Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 12 - SexBaba
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Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

मां जी ने जल्दी से धोती पेहेन ली और दरवाज़े की तरफ बढे. उनका चेहरा गुस्से और शक से भरा हुआ था. रौशनी ने चद्दर को अपने बदन पर और टाइट से लपेट लिया. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी. उसको बहुत डर लग रहा था की अगर कोई देख लेगा तोह क्या होगा.

गीता बहार कड़ी थी. उसकी टांगें काँप रही थी. वह वहां से भागने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके पेअर उसके कण्ट्रोल में नहीं थे. जैसे hi मां जी ने दरवाज़ा खोला, गीता का चेहरा उनके सामने आ गया.

मां जी के मुँह से एक ज़ोर की आवाज़ निकली, “गीता? तू यहाँ क्या कर रही है?”

गीता का चेहरा लाल हो गया. उसकी आँखें नीचे की तरफ झुक गयी. उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या बोले. उसकी बुर अब भी गीली थी और उसको यह सब देख कर बहुत गरम हो रहा था लेकिन साथ hi डर भी लग रहा था.

रौशनी अंदर से चिल्लाई, “मां जी… कौन है?”

मां जी ने गीता को अंदर खिंच लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया. अब तीनो पंप हाउस के अंदर थे. गीता का चेहरा लाल था. उसकी आँखें रौशनी के नंगे बदन पर पद गयी. रौशनी ने चद्दर को और टाइट से पकड़ लिया.

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गीता धीरे से बोली, “मैं… मैं आप दोनों को ढूंढ रही थी… लेकिन यह… यह सब… उफ्फ्फ्फ़…”

मां जी ने गीता की तरफ देखा. उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी. उन्होंने धीरे से कहा,

“गीता… तू बहार से सब देख रही थी न? अब अंदर आ गयी है… तोह अब यहाँ से जाने का कोई मतलब नहीं… बैठ जा… देख ले पूरा मज़ा…”

रौशनी की आँखें फैल गयी. उसको शर्म आ रही थी लेकिन साथ hi उसके अंदर एक और गर्मी भी आ गयी. गीता का चेहरा लाल था. उसको लगा जैसे उसका दिल बहार आ जायेगा.

अब तीनो एक दूसरे को देख रहे थे. पंप हाउस के अंदर की हवा और भी गरम हो गयी थी.

मां जी ने गीता को अंदर खिंच लिया और दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया. पंप हाउस के अंदर अब तीनो थे. हवा में एक अजीब सी सन्नाटा छ गया था. सिर्फ उन तीनो की तेज़ सांसें सुनाई दे रही थी.

गीता का चेहरा लाल हो चूका था. उसकी आँखें नीचे की तरफ झुकी हुई थी. उसको लगा जैसे उसका दिल बहार आ जायेगा. उसकी बुर अब भी गीली थी लेकिन उसके अंदर एक तेज़ डर भी था. वह सोच रही थी की अब क्या होगा… क्या मां जी गुस्सा करेंगे… क्या भाभी उसको डाँटेंगी… या फिर कुछ और…

रौशनी चद्दर को अपने बदन पर और टाइट से लपेट कर बैठी थी. उसका चेहरा शर्म और गुस्से से भरा हुआ था. उसको लगा जैसे उसका पूरा राज़ खुल गया है. उसकी आँखें गीता पर थी और उसके दिमाग में एक hi बात चल रही थी — यह गीता यहाँ क्या कर रही थी… क्या सब देख लिया इसने… अब क्या होगा…

मां जी के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी. उन्होंने धीरे से गीता की तरफ देखा और फिर रौशनी की तरफ. उनकी आँखों में एक चमक थी जो कह रही थी की अब यह पल उनके कण्ट्रोल में है. उन्होंने धीरे से कहा,

“गीता… तू बहार से सब देख रही थी न? अब अंदर आ गयी है… तोह अब यहाँ से जाने का कोई मतलब नहीं… बैठ जा… देख ले पूरा मज़ा… या फिर ज्वाइन कर ले…”

गीता की सांसें और तेज़ हो गयी. उसकी आँखें फैल गयी. उसको लगा जैसे उसका दिल बहार आ जायेगा. उसकी बुर अब भी गीली थी लेकिन उसके अंदर डर और हवस दोनों साथ चल रहे थे. वह सोच रही थी की अब क्या होगा… क्या वह यहाँ से भाग सकती है… या फिर यह सब और गहरा हो जायेगा…

रौशनी ने चद्दर को और टाइट से पकड़ लिया. उसकी आँखें मां जी पर थी. उसको लगा जैसे अब सब कुछ बदल सकता है. पंप हाउस के अंदर की सन्नाटा अब और भी गहरी हो गयी थी. तीनो एक दूसरे को देख रहे थे और कोई नहीं जान रहा था की आगे क्या होने वाला है.

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रौशनी ने चद्दर को अपने बदन पर लपेट रखा था लेकिन उसकी आँखें गीता पर थी. उसको अब समझ आ गया था की गीता ने उनकी चुदाई पूरी तरह से देख ली है. उसकी आँखों में वह हलकी सी चमक थी जो कह रही थी की गीता खुद भी गरम हो गयी है.

मां जी ने अपनी धोती तोह पेहेन ली थी लेकिन ऊपर उनका भरी भरकम बालों वाला सीना अब भी नंगा था. गीता चोरी छुपे उसको देख रही थी. उसकी आँखें उसके चौड़े सीने पर अटक गयी थी. उसको यह देख कर और भी गरम हो रहा था.

रौशनी ने धीरे से, लेकिन मधुर स्वर में कहा,

“गीता… वहां निचे मेरी ब्रा और पंतय पड़ी है… मुझे दे दे न…”

गीता का चेहरा लाल हो गया. उसकी सांसें तेज़ हो गयी. वह धीरे से आगे बढ़ी और ज़मीन पर पड़ी रौशनी की ब्रा और पंतय उठा ली. उसकी उँगलियाँ थोड़ी सी काँप रही थी. उसको यह सब देख कर बहुत शर्म आ रही थी लेकिन साथ hi उसके अंदर एक तेज़ हवस भी जग रही थी.

रौशनी ने चद्दर को थोड़ा सा खिसका कर अपनी ब्रा और पंतय ले ली. उसकी आँखें अब भी गीता पर थी. उसको यह एहसास हो रहा था की गीता अब उनके राज़ में शामिल हो चुकी है. मां जी chup-chap देख रहे थे. उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी.

गीता ने धीरे से कहा, “भाभी… मैं… मैं यहाँ से जा रही थी… लेकिन…”

रौशनी ने हलके से मुस्कुराते हुए कहा, “अब जाने का क्या मतलब… बैठ जा…

रौशनी ने चद्दर को साइड कर दिया. अब वह सिर्फ अपनी ब्लैक लास ब्रा और थोंग स्टाइल पंतय में कड़ी थी.

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उसकी बड़ी चूचियां ब्रा के अंदर से उभर रही थी और उसकी पतली कमर और मोठे गोल गोल चूतड़ उसकी उस थोंग पंतय में तोह और भी मस्त लग रहे थे .. . उसकी गोरी और मुलायम स्किन लास के साथ बहुत सुन्दर लग रही थी.

गीता ने यह सब देख कर अपने आप को रोक नहीं पायी. उसकी आँखें रौशनी के बदन पर अटक गयी. उसको अंदर से बहुत कुछ चल रहा था.

उफ्फ्फ्फ़… रौशनी भाभी का बदन इतना मस्त है… इतनी बड़ी और उभरी हुई चूचियां… पतली कमर… और यह मोती गांड… और ऊपर से यह महंगी और सेक्सी लास ब्रा और छोटी सी थोंग पंतय… बिलकुल सेक्स की देवी जैसी लग रही है… ऐसे बदन से तोह हर मां जी जैसे फौलादी मर्द उसको छोड़ना चाहेगा…

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गीता की बुर अब भी गीली हो रही थी. उसको यह देख कर बहुत जलन हो रही थी लेकिन साथ hi उसके अंदर एक तेज़ हवस भी जग रही थी. उसको लगा जैसे वह भी ऐसे सेक्सी कपड़ों में होना चाहती है और मां जी के साथ ऐसे hi मस्ती करना चाहती है.

रौशनी ने धीरे से मां जी की तरफ देखा. उसकी आँखें अब भी गीता पर थी. उसको यह एहसास हो रहा था की गीता अब उनके राज़ में शामिल हो चुकी है.

मां जी ने दोनों को देखा और धीरे से मुस्कुराये.

मां जी का गुस्सा अब धीरे धीरे काम हो रहा था. उन्होंने गीता को अपनी तरफ खिंच लिया. गीता का चेहरा लाल हो चूका था. मां जी ने उसके कंधे पर हाथ रख कर धीरे से कहा,

“क्यों जाएगी मेरी गीता… तू बड़ी हो गयी है न… तेरे भी कुछ फीलिंग्स होंगे… वैसे भी कुवारी लड़की की गर्मी अलग hi होती है रे…”

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गीता की सांसें तेज़ हो गयी. उसकी आँखें नीचे की तरफ झुक गयी. उसको शर्म आ रही थी लेकिन साथ hi उसके अंदर एक तेज़ गर्मी भी दौड़ रही थी.

रौशनी ने यह सुन कर थोड़ा सा शॉक फील किया. उसकी आँखें फैल गयी. उसको लगा जैसे गीता अब तक वर्जिन है. उसको यह बात समझ नहीं आ रही थी की गीता इतनी करीब होने के बाद भी अब तक कुछ नहीं हुआ है. उसकी आँखों में एक हलकी सी चमक आ गयी.

मां जी: (नशे में, गीता को देखते हुए) अरे रौशनी बीटा, देख तोह सही... तेरी बेहेन जैसी गीता की टाइट यंग बॉडी को. कितनी जवान और टाइट है यह लड़की. उसकी पतली कमर को देखा? जैसे कोई छोटी सी ढेली पतंग, हाथ में आ जाये तोह पकड़ के रख लून.

रौशनी: (मुस्कुराते हुए, गीता की तरफ इशारा करते) हाँ मां जी, बिलकुल सही कह रहे हो. गीता की पतली कमर इतनी सेक्सी है न... छूने का मैं करता है. ऊपर से उसकी aam-jaisi चूचियां... वह! दो bade-bade रसीले आम, टाइट कपड़ों में उभर के दीखते हैं. हिलती है जब वो चलती है तोह मैं करता है मुँह में ले लून.

मां जी: (हाथ से अपना लुंड दबाते हुए) अरे वह! और उसकी टाइट चंचल गांड... ओह्ह्ह मा... बिलकुल गोल और टाइट, जैसे कोई नयी पीच. चलते वक़्त ऊपर नीचे हिलती है, चंचल बन के ताड़ रही होती है. एक थप्पड़ मर के देखना चाहता हूँ कितनी टाइट है वह.

रौशनी: (गीता को घूरते हुए) मां जी, सच में... गीता की गांड देख के hi मेरा पानी निकलने लगता है. इतनी टाइट और यंग बॉडी, पतली कमर, आम जैसी चूचियां जो दबाने के लिए तड़प रही हैं, और वह चंचल गांड जो छोड़ने के लिए इन्विते कर रही है. आपको भी लगता है न?

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मां जी: (गरम होते हुए) लगता है? पागल कर देती है यह गीता. उसकी टाइट यंग बॉडी को नंगा करके, उसकी पतली कमर पकड़ के, चूचियों को मसलते हुए, और उसकी टाइट गांड में घुसा के छोड़ने का मैं करता है. रौशनी, तू भी देख... हम दोनों मिल के इसकी यह सब चीज़ें एन्जॉय करेंगे.

रौशनी: (हस्ते हुए, एक्ससिटेड) हाँ मां जी... गीता की टाइट बॉडी, पतली कमर, रास भरी आम चूचियां और वह चंचल टाइट गांड... सब कुछ हमारा है आज. उससे बोलूं क्या कपडे उतार दे?

मां जी: हाँ उतार देंगे न .. लेकिन अब थोड़ा सा इसलके गुलाबी होठों का रास तोह पि लू जी भर के ..

(गीता रूम के अंदर कड़ी है, दरवाज़े की तरफ से मां जी और रौशनी की बातें सुन रही है. उसका चेहरा लाल हो चूका है, दिल zor-zor से धड़क रहा है, लेकिन शरीर में एक अजीब सी गर्मी फ़ैल रही है.)

गीता (अपने आप से, धीरे से):ओह गॉड... यह दोनों मुझे ऐसे कैसे बोल रहे हैं? मेरी टाइट यंग बॉडी... मेरी पतली सी कमर... और मेरी चूचियां... आम जैसी? शर्म आ रही है, पर... अंदर से कुछ और hi हो रहा है.

गीता (सोचते हुए, अपनी कमर पे हाथ फेरते):मेरी पतली कमर... सच में इतनी अट्रैक्टिव है क्या? जब मैं मिरर में देखती हूँ तोह लगता है हाँ, बिलकुल स्लिम और टाइट. उनकी बातें सुन के मुझे अपनी बॉडी को टच करने का मैं कर रहा है.

(वो अपनी चूचियों को हलके से दबती है)

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गीता (व्हिस्पर में, excited-shy मिक्स):और मेरी आम जैसी चूचियां... दोनों बोल रहे थे रसीले आम जैसे हैं. सच में जब मैं चलती हूँ तोह हिलती हैं. अब उनकी नज़रों के सामने सोच के निप्पल्स खड़े हो गए हैं. शर्म से मर जाउंगी, पर मैं कर रहा है उनके सामने जा के कड़ी हो जॉन.

गीता (पीछे मुद के अपनी गांड को मिरर में देखते हुए):और यह... मेरी टाइट चंचल गांड. चंचल? हाँ, जब मैं चलती हूँ तोह थोड़ा ज़्यादा hi हिलती है. मां जी बोल रहे थे थप्पड़ मरने का मैं करता है... और रौशनी भी. लगता है मां जी मुझे छोड़ना चाहते हैं. मेरी टाइट गांड में... उफ़.

(गीता का सांस तेज़ हो जाता है, वो अपनी तइस प्रेस करती है)

गीता (इंटरनल मोनोलोगे):यह दोनों कितने नॉटी हैं. मां जी तोह मेरे अंकल हैं, और रौशनी मेरी भाभी. पर इनकी बातें सुन के मेरा शरीर रियेक्ट कर रहा है. मेरी यंग टाइट बॉडी को ऐसे प्राइसे कर रहे हैं... थीं कमर पकड़ के, चूचियां मसलते हुए, और मेरी टाइट गांड पे थप्पड़ मरते हुए मुझे छोड़ने का सपना देख रहे हैं. मैं इनको रोकना चाहिए... पर क्यों मैं कर रहा है की मैं अंदर जा के उनके सामने कड़ी हो जॉन और बोलूं – “देख लो जितना देखना है, टच भी कर लो...

गीता दरवाज़े के पास कड़ी सुन रही थी सब. उसका चेहरा लाल हो चुक्का था. जब मां जी और रौशनी की बातें और गरम होने लगी, तोह उसके पेअर अंदर की तरफ खींचे चले गए.

मां जी (गीता को देखते hi उठ कर उसके पास आते hue):Arre मेरी प्यारी गीता... यहाँ छुप के सब सुन रही थी क्या?

गीता ने सिर्फ शर्मा के आँखें नीचे कर ली. बोल नहीं पायी.

मां जी ने उसका हाथ पकड़ा और धीरे से अपनी तरफ खिंच लिया. गीता का दिल zor-zor से धड़क रहा था.

मां जी (गीता को गले से लगते हुए, टाइट हुग mein):Kitni टाइट यंग बॉडी है तेरी... बहुत दिन से इसको गले लगाने का मैं कर रहा था.

उन्होंने गीता को बहुत ज़ोर से अपने सीने से चिपका लिया. गीता की सॉफ्ट aam-jaisi चूचियां मां जी के सीने में डाब गयी. मां जी ने एक हाथ उसकी पतली कमर पे रख कर ज़ोर से दबाया और दूसरे हाथ से उसकी टाइट गांड पे थपकी दी.

गीता (शर्माती हुई, हलकी सी आवाज़ mein):M-Mama जी... ऐसे मत...

लेकिन उसने कोई रेजिस्टेंस नहीं किया. सिर्फ शर्मा के आँखें बंद कर ली.

मां जी ने गीता की सलवार का नाडा पकड़ा और एक hi झटके में धीरे से खोल दिया. सलवार नीचे गिर गयी. अब गीता सिर्फ टाइट ब्लैक लेग्गिंग्स में कड़ी थी, जिसमें उसकी चंचल गांड और पतली कमर बहुत ज़्यादा उभर के दिखाई दे रही थी.

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मां जी (गरम सांस mein):Wahhh... देखो तोह सही. लेग्गिंग्स में तेरी गांड कितनी टाइट और गोल लग रही है. और यह थीं कमर...

उन्होंने गीता को फिर से गले लगा लिया और zor-zor से चूमने लगे. पहले उसके गाल, फिर नैक, और फिर लिप्स पे गहरी किश. मां जी के होठ गीता के सॉफ्ट लिप्स को चूस रहे थे. उनका हाथ गीता की पतली कमर पे घूम रहा था और kabhi-kabhi नीचे उसकी टाइट गांड को मसल रहा था.

गीता (शुरू में सिर्फ सांस चढ़ रही थी, dheere-dheere):Mmmh... मां जी...

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पहले तोह वो बिलकुल पैसिव थी, लेकिन धीरे धीरे उसके होठ भी मां जी के साथ मूव करने लगे. वो शीलय उनके किश का जवाब दे रही थी. उसकी पतली कमर थोड़ी सी हिल रही थी मां जी के हाथों में.

मां जी (किश के बीच mein):Teri चूचियां इतनी टाइट और रसीली हैं... और यह गांड... बहुत चंचल है मेरी जान.

उन्होंने गीता को किश करते हुए उसकी चूचियों के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया. गीता सिर्फ हलकी सी सिसकी भर रही थी.

गीता (शर्माती हुई, धीरे से मां जी की गर्दन में मुँह छुपाते हुए, लेकिन अब थोड़ा साथ देने lagi):Aahh... मां जी... धीरे... शर्म आ रही है...

लेकिन उसने अपने हाथ मां जी की पीठ पे रख दिए थे और उनको थोड़ा सा और खींच रही थी. उसकी टाइट यंग बॉडी अब dheere-dheere गरम हो रही थी. वो सुब्मिसीवलय उनके साथ लिपट रही थी, उनके किश का जवाब दे रही थी, लेकिन आँखें अब भी शर्मा के बंद थी.

रौशनी (साइड से देख कर मुस्कुराती hui):Dekho मां जी... गीता धीरे धीरे खुल रही है. इसकी टाइट गांड और चूचियां आज आपके हैं.

मां जी हाँ रे बहु इतनी मस्त हैं न गीता .... अब तोह पुरे मज़्ज़े लूंगा आज यहाँ पुम्हौसे में ..

मां जी ने गीता को अपनी बाँहों में खिंच लिया. दोनों के होठ एक दूसरे से लिपट गए. यह किश बिलकुल लॉन्ग लॉस्ट लवर्स जैसा था — गहरा, भूखा और बहुत प्यार भरा. मां जी की जीभ गीता के मुँह में घुस गयी और दोनों की जीभें एक दूसरे से लड़ने लगी. गीता के मुँह से हलकी सी सिसकारी निकल रही थी. उसकी टांगें थोड़ी सी काँप रही थी लेकिन वह भी उनके किश में पूरी तरह से खो चुकी थी.

रौशनी चद्दर को अपने बदन पर लपेट कर बैठी हुई देख रही थी. उसकी बुर फिर से गीली हो गयी थी. उसको यह देख कर एक अजीब सी गर्मी महसूस हो रही थी. उसकी आँखें गीता के टाइट और जवान बदन पर थी. उसकी फर्म चूचियां, पतली कमर और मोती गांड देख कर रौशनी के दिमाग में पुराणी यादें आ गयी.

*उफ्फ्फ्फ़… गीता अभी इतनी जवान है… उसकी चूचियां इतनी टाइट और फर्म हैं… मेरी उम्र में भी मैं ऐसी hi थी… लेकिन मुझे ऐसा मातुरे मर्द नहीं मिला था… मां जी जैसा… अगर मुझे उस वक़्त ऐसा एक मर्द मिल जाता तोह मैं कितनी मस्ती कर सकती थी…*

रौशनी की बुर अब भी गीली हो रही थी. उसको यह देख कर जेएलओसी भी हो रही थी लेकिन साथ hi उसके अंदर एक तेज़ हवस भी जग रही थी. उसको लगा जैसे अब यह सब और गहरा होने वाला है.

मां जी ने गीता के होठों को चूसते हुए उसकी कमर को पकड़ लिया और उसको और करीब खिंच लिया. गीता के मुँह से अब भी धीमी सिसकारियां निकल रही थी. दोनों अब एक दूसरे के बदन से चिपके हुए थे.

गीता अब मां जी के गले में hi लिपटी हुई थी. उसकी सलवार ज़मीन पर पड़ी थी और वो सिर्फ टाइट लेग्गिंग्स में थी. मां जी उसको गले लगाए zor-zor से चुम रहे थे, कभी उसकी पतली कमर को दबाते, कभी उसकी टाइट गांड पे हाथ फेरते. गीता शर्मा के आँखें बंद किये उनके सीने में मुँह छुपाये हुए थी, सिर्फ halki-halki सिसकियाँ निकल रही थी.

मां जी ने गीता को थोड़ा सा दूर किया ताकि रौशनी भी देख सके, लेकिन अपना एक हाथ अब भी उसकी थीं कमर पर रख रखा था.

मां जी (गीता को देखते हुए, गरम आवाज़ में रौशनी se):Dekh तोह सही रौशनी... कितनी सेहमी सी है गीता. थोड़ी घबराई सी लग रही है अभी. पूरी तरह से छुईमुई गुड़िया बन गयी है.

रौशनी (मुस्कुराते हुए, गीता को ताड़ते hue):Haan फिर क्यों न होगी मां जी? आप जैसे खुला सांड जो अब इसके पीछे चला हैं. देखि न कैसी छुईमुई सी गुड़िया लगती हैं गीता... इतनी शाय, इतनी टाइट यंग बॉडी के साथ. और आप देखिये – एक बुद्धा खुला सांड. सांड जब पहली बार पीछे पड़ता है न, तोह डर तोह लगता hi है छुईमुई को.

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गीता ने यह सुन कर और शर्मा के अपना मुँह मां जी के सीने में छुपा लिया. उसका चेहरा पूरा लाल हो चूका था. उसकी सांस तेज़ हो रही थी.

मां जी (हस्ते हुए, गीता की पतली कमर को ज़ोर से पकड़ kar):Haan हाँ, बिलकुल सही कह रही है. देख इसकी टाइट चंचल गांड को लेग्गिंग्स में... कितनी घबराई हुई है. पर अंदर से गरम भी हो रही है लगती है. (गीता के कान में धीरे से) क्या बीटा? डर लग रहा है मां जी के सांड से?

रौशनी (गीता को और तैसे करते hue):Dekho मां जी, अब भी कुछ बोल नहीं पा रही. बस शर्मा के आपके सीने में मुँह छुपा रही है. इसकी aam-jaisi चूचियां आपके सीने से डाब रही होंगी अब. और यह पतली कमर... आपके बड़े हाथों में कितनी छोटी सी लग रही है. छुईमुई गुड़िया सच में... पर सांड जब ज़ोर लगाएगा न, तोह धीरे धीरे खुल जायेगी.

मां जी (गीता को फिर से गले लगते हुए, उसकी गांड पे ज़ोर का हाथ ferte):Bilkul. पहली बार सबको डर लगता है. पर देखती जा रौशनी... यह मेरी शाय गीता धीरे धीरे अपनी टाइट बॉडी खोल के देगी. इसकी चूचियां, इसकी पतली कमर, और यह टाइट चंचल गांड – सब कुछ आज मां जी के लिए तैयार है.

गीता (बहुत धीरे से, शर्माती हुई, मां जी के सीने में मुँह छुपाये hue):M-Mama जी... आप दोनों ऐसे मत बोलिये न... बहुत शर्म आ रही है...

लेकिन उसने अपने हाथ मां जी की पीठ पर और टाइट कर लिए थे. वो अभी भी सुब्मिसीवलय उनके गले में लिपटी हुई थी, उनके हर टच पे हलकी सी सिहरन ले रही थी.

मां जी ने गीता को गले लगाए रखा था. रौशनी के साथ बातें करते हुए उन्होंने धीरे से अपना हाथ गीता की लेग्गिंग्स के ऊपर रख दिया. उनकी उँगलियाँ कमरबंद में घुसी और dheere-dheere नीचे की तरफ खींचने लगे.

मां जी (रौशनी से, गीता को लेग्गिंग्स उतारते hue):Dekh रौशनी... यह मेरी शाय छुईमुई गुड़िया अभी भी काँप रही है. पर सांड जब एक बार टारगेट कर लेता है न, तोह पीछे हटने वाला नहीं होता.

लेग्गिंग्स dheere-dheere गीता की जाँघों से नीचे उतर रहे थे. अब गीता सिर्फ एक छोटी सी पंतय में कड़ी थी, जिसकी थीं फैब्रिक उसकी टाइट यंग बॉडी को बरेली कवर कर रही थी.

रौशनी (गीता की तरफ देखते हुए, नॉटी स्माइल के saath):Haan मां जी, आप तोह पूरे खुले सांड हो. इतना मोटा और बड़ा सांड का जो वह ौज़ज़ार हैं .. उफ्फ्फ लटकता हुआ जब सांड चलता हैं .. और फिर . देखो न गीता की हालत... कितनी सेहमी सी है. इसकी छूट कितनी टाइट होगी... इतनी यंग टाइट बॉडी वाली लड़की, पतली कमर, चंचल गांड... उसके अंदर का छेद भी तोह बिलकुल टाइट और छोटा होगा.

मां जी (गीता की पंतय के ऊपर हाथ फेरते हुए, उसकी बुर की तरफ दबाते रहे वहां रौशनी बातें कंटिन्यू राखी

रौशनी मां जी आपका सांड जैसा वह लटकता हुआ मोटा बड़ा चीज़ जब इसकी टाइट छेद पे चढ़ जाएगा न... तोह धज्जियाँ उड़ा देगा उसके छोटे से छेद की. अगर खुला सांड को इस्पे चढ़ने दिया तोह यह छुईमुई गुड़िया की तोह खैर hi नहीं बस ,अंदर घुसते hi चिल्लायेगी hi... लेकिन अगर थोड़ा सा उसे ट्रैन करे तोह वह उस औज़ार को तोह पूरा उस छेद के अंदर तक अंदर तक भर लेगी भी....

गीता यह सब सुन रही थी. उसका चेहरा अब पूरा लाल हो चूका था, बलुशिंग बियॉन्ड कण्ट्रोल. आँखें बिलकुल नीचे, मां जी के सीने से बिलकुल चिपकी हुई. उसकी सांस बहुत तेज़ हो रही थी. Jaise-jaise मां जी और रौशनी के मुँह से यह गन्दी बातें निकल रही थी, उसकी टाइट छूट से रास टपकना शुरू हो गया था. पंतय का अंदर का हिस्सा गीला होने लगा था, और हल्का सा निशाँ पंतय के ऊपर भी दिखने लगा.

गीता (बहुत धीरे से, कांपते हुए आवाज़ mein):M-Mama जी... आप ऐसे मत बोलिये न... बहुत शर्म आ रही है... प्लीज...

लेकिन उसने अपने हाथ मां जी की पीठ पर और टाइट पकड़ लिया था. उसकी पतली कमर थोड़ी सी हिल रही थी, और उसकी टाइट गांड पीछे की तरफ थोड़ा सा पुश हो रही थी जैसे शरीर खुद hi रियेक्ट कर रहा हो.

मां जी (हस्ते हुए, गीता की गीली पंतय पे ऊँगली ferte):Arre देखो रौशनी... यह तोह अभी से रास टपकने लगी है. इतनी टाइट छूट वाली शाय गुड़िया... सांड के लौंडे की बात सुन के hi पानी निकलने लगा. अब अगर यह मोटा सांड इस्पे चढ़ गया न... तोह इसकी छूट की तिघटनेस की धज्जियाँ उड़ा देगा.

रौशनी (गीता को और तैसे karte):Haan... देखो न मां जी, यह छुईमुई कितनी घबरा रही है. पर उसकी बॉडी तोह तैयार हो रही है सांड के लिए. इसकी पतली कमर पकड़ के, उसकी टाइट गांड को थोक के, और उसके छोटे टाइट छेद में अपना मोटा बड़ा सांड वाला हथियार घुसा के छोड़ोगे न आप?

गीता सिर्फ शर्मा के मां जी के सीने में मुँह छुपाये हुए थी. उसकी पंतय अब काफी गीली हो चुकी थी, रास की हलकी सी बूँद उसकी जांघ पर भी टपकने लगी थी. वो सुब्मिसीवलय उनके टच में थी, लेकिन अभी भी बहुत शाय और घबराई हुई.

मां जी ने गीता को और तिघ्टलय गले लगा लिया. उनका सांड जैसा bhar-bharkam, घने बालों वाला सीना गीता की टाइट स्मूथ बॉडी से बिलकुल चिपक गया था. गीता की सॉफ्ट aam-jaisi चूचियां उनके हेयरी चेस्ट में डाब रही थी. उसकी पतली कमर उनके बड़े हाथों में थी और उनकी टाइट गांड उनके तइस से रगड़ खा रही थी.

गीता का शरीर काँप रहा था. पंतय अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी, उसकी छूट से रास tapak-taapak कर उसकी जाँघों तक पहुँच रहा था. वो शर्मा के सिर्फ मां जी के सीने में मुँह छुपाये हुए थी, लेकिन उसने अपने हाथ उनकी पीठ पर और ज़्यादा टाइट कर लिए थे.

मां जी (गीता को चिपकाये हुए, उसकी पीठ सहलाते हुए, रौशनी se):Arre फिर तोह इसको ट्रैन करना hi होगा न. वैसे यह छोटी इतनी लकी है की उसकी भाभी जी hi सबसे बड़ी सेक्स की देवी हैं. मर्दों को दीवाना बनाने की कला में माहिर... और सांड को कण्ट्रोल करने में भी पूरी मास्टर. देख लेना, धीरे धीरे इसकी टाइट छूट को भी तैयार कर देगी.

रौशनी (हस्ते हुए, गीता की तरफ देखते hue):Lekin मां जी जैसे दयावान काम होते हैं. कण्ट्रोल कब खुद हाथ में ले लेते हैं, उसके जैसी मांगी हुई खिलाडी को भी पता नहीं चलता. यह छुईमुई सी गुड़िया क्या चीज़ है आपके सामने? कितनी भी ट्रैन कर लो, आपका सांड वाला बड़ा मोटा हथियार जब इसकी टाइट छूट में घुसे गए न... तोह धीरे से hi पूरी तरह से फाड़ देगा उसको.

गीता यह सब सुन कर और ज़्यादा शर्मा गयी. उसका चेहरा मां जी के हेयरी चेस्ट में बिलकुल दबा हुआ था. उसकी सांस बहुत तेज़ हो रही थी और उसकी छूट से और ज़्यादा रास टपकने लगा था. पंतय का गीला पैच अब साफ़ दिखाई दे रहा था.

गीता (बहुत धीरे से, कांपते हुए, मां जी के सीने में मुँह chhupaye):B-Bhabhi... मां जी... आप दोनों प्लीज... इतना मत बोलिये... मैं... मैं मर जाउंगी शर्म से...

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लेकिन उसकी बॉडी सुब्मिसीवलय उनके अगेंस्ट चिपकी हुई थी. उसकी पतली कमर मां जी के हाथों में हिल रही थी और उसकी टाइट गांड थोड़ी सी पीछे पुश कर रही थी जैसे खुद hi उनके टच को फील करना चाहती हो.

मां जी (गीता के कान में गरम सांस फेंकते हुए, उसकी गीली पंतय पे ऊँगली ghumate)dekha रौशनी? यह सुन के hi इसकी छूट और गीली हो गयी है. सांड का बड़ा मोटा लौंडा इसकी टाइट छूट में जब तक घुसता नहीं, तब तक इसकी ट्रेनिंग नहीं होगी. पर तू तोह देवी है... इसको सीखा देगी न की सांड के सामने कैसे खुद को खोलना है?

रौशनी (गीता की तरफ आते हुए, उसके गाल पे हाथ ferte):Zaroor सिखाऊंगी. पर आप जैसे खुले सांड के सामने यह इनोसेंट गुड़िया कितनी देर तक कण्ट्रोल में रहेगी... यह तोह देखना hi पड़ेगा. इसकी टाइट छूट और चंचल गांड दोनों आज आपके हथियार के लिए खुलने वाले हैं.

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गीता सिर्फ काँप रही थी, बलुशिंग उनकंट्रोलबली, लेकिन मां जी के bhar-bharkam हेयरी चेस्ट से चिपके हुए थी. उसकी बॉडी धीरे धीरे उनके कण्ट्रोल में आ रही थी.

मां जी ने गीता को और तिघ्टलय अपने सीने से चिपकाया. उनका bhar-bharkam बालों वाला सांड जैसा चेस्ट गीता की सॉफ्ट स्मूथ बॉडी से बिलकुल लगा हुआ था. फिर उन्होंने धीरे से अपना हाथ गीता की गीली पंतय के अंदर दाल दिया.

मां जी (गरम आवाज़ mein):Ab इसकी ट्रेनिंग शुरू करते हैं...

उन्होंने गीता की पंतय को dheere-dheere नीचे खिंच दिया. गीता की टाइट, स्मूथ, छोटी सी छूट अब बिलकुल नंगी हो गयी. उसकी छूट पहले से hi रास से चमक रही थी.

गीता (शर्म से कांपते हुए, मां जी के सीने में मुँह छुपाते हुए, हलकी सी सिसकी के saath):N-Nahi मां जी... प्लीज... मत देखो... बहुत शर्म आ रही है...

लेकिन उसने कोई हाथ नहीं उठाया. सिर्फ अपनी तइस को थोड़ा सा क्लोज करने की कोशिश की, जो फ़ैल हो गयी क्यूंकि मां जी के बड़े हाथ उसकी जाँघों के बीच थे.

मां जी ने एक हाथ से गीता की पतली कमर पकड़ी और दूसरे हाथ की उँगलियों से उसकी टाइट छूट पे डायरेक्ट टच कर दिया. उनकी मोती ऊँगली उसके रास से गीले लिप्स पे घूमने लगी, और धीरे से उसकी छोटी सी क्लीट को सहलाने लगे.

मां जी (रौशनी से, ऊँगली गीता की छूट में हलके से अंदर बहार करते hue):Dekh रौशनी... कितनी टाइट और गरम छूट है इसकी. सांड का मोटा बड़ा हथियार इसमें घुसे गए तोह सच में धज्जियाँ उड़ा देगी. अभी से इतना रास टपक रहा है.

रौशनी (एक्टीवेली हेल्प करते हुए, गीता के पीछे आ कर उसको मां जी से चिपकाये रखते hue):Main भी इसकी ट्रेनिंग में मदद करती हूँ मां जी. यह छुईमुई गुड़िया को खुद नहीं पता कितनी लकी है.

रौशनी ने गीता के पीछे से उसकी चूचियों को पकड़ लिया और dheere-dheere मसलने लगी. एक हाथ से गीता की पतली कमर पकड़ कर उसको मां जी के अगेंस्ट और तिघ्टलय प्रेस कर दिया.

रौशनी (गीता के कान में धीरे se):Sharma मत मेरी जान... अपनी भाभी को देख. सांड को कण्ट्रोल करने का तरीका मैं सिखाऊंगी तुझे. अब मां जी की ऊँगली को अंदर लेने की कोशिश कर...

गीता पूरी तरह से ब्लश कर रही थी. उसकी आँखें बंद थी, चेहरा लाल, और वो सिर्फ halki-halki सिसकियाँ भर रही थी.

गीता (शर्म से बहुत धीरे से, कांपते hue):B-Bhabhi... आप भी... ओह्ह... मां जी... आपकी ऊँगली... बहुत मोती है... दर्द हो रहा है थोड़ा... प्लीज धीरे...

लेकिन उसकी छूट मां जी की ऊँगली के अराउंड और ज़्यादा रास निकल रही थी. उसकी टाइट यंग बॉडी सुब्मिसीवलय दोनों के बीच में डाब रही थी. वो धीरे धीरे अपनी कमर हिलाने लगी थी मां जी के हाथ के रदम में.

मां जी (अपनी ऊँगली गीता की टाइट छूट में थोड़ी गहरी डालते हुए, रौशनी se):Bahut टाइट है यह... सांड को बहुत म्हणत करनी पड़ेगी इसको खोलने में. पर तेरी मदद से जल्दी हो जाएगा.

रौशनी (गीता की चूचियों को दबाते हुए और उसके निप्पल्स को पिंच karte):Haan... धीरे धीरे इसको तैयार करेंगे. यह गुड़िया अभी बहुत शर्मीली है, पर सांड के लिए खुल जायेगी.

गीता सिर्फ काँप रही थी, शर्मा रही थी, लेकिन उसकी बॉडी अब धीरे धीरे दोनों के टच में रेस्पोंद करने लगी थी.

**सन कॉन्टिनुएस:**

मां जी ने गीता को थोड़ा सा दूर किया. उनकी आँखों में भूख साफ़ दिखाई दे रही थी. उन्होंने अपनी पंत की ज़िप खोली और अपना मोटा, बड़ा, लौड़ा बहार निकाल दिया. वह पूरा खड़ा और मोटा था — जैसे सांड का बड़ा हथियार, लटकता हुआ, वेइन्स से भरा.

**मां जी** (अपना मोटा लौड़ा हाथ में पकड़ कर गीता के सामने ले आते हुए):

अब असली ट्रेनिंग शुरू होती है मेरी शाय गुड़िया...

गीता ने आँखें खोल कर देखा और तुरंत शर्मा के आँखें फिर से बंद कर ली. उसका मुँह खुला रह गया.

**गीता** (बहुत धीरे से, कांपते हुए, शर्म से):

M-Mama जी... यह... इतना बड़ा... नहीं... मैं नहीं कर पाऊँगी... बहुत शर्म आ रही है...

**रौशनी** (एक्टीवेली हेल्प करते हुए, गीता के पीछे से उसके बाल पकड़ कर उसका मुँह थोड़ा ऊपर की तरफ किया):

शर्मा मत गीता. भाभी सिखाती है. सांड का मोटा हथियार मुँह में लेने का तरीका बताउंगी. यह तेरी ट्रेनिंग का पहला स्टेप है.

रौशनी ने गीता को धीरे से घुटनो के बल बैठने में मदद की. अब गीता मां जी के सामने घुटनो पे बैठी थी, उनका मोटा लौड़ा उसके मुँह के बिलकुल सामने था.

गीता की टाइट यंग बॉडी अभी भी काँप रही थी, उसकी छूट से रास टपक रहा था.

**मां जी** (अपना मोटा लौड़ा गीता के लिप्स पे रगड़ते हुए):

ले बीटा... अपने सॉफ्ट होठ खोल. सांड का यह मोटा चीज़ तुझे ट्रैन करेगा. पहले सिर्फ चूसना शुरू कर.

रौशनी ने गीता के पीछे से उसकी चूचियों को पकड़ कर मसला और उसके कान में कहा:

**रौशनी:**

धीरे से मुँह खोल... जुबां से चाट पहले. जैसे आइस क्रीम चूस रही हो. भाभी यहाँ है, डर मत.

गीता शर्म से पूरी तरह लाल हो चुकी थी. उसकी आँखों में आंसू आ गए थे शर्म के मारे, लेकिन उसने धीरे से अपना मुँह खोला. मां जी ने अपने मोटा लौड़ा के सूपड़ा को उसके सॉफ्ट लिप्स पे रगड़ा.

**गीता** (हलकी सी सिसकी के साथ, मुँह में लेते हुए):

मममहह... बहुत बड़ा है मां जी... मुँह में नहीं आ रहा...

लेकिन वो सुब्मिसीवलय अपनी जुबां से चाटने लगी. रौशनी उसके बाल पकड़ कर धीरे धीरे उसका सर aage-peeche करवा रही थी, ओरल ट्रेनिंग शुरू करवा रही थी.

**मां जी** (सुकून से सांस लेते हुए):

बहुत अच्छा... देखो रौशनी, मेरी छुईमुई गुड़िया धीरे धीरे सीख रही है. इसकी टाइट छूट के बाद इसका मुँह भी ट्रैन हो जाएगा सांड के लिए.

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**रौशनी** (गीता की चूचियों को दबाते हुए):

हाँ... और गहरा लेने की कोशिश कर गीता. सांड जब पीछे से चढ़ेगा न, तब यह ट्रेनिंग काम आएगी. अब जुबां से अच्छे से चाट... पूरा मोटा लौड़ा गीला कर दे.

गीता अब घुटनो के बल बैठी, मां जी का मोटा लौड़ा अपने मुँह में ले कर dheere-dheere चूस रही थी. उसकी आँखें बंद थी, चेहरा लाल, लेकिन वो सुब्मिसीवलय साथ दे रही थी. उसकी छूट से और भी ज़्यादा रास टपक रहा था ज़मीन पर.

**गीता** (मुँह भरे हुए, शर्म से हलकी आवाज़ में):

ममम... मां जी... आपका... बहुत मोटा है...

रौशनी गीता के पीछे घुटनो के बल बैठी थी. उसने गीता के बाल पकड़ कर उसका मुँह मां जी के मोटा लौड़ा के पास गाइड किया.

रौशनी (सॉफ्ट और ट्रेनिंग वाली आवाज़ mein):Geeta सुन... पहले किश कर इससे. Bade-bade प्यारे किश दे मोटा लुंड को. जैसे कोई प्यारा चीज़ हो. फिर जुबां से शाफ़्ट को लीक कर... ऊपर से नीचे तक पूरा गीला कर दे. तभी अच्छे से मुँह में ले सकती है. समझी?

गीता (शर्म से कांपते हुए, आँखें neeche):Ji... भाभी...

गीता ने शर्माते हुए मां जी के मोटा लौड़ा के सुपडे पे ek-do छोटे किश किये. फिर उसकी जुबां से शाफ़्ट को चाटने की कोशिश की, लेकिन वो बहुत नर्वस थी. उसका काम स्लॉपी हो रहा था — जुबां idhar-udhar कर रही थी, पूरा शाफ़्ट गीला नहीं हो प् रहा था, और वो सिर्फ टिप तक hi ले प् रही थी.

गीता (मुँह से निकालते हुए, शर्म se):Bhabhi... बहुत मोटा है... मेरा मुँह छोटा है... सही से नहीं हो रहा...

रौशनी (प्यार से हस्ते hue):Arre मेरी शाय गुड़िया... देखती है मैं कैसे करती हूँ. ध्यान से देख.

रौशनी ने आगे बढ़ कर मां जी का मोटा, बड़ा, सांड जैसा लौड़ा अपने सॉफ्ट हाथों में ले लिया. उसने पहले उसको प्यार से करेस किया, ऊपर नीचे हाथ फेरते हुए.

रौशनी (लुंड को देखते हुए, सेडक्टिव आवाज़ mein):Mmm... कितना मोटा और सांड जैसा है यह लुंड... लेकिन कितना प्यारा भी है. इतना बड़ा, इतना गरम... और कितना मज़ेदार.

उसने फिर मां जी के लुंड पे बहुत सारे प्यारे किश किये — सुपडे पे, शाफ़्ट के ऊपर, नीचे तक. फिर उसकी जुबां से पूरे शाफ़्ट को अच्छे से चाटने लगी, ऊपर से नीचे तक, दोनों तरफ, पूरा गीला और चमकदार कर दिया.

रौशनी (गीता को समझाते हुए, लुंड को चूसते hue)dekh... पहले किस्सेस, फिर लीक... पूरा वेट करो. अब देख कैसे मुँह में लेती हूँ...

रौशनी ने अपना मुँह खोला और धीरे से मां जी का मोटा लुंड अंदर लिया. वो अच्छे से सूचक कर रही थी — ऊपर नीचे हेड मूवमेंट के साथ, कभी जुबां से चाट टी, कभी गहरा ले लेती. उसकी सॉफ्ट लिप्स लुंड के अराउंड टाइट हो रही थी.

रौशनी (लुंड मुँह से निकाल कर गीता se):Ab तू तरय कर. किस्सेस दे, लीक कर पूरा वेट, और फिर सूचक कर. धीरे से शुरू कर.

गीता ने शरमाते हुए फिर कोशिश की. अब थोड़ी बेहतर थी — उसने मां जी के लुंड पे कुछ और किस्सेस दिए, शाफ़्ट को लीक किया (अभी भी स्लॉपी था लेकिन बेहतर), और धीरे से टिप को मुँह में ले कर चूसने लगी.

गीता (मुँह भरे हुए, हलकी सिसकी के saath):Mmmhh... मां जी... आपका... बहुत बड़ा है... मैं तरय कर रही हूँ...

मां जी (सुकून से, गीता के सर पे हाथ फेरते hue):Bahut अच्छा बीटा... धीरे धीरे सीख जायेगी. तेरी भाभी बहुत अच्छी टीचर है.

रौशनी गीता के साथ hi थी, कभी उसके बाल पकड़ कर गाइड कर रही थी, कभी खुद भी किश और लीक कर के दिखा रही थी. गीता अब भी शर्मा रही थी लेकिन सुब्मिसीवलय ट्रेनिंग ले रही थी, उसकी छूट अब भी रास से गीली हो रही थी.

रौशनी ने गीता के बाल पकड़ कर उसका मुँह मां जी के मोटा लौड़ा के सामने किया.

रौशनी:अब तरय कर दीप्तरोात की... धीरे से अंदर ले, गले तक. सांस नोज से ले और रिलैक्स कर.

गीता ने बहुत शर्माते हुए कोशिश की. उसने मां जी का सूपड़ा मुँह में लिया और धीरे से अंदर पुश करने लगी. लेकिन लुंड बहुत मोटा और लम्बा था.

गीता (मुँह भरे हुए, आँखों में आंसू आते हुए, गैग करते hue):Mmmhh... ुघ्घ... नहीं... बहुत बड़ा है भाभी... गले तक नहीं जा रहा... मैं नहीं कर पा रही... उफ्फ्फ ...

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गीता का मुँह गीला हो चूका था, थूक के साथ लुंड चमक रहा था, लेकिन वो डीप नहीं ले प् रही थी. वो शर्म से मां जी के लुंड की तरफ देखती भी नहीं पा रही थी.

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रौशनी (प्यार से गीता के गाल पे हाथ फेरते hue):Koi बात नहीं मेरी जान, पहली बार में नहीं होता. अब हम दोनों साथ में करते हैं. बहुत प्यार से.

रौशनी ने गीता के साथ hi घुटनो के बल बैठ कर मां जी के मोटा लुंड को दोनों तरफ से पकड़ा. दोनों बहनें अब साथ में उसको प्यार से चूसने लगी.

रौशनी और गीता दोनों मां जी के बड़े लुंड पे किस्सेस बरसने लगी — सुपडे पे, शाफ़्ट पे, नीचे तक. रौशनी गीता को beech-beech में सीखा रही थी.

रौशनी (लुंड को चाट ते हुए, गीता se):Dekh... पहले जुबां से पूरा गीला करो... फिर धीरे से अंदर लो. गले की गहराई तक जाने के लिए रिलैक्स करना पड़ता है. ऐसे...

रौशनी ने खुद डेमोंस्ट्रेटे किया. उसने मां जी का मोटा लुंड अपने मुँह में गहरा ले लिया, गले तक, और कुछ सेकण्ड्स तक वहां रखा.

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फिर बहार निकाल कर गीता को दिखाया.

रौशनी:देखा? सांस रोक के थोड़ा प्रैक्टिस कर. अब तू भी तरय कर.

गीता ने फिर कोशिश की. रौशनी उसके बाल पकड़ कर धीरे से गाइड कर रही थी. गीता थोड़ा गहरा ले प् रही थी अब, लेकिन फिर भी गैग हो जा रही थी.

दोनों बहनें फिर साथ में लुंड को प्यार से चूसने लगी — कभी गीता टिप चूस रही होती, कभी रौशनी गहरा ले रही होती. दोनों की ज़ुबानें मां जी के मोटा लुंड पे मिल रही थी. रौशनी beech-beech में गीता को सिखाती:

रौशनी:जुबां नीचे रख... हाथ से शाफ़्ट को हिलाते हुए चूस... और जब गहरा ले सके तब गले की मुस्कले रिलैक्स कर. ऐसे देखो...

रौशनी ने फिर से डीप ले लिया और थोड़ा सा मोअन किया, फिर गीता को भी तरय करने दिया.

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मां जी (सुकून से, हाथ दोनों के सर पे फेरते hue):Wahhh... दोनों बहेनो का मुँह कितना प्यारा लग रहा है मेरे सांड के लुंड पे. गीता धीरे धीरे सीख रही है.

गीता (लुंड चूसते हुए, शर्म से हलकी आवाज़ mein):Bhabhi... आप इतना अच्छा कर लेती हैं... मैं भी तरय कर रही हूँ... मममहह...

दोनों अब प्यार से साथ में सूचक कर रही थी. गीता अभी भी शाय थी लेकिन रौशनी के साथ होने से थोड़ा कॉंफिडेंट फील कर रही थी. मां जी का मोटा लुंड दोनों के मुँह और थूक से चमक रहा था.

रौशनी ने गीता के बाल से हाथ नहीं हटाया. वो मुस्कुराई और धीरे से बोली.

रौशनी:तू क्विक लर्नर है मेरी जान, लेकिन अभी जल्दी मत कर. हम स्लो लेते हैं. सिर्फ सॉफ्ट लीक्स और बहुत सारे वेट किस्सेस... और सिर्फ सुपडे को hi मुँह में ले के चूस. आज हम लेडीज का टाइम है इस खुले सांड को कण्ट्रोल करने का.

रौशनी ने मां जी के मोटा लौड़ा अपने हाथ में पकड़ा और गीता को साथ में गाइड किया.

रौशनी (प्यार se)dekh गीता... ऐसे. बहुत प्यार से किश कर इसको. जैसे यह तेरा फवौरीते चीज़ हो.

दोनों ने फिर से मां जी के बड़े सुपडे पे वेट किस्सेस बरसने शुरू किये. गीता अब dheere-dheere सीख रही थी. उसने शर्माते हुए सुपडे पे एक के बाद एक सॉफ्ट, गीले किश किये. फिर उसकी जुबां निकली और धीरे से लीक करने लगी.

रौशनी (गीता को सिखाते hue):Haan ऐसे... जुबां को पूरे सुपडे पे घुमा. अच्छे से गीला कर. अब सिर्फ हेड को मुँह में ले और धीरे धीरे चूस. बहुत स्लो... जैसे लोल्लिपोप.

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गीता ने मां जी के सुपडे को अपने सॉफ्ट लिप्स में ले लिया और dheere-dheere चूसने लगी. अब वो थोड़ी बेहतर कर रही थी — क्विक लर्नर होने के बावजूद रौशनी उसको स्लो रख रही थी.

रौशनी (मां जी के लुंड को गीता के साथ लीक करते hue):Yeh hi वक़्त होता है हम लेडीज का... जब हम एक खुले सांड जैसे मां जी को कण्ट्रोल कर सकते हैं. देख, अभी यह सांड हमारे हाथों में है. इस मोटा, वाइल्ड सांड को टेम करने का यही तरीका है — प्यार से, धीरे से, किस्सेस से, लीक्स से. बहुत जल्दी मत कर, वर्ण सांड खुल जाएगा और तुझे फाड़ देगा.

गीता (सूपड़ा मुँह में ले कर, हलकी सी आवाज़ mein):Mmmhh... भाभी... समझ रही हूँ... यह... बहुत मोटा है... लेकिन प्यारा भी लग रहा है अब...

दोनों बहनें अब बहुत प्यार से मां जी के लुंड के सुपडे को चूस रही थी. कभी गीता सिर्फ हेड चूस रही होती, कभी रौशनी उसके साथ मिलकर लीक कर रही होती. बहुत सारे वेट किस्सेस, सॉफ्ट लीक्स — लुंड का सूपड़ा पूरा चमक रहा था उनके थूक से.

रौशनी (गीता को और मोटीवेट करते hue):Aur किस्सेस दे... जुबां से ऊपर निचे कर... यहीं से हम इस वाइल्ड सांड को टेम करेंगे. जब तक यह खुला सांड हमारी मर्ज़ी से नहीं चलेगा, तब तक हम इसे कण्ट्रोल में रखेंगे.

मां जी (सुकून से मोअन करते हुए, हाथ दोनों के सर pe):Uff... दोनों कितना अच्छा कर रही हो... मेरी शाय गीता भी धीरे धीरे सांड को मन रही है.

गीता अब शर्मा तोह रही थी, लेकिन वो क्विक लर्नर की तरह रौशनी के साथ मिलकर प्यार से लुंड के हेड को चूस और लीक कर रही थी. उसकी छूट अब भी रास से गीली हो रही थी.

रौशनी ने मां जी के मोटा लुंड को हाथ में पकडे रखा और गीता की तरफ देखा.

रौशनी:अब हम ऐसे करेंगे की पहले में चूसूंगी फिर तुम .. . लेकिन आज ज़्यादा तर गीता hi करेगी. मैं सिर्फ गाइड करुँगी. यह ट्रेनिंग उसके लिए ज़रूरी है.

रौशनी ने पहले खुद एक बार गहरा सूचक किया, फिर लुंड बहार निकाल कर गीता के मुँह के पास किया.

रौशनी:अब तू ले. बहुत प्यार से. किस्सेस, लीक्स, और हेड चूस.

गीता शर्मा रही थी लेकिन क्विक लर्नर होने के बावजूद उसने अपना मुँह आगे बढ़ाया. उसने पहले मां जी के सुपडे पे 4-5 वेट किस्सेस किये, फिर जुबां से अच्छे से लीक किया, और धीरे से सूपड़ा मुँह में ले कर चूसने लगी.

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गीता (मुँह भरे हुए, धीरे dheere):Mmmhh... मां जी...

रौशनी ने उसके बाल पकड़ कर धीरे से गाइड किया, लेकिन ज़्यादा फाॅर्स नहीं किया.

रौशनी:हाँ ऐसे... अच्छे से चूस. जुबां अंदर घुमा. बहुत प्यारा लग रहा है तेरा मुँह.

थोड़ी देर बाद रौशनी ने लुंड अपने मुँह में लिया, लेकिन सिर्फ 10-15 सेकण्ड्स तक. फिर तुरंत गीता को वापस दे दिया.

रौशनी:अब फिर तू. ज़्यादा टाइम तू hi ले. मैं देखूंगी और सिखाऊंगी.

गीता ने फिर से फोकस किया. उसने मां जी के मोटा लुंड के सुपडे पे बहुत सारे सॉफ्ट वेट किस्सेस दिए, पूरे हेड को जुबां से लीक किया, और dheere-dheere चूसने लगी. वो अब थोड़ी बेहतर कर रही थी — हेड को मुँह में ले कर halke-halke सूचक कर रही थी.

रौशनी beech-beech में सिर्फ थोड़ा सा सूचक करती, फिर तुरंत गीता को मौका दे देती.

रौशनी (गीता को सिखाते hue)dheere से हेड को अंदर बहार कर... जुबां नीचे से ऊपर तक. देख, सांड का यह मोटा लुंड अब तेरे कण्ट्रोल में है. इससे टेम करने का यही तरीका है — प्यार से, धीरे से, बहुत सारे किस्सेस और लीक्स से.

गीता (लुंड चूसते हुए, शर्म से हलकी आवाज़ mein):Bhabhi... यह... बहुत मोटा है... मुँह में भर रहा है... लेकिन मैं तरय कर रही हूँ...

रौशनी ने गीता को और ज़्यादा मौका दिया. वो खुद सिर्फ kabhi-kabhi लीक कर देती या किश कर देती, बाकी टाइम गीता hi मां जी के लुंड को लीक, किश और सूचक कर रही थी.

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मां जी (हाथ गीता के सर पे फेरते hue):Bahut अच्छा लग रहा है बीटा... तेरी सॉफ्ट जुबां और लिप्स... धीरे धीरे पूरा सीख जायेगी.

गीता अब थोड़ी कॉंफिडेंट फील कर रही थी. वो dheere-dheere मां जी के सुपडे को अच्छे से चूस रही थी, बहुत सारे वेट किस्सेस दे रही थी, और रौशनी के गाइडेंस में स्लो ट्रेनिंग ले रही थी.

मां जी ने दोनों की तरफ देखा और गरम आवाज़ में बोलै.

मां जी:रौशनी, अब तुम दोनों साथ में मेरा लुंड चुसो. गीता टोपा पे फोकस करे, तू शाफ़्ट को छाते. दोनों मिलकर मेरा लुंड मज़े से एन्जॉय करो.

रौशनी ने तुरंत मान लिया और गीता को अपने पास खींच लिया.

रौशनी:सुन गीता, अब हम दोनों एक साथ करेंगे. तू सिर्फ टोपा को अपने मुँह में ले और चूस. मैं शाफ़्ट को चाटूँगी.

दोनों अब मां जी के मोटा लुंड के दोनों तरफ से लग गयी. गीता ने शर्माते हुए टोपा को अपने सॉफ्ट लिप्स में ले लिया और धीरे धीरे चूसने लगी. रौशनी ने निचे से शाफ़्ट को जुबां से चाटना शुरू कर दिया.

मां जी (सुकून se):Haan ऐसे... दोनों मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है. गीता टोपा को प्यार से चूस, और तू पूरा शाफ़्ट गीला कर दे.

गीता अब सिर्फ टोपा पे फोकस कर रही थी. उसने टोपा पे बहुत सारे गीले किश किये, जुबां घुमाई और धीरे धीरे चूस रही थी. रौशनी निचे से शाफ़्ट को लम्बी लम्बी चाट मार रही थी, कभी कभी गीता के लिप्स के पास भी जुबां ले जाती.

रौशनी (गीता को धीरे se):Haan मेरी साली, टोपा को अच्छे से मुँह में रख. दोनों साथ में इस खुले सांड के लुंड को मज़े दे रहे हैं.

मां जी (हाथ दोनों के सर पे फेरते hue):Bahut मज़ा आ रहा है... भाभी और साली मिलकर मेरा लुंड बहुत प्यार से सेवा कर रही हो.

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गीता शर्म से आँखें बंद किये टोपा को चूस रही थी, लेकिन अब वो धीरे धीरे मज़े ले रही थी. रौशनी उसको बीच बीच में गाइड भी कर रही थी.

रौशनी अब बहुत ज़्यादा गरम हो चुकी थी. उसने मां जी की तरफ देखा और गरम आवाज़ में कहा.

रौशनी:मां जी, आप खड़े हो जाइये. अब मैं और गीता दोनों आपको मज़े देंगे.

मां जी खड़े हो गए. उनका मोटा लुंड सीधा खड़ा था.

रौशनी (गीता se):Geeta, तू आगे जा और मां जी का मोटा लुंड चूस. मैं पीछे जाती हूँ.

गीता शर्माते हुए आगे बढ़ी और घुटनो के बल बैठ कर मां जी के मोटा लुंड को अपने मुँह में ले लिया. उसने टोपा को अपने सॉफ्ट लिप्स से चूसना शुरू कर दिया.

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रौशनी पीछे चली गयी. उसने मां जी की गांड के दोनों ग्लोब्स को हाथों से फैला दिया और अपना मुँह उनके बीच में दाल दिया. उसकी जुबां मां जी के ासशोले पे पहुँच गयी और वो गहरी गहरी चाटने लगी.

मां जी (सुकून से मोअन करते hue):Uffff... रौशनी... यह क्या कर रही है तू... बहुत मज़ा आ रहा है... स्वर्ग जैसे लग रहा है...

रौशनी अब पूरी तरह से हॉर्नी हो कर मां जी की गांड चाट रही थी. उसकी जुबां ासशोले के अंदर बहार घूम रही थी, गहरी लिकिंग कर रही थी.

गीता आगे से मां जी का मोटा लुंड चूस रही थी — टोपा को मुँह में लेकर धीरे धीरे सूचक कर रही थी, कभी लीक्स और किस्सेस दे रही थी.

दोनों अब यूनिसन में काम कर रही थी — गीता आगे से लुंड चूस रही थी और रौशनी पीछे से गांड चाट रही थी.

मां जी (हाथ गीता के सर पे रख कर, आवाज़ में mazaa):Arre वहहह... एक तरफ साली मेरा मोटा लुंड चूस रही है, दूसरी तरफ भाभी मेरी गांड चाट रही है... दोनों ने मिलकर मुझे स्वर्ग में पहुंचा दिया है आज.

रौशनी (गांड चाटते हुए, थोड़ी रुक kar):Geeta धीरे से चूस... मैं इस सांड की गांड को अच्छे से साफ़ कर रही हूँ जुबां से.

गीता शर्म से आँखें बंद किये लुंड चूस रही थी, लेकिन अब वो भी धीरे धीरे मज़े लेने लगी थी. रौशनी की हॉर्नी लिकिंग मां जी को दीवाना बना रही थी.

मां जी अब पूरे मज़े में था, दोनों तरफ से सेवा ले रहा था.

मां जी खड़े हुए थे, उनका पूरा शरीर टेंशन में था. उनके मुँह से सिर्फ मोअन्स और गरम आवाज़ें निकल रही थी.

मां जी:आआह्ह्ह... उफ्फ्फ्फ़... बहुत गहरी चाट रही है तू रौशनी... मेरी गांड के अंदर तक जुबां दाल रही है... स्वर्ग है यह...

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गीता आगे से उनके मोटा लुंड को अब गहरा ले रही थी. उसने टोपा के साथ शाफ़्ट का भी हिस्सा मुँह में लेने की कोशिश की थी.

मां जी:ओह्ह्ह गीता... मेरी साली... इतना गहरा मुँह में ले रही है... तेरी सॉफ्ट लिप्स और गरम जुबां... कितना मज़ा दे रही है तू...

रौशनी ने मां जी की गांड के ग्लोब्स को और फैला दिया और अपनी जुबां को गहरा अंदर तक घुसा दिया, zor-zor से चाटने लगी.

मां जी:उफ्फ्फ्फ़... हहहह... रौशनी... तेरी जुबां मेरी गांड के अंदर घूम रही है... कितनी गहरी लिकिंग कर रही है... मैं पागल हो जाऊँगा...

गीता ने अपना मुँह और गहरा किया और धीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगी, मोटा लुंड को अच्छे से चूस रही थी.

मां जी:अरे गीता... बहुत अच्छा चूस रही है तू... मेरा पूरा लुंड तेरी गरम मुँह में... आआह्ह... दोनों ने मिलकर मुझे दीवाना कर दिया है आज...

रौशनी की जुबां अब तेज़ तेज़ अंदर बहार हो रही थी ासशोले में, गहरी रिम्मिंग कर रही थी.

मां जी:हहहह... रौशनी... और गहरा... मेरी गांड चाट... और गीता तू भी मत रुक... मेरा लुंड गहरा मुँह में ले... दोनों साथ में... उफ्फ्फ्फ़... स्वर्ग... बिलकुल स्वर्ग है यह...

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मां जी के पेअर काँप रहे थे. उनके मुँह से सिर्फ मज़े भरी सिसकियाँ और गरम आवाज़ें निकल रही थी.

मां जी:ओह्ह्ह मा... दोनों बहेनो का यह सेवा... एक मेरी गांड चाट रही है, दूसरी मेरा मोटा लुंड चूस रही है... मैं झड़ने वाला हूँ... आआह्ह्ह...

दोनों अभी भी तेज़ पेस में जारी थी — रौशनी गहरी गांड लिकिंग और गीता गहरा लुंड की चूसै..
 
रौशनी और गीता दोनों अभी भी मां जी को मज़े दे रही थी. रौशनी ने गहरी लिकिंग छोड़ कर आगे आयी. उसने मां जी के मोटा लुंड को अपने दोनों हाथों में पकड़ा और zor-zor से चूसने लगी. पूरा लुंड अपने मुँह में ले कर अच्छे से गीला कर दिया — ऊपर से नीचे तक थूक से चमकदार बना दिया.

रौशनी (लुंड चूसते hue):Mama जी, अब आपकी तैयारी हो गयी है... इस मोटा लुंड को गीता की कुंवारी छूट में डालने के लिए बिलकुल वेट कर दिया मैंने.

फिर रौशनी ने गीता की तरफ देखा.

रौशनी:गीता, अब तू बिस्तर पर लेट जा... नंगी हो जा.

गीता शर्माते हुए उठी और बिस्तर पर लेट गयी. उसने अपने सारे कपडे उतार दिए थे. अब वो पूरी तरह नंगी थी — उसकी टाइट यंग बॉडी, पतली कमर, aam-sized चूचियां और टाइट चंचल गांड सब कुछ खुला हुआ था.

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गीता मां जी के मोटा, लटकता हुआ लुंड को देख कर सेहम गयी. उसकी आँखें फैल गयी थी.

गीता (डर और शर्म से कांपते hue):Mama जी... यह... इतना मोटा और बड़ा है... मेरी छूट में कैसे जाएगा... मैं दर रही हूँ... आज मेरी कुंवारी छूट आप hi छुडवाओगे न...

मां जी ने गीता के पास आकर बिस्तर पर चढ़ गए. उनका मोटा, गीला लुंड अब गीता की टाइट कुंवारी छूट के बिलकुल ऊपर लटक रहा था.

मां जी (गीता की पतली कमर पकड़ते हुए, गरम आवाज़ mein):Haan मेरी साली... आज तेरी कुंवारी छूट की चुदाई मैं hi करूँगा. डर मत... धीरे धीरे अंदर डालूंगा. रौशनी तू भी यहाँ आ, इसकी चूचियां और गांड को संभाल.

रौशनी बिस्तर पर आकर गीता की एक तरफ लेट गयी. उसने गीता की चूचियों को मसलने शुरू कर दिया और उसके कान में धीरे से बोली.

रौशनी:डर मत गीता... सांड का मोटा लुंड तेरी टाइट छूट में जाएगा आज. पहली बार थोड़ा दर्द होगा, फिर मज़ा आएगा.

गीता शर्म और डर से आँखें बंद किये लेती थी, उसकी सांस तेज़ हो रही थी. उसकी कुंवारी छूट अभी से थोड़ी गीली होने लगी थी.

मां जी अपना मोटा लुंड गीता की छूट के मुँह पर रगड़ने लगे.

गीता बिस्तर पर नंगी लेती हुई थी. जब मां जी ने अपना मोटा लुंड उसकी छूट के मुँह पर रगड़ना शुरू किया, तोह वो डर गयी.

गीता (डर से कांपते हुए, रोको hue):Nahi मां जी... आज नहीं... कभी और... प्लीज... मेरी कुंवारी छूट में यह मोटा लुंड नहीं जाएगा... बहुत दर्द होगा...

रौशनी (तुरंत गीता के पास आकर उसको गले लगते hue):Arre मेरी प्यारी साली... डर मत. बहुत मज़ा आएगा. बस पहली बार थोड़ा सा दर्द सहेगी, उसके बाद सिर्फ सुख hi सुख मिलेगा. मैं यहाँ हूँ न तेरे साथ...

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रौशनी ने गीता के होठों पे एक लम्बी, गहरी किश दे दी. उसने गीता के लिप्स को अपने मुँह में ले कर अच्छे से चूसा, जुबां अंदर दाल दी. गीता शर्माते हुए किश का जवाब देने लगी.

उसी बीच मां जी ने अपना मोटा, गीला लुंड गीता की टाइट कुंवारी छूट के मुँह पर सेट किया और धीरे से प्रेशर डालना शुरू कर दिया.

मां जी:बस धीरे धीरे जा रहा हूँ बीटा...

सिर्फ 3 इंच hi अंदर घुस पाया था की गीता की आँखें फैल गयी और वो चिल्लाने लगी.

गीता (चिल्लाते हुए, दर्द और शर्म se):Uffff... मममहह... मां जी... आआह्ह... छोड़िये... उफ़ बहुत मोटा है आपका... मेरी छूट पहात रही है... नहीं... बहुत दर्द हो रहा है... मममहह...

गीता के हाथ बिस्तर की चादर को पकड़ रहे थे. उसकी टाइट छूट सिर्फ 3 इंच लुंड ले कर hi बहुत टाइट हो रही थी. उसकी आँखों में आंसू आ गए थे.

रौशनी (गीता को किश करते हुए और उसकी चूचियों को मसलते hue):Bas थोड़ा सा और सेह ले मेरी जान... धीरे धीरे मज़ा आने लगेगा...

मां जी (अपना लुंड थोड़ा और अंदर पुश करते hue):Haaahhh... कितनी टाइट है तेरी कुंवारी छूट गीता... बिलकुल डब्बा हुआ है मेरा लुंड अंदर...

गीता अभी भी दर्द से कराह रही थी, लेकिन रौशनी के किश और टच से थोड़ी सी रिलैक्स भी हो रही थी.

मां जी ने गीता की टाइट कुंवारी छूट को देखा. उसने अपना मोटा लुंड बहार निकाला, थोड़ा सा ऊपर किया और ज़ोर से थूक लगा दिया — पहले गीता की छूट पर, फिर अपने लुंड पर भी अच्छे से थूक लगाया. लुंड और छूट दोनों चमकने लगे थे.

मां जी:अब और धीरे धीरे अंदर जाएगा...

उन्होंने अपना मोटा लुंड फिर से गीता की छूट के मुँह पर सेट किया और धीरे धीरे प्रेशर डालना शुरू किया. 3 इंच से बढ़ कर अब 5 इंच तक अंदर चला गया.

गीता जोरों से चिल्लाने लगी. उसकी आवाज़ पुम्फोसे के अंदर गूँज रही थी.

गीता (दर्द से चिल्लाते हुए, आंसू बहते hue):Aaaahhhh... मां जी... उफ्फ्फ्फ़... बहुत दर्द हो रहा है... नहीं... बहुत मोटा है... मेरी छूट पहात रही है... आआह्ह... छोर दो प्लीज... मममहहह... इतना अंदर मत डालो...

गीता के हाथ मां जी की पीठ को पकड़ रहे थे, कभी धकेलने की कोशिश कर रही थी, कभी खुद hi पकड़ लेती थी. उसकी टाइट छूट अब 5 इंच मोटा लुंड ले कर बहुत ज़्यादा स्ट्रेच हो रही थी.

लेकिन यह जगह बिलकुल सुनसान थी — खेत के बीच में पुम्फोसे के अंदर. बहार कोई भी सुनने वाला नहीं था. गीता की zor-zor की चिल्लाएं सिर्फ तीनो के बीच hi गूँज रही थी.

मां जी (गरम सांस लेते हुए, लुंड को थोड़ा और अंदर dhakelte):Haaahhh... कितनी टाइट है तेरी कुंवारी छूट... अब 5 इंच तक अंदर चला गया है... बहुत ज़ोर से डाब रहा है मेरा लुंड... सेह ले बीटा... धीरे धीरे पूरा अंदर करूँगा...

रौशनी (गीता को गले लगाए हुए, उसके गाल पे किश करते hue):Bas थोड़ा और सेह ले मेरी साली... दर्द धीरे धीरे काम हो जाएगा... अभी तोह सिर्फ शुरुआत है.

गीता अभी भी दर्द से कराह रही थी, उसकी सांस फूली हुई थी, लेकिन मां जी का मोटा लुंड अब 5 इंच अंदर तक घुसा हुआ था और धीरे धीरे और अंदर जाने की कोशिश कर रहा था.

यह एक पुराण, सुनसान पुम्फोसे था खेत के बिलकुल बीच में. चरों तरफ गहरा अँधेरा, सिर्फ एक छोटी सी बल्ब की हलकी येलो रौशनी चल रही थी जो तीनो के शरीर पर पद रही थी. हवा में मिटटी और गीले पानी की खुशबू थी. बहार खेत में झनझनाती हवा और kabhi-kabhi दूर से किसी जानवर की आवाज़ आ रही थी, लेकिन अंदर बिलकुल अलग माहौल था.

अंदर गर्मी और पसीने की खुशबू फैली हुई थी. पुराने फैन की हलकी सी आवाज़ आ रही थी जो तेज़ नहीं थी. बिस्तर ज़मीन पर बिछा हुआ था, उसके अराउंड कुछ पुराने बर्तन और किसानों का सामान पड़ा था. दरवाज़ा अंदर से बंद था, बहार से कोई भी देख नहीं सकता था.

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गीता अभी भी बिस्तर पर नंगी लेती हुई थी, उसकी चीखें पुम्फोसे की दीवारों से टकरा कर गूँज रही थी.

गीता (दर्द से बिलकुल बेहाल हुई, चिल्लाते hue):Aaaahhhh... मां जी... बहुत दर्द कर रहा है... उफ्फ्फ्फ़... निकाल लो... मेरी छूट पहात गयी... मममहहह... इतना मोटा लुंड... नहीं सेह पा रही...

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मां जी ने थूक लगाकर अपना मोटा लुंड और अंदर धकेल दिया. अब वह 5 इंच से थोड़ा और अंदर चला गया था.

मां जी (गरम सांस लेते hue):Haaahhh... कितनी टाइट और गरम है तेरी कुंवारी छूट गीता... अब और अंदर जा रहा है... सेह ले मेरी जान...

रौशनी (गीता को तिघ्टलय पकडे हुए, उसके होठों पे किश करते hue):Chup हो जा साली... बहार कोई नहीं सुन रहा... यहाँ सिर्फ हम तीनो हैं... दर्द सेह ले, फिर मज़ा आएगा...

पुम्फोसे के अंदर सिर्फ गीता की चीखें, मां जी की गरम सांसें और रौशनी के चूमने की आवाज़ें गूँज रही थी. बहार का अँधेरा और सुनसान खेत उन तीनो को पूरी तरह से छुपा रहा था.

गीता अभी भी दर्द से कराह रही थी, लेकिन मां जी का लुंड धीरे धीरे और अंदर पुश हो रहा था.

मां जी का मोटा लुंड अब गीता की टाइट कुंवारी छूट में काफी अंदर तक घुसा हुआ था. उन्होंने धीरे धीरे halke-halke स्ट्रोक्स देना शुरू कर दिया — बहार निकालते और फिर अंदर धकेल देते.

गीता (दर्द अब थोड़ा काम होते हुए, अभी भी कराह रही thi):Uffff... मां जी... अब थोड़ा... थोड़ा काम दर्द हो रहा है... आआह्ह्ह... लेकिन फिर भी बहुत मोटा है... मममहह...

धीरे धीरे गीता के दर्द में थोड़ी रहत महसूस होने लगी थी. उसकी टाइट छूट अब मां जी के लुंड के अराउंड एडजस्ट होने लगी थी.

रौशनी की भी गर्मी बढ़ चुकी थी. वो गीता के ऊपर झुक गयी और उसकी aam-sized चूचियों को मुँह में ले कर zor-zor से चूसने लगी. एक निप्पल को जुबां से chat-ti और chus-ti, दूसरे को हाथों से मसलती.

रौशनी (गीता की चूचियों को चूसते हुए, गरम आवाज़ mein):Mmm... तेरी चूचियां बहुत रसीली हैं साली... चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है...

उसी बीच मां जी ने अपनी स्पीड धीरे धीरे बढ़ा दी. अब उनके स्ट्रोक्स गहरे और तेज़ होने लगे थे. पुम्फोसे के अंदर “पूछ पूछ” की आवाज़ होने लगी थी.

मां जी (तेज़ सांस लेते हुए, zor-zor से धकेल ते hue):Haaahhh... बहुत टाइट है तेरी छूट गीता... अब अच्छे से ले रही है मेरा लुंड... ले मेरी साली... पूरी चुदाई कर रहा हूँ तेरी आज...

गीता (अब दर्द के साथ थोड़ा मज़ा भी महसूस करते hue):Aaaahh... मां जी... उफ्फ्फ्फ़... धीरे... और तेज़ मत कीजिये... मममहह... बहुत गहरा जा रहा है... ओह्ह्ह...

रौशनी गीता की दोनों चूचियों को baari-baari से चूस रही थी और कभी उसके होठों पे भी किश कर देती थी. मां जी अब फुल स्पीड में गीता की छूट की चुदाई कर रहे थे — उनका मोटा लुंड अंदर बहार हो रहा था.

पुम्फोसे के अंदर तीनो के गरम सांसें, गीता की सिसकियाँ और चुदाई की “थप थप” आवाज़ें गूँज रही थी.

मां जी ने अब स्पीड और तेज़ कर दी. उनके धक्के अब zor-zor के होने लगे थे. उनका मोटा लुंड गीता की टाइट छूट में पूरा अंदर बहार होने लगा था.

मां जी (zor-zor से धकेल ते hue):Le... ले मेरी साली... अब पूरी स्पीड से चुद रही है तेरी कुंवारी छूट... हहहह... कितनी टाइट और गरम है...

गीता (पहले दर्द के साथ, अब धीरे धीरे मज़ा महसूस करते hue):Aaaahhh... मां जी... उफ्फ्फ्फ़... बहुत तेज़... मममहह... अब... अब दर्द काम हो रहा है... ओह्ह्ह... गहरा जा रहा है... आआह्ह...

रौशनी अब भी गीता की चूचियों को zor-zor से चूस रही थी. कभी निप्पल्स को kaat-ti, कभी choos-ti, और हाथ से गीता की पतली कमर और गांड को सहला रही थी.

धीरे धीरे गीता का फुल मज़ा शुरू हो गया. उसकी सिसकियाँ अब दर्द वाली नहीं, बल्कि मज़े वाली होने लगी थी.

गीता (सांस फूलते हुए, मोअन करते hue):Mama जी... आआह्ह... बहुत अच्छा लग रहा है अब... उफ्फ्फ्फ़... और तेज़ कीजिये... मेरी छूट में पूरा लुंड दाल रहे हो... मममहह... बहुत मज़ा आ रहा है...

मां जी अब वाइल्ड हो कर गीता की छूट की zor-zor से चुदाई कर रहे थे. हर धक्के के साथ उनका मोटा लुंड पूरा अंदर तक जा रहा था. “थप थप थप” की आवाज़ पुम्फोसे में गूँज रही थी.

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मां जी:हाँ मेरी रंडी साली... अब मज़ा आ रहा है न? ले... ले पूरा लुंड... तेरी टाइट छूट अब मेरी हो गयी है आज...

रौशनी (गीता की चूचियों को चूसते hue):Dekha साली... बताया था न मज़ा आएगा... अब छिलके बोल... कितना मज़ा आ रहा है मां जी के मोठे लुंड से...

गीता अब पूरी तरह से मज़े में थी. उसकी आँखें बंद थी, मुँह खुला हुआ था, और वो हर धक्के के साथ मोअन कर रही थी.

गीता (तेज़ आवाज़ mein):Aaaahhh... मां जी... बहुत मज़ा आ रहा है... और ज़ोर से छोड़ो मुझे... मेरी छूट आपकी हो गयी... उफ्फ्फ्फ़... बहुत गहरा... ओह्ह्ह यस...

पुम्फोसे के अंदर तीनो का पसीना एक हो रहा था और चुदाई की तेज़ आवाज़ें बहार तक जा रही थी, लेकिन खेत के बीच में कोई सुनने वाला नहीं था.

_____________________________

मां जी ने गीता की पतली कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपनी कमर को zor-zor से हिलने लगे. उनका मोटा, लम्बा लुंड अब गीता की टाइट छूट में पूरा andar-bahar हो रहा था.

हर धक्के के साथ उनका मोटा सूपड़ा गीता की छूट के अंदर तक गहराई तक पहुँच रहा था. “थप… थप… थप… थप…” की तेज़ आवाज़ पुम्फोसे में गूँज रही थी. गीता की छूट का रास अब बहार निकल कर मां जी के लुंड और उनकी जाँघों को गीला कर रहा था.

मां जी (तेज़ धक्के मरते hue):Le… ले मेरी साली… पूरा लुंड अंदर ले… तेरी कुंवारी छूट अब बिलकुल मेरी हो गयी… कितनी टाइट है… बहुत ज़ोर से चुद रही है आज…

गीता (अब पूरे मज़े में, मोअन करती hui):Aaaahhhh… मां जी… बहुत गहरा जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… मोटा लुंड मेरी छूट को पहाड़ रहा है… आआह्ह… और ज़ोर से… और तेज़ छोड़ो मुझे… मममहह… बहुत मज़ा आ रहा है…

रौशनी ने गीता की एक चूचियां मुँह में ले राखी थी. वो zor-zor से चूस रही थी, निप्पल को जुबां से घुमा रही थी और कभी हल्का सा काट भी देती थी. दूसरे हाथ से गीता की दूसरी चूचियां मसल रही थी.

गीता की छूट अब बिलकुल गीली हो चुकी थी. मां जी का मोटा लुंड हर बार अंदर जाते hi “पूछह” की आवाज़ कर रहा था. उनके बॉल्स गीता की टाइट गांड से टकरा रहे थे.

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मां जी (स्पीड और बढ़ाते हुए, zor-zor से धकेल te):Dekh… तेरी छूट कैसे मेरा लुंड निगल रही है… कितना रास निकल रहा है… बहुत टाइट है अब भी… ले… ले… और अंदर…

उन्होंने गीता की टाँगे अपने कंधे पर रख दी और अब और गहरे और तेज़ धक्के मरने लगे. हर धक्के में उनका पूरा मोटा लुंड गीता की छूट के अंदर तक चला जा रहा था.

गीता (सर उठा कर चिल्लाते हुए, पूरा मज़ा लेते hue):Aaaahhhh… मां जी… बहुत अच्छा लग रहा है… मेरी छूट पहात रही है लेकिन मज़ा भी आ रहा है… और ज़ोर से छोड़ो… उफ्फ्फ्फ़… मैं आ रही हूँ… आआह्ह्ह…

रौशनी ने गीता के होठों पे एक लम्बी किश की और फिर उसके कान में बोली:

रौशनी:चुद जा साली… मां जी के मोठे लुंड से पूरी तरह चुद जा आज…

मां जी अब बिलकुल वाइल्ड हो चुके थे. उनकी स्पीड बहुत तेज़ हो गयी थी और पुम्फोसे में सिर्फ चुदाई की तेज़ आवाज़ें और तीनो की गरम सांसें गूँज रही थी.

मां जी ने गीता को झटके से घुमा दिया. अब गीता कुत्ते की पोज़ में बिस्तर पर थी — उसकी टाइट गांड ऊपर उठी हुई, पतली कमर अंदर ढुकि हुई, और उसकी चूचियां नीचे लटक रही थी.

मां जी (गीता की गांड पे थप्पड़ मरते hue):Ab पीछे से लूंगा तेरी छूट…

उन्होंने अपना मोटा, रास से चमकता लुंड गीता की छूट के मुँह पर सेट किया और एक hi झटके में पूरा अंदर धकेल दिया. इस बार लुंड बहुत आसानी से अंदर फिसल गया क्यूंकि छूट काफी गीली और खुल चुकी थी.

गीता (मीठी सिसकी भरते hue):Aaaahhhh… मां जी… पूरा अंदर चला गया… उफ्फ्फ्फ़… बहुत गहरा लग रहा है…

मां जी ने गीता की पतली कमर को पकड़ कर zor-zor से धक्के मरना शुरू कर दिया. हर धक्के के साथ उनका मोटा लुंड पूरा अंदर तक जा रहा था और उनके बॉल्स गीता की गांड से टकरा रहे थे.

मां जी (रौशनी की तरफ हाथ बढ़ाते hue):Roshni… इधर आ… मेरे पास आ जा…

रौशनी तुरंत आगे आयी. मां जी ने उसको अपने सीने से चिपका लिया और उसके होठों पे गहरी, लम्बी चुम्बन देने लगे. दोनों की जुबां एक दूसरे में घुल रही थी जबकि मां जी अपनी कमर हिलाते हुए गीता की छूट की zor-zor से चुदाई कर रहे थे.

मां जी (रौशनी को चूमते हुए, गीता को छोड़ते hue):Mmmhh… तेरी साली की छूट बहुत टाइट और गरम है… और तू भी कितनी प्यारी है…

गीता अब पूरी तरह मज़े में थी. उसकी आहें और सिसकियाँ बहुत मीठी और मदहोश करने वाली हो गयी थी. हर धक्के के साथ वो meethi-meethi सिसकियाँ भर रही थी.

गीता (मीठी आवाज़ में, गांड ऊपर उठाते hue):Aaaahhh… मां जी… बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से छोड़ो… उफ्फ्फ्फ़… मेरी छूट आपके लुंड के लिए बन गयी है… मममहहह… आआह्ह…

पुम्फोसे के अंदर गीता की मीठी सिसकियाँ, मां जी और रौशनी के चुम्बन की आवाज़ें और चुदाई की “थप थप थप” आवाज़ गूँज रही थी.

मां जी रौशनी को किश करते हुए भी अपनी स्पीड नहीं काम कर रहे थे. उनका मोटा लुंड गीता की छूट में तेज़ी से अंदर बहार हो रहा था. गीता की टाइट गांड हर धक्के के साथ हिल रही थी.

गीता (मीठी सिसकी के saath):Aur तेज़… मां जी… पूरी तरह छोड़ो मुझे… आआह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…

अब तीनो पूरी तरह से मज़े में थे.

पुम्फोसे के अंदर की गर्मी और तीनो के पसीने के साथ अब इमोशंस भी उबाल रहे थे.

मां जी गीता की गांड पकड़ कर zor-zor से धक्के मार रहे थे. उनका मोटा लुंड हर बार गीता की छूट के अंदर तक जा रहा था. लेकिन उनके चेहरे पर सिर्फ हवस नहीं, बल्कि एक तरह की जीत और प्यार जैसा एहसास भी था.

मां जी (रौशनी को चूमते हुए, गीता को छोड़ते हुए, गरम सांस mein):Geeta… मेरी प्यारी साली… मैंने हमेशा से तुझे ऐसे देखना चाहता था… तेरी इनोसेंस को तोडना चाहता था… आज तू मेरी हो गयी है…

गीता का दिल बहुत कन्फ्यूज्ड था. दर्द अब ऑलमोस्ट ख़तम हो चूका था, जगह एक गहरा मज़ा ले रहा था. लेकिन उसके मैं में शर्म, गुनाह और एक अजीब सी मोहब्बत जैसा एहसास भी था.

गीता (मीठी सिसकियों के बीच, आंसू और मज़े का mix):Mama जी… आआह्ह… मैं आपकी हूँ आज… लेकिन यह गलत है न… फिर भी… बहुत अच्छा लग रहा है… मममहह… मुझे ऐसा फील नहीं होना चाहिए था… लेकिन रोक नहीं पा रही…

रौशनी गीता की चूचियों को चूस रही थी लेकिन उसकी आँखों में भी गहरा इंटेंसिटी था. वो अपनी साली को मां जी के साथ छोड़वा रही थी, लेकिन अंदर से एक तरह की ट्विस्टेड केयर और हवस का मिक्सचर था.

रौशनी (गीता के कान में धीरे से, उसके निप्पल्स को चूसते hue):Mat सोच इतना साली… बस फील कर. मैं तेरी भाभी हूँ… तुझे यह मज़ा दिलवा रही हूँ. तू अब सिर्फ मज़े ले… हम तीनो एक हो गए हैं आज.

मां जी ने स्पीड थोड़ी काम की लेकिन गहरे धक्के मरने लगे. हर धक्के के साथ वो गीता की पतली कमर को सहला रहे थे, जैसे प्यार भी कर रहे हों.

मां जी:गीता… तू बहुत प्यारी है… तेरी यह टाइट बॉडी, तेरी शर्म… सब मुझे पागल कर देती है. आज से तू मेरी सीक्रेट रानी है.

गीता की आँखों से आंसू निकल रहे थे, लेकिन उसके मुँह से मीठी सिसकियाँ निकल रही थी. उसका शरीर अब पूरी तरह मां जी के रदम के साथ हिल रहा था.

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गीता (इमोशनल और प्लेअसुरे मिक्स mein):Mama जी… मुझे ऐसा फील हो रहा है जैसे मैं आपकी हूँ… बहुत गुनाह लग रहा है… लेकिन रोकना नहीं चाहती… आआह्ह… और अंदर… मुझे अपना बना लो पूरा…

रौशनी ने गीता के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसको एक प्यारी किश दी.

रौशनी:हम तीनो का यह रिश्ता अलग है… यहाँ कोई जज नहीं करेगा. बस अपने मज़े लो.

पुम्फोसे के अंदर फिजिकल चुदाई के साथ अब इमोशनल इंटेंसिटी भी बढ़ रही थी — शर्म, हवस, प्यार, सबमिशन और एक्सेप्टेन्स का mila-jula एहसास.

मां जी ने गीता की पतली कमर को मज़बूत पकड़ कर teen-chaar लम्बे और गहरे स्ट्रोक्स दिए. हर स्ट्रोक बहुत ज़ोर का था — मोटा लुंड पूरा बहार निकाल कर फिर से एक hi झटके में अंदर तक घुसा देते.

मां जी:ले… ले मेरी साली… पूरा लुंड अंदर… आआह्ह्ह…

गीता (मीठी सिसकियों के साथ, शरीर कांपते hue):Aaaahhhh… मां जी… बहुत गहरा… उफ्फ्फ्फ़… मेरी छूट भर गयी है… मममहह…

रौशनी ने मां जी को रोकने का इशारा किया.

रौशनी:मां जी, अब गीता को थोड़ा आराम दीजिये. उसकी कुंवारी छूट आपके सांड जैसे मोठे लुंड से पहली बार इतनी ज़ोर की कुटाई हो गयी है. अब उसको थोड़ा सांस लेने दो.

गीता को बिस्तर पर लेटने दिया गया. वो थकी हुई, पसीने से तर, लेकिन मज़े से भरी हुई लेती रही. उसकी छूट अब लाल और गीली हो चुकी थी.

रौशनी ने तुरंत मां जी के ऊपर चढ़ने का फैसला किया. वो मां जी के ऊपर आ गयी और उनके मोठे लुंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी छूट के मुँह पर सेट किया.

रौशनी (गरम आवाज़ mein):Ab मेरी बारी… मैं आपके सांड को अपनी छूट में ले लुंगी.

रौशनी धीरे से नीचे बैठ गयी. मां जी का मोटा लुंड उसकी छूट में पूरा अंदर चला गया. रौशनी की badi-badi चूचियां upar-neeche हिलने लगी थी.

रौशनी (ऊपर नीचे चढ़ते hue):Aaaahhh… कितना मोटा है आपका लुंड मां जी… मेरी छूट को भर दिया…

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मां जी ने निचे से अपनी कमर utha-utha कर रौशनी की छूट की zor-zor से चुदाई शुरू कर दी. रौशनी की बड़ी चूचियां हर धक्के के साथ zor-zor से उछाल रही थी. वो अपने हाथों को मां जी के सीने पर रख कर तेज़ी से upar-neeche हो रही थी.

मां जी (रौशनी की गांड पकड़ कर धकेल ते hue):Haaahhh… बहुत अच्छे से चुद रही है तू… तेरी बड़ी चूचियां कितनी प्यारी हिल रही हैं… ज़ोर से चुद…

रौशनी (तेज़ आवाज़ में मोअन करते hue):Aur ज़ोर से मां जी… मेरी छूट को फाड़ दो आज… आआह्ह्ह…

गीता बिस्तर पर लेती हुई यह सब देख रही थी. उसकी सांस अब भी तेज़ थी और वो अपनी छूट पे हाथ फेर रही थी, अभी भी थोड़ी दर्द और मज़ा का एहसास ले रही थी.

पुम्फोसे के अंदर अब रौशनी की तेज़ सिसकियाँ और मां जी के धक्के की आवाज़ें गूँज रही थी. रौशनी की बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हिल रही थी और मां जी निचे से उसकी छूट को zor-zor से छोड़ रहे थे.

रौशनी मां जी के ऊपर तेज़ी से upar-neeche हो रही थी. उसकी बड़ी चूचियां zor-zor से हिल रही थी. उसने गीता की तरफ देखा और गरम, मदहोश आवाज़ में बोलै.

रौशनी:गीता… इधर आ मेरी साली… मेरे पास आ… मेरी चूचियों को चूस…

गीता अभी भी थोड़ी थकी हुई थी, लेकिन उसने तुरंत सुन लिया. वो बिस्तर पर घुटनो के बल आगे बढ़ी और रौशनी के ऊपर झुक गयी. उसने रौशनी की एक बड़ी, रसीली चूचियां अपने मुँह में ले ली और धीरे धीरे चूसने लगी.

गीता (रौशनी की चूचियां चूसते hue):Mmmhh… भाभी… आपकी चूचियां बहुत बड़ी और सॉफ्ट हैं…

रौशनी का मज़े और बढ़ गया. वो निचे से मां जी के मोठे लुंड पर घोड़े की सवारी कर रही थी — अपनी गांड को uchka-uchka कर zor-zor से नीचे धकेल रही थी. हर बार मां जी का पूरा मोटा लुंड उसकी छूट में अंदर तक चला जा रहा था.

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रौशनी (गीता की जुबां फील करते हुए, मदहोश आवाज़ mein):Aaaahhh… हाँ गीता… और ज़ोर से चूस… मेरी निप्पल्स को काट… मममहह… और मां जी आप भी ज़ोर से पेलिए… मेरी छूट को फाड़ दो आज…

मां जी निचे से अपनी कमर utha-utha कर बहुत तेज़ धक्के मर रहे थे. उनका मोटा लुंड रौशनी की छूट में zor-zor से अंदर बहार हो रहा था. “थप थप थप” की तेज़ आवाज़ें पुम्फोसे में गूँज रही थी.

मां जी (रौशनी की गांड पकड़ कर धकेल ते hue):Le… ले मेरी रंडी भाभी… तेरी छूट बहुत अच्छे से ले रही है मेरा लुंड… और गीता तू भी अच्छे से चूस…

गीता अब दोनों तरफ से रौशनी की बड़ी चूचियों को baari-baari से चूस रही थी. कभी निप्पल को जुबां से घुमा रही थी, कभी ज़ोर से चूस रही थी. रौशनी का एक हाथ गीता के सर पे था और दूसरा मां जी के सीने पर.

रौशनी अब पूरी तरह मज़े में थी. वो घोड़े की सवारी की तरह अपनी गांड uchka-uchka कर मां जी के लुंड पर चुद रही थी. उसकी बड़ी चूचियां गीता के मुँह में हिल रही थी.

रौशनी (तेज़ी से मोअन करते hue):Aaaahhhh… बहुत मज़ा आ रहा है… दोनों तरफ से सेवा हो रही है मेरी… मां जी आपका मोटा लुंड मेरी छूट पहाड़ रहा है… और गीता तेरी जुबां मेरी चूचियों को दीवाना कर रही है… मममहहह… और तेज़… और ज़ोर से…

तीनो का पेस बहुत तेज़ हो चूका था. पुम्फोसे के अंदर सिर्फ सिसकियों, थप थप की आवाज़ों और तीनो के गरम साँसों की आवाज़ गूँज रही थी.

रौशनी (तेज़ तेज़ ऊपर नीचे चढ़ते हुए, मदहोश आवाज़ mein):Aaaahhh… मां जी… बहुत ज़ोर से पेल रहे हो… मेरी छूट को फाड़ दो आज… मममहह…

गीता (अब खुल कर, बोल्ड होकर रौशनी की चूचियां चूसते hue):Mama जी… और ज़ोर से छोड़ो भाभी को… उनकी बुर को पूरी तरह से छोड़िये… देखो न कितनी मज़े से चुद रही हैं… और तेज़ कीजिये… अपना मोटा लुंड अंदर बहार कीजिये zor-zor से…

गीता ने फिर मां जी के चेहरे पर अपनी छूट रख दी. अब वो मां जी के मुँह पर बैठ गयी थी और अपनी गीली बुर को उनके मुँह पर रगड़ रही थी.

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गीता (अपनी बुर मां जी के मुँह पर रगड़ते हुए, सिसकियों के saath):Mama जी… मेरी छूट को भी चूसिये… जुबां अंदर डालिये… आआह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… आपकी जुबां मेरी बुर में… मममहह…

मां जी (गीता की बुर चाटते हुए, निचे से रौशनी को धकेल ते hue):Mmmhh… गीता तेरी छूट कितनी रसीली हो गयी है… बहुत अच्छे से चाट रहा हूँ… और रौशनी तू भी और तेज़ चुद… अपनी गांड उचका उचका कर मेरा लुंड निगल…

रौशनी (घोड़े की तरह सवारी करते हुए, ज़ोर से मोअन करती hui):Haaahhh… मां जी… आपका लुंड मेरी छूट के अंदर तक जा रहा है… बहुत मोटा है… और गीता तू भी अपनी बुर मां जी को चुसवा… दोनों तरफ से मज़ा ले रहे हैं हम…

गीता (मां जी के मुँह पर अपनी बुर रगड़ते हुए, बोल्ड आवाज़ mein):Mama जी… और ज़ोर से चूसिये मेरी बुर को… जुबां अंदर घुमाइए… आआह्ह… और भाभी को और तेज़ छोड़ो… उनकी बुर को फाड़ दो आपके सांड वाले लुंड से… मैं देखना चाहती हूँ उनको कैसे चुद रही हैं…

मां जी (गीता की छूट चाटते हुए और निचे से रौशनी को zor-zor से धकेल ते hue):Le रौशनी… ले मेरी रंडी… पूरा लुंड ले… और गीता तेरी बुर का रास पि रहा हूँ मैं… कितनी मीठी है तेरी छूट… दोनों की छूट एक साथ मज़े दे रही हैं आज…

रौशनी (तेज़ तेज़ ऊपर नीचे होते हुए, गीता को देखते hue):Geeta… बहुत खुल गयी है तू आज… अपनी बुर मां जी के मुँह पर रख के चुसवा रही है… और मुझे भी उनके लुंड पर छुड़वा रही है… आआह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है…

गीता (अपनी बुर मां जी के मुँह पर दबाते हुए, मोअन करते hue):Haan भाभी… आज मैं भी पूरी तरह खुल गयी हूँ… मां जी आप दोनों को छोड़िये… मेरी बुर को अच्छे से चूसिये… और भाभी की बुर को अपने मोठे लुंड से फाड़िये… आआह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है…

मां जी (दोनों को छोड़ते hue):Dono मेरी रंडियां हो आज… एक मेरी बुर चाट रही है, दूसरी मेरा लुंड छुड़वा रही है… बहुत मज़ेदार हो रहा है…

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तीनो इसी पोज़ में लगे रहे — मां जी निचे लेट कर रौशनी को zor-zor से छोड़ रहे थे जबकि गीता मां जी के मुँह पर बैठी अपनी बुर चुसवा रही थी. यह सब लगभग 10 मिनट तक चलता रहा. तीनो के मोअन और सिसकियाँ पुम्फोसे में गूंजती रही.

फिर मां जी ने रौशनी को अपने ऊपर से उठाया और थोड़ा सांस लेने के लिए लेट गए. उनका मोटा लुंड अभी भी खड़ा और चमकता हुआ था.

मां जी (सांस फूलते hue):Thoda आराम कर लेता हूँ… तुम दोनों अब अपना मज़ा लो…

रौशनी ने तुरंत गीता को अपने पास खींच लिया. दोनों 69 पोज़ में लेट गयी — रौशनी ऊपर और गीता नीचे. दोनों एक दूसरे की बुर को चाटने में लग गयी.

रौशनी (गीता की छूट को चाटते hue):Mmmhh… गीता तेरी बुर अभी भी बहुत गीली है… कितना रास निकल रहा है… मैं पूरी तरह चाट लुंगी…

गीता (रौशनी की बुर को ज़ोर से चूसते hue):Bhabhi… आपकी बुर भी बहुत गरम और रसीली है… मां जी ने आपको बहुत ज़ोर से छोड़ा था… मैं भी आपकी छूट को अच्छे से चूसूंगी… आआह्ह…

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दोनों में बहुत गर्मी थी. रौशनी ने गीता की टाइट छूट को जुबां से अंदर तक चाटना शुरू कर दिया. गीता भी रौशनी की बुर को मुँह में ले कर zor-zor से चूस रही थी. दोनों की ज़ुबानें एक दूसरे की बुर में घूम रही थी.

गीता (रौशनी की बुर चाटते हुए, मोअन करते hue):Bhabhi… आपकी छूट बहुत मीठी है… और अंदर से कितना गरम रास आ रहा है… मैं पूरी तरह चाट रही हूँ…

रौशनी (गीता की क्लीट को चूसते hue):Haaahhh… गीता तू भी बहुत अच्छे से चाट रही है… तेरी जुबां मेरी बुर के अंदर तक जा रही है… मममहह… और ज़ोर से चूस… और अंदर जुबां दाल…

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मां जी बिस्तर के पास लेट कर अपने सख्त, मोठे लुंड को हाथ से हिलाते हुए दोनों को देख रहे थे. उनका लुंड पूरा गीला और खड़ा था.

मां जी (लुंड हिलाते हुए, गरम आवाज़ mein):Wahhh… दोनों बहनें एक दूसरे की बुर चाट रही हैं… बहुत हॉट सन है यह… गीता और ज़ोर से चाट भाभी की छूट को… रौशनी तू भी मत छोड़ गीता की टाइट बुर को…

रौशनी (गीता की बुर में जुबां घूमते hue):Mama जी… देखिये न… हम दोनों कितने मज़े ले रहे हैं… गीता की छूट का रास बहुत अच्छा है… आप भी जल्दी से तैयार हो जाइये… हम दोनों आपके लुंड के इंतज़ार में हैं…

गीता (रौशनी की बुर को चूसते hue):Haan मां जी… आप देख रहे हैं न… हम दोनों एक दूसरे को चाट रहे हैं… आपका मोटा लुंड फिर से तैयार हो जाये… हम दोनों आपकी सेवा करने के लिए तैयार हैं…

दोनों की सिसकियाँ और चूसने की आवाज़ें पुम्फोसे में गूँज रही थी. मां जी अपना लुंड हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए दोनों को देख कर और गरम हो रहे थे.

रौशनी और गीता दोनों अब 69 पोज़ छोड़ कर मां जी के सामने आ गयी. दोनों ने अपनी गांड ऊपर उठा ली और कुत्ते की पोज़ (डोगग्य स्टाइल) में बैठ गयी. दोनों की गांड side-by-side मां जी के बिलकुल सामने थी.

गीता की टाइट, छोटी सी गांड और रौशनी की बड़ी, गोल गांड — दोनों एक के साथ एक उभरी हुई थी. दोनों की छूट अभी भी गीली और लाल थी.

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मां जी बिस्तर पर बैठ गए. उन्होंने अपना मोटा, सख्त लुंड हाथ में पकड़ लिया और दोनों की गांड और छूट को देखते हुए गरम आवाज़ में बोले.

मां जी:वहहह… दोनों की गांड कितनी प्यारी लग रही हैं… एक तरफ मेरी शाय साली गीता की टाइट कुंवारी गांड, दूसरी तरफ मेरी गरम भाभी रौशनी की बड़ी मोती गांड… आज तोह मैं दोनों की बुर की चुदाई करने वाला हूँ.

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उन्होंने अपना लुंड हाथ में हिलाते हुए दोनों की छूट पर नज़र डाली.

मां जी:पहले किस की बुर छोड़ू? गीता की टाइट छूट… या रौशनी की रास भरी गरम बुर?

गीता (गांड ऊपर उठाये हुए, शर्म और हवस के मिक्स mein):Mama जी… आप जो चाहे… लेकिन मेरी छूट अभी भी थोड़ी दर्द कर रही है… आप फैसला कीजिये…

मां जी ने दोनों की गांड को हाथों से सहलाते हुए, अपना मोटा लुंड हाथ में पकडे हुए गरम आवाज़ में कहा:

मां जी:अब बहुत हो गया बुर की चुदाई… आज मैं दोनों की गांड में गहराई तक अपना मोटा लुंड डालना चाहता हूँ. दोनों की टाइट गांड को आज पूरी तरह से छोडूंगा.

गीता यह सुन कर तुरंत शर्मा गयी. उसका चेहरा लाल हो गया और वो गांड ऊपर उठाये हुए hi अपना मुँह बिस्तर में छुपा लेती.

गीता (शर्म से धीरे se):Mama जी… गांड में…? बहुत शर्म आ रही है… और डर भी लग रहा है… आपका इतना मोटा लुंड… मेरी छोटी सी गांड में कैसे जाएगा…

रौशनी (अपनी गांड हिलाते हुए, नॉटी आवाज़ mein):Haan मां जी… आप hi डीडे कीजिये… पहले किस की गांड में अपना मोटा लुंड डालोगे? गीता की टाइट कुंवारी वाली… या मेरी गीली और चूड़ी वाली?

रौशनी (अपनी गांड हिलाते हुए, नॉटी स्माइल के saath):Main तैयार हूँ मां जी… मेरी गांड आपके लुंड के लिए खुल गयी है. गीता को भी थोड़ा डर है पर वो भी मान जायेगी… आप शुरू कीजिये.

मां जी ने गीता की टाइट गांड पे हल्का थप्पड़ मारा और रौशनी की बड़ी गांड को सहलाते हुए बोलै:

मां जी:दोनों की गांड बहुत प्यारी है… पहले किस की गांड फाडून? गीता की टाइट छोटी वाली… या रौशनी की मोती और रसीली गांड?

गीता (शर्माते हुए, धीरे se):Mama जी… प्लीज धीरे से… बहुत डर लग रहा है…

रौशनी (मुस्कुराते हुए, गांड ऊपर उठाते hue):Main पहले लेती हूँ… गीता देख लेगी कैसे लेता है… फिर उसकी बारी आएगी.

दोनों अब डोगग्य पोज़ में side-by-side थी, अपनी गांड मां जी के सामने उठाये हुए. मां जी अपना मोटा लुंड हाथ में पकडे उनकी गांड को देख रहा था.

दोनों गांड मां जी के सामने हिल रही थी, उनकी छूट चमक रही थी. मां जी अपना लुंड हाथ में पकडे दोनों को ताड़ रहे थे.

मां जी:बताओ… पहले किस की चुदाई करूँ मैं आज?

अब बताओ — पहले किस की गांड की चुदाई करे मां जी?(गीता या रौशनी?)

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मां जी ने दोनों की गांड को देखते हुए एक गहरी सांस ली और बोलै:

मां जी:पहले रौशनी की गांड की चुदाई करूँगा… गीता तू देख और सीख… कैसे भाभी मेरी मोती गांड लेती है.

रौशनी ने अपनी बड़ी, गोल गांड और ज़्यादा ऊपर उठा दी और मुस्कुराते हुए बोली:

रौशनी:हाँ मां जी… मेरी गांड आपके लुंड के लिए तैयार है… गीता देख लो अच्छे से.

मां जी ने अपने मोटा लुंड पे थूक लगाया और रौशनी की गांड के छेद पर रगड़ने लगे. फिर धीरे से प्रेशर दाल कर अंदर धकेलने लगे.

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रौशनी (धीरे से मोअन करते hue):Aaaahhh… बहुत मोटा है… धीरे से मां जी… हहहह… अंदर जा रहा है…

मां जी का मोटा सूपड़ा रौशनी की गांड में अंदर घुसता गया. उन्होंने धीरे धीरे और अंदर धकेलना शुरू किया.

मां जी:कितनी टाइट है तेरी गांड रौशनी… बहुत अच्छे से ले रही है मेरा लुंड…

गीता साइड में बैठी उनको देख रही थी. उसकी आँखें बड़ी हो गयी थी और वो शर्मा रही थी, लेकिन उसकी सांस तेज़ हो रही थी.

गीता (आहें भरते हुए, धीरे se):Bhabhi… आपकी गांड में पूरा अंदर जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मोटा लग रहा है… मैं देख रही हूँ… आआह्ह…

मां जी ने स्पीड बढ़ा दी और रौशनी की गांड की zor-zor से चुदाई करने लगे. हर धक्के के साथ रौशनी की बड़ी गांड हिल रही थी.

रौशनी (मज़े में मोअन करते hue):Aaaahhh… मां जी… और ज़ोर से… मेरी गांड फाड़ दो… मममहह… बहुत मज़ा आ रहा है…

गीता (अपनी छूट पे हाथ फेरते हुए, आहें भरते hue):Mama जी… भाभी को और तेज़ छोड़ो… उनकी गांड कितनी अच्छे से ले रही है आपका लुंड… उफ्फ्फ्फ़… मैं भी सीख रही हूँ… आआह्ह…

मां जी (रौशनी की गांड को थप्पड़ मरते hue):Dekh गीता… ऐसे लेता है गांड… तू भी तैयार हो जा… तेरी बारी भी आएगी जल्दी…

रौशनी अब पूरी तरह मज़े में थी और अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल रही थी. गीता साइड में बैठी उनको देख कर आहें भर रही थी.

मां जी ने रौशनी की गांड को दोनों हाथों से मज़बूत पकड़ लिया और अपने धक्के और तेज़ और गहरे कर दिए. उनका मोटा लुंड अब पूरी तरह से रौशनी की गांड में andar-bahar हो रहा था.

**मां जी:**

ले… ले मेरी रंडी भाभी… तेरी गांड को पूरा छोड़ रहा हूँ आज… कितनी टाइट और गरम है…

**रौशनी** (zor-zor से मोअन करते हुए):

आआह्ह्ह्ह… मां जी… बहुत ज़ोर से… मेरी गांड पहात रही है… लेकिन रुकना मत… और अंदर धकेलिए… हहहह…

रौशनी ने आगे बढ़ कर गीता का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने बिलकुल पास खींच लिया. दोनों का चेहरा एक दूसरे के सामने था. रौशनी ने गीता के होठों को अपने मुँह में ले लिया और गहरी, गहरी किश करने लगी.

**रौशनी** (किश के बीच में सिसकियों के साथ):

मममहह… गीता… किश कर मुझे… आआह्ह्ह… मां जी बहुत ज़ोर से छोड़ रहे हैं मेरी गांड को…

**गीता** (शर्माते हुए लेकिन किश करते हुए):

भाभी… आपकी गांड कितनी ज़ोर से हिल रही है… उफ्फ्फ्फ़… मां जी का लुंड अंदर बहार हो रहा है… मममहह…

दोनों बहनें अब गहरी किश में खो गयी थी. उनकी ज़ुबानें एक दूसरे के मुँह में घूम रही थी जबकि मां जी पीछे से रौशनी की गांड को तेज़ी से छोड़ रहे थे. हर धक्के के साथ रौशनी का शरीर आगे हिल रहा था और किश और भी इंटेंस हो रही थी.

**मां जी** (तेज़ धक्के मरते हुए, थप्पड़ मारते हुए):

बहुत मज़ेदार सन है… दोनों किश कर रही हो और मैं रौशनी की गांड फाड़ रहा हूँ… ले… ले पूरा लुंड…

**रौशनी** (किश तोड़ कर ज़ोर से मोअन करते हुए):

आआह्ह्ह्ह… मां जी… और ज़ोर से… मेरी गांड को फाड़ दो… गीता और किश कर… मममहह… बहुत मज़ा आ रहा है…

**गीता** (रौशनी के होठ चूसते हुए, धीरे से):

भाभी… आप कितनी गरम हो गयी हैं… मां जी आपको बहुत ज़ोर से छोड़ रहे हैं… आआह्ह… मैं देख रही हूँ सब कुछ…

मां जी की स्पीड अब और तेज़ हो गयी थी. उनके मोटा लुंड रौशनी की गांड में zor-zor से घुसता जा रहा था. “थप थप थप थप” की तेज़ आवाज़ के साथ रौशनी की गांड की गहरी चुदाई हो रही थी.

दोनों की किश कभी कभी टूट रही थी सिसकियों के कारन, फिर फिर से जुड़ जा रही थी. तीनो के गरम सांसें और सेक्स की आवाज़ें पुम्फोसे में गूँज रही थी.

मां जी ने रौशनी को ज़ोर से उठाया और उसको पीठ के बल बिस्तर पर लिटाया. रौशनी की टाँगे फैला कर उनके कन्धों पर रख दी और अपना मोटा लुंड उसकी गांड के छेद पर सेट किया.

**मां जी:**

अब सीधा देखूंगी तू… मेरी गांड छोड़ते हुए.

उन्होंने एक hi झटके में अपना मोटा लुंड रौशनी की गांड में गहरा दाल दिया और zor-zor से धक्के मरने लगे. साथ hi उनका एक हाथ नीचे गया और रौशनी की बुर को उँगलियों से रगड़ने लगे.

**रौशनी** (ज़ोर से मोअन करते हुए):

आआह्ह्ह्ह… मां जी… बहुत गहरा… मेरी गांड में पूरा लुंड… और बुर भी… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मज़ा आ रहा है… और तेज़ कीजिये…

गीता अब पूरी तरह से लस्ट में आ चुकी थी. वो रौशनी के ऊपर झुक गयी और उसकी बड़ी चूचियों को चूसने लगी.

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पहले उसने रौशनी की लेफ्ट चूचियां मुँह में ले कर ज़ोर से चुसनी शुरू की, निप्पल को जुबां से घुमाया और हल्का सा काटा. फिर राइट वाली पे शिफ्ट हो गयी.

**गीता** (रौशनी की चूचियों को चूसते हुए):

भाभी… आपकी चूचियां बहुत बड़ी और रसीली हैं… मममहह… मैं दोनों को baari-baari चूसूंगी…

वो अल्टेरनाटेली लेफ्ट और राइट चूचियों को चूस रही थी. कभी एक को ज़ोर से chus-ti, कभी दूसरे को, और beech-beech में रौशनी के होठों पे गहरी किश कर देती थी.

**रौशनी** (गीता को किश करते हुए, मोअन करते हुए):

आआह्ह्ह… गीता… और ज़ोर से चूस मेरी चूचियों को… मां जी आप भी मेरी गांड मत छोडो… बहुत गहरा छोड़ रहे हो… मममहह… मैं झड़ने वाली हूँ…

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**मां जी** (रौशनी की गांड में तेज़ धक्के मरते हुए, बुर को रगड़ते हुए):

ले मेरी रंडी… तेरी गांड और छूट दोनों को मज़े दे रहा हूँ… गीता तू भी अच्छे से चूस… दोनों बहनें आज पूरी तरह खुल गयी हैं…

गीता अब बिलकुल हॉर्नी हो चुकी थी. वो रौशनी की चूचियों को baari-baari से चूस रही थी और कभी कभी उसके होठों पे किश कर लेती थी. रौशनी की सिसकियाँ तेज़ी से निकल रही थी.

**रौशनी** (गीता को किश करते हुए):

गीता… और ज़ोर से… मेरी निप्पल्स को चूस… आआह्ह्ह्ह… मां जी आपका लुंड मेरी गांड में बहुत गहरा जा रहा है… मैं आ रही हूँ… आआह्ह्ह…

मां जी ने स्पीड और बढ़ा दी और रौशनी की बुर को तेज़ तेज़ रगड़ने लगे. गीता रौशनी की चूचियों को चूसते हुए उसको किश कर रही थी.

पुम्फोसे में तीनो की गरम सिसकियाँ और चुदाई की तेज़ आवाज़ें गूँज रही थी.

तीनो के बीच का रिश्ता अब सिर्फ हवस नहीं, बल्कि गहरे इमोशनल लेयर्स के साथ भरा हुआ था. पुम्फोसे के अंदर फिजिकल इंटेंसिटी के saath-saath उनके मैं में भी एक तूफ़ान चल रहा था.

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मां जीउनके लिए यह सिर्फ सेक्स नहीं था. यह पावर, पोस्सेस्सिओं और तबू का मज़ा था. वो गीता को देख कर एक तरह की पोस्सेस्सिवे टेंडरनेस फील कर रहे थे — जैसे एक इनोसेंट चीज़ को तोड़ कर अपना बनाना. रौशनी के साथ उनका रिश्ता ज़्यादा इक्वल और वाइल्ड था, जिसमें उन्हें एक एक्सपेरिएंस्ड पार्टनर मिल रही थी जो उनकी हवस को पूरा मैच कर सकती थी.

मां जी (रौशनी की गांड छोड़ते हुए, गीता को देखते hue):Tum दोनों… मेरी हो आज. गीता तेरी शर्म और रौशनी तेरी गर्मी… दोनों को एक साथ प् कर लग रहा है मैं सब कुछ जीत गया हूँ.

रौशनी (भाभी)रौशनी के मैं में काम्प्लेक्स इमोशंस थे. वो गीता को बहुत प्यार करती थी (साली होने के बावजूद), लेकिन उस प्यार में एक ट्विस्टेड गाइडिंग लस्ट भी था. वो गीता को “ट्रैन” कर रही थी, लेकिन अंदर से उसको यह भी पता था की यह तबू है. उसके लिए यह फ्रीडम और कण्ट्रोल का मिक्सचर था — मां जी के साथ वो खुद को कम्प्लीटली सरेंडर भी कर रही थी और गीता को भी उसी रास्ते पर ले जा रही थी.

रौशनी (गीता को किश करते हुए, इमोशनल आवाज़ mein):Geeta… तू मेरी प्यारी साली है… मैं चाहती हूँ तू भी यह मज़ा फील करे… हम तीनो एक हो गए हैं आज… कोई गुनाह नहीं… सिर्फ हमारा अपना रिश्ता…

गीता (साली)गीता सबसे ज़्यादा कॉन्फ्लीक्टेड थी. शुरू में बहुत शर्म और डर था, लेकिन अब वो धीरे धीरे खुल रही थी. उसके मैं में गिल्ट, एक्ससिटेमेंट, सबमिशन और एक नयी तरह की फ्रीडम का कॉकटेल था. वो मां जी के डोमिनान्स से दर रही थी लेकिन उसी में अत्त्रक्ट भी हो रही थी. रौशनी के साथ उसको एक सेफ एंकर मिल रहा था जो उसको ेन्सॉरगे कर रही थी.

गीता (रौशनी की चूचियां चूसते हुए, इमोशनल और लस्ट मिक्स mein):Bhabhi… मुझे बहुत शर्म आ रही है… लेकिन रोक नहीं पा रही… मां जी आप दोनों को छोड़ रहे हो… मैं फील कर रही हूँ जैसे मैं भी आपकी हो गयी हूँ… यह गलत है न? फिर भी… बहुत गहरा कनेक्शन फील हो रहा है…

रौशनी ने गीता को और तिघ्टलय किश किया और धीरे से बोलै:

रौशनी:गलत सही मत सोच अब… बस फील कर. हम तीनो के बीच यह बांड आज बन गया है… तू मेरी साली है, लेकिन आज तू मेरी भी बन गयी है…

मां जी ने रौशनी की गांड में एक गहरा धक्का मारा और गीता के बाल पकड़ कर उसको रौशनी की चूचियों पर और दबाया.

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मां जी:दोनों मेरी हैं… आज से हमारा यह रिश्ता अलग है. गीता तेरी शर्म मुझे और पागल करती है… और रौशनी तेरी गर्मी मुझे और ज़ोर देती है.

तीनो के बीच फिजिकल चुदाई के साथ अब इमोशनल इंटिमेसी भी बढ़ रही थी — गिल्ट, एक्सेप्टेन्स, पोस्सेस्सिवेनेस्स, केयर और रॉ डिजायर का यूनिक मिक्स.

मां जी का लस्ट अब पूरी तरह वाइल्ड हो चूका था. उन्होंने रौशनी को ज़ोर से उठा लिया — बिना अपना मोटा लुंड उसकी गांड से बहार निकले. रौशनी अब उनके ऊपर लटक रही थी, उनकी टाँगे मां जी की कमर के अराउंड लपेट ली थी और हाथ उनकी गर्दन और पीठ के अराउंड.

मां जी (रौशनी को उठाये हुए, zor-zor से धक्के मरते hue):Ab मैं तुझे उठा कर छोडूंगा… तेरी गांड में पूरा लुंड दाल कर…

उन्होंने रौशनी को स्टैंडिंग पोजीशन में उठा रखा था. उनका मोटा, मोटा लुंड रौशनी की गांड में गहरा घुसा हुआ था और वो zor-zor से ऊपर से धक्के मर रहे थे. हर धक्के के साथ रौशनी का पूरा शरीर upar-neeche हिल रहा था.

रौशनी (मां जी के गले में बाहें डाले हुए, ज़ोर से मोअन करते hue):Aaaahhhh… मां जी… बहुत गहरा… आप इतने स्ट्रांग हो… मेरी गांड को उठा कर छोड़ रहे हो… आआह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से…

गीता को तोह रौशनी अब पूरी तरह सेक्स सिंबल hi लग रही थी.. उसकी बड़ी चूचियां मां जी के सीने से रगड़ खा रही थी, उसकी गांड मां जी के हाथों में थी और वो उनके मोटा लुंड पर सवार थी. उसकी आँखों में सिर्फ हवस और मज़ा था.

गीता साइड में बैठी यह सब देख रही थी. उसकी आँखें फैली हुई थी — शॉक और इंटेंस अरौसल का मिक्सचर.

गीता (शॉकेड और हॉर्नी आवाज़ mein):Mama जी… आप इतने ताकतवर हैं… भाभी को ऐसे उठा कर छोड़ रहे हो… उफ्फ्फ्फ़… भाभी आप कितनी मस्त चुदती हो… आपका शरीर कितना कामुक लग रहा है… मां जी का मोटा लुंड आपकी गांड में अंदर बहार हो रहा है… मैं देख रही हूँ… बहुत अरूसेड हो रही हूँ…

रौशनी (मां जी के गले से लिपटे हुए, गीता की तरफ देखते hue):Geeta… देख… मैं इस मोटा लुंड पर सवार हूँ… आआह्ह्ह… मां जी बहुत ज़ोर से छोड़ रहे हैं मेरी गांड को… तू भी तैयार हो जा… तेरी बारी आएगी…

मां जी ने रौशनी को और तिघ्टलय पकड़ लिया और स्टैंडिंग पोजीशन में उसकी गांड की और तेज़ चुदाई करने लगे. हर धक्के के साथ रौशनी का पूरा शरीर उछाल रहा था.

मां जी (गरम और वाइल्ड आवाज़ mein):Le रौशनी… तेरी गांड बहुत टाइट है… मैं तुझे उठा कर छोडूंगा जितना चाहे…

रौशनी (ज़ोर से चिल्लाते hue):Aaaahhhh… हाँ… और ज़ोर से… मेरी गांड छोड़ hi , लाल कर दो दो… गीता देख रही है न… मैं कितने मज़े ले रही हूँ…

गीता अब अपनी छूट पे हाथ फेरते हुए उनको देख रही थी. उसकी सांस तेज़ हो रही थी और वो शॉक के साथ बहुत अरूसेड फील कर रही थी.

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गीता (धीरे se):Bhabhi… आप सच में सेक्स सिंबल हो… मां जी आपको ऐसे उठा कर छोड़ रहे हैं… बहुत हॉट लग रहा है देखने में…

मां जी का लस्ट अब बिलकुल नियंत्रण से बहार हो चूका था. उन्होंने रौशनी को झटके से नीचे लिटाया और उसकी पीठ के बल बिस्तर पर सुलाया. फिर उसकी गांड ऊपर उठा कर अपना पूरा शरीर उस पर रख दिया.

उन्होंने अपना मोटा लुंड रौशनी की गांड के छेद में एक hi झटके में गहरा दाल दिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मरने लगे.

मां जी:अब मैं तुझे दबाकर छोडूंगा… तेरी गांड को पूरी तरह से तोड़ दूंगा…

रौशनी:आआह्ह्ह्हह… मां जी… बहुत गहरा जा रहा है… आपका पूरा वजन मुझ पर… मेरी गांड पहात रही है… और ज़ोर से धकेलिए…

मां जी ने रौशनी को बिलकुल दबोच लिया था. उनका मोटा लुंड अब बहुत गहराई तक उसकी गांड में घुसा हुआ था और वो बहुत तेज़ और शक्तिशाली धक्के मर रहे थे.

रौशनी:आआह्ह्ह्ह… मां जी… मुझे और दबाइये… मेरी गांड को मारों … बहुत मज़ा आ रहा है…

गीता पास बैठी यह सब देख रही थी. उसकी आँखें फैली हुई थी और वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी.

गीता:भाभी… आपको दबाकर छोड़ रहे हैं… मां जी कितने वाइल्ड हो गए हैं… उफ्फ्फ्फ़… भाभी आपकी गांड कितनी ज़ोर से हिल रही है… उफ्फ्फफ्फ्फ़

मां जी ने एक हाथ रौशनी की कमर के नीचे दाल कर उसकी बुर को भी रगड़ने लगे और दूसरे हाथ से उसके बाल पकड़ कर उसका सर पीछे खींच रहे थे.

मां जी:ले रौशनी… तेरी गांड अब मेरी है… पूरी तरह दबाकर छोड़ रहा हूँ…

रौशनी:आआह्ह्ह्ह… हाँ… मुझे तोड़ दो… मेरी गांड में पूरा लुंड डालो… गीता तू भी आ… मेरे होठ चूस…

गीता ने तुरंत रौशनी के होठों को अपने मुँह में ले लिया. अब मां जी रौशनी को दबाकर उसकी गांड की बहुत वाइल्ड चुदाई कर रहे थे और गीता उसको किश कर रही थी.

रौशनी:मममहहह… बहुत वाइल्ड हो गया है आज… मां जी आप मुझे तोड़ रहे हो… आआह्ह्ह्ह…

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मां जी ने थोड़ा सा आराम करने के लिए अपना मोटा लुंड रौशनी की गांड से बहार निकला और पानी पिने के लिए उठ गए.

**मां जी:**

थोड़ा सांस ले लेता हूँ… अब गीता की गांड की बारी है.

रौशनी ने तुरंत गीता को अपने पास खींच लिया और उसको समझाने लगी.

**रौशनी:**

गीता मेरी प्यारी साली… डर मत. पहली बार थोड़ा दर्द होगा लेकिन बहुत मज़ा भी आएगा. मां जी का मोटा लुंड धीरे से अंदर जाएगा. तू रिलैक्स रख अपनी गांड को. मैं तेरी मदद करुँगी.

रौशनी ने गीता की चूचियों को दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया. पहले हलके से, फिर ज़ोर ज़ोर से मसलने लगी.

**रौशनी:**

देख तेरी चूचियां कितनी टाइट हैं… रिलैक्स हो जा…

फिर रौशनी ने गीता को पीठ के बल लिटाया और उसकी छूट से लेकर गांड तक जुबां से चाटने लगी. बार बार उसकी छूट को चाट टी, फिर गांड के छेद तक जुबां घुमा देती.

**रौशनी:**

तेरी छूट और गांड दोनों बहुत स्वादिष्ट हैं… मैं चाट रही हूँ ताकि तू और गीली हो जाए…

गीता की गर्मी बहुत तेज़ हो चुकी थी. उसकी सांस तेज़ होने लगी थी और वो अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाने लगी थी.

**गीता** (उत्तेजित आवाज़ में):

भाभी… आपकी जुबां बहुत अच्छा फील करवा रही है… मेरी गांड में भी ऐसा hi मज़ा आएगा न… मां जी का मोटा लुंड अंदर लेने की इच्छा हो रही है अब… आआह्ह… मुझे तैयार कर दो…

रौशनी ने और तेज़ चाटना शुरू कर दिया. गीता अब पूरी तरह से उत्तेजित और हॉर्नी हो चुकी थी. उसकी गांड रौशनी की जुबां के चुम्बन से गीली और तैयार होने लगी थी.

**गीता** (सिसकियों के साथ):

भाभी… जल्दी… मैं अब मां जी का मोटा लुंड अपनी गांड में लेना चाहती हूँ… बहुत उत्तेजित हो रही हूँ…

मां जी पानी पीते हुए दोनों को देख रहे थे और उनका मोटा लुंड फिर से सख्त हो चूका था.

रौशनी:गीता, अब तू पूरी तरह तैयार हो जा. पहली बार गांड में मोटा लुंड लेने के लिए बहुत धीरे और गहरी तैयारी चाहिए.

रौशनी ने गीता को पीठ के बल लिटाया और उसकी टाँगे फैला दी. फिर उसने अपनी जुबां से गीता की छूट को चाटना शुरू किया और धीरे धीरे नीचे उसकी गांड के छेद तक पहुँच गयी.

रौशनी:तेरी गांड बहुत टाइट है अभी… मैं इसे गीला और नरम बना रही हूँ…

रौशनी ने बार बार गीता की गांड के छेद को जुबां से छाता, अंदर तक जुबां घुमाई और उसके अराउंड गहरा चुम्बन दिया. साथ hi उसने गीता की छूट को भी ऊँगली से रगड़ना शुरू कर दिया.

गीता (सिसकियों के साथ, शरीर कांपते hue):Bhabhi… आपकी जुबां मेरी गांड के अंदर जा रही है… उफ्फ्फ्फ़… बहुत अजीब और अच्छा फील हो रहा है… आआह्ह… मुझे डर भी लग रहा है लेकिन उत्तेजना भी बढ़ रही है…

रौशनी ने गीता की गांड के छेद में एक ऊँगली धीरे से डालनी शुरू की और धीरे धीरे अंदर बहार करने लगी. साथ hi दूसरी ऊँगली से उसकी क्लीट को रगड़ने लगी.

रौशनी:धीरे से रिलैक्स कर… देखो तेरी गांड मेरी ऊँगली अंदर ले रही है… जब मां जी का मोटा लुंड आएगा तब भी धीरे से hi लेगा… तू बस अपनी गांड को नरम रख.

गीता की सांस बहुत तेज़ हो चुकी थी. उसकी गांड अब रौशनी की ऊँगली और जुबां के चुम्बन से गीली और थोड़ी खुल चुकी थी. उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ गयी थी.

गीता (गरम आवाज़ mein):Bhabhi… अब मुझे और तैयार कर दो… मैं मां जी का मोटा लुंड अपनी गांड में लेने के लिए तैयार हो रही हूँ… आआह्ह… बहुत गर्मी हो रही है मेरी गांड में…

रौशनी ने मुस्कुराते हुए गीता की गांड को और गहरा चाटना और ऊँगली से तैयार करना जारी रखा. गीता अब पूरी तरह से उत्तेजित और तैयार होने लगी थी.

गीता (सिसकियों के saath):Mama जी… अब आइये… मेरी गांड आपके लुंड के लिए तैयार है…

मां जी अपना मोटा लुंड हाथ में पकड़ कर गीता की तैयार गांड को देख रहे थे.

रौशनी ने एक शीशी से तेल निकला और पहले गीता की गांड के छेद पर अच्छे से तेल लगा दिया. फिर मां जी के मोठे लुंड पर भी गहरा तेल लगाया ताकि अंदर जाने में आसानी हो.

रौशनी:यह तेल बहुत मदद करेगा… धीरे से जाएगा.

मां जी ने गीता की गांड के छेद पर अपनी मोती ऊँगली राखी और धीरे से अपना मोटा अंगुष्ट अंदर धकेल दिया.

मां जी:देख गीता… पहले मेरा मोटा अंगुष्ट अंदर जा रहा है… रिलैक्स कर… धीरे धीरे привыात हो जायेगी तेरी गांड.

गीता की आँखें बंद थी और वो सिसकियाँ भर रही थी.

गीता:आआह्ह्ह… मां जी… आपका अंगुष्ट बहुत मोटा है… मेरी गांड में गहरा जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… दर्द हो रहा है थोड़ा… लेकिन तेल की वजह से आसानी हो रही है…

रौशनी ने गीता की चूचियों को मुँह में ले कर ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. एक चूचियां को चूस टी, दूसरी को हाथ से दबती और निप्पल को जुबां से घूमती.

रौशनी:गीता रिलैक्स कर… मेरी चूचियां चूसने से तेरा दर्द काम हो जाएगा… बस मज़ा ले…

गीता (सिसकियों के saath):Bhabhi… आप मेरी चूचियां बहुत अच्छे से चूस रही हैं… आआह्ह… मां जी आपका अंगुष्ट अंदर बहार हो रहा है… अब थोड़ा मज़ा भी आ रहा है… मेरी गांड तैयार हो रही है आपके मोठे लुंड के लिए…

मां जी ने अपना मोटा अंगुष्ट धीरे धीरे अंदर बहार करते हुए गीता की गांड को और गहरा तैयार कर रहे थे. रौशनी गीता की चूचियों को चूसते हुए उसको और रिलैक्स्ड और उत्तेजित बना रही थी.

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गीता (गरम आवाज़ mein):Ab… अब मैं तैयार हूँ… मां जी आप अपना मोटा लुंड मेरी गांड में दाल सकते हैं… धीरे से hi डालियेगा प्लीज…

रौशनी ने गीता के होठों पे किश किया और चूचियों को चूसना जारी रखा.

मां जी ने गीता की तैयार गांड को देखा. उन्होंने अपना मोटा, तेल से चमकता लुंड हाथ में पकड़ा और उसके छेद पर रगड़ने लगे.

मां जी:अब मैं अपना मोटा लुंड तेरी गांड में दाल रहा हूँ गीता… बहुत धीरे से जाएगा… रिलैक्स रख अपनी गांड को.

उन्होंने धीरे धीरे प्रेशर डालना शुरू किया. उनका मोटा सूपड़ा गीता की टाइट गांड के छेद में अंदर घुसा.

गीता (दर्द से सिसकियाँ भरते hue):Aaaahhhh… मां जी… बहुत मोटा है… मेरी गांड पहात रही है… उफ्फ्फ्फ़… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…

रौशनी ने तुरंत गीता की चूचियों को मुँह में ले कर ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया और उसके कान में धीरे से बोली:

रौशनी:धीरे से सेह ले साली… पहली बार थोड़ा दर्द होगा… मैं तेरी चूचियां चूस रही हूँ… मज़ा ले…

मां जी ने धीरे धीरे और अंदर धकेलना शुरू किया. उनका मोटा लुंड गीता की गांड में थोड़ा थोड़ा अंदर जा रहा था.

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मां जी:बहुत टाइट है तेरी गांड गीता… बहुत अच्छे से ले रही है… धीरे धीरे पूरा अंदर करूँगा…

गीता ( आँखों में आंसू आते हुए, लेकिन मज़ा भी महसूस करते hue):Mama जी… आपका लुंड बहुत गहरा जा रहा है… आआह्ह्ह… दर्द हो रहा है लेकिन… अब थोड़ा मज़ा भी आ रहा है… धीरे से hi कीजिये प्लीज…

रौशनी गीता की चूचियों को चूसते हुए उसको और रिलैक्स कर रही थी. मां जी धीरे धीरे अपना मोटा लुंड गीता की गांड में और अंदर धकेल रहे थे.

गीता (सिसकियों के saath):Bhabhi… आप मेरी चूचियां मत छोड़िये… मां जी आपका लुंड मेरी गांड के अंदर जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़…

अब मां जी का मोटा लुंड गीता की गांड में आधा अंदर चला गया था और वो धीरे धीरे धक्के मरने लगे थे.

मां जी ने अपना मोटा लुंड गीता की सबसे टाइट गांड में धीरे धीरे अंदर धकेल दिया. अब उनका आधा लुंड उसकी गांड के अंदर चला गया था.

मां जी:अब आधा लुंड तेरी गांड में घुसा है गीता… बहुत टाइट है… मैं धीरे धीरे छोडूंगा…

उन्होंने गीता की कमर को प्यार से पकड़ लिया और धीरे धीरे उसकी गांड की चुदाई शुरू कर दी. हलके हलके धक्के मार रहे थे.

गीता (दर्द के साथ सिसकियाँ भरते hue):Aaaahhh… मां जी… आपका आधा लुंड मेरी गांड में है… बहुत टाइट फील हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… धीरे कीजिये…

रौशनी ने गीता की चूचियों को मुँह में ले कर ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. कभी कभी नीचे उतर कर गीता की छूट को भी चाटने लगी.

रौशनी:मैं तेरी छूट और चूचियां चूस रही हूँ… ताकि तेरा दर्द काम हो जाए और मज़ा बढे…

गीता की दर्द धीरे धीरे काम होने लगी क्यूंकि रौशनी उसकी छूट और चूचियों को अच्छे से सेवा दे रही थी. उसकी उत्तेजना बढ़ रही थी.

गीता (सिसकियों के saath):Bhabhi… आप मेरी छूट चाट रही हैं… आआह्ह… अब दर्द काम हो रहा है… मां जी आप अब और अंदर दाल सकते हैं…

मां जी ने अब गहरे और थोड़े तेज़ धक्के मरना शुरू कर दिया. उनका मोटा लुंड गीता की गांड में और गहरा जा रहा था.

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मां जी:बहुत अच्छा… तेरी गांड अब मेरा लुंड अंदर ले रही है… धीरे धीरे पूरा अंदर करूँगा…

गीता (मज़ा महसूस करते hue):Mama जी… अब मज़ा आ रहा है… आपका लुंड मेरी गांड में गहरा जा रहा है… आआह्ह्ह… और तेज़ कीजिये…

रौशनी गीता की छूट को चाट टी रही और चूचियों को चूस टी रही थी. इससे गीता का दर्द और काम हो गया और वो पूरी तरह मज़ा लेने लगी.

गीता:भाभी… आप मत छोड़िये… मां जी आप और ज़ोर से छोड़िये मेरी गांड को… अब बहुत अच्छा लग रहा है…

मां जी अब गीता की गांड की गहरी चुदाई कर रहे थे जबकि रौशनी उसको और उत्तेजित बना रही थी.

मां जी ने गीता की कमर को मज़बूत पकड़ लिया और अपना मोटा लुंड उसकी सबसे टाइट गांड में और गहरा धकेल दिया.

मां जी:ले गीता… अब मेरा मोटा लुंड तेरी गांड में और गहरा जा रहा है… बहुत टाइट है तेरी गांड… ले पूरा लुंड अंदर…

उन्होंने अपने धक्के और तेज़ और लम्बे कर दिए. अब उनका मोटा लुंड गीता की गांड में गहराई तक अंदर बहार होने लगा था.

मां जी:देख… कितनी अच्छे से ले रही है तेरी गांड… अब पूरा लुंड अंदर बहार कर रहा हूँ… बहुत टाइट और गरम है तेरी गांड… ले… ले और गहरा…

गीता ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी. उसकी चीखें बहुत तेज़ हो गयी थी.

गीता:आआह्ह्ह्हह… मां जी… बहुत गहरा… मेरी गांड पहात रही है… आआह्ह्ह्ह… बहुत तेज़… उफ्फ्फ्फ़… आआह्ह्ह्ह…

रौशनी ने तुरंत गीता का सर पकड़ कर अपनी छूट के पास ले आया और उसकी बुर को गीता के मुँह पर दबा दिया.

रौशनी:गीता… मेरी बुर चूस… मुँह में ले और चूस… आआह्ह… इससे तेरी चीखें काम हो जाएंगी…

गीता ने रौशनी की बुर को मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया. रौशनी ने उसका सर अपनी छूट पर और दबाया.

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रौशनी:हाँ… और गहराई से चूस मेरी बुर … मां जी आप भी और ज़ोर से छोड़िये इसकी गांड को…

मां जी (तेज़ और लम्बे धक्के मरते hue):Bahut अच्छा… तेरी गांड अब मेरा पूरा लुंड अंदर ले रही है गीता… ले… ले और तेज़… बहुत टाइट है तेरी गांड… मैं तुझे पूरी तरह छोड़ रहा हूँ आज…

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गीता (रौशनी की क्लीट चूसते हुए, मुँह भरे हुए चीखें निकलती hui):Mmmhhh… आआह्ह्ह्ह… मां जी… बहुत गहरा… मेरी गांड… उफ्फ्फ्फ़… मममहह…

मां जी अब बहुत तेज़ और लम्बे स्ट्रोक्स दे रहे थे. उनका मोटा लुंड गीता की गांड में पूरा अंदर बहार हो रहा था. रौशनी गीता का मुँह अपनी छूट पर दबाये राखी थी और गीता उसकी क्लीट को ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी.

मां जी:ले गीता… अब तेरी गांड पूरी तरह मेरी हो गयी… ले और गहरा… बहुत ज़ोर से छोड़ रहा हूँ तेरी टाइट गांड को…

गीता की चीखें अब रौशनी की छूट में डाब रही थी लेकिन उसके शरीर की हर हिलती हरकत से पता चल रहा था की वो बहुत मज़े में है.

मां जी अब बहुत तेज़ और गहरे धक्के मार रहे थे. उनका मोटा लुंड गीता की टाइट गांड में पूरा अंदर बहार हो रहा था. साथ hi रौशनी गीता की छूट को ज़ोर ज़ोर से चाट रही थी और उसकी क्लीट को जुबां से रगड़ रही थी.

मां जी:ले गीता… ले मेरी साली… तेरी गांड अब पूरी तरह मेरी हो गयी… बहुत ज़ोर से छोड़ रहा हूँ…

रौशनी:गीता… तेरी छूट का रास बहुत निकल रहा है… मैं पूरी तरह चाट रही हूँ…

गीता का शरीर एकदम से टाइट हो गया. उसकी छूट और गांड दोनों स्पैमिंग करने लगे. उसको पहले से कभी नहीं हुआ था ऐसा इंटेंस आनंद.

गीता (ज़ोर ज़ोर से चीखते हुए, शरीर कांपते hue):Aaaahhhhh… मां जी… भाभी… मैं आ रही हूँ… आआह्ह्ह्ह… बहुत ज़ोर से… मेरी छूट और गांड दोनों… उफ्फ्फ्फ़… आआह्ह्ह्हह!!!

गीता का पहला ास्सगस्म आ गया. उसकी गांड मां जी के लुंड के अराउंड ज़ोर ज़ोर से स्पैमिंग कर रही थी और उसकी छूट से भी रास निकल रहा था. उसका पूरा शरीर हिल रहा था और वो ज़ोर ज़ोर से चीख रही थी.

मां जी:वहहह… गीता तेरी गांड तोह बहुत ज़ोर से स्पैमिंग कर रही है… बहुत अच्छा आ रहा है तेरा…

रौशनी ने गीता की छूट चाट ते हुए ऊपर देखा और मुस्कुराने लगी. उसकी सोच में एक गहरा एहसास था:

(रौशनी की सोच: उफ्फ्फ्फ़… मैंने भी अपनी पहली गांड चुदाई में ऐसा ास्सगस्म नहीं पाया था… यह गीता बिलकुल नयी है फिर भी इतनी तेज़ रिस्पांस दे रही है… यह तोह असली प्रो निकलेगी… शायद इसकी गांड चुदाई मुझसे भी ज़्यादा मज़ेदार होने वाली है…)

रौशनी (मुस्कुराते हुए, गीता की छूट चाटते hue):Geeta… बहुत ज़बरदस्त… तेरी पहली गांड चुदाई में hi ास्सगस्म आ गया… तू बहुत तेज़ निकलेगी…

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गीता अभी भी स्पैमिंग कर रही थी. उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे लेकिन चेहरे पर मज़ा साफ़ दिखाई दे रहा था.

गीता (सांस फूलते hue):Bhabhi… मां जी… बहुत ज़ोर का आनंद था… मेरी गांड और छूट दोनों में एक साथ… आआह्ह्ह… मैं कभी नहीं भूलूंगी यह एहसास…

मां जी अभी भी गीता की गांड में लुंड डाले हुए धीरे धीरे धक्के दे रहे थे और रौशनी गीता की छूट चाट रही थी.

मां जी अब बिलकुल कण्ट्रोल खो चुके थे. उन्होंने गीता की कमर को मज़बूत पकड़ लिया और बहुत तेज़ और गहरे धक्के मरने लगे.

मां जी (गरम और तेज़ आवाज़ mein):Aaaahhh… गीता… तेरी गांड बहुत टाइट है… मैं रहा नहीं जा रहा… बहुत जल्दी आ रहा है मेरा माल… उफ्फ्फ्फ़… तेरी गांड ने मेरा लुंड पकड़ लिया है…

उनके धक्के अब बहुत तेज़ और लम्बे हो गए थे. उनका मोटा लुंड गीता की गांड के अंदर सबसे गहराई तक जा रहा था.

मां जी (सांस फूलते हुए, मोअन करते hue):Le… ले मेरी साली… तेरी टाइट गांड में पूरा लुंड दाल रहा हूँ… आआह्ह्ह… बहुत ज़ोर से आ रहा है… मैं झड़ने वाला हूँ… तेरी गांड के अंदर hi झाड़ूंगा आज…

गीता (ज़ोर ज़ोर से चीखते hue):Aaaahhhhh… मां जी… और ज़ोर से… मेरी गांड में डालिये… आआह्ह्ह…

मां जी (तेज़ी से धक्के मरते हुए, आवाज़ में टेंशन के saath):Haaahhh… बहुत गहरा… तेरी गांड बहुत अच्छे से ले रही है… अब रुक नहीं सकता… आआह्ह्ह्हह… आ रहा है… आ रहा है मेरा माल… ले ले मेरी प्यारी गीता…

उन्होंने एक लम्बे और ज़ोर के धक्के के साथ अपना मोटा लुंड गीता की गांड के सबसे अंदर तक घुसा दिया और ज़ोर ज़ोर से झड़ने लगे.

मां जी (ज़ोर से चीखते hue):Aaaahhhhh… ले… ले मेरा माल… तेरी गांड के अंदर भर रहा हूँ… उफ्फ्फ्फ़… बहुत ज़ोर का झाड़ रहा हूँ… तेरी टाइट गांड ने सब निकाल लिया…

मां जी गीता की गांड में गहरा धक्का मार कर ज़ोर से झड़ने लगे. उन्होंने अपना मोटा लुंड झड़ते हुए hi बहार निकाल लिया और तुरंत रौशनी की तरफ घुमा दिया.

मां जी (ज़ोर से मोअन करते hue):Le रौशनी… ले मेरा माल…

उनके मोठे लुंड से गहरा और गधा माल का फव्वारा रौशनी के चेहरे पर छूटने लगा. कुछ माल उसके मुँह, गाल, आँखों और चूचियों पर गिर गया.

रौशनी ने तुरंत आगे बढ़ कर मां जी के मोठे लुंड को मुँह में ले लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. वो उनके लुंड से निकल रहे माल को चाट रही थी और गीता की गांड की खुशबू वाले लुंड को गहरा चूस रही थी.

रौशनी (लुंड चूसते हुए, गरम आवाज़ mein):Mmmhh… मां जी का माल और गीता की गांड की खुशबू… बहुत नशीला है… उफ्फ्फ्फ़… मैं इसको पूरा चाट रही हूँ…

रौशनी ने एक हाथ से अपनी छूट में ऊँगली दाल कर ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी. गीता की गांड की खुशबू और मां जी के माल के साथ वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी.

रौशनी (अपनी छूट में ऊँगली करते हुए, मोअन करते hue):Aaaahhhh… बहुत नशीला है… गीता तेरी गांड की खुशबू मेरे मुँह में… मां जी आपका माल मेरे चेहरे पर… मैं आ रही हूँ…

रौशनी का शरीर एकदम से टाइट हो गया. उसकी छूट स्पैमिंग करने लगी और वो ज़ोर से झाड़ गयी. उसकी उँगलियाँ अपनी छूट में अंदर बहार हो रही थी और वो मां जी के लुंड को चूस टी रही थी.

रौशनी (झड़ते hue):Aaaahhhhh… मैं आ गयी… बहुत ज़ोर का आनंद आ रहा है…

मां जी अपना लुंड रौशनी के मुँह में डाले हुए खड़े थे और गीता थकी हुई बिस्तर पर लेती हुई उनको देख रही थी.

मां जी:बहुत ज़बरदस्त था आज… दोनों ने मुझे बहुत मज़ा दिया…

रौशनी अभी भी मां जी के लुंड को चाट रही थी और अपने चेहरे पर लगे माल को ऊँगली से उठा उठा कर चाट रही थी.

रौशनी ने गीता को अपने सीने से चिपका लिया. दोनों के चेहरे पर मां जी का गधा माल लगा हुआ था.

रौशनी:आ मेरी साली… अब हम दोनों एक दूसरे को चूमें…

दोनों बहनें एक दूसरे के होठों पर झुक गयी. उनकी किश बहुत गहरी और गीली हो गयी क्यूंकि दोनों के होठ और गाल मां जी के गधे माल से भरे हुए थे.

रौशनी (किश करते हुए, जुबां से माल चाटते hue):Mmmhh… गीता… तेरे होठों पर भी माल लगा है… बहुत स्वादिष्ट है… मैं इसको चाट रही हूँ…

गीता (शर्माते हुए लेकिन उत्तेजित होकर किश करते hue):Bhabhi… आपके चेहरे पर भी माल लगा है… हम दोनों किश कर रहे हैं… उफ्फ्फ्फ़… माल के साथ किश करना बहुत नशीला लग रहा है…

दोनों की ज़ुबानें एक दूसरे के मुँह में घुल रही थी. उनके होठ माल से गीले हो रहे थे. रौशनी ने गीता के गाल पर लगा माल चाट लिया और फिर उसके होठों को ज़ोर से चूसने लगी.

रौशनी (किश के बीच mein):Aaj हम दोनों मां जी के माल से शनी हैं… और हम एक दूसरे को चूस रहे हैं… बहुत गरम एहसास है यह…

गीता (सिसकियों के साथ किश करते hue):Bhabhi… आपकी जुबां मेरी लिप्स पर माल के साथ… आआह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… हम दोनों के चेहरे पर माल लगा है और हम किश कर रहे हैं…

दोनों बहनें एक दूसरे के गले में बाहें डाले हुए गहरी गहरी किश कर रही थी. कभी कभी वो एक दूसरे के गाल, गर्दन और होठ पर लगा माल चाट भी रही थी. उनकी किश में माल की गीली चमक दिखाई दे रही थी.

रौशनी (किश करते hue):Geeta… तू बहुत प्यारी है… आज हम तीनो का यह रिश्ता बहुत गहरा हो गया है…

मां जी उनको देख कर मुस्कुराते हुए बैठ गए थे और उनका लुंड अभी भी सख्त था.

मां जी:बहुत सुन्दर नज़ारा है… दोनों बहनें मेरे माल से शनी होकर किश कर रही हैं…

दोनों की किश अभी भी जारी थी.

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पुम्फोसे के अंदर अब एक थका हुआ, गरम और नशीला माहौल बन गया था.

हवा में पसीने, सेक्स की खुशबू और थोड़ी सी मिटटी की स्मेल मिल रही थी. पुराण पंखा धीरे धीरे चल रहा था, लेकिन उससे गर्मी काम नहीं हो रही थी. एक छोटी सी बल्ब की हलकी पीली रौशनी तीनो के शरीर पर पद रही थी.

बिस्तर पर तीनो थके हुए लेट रहे थे.

  • मां जी बिस्तर के सिरहाने तकिये पर लेट गए थे. उनका मोटा लुंड अब थोड़ा नरम हो चूका था, लेकिन अभी भी चमक रहा था. उनके सीने पर पसीना था और सांस अभी भी तेज़ थी.
  • रौशनी गीता के बगल में लेती हुई थी. उसका चेहरा, गाल और चूचियां अभी भी मां जी के गधे माल से शनी हुई थी. उसकी बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी और वो हलकी हलकी सांस ले रही थी.
  • गीता सबसे ज़्यादा थकी हुई नज़र आ रही थी. उसकी टाइट गांड अभी भी लाल और थोड़ी सी खुली हुई थी. उसकी छूट और गांड से थोड़ा माल और रास निकल रहा था. उसकी आँखें बंद थी और चेहरा लाल था. उसकी पतली कमर और चूचियों पर भी पसीना चमक रहा था.

तीनो के शरीर एक दूसरे से चिपके हुए थे. गीता और रौशनी एक दूसरे के गले में बाहें डाले हुए लेती थी. मां जी दोनों के बीच में बैठ कर उनके शरीर को सहला रहे थे.

पुम्फोसे के बहार खेत में हवा चल रही थी, लेकिन अंदर बिलकुल अलग दुनिया थी — गरम, गीला, नशीला और थका हुआ.

मां जी (हलकी आवाज़ mein):Aaj बहुत ज़बरदस्त था… तुम दोनों ने मुझे स्वर्ग दिखा दिया…

रौशनी (गीता के गाल को चूमते hue):Haan… हम तीनो आज पूरे तरह एक हो गए…

गीता (शर्माते हुए, धीरे se):Bahut थक गयी हूँ… लेकिन बहुत मज़ा भी आया… यह एहसास मैं कभी नहीं भूलूंगी…

पुम्फोसे के अंदर अब सिर्फ तीनो की हलकी सांसें और कभी कभी चूमने की हलकी आवाज़ गूँज रही थी. बहार का अँधेरा और सुनसान खेत उन तीनो को पूरी तरह से छुपा रहा था.

यह उनका अपना छुपा हुआ, गरम और यादगार पल था.

__________________________________________

तीनो पुम्फोसे से निकल कर घर पहुँच गए. सबके चेहरे पर थकान और एक छुपा हुआ नशीला एहसास था. घर पहुँचते hi रमेश बहार बैठा हुआ था. उन्हें देख कर वो तुरंत उठा.

रमेश:कहाँ थे इतनी देर सब? मैं परेशां हो रहा था.

मां जी मुस्कुराते हुए आगे बढे और रमेश के कंधे पर हाथ रख कर बोले:

मां जी:अरे बीटा, चिंता मत कर. मैं रौशनी को ज़मीन दिखा रहा था जो अब तेरी हो गयी है. बहुत अच्छी ज़मीन है. और हाँ, एक और तोहफा है तुझे. मैं एक और टुकड़ा ज़मीन रौशनी के नाम कर रहा हूँ. क्यूंकि वह सबसे अच्छी बहु है जो मैं चाहता था. घर संभालती है, सबको खुश रखती है.

मां जी ने यह बोलते हुए रौशनी की तरफ आँख मारी. रमेश को कुछ नहीं दिखा.

रमेश:वाह, यह तोह बहुत बड़ी बात है. धन्यवाद् मां जी!

थोड़ी देर बाद जब मां जी अंदर चले गए, रमेश ने रौशनी की तरफ देखा और हलके से पुछा:

रमेश:रौशनी, बता तोह सही, तूने मां जी पर क्या जादू कर दिया? पहले से ज़्यादा खुश और उदार क्यों हो गए हैं आजकल?

रौशनी ने हलकी सी मुस्कान ली. उसकी सोच में पुम्फोसे की साड़ी गर्मी और मां जी के मोठे लुंड की यादें आ गयी — कैसे उनकी छूट और गांड दोनों को मां जी ने छोड़ रखा था.

रौशनी (मुस्कुराते हुए, अंदर से गरम होते hue):Kuch नहीं… बस मैं अपना फ़र्ज़ अच्छे से निभा रही हूँ. मां जी खुश हैं तोह अच्छी बात है न?

रौशनी ने यह बोलते हुए अपने अंदर की बात छुपाई. उसकी छूट और गांड अभी भी थोड़ी सी दर्द और मज़ा महसूस कर रही थी. वो जानती थी की यह जादू मां जी के लुंड और उनके तेज़ चुदाई का hi असर था.

अगला दिन…

सुबह तीनो घर से निकलने की तैयारी कर रहे थे. रमेश ने रौशनी की कमर को अपने हाथ से पकड़ लिया और उसके साथ आगे आगे चल रहा था. रौशनी के चूतड़ हर कदम के साथ हिल रहे थे.

पीछे से मां जी उन्हें विदा कर रहे थे. उनकी नज़र रौशनी के हिलते हुए चूतड़ों पर लगी हुई थी.

मां जी (मुस्कुराते hue):Achhe से जाना… जल्दी आना फिर.

रौशनी पीछे मुद कर देखा. तब उसने देखा की मां जी ने गीता को बाँहों में उठा लिया था और अंदर ले जा रहे थे. मां जी ने दरवाज़ा बंद कर दिया था.

रौशनी के मैं में सोच आयी:

(अब तोह यह नया चुदाई भरा रिश्ता शुरू हो गया है मां जी और गीता के बीच… और मैं खुश हूँ की मेरी भी छूट और गांड की मस्त चुदाई हो चुकी है… एक तरफ पति ने, दूसरी तरफ मां जी ने…)

रौशनी हलकी सी मुस्कान के साथ रमेश के साथ आगे बढ़ गयी. वह इस गाँव से .. उस पुम्फोसे में की गयी साड़ी गर्मी और मां जी के मोठे लुंड की यादें और उसकी गांड और बुर चुदाई की निशानी लिए वापस लौट रही थी.

थे एन्ड ऑफ़ Roshni’s विलेज एडवेंचर

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रौशनी अपने शहर के घर पहुँच चुकी थी. विलेज की वह वाइल्ड रात अभी भी उसके मैं और शरीर में घूमी जा रही थी. वो ड्राइंग रूम के सोफे पर बैठ गयी और आँखें बंद कर ली.

उसकी सोच में तुरंत मां जी का मोटा लुंड आ गया — कैसे उनका लुंड उसकी छूट और गांड दोनों में गहरा घुसा था. पुम्फोसे में मां जी का ज़ोर, गीता के साथ थ्रीसम, दोनों के चेहरे पर माल, किश… सब कुछ याद आ रहा था.

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रौशनी (अपने आप से, हलकी सी मुस्कान के saath):Uffff… मां जी का मोटा लुंड… मेरी छूट और गांड दोनों को फाड़ दिया था… और गीता के साथ वह थ्रीसम… बहुत नशीला था… अब मां जी गीता को भी बहुत ज़ोर से छोड़ रहे होंगे… उसकी टाइट बुर और गांड को… सोच कर hi मेरी छूट गीली हो रही है…

रौशनी ने अपनी टाँगे थोड़ी सी फैलाई. उसकी छूट अभी भी थोड़ी सी सेंसिटिव थी. वो सोच रही थी की मां जी अब गीता को कितनी ज़ोर से छोड़ रहे होंगे — उसकी बुर में और गांड में गहरे धक्के.

थोड़ी देर बाद उसने टेबल पर एक नोट देखा. नोट में लिखा था:

"रौशनी, मैं शाम तक घर आ जाऊंगा. कही बहार गया था, बताऊंगा जब आऊंगा.

रौशनी ने नोट पढ़ कर हलकी सी सांस ली.

रौशनी (मैं hi mann):Ronit शाम को आएगा… और मैं अभी भी मां जी और गीता की यादों में डूबी हुई हूँ… अब मुझे ऑफिस के लिए तैयार होना है. ंगो में असिस्टेंट डायरेक्टर का काम है, मीटिंग भी है आज.

वो उठी और बैडरूम में गयी. मिरर के सामने कड़ी होकर अपने शरीर को देखा. उसकी चूचियां, कमर और गांड पर अभी भी हलके निशाँ थे. वो हलके से मुस्कुराई.

रौशनी (अपने आप se):Aaj ऑफिस में सब नार्मल दिखेगा… लेकिन अंदर से मैं अभी भी उनके लुंड और गीता की सिसकियों की यादों में हूँ… उनका एडवेंचर तोह अब शुरू हुआ है…

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वो तैयार होने के लिए बाथरूम की तरफ गयी.

रौशनी नहाने के बाद तैयार होने लगी. उसने एक स्लीवलेस साड़ी ब्लाउज पहना जो बहुत गहरा बैक कट था. ब्लाउज उसकी पीठ को काफी खुला छोड़ रहा था. साड़ी को वह नैवेल से काफी नीचे बाँधी थी. हल्का पिंक लिपस्टिक लगाया, हल्का मेकअप किया और बाल को पोनी टेल में बाँध लिया.

वो मिरर के सामने कड़ी होकर खुद को देखती रही.

"उफ़ रौशनी पिछली चुदाई भरी हफ्ते के बाद तेरी फिगर तोह और भी मस्त हो गयी हैं .. उफ्फ्फ मां जी ने मेरी चकहियों को दबा दबा कर चूस चूस कर और भी बड़े बनाये हैं उफ्फ्फ और मेरी चूतादें उफ्फ्फ .. अब तोह ंगो जाउंगी और फिर तोह वहां वह दोनों सांड भी मिलेंगे न असलम मियां और वह सलीम जो मुझ से चीट कर उस मीनल की चुदाई कर रहा था .. कमीना साला.

रिक्शा में बैठ कर वो ंगो की तरफ जा रही थी. उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा सरक गया था और डीप बैक कट ब्लाउज से उसकी पीठ दिखाई दे रही थी. और सब मर्द उसकी को घर रहे थे . ऑफिस के बहार रिक्शा से उतारते हुए उसने अपना पल्लू सही किया और अंदर पहुंची अपने ऑफिस.

रौशनी अपने केबिन में बैठी थी, लैपटॉप पर कुछ फाइल्स देख रही थी लेकिन उसका मैं कहीं और था. सुबह से उसे पिछले हफ्ते की वाइल्ड चुदाई की मेमोरीज उसके बॉडी को गरम कर रही थी. आफ्टरनून ब्रेक का टाइम होते hi उसने क्लॉक देखा – 2:30 पं.

रौशनी (मैं hi मैं, हलकी सी स्माइल के साथ): एक हफ्ता हो गया... असलम मियां का लुंड तोह पक्का तड़प रहा होगा. और मैं भी... उफ़, उसकी मोती लौड़ा की याद आते hi मेरी छूट गीली होने लगी है. सलीम तोह अपनी मीनल के चक्कर में बिजी है, लेकिन असलम... वह मेरे लिए hi इंतज़ार कर रहे होंगे.

वो उठी, अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा एडजस्ट किया (जो उसके बड़े चूचियों पर कास कर बैठा हुआ था), और ऑफिस से निकल पड़ी. ंगो के बहार ऑटो पकड़ कर वह सीधा उस इलाके की तरफ गयी जहां असलम का घर था ...

पांच मिनट बाद वह वहां पहुँच गयी. घर का दरवाज़ा half-open था. अंदर जाते hi उसने असलम को देखा – वह कुछ बॉक्सेस शिफ्ट कर रहा था, उसकी कुरता पसीने से भीगी हुई थी और उसकी मस्कुलर बॉडी साफ़ दिखाई दे रही थी.

रौशनी (घुसकर, धीरे से): असलम मियां... क्या हाल है?

असलम ने पलट कर देखा और उसकी आँखों में एक डैम चमक आ गयी. उसने जल्दी से गेट बंद किया और रौशनी के पास आया.

असलम (उसकी कमर पकड़ते हुए, भूखे स्वर में): अरे मेरी जान... एक हफ्ता बाद आयी हो. मैं तोह दिन रात बस तेरी याद में hi लुंड हिलता रहा हूँ. तेरी वह टाइट छूट और गांड की याद ने मुझे पागल कर दिया था.

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रौशनी ने उसके सीने से चिपक कर उसकी गर्दन पर किश किया. उसके बड़े चूचिये असलम के सॉलिड सीने से रगड़ रहे थे.

असलम ने बिना एक सेकंड वास्ते किये उसको अपने सीने से कास कर खींच लिया.

असलम का एक हाथ उसकी पीठ पर था और दूसरा उसकी गांड पर. वह रौशनी को गहरी नज़रों से देखते हुए उसके होंठों पर अपने लिप्स जोड़ दिया. यह किश बिलकुल वाइल्ड और भूखा था – जैसे एक हफ्ते की प्यास एक साथ निकाल रहा हो.

रौशनी ने भी पूरी लस्ट के साथ रेस्पोंद किया. उसने अपने दोनों हाथ असलम की गर्दन में दाल दिए और उसके होंठों को चूसने लगी. दोनों की जुबां एक दूसरे में घुस कर खेल रही थी. वेट, स्लॉपी और पैशनेट किश था वह.

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रौशनी के बड़े, भरे हुए चूचिये असलम के सॉलिड सीने से ज़ोर से डाब रहे थे. ब्लाउज के थीं फैब्रिक के थ्रू भी उसकी गरम चूचियां फील हो रही थी. असलम ने एक हाथ से उसकी गांड को zor-zor से सेहला और दबाने लगा, उसकी सॉफ्ट और गोल चूतड़ों को मसलता हुआ. दूसरा हाथ उसकी स्मूथ, नंगी पीठ पर घूम रहा था – बैकलेस ब्लाउज की वजह से उसकी पूरी पीठ उसके हाथों के लिए खुली थी.

असलम (किश के बीच सांस लेते हुए, गरम आवाज़ में): उफ़... तेरी गांड कितनी सॉफ्ट और टाइट है... और तेरी पीठ... बहुत मस्त है आज.

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रौशनी (उसके होंठों को चूसते हुए, हलकी सी सिसकारी के साथ): मममहह... और ज़ोर से दबाओ मियां... हाथ घुमाओ मेरी चूतड़ पर... अह्ह्ह...

दोनों का किश और गहरा होता जा रहा था. असलम की उंगलियां रौशनी की साड़ी के ऊपर से उसकी गांड को दबोच रही थी, कभी कभी उसकी पीठ पर नेल्स फेरते हुए. रौशनी भी उसके सीने से और चिपक गयी, अपने चूचियों को उसके बॉडी पर रगड़ रही थी. दोनों की साँसें एक दूसरे में मिल रही थी और किश के बीच हलकी सी चीख और मोअन निकल रही थी.

किश इतना इंटेंस था की रौशनी के लिप्स थोड़े स्वेल्ल हो गए थे और असलम का लुंड उसकी जांघों के बीच खड़ा हो कर डाब रहा था, लेकिन उन्होंने अभी सिर्फ किश और टच तक hi रखा.

रौशनी (किश तोड़ कर, सांस चढ़ाते हुए उसकी आँखों में देखते हुए): बहुत मिस किया था तुम्हे...

असलम ने उसके लोअर लिप को हलके से काट कर मुस्कुराया और फिर से उसको किश करने लगा.

असलम ने रौशनी को किश से हटा कर उसका हाथ पकड़ा और धीरे से बोलै:

असलम: चल, थोड़ी देर बैठते हैं. बहुत दिन बाद आयी है तू.

वह उसके घर के एक छोटा सा कम्फर्टेबले सोफे पर बैठे,. असलम ने रौशनी को सोफे पर बिठा लिया और खुद उसके बिलकुल साथ बैठ गया, इतना करीब की उनके जिस्म एक दूसरे से लग रहे थे.

असलम का एक हाथ रौशनी की कमर पर था और उसने उसे तिघ्टलय पकड़ रखा था. उसकी उंगलियां उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी नंगी कमर को सेहला रही थी. रौशनी ने अपना सर असलम के कंधे पर रख दिया, उसके बड़े चूचिये उसके सीने से हलके से रगड़ रहे थे.

रौशनी (हलकी सी सांस लेते हुए): उफ़... एक हफ्ता हो गया था. बहुत मिस कर रही थी तुझे.

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असलम (उसकी कमर को और गहरे से सहलाता हुआ, दूसरे हाथ से उसके बाल में उँगलियाँ फेरते हुए): मैं तोह रोज़ रात को तेरी याद में hi पागल हो जाता था. तेरी वह सॉफ्ट गांड, बड़ी चूचियां और टाइट छूट... सब याद आता था. आज जब तू आयी न, तोह दिल और लुंड दोनों खुश हो गए.

रौशनी मुस्कुराई और उसके सीने पर हाथ फेरते हुए बोली:

. आप बताइये, कैसा रहा आपका हफ्ता..

असलम (उसकी कमर को हलके से दबोचते हुए, उसके नैवेल के पास ऊँगली घूमते हुए): बस तेरी इस खूबसूरती को बहुत मिस किया जानेमन .. यही मन करता हैं यहीं पर राखु और ढेर सारा प्यार करू तुझ से..

रौशनी असलम की ऐसी बातें से गरम हो रही थी.

रौशनी ने अपनी टांग थोड़ी सी उसकी टांग पर रख दी और और चिपक गयी. असलम का हाथ अभी भी उसकी कमर पर था, कभी कभी ऊपर की तरफ जाकर उसकी पीठ को सहलाता और कभी नीचे की तरफ उसकी गांड के स्टार्ट तक.

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दोनों ऐसे hi बातें करते रहे – थोड़ी सी नॉटी, थोड़ी सी इमोशनल. रौशनी असलम के सीने पर हाथ फेर रही थी और असलम उसको अपने करीब रखे हुए उसकी कमर और पीठ को टच करते हुए बात कर रहा था. उनके बीच की क्लोसनेस्स और गरम सांस अभी भी महसूस हो रही थी.

असलम और रौशनी सोफे पर और भी करीब आ गए. उनकी बातें धीरे धीरे गहरी होने लगी.

रौशनी (उसकी चेस्ट पर हाथ फेरते हुए, नरम आवाज़ में): असलम... सच बताओ, इस हफ्ते मैं नहीं थी तोह किसी और को सोचा भी था क्या?

असलम (उसकी कमर को और तिघ्टलय पकड़ कर, उसके गले में किश करते हुए): सिर्फ तुझे... तेरी बॉडी, तेरी सिसकियाँ, तेरी स्मेल. कोई और नहीं चाहिए मुझे. पता हैं न गांजा , न बीड़ी न दारु .. बस रौशनी .. तू hi मेरी सबसे बड़ी नशा है.

रौशनी की सांसें तेज़ होने लगी. वह कुछ मिनट से hi लस्ट में खो चुकी थी. उसने असलम का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर एक गहरा, भूखा किश कर दिया. दोनों की जुबां फिर से एक दूसरे में घुस गयी, वेट और पैशनेट.

असलम पूरा गरम हो चूका था. उसने किश छोड़ते हुए रौशनी का पल्लू एक झटके में नीचे सरका दिया. उसकी बड़ी, भरी हुई चूचियां ब्लाउज में से उभर कर सामने आ गयी. असलम ने तुरंत अपना मुँह उनके बीच में लगा दिया और zor-zor से चूमने लगा, उनको दबाते हुए.

रौशनी (सिसकारी भर कर): अह्ह्ह... असलम...

असलम ने जल्दी से रौशनी के ब्लाउज के ऊपर के तीन हुक्स खोल दिए. ब्लाउज दोनों तरफ से खुल गया और उसकी टाइट ब्रा सामने थी. उसने ब्रा को नीचे धकेल दिया और उसके दोनों बड़े निप्पल्स को मुँह में ले लिया. पहले एक को ज़ोर से चूसने लगा, फिर दुसरे को. उसके दांत हलके से निप्पल को खींच रहे थे.

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रौशनी ने अपनी आँखें बंद कर ली थी और एक हाथ से असलम के सर को पकड़ कर अपनी चूचियों पर और ज़ोर से दबा रही थी.

रौशनी (मॉनिंग में, सांस चढ़ाते हुए): हैं... और ज़ोर से चुसो मियां... उफ्फ्फ्फ़... बहुत दिन से तरस रही थी इसके लिए... अह्ह्ह... काट दो थोड़ा...

असलम दोनों हाथों से उसकी चूचियों को मसल रहा था और मुँह से उनको चूस और चूस रहा था. कभी निप्पल को जुबां से चक्कर देता, कभी पूरा निप्पल मुँह में ले कर चुष्ट. रौशनी की चूचियां अब और भी टाइट और भरी हुई लग रही थी.

रौशनी पूरी तरह लस्ट में डूब चुकी थी. उसकी टाँगे थोड़ी सी फैली हुई थी और वह असलम के सर को पकडे हुए अपने निप्पल्स चुसवा रही थी, कभी कभी हलकी सिसकियाँ निकल रही थी.

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असलम (उसके निप्पल को चूसते हुए, गरम सांस के साथ): कितनी टेस्टी हैं तेरी चूचियां आज... और कितनी बड़ी हो गयी हैं... मैं इनको पूरा दिन चूस सकता हूँ.

रौशनी की लस्ट अब पूरी तरह कण्ट्रोल ले चुकी थी. असलम के मुँह में अपनी चूचियां चुसवाते हुए उसकी आँखें बंद थी और सांसें बहुत तेज़ हो रही थी. उसने एक हाथ असलम के सीने से नीचे की तरफ ले जाकर उसकी पंत के ऊपर से उसके मैसिव बुल्गे पर रख दिया.

रौशनी (हलकी सी सिसकारी के साथ मन hi मन सोचने लगी): (उफ्फ्फ्फ़... इतना बड़ा और सख्त हो गया है... मां जी से भी बड़ा और रमेश से भी मोटा... सिर्फ सलीम का hi इससे भी ज़्यादा मोटा और लम्बा है...

असलम ने गरम सांस में हसकर उसका हाथ पकड़ा और तुरंत अपनी पंत के अंदर दाल दिया.

असलम: पकड़ ले मेरी जान... देख कितना तड़प रहा है तेरा लुंड.

रौशनी की उँगलियाँ तुरंत उसके गरम, मोती लौड़े पर लपेट गयी. असलम का लुंड पूरा खड़ा और बहुत मोटा था – उसकी उँगलियाँ उसके मोटापे को पूरी तरह नहीं घेर प् रही थी. उसके लुंड के टॉप पर से प्रेकम बहुत ज़्यादा निकल रहा था, जो रौशनी के हाथ पर लीक हो रहा था. वह गरम और स्लिपरी हो चूका था.

रौशनी ने अपनी आँखें बंद किये हुए hi उसके लुंड को तिघ्टलय पकड़ा और धीरे धीरे ऊपर नीचे स्ट्रोक करने लगी. हर स्ट्रोक के साथ असलम का लुंड और भी हार्ड होता जा रहा था, और ज़्यादा प्रेकम उसके हाथ पर टपक रहा था.

रौशनी (उसके निप्पल चुसवाते हुए और हाथ से लुंड हिलाते हुए, मदहोशी में): कितना मोटा है तेरा... हाथ में भी नहीं आ रहा पूरा... और कितना गरम प्रेकम निकल रहा है... मममहह...

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असलम (उसकी चूचियों को ज़ोर से चूसते हुए, भारी आवाज़ में): अह्ह्ह... हाँ मेरी रानी... और ज़ोर से हिलाओ... बहुत दिन बाद तेरी सॉफ्ट हाथ में आ रहा है मेरा लुंड... उफ्फ्फ्फ़...

रौशनी अब पूरी तरह लस्ट में डूब चुकी थी. एक तरफ असलम उसके बड़े निप्पल्स को zor-zor से चूस और काट रहा था, और दूसरी तरफ वह अपने हाथ से उसके मोठे लुंड को तिघ्टलय पकड़ कर स्ट्रोक कर रही थी. उसके हाथ अभी तक असलम के प्रेकम से वेट हो चुके थे.

असलम की सांसें और भारी होती जा रही थी और वह रौशनी की चूचियों को और भी भूखे पैन से चूस रहा था.

असलम ने रौशनी की साड़ी को और ऊपर किया और उसकी टांगों के बीच हाथ दाल दिया. उसकी पंतय पहले से hi गीली हो चुकी थी. उसने पंतय को साइड किया और अपनी दो उंगलियां सीधे रौशनी की छूट के अंदर घुसा दी.

रौशनी (एक ज़ोर की सिसकारी के साथ): आआह्ह्ह... असलम...!

असलम की उंगलियां उसकी गीली और गरम छूट के अंदर andar-bahar होने लगी. वह एक्सपर्ट तरीके से उसकी G-spot को रगड़ रहा था और कभी कभी उसकी क्लीट पर भी ऊँगली घुमा देता. रौशनी की चूचियां अभी भी बहार थी और असलम एक हाथ से उनको दबाते हुए दूसरे हाथ से उसकी छूट में उंगलियां चला रहा था.

लेकिन कुछ hi देर बाद रौशनी को होश आया. उसने नज़र घडी पर डाली – दुपहर का टाइम हो चूका था और ऑफिस वापस जाना ज़रूरी था.

रौशनी (सांस फूलते हुए, असलम के हाथ को रोकते हुए): असलम... प्ल्ज़... छोड़िये मुझे... उफ्फ्फ्फ़... मत तड़पाइए ऐसे... नहीं तोह यहीं पर hi... ाःह... मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाऊँगी... मुझे ऑफिस वापस जाना है अभी.

उसने असलम का हाथ अपनी छूट से हटा दिया, लेकिन उसकी आवाज़ में अभी भी पूरी लस्ट थी. उसकी छूट अभी भी उँगलियों के जाने के बाद भी खुली और गीली थी.

असलम (उसको चिढ़ाते हुए, मुस्कुराते हुए, फिर से हाथ बढ़ाते हुए): क्या हुआ मेरी जान? यहीं पर hi क्या प्रॉब्लम है? इतनी गीली हो राखी है... एक बार छोड़ दूँ तोह ठीक से मैं भर जाए... ऑफिस थोड़ी देर और वेट कर लेगा न?

रौशनी (उसके सीने पर हाथ रख कर रोकती हुई, हलकी सी हंसती हुई): नहीं मियां... प्लीज... अभी नहीं. मैं आलरेडी लेट हो रही हूँ. रोनित भी शाम को आने वाला है... अगर मैं अभी नहीं गयी तोह सब बिगड़ जाएगा. बस आज इतना hi... बाकी नेक्स्ट टाइम पूरी तरह तुम्हारी हो जाउंगी.

असलम ने थोड़ा और मज़ा लेते हुए उसके निप्पल पर एक लास्ट चुम्मा दिया और उसकी छूट पर एक बार और ऊँगली फेर दी, फिर हाथ हटा लिया.

असलम (उसके होंठों पर किश करते हुए): ठीक है मेरी रानी... लेकिन अगले बार इतनी जल्दी नहीं छोडूंगा तुझे. पूरा दिन रखूँगा यहीं.

रौशनी ने जल्दी से अपनी ब्रा ऊपर की, ब्लाउज के हुक्स बंद किये, पल्लू सही किया और असलम को एक गहरा किश देकर उठ कड़ी हुई. उसकी टाँगे अभी भी थोड़ी कम्प रही थी.

रौशनी: मैं चलती हूँ... में आयी थी अभी क्यूंकि में बहुत मिस कर रही थी तुम्हे.

असलम ने रौशनी के jaate-jaate उसकी कलाई पकड़ ली और उसे अपनी तरफ खींच लिया. वह अभी भी सोफे पर बैठा था और रौशनी कड़ी थी, उसके बिलकुल सामने.

असलम (गरम और थोड़ी सी ज़िद भरी आवाज़ में): आज शाम को वापस आ जाना. मैं वेट करूँगा. पूरा टाइम तेरे लिए फ्री रखूँगा.

रौशनी (उसकी कलाई को धीरे से छुड़ाते हुए, प्यार से): असलम... आज नहीं मियां. मैं हफ्ते बाद आयी हूँ घर... रोनित शाम को घर पर इंतज़ार कर रहा होगा. अगर मैं आज भी लेट हुई तोह वह शक करने लगेगा. प्लीज समझ लो.

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असलम ने उसकी कलाई नहीं छोड़ी. उसने उसको और करीब खींचा और उसकी कमर पर हाथ रख कर बोलै:

असलम: बस एक बार आ जा... मैं जल्दी छोड़ दूंगा. या फिर रात को थोड़ी देर के लिए.

रौशनी (उसके सीने पर हाथ रख कर, हलकी सी मुस्कान के साथ): नहीं असलम... आज सच में नहीं हो पायेगा. कल शाम को पक्का. मैं कल ऑफिस से सीधा तेरे पास आ जाउंगी. पूरी शाम तेरे साथ स्पेंड करुँगी. प्रॉमिस.

असलम ने थोड़ा और तड़पाते हुए उसकी कलाई को छोड़ दिया और मुस्कुराते हुए बोलै:

असलम: उफ्फ्फ्फ़... और तडपाओगी मेरी बेगम? इतना तोह मेरी रुकसाना बेगम भी नहीं तड़पती थी... और न hi मैं उसके लिए इतना तड़पता था. बस उसे खींच लेता और यहीं चुदाई कर hi छोड़ता. लेकिन तू मेरी डार्लिंग है... तेरे लिए इंतज़ार करूँगा कल शाम तक. पर याद रखना — कल तेरे साथ कोई जल्दी नहीं करूँगा. पूरा टाइम लूंगा तेरा.

रौशनी ने उसके गाल पर किश किया और उसके लुंड पर हाथ से एक लास्ट स्क्वीज़ देते हुए धीरे से बोली:

रौशनी: कल पूरी तरह तुम्हारी हो जाउंगी... अभी जाने दो न.

असलम ने एक गहरा किश किया और आखिरी बार उसकी गांड पर ज़ोर से थप्पड़ मारा.

असलम: ठीक है मेरी जान. कल शाम तक तड़प कर रहूँगा.

रौशनी ने अपना पल्लू सही किया, थोड़ा मेकअप चेक किया और मुस्कुराती हुई बहार निकल गयी. उसकी छूट अभी भी गीली थी और असलम के उँगलियों और चूचियों के चूसने की याद उसके मैं में घूम रही थी.

रौशनी ऑफिस पहुंची तोह उसका मैं बिलकुल कहीं और था. उसने अपने केबिन में बैठ कर लैपटॉप खोला, लेकिन आँखें स्क्रीन पर थी और दिमाग असलम के गोडाउन में था.

उसके मैं में अभी भी वह सब घूम रहा था — असलम का गहरा किश, उसके बड़े हाथों का उसकी गांड और कमर पर प्रेशर, उसके मुँह में अपनी चूचियों का चूसना, और उसके मोठे लुंड को हाथ में पकड़ कर स्ट्रोक करने की फीलिंग. उसके हाथों पर अभी भी असलम का प्रेकम सुख चूका था, जो उससे याद दिला रहा था.

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रौशनी (मैं hi मैं, हलकी सी सांस लेते हुए): उफ्फ्फ असलम... तूने आज तोह बिलकुल पागल कर दिया था मुझे. कल शाम को क्या करेगा यह... मैं सोच भी नहीं सकती.

काम में बिलकुल मैं नहीं लग रहा था. मीटिंग में भी उसने सिर्फ फॉर्मल बातें की, बाकी टाइम तोह सिर्फ असलम के सपने देख रही थी. कैसे उसने उसकी छूट में उंगलियां डाली थी, कैसे उसके निप्पल्स को चूसा था... सब कुछ याद आ रहा था.

किसी तरह से उसने अपना काम ख़तम किया. इवनिंग हो चुकी थी – 6:30 बज रहे थे.

ऑफिस से बहार निकलते hi उसने रिक्शा की तरफ जाने की बजाये लेफ्ट साइड देखा — असलम के घर का रास्ता. एक पल के लिए बहुत टेम्पटेशन हुआ. उसकी छूट में फिर से हल्का सा करंट दौड़ गया.

रौशनी (अपने आप से): बस एक बार चली जॉन... रोनित को बोल दूंगी लेट हो गया. लेकिन... नहीं. आज नहीं. उसने प्रॉमिस किया था कल का.

उसने मैं को संभाला और सीधा घर की तरफ रिक्शा पकड़ लिया.

घर पहुँचते hi दरवाज़ा खोलते hi उसने रोनित को देखा. आज उसका मूड अलग था. वह सोफे पर बैठा था, चेहरे पर थोड़ी सी ख़ुशी और एक्ससिटेमेंट दिखाई दे रही थी. पहले जैसे उदास और फ़्रस्ट्रेटेड नहीं था.

रोनित (मुस्कुराते हुए): आयी गयी? आज जल्दी आ गयी लग रही है.

रौशनी घर के अंदर आते hi रोनित को देख कर थोड़ी सी रुक गयी.

आज रोनित का लुक बिलकुल अलग था. वह एक अच्छे से आयरन किये हुए लाइट ब्लू शर्ट और डार्क जीन्स पहने हुआ था. उसके बाल नेअटली सेट किये हुए थे, चेहरा saaf-shaved था — एक भी बाल नहीं था. वह बिलकुल वह पुराण रोनित लग रहा था, जिसे वह पहले बहुत प्यार करती थी — स्मार्ट, कॉंफिडेंट और अट्रैक्टिव.

रौशनी (मैं hi मैं): वाह... आज तोह बिलकुल पहले जैसा लग रहा है. कितना हैंडसम दीखता है जब इतना संभल कर रखता है खुद को.

रौशनी (थोड़ा सुरप्रीसेड होकर, स्माइल करते हुए): हाँ... काम ख़तम कर के आ गयी. आज तुम्हारा मूड अलग लग रहा है. क्या बात है?

रोनित ने उठ कर उसके पास आया और उसको गले लगा लिया.

रोनित: अच्छी खबर है रौशनी. आज एक कंपनी में इंटरव्यू था... और लगता है सेलेक्ट हो गया हूँ. पैकेज भी डेन्ट है. कल फाइनल कन्फर्मेशन आ जायेगा.

रौशनी: वाओ... बहुत ख़ुशी की बात है. मैं तोह बहुत दिन से यही सोच रही थी.

रोनित ने उसको और करीब खींचा और उसके होंठों पर किश किया. आज उसकी किश में अलग सी एनर्जी थी.

रोनित ने उसको और करीब खींच लिया. उसकी बाहों में आज पुराणी वाली वार्मथ और थोड़ी सी मर्दानगी महसूस हो रही थी.

रोनित (उसके कान में धीरे से): आज सेलिब्रेट करते हैं. मैंने सोचा था की हम दोनों बहार डिनर कर आएं. क्या कहती हो?

रौशनी का मैं एक पल के लिए असलम की तरफ चला गया — उसके मोठे लुंड, उसकी वाइल्ड टचिंग और कल शाम का वडा.

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लेकिन रोनित को ऐसे खुश देख कर उसने मैं को संभल लिया.

रौशनी: हाँ... ज़रूर. मैं फ्रेश हो कर आती हूँ.

जब वह बैडरूम में कपडे बदलने गयी, तोह मिरर में अपने आप को देखा. उसकी साड़ी अभी भी थोड़ी सी क्रीज़ थी असलम के हाथों से, और उसके चूचियों पर हलके निशाँ अभी भी थे. उसने गहरी सांस ली.

रौशनी (अपने आप से): आज रोनित के साथ अच्छा टाइम स्पेंड करुँगी... कल असलम के लिए सेव करुँगी.

रौशनी तैयार होकर निकली. उसने एक सिंपल और सेक्सी ब्लैक साड़ी पहनी थी जो उसकी फिगर को बहुत अच्छे से हाईलाइट कर रही थी. डिनर के लिए दोनों एक अच्छे रेस्टोरेंट में गए. रोनित बहुत खुश और एक्ससिटेड था. दोनों ने अच्छे से बातें की, पुराने दिनों की यादें ताज़ी की और नयी जॉब की प्लानिंग की.

रोनित ने उसको कई बार कॉम्पलिमेंट किया — “आज तू बहुत खूबसूरत लग रही है” और “तेरे बिना यह ख़ुशी अधूरी थी”.

घर लौटने के बाद मूड अभी भी रोमांटिक था.

जैसे hi मैं दूर बंद हुआ, रोनित ने रौशनी को अपनी तरफ घुमा लिया और उसके होंठों पर एक गहरा किश किया. यह किश पहले जैसे सॉफ्ट और प्यार भरा था, लेकिन इस बार उसमें थोड़ी सी भूख भी थी.

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रोनित (उसको किश करते हुए): आज बहुत दिन बाद फील हो रहा है... जैसे पहले होता था.

रौशनी भी रेस्पोंद कर रही थी. दोनों बैडरूम में गए. रोनित ने धीरे से उसकी साड़ी का पल्लू नीचे किया और उसकी कमर को सहलाने लगा. रौशनी ने उसके शर्ट के बटन्स खोलने शुरू किये.

दोनों बीएड पर लेट गए. रोनित उसके ऊपर आया और उसके गले, नैक और चूचियों के ऊपर किश करने लगा. उसने रौशनी का ब्लाउज खोला और ब्रा के ऊपर से hi उसके बड़े चूचियों को दबाने लगा.

रौशनी (हलकी सिसकारी के साथ): मममहह... रोनित...

रोनित ने उसकी ब्रा खोली और उसके निप्पल्स को मुँह में ले कर चूसने लगा. वह धीरे धीरे, प्यार से कर रहा था. रौशनी की आँखें बंद थी, लेकिन उसके मैं में असलम की वाइल्ड चुदाई वाली इमेजेज भी आ रही थी.

रोनित ने उसकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर किया, पंतय उतरी और अपनी ऊँगली से उसकी छूट को सहलाने लगा. रौशनी आलरेडी थोड़ी गीली थी — असलम के साथ गुज़रे टाइम की वजह से.

रोनित अपने कपडे उतर कर उसके ऊपर लेट गया. उसका लुंड मध्यम साइज का और सख्त था.

रोनित ने रौशनी को प्यार से वाल के साथ लगा दिया. उसने उसके दोनों गालों पर किश किया, फिर उसके होंठों को अपने होंठों में धीरे से समेत लिया. यह किश जल्दी और भूखे पैन वाला नहीं था — बहुत स्लो, गहरा और प्यार भरा था.

रोनित (उसके होंठों को चूसते हुए धीरे से): आज सिर्फ तू और मैं... कोई जल्दी नहीं.

उसने रौशनी को उठा कर बैडरूम में ले गया और बीएड पर बहुत प्यार से लिटाया. दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे. रोनित ने उसकी साड़ी का पल्लू धीरे से नीचे किया और उसकी कमर पर किश करने लगा. उसकी उंगलियां रौशनी की पीठ पर घूम रही थी, जैसे हर इंच को फील कर रहा हो.

रौशनी ने उसके बाल में हाथ दाल कर उसका चेहरा ऊपर किया और फिर से किश किया. रोनित ने उसका ब्लाउज खोलते हुए उसके चूचियों को हाथों में लिया और उनको dheere-dheere सहलाया. उसने ब्रा का हुक खोला और ek-ek करके दोनों निप्पल्स को मुँह में लिया. वह बहुत प्यार से चूस रहा था — जुबां से gol-gol घूमते हुए, हलके से चूसते हुए, कभी कभी धीरे से काट भी लेता.

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रौशनी (सुकून भरी सिसकारी के साथ): मममहह... रोनित... बहुत अच्छा लग रहा है आज...

रोनित ने उसकी साड़ी और पेटीकोट को धीरे से ऊपर किया. उसकी टाँगे फैलाकर उसने उसकी छूट पर किश किया — पहले बहार से, फिर जुबां अंदर तक घुसा दी. वह बहुत स्लो और सेंसुअल तरीके से उसकी छूट चाट रहा था, क्लीट को जुबां से रगड़ रहा था. रौशनी की टाँगे काँप रही थी.

थोड़ी देर बाद रोनित उसके ऊपर आया. दोनों की आँखें मिल रही थी. उसने अपना लुंड रौशनी की छूट के मुँह पर रगड़ते हुए धीरे से अंदर धकेल दिया.

रोनित (उसकी आँखों में देखते हुए, एक गहरे धक्के के साथ): अह्ह्ह... रौशनी...

यह रदम बहुत स्लो और गहरा था. हर धक्का गहरा और प्यार भरा था. रोनित उसके ऊपर लेट कर उसको तिघ्टलय पकडे हुए था. कभी वह उसके होंठों को चूस लेता, कभी उसके चूचियों को, कभी उसके गले पर. रौशनी भी उसके हिप्स के साथ अपने हिप्स हिला रही थी, दोनों का मिलान बहुत इंटिमेट और इंटेंस था.

इस बार रोनित में वह पुराणी बेचैनी और जल्दी नहीं थी. वह धीरे धीरे लेकिन ज़ोर से छोड़ रहा था — जैसे हर धक्के में उसको पूरी तरह फील करना चाहता हो.

रौशनी (उसके कान में मोअन करते हुए): और गहरा... बहुत अच्छा लग रहा है आज...

रोनित ने रौशनी को तिघ्टलय पकडे हुए hi अपना लुंड उसके अंदर रखा हुआ था. दोनों की सांसें मिल रही थी. उसने धीरे से अपने हिप्स हिलने शुरू किये — अभी भी स्लो और गहरे धक्के.

रौशनी ( आँखें बंद किये, हलके से मोअन करते हुए): मममहह... रोनित... आज बहुत अलग फील हो रहा है...

रोनित उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को फिर से चूसने लगा. हर धक्के के साथ वह उसके चूचियों को अपने सीने से दबोच रहा था. उसकी स्पीड धीरे धीरे बढ़ रही थी, लेकिन अभी भी वाइल्ड नहीं थी — प्यार भरी, इंटेंस और पैशनेट थी.

रौशनी के मैं में थॉट्स आ रहे थे:

यह वही पुराण रोनित है... जो मुझे इतना प्यार से छोड़ता था. मां जी, असलम या सलीम जैसा वाइल्ड और बीस्ट वाला नहीं... लेकिन आज बहुत इंटेंस है. बहुत दिन बाद फील हो रहा है की मेरा पति मुझे छोड़ रहा है... और मैं एन्जॉय कर रही हूँ.

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रोनित ने उसकी एक टांग अपने कंधे पर रख दी और थोड़ा गहरा एंगल बनाकर धक्के मरने लगा. हर धक्का अब और गहरा और मज़ेदार हो रहा था. वह कभी उसके निप्पल्स को चूस रहा था, कभी उसके गले पर लव बिट्स दे रहा था.

रौशनी (उसकी पीठ पर नेल्स गाड़ते हुए, मदहोशी में): अह्ह्ह... हाँ... और ज़ोर से... बहुत अच्छा लग रहा है आज...

यह उनका 2 हफ्ते बाद का पहला सेक्स था और महीनो बाद का सबसे हॉट और सटिस्फीइंग सेशन. रोनित अभी भी कण्ट्रोल में था, लेकिन उसकी मर्दानगी और प्यार दोनों saath-saath आ रहे थे.

उसने रौशनी को घुमा दिया और अब डोगग्य स्टाइल में उसके पीछे आ गया. उसने उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर धीरे से अपना लुंड अंदर डाला. इस पोजीशन में भी वह स्लो और गहरा छोड़ रहा था, कभी कभी उसकी पीठ पर किश करते हुए.

रौशनी (सिराने को पकड़ते हुए, मोअन करते हुए): उफ्फ्फ्फ़... रोनित... गहरा डालो... बहुत दिन बाद... अह्ह्ह...

रोनित ने उसके बाल पकड़ कर (लेकिन ज़ोर से नहीं) उसको थोड़ा ऊपर खींचा और रदम तेज़ किया. रूम में सिर्फ उनकी साँसों और thap-thap की आवाज़ें हो रही थी.

रौशनी का शरीर अभी भी असलम के टच से सेंसिटिव था, इसलिए हर टच और धक्का उसको एक्स्ट्रा मज़ा दे रहा था. वह अंदर hi अंदर सोच रही थी की आज का सेक्स बहुत अच्छा लग रहा है — इमोशनल और फिजिकल दोनों तरह से.

रोनित ने फिर से उसको घुमाया और मिशनरी में आ गया. अब दोनों की आँखें मिल रही थी. वह तेज़ धक्के मर रहा था लेकिन हर धक्के के साथ उसको किश कर रहा था.

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रोनित (सांस चढ़ाते हुए): रौशनी... ी लव यू...

रौशनी (उसके सीने से चिपक कर, मोअन करते हुए): मैं भी... अह्ह्ह... मत रुकना आज...

दोनों का पेस और तेज़ होता जा रहा था. रौशनी की छूट अब बहुत गीली हो चुकी थी और रोनित का लुंड अंदर बहार स्मूथली जा रहा था.

रोनित का रदम अब और तेज़ और इंटेंस हो चुक्का था. वह रौशनी के ऊपर लेट कर zor-zor से धक्के मर रहा था, लेकिन हर धक्के में अभी भी वह प्यार और कनेक्शन महसूस हो रहा था.

दोनों के शरीर पसीने से तर थे. रोनित ने रौशनी की टाँगे अपनी कमर पर लपेट ली और गहरे, तेज़ धक्के मरने लगा. रौशनी भी उसके साथ अपने हिप्स utha-utha कर मिल रही थी.

रौशनी (सांस फूलते हुए, मोअन करते हुए): रोनित... बहुत अच्छा लग रहा है आज... आआह्ह... और तेज़...

यह सेशन लगभग 20 मिनट तक चला — मां जी, असलम या सलीम के साथ उसके सेशंस से काफी काम, लेकिन आज रोनित के साथ यह टाइम बहुत सटिस्फीइंग और इमोशनली कनेक्टेड था. रोनित का लुंड उसकी छूट के अंदर गहरा जा रहा था और हर धक्के के साथ रौशनी को एक अलग hi मज़ा दे रहा था.

आखिर में रोनित का शरीर टाइट हो गया. उसने रौशनी को बहुत ज़ोर से पकड़ लिया और एक गहरे धक्के के साथ अपना गरम माल उसकी छूट के अंदर छोड़ दिया.

रोनित (ज़ोर से मोअन करते हुए): अह्ह्ह्हह... रौशनी...!

रौशनी भी उसके साथ hi झाड़ गयी. उसकी छूट रोनित के लुंड के अराउंड स्पास्मोडिकालय सिकुड़ रही थी. दोनों एक दूसरे से लिपट कर zor-zor से सांस ले रहे थे.

रौशनी (उसके सीने पर हाथ फेरते हुए, हलकी सी मुस्कान के साथ): आज बहुत ज़बरदस्त था... पुराने रोनित की वापसी लग रही है. बहुत दिन बाद इतना अच्छा फील हुआ.

रोनित ने उसके माथे पर किश किया और उसको अपनी बाँहों में और खींच लिया.

रोनित: हाँ जान... मैं भी बहुत खुश हूँ आज. दोनों एक दूसरे के बाँहों में सो गए .. आज रौशनी खुश थी .. उसके पति रोनित सुधर गए थे ..

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रोनित ने जॉब के बारे में सिर्फ इतना hi बताया था की “एक कंपनी में अच्छा पैकेज है”, लेकिन डिटेल्स नहीं दिए थे. उसने पुछा भी था लेकिन रोनित ने टॉपिक चेंज कर दिया था.

रोनित ने रौशनी को अपनी बाहों में तिघ्टलय पकड़ रखा था, लेकिन उसका मैं बिलकुल अलग जगह था.

असल में रोनित की सिचुएशन बहुत खतरनाक हो चुकी थी.

जब से उसका बिज़नेस बंद हुआ था, तब से वह बहुत बड़े डेब्ट में डूब चूका था. शुरू में उसने सोचा था की कुछ लोन ले कर बिज़नेस वापस खड़ा कर लेगा, लेकिन उसने गलती से अपने एक पुराने “दोस्त” से पैसे उधार लिए. वह दोस्त असल में एक लोन शार्क और अंडरवर्ल्ड का आदमी निकला.

अब वह दोस्त हर हफ्ते प्रेशर बना रहा था. जब रोनित पैसे नहीं दे पाया, तोह उसने रोनित को एक अल्टीमेटम दिया था — या तोह पूरा पैसा वापस करो, या फिर मेरे ड्रग डीलिंग के बिज़नेस में पार्टनर बन कर काम करो.

रोनित ने मजबूरी में हाँ कर दिया था. आज जो उसने रौशनी को “जॉब” बताया था, वह असल में इसी ड्रग रैकेट में एंट्री था. वह अब उसके दोस्त के लिए डिलीवरी, कलेक्शन और कुछ लोकल लेकिन हाई एन्ड लेवल के काम करेगा. पैकेज और “अच्छी कंपनी” वाली बात सिर्फ झूठ थी ( पैसे तोह बहुत मिलने वाले थे लेकिन गैर कानूनी कामों से, ताकि रौशनी खुश रहे और शक न करे.

रौशनी अभी भी उसके सीने पर लेती हुई थी, बिलकुल अनजान. उसके चेहरे पर ख़ुशी थी. बहुत दिन बाद उसने रोनित को इतना कॉंफिडेंट, well-dressed और एनर्जेटिक देखा था. वह सोच रही थी की अब सब ठीक हो जायेगा — रोनित वापस पुराने वाले एनर्जेटिक और केयरिंग पति बन रहा है.

रौशनी (खुद से, ख़ुशी से): आज सच में पुराण रोनित वापस आ गया लगता है... फाइनली एक अच्छी जॉब मिल गयी है उसको. अब सब कुछ नार्मल हो जायेगा.

लेकिन रोनित अंदर hi अंदर बहुत परेशां था. उसने रौशनी के बाल सहलाते हुए सोचा — “मुझे इससे दूर रखना होगा. यह दुनिया बहुत गन्दी है... अगर रौशनी को कुछ पता चल गया तोह उसका विश्वास मुझे पर जो वापस दिख रहा हैं .. वह नष्ट हो जायेगा.”

वह रौशनी को और करीब खींच कर लेट गया, बहार से प्यार भरा पति बन कर, लेकिन अंदर से एक नयी टेंशन और दर के साथ.

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सुबह के 6:30 बजे थे. रौशनी धीरे से आँखें खोली. उसके aas-paas रोनित के हाथ थे — एक हाथ उसकी कमर पर, दूसरा उसके बड़े चूचियों के नीचे. वह बिलकुल उसके सीने से चिपकी हुई थी.

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यह पहली बार था हफ़्तों बाद की उन्होंने रात को सेक्स किया था, और उसके बाद से यह पहली सुबह थी जब वह अपने पति की बाहों में जाएगी थी.

रौशनी (मैं hi मैं, सॉफ्ट स्माइल के साथ): उफ्फ्फ... कितना सुकून है आज. बहुत दिन बाद ऐसा फील हो रहा है. रोनित वापस आ रहा है... और मेरा सेक्स लाइफ भी.

उसके चेहरे पर एक नेचुरल ग्लो था. उसकी आँखों में थकान नहीं, बल्कि एक सॉफ्ट सटिस्फैक्शन थी. वह धीरे से रोनित के हाथ हटा कर उठ बैठी, लेकिन उसके बॉडी में अभी भी रात वाली ठहरी हुई गर्माहट थी.

बाथरूम में जाकर उसने गरम पानी से नहाया. स्टीम में उसकी मिल्की फेयर स्किन और भी सॉफ्ट लग रही थी. मिरर में देखते हुए उसने अपने आप से कहा:

रौशनी: आज तोह लग रहा है की मैं और भी हॉट लग रही हूँ...

उसने एक स्लीवलेस ब्लाउज पहना जिसका बैक कट बहुत डीप था — उसकी पुरे मिल्की पीठ ऑलमोस्ट नंगी थी, सिर्फ थीं स्ट्रैप्स थे. साड़ी उसने नैवेल से थोड़ी नीचे बाँधी. हल्का पिंक लिपस्टिक लगाया, बाल लूसे छोड़ दिए, और आज उसने अपना मंगलसूत्र बिलकुल साफ़ और प्रोमिनेन्ट रखा था — जैसे jaan-boojh कर दिखा रही हो की वह मैरिड है.

जब वह बैडरूम से निकल कर लिविंग रूम में आयी, तोह रोनित सोफे पर बैठा था, चाय पी रहा था. उसने रौशनी को देखा और उसकी आँखें थोड़ी सी बड़ी हो गयी.

रोनित (एक स्लो स्माइल के साथ, उसको ऊपर से नीचे तक देखते हुए): उफ्फ्फ्फ़... आज तोह तू अल्ट्रा सेक्सी लग रही है. इतना डीप बैक कट?

वह उठा और उसके पास आया, उसकी नंगी पीठ पर हाथ फेरते हुए.

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रोनित (उसके कान के पास, तैसिंग टोन में): लगता है ऑफिस में कोई नया बॉयफ्रेंड बन गया है? इसलिए इतनी म्हणत से तैयार हुई है आज? या फिर सिर्फ मेरे लिए hi इतनी हॉट हो रही है?

रौशनी ने हसकर उसके सीने पर हल्का थप्पड़ मारा, लेकिन उसके चेहरे पर ब्लश आ गया.

रौशनी: बस ऐसे hi... आज मूड अच्छा है. और हाँ, मंगलसूत्र तोह मैं हमेशा पहनती हूँ. तुम्हे प्रॉब्लम है क्या?

रोनित ने उसकी पीठ पर एक और हाथ फेरते हुए उसको अपने सीने से चिपका लिया.

रौशनी कहती हैं .. रोनित सुनो न आज शाम थोड़ा लेट होगा .. वह बहुत दिनों से छुट्टी पर थी न तोह ज्यादा काम हैं ..

(रौशनी के मन में उसे पता था काम तोह नहीं था , आज असलम के साथ शाम बिताने का वडा जो की थी)

रोनित चिढ़ाते हुए .. अच्छा तोह कोई बॉयफ्रेंड तोह नहीं न .. इतने दिनों से मेरे गलत बर्ताव ने तुम्हे किसी बॉयफ्रेंड के बाँहों में तोह नै धकेला ..

रौशनी . "उफ़ ऐसे कुछ नहीं तुम भी न .. बस ..

रोनित "अरे इतने महीनो से में पागल था जो तुम्हारी जवानी और खूबसूरती को नाज़ा अंदाज़ किया था .. लेकिन सच कहता हूँ तुम्हे ऐसे ड्रेस उप होकर देख जलन होती हैं क और कोई तुम्हे देख पाएगा इतनी सेक्सी और जवान जो हो तुम ..

Ronit:ab तोह दिन भर बस यही सोचता रहूँगा की ऑफिस में तुझे ऐसे देख वहां के मर्दों का तोह उसका लुंड खड़ा हो जायेगा.

रौशनी "रोनित डिअर लगता हैं भूल गए हो तुम्हे भी ऑफिस जाना हैं आज .."

रोनित " उफ़ हाँ सही हैं भूल गया में तोह ... आज तोह मैं भी लेट हो गया घर से निकलने में...

रौशनी उसके गले में हाथ दाल कर उसको किश किया, लेकिन उसके मैं में असलम का चेहरा भी फ़्लैश हुआ — आज शाम का वडा.

रौशनी (हलकी सी हसी के साथ): चलो अब ऑफिस जाती हूँ. लेट हो रही हूँ.

वह निकल पड़ी, लेकिन उसके स्टेप्स में आज एक अलग सी स्किप थी. ग्लो उसके फेस और बॉडी दोनों पर था.

---

रिक्शा में बैठते hi रौशनी ने साड़ी का पल्लू थोड़ा एडजस्ट किया. डीप बैक कट ब्लाउज की वजह से उसकी मिल्की पीठ हलकी हवा से टच हो रही थी. रिक्शा वाला kabhi-kabhi आईने से उसको देख रहा था, लेकिन उसका मैं बिलकुल कहीं और था.

रस्ते भर उसके दिमाग में रोनित घूम रहा था.

रौशनी (मैं hi मैं, सॉफ्ट स्माइल के साथ): आज तोह सच में पुराण रोनित वापस आ गया लगता है. पहले जैसा तैसिंग, नौघटिनेस्स... उसकी आँखों में वह ओल्ड स्पार्क था. “नया बॉयफ्रेंड है क्या?”... उफ़, उसने तोह आज मुझे hi फ़्लर्ट कर दिया.

उसके चेहरे पर एक सुकून भरी ख़ुशी थी. रात का सेक्स, सुबह उसकी बाहों में जागना, और अब यह नया कॉंफिडेंट रोनित — सब मिलकर उसको बहुत अच्छा फील करवा रहा था.

लेकिन उसके बाद उसका मैं रोनित के “बॉयफ्रेंड” वाले कमेंट पर अटक गया.

रौशनी (अपने आप से, थोड़ा ब्लश करते हुए): बॉयफ्रेंड... हाँ, अब तोह असलम, सलीम, रमेश... यह सब बॉयफ्रेंड hi तोह हैं न? या फिर कुछ और भी? मां जी तोह अलग hi लेवल के थे. और असलम... उफ़, वह तोह देखते hi टूट पड़ता है मुझ पर.

उसके लिप्स पर एक नॉटी सी मुस्कान आ गयी. वह रिक्शा की सीट पर थोड़ा शिफ्ट हुई और सोचने लगी कल शाम के वेड के बारे में.

रौशनी (मैं hi मैं, हलकी सिसकारी के साथ): आज शाम पूरा टाइम असलम के साथ बिताना है... उसने क्लेअर्ल्य कहा था की आज कोई जल्दी नहीं करेगा. पूरा टाइम लेगा. उफ्फ्फ असलम भी न... मुझे देखते hi उसका लुम्बा मोटा लुंड खड़ा हो जाता है. कल उसने मेरे चूचियों को इतना चूसा था, और मेरी छूट में उंगलियां दाल दी थी... आज तोह वह मुझे बिलकुल नहीं छोड़ेगा.

उसके शरीर में एक हल्का करंट दौड़ गया. रिक्शा अभी ंगो के पास पहुँचने hi वाला था, लेकिन उसका मैं आलरेडी असलम के रूम में था — उसके मोठे लुंड, उसके रफ़ हाथों और उसकी भूखी नज़र की यादों में.

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रौशनी ने गहरी सांस ली और अपने आप से कहा:

रौशनी: आज काम पे फोकस करना है... लेकिन शाम को... असलम.

वह ंगो के गेट पर उत्तरी, पल्लू सही किया, और अंदर चली गयी. उसके स्टेप्स में अभी भी वह स्किप था, लेकिन आँखों में एक अलग सी ांतिकिपतिओं भी.

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रौशनी (मैं hi मैं, फिंगर्स से पेन घूमते हुए): कल उसने मेरी चूचियों को इतना ज़ोर से चूसा था... और जब उसने मेरी छूट में उंगलियां डाली थी तोह मैं ऑलमोस्ट झाड़ hi गयी थी. आज शाम पूरा टाइम उसके साथ... उफ्फ्फ, वह क्या करेगा मुझसे.

उसने फ़ोन उठाया. व्हाट्सप्प पे असलम का चाट ओपन किया. पहले तोह सोचा मैसेज न भेजे, लेकिन उसका हाथ कण्ट्रोल नहीं हुआ.

रौशनी:गुड मॉर्निंग मियां… आज भी सोच रहे हो मुझे?

कुछ सेकंड बाद रिप्लाई आ गया.

असलम:सुबह से लुंड खड़ा है तेरी याद में. कल शाम के बारे में सोच सोच कर पागल हो रहा हूँ. आज ऑफिस से सीधा आ जाना. कोई एक्सक्यूज़ नहीं.

रौशनी ने मैसेज पढ़ते hi थोड़ी सी स्माइल की, लेकिन उसके तइस टाइट हो गए.

रौशनी:इतना तड़प रहे हो? कल तोह मैंने कहा था पूरा टाइम दूंगी… अभी ऑफिस में हूँ, काम करने दो.

असलम:काम छोड़. तेरी वह डीप बैक कट वाली फोटो भेज. याद दिला दे की आज क्या पहना है. मैं अभी लुंड हिलता हूँ तेरी फोटो देख के.

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रौशनी ने aas-paas देखा. केबिन थोड़ी प्राइवेट थी. उसने धीरे से फ़ोन को पीछे की तरफ किया, बैक कैमरा से अपनी डीप कट पीठ की फोटो ली, पल्लू थोड़ा साइड करके, और भेज दी.

असलम:उफ्फफ्फ्फ़ मादरचोद… इतनी नंगी पीठ? आज तोह मैं इसको चाटूँगा पहले. तेरी गांड भी दिखा. जल्दी.

रौशनी ने हसकर मैसेज टाइप किया:

रौशनी:ऑफिस में हूँ मियां… इतना भी नहीं. शाम को आके खुद देख लेना. अब काम करने दो.

असलम:ठीक है मेरी बेगम. लेकिन याद रख… आज मैं तुझे 2-3 बार छोडूंगा. सुबह से तड़प रहा हूँ. मेरा लोढ़ा तैयार है.

रौशनी ने फ़ोन साइड रख दिया, लेकिन उसका फोकस बिलकुल टूट चूका था. हर बार जब वह रिपोर्ट पढ़ती, उसके दिमाग में असलम के हाथ, उसका मोटा लुंड, और उसकी भूखी नज़र आ जाती.

लंच टाइम तक उसने बरेली काम किया. उसकी छूट थोड़ी गीली हो चुकी थी सिर्फ मेस्सगेस की वजह से.

रौशनी (अपने आप से, डेस्क पर सर टेका कर): बस 4-5 घंटे और… फिर मैं असलम के पास हूँगी. आज तोह वह मुझे छोड़ेगा नहीं.

शाम के 5:45 बजे थे. रौशनी ने अपना काम jaldi-jaldi ख़तम किया. Aas-paas के लोग अभी भी बैठे थे, लेकिन उसका मैं बिलकुल नहीं था.

उसने फ़ोन चेक किया. असलम का लास्ट मैसेज अभी भी स्क्रीन पर था:

असलम:बस आ जा. गेट खुला रखूँगा. आज कोई रास्ता नहीं है. पूरी रात तक नहीं छोडूंगा तुझे.

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रौशनी ने गहरी सांस ली. उसने अपना बैग उठाया, पल्लू सही किया, और ऑफिस से निकल पड़ी.

5-10 मिनट में पहुँच जाउंगी.

असलम:जल्दी आ. मैं रेडी हूँ. तेरा लुंड आलरेडी लीक कर रहा है.

रस्ते भर रौशनी का दिल zor-zor से धड़क रहा था. एक तरफ रोनित की याद थी — सुबह उसकी बाहों में जागना, उसका तैसिंग, रात का सॉफ्ट सेक्स. दूसरी तरफ असलम की वाइल्ड भूख. उसकी छूट आलरेडी थोड़ी गीली हो चुकी थी सोच सोच कर.

रौशनी ने धीरे से अंदर ढाका दिया. अंदर डिम लाइट थी. असलम सोफे पर बैठा था, सिर्फ लोअर लुंगी पहने हुए. उसका उप्पेर बॉडी नंगा था, पसीने से हल्का चमक रहा था. जैसे hi उसने रौशनी को देखा, उसकी आँखें डार्क हो गयी.

असलम (उठते हुए, गरम आवाज़ mein):Aa गयी मेरी बेगम…

वह सीधा उसके पास आया. बिना एक सेकंड वास्ते किये उसने रौशनी को अपने सीने से कास कर खींच लिया और उसके होंठों पर एक गहरा, भूखा किश लगा दिया. उसके दोनों हाथ तुरंत रौशनी की डीप कट पीठ पर चले गए, उसकी नंगी स्किन को ज़ोर से सहलाते हुए.

असलम (किश के बीच, उसके कान mein):Subah से तड़प रहा था… आज तोह तुझे छोडूंगा नहीं.

रौशनी भी उसके किश में खो गयी. उसने अपने हाथ असलम की नंगी पीठ पर दाल दिए.

रौशनी (सांस लेते hue):Main आ गयी न… अब बता, क्या करना है आज?

असलम ने उसको और तिघ्टलय पकड़ लिया, उसकी गांड पर दोनों हाथ रख कर दबोच लिया.

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असलम ने रौशनी को अपने सीने से कास कर पकड़ा हुआ था. उसके दोनों हाथ उसकी डीप कट पीठ पर थे, उंगलियां उसकी मिल्की सॉफ्ट स्किन को सेहला रही थी.

रौशनी (उसके गले में सर रख कर, हलकी सिसकारी के साथ):

ूई माँ… उफ्फ्फ असलम… छोड़िये न मुझे… उफ्फ्फ… आप भी न… मममहह…

असलम हँसा, लेकिन हाथ नहीं हटाया. उसने ब्लाउज के पीछे से हाथ अंदर दाल दिया और ब्रा के स्ट्रैप्स को उँगलियों से खेलने लगा. उसने ब्रा को थोड़ा ऊपर धकेल कर उसके बड़े चूचियों को पीछे से सहलाया, उनके वेट को फील करते हुए.

असलम (उसके कान के पास, गरम सांस के साथ):

उफ्फ्फ रौशनी… आज तोह इतनी मलाई दार और माल लग रही हो… पहले से भी ज़्यादा. उफ्फ्फ… क्या राज़ है मेरी बेगम? अपने इस शौहर की यादों में और खिल रही हो क्या? ः…

उसने ब्रा के हुक्स को धीरे से खोल दिया. ब्रा ढीली पद गयी और उसके चूचिये आज़ाद हो गए. असलम ने पीछे से hi उनको दोनों हाथों से दबोच लिया, उनको मसलते हुए.

रौशनी (आँखें बंद करके, मोअन करते हुए):

अह्ह्ह… असलम… मत करो ऐसे… मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाऊँगी… मममहह…

असलम ने उसको और तिघ्टलय पकड़ लिया. एक हाथ से उसके चूचियों को दबाता रहा, दुसरे हाथ से उसकी गांड को सहलाने लगा. उसने रौशनी के पल्लू को बिलकुल नीचे सरका दिया.

असलम (उसके गले पर किश करते हुए):

देख कैसे खिल रही है आज… लगता हैं आज तेरे पति रोनित ने आखिर कर तुझे रात में अच्छे से छोड़ा होगा तभी इतनी सॉफ्ट और गरम हो रही है. लेकिन आज मैं तुझे उससे भी ज़्यादा तड़पाऊंगा… और फिर छोडूंगा.

रौशनी उसके सीने से चिपकी हुई थी, उसकी सांसें तेज़ हो चुकी थी. असलम के हाथ उसके बॉडी पर घूम रहे थे — पीठ, चूचिये, गांड.

रौशनी (उसके कान में, मदहोशी से):

उफ्फ्फ… आप भी न… इतना मत बोलिये… मैं शर्मा जाती हूँ…

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असलम ने उसके फेस को ऊपर उठाया और उसके होंठों पर एक गहरा, वेट किश लगा दिया. किश के बीच hi उसने उसकी ब्रा को पूरी तरह उतर दिया और ब्लाउज के अंदर से hi उसके निप्पल्स को उँगलियों से पिंच किया.

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असलम ने रौशनी को धीरे से सोफे पर लिटाया. उसने उसके ऊपर चढ़ गया, अपने दोनों हाथ उसके साइड्स पर रख कर. रौशनी की डीप कट पीठ सोफे से टच हो रही थी, उसके बड़े चूचिये अभी भी ब्लाउज के अंदर से उभर रहे थे.

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असलम ने बिना देर किये रौशनी के ब्लाउज के दो हुक्स खोल दिए. ब्लाउज दोनों तरफ से खुल गया. उसने ब्रा को थोड़ा नीचे धकेल दिया, जिससे उसके फुल, malai-daar चूचिये बिलकुल फ्री हो गए. निप्पल्स आलरेडी थोड़े से टाइट थे.

असलम ने तुरंत अपना मुँह उनके बीच में लगा दिया. पहले एक चूचिये को पुरे मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगा. उसके दांत हल्का सा निप्पल को खींच रहे थे, जुबां उसके अराउंड घूम रही थी. फिर दुसरे चूचिये पर शिफ्ट हो गया और उसको भी शामे इंटेंसिटी से चूसने लगा.

रौशनी (आँखें बंद किये, सर पीछे की तरफ, सिसकियाँ भरते हुए):

आआह्ह्ह… अहैइन… उफ्फ्फ्फ़ असलम… मममहह… अह्ह्ह…

उसके हाथ असलम के सर पर थे, उसके बाल पकड़ कर उसको अपनी चूचियों पर और ज़ोर से दबा रही थी. हर बार जब असलम निप्पल को चुस्त या हल्का काटता, रौशनी की कमर उठ जाती थी.

असलम दोनों चूचियों को ek-ek करके चूस रहा था — कभी पुरे अरेओला को मुँह में ले लेता, कभी सिर्फ निप्पल को तिघ्टलय सूचक करता. उसके हाथ नीचे जाकर रौशनी की गांड को दबोच रहे थे, उसकी साड़ी को ऊपर खींचते हुए.

रौशनी (तेज़ सांसें लेते हुए, कंटीन्यूअस मोअन्स):

अहैइन… असलम… मत दबाओ ऐसे… अह्ह्ह… बहुत ज़ोर से… मममहह…

असलम ने एक चूचिये को चूसते हुए दुसरे को हाथ से मसलना शुरू कर दिया. उसके मुँह से वेट सकिंग की आवाज़ें आ रही थी. रौशनी की चूचियां अब और भी भरी और सेंसिटिव हो चुकी थी.

रौशनी का बॉडी थोड़ा काँप रहा था. वह पुरे तरह से असलम के मुँह के नीचे सबमिट हो चुकी थी, सिर्फ सिसकियाँ और “आहें” निकल रही थी.

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रौशनी ने धीरे से अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाय. असलम के लुंगी / पंत के ऊपर से उसके लांबе, उभरते हुए मोठे लुंड को फील किया. जैसे hi उसके मुलायम हाथ उसके उभर से टकराये, असलम का लुंड एक ज़ोर का झटका मारा — जैसे किसी ने करंट लगा दिया हो.

असलम (उसके होंठों के पास, गरम सांस के साथ):

अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… मस्त बेगम हो तुम… बस लुंड के उभर को hi टच कर इतना झटके मारता है… उफ्फफ्फ्फ़…

रौशनी ने उसके लुंड को पंत के ऊपर से hi dheere-dheere सहलाना शुरू कर दिया. उसकी उंगलियां उसके शेप को फील कर रही थी — कितना लम्बा और मोटा हो चूका था. हर बार जब वह उसके टिप के पास हाथ फेरती, असलम का लुंड फिर से झटका मारता.

असलम ने उसके ऊपर झुक कर उसके होंठों को फिर से चूमने लगा. यह किश अब इमोशनल भी था और भूखा भी. दोनों की जुबां एक दूसरे से मिल रही थी. रौशनी किश के beech-beech में ाहिएँ भर रही थी.

रौशनी (चूमते हुए, सॉफ्ट मोअन्स के साथ):

मममहह… अह्ह्ह… असलम…

उसकी बुर में नमी तेज़ी से बढ़ रही थी. वह आलरेडी गीली हो चुकी थी, लेकिन अब उसकी पंतय बिलकुल वेट फील हो रही थी. उसके हाथ अभी भी असलम के उभरते लुंड को पंत के ऊपर से सेहला रहे थे — कभी उसके पुरे लेंथ को फील करती, कभी टिप को लिघ्टलय प्रेस करती.

असलम किश तोड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए बोलै:

असलम:

देख कैसे तड़प रहा है तेरा लुंड… सिर्फ तेरे सॉफ्ट हाथ से. आज तोह मैं इसको तेरी छूट में दाल कर hi शांत करूँगा…

रौशनी ने उसके लुंड को थोड़ा और तिघ्टलय प्रेस किया, लेकिन अभी भी कपड़ों के ऊपर से. उसके लिप्स फिर से असलम के लिप्स से मिल गए. किश के बीच उसकी सिसकियाँ निकल रही थी और उसका हाथ कन्टिन्यूसली उसके हार्ड लुंड को सेहला रहा था.

रौशनी (किश के बीच, मदहोशी से):

उफ्फ्फ… कितना सख्त हो गया है… मममहह…

असलम ने उसके चूचियों को फिर से हाथ में ले लिया और उनको सहलाते हुए उसके होंठों को चुस्त रहा. दोनों का कनेक्शन अब फिजिकल और इमोशनल दोनों तरह से टाइट हो चूका था.

---

असलम ने किश तोड़ते हुए रौशनी के ब्लाउज को पूरी तरह खोल दिया और एक झटके में ज़मीन पर फ़ेंक दिया. उसके बाद तुरंत उसकी ब्रा के हुक्स खोल दिए. ब्रा भी साइड हो गयी और उसके बड़े, malai-daar चूचिये बिलकुल फ्री हो गए.

असलम ने फिर से उसके होंठों को चूमते हुए एक चूचिये को मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगा. दुसरे हाथ से उसने रौशनी का हाथ पकड़ा और अपनी पंत के अंदर दाल दिया.

रौशनी की सॉफ्ट उंगलियां सीधे उसके सख्त, मोठे और लम्बे लुंड पर पद गयी. जैसे hi उसने उसको पकड़ा, असलम का लुंड फिर से एक बड़ा झटका मारा. वह गरम था, वेइन्स उभर रही थी, और टिप से थोड़ा प्रेकम निकल रहा था.

रौशनी (चूमते हुए, सिसकियाँ भरते हुए):

मममहह… अह्ह्ह… असलम…

उसने उसके लुंड को तिघ्टलय पकड़ लिया और dheere-dheere upar-neeche सहलाने लगी. उसकी मुलायम हाथ उसके पुरे लेंथ को फील कर रही थी — कितना मोटा और दुमदार था.

**रौशनी (मैं hi मैं, आँखें बंद करके):**

उफ्फ्फ… उनका मोटा दुमदार लुंड… कितनी मिस करि हूँ… उफ्फफ्फ्फ़… इतना सख्त और गरम…

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असलम उसके एक चूचिये को चुस्त रहा, कभी निप्पल को दांत से हल्का काट लेता, कभी पुरे अरेओला को मुँह में ले लेता. Beech-beech में वह उसके लिप्स पर वापस आ जाता और गहरा किश करता.

रौशनी का हाथ अब कन्टिन्यूसली उसके लुंड को स्ट्रोक कर रहा था. हर स्ट्रोक के साथ असलम की सांसें तेज़ हो रही थी और उसका लुंड और भी हार्ड फील हो रहा था.

असलम (उसके चूचिये को चूसते हुए, गरम आवाज़ में):

अह्ह्ह… बस ऐसे hi हिलाओ मेरी बेगम… तेरी सॉफ्ट हाथ… उफ्फ्फ्फ़…

रौशनी उसके सीने से चिपकी हुई थी, एक हाथ से उसके लुंड को सेहला रही थी और दुसरे हाथ से उसके बाल पकडे हुए थी. उसकी बुर अब बिलकुल गीली हो चुकी थी.

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रौशनी को अब कण्ट्रोल नहीं रहा. उसकी बुर इतनी गीली हो चुकी थी और असलम का मोटा लुंड उसके हाथ में इतना सख्त फील हो रहा था की उसने सोचना बंद कर दिया.

उसने असलम को धीरे से सोफे पर बिठा दिया. खुद उसके सामने घुटनो के बल बैठ गयी. असलम की पंत अभी भी नीचे थी, लेकिन उसका लम्बा, मोटा लुंड पूरा बहार निकल आया था — वेइन्स उभरी हुई, टिप से प्रेकम टपक रहा था.

रौशनी ने अपना मुँह उसके लुंड के पास ले जाय. पहले उसने उसके मोठे टोपे (टिप) को सॉफ्ट लिप्स से चुम्मा. फिर जुबां निकाल कर उसको dheere-dheere लीक करने लगी — टिप के अराउंड, फिर नीचे की तरफ स्लिट्स तक.

रौशनी (लीक करते हुए, सॉफ्ट वौइस् में):

मममहह… कितना गरम है…

उसने फिर से टिप को चुम्मा, उसको लिप्स के बीच प्रेस किया, और फिर धीरे से उसके पुरे लुंड को मुँह में ले लिया. पहले सिर्फ टिप, फिर थोड़ा और अंदर. उसकी गरम सॉफ्ट माउथ असलम के लुंड को सराउंड कर रही थी.

असलम (सर पीछे की तरफ, हाथ उसके बालों में, ज़ोर से सांस लेते हुए):

अह्ह्ह… … रौशनी… उफ्फ्फ्फ़… तेरी मुँह… कितनी गरम और सॉफ्ट है…

रौशनी ने उसके लुंड को मुँह में ले कर upar-neeche मूव करना शुरू कर दिया. कभी टिप को तिघ्टलय चुस्ती, कभी थोड़ा और अंदर ले जाती. उसकी जुबां उसके ुन्दरसीदे को कन्टिन्यूसली लीक कर रही थी. प्रेकम उसके मुँह में मिक्स हो रहा था.

रौशनी (लुंड को मुँह से निकालते हुए, सांस लेते हुए, फिर से अंदर लेते हुए):

उफ्फ्फ… कितना मोटा है… मममहह…

असलम का हाथ उसके बालों में था, लेकिन वह फाॅर्स नहीं कर रहा था. वह बस फील कर रहा था की रौशनी उसके लुंड को कितनी भूख से चूस रही है.

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रौशनी अब रदम में उसके लुंड को मुँह में ले रही थी — कभी डीप, कभी सिर्फ टिप को फोकस करती. उसकी आँखें कभी असलम की आँखों से मिलती, कभी बंद हो जाती.

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रौशनी ने असलम के मोठे लुंड को मुँह में ले कर उसको देर तक चूसना शुरू कर दिया. उसकी सॉफ्ट लिप्स उसके शाफ़्ट के अराउंड तिघ्टलय बंद थी, जुबां कन्टिन्यूसली ुन्दरसीदे को लीक कर रही थी. कभी वह टिप को तिघ्टलय सूचक करती, कभी थोड़ा और अंदर ले जाती.

असलम ने अपना हाथ उसके सर पर रख दिया. उसने धीरे से प्रेशर डाला और अपने लुंड को रौशनी के मुँह में और अंदर धकेलने लगा. पहले तोह सॉफ्ट, फिर थोड़ा और गहरा.

असलम (गरम सांस के साथ):

अह्ह्ह… बस ऐसे hi… और अंदर ले… उफ्फ्फ्फ़…

रौशनी ने उसके लुंड को चूसते हुए आँखें ऊपर उठायी और सीधे असलम की आँखों में देखने लगी. उसकी बड़ी, मॉइस्ट आँखें उससे मिल रही थी जब वह उसके लुंड को मुँह में ले रही थी. यह ऑय कांटेक्ट देख कर असलम की गर्मी और बढ़ गयी.

असलम (उसके बाल पकड़ कर, थोड़ा तेज़ धक्के मारते हुए):

… ऐसे मत देखो… मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाउँगा… अह्ह्ह…

उसने अब रौशनी के मुँह की हलकी सी चुदाई शुरू कर दी. अपने हिप्स aage-peeche हिलाते हुए अपना मोटा लुंड उसके मुँह में andar-bahar करने लगा. रौशनी उसके धक्कों के साथ एडजस्ट कर रही थी — कभी डीप ले लेती, कभी टिप पर फोकस करती, लेकिन आँखें ऑलमोस्ट कन्टिन्यूसली असलम से मिली हुई थी.

रौशनी के मुँह से वेट सकिंग की आवाज़ें आ रही थी. उसकी थूक असलम के लुंड पर चमक रही थी. हर बार जब असलम थोड़ा गहरा धक्का मारता, रौशनी की आँखें थोड़ी सी बंद होती, लेकिन फिर से खोल कर उससे देखने लगती.

असलम (उसके सर को पकडे हुए, रदम मेन्टेन करते हुए):

तेरी यह नशीली आँखें… और यह गरम मुँह… उफ्फ्फ्फ़ रौशनी… मैं पागल हो रहा हूँ…

रौशनी ने उसके लुंड को और तिघ्टलय चूसना शुरू कर दिया. उसकी एक हाथ उसके बॉल्स को सेहला रही थी, दूसरी उसके थिगह पर थी. वह लॉन्गर टाइम तक उसके लुंड को मुँह में लिए हुए थी, आँखों में आँखें डाले, जैसे वह उसको पूरी तरह फील करना चाहती हो.

असलम का लुंड अब उसके मुँह में कन्टिन्यूसली मूव कर रहा था — हलकी सी face-fucking, लेकिन कण्ट्रोल के साथ. रौशनी की सिसकियाँ उसके लुंड के अराउंड विबरते कर रही थी.

असलम का हाथ अभी भी उसके सर पर था. वह dheere-dheere अपने हिप्स हिलाते हुए अपना लुंड उसके मुँह में andar-bahar कर रहा था. यह हलकी सी face-fucking अब थोड़ी तेज़ हो चुकी थी, लेकिन अभी भी कण्ट्रोल में थी.

रौशनी उसके हर धक्के के साथ एडजस्ट कर रही थी. जब असलम थोड़ा गहरा धकेलता, तोह उसका लुंड उसके गले के पास तक चला जाता. रौशनी की आँखें कभी थोड़ी सी पानी से भर जाती, लेकिन वह उन्हें बंद नहीं करती थी — वह कन्टिन्यूसली असलम की आँखों में देख रही थी.

उसके मुँह से कंटीन्यूअस वेट साउंड्स आ रही थी — स्लुर्पिंग, सकिंग, और हलकी सिसकियाँ. उसकी थूक असलम के लुंड और बॉल्स पर फैली हुई थी. रौशनी ने एक हाथ से उसके बॉल्स को जेंटली मस्सगे करना शुरू कर दिया, दुसरे हाथ से उसके बेस को पकड़ कर उसके धक्कों को गाइड कर रही थी.

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असलम (सर पीछे की तरफ, सांस तेज़ लेते hue):Ufff… बस ऐसे hi… और ज़ोर से चुसो… तेरी सॉफ्ट लिप्स… अह्ह्ह फ़क…

रौशनी ने उसके लुंड को मुँह से निकाला, टिप को जुबां से स्लो सर्कल्स में लीक किया, फिर फिर से पुरे लुंड को मुँह में ले लिया. इस बार उसने और डीप लिया. उसकी आँखें असलम से मिली हुई थी जब उसका लुंड उसके मुँह के अंदर तक था.

असलम का लुंड अब बहुत ज़्यादा हार्ड और थ्रोब्बिंग था. हर बार जब रौशनी उसको तिघ्टलय सूचक करती, उसका लुंड उसके मुँह में झटका मारता. उसकी सांसें और भारी हो चुकी थी.

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रौशनी (लुंड को मुँह से थोड़ा निकालते हुए, सांस लेते हुए, फिर से अंदर लेते hue):Mmmhh… कितना मोटा… अह्ह्ह…

वह इस तरह देर तक उसके लुंड को चुस्ती रही — कभी स्लो और सेंसुअल, कभी थोड़ा तेज़. असलम उसके सर को लिघ्टलय गाइड करता रहा, उसके मुँह की हलकी चुदाई कंटिन्यू रखते हुए. दोनों की आँखें ऑलमोस्ट कन्टिन्यूसली मिली हुई थी, जो इंटेंसिटी को और बढ़ा रहा था.

असलम (कण्ट्रोल करते हुए, उसके बाल पकड़ kar):Main झड़ने वाला हूँ… लेकिन अभी नहीं… तू ऐसे hi चुस्ती रह…

रौशनी ने उसके वर्ड्स सुन कर उसके लुंड को और तिघ्टलय और डीपर चूसना शुरू कर दिया, आँखों में आँखें डाले हुए.

असलम का कण्ट्रोल अब टूटने hi वाला था. रौशनी के गरम, सॉफ्ट मुँह में उसका मोटा लुंड कन्टिन्यूसली जा रहा था. उसकी आँखें रौशनी की आँखों से मिली हुई थी, और हर बार जब वह उसके लुंड को तिघ्टलय चुस्ती, असलम का शरीर और टाइट हो जाता.

असलम (उसके सर को पकड़ कर, सांस फूलते hue):Roshni… मैं… अह्ह्ह… कण्ट्रोल नहीं… कर प् रहा…

उसके धक्के थोड़े तेज़ हो गए. वह अब रौशनी के मुँह में अपना लुंड थोड़ा ज़ोर से धकेल रहा था. रौशनी उसके हर धक्के को ले रही थी, आँखें अभी भी उससे मिली हुई.

एक सुद्दीन झटके के साथ असलम का लुंड रौशनी के मुँह में ज़ोर से थ्रोब किया. उसने अपना लुंड थोड़ा बहार निकाला, लेकिन रौशनी ने उसको फिर से मुँह में ले लिया.

असलम (ज़ोर से मोअन करते hue):Ahhh… फ़क… आ रहा हूँ…

उसने कण्ट्रोल नहीं किया. उसका गरम, थिक माल पहले रौशनी के मुँह में hi निकलना शुरू हो गया. रौशनी ने उसके लुंड को मुँह से निकालने की कोशिश की, लेकिन असलम ने उसके सर को लिघ्टलय पकडे रखा. कुछ छुम उसके मुँह में गया, बाकी उसके लिप्स, चीन और थोड़ा फेस पर फ़ैल गया.

असलम (सांस लेते हुए, उसके बाल सहलाते hue):Ufff… रौशनी… अह्ह्ह…

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रौशनी ने उसके लुंड को मुँह से निकाला. उसके लिप्स और चीन पर असलम का छुम चमक रहा था. उसने जुबां निकाल कर अपने लिप्स को साफ़ किया, फिर असलम की आँखों में देखते हुए उसके लुंड के टिप को एक लास्ट बार लीक कर दिया.

रौशनी (सांस लेते हुए, हलकी सी मुस्कान के saath):Ufff… इतना निकल दिया…

असलम ने उसको ऊपर खींच लिया और उसके cum-covered लिप्स को चुम लिया. किश के बीच उसने उसके फेस को सहलाया.

असलम (उसके माथे पर किश करते hue):Teri मुँह… आज तोह मुझे पागल कर दिया.

असलम ने रौशनी को अपने सीने से चिपका लिया. दोनों अभी भी सोफे पर थे. उसके लुंड से अभी भी थोड़ा छुम टपक रहा था, और रौशनी के लिप्स और चीन पर उसके माल के निशाँ थे.

असलम (सांस नार्मल करते हुए, उसके बाल सहलाते hue):Ufff… सोचा नहीं था आज तेरी चूसै से hi लुंड का माल का विस्फोट हो जायेगा… उफ्फ्फ. बहुत दिनों बाद मिलने का यही हाल होता है बेगम. अब थोड़ा टाइम दे… फिर तेरी चुदाई करूँगा. पूरी तरह.

उसने रौशनी के चूचियों पर हाथ फेरते हुए उसके होंठों पर एक सॉफ्ट किश किया.

लेकिन रौशनी का मैं एकदम से कहीं और चला गया.

रौशनी (मैं hi मैं):8:30…? इतना टाइम हो गया? रोनित… वह घर पर इंतज़ार कर रहा होगा. आज सुबह उसने इतना प्यार से रखा था मुझे… रात को इतना कनेक्टेड फील हुआ था. अगर मैं अभी लेट हुई तोह वह शक करेगा. या फिर कॉल करेगा…

उसने असलम के सीने से थोड़ा डिस्टेंस बनाया. उसके चेहरे पर अभी भी लस्ट थी, लेकिन आँखों में थोड़ी सी बेचैनी आ गयी थी.

रौशनी (हलकी सी सांस लेते hue):Aslam… टाइम देखना… 8:30 हो गया है. मुझे… घर भी जाना है. रोनित…

असलम ने उसकी बात सुनते hi उसकी कमर पकड़ ली.

असलम (उसकी आँखों में देखते हुए, थोड़ा ज़िद भरे टोन mein):Ronit? अभी? मैं abhi-abhi झाड़ा हूँ तेरी मुँह में… और तू घर की बात कर रही है? थोड़ा और रुक जा. मैं जल्दी फिर से तैयार हो जाऊंगा … फिर तुझे अच्छे से छोडूंगा.

---

रौशनी ने असलम के सीने से और दूर होते हुए अपना ब्लाउज और ब्रा उठाया. उसने जल्दी से ब्रा पहनी और ब्लाउज के हुक्स बंद करने लगी.

रौशनी (थोड़ी सी जल्दी और सॉफ्ट आवाज़ में):

नहीं प्लीज… आज नहीं. बस कभी और… मुझे जाना है अब.

असलम ने उसकी कलाई पकड़ ली. उसके दिमाग में एक सेकंड के लिए फाॅर्स करने का ख्याल आया — उसको वापस सोफे पर लिटाना, उसकी साड़ी ऊपर खींचना, और अपना लुंड उसकी गीली छूट में दाल देना. उसका लुंड अभी भी half-hard था, और रौशनी का बॉडी अभी भी उसके टच से गरम था.

लेकिन उसने खुद को रोका.

**असलम (मैं hi मैं):**

अगर आज फाॅर्स किया… और वह पूरी तरह से हाथ से निकल गयी… तोह फिर? नहीं. कभी और, इत्मीनान से, पूरी तरह छोडूंगा. उफ्फ्फ… अगर लुंड से माल नहीं निकलता आज तोह पक्का चुदती रौशनी मेरे लोडे से… उफ्फ्फ्फ़.

उसने रौशनी की कलाई छोड़ दी. उसकी आँखों में फ़्रस्ट्रेशन थी, लेकिन उसने कण्ट्रोल कर लिया.

असलम (थोड़ी सी हैवी आवाज़ में, उसके गाल पर हाथ फेरते हुए):

ठीक है… जा. लेकिन याद रख, आज तू बच गयी. अगली बार मैं तुझे इतनी आसानी से नहीं छोडूंगा. पूरा टाइम लूंगा… और पूरी तरह से छोडूंगा.

रौशनी ने उसके होंठों पर एक लास्ट सॉफ्ट किश किया.

Roshni:Aslam… इसीलिए मुझे आप इतने पसंद हो… और मैं आपकी बेगम बन चुकी हूँ… मैं और तन से. आप फाॅर्स नहीं करते. आप बहुत अच्छे हो…

उसने उसके गाल पर हाथ फेरते हुए कंटिन्यू किया:

Roshni:Agar आप ज़ोर देते तोह शायद मैं इतनी फ्री फील नहीं करती. आप मुझे टाइम देते हो… मेरी बात सुनते हो. इसलिए मैं आपके पास आती हूँ.

असलम ने उसकी बात सुन कर थोड़ी देर चुप रहा. उसने रौशनी के बाल सहलाये.

असलम (धीमी आवाज़ mein):Teri यह बातें… मुझे और पागल करती हैं बेगम. मैं तुझे फाॅर्स नहीं करता क्यूंकि तू खुद मेरी हो जाती है. लेकिन आज… जब तू इतनी गीली और रेडी है… तोह तुझे जाने देना मुश्किल हो रहा है.

उसने उसकी कमर को फिर से पकड़ लिया, लेकिन इस बार प्रेशर सॉफ्ट था.

Aslam:Thoda और रुक जा. बस हाफ ऑवर. मैं तुझे जल्दी से, लेकिन अच्छे से छोड़ दूंगा. फिर घर चली जाना. तुम्हारे पति रोनित को भी तेरा इंतज़ार है… मैं समझता हूँ. लेकिन अभी… मेरी भी ज़रुरत है तुझे.

रौशनी के मैं में कनफ्लिक्ट चल रहा था. एक तरफ असलम की नरमी और उसका लुंड जो अभी भी थोड़ा हार्ड था, दूसरी तरफ घर और रोनित की याद.

रौशनी (उसके सीने से चिपकते हुए, सॉफ्ट वौइस् mein):Aslam… मैं भी चाहती हूँ… लेकिन…

उसके हाथ अभी भी असलम के बॉडी पर थे. उसकी छूट अभी भी गीली थी, और असलम का टच उसको अगेन पुल्ल कर रहा था.

लेकिन रौशनी थान लेती हैं आज नहीं .. और खुद को चुरा टी हैं असलम के गृप से ...

रौशनी:

मैं… कल मैसेज करुँगी. प्रॉमिस.

उसने जल्दी से अपना पल्लू सही किया, बैग उठाया, और गेट की तरफ बढ़ गयी. Jaate-jaate उसने एक बार पीछे मुद कर असलम को देखा — वह अभी भी सोफे पर बैठा था, नंगा उप्पेर बॉडी, लुंगी नीचे, लुंड अभी भी थोड़ा उभरा हुआ.

रौशनी के मैं में गिल्ट और इन्कम्प्लीट डिजायर दोनों थे. बहार निकलते hi उसने फ़ोन चेक किया — 8:42. रोनित का कोई मैसेज नहीं था अभी तक.

वह रिक्शा की तरफ बढ़ गयी, दिल तेज़ धड़क रहा था.

---

रौशनी ने असलम के घर से निकलते टाइम jaldi-jaldi कपडे सही किये. उसके लिप्स अभी भी थोड़े वललें थे, चीन पर असलम के छुम के हलकе निशाँ थे जो उसने टिश्यू से साफ़ किये थे. लेकिन उसकी छूट अभी भी गीली और बेचैन थी — असलम के साथ अधूरा रह गया था सब कुछ.

रिक्शा से घर पहुँचते hi उसने दरवाज़ा खोला. रोनित लिविंग रूम में बैठा था. जैसे hi उसने रौशनी को देखा, उसकी आँखें थोड़ी सी तेज़्ज़ हो गयी.

रौशनी का कण्ट्रोल टूट गया. असलम के साथ जो गर्मी अधूरी रह गयी थी, वह अब रोनित को देखते hi उभर आयी. उसने बैग साइड में फेंका और सीधा रोनित की बाहों में जा कर लिपट गयी.

रौशनी (उसके गले में हाथ दाल कर, भूखे पैन से):

रोनित…

उसने उसके होंठों पर एक गहरा, वेट किश लगा दिया. यह किश सॉफ्ट नहीं था — लस्ट भरा था. उसकी जुबां रोनित के मुँह में घुस गयी. रोनित भी सुरप्रीसेड था, लेकिन उसने तुरंत रेस्पोंद किया. उसके हाथ रौशनी की पीठ और गांड पर चले गए.

रोनित (किश के बीच, गरम आवाज़ में):

इतनी गरम आ रही हो आज… क्या बात है?

रौशनी ने उसको और तिघ्टलय पकड़ लिया. उसके चूचिये रोनित के सीने से डाब रहे थे. उसकी सांसें तेज़ थी.

रोनित ने उसको उठा लिया और सीधा बैडरूम में ले गया. उसने रौशनी को बीएड पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया. दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई — सिर्फ किसिंग, टचिंग और कपडे खोलने की जल्दी.

रोनित ने उसकी साड़ी और ब्लाउज जल्दी से हटा दिए. रौशनी की ब्रा पहले से hi ढीली थी. उसने उसके चूचियों को हाथ में ले कर दबाया और उनको मुँह में ले लिया. रौशनी की सिसकियाँ निकलने लगी.

रौशनी (आँखें बंद करके):

अह्ह्ह… रोनित… आज… मत रुकना…

रोनित ने अपने कपडे भी उतर दिए. उसका लुंड पहले से hi सख्त था. उसने रौशनी की पंतय साइड की और बिना देर किये अपना लुंड उसकी गीली छूट में धकेल दिया.

दोनों एक साथ मोअन किये.

रोनित (गहरे धक्के मारते हुए):

फ़क… इतनी गीली… आज क्या हुआ तुझे?

रौशनी ने उसकी पीठ पर नेल्स गदा दिए और अपने हिप्स utha-utha कर उसके धक्कों को मिलाने लगी. असलम के अधूरे टच की वजह से उसकी छूट बहुत सेंसिटिव थी. हर धक्का उसको एक्स्ट्रा इंटेंसिटी दे रहा था.

रोनित अब तेज़ और गहरे धक्के मार रहा था. यह उनका सेक्स अभी शुरू hi हुआ था, लेकिन दोनों की गर्मी पहले से hi पीक पर थी.

---

रौशनी की गर्मी अब कण्ट्रोल के बहार थी. असलम के साथ अधूरा रह गया था, इसलिए रोनित के लुंड को अंदर लेते hi उसका बॉडी और बेचैन हो गया.

उसने रोनित को ज़ोर से बीएड पर लिटाया और खुद उसके ऊपर चढ़ गयी. उसने उसके सख्त लुंड को हाथ में पकड़ा, अपनी गीली छूट के मुँह पर रगड़ा, और एक hi धक्के में पूरा अंदर ले लिया.

रौशनी (ज़ोर की सिसकारी के साथ):

आआह्ह्ह… रोनित…!

वह उसके लुंड पर कूदने लगी — तेज़, हंगरी, और बिलकुल control-free. उसके बड़े चूचिये upar-neeche हो रहे थे. हर बार जब वह नीचे बैठती, उसका लुंड उसकी छूट के बिलकुल एन्ड तक चला जाता.

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रोनित ने दोनों हाथों से उसकी गांड पकड़ ली और उसके सॉफ्ट, नरम चूचियों को मुँह में ले लिया. वह उनको zor-zor से चूसने लगा — कभी निप्पल को तिघ्टलय सूचक करता, कभी पुरे चूचिये को मुँह में ले लेता.

रौशनी (उसके लुंड पर तेज़ कूदते हुए, मोअन करते हुए):

अह्ह्ह… हाँ… चुसो… अह्ह्ह रोनित… और अंदर…!

उसके हिप्स कन्टिन्यूसली मूव कर रहे थे. यह राइडिंग बिलकुल हंगरी थी — जैसे वह अपनी अधूरी गर्मी निकाल रही हो. रोनित के लुंड पर उसकी गीली छूट की आवाज़ें आ रही थी — वेट, slap-slap.

रोनित (उसके चूचियों को चूसते हुए, सांस फूलते हुए):

फ़क… रौशनी… इतनी टाइट… और गीली… अह्ह्ह…

रौशनी ने उसके सीने पर हाथ रख कर और तेज़ कूदना शुरू कर दिया. उसकी आँखें बंद थी, लेकिन दिमाग में असलम का मोटा लुंड और उसकी चूसै भी फ़्लैश हो रही थी. इस डबल गर्मी ने उसको और वाइल्ड बना दिया था.

कुछ hi मिनट बाद रोनित का शरीर टाइट हो गया. उसने रौशनी की गांड को ज़ोर से पकड़ लिया और उसके अंदर hi झाड़ गया.

रोनित (ज़ोर से मोअन करते हुए):

अह्ह्ह… रौशनी… आ रहा हूँ…!

उसका गरम माल रौशनी की बुर के अंदर निकलने लगा. रौशनी ने उसके लुंड को अपनी छूट में तिघ्टलय पकडे हुए उसके ऊपर कूदना कंटिन्यू किया, जब तक रोनित का लास्ट ड्राप नहीं निकल गया.

दोनों पसीने से तर, सांस लेते हुए बीएड पर गिर गए. रौशनी अभी भी उसके ऊपर थी, उसका लुंड अभी भी उसकी छूट में था.

रौशनी (सांस लेते हुए, उसके सीने पर लेटते हुए):

उफ्फ्फ… आज… बहुत ज़ोर की ज़रुरत थी…

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रौशनी रोनित की बाहों में लेती हुई थी. उसके सीने से चिपकी हुई, उसकी उंगलियां रोनित के चेस्ट पर घूम रही थी. दोनों अभी भी थोड़े पसीने से तर थे. रोनित का लुंड अब सॉफ्ट हो चूका था, लेकिन उसकी छूट में अभी भी उसका माल था.

रूम में सिर्फ उनकी सांसें थी.

रौशनी की आँखें खुली हुई थी. सीलिंग को देखते हुए उसका मैं कपरिसों में चला गया.

**रौशनी (मैं hi मैं):**

रोनित… आज तोह बिलकुल अलग था. तेज़, हंगरी, और मेरी गर्मी को समझ गया. जब मैं उसके ऊपर कूद रही थी तोह उसने मेरा साथ दिया… चूचियों को चूसा, गांड पकड़ी. बहुत दिन बाद इतना इंटेंस फील हुआ उसके साथ. पिछली रात वाला सॉफ्ट वाला रोनित भी अच्छा था, लेकिन आज का यह हंगरी वाला… उसने मेरी अधूरी गर्मी को काफी हद तक शांत किया.

लेकिन असलम…

असलम का लुंड… उफ्फ्फ. इतना मोटा, लम्बा और दुमदार. जब उसने मेरे मुँह में दिया था तोह मैं फील कर रही थी की यह रोनित से बिलकुल अलग लेवल का है. उसके हाथ, उसकी नज़र, उसका “बेगम” बोलना… उसमें एक अलग hi पोस्सेस्सिवेनेस्स है. वह फाॅर्स नहीं करता, लेकिन उसकी भूख इतनी रॉ होती है की मैं खुद उसके सामने सबमिट हो जाती हूँ. आज उसके साथ अधूरा रह गया… अगर उसने मुझे छोड़ लिया होता तोह शायद मैं इतनी बेचैन होकर घर नहीं आती.

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रोनित… प्यार है, हिस्ट्री है, घर है. उसके साथ सेक्स अब इम्प्रूव हो रहा है. वह वापस आ रहा है. लेकिन असलम… वह सिर्फ सेक्स नहीं है. वह एक अलग दुनिया है. उसके साथ जो वील्डनेस और इंटेंसिटी मिलती है, वह रोनित के साथ अभी भी नहीं मिलती — चाहे आज कितना भी तेज़ था.

रौशनी ने रोनित के सीने पर और चिपक कर सोचा:

**दोनों अलग हैं. रोनित मेरा पति है… असलम मेरी बेगम वाली साइड है. एक से घर चलता है, दुसरे से मेरी बॉडी की भूख.**

लेकिन उसके दिमाग में असलम का चेहरा और उसका मोटा लुंड अभी भी घूम रहा था.

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सुबह के 7:30 बजे थे. रौशनी तैयार हो कर बैडरूम से निकल रही थी.

आज उसने फिर से स्लीवलेस ब्लाउज पहना था जिसका बैक कट बहुत डीप था — उसकी मिल्की पीठ काफी हद तक खुली हुई थी. साड़ी उसने ऐसी पहनी थी जो थोड़ी semi-transparent थी; लाइट पड़ते hi उसकी कमर और नैवेल की लाइन साफ़ दिखाई दे रही थी. लिप्स पर उसने ब्राउन लिपस्टिक लगायी थी — वह शादी जो वह नोर्मल्ली कभी नहीं लगाती. असलम का फवौरीते था यह. बाल उसने हाई पोनी में बांधे थे, जो उसकी कमर तक लटक रहे थे और हर कदम के साथ उसकी सॉफ्ट कमर के साथ side-to-side हिल रहे थे.

रोनित लिविंग रूम में खड़ा था, चाय का कप हाथ में. जैसे hi उसने रौशनी को देखा, उसकी नज़र उसके डीप बैक कट से शुरू हुई, फिर उसकी कमर, फिर उसके बालों तक गयी.

रोनित (कप साइड रखते हुए, स्लो स्माइल के साथ):

उफ्फ्फ्फ़… आज तोह तू बिलकुल अलग लेवल की सेक्सी लग रही है. यह डीप बैक कट… पीठ बिलकुल नंगी सी दिख रही है. और यह साड़ी? इतनी ट्रांसपेरेंट? लाइट में तोह तेरी कमर और सब कुछ क्लेअर्ल्य नज़र आ रहा है.

वह उसके पास आया. उसने पीछे से रौशनी की पोनी को लिघ्टलय टच किया, जो उसकी कमर के साथ हिल रही थी.

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रोनित (उसके कान के पास, तैसिंग टोन में):

और यह बाल… पोनी में बंधे हुए, कमर के साथ side-to-side हिल रहे हैं. हर कदम पे जैसे डांस कर रहे हैं. मैं तोह देखते hi डिस्ट्रक्ट हो गया.

फिर उसकी नज़र रौशनी के लिप्स पर गयी.

रोनित:

यह ब्राउन लिपस्टिक? तू तोह कभी नहीं लगाती यह शादी. आज क्या स्पेशल है? कोई नया अदमीरेर ऑफिस में? या फिर सिर्फ मेरे लिए इतनी म्हणत से तैयार हुई है?

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रौशनी के चेहरे पर हल्का ब्लश आ गया. उसने अपना पल्लू थोड़ा एडजस्ट किया, लेकिन उसके मैं में असलम की याद फ़्लैश हुई — यही ब्राउन लिपस्टिक उसने कल उसके लिए प्रेफर की थी.

रौशनी (हलकी हसी के साथ, उसके सीने पर हाथ रखते हुए):

बस ऐसे hi… मूड था. और ट्रांसपेरेंट साड़ी तोह गर्मी की वजह से. ज़्यादा सोच मत लो.

रोनित ने उसकी नंगी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसको अपने सीने से चिपका लिया.

रोनित:

सोचनе वाली बात है. आज अगर कोई ऑफिस में तुझे पीछे से देखेगा तोह उसका दिल नहीं लगेगा काम में. मैं तोह आलरेडी लेट हो रहा हूँ घर से निकलने में…

रौशनी ने उसके गाल पर एक सॉफ्ट किश दिया और बैग उठाया.

रौशनी:

चलो, अब लेट हो रही हूँ. ंगो पहुंचना है.

वह निकल पड़ी. रिक्शा में बैठते hi उसके बाल फिर से उसकी कमर के साथ हिलने लगे, और उसके मैं में रोनित के फ्लिर्टी कमैंट्स के saath-saath असलम की आगे आने वाली भूखी नज़र भी घूम रही थी.

---

---

रौशनी ंगो पहुंची तोह उसका मैं बिलकुल काम में नहीं था. सुबह रोनित के फ्लिर्टी कमैंट्स अभी भी उसके कानो में गूंज रहे थे, लेकिन उसके दिमाग में असलम घूम रहा था.

उसने फ़ोन निकाला. असलम के मेस्सगेस पहले से hi वेट कर रहे थे.

**असलम:**

सुबह से लुंड खड़ा है तेरी याद में. आज वह ब्राउन लिपस्टिक लगायी है न? मैं जानता हूँ. शाम तक वेट नहीं कर सकता. ब्रेक में आ जा.

**असलम:**

कल तेरी मुँह में झाड़ा था… आज तेरी छूट में झड़ना है. जल्दी आ.

रौशनी ने मेस्सगेस पढ़ते hi उसकी सांसें तेज़ हो गयी. उसकी छूट में हलकी नमी आ गयी. वह bar-bar फ़ोन चेक करती रही, काम करने की कोशिश करती रही, लेकिन फोकस बिलकुल नहीं लग रहा था.

रौशनी (मैं hi मैं):

उफ्फ्फ असलम… इतना तड़पा रहा है. मैं कैसे वेट करूँ?

लेकिन उसे आज ऑप्शन नहीं तह .. शाम तक काम hi काम था ंगो में ..

काम का एन्ड होते hi उसने कण्ट्रोल नहीं किया. बैग उठाया, पल्लू एडजस्ट किया, और बिना किसी को बताये ंगो से निकल पड़ी. सीधा असलम के घर की तरफ.

15 मिनट बाद वह पहुँच गयी .. हमेशा की तरह दरवाज़ा थोड़ा हकुला था. उसने धीरे से अंदर ढाका दिया. अंदर डिम लाइट थी, थोड़ी सी साइलेंस.

रौशनी ने मुंह से “असलम…” कहने hi वाला था की पीछे से एक स्ट्रांग हाथ उसकी कमर में जकड गया. दूसरा हाथ उसकी फ्लैट पेट पर आ गया. किसी ने उसको अपने सीने से कास कर चिपका लिया और उसके नैक के अंदरूनी हिस्से — कान के नीचे, कलरबोने के पास — ज़ोर से चूमने लगा. गरम सांसें उसकी स्किन पर पद रही थी.

रौशनी (आँखें बंद करके, सिसकारी के साथ):

उफ्फ्फ असलम जी… शुरू हो गए… उफ्फ्फ… प्ल्ज़… ममम… छोड़िये…

वह पीछे की तरफ झुक गयी, उसकी डीप कट पीठ उसके सीने से रगड़ रही थी. उसकी पोनी उसकी कमर के साथ हिल रही थी. उसने सोचा असलम hi है जो इतनी भूख से उसको पकडे हुए है.

लेकिन जब उसने थोड़ा सा मुँह घुमाया, तोह उसकी आँखें बड़ी हो गयी.

पीछे असलम नहीं था.

**सलीम** था.

उसके लिप्स अभी भी रौशनी के नैक पर थे. उसने उसको और तिघ्टलय पकड़ लिया और उसके कान के पास हसकर बोलै:

सलीम (गरम आवाज़ में):

असलम नहीं… सलीम. तेरी यह ब्राउन लिपस्टिक और डीप बैक कट देख के मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाया, रौशनी…

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रौशनी का शरीर एक सेकंड के लिए स्टिफ हो गया, लेकिन सलीम के हाथ अभी भी उसकी कमर और पेट पर थे, उसके नैक को चूमते हुए.

---

रौशनी का शरीर एक दम स्टिफ हो गया. उसने पीछे मुड़ने की कोशिश की, लेकिन सलीम ने उसको और तिघ्टलय पकड़ लिया था. उसके लिप्स अभी भी उसके नैक पर थे.

जैसे hi उसने सलीम का चेहरा क्लेअर्ल्य देखा, उसकी आँखें गुस्से और शॉक से भर गयी.

रौशनी (ज़ोर से, उसके हाथ हटाते हुए):

सलीम?! छोड़ मुझे! अभी!

उसने दोनों हाथों से सलीम के हाथ को अपनी कमर से धक्का दिया और थोड़ा आगे बढ़ कर उससे दूर हो गयी. उसकी सांसें तेज़ थी — पहले लस्ट से, अब गुस्से से.

रौशनी (उसकी तरफ देखते हुए, आवाज़ में बित्तेर्नेस के साथ):

तुम? यहाँ? मैं समझी थी असलम है… तुमने मुझे छुआ भी कैसे दिया? भूल गए क्या मैंने तुम्हे मीनल के साथ देखा था?

उसने अपना पल्लू सही किया और थोड़ा और पीछे हैट गयी. उसकी आँखों में अभी भी वह सन घूम रहा था — सलीम, मीनल के ऊपर, उसको छोड़ते हुए. तब से उसने सलीम को माफ़ नहीं किया था. उसके लिए वह अब भी धोकेबाज़ था.

सलीम (हाथ ऊपर करके, थोड़ा हसकर, लेकिन आँखों में भूख के साथ):

अरे रौशनी… इतना गुस्सा? वह तोह बस एक बार की बात थी. तू तोह जानती है मैं तेरा hi दीवाना हूँ. आज तू इतनी सेक्सी आ रही थी… ब्राउन लिपस्टिक, डीप बैक… मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाया.

उसने एक कदम आगे बढ़ाया, लेकिन रौशनी ने तुरंत हाथ आगे करके रोक दिया.

रौशनी (तेज़ आवाज़ में):

मत आना पास. मैं अभी भी वह सन भूल नहीं पायी. तुमने मुझे चीट फील करवाया था. असलम को बुलाओ… मैं उससे मिलने आयी हूँ, तुमसे नहीं.

उसके चेहरे पर क्लियर रेजिस्टेंस थी. उसकी बॉडी अभी भी थोड़ी गरम थी पहले वाले टच से, लेकिन उसका मैं सलीम के अगेंस्ट था.

सलीम ने थोड़ा रुक कर उसको देखा. उसके चेहरे पर अब भी डिजायर थी, लेकिन उसने फाॅर्स नहीं किया.

सलीम:

ठीक है… गुस्सा कर. लेकिन इतना दूर मत जा. में तुम्हे बहुत मिस किया हूँ ... उफ्फ्फ तुम मेरी हो रौशनी .....

---

सलीम ने थोड़ा सॉफ्ट टोन अडॉप्ट किया. उसने हाथ ऊपर किये, जैसे सरेंडर कर रहा हो, लेकिन उसका बॉडी अभी भी रौशनी के बिलकुल करीब था. असल में रौशनी अभी भी उसकी बाहों के रेंज में hi थी — उसने खुद को पूरी तरह छुड़ाने की कोशिश नहीं की थी.

सलीम (धीमी, सॉफ्ट आवाज़ में):

रौशनी… सुन तोह. मैं जानता हूँ मैंने गलती की थी. मीनल वाला सन… वह सिर्फ एक बार की बेवकूफी थी. मैं तुझे दुखी नहीं देखना चाहता . तू मेरी पहली चॉइस है… हमेशा से. माफ़ कर दे न.

रौशनी ने उसकी तरफ देखा, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी गुस्सा था. उसने जवाब नहीं दिया. सिर्फ पल्लू को तिघ्टलय पकडे हुए कड़ी रही. उसने सलीम से दूर होने की कोशिश भी नहीं की — उसका बॉडी अभी भी उसके टच के असर में थोड़ा सॉफ्ट था.

यह देख कर सलीम और बोल्ड हो गया. उसने धीरे से फिर से रौशनी की कमर पकड़ ली और उसको अपने सीने से चिपका लिया. इस बार उसने उसके नैक के बजाये सीधे उसके होंठों की तरफ मुँह बढ़ाया.

रौशनी (उसके सीने पर हाथ रखते हुए, तेज़ सांस लेते हुए):

सलीम… मत…

लेकिन उसने उसको धक्का नहीं दिया. सलीम ने उसके गुलाबी होंठों को अपने काळा, मोठे होंठों से चूमने की कोशिश की. जैसे hi उसके लिप्स रौशनी के लिप्स के करीब आये, रौशनी ने तुरंत अपनी ऊँगली उनके बीच रख दी.

उसने अपनी सॉफ्ट ऊँगली सलीम के काळा होंठों और अपने गुलाबी होंठों के बीच प्रेस कर दी, उसको किश करने से रोकते हुए.

रौशनी (ऊँगली अभी भी उनके लिप्स के बीच, आँखों में मिक्स ऑफ़ एंगर और समथिंग ेल्स):

नहीं… मत चूमो. मैं अभी भी गुस्सा हूँ. तुम्हे माफ़ नहीं किया मैंने.

सलीम ने उसकी ऊँगली को अपने लिप्स से लिघ्टलय किश किया, लेकिन आगे नहीं बढ़ा. उसके हाथ अभी भी रौशनी की कमर पर थे, उसको अपने सीने से चिपकाये हुए. दोनों की सांसें मिल रही थी. रौशनी ने अभी भी खुद को पूरी तरह आज़ाद नहीं किया था.

सलीम (उसकी ऊँगली के अगेंस्ट, गरम आवाज़ में):

फिर क्यों नहीं हैट रही मेरे से? इतनी नज़दीक क्यों है अभी भी?

रौशनी के पास उसका कोई क्लियर जवाब नहीं था. उसकी ऊँगली अभी भी उनके लिप्स के बीच थी, लेकिन उसका बॉडी सलीम के अगेंस्ट प्रेस हो रहा था.

---

सलीम ने रौशनी की ऊँगली को साइड किया और फिर से उसके होंठों के करीब आया. उसने उसकी कमर को और तिघ्टलय पकड़ लिया, एक हाथ उसकी डीप कट पीठ पर ले जाकर उसकी नंगी स्किन को सहलाने लगा. उसने सोचा रौशनी अभी भी उसके अगेंस्ट सॉफ्ट है, इसलिए वह और आगे बढ़ सकता है.

सलीम (गरम सांस के साथ, उसके गले पर लिप्स ले जाते हुए):

रौशनी… बस एक बार… माफ़ कर दे…

लेकिन रौशनी अब पहले जैसी नाज़ुक काली नहीं थी. गयम और रेगुलर फिटनेस की वजह से उसके शरीर में अब असली ताक़त आ चुकी थी. उसके आर्म्स और कोर स्ट्रांग थे.

उसने एक सुद्दीन, कंट्रोल्ड फाॅर्स से सलीम के दोनों हाथ अपनी कमर से हटाए. फिर अपने दोनों हाथों से उसके सीने पर प्रेशर दाल कर उसको थोड़ा पीछे धक्का दिया. यह धक्का इतना था की सलीम को एक कदम पीछे हटना पड़ा.

रौशनी (तेज़ सांस लेते हुए, आँखों में क्लियर बाउंड्री के साथ):

मैंने कहा न… मत चलो. मैं अब वह पहली वाली रौशनी नहीं हूँ जो तुम्हारी बातों में आ जाये. दूर रहो.

उसने अपना पल्लू सही किया और do-teen कदम पीछे हैट कर क्लियर डिस्टेंस बना लिया. उसकी पोनी अभी भी उसकी कमर के साथ हिल रही थी, लेकिन उसके पोस्चर में अब स्ट्रेंथ और कण्ट्रोल दिखाई दे रहा था.

सलीम थोड़ा सुरप्रीसेड था. उसने रौशनी को इस तरह फाॅर्स उसे करते नहीं देखा था पहले. उसके चेहरे पर मिक्स ऑफ़ डिजायर और थोड़ी सी रेस्पेक्ट आ गयी.

सलीम (हाथ ऊपर करके, हसकर):

वह… इतनी ताक़त आ गयी है अब. पहले तोह इतनी नाज़ुक काली थी…

रौशनी ने उससे नज़र मिलाते हुए क्लियर कहा:

रौशनी:

हाँ. अब मैं नाज़ुक नहीं रही. और तुम्हे मैं अभी भी माफ़ नहीं किया. असलम को बुलाओ, या मैं चली जाती हूँ.

उसने फ़ोन निकाल लिया, असलम को कॉल करने के लिए रेडी.

---

रौशनी ने सलीम से क्लियर डिस्टेंस बनाये हुए अपना बैग उठाया और गेट की तरफ मुद गयी. उसके स्टेप्स तेज़ थे — जैसे वह जल्दी से यहाँ से निकलना चाहती हो.

रौशनी (बिना पीछे देखे):

मैं जा रही हूँ. असलम को बोल देना की मैं आयी थी.

जैसे hi उसने गेट का हैंडल पकड़ा, बहार से असलम अंदर आया. उसने रौशनी को बैग लिए हुए और थोड़ा अपसेट से फेस के साथ देखते hi रुक गया.

असलम (थोड़ा कन्फ्यूज्ड, उसकी तरफ देखते हुए):

क्या हुआ रौशनी? इतनी जल्दी? अभी आयी hi थी…

रौशनी ने उसकी तरफ देखा. उसके चेहरे पर अभी भी थोड़ा गुस्सा और बेचैनी थी, लेकिन असलम को देखते hi उसकी आवाज़ सॉफ्ट हो गयी.

रौशनी (थोड़ा सांस लेते हुए):

असलम… चलो कहीं बहार जाते हैं. भूख लगी है. यहाँ नहीं…

उसने सलीम की तरफ एक शार्ट नज़र डाली, फिर तुरंत असलम की तरफ वापस देख लिया. उसके वर्ड्स क्लियर थे — वह यहाँ नहीं रुकना चाहती थी.

असलम ने रौशनी को देखा, फिर उसकी नज़र सलीम पर गयी. सलीम थोड़ा सा साइड में खड़ा था, चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं था, लेकिन उसकी बॉडी लैंग्वेज से साफ़ था की कुछ हुआ है.

**असलम (मैं hi मैं, हलकी सी सटिस्फैक्शन के साथ):**

अच्छा… सलीम के साथ कुछ हुआ है. रौशनी उससे दूर जा रही है… और मुझे कह रही है बहार चलें. Dheere-dheere यह मुझे और करीब आ रही है, और सलीम से दूरी बढ़ा रही है. बहुत अच्छा.

असलम ने बहार से नार्मल फेस मेन्टेन किया. उसने रौशनी के बैग को हाथ में लिया और उसकी तरफ सॉफ्ट स्माइल के साथ बोलै:

असलम:

ठीक है. चलो. मैं जानता हूँ एक अच्छी जगह. तू रेडी है तोह निकलते हैं.

उसने सलीम को एक शार्ट, कोल्ड नज़र दी — जैसे कह रहा हो “बाद में बात करेंगे” — और रौशनी के साथ गेट से बहार निकल गया.

रौशनी उसके साथ चल पड़ी. उसके स्टेप्स अब थोड़े हलकе थे. असलम के साथ होने से उसको थोड़ा सुकून मिल रहा था, लेकिन उसके मैं में अभी भी सलीम वाला सन घूम रहा था.

---

असलम ने रौशनी का बैग लिए हुए उसके साथ गेट से बहार निकल गया. उसने कोई रेस्टोरेंट या क्राउडेड जगह का नाम नहीं लिया. सीधा उसने अपने बाइक की तरफ इशारा किया.

असलम (धीमी आवाज़ में):

चल, मैं तुझे एक प्राइवेट जगह ले चलता हूँ. वहां आराम से बात कर सकते हैं. कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.

रौशनी ने कुछ नहीं कहा. बस उसके पीछे बैठ गयी. बाइक स्टार्ट होते hi उसने असलम की कमर पकड़ ली. रस्ते भर दोनों चुप रहे. रौशनी का मैं अभी भी सलीम वाले सन में था — उसके हाथ, उसका टच, और अपना गुस्सा.

10-12 मिनट बाद असलम ने बाइक एक छोटे से क्वाइट लेन में रोक दी. यघर से थोड़ा दूर, बिलकुल अलग एंट्री के साथ एक जगह थी. अंदर सिंपल सोफे, और पूरी प्राइवेसी थी.

असलम ने रौशनी को अंदर ले गया और गेट बंद कर दिया. उसने उसका बैग साइड रख दिया और उसकी तरफ देखते हुए बोलै:

असलम:

अब बोल. क्या हुआ वहां? तू इतनी परेशां क्यों लग रही है? सलीम ने कुछ किया?

रौशनी थोड़ी देर चुप रही. उसने सोफे पर बैठते हुए गहरी सांस ली. असलम उसके बिलकुल सामने कुर्सी खींच कर बैठ गया, उसकी आँखों में देखते हुए.

---

रौशनी ने असलम का हाथ अभी भी पकडे हुए उसकी आँखों में देखा. थोड़ी देर चुप रहकर उसने धीरे से पूछा:

रौशनी:

असलम… तुम मुझे यहाँ प्राइवेट जगह क्यों ले आये? रेस्टोरेंट या बहार कहीं नहीं… सीधा यहाँ?

उसके लिप्स पर एक छोटी सी कनोइंग सी स्माइल थी. वह जानती थी जवाब क्या है.

**रौशनी (मैं hi मैं):**

मैं जानती हूँ क्यों. तुम मुझे अकेले में रखना चाहते हो… अपना टाइम चाहते हो. अपनी लस्ट निकालना चाहते हो. और सच तोह यह है… मैं मन भी नहीं करने वाली. कल रात से मैं तुम्हें सोच रही हूँ. असलम की भूख, उसका टच, उसका लुंड… सब याद आ रहा है. मैं भी यह प्राइवेट टाइम चाहती हूँ.

असलम ने उसका हाथ थोड़ा तिघ्टलय पकड़ लिया. उसने रौशनी के करीब आकर उसकी आँखों में सीधे देखते हुए बोलै:

असलम:

क्यूंकि मैं तुझे क्राउड में नहीं ले जाना चाहता था. मैं तुझे अकेले में बात करनी थी… और हाँ, तुझे फील भी करना था. कल से तड़प रहा हूँ. तू भी जानती है न?

रौशनी ने नज़र नहीं हटाई. उसने असलम का हाथ अपने हाथ में लेते हुए सॉफ्ट आवाज़ में कहा:

रौशनी:

हाँ… मैं जानती हूँ. और मैं मन भी नहीं करने वाली. कल रात से… तुम्हारी याद आ रही थी. तुम्हारी लस्ट… तुम्हारा टच. इसलिए मैं यहाँ आ गयी.

उसने थोड़ा आगे बढ़ कर असलम के सीने के करीब आ गयी. उसकी सांसें अब थोड़ी तेज़ हो रही थी. असलम के प्राइवेट रूम की साइलेंस में दोनों के बीच जो टेंशन थी, वह अब क्लेअर्ल्य फील हो रही थी.

असलम ने उसकी पोनी को लिघ्टलय टच किया, जो अभी भी उसकी कमर तक लटक रही थी.

असलम (गरम आवाज़ में):

तोह फिर… अब बता. तू यहाँ क्या चाहती है, मेरी बेगम?

रौशनी ने उसकी आँखों में देखते हुए जवाब नहीं दिया. बस उसके सीने पर हाथ रख दिया. उसका बॉडी पहले से hi असलम की तरफ रेस्पोंद कर रहा था.

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---

असलम ने रौशनी के करीब आकर उसकी आँखों में देखा. उसने उसके बाल सहलाते हुए धीमी, गरम आवाज़ में कहा:

असलम:

कल शाम तू जल्दी भाग गयी थी. आज शाम तोह रहो मेरे साथ… कुछ और देर. मैं यहीं खाना मंगवा लूंगा. यह बिलकुल प्राइवेट जगह है. कोई नहीं आएगा.

रौशनी ने उसकी बात सुनते hi सर हाँ में हिला दिया. उसकी आँखों में क्लियर एक्सेप्टेन्स थी. वह थोड़ा और आगे बढ़ गयी, अब दोनों के बीच सिर्फ कुछ इनचेस का डिस्टेंस बचа था.

असलम ने उसके चेहरे को देखते हुए उसके लिप्स पर नज़र डाली. उसने थंब से रौशनी के लोअर लिप को लिघ्टलय टच किया.

असलम (हलकी सी स्माइल के साथ):

यह ब्राउन लिपस्टिक… मेरी फवौरीते. तू आज यही लेके आयी है.

रौशनी ने उसकी आँखों में देखते हुए सॉफ्ट आवाज़ में जवाब दिया:

रौशनी:

हाँ… बस आप hi के लिए.

इतना कहते hi दोनों एक दूसरे के और करीब आ गए. असलम ने रौशनी की कमर पकड़ ली और उसको अपने सीने से चिपका लिया. रौशनी ने भी अपने हाथ उसकी गर्दन में दाल दिए.

उनके होंठ पहले हलकе से टकराये, फिर dheere-dheere गहरे किश में बदल गए. असलम के काळा, मोठे लिप्स रौशनी के ब्राउन लिपस्टिक वाले गुलाबी होंठों को चूस रहे थे. किश स्लो से शुरू हुआ, लेकिन जल्दी hi वेट और हंगरी हो गया. दोनों की जुबां एक दूसरे से मिलने लगी.

रौशनी (किश के बीच, सॉफ्ट मोअन के साथ):

मममहह…

असलम ने उसकी डीप कट पीठ पर हाथ फेरते हुए उसको और तिघ्टलय पकड़ लिया. रौशनी की पोनी उसकी पीठ पर हिल रही थी जब वह किश में डूब रही थी.

दोनों कुछ देर तक बस एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे — बिना किसी जल्दी के, लेकिन पूरी लस्ट के साथ.

किश के बीच रौशनी ने धीरे से लिप्स हटाए. दोनों की सांसें अभी भी तेज़ थी. उसने असलम के सीने पर हाथ रखते हुए सॉफ्ट आवाज़ में कहा:

Roshni:Rukiye… पहले रोनित से बात कर लेती हूँ. कहती हूँ आज बहुत एक्स्ट्रा काम है, लेट रुकना पड़ेगा.

असलम ने उसकी कमर से हाथ नहीं हटाया, बस उसके लिप्स पर एक लास्ट सॉफ्ट किश करके थोड़ा सा डिस्टेंस दिया.

रौशनी ने फ़ोन निकाला और रोनित को कॉल लगा दिया. Do-teen रिंग्स के बाद रोनित ने उठाया.

Roshni:Ronit… मैं ंगो में हूँ. आज थोड़ा एक्स्ट्रा काम आ गया है, मीटिंग भी लेट तक चल सकती है. मैं लेट आउंगी… शायद 10-11 बजे तक. तुम्हे कोई प्रॉब्लम तोह नहीं?

लाइन के दूसरी तरफ थोड़ा सा पॉज आया. फिर रोनित की आवाज़ आयी — सुर्प्रिसिंगलय कलम और बिलकुल ठीक.

Ronit:Haan, कोई प्रॉब्लम नहीं. तुम अपना काम करो. मैं भी आज थोड़ा बिजी रहने वाला हूँ. लेट तक बहार hi रहूँगा शायद. टेंशन मत लो.

बस किसके साथ आओगी बताओ.

रोष ी कहती हैं वह ंगो के एक महिला वर्कर के साथ आएगी. रोनित आगे कुछ नहीं कहता . लव यू डार्लिंग कहता हैं

रौशनी थोड़ी सुरप्रीसेड थी इतनी आसानी से हाँ मिलने पर, लेकिन उसने बस “लव यू तू ” कहा और कॉल काट दिया.

फ़ोन रखते hi उसने असलम की तरफ देखा.

वहां (रोनित की साइड):रोनित असल में खुश था की रौशनी लेट तक बहार रहेगी. आज रात उसको अपने “काम” के लिए टाइम चाहिए था — वही इललीगल ड्रग ट्रेड वाला काम जिसमें वह अपने लोन शार्क दोस्त के अंडर काम कर रहा था. रौशनी के घर न होने से उसको फ्री टाइम मिल रहा था बिना किसी sawaal-jawaab के.

रौशनी ने फ़ोन साइड रखते हुए असलम की तरफ फिर से देख लिया. उसकी आँखों में अब क्लियर ग्रीन सिग्नल था.

रौशनी (थोड़ा सॉफ्ट स्माइल के saath):Bol दिया… लेट तक फ्री हूँ.

असलम ने उसको फिर से अपने करीब खींच लिया. उसके हाथ वापस रौशनी की डीप कट पीठ पर चले गए.

Aslam:Toh अब कोई रुकावट नहीं…

---

असलम ने रौशनी को और तिघ्टलय अपने सीने से चिपका लिया. उनका किश अब पहले से कहीं ज़्यादा गहरा और हंगरी हो गया. दोनों की जुबां एक दूसरे से मिल रही थी, लिप्स चूस रहे थे. असलम के हाथ रौशनी की डीप कट पीठ पर घूम रहे थे, उसकी नंगी स्किन को सहलाते हुए.

फिर उसने एक हाथ आगे लाकर रौशनी के ब्लाउज के ऊपर से hi उसके बड़े चूचियों को दबोच लिया. उसने उनको ज़ोर से प्रेस किया, उनके शेप को फील करते हुए. रौशनी की सॉफ्ट, नरम चूचियां ब्लाउज के थीं फैब्रिक के थ्रू क्लेअर्ल्य फील हो रही थी.

रौशनी (किश के बीच, आह भरते हुए):

मममहह… अह्ह्ह…

असलम ने बिना किश तोड़е उसके ब्लाउज के हुक्स खोलने शुरू कर दिए. Ek-ek करके हुक्स खुले. ब्लाउज ढीला पद गया. उसने हाथ सीधे ब्रा के अंदर दाल दिया और उसके सॉफ्ट, नरम चूचियों को बिना किसी रुकावट के मसलने लगा. उसके उंगलियां उनके वेट को फील कर रही थी, निप्पल्स को लिघ्टलय पिंच करती हुई.

रौशनी की aahеin तेज़ हो गयी. उसने असलम के किश में और डूबते हुए अपना हाथ नीचे ले जाय. उसने असलम की पंत के अंदर हाथ दाल दिया और सीधे उसके सख्त, मोठे, लम्बे लुंड को पकड़ लिया. जैसे hi उसकी सॉफ्ट उंगलियां उसके लुंड पर पड़ी, असलम का लुंड एक झटका मारा.

रौशनी ने उसको dheere-dheere सहलाना शुरू कर दिया — पुरे लेंथ को फील करते हुए, टिप से बेस तक. असलम के लुंड की गर्मी और हार्डनेस उसके हाथ में साफ़ महसूस हो रही थी.

असलम (उसके चूचियों को मसलते हुए, गरम सांस के साथ):

उफ्फ्फ… तेरी यह सॉफ्ट चूचियां… और तेरा हाथ… अह्ह्ह रौशनी…

रौशनी उसके लुंड को पंत के अंदर से hi स्ट्रोक करती रही, जबकि असलम उसके ब्रा के अंदर उसके चूचियों को दबाता और सहलाता रहा. दोनों का किश अभी भी कंटिन्यू था — वेट, डीप, और फुल ऑफ़ लस्ट.

रौशनी (aahеin भरते हुए, उसके लुंड को सहलाते हुए):

अह्ह्ह… असलम… कितना सख्त… मममहह…

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उनका फिजिकल क्लोसनेस्स अब पूरी तरह इंटेंसीफी हो चूका था. सोफे पर दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे, हाथ एक दूसरे के बॉडी पर घूम रहे थे.

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असलम ने किश तोड़ते हुए रौशनी के ब्लाउज को पूरी तरह खोल दिया और उसके कन्धों से उतार कर साइड में फ़ेंक दिया. उसके बाद उसने ब्रा के स्ट्रैप्स नीचे किये और उसको भी पूरी तरह हटा दिया. रौशनी के बड़े, सॉफ्ट, नरम चूचिये अब बिलकुल फ्री थे — असलम के हाथों और नज़र के सामने.

असलम ने उनको दोनों हाथों से पकड़ कर दबाया, फिर झुक कर एक निप्पल को मुँह में ले लिया और चूसने लगा. रौशनी की aahеin निकलने लगी.

इसी बीच रौशनी ने असलम की पंत का बटन और ज़िप खोल दिया. उसने उसके अंडरवियर को नीचे किया और उसके सख्त, मोठे, लम्बे लुंड को बहार निकाल लिया. जैसे hi उसका लुंड फ्री हुआ, रौशनी ने उसको अपने सॉफ्ट हाथ में पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया — टिप से बेस तक, धीरे लेकिन फिरमली.

असलम (उसके चूचिये को चूसते हुए, मोअन के saath):Ahhh… रौशनी… तेरी हाथ…

फिर असलम का फोकस नीचे की तरफ बढ़ा. उसने एक हाथ रौशनी की साड़ी के पल्लू को साइड करके उसकी कमर और पेट पर फेरа, फिर धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर उठाया. उसने उसकी जांघों के बीच हाथ दाल दिया और उसकी पंतय के ऊपर से hi उसकी छूट को सहलाना शुरू कर दिया. पंतय पहले से hi थोड़ी गीली थी.

रौशनी (उसके लुंड को स्ट्रोक करती हुई, आह भरते hue):Mmmhh… असलम… अह्ह्ह…

असलम ने उसकी पंतय को साइड करके सीधे उसकी गीली छूट पर ऊँगली फेर दी. उसने उसकी क्लीट को लिघ्टलय रब किया, फिर एक ऊँगली उसकी छूट के मुँह पर घुमाई. रौशनी की कमर थोड़ी सी उठ गयी.

दोनों अब सोफे पर ऐसे थे — रौशनी के चूचिये असलम के मुँह में, उसका हाथ असलम के मोठे लुंड को सेहला रहा था, और असलम का हाथ उसकी छूट पर था. फिजिकल क्लोसनेस्स अब नीचे तक पूरी तरह फ़ैल चूका था.

---

असलम ने रौशनी की साड़ी को और ऊपर किया और उसकी पंतय को धीरे से पकड़ कर नीचे खींच दिया. पंतय उसकी टांगों से निकल कर साइड हो गयी. अब रौशनी की गीली, सॉफ्ट छूट बिलकुल ओपन थी असलम के सामने.

उसने पहले दो उंगलियां उसकी छूट के मुँह पर फेरі, फिर धीरे से अंदर दाल दी. रौशनी की छूट पहले से hi गीली थी, इसलिए उसकी उंगलियां आसानी से अंदर चली गयी. असलम ने उनको andar-bahar करना शुरू किया, उसकी G-spot को ढूंढते हुए.

रौशनी (आह भरते हुए):

अह्ह्ह… असलम… मममहह…

फिर असलम ने सोफे पर उसकी टाँगे थोड़ी फैलाई और खुद नीचे चला गया. उसने अपना मुँह रौशनी की छूट के बिलकुल करीब ले जाकर पहले उसके सॉफ्ट छूट के होठों को अपनी जीभ से dheere-dheere रगड़ा. उसकी जीभ उसकी फोल्ड्स के बीच घूम रही थी, उनको सेपरेट करती हुई.

उसने फिर उसकी क्लीट को मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया — हल्का सा, फिर थोड़ा ज़ोर से. कभी जीभ से उसको सर्कल्स में रगड़ता, कभी पुरे छूट के मुँह को chaat’ta. Beech-beech में वह अपनी उंगलियां भी andar-bahar करता रहता था.

रौशनी की aahеin और सिसकियाँ अब तेज़ हो चुकी थी. उसने असलम के सर को अपने हाथ से पकड़ लिया था, उसके बाल में उंगलियां डाले हुए.

रौशनी (कमर थोड़ी सी उठाते हुए, कंटीन्यूअस मोअन्स के साथ):

आआह्ह्ह… अह्ह्ह असलम… उफ्फ्फ्फ़… ऐसे… मममहह… अह्ह्ह…

असलम ने उसकी दोनों छूट के होठों को अपनी जीभ से फ्लॉप करके चाटना कंटिन्यू किया, फिर क्लीट को तिघ्टलय सूचक किया. रौशनी की सांसें बिलकुल तेज़ हो गयी थी. उसके तइस थोड़े काँप रहे थे, और उसकी सिसकियाँ रूम में गूँज रही थी.

असलम उसकी छूट को गहरा चाट रहा था — जीभ अंदर तक ले जाकर, फिर बहार निकल कर क्लीट पे फोकस करता. रौशनी का बॉडी अब फुल्ली रेस्पोंद कर रहा था, उसकी aahеin और सिसकियाँ कन्टिन्यूसली बढ़ रही थी.

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---

असलम ने रौशनी की छूट को चाटना और चूसना कंटिन्यू रखा. पूरे 5 मिनट तक उसकी जीभ और लिप्स उसकी गीली छूट पर थे. कभी वह उसकी क्लीट को तिघ्टलय सूचक करता, कभी उसके सॉफ्ट होठों को जीभ से रगड़ता, कभी अपनी जीभ अंदर तक ले जाकर उसकी छूट को गहरा चाटता. उसकी उंगलियां भी beech-beech में andar-bahar होती रही.

रौशनी की aahеin और सिसकियाँ कन्टिन्यूसली बढ़ती गयी. उसने सोफे के पिलो को दोनों हाथों से ज़ोर से पकड़ लिया था. हर बार जब असलम उसकी क्लीट को चुस्त या जीभ से रगड़ता, रौशनी की कमर उठ जाती और उसके मुँह से तेज़ सिसकियाँ निकलती.

रौशनी (पिलो को पकडे हुए, कंटीन्यूअस मोअन्स):

आआह्ह्ह… अह्ह्ह… असलम… उफ्फ्फ्फ़… मममहह… अह्ह्ह… बस… ऐसे… आआह्ह्ह…

उसके तइस काँप रहे थे. उसकी सांसें बिलकुल शार्ट और तेज़ हो चुकी थी. 5 मिनट की इस लम्बी चूसै ने उसको पूरी तरह एज पर ला दिया था. उसकी छूट अब इतनी गीली थी की असलम के मुँह और चीन पर उसका रास चमक रहा था.

फिर रौशनी ने सडनली असलम के सर को पकड़ कर उसको ऊपर किया. उसने उसको सोफे पर लिटाया और खुद उसके बीच में आ गयी. बिना किसी देर के उसने असलम के सख्त, मोठे, लम्बे लुंड को हाथ में लिया और अपने मुँह में ले लिया.

रौशनी ने उसके लुंड को ज़ोरों से चूसना शुरू कर दिया. उसका मुँह upar-neeche मूव कर रहा था — कभी टिप को तिघ्टलय सूचक करती, कभी उसके लुंड को गहरा मुँह में ले लेती. उसकी थूक उसके शाफ़्ट पर फ़ैल रही थी. वह बिलकुल हंगरी तरीके से उसके लुंड को चूस रही थी, जैसे उसकी अपनी एडजेड गर्मी निकाल रही हो.

असलम (सर पीछे की तरफ, हाथ उसके बालों में, मोअन के साथ):

अह्ह्ह… फ़क… रौशनी… इतना ज़ोर से… अह्ह्ह…

रौशनी उसके लुंड को कन्टिन्यूसली upar-neeche चुस्ती रही, kabhi-kabhi टिप को जुबां से लीक करती, फिर फिर से पुरे लुंड को मुँह में ले लेती. उसकी आँखें कभी बंद होती, कभी असलम की आँखों से मिलती.

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रौशनी ने असलम के मोठे लुंड को और देर तक चूसना कंटिन्यू किया. अब वह सिर्फ upar-neeche नहीं कर रही थी — वह उसके लुंड को गहरा मुँह में ले रही थी. हर बार जब वह नीचे जाती, उसका लुंड उसके गले के करीब तक चला जाता. उसकी आँखें kabhi-kabhi पानी से भर जाती, लेकिन वह रूकती नहीं थी.

उसने एक हाथ से असलम के बॉल्स को सहलाया और दुसरे हाथ से उसके बेस को पकड़ कर उसके लुंड को अपने मुँह में गाइड किया. उसकी थूक अब उसके पुरे शाफ़्ट पर थी, वेट स्लुर्पिंग आवाज़ें आ रही थी.

असलम का हाथ उसके सर पर था. वह dheere-dheere अपने हिप्स भी हिलने लगा, रौशनी के मुँह में अपना लुंड थोड़ा और डीप धकेलते हुए.

असलम (सांस फूलते हुए, कण्ट्रोल खोते हुए):

रौशनी… अह्ह्ह… बहुत गहरा… मैं… अब नहीं रोक सकता…

रौशनी ने उसकी बात सुनते hi उसके लुंड को और तिघ्टलय और डीपर चूसना शुरू कर दिया. उसकी नज़र असलम की आँखों से मिली हुई थी जब उसका लुंड उसके मुँह के अंदर तक था.

कुछ hi सेकंड बाद असलम का शरीर टाइट हो गया. उसने रौशनी के सर को लिघ्टलय पकड़ लिया और एक गहरे धक्के के साथ अपना पूरा माल उसके मुँह में छोड़ दिया.

असलम (ज़ोर से मोअन करते हुए):

अह्ह्ह… फ़क… रौशनी… आ रहा हूँ…!

उसका थिक, गरम छुम रौशनी के मुँह में निकलने लगा. रौशनी ने उसके लुंड को मुँह से नहीं निकाला. उसने उसके छुम को अपने मुँह में लिया, थोड़ा सा गले से उतरा, और बाकी को उसके लुंड के अराउंड रखते हुए उसको चुस्ती रही जब तक असलम का लास्ट ड्राप नहीं निकल गया.

जब असलम का लुंड फाइनली सॉफ्ट होने लगा, तब रौशनी ने उसको मुँह से निकाला. उसके लिप्स और चीन पर थोड़ा छुम चमक रहा था. उसने जुबां से अपने लिप्स साफ़ किये और असलम की आँखों में देखते हुए सॉफ्ट सांस ली.

रौशनी (सांस लेते हुए):

उफ्फ्फ… इतना…

असलम ने उसको ऊपर खींच कर अपने सीने से चिपका लिया. दोनों की सांसें अभी भी तेज़ थी.

असलम (उसके बाल सहलाते हुए):

तेरी मुँह… आज तोह मुझे खा गयी. अब थोड़ा टाइम दे… फिर तेरी बारी है.

कुछ मिनट बाद असलम रिकवर हो गया. उसने रौशनी को धीरे से घुमा दिया और उसको सोफे पर डोगग्य पोजीशन में झुकа दिया. रौशनी के हाथ सोफे के बैकरेस्ट पर थे, उसकी पीठ थोड़ी सी आर्च की हुई थी. उसने उसकी पंतय (जो पहले से साइड थी) पूरी तरह हटा दी. अब उसकी सॉफ्ट, गीली छूट और उसकी गांड बिलकुल एक्सपोज़ थी.

असलम ने पीछे से उसकी टाँगे थोड़ी फैलाई और अपना मुँह उसकी छूट के बिलकुल करीब ले गया. उसने पहले उसकी गीली छूट को पीछे से जीभ से चाटना शुरू किया — उसके सॉफ्ट होठों को फ्लॉप करके, क्लीट को ढूंढते हुए, जीभ अंदर तक ले जाकर.

फिर उसने अपनी जीभ ऊपर की तरफ ले जाकर उसकी अस्स होल को भी लीक किया. उसने दोनों जगह लगातार चाटना शुरू कर दिया — कभी उसकी छूट को गहरा चाट लेता, कभी उसकी टाइट अस्स होल को जीभ से सर्कल्स में रगड़ता, कभी दोनों के बीच जीभ घूमता.

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रौशनी (डोगग्य में झुकी हुई, कंटीन्यूअस प्लेअसुरे bhаri आवाज़ें निकालते हुए):

उफ्फ्फ… मममहह… अह्ह्ह… आआह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… आठ… ममम… अह्ह्ह…

उसके मुँह से सिर्फ सिसकियाँ, aahеin और प्लेअसुरे की आवाज़ें आ रही थी. उसने सोफे के एज को ज़ोर से पकड़ लिया था. हर बार जब असलम उसकी अस्स होल को लीक करता या उसकी छूट में जीभ डालता, रौशनी की कमर थोड़ी सी हिल जाती और उसकी मोअन्स तेज़ हो जाती.

असलम दोनों जगह कन्टिन्यूसली चाट रहा था — कभी उसकी छूट के रास को चूसता, कभी उसकी अस्स होल को जीभ से प्रेस करता. रौशनी का बॉडी पुरे प्लेअसुरे में डूबा हुआ था. उसकी सांसें बिलकुल शार्ट थी और उसके मुँह से ruk-ruk कर “उफ्फ्फ… अह्ह्ह… मममहह… आआह्ह्ह” की आवाज़ें निकल रही थी.

असलम ने उसकी गांड को दोनों हाथों से फैला कर और गहरा चाटना शुरू कर दिया. रौशनी की सिसकियाँ अब और तेज़ हो चुकी थी.

रौशनी (कमर हिलाते हुए, पुरे प्लेअसुरे में):

उफ्फ्फ… अह्ह्ह… मममहह… आआह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… आठ…

वह बस मोअन कर रही थी — कोई क्लियर वर्ड्स नहीं, सिर्फ उसके बॉडी का रिस्पांस.

असलम ने रौशनी की अस्स होल और छूट को चाटना और भी फोकस्ड तरीके से कंटिन्यू रखा. उसने उसकी गांड को दोनों हाथों से फैला कर रखा था. कभी उसकी जीभ रौशनी की टाइट अस्स होल को स्लो सर्कल्स में रगड़ती, कभी नीचे जाकर उसकी गीली छूट के होठों को फ्लॉप करती, कभी उसकी क्लीट को पीछे से hi ढूंढ कर चुस्ती.

रौशनी की aahеin बस बढ़ती hi जा रही थी. सोफे के एज को उसने इतना ज़ोर से पकड़ लिया था की उसकी उँगलियों के निशाँ पद रहे थे. हर बार जब असलम उसकी अस्स होल को जीभ से प्रेस करता या उसकी छूट में जीभ डालता, उसके मुँह से और तेज़ सिसकियाँ निकलती.

रौशनी (कंटीन्यूअस, राइजिंग मोअन्स):

उफ्फ्फ… आआह्ह्ह… मममहह… अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… आआह्ह… ममम… अह्ह्ह…

उसका बॉडी thoda-thoda हिल रहा था. उसकी टाँगे काँप रही थी. प्लेअसुरे इतना तेज़ था की उसको लग रहा था वह बस चूसै से hi झड़ने वाली है.

**रौशनी (मैं hi मैं, आँखें बंद करके, शरमाते हुए):**

ऐसे तोह चूसै रोनित कभी नहीं करता… न hi सलीम… न रमेश. उफ्फ्फ… असलम की जीभ… दोनों जगह… इतना गहरा… आज तोह सिर्फ चूसै से hi झरने वाली थी मैं. और अभी तोह शाम बस शुरू हुई है… आज तोह पूरी तरह छुड़ेगी तू रौशनी… .. इस सोच से रौशनी की बुर और लीक करने लगी..

यह सोचते hi उसके चेहरे पर हलकी सी शर्म आ गयी, लेकिन उसकी aahеin रुक नहीं रही थी. वह और ज़ोर से सोफे को पकड़ कर असलम की जीभ के अगेंस्ट अपनी गांड थोड़ी सी पीछे धकेल रही थी.

असलम ने उसकी रिएक्शन फील करके उसकी अस्स होल को और फोकस्ड तरीके से चाटना शुरू कर दिया, beech-beech में उसकी छूट को भी नहीं भूलता. रौशनी की मोअन्स अब ऑलमोस्ट कंटीन्यूअस हो चुकी थी — “उफ्फ्फ… अह्ह्ह… मममहह… आआह्ह्ह…”

उसकी छूट इतनी गीली थी की असलम के मुँह और चीन पर उसका रास चमक रहा था. शाम अभी शुरू hi हुई थी, और रौशनी पहले से hi एज पर थी.

असलम की जीभ रौशनी की अस्स होल और छूट पर लगातार काम कर रही थी. उसने उसकी क्लीट को पीछे से hi तिघ्टलय सूचक किया और साथ में एक ऊँगली उसकी छूट में गहरा दाल दी. यह कॉम्बिनेशन रौशनी के लिए लास्ट स्ट्रॉ बन गया.

रौशनी की कमर एकदम टाइट हो गयी. उसने सोफे के एज को इतना ज़ोर से पकड़ लिया की उसके नेल्स ऑलमोस्ट गढ़ गए. उसकी टाँगे कांपने लगी और उसके मुँह से एक लम्बी, जहरі सिसकारी निकल गयी.

रौशनी (जोर से झड़ते हुए):

आआह्ह्ह्हह… उफ्फ्फ्फ़… असलम… आआह्ह्ह…!

उसकी छूट असलम की जीभ और ऊँगली के अराउंड स्पास्मोडिकालय सिकुड़ने लगी. वह पुरे ओर्गास्म में डूब गयी — बॉडी कांपते हुए, सांसें फूलते हुए, सोफे पर झुकी हुई. असलम ने उसके झड़ने के पूरा टाइम उसकी छूट और अस्स होल को चाटना कंटिन्यू रखा, उसके ओर्गास्म को और लम्बा khееnchte हुए.

जब फाइनली रौशनी का बॉडी ढीला पड़ा, तब असलम ने उसको धीरे से सोफे पर लिटाया. दोनों थोड़ा टाइम चुप चाप आराम करने लगे. रौशनी की सांसें अभी भी तेज़ थी, उसका बॉडी थोड़ा सॉफ्ट और सेंसिटिव हो चूका था.

रौशनी ने आँखें खोल कर इस छोटे से प्राइवेट रूम को देखा — डिम लाइट, छोटा सोफे, बंद गेट, पूरी प्राइवेसी. उसके लिप्स पर एक सॉफ्ट, सटिस्फीएड सी मुस्कान थी.

**रौशनी (मैं hi मैं, आँखें half-closed, सोचते हुए):**

उफ्फ्फ… आज तोह मैं इस छोटे से कमरे में, इस सोफे पर hi असलम के साथ छोडूंगी… उफ्फफ्फ्फ़.

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उसка मोटा, कला, लम्बा लुंड तोह आज चाहिए… ममममम. अभी सिर्फ चूसै से hi इतना झाड़ गयी… अब जब वह अंदर आएगा तोह…

उसने असलम की तरफ देखा. वह उसके बगल में लिट्а हुआ था, उसके बाल सेहलа रहा था. रौशनी ने उसके सीने पर हाथ रख दिया और उसके मोठे लुंड की तरफ नज़र डाली जो अभी भी थोड़ा हार्ड था.

रौशनी (सॉफ्ट आवाज़ में, थोड़ा शरमाते हुए):

असलम… अभी… थोड़ा टाइम और…

असलम ने उसके माथे पर किश किया, लेकिन उसकी आँखों में क्लियर था की वह अब रिकवर करके आगे बढ़ने वाला है.

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