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अपडेट-6
सुबह देर से आँख खुली दीदी के बीएड की तरफ देखा तो वो वह नहीं थी तो में भी उठा और नाहा धो कर फ्रेश हुआ और निचे गया और हॉल में बैठ गया माँ किचन में थी उन्होंने एक नज़र मुझे देखा और थोड़ी देर में मेरे लिए नास्ता लेकर आयी मैंने भी कोई बात नई और चुप चाप नास्ता करके बहार निकल गया पूरा दिन ऐसे hi घूमता रहा और रात को घर पंहुचा तो देखा दोनों मेरा वेट कर रही थी
माँ- ये क्या टाइम है घर आने का सुबह से कहा था न खाना न पीना पोरे दिन आवारागर्दी
में- में बस अपने दोस्तों से मिलने गया मोदी को तो में चला जाऊंगा फिर पता नई कब मिलना होगा उनसे
माँ- ठीक चल खाना खा ले फिर हम ने मिल के खाना खाया और में अपनी आदत के अनुसार टहल ने के लिए चला गया जब वापस आया तो माँ ने गेट खोला पैर बोली कुछ नहीं और में भी चुप चाप अपने रूम में गया अंदर जैसे hi गया तो देखा दीदी ने मेरा और अपना बीएड मिला के एक कर दिया था में तो शोक में था की ये सब क्या है
दीदी- अब आँखे फाड़े देखता hi रहेगा या लाइट बंद कर के सोयेगा भी
में- ये बीएड एक करने का मतलब
दीदी - ज्यादा दिमाग मत चला मैंने सोचा वह तो अपने अलग रूम है तो 2/ 4 दिन के लिए बीएड को एक कर दिया ताकि बाते करनी हो तो दिक्कत न हो
में- ओह्ह्ह शुक्रिया पैर इसकी कोई जरुरत नहीं है अलग करो बीएड
दीदी- तुझसे बड़ी हु हर वक़्त ये ढोस मत दिखाया कर समझा न चुप चाप सो जा
फिर मैंने भी जयादा बहस नहीं की और चुप लाइट बंद कर के अपनी साइड पे लेत गया
अभी थोड़ी देर hi हुई थी की दीदी मेरे पास सरक के आयी
दीदी- नाराज़ है क्या अभी तक
में- क्यों नाराज़ किस लिए आपकी ज़िन्दगी है आप जैसे मर्ज़ी जियो
दीदी- समझ न भाई ये गलत है हमारा रिश्ता इस सब की इज़्ज़ज़त नहीं देता
में- तो यार में कब आप से कह रहा हु की आप कुछ करो
दीदी- ाचा देख किश कर लिया कर बस बाकि और कुछ नई प्ल्ज़ समझा कर न
में- नहीं जी किश की भी जरुरत नहीं है अब आप सो जाओ मुझे भी नींद आ रही है प्ल्ज़ और में नाराज़ नहीं हु आज के बाद इस बारे में कोई बात नहीं होगी
दीदी- युवी समझता क्यों नहीं अगर किसी को पता चला तो कितनी बदनामी होगी
में- क्यों आप बता रे क्या और जब आपका मैं नहीं है तो क्यों बोल रे हो मैंने बोलै क्या
दीदी - क्युकी तेरी बाते मुझे चैन से जीने नहीं दे रही की तू मुझसे प्यार करता है और मेरी वजह से तू उदास रहने लगा है न खाता है न पिता है
में- तो आप भूल जाओ न सब कुछ क्यों याद कर रही
दीदी- ऐसे कैसे भूल जाओ युवी तूने एक आग लगा दी है मेरे अंदर
में- ये आग तो बहुत पहले से जल रही है दीदी बस आप महसूस नहीं करना चाहती या फिर सब कुछ जान कर भी अनजान बन रही हो इस जिस्म की भी कुछ जरूरते होती जिसे आप 8 महीने से नज़र अंदाज़ कर रही हो
दीदी- तो और क्या करती किसी के भी आगे अपनी टाँगे खोल देती और पापा को और तुझे दुनिया के सामने बदनाम कर देती तू hi बता न में क्या करती कैसे कहती की मेरा जिस्म तप रहा है
में- तो अब क्यों कह रही हो अब क्या हो गया
दीदी- क्युकी अब तूने इस जलती आग में प्यार की चीते मार दिए है और ये अब कबूल hi नहीं करना चाहती की में इस आग में और जलु ये ( परिवर्तन ( बदलाव) तू लाया है मेरी ज़िन्दगी में
में- तो छोड़ क्यों नहीं देती ये झूटी ज़िद्द जो तुम्हे जला के रख देगी
दीदी- मुझे सोच ने लिए कुछ वक़्त दे प्ल्ज़
गुड़ नाईट अब सो जा
में- सोच लो जितना सोच न है तुम्हारा जो भी फैसला होगा मुझे मंज़ूर है
दोनों बहिन भाई सो गए एक नए दिन की छह में
सुबह देर से आँख खुली दीदी के बीएड की तरफ देखा तो वो वह नहीं थी तो में भी उठा और नाहा धो कर फ्रेश हुआ और निचे गया और हॉल में बैठ गया माँ किचन में थी उन्होंने एक नज़र मुझे देखा और थोड़ी देर में मेरे लिए नास्ता लेकर आयी मैंने भी कोई बात नई और चुप चाप नास्ता करके बहार निकल गया पूरा दिन ऐसे hi घूमता रहा और रात को घर पंहुचा तो देखा दोनों मेरा वेट कर रही थी
माँ- ये क्या टाइम है घर आने का सुबह से कहा था न खाना न पीना पोरे दिन आवारागर्दी
में- में बस अपने दोस्तों से मिलने गया मोदी को तो में चला जाऊंगा फिर पता नई कब मिलना होगा उनसे
माँ- ठीक चल खाना खा ले फिर हम ने मिल के खाना खाया और में अपनी आदत के अनुसार टहल ने के लिए चला गया जब वापस आया तो माँ ने गेट खोला पैर बोली कुछ नहीं और में भी चुप चाप अपने रूम में गया अंदर जैसे hi गया तो देखा दीदी ने मेरा और अपना बीएड मिला के एक कर दिया था में तो शोक में था की ये सब क्या है
दीदी- अब आँखे फाड़े देखता hi रहेगा या लाइट बंद कर के सोयेगा भी
में- ये बीएड एक करने का मतलब
दीदी - ज्यादा दिमाग मत चला मैंने सोचा वह तो अपने अलग रूम है तो 2/ 4 दिन के लिए बीएड को एक कर दिया ताकि बाते करनी हो तो दिक्कत न हो
में- ओह्ह्ह शुक्रिया पैर इसकी कोई जरुरत नहीं है अलग करो बीएड
दीदी- तुझसे बड़ी हु हर वक़्त ये ढोस मत दिखाया कर समझा न चुप चाप सो जा
फिर मैंने भी जयादा बहस नहीं की और चुप लाइट बंद कर के अपनी साइड पे लेत गया
अभी थोड़ी देर hi हुई थी की दीदी मेरे पास सरक के आयी
दीदी- नाराज़ है क्या अभी तक
में- क्यों नाराज़ किस लिए आपकी ज़िन्दगी है आप जैसे मर्ज़ी जियो
दीदी- समझ न भाई ये गलत है हमारा रिश्ता इस सब की इज़्ज़ज़त नहीं देता
में- तो यार में कब आप से कह रहा हु की आप कुछ करो
दीदी- ाचा देख किश कर लिया कर बस बाकि और कुछ नई प्ल्ज़ समझा कर न
में- नहीं जी किश की भी जरुरत नहीं है अब आप सो जाओ मुझे भी नींद आ रही है प्ल्ज़ और में नाराज़ नहीं हु आज के बाद इस बारे में कोई बात नहीं होगी
दीदी- युवी समझता क्यों नहीं अगर किसी को पता चला तो कितनी बदनामी होगी
में- क्यों आप बता रे क्या और जब आपका मैं नहीं है तो क्यों बोल रे हो मैंने बोलै क्या
दीदी - क्युकी तेरी बाते मुझे चैन से जीने नहीं दे रही की तू मुझसे प्यार करता है और मेरी वजह से तू उदास रहने लगा है न खाता है न पिता है
में- तो आप भूल जाओ न सब कुछ क्यों याद कर रही
दीदी- ऐसे कैसे भूल जाओ युवी तूने एक आग लगा दी है मेरे अंदर
में- ये आग तो बहुत पहले से जल रही है दीदी बस आप महसूस नहीं करना चाहती या फिर सब कुछ जान कर भी अनजान बन रही हो इस जिस्म की भी कुछ जरूरते होती जिसे आप 8 महीने से नज़र अंदाज़ कर रही हो
दीदी- तो और क्या करती किसी के भी आगे अपनी टाँगे खोल देती और पापा को और तुझे दुनिया के सामने बदनाम कर देती तू hi बता न में क्या करती कैसे कहती की मेरा जिस्म तप रहा है
में- तो अब क्यों कह रही हो अब क्या हो गया
दीदी- क्युकी अब तूने इस जलती आग में प्यार की चीते मार दिए है और ये अब कबूल hi नहीं करना चाहती की में इस आग में और जलु ये ( परिवर्तन ( बदलाव) तू लाया है मेरी ज़िन्दगी में
में- तो छोड़ क्यों नहीं देती ये झूटी ज़िद्द जो तुम्हे जला के रख देगी
दीदी- मुझे सोच ने लिए कुछ वक़्त दे प्ल्ज़
गुड़ नाईट अब सो जा
में- सोच लो जितना सोच न है तुम्हारा जो भी फैसला होगा मुझे मंज़ूर है
दोनों बहिन भाई सो गए एक नए दिन की छह में