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जी आप... मैं हूँ न उन्हें सँभालने के लिए.
तभी नवाज़ किचन के दरवाज़े पर आकर खड़ा हो गया और कुटिलता से बोलै,
"क्या बातें हो रही हैं मेरी? चाय बन गयी या सिर्फ मेरी बुराई चल रही है?"
नवाज़ के ऐसे कहते hi आरती वही गैस स्टोव के पास वैसे hi कड़ी अपनी तेज़ चलती साँसों को संभालती रही. अपने चेहरे पर आयी लाली और बिखरे बालों को ठीक करके जब उसने आपने गर्दन , तोह उसकी आँखें सीधे नवाज़ से जा टकराई
नवाज़ ने जब आरती की आँखों में देखा, तोह उसे साफ़ समझ आ गया की आप ने उसके दिल में नवाज़ के लिए और भी गहरी जगह बना दी है.
आरती एक नए एहसास में डूबी हुई थी. उसने अपनी सरसराती हुई copper-red रंग के कॉटन की साड़ी का पल्लू नए अंदाज़ से संभाला था, जिसमें से उसकी पतली कमर साफ़ झलक रही थी. उसके बाल बड़े hi सलीके से पीठ पर बंधे हुए थे, पर उनकी कुछ लट्ठे अब भी उसके चेहरे और कान के पास सरसरा रही थीं.
उसने खूबसूरत झुमके पहने हुए थे जो उसकी गर्दन के पास हिल रहे थे, और हाथों में पहनी कांच की पतली चूड़ियां नवाज़ के उस नरम टच की गवाही दे रही थी.
आरती ने गैस स्टोव के पास खड़े होकर अपना एक हाथ धीरे से अपने बालों पर फेरा, बिलकुल वैसे hi जैसे तस्वीर में दिख रहा है. उसने मुद कर नवाज़ की तरफ dekha—uski आँखों में अब डर नहीं था, बल्कि एक शर्मीली इजाज़त और गहरी मोहब्बत थी. उसका यह नखरीला और शर्मीला अंदाज़ देख कर नवाज़ का दिल एक बार फिर बेकाबू होने लगा.
नवाज़ ने शरारत से मुस्कुरा कर आँखों hi आँखों में उसे इस खूबसूरती की तारीफ की, जिसे देख कर आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका लीन और मुस्कुराने लगी.
आप उन दोनों के बीच के इस साइलेंट रोमांस को देख कर अंदर hi अंदर मुस्कुरा रही थीं.
आरती ने अपना एक हाथ अपने होठों के पास रखा, जैसे वह अपनी हंसी छुपाने की कोशिश कर रही हो. आरती ने दीवार से थोड़ा टिकते हुए, अपनी आँखों में एक शैतानी और शर्मीली चमक के साथ नवाज़ को जवाब दिया:
"आपकी बुराई करने के लिए वक़्त चाहिए नवाज़ जी, और हमारे पास अभी सिर्फ चाय पीने का वक़्त है. वैसे भी, आप तोह आपकी तारीफ कर रही थी, पर लगता है आपका ज़मीर hi थोड़ा सा भटका हुआ है."
नुसरत आप ने जब आरती का यह धरतेदार और मज़ाक़िया जवाब सुना, तोह वह खिलखिला कर हंस पड़ी. उन्होंने नवाज़ को घूरा और आरती का साथ देते हुए कहा:
"देखा नवाज़! मैंने कहा न, हमारी भाभी जितनी खूबसूरत हैं, उतनी hi होशियार भी हैं. अब चुपचाप वहां खड़े मत रहो, चाय बन गयी है तोह अंदर आओ और चाय पीओ. और ध्यान रखना, अब अगर तुमने भाभी को तंग किया, तोह तुम्हारी खैर नहीं!"
नवाज़ ने आरती के इस नए अंदाज़ और आप की दंति को देखा, तोह वह बस मुस्कुरा कर रह गया. उसका दिल आरती के इस शर्मीले और नखरीले रूप को देख कर एक बार फिर पूरी तरह उसके निशाने पर आ चूका था.
नुसरत आप की बात सुनकर नवाज़ मुस्कुरा कर किचन के अंदर आया. वह आरती के बिलकुल पास आकर खड़ा हुआ, मेज़ से चाय का कप उठाया और बड़े अंदाज़ से चाय की एक चुस्की ली. पर चुस्की लेते hi उसने अपना मुँह गन्दा सा बना लिया, जैसे चाय बोहोत ख़राब बानी हो.
"उफ़... इतनी गन्दी चाय!"
नवाज़ ने कप वापस रखते हुए शिकायत की.
आरती का मुँह उतर गया.
उसने बुरा सा मुँह बनाया और परेशानी में बाजु मई कड़ी नुसरत आप की तरफ देख कर पूछा,
"इतनी गन्दी है क्या चाय आप?"
नुसरत ने झट र से hi जवाब दिया,
"नहीं तोह भाभी! चाय तोह बोहोत अच्छी बानी है."
नवाज़ ने अपनी शरारत बरक़रार रखते हुए कहा,
"अरे, मैं क्या झूट बोल रहा हूँ क्या?"
तभी आप थोड़ा आगे आते हुई नवाज़ को टोकते हुए बोलीं,
"नहीं तोह क्या... मेरी प्यारी भाभी को तुम खामखा परेशां कर रहे हो!"
नवाज़ ने अभी भी हंसी छुपाते हुए कहा,
"नहीं आप, सच में अच्छी नहीं है चाय."
आरती को अब यकीन नहीं हो रहा था. उसने वहां मेज़ से एक दूसरा कप उठाया, उसमें थोड़ी चाय डाली और एक चुस्की लेकर chakhi.aur नवाज़ की और देखते हुई बड़ी नखरे से उसने कहा,
"अच्छी तोह है... इसमें क्या खराबी है?"
नवाज़ ने फिर अपना सर हिलाया,
"नहीं, बिलकुल अच्छी नहीं है."
अब आरती ने आओ देखा न ताव, गुस्से और हड़बड़ाहट में सीधे नवाज़ के हाथ से उसका कप छीन लिया. उसने बिना soche-samjhe नवाज़ के hi कप से चाय की एक गहरी चुस्की ली ताकि पता कर सके की उसके कप में क्या खामी है.
आरती को नवाज़ के hi कप से झूटी चाय पीते देख कर नुसरत आप के चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल आ गयी. वह दोनों को देखते हुए छेड़ने वाले अंदाज़ में बोलीं,
"हाँ हाँ, peeo-peeo... एक दुसरे का झूठा पीने से तोह प्यार और बढ़ता है!"
आप की बात सुनते hi आरती को एहसास हुआ की उसने जल्दबाज़ी में क्या कर दिया है. उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया.
उसने बात को सँभालने की कोशिश करते हुए हड़बड़ा कर कहा,
"अरे... मैं तोह बस देखने के लिए पि रही थी आप... की इनके कप में चाय कैसी है."
नुसरत ने हँसते हुए उन्हें चिढ़ाया,
"हाँ हाँ, ठीक है, मैं सब समझती हूँ!"
आरती ने फिर से नवाज़ की तरफ देखा और थोड़े नखरे से बोली,
"चाय बिलकुल अच्छी तोह है!"
नवाज़ उन दोनों की इस बातचीत पर अंदर hi अंदर बोहोत खुश हो रहा था, क्यूंकि उसका मक़सद आरती को छेड़ना था, जिसमें वह पूरी तरह कामयाब हो चूका था.
तभी नवाज़ किचन के दरवाज़े पर आकर खड़ा हो गया और कुटिलता से बोलै,
"क्या बातें हो रही हैं मेरी? चाय बन गयी या सिर्फ मेरी बुराई चल रही है?"
नवाज़ के ऐसे कहते hi आरती वही गैस स्टोव के पास वैसे hi कड़ी अपनी तेज़ चलती साँसों को संभालती रही. अपने चेहरे पर आयी लाली और बिखरे बालों को ठीक करके जब उसने आपने गर्दन , तोह उसकी आँखें सीधे नवाज़ से जा टकराई
नवाज़ ने जब आरती की आँखों में देखा, तोह उसे साफ़ समझ आ गया की आप ने उसके दिल में नवाज़ के लिए और भी गहरी जगह बना दी है.
आरती एक नए एहसास में डूबी हुई थी. उसने अपनी सरसराती हुई copper-red रंग के कॉटन की साड़ी का पल्लू नए अंदाज़ से संभाला था, जिसमें से उसकी पतली कमर साफ़ झलक रही थी. उसके बाल बड़े hi सलीके से पीठ पर बंधे हुए थे, पर उनकी कुछ लट्ठे अब भी उसके चेहरे और कान के पास सरसरा रही थीं.
उसने खूबसूरत झुमके पहने हुए थे जो उसकी गर्दन के पास हिल रहे थे, और हाथों में पहनी कांच की पतली चूड़ियां नवाज़ के उस नरम टच की गवाही दे रही थी.
आरती ने गैस स्टोव के पास खड़े होकर अपना एक हाथ धीरे से अपने बालों पर फेरा, बिलकुल वैसे hi जैसे तस्वीर में दिख रहा है. उसने मुद कर नवाज़ की तरफ dekha—uski आँखों में अब डर नहीं था, बल्कि एक शर्मीली इजाज़त और गहरी मोहब्बत थी. उसका यह नखरीला और शर्मीला अंदाज़ देख कर नवाज़ का दिल एक बार फिर बेकाबू होने लगा.
नवाज़ ने शरारत से मुस्कुरा कर आँखों hi आँखों में उसे इस खूबसूरती की तारीफ की, जिसे देख कर आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका लीन और मुस्कुराने लगी.
आप उन दोनों के बीच के इस साइलेंट रोमांस को देख कर अंदर hi अंदर मुस्कुरा रही थीं.
आरती ने अपना एक हाथ अपने होठों के पास रखा, जैसे वह अपनी हंसी छुपाने की कोशिश कर रही हो. आरती ने दीवार से थोड़ा टिकते हुए, अपनी आँखों में एक शैतानी और शर्मीली चमक के साथ नवाज़ को जवाब दिया:
"आपकी बुराई करने के लिए वक़्त चाहिए नवाज़ जी, और हमारे पास अभी सिर्फ चाय पीने का वक़्त है. वैसे भी, आप तोह आपकी तारीफ कर रही थी, पर लगता है आपका ज़मीर hi थोड़ा सा भटका हुआ है."
नुसरत आप ने जब आरती का यह धरतेदार और मज़ाक़िया जवाब सुना, तोह वह खिलखिला कर हंस पड़ी. उन्होंने नवाज़ को घूरा और आरती का साथ देते हुए कहा:
"देखा नवाज़! मैंने कहा न, हमारी भाभी जितनी खूबसूरत हैं, उतनी hi होशियार भी हैं. अब चुपचाप वहां खड़े मत रहो, चाय बन गयी है तोह अंदर आओ और चाय पीओ. और ध्यान रखना, अब अगर तुमने भाभी को तंग किया, तोह तुम्हारी खैर नहीं!"
नवाज़ ने आरती के इस नए अंदाज़ और आप की दंति को देखा, तोह वह बस मुस्कुरा कर रह गया. उसका दिल आरती के इस शर्मीले और नखरीले रूप को देख कर एक बार फिर पूरी तरह उसके निशाने पर आ चूका था.
नुसरत आप की बात सुनकर नवाज़ मुस्कुरा कर किचन के अंदर आया. वह आरती के बिलकुल पास आकर खड़ा हुआ, मेज़ से चाय का कप उठाया और बड़े अंदाज़ से चाय की एक चुस्की ली. पर चुस्की लेते hi उसने अपना मुँह गन्दा सा बना लिया, जैसे चाय बोहोत ख़राब बानी हो.
"उफ़... इतनी गन्दी चाय!"
नवाज़ ने कप वापस रखते हुए शिकायत की.
आरती का मुँह उतर गया.
उसने बुरा सा मुँह बनाया और परेशानी में बाजु मई कड़ी नुसरत आप की तरफ देख कर पूछा,
"इतनी गन्दी है क्या चाय आप?"
नुसरत ने झट र से hi जवाब दिया,
"नहीं तोह भाभी! चाय तोह बोहोत अच्छी बानी है."
नवाज़ ने अपनी शरारत बरक़रार रखते हुए कहा,
"अरे, मैं क्या झूट बोल रहा हूँ क्या?"
तभी आप थोड़ा आगे आते हुई नवाज़ को टोकते हुए बोलीं,
"नहीं तोह क्या... मेरी प्यारी भाभी को तुम खामखा परेशां कर रहे हो!"
नवाज़ ने अभी भी हंसी छुपाते हुए कहा,
"नहीं आप, सच में अच्छी नहीं है चाय."
आरती को अब यकीन नहीं हो रहा था. उसने वहां मेज़ से एक दूसरा कप उठाया, उसमें थोड़ी चाय डाली और एक चुस्की लेकर chakhi.aur नवाज़ की और देखते हुई बड़ी नखरे से उसने कहा,
"अच्छी तोह है... इसमें क्या खराबी है?"
नवाज़ ने फिर अपना सर हिलाया,
"नहीं, बिलकुल अच्छी नहीं है."
अब आरती ने आओ देखा न ताव, गुस्से और हड़बड़ाहट में सीधे नवाज़ के हाथ से उसका कप छीन लिया. उसने बिना soche-samjhe नवाज़ के hi कप से चाय की एक गहरी चुस्की ली ताकि पता कर सके की उसके कप में क्या खामी है.
आरती को नवाज़ के hi कप से झूटी चाय पीते देख कर नुसरत आप के चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल आ गयी. वह दोनों को देखते हुए छेड़ने वाले अंदाज़ में बोलीं,
"हाँ हाँ, peeo-peeo... एक दुसरे का झूठा पीने से तोह प्यार और बढ़ता है!"
आप की बात सुनते hi आरती को एहसास हुआ की उसने जल्दबाज़ी में क्या कर दिया है. उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया.
उसने बात को सँभालने की कोशिश करते हुए हड़बड़ा कर कहा,
"अरे... मैं तोह बस देखने के लिए पि रही थी आप... की इनके कप में चाय कैसी है."
नुसरत ने हँसते हुए उन्हें चिढ़ाया,
"हाँ हाँ, ठीक है, मैं सब समझती हूँ!"
आरती ने फिर से नवाज़ की तरफ देखा और थोड़े नखरे से बोली,
"चाय बिलकुल अच्छी तोह है!"
नवाज़ उन दोनों की इस बातचीत पर अंदर hi अंदर बोहोत खुश हो रहा था, क्यूंकि उसका मक़सद आरती को छेड़ना था, जिसमें वह पूरी तरह कामयाब हो चूका था.