह काढ़ा हो जाता है ....

मेमसाहेब..........

तब आरती मुद कर नवाज़ को देखते हुई नखरे से कहती है....

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क्या है ....

बहुत भूक लगी हैं .......

नवाज़ आरती के गदराये बदन को ललचायी नज़रो से देखते हुई कहता है….

अगर कुछ खाने को मिल जायेगा तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी......

आरती की साड़ी का पल्लू एक साइड से हटा था जिसकी वजह से उसकी सुडोल चूचियां ब्लाउज में क़यामत लग रही thi....chuchiya बड़ी होने के साथ साथ गोल मटोल और सुडोल भी थी...... नवाज़ को अपने चुकी को इस तरह घूरता देख कर आरती शर्मा जाती hai...aur वो अपनी नज़रे दूसरी तरफ कर लेती है .... लेकिन अपनी चुकी को ढकती नहीं है और ज्यादा टाइट करके कड़ी हो जाती है......

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फिर नवाज़ आरती को ऊपर से निचे डेक देखता है .. तब आरती के गाल शर्म से लाल हो गए .. वो भी नवाज़ को देख रही थी और नज़र से उसे पूछ रही थी कैसे दिख रही हु तब नवाज़ उसे देखते हुई नज़र से कहता है

हॉट एंड ब्यूटीफुल

आरती को देख के नवाज़ के मुहा से लार टपक पद रही थी पर इस वक़्त उसे जोर से भूख लगी थी .. भूख उसे अब कण्ट्रोल नहीं हो रही थी .. इसलिए नवाज़ आरती को देखते हुई कहता है ..

मेमसाहेब.... मुझे ज़ोरों की भूख लगी hain.......agar कुछ नास्ता मिल जायेगा तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी.....

तब आरती नवाज़ की आँखों मई देखते हुई जरा कड़क आवाज़ मैं कहा...

इतने भूख लगी थी तब तभी आ जाना था .. कहाँ थे इतनी

देर तक .. रूम के सफाई कर रहे थे क्या ..

तब नवाज़ कहता है ..

वो क्या है न मेमसाब आप अपनी फ्रेंड को तो जानते हो hi न

अच्छा तो तुम उस कामचोर के साथ थे सुबह से

अब क्या करे वो कहा मुझे अकेले चोरटी है

तब शेठजी कहते है

कोण तुजे अकेला नहीं चोरटी नवाज़

तब आरती बात को संभालते हुई कहती है

कोई नहीं पापा .. कोण हो सकती है .. कामचोर को चोर के ..

तब शेठजी हँसाने लगे .. फिर नवाज़ को देखते हुई कहते है

उस कामचोर की बात hi मत करो .. आओ अंदर .. नास्ता देते हु तुम ..

तब नवाज़ अंदर आया .. वो हाल मई दाखिल हुआ ..

तब आरती कहती है

तो फिर इतने देर कैसे लगा तुम ……. कोई रूम तो क्लीन नहीं की होगी तुम दोनों ने ..

ये बोलकर आरती अपनी बड़ी सी गांड मटकाती हुई किचन के तरफ चल padi....nawaz तो जैसे आरती की मटकती गांड को देखते हुई खो सा गया.... आरती किचन के तरफ जाते हुई किसी सेक्स बम से काम नहीं लग रही thi.....piche से आरती की बड़ी गांड टाइट साडी मई लिपटी हुई ज़ोर ज़ोर से थिरक रही thi....jiski वजह से आरती के पायल छम छम की आवाज़ कर रही थी.... आरती की खुली हुई पीठ और नंगी पतली कमर देख कर नवाज़ का लुंड पंत के अंदर फड़फड़ाने लगा था.....
 
ये बोलकर आरती अपनी बड़ी सी गांड मटकाती हुई किचन के तरफ चल padi....nawaz तो जैसे आरती की मटकती गांड को देखते हुई खो सा गया....

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आरती किचन के तरफ जाते हुई किसी सेक्स बम से काम नहीं लग रही thi.....piche से आरती की बड़ी गांड टाइट साडी मई लिपटी हुई ज़ोर ज़ोर से थिरक रही thi....jiski वजह से आरती के पायल छम छम की आवाज़ कर रही थी.... आरती की खुली हुई पीठ और नंगी पतली कमर देख कर नवाज़ का लुंड पंत के अंदर फड़फड़ाने लगा था..... नवाज़ उसकी मटकती हुई गांड को देखे जा रहा था ..... आरती की लगभग नंगी पीठ और उभरी हुई गांड को देखे जा रहा था ….नवाज़ फ़ौरन बिना झिझक के अपना एक हाथ अपने लुंड पर ले जाता हैं और पंत के ऊपर से hi आरती की मटकती हुई गांड को घूरते हुई धीरे धीरे अपने लुंड को सहलाने लगता हैं ........ आरती के चलने की वजह से उसकी गांड हिल रही thi..Aarti की गांड हिलने से साड़ी के ऊपर उसके गांड के बीच की दरार साफ़ नज़र आ रही थी .. जो नवाज़ को बेचैन करने के लिए काफी थी......

वहीँ आरती बिना कुछ बोले नवाज़ के तरफ पीठ करके किचन के और जा रही थी ..

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अब आरती एक बार पीछे पलटकर नवाज़ के तरफ देखने लगी.... और उसे कहती है ..

अब भूक नहीं लगी क्या

तभी उसकी नज़र नवाज़ के हाथो पाई जाती है और जब नवाज़ को अपने पंत के ऊपर से अपना लुंड मसलते हुई देखती है जैसे उसकी सांस अटक गयी ..... एक अजीब सी सिरहन उसके तन बदन में दौड़ gayi..................wo फ़ौरन अपनी नज़ारे घुमा लेती है

तब नवाज़ कहता है …

हां लगी है न मेमसाब

ऐसा कहते हुई नवाज़ तेज़ी से किचन मई घुसता है ..अब उसे भूक लगी थी और अरविन्द का और शेठ जी का नास्ता अभी ख़तम हुआ था ..

आओ नवाज़ बैठो और नास्ता करो

अब बैठो न .. मई नीचे बैठता हु ..

अरे मेरा हो गया है ..मई बहार हाल मई बैठ कर पेपर पड़ता हु ..

जी ..

तब शेठजी उठ जाते है और नवाज़ दिंनिंग टेबल के चेयर मई बैठ जाता है..

अब अरविंद उतने वाला होता है की तभी आरती कहती है

आप अभी ऑफिस निकल रहे हैं क्या??

अरे नहीं…

तब नवाज़ कहता है

ारे मेमसाब साहब अभी तो आये है .. आप उन आराम करने दो .. उनको क्यों ऑफिस भेज रहे हो

मई कहा तुम्हारे साहब को ऑफिस भेज रही हु ..वो कहा मेरे सुनते है ..वो घर मई कहा बैठते है.. हमेशा भागते रहते है ..इसलिए बोलै ..

छोटे मालिक ..ये बात तो आपकी ठीक नहीं है ..

क्या ठीक नहीं है नवाज़

यही जो मेमसाब बोल रही है .. आप घर पाई नहीं रहते ..

तब नवाज़ की और देखते हुई आरती नखरे से कहती है

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तुम hi बताओ ..नवाज़ ..मेरी तो ये सुनते नहीं ..
 
मई कहा तुम्हारे साहब को ऑफिस भेज रही हु ..वो कहा मेरे सुनते है ..वो घर मई कहा बैठते है.. हमेशा भागते रहते है ..इसलिए बोलै ..

छोटे मालिक ..ये बात तो आपकी ठीक नहीं है ..

क्या ठीक नहीं है नवाज़

यही जो मेमसाब बोल रही है .. आप घर पाई नहीं रहते ..

तब नवाज़ की और देखते हुई आरती नखरे से कहती है

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तुम hi बताओ ..नवाज़ ..मेरी तो ये सुनते hi नहीं ..

तब नवाज़ अरविन्द को कहता है

सच कह रहा हु साहब आप इस दुनिया के सबसे ख़ुशनाइब इंसान हो .. आपको भगवन ने दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की दी है .. साहब आप बहुत किस्मत वाले है.....

पता है नवाज़ मुझे

नवाज़ ये जब अरविन्द को कह रहा था तब आरती बस टकटकी लगाए नवाज़ को देखे जा रही थी.... और बहुत प्यार से नवाज़ की बात सुन रही thi....mano नवाज़ ने उसपर कोई जादू कर दिया हो....

आप को पता है फिर भी आप घर पाई रहते नहीं है

काम होता है नवाज़ फिर नवाज़ को देखते हुई अरविन्द कहता है

वैसे तुम कैसे हो नवाज़

मई कैसा रहूँगा छोटे मालिक जब ऐसे सेवा करने वाली मालकिन होगी तो

मतलब

तब आरती की और देखता है .. आरती उसे hi देख रही थी.. उसकी और देखते हुई नवाज़ कहता है

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मेमसाब बहुत केयर करती है हमारी .. कल उप्पर के कमरे की सफाई करते वक़्त मुझे थोड़ा पत्र लगा था .. हल्का सा पर मैडम जी ने तुरंत हाट मई पट्टी बंद ली और डॉक्टर को बुला के तट का इंजेक्शन भी लगवाया

ऐसे सेवा तो तुम्हारे मैडम जी ने मेरे भी कभी नहीं की

तब आपने पति के शोल्डर को आरती मरती है

आप भी न कुछ भी बोलते हो

फिर तो मई बहुत खुशनसीब हु जो सेवा आपकी अब तक मैडम जी नहीं की वो मेरे की

अब तो मुझे तुमसे जलन से होने लगी है नवाज़

आप कुछ भी मत बोलिये .. वो नवाज़ क्या सोचेगा

मई कुछ बुरा नहीं सोचूंगा .. अच्छा हु सोचूंगा मैडम जी

हां नवाज़ अच्छा hi सहेगा तुम्हारे बारे मई .. हमारे फॅमिली के बारे मई

तब किसी का कॉल आया तो कॉल उतके अरविन्द उससे बात करता hai..tab आरती नवाज़ को देखने लगती है और नवाज़ आरती को..

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तब अरविन्द कहता है

हां सर मई अभी आप को फोटो भेजवा देता हु

ऐसा फ़ोन पाई कहते हुई फ़ोन रख देता है और आरती को कहता है

अभी आया आरती मई .. नवाज़ को नाश्ता बनाओ तब तक .. मई सर को फाइल का फोटो सेंड करवाता हु

जी

तब अरविन्द बहार जाता है और इधर आरती गैस के पास जाती है और वो नवाज़ के लिए नाश्ता तैयार करने लगती hai....aab आरती नवाज़ के तरफ पिट करके खड़े होक ब्रेड पर बटर और जैम लगाकर उसे ओवन में गरम करने लगती हैं....

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उसकी नंगी पिट और गांड को देख कर नवाज़ के चेहरे पर गन्दी हंसी आ जाती है ...... आरती की गांड को देखते हुई नवाज़ सोचता है ..

बहुत मटक मटक कर चलती है न तू आरती ...... देख लेना जिस दिन ये लौड़ा तेरी गांड में घुसेगा तब तेरी चाल खुद बा खुद बदल जाएगी ..... वो दिन मेरी ज़िन्दगी का सबसे खुसनसीब दिन होगा ... और तुझे बेशरम बनाना हैं तो पहले मुझे खुद hi बेशरम बनाना पड़ेगा ....

ये सोचते हुई नवाज़ अपने लुंड को मसलता है ... वहीँ दूसरे और आरती की साँसे भरी होने लगी थी... नवाज़ की वो बाते भूल नहीं पा रही थी ... अरविन्द के सामने hi मेरे तारीफ कर रहा है ये लड़का .. कितना पागल है .. अरविन्द को थोड़ा भी शक हो जाता तो क्या हालत हो जाती इस लड़के की .. थोड़ा भी सोचता नहीं है..

ये सब सोच सोचकर उसका दिल घबरा रहा था .... अजीब सी बेचैनी उसके तन बदन में हो रही थी..........

तब नवाज़ कहता है

ग़ुस्ताख़ी माफ़ मैडम

मई नहीं सामजी

ऐसा आरती पलट के नवाज़ को देखते हुई कहती है

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कोई बत्तमीज़ी हुई तो माफ़ कर देना मेमसाब

जान भुज कर बत्तमीज़ी या ूँजने मई हुई हुई बत्तमीज़ी

इतने अच्छे मैडम के साथ कोई नलकायक आदमी hi जाँणब्बुज कर बत्तमीज़ी कर सकते है

तो फिर ठीक है

मैंने कोई बत्तमीज़ी की क्या

नहीं तो

फिर वो पलट के सोचते है

इसने ऐसा क्यों पूछा

भले hi वो नवाज़ से दूर खड़े होक नास्ते के लिए ब्रेड गरम कर रही थी मगर उसका सारा ध्यान कहीं और था .. मतलब नवाज़ की और था .. वो जैसे तैसे अपनी सांसों को संभालती हुई उस ब्रेड को गरम होने के बाद एक ट्रे में रखती हैं और साथ में एक पका हुआ आम भी रखती है .. पीछे मुद कर नवाज़ की और जेक उस को देने लगती है....

ट्रे देते वक़्त उसके हाथ थोड़े काँप रहे थे ..... और जिस्म में अजीब सी बेचैनी बार बार उठ रही thi.....jaise हे आरती ट्रे नवाज़ को देती है नवाज़ उस के हाथ को टच कर देता है…. इससे आरती के बदन में जैसे करंट सा दौड़ जाता है..... आरती की धड़कने तेज़ हो जाती है.. तब आरती एक नज़र नवाज़ पर डालती है....

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पर कहती कुछ नहीं है तब नवाज़ कहता है

आपका बहुत बहुत शुक्रिया मेमसाहेब ..... आप बहुत ाची हैं ...

फिर नवाज़ एक नज़र ट्रे में रखे उस बड़े से आम की तरफ देखता हुई धीरे से हंस पड़ता हैं … वहीँ आरती भी नवाज़ की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं ....

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और फिर आरती के आम पर नज़र डालते हुई कहता है

वा ......पके हुई आम .... वैसे मेमसाहेब ...... मुझे आम बेहद पसंद हैं.........

पसंद हैं तो फिर खावो ...

तब नवाज़ आरती के चेहरे को देखता है .. उसके चेहरे पर कमीनी मुस्कान तैर जाती हैं............

वैसे एक बात बोलूं मेमसाहेब ........ आप साड़ी में बेहद हसीं लगती hain..............aap हमेशा साड़ी hi पहना कीजिये .......

तब आरती एक नज़र नवाज़ के चेहरे की तरफ देखती हैं मगर वो उसे कुछ नहीं कहती

....तब तक अरविन्द बहार से आ जाता है

हाँ नवाज़ तुम क्या कह रहे थे

कुछ नहीं छोटे मालिक

वो तुम्हारे मैडम ने तुम्हारी जो सेवा की उस बारे मई

तुम्हारे मैडम उसके हस्बैंड ने कहा तो आरती शर्मा गयी

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हां छोटे मालिक हमारे मैडम ने बहुत खूब सेवा की हमारी ..

हां तुम्हारे मैडम है hi ऐसे

हां साहब और आप को ये बात बताना hi भूल गया मैडम जी बारिश मई भीगते हुई नीचे गयी और फरिस्त अिध बॉक्स लेके आये मेरे लिए

अब तो पक्का मुझे कुछ न कुछ आपने हातो को करना पड़ेगा

ऐसा बोल के आपने हाट को मरने लगा तब आरती आपने हस्बैंड के हाट को पकड़ने लगी और इधर नवाज़ भी आपने मालिक का हाट पकड़ने लगा .. आरती थोड़ा दूर थी इस वजह से आपने हस्बैंड का हाट पकड़ने के लिए उसे थोड़ा जुकना पड़ा इस वजह से उसका बैलेंस बिगड़ गया तब वो गिराने वाली थी तभी नवाज़ उसके कमर मई हाट दाल के उसको पकड़ लेता है उसके हस्बैंड के सामने hi ..

नवाज़ के काळा हाथ उसकी गोरी कमर को घेर चुके थे ....

आरती - आआआहहहहहहह ...
 
अब तो पक्का मुझे कुछ न कुछ आपने हातो को करना पड़ेगा

ऐसा बोल के आपने हाट को मरने लगा तब आरती आपने हस्बैंड के हाट को पकड़ने लगी और इधर नवाज़ भी आपने मालिक का हाट पकड़ने लगा .. आरती थोड़ा दूर थी इस वजह से आपने हस्बैंड का हाट पकड़ने के लिए उसे थोड़ा जुकना पड़ा इस वजह से उसका बैलेंस बिगड़ गया तब वो गिराने वाली थी तभी नवाज़ उसके कमर मई हाट दाल के उसको पकड़ लेता है.. उसके हस्बैंड के सामने hi ..

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आरती - आआआहहहहहहह ...

जैसे hi आरती के मू से ाहः की आवाज़ हुई तब उसका हस्बैंड कहता है

क्या हुआ

आरती कुछ नहीं बोली ... सिर्फ नवाज़ की और देखने लगी..

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नवाज़ के काळा हाथ उसकी गोरी कमर को घेर चुके थे ....और वो आरती को देख रहा था ..तभी आरती का पति फिर से कहता है..

आरती तुम कुछ हुआ क्या

तब नवाज़ को लगा शायद उसका मालिक उसका और आरती का सुरु होने से पहले hi कुछ और hi समझ न ले इसलिए वो उसके कमर का हाट निकल देता है .. इधर आरती भी समाज जाती है नवाज़ ने क्यों हाट निकला .. इसलिए वो थोड़ा पीछे हो जाती है और आपने पति को कहती है..

कुछ नहीं हुआ..

तुम्हारा आवाज़ आया इसलिए कहा

तब आरती कहते hai..nakhare से

" आप मुझे इतना तंग क्यों करते हो "

आरती ने नरम लहजे में पूछा .

.. पर नखरे से ..

मई कहा तंग करता हु

अच्छा .. वैसे आपके वो गेस्ट कल कब आने वाले है ...

नहीं आने वाले

क्या ?? नहीं आनेवाले

जरा जोर से छीलते है..

हां नहीं आने वाले

इसलिए मैंने कहा मुझे तंग करना चोर दो ..

अब इसमे मैंने क्या तंग किया तुम ..

तब तक शेठ जी वह आ गए ..आरती का आवाज़ सुन कर ..

पापा जी से पूछ लो .. मुझे आप के गेस्ट के चक्कर मई क्या क्या करना पड़ा .. कार का ड्राइवर नहीं था .. एक भी ऑटो वाला नहीं था . .. फिर नवाज़ के साथ बाइक पाई जाना पड़ा .. इतने ख़राब रोड पाई .. कितने तकलीफ हुई .. आप को पता भी है क्या ..

आरती के ऐसे कहने के बाद नवाज़ आरती को देखने लगता है..

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आरती भी उसे देखते हुई आपने पति से कहती है

और आप कह रहे हो अब गेस्ट नहीं आने वाले है ..

आरती अब इस मई मई क्या कर सकता हु... वो नहीं आने वाले तो . अब क्या जबरदस्ती उनको उतके लेके औ क्या ..

पापा जी हर बार ये ऐसे hi करते है

तब अरविन्द शेठ जी की तरफ देखती हुई कहता है

पापा जी सच मई पहले उनोने कहा इसलिए मैंने आरती को कहा और अब वो कह रहे है आना पॉसिबल नहीं है .. अब इसमे मेरे क्या गलती है

आरती बुरा सा मू बनके कहती है

मेरे hi गलती है

तब दूर बेल बजी ..तब शेठ जी नवाज़ को कहते है ..

जेक देख लो कोण है ..

वैसे hi नवाज़ वह से हाल मई जाता है

आरती तुम्हारी भी गलती नहीं है

तब शेठ जी कहते है

अरविन्द उनका आना कैंसिल हुआ था तब उसी टाइम तुमने आरती को क्यों नहीं बोलै

एक्चुअली पापा मई भूल गया

देखा पापा जी

तब शेठ जी कुछ कहते इस से पहले अरविन्द कहता है

इसलिए मई आरती तुम कह रहा था की कार ड्राइविंग सिख लो

हां बीटा सिक्ख लो .. अब तो बहार का कोई ट्रेनर भी नहीं लाना पड़ेगा .. नवाज़ तुम सीखा लेगा ..

हां पापा आप ने सही कहा

तब आरती गुस्से मई कहती है

पापाजी मुझे ड्राइविंग नहीं सीखनी है.. और नवाज़ से तो हरगिज़ नहीं..

नवाज़ के साथ ड्राइविंग ये सोच कर hi उसको डर लगने लगा था .. उसे पता था नवाज़ ऐसे मोके के ताड़ मई रहता है और वो इस मोके का अच्छे से उसे करेगा.. यही सब सोचकर आरती को आपने गुस्सा आ गया था...

पर क्यों..

पापाजी ड्राइविंग की क्या जर्रोरत है.. हमारे पास नौकर चाकर है.. हमेशा हमारे पास ड्राइवर रहता है .. फिर मेरे ड्राइविंग सीखने की क्या जरुरत है ..

तब शेठ जी उसको समजने लगते है..

बीटा वक़्त बताके नहीं आता .. कब क्या हो जायेगा किसी को पता नहीं रहता.. अचानक किसी को क्या हो गया और उस वक़्त अगर हमारा ड्राइवर हमारे पास नहीं होगा तो क्या करेंगे tu..aur कल हुआ वैसे कोई इमरजेंसी हुई तब कोई नौकर नहीं होगा तो हम क्या करेंगे .. अब इस बार नवाज़ था पर हर बार नवाज़ थोड़ा रह सकता है..

शेठ जी की ऐसे बातो के बाद आरती शांत हो जाती है ..

फिर अरविन्द कहता है..

और दूसरी बात हम जिस समाज और सोसाइटी में रहते हैं वहां अपनी स्टानडंद मेन्टेन करना पड़ता hain......aur मैं खुद चाहता हूँ की तुम इस सोसाइटी में पूरी तरह से आपने स्टैंडर्ड मेन्टेन करके रहो .......

कार चलना सिख जाउंगी तो सोसाइटी का स्टैंडर्ड मेन्टेन हो जायेगा क्या ..

आरती गुस्से से अरविन्द की तरफ देखते हुई कहती है ..

ओह कॉमन आरती तुम एक पढ़ी लिखी होकर ऐसी बातें करती ho.......tum जानती हो हर सोसाइटी का एक स्टैंडर्ड होता और उसे हमें मेन्टेन रखना होता है..

भाड़ मई जय सोसाइटी का स्टैंडर्ड .. मुझे नहीं ड्राइविंग सीखनी ....... मैं जैसी हूँ ठीक हूँ.......

इस बात पर शेठ जी हस्ते है.. उन आरती के गुस्से पर हसी आ रही थी.. और अरविन्द को गुस्सा .. वो गुस्से मई बोलै ..

मैं कुछ नहीं सुन्ना चाहता तुम्हें ड्राइविंग सीखने है मतलब सीखने है ........ नवाज़ तुम कल से ड्राइविंग सीखा देगा..

इन् दोनों का गुस्सा देखकर शेठ जी कहते है..

तुम दोनों जगदा मत करो.. शांत हो जाओ पहले ..

आरती को अब समाज आया अरविन्द को गुस्सा आया है.. उसे पता था अरविन्द को गुस्सा आया तो उसे उसकी बात माननी hi पड़ती है..

यही सब सोचकर आरती आपने गुस्सा काबू मई करती है.. और कहती है..

पापाजी देखिये न.. थिस इस नॉट fare........main भला अकेले उस जाहिल नवाज़ के साथ कैसे ड्राइविंग सीख सकती हूँ.......

ा- ड्राइविंग अकेले hi सिखाते है

हाँ मुझे पता है.. देखिये न पापाजी मुझसे कैसे बाते कर रहे है.. मई क्या इतने बुद्धू हो क्या.. मुझे पता नहीं है क्या ड्राइविंग अकेले hi सीखे जाती है..

मतलब थोड़े बुद्धू हो

शेठ जी के इस बात पर आरती थोड़े नाराजगी जताते हुई कहती है

पापाजी आप भी सुरु हो गए क्या.. मई कह रही थी मई अकेले उस नवाज़ के साथ.. अगर कहीं कुछ हो गया to......mera मतलब.....

ऐसा कह के आरती रुख जाती है.. और सोचने लगी ..

ये मई क्या बोल गयी ..

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है
 
पापाजी आप भी सुरु हो गए क्या.. मई कह रही थी मई अकेले उस नवाज़ के साथ.. अगर कहीं कुछ हो गया to......mera मतलब.....

ऐसा कह के आरती रुख जाती है.. और सोचने लगी ..

ये मई क्या बोल गयी ..

आज उसके दिल और दिमाग में सुबह से hi ुतल पुथल हो रही thi.......wo सोच कुछ और रही थी और कर कुछ और रही थी .. इसी उदंबंध मई उसने ये कहा था .. तब शेठ जी कहते है..

तुम सच कह रही हो बेटी .. होने को तो कुछ भी हो सकता है .. अगर तुम नवाज़ से कार सीखना नहीं चाहते तो वैसा hi सही ..

वो गम शूम सी वही खड़े रही तब उसका पति कहता है

ठीक हैं जैसी तुम्हारी मर्ज़ी......

ऐसा बोल के दोनों वह से चले जाते है

फिर आरती भी आपने बैडरूम मई चली जाती है और अपने बिस्टेर पर बैठी रहती हैं और आने वाले समय के बारे में सोचने लगती हैं...... थोड़ी डियर बाद बीएड पर लेट जाती है.. थोड़े देर तक वो वहीँ लेती रहती हैं तभी उसके मोबाइल पर उसके हस्बैंड का कॉल आता है

वो मुस्कुराते हुई फ़ोन रइवे करती हैं.....

सिटी जाना है क्या

अभी अचानक

सोचा बीवी का थोड़ा गुस्सा काम कर दू

वो स्माइल करते हुई कहते है

वो कैसे

शॉपिंग करते है .. मूवी देखेंगे एंड डिनर भी कर लेंगे

Ok

सिर्फ ok

अच्छा प्लान है

फिर रेडी हो जाओ

है होती हु

फिर हस्बैंड वाइफ प्लान के हिसाब से सिटी गए ..उनोने शॉपिंग भी की .. मूवी भी देखे और फिर डिनर करके रात लेट आ गए ..
 
फिर हस्बैंड वाइफ प्लान के हिसाब से सिटी गए ..उनोने शॉपिंग भी की .. मूवी भी देखे और फिर डिनर करके रात लेट आ गए ..

फिर दूसरे दिन सुबह आरती किचन का काम करके बहार आते है तब उसे नीता और नवाज़ मिलते है तब उन्दोनो के साथ आरती बात करती है .. उन तीनो का हसी मज़ाक चल रहा था .. और फिर वह से चले जाना लगते है तब नवाज़ कहता है

आरती जी.. क्या आप हेल्प करोगे..

तब आरती पलट जाती है...

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और कहती है..

कैसे हेल्प नवाज़ जी... नीता के नवाज़ जी..

इस से नीता शर्मा जाती है...

दीदी आप भी न

उस रूम मई का सामान मई अकेले नहीं निकल प् रहा हु..

तब नीता कहती है

दीदी को क्यों कह रहे हो हम दोनों कर लेंगे..

नीता के बात पर नवाज़ ध्यान नहीं देता..

अकेले कहा हो तुम.. तुम्हारी नीता भी है न ..

वो है आरती जी पर...

पर क्या..

वह हेइटेड बाँदा चाहिए.. उसमे आपकी हेल्प चाहिए..

मई कहा हेइटेड हु.. तुम hi हेइटेड हो..

मई हेइटेड हु पर वह दोनों हेइटेड चाहिए .. नीता से आप ज्यादा हेइटेड हो

दोनों की क्या जरूरत.. तुम सामान निकालो और नीता निचे से सामान लगे.. . तुम दोनों कर सकते हो न..

नहीं आरती जी वैसा कर सकता तो पहले hi कर देता .. पर मई एक हाथ से वो हैवी सामान निचे नहीं निकल सकता..

एक हाथ से .. दूसरा हाथ...

उससे कही पकड़ना पड़ेगा न..

ोूहहु

इसलिए आप की हेल्प चाहिए थी अगर आप नहीं करना चाहते तो रहने दीजिये..

आरती कुछ सोचती है ..और फिर कहते है..

ठीक है .. पर मुझसे यहाँ ज्यादा देर रुका नहीं जायेगा.. घर मई बहुत सारा काम है वो मुझे करना है..

आप को मई ज्यादा देर नहीं रुकूंगा.. सिर्फ 10-15 मिनट..

ठीक है चलते है फिर..

चलिए आरती जी..

फिर वो नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है...

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कोनसे रूम मई जाना है

स्टोर रूम मई

तब आरती आचार्य से नवाज़ को कहते है

क्या???

हाँ आरती जी...

वह तो बहुत अँधेरा होगा ..

लाइट है न दीदी

नीता कहती है..

गर्मी भी बहुत होंगे.. वह कहा से भी हवा नहीं आती..

इसलिए मई बोल रही थी नवाज़ तुम की हम कर लेंगे.. दीदी से नहीं होगा...

नीता ने ऐसे कहते hi आरती झट से कहा..

तुम्हारे कहने का क्या मतलब है..

नहीं दीदी मेरे कहने का बस इतना hi मतलब था की आपको ऐसे काम का अनुभव नहीं है... आप हमेशा एक मि रहे हो.. ऐसे गर्मी मई आप कैसे काम करोगे...

हाँ.. वो बात तो है.. पर मैंने कब कहा मुझसे नहीं होगा.. मई सिर्फ इतना कह रही थी की वह अँधेरा है और वह कही से हवा नहीं आती तो गर्मी बहुत होंगे.. और मई कहा उस रूम मई अकेले होंगी.. तुम दोनों भी हो न..

ये कहते हुई आरती का चेहरा पड़ा हुआ था ..

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उसके चहरे की और देखते हुई नवाज़ जान गया था की नीता ने उसके ईगो को ठेस पहुचाये है

इधर आरती सोचते है

नीता इधर उधर चली गयी तो ये कमीना कुछ न कुछ गन्दी हरकत karega...magar वो क्या करती उसका दिल मान नहीं रहा था और उसने जोश मई आके जो बोलै था.. इसलिए उनके साथ काम करने के शिवाय अब कोई और रास्ता भी तो नहीं था उसके पास.

फिर वो तीनो उस कमरे की तरफ जाने लगते है ..

और एक बात नवाज़.. ज्यादा हैवी सामान मुझसे उठाया नहीं जायेगा..

वो मई जनता हु.. मई hi उठा लूंगा सिर्फ एक साइड से आप उस बॉक्स को पकड़ लेना ताकि वो अच्छे से निचे हम उतर सके..

नीता - और नीचे से मई ले लुंगी

आरती - अच्छा

आरती हॉल मैं खरी होकर इधर उधर देख रही थी. नवाज़ आरती को देखते हुई बोलै...

मेमसाब शुरू करे सफाये...

तब नवाज़ की तरफ देखते हुई आरती कहती है...

हाँ.. पर मई सोच रही हु कहा से सुरु करे.. यहाँ तो कबाड़खाना बन गया है...

तब नीता झट से बोलती है..

इस लेफ्ट साइड से करते है..

तब आरती नीता को देखती है...

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आईडिया अच्छा है...

उस दिन आरती अपनी रूटीन के मुताबिक़ अभी साडी मैं hi थी. पिंक कलर की साडी उसने पहने हुई थी… ब्लाउज हाफ स्लीव था .. जिस मैं से उसकी माखन जैसे सॉफ्ट और गोरी पतली पतली बाज़ू नंगी नज़र आ रही थी. .

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बाते करते वक़्त उसके साड़ी का पल्लू थोड़ा निचे गिरा हुआ था इस वजह ऐ उसके आम का दर्शन नवाज़ को अच्छे से हो रहा था . .. इसलिए लगातार वही वो देख रहा था ..तब आरती की नज़र नवाज़ की तरफ गयी .. उसकी नज़र पाचनकार वो नीता से बाते करने का नाटक करते हुई ाअपनी साडी को ठीक किया.. पर नवाज़ को कुछ नहीं कहा और न hi उसे गुस्से से देखा..

अब वो दोनों बाते करनी लगी तब नीता कहते है

शायद नवाज़ ये बॉक्स वह से हटाना पड़ेगा ..

तब नवाज़ वो बॉक्स जो निचे था वह से हटाने लगा.. बॉक्स थोड़ा भरी था .. तब नीता आके उसे हेल्प करनी लगी. और वो दोनों बॉक्स वह से एक कार्नर मई ले जाने लगे ... आरती बस एक जगह खड़े होक उन्दोनो को देखने लगी ..

नेत्ता आरती की तरफ देखकर कहती है..

दीदी थोड़े हेल्प करो na..waha थोड़ा जादू मारो न .. तो ये बॉक्स वह रख देते है ..

आरती अच्छा कह के उस रूम मई जो एक जादू था उसे उतके जादू मरने लगी .. जादू मरने के लिए वो जुकति तब उसके क्लेवलागे नवाज़ को दिख जाते ..नवाज़ का ध्यान उधर hi था ..

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अब बॉक्स हटाने से नवाज़ को थोड़े गर्मी होने लगी तो वो शर्ट निकल देता है और बॉक्स उसके पास लता है ..

बहुत भरी है ये बॉक्स

तब आरती नवाज़ की तरफ देखने लगे..

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शर्ट निकालने और पसीने से भीगे हुई उसके बॉडी को वो देखने लगे .. . और आपने आप से कहने लगे...

इसकी हाइट अरविन्द से एक दो इंच काम hi है मगर बॉडी ज़्यादा मस्कुलर है. शायद ये कुछ एक्सरसाइज या गयम वगैरा की वजह से होगी . और फिर खुद से hi कहने लगे.. इन् गरीब लोगो के पास गयम के लिए पैसे कहा होंगे.. और ये खेत मई रहता है और गयम तो इधर गाओं मई है.. खेत से गयम के लिए आना इससे पॉसिबल नहीं होगा.. खेत मई hi ये एक्सरसाइज करता होगा..

तब नवाज़ देखत है तब आरती कहती है

शर्ट क्यों निकला

गर्मी कितनी है और गर्मी से ये शर्ट भी तो ख़राब होगा

हां .. एक hi शर्ट है क्या तेरे पास

अभी तो एक hi है है

खाने को ऐसे hi आएगा क्या

मई तो ऐसे hi खता हु

मेरे यहाँ ऐसा नहीं चलेगा

तो

नाहा धो के आजाना मेरे किचन मई वर्ण मत आना

मेमसाब घर जेक आऊंगा तो टाइम लगेगा

घर क्यों जा रहा है.. यही पाई नाहा ले किसी बाथरूम मई

वो तो ठीक है मेमसाब.. पर आप देख hi रही हो न पसीने से मेरे कपडे कितने ख़राब हो गए है.. कितने बदबू आ रही है उसमे से.. और आप को तो बदबू पसंद नहीं है.. नहाने के बाद यही कपडे पहन लूंगा तो बदबू मरेंगे न.. मैंने कोई कपडे लाये नहीं है न

अच्छा अच्छा साहब के कुछ कपडे देते हु.. ज्यादा नौटंकी मत मार

तब नवाज़ हस्ते हुई कहता है

आप बहुत स्मार्ट हो.. मैं की बात तुरंत जान लेती हो

अब ज्यादा तारीफ मत करो और आपने काम करो

ठीक है काम करना सुरु करते है ..

पहले ये बॉक्स उठाओ

क्या??

आरती तब जरा जोर से छीलते है..

मेरे कहने का मतलब है ये बॉक्स उतने के लिए हमारी हेल्प करो

वैसे कहो न फिर.. डायरेक्ट मुझे काम करने की आर्डर दे रहे हो..

हम कैसे आर्डर दे सकते है मैडम आप को

अब आरती अपनी साडी को सही करके बॉक्स उतने के लिए जुख जाते है… अब वो दोनों बॉक्स उतके एक साइड मई रखते है. .. फिर आरती कड़ी होक पल्लू हटा के साडी एडजस्ट करने लगती है.. तभी नवाज़ की नज़र उसके ब्लाउज पाई जाती है.. पसीने के वजह से वो भी भीग गया था.. और उस वजह से उसके आम ठीक से दिख रहे थे… ब्लाउज के तीन बटन के थोड़े उप्पर से आरती के बॉल की लकीर दिख रही थी.. आरती वह का पसीना पांच लेती है तब उसकी नज़र नवाज़ पाई जाती है.. नवाज़ वही देख रहा था.. आरती थोड़ा गुस्से मई आके कहते है.

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क्या देख रहे हो
 
क्या देख रहे हो

तब आरती का गुस्सेवाला चेहरा देख के नवाज़ बात बदल देता है

कुछ नहीं… वो सोच रहा था.. वह का सामान कहा रखे..

और आरती के दूसरे साइड मई.. बाजु मई पड़ा हुआ सामान देख रहा है ऐसे दिखता है..

आरती पलट के देखते है तो वह सामान था.. वो सोचने लगते है.. गुस्से मई..

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साला सचमुच यही सोच रहा था या मेरे बूब्स को देख रहा था.. कमीने का कुछ बता नहीं सकते..

यही सोचते हुई जैसे हे आरती की नज़र नवाज़ के चेस्ट पर पड़ती हैं वो खो सी जाती है उसका बदन देख के.. उसके चौरे छाती और मांसल पेट , मजबूत बांहे और कंडे को देख कर.. वो लेन्टाइन से छोटे छोटे बॉक्स निकल रहा था.. अब इस वक़्त उसके एक हाथ मई एक बॉक्स था इस वजह उसके बाइसेप्स फूल गए थे.. .आरती जैसे हे उसके बाइसेप्स को देखती है तो वो उसके हाथ के ताक़त का अंदाज़ा लगाती है और मन में कहती है:

इतनी बड़ी बाइसेप्स.. कितना मज़बूत हाथ है (तभी उसके मन में नीता की बात याद आती है..

" दीदी जी नवाज़ के हाथ हे मेरे ये बड़े बड़े दूध को एक हाथ से दबोच सकते है और मेरे मटके जैसे गांड की नसे ढीली कर देते है .. दीदी जी उसका हाथ इतना बड़ा है उतना बड़ा hi उसका हत्यार है जिस से मेरे आगे का दरया और पीछे का समुन्दर पार कर देता है ")

तभी नवाज़ के आवाज़ से आरती अपनी सोच से बहार आती है

मेमसाब आप कहा खो गयी

कही नहीं.. बताओ क्या करना है..

उसके तरफ देखते हुई कहते है..

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वो पीछे वाले बॉक्स है न

अभी भी आरती नवाज़ को देख रही थी.. उसके नंगे जिस्म को.. वो देखते हुई कहती है

कोनसे बॉक्स

मुझे मत देखो.. उस बॉक्स को देखो.. मेरे को ऐसे क्या देख रहे हो . .

नवाज़ ने ऐसे कहते hi आरती शर्म से आपने बाल संवारते हुई दूसरी और देखने लगे... और नीचे देखते हुई कहने लगी..

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मई तेरे को क्यों देखूंगी भला.. कुछ भी बोलते हो..

अच्छा.. आप मुझे नहीं देख रही थी ..

वो जाने दो.. कह क्या रहे थे ये बताओ

वो जो बॉक्स है

कोनसे वाले

तब इशारा करते हुई नवाज़ कहता है

वो पीछे वाले

उन निचे लेना है

तो ले लो न.. मुझे क्यों बता रहे हो..

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नखरा करते हुई आरती कहती है

मेरे हाथ वह तक नहीं जा रहा है

तो मेरा कैसे जायेगा

वो मुझे पता है पर मेरे पास एक आईडिया है

कोनसे आईडिया

अगर आपको कोई प्रॉब्लम नहीं है तो

बताओ पहले आईडिया क्या है

मई आप को पीछे से उठा लेता हु.. फिर आप बॉक्स निचे उतर लो

क्या??

ऐसा कह के जोर से चिल्लाते है... और फिर उसकी और देखते हुई कहती है..

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नहीं .. मई ये नहीं कर सकती..

फिर दोनों कुछ देर शांत रहते है.. नवाज़ सोच रहा था इसको कैसे तैयार करू और आरती सोचती है ये करना सही नहीं है .. उसको अगर मेरे बॉडी को चुने दिया तो ये मेरे साथ कुछ न कुछ गलत हरकत करेगा.. मेरे को इधर उधर छुएगा.. ये सब ठीक नहीं है.. और नीता के सामने तो कदापि सही नहीं है.. मई ये कभी नहीं कर सकती.. नीता के होते हुई या नहीं होते हुई..

तभी नवाज़ कहता है..

मान जाओ न मेमसाब..

मई ये नहीं कर सकती.. तुम्हारे पास इसके सिवाय कोई अच्छा आईडिया नहीं है क्या..

उसकी और देखते हुई कहते है..

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नहीं है

तो रहने दो बॉक्स वह

मालिक घटेंगे..

तब वो सोचती है.. बात तो सही कह रहा है.. पापा जी को आधा अधूरा काम पसंद नहीं है..

फिर कोई अच्छा दूसरा वाला आईडिया सोच लो

है पर आप कर नहीं पाओगे

कोई उटपटांग आईडिया होगा तो नहीं कर पाउंगी

उटपटांग नहीं है.. अच्छा वाला है . .

उसकी और अड्डा के साथ देखते हुई कहती है..

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पक्का

हाँ मेमसाब

बको
 
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