Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala - Page 4 - SexBaba
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Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala

अपडेट 28: राजू के मजे..

रात को राजू जब ठाकुर और उसकी हरकतों के बारे में सोच रहा होता है तो दरवाज़े पर धीरे से दस्तक होता है..

राजू: कौन है?

औरत – क्या मैं अंदर आ सकती हूँ? (धीरे se…aur उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है).

राजू वह औरत को देख कर ठाकुर के बारे में भूल जाता है और लार टपकने लगता hai…kyun की दरवाज़े पर और कोई नहीं बल्कि ारु आयी हुई थी और हु एक ट्रांसपेरेंट मैक्सी में बहुत hi सुपर सेक्सी लग रही थी…
 
अपडेट 29: राजू के maje..contd..(Mala का इनाम, इंतज़ार ख़तम हुआ..)

अगली सुबह…

अगली सुबह सब फ्रेश हो कर रत्न किचन में चाय बना रही होती है..

राजू चुपके से उसके पीछा आकर उसको बाहों में भर के उसके गले में किश करते हुए उसकी चुकी दबा देता है..
 
अपडेट 30: एक आम दिन..

खेत की झोपडी में:

दोनों की ज़बरदस्त चुदाई के बाद दोनों पास में एक सूखे जगह पर लेट जाते है और माला राजू की बाहों में होती है.

राजू: मज़ा आया क्या? प्यास बुझ गयी तुम्हारी?

माला: मज़ा तो बहुत aaya…lekin अभी प्यास कहाँ बुझी है? प्यास तो और भड़क गयी है..

राजू: चिंता मत karo..samay आने do..tumhaari प्यास बुझा doonga..ab से तुम्हारे तड़पने के दिन दूर हो गए है.

माला: कुछ सोचते hue..ek और है जिसकी प्यास दिन बी दिन बढ़ती जा रही है..

राजू माला की तरफ देखता है..

माला: मैं काम्य की बात कर रही hoon…uska भी कुछ करो ना..

राजू: देखता hoon..jaldi hi कुछ करने की कोशिश करता हूँ.

राजू: accha..mujhe यह bataao..ki तुमको क्यों लगा की तुम्हे मुझे मदत करनी chahiye..woh भी अपने भाई के खिलाफ..

माला: वह बहुत लम्बी कहानी hai…khair…main इतना hi कहूँगी की भाई बचपन से hi हरामी और निकम्मा nikla…pata नहीं कैसे हमारे परिवार में पैदा हो गया..

लेकिन हु हमेशा लालची, पैसों का भूका और लोगों को तकलीफ dena…yehi उसका काम है. बचपन से hi वह गलत सांगत में पद गया और उसे कोई ठीक करने वाला भी नहीं th..aur वह बुरे काम करता चला गया और अब यह हाल में है जहाँ वह सिर्फ बुरे काम hi करता hai....Aur साथ में उसका भांजा भी उसे इस काम में साथ देता है..

राजू: अच्छा हुआ तुमने उसका ज़िक्र kiya..uske बारे में भी कुछ bataao..jab मैंने उसे उस खण्डार में देखा tha…to मुझे भी लगा की यह बहुत कमीना hai..aur मुझे उससे थोड़ा संभल कर रहना पड़ेगा..

माला: पता नहीं kaise…lekin हु भी अपने चाचा (ठाकुर) के क़दमों पे चल पड़ा hai..upar से हु बहुत नशा भी करता hai..aur किसी पे कोई दया नहीं dikhaata..zaalim है वह बहुत..

माला: भगवान् का dekho..kaise हमारा परिवार बनाया hai..jahan मर्द एकदम हरामी और नीच किस्म के लोग hai..wahi इस परिवार की औरतें एकदम दिल की अच्छी, साफ़ और लोगों का ख़याल करने वाले लोग hai…aur धीरे से राजू के कान में.. और बहुत चुड़क्कड़ भी..

राजू: वह तो मैं देख hi रहा hoon…aur ऐसा कहते हुए हु माला की चुकी ज़ोर से दबा देता है और उसके होंठ चूम लेता है..

राजू: तुम्हारा उन लोगों से साथ सम्बन्ध कैसे है? मिलना जुलना होता है क्या?

माला: सम्बन्ध तो ठीक hai…..pehle काफी अच्छे the..lekin जब से अजय की शादी हुई है और वह नशा करने लगा hai..tab से सम्बन्ध ठीक नहीं hai..lekin फिर भी बीच बीच में बात होती रहती hai..kusum के saath..jahan तक मैं जानती hoon…kusum भी अजय से खुश नहीं hai..yaa फिर कहे की वह उसे बहुत परेशान करता hai..main सोच रही हूँ की एक बार अजय, कुसुम और कुसुम की माँ से मिल aaaon..aur उनको भी थोड़ी सतर्क रहने को बोल दूँ..

राजू: haan..yeh अच्छी बात है Mala..tumhaara उनसे मिलना भी हो jaayega..aur वहां कुछ ज़रूरी बात पता चल जाए तो मुझे भी बता देना..

राजू: अरे haan..tumne जो मुझे फ़ोन दिया tha..mere पास hai..le लो..

माला: नहीं raju..apne पास hi rakho..pata नहीं कब ज़रुरत पद जाए..

राजू ठीक है कह कर रख लेता है..

राजू: chalo..bahut देर हो गया hai..aur देरी होगा तो दोनों को मुसीबत हो सकता है

माला: ठीक कह रहे हो Raju..main भी निकलती हूँ..1-2 दिन में मैं भी गाँव जा कर अजय और उसके परिवार से मिलती hoon..to शायद कुछ दिनों के लिए मुलाक़ात ना हो..

और ऐसे कहते हुए माला राजू को हसरत भरी निगाहों से देखती है और दोनों के होंठ फिर से मिल जाते है और दोनों 5 मं के लिए गहरे चुम्बन में खो जाते है..

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राजू किश तोड़ के माला की गांड दबा देता है और एक ऊँगली साडी के ऊपर से hi गांड के छेद में घुसा के माला के कान mein..yeh कब दे रही हो?

तुम्हारी गांड तो एकदम जानलेवा है..

माला: वह भी doongi..thoda सबर karo…sabar का फल मीठा होता hai..aur राजू को आँख मार देती hai..waise वह अब तक कुंवारी hi है..

राजू का लुंड भी यह बात सुन कर्तन के खड़ा हो जाता hai…lekin अपने आपको एडजस्ट कर लेता hai..aur कहता hai..phir तो तुम्हे भी बहुत मज़ा आएगा…

माला जब निकलने को होती है तो राजू उसको फिर से अपने बाहों में lekar..suno…Kaamya से भी कहना की वह तैयार rahe..(in सब बातों से राजू को भी थोड़ा ठरक चढ़ जाता hai)..aur साफ़ रहे..

माला: वह तो हमेशा से hi साफ़ रहती hai..aur उसकी छूट देखोगे तो एकदम कायल हो jaaoge..aur एकदम मीठी भी hai…maine उसे चका है..

राजू: फिर तो दोनों की एक साथ लेना padega..aur है देता है.

माला राजू से फिर अलग हो कर अपनी गांड मटकाते हुए वहां से निकल जाती है और राजू भी वहां से चुपके से निकल जाता है.

राजू के घर:

राजू खेत से निकल कर अपने घर चला जाता hai…jab हु घर पर जा रहा होता है तो उसकी नज़र 2 लोगों पे पड़ती है जो उसके घर के पास the..lekin उन्हें कभी पहले नहीं देखा था..

फिलहाल उनको अनदेखा कर के घर के अंदर चला जाता है …घर पे सभी लोग रहते hai…phir राजू सब के साथ चाय पीटा hai..aur देखता है की संध्या चुपके से उसे देख रही है और शर्मा भी रही है..

रत्न की नज़र दोनों पे पड़ती है और माजरा क्या hai..yeh समझने में देर नहीं लगती और उसके चेहरे पे एक मुस्कान सी आ जाती है.

राजू: संध्या se..maaji..kya हाल है? आपकी बहिन कैसी है?

संध्या: सब ठीक है beta…meri बहिन भी अच्छी hai..aur तुमको भी बहुत याद करती hai…keh रही थी की तुम मेरे साथ जब उसके घर आये तो उसे बहुत अच्छा लगा..

राजू मन में: अच्छा तो लग्न hi tha..jam के चूड़ी मुझसे…

चाय पीने के बाद राजू अपने कमरे में चला जाता है और जाते जाते (बिना किसी के देखे) आँखों से संध्या को इशारा करता है..

संध्या भी समझ जाती है और जब बाकी सब अपने काम में लग जाते है तो संध्या भी धीरे से राजू के कमरे में चली जाती hai..jahan राजू पहले से hi उसका इंतज़ार कर रहा था..

संध्या जब कमरे में जाती है तो राजू वहां दिखाई नहीं deta..lekin राजू चुपके से उसके पीछे आकर दरवाज़ा बंद कर के संध्या को पकड़ लेता है और उसकी चुकी ज़ोर से दबा देता hai..aur उसके गले को चूमता है..

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संध्या भी हलकी सी सिसकी लेती hai..aahhh..aur राजू की तरफ देखती है तो राजू अपने होंठ उस से मिला लेता है और दोनों बिना कुछ कहे एक गहरा किश से जुड़ जाते है..

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किश तोड़ने के बाद राजू संध्या को अपनी तरफ घुमा लेता hai…aur उसकी चुकी फिर से दबाते hue…kyun..meri याद नहीं आयी kya..jo आप इतने दिनों बाद आयी हो..

संध्या: याद तो बहुत आयी थी राजू लेकिन दीदी ने आने नहीं दिया..

राजू: संध्या का हाथ पकड़ कर उसके लुंड पे रख kar..meri या मेरे लुंड की याद..

संध्या: दोनों की याद आती है राजू और ऐसा कहते हुए वह भी राजू का हाथ पकड़ कर अपने साडी के ऊपर से छूट पे रख kar…dekh lo..kitni गीली हुई है और तुम्हारे लिए आंसू बहा रही है..

राजू भी थोड़ा शरारती करते hue..apna (सूखा) हाथ संध्या को दिखाते hue..kahan गीला हुआ है..

संध्या भी कामुक मुस्कान के saath..tu नहीं jaanta..to यह dekh..aur ऐसा कहते हुए फिर से राजू का हाथ लेकर इस बार अपने साडी के अंदर घुसा देती है..

राजू भी संध्या की पंतय के ऊपर से उसकी छूट को अपने हाथों से अच्छे से मसल देता है (और संध्या एक गहरी सिसकी लेती है) और जब हाथ बहार निकालता है तो उसका हाथ पूरा गीला रहता है..

संध्या: देख लिया ना कितना गीला है..

राजू: क़ातिल हसी के साथ देख भी लिया है और एक ऊँगली अपने मुँह में दाल ke…chakh भी लिया है..

संध्या: dhat…tum बड़े शरारती होते जा रहे हो..

राजू फिर संध्या को बिस्तर पे ले जाता है और देखते देखते दोनों नंगे हो जाते है और दोनों में फिर से गहरा प्यार और हसीं चुदाई हो जाती है..

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ठाकुर के घर:

माला राजू से मिलकर घर चले जाती है जहाँ काम्य उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रही होती hai..use दर लगने लगता है की कही राजू को कुछ हो ना गया हो..

माला को देख kar…bol naa..kya हुआ? सब ठीक तो है ना..

माला: haan..sab ठीक hai..koi गड़बड़ नहीं hai..jaisa तुम सोच रही हो..

काम्य फिर देखती है की माला के चेहरे पे एक अलग hi रंग में निखरा हुआ है..

उसको देख kar..kyun re..tera चेहरा एकदम खिला खिला सा लग रहा hai..kuch हुआ क्या वहां?

माला: काम्य को अपनी बाहों में lekar…arre jaan..yeh पूछ की क्या क्या हुआ हैं वहां..

काम्य अपनी आँखें बड़ी करती hui..to बताना kameeni…lagta है खुद मजे लेकर आ गयी है और मुझे चिढ़ा रही है..

माला काम्य को एक गहरा किश करते hue..khoob रगड़ रगड़ के छोड़ा है राजू ne…aur कामये के कान mein..uska लुंड भी बहुत तगड़ा और मोटा hai…tu देखेगी तो तेरी छूट पनिया jaayegi..aur ऐसा कहते हुए माला काम्य की छूट उसके साडी के ऊपर से hi दबा देती है..

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काम्य की एक सिसकी निकल जाती है..

दोनों ऐसे कामुक बातें करते हुए दोनों नंगे हो जाते है और बिस्तर पे लेट कर..

काम्य: मुझे bataana..kya किया राजू ne..aur कैसे उससे तू छुड़वाई..

माला भी पूरा खुल कर और थोड़ा और ज़्यादा मिर्च मसाला दाल कर काम्य को पूरा बताती है की राजू ने उसे कैसे छोड़ा है..

माला की बातें सुन कर काम्य बहुत एक्ससिटेड हो जाती है और उसकी छूट रास बहाने से रुक नहीं रही थी..

काम्य माला का हाथ पकड़ कर अपनी छूट पे रख kar…Mala..zara मुझे भी थोड़ा शांत कर do..rukne का नाम नहीं ले रहा है..

काम्य की हालत देख कर माला को भी थोड़ा तरस आता hai..aur वह काम्य की टांगों के बीच आकर काम्य की छूट chaat-te हुए अपनी 2 उंगलियां उसकी छूट में दाल कर उसे ूँगी से छोड़ने लगता है..5 मं एक अंदर hi काम्य झाड़ जाती है और माला उसका पूरा रास चख लेती है..

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काम्य को झड़ाने के बाद माला उसके ऊपर आकर उसको चूमते hue….le..tu भी अपना रास चख le..aur दोनों किश करने लग जाते है..

5 मं बाद जब दोनों अलग हो जाते है तो माला कहती है..

माला: Kaamya..sun..2 baatein…Raju तेरे पास जल्दी hi aayega..tujhe भी खुश कर देगा और तू भी उसे खुश कर dena..aur दूसरी baat..main थोड़े दिनों के लिए अपने घर जा रही हूँ..

काम्य जब यह बात सुनती है तो थोड़ा आश्चर्य से माला की देखती hai..to माला उसके पास aakar..Bhai से कह दूँगी की मैं अपने घर जा रही hoon..lekin मैं अजय के घर जाऊँगी..

कुसुम और गौरी का भी हाल चाल पूछ लूंगी और उन्हें भी थोड़ा सतर्क रहने को बोल कर aaungi…lekin यह बात भाई को मत bataana..theek है?

काम्य हाँ में सर हिला देती है..

रात को:

रात को जब ठाकुर घर आ जाता है और का पीकर अपने कमरे में जाता है तो माला उसके कमरे में जाती है..

माला: Bhai..mujhe तुमसे कुछ बात करनी थी..

ठाकुर: बोल..

माला: मैं सोच रही थी की कुछ दिनों के लिए एक बार घर हो aaoon…bahut दिन हो गए घर नहीं गए हुए..

ठाकुर: ठीक hai..chali jaao…aur suno…is बार थोड़ी थीकि और ऊँची आवाज़ mein..mere काम में तुम दखर अंदाज़ी करना बंद कर do…is बार तो तुम्हे माफ़ कर दिया hai..lekin अगली बार फिर से ऐसी करि तो मैं भूल जाऊँगा की तुम मेरी बहिन hao..aur ऐसा हुआ तो उसका नतीजा अच्छा नहीं होगा..

माला कुछ नहीं कहती और ठाकुर को मन में गाली देते हुए वहां से निकल जाती है..

काम्य के कमरे में aakar…main कल hi निकल रही hoon..tum यहाँ संभाल लेना..

आगे जानेंगे और क्या क्या होता है.. …अगले अपडेट में..

फ्रेंड्स, सेटिंग उप थे चरक्टेर्स फॉर फुरदर एक्शन एंड "एक्शन्स" गोइंग फॉरवर्ड.
 
अपडेट 31: कुसुम के घर के हालत

कुसुम के घर:

अगली सुबह जैसे माला ने कहा tha..woh अपने घर से निकल जाती है और पहुँच जाती है कुसुम के घर. उस वक़्त अजय घर पे नहीं होता है तो दोनों कुसुम और गौरी उसको देख कर थोड़ा सरप्राइज हो जाते है..

कुसुम: माला के पेअर छु kar..kaise आना हुआ माँ जी?

माला: मैं अपने घर जा रही thi..socha एक बार तुम लोगों से भी मिल लून..

इतने में गौरी भी अपने कमरे से आ जाती है और माला को देख कर उसे गले लगा लेती है (नार्मल) और ठाकुर और घर का हाल चाल पूछती है..

माला: सब ठीक है माँ जी..

ऐसे hi थोड़ी बहुत नार्मल बातें होती है और फिर सब फ्रेश हो के कुसुम और माला चाय नाश्ता के लिए बैठ जाते है..

माला: कुसुम, अजय कैसा है? दिख नहीं रहा है..

कुसुम: माँ ji..woh काम पे गए hai..shaam तक आ जाएंगे..

इतने में गौरी भी नाहा कर वहां आ जाती है…

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गौरी को देख कर माला मन में सोचती hai..(kyunki इस वक़्त गौरी बहुत hi सेक्सी नज़र आ रही thi…tight ब्लाउज में उठी हुई chuchiyaan…saadi नाभि के नीचे बंधा hua..)..kya मस्त माल hai…kaise अपनी जवानी को संभाल कर रख रही hai…kuch बात करना पड़ेगा..

फिर तीनो चाय नाश्ता कर के माला थोड़ा आराम करने के लिए चले जाती है.

गौरी: कुसुम se..beta पता नहीं क्यों माला यहाँ आयी hai..lekin हमारे बारे में उसे कुछ मत bataana..warna गड़बड़ हो सकता है..

कुसुम: ठीक है maa..main उनसे कुछ नहीं कहूँगी..

राजू के घर:

सुबह रत्न फ्रेश हो कर किचन में काम कर रही होती hai..itne में राजू भी उठ जाता है और फ्रेश हो कर किचन में रत्न के पास जा के उसे पीछे से अपने बाहों में लेकर हल्का सा गार्डन में किश करते हुए कहता है..

राजू: Maa…tumse एक बात करना tha..pata नहीं सही होगा के नहीं..

रत्न: बोल naa..itna क्यों झिझक रहा है

राजू: बात यह है की 1-2 दिन में मैं सब को बुला कर अपने “दिल” की बात कहना चाहता hoon…kya तुम्हे मंज़ूर है?

रत्न: इसमें क्या बात है beta…haan बोल de..main भी खुश हो jaaongi..aur उसको छेड़ते hue..to तू जल्दी hi “घर” वाला बन जाएगा..

राजू: सोच तो यही रहा हूँ maa…dekho naa…din भी गुज़र रहे hai…aur देखते देखते उन सब की उम्र भी हो रही है…

रत्न: ठीक कह रहे हो beta…jab भी तुमको ठीक लगे तो कह dena…main तो तेरे लिए हमेशा खुश hi रहूंगी..

राजू: थैंक यू माँ..1-2 दिन में बात करता हूँ फिर..

राजू फिर अपना काम कर के घर से खेत के लिए निकल जाता है और जब वह घर के बहार आता है तो वह फिर से 2-3 आदमियों को देखता है जिन्हे पहले कभी नहीं देखा tha..aur उसे कुछ गड़बड़ लगता है.

खेत में जाकर अपना काम ख़तम कर के सोचता है की एक बार माला से मिल आये (उसे पता नहीं था की माला निकल गयी है).

जब राजू चुपके से Kaamya/Mala के घर जाता है तो देखता है की काम्य सो रही hai..aur सोने की वजह से उसके साड़ी का पल्लू हैट गया था और उसकी चूचियां आधे से ज़्यादा बहार की निकला गयी थी…

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उसको देख कर उसके पंत में भी लुंड भी खड़ा हो जाता है लेकिन अपने आपको संभालते हुए हु खास्ता है तो काम्य इसकी आवाज़ से झट से उठ जाती है और अपने हाल को देख कर थोड़ा शर्मा जाती है.

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फिर काम्य अपने आपको संभालते हुए कहती है

काम्य: अंदर आओ राजू…

राजू: माला मेमसाब कहाँ है?

काम्य: वह तो अपने गाँव गयी hai..usne मुझे बताया था की तुमको भी उसने कहा है..

राजू: haan..yaad aaya..keh रही थी की वह एक बार गाँव होकर आएगी..

काम्य: वैसे माला जब तुमसे मिलकर आयी थी तो बहुत खिली खिली सी लग रही thi..kya बात है?

राजू: उसे भी पता tha…Mala ने जो बताया था उसे की काम्य भी बहुत गरम है उसके liye..dheere से काम्य के पास जाकर उसे बाहों में भरते हुए उसको एक गहरा किश करता है जिसमें काम्य भी उसका साथ देती है..

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किश करने के बाद एक हाथ से उकसी उसकी गांड को दबाते हुए और दुसरे हाथ उसकी छूट के ऊपर रख कर उसके कान में धीरे से कहता है..

राजू: आप ठीक कह रही हो memsaab…Mala मेमसाब तो खिली खिली दिखेगी hi..kyunki उसको कल खूब जैम के छोड़ा और संतुष्ट होकर घर को आयी थी..

काम्य यह बात सुनकर शरमाते हुए हस्ती है और राजू के कान में कहती है..

काम्य: फिर तुम मुझे कब जैम के छोड़ रहे हो और संतुष्ट करोगे?

राजू: जल्दी hi करता हूँ memsaab..bas तैयार rehna..aur ऐसी ठुकाई करूंगा की आपको ज़िन्दगी भर याद रहेगा..

काम्य: मैं भी तो एहि चाहती हूँ Raju…jaldi से मेरी प्यास भी बुझा दो..

राजू: ठीक है कह कर वहां से निकल जाता है..

कुसुम के घर :

शाम को अजय अपने काम से वापस घर आता है तो माला को देख कर थोड़ा आशर्य होता है लेकिन अपने आप को संभालते हुए नार्मल तरीके से बात करता है..

फिर सब अपने काम करते है और रात को खाने के बाद माला भी कमरे में सोने चली जाती है.

अजय और कुसुम भी अपने कमरे में जाते hai…Kusum नाईट ड्रेस में चेंज करके सोने की तैयारी करती है तो अजय पीछे से आकर कुसुम को ज़ोर के पकड़ते हुए उसकी चुकी को दबाते हुए उसे बिस्तर पर गिरा देता है. कुसुम को ऐसा पसंद नहीं tha..aur मन करती है लेकिन अजय नहीं manta..woh भी अपने कपडे निकल कर जबरदस्ती कुसुम के ऊपर चढ़ने लगता hai..Kusum जब मन करती है तो अजय उसे थप्पड़ मार देता है..

अजय: चुप कर साली randi…aur ज़ोर से उसे मारने लगता hai…Kusum को दर्द होता है तो ज़ोर के चिल्लाती hai…itna ज़ोर के की उसकी आवाज़ कमरे के बहार भी आती है जो माला ( और गौरी) को भी सुनाई देती है (जो सोने की तैयारी कर रही थी). कुसुम की आवाज़ सुन कर वह भी सोच में पद जाती है..

इधर अजय: चुप कर saali..itna ज़ोर के क्यों चिल्ला रही hai..poore मोहल्ले को उठाएगी kya..aur कुसुम के ना चाहते हुए भी उसको छोड़ने लग जाता है..

ऐसे hi 3-4 मं तक ज़बरदस्ती करने के बाद अजय थक जाता है और कुसुम के ऊपर से उठ जाता है और हांफने लगता है..

कुसुम दर्द और पीड़ा के मारे रोये जा रही थी और अपनी किस्मत को कोस रही थी..

अजय: अब रोना बंद kar..light बुझा दे और सोने दे..

माला और गौरी की इमोशनल बातें:

वहीँ माला जब कुसुम की चीखे सुनती है तो वह भी कमरे से निकल कर बहार आती है तो देखती है की कुसुम का कमरा बंद hai..to वह धीरे से गौरी के कमरे के पास जाकर देखती hai..uska कमरा पूरा बंद नहीं होता है तो धीरे से दरवाज़ा खोल कर अंदर देखती है तो पाती है की गौरी रो रही है और अपने आंसूं पॉच रही है.

यह देख कर माला से भी रहा नहीं जाता और हु भी कमरे में घुस कर दरवाज़ा बंद कर के गौरी के पास चली जाती है..

गौरी उसे देख कर उसे भी रहा नहीं जाता (और गौरी को समझ आ जाता है की माला ने भी कुसुम की छीके सुन ली hai)..aur खूब रोने लगती है.

माला बिस्तर पे उसके बगल में आकर गौरी को धीरे से अपनी बाहों में लेकर उसे शांत करती है..

माला: चुप हो जाओ माँ ji..sab ठीक हो jaayega…bhagwaan पे भरोसा रखो..

गौरी: क्या ठीक होगा Mala..pichle कई महीनों से मैं यह सब सुनते आ रही hoon..lekin मैं कुछ नहीं कर पा रही hoon…dekhte देखते मेरी आँखों से सामने मेरी बेटी की ज़िन्दगी बर्बाद हो रही है..

माला: क्या hua..mujhe भी अपना hi समझो और bataao..shayad मैं आपकी कुछ मदत कर सकती हूँ..

गौरी: तुम्हे तो शायद पता hi hoga…Ajay अच्छा लड़का नहीं hai..hamesha गुस्से में रहता है और नशा भी करता hai..aur रोज़ नशे में कुसुम को भी मारता रहता hai..main जब उसे मन करती हूँ या पूछती हूँ तो वह भी मुझे गन्दी नज़र से देखता है और कहता है की वह (कुसुम) नहीं तो आप hi sahi..aa जाओ मेरे कमरे में…

मुझे भी अब उससे नफरत हो रही है लेकिन अपनी बेटी की खातिर मुझे यह सब सेहन करना पढ़ रहा है..

माला: मैं समझ सकती हूँ आपकी haalat…mera भी कुछ ऐसा hi हाल hai…farak इतना है की कुसुम अपने पति के साथ खुश नहीं है और मैं भी अपने पति से खुश नहीं थी तो इसीलिए तलाक ले लिया hai..hum सब एक hi नाव से गुज़र रहे है..

अगर आप दोनों को इतनी तकलीफ है तो फिर अलग क्यों नहीं रहते?

गौरी: अलग तो हम भी होना चाहते है use..lekin ऐसा हम नहीं कर पा रहे hai…Ajay के आदमियों की नज़र हम पर हमेशा hi रहती hai..aur अगर हम भाग भी जाए तो हमें ढूढ़ लेगा और कुसुम पर और ज़्यादा अत्याचार करेगा..

माला: hmm…dekhti hoon..main कुछ कर सकती हूँ kya…aur ऐसा कहते हुए माला गौरी की आंसूं पॉच देती है और उसे गले लगा लेती hai..aur फिर प्यार से उसका माथा चूम लेती hai..aur जब दोनों के चेहरे आमने सामने होते है एकदम नज़दीक तो माला उसको एक बार अच्छे से ऊपर से नीचे (उभरी हुई सीने तक क्यों की वह भी बैठी हुई पोजीशन में थी) कहती है

माला: आप इतनी सुन्दर ho…aisa दुखी चेहरा अच्छा नहीं lagta…aapki जवानी तो एकदम उफान मार रही hai…aur अगर मैं लड़का होती तो ज़रूर मैं बहक गयी hoti..aur ऐसा कहते हुए माला गौरी की गाल चूम लेती है..

गौरी हल्का है देती hai..aur कहती hai..kya karoon…kuch लोगों के नसीब मैं शायद ऐसा hi लिखा है..

माला: शायद ठीक कह रही हो aap..lekin हम नसीब को बदलने की कोशिश तो कर सकते है naa…aap अब से थोड़ा खुश रहने की कोशिश karo…aapko देख कर कुसुम का भी मन शायद हल्का हो जाए..

गौरी: शायद आप ठीक कह रही ho..dekhti हूँ..

माला: देखना नहीं है और करना hai..phir से माला इस बार उसका दूसरा गाल चूम लेती है और फिर उसकी आंखों में देकते हुए धीरे से गौरी के होंठ पे एक हल्का सा किश करती है..

गौरी: क्या कर रही हो आप…

माला: वही कर रही हूँ जिससे आप और मैं भी वंचित है..

गौरी: मतलब?

माला: pyaar…hum सब इसी प्यार के लिए वंचित है और शायद हम खुल के ना bole…lekin यह सच्चाई है को मैं आपकी आँखों में देख रही hoon..ismein कोई शक नहीं है..

गौरी कुछ नहीं कहती और बस माला को देखे जा रही thi..aur वह भी अपना चेहरा माला के करीब ले जा रही थी की..

इतने में माला का फ़ोन बजता है तो दोनों होश में आकर अलग होते है..

माला और राजू की बातचीत:

माला देखती है की राजू का फ़ोन था..

गौरी: इतनी रात को कौन फ़ोन कर रहा है?

माला: फिर कभी bataaongi…mujhe बात करना hai..aap सो जाओ…

ऐसा कहते हुए माला गौरी के कमरे से निकल कर अपने कमरे में चली जाती है और धीमी आवाज़ में राजू से बात करती है.

माला: बोलो राजू इतनी रात को कैसे फ़ोन किया? सब ठीक तो है ना.

राजू: वह भी धीमी आवाज़ mein..theek hai..shayad haan..yaa naa..main दिन में अपने काम से बिजी था तो इसीलिए अभी फ़ोन किया..

माला: क्या बोल रहे हो तुम?

राजू: बात यह है की मैं 2 दिनों से देख रहा हूँ की घर के पास 2-3 लोग घूम रहे है जिन्हे मैंने पहले कभी नहीं देखा यहाँ..

मुझे शक है कहीं यह ठाकुर के आदमी तो नहीं है जो मेरे घर पे नज़र रख रहे है और अगर ऐसा है तो ठाकुर कुछ सोच के hi कर रहा होगा ऐसा काम..

क्या तुम पता कर सकती हो इस बारे में?

माला: haan..pata करती हूँ..1-2 दिन का टाइम दो मुझे..

राजू: वहां के क्या हाल है? आज काम्य से मिलने गया था तो उसने बताया की तुम अजय के घर गयी हो..

माला: haan..theek कहा काम्य ne…yahan के हालत भी अच्छे नहीं hai…Ajay अपनी बीवी कुसुम को बहुत परेशान करता hai..maarta hai..jiski वजह से उसकी माँ गौरी भी बहुत दुखी hai..main उन दोनों का कुछ करती हूँ यहाँ par..tum वहां संभाल के रहना..

राजू: ठीक hai..main फ़ोन रखता hoon…zyaada देर बात करना भी अच्छा नहीं hai..agar तुम्हे कुछ पता चलता है तो बता देना mujhe…phir क्या करना है मैं भी सोचता हूँ.

माला: ठीक hai..raat बहुत हो गयी hai..main भी बहुत थक गयी hoon..phir बात करते hai..aur फिर फ़ोन कट कर देती है.

राजू: ठीक hai..kehte हुए वह भी फ़ोन कट कर देता है और हु भी सोने की तैयारी कर रहा होता है तो दरवाज़े पे दस्तक देते hue…kya मैं अंदर आ सकती हूँ…

राजू उस चेहरे को देख कर अपनी बत्तीसी (दांत) दिखाते hue…kisi ने रोका है क्या…

अभी दरवाज़े पे कौन hai..yeh अगले अपडेट में देखेंगे…

अब से कहानी थोड़ा थ्रिलिंग भी hoga..but सम गुड सेक्स अस वेल…
 
अपडेट 32: सुधा की चाहत

राजू जब उसे चेहरे को दरवाज़े पर देखता है तो खुश हो कर हस्ता है..

हु औरत: क्या मैं अंदर आ सकती हूँ?

राजू; मैंने कभी रोका है क्या आपको अंदर आने से?

हु औरत: अंदर आकर दरवाज़ा बंद कर देती है और राजू को कामुक नज़र से देखती है..

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क्यों रे babu…us दिन तूने अच्छे से मालिश कर के मेरी कामाग्नि भड़का के छोड़ कर चला गया और फिर तू एक बार भी मुझसे मिलने नहीं aaya…ji haan..woh औरत राजू की मौसी सुधा थी जो सेक्सी कपडे पेहेन कर राजू के कमरे में आयी थी..

राजू: मैंने किसीको वचन दिया है की मैं किसीके साथ ज़बरदस्ती नहीं करूंगा..

सुधा: मैं तुम्हे ज़बरदस्ती करने को तो कह नहीं रही हूँ naa..main भी तो चाहती हूँ की तू मेरे पास आये और मेरी भी प्यास बुझे दे..

राजू: मैं तो आपका hi इंतज़ार कर रहा था की आप कब aaogi..aur अब आप आ hi गयी ho..aisa कहते हुए राजू भी बिस्तर से उठ कर उसके नज़दीक जाता है और उसके कन्धा पकड़ कर दोनों एक दुसरे को गहरी नज़र से देकते hai..dono के बीच का फासला बहुत काम tha..aur दोनों एक दुसरे की साँसों को महसूस कर रहे थे..

सुधा: क्या ऐसा hi देखता रहेगा क्या??

राजू: तो और क्या करना है?

राजू इतना hi कहता है की सुधा अपने होंठ राजू के होंठों पर चिपका देती hai…aur गहरा किश करती hai..Raju भी उसमें खो जाता है और अपने हाथ ले जाकर सुधा की कमर पे रख कर उसको धीरे से दबा देता है…

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सुधा धीरे से सिसकी लेती है तो उसका मुँह थोड़ा खुल जाता hai..aur राजू उसी वक़्त अपनी जुबां उसके मुँह में दाल कर जुबां को चूसने लग जाता hai..jismein सुधा भी उसकी मदत करती है..

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दोनों एक दुसरे की जुबां चूसते चले जाते है..5 मं के किश के बाद दोनों अलग होते है तो दोनों उखड़ी साँसों से एक दुसरे को देखते है

राजू: आपके होंठ तो बहुत रास भरे hai..jee करता है चूसता hi चला जाऊं..

सुधा: तो रोका किसने है tumhe…aisa कहते hi राजू फिर से उसके होंठों पर टूट पड़ता है..

इस बार राजू धीरे से सुधा की साडी का पल्लू उसके कंधे से निकल देता है और धीरे से उसकी चुकी को दबाने लगता hai..jaise जैसे किश फिर से गहरा होता hai..waise hi राजू की पकड़ उसके चुकी पर बढ़ जाती है..

सुधा: लल्ला, थोड़ा धीरे से दबाओ naa..kahin भागे नहीं जा रहे है..

राजू: क्या करून mausi..aisa कहते हुए राजू उसके कान के पास aakar..jab हम दोनों कमरे में रहेंगे तो मैं आपको जानू bulaaonga..theek है?

सुधा: तू भी तो मेरी जान है lalla..jaisa चाहे बुला le..mujhe भी अच्छा लगेगा..

राजू सुधा को किश करते हुए धीरे से उसे कमरे की दीवार से सत्ता देता hai…aur उसे दीवार की तरफ ले जाते वक़्त उसकी साडी को भी निकल कर अलग कर देता है…

सुधा अभी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में hi थी..

राजू किश करते हुए गले को किश करते हुए सुधा की चूचियों की घाटी के बीच में अपनी जुबां से उसको chaat-ta hai..aur साथ hi उसकी चूचियों को भी ज़ोर से दबाता है..

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राजू: जानू, तुम्हारे यह गुब्बारे तो बहुत रास भरे लगते hai…lagta है बहुत दिनों से किसीने इनको पिया नहीं..

सुधा: ठीक कह रहे हो lalla…bahut दिनों से इन्हे किसीने छुआ तक nahi..bahut प्यासी है…

राजू: अब मैं हूँ naa…kabhi आपको और इनको तरसने नहीं doonga…aur ऐसा कहते हुए चूचियों को ज़ोर से दबाते हुए उसके ब्लाउज को खोल कर अलग कर देता hai….ek चुकी को मुँह में लेकर दुसरे को दबाने लगता hai…aur इससे सुधा की ज़ोर से सिसकारियां निकल जाती है और राजू का सर अपनी चूचियों पे दबा देती है…

सुधा: हाँ beta..aise hi piyo..bahut दिनों से तरसाया हुआ है isne…khaaskar जब से तूने मुझे मालिश किया था…

राजू फिर दूसरी चुकी को मुँह में लेकर चूसता है और इस बार उसकी निप्पल को हल्का सा kaat-ta hai…Sudha…aaaahhhhhhhh…kar के सिसकारी लेती है और कहती hai..aise hi धीरे से काटो beta…bahut अच्छा लग रहा है..

राजू के ऐसा करने के उसकी छूट बहुत गीली हो जाती है और रास बहाना शुरू कर देती है..

राजू ऐसे hi 10 मं तक दोनों चूचियों का मर्दन करता है और फिर नीचे सरक कर उसकी नाभि को चूमता और chaat-ta hai…aur उसकी नाभि पे गहरा किश करता है..

सुधा: aaahhh….beta…bahut अच्छा लग रहा hai..aur अपना हाथ राजू के सर के पीछे रख कर उसे अपनी नाभि पे दबा देती है..

राजू और थोड़ा नीचे जाता है तो देखता है की सामने से उसका पेटीकोट पूरा भीगा हुआ है..

राजू है kar…Jaanu..yeh पेटीकोट क्यों भीगा हुआ है?

सुधा: अपनी गीली पेटीकोट को देख कर शर्मा जाती है और कहती hai…dhat…tujhe पता नहीं?

राजू: पता nahi..aap hi बताओ ना..

सुधा राजू को उठाती है और उसका चेहरा सामने लाकर ज़ोर को उसके होंठों को चूमते हुए धीरे से उसके कान में कहती hai….teri हरकतों से मेरी छूट पूरी गीली हो गयी है और रास बहा रही hai…isi रास की वजह से पेटीकोट भी गीली हो गयी है और शर्मा के मुस्कुरा देती है..

राजू भी शरारत भरी अंदाज़ mein…ismein शर्माने की क्या बात hai…iska मतलब है की आपको भी मज़ा आ रहा hai…theek कहा ना maine?...aisa कहते हुए राजू उसकी पेटीकोट का नाडा भी खोल देता है और पेटीकोट भी नीचे गिर जाता है और सुधा पूरी तरह से नंगी हो जाती है..

सुधा: हाँ beta…bahut अच्छा लग रहा hai….uska कुछ करो ना…

राजू: किसका?

सुधा राजू का हाथ ले जाकर अपनी छूट पे रखती है और कहती hai..iska..

राजू: देखो jaanu…chudai के वक़्त जितना खुल कर आप rahogi..utna hi मज़ा आपको भी aayega..dekho..maine आपको जानू बोलै hai..theek…bina शर्म ke..waise hi आप भी शर्माना छोड़ do…khul के बात karo..phir देखो कितना मजा आता है…

सुधा थोड़ा शर्म से अपनी आँखें नीचे करती hai..theek है..

राजू: तो फिर किसका क्या करना है…

Sudha..phir भी थोड़ा हिचखिचाते hue…ch…ch…ch..

राजू: ch..ch…kya hai..mujhe नहीं पता..

सुधा: उसके कान के paas…choot का भी कुछ करो naa…ab ठीक?

राजू: यह हुई ना baat..kya करून?

सुधा: इसकी भी प्यास बुझा do..bahut दिनों से तड़पा रही है…

राजू फिर नीचे जाता है और अपने घुटनों के बल बैठ कर देखता है तो पाटा है की उसकी चिकनी छूट एक पतली सी दरार में पूरा रास बहा रही है और कुछ रास उसकी जाँघों से बह रहा था..

राजू उसकी जाँघों को चूमते हुए ऊपर की तरफ जा कर उसकी छूट को देखते हुए..

लगता है बहुत दिनों से बंद hai..to इसको ज़रूर खोलना पड़ेगा..

सुधा: haan..bahut दिनों से किसीने कुछ किया नहीं और प्यार के लिए तरस रही है..

राजू देखता है की उसकी छूट एक पतली सी लाइन के माफिक है और बहुत रास छोड़ रही है..

राजू से अब रहा नहीं जाता और अपनी जुबां से उसकी छूट को ऊपर से नीचे तक chaat-ta है…

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सुधा एकदम ज़ोर से चिक्ति है लेकिन टाइम पर अपने हाथ से अपना मुँह दबा देती है और राजू का सर अपनी छूट में ज़ोर के दबा देती है..

राजू बेतहाशा उसकी छूट को chaat-ta चला जाता hai…upar से नीचे तक और फिर नीचे से ऊपर tak…aur उकसी छूट की लोगों को खोलने की कोशिश करता है तो बड़ी मुश्किल से उसके लैब खुलते है..

राजू: jaanu..aapki छूट को कुंवारी लग रही hai..khul भी नहीं रहे है..

सुधा: हाँ beta…bahut दिनों से बंद पड़ी hai…lagbhag कुंवारी hi समझो..

राजू एकदम खुश हो जाता hai..aur अपनी काम जारी रखता है और इस बार उसकी क्लीट को चूमते हुए हल्का सा काट देता है…

सुधा यह हुम्ला बर्दास्त नहीं कर पाती और ज़ोर के झाड़ जाती है और अपना पानी फिर से निकल देती है जिसे राजू बड़े चाव से पी जाता है.

राजू: बड़ा स्वादिष्ट hai..tum, तुम्हारा पानी और तुम्हारी छूट भी..

सुधा शर्मा जाती hai..lekin कुछ नहीं kehti..woh इस हमले से ाँहें भरते रहती है की राजू उसे घुमा देता है और उसकी गांड का छेद सामने आ जाता hai…Raju उसे देख कर लार टपकाता है और उसकी गांड को चूमता और chaat-ta है..

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Sudha…aaaaaaaaaahhhhhhhhh……ooooohhhhh…kya कर रहे हो beta…main मर jaaongi…lagta है मैं आसमान में उड़ रही हूँ…

राजू उसकी गांड को chaat-te हुए एक ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश करता है तो ऊँगली जाती nahi…Sudha को जब यह महसूस होता है तो कहती है..

सुधा: beta..woh तो कुंवारी है है अब tak…Raju धीरे से अपने खड़ा हो कर उसके कान mein…to फिर पहले इसकी उद्धघाटन karoonga..theek है?

सुधा: नहीं beta..abhi तक वह सील पैक hai..bahut दर्द hoga..aur सब को पता चल jaayega…phir कब वहां दाल लेना..

राजू: क्या और कहाँ? मैंने कहा ना aapse…khul कर बात kijiye..tabhi आपको भी मज़ा आएगा..

सुधा: अपना लुंड फिर कभी मेरी गांड में दाल lena…aaj सिर्फ छूट hi छोड़ना लल्ला…

राजू: ठीक है jaanu..jaisa आप कहोगी..

राजू फिर नीचे बैठ जाता है और फिर से उसकी छूट से लेकर गांड तक chaat-ta है जिस में सुधा को भी बहुत आनंद की प्राप्ति होती है.

10 मं तक राजू chaat-ta रहता hai..in 10 मं सुधा फिर से 2-3 बार झाड़ जाती है और अपना पानी निकल देती है.

10 मं बाद राजू खड़ा होता है और सुधा को पलटा कर उसके होंठ चूम लेता है और उसे अपनी पानी पीला देता है..

राजू: kyun..paani कैसा लगा?

सुधा: धत…

राजू: चलो अब आपकी baari…apne छोटे यार कोभी खुश कर do..usko भी अपने दोस्त से “जान पहचान” करना है..

सुधा: कुछ समझी नहीं..

राजू है kar…mere लुंड को तैयार करो naa…phir आपकी छूट की सवारी भी करनी है naa…aur ऐसा कहते हुए है देता है.

राजू फिर सुधा के कन्धों को पकड़ कर धीरे से उसे भी बिठा देता है और अब राजू का लुंड सुधा के एकदम करीब tha..aur लहरा रहा था..

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सुधा: क्या re…itna बड़ा…

राजू: अभी बड़ा कहाँ हुआ hai…thoda अपने प्यार की बरसात कर do..phir बड़ा भी होगा और आपको खूब मजा भी देगा..

सुधा फिर उसके लुंड पर हल्का सा चुप्पी देती है..

राजू अपना हाथ सुधा के सर के पीछे ले जाकर थोड़ा दबाव बनाता है जिसे सुधा भी समझ जाती hai…aur फिर सुधा भी उसके लुंड को अपने मुँह में लेती hai…pehle dheere..lekin फिर देखते देखते राजू का पूरा लुंड अपने मुँह में ले लेती है और पाती है की उसका लुंड उसके गले में बहुत अंदर तक जा रहा है…

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धीरे धीरे राजू उसके मुँह को छोड़ता hai..aur सुधा को सांस लेने में परेशानी हो रही thi…Sudha उसके लुंड को बहार निकल kar…kyun re..yeh तो और बड़ा हो रहा है..

राजू: ऐसे hi प्यार करती raho..yeh और बड़ा हो jaayega..aur ऐसा कहते हुए फिर से राजू सुधा का मच छोडन करना स्टार्ट कर देता है..10 मं तक ऐसे hi राजू सुधा का मुँह छोड़ता है और उसका लुंड सुधा के थूक से तर बतर हो जाता है..

10 मं बाद सुधा: बीटा अब मेरा मुँह भी दर्द करने लगा है..

राजू थोड़ा हस्ते हुए सुधा को उठा लेता hai..aur फिर उसके कान में धीरे से ..शुरू करे?

सुधा: haan..karo naa…Raju छेड़ते hue..kya करना है..

Sudha..dhat…tu सुधरेगा nahi..chal..jaldi से अपना लुंड मेरी छूट में दाल कर छोड़ना शुरू कर..

Raju…to तैयार हो jaao…Sudha..haan..

सुधा का इतना कहना hi था की राजू अपने लुंड को सुधा की छूट पे रख कर एक ज़बरदस्त शॉट मारता hai..jisse राजू का आधे से ज़्यादा लुंड सुधा की छूट में चला जाता है..

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सुधा दर्द के मारे चटपटी hai…Raju को पता tha..isiliye वह अपना मुँह सुधा के मुँह से जोड़ देता है ताकि आवाज़ बहार ना jaaye..Sudha की आँखों से आंसूं बहने लगते है..

राजू वैसे hi थोड़ा रुक जाता hai..Sudha के आंसूं पोछता है और कहता hai…bus हो गया jaanu…job hi दर्द होना tha..ho gaya..ab मजे का समय आ गया है..

सुधा राजू को इशारा करती है की वह थोड़ी देर ऐसे hi rahe..Raju फिर वैसे hi थोड़ी देर रहता है बिना कुछ kiye…Sudha को जब थोड़ा रहत मिलती है तो अपनी आँखों से इशारा करती है तो राजू फिर से अपने लुंड को थोड़ा बहार निकल कर अंदर बहार करने लगता है जिसमें सुधा को भी मजा आ रहा tha…aaahhh….ooohhh….aise hi छोड़ो Raju..bahut मजा आ रहा hai..Sudha की सिसकारियां कमरे में धीरे से गूंजे लगती है..

जब सुधा भी मजे लेने लगती है तो राजू फिर से एक और बार ज़बरदस्त शॉट मारता है जिसकी वजह से उसका पूरा लुंड सुधा की छूट में जड़ तक समां जाता है…

सुधा की आँखें बड़ी हो जाती hai…Raju अपना हाथ उसके मुँह पे रख kar…uske कान के paas…poora जड़ तक घुस गया है lund…ab और ज़्यादा दर्द नहीं hoga…ab असली मजे का वक़्त आ गया है मेरी जान…

सुधा उसको थोड़ा रुआंसी नज़रों से देखती है और कहती hai..koi इतना ज़ोर का झटका मारता है क्या?

Raju…agar ज़ोर का झटका मारता नहीं तो फिर जड़ तक कैसे जाता मेरा लुंड..

सुधा हलके से उसके सीने में चपत मारती hai…aur फिर राजू का भी मूड बन जाता है और हु भी ताबडतोब सुधा की चुदाई करने लग जाता है…

10 मं तक ऐसे hi चुदाई करने के baad…Raju सुधा के कान में कहता hai..jaanu..ghodi बन jaao..peeche से तुम्हे छोडूंगा…

सुधा भी राजू की बात मान जाती hai..aur अपना हाथ दीवार पे लगा के घोड़ी बन जाती है…

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राजू उसे पीछे आकर फिर से एक बार उसकी छूट को चाट कर अपना लुंड उसकी छूट में पेल देता है और झुक कर उसकी चूचियों को दबाता है..

सुधा को भी इस पोजीशन में मजा आ रहा tha..woh भी मजे से छुड़वाते हुए आहें भर रही thi..oooh….aaah….ouch…..haan..aise hi छोड़ो मुझे राजू …मजा आ रहा है…

फिर 10 मं की ऐसी hi चुदाई के बाद..

सुधा: क्यों re..tu थकता नहीं है क्या? 15-20 से चोदे hi जा रहा hai…main तो बहुत थक गयी हूँ beta…mere पारी भी दर्द कर रहे hai..bistar पे ले चलो मुझे अब..

राजू: तुम जैसी गदरायी माल को देख कर मैं कैसे थक सकता हूँ मौसी…

अभी तो रात पूरी बाकी hai…aisa कहते हुए अपने लुंड उसकी छूट से निकल कर उसे आँख मार देता है और सुधा को अपनी गॉड में उठा के बिस्तर पे ले जाता है और उसे सुला देता है..

फिर से अपना लुंड उसके मुँह के पास ले जाता है तो सुधा भी समझ जाती है और झट से उसका लुंड मुँह में लेकर चूसने लग जाती hai…Raju भी मुद कर उसकी छूट चाटने लग जाता है और दोनों 69 पोजीशन में आ जाते है और दोनों एक दुसरे को मजा देते है..

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5 मं बाद दोनों अलग होते hai..aur फिर राजू तबियत से सुधा को (मिशनरी पोजीशन में) पेलना शुरू कर देता hai..Sudha भी मस्ती के सागर में डूबती चली जाती है..

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उसकी भी प्यास बहुत दिनों बाद बुझ रही थी..

सुधा: हाँ beta..aise hi chodo..bahut दिनों बाद ऐसा सुकून मिल रहा है beta..mujhe छोड़ोगे तो नहीं ना बीटा..

राजू: क्या कह रही हो jaanu..chhod कैसे सकता हूँ आप सब ko..aap सब तो मेरी जान ho..aur प्यार से उसके होंठ चूम लेता है जिसे सुधा भी बड़े प्यार से उसका सहयोग करती है..

10 मं की दुमदार चुदाई में सुधा फिर से 3-4 बार झाड़ जाती है और बाद राजू को भी लगता है की उसका भी होने वाला है..

राजू: मैं भी आ रहा हूँ जानू…

सुधा: अंदर मत gira…aaj मुझे अपना पानी पीला de…main भी तेरा पानी पीना चाहती हूँ..

राजू फिर 3-4 शॉट अच्छे से मार कर अपना लुंड उसकी छूट से निकाल कर सुधा के मुँह के पास आकर अपना पानी पूरा उसके मुँह में दाल देता है..

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सुधा उसका पूरा पानी पी जाती है और पाती है की उसका रास बहुत गाढ़ा हेयर और मात्रा भी बहुत ज़्यादा hai..Raju भी लुढ़क जाता है और हाँफते हुए सुधा के बगल में लेट जाता है..

सुधा: तेरा पानी तो बहुत गाढ़ा है मेरे laal..aur बहुत ज़्यादा bhi..agar तो मेरे अंदर hi छोड़ देता तो मैं जल्दी hi तेरे बच्चे की माँ बन जाती..

राजू: है kar..yeh तो अच्छी बात है naa…chalo..agli बार ऐसे hi करते है और सुधा को आँख मार देता hai…Sudha शर्म से पानी पानी हो जाती है..

राजू: मजा आया ना?

सुधा: maja..arre…aisa मजा तो मुझे पहले कभी नहीं aaya…tune तो मुझे पूरा संतुष्ठ कर दिया है लल्ला…

राजू खुश हो जाता है और सुधा के होंठ चूम लेता है..

उस रात राजू सुधा को अच्छे से फिर 2-3 बार पेलता है जिसमें दोनों को बहुत मजा आता है और फिर थक हार कर सुधा अपने कमरे में संतुष्टि के भाव से चली जाती है और दोनों राजू और सुधा गहरी नींद में चले जाते है…

अगली सुबह…

अगली सुबह राजू की नींद फ़ोन की घंटी से खुलती hai…number देख कर एकदम झटके से उठ जाता है…
 
अपडेट 33: राजू की पहली नज़र ठाकुर पे…

अगली सुबह:

राजू की नींद खुलती है फ़ोन रिंग होने par…ring सुनकर फ़ोन उठा लेता है बात करने के liye..kyunki फ़ोन माला का था..

राजू: haan..kaho..kya बात है?

माला: सुनो Raju..maine काम्य से बात कर लिया hai..tum एक बार उससे मिल lo..tumhe कुछ शायद जानकारी दे दे जिसके बारे में हम कल रात को बात किये थे..

राजू: ठीक hai..milta हूँ उससे आज hi..aur फिर फ़ोन कट कर देता है.

राजू उठ कर फ्रेश हो कर किचन में जाता है तो देखता है की रत्न चाय बना रही थी.

राजू उसे पीछे से अपनी बाहों में लेकर प्यार से गले को किश करते हुए नार्मल बात करता है..

रत्न: उठ गया मेरे laal..chal jaa..baith मैं तुझे चाय देती हूँ..

राजू शरारत भरी अंदाज़ mein…mujhe तो “दूध” पीना है..

रत्न: तेरे नखरे बढ़ते जा रहे hai..maar खायेगा..

राजू हस्ते hu..haan..maar भी खा loonga..bus ज़रा दूध पीला दो..

ऐसे hi हसी मजाक की बात करते हुए दोनों चाय पीने लगते है तो इतने में ारु एंड संध्या भी फ्रेश हो कर वहां आ जाते है और सब साथ चाय पीने लगते है..

थोड़ी देर बाद सुधा भी आ जाती है और वह थोड़ा लंगड़ाती हुई चल कर आती hai..usko देख कर सब के चेहरे पे हसी आ जाती है लेकिन सब अपनी हसी रोक लेते है..

संध्या: क्या हुआ behenji…aap लंगड़ा के क्यों चल रही हो?

सुधा: थोड़ा शर्मा ke..kuch nahi..subah से hi पाँव में थोड़ा दर्द हो रहा hai..aur तिरछी नज़र से राजू को देखती hai..jo रत्न भी नोटिस कर लेती है..

संध्या उसकी टांग खींचते hue…haan…pata है मुझे bhi..kabhi कभी पाँव में चोट लग जाती hai..aur ऐसा कह कर सब है देते hai..kyunki वहां बैठे सब को “पता” था की “चोट कैसे आयी है” उसको..

फिर सब चाय पीकर ऐसे hi कुछ बात चीत कर के अपने कमरे में जा रहे होते है ..

संध्या जाते जाते सुधा को अपने कमरे में बुलाती hai..Sudha ना चाहते हुए भी संध्या के कमरे में जाती है..

कमरे में जाते है संध्या सुधा को पकड़ कर दीवार से सत्ता कर..

संध्या: kyun..sach में आपके पाँव में सच में चोट लगी है kya…aur ऐसा कहते हुए अपना हाथ सुधा की सदी के ऊपर से उसकी छूट पे रख kar..yaa फिर यहाँ चोट लगी है?

सुधा कुछ कह नहीं पाती और अपनी आखें नीचे झुका लेती है..

संध्या: घबराने की कोई बात नहीं है behenji..aur धीरे से उसके कान में ऐसी चोट हम सब को भी लगी है..

सुधा उसकी बात सुन कर है देती है और आँखों से हाँ में इशारा कर देती है..

संध्या: तो राजू ने आपका भी कल्याण कर दिया hai…theek कहा ना मैंने?

सुधा: haan..theek कह रही ho…aur वह भी थोड़ा खुलने लगती है..

संध्या: यह हुई ना baat…aisa कह कर संध्या सुधा के होंठ चूम लेती hai..Sudha एक्सपेक्ट नहीं कर रही होती hai..aisa kuch..lekin जब उसे समझ में आता है तो वह भी संध्या को ज़ोर के चूम लेती hai..aur धीरे से संध्या की गांड दबा देती है..

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संध्या की हलकी सी सिसकारी निकलती hai..itne में उनको किसी के आने की आहात होती है तो दोनों अलग हो जाते है और नार्मल बात करने की कोशिश करते है..

दरवाज़े पे रत्न आयी हुई thi..aur सुधा से कहती hai…chal..thoda घर का काम भी करना hai..aur ऐसा कहते हुए दोनों संध्या के कमरे से निकल जाते है..

इधर राजू अपने कमरे में आकर फ्रेश होता है और काम्य को फ़ोन कर के कहता है की वह उससे मिलने आएगा..

काम्य के घर:

राजू से बात करने के बाद काम्य के चेहरे पे ख़ुशी की झलक आ जाती है और वह भी तैयार होने लग जाती है..

1-2 घंटे बाद राजू अस उसुअल चुपके से काम्य से मिलने आता है ..जब हु काम्य को उसके कमरे में देखता है तो देखता hi रह जाता hai..is वक़्त काम्य बहुत से hi सेक्सी नज़र आ रही thi..blouse और लहंगे पहने hue..jismein से उसकी आधी चूचियां दिख रही थी…

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काम्य: राजू को कामुक नज़र से देखते hue..aa गए Raju..main तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी..

राजू: उसको देखते हुए धीरे से उसके पास aakar..bahut कातिल लग रही हो memsaab..aisa लग रहा है की अभी बिस्तर पे पटक के आपके ऊपर चढ़ jaaon…aisa कहते हुए राजू काम्य को पकड़ कर एक गहरा चुम्बन करता है जिसमें काम्य भी उसका साथ देती है..

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काम्य भी उसी अंदाज़ में जवाब देते hue…to रोका किसने है तुम्हे? मैं तो कब से इंतज़ार कर रही हूँ..

लेकिन….

इतने में उन दोनों की दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आती hai..dono अलग हो जाते है और काम्य कहती है राजू से की वह वहां से निकल जाए..

लेकिन राजू के पास उतना टाइम नहीं था की हु काम्य के घर से निकल jaaye..kyuni की उसके दरवाज़े पर जैम के कोई पीट रहा था..

राजू चुपके से बाथरूम में खिसक जाता है और काम्य दरवाज़ा खोलती है तो देखती है की ठाकुर वहां खड़ा था..

हुआ यूं था की ठाकुर अस उसुअल अपने काम से चला गया tha..lekin उसे कुछ याद आता है की वह घर में कुछ भूल गया tha..aur वही लेने घर आया tha..aur देखता है की काम्य के कमरे का दरवाज़ा बंद है और कुछ आवाज़ आ रही hai..use शक हो जाता है और दरवाज़ा पीटने लगता है..

ठाकुर का गुस्सा:

ठाकुर: क्यों re..kaun है इस कमरे में? मुझे किसी की आवाज़ आ रही थी..

काम्य: थोड़ा घबरा kar..koi नहीं है ji..aapko गलत फेहमी हुई hai..main तो दीदी (माला) से फ़ोन पर बात कर रही thi..wahi आवाज़ आपको सुनाई दिया होगा..

ठाकुर फिर भी मानता नहीं और ऊंची आवाज़ mein…mujhe से झूट मत bol..agar मुझे पता चला की तू झूट बोल रही है और यहाँ कोई आया hai..to dekhna…bahut बुरा हाल करूंगा तेरा…

ठाकुर और काम्य की यह बातें हो रही thi..to राजू धीरे से बाथरूम का दरवाज़ा खोल कर देखता hai…to उसे पूरे कमरे का नज़ारा साफ़ दिख रहा tha..aur आज पहली बार राजू ने ठाकुर को ठीक से देखा tha..(Khandahar में राजू ने ठाकुर को देखा tha..lekin उस वक़्त दूरी भी थी और उस खँडहर में अँधेरा भी tha..to ठीक से ठाकुर को देख नहीं पाया tha..)..lekin आज साफ़ साफ़ सब दिख रहा था…

ठाकुर एक कोट और धोती पहने हुए काम्य से बात कर रहा tha…dikhne में ठीक ठाक tha..thoda saanvla…lekin उसका चेहरा देख कर कोई भी कह सकता था की वह बहुत हरामी hai..uske चेहरे का रंग और बनावट hi ऐसा tha…ki उसके चेहरे से हरामीपन चालक रहा था..

राजू ठाकुर को देख कर मन में सोचता hai..yeh चूतिये को काम्य जैसे माल कैसे मिल गयी??? लेकिन फिलहाल उस बात को अनदेखा करके उन दोनों की बात सुनने की कोशिश कर रहा था..

ठाकुर: उसे काम्य की बात पर विश्वास नहीं tha..aur उसे डराने और धमकाने के लिए उसे मारता hai..aur कहता hai…yaad rakhna..meri नज़र तुझ पर हमेशा hi rahegi..koi चालाकी की तो तेरे साथ मुझे बुरा करने का कोई अफ़सोस नहीं होगा..

काम्य उसे समझाने की कोशिश करती है लेकिन ठाकुर कहाँ सुनने वाला था..

ठाकुर: अभी मेरे पास वक़्त की कमी hai..tere से मैं फिर मिलने aaonga…aur इस बार तेरी अच्छी खबर लूँगा…

काम्य रोये जा रही thi…aur ठाकुर गुस्से से उसके कमरे से निकल जाता hai..use धमका कर..

2-3 मं तक काम्य ऐसे hi रहती है और जब उसे लगता है की ठाकुर चला गया है तो दरवाज़ा बंद कर देती है और राजू भी बाथरूम से बहार आता है..

काम्य: राजू से रट hue..suna (देखा) ना tumne..Thakur कैसे बर्ताव करता है mujhse…kaise मारता और धमकाता है mujhe…isiliye मैं यहाँ से भाग जाना चाहती हूँ Raju…isiliye तेरी मदत मांग रही थी की मुझे इस नरक से निकल लो..

राजू को भी काम्य पे थोड़ा दया आता है और काम्य को उसे अपने बाहों में लेकर…

राजू: haan..maine देखा है और समझ भी सकता hoon…bas थोड़ा और टाइम do…jaldi hi कुछ ज़रूर करता hoon…Raju थोड़ा सोच kar..waise तुम्हे भी ठाकुर से बदला लेना है ना?

काम्य : haan…mujhe उसका ग़रूर और घमंड भी तोडना है और उसने मेरे साथ जॉब hi किया है मुझे उसका बदला भी लेना है..

राजू: धीरे से उसके पास aakar..uske कान में कुछ लम्बी कहता है..

काम्य एकदम आश्चर्य से बड़ी आँखें कर के उसे देखते hue…kya कह रहो राजू? ऐसे कैसे मुमकिन है?

तुम्हे क्या लगता hai..tum ऐसा करोगे तो ठाकुर तुम्हे छोड़ेगा क्या?

राजू: तुम उसकी चिंता मत karo..bolo…manzoor है? उसे तुम्हारा बदला भी पूरा hoga…aur तुम्हे जो चाहिए हु भी मिल jaayega…aur तुम ठाकुर से आज़ाद भी हो सकती हो..

काम्य: अगर ऐसा हुआ तो मुझे मंज़ूर hai..aur अपने आंसूं पॉच कर राजू की फिर से चूमती है…

राजू: अभी उसके लिए वक़्त hai…Mala ने कहा था की वह तुमसे बात की है..

काम्य: haan..kal रात उसने मुझे फ़ोन किया tha..hamari बात हुई है..

राजू: तो जो मैंने माला से पुछा था.. उसके बारे में जल्दी से पता करो और मुझे आज शाम तक या कल तक कन्फर्म karna…aur मुझे फ़ोन karna…Mala का दिया हुआ फ़ोन अभी भी मेरे hi पास hai..abhi हमारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं hai..theek है?

काम्य: ठीक hai..main कोशिश करती hoon..aur जल्दी hi तुम्हे बता देती हूँ..

राजू फिर वहां से अपने खेत के लिए निकल जाता hai…sochte hue..ki उसने जो बात काम्य के कान में kaha..agar ऐसा हुआ (और उसे यकीन था की ऐसा ज़रूर होगा) तो बहुत मज़ा aayega…Raju ने काम्य के कान में क्या kaha…aage पता चलेगा..

उधर कुसुम के घर:

सुबह गौरी किचन में चाय बना रही thi…Mala धीरे से उसके पीछे आकर उसे पकड़ लेती है और हल्का सा उसका पेट दबा देती है..

गौरी: थोड़ा चौंक जाती है और पीछे मुद कर देखती है तो माला को पाती है जो हलके से है रही thi…chhodo mujhe..koi देख लेगा तो अच्छा नहीं होगा..

माला: अभी वह दोनों बहार नहीं आये hai..kuch नहीं hoga..Gauri को पलटा कर उसकी आँखों में देखती hue…kitni प्यारी लग रही हो aap….aur धीरे से थोड़ा आगे आकर कहती hai..jee करता है ki…itna कहते hi गौरी उसकी जुबां पे हाथ रख kar…nahi…ruk jaao…koi देख लेगा तो अनर्थ हो जाएगा…

माला उसकी बात मानते हुए अलग हो जाती hai..aur इतने में दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आती है…

कुसुम thi..woh भी किचन में आ जाती है और माला देखती है की उसके चेहरे पे निशाँ है..

माला: क्या हुआ beti..yeh निशाँ कैसे हुए?

कुसुम कुछ नहीं कहती और उसकी आँखों से 1-2 बूँद आंसूं निकल जाते है..

माला: अच्छे बच्चे रट नहीं beta..aur ऐसा कहते हुए उसकी आंसूं पॉच देती है..

फिर सब चाय पीने लग जाते है तो अजय भी बहार आ जाता है और वह भी चाय पीने लग जाता है..

माला: (अजय se)..dheere se..kyun re…Kusum के चेहरे पे निशाँ कैसे आ गए?

अजय है ke..kya बुआ आप bhi…yeh सब तो होते रहता है..

माला: लेकिन इतना भी क्या की निशाँ पद jaaye…aaram से मजे करो बीटा..

अजय को थोड़ा गुस्सा आता है और माला से कहता hai..bua..aap इन चीज़ों से दूर hi रहो तो अच्छा hai…jo भी होगा मई देख loonga..aapko चिंता करने की कोई ज़रुरत नहीं है..

माला को समझ में आ जाता है की अजय सुधरने वाला नहीं है तो और कुछ नहीं कहती..

फिर अजय अपने काम से निकल जाता है..

वह कुछ काम की सिलसिले में ठाकुर को फ़ोन करता है..

अजय और ठाकुर की बातचीत:

अजय: chachu…baat कहाँ तक पहुंची? कुछ पता चला क्या उसके (राजू) के बारे में?

ठाकुर: छोटे, मैंने आदमी को काम पे लगा दिया hai..jab पता चलेगा तो तुझे बता दूंगा..

अजय: अच्छा chachu..aapne बताया नहीं की बुआ यहाँ आ रही है? बता देते तो मैं उन्हें लेने बस स्टैंड चला जाता..

ठाकुर: आश्चार्य se..kya बोल रहा है छोटे? कुछ समझ नहीं आया..

अजय: अरे chachu..main माला बुआ के बारे में बात कर रहा hoon..woh यहाँ 1-2 दिन पहले आयी है और अभी घर पे hi है..

ठाकुर: अबे saale..kya बक रहा hai..woh तो अपने घर जा रही है बोल के यहाँ से निकली thi…agar मुझे पता होता की तेरे घर आ रही है तो कभी भेजता hi नहीं use..pata कर क्यों आयी है तेरे paas…mujhe कुछ गड़बड़ लगरहा hai…waise भी ..आज कल उसकी हरकतें भी ठीक नहीं hai…kuch लफड़ा ना ho..dekhna और मुझे बताना..

अजय सोच में पद जाता है और हाँ कह कर फ़ोन काट देता है..

अजय शाम को घर जाता है तो कुसुम को अपने कमरे में बुला कर थीकि आवाज़ में कुसुम से कहता है की हु अपनी माँ को बोले की माला बुआ को जल्दी से घर से निकल de..warna उन सब के साथ बहुत बुरा होने वाला है..

कुसुम को कुछ समझ में नहीं आता और चुपचाप उसकी बात सुनती रहती hai..aur हाँ में सर हिला देती है.

इधर राजू के घर:

राजू अपना काम ख़तम कर के जब शाम को घर आता है तो उसे फिर से वह लोग दिख जाते है और उसको यकीन होने लगता है की वह आदमी ठाकुर के hi आदमी है..

वह घर चला जाता है और कुछ सोचते हुए कुछ देर बाद घर से निकल कर पास में बने एक चाय टापरी में जाता है जहाँ से वह उन लोगों पर नज़र रखता hai..dekhta है की हु आदमी फ़ोन पे किसीसे बात कर रहा था…

इतने में राजू को काम्य का फ़ोन आता है

राजू: धीरे se..haa मेमसाब..

काम्य: तूने और माला ने जो बात किया है ..लगता है वह सही hai..Thakur के कुछ आदमी तुम्हारे घर पर नज़र रख रहे hai…kyun..pata nahi..aur पता करना भी मुश्किल hai…agar मैं उनसे पूछूँगी तो उसे शक हो जाएगा..

राजू: haan..main समझ सकता hoon..theek hai..bataane के लिए dhanyawaad…dekhta hoon..kya चल रहा है yahan…aur फिर फ़ोन कट कर देता है..

राजू फिर देखता है की वह आदमी कुछ देर और वहां रहते है और फिर निकल जाते है..

राजू भी फिर वहां कुछ देर रहता है और कुछ नहीं होता तो वह भी अपने घर निकल जाता है..

रात को:

रात को जब सब खाने खाते रहते है तो राजू कहता है..

आप सब लोग खाना खा कर मेरे कमरे में आ jaana…mujhe आप सब से कुछ ज़रूरी बात करनी है..

चारो एक दुसरे को देखते रह जाते है और कहते है की ऐसा क्या ज़रूरी बात है को तुम यहाँ पर नहीं कह सकते?

राजू: बात hi कुछ ऐसी hai…aur कुछ नहीं कहता..

खाना खा कर राजू अपने कमरे में चला जाता है और उनका इंतज़ार करता है…

बाकी सब भी खाना खा कर सब साफ़ सफाई कर के एक दुसरे को देखते हुए राजू के कमरे में जाते है..

राजू उनसे क्या बात करता और कहता hai…next अपडेट में..
 
अपडेट 34: राज़ का खुलासा…

सीढ़ी baat..no बकवास

रात को खाना खाने के बाद राजू सब का अपने कमरे में इंतज़ार कर रहा था.

सब अपना काम कर के राजू के कमरे में आकर बैठ जाते है और सब के चेहरे बहुत सीरियस दिख रहा tha…Raju मूड को थोड़ा हल्का करने के लिए कहता है..

राजू: अरे, कुछ नहीं hua…itna सीरियस होने की बात नहीं है..

सब थोड़ी झूटी मुस्कान अपने चेहरे पे लाते है जिसे राजू समझ जाता है..

राजू उनकी परेशानी देख कर सब बात साफ़ साफ़ करने की सोचता है और कहता है..

राजू: एक बात बताना tha..aur ध्यान से suno..shayad आप लोगों ने देखा ना ho..lekin शायद यह सच है.

सब एक साथ: क्या??

राजू: मैं पिछले 3-4 दिनों से देख रहा हूँ की कुछ आदमी, जिन्हे मैंने पहले कभी नहीं देखा tha…woh अपने घर के पास खड़े रहते hai..mujhe लगता है की वह लोग ठाकुर के आदमी हो सकते है और हम पर निगरानी रख रहे hai..ki हम कब, कहाँ और कैसे बहार जाते है..

जब यह बात बाकी लोग सुनते है तो उनके चेहरे के रंग बदल जाते hai..aur परेशान हो जाते है..

रत्न: beta..maine तो इस बारे में ध्यान भी कभी नहीं diya..ki ठाकुर ऐसा कुछ काम भी कर सकता है..

रत्न बाकी तीनो (बट) की तरफ देख कर उनसे पूछती है तो वह भी एहि जवाब देते है की उन्होंने भी इस बात पे कोई ध्यान नहीं दिया..

राजू: कोई nahi..lekin लगता है की हाल ऐसा hi कुछ hai…maine भी पता लगाने की कोशिश की है..1-2 दिन में पता चल जाएगा की वह लोग ठाकुर के आदमी है या कोई और..

लेकिन हम लोग चांस नहीं ले सकते और थोड़ा सावधानी से रहना पड़ेगा.

ारु: तो हमको क्या करना है?

राजू: जब भी तुम लोग कोई काम से बहार jaao..to अकेले मत jaana…atleast 2 लोग साथ जाना ताकि एक दुसरे के साथ rahe..aur मेरा फ़ोन नंबर भी रख lo…agar ज़रुरत पड़े तो कॉल कर लेना..

रत्न: बीटा, यह फ़ोन तुम्हारे पास कैसे आया?

राजू: माला ने दिया है…

बाकी तीनो: यह माला कौन है?

राजू: यह ठाकुर की बहिन है..

जब यह बात तीनो सुनते है तो सब आश्चर्य से अपना मुँह खोल कर उसे देखते रह जाते है..

राजू उनको इस हालत में देख कर हस्ता है और कहता hai..aap सब लो उसकी चिंता मत karo..philhaal मेरा नंबर रख लो..

डरो mat…main हूँ naa..dekh loonga..hum कब तक ऐसे डरे डरे jiyenge…main जल्दी hi सब ठीक कर दूंगा..

सब सीरियस दिख रहे होते है तो राजू थोड़ा माहौल को हल्का करने के liye…chalo..ab थोड़ा है भी do…abhi हम पर कोई पहाड़ तो टूट नहीं पड़ा है na..to यह उदासी क्यों अपने चेहरे पे ला रहे हो..

राजू: रत्न की तरफ देखते hue..baaki तीनो से कहता hai…ek और एहम baat…jo मई अपने दिल की बात आप सब से कह रहा हूँ…

बट सवालिया नज़र से राजू को देखते hue…kya बात है?

राजू: मैं आप सब को दिल से चाहता hoon…pichle कुछ महीनो से लेकर जो भी इस घर में हुआ hai…aur उसके chalte…dheere धीरे मुझे आप सब के लिए प्यार है और सब मेरी जान ho…yeh बात उन चारो को देखते हुए कहता hai…aur पता है की रत्न हलके से है देती है जो बाकी तीन नहीं देख पाते.

बट: हाँ Raju..tum जो कह रहे ho..woh सच hai..hum भी तुमसे बहुत प्यार करते है और तू तो अब हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा बन गया है…

राजू: मेरा भी एहि हाल hai…aur isiliye…mai जो कह रहा hoon…soch समझ कर बताना mujhe…jo भी आपका फैसला होगा, मुझे मंज़ूर होगा…

बाकी सब: क्या कहना चाहते हो?

राजू: एहि की …जैसा मैंने kaha..aap सब लोग मेरी जान और धड़कन हो और मैं आप सब से शादी करना चाहता हूँ और हमेशा के लिए अपना बनाना चाहता हूँ…

राजू यह बात बोल के रुक जाता है और सब के चेहरे देखता है..

बट के होश ुध जाते hai..kyunki उन्होंने शायद कभी ऐसा सोचा नहीं था (रत्न को पहले से hi मालूम था..)

बट को जब एहसास होता है तो तीनो एक दुसरे को देखते hai…aur फिर तीनो एक साथ राजू पे टूट पड़ते है और उसके चेहरे पे चुम्मियों की बरसात कर देते है..

2-3 मं baad…unke आँखों से आंसूं (ख़ुशी के) आ जाते hai..to राजू उनको भी धीरे से अपने गले लगा के…

मेरी बनना चाहोगे आप लोग?

ारु: राजू मैं कह नहीं सकती मैं कितनी खुश हूँ की तुम हमें अपना बनाना चाहते ho….meri सूनी ज़िन्दगी में आने के लिए…

सुधा और संध्या: ारु ठीक कह रही है Raju….hamein तुमने जो खुशियां दी hai…keh नहीं sakte..ki हम कितने आभारी है तुम्हारे..

सुधा: लेकिन यह कैसे हो सकता है की तुम हम सब से शादी करना चाहते हो? दुनिया और समाज क्या कहेगा?

राजू: दुनिया और समाज को chhodo…jab हम इतनी मुश्किल ज़िन्दगी जी रहे the..aur इतने परेशान the..to कौन आया था हमारी मदत करने के लिए?

कोई नहीं naa…to उनको हमारे ज़िन्दगी और शादी से क्या लेना देना? वह सब मुझ पर छोड़ do..main देख लूँगा…

और वैसे bhi…baat यह है की ज़िन्दगी हमें अपने लिए और अपनों के लिए जीना है या समाज के लिए?

मुझे आपकी रज़ामंदी चाहिए thi..jo मिल गयी hai..aur कुछ नहीं..

संध्या: हम तो ठीक hai..lekin माजी (रत्न की तरफ देखते हुए)…

राजू: मैंने उनसे पहले hi बात कर्ली hai…woh भी मेरी बन कर rahegi..lekin उसके लिए अभी वक़्त है…

राजू: क्यों maa…theek कह रहा हूँ ना?

रत्न: थोड़ा शर्माते hue…theek कह रहे हो बीटा..

राजू: बाकी तीनो se…ek और बात मैं आप सब से कहना चाहता hoon..jo की बहुत ज़रूरी है..

बट: बोलो…

राजू: आप सब को शायद पता नहीं hoga..lekin मेरे सम्बन्ध आप सब से बन hi गए hai..jab यह बात राजू कहता है तो तीनो शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लेती है..

राजू उनकी टांग खींचते hue..aapko क्या लगता hai..aap लंगड़ा के चलो और कहो की पाँव में छोट लग गयी तो बाकी सब मान जाएंगे?? और यह कहते हुए ज़ोर से है देता है..

बट: हैट besharam…aur हल्का सा है देती है..

झटके पे Jhatke..raaz धीरे धीरे खुलते हुए…

राजू: khair…jo बात मैं कहना चाहते hoon…yeh है ki..aur ऐसा कहते हुए राजू संध्या और रत्न की तरफ देख कर कहता hai..mere और भी लोगों के साथ सम्बन्ध hai..yaa फिर कहो तो बन गए hai…naa चाहते हुए भी…

लेकिन मेरे उनसब से सम्बन्ध और हमारे बीच का कोई लेना देना नहीं hai…main बस एहि चाहता हूँ की हम सब हमेशा खुश रहे और एक साथ रहे और कोई हमें अलग ना करे..

ारु और सुधा: क्या कह रहे हो राजू? हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है..

राजू: याद hai…aur संध्या की तरफ देखते हुए कहता hai..jab मैं और संध्या उसकी बहिन के घर गए थे 1-2 महीने पहले…

दोनों: हाँ…

राजू: संध्या की तरफ देखते hue…aap बताना चाहोगी?

दोनों और रत्न संध्या की तरफ देखते हुए: Bolo..kya हुआ जो राजू तुम्हे कहने को बोल रहा है..

संध्या फिर तीनो को उसके बहिन के घर में जो hi हुआ (रानी के साथ) सब बता देती hai…aur तीनो से कहते hai..mujhe माफ़ कर de..aur रोने लगती है..

यह बात सुनकर रत्न उसे अपने बाहों में लेते hue…rote नहीं Sandhya…Raju ने जो भी किया तुम्हारी बहिन की ज़िन्दगी में ख़ुशी के दो पल लाने के लिए hi किया hai..humein कोई परेशानी नहीं है..

सुधा और ारु की तरफ देखते hu…kyun, ठीक कहा ना मैंने?

सुधा और ारु भी संध्या को गले लगा kar…kuch गलत नहीं हुआ…

राजू: इतना hi nahi…ab एक और झटका सुनो…

बट: और कितने झटके डोज Raju…ek दिया ..वह काफी नहीं है क्या?

राजू: तो suno….mere सम्बन्ध माला और काम्य से भी है..

बट: यह कौन है..

राजू: ठाकुर की बहिन और biwi..aur ऐसा कहते हुए राजू रत्न की तरफ देखता है..

बट के होश उड़ जाते है और खुले मुँह से राजू की तरफ देखते है..

राजू उनको मज़ाकिया ढंग se..mooh बंद karo…makkhi घुस जायेगी मुँह में..

बट: यह क्या कह रहे हो राजू? ठाकुर को पता चल गया तो क्या होगा?

राजू: ठाकुर को पता नहीं hai…aur जब तक chalega..bahut देर हो चुकी होगी…

बट: क्या कहना चाहते हो तुम?

राजू: एहि की माला और काम्य भी मेरी मदत कर रहे है ठाकुर से बदला लेने के liye….warna (फ़ोन दिखाते हुए) माला मुझे क्यों देती..

राजू: ठाकुर उन लोगों को भी बहुत परेशान करता hai…khaaskar काम्य को एक रंडी की तरह देखता और रखता है घर mein…woh दोनों भी ठाकुर के नरक के ज़िन्दगी से निकलना चाहती है..

मई आज hi देख कर आया हूँ की ठाकुर ने कैसे काम्य को ज़लील किया और मारा भी..

ारु: कैसे? अगर तुमने उसे देखा है तो ठाकुर को पता नहीं चला क्या?

राजू: nahi…jab मई काम्य से बात कर रहा था तो घर में ठाकुर आ गया tha..aur मैं बाथरूम में चुपके उनकी बातें सुना और देखा भी ठाकुर को काम्य को मारते हुए..

मेरे सम्बन्ध उन दोनों से hai..yeh बात मैंने माँ को भी बताया है और उनकी रज़ामंदी भी है उसमें…

बट: रत्न की तरफ देखते hue…maaji राजू क्या कह रहा है? बात सही है क्या?

रत्न: haan..baat सही hai…Raju मुझसे कुछ नहीं chupaata…maine hi उसे आगे बढ़ने को कहा था…

बट आश्चर्य से रत्न को देखे जा रही thi…unko कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था..

राजू: एक और बात maa….yeh बात अब तक किसीको पता nahi..abhi फिलहाल माला ठाकुर के भतीजे के घर में hai..aur वहां भी हाल बहुत बुरा hai…Bhatije की पत्नी और उसकी माँ को भी उसने परेशान कर रखा hai…shayad हो सकता है की माला मुझसे मदत maange..to शायद मैं इंकार ना कर पाऊं..

ठाकुर का भतीजा उससे भी ज़्यादा हरामी और खतरनाक hai…kya पता शायद वह भी हमें नुक्सान कर सकता hai..usse भी संभल के रहना पड़ेगा अगर ज़रुरत पड़ी तो..

यह बात सुनकर सब के चेहरे के रंग बदल जाते hai…jo राजू देख लेता है..

राजू फिर कुछ सोच कर…

राजू: एक बात पूछूं माँ…

रत्न: हाँ, पूछ..

राजू: जब मैंने अपनी दिल की बात बता दी है और सब राज़ी भी हो गए hai..to क्या आपको लगता है की अब आप भी वह राज़ बता दे जो इतने दिनों से आप अपने सीने में छुपा राखी है?

क्यूंकि ऐसा ना ho..ki यह लोग आपसे पूछे की मेरे इतने सम्बन्ध में आपकी रज़ामंदी कैसे हुई…

जब हम सब को एक साथ प्यार से रहना है और ठाकुर को उसके ठिकाने लगाना hai..to यह भी jaan-na ज़रूरी hai…isiliye आपसे poocha….agar आपको लगता है की अभी भी वह वक़्त नहीं आया hai..to ना बताये..

राजू जब यह बात कहता है तो फिर से तीनो को झटका लगता है..

ारु: क्या कह रहे हो राजू? माजी कौन सी बात अपने सीने में छुपा राखी है?

आज के दिन और कितने झटके देने वाले हो? कहीं यह सब सुन कर हम को दिल का दौरा ना पद jaaye…ek दिन में इतना कुछ सहना मुश्किल है..

रत्न जब ारु के मुँह से दिल का दौरा की बात सुनती है तो झट से ारु के मुँह पे हाथ रख kar…aisi बातें नहीं करते बेटी…

दिल का द्वारा और मरे हमारे dushman..hum nahi…yeh कहते हुए रत्न की आँखों में आंसूं आ जाते है..

सब एक साथ रत्न के पास पहुँच कर उसकी आँखें साफ़ करती है और इंतज़ार करते है की रत्न कुछ कहे..

थोड़ी देर baad…kuch सोच कर..

रत्न: तू सही कह रहा है beta…lagta है वह वक़्त आ गया है तुझे बताने kaa..jo बात मेरे और गुरूजी के बीच हुई थी…

बट: यह गुरूजी कौन है? हमें कुछ समझ में नहीं आ रहा है..

रत्न और राजू एक साथ: तुम लोगों को कुछ समझ नहीं aayega..yeh बात सिर्फ हम दोनों hi जानते है..

फिर रत्न उठ कर अपने कमरे में जाती है और वह छिट्टि लाकर ारु को देती है…

ारु वह छिट्टि पद कर उसके आँखों में आंसूं आ जाते hai..yehi हाल सुधा और संध्या का भी होता है जब वह भी छिट्टि पड़ते है..

राजू: तो बताओ maa…Guruji ने आपसे क्या बात कही थी..

फ्लैशबैक: (Guruji....Raaz का खुलासा)

बात तब की है जब राजू और रत्न पहली बार गुरूजी से मिलने गए the..(Update 9)

गुरूजी राजू को बहार जाने को कहता है तो राजू बहार चला जाता है और रह जाते है गुरूजी और रत्न.

गुरूजी (रत्न से): शायद तुम्हे पता नहीं hoga..lekin बीस साल पहले तुम्हारे ससुरजी मेरे पास आये the…tumhe पता hoga..tumhaari शादी के 2 साल बाद भी कोई संतान नहीं हुआ tha…isiliye परेशान हो कर तुम्हारे ससुरजी मुझसे मिलने आये the..aur तुम्हारी कुंडली भी लेकर आये थे..

मैंने तुम्हारी कुंडली देख कर hi तुम्हारे ससुरजी को बताया था की तुम्हे 4 सन्तानो के सुख की प्राप्ति hogi..lekin अभी तक तुम्हे 2 hi संतान हुए है (1 मर गया hai)…ab इस उम्र में तुम और बच्चे पैदा करना चाहती हो के nahi..yeh मैं तुम पर छोड़ता हूँ..

रत्न: क्या कह रहे हो गुरूजी? 4 संतान और मुझको…

गुरूजी: haan..sahi कह रहा hoon..yeh मैं तुम्हारी कुंडली देख कर hi तुम्हारे ससुर को बताया tha…lekin अभी तुम्हारा 1 hi बीटा है..

तो मैं इतना hi कहूंगा की इसे बहुत प्यार और आदर से paalna..maine इसकी भी कुंडली देखि है..

यह आगे जाकर बहुत अच्छे काम करने वाला है और बहुतों की ज़िन्दगी भी आबाद karega..yeh लड़का जो भी karega..soch समझ कर karega..bhagwaan ने इसे सोचने की बहुत शक्ति दी hai..aur तुम्हे अपना राज़दार banaayega..tum इसकी किसी भी बात को मन मत karna..kyunki यह हमेशा लोगों की भलाई hi करेगा भले hi तुम्हे लगे की बात गलत हो सकती hai..lekin वह (राजू की तरफ इशारा कर के) अपने उम्र से ज़्यादा होशियार और समझदार hai…zindagi और वक़्त बहुत कुछ सीखा देती है इंसान ko..aur एहि हाल तुम्हारे bête का भी है जो इस वक़्त बहार तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है..

Haan…ant में इतना hi kahoonga…tum जो भी निर्णय lo…woh तुम्हारे bête को मंज़ूर hoga..woh तुम्हे कभी ना नहीं kahega…aur तुम्हे सबसे ज़्यादा प्यार karega..aage तुम सब की ज़िन्दगी में उतार चढ़ाव तो आएंगे hi..yeh तो प्रकृति का नियम hai..tumhaara लड़का उन सब से ऊपर उठेगा और तुम सब के लिए बहुत अच्छे दिन भी लाएगा जो हसी और ख़ुशी भरा होगा और जल्दी hi तुम्हारे घर बच्चों की किलकारियों और ख़ुशी से झूमेगा..

वैसे hi तुम्हारा यह बीटा जो भी निर्णय लेगा उसमें तुम उसका साथ और सहमति भी देना. मेरा आशीर्वाद तुम सब के साथ hai..jeevan में आगे बढ़ो और सदैव खुश रहो!!

रत्न गुरूजी को प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लेकर निकल जाती है..

<एन्ड ऑफ़ फ्लैशबैक>

बैक तो प्रेजेंट:


राजू एंड बट रत्न की बात सुन कर यकीन नहीं कर पाते की रत्न जो कह रही hai..sach या झूट..

सुधा: क्या didi..aap क्या कह रही हो? मुझे तो यह सब झूट लगता है..

संध्या एंड ारु: हाँ maaji…hamein नहीं लगता की यह सच कह रहे hai..koi ढोंगी गुरूजी लगते है..

ारु का इतना hi कहना था की रत्न तुरंत ारु के मुँह पे हाथ रख कर..

नहीं beta…tum गलत कह रही ho…Guruji ने जो भी मुझसे कहा hai..sahi है..

उस समय सिर्फ मैं hi यह बात जानती थी की हमारी शादी के 2 साल तक राजू और रवि पैदा नहीं हुए the….kyunki जब हम गुरूजी के पास गए the..us वक़्त रवि तुम्हारे ससुर इस दुनिया में नहीं the..to यह बात सिर्फ मैं hi जानती थी...

सुधा: तो फिर 4 संतानों की बात?

रत्न: उसका तो मई कुछ नहीं कह sakti…lekin गुरूजी की बाकी सब बातें एकदम सही है..

मई राजू की माँ hoon.…aur उसे बहुत करीब से देखा और जाना hai..jo तुम लोगों को पता nahi..usne अब तक जो भी काम किया hai…usne मुझे खुद सब बताया hai…maine कभी उससे पुछा भी नहीं कोई baat...aur मैंने भी उसे एहि वादा लिया था की वह किसीसे कोई ज़बरदस्ती नहीं करेगा..

अब तुम लोग यह बात याद करो की जब तुम्हारा सम्बन्ध राजू से बना tha…to क्या राजू ने तुम में से किसी के साथ ज़बरदस्ती किया tha..yaa फिर तुम hi सब अपनी मर्ज़ी से गए थे उसके पास…

इस बात का ज़िकर होते hi ारु, संध्या और सुधा सोच में पद जाते है और जब याद करते है तो उनको रत्न की बात सच लगती hai…Raju उनसे कभी बत्तमीज़ी नहीं किया tha…aur वह सब अपनी मर्ज़ी से hi राजू के पास गए थे..

ारु: आप सही कह रही हो Maaji…Raju ने meri..aur सुधा और संध्या की और देख kar..hamein बहुत इज़्ज़त दी है और कभी भी हमें गन्दी नज़र से नहीं dekha…humne जो भी गलतियां की hai…use सुधारा ha..naa की हमें वह गलतियां करने के लिए नाराज़गी ज़ाहिर hai..hamesha हमारे लिए उसकी आँखों में प्यार hi देखा hai..naa की कोई बुराई या गुस्सा..

इस बात पर सुधा और संध्या भी मानते है और रत्न को हाँ में जवाब देते है..

राजी भी इन सब बातों को बड़े ध्यान से सुन रहा tha..aur मन hi मन खुश भी हो रहा था..

राजू: थोड़ा खासते hue…has kar..agar आप लोगों की बात हो गयी हो to..main कुछ कहूँ..

राजू: maa…aapne आज मेरा भोज हल्का कर दिया hai..aur उसके लिए बहुत dhanyawaad..aur ऐसा कहते हुए रत्न को गले लगा लेता है और उसकी आँखों से आंसूं आ जाते है..

रत्न उसकी आँखें पॉच kar…naa मेरे राजा bête..rote नहीं..

राजू: आप सही कह रही हो Maa..ab वह ठाकुर को ठिकाने लगाने का वक़्त आ गया है और उसे रुलाने का वक़्त आ गया hai…kuch सोचता हूँ उसके बारे में…

सब को फिर से एक बार देख kar…kya आप सब मेरे साथ हो?

सब एक साथ: तुम तो हमारी जान ho…hum कैसे अलग रह सकते है? मरते दम तक तुम्हारे साथ है..

राजू अपनी बाहें फैला देता है तो चारो उसके पास आकर उसके बाहों में आकर उसको गले लगा लेते है..

राजू: जाने से पहले एक और baat...main तुम सब से एक सामान hi प्यार करता hoon..isiliye आपस में कोई गिला shikwa...Raju इतना hi कहता है की सुधा एकदम से आगे आकर राजू के होंठ चूम लेती hai..aur कहती hai..ab कुछ नहीं kahega...samjhe...Raju मुस्कुरा कर हाँ में सर हिला देता है..

राजू: chalo…raat बहुत हो गयी hai..subah जल्दी उठना है और बहुत कुछ काम है…

सब राजू को प्यार से उसका माथा चूम कर अपने कमरे के लिए निकल जाते है..

निकलते वक़्त ारु पीछे मुद कर राजू को हसरत भरी निगाहों से देखती hai..to राजू उसे कुछ इशारा कर के भेज देता है..

राजू (और दुसरे कमरे में रत्न) चैन की नींद में चले जाते hai…kyunki दोनों के दिल में इतना बड़ा बोझ जो हल्का हो गया था…

राजू ने ारु को क्या इशारा kiya…jaante है अगले अपडेट में..

नोट:

ओने ऑफ़ थे फ्यू उपदटेस विथ no पिक्स and/or sex...but इम्पोर्टेन्ट फॉर थे स्टोरी तो मूव फॉरवर्ड विथ एक्ससिटिंग इवेंट्स वेटिंग तो हैपन...
 
अपडेट 35: नहाने का मजा..

अगली सुबह:

अगली सुबह रत्न उठ कर किचन में अपना काम कर रही होती है…

इतने में राजू भी उठ कर आ जाता है और पीछे से उसे पकड़ कर अपनी बाहों में लेकर गुड मॉर्निंग विश करता है..

राजू: रत्न के गले हो हल्का सा चूमते hue..Good मॉर्निंग माँ..

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रत्न: गुड मॉर्निंग beta..uth गया tu..jaa बैठ jaa…chai बना कर लाती हूँ..

राजू: तुम सब को कोई परेशानी नहीं है naa..khush तो हो ना?

रत्न: परेशानी किस बात की?

राजू: वही जो कल रात को मैं आप सब से बातकिया था और अपने दिल की बात बतायी थी..

रत्न: इसमें परेशानी की क्या बात hai…mujhe तो पहले से hi तूने बताया tha…aur वैसे भी तू तो हम सब का जिगर का टुकड़ा hai…aur मैंने तेरी आँखों में हम सब के लिए सिर्फ प्यार hi देखा hai..to परेशानी की कोई बात नहीं बीटा..

राजू खुश हो जाता है रत्न की बात sunkar..Ratna को पलटा कर उसकी आँखों में देखते हुए इशारा करता है ..और अगले hi पल दोनों के होंठ मिल जाते है और राजू एक गहरा किश रत्न को करता hai..jismein रत्न भी उसका साथ देती है..

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2-3 मं की बाद अलग हो कर…

रत्न: चल jaa…ho गया ना मुँह meetha..jaa..main चाय देती हूँ तुझे..

राजू निकल कर बहार बैठ जाता hai..aur इतने में बाकी तीनो भी फ्रेश हो कर आ जाते है..

लेकिन आज वह सभी एक दुसरे से देखने से शर्मा जाते है और अपनी नज़रें नीचे कर लेती है जो राजू देख लेता hai…aur कहता है..

राजू: क्यों इतना शर्मा रहे हो आप लोग? मैंने कुछ गलत कह दिया क्या?

तीनो एक साथ: नहीं..

राजू: तो फिर यह शर्माना छोड़ do..aur नार्मल तरीके से रहो जैसे रोज़ रहते the…warna…

ारु: वर्ण क्या राजू?

राजू: वर्ण यह की मुझे hi तुम लोगों की शर्म दूर करनी padegi..aur ऐसा कहते हुए पास में संध्या कड़ी रहती है तो उसे पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर उसे अपनी गॉड में बिठा लेता है…

संध्या इसके लिए तैयार नहीं thi..aur शर्माते हुए राजू से अलग होने की कोशिश करती है..

लेकिन राजू उसे मजबूती से पकड़ के रखा tha..aur फिर भी संध्या शर्मा रही थी तो उसका चेहरा पकड़ कर अपनी तरफ करके उसे भी एक गहरा किश करता है उसके होंठों पे..

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राजू: और भी शरमाओगी तो फिर तुम्हे यहीं पटक कर सबके सामने पेल देता हूँ..

संध्या: क्या बात कर रहे हो राजू: कुछ तो शर्म karo…sabhi यहीं है..

राजू: मैं भी तो यही कह रहा hoon…sharmanaa छोड़ do…aur ारु और सुधा की तरफ देख kar…agar तुम लोग भी ऐसे hi रहोगे तो अगली बारी तुम्हारी होगी…

ारु और सुधा भी थोड़ा शर्मा जाते hai…aur राजू se..dhat..sharam करो ..ऐसा कहते हुए हस्ते हुए किचन में भाग जाती है दोनों..

फिर थोड़ी देर बाद रत्न सब के लिए चाय लेकर आती है और सब चाय पीने लगते hai..lekin उनकी आँखों में अब भी शर्म और हाय बची हुई थी..

राजू रत्न से कान में धीरे से कुछ कहता है तो रत्न हस्ते हुए उसे हल्का सा मार देती है..

रत्न: यह क्या कह रहे हो बीटा?

राजू: जो मैं कह रहा hoon..sahi hai..warna सबको मुश्किल होगी..

सुधा: क्या कह रहा है दीदी?

रत्न: वही जो तुमने मुझे किचन में बताया था..

सुधा शर्मा जाती है और कहती hai..humse यह सब कैसे hoga..bahut शर्म आती है..

राजू शरारत se…kyun mausi..jab आप कमरे में खुल कर और मजे से छुड़वा सकती हो (और राजू जान बूझ कर छुड़वाना शब्द उसे करता है) तो फिर सब के सामने में ऐसी शर्म क्यों?

सुधा: अपना मुँह खोले आश्चर्य से राजू की तरफ देखते hue…uspar मज़ाकिया ढंग से मारने को हाथ उठा टी है…

राजू उसका हाथ पकड़ kar..bolo..kya कहती हो Mausi…maa के सामने hi …और बात अधूरा छोड़ देता है जो सब समझ जाते hai…aur सब हसने लग जाते है..

राजू: यह हुई ना baat…main भी यही चाहता हूँ की सब आराम से मस्ती और ख़ुशी में raho…humein जो भी समस्या aayengi..hum सब उसका मिल कर उसका सामना karenge…bolo..kya कहते है…

इस बात पर सभी राजी हो जाते है…

राजू अपनी बाहें फैलाता है तो सब उसकी बाहों में ख़ुशी से आ जाते है…

राजू भी सब को प्यार से माथे पे चूमते हुए अलग कर देता hai…aur सब के चेहरे ख़ुशी से खिल रहे होते है..

राजू: chalo…accha hua..din की शुरुवात में सब के चेहरे पे ख़ुशी देखि hai..aur कहता है की हु तैयार होकर एक बार खेत की तरफ हो कर aayega..aur सब चाय ख़तम करके अपने काम में लग जाते है..

बाथरूम में मस्ती और प्यार:

राजू बाथरूम में नहाने चला जाता है और कुछ देर बाद वहां से आवाज़ देता है..

राजू: maa..main टॉवल लाना भूल gaya..koi मुझे टॉवल ला कर दे..

रत्न और सुधा उस वक़्त एक साथ बैठ कर कुछ बात कर रहे the..Raju की आवाज़ सुनते hi रत्न सुधा से कहती है: लगता है राजू टॉवल भूल गया hai…jaa chhoti..use टॉवल देकर aaja..tab तक मैं किचन का काम देख लेती हूँ..

सुधा; ठीक है didi..aur ऐसा कहते हुए सुधा एक टॉवल लेकर राजू के बाथरूम में जाती है उसे देने..

सुधा: बाथरूम का दरवाज़ा खटखाते hu..Raju, यह लो towel..jaldi नाहा कर आ जाओ..

राजू एकदम मस्ती और शरारत से दरवाज़ा खोल कर टॉवल के साथ सुधा को भी अंदर खींच लेता है..

सुधा एकदम चक्र जाती है इस हरकत से..

Sudha:kya कर रहे हो Raju…main दीदी को बोल कर आयी हूँ की तुम्हे टॉवल देकर किचन में उसकी मदत करूंगी..

राजू भी मस्ती mein..haan..chali jaana..maine कब मन किया hai…thoda पहले प्यार तो कर लो अपने होने वाले बीवी से…

राजू जब ऐसा कहता है तो सुधा एकदम शर्मा जाती hai…aur इसी बीच वह भी पूरी तरह पानी से भीग जाती है..

राजू उसको थोड़ा अलग करके ऊपर से नीचे तक देखते hue…bheege baal…geele होने से उसकी चूचियां एकदम अकड़ जाती है और ब्लाउज में से hi निप्पल्स भी नज़र आते hai..paani की बूँदें उसके बदन से नीचे खिसक रही थी…

और दो बूँदें उसकी नाभि में चली जाती hai…jise देख कर राजू भी लार टपकने लग जाता है…

Raju..kehta hai..jab इतनी सेक्सी होने वाली बीवी पास में हो और मैं कुछ ना karoon…to क्या फायदा…

राजू की बातें सुनकर सुधा भी गरमा जाती hai…aur भले hi वह भी भीगी ho..lekin उसकी टांगों के बीच में भी हलचल मच जाती है..

राजू उसे फिर से पकड़ कर नज़दीक लाता है और इस बार अपने होंठ उसके होंठों से मिला देता है जिसमें सुधा भी उसका पूरा साथ देती है और ज़ोरदार फ्रेंच किश करता hai…dono की जुबां आपस में टकराती है और दोनों की जुबां कुश्ती करने लग जाते है..

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किश करते करते राजू अपना हाथ उसकी चुकी पे ले जाकर ज़ोर से दबाता है..

सुधा aah..ki धीमी आवाज़ निकलती है जो राजू के मुँह में डाब कर रह जाती है…

राजू अपने हाटों से काम चालु रखता है और सुधा की चुकी दबाते हुए उसके ब्लाउज के हुक्स खोल कर उसको ऊपर से नंगा कर देता है…

राजू फिर झुक कर उसकी एक चुकी को मुँह में लेकर चूसने लग जाता है तो दूसरी चुकी को दबाने लग जाता hai…Sudha…aaah…ooohh……ooouccch…karke सिसकी लेती रहती hai..aur अपना हाथ राजू के सर के ऊपर रख कर उसे अपने सीने में दबा देती है…

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राजू को थोड़ी शरारत सूझती है और वह निप्पल को धीरे से काट देता है…

Sudha….aaahhh की आवाज़ निकलती है और कहती hai…kaat-te क्यों ho..bhaagi नहीं जा रही hai..tumhaari hi तो hai…aaraam से चूसो naa..main मन तो नहीं कर रही हो..

राजू: मन नहीं कर रही ho..lekin लगता है तुम्हे मजा नहीं आ रहा है…

सुधा: ऐसा नहीं है Raju..bahut मजा आ रहा hai…pehli बार मैं किसी से भीगे पानी में प्यार कर रही hoon..agar मजा नहीं आता तो क्या मैं तुम्हे अपने सीने से दबाऊँगी क्या?

राजू भी है देता है और उसकी चुकी फिर से शिद्दत से चूसने लगता hai…pehle ek..phir doosra…aur ऐसा करते हुए वह सुधा की साडी भी निकल देता hai..aur साथ में उसकी पेटीकोट का नाडा भी निकल कर अलग कर देता hai..aur पेटीकोट गिर कर सुधा की पाँव में अटक जाती hai..aur हु भी राजू की तरह अब पूरी नंगी हो जाती है…

राजू उसकी चुकी को चूमते हुए नीचे सरक जाता hai..aur उसकी गहरी नाभि में अपनी जुबां दाल कर उसको भी चाटने लग जाता hai..Raju के इस हरकत से सुधा इतना गरमा जाती है की ज़ोर से सिसकियाँ लेते हुए वह पहली बार झाड़ जाती है और अपना पानी छोड़ देती hai..aur हांफे लग जाती है…

सुधा: तुम तो मेरी जान hi लेकर रहोगे..

राजू: जान नहीं jaanu..choot लेकर rahoonga..aur हस्ते हुए वहीँ ज़मीन पे नीचे बैठ कर उसकी छूट की फांक जो एकदम चिपकी हुई thi..alag कर के उसकी छूट पे ज़ोर के चुम्मा देता hai…Sudha फिर से बहक जाती है और राजू का सर उसकी छूट पे दबा देती है..

राजू भी बड़े शिद्दत उसकी छूट को chaat-te चला जाता hai…upar से लेकर नीचे tak….Sudha ाँहें भरी चली जाती hai…aur राजू अपना एक हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड में ऊँगली करता hai..jo की बहुत टाइट थी और ऊँगली घुस नहीं पाती…

राजू धीरे se…bahut टाइट है तुम्हारी gaand…bahut लेने का मन कर रहा है..

सुधा: नहीं Raju..abhi nahi…suhaagraat में तुम्हे कुछ तो कुंवारी मिलनी चाहिए naa…abhi वह कुंवारी hi hai…Shaadi के बाद ले lena..main मन नहीं करूंगी…

राजू है देता है और फिर से छूट चूसै चालु कर देता hai…aise hi 5 मं तक राजू उसकी छूट को चूमता chaat-ta रहता है और इसी बीच सुधा फिर से 2-3 बार फिर से झाड़ जाती है जिसका ुक्सो पता भी नहीं chalta…aur राजू भी बड़े मगन से उसका पूरा पानी पी जाता है..

फिर भी उसका जी नहीं भरता तो सुधा को पलटा कर कहता hai…gaand तो अभी डौगी nahi…chalo…apne मुँह से hi काम चला लेता hoon..aur ऐसा कहते हुए उसकी गांड को भी चाटने लग जाता hai…choot से लेकर गांड को chaat-ta चला जाता है..

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सुधा से गांड पे यह हुम्ला सेहन नहीं कर पाती और गिरने को होती है तो राजू उसे वैसे hi पकड़ लेता hai..aur फिर उसे झाका के फिर से गांड chaat-ta है..

पानी का झरना और छूट और गांड चटाई से सुधा एकदम मगन हो जाती है और हु भी राजू की तरह खूब मजे से चटवाती है…

2-3 मं बाद राजू अपना चेहरा निकल कर अपने होंठ पे लगे रास को chaat-te hue….kehta hai..bahut मीठी हो tum…lotum भी चख lo..aur फिर सुधा को चूमता है और उसका रास उसे hi चखा ता है…

राजू: कैसा लगा तुम्हारा रा?

सुधा: dhat…aise कोई कहता है क्या..

राजू: बहार मैं एहि तो कह रहा tha…sharam छोड़ do..to फिर dekhna..tumhe कितना मजा आएगा…

सुधा: तुम भी समझने की कोशिश karo..main भी एक औरत hai…sharam इतनी जल्दी छूटने वाली है है..

राजू: देखते hai…aur देखना ..जब तुम शर्म छोड़ डौगी तो सब के सामने hi मुझसे chudwaaogi…aur वैसे भी शादी के baad..sab को एक hi कमरे में और बिस्तर में सोना hai..to फिर तब शर्म नहीं आएगी क्या?

सुधा: तब की तब dekhenge…abhi तो रहने दो..

राजू: chalo…koi nahi…ab तुम्हारी बारी hai..aur ऐसा कहते हुए राजू उठ जाता है और अपना लहराता हुआ लुंड सुधा के सामने ले जाता है और उसका सर पकड़ कर अपना लुंड उसके मुँह के सामने ले जाता है..

सुधा भी अब मजे लेने के मूड में thi…Raju की कामुक बातें उसे भी गरम कर दिया था..

सुधा उसका लुंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर देती है और राजू भी बड़े मजे से लुंड चुसवाते hai…aur उसके मुँह को पेलते रहता है..

देखते देखते उसका लुंड पूरा तन जाता है और सुधा के गले में ठोकर मारता है..

सुधा की सांसें अकड़ने लगती है और उसका लुंड निकल कर खांसने लगती hai..aur उसका लुंड थूक से पूरा सना हुआ था..

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सुधा: थोड़ा आराम से मुँह में डालो naa…itni भी क्या जल्दी है..

राजू: क्या करून jaanu…tum इतना अच्छा चूसती हो की रहा नहीं gaya..aur फिर से सुधा राजू का लुंड चूसने में मगन हो जाती hai..aur पूरा लुंड उसके मुँह में लेकर चूसती चली जाती है..

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5 मं तक ऐसे hi लुंड चुसवाने के बाद राजू अपना लुंड निकल लेता है और सुधा को खड़ा कर के दीवार से सत्ता कर पीछे से अपना लुंड उसकी छूट में डालता hai..pehle ठीक से जाता nahi..lekin लुंड को छूट पे अच्छे से सेट करके एक ज़बरदस्त शॉट मारता है जिससे उसका आधा लुंड सुधा की छूट में चला जाता hai..Sudha इस हमले को बर्दाश्त नहीं कर पाती और ज़ोर की चिल्लाती hai..aur उसकी आँखों से आंसूं निकल जाते है..

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राजू उसके मुँह पे हाथ रख kar…ho गया jaanu…aur ज़्यादा नहीं है..

तुम्हारी छूट अभी भी बहुत टाइट hai..isiliye शायद तुम्हे थोड़ी तकलीफ हुई है..

सुधा: टाइट तो hai..lekin इतनी ज़ोर से कोई डालता है क्या…

राजू भी मजे लेते hue….ab शर्म chhodo..aur bolo…kya और कहाँ डाला मैंने…

राजू अपने झटके जारी रखता है..

सुधा: तुम एकदम कमीने हो Raju…mujhe पूरी बेशरम बना doge…to suno…koi इतनी ज़ोर से छूट में लुंड डालता है क्या?

राजू: दूसरों का तो पता नहीं लेकिन मैं ज़रूर daaloonga..aur ऐसा कहते हर फिर से तेज़ शॉट मारता है और इस बार राजू का पूरा लुंड सुधा की छूट की जड़ तक चला जाता है और उसके बच्चेदानी से टकराता है…

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सुधा को भी यह एहसास होता है की राजू का लुंड उसके बच्चेदानी को छु रहा hai..woh भी सेहम जाती है (और उसे पिछले रात की बात याद आती है) और मजे से चुदवाती है..

राजू भी झटके पे झटके मारता रहता है और ऐसे hi ज़बरदस्त पेले होती है..

5-6 मं के पेलने के बाद सुधा कहती hai…Raju..mere पाँव दुःख रहे hai…to राजू अपना लुंड निकल कर वहीँ सुधा को गीले फर्श पर सुला कर उसके ऊपर चढ़ कर उसको चूमते हुए फिर से अपना लुंड उसकी छूट में दाल कर छोड़ना शुरू कर देता hai…Sudha भी सिसकियाँ लेते हुए चुदवाती है..

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इसी पोजीशन में फिर से 5 मं तक छोड़ने के बाद सुधा फिर से झाड़ जाती है और थक भी जाती है..

सुधा: तुम थकते नहीं हो क्या? पिछले 10 मं से चोदे जा रहे ho..main इतनी बार झाड़ चुकी hoon..lekin तुम तो लगे हो..

राजू: क्यों, तुमको मजा नहीं आ रहा है क्या?

सुधा: मजा तो आ रहा hai…lekin थक भी गयी हूँ..

राजू: 2 मं और ruko…main भी आ रहा hoon…aisa बोल कर राजू छोड़ने की रफ़्तार बढ़ा देता है और phir…main आए रहा hoon….kahan निकालूँ?

Sudha…mere अंदर नहीं अभी…

राजू झट से अपना लुंड सुधा की छूट से निकल कर उसके मुँह के पास जा कर उसके मुँह और चेहरे पे अपना पानी छोड़ देता hai..aur वह भी थक हार कर वहीँ लेट जाता है..

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सुधा: बाप re…kitna पानी निकलता है tumhaara…agar किसी औरत के अंदर इतना पानी डालोगे तो बच्चों की लाइन लगा doge…aisa बोल कर सुधा हसने लगती है…

राजू भी हस्ते hue…is बार तो मुँह में गिराया hai…agli बार सीधा तुम्हारे andar…aur फिर अगले महीने खुश khabar..aisa कह कर सुधा को आँख मार देता hai…Sudha भी शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लेती है…

सुधा: टब hi naa…bahut बेशरम हो गया है…

राजू: kyun…aisa क्यों कहती हो? तुम्हे तो सबसे पहले माँ banaaonga…dekh लेना…

सुधा राजू को हल्का सा मुक्का मार देती है और दोनों भीगे फर्श पर बाहों में पड़े रहते है..

राजू: मजा आया क्या?

Sudha:haan..bahut…pehli बार बाथरूम में सेक्स का मजा लिया है…

राजू: और मैं भी…

सुधा: chalo..ab बहुत हो gaya…zyaada लेट हो गए तो दीदी या और कोई आ जायेगी..

राजू: आने दो naa..main थोड़ी hi ना डरता hoon..woh सब भी तो मेरी बीवियां बनने वाली है (और सुधा के कान में धीरे se…tumhaari sautan)..aisa कह कर राजू है देता है..

फिर दोनों अच्छे से नाहा कर बहार निकल जाते hai…Sudha भी धीरे से अपने भीगे कपड़ों में hi अपने कमरे में चली जाती है.

रत्न और सुधा की nok-jhok

थोड़ी देर baad..jab सुधा रत्न से मिलती है तो..

रत्न: क्यों re..itne देर कहाँ लगा di…Raju को तो सिर्फ टॉवल देने गयी thi..phir इतनी देर क्यों?

सुधा: क्या बताओं didi…Raju भी naa…chhodta hi नहीं hai…mujhe भी बाथरूम में खींच liya..aur….thoda हल्का सा शर्मा जाती है..

रत्न भी उसकी टांग खींचते hue…phir क्या हुआ..

सुधा: आपको तो पता hi होगा didi..phir क्यों टांग खींच रही हो..

रत्न: राजू भी तो एहि कह रहा tha..sharmaana छोड़ do…to बता क्या हुआ..

सुधा: होना क्या था didi…Raju ने मुझे बाथरूम में खींच कर थोक diya…aur हसने लगती hai…aur वह भी थोड़ा बेशरम होते hue..dheere से रत्न के कान mein…maine भी पहली बार बाथरूम में चुदाई का मज़ा लिया hai..aur कह कर रत्न को आँख मार देती है..

सुधा की चेहरे में चमक देख कर रत्न के आँखों में आंसू आ जाते है..

रत्न को रट देख कर सुधा घबरा जाती है और पूछती है की क्या हुआ? उसने कुछ गलत किया क्या?

रत्न: नहीं रे pagli..yeh तो ख़ुशी के आंसूं hai…tere चेहरे में चमक देख कर मैं बहुत खुश hoon…aise hi खुश रहा कर मेरी gudiya…aise प्यार भरी बातें बोल कर रत्न सुधा का माथा प्यार से चूम लेती है. सुधा भी रट हुए रत्न के गले लग जाती hai..aur कहती hai…didi…woh दिन भी दूर नहीं जब आप अपने राजू के नीचे लेती rahogi…aur उसे आप hi छोड़ने को kahogi…main भी जानती hoon…jab से हादसा हुआ hai..aapke दिल ने भी बहुत कुछ सहा hai….lekin अपना राजू सब ठीक कर देगा..

रत्न: मैं भी तो उस दिन का इंतज़ार कर रही हूँ पगली…

और ऐसे hi थोड़ी और बातें करते हुए अपना काम कर लेती है..

फिर थोड़ी देर बाद राजू भी तैयार हो कर आ जाता है..

राजू का तेज़ दिमाग:

सब लोग नाश्ता करते waqt…Raju कुछ सोचता है…

राजू: माँ मैं एक बार खेत हो कर आता हूँ…

ारु और संध्या se…aap लोग बाज़ार जा कर घर का ज़रूरी सामान ले aao..aur जैसा मैंने kaha..dono साथ jaana..aur अलग मत होना..

ारु: ठीक है..

फिर राजू अपने खेत के लिए “निकल” जाता है..

जब वह घर से निकलता है तो एक नज़र दौड़ाता है और देखता है की कुछ अनजाने लोग थोड़ी दूर पे चाय की टापरी पे बैठे हुए है..

राजू वहां से निकल जाता hai…lekin हु खेत ना जाकर बगल में दूसरी गली के पास जा कर बिना किसीको दिखे अपने घर और उन लोगों पर नज़र रखता है…

कुछ देर बाद ारु और संध्या भी बहार आकर बाजार को चले जाते है..

ठीक उसी वक़्त हु आदमी भी उनका पीछा करते हुए बाजार जाते है..

राजू का शक अब यकीन में बदल गया था की वह लोग ठाकुर के आदमी है..

वह भी उनके पीछे चला जाता hai..woh भी देखना चाहता था की वह आदमी कहाँ जा रहे है..

जैसा राजू सोचता है, ठीक वैसे hi वह आदमी भी उन दोनों के पीछे बाज़ार जाते hai..bina ारु और संध्या के jaane...lekin उन्हें यह पता नहीं था की उनका भी पीछा हो रहा है..

ारु और संध्या बाजार से कुछ सामान लेकर घर की और निकल जाते hai…us वक़्त बाजार में बहुत चेहेल पहल और भीड़ tha…isiliye वह आदमी कुछ नहीं करपाते और अपने रास्ते (ठाकुर के पास) चले जाते है…

राजू ारु और संध्या का घर तक फिर से पीछा करता है और जब हु लोग घर पहुँच जाते है तो हु भी खेत के लिए निकल जाता hai….aur आगे क्या करना है इसके बारे में सोचता है…

आगे राजू क्या करने वाला hai..next अपडेट में जानेंगे…
 
अपडेट 36: ठाकुर की naakaamyaabi….aur शादी की तैयारी..

ठाकुर का हाल:

ठाकुर के आदमी वापस निकल ठाकुर के घर चले है.

ठाकुर: तो क्या खबर है? कुछ बात बानी क्या?

पहला आदमी: नहीं sahib..zyaada कोई बात नहीं bani..woh लोग घर से निकलते hi नहीं है और आज जब निकले थे तो उनको पकड़ने के लिए हमने उनका पीछा किया..

लेकिन हु मार्किट में घुस गए और मार्किट में बहुत भीड़ tha…to हम कुछ नहीं कर paaye…utne भीड़ में उनका उठाना मुश्किल tha..isiliye हम लौट आये..

ठाकुर इस पर बहुत गुस्सा हो जाता है और आग बबूला हो जाता है और उसके आदमियों को गाली देता है..

ठाकुर: साले हराम khoron…mera एक काम नहीं कर paaye..kya समझा tha..aisi लापरवाही मुझे पसंद नहीं hai…agar अगले बार भी ऐसी hi खबर डोज तो याद rakhna..aur ऐसा कह कर बात अधूरी छोड़ देता है..

ठाकुर के आदमी फिर उसको सलाम कर के निकल जाते है..

ठाकुर गुस्से से घर जाता है और अपना गुस्सा और ठरकपन काम्य पर निकालने की कोशिश करता है..

घर जा कर वह सीधा काम्य को जकड लेता है जो उस वक़्त अपने कमरे में काम कर रही thi..aur उसे गाली देते हुए उसके उसे बिस्तर पे ले जाके पटक देता है और अपने नाकामयाबी का गुस्सा उस पर निकलते है.

ठाकुर: saali..aaj बहुत दिन हो gaye..tune मेरी प्यास नहीं bujhaayi…chal नीचे baith..aur ऐसा करते हुए ठाकुर अपना धोती निकल देता है और अपना छोटा लुंड काम्य के मुँह में ठूस देता है..

काम्य ना ना करती रहती है लेकिन ठाकुर नहीं मंटा और उसे मारते हुए अपने लुंड उसके मुँह में दाल कर चूसने को कहता है..

काम्य को यह सब पसंद नहीं tha..lekin वह कुछ नहीं कर sakti..apne आँखों से आंसूं बहाते हुए बेमन से उसका लुंड अपने मुँह में ले लेती हैं और चूसने लगती है..

2-3 मं के चूसै के बाद hi ठाकुर से रहा नहीं जाता और उसके मुँह में hi 2-3 बूँदें गिरा कर झाड़ जाता hai…aur काम्य को धकेल कर कमरे से बाहर चला जाता है..

काम्य को यह सब पसंद नहीं aata..aur जैसे hi ठाकुर कमरे से निकल जाता है तो काम्य भी भाग कर बाथरूम जा कर उल्टियां करती हुई उसका माल निकल लेती है और ठाकुर को मन में गाली देती hai..haraami saala…jab मेरा वक़्त आएगा naa..to ऐसा बदला लूंगी की तू मरते डैम तक याद rakhega…aisa hi कुछ सोच कर हु भी गुस्से से फ्रेश हो कर बहार आ जाती है..

ठाकुर अपने कमरे में जाकर अजय को फ़ोन करता है..

ठाकुर: फ़ोन pe..sun chhote..lagta है मेरे आदमियों से काम नहीं हो रहा hai..tu hi कुछ कर और उन लौंडियों को उठा le…phir देखते है वह लौंडा (राजू) कैसे उन्हें बचाता है..

अजय: ठीक है chachu..main जल्दी hi कुछ करता हूँ और अपने आदमियों को वहां भेजता हूँ.

वहीँ दूसरी तरफ काम्य अपने आप को ठीक कर के माला को फ़ोन करती है..

काम्य: माला se..yahan हालत ख़राब हो रही hai..Thakur आज बहुत गुस्से में घर आकर मेरे साथ ज़बरदस्ती kiya..aur थोड़ा डिटेल में माला को बताती है क्या हुआ..

माला: थोड़े दिन और सबर kar..main कुछ करती hoon..yahan भी वैसा hi हाल है..

और फिर थोड़ी देर ऐसे hi बातें कर के फ़ोन कट कर देते है..

रात में राजू के घर:

रात को राजू घर आकर खाना वगैरह काम कर के अपने कमरे में सोने जाता hai..kamre में जाकर वह माला को फ़ोन करता है..

राजू: मेमसाब, कैसी हो?

माला: राजू, जब हम अकेले में बात करते है तो मुझे मेरे नाम से bula..memsaab कहने की ज़रुरत नहीं है..

राजू: ठीक hai…to suno..aaj मायने hi पता लगाया है और मेरा शक भी सही nikla..mere घर पे ठाकुर की निगरानी है..

माला: तुम्हे कैसे पता चला?

राजू: डिटेल में बताने के लिए अभी टाइम नहीं hai..jab मिलेंगे तो बता doonga..but इतना है की मैंने जो बात तुमसे कहा tha..woh सुच nikla..mujhe भी सावधान रहना पड़ेगा..

वहां के क्या हाल है?

माला: यहाँ भी कुछ ऐसा hi hai..Ajay मुझ से पूछ रहा था की मैं यहाँ क्यों aayi..wagairah..lekin मैंने जवाब ताल diya..shayad ज़्यादा दिन यहाँ रह ना paaoon..inko भी सतर्क रहने के कहूँगी..

राजू: ठीक hai..jab यहाँ आओगी तो मुझे फ़ोन karne..milne आ jaaoga..aur फ़ोन कट कर देता है..

राजू कुछ अपने मन में सोचता है और अपने प्लान को अमल करने की ठान लेता hai..man में सोचता hai..Thakur..apne दिन गईं le..zyaada दिन नहीं बच पायेगा मुझ से…

उस रात और कुछ नहीं होता और सब अपने कमरे में सो जाते है.

राजू की चाल:

अगली सुबह..


राजू फ्रेश हो कर अपने “काम” के लिए घर से निकल जाता hai..woh अपने दोस्त से गाडी लेकर ठाकुर के घर से कुछ दूर रह कर उसका इंतज़ार करता है..

थोड़ी देर में ठाकुर अपने गाडी से निकल जाता है और राजू उसका पीछा करता है..

ठाकुर गाँव से दूर एक खंडहर पे जाता है जहाँ अजय उसका वेट कर रहा tha..yeh वही जगह tha..jahan रोज़ ठाकुर अपने आदमियों और अजय से मिलता रहता है और अपने काले काम करने की योजना बनाते रहता hai..aur पिछली बार भी राजू इस जगह आया था..

राजू भी उसका पीछा करते हुए वहां पहुँच जाता है और फिर एक जगह ढूंढता है जहाँ से वह खंडहर के अंदर का नज़ारा अच्छे से देख पता है और सभी लोग उसे नज़र आते है..

ठाकुर भी वहां पहुँच जाता है और अजय से बात करने लग जाता है..

भले hi ठाकुर और अजय नार्मल आवाज़ में बात कर रहे the..lekin सुनसान होने की वजह से उनकी बातें कमरे में गूँज रही थी जी की राजू को सुनाई दे रही thi..(pichli बार जब राजू यहाँ आया tha..to उसे यह जगह नहीं मिली thi..doosri जगह से उन्हें देखा था लेकिन उस वक़्त राजू को उनकी बातें सुनाई नहीं दी थी..)

ठाकुर का राज़:

ठाकुर: छोटे, अपने आदमी लाया है क्या? मुझे अब देर नहीं करना चाहिए..

अजय: लाया तो हूँ chachu..lekin आप उन लोगों के पीछे क्यों पड़े हो?

ठाकुर: तू नहीं jaanta…pichle साल मैंने उसके घर की एक औरत को अगवाह करवाया tha..lekin उस लौंडे ने उसे बचा liya…aur ठाकुर अपने धोती के ऊपर से अपना लुंड मसलते hue..tujhe शायद पता ना ho..woh एकदम माल लौंडिया thi..tu भी देखेगा तो तेरा भी यही हाल होगा…

और इतना hi nahi..uske पहले एक और लौंडिया को मैं उठवाना चाहता tha..lekin उसका भाई बीच में आकर पानी फेर दिया और उससे शादी कर liya..isiliye, मैंने उसको (रवि, Raju’s ट्विन बरोथेर) और उसके बाप को मार diya..aur ऐसा दिखाया की उनका एक्सीडेंट हुआ है..

राजू जब यह बात सुनता है तो उसका खून खौल जाता hai..aur बहुत गुस्सा आता है ठाकुर pe..aur उसकी आखों से आंसूं निकल जाते hai…lekin अभी समय ठीक नहीं tha..to वह कुछ नहीं करता और उनकी बातें सुनता रहता है..

ठाकुर: एक और बात chhote…unki ज़मीन जो है naa..woh गाँव का सबसे बड़ा और बेहतरीन ज़मीन hai..use हमने ले लिया na..to हम मालामाल हो jaayenge…gaanv के बहुत ज़मीन मैंने हड़प लिए hai..lekin साला यह hi एक ज़मीन बची है तो उसके बाप से ले नहीं पाया..

अजय: तो यह बात है chachu..theek hai..main अपने आदमी भेजता हूँ और जल्दी hi उन औरतों को आपके सामने लेकर आऊँगा और वह सब आपके नीचे hongi..aur उनकी ज़मीन भी ले lenge..ek तीर से दो निशाँ…

ठाकुर: शभाष chhote..tujhse यही उम्मीद थी..

अजय: ठीक hai..jaldi hi आपको खबर करता hoon..taiyyar रहना..

और फिर ऐसे hi कुछ बाते कर के दोनों वहां से निकल जाते है..

राजू भी चुपके से वहां से निकल जाता hai..uske मन में भी उथल पुथल हो रहा tha…Thakur की बातें सुन kar…lekin अब उसने निश्चय कर लिया था की ठाकुर का काम तमाम करने के लिए..

शादी की तैयारी

तभी उसे कुछ याद आता है और गाँव से थोड़ा दूर एक मंदिर जाता है जहाँ के पुजारी को पहले से hi थोड़ा जानता tha..aur यह वही पुजारी था जिसने रवि और ारु की शादी की थी..

मंदिर जा कर दर्शन करने के बाद राजू पुजारी से बात करता है..

राजू: पुजारी ji..mujhe आपसे कुछ बात करना hai..akele में..

पुजारी: थोड़ा तेहरो beta..jab भीड़ काम हो जाए तो फिर बात करते है..

थोड़ी देर बाद जब भीड़ काम हो जाता है और ज़्यादा लोग नहीं रहते तो राजू उनके पास जा कर कहता है..

पुजारी: बीटा, तुम वही हो naa…kuch साल पहले तुम्हारे भाई की शादी मैंने hi करवाई थी..

राजू: जी haan..aap सही कह रहे ho..isiliye मैं आपके पास आया हूँ..

पुजारी: bolo..kya बात है?

राजू: पुजारी ji..mujhe शादी करनी है..

पुजारी: तो इसमें दिक्कत क्या है बीटा?

राजू: दिक्कत यह है की मैं तीन लोगों से शादी करना चाहता hoon…woh तीनो hi मेरी जान का टुकड़ा है और वह भी मुझसे उतना hi चाहती hai..woh भी मुझसे शादी करने के लिए तैयार है..

राजू: मैं जानता hoon..samaj और लोगों के नज़रिये में गलत hoga..lekin मुझे उनकी चिंता नहीं hai..mujhe आपकी मदत chahiye..lekin मैं चाहता हूँ की यह बात आप किसीको ना bataaye…agar हो सके तो आप घर hi आकर हमारी शादी करवा दीजिये..

पुजारी: ठीक है beta..yahan शादी करवाना ठीक नहीं rahega..agar लोग देख लेंगे तो मुश्किल हो जाएगा..

राजू: बहुत धन्यवाद aapka…kab शादी करवा सकते है?

पुजारी: वैसे तो मैंने तुम्हारी कुंडली देखि नहीं hai..lekin परसों का दिन बहुत अच्छा hai..us दिन इस गाँव और बाकी गावों में भी बहुत शादियां हो रही hai..bahut अच्छा दिन hai..tum भी उस दिन शादी कर लो..

राजू: ठीक hai..jaisi आपकी aagya..lekin आप को टाइम मिलेगा क्या आने के liye..aap भी तो बहुत बिजी होंगे..

पुजारी: haan…mujhe और भी 2-3 शादी करना है उस din..lekin मैं तुम्हारे घर आ jaaonga..bas..zyaada देर नहीं रह sakta..to सब तैयार rakhna..shaadi जल्दी समाप्त कर के निकल जाऊँगा…

राजू: ठीक है पुजारी ji..unke पेअर छु कर आशीर्वाद लेकर अपने घर के लिए निकल जाता hai..Raju उनको कुछ पैसे भी दे देता है…

राजू की घर में बातचीत:

राजू जब घर जाता है तो थोड़ा सीरियस और सोच विचार में रहता है..

रत्न उसे देख kar..kya हुआ beta..aisa गुमसुम क्यों है? सब ठीक तो है ना..

राजू: haan..theek है maa..ek काम करते hai..mujhe आप सब से बात भी करनी hai…khaana खा कर मेरे कमरे में आ जाना..

रत्न राजू की बात सुन कर थोड़ा घबरा जाती है और कहती है..3 दिन पहले भी तूने हमें अपने कमरे में बुलाया tha…sab ठीक तो है ना बीटा? मुझे बहुत घबराहट हो रही है..

राजू रत्न को अपनी बाहों में lekar..sab ठीक है maa..mujh पर विश्वास रखो..

रत्न: तेरे पे hi तो विश्वास है beta..tere सहारे hi तो जी रहे है हम sab..aur उसकी आँखों से आंसूं आ जाते है..

राजू उसकी आँखें पॉच कर उसे अपने गले लगा लेता है..

रात को खाना खाने के बाद राजू अपने कमरे में चला जाता है और उन सब का इंतज़ार करता है..

चरों औरतें किचन में अपना काम निपटा कर घबराते हुए राजू के कमरे में आते है..

राजू उन्हें देख kar..maahaul को थोड़ा हल्का करने के liye..arre..aao..baitho..aise घबरा क्यों रहे ho…darne की कुछ बात नहीं hai..main हूँ ना..

फिर चारो वहां बैठ जाती है और राजू की तरफ सवालिया नज़रों से देखती है..

राजू फिर बात करने लगता है..

राजू: पहली baat..maine जो 3 दिन बताया tha..woh बात सुच है..

ारु: कौनसी बात?

राजू: वही की ठाकुर के कुछ आदमी हम पर नज़र रख रहे है..

सुधा: तेरे को कैसे पता चला?

राजू: 2 दिन पहले जब मैं काम के लिए निकला tha..aur आप से कहा था की घर के लिए कुछ सामान लाने ko…jab आप घर से निकली तो मैं भी यही tha…dekhna चाहता था की मेरा शक सही है के nahi..aur मेरा शक सही निकला..

जैसे hi तुम दोनों घर से मार्किट के लिए जा रहे the..to दो आदमी तुम्हारा पीछा कर रहे the..aur मैं उनका पीछा कर रहा था..

उस दिन मार्किट में बहुत भीड़ tha..to वह दोनों तुम्हारे नज़दीक नहीं आ paaye..nahi तो मैं वहीँ उनको मार देता..

ारु और संध्या अपना मुँह खोले यह सब सुन रहे the..kyunki उनको पता नहीं था की कोई उनका पीछा कर रहे है..

मैं यह कन्फर्म करने के लिए ऐसा kiya..aur कन्फर्म भी हो गया hi की हमें ठाकुर और उसके भतीजे से खतरा है..

रत्न: यह भतीजा बीच में कहाँ से आ गया ?

राजू: अब अपना दिल थाम के बैठ jaao..main जो कह रहा hoon..bahut कठिन बात hai…lekin आगे क्या और कैसा करना hai..maine सब सोच लिया है..

रत्न: क्या:

राजू: बात यह है की आज मैं ठाकुर का पीछा किया और वह अजय से मिलने gaya..Ajay के पूछने पर ठाकुर ने अपने राज़ उसे बता दिया..

सुधा: कौनसे राज़?

राजू: राज़ यह है की भाई और बापू का एक्सीडेंट नहीं हुआ है बल्कि ठाकुर ने उन्हें मरवाया hai…yeh बात सुनते hi ारु और रत्न ज़ोरो से रोने लगती है…

सुधा और संध्या उन्हें अपनी बाहों में लेकर दिलासा देते है..

ारु और संध्या की तरफ देख संध्या को होली के दिन उठवाना और ारु की शादी से पहले ठाकुर की उस पर nazar..etc..etc…sab बता देता hai…jo ारु और संध्या भी हाँ में जवाब देती है..

राजू: और सबसे बड़ी baat..Ratna की तरफ देखते hue..Thakur की गन्दी नज़र हमारे ज़मीन पर hai..jo की इस गाँव का सबसे अच्छा ज़मीन hai..woh उसे भी हड़पना चाहता है जैसे की बाकी लोगों की ज़मीन उसने हड़पा hai…bapu तैयार नहीं the..aur ठाकुर ने उसका बदला लेने के लिए सब कुछ किया…

कमरे में खामोशी चा जाती है और कोई कुछ नहीं कह पाटा..

थोड़ी देर के बाद राजू hi ख़ामोशी तोड़ते हुए कहता है..

राजू: मैं जानता hoon..hum सब को बहुत तकलीफ हो रही hai..lekin मुझ पर भरोसा rakho..main ठाकुर से ऐसा बदला लूँगा की वह जीते जी मर जाना चाहेगा…

रत्न: जो भी करना है beta..karo..main तुम्हे रोकूंगी nahi…mujhe जल्दी hi वह खबर चाहिए…

राजू: चिंता मत करो maa..maine सब सोच रखा hai..bus कुछ वक़्त की बात है..

राजू फिर माहौल को हल्का करते hue..ek और एहम बात बताना है..

रत्न: और क्या बचा है बताने के लिए? और कितना दिल तोड़ेगा?

राजू: नहीं maa..yeh ख़ुशी की बात है..

रत्न: क्या?

राजू: maa..main आज घर आते समय गाँव के पुजारी से बात की है..

वह कह रहे थे की परसों का दिन बहुत अच्छा है और हम सब की शादी कर देंगे..

यह बात सुन कर ारु, संध्या और सुधा शर्मा जाती है और अपनी नज़रें नीचे झुका लेती है..

रत्न: बीटा, इतनी जल्दी kaise…aur वैसे भी हमारा मूड भी ख़राब है..

राजू: मैं जानता hoon..lekin हम ठाकुर के दर से अपना जीना और जिंदगी तो ख़राब नहीं कर सकते ना..

और वैसे bhi..maine सब सोच के रखा hai..aage क्या और कैसे करना है और ठाकुर से बदला कैसे लेना hai..tum उसकी चिंता मत करो..

राजू सब की तरफ देख कर: मुझ पर भरोसा है ना तुम सब को?

चारो एक साथ हाँ में सर हिला देते है..

राजू: तो फिर बात pakki…ab ख़ुशी के दिन अपने रहेंगे और ठाकुर की उलटी गिनती शुरू..

सब हाँ में सर हिला देते है..

राजू फिर हस्ते hue…to कल बहुत काम hai..kal सब के लिए खरीदारी भी करनी hai..samay बहुत काम hai..theek?

तीनो की तरफ देख kar..kya क्या चाहिए तुम लोगों को?

तीनो एक साथ: आपको जो अच्छा लगे, ले आना..

राजू सुधा की तरफ देख kar..kal आप मेरे साथ chalna…mil कर खरीदारी करते है..

सुधा शर्मा जाती है और हाँ कहती है..

राजू: तो फिर ठीक hai..kal जल्दी hi निकल jaayenge..aur haan…Sandhya की तरफ देख kar..aap अपनी बहिन को फ़ोन कर के बुला lo..woh भी यहाँ आएगी तो अच्छा rahega…aur उससे भी मिलना हो जाएगा..

संध्या: उसको बुलाने की ज़रुरत है क्या?

राजू: haan..kyun nahi..behcaari वह भी तो अकेली hai..uska पति तो हाथ पाँव तुड़वाये घर बैठा hai..kuch तो नहीं कर सकता..

रत्न भी राजू की बात को मान जाती है और संध्या से कहती है की उसे भी बुला ले..

सब लोग अपने कमरे से निकल जाते hai..sone के लिए…

राजू भी उठ कर दरवाज़ा बंद करने को आता hai…to ारु पलट कर राजू को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते hue….bahut अच्छा काम किया तुमने Raju…parson का इंतज़ार रहेगा…

राजू: मैं bhi…aur है देता है…

सब लोग अपने कमरे में जा कर अपने ख्यालों की वादियों में खो जाते है…

नोट: थिस इस आल्सो ा "सेक्स लेस्स" update...lekin नेक्स्ट 3-4 उपदटेस विल हैवे हॉट एंड रोमांटिक सेक्स...
 
अपडेट 37: शादी की shopping.....aur सरप्राइज..

अगली सुबह:

अगली सुबह सब उठ कर हॉल में आकर चाय पी रहे होते hai…kuch के चेहरे पर शर्म तो कुछ के चेहरे पर खुशियां साफ़ झलक रही थी..

चाय पीते वक़्त राजू कहता है..

राजू: मेरे साथ शॉपिंग करने के लिए कौन शहर कौन आएगा? यहाँ गाँव में तो ज़्यादा कुछ मिलने वाला नहीं hai..to शहर hi जाना पड़ेगा..

चारो चुप्पी साढ़े बैठे रहते है चाय पीते hue..lekin कोई कुछ नहीं कहता..

राजू समझ जाता है की सब शर्मा रही है तो राजू hi कहता है..

राज: maa..mai मौसी को लेकर जाता hoon…akele सब काम करना मुश्किल होगा..

सुधा थोड़ा ना नुकुर करती है लेकिन आखिर में मान जाती है..

राजू: तो ठीक hai..mausi..aap भी तैयार हो jaao..mai भी तैयार होकर आता hoon..bahut काम है..

राजू संध्या से: आपने रानी को फ़ोन करके बुलाया है क्या?

संध्या: nahi..mai अभी फ़ोन करती हूँ usko..aisa कहते हुए सबके सामने hi संध्या रानी को फ़ोन करती है और उससे बात कर के घर आने को कहती है..

संध्या: दीदी मान गयी hai..dopahar तक आ जायेगी..

फिर सब लोग अपने काम में लग जाते है..

रत्न किचन में सब सामान सेट कर रही होती है तो राजू वहां जा कर रत्न को पीछे से पकड़ कर अपनी बाहों में लेते हुए…

राजू: maa..kuch चाहिए क्या आपको?

रत्न: nahi..tujhe जो अच्छा lage..le आना..

राजू रत्न को पलट कर उसको प्यार से गले लगा kar..mai जो भी laaonga..aapko पसंद hi aayega..aisa कहते हुए रत्न को आँख मार देता hai..aur फिर कहता है..

राजू: बस, यह सब हो जाने दो maa…maine ठाकुर के बारे में कुछ सोच रखा hai..kaise उसे ठिकाने लगाना है और कैसे हमारा बदला पूरा होने वाला है..

रत्न: मैं इंतज़ार करूंगी beta..main भी तेरी बाहों में आने के तड़प रही hoon..agar यह वादा तुमसे नहीं लेती तो…

राजू: मैं भी जानता हूँ maa…aur haan..sabar का फल मीठा होता hai…aisa कह कर राजू है देता है तो रत्न भी है देती है..

फिर ऐसे हो छोटी मोती बातें कर के बाहर आ जाता hai..aur इतने में सुधा भी तैयार हो कर बहार आ जाती है..

राजू उसे देख कर देखता hi रह जाता hai…simple साडी में भी सुधा बहुत सेक्सी लग रही थी..

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उसका फिगर उसकी टाइट साडी में केहर धा रहा था..

निकलने से पहले राजू सब को कहता है की संभाल कर rahe…thakur से खतरा अभी टाला नहीं hai..use नहीं पता है की हमें मालूम है की उसकी नज़र अपने घर पे hai..to ध्यान देना..

और संध्या की तरफ देख kar..jab आपकी बहिन आ जायेगी आप और ारु जा कर उसे बस स्टेशन से ले आना…

शादी की shopping..aur Raju-Sudha की सेक्सी बातें..

राजू और सुधा शहर के लिए निकल जाते hai….lekin उससे पहले जब वह दोनों घर से निकलते है तो राजू एक नज़र दौड़ाता है और देखता है की ठाकुर के आदमी वहीँ पास एक चाय की टापरी पे चाय पी रहे होते है लेकिन उनका ध्यान घर पे नहीं होता (और शायद यह गलती कर बैठे थे). उनके बिना देखे hi राजू और सुधा भी घर से निकल जाते है..

वह दोनों बस से शहर चले जाते है और वहां थोड़ा जलपान कर के एक अचे मॉल में चले जाते है..

राजू और सुधा बहुत दिनों बाद शहर आये हुए the..aur फिर मॉल में भी बहुत दिनों बाद गए थे..

राजू सुधा का हाथ पकड़ कर मॉल में घूम रहे थे और सुधा बहुत शर्मा रही थी..

राजू उसे देख कर:

राजू: इतना क्यों शर्मा रही हो मौसी? और धीरे से उसके कान में कहता hai..kal शादी के बाद तो आपको नाम से bulaaonga..to कोई परेशानी तो नहीं है ना?

सुधा भी शर्माते hue…jab तुम्हारी बीवी बन जाऊँगी तो नाम से hi bulaana..mujhe भी अच्छा लगेगा..

ऐसे hi बातें करते हुए घुमते है और एक अच्छे कपडे की शॉप में चले जाते है..

शॉप में जा कर राजू सुधा से पूछता है की क्या लेना है..

सुधा राजू की तरफ सवालिया नज़र से देखती है..

राजू है देता है और दुकानदार से कुछ साड़ियां और ghagra-choli पसंद करता है और सुधा को भी दिखाता है..

सुधा अपनी आँखें बड़ी करके राजू की तरफ देखती है और कहती है की इतना सब लेना ज़रूरी है क्या?

राजू: haan..zaroori hai…shararat से धीमी आवाज़ mein..shaadi के दिन मेरी बीवियां बहुत सुन्दर और सेक्सी दिखनी चाहिए ना..

जब राजू यह बात कहता है तो सुधा शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती..

4 सेक्सी और थोड़ा ट्रांसपेरेंट साड़ियां, स्लीवलेस & बैकलेस ब्लौसेस और 4 ghagra-choli ले लेता है..

सुधा उनको देख और फील कर के शर्म से पानी पानी हो जाती hai..aur सोचती है की उनको पहन कर कैसे फील karegi..aur यह सब सोचते हुए वह भी थोड़ा गरम हो जाती hai..aur पाती है की उसकी पंतय भी गीली हो गयी hai..yeh जान कर hi उसके चेहरे पर एक कामुक मुस्कान आ जाती है..

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राजू उसको हस्ते हुए देख कर पूछता है तो सुधा बात को ताल देती है और कहती है की शॉपिंग पूरी हो गयी हो तो घर के लिए निकलते है..

राजू: अभी कहाँ पूरा हुआ है? सबसे ज़रूरी खरीदारी तो अभी करनी है

सुधा: और क्या बचा है?

राजू: जेवरात और भी कल के लिए जो चाहिए रहेगा वह तो लेना पड़ेगा naa..aur उसके कान में धीरे se..aur सब से ज़रूरी चीज़…

सुधा: क्या?

राजू: ब्रा, पैंतीस भी तो लेनी है ना..

सुधा यह बात सुनकर शर्मा जाती है और कहती है की उसकी क्या ज़रुरत hai…aakhir तुम उसे निकलने hi वाले हो ना..

राजू: तभी तो मज़ा है मेरी jaan…Raju अब धीरे धीरे सुधा के सामने भी खुल रहा था..

तुम पहनने में जितनी सेक्सी फील karogi..mujhe उन्हें उतारने में उतना hi मजा aayega…aur है देता है..

सुधा भी है देती है और दूसरी दूकान में चले जाते है जहाँ पर कई नहीं डिज़ाइन के ब्रा पैंतीस थे..

सुधा उनको देख कर शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती..

दोनों उस दूकान में जा कर काफी ब्रा पैंतीस खरीद लेते है जो की मोस्टली ट्रांसपेरेंट और बहुत सेक्सी थे..

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सुधा राजू को मन करती है लेकिन राजू कहाँ maan-ne वाला था…

राजू सब ख़ुशी ख़ुशी खरीदारी करता है और वह लोग फिर बाहर आ जाते है..

इन सब काम में बहुत वक़्त लग जाता है और बहुत देर भी हो रही thi..to दोनों घर के लिए निकल जाते है..

राजू के घर:

3 घंटे बाद रानी का फ़ोन आता है की वह उनके गाँव पहुँच गयी है और बस स्टैंड में उनका इंतज़ार कर रही है..

संध्या और ारु भी जल्दी से बस स्टेशन के लिए निकल जाते hai…lekin इस वक़्त ठाकुर के आदमी उन्हें देख लेते है और उनका पीछा करते है..

दोनों बस स्टेशन जाते है जहाँ रानी उनका इंतज़ार कर रही थी..

बाल बाल बचे…

तीनो मिलते है और उसी वक़्त ठाकुर का आदमी ारु के पास आकर बड़ी मासूमियत से कुछ चीज़ jaan-ne की कोशिश करता है जिससे ारु का ध्यान थोड़ा भटक जाता है और उसी वक़्त दूसरा आदमी संध्या को पकड़ने की कोशिश करता hai..lekin उसी वक़्त एक बस उनकी तरफ आ रही होती है जिस वजह से लोग अलग होकर बस को रास्ता देते hai..isi हलचल में ठाकुर का दूसरा आदमी अलग हो जाता है और संध्या को पकड़ नहीं paata..bheed भी जैम जाती है बस के आने se..aur तीनो (ारु, रानी और संध्या) भीड़ से बचते हुए निकल जाते hai..bina यह जाने की उनकी जान को बहुत खतरा था..

ठाकुर के दोनों आदमी कुछ नहीं कर पाते और गाली देते हुए निकल जाते है..

राजू के घर:

तीनो घर आ जाते है और संध्या रानी को सब का परिचय करवाती है और रत्न से मिलकर उसके पाँव छूकर आशीर्वाद लेती है..

रत्न: जग जग जियो बीटा और भगवान् तुमको लम्बी उम्र दे..

रानी फिर ारु के भी गले लग जाती है..

फिर ऐसे hi बातें कर के संध्या रानी को उसके कमरे में ले जाती है और दरवाज़ा हल्का सा बंद कर के रानी को दीवार से सत्ता कर उसके होंठ को चूम लेती hai..jismein रानी की उसका पूरा साथ देती है (क्यूंकि यह दोनों बहुत दिनों बाद मिले थे).

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संध्या: रानी को ऊपर से नीचे तक देख kar…kyun re..tu तो इन 2-3 महीनो में बहुत गदरा गयी है और ऐसा कहते हुए एक हाथ से उसकी चुकी और दुसरे हाथ से उसकी गांड दबा देती hai..aur फिर से उसको चूम लेती है..

रानी: क्यों nahi..yeh सब राजू का hi तो कमाल है..

संध्या: मैं कुछ समझी नहीं…

रानी: अरे pagli..maine कल hi टेस्ट करवाया hai…tu मौसी बनने वाली है…

जी haan…Rani इस थे फर्स्ट पर्सन तो बे इम्प्रेग्नेटेड बी राजू… ज

संध्या: एकदम ज़ोर se…kyaaaaaaaaaaaaaaa

संध्या इतनी ज़ोर से चिल्लाती है की रत्न और ारु भी भाग कर उनके कमरे का दरवाज़ा खोल कर अंदर आ जाते है और संध्या से पूछते है की क्या hua..itna क्यों ज़ोर से चिल्लाई..

संध्या को अपनी गलती का एहसास होता है और चुप हो जाती है..

रत्न फिर भी पूछती है तो संध्या धीरे से उसके पास जाकर रत्न के कान में कहती है की maaji…aap दादी बनने वाली हो..

रत्न यह बात सुनकर अपना मुँह आश्चर्य से खोल लेती है और पूछती है की यह कैसे हुए?

संध्या रानी की तरफ इशारा करती है तो रानी शर्मा जाती है और हाँ में सर हिला कर रत्न के पेअर फिर छूकर उसका आशीर्वाद लेती है..

रत्न: तूने तो हमें बड़ी खुश खबर दी है beta..aur ऐसा कहते हुए रानी का माथा प्यार से चूम लेती है..

ारु भी यह बात सुनकर उसकी आँखों से ख़ुशी के आंसूं निकल जाते है और रानी को गले लगा लेती है..

संध्या: रानी se…yeh सब कैसे और कब हुआ?

रानी:

<फ्लैशबैक>

यह तब की बात है जब तुम दोनों मेरे घर आये the..aur उस रात हम तीनो ने मिलकर खूब प्यार kiya…yeh तो तुझे पता hi होगा..

अगली सुबह:

रानी अगली सुबह उठ कर रेडी होकर बड़े अच्छे मूड में चाय बना रही होती है..

उसी वक़्त राजू भी उठ जाता है और फ्रेश होकर किचन में रानी के पीछे जाकर उसके गले को चूमते हुआ उसकी चुकी को दबाता hai…aur कहता है..

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राजू: रानी, आपको मजा तो आया na..aur बुरा तो नहीं laga..jo भी रात को हुआ..

रानी पलट कर राजू को एक गहरा चुम्बन देती है जिसमें राजू भी पूरी शिद्दत से रानी के होंठों का रसपान करता है..

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रानी: अब पता chala..kitna मजा आया मुझे..

राजू: जी बिलकुल..

रानी राजू की आँखों में देखते हुए…

रानी: Raju..meri एक सालों की इच्छा पूरी करेगा?

राजू: आप कहो तो sahi..agar मुझ से हुआ तो ज़रूर…

रानी: तुझ से hi hoga..isiliye तुमसे पूछ रही हूँ..

राजू: bolo..kya इच्छा है आपकी..

रानी: कल रात को जब हमने प्यार किया tha…to मैंने देखा की तुम्हारा वीर्य बहुत गाढ़ा और तुम्हारा रास भी बहुत निकलता है..

मैं चाहती हूँ की तुम इस बार अपना पूरा रास मेरे अंदर hi डालो और मुझे माँ बनने में मदत करो…

राजू रानी से यह बात सुनकर चक्र जाता है की रानी उससे क्या मांग रही है..

राजू कुछ कहने को होता है तो रानी अपनी ऊँगली उसके होंठ पर रख kar..kuch मत कहना Raju..main जो कह रही hoon..bas, मेरी इतनी इच्छा पूरी कर do…zindagi भर मैं तुम्हारा अहसान मंद रहूंगी..

राजू: लेकिन तुम दुनिया वालो को क्या कहोगी/

रानी: तुम उसकी चिंता मत karo..main वह सब देख loongi..bas तुम मेरी यह इच्छा पूरी कर दो..

राजू फिर भी थोड़ा हिचखीचता hai…jo रानी समझ जाती hai…aur उसकी आँखों में कामुक नज़र से देख कर वही घुटनो के बल आ जाती है और राजू का पंत उतर कर उसके लुंड को पकड़ लेती है और मुठियाने लग जाती है..

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इस हरकत से राजू की सेहन शक्ति भी टूट जाती है और खुद को रोक नहीं पाटा और अपना हाथ रानी के सर के पीछे लेजा कर अपना लुंड उसके मुँह के पास रखता है..

रानी भी समझ जाती है और बड़े चाव से राजू का पूरा लुंड अपने मुँह में ले लेती है और बड़ी शिद्दत से चूसने लग जाती है..

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राजू सातवें आसमान में पहुँच जाता है और रानी की लुंड चूसै का मजा लेने लग जाता है..

देखते hi देखती रानी भी पूरे मजे से राजू का लुंड चूसती है और अपने थूक से उसे पूरा गीला कर देती है..

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5 मं बाद ऐसे hi लुंड चूसने के बाद राजू भी झड़ने के कगार पर आ जाता hai..lekin जैसा रानी ने कहा tha..woh अभी झड़ना नहीं चाहता tha..to राजू रानी का कन्धा पकड़ कर उठा लेता है और फिर से एक गहरा चुम्बन करता hai..aur एक दुसरे के जुबां चूसने लग जाते है..

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राजू फिर झुक कर उसकी चूचियों पर टूट पड़ता है और एक चूची मुँह में लेकर चूसता है तो दुसरे को अपने हाथ से दबाता चला जाता है..

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रानी के मुँह से सिसकारियां निकल जाती है…

Rani:aaahhh…ooohh…aise hi Raju….khaa jaao..pee jaao..mere दूध ko…bahut परेशान करती है mujhe..tumhe hi इन्हे शांत करना padega…aise hi रानी बाद बढ़ाते रहती है और राजू भी अपने काम में लगे रहता है..

थोड़ी देर बाद राजू रानी को उठा कर किचन के स्लैब पे बिठा देता hai..aur उसके मैक्सी के अंदर अपना सर घुसा देता hai..aur बड़ी शिद्दत से उसकी छूट को चाटने लग जाता है..

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रानी भी अपना हाथ उसके सर पे रख कर उसे अपने अंदर दबा लेती hai..Raju उसकी छूट chaat-ta चला जाता hai….Rani को पता भी नहीं चलता और इतने में hi वह भी झाड़ जाती है और राजू उसका रास पूरा पी जाट है और रानी ाँहें भर्ती चली जाती है..

राजू फिर उसे स्लैब से नीचे उतार कर दीवार से सत्ता देता है और फिर उसकी छूट चाटने लग जाता hai....upar से नीचे तक और अपनी दो उंगलियां उसकी छूट में दाल कर दोहरा प्रहार करता hai..chaatna और उँगलियों से छोड़ना..

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रानी से यह दोहरा प्रहार सेहन नहीं होता और फिर से एक और बार झाड़ जाती है..

रानी राजू के कंधे को पकड़ उसे उसे ऊपर उठाती है और उसे चूम kar..Raju अब मुझसे तड़प नहीं hota…mujhe जैम के छोड़ो…

राजू भी अब रानी को और तड़पाना नहीं चाहता और उसे दीवार से सत्ता कर एक पाँव अपने हाथ में रख कर उसको खड़े खड़े hi छोड़ना शुरू कर देता है..

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रानी भी ाँहें भर्ती हुई चुदाई का पूरा मज़ा लेती hai..aur पूरे किचन में thap..thap..thap..ki आवाज़ गूँज रही होती है..

5 मं तक ऐसे hi छोड़ने के बाद रानी थक जाती hai..aur राजू से कहती hai..Raju..thak गयी hoon..bistar पे ले चलो ना…

तो राजू रानी को बिस्तर पे ले जाता है और देखता है की संध्या कल रात की चुदाई के वजह से घोड़े बेच के गहरी नींद में सो रही है…

राजू रानी को सुला कर फिर से उसकी छूट को chaat-ta है

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और इस बार हु रानी को पलटा कर उसका मुँह अपने लुंड पे रख देता है और दोनों 69 पोजीशन में एक दुसरे को मजे दे रहे होते है..

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5 मं बाद राजू फिर रानी को लेता देता है और एक hi झटके में अपना पूरा लुंड उसकी छूट में घुसा देता है…

रानी चीकने को होती है लेकिन राजू उसी वक़्त उसके होंठ जैम के चूम लेता है और रानी की आवाज़ राजू के होंठों में hi डाब जाती hai..aur ऐसे hi राजू रानी को जैम के पेलता चले जाता है…

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यह धुआंधार चुदाई काफी देर तक चलती hai..phir राजू इस बार सो जाता है और रानी को अपने ऊपर ले लेता hai…Rani अपनी गांड ऊपर नीचे कर के उछलते रहती है और राजू उसकी चुकी को पकड़ कर मसलते रहता है..

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इस दमदार चुदाई में रानी ना जाने कितने बार झाड़ जाती है..

आखिर में राजू का भी होने वाला tha..woh भी थोड़ा चिल्लाते hue…Rani….mera भी होने वाला है……

रानी इस बार कमान संभालते हुए फिर से पलट कर राजू के नीचे आती है और राजू से कहती hai…mere अंदर की पूरा रास chhodna…Raju से भी अब रहा नहीं जाता और अपना पूरा माल रानी के अंदर hi छोड़ता चला जाता है…

पूरे 2 मं तक राजू अपना माल रानी के अंदर छोड़ता है और फिर हाँफते हुए रानी के बगल में लुढ़क जाता है..

रानी भी संतुष्टि के भाव से उसकी बाहों में लुढ़क जाती है…

आश्चर्य की बात यह थी की इस हरकत के बावजूद संध्या को होश नहीं आता…

उसको देख कर रानी कहती है राजू se…lagta है कल रात की चुदाई का पूरा आनंद संध्या ले रही है और है देती है…

राजू भी है देता है और रानी के कान के पास आकर कहता है…

राजू: मैंने तुम्हारी इच्छा पूरी कर दी hai..meri कब करोगी?

रानी: कौनसी इच्छा? अगर मैं कर सकती हूँ तो ज़रूर करूंगी..

राजू रानी को अपनी बाहों में लेकर एक हाट पीछे ले जाकर उसकी गांड को दबाते हुए…

राजू: मुझे तुम्हारी गांड बहुत मस्त लगती hai..yeh कब डौगी?

रानी: जब कन्फर्म हो जाएगा की मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनूंगी तो pakka..main hi खुद तुम्हारे पास आऊँगी और यह दरवाज़ा भी खुल वाऊंगी…

राजू: पक्का ना?

रानी: हाँ मेरे pyaare..pakka…aur हल्का सा उसके होंठ चूम लेती है..

<एन्ड ऑफ़ फ्लैशबैक>

संध्या: तो उस दिन इतना कुछ हुआ और मुझे बताया भी नहीं..

रानी: तू तो घोड़े बेच के सो रही thi…tujhe उठाती तो भी तू उठती nahi..aisa कह कर रानी है देती है..

रत्न: chalo..jo भी हुआ …अच्छा hi hua…tu तो खुश है ना बेटी? (रानी से)

रानी: माँ ji..Raju ने तो मेरी तमन्ना पूरी कर दी hai…aap भी एक माँ ho…aap को भी पता होगा हर औरत शादी के बाद माँ बनने की ख्वाब डेक्टि है..

मेरा पति तो मेरा साथ नहीं दे paaya..lekin राजू की मदत से आज मैं प्रेग्नेंट हो गयी hoon…mujhe इससे बड़ी और क्या ख़ुशी चाहिए..

Haan..main गरीब hoon..lekin मेरे होने वाले बच्चे को जी जान से पालूंगी और राजू जैसा अच्छा इंसान बनाने की कोशिश करूंगी..

रत्न रानी के यह बात सुन कर इमोशनल हो जाती है और रानी से कहती है..

चुप हो jaa..yeh (होने वाला बच्चा) भी तो इस घर का चिराग hai..tu चिंता मत kar…sab ठीक हो जाएगा..

इतने में दरवाज़े पर घंटी बजती है…

ारु जा कर खोलती है तो राजू और सुधा the..poore सामान के साथ..

सब सामान लाकर हॉल में रख देते है और राजू वहां थका हुआ बैठ जाता है..

इतने में रत्न, संध्या और रानी भी बहार आ जाते है और रानी राजू को देख कर शर्मा जाती है…

राजू भी रानी को देखता है तो मुस्कुरा देता hai…Sandhya और रत्न उसको सवालिया नज़र से देखते hai…jaise पूछ रहे हो की तुमने हमें क्यों नहीं बताया…

राजू उनको देख कर पूछता hai…kya हुआ??? ऐसा क्यों देख रहे हो….

राजू का रिएक्शन और आगे क्या होता hai…dekhte है अगले अपडेट में…
 
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