Parivartan ( badlaav) - SexBaba
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Parivartan ( badlaav)

hotaks

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Dec 5, 2013
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इंट्रो.

तो दोस्तों पहले तो माफ़ी चाहूंगा की अपना वादा तोड़ के फिर से एक नयी कहानी लेके आया हु पसंद आये तो पढियेगा जरूर शुक्रिया

पिता जी रेलवे में एक अचे पद पे है तो पैसे की कमी थी नहीं इसलिए सोल्लगे पूरा होने के बाद भी में घर पे hi रहता था उम्मीद थी एक अछि नौकरी की जो की आज हर कोई चाहता है

मेरे घर में हम 4 जान है

पिता जी - अशोक

माता जी- सविता

दीदी- सुषमा( मैरिड)

में- युवी ( योगेश)

वैसे तो दीदी की शादी हो चुकी थी पैर कुछ मतभेद के कारन वो पिछले 4 महीनो से हमारे साथ hi रह रही थी

आज पिता जी घर आने वाले थे 3 दिन बाद क्युकी वो रेलवे में मालगाड़ी चलते थे तो ऐसे hi आना होता था उनका पैर आज वो इसलिए भी आ रहे थे क्युकी प्रमोशन के साथ उनका ट्रांसफर भी हुआ था ंप के एक छोटे से गाओ अमिलपुर में क्युकी पता जी की ये लास्ट पोस्टिंग थी तो पिता जी तहा का मकान बेच कर वही बनाना चाहते थे वह अभी नए प्लाट कटे थे तो पिता जी ने वह 150 गजह का प्लाट लिया था जो की स्टेशन से 2 कम दुरी पैर था पैर थोड़ा जंगल टाइप एरिया था वह से सेहर 5कम दूर था पैर आने वाले समय में ये जन्नत होना था पैर एक समस्या थी की अगर हम वह शिफ्ट होते तो दीदी की ससुराल दूर हो जाती

अब हम कैसे शिफ्ट हुए और ऐसा क्या ( परिवर्तन) आया आगे पता चलेगा[/B]
 
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अपडेट-1

जब में घर आया तो देखा माँ दीदी और पिता जी दोनों हॉल में hi बैठे थे और चाय पिटे हुए बात कर रहे थे मुझे देखते hi दीदी उठा कर गयी और मेरे लिए भी चाय ले इस (वक़्त उसने एक टाइट पजामी और फिटिंग का कुरता डाला हुआ था जिस में से उसकी घातिया का उधार साफ़ चालक रहा था जो किसी का भी लुंड कर दे और उसकी वो मस्त मोती गांड उफ्फ्फ)

माँ- वो सब तो ठीक है पैर सुषमा का क्या होगा अगर हम इतनी दूर चले गए तो ये भी तो सोचिये न

दीदी- माँ पापा में उस घर में नहीं रह सकती कमी ( दीदी का पति) सुरेश में है न की मुझ में फिर भी सब मुझे hi सुनते है और उसकी माँ तो वैसे भी उसकी शादी करना चाहती है

पापा- देखो सविता अगले हफ्ते तक घर तैयार हो जायेगा और वह शिफ्ट तो होना hi है क्युकी ये घर भी तो हम बेक चुके है और रही सुषमा की बात तो तुम चिंता मत करो में एक लास्ट इस के ससुर से बात करूँगा अगर वो मने तो ठीक नहीं तो डाइवोर्स ले लेंगे बस

माँ- हां जी ये ठीक है एक बार बात तो करनी पड़ेगी अब आप आराम करो में खाना बनती हु

फिर माँ के साथ दीदी भी चली गयी में अभी भी वही बैठा था तभी पापा बोले

पापा- बीटा युवी सामान के साथ तुमको जाना है अगले ट्यूसडे को अमिलपुर और ध्यान से जाना

में- जी पापा आप चिंता न करे में ध्यान से जाऊंगा

थोड़ी देर यही बात करने के बाद में बाथरूम में चला गया फ्रेश होने यहाँ को जो बाथरूम था वो आत्ताच टॉयलेट भी था और उसपे दरवाज़े की जगह पर्दा hi लगा हुआ था पापा के ट्रांसफर की वजह से हम ने यहाँ ज्यादा पैसा नहीं लगाया था वैसे भी हमे यहाँ ए हुए अभी 6 महीने hi हुए थे तो में पर्दा लगा के नाहा रहा था और अपने 7.इंच के लोडे को हाथ से मसल रहा था जिसकी मोटाई लगभग 2.5 होगी की तभी लाइट चली गयी तो मैंने जल्दी से पानी डाला और हाथो से टॉवल लेने लगा इस वक़्त में बिलकुल नंगा था और मसल ने की वजह लुंड भी पूरा खड़ा था अभी टॉवल मेरे हाथ में आया hi था की लाइट आगयी और सामने मेरी सासि उठाये मूट रही थी उफ़ क्या गांड थी बिलकुल गोरी वैसे तो पहले भी कई बार मैं माँ को नंगा देखा था पैर इतने करीब से पहली बार था और जैसे hi माँ की नज़र मुझ पे पड़ी तो वो एक दम से कड़ी हो गयी और जल्दबाज़ी में बहार जाने लगी तो साबुन की वजह से एक दम पेअर फिसल गया उन्हें गिरता देख जैसे hi में आगे बढ़ा माँ के हाथ में मेरा लुंड आज्ञा पैर तब तक में भी माँ को पकड़ चूका था पैर जैसे hi माँ ने अपने हाथ में मेरा खड़ा लुंड देखा तो खड़े होते hi गुस्से से मुझे छठा मारा और चुप चाप बहार चली गयी और में अभी भी गाल पे हाथ रखे में माँ की गांड के बारे में hi सोच रहा था पहले में ऐसा नहीं पैर एक दिन मैंने सुषमा दीदी को बाथरूम में ऊँगली करते देखा

फ्लैशबैक

दीदी- ऊऊफफफफफ सुरेश मुझे ले जाओ न अपने पास मुझसे ये छूट की खुजली बर्दाश्त नहीं होती आह्हः मा काश तुम मुझे माँ बना पाते तो हम साथ होते उफ्फ्फ

और बहार खड़ा बस यही सोच रहा था की मेरी दीदी क्या मस्त माल है काश में इस की 34 की चूचियों को रगड़ पाटा और 36 की गांड में लुंड दाल पाटा पैर सोच ने के सिवा में कुछ कर नहीं सकता था और उस दिन से ऐसे hi मोके ढूंढ़ता ता रहता और ऐसी वजह से मैंने माँ को भी देखा कई बार पैर देखने के सिवा कभी कुछ न कर सका

फ्लैशबैक एन्ड

फिर थोड़ी देर बाद में बहार आया जहा अभी कोई नहीं था तो सीधा अपने रूम में चला गया जो की दीदी और मेरा कमान रूम था वह जा के कपडे चेंज किये और बीएड पे लेट गया
 
अपडेट-2

लेते लेते न जाने कब आँख लग गयी और खुली दीदी के उठाने से और आँख खुलते hi सीधा नज़र दीदी की चूचियों पे गयी जो झुकने की वजह से बहार आने को बेताब थी उफ्फ्फ क्या मस्त चूचिया थी ऐसे लग रहा था जैसे कह रही हो की आओ और खा जाओ में उन खोया हुआ था की दीदी ने जोर से हिलाया क्या हुआ कहा खो गया ( आपकी चूचियों की गहराई में)

में- कही नहीं ( पैर मेरी नज़र अभी भी वही थी)

दीदी- तो चल खड़ा हो और खाना खा ले ( क्या ये सच में मेरी छाती को घर रहा था नहीं नहीं )

में- आप चलो में अभी आता हु

और फिर खड़ा होक बाथरूम गया और फ्रेश हो के निचे पंहुचा तो वह पिता जी दीदी और माँ सभी दिंनिंग टेबल पे बैठे मेरा इंतज़ार कर रहे थे

पापा- आज बीटा जल्दी तेरा hi इंतज़ार हो रहा है

में- सॉरी पापा लेट हो गया

मेरे सामने माँ थी पैर चेहरे पे कोई भाव नहीं थे फिर सब ने अपनी प्लेट खाना डाला और खाना शुरू हुआ

पापा- सविता आज मोटों बहुत टेस्टी बना है कसम से दिल करता है तुम्हारे हाथ चुम लू

माँ- चुप चाप खाना खाइये बच्चे बैठे है ज़रा तो ख्याल करा कीजिये

पापा- ओह यार ऐसा भी क्या कह दिया खाने की तारीफ़ hi तो की और तुम ऐसे भड़क रही हो पता नई

और चुप चाप खाना खाने लगे मैंने नज़र उठा के देखा तो माँ का ध्यान खाने में था और खाते वक़्त उनकी चूचियों की झलक मिल रही थी हलकी सी और तभी माँ ने मुझे अपनी चूचियों को देखते हुए पकड़ लिया और गुस्से से मुझे देखने लगी तो में चुप चाप निचे मुँह करके खाना खाने लगा और फिर दोबारा मेरी हिम्मत भी नहीं हुई ऐसी तरह खाना फिनिश हुआ और सब उठ के अपने रूम में चले गए और माँ बर्तन लेके किचन में में बहार निकल गया थोड़ा टहल ने के लिए ये मेरा रोज़ का था खाना खाने के बाद घूम कर आता था जब में वापस आया तो गेट माँ ने खोला उन्हें देख के में चुप चाप जाने लगा तो माँ बोली

माँ- रुक कुछ बात करनी है

में चुप चाप खड़ा हो गया

माँ- तुझे शर्म नहीं आयी ऐसा करते हुए

में फिर भी चुप था

माँ- बोल न अब क्या साप सुंग गया तुझे जो आवाज़ भी नहीं निकल रही है

में- माँ में तो पहले से नाहा रहा था तभी लाइट चली गयी इस में मेरी क्या गलती मुझे तो पता भी नहीं था की आप आयी हो

माँ- तो तू घूम भी तो सकता था दूसरी तरफ घर कर देख क्यों रहा था

में- वो वो माँ एक दम से सब हो गया कुछ समझ में नई आया और तभी आपको गिरने से बचने के चक्कर में वो सब हो गया ी ऍम सॉरी चाहो तो और मार लो माँ

माँ- चल वो सब तो अनजाने हुआ और जो तू अभी खाना कहते वक़्त घर कर देख रहा था उसका क्या

में- सॉरी माँ आगे से नहीं होगा

माँ- ठीक है जा सो जा( ऊऊफफफ हे राम क्या ज़माना आज्ञा बच्चे माँ को hi ऐसे देखते है और उसका वो भी तो कितना मोटा और लम्बा था) छी छी ये क्या सोच ने लगी में

और फिर में अपने रूम में गया तो दीदी बिकिनी में कड़ी थी और मुझे देखते hi चिल्लाई बहार जा ोूर में बहार आज्ञा पता नई आज मेरे साथ क्या हो रहा है थोड़ी देर बाद दीदी की आवाज़ आयी

दीदी- आजा अंदर

इस वक़्त दीदी ने एक टी- शर्ट और काप्रि निक्कर पहन रखा था जिस में उसकी मसल जंघे दूध सी सफ़ेद साफ़ दिख रही थी और गांड तो जैसे केप्री पहाड़ के बहार आने को तैयार थी फिर में चुप चाप अपने बीएड पे गया और लेट गया( हमारे रूम में तो सिंगल बेड्स है) और आज के बारे में सोचने लगा

दीदी- नॉक करके नहीं आ सकता था तू

में- दरवाज़ा खुला था और मुझे क्या पता था की आप अंदर नंगी कड़ी हो दरवाज़ा आपको बंद करना चाहिए था न

दीदी- शट उप क्या भासा है ये और मैंने उन्देर्गर्मेन्ट्स पहने थे और मुझे ध्यान नहीं रहा था की गेट खुला है पता नई कब तक रूम शेयर करना पड़ेगा

में- टेंशन मत लो 1 वीक की hi बात है नए घर में सब के अपने अपने रूम है फिर जैसे मर्ज़ी रहना ( और खूब ऊँगली करना अपनी छूट में)

दीदी- हां पता है मुझे जयादा ज्ञान मत दे अब सो जा

में- ( तुम्हे तो लुंड दे दू मेरा बस चले तो) ok ok गुड नाईट और लाइट ऑफ करके लेत गया

पैर नींद तो आज कोसो दूर थी आँखों से और पता भी नई चला कब 1 घंटा बीत गया अब प्यास लगी थी लाइट जला कर देखा तो आज माँ के छककर में फ्रिज से पानी लाना भूल गया था तो उठा और निचे चल दिया जैसे hi माँ के कमरे के पास पंहुचा तो आवाज़े आरही थी

आअह्ह्ह सविता तेरी तो चूचिया दिन बा दिन और मस्त होती जा रही है उउउउउम्मम्म आह्हः काटो मात्त ना आरामम से ऊऊफफफफ थोड़ा तेज़्ज़ तेज़्ज़ करो नाआ आअह्ह्ह सवितता मेरा होने वाला है नाही अभी नहीं अशोक प्लललज़्ज़ज़ मुझे भी तो ठंडा करो आअह्ह्ह सविता बस आठ में गययययआआ बुसस यही करते हो आज कल आप एक तो कभी कभी मूड में आते हो और फिर जल्दी झाड़ जाते हो

पापा- तो क्या कृ यार थक जाता हु उम्र भी तो होती जा रही है

माँ- और मेरा क्या जो में प्यासी रह जाती हु उसका क्या

पापा- नए घर में अचे से करूँगा कुछ दिन छुट्टी लेके

माँ- पता नई कितने अचे से करोगे

और फिर आवाज़ बंद हो गयी तो में किचन में चला गया और पानी पिने लगा पानी पि के जैसे hi जाने लगा माँ से टकरा गया और हम दोनों hi गिर गए और नज़ारा कुछ यु था की माँ अपने दोनों पेअर फैलाये पड़ी और उनकी छूट की दोनों फाके खुली हुई थी में तो कभी उनकी छूट और कभी उनकी चुकी देख रहा था तभी वो कड़ी होने लगी तो एक दर्द भरी आह्हः निकली उनको दर्द में देख के में सब भूल गया और जल्दी से खड़ा हो के उन्हें खड़ा किया और इस क्रिया मेरा एक हाथ कमर से घूम के उनकी लेफ्ट चुकी पे पड़ा और दूसरा हाथ उनकी मस्त मुलायम गदराई हुई गांड पे जैसे hi मेरा हाथ उनके नंगे जिस्म पे पड़ा तब शायद उन्हें अपनी सिटिहटी का अब्बास हुआ और एक दम घूम के छाजटाएकककक से करारा छठा मेरे गाल पे जड़ दिया ये करके जैसे hi मेरा सहारा छूटा वो फिर से गिरने को हुई तो मैंने फिर से पकड़ लिया और सहारा देके उनके कमरे तक लेके गया अंदर देखा तो पिता जी सो चुके थे तो में उन्हें धीरे 2 अंदर लेके गया और बीएड लिटा के चादर ुधा दी उनकी आंखे बंद थी फिर चुप चाप किचन में आया और पानी की बोतल और गिलास लिया और दोबारा से उनके रूम में गया और उन्हें पानी दिया उन्होंने चुप चाप पानी पिया और आँखे बंद करके लेत गयी तो मैंने उनके रूम की लाइट ऑफ की और धीरे से गेट लगा के जाने लगा गेट तक hi पंहुचा था की माँ की आवाज़ आयी

माँ- ी म सरररयययय

में- इतस ok गुड नाईट

और चुप चाप अपने कमरे में आके सोऊ gyaaaaaaaaaaaa
 
अपडेट-3

सुबह दीदी के उठाने से आँख खुली और उठ कर फ्रेश हुआ और निचे हॉल में आ के बैठ गया मेरे आते hi दीदी चाय और नास्ता ले आयी माँ अभी तक नज़र नहीं आयी थी तो मैंने भी ज्यादा ध्यान न देते हुए नास्ता ख़तम किया और टीवी देखने लगा थोड़ी देर बाद पापा भी हॉल में hi आगये और दीदी भी फिर पापा बोले

पापा- देखो युवी बीटा मैंने सुसमा की ससुराल में बात की पैर वो नहीं मान रहे और चाहते है की शांति से डाइवोर्स हो जाये

में- पैर पापा जो दीदी के साथ उन्होंने किया उसका क्या और जो हम ने दहेज़ दिया था वो सब

पापा- बीटा सब बात हो गयी है वो 5 लाख दे देंगे और फिर जब वो लड़का भी सुषमा के साथ रहना नहीं चाहता तो क्या जबरदस्ती करे

दीदी- मुझे भी नहीं रहना पापा बस आप जाने से पहले सब करवा दो

पापा- बीटा उन्हें तुमसे ज्यादा जल्दी सुरेश आएगा डाइवोर्स पेपर्स लेके सिग्न कर देना ok और मुझे दोपहर में निकल न है तो युवी सब का ध्यान रखना

युवी- जी पापा आप बेफिक्र रहे में हु यहाँ

फिर पापा अपने रूम में चले गए और हम दोनों टीवी देखने लगे जिसपे दयावान मूवी चल रही थी और फिर माधुरी का वो हॉट सन आया जिसे दीदी बड़े गौर से देख रही पैर जैसे hi उनकी नज़र मुझ पे पड़ी तो चैनल चेंज कर दिया और अपने आप को सही करके बैठ गयी उसके बाद कुछ ख़ास नहीं हुआ पापा दोपहर को जा चुके थे और में अपने कमरे लेता हुआ था शाम का वक़्त की मुझे निचे से कुछ आवाज़ आयी तो में उठ के निच्चे आया तो देखा सुरेश आया था पेपर लेके सिग्न करने और दीदी के साथ बहस के रहा था

सुरेश- अब सड़ना साडी ज़िन्दगी अपने माँ बाप के पास hi माँ तो तू बन्न नहीं सकती अब कोण करेगा तुझ जैसे बाँझ से शादी

दीदी- वो तो तुम भी जानते हो की कमी किस में तुम्हारे स्पर्म काउंट काम है सुरेश और मुझे बाँझ कह रहे हो जल्द hi सब को पता चल जायेगा की तुम क्या हो घिन आती है मुझे की मैं तुमसे प्यार करने लगी थी ये पकड़ो अपनी फाइल और निकल जाओ अपनी ये गन्दी शक्ल लेके और दोबारा कभी सामने आये तो चप्पल से मरूंगी

सुरेश- साली कुटिया तेरी इतनी हिम्मत तुझे तो अभी बताता

बस इतना hi कह पाए था की चत्ताकक 2 तीन थप्पड़ पड़े उसके गाल पे और

में- भाग जा यहाँ वर्ण जान से मार दूंगा साले तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी दीदी को गलत बोलने की साले अपनी शकल देख कही से भी दीदी के लायक नहीं है तू में तो तब्ब भी खिलाफ था इस शादी के अब एक मं और रुका न तो गांड फाड़ दूंगा तेरी

और फिर एक लात मारी और पकड़ के घर से बहार फैक दिया

सुरेश- हाथ उठा के ठीक नई किया तुम ने में इसका बदला जरूर लूंगा

में- चला जा साले वार्ना और मरूंगा फिर तू अपने पाँव पे चलके नई जाएगा और गेट बंद कर दिया

दीदी अपने रूम में जा चुकी थी तो में भी ऊपर रूम गया तो देखा दीदी रो रही थी तो में उसके पास जा के उसे चुप कराया तो वो मेरे गले से लग गयी और जोर से रोने लगी

में- यार अब उस आदमी के लिए क्यों रो रही हो तुम ऐसे बिलकुल भी अछि नहीं लगती प्ल्ज़ रोना बंद करो

दीदी- युवी अगर तू न आता तो वो मुझ पे हाथ उठा देता

युवी- ऐसे हाथ उठा देता उसके हाथ तोड़ देता एक तो साले को इतनी सूंदर और हॉट लड़की मिली थी उसकी भी कदर नहीं की गयी साले से

मेरे से हॉट सुनके दीदी ने मेरी तरफ गौर से देखा

में- मतलब की सूंदर और प्यारी से था

दीदी- सूंदर होती तो वो मुझे छोड़ता

में- उसे क्या पता हीरे की कदर आपको नहीं पता आप कितनी सूंदर हो खास आप मेरी दीदी न होती तो.....

दीदी- तो क्या ( अब दीदी बिलकुल नार्मल थी पैर अभी भी मेरे गले लगी हुई थी) बोल न

में-( उनके चेहरे को अपने दोनों हाथो में ले लिया) तो में आप से शादी कर लेता और सारा दिन आप से प्यार करता

कमरे में एक दम शांति च गयी थी हम दोनों में से कोई नहीं बोल रहा था बस एक दूसरे को देखे जा रहे न जाने कब हमारे होठ एक दूसरे से मिल गए उफ्फ्फ क्या नरम होठ थे ऐसे लग रहा था की मुँह में hi घुल जायेंगे हम दोनों मस्ती में एक दूसरे के होठ चूस रहे थे और निचे मेरा लुंड भी खड़ा हो के दीदी की छूट पे दस्तक दे रहा था और इसी माधोसी मेरे एक हाथ ने दीदी की वो मोती सी चुकी को अपने पंजे में दबोच लिया और इसका एहसास होते hi दीदी एक झटके में अलग हो गयी दूसरी तरफ मुँह करके कड़ी हो गयी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये सब कैसे हो गया पैर अंदर hi अंदर एक खुसी भी थी पर कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी तो में निचे उतर के बहार चला गया
 
अपडेट-4

में जान कर घर देर से गया दरवाज़ा दीदी ने hi खोला और दरवाज़ा खोल के साइड हो गयी तो में भी बिना कुछ बोले अंदर दाखिल हुआ माँ सोफे पे बैठी टीवी देख रही थी मुझे देखते hi बोली

माँ- कहा गया था तुझे पता है न पापा भी नहीं है घर पैर

में- वो बस बहार टहल रहा था तो वक़्त का पता नहीं चला अब आपकी तबियत कैसी है( मेरे तबियत के बारे में पूछते hi माँ को रात की घटना याद आगयी और उन्होंने नज़र घूम ली

माँ- अब ठीक हु और ( फिर दीदी को देख के चुप हो गयी और दीदी को बोली) सुसमा तू खाना बना ले

दीदी- ठीक है माँ

दीदी ये बोल के चली गयी तो में ऊपर जाने लगा अभी सीधी चढ़ा hi था की माँ की आवाज़ आयी

माँ- युवी इधर आ मेरे पास बैठ कुछ बात करनी है

में- जी बोलिये ( और उनके पास hi सोफे पे बैठ जिस उनकी और मेरी जाँघे मिल रही थी )

मुझे तो ये महसूस होते hi माँ नंगी नज़र आने लगी रात की तरह पैर में कण्ट्रोल किये बैठा रहा

माँ- वो रात की लिए सॉरी मैंने बिना तेरी गलती के मर दिया था

में- कोई बात नहीं माँ में भी तो आपका hi हु

माँ- मेरा राजा बीटा कितनी परवाह करता है अपनी माँ की मेरे मार ने के बाद भी मुझे कमरे तक छोड़ के आया

में- बस आप ऐसे hi खुश रहा करो हस्ते हुए आप और भी सूंदर लगती हो

माँ- ाचा जी तो तुझे माँ सूंदर लगती है पैर अब तो तेरी माँ बुद्धि हो गयी

में- कहा माँ रात को नहीं देखा आप ने बिना ब्रा के भी आपकी चुकी एक दम टाइट थी ( जोश में बोल तो गया पैर अब क्या कर सकते थे तीर कमान से निकल चूका था)

माँ- बेशरम यानि तू अपनी माँ को गन्दी नज़रो से देख रहा था मैं तो करता है एक लागू तेरे गाल पैर

में- सॉरी माँ वो गलती से निकल गया मुँह से मेरा वो मतलब नहीं था

माँ- गलती से नहीं सच निकला है तभी तो रात को घर कर देख रहा था और हाथ भी लगाया था

में- ऐसा कुछ नहीं है माँ में सिर्फ आपको सहारा दे रहा था

माँ- झूट सहारे के नाम पे तू अपनी हवस पूरी कर रहा था देखने की और चुने की

में-( गुस्सा बहुत आ रहा था) ये सच नहीं है माँ और देखना उसे कहते जो आप ने उस दिन बाथरूम में देखा था मेरे उस को की आप ये भी भूल गयी थी की आप कहा हो और किस हालात में हो

माँ- चातकककक बेशरम अपनी माँ से ऐसी बाते करता है

में- सॉरी चाहे तो और मार लो पैर जो बोलै वो सच hi बोलै नहीं तो खाओ मेरी कसम की आप मेरा नहीं देख रही थी

माँ- मुझे नहीं कहानी कोई कसम समझा न और अगर फिर तू ने ऐसी कोई हरकत की तो इस बार तेरे पापा तुझसे बात करेंगे

में- मुझे जवाब मिल गया माँ आप चाहो तो घर से निकाल दो या पापा को बता दो पैर मैंने कुछ भी जान कर नहीं किया और में भी अब जवान हु और सामने आप जैसी औरत वो भी नंगी हो तो देखे बिना कोई कैसे रह सकता है और कल रात भी में तो नहीं आया था न आपको देखने क्या आपको नहीं पता की घर में बच्चे भी है जो आप नंगी hi कमरे से निकल कर घूम रही थी बोलिये न

माँ- हां कल रात मेरी गलती थी पैर हु तो तेरी माँ hi ना तुझे तो ऐसे नहीं देखना चाहिए था ( मेरा गुस्सा देख माँ भी नरमी से hi बोली)

में- तो ये बात तो आप पे भी लागु होती है आपको भी नहीं देखना चाहिए था न मुझे आपको ख्याल नहीं आया की जिसे आप देख रही है वो आपका अपना बीटा है थॉट्स नॉट फारे माँ गलत आप भी तो हो और सच पूछो तो जिस्म की आग किसी रिश्ते हो को नहीं मानती उस वक़्त आपको आपकी प्यास ने मजबूर किया देखने के लिए और मुझे मेरी प्यास ने

माँ- ठीक है सॉरी जो हुआ भूल जा और अब से ध्यान रखना

में- ध्यान रखूँगा माँ पैर जो परिवर्तन( बदलाव) आपको देख आया है उसका क्या करूँगा

और ये बोल के में खड़ा हुआ और अपने रूम में आ के बीएड पे लेत गया
 
अपडेट-5

रूम में आके चुप चाप बीएड पे लेत गया अभी आँख लगी hi थी की दीदी आयी

दीदी- युवी चल खाना खा ले

में- मुझे भूक नहीं है आप लोग खा लो

दीदी- क्यों भूक नहीं है जयादा नाटक मत कर और चल खड़ा हो जल्दी से मुझे भूक लगी है बहुत तेज़ तू नहीं खायेगा तो में भी नहीं खाने वाली सोच ले

में- ाचा बाबा चलो ( और मैं मर के निचे आया और खाना खाने लगा)

खाना कहते वक़्त माँ देखा तो उनका फेस उदास था शयद कुछ सोच रही थी पैर मैंने जयादा ध्यान न दिया और चुप खाना फिनिश करके अपने रूम में चला गया और कपडे चेंज करके बीएड पे लेत गया मेरा एक होठ मोड़ के मेरी आँखों पे था और में आज जो माँ से बात हुई उसके बारे में सोच रहा था की कैसे मैंने माँ से इतना कुछ बोल दिया करीब 1/2 घंटे बाद दीदी रूम में आयी और मुझे आवाज़ देने लगी पैर में इस वक़्त बात नहीं करना चाहता था तो चुप hi रहा तो दीदी मेरे पास आयी और हाथ हटा दिया

दीदी- मुझे पता है तू सोया नहीं है दोपहर वाली बात की वजह से अपसेट है न( उनको लग रहा था में किश वाली बात से टेंशन में हु)

में- क्यों दिन में ऐसा क्या हुआ जो अपसेट हो जाऊ

दीदी- वो हम दोनों से जो गलती में किश हुआ

में- तो वो तो मजे की बात है न की इतनी सूंदर लड़की की किश मिली उफ़ क्या टास्ते था खास में आपका पति होता तो रोज़ आपको किश करता

दीदी- कितना कमीना है तू अपनी दीदी के बारे में ऐसा सोचता है में तो सोच रही थी की तू गिलटी फील कर रहा है इसलिए उदास है

में- वो उदास तो में इसलिए हु की अब दोबारा चांस नई मिलेगा इतनी हॉट लड़की को किश करने का

दीदी- युवी शट उप हम भाई बहिन बाबू वो तो अट्रैक्शन में हो गया सब अब भूल जा

में- हाय कैसे भूल जाऊ कितनी सॉफ्ट सी चीज़ हाथो में आयी थी ( मुझे पता था की दीदी का भी मैं करता है 4/5 महीनो से चूड़ी जो नहीं थी) न जाने अब कब नसीब होगा ऐसा एहसास

दीदी- चल उठ बहार जा मुझे कपडे चेंज करने है कमीने

में- तो कर लो न वैसे भी उंडेर्गारमेंट में तो आप को देख hi चूका हु या फिर पहने hi नहीं है

दीदी- रुक तुझे में बताती हु ( और मार ने के लिए मेरी और लपकी पैर जब तक वो मरती में बहार भाग गया )

थोड़ी देर इंतज़ार कर के में अंदर आया तो दीदी कपडे चेंज कर चुकी थी और इस वक़्त उन्होंने एक नाईट गाउन पहन रखा और शयद ब्रा उतार दी थी क्युकी उनकी चूचिया हिल रही थी फिर वो अपने बीएड पे लेत गयी

दीदी- चल अब जा अपने बीएड पे और लाइट बंद कर मुझे नींद आ रही है

में- दीदी क्यों न हम बीएड आपस में मिला ले फिर एक दूसरे के नज़दीक भी रहेंगे

दीदी- जी नहीं बिलकुल भी नहीं( करीब रहा तो पता नई क्या करेंगे और वैसे भी इस के करीब जाते hi पता नई मुझे कटा होने लगता है) नाहठियई न

में- तो ठीक है चिल्ला क्यों रही हो वैसे एक बात बोलो अगर आप गुस्सा न करो

दीदी- बोल क्या बात है

में- एक बार किश करे प्ल्ज़

दीदी- नहीं युवी तो मेरा छोटा भाई में ये सब तेरे साथ नहीं कर सकती( वर्ण में बहक जाऊँगी)

में- तो क्या आप हुआ आप मुझे भाई समझ के hi किश कर ने दो इतना तो आप मेरे लिए कर hi सकते हो( मुझे पता एक बार कर चुकी है बस टाइम लगेगा पैर मान जाएगी)

दीदी- तू और कुछ बोल वो में कर दूंगी तेरे लिए

में-( कुछ सोच कर) ठीक है तो एक बार आप पास लेत जाऊ गले लग कर

दीदी- पैर कोई हरकत नहीं करेगा

में- पक्का प्रॉमिस

दीदी- आजा

मैंने लाइट बंद की और लैंप ों करके दीदी के पास चला गया और उनकी तरफ करवट लेके एक हाथ उनकी कमर पे दाल दिया

दीदी-( अह्ह्ह) तूने प्रॉमिस किया है

में- हां तो गले लगाने की परमिशन तो आप ने hi दी थी न ( और उन्हें अपने से चिपका लिया)

दीदी- अब तो खुस है

में- हां बहुत खुश वैसे एक बात पुछु

दीदी- हम्म पूछ

में- आपको गुस्सा नई आया जब में सुरेश को मार रहा था

दीदी- गुस्सा क्यों आना था मेरे लिए hi तो मारा तूने उसे पैर तुझे इतना गुस्सा होते हुए पहले तो कभी नई देखा

( इस वक़्त हम दोनों आपस में वछिपके हुए थे और धीरे 2 मेरा लुंड भी खड़ा होने लगा था जो की शायद दीदी की जांघो से टच हो रहा था)

में- आपको कोई भी कुछ कहता है तो मुझसे बर्दश्त नहीं होता और उस पे तो मुझे 2 साल से गुस्सा था उसी की वजह से तो आप मुझसे दूर रही मेरा बस चले तो जान से मार दू

दीदी- ाचा जी इतना प्यार करता है अपनी दीदी को

में- इतना प्यार करता हु की सब्दो में बया नहीं कर सकता में

दीदी- पैर बाबू ये अछि बात नहीं किसी को इतना प्यार नहीं करना चाहिए क्युकी बाद में तकलीफ होती है

में- में तो करूँगा और बहुत प्यार करूँगा तकलीफ मुझे होगी न में सेह लूंगा और वैसे भी अब तो आप मेरे पास hi रहोगी

दीदी- हां पैर फिर भी युवी तेरी शादी भी तो होगी( आठ)

ये आह इसलिए निकली क्युकी मैंने अपना एक पेअर जैसे hi मोड़ा वो सीधा दीदी की छूट पे तोच हुआ

में- मुझे नहीं करनी शादी मुझे बस आपके पास रहना है

दीदी- पागल है तू एक दम ाचा चल अब सो जा बहुत देर हो गयी

में- आपके पास hi सो जाता हु न

दीदी- नहीं अपने बीएड पे जाओ जल्दी से

निचे मेरा काम चालू था धीरे दीदी की छूट को पेअर से मसल रहा था जिसका असर ये था की दीदी की साँसे तेज़ हो चली थी और आँखों में भी वासना के डोरे साफ़ देखे जा सकते थे इसलिए वो मुझे सोने को कह रही थी

में- ok बाबा जाता हु पैर क्या मुझे मेरे प्यार के बदले एक किश भी बही मिल सकती

दीदी- समझ न मेरी मज़बूरी में च कर भी ये नहीं कर सकती

में- समझ गया दीदी वो जो आपको बिलकुल प्यार नहीं करता था उसने जो चाहे वो किया होगा पैर मेरे प्यार की कोई कदर नहीं आपको( उदास होते हुए) गुड नाईट

दीदी- आह तू नहीं मानेगा न पैर सिर्फ एक किश और वो भी लास्ट

इस पहले की दीदी कुछ और कहती मैंने फ़ौरन उनके होठो को अपने होठो में ले लिया और अपने पेअर को जोर से उनकी छूट पे दबा दिया दीदी ने पंतय नहीं पहनी क्युकी उनकी छूट मुझे महसूस हुई गीली सी

दीदी भी अब पुर जोश में मेरे किश का साथ दे रही थी ऊफ्फ होठ क्या थे जैसे माखन जो मुँह में घुल रहे थे दीदी की आँखे बंद थी और मेरा एक हाथ उनकी चूचियों को मसल ने लगा था सायद दीदी पूरी तरह गरम हो छुकि थी तो मैंने भी थोड़ा आगे भड़ते हुए एक हाथ से उनकी निघ्त्य को धीरे 2 ऊपर करने लगा जब उनकी निघ्त्य जांघो तक आगयी तो फैट से हाथ उनकी नाईट में दाल दिया और हाथ में आयी गरम गरम गीली छूट और हाथ पड़ते hi दीदी का जिस्म अकड़ ने लगा पैर तब तक मेरी ऊँगली उस स्वर्ग के द्वार प्रवेश कर चुकी थी और जैसे hi मेरी ऊँगली अंदर गयी दीदी आँखे खुल गयी और वो तेज़ तेज़ साँसे लेने लगी पैर ावहि तक मेरा हाथ नहीं हटाया था उनकी छूट से बेहटा रास मेरे पुरे हाथ को भिगो चूका था

फिर एक दम से दीदी ने मेरी तरफ देखा और मेरा हाथ निकल दिया

दीदी- युवी प्ल्ज़ जा भाई अपने बीएड पे ये ठीक नहीं हुआ

मैंने उनके सामने उनकी छूट रास चाट के साफ़ किया अपने हाथ से

में- मुझे कोई बुराई नहीं दिखती दीदी में प्यार करता हु तुमसे और अगर तुम्हे बुरा लगा है तो बोल दो में कभी तुम्हे हाथ नहीं लगाऊंगा कह दो तुम्हे सकूं नहीं मिला

दीदी- सब सच है युवी पैर सबसे बड़ा सच ये है की में तेरी बड़ी बहिन हु और समाज इसकी इज़ाज़त कभी नहीं देगा अब तू जा मुझे सोने दे प्ल्ज़ में तेरे हाथ जोड़ती हु

में- ठीक है दीदी आज के बाद में तुम्हारे पास कभी नहीं आऊंगा पैर क्या ये समाज तुम्हे खुसी देने आएगा नहीं कभी नहीं में तुमसे प्यार करता हु और करता रहूँगा और देख लेना तुम खुद मेरे पास आओगी ये बोल के में अपने बिस्टेर पे लेत गया और न जाने कब नींद आयी
 
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