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- Dec 5, 2013
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अपडेट-19
रात भर चैन की नींद सोने के बाद सुबह जब मेरी आँख खुली तो में अकेला बीएड पे नंगा hi सोया हुआ था रात की बात याद करके में मुस्कुराते हुए खड़ा हुआ और फ्रेश हो के निचे गया और हॉल में बैठ क्र टीवी देख ने लगा थोड़ी देर बाद सब बहार से अंदर आये
में- आप लोग कहा गए थे
पापा- बीटा पूजा में पड़ोसियों को भी तो बुलाना था न तो में और तेरी दीदी स्टेशन और तेरी माँ और बुआ पास के पड़ोसियों को बोल ने गए थे तू सो रहा था इसलिए जगाया नहीं अब जा के पंडित जी को ले आ
में- जी बिलकुल बस एक कप कॉफ़ी मिल जाये तो
दीदी- तू बैठ में अभी लायी कॉफ़ी तेरे लिए और कोई तो नहीं पियेगा न
पापा- 1 कप मुझे भी दे hi दो कल से फिर वो सदी चाय hi पिणि है है
थोड़ी देर में hi दीदी 2 कप कॉफ़ी लेकर आयी और हम दोनों को दे दी तभी मेरी नज़र बुआ की चाल पे गयी वो थोड़ा लंगड़ा के चल रही थी
में- क्या हुआ बुआ ऐसे क्यों चल रही हो
मेरे ऐसा कहते hi सब की नज़र बुआ पैर गयी
पापा- हां किरण क्या हुआ ऐसे कई चल रही हो
माँ- क्या हुआ तुम्हे
बुआ- अरे एक साथ बोलोगे तो जवाब कैसे दूंगी वो दरसल पेअर मुद गया था सुबह सीधी उतारते वक़्त( और मुझे प्यार से घर कर देखा)
में- ओह हो बुआ फिर तो आप ऊपर नहीं सो पाओगे फिर मेरे रूम में( ये बात मैंने मजा लेने के लिए बोली थी)
बुआ- नहीं नहीं इतना भी दर्द नहीं है शाम तक ठीक हो जायेगा तू फ़िक्र मत कर
बुआ जब बोल रही थी तो मुझे हसी आ रही थी इसलिए मैंने जल्दी से कॉफ़ी ख़तम की और पापा से एड्रेस लेके पंडित जी लेने के लिए निकल गया वह पहुंच के पंडित जो को साथ लिया और घर आज्ञा पूजा में माँ और पापा बैठे थे अभी पूजा शुरू hi हुई थी की सविता आंटी की बहु आयी उफ़ क्या लग रही थी रेड पटियाला सूट में उसने अंदर आते हुए इशारे से सब को नमस्ते की और मेरी बगल में आ के बैठ गयी दीदी मेरी दूसरी साइड में बैठी थी और बुआ मेरे आगे जैसे hi भाभी मेरे पास बैठी उनकी खुशबू फ़ैल गयी मेरे आस पास मैंने स्माइल कर के उन्हें देखा तो उन्होंने भी मुझे स्माइल की और सर पे चुन्नी रख कर सामने देखने लगी तभी दीदी मेरे पास आयी और कान के पास आके बोली
दीदी- लो आगयी तुम्हारी मस्त भाभी और बैठी भी तुम्हारे पास hi है
में- तो आपको क्यों जलन हो रही है मेरी भाभी है न तो चाहे बगल में बैठे या मेरी गॉड में
दीदी- मुझे क्यों जलन होगी जो मर्ज़ी कर
में- हां तो करूँगा न वैसे भी हॉट है न
दीदी - मुझे नई पता अब चुप चाप बैठ और पूजा पे ध्यान दे
फिर कुछ और लोग आये कुछ पापा की जान पहचान के थे तो भाभी को मेरी तरफ खिसकना पड़ा जिस वजह से भाभी की और मेरी जाएंगे आपस में मिल गयी मेरा तो ये महसूस करके hi खड़ा होने लगा था तो मैंने अपना ध्यान पूजा में लगाया
करीब 1.30 घंटे बाद पूजा समाप्त हुई और आरती के लिए खड़े होने लगे तो बहुत दिएर बढ़े रहने की वजह से पेअर अकड़ ने लगे थे में तो खड़ा हो पैर जैसे hi भाभी कड़ी हुई तो एक दम गिरने लगी तो मैंने हाथ बढ़ा के उन्हें पकड़ लिया और इस घटना में उनका एक पपीता मेरे हाथ में आज्ञा उफ्फ्फ हम दोनों hi एक दूसरे को देख रहे थे पैर जैसे hi भाभी का ध्यान मेरे हाथ पे गया तो उन्होंने हाथ हटा के नज़रे घुमा ली तो मैंने धीरे से उनके कान में सॉरी बोलै तो उन्होंने मुझे देखा पैर बोली कुछ नहीं
तभी आरती थाली मेरे पास आयी तो मैंने भी आरती करके थाली भाभी की तरफ की और थाली पकड़ा ते वक़्त उनका हाथ दबाया जिस से उन्होंने फिर मेरी तरफ देखा तो मैंने फिर इशारे से सॉरी बोलै इस बार वो हल्का सा मुस्कुराई और थाली लेके आरती करने लगी
ऐसे hi पूजा सम्पत हुई तो सब प्रसाद लेके अपने घर निकल गए भाभी भी सबसे मिलके और प्रसाद लेके अपने घर चली गयी
फिर पापा ने पंडित जी को दक्षिअ दी और में पंडित जी को उनके घर छोड़ आया इस सब में मुझे 12 बज गए तो मैंने भी एक पन्नी में प्रसाद लिया और कजरी से मिलने के लिए निकल गया चुप चाप
रात भर चैन की नींद सोने के बाद सुबह जब मेरी आँख खुली तो में अकेला बीएड पे नंगा hi सोया हुआ था रात की बात याद करके में मुस्कुराते हुए खड़ा हुआ और फ्रेश हो के निचे गया और हॉल में बैठ क्र टीवी देख ने लगा थोड़ी देर बाद सब बहार से अंदर आये
में- आप लोग कहा गए थे
पापा- बीटा पूजा में पड़ोसियों को भी तो बुलाना था न तो में और तेरी दीदी स्टेशन और तेरी माँ और बुआ पास के पड़ोसियों को बोल ने गए थे तू सो रहा था इसलिए जगाया नहीं अब जा के पंडित जी को ले आ
में- जी बिलकुल बस एक कप कॉफ़ी मिल जाये तो
दीदी- तू बैठ में अभी लायी कॉफ़ी तेरे लिए और कोई तो नहीं पियेगा न
पापा- 1 कप मुझे भी दे hi दो कल से फिर वो सदी चाय hi पिणि है है
थोड़ी देर में hi दीदी 2 कप कॉफ़ी लेकर आयी और हम दोनों को दे दी तभी मेरी नज़र बुआ की चाल पे गयी वो थोड़ा लंगड़ा के चल रही थी
में- क्या हुआ बुआ ऐसे क्यों चल रही हो
मेरे ऐसा कहते hi सब की नज़र बुआ पैर गयी
पापा- हां किरण क्या हुआ ऐसे कई चल रही हो
माँ- क्या हुआ तुम्हे
बुआ- अरे एक साथ बोलोगे तो जवाब कैसे दूंगी वो दरसल पेअर मुद गया था सुबह सीधी उतारते वक़्त( और मुझे प्यार से घर कर देखा)
में- ओह हो बुआ फिर तो आप ऊपर नहीं सो पाओगे फिर मेरे रूम में( ये बात मैंने मजा लेने के लिए बोली थी)
बुआ- नहीं नहीं इतना भी दर्द नहीं है शाम तक ठीक हो जायेगा तू फ़िक्र मत कर
बुआ जब बोल रही थी तो मुझे हसी आ रही थी इसलिए मैंने जल्दी से कॉफ़ी ख़तम की और पापा से एड्रेस लेके पंडित जी लेने के लिए निकल गया वह पहुंच के पंडित जो को साथ लिया और घर आज्ञा पूजा में माँ और पापा बैठे थे अभी पूजा शुरू hi हुई थी की सविता आंटी की बहु आयी उफ़ क्या लग रही थी रेड पटियाला सूट में उसने अंदर आते हुए इशारे से सब को नमस्ते की और मेरी बगल में आ के बैठ गयी दीदी मेरी दूसरी साइड में बैठी थी और बुआ मेरे आगे जैसे hi भाभी मेरे पास बैठी उनकी खुशबू फ़ैल गयी मेरे आस पास मैंने स्माइल कर के उन्हें देखा तो उन्होंने भी मुझे स्माइल की और सर पे चुन्नी रख कर सामने देखने लगी तभी दीदी मेरे पास आयी और कान के पास आके बोली
दीदी- लो आगयी तुम्हारी मस्त भाभी और बैठी भी तुम्हारे पास hi है
में- तो आपको क्यों जलन हो रही है मेरी भाभी है न तो चाहे बगल में बैठे या मेरी गॉड में
दीदी- मुझे क्यों जलन होगी जो मर्ज़ी कर
में- हां तो करूँगा न वैसे भी हॉट है न
दीदी - मुझे नई पता अब चुप चाप बैठ और पूजा पे ध्यान दे
फिर कुछ और लोग आये कुछ पापा की जान पहचान के थे तो भाभी को मेरी तरफ खिसकना पड़ा जिस वजह से भाभी की और मेरी जाएंगे आपस में मिल गयी मेरा तो ये महसूस करके hi खड़ा होने लगा था तो मैंने अपना ध्यान पूजा में लगाया
करीब 1.30 घंटे बाद पूजा समाप्त हुई और आरती के लिए खड़े होने लगे तो बहुत दिएर बढ़े रहने की वजह से पेअर अकड़ ने लगे थे में तो खड़ा हो पैर जैसे hi भाभी कड़ी हुई तो एक दम गिरने लगी तो मैंने हाथ बढ़ा के उन्हें पकड़ लिया और इस घटना में उनका एक पपीता मेरे हाथ में आज्ञा उफ्फ्फ हम दोनों hi एक दूसरे को देख रहे थे पैर जैसे hi भाभी का ध्यान मेरे हाथ पे गया तो उन्होंने हाथ हटा के नज़रे घुमा ली तो मैंने धीरे से उनके कान में सॉरी बोलै तो उन्होंने मुझे देखा पैर बोली कुछ नहीं
तभी आरती थाली मेरे पास आयी तो मैंने भी आरती करके थाली भाभी की तरफ की और थाली पकड़ा ते वक़्त उनका हाथ दबाया जिस से उन्होंने फिर मेरी तरफ देखा तो मैंने फिर इशारे से सॉरी बोलै इस बार वो हल्का सा मुस्कुराई और थाली लेके आरती करने लगी
ऐसे hi पूजा सम्पत हुई तो सब प्रसाद लेके अपने घर निकल गए भाभी भी सबसे मिलके और प्रसाद लेके अपने घर चली गयी
फिर पापा ने पंडित जी को दक्षिअ दी और में पंडित जी को उनके घर छोड़ आया इस सब में मुझे 12 बज गए तो मैंने भी एक पन्नी में प्रसाद लिया और कजरी से मिलने के लिए निकल गया चुप चाप