KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION - Page 40 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION

शेठजी ने जैसे hi अपना आखरी फैसला सुनाया, भीड़ में खड़े लोग आपस में kaana-phoosi करने लगे. सब समझ गए थे की रामलाल का खेल अब हमेशा के लिए ख़तम हो चूका है और अब इस जगह पर दुलारी का राज चलेगा. नवाज़ ने कुटिलता से मुस्कुरा कर फ़ोन आरती के हाथ में थमा दिया.

रामलाल अब भी ज़मीन पर पड़ा रो रहा था, पर नवाज़ ने उसे कालर से पकड़ कर खड़ा किया और कान में फुसफुसाया,

"सुना न मालिक का हुकुम? चलता बन अब यहाँ से, वर्ण अगला थप्पड़ सीधे जान निकल देगा."

रामलाल ने डर के मारे अपनी साइकिल उठायी और बिना पीछे देखे वहां से भाग खड़ा हुआ. दुलारी ने आखरी बार हाथ जोड़कर आरती को धन्यवाद् किया.

आरती इस पूरे तमाशे से बोहोत थक चुकी थी और उसकी सांसें अभी भी थोड़ी तेज़ थी. उसने नवाज़ की तरफ देखा

b51b16b2-ded2-424e-92cd-7d829ceea211.jpg


और कहा,

"नवाज़, चलो अब... मुझे यहाँ बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा."

आरती ने जैसे hi देखा की नवाज़ भीड़ के सामने hi उसका हाथ पकड़ लिया , तोह वो एकदम से शर्मा गयी.

ebfdc3d5-2314-4a6d-8f8d-00e138e2f472.jpg


गाँव के इतने सारे लोग उन्ही को देख रहे थे, और शेठजी की बहु होने के नाते उनके सामने नवाज़ का इस तरह हाथ पकड़ना उसे अंदर तक झिझक से भर गया.

उसने शर्म के मारे अपनी नज़रें झुका ली

2d342eb5-0a04-40e3-8388-a81afe486e44.jpg


और जल्दी से अपना हाथ पीछे खींच लिया.

वो धीरे से नवाज़ के कान के पास फुसफुसाई,

"नवाज़... क्या कर रहे हो? सब देख रहे हैं. चलो यहाँ से."

नवाज़ ने भीड़ की तरफ देखा और फिर आरती के लाल होते चेहरे को देखकर कुटिलता से मुस्कुरा दिया. वो समझ गया की रानी इस वक़्त शर्म से paani-paani हो रही है. उसने हाथ तोह नहीं पकड़ा, पर बिलकुल उनके साथ सटे हुए चलने लगा ताकि भीड़ को चीयर सके.

दोनों तेज़ कदमो से उस डंडी पर आगे बढे और लोगों का शोर dheere-dheere पीछे छूट गया.

थोड़ी hi देर में सामने नीता का छोटा, सुन्दर और saaf-suthra घर दिखाई दिया. घर के सामने एक छोटा सा बगीचा था जिसमे गुलाब और चमेली के पौदे लगे हुए थे.

दोपहर की धुप में वो छोटा सा आँगन बोहोत शांत और सुकून भरा लग रहा था.

नवाज़ ने घर के दरवाज़े के पास पहुँच कर हलके से कहा,

लो रानी, पहुँच गए नीता के घर.

नवाज़ ने आगे बढ़कर दरवाज़े पर दस्तक दी:

थक... थक... थक...

"नीता... अंदर हो क्या?"

नवाज़ ने थोड़ा ज़ोर से आवाज़ लगाया.. फिर आरती की और देखते हुई कहता है

अब थोड़ा अपना चेहरा नार्मल कर लो, वर्ण वो देख कर डर जाएगी.

नवाज़ ने जब ऐसा कहा तब आरती ने नखरे से अपना मुँह फुलाया और बड़ी hi शरारत भरी नज़रों से नवाज़ को देखने लगी—

8381c5ee-be3b-4903-9220-4c571490e44a.jpg


बिलकुल उस तस्वीर की तरह, जिसमे उसकी मासूमियत और हल्का सा गुस्सा साफ़ चालक रहा था.

"अच्छा जी... जो हुकुम मेरे प्यारे शोहर का,"

आरती ने नखरे से अपनी आवाज़ को धीमे करते हुए कहा.

और अगले hi पल, बिना किसी की परवाह किये, वो आगे बढ़ी और नवाज़ के गले लग गयी. उसने अपने दोनों हाथ नवाज़ की पीठ पर कास दिए और अपना चेहरा उसके सीने में छुपा लिया.

दोपहर की धुप में, नीता के उस शांत आँगन में, दोनों का एक दुसरे से लिपटना उनके रिश्ते की इस नयी शुरुआत को और भी गहरा कर रहा था.

नवाज़ ने भी मुस्कुरा कर उसे अपनी बाहों में भींचा और उसके बालों को सेहलते हुए फुसफुसाया,

"बस करो रानी, अभी थोड़ी देर पहले भीड़ के सामने शर्मा रही थी, और अब खुद hi इतने जूनून में आ गयी हो? नीता किसी भी वक़्त बहार आ सकती है."

आरती ने थोड़ा हैट कर फिर से वही प्यारा सा मुँह बनाया

Nivetha-Pethuraj.jpg


और बोली,

"आने दो... अब मुझे किसी का डर नहीं."

ऐसा कहते हुई आरती ने नवाज़ की बाहों से थोड़ा अलग ह. अब उसके चेहरे के भाव एकदम बदल गए थे . उसने अपने बिखरे बाल पीछे किये और बी अपनी आँखें थोड़ी बड़ी करके, सीधे नवाज़ की आँखों में देखा.

6d0fb211-cd85-4917-bc2b-73bb720c2453.jpg


उसकी नज़रों में इस वक़्त एक अजीब सा फकर और गहरा जूनून साफ़ चालक रहा था.

"मुझे अब किसी का डर नहीं..."

आरती ने ek-ek शब्द पर ज़ोर देते हुए कहा.

नवाज़ ने उसके इस बदले रूप को देखा तोह देखता hi रह गया. वो कुटिलता से मुस्कुराया,

"अच्छा? सच में डर नहीं लग रहा?"

"हाँ नहीं, बिलकुल नहीं!"

आरती ने उसकी आँखों में आखिरी हद्द तक देखते हुए जवाब दिया. उसके चेहरे पर अब कोई झिझक या शर्म नहीं थी, बल्कि अपने इस नए रिश्ते को लेकर एक अलग hi धीटपणा और घमंड आ चूका था. रस्ते के तमाशे और नवाज़ के उस मरदाना गुस्से ने उसके अंदर के डर को पूरी तरह ख़तम कर दिया था.

नवाज़ ने आरती का ये तीखा और नशीला रूप देखा तोह उसके दिमाग में कल खेत वाले प्लान की चमक और बढ़ गयी. वो आगे बढ़ कर उसके और क़रीब आया

नवाज़ बिलकुल आरती के करीब आ गया, दोनों के बीच की डोरी अब न के बराबर थी. उसने अपनी भरी और नशीली आवाज़ में फुसफुसाया,

"सच में रानी? बिलकुल डर नहीं लगता अब?"

आरती ने बिना अपनी नज़रें हटाए, एक प्यारी और थोड़ी शोख मुस्कान के साथ नवाज़ की आँखों में देखा.

Pam.jpg


उसका एक हाथ हलके से उसके गले के चैन पर चला गया, जिसे वो उँगलियों से पकड़ते हुए नखरे से बोली,

"नहीं, बिलकुल नहीं!"

उसकी आँखों में इस वक़्त नवाज़ के लिए पूरा समर्पण और एक अजीब सा हक़ साफ़ दिख रहा था. नवाज़ का मरदाना रूप और दुश्मनो को मिटटी में मिला देने का वो गुस्सा देख कर आरती का दिल अब पूरी तरह से नवाज़ का घुलम हो चूका था. गाँव, समाज और परिवार का डर जैसे इस दोपहर के सन्नाटे में कही गायब हो गया था.

नवाज़ ने जब आरती का यह बेहद खूबसूरत और be-parwah रूप देखा, तोह उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसकी पतली कमर को dhar-dabora और उसे अपने जिस्म से चिपका लिया. आरती की सांसें एक बार फिर से तेज़ होने लगी थीं.

आरती ने नखरे से अपने होंठ को हलके से दांतो टेल दबाते हुए और अपनी नशीली आखों से सीधे नवाज़ के चेहरे को तकते हुए कहा:

b0036f12-2662-4296-a554-d59173f84b43.jpg


"मैं भला क्यों दारूण... जब मेरे साथ मेरा प्यारा शोहर खड़ा हो, जो मेरे खातिर साड़ी दुनिया से भीड़ जाता हो! ऐसा शोहर होगा तोह कौन बेगम डरेगी? जब आप किसी से न डरते हुए, सारे गाँव के सामने मेरा हाथ पकड़ते हो, तोह मैं अब किसी से नहीं डर्टी नवाज़ जी!"

आरती के मुँह से 'नवाज़ जी' और 'शोहर' सुनकर नवाज़ का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. उसके होंठों पर एक गहरी और कुटिल मुस्कान तैर गयी. उसने आरती की कमर पर अपनी पकड़ को और मज़बूत किया, जिससे दोनों के जिस्म एक दुसरे में पूरी तरह समां गए. गाँव, समाज और परिवार का डर जैसे इस दोपहर के सन्नाटे में हमेशा के लिए गायब हो गया था.

आरती का ये नया, ढीट और पूरी तरह से उसपर हक़ जताने वाला रूप देख कर नवाज़ का दिल baagh-baagh हो गया. उसके होंठों पर एक गहरी और कुटिल मुस्कान तैर गयी.

"सही में रानी... तू अब सच में मेरी बेगम बनने के काबिल हो गयी है,"

नवाज़ ने उसके चेहरे के बेहद क़रीब आकर धीमे से फुसफुसाया,

"तेरे इस धीटपणे पर तोह ये जान भी हाज़िर है."

आरती ने शरारत से उसके सीने पर हलके से एक मुक्का मारा
 
नवाज़ ने जैसे hi उसके चेहरे के बेहद क़रीब आकर धीमे से फुसफुसाया,

"तेरे इस धीटपणे पर तोह ये जान भी हाज़िर है,"

तोह आरती के चेहरे के भाव एकदम से बदल गए .

उसने शरारत से नवाज़ के सीने पर हलके से एक मुक्का मारा और अपना मुँह थोड़ा सा घुमाकर, जरा नखरे से कहने लगी,

85a76a6b-a9fc-4203-935b-33116572f5ca.jpg


"जान देने की बात न करें आप! मुझे आपकी जान नहीं, आपका साथ चाहिए."

नवाज़ ने जब उसके इस प्यारे से नखरे को देखा, तोह उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी.

उसने आरती का वही हाथ पकड़ कर अपने होंठों से लगा लिया और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै,

"जो हुकुम मेरी बेगम. अब जब तक तू साथ है, ये जान कहीं नहीं जाने वाली."

आरती ने मुस्कुरा कर अपनी नज़रें झुका लीन.

नवाज़ ने जब आरती के मुँह से यह सुना, तोह उसके सबर का बाँध टूट गया. उसने एक कुटिल और गहरी मुस्कान के साथ पूछा,

"तोह किश कर लून?"

आरती ने अपनी गर्दन को थोड़ा सा झटक कर, नशीली और शोख नज़रों से सीधे नवाज़ की आँखों में देखा.

Priyanka-arul-mohan.jpg


उसने नखरे से अपने होंठ को हल्का सा दबाया और बड़ी hi बेशर्मी और समर्पण के साथ फुसफुसाई:

"कर लो... मैंने कब मन किया है? आपकी यह बेगम पूरी तरीके से आपकी hi तोह है."

यह सुनते hi नवाज़ ने बिना एक पल गवाए आरती को कमर से पकड़ कर पूरी ताक़त से अपनी तरफ खींचा. आरती का जिस्म एक झटके में उसके मरदाना सीने से जा चिपका, जिससे साड़ी में क़ैद उसके गोल मम्मी ज़ोर से डाब गए. नवाज़ ने अपना हाथ उसके बालों में फिसला कर उसका चेहरा ऊपर उठाया और आगे बढ़कर उसके रसीले गुलाबी होंठों पर अपने गरम होंठ रख दिए.

ec4365e020023cbc53960ed82e1fb3c7-ezgif-com-resize.gif


इस बार यह किश पहले से भी ज़्यादा जुनूनी और गहरी थी. नवाज़ ने बड़े hi अधिकार से उसके नीचे वाले होंठ को अपने मुँह में लिया और उसे भेड़िये की तरह चूसना शुरू किया. आरती ने भी अपना डर और शर्म पूरी तरह से भूल कर नवाज़ के गले में अपने दोनों हाथ दाल दिए और उसकी पीठ को कास के पकड़ते हुए उसके किश का बराबर साथ देने लगी. दोपहर की धुप और नीता के उस सुनसान आँगन में दोनों एक दुसरे की साँसों की गर्मी में पूरी तरह फ़ना हो गए.

नवाज़ का दूसरा हाथ नीचे फिसला और उसने आरती के टाइट और well-shaped गांड को कपड़ों के ऊपर से hi ज़ोर से दबोर लिया. आरती के मुँह से एक लम्बी और गरम सिसकारी निकली

—"आआह्ह्ह... नवाज़..."—

जो नवाज़ ने पूरी तरह अपने मुँह के अंदर hi समेत ली.

यहाँ एक बोहोत बड़ा राज़ tha—Neeta को अभी तक यह बिलकुल नहीं पता था की उसकी मालकिन आरती और उसके पुराने आशिक़ नवाज़ के बीच यह सब चल रहा है. नवाज़ इस घर का नौकर था और नीता उनके यहाँ माइड (काम वाली) थी. नवाज़ और नीता का अफेयर पहले से चल रहा था, और यह बात मालकिन होने के नाते आरती अच्छे से जानती थी. पर आज, आरती खुद अपने hi नौकर के इश्क़ में इस क़दर अंधी हो चुकी थी की वो नीता के hi घर के बहार उसके बेगम बनने के नखरे दिखा रही थी.

नवाज़ का जोश अब हर हद्द को पार कर रहा था. उसने आरती के होंठों को अपनी गिरफ्त में रखते हुए hi, अपना एक हाथ उसकी पीठ से आगे की तरफ बढ़ाया. साड़ी का पल्लू पहले hi सरक चूका था, और नवाज़ की गरम उँगलियों ने बिना देरी किये आरती के ब्लाउज के अंदर दाखिल होकर उसके नरम, गर्म और भरी मम्मों को सीधे अपने हाथ में थामे लिया.

"मममहह..."

आरती के मुँह से एक बेहद नशीली और दबी हुई सिसकारी निकली. जैसे hi नवाज़ की मरदाना और खुरदरी हथेली उसके नरम बदन से सीधे टकराई, उसके जिस्म में एक तेज़ झुरझुरी दौड़ गयी. नवाज़ ने उसके गोल मम्मी को उनकी गहराई से पकड़ कर हलके से दबाना और उसके निप्पल्स को अपनी उँगलियों के बीच मसलना शुरू किया, जिससे आरती का पूरा जिस्म एकाध गया.

उसका दूसरा हाथ अभी भी आरती के साड़ी के ऊपर से उसकी टाइट और well-shaped गांड को पूरी ताक़त से दबा रहा था. नवाज़ आरती को आगे और पीछे दोनों तरफ से इस तरह मसल रहा था जैसे वो इस मालकिन के जिस्म का ek-ek क़तरा निचोड़ लेना चाहता हो. आरती पूरी तरह उसके जिस्म से चिपक चुकी थी, और उसके दोनों हाथ नवाज़ के बालों को कास के भींचे हुए थे, जैसे वो खुद को गिरने से बचा रही हो.

दोनों की सांसें दोपहर के उस सन्नाटे में ढोल की तरह बज रही थीं. नवाज़ ने उसके होंठों को चूसते हुए अपनी दबी हुई आवाज़ में फुसफुसाया,

"रानी... तेरी यह नरम नरम मम्मी मुझे पागल कर देंगे."

आरती ने बिना आँखें खोले, उसके होंठों पर hi अपनी गर्म सांस छोड़ते हुए और ज़ोर से सिसकारी ली,

"नवाज़... और... और ज़ोर से..."

नवाज़ अब पूरी तरह से होश खो चूका था. आरती की सिसकारियों और उसकी "और ज़ोर से" कहने की ख्वाहिश ने उसके अंदर के जानवर को पूरी तरह जगा दिया था. उसने उसके होंठों को चूसते हुए hi, अपने उस हाथ को जो उसकी गांड पर था, तेज़ी से आगे बढ़ाया और आरती की साड़ी के पल्लू को झटके से उसके कंधे से नीचे गिरा दिया.

नवाज़ ने जैसे hi देखा की आरती उत्तेजना में बिलकुल बेहाल हो रही है, उसके दिमाग की बनती ने तुरंत काम किया. उसने याद किया की वो दोनों इस वक़्त नीता के घर के दरवाज़े पर खड़े हैं और यहाँ पूरा ब्लाउज खोलना बोहोत बड़ी गलती होगी.

उसने पूरा ब्लाउज खोलने के बजाये, सिर्फ ऊपर के दो बटन hi हलके से खोले ताकि आरती के गर्म और भरी उभारो का ऊपर का हिस्सा नुमायां हो सके. उसने अपना हाथ उन खुले हुए दो बटन के अंदर डाला और उसके नरम, गर्म मम्मी के ऊपर के हिस्से को अपनी उँगलियों से ज़ोरदार ढंग से सहलाने और दबाने लगा.

"मममहह... नवाज़..."

आरती ने अपनी आँखें कास के बंद कर ली और उसके सीने से लग गयी, उसकी सांसें बोहोत तेज़ चल रही थीं. नवाज़ ने उसे थोड़ा पीछे किया ..

अब आरती का गहरा ब्लाउज और उसके अंदर क़ैद भरी उभार पूरी तरह से मतलब उप्परि गुस्सा नवाज़ के सामने नुमायां हो चुके थे.

जैसे hi नवाज़ से वो थोड़ी दूर हुई ठंडी हवा आरती के नरम और गोर बदन से टकराई, उसके जिस्म में एक कपकपी दौड़ गयी.

नवाज़ ने बिना वक़्त गवाए अपना मुँह उसके होंठों से फिर से लगाया ...और कुछ देर किश 💋 करने के बाद आपने होंठ हटा दिए

और सीधे उसके नरम, गर्म मम्मों के बीच की गहराई (क्लीवेज) में अपना चेहरा छुपा दिया.

"आआह्ह्ह... नवाज़... क्या कर रहे हो..."

आरती ने दोनों हाथों से नवाज़ के सर को पकड़ लिया, पर वो उसे दूर नहीं धकेल रही थी, बल्कि उसके सर को अपने मम्मों पर और ज़ोर से दबा रही थी.

अब नवाज़ अस रहा नहीं गया और उसने बच्चे भी बटन भी निकल दिए ..नवाज़ ने उन भरी उभारो को दोनों हाथों से ऊपर की तरफ उठाया और एक गोल मम्मी को पूरी तरह अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

ब्लाउज खुलने से आरती इस सुनसान आँगन में पूरी तरह बेहाल हो चुकी थी.

नवाज़ और आरती उस शांत आँगन में साड़ी दुनिया को भूल चुके थे. नवाज़ ने जब उसके नरम, गोरी छाती पर अपने गर्म होंठ रचे, तोह आरती का bacha-kuche सबर का बाँध भी पूरी तरह टूट गया. उसकी सिसकारियों की आवाज़ दोपहर के उस सन्नाटे में गूँज रही थी, और वो पूरी तरह नवाज़ के मरदाना जिस्म के आगे सरेंडर कर चुकी थी.

नवाज़ के होंठ उसके एक गोल मम्मी को पूरी शिद्दत से चूस रहे थे, जबकि उसका दूसरा हाथ उसके दुसरे नरम उभार को बुरी तरह मसल रहा था. साड़ी और ब्लाउज के खुलने से आरती इस सुनसान आँगन में पूरी तरह बेहाल और नशीली हो चुकी थी. उसके पेअर अब जिस्म का बोझ नहीं उठा प् रहे थे, इसलिए नवाज़ ने उसे अपनी मज़बूत बाहों में कास कर थमा हुआ था और उसकी टाइट गांड को लगातार अपने जिस्म पर रगड़ रहा था ताकि उसकी उत्तेजना और बढे.
 
आरती ने जैसे hi देखा की नवाज़ अब रुकने वाला नहीं है , उसने अचानक एक गहरी सांस ली और खुद को संभाला. उसके अंदर का डर एक झटके में फिर से उस नए घमंड और धीटपणे में बदल गया. उसने अपनी गर्दन को थोड़ा ऊँचा उठाकर, नशीली और शोख नज़रों से सीधे नवाज़ के चेहरे को ताका.

efcead3e-7b8a-4237-b467-4c2f994f4c0a.jpg


उसने अपने कपड़ों को थोड़ा ठीक किया और हलके से आँख मारते हुए, नखरे से कहा:

"अहा! तोह बहार hi सारा इश्क़ फ़रमाया जायेगा या अंदर जाकर मेरे बीमार सहेली का haal-chaal भी पूछोगे जी?"

आरती के इस अचानक बदले अंदाज़ और आँख मारने पर नवाज़ एक पल के लिए दांग रह गया. वो उसके इस be-parwah और खुले रूप को देख कर अंदर hi अंदर मुस्कुरा उठा. उसे समझ आ गया की अब उसकी यह रानी किसी के बाप से नहीं डरने वाली.

नवाज़ ने जब आरती का यह be-parwah रूप देखा, तोह उसने हस्ते हुए उसके कान के पास झुक कर धीरे से कहा,

"चलो बेगम, चलो... तुम्हारी सहेली अंदर इंतज़ार कर रही है."

आरती ने अपने ब्लाउज के बटन को jaldi-jaldi लगते हुए थोड़े नखरे से कहा,

"दूर तोह खुलने दो पहले!"

नवाज़ ने कुटिलता से मुस्कुरा कर उसकी पतली कमर को फिर से दबोरा और बोलै,

"फिर क्या तब तक एक और किश करें?"

आरती ने बिना किसी डर के सीधे नवाज़ की आँखों में देखा, जहाँ अब मालकिन वाला रूप नहीं बल्कि पूरा समर्पण था. वो शोख अदा से बोली, "

है क्यों नहीं... मैं आपकी hi बेगम हूँ. आपकी दासी हूँ, तोह आप कभी भी और कहीं भी किश कर सकते हो!"

ऐसा बोलते hi आरती ने खुद आगे बढ़कर नवाज़ के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और पूरी ख़ुशी से उसे किश करने लगी.

c6a1a1a1e26f4a350796966c149aad13-t4-ezgif-com-resize.gif


इस बार आरती खुद पहल कर रही थी, उसने नवाज़ के गले में बाहें दाल कर उसके होंठों का रास चूसना शुरू किया. नवाज़ ने भी मौका देखते hi उसकी गांड को साड़ी के ऊपर से hi ज़ोर से दबाया, जिससे आरती के मुँह से एक नशीली सिसकारी निकली जो नवाज़ ने अपने मुँह में hi समेत ली. नीता के दरवाज़े के ठीक बहार दोनों एक दुसरे के जिस्म की गर्मी में दोपहर के सन्नाटे को चीरते हुए खोये रहे.

नवाज़ ने उस जुनूनी किश को हलके से तोड़ते हुए आरती की नशीली आँखों में देखा और कुटिलता से मुस्कुरा कर पूछा,

"दासी kya-kya करती है पता है न रानी?"

आरती ने उसकी आँखों में गहरे डूबता हुए और अपने होंठों की नमी को महसूस करते हुए झट से जवाब दिया,

"हाँ पता है मेरे राजा... वो सब मैं करुँगी."

ऐसा कहते hi उसने बिना एक पल गवाए दोबारा अपने होंठ नवाज़ के होंठों पर जमाये और पूरे हक़ से उसे फिर से किश करने लगी. दोनों ek-doosre के जिस्म की गर्मी में पूरी तरह अंधे हो चुके थे.

तभी अंदर से नीता की बैसाखी की आवाज़ आयी—खाद... खाद... खाद...—और दोनों के होश एक झटके में ठिकाने आ गए. क़दमों की आवाज़ बिलकुल दरवाज़े के पास सुनाई दी तोह दोनों झट से ek-doosre से थोड़ा अलग हुए.

आरती ने एक गहरी सांस ली, कांपते हाथों से अपनी साड़ी के पल्लू को संभलकर कंधे पर रखा और अपने बिखरे बाल ठीक किये. उसके चेहरे पर अभी भी उस हसीं किश की गर्मी, रस्ते वाले झगडे का खौफ और abhi-abhi हुई उत्तेजना और शर्म का रंग साफ़ mila-jula दिख रहा था.

नवाज़ ने भी अपना कुरता ठीक किया और पीछे हैट गया.

और तभी दरवाज़ा पूरा खुल गया!

सामने नीता कड़ी थी, जिसका एक पेअर प्लास्टर में बंधा हुआ था और वो बैसाखी के सहारे कड़ी थी. उन दोनों को इस तरह अपने आँगन में खड़ा देख कर नीता के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी, हालाँकि उसकी नज़रों में थोड़ा सा शक भी था क्यूंकि नवाज़ और आरती दोनों की सांसें काफी तेज़ चल रही थीं.

"अरे! तुम दोनों आ गए? और बहार hi खड़े रहोगे या अंदर भी आओगे?"

नीता ने हस्ते हुए शरारत से पूछा.

आरती ने मालकिन वाला रॉब वापस लाने की कोशिश की और मुस्कुरा कर अंदर बढ़ने लगी.

अंदर आने के बाद नीता बैसाखी के सहारे कड़ी होकर दोनों को ध्यान से घूर रही थी. उसने साफ़ देखा की आरती का चेहरा टमाटर की तरह लाल है, उसके बाल बिखरे हुए हैं, और नवाज़ की शर्ट का ऊपर का बटन भी निकला हुआ है.

नीता ने थोड़ा शक्की और गुस्से भरी नज़रों से नवाज़ को dekha—kyunki नवाज़ पर उसका अपना हक़ था और दोनों का अफेयर चल रहा tha—par अपनी मालकिन आरती के सामने वो खुल कर कुछ बोल नहीं सकती थी.

"आओ मेमसाब, बैठ जाओ...

नीता ने बड़े hi अदब से आरती को चारपाई पर बैठने का इशारा करते हुए कहा, पर उसकी नज़रें अभी भी नवाज़ पर hi तिकी थीं, जैसे वो उससे आँखों hi आँखों में सवाल कर रही हो की बहार क्या चल रहा था.

आरती ने खुद को संभाला और अपनी मालकिन वाली सोफिस्टिकेशन और थोड़ा रॉब वापस लाते हुए चारपाई की और बढ़ी पर बैठी नहीं. वो वही कड़ी रही और उसने बिलकुल नखरे से अपनी साड़ी के पल्लू को एक झटके में सही किया.

a906109c-1fba-4e14-a623-201d065abb52.jpg


उसने अपनी तिरछी और नशीली नज़रों से पहले नवाज़ को देखा, फिर बड़ी hi अदा के साथ नीता की तरफ घूम गयी. उसके चेहरे पर अब शर्म नहीं, बल्कि इस बात का घमंड था की उसके साथ उसका मर्द खड़ा है जो abhi-abhi बहार उसके जिस्म का मज़ा लेकर होता है.

"बैठूंगी नीता, पहले रस्ते की थकन और गर्मी तोह काम हो जाये,"

आरती ने jaan-bujhkar नखरे से अपनी आवाज़ को थोड़ा धीमे किया ताकि उसकी साँसों की गर्मी साफ़ महसूस हो सके.

नीता बैसाखी के सहारे कड़ी उन दोनों के बिखरे हुए रूप को लगातार टाक रही थी. उसका शक्क dhiire-dhiire बढ़ता जा रहा है क्यूंकि नवाज़ अभी भी चुपचाप खड़ा कुटिलता से मुस्कुरा रहा था.

नीता ने जब आरती के चेहरे पर वह घमंड और उसकी आवाज़ में नशीली गर्मी महसूस की, तोह उसके अंदर की जलन और सुलग गयी. उसने एक गहरी नज़र नवाज़ के खुले बटन और बिखरे बालों पर डाली, और फिर बैसाखी पर थोड़ा सा अपना वज़न संभालती हुई अदब के परदे में थोड़ा ताना मार कर बोली:

"जी मेमसाब, दोपहर की गर्मी है hi ऐसी की achhe-achhon का हाल बेहाल हो जाये. पर लगता है रस्ते की धुप आप दोनों को कुछ ज़्यादा hi लग गयी है... तभी तोह नवाज़ की शर्ट के बटन तक टूट गए और आपके बाल भी बिखरे हुए हैं."

नीता ने jaan-bujhkar अपनी नज़रें नवाज़ पर टिका दिन, जैसे वो उसे जाता रही हो की वो सब समझ रही है.

फिर उसने थोड़ी ढीट मुस्कान के साथ आरती से कहा,

"मेमसाब, आप कड़ी क्यों हैं? बैठिये न. नवाज़ तोह गाँव का लड़का है, इसको dhoop-garmi की आदत है... पर आप जैसे नरम बदन के लोग इस दोपहर में धुप झेल नहीं पाते."

नीता की इस बात में एक छिपा हुआ तीर था, जो सीधे आरती के नखरे और उनके abhi-abhi बहार किये गए रोमांस पर निशाना साध रहा था. नवाज़ पीछे खड़ा उन दोनों की इस तकरार पर अपनी कुटिल मुस्कान दबाने की कोशिश कर रहा था.

नीता का यह छुपा हुआ तीर सुनकर आरती के होंठों पर एक बेहद ठंडी और कुटिल मुस्कान आ गयी.

5f696f6e-8ebf-4f24-ab61-f097e6a57134.jpg


वो बिलकुल नहीं घबराई, बल्कि उसने अपनी साड़ी के पल्लू को एक झटके से अपने सीने पर और अच्छे से सेट किया और दो कदम आगे बढ़कर सीधे नीता के सामने आकर कड़ी हो गयी.

उसने नखरे से अपनी नज़रों को घुमा कर नवाज़ को देखा

e730cde4-b446-4830-a384-c6f9879deb07.jpg


और फिर नीता की आँखों में देखते हुए पूरे घमंड और मालकिन वाले रॉब से पलटवार किया:

"तुमने बिलकुल सही कहा, नीता. मेरा बदन नरम ज़रूर है, पर इस गर्मी को झेलना और संभालना अब मुझे अच्छे से आता है. और रही बात नवाज़ की... तोह अब इसको dhoop-garmi में अकेले rehte-rehte बोहोत वक़्त हो गया है. अब इस गाँव के मर्द को भी तोह थोड़ी ठंडक और नरम सहारे की ज़रुरत होती है न? इसीलिए तोह अब ये हर वक़्त मेरे aage-piche साये की तरह रहता है."

आरती ने jaan-bujhkar अपने होंठ को हलके से दांतो टेल दबाया और नीता के बिलकुल पास आकर धीरे से बोली

c1b797e3-ec01-4eec-9cbd-c14010b82201.jpg


उसकी आँखों मई देखते हुई

, "रस्ते में थोड़ा बद्द्तमीज़ी का किस्सा हो गया था, तोह नवाज़ ने सबके सामने मालकिन का फ़र्ज़ निभाया. अब जब मर्द इतना सब कुछ करेगा, तोह उसके शर्ट का ek-aadho बटन खुलना और मेरे बाल बिखरना तोह लाज़मी है, है न?"

आरती का यह खुला और तीखा जवाब सुनकर नीता के चेहरे का रंग एक झटके में उड़द गया. उसने साफ़ देख लिया की उसकी मालकिन अब दररने के बजाये उसके यार पर khullam-khulla अपना अधिकार जाता रही है.

नवाज़ पीछे खड़ा आरती के इस ज़ोरदार पलटवार को देख कर अंदर hi अंदर बिलकुल लल्लू हो गया. उसके सीने में गर्व का एक अनोखा उबाल उठा की उसकी रानी अब सच में उसकी बेगम बनने के लिए पूरी तरह ढीट हो चुकी है.
 
रस्ते में थोड़ा बद्द्तमीज़ी का किस्सा हो गया था, तोह नवाज़ ने सबके सामने मालकिन का फ़र्ज़ निभाया. अब जब मर्द इतना सब कुछ करेगा, तोह उसके शर्ट का ek-aadho बटन खुलना और मेरे बाल बिखरना तोह लाज़मी है, है न?"

आरती का यह खुला और तीखा जवाब सुनकर नीता के चेहरे का रंग एक झटके में उड़द गया. उसने साफ़ देख लिया की उसकी मालकिन अब दररने के बजाये उसके यार पर khullam-khulla अपना अधिकार जाता रही है.

नवाज़ पीछे खड़ा आरती के इस ज़ोरदार पलटवार को देख कर अंदर hi अंदर बिलकुल लल्लू हो गया. उसके सीने में गर्व का एक अनोखा उबाल उठा की उसकी रानी अब सच में उसकी बेगम बनने के लिए पूरी तरह ढीट हो चुकी है.

तब नीता कहते है

दीदी मेरे घर तक पहुंचने मई कोई तकलीफ तो नहीं हुई न

नहीं नीता, पर वो रस्ते में एक बद्तमीज़ मिल गया था.. नवाज़ ने उसकी धुलाई कर दी.

नीता ने नवाज़ की तरफ देखते हुए थोड़ा ताना मारते हुए कहा,

"हाँ, नवाज़ वैसे hi है मेमसाब, किसी के बाप से नहीं डरता!"

आरती ने नीता और नवाज़ के पुराने अफेयर का ज़िक्र छेड़ते हुए नखरे से जवाब दिया,

"अब तुम्हारा यार है तोह तुम्हे hi पता होगा, मुझे क्या पता."

नीता ने बात को घुमा कर और दभपान से कहा,

अब आप उसके साथ रह रहे हो, तोह आप को भी पता चल जायेगा मेमसाब.

नवाज़ पीछे खड़ा होकर एक कुटिल और कामिनी मुस्कान के साथ दोनों औरतों की इस तकरार को देख रहा था. उसे अंदर hi अंदर बड़ा मज़ा आ रहा था की एक तरफ उसकी पुराणी मेहबूबा कड़ी है और दूसरी तरफ उसकी आने वाली बेगम है, और दोनों hi उसके लिए एक दुसरे से अंदर hi अंदर जल रही हैं

नीता के मुँह से यह बात सुनते hi आरती का माथा ठनका . उसकी बातों में छुपा वो हल्का सा दाबाउर जताने का अंदाज़ आरती को अंदर तक चुभ गया. भले hi आरती को सब पता था, पर इस वक़्त वो खुद को नवाज़ की 'बेगम' समझ रही थी. एक माइड का उसके आगे इस तरह बोलना उसके मालकिन वाले ईगो को हिला गया.

आरती ने नखरे और थोड़े से घमंड के साथ अपनी गर्दन को हल्का सा झटका.

उसने अपनी तिरछी, नशीली नज़रों से पहले नवाज़ को देखा—

Aruljothi-Arockiaraj.jpg


जैसे वो उसे जाता रही हो की यह मर्द अब सिर्फ उसका hai—aur फिर पूरे रॉब के साथ नीता की तरफ मुद गयी.

उसने अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रखे, जिससे उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा और सरक गया, और बड़े hi अड्डा और सोफिस्टिकेशन के साथ बोली:

Aruljothi-The-Allure-of-Sleeveless-Fashion.jpg


"मुझे पता चलने में अब ज़्यादा देर नहीं है, नीता. वैसे भी नवाज़ जी अब सिर्फ एक नौकर नहीं हैं मेरे लिए. गाँव का तोह छोड़ो, अभी रस्ते में उन्होंने मेरे खातिर जो किया न, उसके बाद तोह उनका हर रूप मुझे अच्छे से समझ आ गया है."

आरती ने jaan-bujhkar 'नवाज़ जी' पर ज़ोर दिया ताकि नीता को उसकी जगह याद दिला सके. उसके चेहरे पर एक अजीब सा घमंड था, जैसे वो नीता को दिखा रही हो की जिसे तू अपना यार कहती है, वो मेरे सामने घुटने टेकता है.

नवाज़ पीछे खड़ा यह सब देख कर अंदर hi अंदर बिलकुल लल्लू हो रहा था. उसे दोनों औरतों के बीच का यह साइलेंट वॉर देख कर इतना मज़ा आ रहा था की उसकी कुटिल मुस्कान और गहरी हो गयी. वो देखना चाहता था की नीता अब अपनी मालकिन के इस खुले चैलेंज पर क्या जवाब देती है.

नीता ने जब देखा की आरती पूरे रॉब में आ चुकी है और माहौल गरम हो रहा है, तोह उसने बोहोत शातिराना तरीके से बात को एकदम पलट दिया. उसने आरती को ऊपर से नीचे तक देखा

15d578a8-98a6-4c2f-a570-c84258acccb7.jpg


और ढीट मुस्कान के साथ बोली:

"वाओ दीदी! क्या लग रही हो... साहब देख के पागल हो जायेंगे. क्या saji-sanwari हो आप!"

आरती इस ताने और तारीफ के अचानक बदलाव से थोड़ा ठिठकी, और उसके मुँह से झट से निकल गया,

"मैं कहाँ तुम्हारे साहब के लिए saji-sanwari हुई हूँ!"

नीता ने तुरंत मौका देखा और आँखिन मरते हुए पूछा,

"तोह क्या नवाज़ के लिए saji-sanwari हो?"

आरती का दिल एक पल के लिए ज़ोर से धड़का, पर उसने तुरंत अपना नखरा दिखाया.. और बड़े नखरे से कहती है...

1277c42a-81ea-4ec9-9d06-3caa2222fa06.jpg


, "धत पागल! मैं क्यों उसके लिए saji-sanwarungi... वो तेरा आशिक़ है, मेरा नहीं है!"

नीता ने नवाज़ की तरफ एक तिरछी नज़र डाली और फिर आरती से बोली,

"आप को इस हाल में देख के वो आप का आशिक़ बन जायेगा दीदी."

"धत बेशरम! कुछ भी मत बोल!"

आरती ने शर्म से अपना मुँह नीचे कर लिया .

0f43532e-0766-44fd-9d29-5deb44d99d5e.jpg


"मैं सच कह रही हूँ दीदी... मज़ाक छोडो पर आप का ये रूप देखेगा तोह कोई भी पागल हो जायेगा... कोई भी आप का आशिक़ बन जायेगा,"

नीता ने बैसाखी पर झुकते हुए कहा.

आरती ने नखरे से अपनी साड़ी का पल्लू संभाला,

"मुझे किसी को भी अपना आशिक़ नहीं बनाना."

"आप क्यों किसी को अपना आशिक़ बनाओगे, आप का तोह आशिक़ आलरेडी..."

नीता ने बात अधूरी छोड़ी.

आरती ने पूछा,

"कौन?"

"कौन क्या... साहब! आप के हस्बैंड!"

नीता ने हस्ते हुए कहा.

आरती ने एक सुकून की सांस ली और बात संभालती हुई बोली,

"हाँ, वो तोह हैं."

नवाज़ पीछे खड़ा उन दोनों की इस गुफ्तगू को सुनकर अंदर hi अंदर कुटिलता से मुस्कुरा रहा था. उसे पता था की आरती का ये सारा रूप और ये नखरा अब सिर्फ और सिर्फ उसके खेत वाले प्लान के लिए तैयार हो रहा है.
 
नवाज़ पीछे खड़ा चुपचाप दोनों की बातें सुन रहा था और उसकी कुटिल मुस्कान और गहरी होती जा रही थी.

नीता ने बैसाखी पर हलके से झुकते हुए आँखिन मरी,

"वैसे भैया आप को ऐसा देखेंगे तोह आप को देखने के बजाये डायरेक्ट बैडरूम में लेके जायेंगे."

नीता के मुँह से यह बेशर्मी भरी बात सुनकर आरती का चेहरा एक बार फिर शर्म और उत्तेजना से लाल हो गया.

6f1e5d11-7dc9-439c-8965-87baa93d2532.jpg


आरती ने नखरे से अपना मुँह घुमाया,

"धत्त बेशरम! कुछ भी मत बोल."

"कुछ भी नहीं, सच बोल रही हु,"

नीता ने धीटपणे से हस्ते हुए कहा.

"वैसे आप आज तक, जितना मैं जानती हु इतने से कह सकती हु की आप आज तक कभी साहब के लिए ऐसे saji-sanwari नहीं हो... फिर आज कुछ ख़ास है?"

आरती ने अपनी साड़ी का पल्लू हलके से संभाला और नखरे से बोली,

mallu-aunty-clevarage-hot-big-mallu-hot-tamilaunty-malluaunty-desi-cleavarage-hot-bikini.jpg


"कुछ ख़ास नहीं है, मैं किया तोह कर लिया मेकअप."

नीता ने एक तीखी नज़र नवाज़ पर डाली और फिर आरती से बोली,

"लग रहा है आप साहब के साथ घूमने नहीं, तोह आप मेरे नवाज़ के साथ घूमने जा रही हो."

आरती के अंदर का घमंड और धीटपणा एक झटके में बहार आ गया. उसने सीधे नीता की आखों में देखा

Mamitha-Baiju.jpg


और पलटवार किया,

"नहीं, साहब के साथ नहीं... तेरे नवाज़ के साथ जा रही हु!"

नीता ने हसीं ढंग से ठहाका लगाया,

"फिर तोह आज नवाज़ की खैर नहीं... वो तोह आप को देखता hi रह जायेगा."

आरती ने नवाज़ की तरफ एक तिरछी नज़र डाली

6db1020e-3ee1-4973-a58b-fddea4c94c59.jpg


और बोली,

"वो भला मुझे क्यों देखेगा... अगर उसको किसी को देखना है तोह तेरे को देखेगा."

नीता ने बात को और उकसाते हुए कहा,

"इतना हॉट माल सामने होगा तोह वो मुझे क्यों देखेगा, आप को hi देखेगा!"

आरती ने नखरे से अपनी गर्दन झटकी और पूरे रॉब से बोली,

"मुझे देखेगा तोह उसका मूड तोड़ दूंगी!"

नीता ने हस्ते हुए अपनी बैसाखी संभाली,

"अब आप जानो और नवाज़ जाने... मई तोह चली बाथरूम."

ऐसा कह कर नीता बैसाखी के सहारे बाथरूम की तरफ बढ़ गयी. कमरे में अब सिर्फ आरती और नवाज़ अकेले बचे थे, और दरवाज़ा अंदर से बंद होने की आवाज़ आयी.

नवाज़ ने बिना वक़्त गवाए आगे बढ़कर आरती को अपनी मज़बूत बाहों में दबोच लिया.

6448739b-ab75-49dd-bc4c-95d5e70f2cdb.jpg


नीता जैसे hi बाथरूम के पास पहुँच कर अंदर से आवाज़ लगायी,

"नवाज़... मुझे बाथरूम में लेकर जाओ, मुझसे बैसाखी के सहारे अकेला नहीं जाया जा रहा."

यह सुनते hi आरती के चेहरे पर जलन के भाव साफ़ दिखने लगे. उसका दिल एक झटके में सुलग उठा की उसके नौकर और होने वाले शोहर को एक माइड इस तरह हक़ से बुला रही है. पर नीता बीमार थी, इसलिए नवाज़ ने आरती की तरफ देखा और उसे बाथरूम के अंदर छोड़ने चला गया. आरती गुस्से में लाल टमाटर होकर, कमरे के एक कोने में मुँह दूसरी तरफ करके कड़ी हो गयी.

थोड़ी hi देर में नवाज़ नीता को अंदर छोड़ कर बहार आया और सीधे आरती के पास पहुंचा. उसने बिना एक पल गवाए पार्टी की पतली कमर में अपने दोनों हाथ डाले और उसे अपने मरदाना सीने से कास के चिपका लिया.

Family.jpg


आरती ने गुस्से और नखरे से झटका मरने की कोशिश की, मगर नवाज़ की पकड़ बोहोत मज़बूत थी. वो नखरे से अपनी गर्दन थोड़ी तिरछी करके बोली,

"जाओ न... अपनी नीता रानी के पास जाओ! मेरे पास क्यों आये हो?"

नवाज़ ने कुटिलता से मुस्कुरा कर उसके नरम कान के पास अपने होंठ लाये और फुसफुसाया,

"अरे रानी, तू तोह सच में जल भून गयी. वो तोह बीमार है, इसलिए मदद की. पर इस दिल पर तोह सिर्फ तेरी हुकूमत चलती है."

नवाज़ उसे मानाने के लिए उसकी गोरी गर्दन पर हलके से अपने होंठ रगड़ने लगा,

22a16aa9-cabc-4279-b98c-f7584b92691f.jpg


जिससे आरती की नाराज़गी dhiire-dhiire पिघलने लगी.

मगर वो डर कर बोली,

"हटो नवाज़... वो अभी बाथरूम से बहार आ जाएगी."

"नहीं, वो इतनी जल्दी नहीं आएगी,"

नवाज़ ने उसके ब्लाउज के ऊपर से hi उसके भरी मम्मों को पीछे से दबाते हुए कहा.

"नहीं, वो नहीं आएगी... मुझे आवाज़ देगी जब आना होगा,"

आरती ने साँसें उखड़ते हुए कहा.

नवाज़ ने मौका देखा और आरती को घुमाकर सीधे चारपाई पर गिरा दिया. उसके गिरते hi साड़ी का पल्लू पूरी तरह सरक गया.

नवाज़ ने बिना वक़्त गवाए उसके ऊपर चढ़ते हुए उसके रसीले होंठों को अपने मुँह में भर लिया और एक हाथ से उसके गोर नरम मम्मों को और दुसरे हाथ से उसकी टाइट well-shaped गांड को zor-zor से मसलना शुरू कर दिया. चारपाई पर दोनों एक दुसरे के जिस्म का मज़ा लेने में पूरी तरह मदहोश हो गए.
 
नवाज़ ने बिना वक़्त गवाए उसके ऊपर चढ़ते हुए उसके रसीले होंठों को अपने मुँह में भर लिया और एक हाथ से उसके गोर नरम मम्मों को और दुसरे हाथ से उसकी टाइट well-shaped गांड को zor-zor से मसलना शुरू कर दिया. चारपाई पर दोनों एक दुसरे के जिस्म का मज़ा लेने में पूरी तरह मदहोश हो गए.

नवाज़ ने आरती के बिखरे हुए बालों की एक लेथ को उनके कान के पीछे किया और उनके चेहरे के बेहद करीब आ गया. आरती की सांसें बोहोत तेज़ हो गयी थीं और उसने चारपाई पर लेते हुए hi अपना चेहरा दूसरी और घुमा लिया.

d26f6e21-0278-4558-813a-ca923c37cce6.jpg


पर नवाज़ ने उनके फेस को धीरे से पकड़ कर अपनी तरफ खिंच लिया.

"नवाज़... वो आ जाएगी,"

आरती ने कमज़ोर आवाज़ में कहा, पर उसने नवाज़ को पीछे नहीं धकेला..

"इस वक़्त सिर्फ चाट और ये दीवारें हमें देख रही हैं,"

नवाज़ ने उनके गले पर धीरे से फुसफुसाया. उसका स्पर्श आरती को अंदर तक झकझोर रहा था.

नवाज़ ने आरती की हथेलियों को अपने कन्धों पर रखा और dhire-dhire उनके चेहरे को चूमने लगा.

आरती ने अपनी आँखें मूँद लीन और उसके बालों में अपनी उँगलियाँ फंसा दिन.

उस रूम की गरम हवा और उनके बीच का ये शिद्दत भरा रोमांस अब हर डर पर भारी पद रहा था.

"तुम्हारी खुशबु... मुझे पागल कर देती है,"

नवाज़ ने उनके होठों के पास आकर कहा.

37190acd-eed0-47de-8512-1295d8346a4b.jpg


आरती ने बस एक गहरी सांस ली और नवाज़ को और करीब आने का इशारा किया.

नवाज़ ने अब सब सब्र खो दिया था. उसने आरती की बाहों को अपने गले में मज़बूती से फंसाया और एक झटके में उन्हें चारपाई पर उठा कर बैठा दिया. उसने डर और एक्ससिटेमेंट के मारे नवाज़ के कन्धों को कास के पकड़ लिया.

"नवाज़! क्या कर रहे हो... मुझे जाने दो. वो नीता आ गयी न तोह मैं कहीं की नहीं रहूंगी,"

उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा, पर उनकी आँखों में एक शैतानी चमक थी.

नवाज़ ने उनके दोनों घुटनो को फैलाया और उन्हें अपने दोनों साइड कर लिया. उनका फैसला अब बिलकुल ख़तम हो चूका था. उसने आरती के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरा

d10e1f6d-77a8-4514-8120-f4e9cba47ff5.jpg


और उनकी आँखों में देखते हुए बोलै,

"अब तुम कहीं नहीं जा सकती. इस चारपाई पर सिर्फ तुम हो और मैं हूँ."

आरती की सांसें इतनी तेज़ थीं की उनका सीना तेज़ी से upar-neeche हो रहा था. नवाज़ ने धीरे से अपना सर उनके गले की तरफ झुकाया और वहां अपनी साँसों की गर्मी छोड़ी. आरती ने एक हलकी सी आह भरी और अपना सर पीछे कर दिया.

"तुम्हे पता है आरती... तुम इस वक़्त कितनी खूबसूरत लग रही हो?"

नवाज़ ने उसके कान के पास सरसराते हुए पूछा. उसके हाथ आरती की कमर से होते हुए उसकी पीठ पर घूमने लगे.

आरती ने अपनी आँखें बंद कर लीन और नवाज़ को अपने और करीब खिंच लिया. नवाज़ ने dhire-dhiire उसके चेहरे को चूमना शुरू kiya—pehle माथा, फिर गाल, और फिर वह उड़के होठों के बेहद करीब आ गया.

"नवाज़..."

आरती ने बस उसका नाम लिया, जैसे वह उसे पूरी तरह अपना लेने की इजाज़त दे रही hon.waise hi नवाज़ उसके होंटो को आपने होंटो मई ले लेता है ..

f7354dac9af5e8ed48e0bba47feaaef2-ezgif-com-video-to-gif-converter.gif


या योन कहे की दोनों एक दूसरे के होंटो को आपने होंटो के अंदर लेके चुम रहे थे ..

दोनों एक दुसरे में पूरी तरह खोये हुए थे की अचानक बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आहात हुई और नीता की आवाज़ गूंजी.

"नवाज़... आओ न, हो गया मेरा!"

नीता के यह शब्द सुनते hi जैसे दोनों पर बिजली गिर गयी. आरती का डर सच हो चूका था. उसने एक झटके में नवाज़ को खुद से अलग किया और गुस्से और डर के मरे फुसफुसाई,

"आ गयी करमजली...!"

नवाज़ का दिल भी तेज़ी से धड़क रहा था. उसने जल्दी से अपने कपडे और बाल ठीक किये, और आरती को आँखों hi आँखों में शांत रहने का इशारा किया. आरती ने जल्दी से चारपाई से उठ कर अपने बिखरे हुए बाल संभाले और कमरे के एक कोने में कड़ी हो गयी, जैसे वह कुछ कर hi नहीं रही थी.

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली, अपने चेहरे पर आम भाव लाया, और बाथरूम की तरफ चल दिया ताकि नीता को कोई शक न हो.

जैसे hi नवाज़ के साथ नीता हॉल में आती है, वह अपनी बैसाखियो के सहारे धीरे से एक चेयर पर बैठ जाती है. थकन की वजह से उसने नवाज़ की तरफ देखा और कहा,

"नवाज़, थोड़ा पानी देना..."

नवाज़ पानी लेने बढ़ने hi वाला होता है की आरती जल्दी से बीच में बोल पड़ती है,

"मैं देती हूँ न... उन्हें क्यों तकलीफ दे रही हो?"

नीता के चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान आती है और वह आरती को देखते हुए कहती है,

"अच्छा जी! मतलब दीदी यहाँ तक बात बढ़ गयी है क्या ?"

आरती का दिल एक पल के लिए बैठ जाता है, पर वह बात को संभालती है. अपने डर को छुपाने के लिए वह थोड़ा शरमाते हुए बोलती है,

Raashii-Khanna.jpg


"अरे, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं तोह तुम्हारे लिए कर रही हूँ."

नीता हस्ती है और कहती है,

"फिर ठीक है."

पानी लेन के बाद, आरती गिलास नीता को पकड़ती है और बातों hi बातों में कहती है,

"वैसे, जो नवाज़ ने मेरे लिए आज जो किया है, वह तुम्हारे छोटे मालिक भी मेरे लिए कभी नहीं करते."

नीता ने पानी का घुट लिया और आरती की तरफ देखकर नरम आवाज़ में बोली,

"इसीलिए वह आपको इतना प्यारा हो गया है?"

आरती थोड़ा हड़बड़ा जाती है,

"क्या?!"

नीता मुस्कुरा कर कहती है,

"आप लोग जो इंग्लिश में कहते हो न ... '

क्या

तब नीता कहते है

क्लोज

आरती ने चैन की सांस ली और मुस्कुरा कर बोली,

471ae12f-002e-4b56-b2a5-b8e167c7dd88.jpg


"हाँ, ... वह कह सकती हो."

और फिर आरती ने तिरछी नज़र से नवाज़ की तरफ देखा और नरम आवाज़ में कहा,

"चलें?"

"हाँ, चलो,"

नवाज़ ने सर हिला कर जवाब दिया.

फिर उसने नीता की तरफ रुख किया और बोलै,

"नीता, अब मैं निकलता हूँ."

नीता ने मुस्कुरा कर ताना मारा,

"अब क्या दीदी को छोड़ने जा रहे हो क्या ?"

"हाँ, पर पहले अम्मी से मिलने जाना है,"

नवाज़ ने बात संभालती हुई कहा.

आरती ने चौंकने का नाटक करते हुए नवाज़ से पूछा, "

अम्मी से मिलने जाना है क्या?"

"हाँ,"

नवाज़ ने जवाब दिया.

आरती ने थोड़े नखरे से कहा,

"चलिए फिर..."

नीता ने आरती के इस बदले हुए अंदाज़ को देखा और बड़े नखरे से उन्ही के लहजे में दोहराया,

"'चलिए'..."

आरती ने थोड़ा चिढ़कर कहा.. गुस्से से नीता को देखते हुई..

Raashi-Khanna.jpg


"क्यों? मैं तेरे यार को रेस्पेक्ट देकर बात नहीं कर सकती क्या?"

नीता ने कंधे उचकाए और बोली,

"कर सकती हो न दीदी ... मैं कौन होती हूँ रोकने वाली? यह आप और आपके नौकर के बीच का मामला है."

आरती ने पलट कर जवाब दिया,

"फिर ठीक है."

तभी नीता ने बात को एक नया मोड़ देते हुए नवाज़ से कहा,

"नवाज़, इनको लेके जाओ और अपना घर भी दिखाओ... आखिर इन्हें भी तोह तुम्हारा घर देखना चाहिए."

आरती ने इस मौके का फ़ायदा उठाया और बड़े नखरे से बोली.. थोड़े शर्म थी उसके चहरे पर ..

283d68b8-b09f-49c1-816f-896ee69addaa.jpg


"हाँ, मुझे भी पूरा हक़ है... नवाज़ जी का घर देखने का."

नवाज़ ने हँसते हुए कहा,

"तोह चल फिर."

नीता ने फ़ौरन बीच में टोकते हुए कहा,

"अरे 'चल' क्या? डायरेक्ट 'चल'...? 'चलो मेमसाब' बोलो! नवाज़, तुम्हारी मेमसाब हैं वह."

नवाज़ के कुछ बोलने से पहले hi आरती ने बाज़ी मार ली और नीता को घूरते हुए बोली,

93b5c734-fc74-4820-a93e-669209edce14.jpg


"अभी तोह कहा न तुमने की यह मैं और मेरे नौकर के बीच का मामला है... तुम क्यों बीच में पदों? और अब खुद hi बीच में पद रही हो!"

नीता ने अपनी हार मानते हुए हंसा और कहा,

"सॉरी दीदी, गलती हो गयी!"

इस nok-jhonk के बाद, आरती और नवाज़ एक दुसरे को देखते हुए वहां से निकल गए.
 
घर से बहार आकर दोनों थोड़ा दूर चले और अपनी बाइक के पास पहुँच गए. नवाज़ ने जैसे hi बाइक स्टार्ट की, आरती बड़े हक़ से उसके पीछे बैठ gayi—bilkul वैसे, जैसे वह सच में उसकी बेगम हो.

हवा के झोंकों के बीच बाइक आगे बढ़ने लगी. थोड़ा आगे आने के बाद, रस्ते में नवाज़ ने थोड़ा पीछे मुड़ते हुए पूछा,

"मैं आप को बोलू क्या?"

आरती ने पूछा,

"क्या जी?"

नवाज़ ने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा,

"हमारे सुहागरात के बारे में..."

आरती ने फ़ौरन डर और शर्म के मारे उसके कंधे पर हलकी सी चपत मारी,

"नहीं, बिलकुल नहीं!"

नवाज़ ने बात को आगे बढ़ाया,

"अरे, कोई एक तोह चाहिए न हमारा बीएड सजाने के लिए?"

आरती ने मश्वरा दिया,

"वह बूढ़ा नौकर है न, उससे कह देना."

नवाज़ ने समझते हुए कहा,

"वह तोह बहार का है. अगर घर का कोई अपना होगा, तोह कोई रिस्क नहीं होगा."

"वह बात तोह है... पर मुझे शर्म आएगी आप से,"

आरती ने थोड़ा शरमाते हुए अपना चेहरा नवाज़ के पीठ के पास छुपाया.

3830143e-b3b2-42fc-9a24-83a6d9230974.jpg


नवाज़ ने हंसा,

"अरे, वह तेरी ननद है, उससे क्या शर्माना?"

आरती ने चिढ़ते हुए पूछा,

e44df08c-230c-4b8d-8f1d-5fedd5f9f221.jpg


"अच्छा? और आप उनसे क्या बोलोगे? यह की हमने खेत में सुहागरात करनी है?"

नवाज़ ने बिना हिचकिचाए कहा,

"हाँ!"

आरती ने अपना सर पीटा,

"मुझे पता था, आप ऐसे hi बेशरमी से बोलोगे."

नवाज़ ने मज़ाक़िया अंदाज़ में पूछा,

"तोह फिर कैसे बोलता?"

"जो भी बोलना है बोलो, पर मेरे सामने मत बोलो,"

आरती ने शर्त राखी.

नवाज़ ने उसे और चिढ़ाते हुए पूछा,

"और अगर आप ने तेरे सामने hi उनसे पूछ लिया तोह?"

आरती ने गुस्से और शर्म के मरे अपनी आँखें मूँद ली और बोली,

"मुझे नहीं पता... जो करना है करो!"
 
बाइक नवाज़ के घर के आँगन में आकर रुकी. नवाज़ का घर मतलब एक पुराण सा घर था ..

देखो रानी आ गए हमारे घर मई

जी

आरती ने जल्दी से अपनी साड़ी संभाली और बाइक से नीचे उत्तरी. अभी वह दोनों खड़े hi हुए थे की घर का मुख्या दरवाज़ा खुला और नवाज़ की बहिन, नुसरत, बहार आयी.

सामने नवाज़ के साथ आरती को देख कर नुसरत की आँखों में एक शरारत भरी चमक आ गयी. उसने चोखटे हुए पूछा,

"तू नवाज़...? और साथ में मेमसाब भी हैं?"

नवाज़ ने थोड़ा सीना तान कर नखरे से कहा,

"हाँ आप, मैं और मेमसाब... अब्बू को देखने के बाद सोचा अपना घर भी घूमता चलूँ."

नुसरत ने आरती को ऊपर से नीचे तक देखा और एक प्यारी सी मुस्कान के साथ बोली,

"अरे, तोह पहले बताना चाहिए था न नवाज़! 'भाभी' पहली बार घर आ रही हैं, कुछ तयारी तोह करके रखती!"

'भाभी' शब्द सुनते hi आरती का चेहरा शर्म से बिलकुल लाल टमाटर हो गया.

उसने हड़बड़ा कर अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा और संभाला और अपनी नज़रें झुका ली.

BHAGYASHRI-Borse.jpg


नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ आरती की तरफ देखा, जैसे वह उसकी इस हालत का पूरा मज़ा ले रहा हो.

"आइये भाभी, अंदर आइये,"

नुसरत ने बड़े hi अपनापन और इज़्ज़त से उन्हें रास्ता दिया.

मेमसाब ... मैं आपको भाभी कह सकती हूँ न?"

आरती थोड़ा हिचकिचाई और बड़ी अड्डा के साथ नुसरत की और देखने लगी..

8793e6f4-23fe-42dd-89b0-f89b58d87cf8.jpg


और फिर नवाज़ के peeche-peeche दबे पाऊँ अंदर दाखिल हुई. पर आप को कुछ नहीं कहा ..

डर और शर्म के मारे उसने नवाज़ की शर्ट का पीछे से एक कोना कसके पकड़ लिया था.

कमरे में आते hi, आरती ने नवाज़ के कान के पास बेहद धीरे से फुसफुसाया,

"नवाज़ जी... वह मुझे 'भाभी' क्यों बोल रही हैं?"

नवाज़ ने पलट कर उसकी खूबसूरत आँखों में देखा और धीरे से बदमाशी से बोलै,

"क्यूंकि उन्हें पता है की परसो खेत में हमारी सुहागरात होने वाली है. अब से तू इस घर की बेगम है, मेरी रानी!"

आरती ने शर्मा कर उसे घूरा

07383843-7321-40a4-b1c1-4186e795d2ab.jpg


और हलकी सी चपत लगाने के बाद कहा

क्या आपने सबकुछ बता दिया है क्या आप को

बिलकुल नहीं रानी

फिर उन

स्मार्ट है वो उसे आईडिया हो गया होगा

अच्छा जी

ऐसा कह के आरती नुसरत की तरफ मुड़ी.

उसने नरम और इज़्ज़तदार लहज़े में पूछा,

"आप ... मैं आपको आप कह सकती हूँ न?"

नुसरत यह सुनकर खिलखिला कर हंस पड़ी और आगे बढ़ कर आरती का हाट पकड़ लिया. उसे मोहब्बत से बैठते हुए बोली,

"बिलकुल कह सकती हो! आज से हम दोनों nanand-bhabhi हैं."

फिर उसने नवाज़ को घूरा,

"नवाज़, चल तू अब खड़ा क्या देख रहा है? किचन जा और ठंडा लेकर आ, भाभी थक गयी होंगी."

नवाज़ ने आरती को एक आँख मारी और किचन की तरफ बढ़ गया, पर jaate-jaate सबकी नज़रों से बचाकर आरती की कमर पर एक हलकी सी चुटकी काटना नहीं भूला. आरती का दिल एक पल के लिए फिर तेज़ी से धड़क उठा.

नवाज़ के किचन में जाते hi नुसरत ने आरती का हाथ बड़े प्यार से थमा और उसे अपने पास बिठा लिया. आरती अभी भी थोड़ी हिचकिचाए हुए थी और उसकी नज़रें झुकी हुई थी.

f63320fb-bac4-4b8d-8a5a-ebc4f95e127e.jpg


नुसरत ने उसे आरामदेह महसूस करते हुए कहा,

"शर्माओ मत आरती भाभी .. अब तोह आप इस घर की भाभी हो. सच बताना, यह बदमाश तुम्हे ज़्यादा तंग तोह नहीं करता न?"

आरती ने धीरे से मुस्कुराते हुए नज़रे झुका िये हुई hi बोली,

a1103e33-114a-442b-b0d8-215e37f31f84.jpg


"नहीं आप... 'इनको' तोह आप जानती hi हैं. यह तोह बस थोड़े ज़िद्दी हैं, पर दिल के बुरे नहीं हैं."

जैसे hi आरती के मुँह से नवाज़ के लिए यह इज़्ज़तदार शब्द 'इनको' निकला, नुसरत ने फ़ौरन अपनी आँखें उठा कर शरारत से आरती की तरफ देखा. उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी, जैसे उसने आरती की छिपी हुई मोहब्बत पकड़ ली हो. नुसरत के इस तरह देखने पर आरती का bacha-kucha सब्र भी जवाब दे गया और वह शर्म के मारे paani-paani हो गयी.

98e12f50-5287-45e4-be82-38c61567e395.jpg


उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया.

नुसरत ने हँसते हुए बात आगे बधाई,

"अच्छा जी! 'इनको'...? वाह! वैसे यह ज़िद्दी नहीं, एक नंबर का गुंडा है! बचपन से hi ऐसा है, जो ठान लेता है वह करके रहता है. मुझे तोह हैरानी हो रही है की तुम जैसी 'सोफिस्टिकेटेड' मालकिन ने इस उखड़े हुए इंसान में क्या देख लिया?"

आरती ने थोड़ा शर्मा ये हुए अपनी साड़ी का पल्लू उँगलियों में लपेटा.

59b9fb68-3e3e-404d-944e-8f12fb0a8794.jpg


उसके दिमाग में अचानक नवाज़ का वह वाशरूम वाला शिद्दत भरा रोमांस और उसकी मरदाना गर्मी घूम गयी, जिससे उसके जिस्म में एक सिहरन दौड़ गयी.

अपने जज़्बात को छुपाते हुए आरती बोली,

"बस आप... इनका अंदाज़ थोड़ा अलग है. और मुश्किल वक़्त में इन्होने मेरा बहुत साथ दिया है."

नुसरत ने आरती की आँखों में देखा और संजीदगी से बोली,

"सही कह रही हो. यह भले hi दुनिया के लिए गुंडा हो, पर जिससे मोहब्बत करता है उसके लिए जान दे देता है. बस थोड़ा ठरकी है, ध्यान रखना... कहीं अकेले में तुम्हे परेशां न करे."

आरती का चेहरा यह सुनकर बिलकुल लाल टमाटर हो गया.

a6e50d61-fc04-4e33-b758-dfdb16e5232c.jpg


उसने मैं hi मैं सोचा,

'आप आपको क्या पता की यह हर वक़्त मुझे परेशां hi करते रहते हैं...!'

नुसरत ने आगे कहा,

"वैसे, कल तुम दोनों खेत जा रहे हो न? नवाज़ बोल रहा था की वहां बहुत काम है. संभल कर जाना, सुनसान जगह है... और यह तोह हमेशा मौका ढूंढ़ता रहता है."

आरती ने सिर्फ "जी आप" कह कर सर झुका लिया.

उसका दिल ज़ोरों से धड़कने लगा क्यूंकि उसे अच्छी तरह पता था की खेत में सिर्फ काम नहीं, बल्कि उनकी सुहागरात होने वाली है.

तभी नवाज़ किचन से ठंडा शरबत लेकर आया और दोनों को इतने करीब देख कर कुटिलता (शातिराना अंदाज़) से मुस्कुरा दिया.

"क्या बातें हो रही हैं nanand-bhabhi में? मेरी बुराई तोह नहीं कर रही न आप?"

नवाज़ ने शरबत का गिलास मेज़ पर रखते वक़्त jaan-bujhkar सबकी नज़रों से बचा कर आरती की नरम उँगलियों को छुआ. उसके अचानक इस टच से आरती एक दम से सिहर उठी और उसने डर के मारे नुसरत की तरफ देखा की कहीं उसने देख न लिया हो.

शरबत का गिलास उठाते हुए नुसरत ने पहले आरती को देखा और फिर नवाज़ की तरफ घुरा.

उसके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान गहरी हो गयी.

नुसरत बोली,

नहीं बाबा ..भाई कोई बुराई नहीं कर रही है न मई ..

फिर आरती की और देखते हुई नुसरत कहते है

वैसे भाभी, मैं तब से यही सोच रही हूँ... की तुम जैसी इतनी खूबसूरत और समझदार लेडी मेरे इस अजीब से भाई से कैसे पैट गयी? इसने ज़रूर तुम पर कोई jadu-tona किया है!"

आरती ने शरबत का घुट लेते हुए अपनी हंसी छुपाने की कोशिश की, पर वो छुपा नहीं पायी और हँसाने लगी ..

उसकी गाल फिर से गुलाबी हो गयी. ..

40ccb797-e5b3-4f0e-b61b-111629aaff1a.jpg


उसके गाल फिर से गुलाबी हो गए . ..उसने फिर तिरछी नज़र से नवाज़ को देखा.

Rabiya-Khatoon-rabiyaakhatoon-Rabiya-Khatoon-sareeaesthetics-Saree-sareegram-sareelove-sare.jpg


नवाज़ ने फ़ौरन अपना सीना तान लिया और बड़े नखरे से बोलै,

"अरे आप, आप अपने भाई के जलवे को नहीं जानती! शराफत और अंदाज़ दोनों koot-koot कर भरे हैं मुझमें. क्यों मेमसाब, सही कहा न?"

आरती ने गिलास मेज़ पर रखा और थोड़े नखरे से बोली,

Rabiya-Khatoon-rabiyaakhatoon-Rabiya-Khatoon-sareeaesthetics-Saree-sareegram-sareelove-sare.jpg


"जलवे तोह आपके वाशरूम में hi दिख गए थे... मेरा मतलब, आपकी म्हणत तोह सब देख hi रहे हैं."

वाशरूम का नाम आते hi आरती का दिल खुद थोड़ा धारक गया, पर उसने बात को घूमने के लिए कहा, "

वैसे नुसरत आप , आप का भाई पटाने में नहीं, बल्कि ज़बरदस्ती हक़ जताने में माहिर है."

नुसरत ज़ोर से हंस पड़ी और नवाज़ को चिढ़ाते हुए बोली,

"देखा! मुझे पता था यह कोई न कोई गुंडागर्दी hi करके तुम्हें फसा के लाया होगा. नवाज़, ध्यान रखना, अगर तुमने हमारी भाभी को थोड़ा भी परेशां किया, तोह मैं अम्मी से कहकर तुम्हारी खैर नहीं छोडूंगी."

नवाज़ ने दोनों के बीच खुद को फंसा देख कर दोनों हाथ खड़े कर दिए,

"अच्छा बाबा माफ़ी! अब तुम दोनों nanand-bhabhi मिलकर मुझे hi टारगेट करो. मैं तोह चला खेत की तयारी देखने... क्यूंकि असली हक़ तोह कल hi जाताना है!"

नवाज़ के इस खुले आम मज़ाक़ और 'कल' के ज़िक्र ने आरती को अंदर तक झकझोर दिया. उसने डर के मारे एक बार फिर नुसरत की तरफ देखा, पर नुसरत तोह बस उन दोनों के इस मज़ाक़िया टकराव का मज़ा ले रही थी.

तभी नुसरत ने मुस्कुरा कर पूछा,

"अरे भाभी... यह वाशरूम का क्या मामला है? बात यहाँ तक पहुँच गयी और मुझे पता भी नहीं?"

नुसरत के मुँह से 'वाशरूम' शब्द निकलते hi कमरे में एक पल के लिए सन्नाटा छ gaya.Nusrat का यह सवाल सुनते hi आरती के होठों से हंसी गायब हो गयी और उसके होश उड़ गए. उसे अचानक याद आया की उसने ध्यान नहीं दिया और जल्दबाज़ी में क्या बोल दिया था . उसका दिल डर के मारे zor-zor से धड़कने लगा. उसने सोचा, 'हे भगवन! अगर आप को पता चल गया की तोह मैं कहीं मुँह दिखने के काबिल नहीं रहूंगी!'

आरती ने हड़बड़ाते हुए नवाज़ की तरफ देखा,

2d7f73c8-c6b0-4f3d-871c-9bdeb46ab2b1.jpg


जैसे वह मदद मांग रही हो. उसका चेहरा डर और शर्म से एक डैम लाल हो चूका था.

नुसरत ने शरबत का गिलास मेज़ पर रखा और उसकी आँखें चौंक कर बड़ी हो गयी. उसने बड़े hi शरारत भरी पर तेज़ नज़र से आरती की तरफ देखा...

ारे बताओ bhabhi..kya मामला है..

नवाज़ भी एक पल के लिए थोड़ा झेंप गया, पर वह तोह आदत से मजबूर था. उसने जल्दी से बात को सँभालने के लिए एक झूटी कहानी बनायीं और हंसा,

"अरे आप, आप भी क्या सोच रही हैं! वह... वह एक्चुअली कल इनके घर का वाशरूम का नल ख़राब हो गया था, तोह मैं एक नौकर होने के नाते उसे ठीक करने गया है. बस वहां थोड़ी bhesh-baazi हो गयी थी, यह वही बोल रही हैं."

नुसरत ने नवाज़ को घूरा,

"नल ठीक करने गए थे या कुछ और ठीक करने गए थे? मुझे तोह तुम दोनों की दाल में कुछ कला लग रहा है."

आरती ने जल्दी से बात को पकड़ा और बालों को कान के पीछे करते हुए झूट बोलती हुई बोली,

cbf30a09-2aea-442e-9f89-02fc81bca095.jpg


"हाँ आप... यह सच कह रहे हैं. वह थोड़ा पानी टपक रहा था न, तोह इन्होने hi ठीक किया. आप इस बदमाश की बातों पर ध्यान मत दीजिये."

नुसरत ने दोनों के चेहरे के उड़ते हुए रंग देख कर हंसा और कहा,

"चलो, मान लेती हूँ. पर ध्यान रखना, मेरे भाई के इरादे वैसे भी ठीक नहीं लगते मुझे!"
 
नुसरत ने दोनों के चेहरे के उड़ते हुए रंग देख कर हंसा और कहा,

"चलो, मान लेती हूँ. पर ध्यान रखना, मेरे भाई के इरादे वैसे भी ठीक नहीं लगते मुझे!"

नवाज़ ने बेसब्री से हंसा और सीना तान कर बोलै,

"अरे, मेरे इरादे हमेशा नेक hi हैं आप! अच्छा, मैं चलता हूँ अब."

नुसरत ने फ़ौरन उसे टोकते हुए कहा,

अरे, कहाँ चले?

दोस्तों के पास

दोस्तों को रहने दो . भाभी पहली बार घर आयी हैं, तोह तुम उन्हें अपना कमरा नहीं दिखाओगे क्या?

आरती यह सुनकर फिर से शर्मा गयी.

2e816cb8-34fa-4f13-a668-85ea89a0f988.jpg


नुसरत ने एक शरारत भरी मुस्कान के साथ आगे कहा,

"आख़िरकार वह कमरा आगे चल कर उनका hi तोह है, तोह उसे देखना और theek-thak करना उनकी hi तोह ज़िम्मेवारी है."

आरती ने शरमाते हुए बेहद धीरे से कहा,

"जी..."

5895d9a7-b65b-4640-acfb-54d188a91129.jpg


नवाज़ ने मौका देखा और आरती का हाथ पकड़ लिया ..आरती का दिल किसी nayi-naveli दुल्हन की तरह dhak-dhak कर रहा tha.wo नवाज़ को देखने लगी..

80f9790c-94ec-44d9-9d02-4eed66aedb82.jpg


तब नवाज़ कहता है

चलो आपने कमरे मई

ऐसा कह कर उसे सीढ़ियों से ऊपर अपने कमरे की तरफ खींचने लगा. नुसरत आप नीचे से उन्हें जाते हुए देख कर मुस्कुरा रही थी, उनकी नज़रों में वही शरारत थी जो एक नानन्द की अपनी भाभी के लिए होती है.

कमरे में दाखिल होते hi नवाज़ ने दरवाज़ा पीछे से भिड़ाया और आरती को कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा.

Anandhi.jpg


उनके बीच का फैसला फिर से ख़तम हो गया. उसने कमरे के पुराने बीएड और saaze-saamaan की तरफ इशारा करते हुए कुटिलता से फुसफुसाया,

"मैं तोह तेरे साथ सुहागरात यही करना चाहता था रानी... पर क्या करूँ, तूने खेत का प्रोग्राम बनाया है."

आरती ने नवाज़ के सीने पर अपना सर टिकाया और उसके शर्ट के बटन से खेलते हुए नरम आवाज़ में कहा,

"कोई नहीं मेरे राजा... खेत वाला मिलान यादगार होगा. फिर बाद में यहाँ आके भी करेंगे न."

नवाज़ ने उसकी थोड़ी ऊपर उठायी और उसकी आँखों में देखा जो उत्तेजना से चमक रही थी.

"पक्का न? फिर यहाँ जब हम होंगे, तोह आप का डर तोह नहीं लगेगा?"

आरती शर्मा गयी और "जी" कह कर उसके सीने में अपना चेहरा छुपा लिया. नवाज़ ने उसे बीएड की तरफ थोड़ा धकेला और उसके ऊपर झुकते हुए बोलै,

"तोह फिर आज थोड़ी 'प्रैक्टिस' यही हो जाये? कल खेत निकलने से पहले?"

आरती ने नवाज़ के लबों पर अपनी नरम ऊँगली रख दी और बोली,

"नहीं... अभी नीचे आप इंतज़ार कर रही हैं. सबर रखिये, कल खेत में मैं पूरी तरह आपकी हूँ."

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और उसके नरम होंटो पर एक गहरा किश करते हुए बोलै,

7b0b1122-cd27-4ebc-ab50-83c380d381ad.jpg


"ठीक है रानी... कल की रात हमारी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी रात होगी."

जी

कह के पलट के वो दूर ओपन करने जा रही thi..aur दरवाज़ा जैसे hi ओपन किया की नवाज़ ने उसे पीछे से पकड़ लिया ..

Rx100.jpg


नवाज़ ने जैसे hi देखा की आरती उसके सीने से चिपकी हुई है और उसकी सांसें भरी हो रही हैं, उसने दरवाज़ा पीछे से पूरी तरह लॉक कर दिया.

कमरे में एक अजीब सी ख़ामोशी थी, जो सिर्फ उनकी धड़कनों से टूट रही थी.

cd0620eae755e4de04669c00468cafb4-ezgif-com-video-to-gif-converter.gif


नवाज़ ने आरती को कमर से पकड़ कर झटके से बीएड की तरफ धकेला और खुद उसके ऊपर झुक गया. आरती की साड़ी के पल्लू के बीच से उसकी गोरी गर्दन चमक रही थी.

"नवाज़ जी... नीचे आप हैं... प्लीज,"

आरती ने सिसकते हुए कहा, पर उसके हाथ नवाज़ के मज़बूत कन्धों पर जैम गए थे.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और उसके कान के पास फुसफुसाया,

"आप को पता है की उनका भाई अपनी 'बेगम' को कमरा दिखा रहा है... उन्हें कोई जल्दी नहीं है."

नवाज़ ने अपने गरम लैब आरती की गर्दन पर रख दिए और वहां एक गहरा किश किया.

आरती ने दर्द और मज़े के मरे अपनी आँखें मूँद ली और उसके बालों को कसके पकड़ लिया.

नवाज़ का एक हाथ अब आरती की साड़ी के नीचे से उसकी नरम और गोरी जांघ पर सरकने लगा, बिलकुल वही जगह जहाँ उसने वाशरूम में उसे तड़पाया था.

"आआह्ह्ह... नवाज़... कल खेत में... सब करने दूँगी... अभी इतना मत तड़पाओ,"

आरती ने भांपते हुए अपना सर तकिये में छुपा लिया.

नवाज़ ने उसके लबों को अपने लबों में भर लिया और एक जुनूनी किश शुरू किया. उसका हाथ अब आरती की जांघ से ऊपर उठकर उसकी नाज़ुक जगह के करीब पहुँच गया था. वो वहां साड़ी के ऊपर से hi थोड़ा दबाव बनाने लगा, जिस से आरती का पूरा बदन कमान की तरह अकड़ गया.

"ये प्रैक्टिस है रानी... कल खेत में तोह मैं तुझे सांस लेने का मौका भी नहीं दूंगा,"

नवाज़ ने किश के बीच में hi भांपते हुए कहा.

आरती ने उसके जूनून को महसूस किया और उसके सीने पर अपना हाथ रख कर उसे और अपने करीब खिंच लिया. दोनों उस पुराने बीएड पर एक दुसरे की गर्मी में खोये हुए थे, कल की सुहागरात का इंतज़ार उन्हें और भी बेचैन कर रहा था.

नवाज़ के कमरे का माहौल अभी गरम hi था की दरवाज़े पर दस्तक हुई .. दूर ठीक से बंद नहीं हुआ था .. इसलिए आप ने पुश किया तो खुल गया ..

और नुसरत आप खुद चाय की ट्रे लेकर अंदर दाखिल हुईं. आरती हड़बड़ाकर नवाज़ से दूर हटी और अपनी साड़ी और बाल सँभालने लगी. उसका चेहरा शर्म से लाल टमाटर हो रहा था.

आरती ने हिचकिचाते हुए कहा,

"आप... आप क्यों लेकर आयीं? मैं वहीँ निचे बना लेती न."

नवाज़ ने मौका देखा और आरती को थोड़ा और छेड़ने के लिए, उसकी कमर पर थोड़ा दबाव डालते हुए और उसकी आँखों में आँखें दाल कर बड़े रॉब से बोलै:

"बनाती न?"

नवाज़ ने थोड़ा ज़ोर देकर पूछा.

आरती ने दबी आवाज़ में कहा,

"जी..."

"फिर बना न! यहाँ क्यों कड़ी है? जाओ किचन में और मेरे लिए एक कड़क चाय और बना कर लाओ,"

नवाज़ ने बड़े 'शौहर' वाले अंदाज़ में हुकुम चलाया.

नवाज़ की ये मरदाना अकड़ देख कर आरती एक पल के लिए ठिठक गयी, पर उसकी आँखों में नवाज़ के लिए चाहत और बढ़ गयी. नुसरत आप ये सब देख कर मुस्कुरा रही थी.

"अरे नवाज़, इतना रोअब मत झाड़ बेचारी पर! पहली बार घर आयी है,"

आप ने हस्ते हुए कहा.

आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली और "अभी आयी आप" कह कर किचन की तरफ भाग गयी.

नवाज़ वही खड़ा कुटिलता से मुस्कुरा रहा था. उसने आप की तरफ देख कर एक आँख मारी, जैसे कह रहा हो की उसने अपनी 'मालकिन बेगम' को ढंग से काबू कर लिया है.

नवाज़ ने मन hi मन सोचा, 'आज तोह सिर्फ किचन में चाय बनवा रहा हूँ रानी... कल खेत में तुझसे वो सब करवाऊंगा जो तूने ख्वाबों में भी नहीं सोचा होगा.'

आरती किचन में पहुंची तोह उसके हाथ अभी भी थोड़ा काँप रहे थे. नवाज़ की उस 'मरदाना अकड़' ने उसके अंदर एक अजीब सी हलचल मचा दी थी. नुसरत आप भी उसके peeche-peeche किचन में आ गयी और आरती को चाय की पट्टी ढूँढ़ते देख मुस्कुरा दी.

आरती: (शरमाते हुए)

"आप, नवाज़ जी हमेशा ऐसे hi रोअब जमाते हैं क्या? देखा कैसे हुकुम चला रहे थे मुझ पर."

नुसरत: (हँसते हुए)

"अरे भाभी , वो तोह उसका बचपन का अंदाज़ है. जो उसे अपना लगता है, उसपर वो ऐसे hi हक़ जताता है. बचपन में भी जब उसे कोई खिलौना पसंद आता था, तोह वो किसी को उसे छूने नहीं देता था."

आरती ने अदरक koot-te हुए पूछा,

"आप, ये बचपन में कैसे थे? क्या तब भी इतने hi गुंडे और ज़िद्दी थे?"

नुसरत:

"गुंडा तोह नहीं, पर ढीट बहुत था. एक बार पड़ोस के लड़के ने इसकी साइकिल छू ली थी, तोह इसने पुरे मोहल्ले में हंगामा कर दिया था. पर दिल का साफ़ है. अम्मी और अब्बू का बहुत ख्याल रखता है. बस ये थोड़ा 'रंगीला' हो गया है आज कल, पर जबसे तुम इसकी ज़िन्दगी में आयी हो, इसकी आँखों में एक अलग hi सुकून दीखता है."

आरती ने मुस्कुराकर चाय कप में छन्नी. उसका दिल नवाज़ के लिए और भी पिघल गया. उसे एहसास हुआ की नवाज़ भले hi बहार से सख्त दीखता हो, पर वो अंदर से रिश्तों की कदर करना जानता है.

नुसरत:

"वैसे आरती भाभी एक बात बोलूं? नवाज़ तुमसे बहुत मोहब्बत करता है, पर वो बोलेगा नहीं. बस कल खेत जा रहे हो तोह उसका ध्यान रखना... वो जज़्बात में थोड़ा बहक जाता है."

आरती का चेहरा फिर से लाल हो गया. उसे कल की सुहागरात याद आ गयी. उसने धीरे से कहा,

"जी आप... मैं हूँ न उन्हें सँभालने के लिए."

तभी नवाज़ किचन के दरवाज़े पर आकर खड़ा हो गया और कुटिलता से बोलै,

"क्या बातें हो रही हैं मेरी? चाय बन गयी या सिर्फ मेरी बुराई चल रही है?"

नवाज़ ने जब आरती की आँखों में देखा, तोह उसे समझ आ गया की आप ने उसके दिल में नवाज़ के लिए और जगह बना दी है.
 
Back
Top