रौशनी की ानकेहिं खुली … वह एकदम से उठ गयी और इधर उधर देखने लगी ..
ेओ खिड़की से सुबह की सनलाइट आ रही थी उसके चेहरे पर चमकने लगी.
फिर उसे एक दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनाई दी. वह चौंकी और सोची की वह बुद्धा किशोर वापस आया होगा .. सूरज की रौशनी में वह कीच देख नहज पाएगी लेकिन जब देख सकीय तोह वह पायी की दरवाज़े से आता हुआ शख्स रमेश जी hi थे ..
और उसे सब याद आया कैसे रमेश ने उसकी बलात्कार होने से बचा लिया था . रमेश पास आते hi रौशनी उठी और रमेश को झट से गले लगा लिया ..
“शुक्रिया रमेश जी आपने मेरी लाज बचाई.”
“अरे रौशनी यह मेरा फ़र्ज़ था , तुमने वह लोकेशन मैसेज कर अच्छी बात करि, उस के मदत से में सही वक़्त पर पहुंच पाया.”
“हाँ शुक्रिया रमेश जी .. और रौशनी रमेश के साइन से लिपट गयी ..”
रमेश ने भी उसे अपने बाँहों में लपेट लिया अपने हाथों को उसकी मुलायम पीठ पर फेरने लगा .. रौशनी ने अपना सर उसकी छाती अपर रख खुद को उनकी बाँहों में सुकून पायी.
कुछ मं ऐसे hi लिपटे रहने बाद दोनों एक दूसरे की आँखों में आक्न्हें दाल फॉर दोनों के होठं .. रौशनी की गुलाबी होठं और रमेश के काळा होठं काफी करीब थे .. और कुछ सेकण्ड्स में दोनों के होठं एक दूसरे से मिले और दोनों गहरी चुम्बन में लग गए.
रौशनी ने अपने बाँहों को रमेश के इर्द गिर्द रख जोरों से उन्हें चूमने लगी…
कुछ 5 मं की चुंबन की बाद रौशनी बोली
“माफ़ करिये में कल आप से ग़ुस्से में कुछ बोली दी ..”
“अरे रौशनी तुम्हारा ग़ुस्सा जाइएज था . मुझे यकीन था की नहीं होगी राइड लेकिन अब पता हैं कुछ व्ही हो सकता हैं तोह मैंने उस गार्ड को कुछ पैसे दिए बताने के लिए अगर राइड होगी तोह , ताकि हमें नुक्सान नहीं होगा. वैसे भी ऐसी जगहों में ऐसे रिस्क होते hi हैं रौशनी .”
“हाँ फिर से सॉरी कहती हूँ आपसे .. सही हैं आपकी बात भी.”
फिर दोनों एक दूसरे को चूमते है और रमेश बोलता हैं.”
रौशनी जी आपने मेरी उस दिन के प्रस्ताव के बारे में कुछ सोचोगे फिर से”
“हम्म ठीक हैं लेकिन मुझे थोड़ा वक़्त दीजिये .. बस कल तक बता दूंगी आपको.”
“Ok रौशनी जी , बस कल सुबह तक बताइये. चलो आपको आपके घर छोर देता हूँ.”
“शुक्रिया रमेश जी ..चलिए.”
रमेश , रौशनी को घर छोर देता हैं .
रौशनी बिस्तर पर लेते सोचती हैं की रात को सच में उसका बलात्कार्र होने hi वाला था .. रमेश जी ने बचा लिया , ज़िन्दगी भर उस एहसान को कैसे चुकौ..
कुछ टाइम आराम करने के बाद रौशनी फ्रेश हो जाती हैं क्यूंकि उसे ंगो जाना था.
तैयार होकर निचे रमेश अपने रिक्शा में उसके इंतेज़्ज़र कर रहा होता हैं और वह रिक्शा में बैठ ंगो चली जाती हैं.
दिन भर काम बाबत होने के रमेश उसे और कुछ सोचने की फुर्सत hi नहीं होती. फिर शाम को काम होने के बाद वह निकलने वाली थी . रमेश भी आज कुछ काम की वजह से शाम को नहीं आने वाले थे इसलिए रौशनी सोचती हैं की वह असलम से मिलने जाएगी..
वह कुछ नज़दीक पहुँचते hi ेलदुम से फिर से जोरों से बारिश आ रही थी.
वह भाग कर असलम के घर पहुँचती hi हैं की उसे अंदर से कुछ आवाज़ें आने लगती हैं.. उनके घर के वह एक खिड़की थी वह वहां रौशनी अंदर देखती हैं और जो डेक्टि हैं उसे देख चौंक जाती हैं.
वहां सलीम किसी महिले के साथ बिस्तर पर उसकी चुदाई कर रहे थे.
“उफ्फ्फ अह्ह्ह ममम सलीम मिया उफ्फ्फ ममम क्या चुदाई कर रहे हो ममममम”
“अरे जानेमन तेरी छूट hi इतनी मस्त हैं , मेरी बड़े लोडे से देख कैसे तेरी हालत ख़राब का रहा हूँ उफ्फ्फ एले मम ले मेरी लोडे को तेरे इस बुर में”
“अह्ह्ह क्या बातें करते हो सलीम मिया उफ्फफ्फ्फ़ , ऐसा दमदार लुंड को बस खुशनसीब लड़कियों और औरतों को मिलता हैं उफ्फ्फ ममममम पहले तोह में आपसे डर्टी थी लेकिन उफ्फ्फ्फ़ ममम अब बस हवस की नज़रों से देखती हूँ आपको मममम छोड़िये मेरी छूट अह्ह्ह्ह”
“अरे ये ले कुटिया , ये ले मेरी घोड़े जैसा लुंड तेरी इस बुर में अह्ह्ह ये ले उफ्फ्फ ममम”
“उफ़ मेरी चूड़ाकड यार मममम पता नहीं था आप जैसे बुड्ढे में भी ऐसी चुदाई की ताक़त होगी मम उफ्फ्फ दे दो आपका लुंड मेरी इस छूट में अह्ह्ह, आपके इस लोडे को सलाम उफ्फ्फ्फ़”
… रौशनी को कुछ समय तक उस महिला का चेहरा नहीं दिख पता , लेकिन आखिर में दिख जाता हैं चेहरा और वह चेहरा और किसी का नहीं बल्कि था मीनल का चेहरा..
रौशनी के मन में ग़ुस्सा आने लगा मन में कही तोह जैपुश्य भी .. की कमीना सलीम उस मीनल की चुदाई कर रहे हैं…
जोरों की चुदाई चल रही थी … मीनल निचे लेते उचका उचका कर सलीम के ढाकों का साथ दे रही थी और चुद रही थी जोरों से…
वहां वह कला सांड सलीम भी उसकी बेहरहमी से चुदाई कर रहे थे ..
रौशनी वहां से फ़ौरन चली जाती हैं और एक रिक्शा में बैठ अपने घर चली जाती हैं. मन में ग़ुस्सा था उसके .. उस इ रमेश को कॉल की और बोली की वोन तैयार थी उनके साथ आने लेकिन उन्हें सैक ंज सच सब बता होगा की क्यों उसे वह ले जाना चाहते हैं फर hi वह आएगी. रमेश हाँ कहता हैं , कल वह बताएगा सब कुछ डिटेल में.
रौशनी ठीक हैं कहकर फ़ोन रखती हैं. वह बिस्तर पर सोने लगती हैं लेकिन सलीम और मीनल की चुदाई उसके आँखों के सामने आती रहती हैं. उसका ग़ुस्सा सलीम के प्रति काफी बढ़ चूका था.. साला उस छिनाल मीनल की चुदाई कर रहा हैं, मुझे उन्होंने बताया तक नहीं की वह वापस आए हैं.. और उस मीनल की चुदाई कर रहा हैं मेरी नहीं .. कमीना कही का.
बस ऐसे hi सोच विचार मन में आटे आते रौशनी आखिर कर सो जाती हैं..
अगले दिन रमेश के रिक्शा में रौशनी , रमेश को पूछती हैं की उसे hi क्यों आना था उसके पुराने गाँव.
रमेश कहता हैं.
“रौशनी बात हैं की मेरी पुराने गाँव में मेरी पुश्तैनी ज़मीन हैं, छोटी से hi हैं . अब पुराने गाँव की तोह छोर अर्ज़ा बीत गया और में वहां बस 12 साल की उम्र कर hi था फिर भी वहां के मेरी मां हैं और उन्होंने अपनी वसीयत में मेरा नाम लिखा था.
लेकिन प्रॉब्लम हैं की वह चाहते हैं में अपनी बीवी को भी वहां लाऊँ . लेकिन मेरी बीवी रथ यात्रा पर गयी हुयी हैं और वह अगले महीने hi आएगी. में बीवी को ले नहीं आया तोह वह मेरी दूसरे परिवार वालों को ज़मीन देंगे और मेरा बहुत नुक्सान होगा क्यूंकि ज़मीन काफी अच्छी हैं.
“अच्छा आप सच कह रहे हो न ..”
“सच हैं सब , अब क्या बताऊ आपको .. आपको नहीं आना तोह मत आइये फाॅर्स तोह नहीं करूँगा .. बस बिनती थी आपसे ..”
“लेकिन रमेश जी उन्हें तोह आओ क बीवी पता होगी .. मुझे देखेंगे तोह जान जाएंगे में आपकी बीवी नहीं हूँ. फिर कैसे”
“रौशनी जी बात यह हैं की उन्होंने कभी मेरी बीवी को नहीं देखा हैं, उन्हें तोह शादी पर भी नहीं बुलाया था . इसीलिए आप मेरी बीवी हो उसमें उन्हें शक नहीं होगा.”
“लेकिन रमेश जी आपकी और मेरी उम्र में अंतर हैं, उन्हें कैसे समझाओगे आपसे काम उम्र वाली लेडीज से शादी करि हैं”
“रौशनी जी उन्हें कुछ नहीं पता , लेकिन हाँ रिस्क तोह हैं लेकिन मुझे यकीन हैं की उन्हें आप यकीन दिलाओगी की आप hi मेरी बीवी हैं. फाॅर्स नहीं करूँगा आपको , आपकी मर्ज़ी”
रौशनी सोचती हैं (रमेश जी ने उस रात उसकी इज़्ज़त बचाई थी,, अब मौका था उनके लिए कुछ करने का और उनका एहसान चुकाने का.
रौशनी हाँ में सर हिलाते हुए “हाँ आउंगी में आपकी पत्नी बनकर .. और रौशनी शर्माती हैं.. उसने असलम और सलीम , दो बुद्धों से un-officially निकाह करने के लिए राज़ी ह्यु थी और अब वह रमेश बुड्ढे की ुनोफ़्फ़िसल पत्नी बनने को भी राज़ी हुयी हैं उफ्फफ्फ्फ़. “
बस और क्या अगले दिन जाने की तैयारी बाकी थी .. और दो दिन तक उसे अब रमेश की बीवी बनना था .. उफ्फफ्फ्फ़.
रमेश ने रौशनी के लिए एक मंगल सूत्र लाया था पहनने और एक नयी साड़ी जो गाँव के लेडीज पहनते हैं. वह साड़ी ऐसी थी की उसे ब्लाउज एक साइज काम थी और उस वजह से उसकी चकहियाँ ऊपर की तरफ पुश हो गयी थी और अगर वह जरा सą भी झक्ति तोह उसकी चूचियों की करार न hi sırf दिक्ति , उसकी चूचियां यही बहार आने की चान्सेस थे …
उफ्फ्फ ऐसे सोच से रौशनी शर्म से लाल हो गयी.
फिर रौशनी ने उसके हाथो में एल्बो तक रेड एंड वाइट कॉम्बिनेशन की चुडिया पहनी ली , बिलकुल वैसे hi जैसे एक गाँव की शादी शुदा औरत पहनती है. उसने ऊपर से घूँघट ओढ़ ली ताकि बहार कोई उसे ऐसे न देख सके.
अपने माथे पर एक लाल कलर की सुन्दर बिंदी लगा वह तैयार हो गई… और निचे अपने सोसाइटी के कुछ दुरी पर रमेश का इंतज़ार करि.
रौशनी को देख रमेश मज़्ज़ाकिये अंदाज़ में कहते हुए “ओह रौशनी उफ़ मेरी बीवी इतनी सुन्दर और मस्त , मेरी तोह भाग्य खुल गए ..”
रौशनी , रमेश के मुँह से उसे उसकी बीवी बुलाते हुए सुन शर्म से लाल लाल हो जाती हैं. फिर दोनों बस स्टॉप एक रिक्शा से जाते हैं और उसकी गाँव के एक बस में चढ़ बैठ जाते हैं आखिरी सीट के एक कोने में जाकर.
बस में रौशनी रमेश से एकदम सात क बैठी थी और अपना सर उनके खंड पर राखी थी.
रमेश उसे प्यार से देख रहे the.use तो विश्वास hi नहीं हो रहा था की रौशनी उसकी पत्नी बनकर गाँव जा रही हैं.
बस में रौशनी खुद को रमेश के काफी करीब पाकर उसे उस दिन की बस की यात्रा मन में आयी जो उसने असलम और सलीम के साथ करि थी. उस बस में दोनों ने तोह उसे बीच में रख उसका पूरा रास निचोड़ा था और फिर वहां उस लॉज में ले जाकर दो रातों तक उसकी बुरी तरह से चुदाई कर उसका पूरा रास फिर से निचोड़ा था .. उसे अब तक उतनी तोह समझ आ चुकी थी की रमेश उसे अपने गाँव उसकी बीवी बनाकर ले जाकर उसका भी पूरा रास निचोड़ने वाला था दो दिन जो वह वहां रहने वाली थी. इसी कामुक सोच के साथ उसकी बुर में हलके से नमी भरने लगी और उसकी गर्मी बढ़ने लगी थी.
सुबह का वांट था उसकी नींद अभी यही पूरी नहीं हुयी थी इसीलिए बस में तोह कुछ न हुआ .. आखिर कर दोनों रमेश के गाँव पहुँच hi गए.
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हम लोग गाओं पहुँच गए. जैसे hi हम बस से उतरे, मैं देखि की कुछ लोग गारलैंड और बॉकेट्स के साथ जमे हुए हैं. रमेश मेरी कानों में बोले,
"रौशनी, यह मेरी मां की फॅमिली है, वह लोग हमारा स्वाग करने आये हैं." मेरी मां, उनका नाम है मुकेश. उनके पेअर चुकार उन्हें ग्रीट करना और उनके ब्लेस्सिंग्स लेना. मुकेश मां और उनके फॅमिली मेंबर्स के साथ कुछ जाने पहचाने विल्लागेरस ने मेरा गारलैंड से और रमेश को बुके देकर स्वागत किया. में निचे झझक कर मुकेश मां के पेअर छुए और मुझे गारलैंड करते वक़्त, मुकेश मां ने ब्लाउज के ऊपर से मेरी चूचियां को हलके से प्रेस की और मुझे देखे और स्माइल की, जैसे मुझे कुछ हिंट दे रहे हों.
मुझे रीलीज़ हुआ की रमेश के यह मां तोह ठरकी हो सकते हैं और मुझे सरप्राइज हुआ की उनके press-touch से मुझे मेरी झंघों के बीच में नमी फील हुई. एक स्ट्रेंजर मेरी चूचियों को प्रेस कर रहे थे और मैं एन्जॉय कर रही थी. )उफ़, मुझे क्या हो गया है, मैं सोचती रही. )
गीता, जो उनकी बेटी थी, ने एक टिपिकल विलेज टाइप साड़ी पहनी हुई थी और मुझे और रमेश को हुग किया. मुकेश मां और बाकी मर्द लोग धोती और कुरता में थे.
मुकेश का टिपिकल पुअर फार्मर मन बदन नहीं था. उन्होंने एक स्माल गोल्ड चैन पहनी हुई थी, जो उनके घने बालों वाले चट्टी पर रेस्ट कर रही थी. उनके कुर्ते के जिसके टॉप के दो बटन्स लूसे थे सीस में से में उनके घने सफ़ेद बालों को देख प् रही थी. उन्होंने एक गोल्ड ब्रेसलेट और गोल्ड रिंग्स भी पहने थे और राइट वृस्त में एक पुराणी घडी, माथे पर एक तिलक और डार्क और थिक मच थी ऊनि. वह एक घने बालों वाले मर्द थे, जिनके बॉडी पर बाल hi बाल थे.
अब रमेश और असलम और सलीम के साथ, अपने एक्सपीरियंस से मैं सीखी हूँ की जिन मर्दों के पूरे बदन पर बाल होते हैं, वह बिस्तर में काफी हॉर्नी होते hain.Mein मन मैं सोची की यह मां मेरी साथ मस्ती करने की तरय करेंगे, और मुझे उनसे बच कर सवधननि बरनि पड़ेगी.
गारलैंड पहना कर और एक दूसरे को ग्रीट करने के बाद, हमे एक गाडी से एक विलेज हूत हाउस में गाइड की गया, जिसकी सीमेंट शीट रूफिंग थी और बहार एक गेस्टों का गोत्ता था और वहां से cow-dung की स्मेल आ रही थी.
वह हूत हाउस काफी बड़ा था एक गाँव के घर के लिए, जिसमें 3 रूम्स थे बड़े दरवाज़ों के साथ. वाल्स और डोर्स में कुछ स्माल गैप्स थे, जिससे आउटसाइड और दूसरी साइड की रोड़ा कुछ दिख सकता था गौर से देखेगा कोई तोह.
फिर मुकेश मां ने मुझे और रमेश को देखा और एक कहे, "रमेश, त्यार हो जा, ठहरे और ठहरी लुगाई खातिर एक घंटे में छोटा सो प्रोग्राम रेक हैं गाँव वालों ने.*"
लुगाई शब्द सुन में मन hi मन शर्मायी .. उफ्फ्फ हाँ में तोह दो दिन रमेश की लूग hi बनकर आयी हूँ उफ्फफ्फ्फ़.
उनकी बेटी गीता ने मुझे एक साड़ी दी और उसको पेहेन्ने के लिए कही. रमेश चेंज नहीं करे, लेकिन मैं अपनी साड़ी रिमूव की और गीता की दी हुई साड़ी पहनी, जो एक पलाइन पीच कलर साड़ी थी, शामे कलर पेटीकोट, पीछे से प्यूरीन जाम्बे वाले हुक वाले पूरी कवर करने वाली ब्लाउज लेकिन स्लीवलेस.
हमारे लिए एक छोटा सा डिनर अर्रंगे की गया था, एकदम टिपिकल विलेज स्टाइल में - रोटी, दाल, खिचड़ी, बैंगन (ब्रिंजल), मिक्स वेजिटेबल, तीखी लाल और हरी चिल्ली चटनी, बैंगन भरता और कला जमुनस. डिनर गरम था और हमने मज़े से खाना खाये. फिर खाने के बाद गीता अपने घर चली गयी और में मुकेश मां और रमेश स्टेज पर, जहाँ फंक्शन था, थोड़ी देर बातें किये, फिर कुछ और लोग भी चले गए. हम चार लोग थे वहां, रमेश, मुकेश मां, उनका एक अटेंडेंट और मैं. थोड़ी देर में मुकेश मां भी उनके घर के लिए निकल गए.
अब मैं और रमेश hi बचे थे, और रमेश, जो मेरी पास बैठे थे, मेरी बॉडी से छेड़खानी करने लगे. हु अपने हाथों से बार बार मेरी पल्लू गिरा रहे थे बातों बातों में . मैं भी बार बार अपना पल्लू अपने शोल्डर पर रख रही थी.
अचानक से रमेश ने मुझे पंडाल के पीछे खींच लिया और 'पंडाल' के एक बम्बू बार पर टिका दिया. पीछे से उन्होंने मेरी ब्लाउज की हुक्स खोल दी और मेरी पीठ को चूमने लगे , मैं ब्रा नहीं पहनी थी क्यूंकि ब्लाउज पहले से hi टाइट थी. फिर उन्होंने मेरी साड़ी मेरी कमर से ऊपर उठाई और फिर मेरी चिकनी झंघों को चूमने लगे ,मेरी अब गिल्ली पंतय को चूमे और मुझे 2-3 बार मेरी चूतड़ों को दबाये.
"अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह"! मैं एक्ससिटेमेंट में सिसकियाँ दे रही थी. फिर वह मेरी नाभि पर चूमे और ब्लाउज कप्स को मेरी नीचे धकेल कर मेरी निप्पल्स को बाईट किये और मेरी बड़े चूचियों को चाटने लगे. उसने अपना सर मेरी पंतय पर गाइड करे.
मैं एक हलकी सी आह भरी "अहह उठ उफ्फ्फ्फ़ ममममममम" रमेश ने मेरी पंतय के ऊपर से मेरी बुर की सुगंध लेनी शुरू कर दी. ऊपर लाइट की वजह से वह मेरी बुर देख सकते थे. फिर उन्होंने अपने लिप्स मेरी छूट के लिप्स पर लगा दिए और चाटने लगę. मैं अपने नंग चूचियों को मस्सगे करने में बिजी थी.
रमेश बोले, "तेरी बुर तोह कमाल की है रौशनी उफ्फ्फ. तेरे चकहियाँ के निप्पल्स देखो रेज खड़े हैं … उफ्फ्फ तुम बनी उतावली होते जा रही हो न डालरिंग मममम.”
फिर वह मेरी पंतय को साइड कर मेरी छूट को चाटने लगे और अपने हाथों से मेरी चूचियों को मसलने लगे.
मेरी सिसकियाँ तेज़ होने लगी "आह, आह अह्हह्ह्ह्ह, ओह्ह्ह्हह्ह, अह्ह्ह्हह, आह, उन्ह, उन्ह, उन्ह, उह, उह, अहं अहं, हाँ, हँ, हँ, Hun,chusiye मेरी बुर मममम!”
रमेश खड़ा हुआ और मुझे अपने घुटनो पर झुकाया और अपनी पंत की ज़िप खोली और में उनके मोठे लुंड को चाटने लगी ..
रमेश अपने खड़े लुंड के ब्लोजॉब के लिए मेरी मुँह में में धकेलने वाले hi थे ..
उनका लुंड मेरी गुलाबी होठनो को छू गए की कुछ अफवास आई और में कणुड को संभाली .. समझ आ गयी की में तोह एक ओपन पंडाल पर ऐसे सब अश्लील चीज़ें कर रही थी उफ्फ्फ्फ़..
मैं उठ गयी और मैं अपनी ब्लाउज और पेटीकोट एडजस्ट की और अपनी साड़ी ठीक से पहन ली. रमेश ने भी अपनी पंत ज़िप ऊपर कर ली. यह सब सही टाइम पर हुआ क्यूंकि मुकेश मां और उनकी बेटी गीता ने हमें ज्वाइन किया.
रात के 10 बज रहे थे. हम घर पहुंचे.
मुकेश मां बोले “थे दोनों lugai-dhani सो jao,Kaal बात करसा.
फिर मुकेश मां अपनी बेटी के साथ चले गए. उन्हें जस्ते देख मुझे यह बात अजीब लगी की मुकेश मां अपनी बेटी को कास कर उसकी कमर को पकडे हुए जा रहे थे. मुझे याद है रमेश और सलीम, असलम मुझे ऐसी hi कमर जकड़े पास राकी चलते थे जब उन्हें मस्ती सूझती थी.
मुझे लगा की मुकेश मां और उनकी बेटी के बीच कुछ यौन सम्बन्ध तोह थे ज़रूर.
वहां में और रमेश खःद को कमरे में अकेले पाए … आए तोह रमेश जी और मेरी बीच फाई काफी कुछ होने वाला था क्यूंकि में कुछ प्लान करके आई थी… और में उस सोच से शर्मायी.
वन्स थे हद गॉन एंड वे वेरे इनसाइड, ी टर्न्ड अराउंड एंड किस्ड रमेश. थे इंसिडेंट इन थे पंडाल हद मेड में वैरी हॉर्नी एंड ी वांटेड तो एन्जॉय थिस नाईट विथ रमेश.
"दरवाज़ा बंद करो रमेश जी. फिर, पलंग पर बैठो और अपनी आँखें बंद करो, जब तक मैं कपडे पहन लूँ. कोई झांकना नहीं." मैं कहा और परदे के पीछे चली गयी और तैयार होने लगी. रमेश ने मुझे चूमा. उसने वही की जो मैं उसे बताया था. वह मेरी प्रतीक्षा कर रहा था, अपनी आँखें बंद करके, यह सोचकर की मैं क्या करने वाली हूँ. मैं कपडे पहने. मैं मेकअप किया. मैं अपने बाल बनाये. इसमें आधे घंटे से ज़्यादा लग गया. आखिरकार, मैं तैयार थी. मैं परदे को खिसकने वाली थी, लेकिन उससे पहले मैं कहा, "आँखें बंद करो, रमेश जी." रमेश ने वैसा hi किया. मैं पर्दा खिसकाया. मैं अपना फ़ोन लिया और एक गाना बजाना शुरू कर दिया. जैसे hi संगीत रमेश के कानो में पड़ा, वह तुरंत गाने को जान गया,
'चोली के पीछे क्या है' फिल्म खलनायक से.
उसने जल्दी से अपनी आँखें खोली और मुझे देखा. उसका जबड़ा गिर गया. उफ़ रौशनी तुम गाने में मेरी पसंदीदा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की तरह दिखती हो. मैं hare-peele रंग का लेहेंगा चोली पहना था जो मुझे मिला था क्यूंकि मुझे पता था की गाँव में वे ऐसा पहनते हैं. मेरा चेहरा उसी रंग के घूँघट से ढाका हुआ था. लेकिन रमेश ने देखा की, गाने की तरह, मेरी नाभि नंगी थी और मेरी खूबसूरत नाभि ने मेरी सुंदरता में बहुत इज़ाफ़ा किया. मैं कमर की चैन भी पहनी थी जो मेरी पति रोनित ने बहुत पहले गिफ्ट की थी. लेकिन मैं शर्त लगाने को तैयार थी की मैं माधुरी से कहीं ज़्यादा कामुक दिखती थी, खासकर मेरी और भी गोरी चिकनी त्वचा के कारण. इसने पोषक को बहुत अच्छी तरह से निखारा. गाना शुरू हो गया. मैं गाने पर अपनी नाभि को हिलना शुरू कर दी.
रमेश मुझे अपनी हरकतों से लुभाते हुए देख रहे थे. मैं देख सकती थी की उनका लम्बा और मोटा लुंड सख्त होने लगा है. उसकी आँखें मेरी नाभि और मेरी नाभि पर तिकी थीं.
गाना बजता रहा: 'चोली में दिल है मेरा चुनरी में दिल है मेरा ये दिल मैं दूँगी मेरी यार को, प्यार को!'
और गाने के आखरी लीनę के साथ, मैं अपने चेहरे से घूँघट उठाया और इसे अपने पति को दिखाया. रमेश का लुंड धड़क रहा था. मुझे यकीन है की ऐसा इसलिए था क्यूंकि उसने देखा की मैं अपना मेकअप कितना सही की है. मैं एक देसी गाँव की महिला की तरह दिख रही थी. मेरी चेहरे के भाव बहुत देसी थे. मैं नाचती रही. रमेश का लुंड सख्त और धड़क रहा था. उसने जल्दी से अपने सारे कपडे उतार दिए और नंगा हो गया. मैं नाचती रही. मेरी बारे में सब कुछ बहुत कामुक था, खासकर मेरी नाभि. अपने डांस सेटप्स से में सूरे करि की सारा ध्यान मेरी नाभि पर हो. रमेश ने अपना लुंड पकड़ा और उसे upar-neeche पंप करना शुरू कर दिया. मैं शरारती अंदाज़ में शर्मा गयी. मैं देख सकती थी की उसके लुंड से pre-cum टपक रहा है, यह इस बात का सबूत है की मैं अपना काम अच्छी तरह से कर रही थी. मैं मुस्कुराई और अपनी आँखें बंद कर ली और ताल पर अपनी कमर हिलने लगी. रमेश को उत्तेजित होते देखना मुझे भी उत्तेजित कर रहा था. अचानक, मैं अपने रमेश के हाथों को अपनी नाभि पर महसूस किया, उसे महसूस करते हुए, उसे गूंथते हुए और अपनी उँगलियों से मेरी नाभि को छेड़ते हुए. मैं अपनी आँखें खोली और मुस्कुराई. मैं रमेश की आँखों में मेरी लिए भूख और वासना देख सकती थी. और मेरी योनि भी गीली हो रही थी. लेकिन मैं रमेश की कलाइयों को पकड़ ली और उन्हें अपनी नाभि से छुड़ा लिया. फिर मैं उसे ऊँगली दिखाई और धीरे से अपना सर हिलायी जैसे की यह कह रही हो, 'अभी नहीं'.
गाने की ताल थोड़ी तेज़ हो गयी. मैं थोड़ा पीछे हटकर जवाब दिया और मुद गयी. मेरी कामुक पीठ सिर्फ मेरी ब्लाउज के दो धागों से ढकी हुई दिखाई दे रही थी. मेरा लेहेंगा भी kabhi-kabhi मेरी गांड का आकर दिखा देता था. तेज़ ताल के साथ, मैं तेज़ी से नाचना शुरू कर दिया. मैं अपनी कमर और अपनी गांड को हिलनी शुरू कर दी."
रमेश ने मुझे पकड़ लिया जब मैं zor-zor से अपनी कमर हिला रही थी, फ़ास्ट बीट पर. उनका लुंड फड़क रहा था. मैं पलटी और रमेश ने मेरी पेट को उत्तेजना से कांपते हुए देखा. मेरी नाभि बहुत सेंसुअल लग रही थी. फिर गाना अपनी ओरिजिनल बीट पर लौट आया. मैं पहले वाली रदम पर डांस कर रही थी. मुझे रमेश के लिए एक सेक्सी बुर्लेस्कुए गर्ल की तरह डांस करने में बहुत मज़ा आ रहा था. रमेश जान गए थे की वह अब ज़्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे. गाना चलता रहा.
'लड़की हो कैसी बोलो, लड़की हो कैसी' (एक लड़की कैसी होती है, बताओ, एक लड़की कैसी होती है) 'लड़का हो कैसा बोलो, लड़का हो कैसा' (एक लड़का कैसा होता है, बताओ, एक लड़का कैसा होता है) 'लड़की हो मेरी जैसी' (एक लड़की मेरी जैसी होती है) 'लड़का हो तेरे जैसा' (एक लड़का तेरे जैसा होता है)
(मैं रमेश की तरफ इशारा किया)
'आये मज़ा फिर कैसा, प्यार का, प्यार का!' (फिर प्यार का क्या मज़ा है, प्यार का, प्यार का!)
बस, रमेश से और सहा नहीं गया. वह बीएड से उठे, मेरा फेस पकड़ा, और मुझे चुम्मा. मैं चौंक गयी. मैं रमेश को गले लगाया और उन्हें किश किया. कुछ सेकंड बाद, मैं अपनी जीभ रमेश के मुँह में डाली, और वह फ्रेंच किश करने लगे. किश करते वक़्त, मुझे रमेश का सख्त लुंड नीचे मेरी बुर को छूटा हुआ महसूस की. रमेश के लुंड से निकला pre-cum मेरी पेट और नाभि पर लग रहा था. अपनी आँखें बंद करके, मैं यह सब महसूस की और इतनी कामुक हो गयी की मैं रमेश को और ज़ोर से किश करना शुरू कर दी. एक मिनट बाद, रमेश ने किश तोडा और मेरी आँखों में देखा. मैं रमेश की आँखों में भूख और लस्ट देखि. मैं अपने चेहरे पर एक कामुक एक्सप्रेशंस देते हुए रमेश को इशारा कर रही थी की मैं भी उन्हें बहुत चाहती हूँ. रमेश ने जल्दी से मेरी ब्लाउज के ज़रिये से मेरी चूचियां पकडे और उन्हें दबाना शुरू कर दिया. मैं अपनी आँखें बंद कर ली और रमेश को अपने चूचियां सहलाते हुए पाकर मज़ा लेने लगी. लेकिन रमेश के अंदर एक जनवरी, लस्ट थी, जो उनके ुर्हरते मोठे काळा लुंड से उगल रही थी. रमेश ने मेरी ब्लाउज के दोनों साइड पकडे और बड़ी ताकत से ब्लाउज को hi चीयर दिया.
ब्लाउज पहात गया, और फिर मेरी सुन्दर बड़ी और सूदół चूचियां उन्हें दिख गए. मेरी आँखें खुल गयी. मेरी ब्लाउज के फटने की फीलिंग ने मुझे और भी ारोउसे कर दिया. मेरी आँखों में हवस रमेश की हवस से मैच कर रही थी. रमेश ने अपना मुँह मेरी एक निप्पल की तरफ बढ़ाया और उसे चूसना शुरू कर दिया, जबकि वह मेरी दुसरे निप्पल को पिंच कर रहे थे, खींच रहे थे और उससे खेल रहे थे. इससे मैं और भी ारोउसे हो गयी, और मैं मोअन करने लगी. रमेश ने मेरा ब्लाउज कम्प्लीटली निकाल दिया, मेरी उप्पेर बॉडी को कम्प्लीटली नंगा छोड़ दिया. उन्होंने मुझे गले लगाया और मुझे गहराई से चूमने लगę. रमेश ने मेरी चूचियां को अपनी छाती के अगेंस्ट महसूस करे और मेरी सख्त निप्पल्स उन्हें चूब रहे थे.
जब हम एक दूसरे को चूमते रहे, रमेश ने अपने हाथो से मेरी चूतड़ों के गोलों को पकड़ लीरा और दबाने लगę. उन्होंने उन्हें दबाना, मसलना और उनपर थपड मारना शुरू कर दिया. मैं जॉर्डन से इस हरकत से सिसककियाँ देती रही. मैं रमेश के लुंड को धड़कते हुए महसूस कर रही थी, उनका pre-cum उस पर मेरी पेट के अगेंस्ट प्रेस हो रहा था. मैं अपनी खुद की हवस में खो गयी थी. मुझे यह भी पता नहीं चला की रमेश ने मेरी लेहेंगा की स्ट्रिंग कब खींच ली और उसे खोल दिया. एक सेकंड में, लेहेंगा ज़मीन पर गिर गया और मेरी पैरो के ird-gird ढेर हो गया. मैं अब पूरी नंगी थी. मैं सिर्फ वह कमरबंद पहनी थी जो मेरे पति नरोनित ने पल्ले कभी मुझे गिफ्ट की थी. मैं रमेश को एक हवस अंदाज़ से देखि. मैं महसूस कर सकती थी की रमेश मेरी बॉडी के भूखे थे. रमेश ने मुझे किश की और फिर अपने घुटनो पर आ गए. सबसे पहले, उन्होंने मेरी पेट को चुम लिया और उसे चुम्मों के गीलेपन से से नहलाये. उन्होंने मेरी पेट को हर जगह किश किया. फिर उन्होंने मेरी नाभि के अंदर अपनी जीभ दाल वहां चेतना शुरू कर दिया. मुझे यह बहुत अच्छा लगा. मेरी उंगलियां उनके बालों में थी, उन्हें अपनी नाभि के और करीब खींच रही थी. मैं तेज़ी से सांस ले रही थी, रमेश के साथब छोड़ने बिलकुल तैयार थी. रमेश ने मज़े से मेरी पेट का लुफ्त उठाया. मेरी नाभि पर एक फाइनल किश के साथ, उन्होंने मेरी पेट को छोड़ दिया और मेरी बुर तक पहुँचने .मैं अपनी बुर पर उनके चुम्मे महसूस की, और मैं सिसकियाँ मरने लगी जोरों से.
रमेश मेरी रिएक्शन से खुश थे. उन्होंने अपनी बुर को कुछ और वेट किस्सेस से नहलाया. मेरी बुर उनकी थूक और मेरी खुद के बुर के रास की वजह से और भी गीली हो गयी. जल्दी hi, उन्होंने अपनी जीभ निकली और मेरी छूट के दाने को चाटना करना शुरू कर दिया. मेरी बुर तोह उन्होंने कई बार छाती थी था, लेकिन इस बार उनकी चाटने किआ अंदाज़ अलग महसूस करि. मनो पहले, यह सिर्फ उनकी लवर की बुर थी. अब, वह मुझे अपनी बीवी के रूप में इमेजिन कर रहे थे और मेरी बुर को चूस रहे थे.
मैं उत्तेजना से सिसकियों पर सिसकियाँ देने लगी. मैं वह प्लेअसुरे महसूस कर सकती थी जो रमेश दे रहे थे. थोड़ी देर बाद, रमेश उठे, और अपनी जीभ की टिप से, मेरी छूट के होठों को अपने होठों में लेना और कबाना शुरू करे. मैं छापने लगी और कोरों से सिसकियाँ मरने लगी. मेरी छूट का दाना काफी सेंसिटिव हैं. रमेश बस उसकी को चाट और चुम रहे थे … उन्होंने फिर मेरी बुर के अंदर एक ऊँगली डाली और मेरी छूट के डेन को चाटना कंटिन्यू रखा. और वहń चाट चाट कर मैं ज़ोर से सिसकियाँ दी. “हे भगवान्!… उफ़ मत रुकिए डार्लिंग ममममम.” मैं चीखी. मैं अब रमेश से छोड़ने तैयार थी , उनकी पत्नी बन कर उनसे छोड़ना चाहती थी उफ्फ्फफ्फ्फ़ ……