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- Dec 5, 2013
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आप को शर्म नहीं आती क्या
अब इसमे शर्माना कैसा .. यहाँ कोण है तुम्हारे अलावा .. ज्यादा से ज्यादा नीता आ सकते है .. नीता ने तो कही बार मुझे नंगा देखा है
पर मैंने नहीं देखा न
अब देखा न
हस्ते हुई कहता है
बेशरम कही के ..
अब आरती नवाज़ के सामने कड़ी थी.......
अपने हाथों में नवाज़ के लिए कपडे लेके … जिसे वो हाथ में लिए हुई हवा में झूला रही थी ..
आरती ने इस वक़्त एक साडी पहनी हुई थी विथ स्लीवलेस ब्लाउज .. जिससे उसकी पिट पूरी तरह से ओपन उसके सामने थी ....... ब्लाउज की वजह से उसकी गुर्दें भी ओपन थी.. साडी का पल्लू उसके खंड पर था .. उसकी गर्दन और गोरी गोरी पिट इस वक़्त बेहद hi ाखर्षक लग रही थी … गार्डन और पिट का गोरा कलर और उसपर पसीने की चाँद बूंदे ............ और साड़ी में कासी उसकी गांड जो की पूरे गोल आकर में .... तानी हुई .....सुडोल रूप में ..... नवाज़ जैसे मर्द के लुंड में आग लगा देने के लिए बस काफी थी ...
फिर आरती टॉवल बिना पीछे देखे उसके उप्पर फेंक देती है ..वो उसके बदन को लग के निचे गिरता है
इससे से आपने बदन पॉंच लो और फिर आपने बदन को धक् लो
किस्से
टॉवल से
कोनसा टॉवल
अभी मैंने जो तुम दिया
नहीं कोई टॉवल नहीं दिया तुमने
ओह्ह गोड्ढ मई क्या करू इस लड़के का ..ये मुझे पागल बना देगा
बेगम सच मई तुमने कोई टॉवल मुझे नहीं दिया है ..यकीं नहीं होता तो पीछे मुद के देख लो .. कोई टॉवल नहीं है मेरे पास
यही चाहते हो न आप
क्या
मुझे पता है आप ये सब क्यों कर रहे हो
क्यों कर रहा हु
क्यों की मई आप को नंगा देख लू
फिर देख लो न
नहीं देख सकती ..आप के बाकि के आइटम जैसे मई बेशरम नहीं हु
इसलिए तो तुम आपने बनाना चाहता हु
ऐसा कह के उसके पास जेक उसको पीछे से चिपक जाता है
नहीं अभी नहीं
क्यों
मेरे साड़ी भीग जायेगे
दूसरे साड़ी पहन लो
यही करते राहु मई दिन भर
तब नवाज़ उसके गर्दन को चूमने लगता है ..
आहहहा
नवाज़ का यूँ उसके गर्दन पर किश करने से आरती की उत्तेजना बढ़ाने लगी थी ...वो खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहे थी पर नवाज़ अब बिना हिले उसके गर्दन पर चूमते रहता है....
अब उसकी आँखे बंद हो गए थी ..
ाहहए नवाज़ आप सुनते क्यों नहीं हो ..बिना सुने मुझे चूमते जा रहे हो
तब उसके खंड को पकड़ कर घुमा देता है ..
No नवाज़ … मई ये नहीं कर सकती
ऐसा कहते हुई आपने आँखे बांध करती है ..
आँखे खोलो बेगम साहिबा
न्यूऊओ
नवाज़ की नज़र आरती के उप्पर hi थी … उसकी नज़र आरती के मम्मी पर गयी ..साड़ी का पल्लू थोड़ा हैट गया था इस वजह से उसके मम्मी सहीसे उसको दिख रहे थे .. आरती की आँखे बंद थी इस वजह से वो देख नहीं पा रही थी की नवाज़ क्या देख रहा है .. शायद इस वजह से नवाज़ इस वक़्त अपनी पालक झपकना भी भूल गया था …
ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ
प्ल्ज़ आँखे खोल के देख लो कहा है टॉवल
सच कह रहे हो टॉवल नहीं है
हाँ बेगम साहिबा
ये कहते हुई नवाज़ उसके होंटो पाई आपने होंठ रख देता है ..
और फिर उसके होंटो को चूसने लगा ..
और फिर उसके एक मम्मी पर हाथ रख कर जोर से दबाया ..
aaaaaaaahhhhhhhhhhaa .. अभी नहीं …
ये कहते हुई नवाज़ का किश तोड़ते हुई पीछे हैट गयी और इस हड़बड़ी मई उसकी आँख खुल गयी …
अब आरती की नज़र अपने सामने खड़े हुई नवाज़ पाई गयी .. नंगे नवाज़ पर उसकी नज़र पड़ते hi उसके चेहरे पर शर्म और हाय की लखीरे साफ़ नज़र आने लगती hain......kyon की उसने ज़रा सा भी एक्सपेक्ट नहीं किया था जब वो नवाज़ के लिए सजधज के की कमरे में आये थी तब की वो नवाज़ को ऐसे नंगा देख्नेगे ..
नवाज़ को ऐसा देखकर उसका चेहरा यु शर्म से लाल पढ़ जाता हैं.... .वो शर्माकर फ़ौरन अपनी नज़ारे नीचे की तरफ झुका लेती हैं ........ वही नवाज़ आरती की तरफ देखता हुआ हंस रहा था.......
देखा मैंने कहा था न कोई टॉवल तुमने मुझे नहीं दिया
दिया था
कहा है फिर
जाओ जी मुझे नहीं देखना
शरमाते हुई कहती है
देखो न मेरे प्यारे बेगम साहिबा
तब झिझकते हुई आखिर कर आरती हौले से नवाज़ की तरफ देखती हुई दुबारा से बोल पड़ती हैं............
दिया था
फिर कहा गया
यही कही होगा
देखो फिर कहा है
तब उसे टॉवल उसे पीछे गिरा हुआ दिखा .. नवाज़ के पीछे ..नवाज़ थोड़ा आगे चल के आया था इस वजह से टॉवल पीछे निचे गिरा था ..
यहाँ है
ऐसा कह के आरती झट से नवाज़ के पीछे जेक टॉवल उठा लेती है ..
अब इसमे शर्माना कैसा .. यहाँ कोण है तुम्हारे अलावा .. ज्यादा से ज्यादा नीता आ सकते है .. नीता ने तो कही बार मुझे नंगा देखा है
पर मैंने नहीं देखा न
अब देखा न
हस्ते हुई कहता है
बेशरम कही के ..
अब आरती नवाज़ के सामने कड़ी थी.......
अपने हाथों में नवाज़ के लिए कपडे लेके … जिसे वो हाथ में लिए हुई हवा में झूला रही थी ..
आरती ने इस वक़्त एक साडी पहनी हुई थी विथ स्लीवलेस ब्लाउज .. जिससे उसकी पिट पूरी तरह से ओपन उसके सामने थी ....... ब्लाउज की वजह से उसकी गुर्दें भी ओपन थी.. साडी का पल्लू उसके खंड पर था .. उसकी गर्दन और गोरी गोरी पिट इस वक़्त बेहद hi ाखर्षक लग रही थी … गार्डन और पिट का गोरा कलर और उसपर पसीने की चाँद बूंदे ............ और साड़ी में कासी उसकी गांड जो की पूरे गोल आकर में .... तानी हुई .....सुडोल रूप में ..... नवाज़ जैसे मर्द के लुंड में आग लगा देने के लिए बस काफी थी ...
फिर आरती टॉवल बिना पीछे देखे उसके उप्पर फेंक देती है ..वो उसके बदन को लग के निचे गिरता है
इससे से आपने बदन पॉंच लो और फिर आपने बदन को धक् लो
किस्से
टॉवल से
कोनसा टॉवल
अभी मैंने जो तुम दिया
नहीं कोई टॉवल नहीं दिया तुमने
ओह्ह गोड्ढ मई क्या करू इस लड़के का ..ये मुझे पागल बना देगा
बेगम सच मई तुमने कोई टॉवल मुझे नहीं दिया है ..यकीं नहीं होता तो पीछे मुद के देख लो .. कोई टॉवल नहीं है मेरे पास
यही चाहते हो न आप
क्या
मुझे पता है आप ये सब क्यों कर रहे हो
क्यों कर रहा हु
क्यों की मई आप को नंगा देख लू
फिर देख लो न
नहीं देख सकती ..आप के बाकि के आइटम जैसे मई बेशरम नहीं हु
इसलिए तो तुम आपने बनाना चाहता हु
ऐसा कह के उसके पास जेक उसको पीछे से चिपक जाता है
नहीं अभी नहीं
क्यों
मेरे साड़ी भीग जायेगे
दूसरे साड़ी पहन लो
यही करते राहु मई दिन भर
तब नवाज़ उसके गर्दन को चूमने लगता है ..
आहहहा
नवाज़ का यूँ उसके गर्दन पर किश करने से आरती की उत्तेजना बढ़ाने लगी थी ...वो खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहे थी पर नवाज़ अब बिना हिले उसके गर्दन पर चूमते रहता है....
अब उसकी आँखे बंद हो गए थी ..
ाहहए नवाज़ आप सुनते क्यों नहीं हो ..बिना सुने मुझे चूमते जा रहे हो
तब उसके खंड को पकड़ कर घुमा देता है ..
No नवाज़ … मई ये नहीं कर सकती
ऐसा कहते हुई आपने आँखे बांध करती है ..
आँखे खोलो बेगम साहिबा
न्यूऊओ
नवाज़ की नज़र आरती के उप्पर hi थी … उसकी नज़र आरती के मम्मी पर गयी ..साड़ी का पल्लू थोड़ा हैट गया था इस वजह से उसके मम्मी सहीसे उसको दिख रहे थे .. आरती की आँखे बंद थी इस वजह से वो देख नहीं पा रही थी की नवाज़ क्या देख रहा है .. शायद इस वजह से नवाज़ इस वक़्त अपनी पालक झपकना भी भूल गया था …
ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ
प्ल्ज़ आँखे खोल के देख लो कहा है टॉवल
सच कह रहे हो टॉवल नहीं है
हाँ बेगम साहिबा
ये कहते हुई नवाज़ उसके होंटो पाई आपने होंठ रख देता है ..
और फिर उसके होंटो को चूसने लगा ..
और फिर उसके एक मम्मी पर हाथ रख कर जोर से दबाया ..
aaaaaaaahhhhhhhhhhaa .. अभी नहीं …
ये कहते हुई नवाज़ का किश तोड़ते हुई पीछे हैट गयी और इस हड़बड़ी मई उसकी आँख खुल गयी …
अब आरती की नज़र अपने सामने खड़े हुई नवाज़ पाई गयी .. नंगे नवाज़ पर उसकी नज़र पड़ते hi उसके चेहरे पर शर्म और हाय की लखीरे साफ़ नज़र आने लगती hain......kyon की उसने ज़रा सा भी एक्सपेक्ट नहीं किया था जब वो नवाज़ के लिए सजधज के की कमरे में आये थी तब की वो नवाज़ को ऐसे नंगा देख्नेगे ..
नवाज़ को ऐसा देखकर उसका चेहरा यु शर्म से लाल पढ़ जाता हैं.... .वो शर्माकर फ़ौरन अपनी नज़ारे नीचे की तरफ झुका लेती हैं ........ वही नवाज़ आरती की तरफ देखता हुआ हंस रहा था.......
देखा मैंने कहा था न कोई टॉवल तुमने मुझे नहीं दिया
दिया था
कहा है फिर
जाओ जी मुझे नहीं देखना
शरमाते हुई कहती है
देखो न मेरे प्यारे बेगम साहिबा
तब झिझकते हुई आखिर कर आरती हौले से नवाज़ की तरफ देखती हुई दुबारा से बोल पड़ती हैं............
दिया था
फिर कहा गया
यही कही होगा
देखो फिर कहा है
तब उसे टॉवल उसे पीछे गिरा हुआ दिखा .. नवाज़ के पीछे ..नवाज़ थोड़ा आगे चल के आया था इस वजह से टॉवल पीछे निचे गिरा था ..
यहाँ है
ऐसा कह के आरती झट से नवाज़ के पीछे जेक टॉवल उठा लेती है ..