SAB KUCH JAYAZ HAI... - Page 13 - SexBaba
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SAB KUCH JAYAZ HAI...

थैंक्स फॉर योर लवली कमेंट....

भय मैंने स्टोरी के बारे में पहले hi टैग कर दिया था की वो कैसी रहेगी. इन्सेस्ट अडुल्टेरी और थ्रिल. आप देख सकते हो मगर हाँ ये स्टोरी सुपर नेचुरल पावर वाली नहीं है ये पक्की बात है....

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ों पेज no. 239....

रीड & एन्जॉय....
 
भाई लोग....

लगता है आप लोगो को स्टोरी पसंद नहीं आ रही है. पिछले कुछ उपदटेस से आप लोगो का रिस्पांस काम दिख रहा है. जो हमेशा कमेंट करते थे वो गायब हो गए. क्या ये अच्छी बात है....

यारा टाइम की कमी की वजह से मैं डेली अपडेट नहीं दे प् रहा. मगर जिस दिन देता हु वो मेगा अपडेट से काम भी नहीं होता मतलब की मैं दो अपडेट के बराबर एक अपडेट दे देता हु. सो भाई लोग अगर आप लोगो का स्टोरी से इंटेरेस्ट ख़तम हो गया है तो कोई बात nahi...aap बता सकते हो. मैं तो स्टोरी कम्पलीट hi करुगा मगर जैसे अब तक आप लोग साथ दे रहे थे वैसे hi साथ देते रहते तो मुझे अच्छा लगता....

नेक्स्ट अपडेट विल के तो थे नेक्स्ट डे....

कीप सपोर्टिंग & स्टे विथ....
 
सब कुछ जायज़ है....

अपडेट = 54


"तुम मेरा मज़ाक उदा रहे हो.???" दक्षिणा ने मुँह फूलते हुए ये कहा तो मैंने हस्ते हुए कहा.

"यार मैं मज़ाक नहीं उदा रहा हु बल्कि मैं तो वही कह रहा हु जो ऐसा होने पर लगेगा." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"तुम न रहने दो अब. जब देखो तब मेरी उम्र का तना मारने लगते हो तुम." दक्षिणा ने रूठते हुए ये कहा तो मैंने कहा.

"ारी यार, मैंने कब इस तरह का तना मारा.?" मैंने हैरानी से ये कहा तो दक्षिणा अभी कुछ कहने hi वाली थी की तभी उसके पर्श में पड़ा उसका मोबाइल बजा. जिसकी वजह से उसने मुझसे कुछ न कहा बल्कि पर्श से अपना मोबाइल निकालने लगी.

अब आगे पढ़िए....


दक्षिणा अपने पर्श से अपना मोबाइल निकालने लगी और इधर मैं एक बार फिर से पुलिस वाले की बातो के बारे में सोचने लगा था. ये तो मैं भी मानता था की बिना वजह कोई मेरी जान लेने की कोशिश नहीं करेगा मगर मैं ये नहीं समझ पा रहा था की जब मैंने किसी का कुछ बुरा किया hi नहीं है तो कोई क्यों मेरी जान का दुश्मन बन जायेगा.? मैं इस बारे में जितना सोच सकता था उतना सोच hi रहा था मगर मेरे दिमाग में कोई भी ऐसा ब्यक्ति नहीं आ रहा था जिसके बारे में मैं ये कह सकू की ये मेरी जान ले सकता है.

पुलिस वाले की वो बात मुझे याद आयी जब उसने कहा था की इस मामले में कोई भी पुलिस वाला मेरे लिए इतना कुछ नहीं करता. उसकी बात सच थी. क्यों की कक्तव कमरे में जिस बिना नंबर प्लेट वाली कार के बारे में बात हुयी थी उस पर इतना दिमाग खपाने की भी कोई ज़रूरत न समझता. बड़े बड़े शहरो में हर दिन कोई न कोई अपराध होता hi रहता है और ऐसा भी होता है की अपराधी ऐसे वाहन ले कर घुमते रहते हैं जिनमे नंबर प्लेट नहीं लगी होती. दूसरा पुलिस वाला इस केस में ये भी तर्क कर सकता था की हो सकता है की वो बिना नंबर प्लेट वाली कार वाला इत्तेफाक से hi उस वक्त मेरी कार की साइड आ गया हो. कहने का मतलब ये की हो सकता है की वो खुद किसी से भाग रहा हो सकता था उस वक्त और गलती से hi मेरी कार की साइड पर आ गया था. उसने तो बड़ी दक्षता से अपनी कार को सम्हाल लिया था मगर मैं नहीं सम्हाल पाया था. जिसका नतीजा ये निकला की मेरा एक्सीडेंट हो गया.

दूसरा पुलिस वाला इस केस को इस एंजेल से भी सोच सकता था और उस कार को या उस कार वाले से मेरा सम्बन्ध न जोड़ता. बात सही भी है क्यों की हर बात के सोचने के अलग अलग पहलु होते हैं. सच तो तभी पता चलेगा जब मुजरिम पकड़ में आ जाये और वो इस बात को एक्सेप्ट करे की हाँ उसी ने वो सब किया था. खेर यहाँ पर ये पुलिस वाला मेरे hi पक्ष में सोच रहा था और इस बारे में पूछताछ कर रहा था. जबकि इस बात को न वो पक्के तौर पर कह सकता था की वो कार वाला मेरी hi जान लेना चाहता था और न hi मैं. इस बारे में पक्का यकीन तभी हो सकता था जब एक बार फिर से मेरी जान लेने की कोशिश की जाये.

अभी मैं ये सब सोच hi रहा था की तभी दक्षिणा की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी और मैं सोचो से बाहर आ कर उसकी तरफ देखने लगा. उसने मोबाइल को कान से लगा रखा था. जाने उस तरफ से ऐसा क्या कहा जा रहा था जिसे सुन कर उसके चेहरे पर ऐसे भाव उभर आये थे जैसे वो किसी बात से बुरी तरह शॉक और घबरा गयी हो. मुझे समझ में नहीं आया की उसकी ये हालत किस बात से हो गयी थी.? आखिर किसका कॉल आया हुआ है और किस्से बात कर रही है वो.?

उधर कुछ देर बात करने के बाद दक्षिणा ने ये कह कर कॉल कट कर दी की तुझे अगर इतनी hi तजलिफ़ है तो तू वापस आ जा. मैं तुझे नए घर का पता व्हाट्सप्प करती हु अभी. इतना कह कर दक्षिणा ने कॉल कट कर दिया था. मैं उसी की तरफ देख रहा था. उसके चेहरे पर अभी भी घबराहट और हैरानी वाले भाव कायम थे.

"क्या बात है.? तुम इतना घबराई हुयी क्यों लग रही ho...aur..aur तुम किस्से बात कर रही थी फ़ोन पर.?" मैंने एक सांस में कई सरे सवाल किये तो दक्षिणा ने खुद को मजबूती से सम्हालते हुए कहा.

"फ़िक्र मत करो जान और haan...abhi मुझे एक बहुत ज़रूरी काम से कही जाना है मगर मैं जल्द hi वापस ाउगि." दक्षिणा ने अजीब तरह से रिएक्शन देते हुए ये कहा तो मैंने कहा.

"ारी पर बात क्या है.? क्या छुपा रही हो मुझसे.? मेरी माँ बहने सब ठीक तो हैं न.?" मैं एकदम से चिंतित और परेशान हो गया था उसकी बात सुन कर. जबकि मेरी इस बात से दक्षिणा ने मेरा चेहरा अपनी हथेलियों पर लेते हुए प्यार से कहा.

"वो सब ठीक हैं जान. तुम्हे किसी की भी फ़िक्र करने की कोई ज़रूरत नहीं है. जब तक मैं हु तब तक किसी को भी कुछ नहीं होगा. खेर अभी मैं चलती हु और हाँ ज़्यादा सोच विचार मत करना. वापस आने पर मैं तुम्हे सब कुछ बता दूगी. अब चलो आराम करो तुम." ये सब कहने के बाद दक्षिणा झुकी और मेरे होठो पर हलके से किश करने के बाद वो तेज़ी से कमरे से बाहर चली गयी. उसके इस तरह चले जाने से मेरे मन में हज़ारो तरह के ख़याल उभरने शुरू हो गए.

अभी मैं उसके बारे में सोच hi रहा था की तभी मेरे दिमाग की बत्ती जाली. मेरे दिमाग में सवाल उभरा की कही दक्षिणा को इस बात के बारे में तो नहीं पता चल गया की मेरा एक्सीडेंट हादसा नहीं बल्कि किसी अनजान ब्यक्ति ने मेरी जान लेने के उद्देस्य से करवाया था.? कही उसे पता तो नहीं चल गया की किसी ने मेरी जान लेने की कोशिश की थी उस दिन.? दक्षिणा फ़ोन पर किस्से बात कर रही थी.? ऐसे कई तरह के सवाल एकदम से मेरे दिमाग में उधम मचने लगे थे मगर उन में से किसी भी सवाल का जवाब मेरे पास नहीं था.

मैं इन्ही सब बातो के बारे में सोचे जा रहा था. मुझे पता hi नहीं चला की कब शाम हो गयी. दक्षिणा अभी तक नहीं आयी थी. वक्त का अहसास मुझे तब हुआ जब एक नर्स कमरे में आयी और वो मुझे दवा देने की बात मुझसे की.

नर्स के जाने के बाद मैं एक बार फिर से इन्ही सब बातो के बारे में सोचने लगा. असल में मैं ये नहीं चाहता था की इस बात का पता मुझसे रिलेटेड किसी भी इंसान को चले. क्यों की वो सब इस बात से बहुत ज़्यादा परेशां हो जायेंगे. मेरी माँ बहने तो सबसे ज़्यादा दुखी हो जाएँगी. मगर एक सच्चाई ये भी थी की इस बात को छुपा कर भी तो ऐसे हालात से छुटकारा नहीं मिलने वाला था. मुझे पुलिस वाले की बाते याद आयी तो मुझे अहसास हुआ की मुझे उस पर भरोसा करना चाहिए था और उसे सब कुछ बता देना चाहिए था.

अभी मैं ये सब सोच hi रहा था की तभी कमरे में दक्षिणा आयी. मैं ये देख कर चौंका की उसके पीछे वो पुलिस वाला भी था जो मुझसे मिल कर गया था. मैं दोनों को hi न समझने वाले अंदाज़ से देखने लगा था. जबकि वो पुलिस वाला मुस्कुराते हुए मेरे पास आया और फिर बोलै.

"किस्मत वाले हो भाई की वक्त रहते इस बात का पता चल गया की तुम्हारी जान का दुश्मन कौन hai...aur इस लिए अब फ़िक्र करने की कोई ज़रूरत नहीं है." पुलिस वाले ने ये कहा तो मैं बुरी तरह हैरान रह गया. मुझे यकीन न हुआ उसकी बातो पर. उसने मेरे चेहरे के भावो से शायद मेरे मन की बात पढ़ ली और इस लिए बोलै.

"तुमने सच hi कहा था की तुम्हारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है. क्यों की जिस इंसान ने तुम्हारी जान लेने कोशिश की उसके साथ तुमने सच में कुछ भी बुरा नहीं किया है. वो तो बस इस बात के लिए तुम्हारी जान का दुश्मन बैठा की कही मरस दक्षिणा की प्रॉपर्टी तुम्हे न मिल जाये." पुलिस वाले ने ये कहा तो मैं और भी ज़्यादा हैरान हुआ और फिर एकदम से मेरे दिमाग की बत्ती जल उठी. मुझे समझ आ गया की मेरी जान कौन लेना चाहता था.

"इसका मतलब..." मैं अभी कुछ कहने hi लगा था की दक्षिणा ने मेरी बात kaat'te हुए कहा.

"हाँ विक्की यही सच है. वो मेरा दामाद hi है जो तुम्हारी जान लेना चाहता है. उसे लगता है की मैं अपनी साड़ी प्रॉपर्टी तुम्हे दे दूगी और इसी लिए उसने तुम्हे अपने रास्ते से हटाने की कोशिश की." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"मगर ऐसा उसने सोचा भी कैसे की आप मुझे अपनी प्रॉपर्टी दे dengi...aur मैं खुद भी ये चाहत नहीं रखता की मुझे आपकी प्रॉपर्टी मिल जाये. बल्कि इस बारे में तो मैं खुद hi यही कहुगा की आप अपनी बेटी को अपनी साड़ी प्रॉपर्टी दे दे. वैसे भी कानूनी रूप से आपके बाद आपकी प्रॉपर्टी पर आपकी बेटी का hi हक़ होता है." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"हाँ तुमने सही कहा. मैं खुद भी यही चाहती थी की मरने से पहले मैं अपनी बेटी के नाम अपनी साडी प्रॉपर्टी लिखवा दूगी मगर अब ऐसा नहीं होगा. क्यों की उसके दोगले पति ने इसके लिए तुम्हारी जान लेने की कोशिश की. जबकि इसमें तुम्हारा कही कोई कसूर hi नहीं है. तुम तो वो हो जिसने बुरे से बुरे वक्त में हमें बिखरने नहीं दिया और हमारे कारोबार को बुलंदी तक पहुंचाया. मेरे उस दोगले दामाद ने क्या किया.? उसने तो कभी फ़ोन करके ये भी नहीं पूछा की मैं यहाँ किस हाल में हु.? मेरे कारोबार में मेरा हाथ बताने की तो बात hi दूर है. उसे तो बस पाकी पकाई मिलकियत चाहिए. मगर अब कुछ नहीं पायेगा वो. मुझे दुःख है की मेरी बेटी ऐसे नीच इंसान के साथ मेरे पति के द्वारा ज़बरदस्ती बाँध दी गयी थी." दक्षिणा जज़्बात में बहने लगी थी की तभी फिर उसने खुद को सम्हाला और चुप हो गयी.

"आपके दामाद को तो सजा ज़रूर मिलेगी दक्षिणा जी क्यों की उसने एक निर्दोष इंसान की जान लेने की कोशिश की है. खेर अच्छा हुआ की आप पुलिस थाने पर आयी और मुझे इस बारे में साड़ी बाते बतायी." पुलिस वाला ये कह hi रहा था की मैंने कहा.

"मगर मेरी समझ में ये नहीं आ रहा की इस बात का पता कैसे चला.? मेरा मतलब है ये कैसे पता चला की उस इंसान ने प्रॉपर्टी के लिए मेरी जान लेने की कोशिश की.?" मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"उस वक्त किरण का फ़ोन आया था मेरे पास. मैं उस वक्त उसी से बात कर रही थी. उसी ने इस बारे में सब कुछ बताया मुझे. उसने बताया की पहले उसे भी इस बारे में कुछ पता नहीं था और न hi उसके पति ने उससे इस बारे में कभी बात की थी. उसे लगता था की ऐसी बातो का ज़िकर किरण मुझसे ज़रूर करेगी. इस लिए उसने किरण को कुछ नहीं बताया. बल्कि उसने गुप् चुप तरीके से hi इस सरे मामले को अंजाम दिया. एक दिन किरण ने उसे फ़ोन पर किसी से बात करते हुए सुन लिया था. उसकी बातो में तुम्हारा ज़िकर था. किरण को पहले तो कुछ समझ नहीं आया था मगर उसने ये ज़रूर सोचा की उसका पति फ़ोन पर किस्से और किस बारे में तुम्हारा ज़िकर कर रहा है.? ये सोच कर उसने अपने पति की जासूसी की और ऐसे hi कुछ दिनों में उसे सब कुछ पता चल गया. ये अभी कुछ दिनों पहले से हुआ था. आज उसे पता चला की उसका पति अपने आदमियों से तुम्हे यहाँ हॉस्पिटल से गायब करने की बात कर रहा था. ये सब जान कर उसने फ़ौरन hi मुझे इस सबके बारे में बताने के बारे में सोचा. उसे ये नहीं पता था की तुम इस हालत में यहाँ हो. ये बात भी उसे उसके पति के द्वारा hi पता चली. उसने बताया की आज उसने चुपके से अपने पति की कोट में एक छोटा सा माइक्रोफोन छुपा दिया था. क्यों की उसे लगता था की तुम्हारे बारे में जो भी बात है वो सीरियस ज़रूर है. उस माइक्रोफोन के द्वारा hi उसे पता चला की उसके पति ने अपने आदमियों को आज रात हॉस्पिटल से तुम्हे गायब करने के लिए कहा है. पहले तो किरण इस सबके लिए अपने पति से बात करने के लिए उसका इंतज़ार करती रही थी मगर जब उसका पति सारा दिन घर न आया तो उसे लगा की कही तुम पर सच मच कोई खतरा न आ जाये इस लिए उसने फिर फ़ौरन मुझे फ़ोन किया और सब कुछ बताया." दक्षिणा ने ये सब कहा तो मैं सोच के गहरे समंदर में डूब गया. मुझे किरण की वफ़ा पर भी नाज़ हाउ और इस मामले में उसकी समझदारी पर भी.

"मैंने हॉस्पिटल में उसके आदमियों को पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया है. उसके आदमी जैसे hi यहाँ आएंगे वैसे hi वो लोग पुलिस के हाथो धार लिए जायेंगे." पुलिस वाले ने ये कहा तो मैंने कहा.

"ये सब करने की क्या ज़रूरत है सर.? सीधे सीधे आपको उस अमित को hi पकड़ लेना चाहिए." मैंने ये कहा तो पुलिस वाले ने कहा.

"हम ऐसा नहीं कर सकते हैं. क्यों की इनका दामाद अमित कल hi दुबई से आया था अपनी पत्नी किरण जी के साथ. किरण जी को पहले पुरे मामले का पता नहीं था. वो तो आज hi पता चला है. उन्होंने बताया की अमित सुबह घर से चला गया था और तब से वापस नहीं आया है. इसका मतलब ये हुआ की अमित अगर घर नहीं गया तो वो प्लान के अनुसार वही गया होगा जहा पर वो अपने आदमियों को मिलने के लिए बोलै रहा होगा. खेर हमने सिर्फ उसके मोबाइल के आधार पर उस तक पहुंचने का सोचा था. इसके लिए हमने उसके मोबाइल को ट्रेस भी किया मगर उसका मोबाइल फ़ोन स्विच ऑफ है. इस लिए हम डायरेक्ट उस तक नहीं पहुंच सकते. इस लिए अब एक hi रास्ता है की हम उसके आदमियों के द्वारा hi उस तक पहुंचेंगे. कहने का मतलब ये की उसके आदमी अपने प्लान के अनुसार यहाँ तुम्हे लेने आएंगे और हमारे आदमियों के द्वारा पकड़ लिए जायेगे. उसके बाद हम उनसे उगलवाएगी की वो तुम्हे ले कर कहा जाने वाले थे.? उसके आदमी हमें खुद अमित तक पहुचायेंगे." पुलिस वाले ने ये सब बताया तो मैं कुछ न बोलै.

उसके बाद यही किया गया. यानी पुलिस इंस्पेक्टर के आदमी सादे कपड़ो में हॉस्पिटल में तैनात हो गए मगर इस तरह की उन लोगो को ये भनक तक न लग सके की उन्हें पकड़ने के लिए हॉस्पिटल में जाल बिछाया गया है. सब कुछ सही कर के इंस्पेक्टर दक्षिणा से किसी ज़रूरी काम का बोल कर चला गया था. इस वक्त कमरे में मैं और दक्षिणा hi थे. पुलिस के दो आदमी कमरे के बाहर होपितल के नार्मल कर्मचारी के रूप में मौजूद थे जबकि बाकी आदमी हॉस्पिटल के हर उस हिस्से में मौजूद थे जहा से किसी के आने और जाने के बारे में ज़रा सा भी संदेह था.

"I'm सो सॉरी जान." मेरे बगल से कुर्सी पर बैठी दक्षिणा ने मेरी तरफ देखते हुए ये कहा तो मैंने कहा.

"सॉरी किस बात के लिए.?" मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"इसी बात के लिए की मेरे दामाद की वजह से ये सब हुआ. अगर उस दिन सच में तुम्हे कुछ हो जाता तो क्या होता.? मेरा तो इस सबके बारे में सोच सोच कर hi दिल बैठा जा रहा है. मैं सोच भी नहीं सकती थी की अमित ऐसा भी कर सकता hai..wo भी सिर्फ इस लिए की मैं अपनी प्रॉपर्टी कही तुम्हे न दे दू." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"वैसे गलत कहा सोच रहा था वो.? ये तो हकीकत hi है न की तुम अपनी साड़ी प्रॉपर्टी मुझे देने का पहले से hi सोच राखी हो. जबकि मैंने तुम्हे कई बार इसके लिए मन भी किया था. आखिर तुम्हारी प्रॉपर्टी और पैसा सब कुछ तुम्हारे बाद तुम्हारी बेटी का hi तो है और क्यों की तुम्हारी बेटी अमित की पत्नी है तो उस हिसाब से ये सब उसका भी हुआ." मैंने ये सब कहा तो दक्षिणा मेरी तरफ कुछ पालो तक देखती रही फिर बोली.

"हाँ मगर मेरी बेटी ने तो लेने से इंकार कर दिया था न. मैंने तो उससे कहा भी था की वो अपने नाम करवा ले ये सब मगर उसने तो साफ़ इंकार कर दिया था. उसका कहना था की मेरी लाइफ में तुम हो और इस लिए मुझे इस प्रॉपर्टी की ज़रूरत पड़ेगी. मैं कभी कभी सोचा करती हु की मेरी बेटी क्या सच में इतनी महान है जो मेरी खुशियों के लिए इतना कुछ सोचती है.? कोई दूसरी बेटी होती तो वो इस बात से hi मुझसे हमेशा नाराज़ रहती की मेरा तुमसे जिस्मानी सम्बन्ध है. हो सकता है की इस बात का पता चलते hi वो कभी मेरी सूरत भी देखना पसंद न करती. मगर किरण में ऐसी कोई बात नहीं थी. बल्कि वो हमारे इस रिलेशन से बहुत खुश थी. हाँ इस बात से वो ज़रूर दुखी थी की उसकी शादी तुमसे नहीं हो सकीय. मगर इसके लिए भी वो मुझे दोषी नहीं मानती. वो अच्छी तरह जानती है की उसके बाप ने ज़बरदस्ती उसकी शादी अमित से की thi...jabke मैं तो चाहती थी की उसकी शादी तुमसे हो जाये." दक्षिणा ये सब कह रही थी और मैं पिछली ज़िन्दगी के बारे में सोचने लगा था.

"मैं भगवन से यही दुआ मांगती हु की वो हर जनम में मुझे यही बेटी दे. वो आज भी तुमसे बहुत प्यार करती है. जैसे hi उसे पता चला की उसके पति के द्वारा तुम्हारी जान का खतरा है तो उसने फ़ौरन इस बारे में अपने पति की जासूसी करनी शुरू कर दी. उसने एक बार भी ये नहीं सोचा की इस सबके बाद उसके पति का क्या होगा.? उसे पता है की इस जुर्म के लिए उसके पति को सजा हो सकती है. इसके बाद भी उसने वही किया जो उसके दिल ने कहा." दक्षिणा ने ये सब कहा तो मैंने कहा.

"तुम्हे पता hai...uska पति कभी उसको माँ नहीं बना सकता." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने हैरानी से मेरी तरफ देखा.

"ये क्या कह रहे हो तुम.?" दक्षिणा ने हैरानी से ये पूछा तो मैंने कहा.

"मुझे किरण ने hi बताया था की उसका पति उसे माँ नहीं बना सकता. लास्ट टाइम जब वो यहाँ आयी थी और रात में मेरे साथ थी तो वो मुझसे यही कह रही थी की मैं उसे अपने बच्चे की माँ बना दू. जब मैंने उससे ये कहा की उसके पति को पता चल गया तो क्या होगा तो उसने बताया की उसका पति उसे माँ नहीं बना सकता. अब ये बात उसके पति को भी पता है की नहीं ये मैं नहीं जानता. मैंने भी उससे ये नहीं पूछा था की उसने अपने पति के बारे में ऐसा क्यों कहा था.?" मैंने ये सब कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"शायद ये बात सच hi हो या फिर ये हो सकता है की किरण तुम्हे तुम्हारे बच्चे की माँ बनाने के लिए इस लिए कह रही थी क्यों की वो तुमसे प्यार करती थी और चाहती थी की वो तुम्हारे hi बच्चे की माँ बने." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"हाँ ये भी हो सकता है." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"उसने फ़ोन पर बताया की अब वो अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती है. मैंने जब उससे वजह पूछी तो उसने बताया की उसका पति शुरू शुरू में ठीक था मगर धीरे धीरे उसका बर्ताव चेंज होने लगा और एक दिन उसने किरण से ये कहा की वो उसे किसी दूसरे मर्द के साथ सेक्स करते हुए देखना चाहता है. उसकी इस बात से किरण के होश उड़ गए थे. इस बात पर किरण उससे नाराज़ भी हो गयी थी. कुछ दिन तक तो ठीक रहा मगर फिर से वो यही बात कहने लगा उससे." दक्षिणा ने ये सब कहा तो मैं भी हैरान रह गया.

"पिछले कुछ समय से किरण की शादी शुदा ज़िन्दगी अच्छी नहीं चल रही है. हालात तो यहाँ तक बिगड़ गए की अमित इसके लिए किरण पर हाथ भी उठाने लगा. आज फ़ोन पर उसने पहले मुझे इस मामले के बारे में बताया और फिर अपने और अमित के इस मामले के बारे में. वो बात करते हुए रो रही थी और कह रही थी की उसे अब अमित के साथ नहीं रहना है. वो उसे दूसरे मर्दो के साथ सेक्स करने के लिए मजबूर करता है और जब वो राजी नहीं होती तो उसे बुरी तरह मारता है. इस लिए मैंने भी उससे कह दिया है की वो वापस आ जाये. मैं भी नहीं चाहती की वो घटिया इंसान अपनी ख्वाहिशो के लिए मेरी बेटी को बाज़ारू रंडी बना दे." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"अगर ऐसी बात है तो मैं भी यही कहुगा की किरण को उसके पास रहने की कोई ज़रूरत नहीं है. या तो वो अपनी ससुराल में अपने सास ससुर से इस बारे में बताये या फिर वो अमित को तलाक दे कर यहाँ आ जाये." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"सास ससुर को बताने से भी क्या होगा विक्की.? आखिर किरण को रहना तो अमित के साथ hi पड़ेगा न और वो यहाँ रहता नहीं है बल्कि दुबई में रहता है. पता नहीं ऐसी वाहियात ख्वाहिश उसके मन में आयी कैसे.? ज़रूर दुबई में उसके ऐसे कोई यार दोस्त होंगे जो उसे ऐसे काम करने की नसीहत देते होंगे. अभी तक तो मेरी बेटी किसी तरह इस सबसे बचती रही है मगर कब तक वो इस सबसे बचती रहेगी. इससे अच्छा तो यही है न की वो अमित से हर रिश्ता hi तोड़ ले." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने हाँ में सर हिलाया.

मेरे मन में किरण के बारे में hi बाते चल रही थी. दुनिया में कैसे कैसे लोग पड़े हैं जिनकी अजीब अजीब सी ख्वाहिशे हैं. किरण एक ऐसी लड़की थी जिसके दिल में कोई मेल नहीं था. वो मुझसे बहुत प्यार करती थी और मुझसे hi शादी करना चाहती थी मगर किस्मत को तो कुछ और hi मंजूर था. उसे पता था की उसकी माँ मुझे बहुत चाहती है. इस लिए जब उसके बाप ने अपनी पसंद के लड़के से उसकी शादी की बात की तो वो पहले तो बहुत रोई और इसके लिए उसने अपने बाप से इंकार भी किया मगर जब उसके बाप ने उसे शख्ती से मजबूर किया तो वो सबके सो जाने के बाद मुझसे मिली. मुझसे उसने बहुत hi गंभीर लहजे में कहा था की मैं उसकी माँ का हमेशा ख़याल राखु और उसे खूब प्यार दू.

मुझे लगता है की वो अगर चाह लेती तो अपनी शादी अमित से किसी भी सूरत में नहीं होने देती मगर शायद उसने अपनी माँ की खुशियों के लिए ये ज़हर पि लिया था. उसे पता था की उसकी माँ भी उसकी ख़ुशी के लिए hi मेरे साथ उसकी शादी करने को लिए तैयार थी. दोनों माँ बेटी एक दूसरे की खुशियों के लिए अपनी अपनी चाहत को कुर्बान करने के लिए तैयार थी. ये कितनी अजीब और कितनी बड़ी बात थी.

वक्त अपनी स्पीड से गुज़रता रहा. दक्षिणा ने मुझसे कहा था की इस सबके बाद वो मुझे दूसरे hi दिन घर ले जाएगी. खेर वक्त गुज़रता रहा और रात हो गयी. मगर अभी तक ऐसा कुछ न हुआ था जिसके लिए पुलिस वाले हॉस्पिटल में मेरी सुरक्षा के लिए मौजूद थे.

रात का खाना खाने के बाद दक्षिणा कुछ देर मेरे पास hi बैठी रही. उसके बाद मैंने उसे सोने के लिए कहा तो वो कमरे में hi दूसरी तरफ रखे बीएड पर जा कर लेट गयउ थी. इस वक्त रात के ग्यारह बज चुके थे. मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैं जानता था की यही हाल दक्षिणा का भी था. ऐसे माहौल में नींद भी कैसे आ सकती थी जबकि हमें पता हो की कुछ गुंडे टाइप के लोग मुझे अपहरण करने के लिए आने वाले हैं आज रात.?

वक्त गुज़रता जा रहा था और वक्त के साथ साथ मेरे दिल की धड़कने भी बढ़ती जा रही थी. दिल और दिमाग में एक घबराहट सी भर्ती जा रही थी ये सोच कर की जो लोग मुझे अपहरण करने के लिए आ रहे हैं उनका मैं इस हालत में कुछ नहीं बिगाड़ पाउगा और अगर वो मुझे हर रुकावट को पार कर के ले गए तो क्या होगा.? जब मेरे अपहरण का पता मेरी माँ और बहनो को चलेगा तो उनके ऊपर तो जैसे आसमान hi गिर पड़ेगा. मेरी माँ का रो रो कर बुरा हाल हो जायेगा. अभी मैं ये सब सोच hi रहा था की तभी मुझे अहसास हुआ की ये सब मैं क्या सोचे जा रहा हु.? भला इतने पुलिस वालो के रहते कोई मुझे कैसे यहाँ से ले जायेगा.??

उस वक्त रात के एक बज रहे थे जब मुझे ऐसा लगा जैसे कमरे के बाहर कुछ लोगो के चलने की आवाज़ हुयी हो. धीरे धीरे उन कदमो की आवाज़ क्लियर होती चली गयी. इन आवाज़ों से मेरे दिल की धड़कने भी एकदम से बढ़ गयी थी और जैसे hi कदमो की आवाज़ कमरे के दवाज़े पर आ कर बंद हुयी वैसे hi मुझे लगा की मेरी धड़कनो ने धड़कना बंद कर दिया हो. मैं दर और घबराहट की वजह से पसीना पसीना हो गया था.

उधर कमरे का दरवाज़ा खुला और पुलिस इंस्पेक्टर दो और पुलिस वालो के साथ कमरे में दाखिल हुआ. दरवाज़ा खुलने की आवाज़ से दूसरे बीएड पर लेती दक्षिणा भी उठ गयी थी और पुलिस इंस्पेक्टर को देख कर बीएड से नीचे उतर आयी थी.

"क्या बात है inspector...kya उन लोगो को पकड़ लिया आपने.?" दक्षिणा ने इंस्पेक्टर के करीब आते हुए ये कहा तो इंस्पेक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा.

"जी बिलकुल. उन लोगो को शायद इस बात की ख्वाब में भी उम्मीद नहीं थी की उनके स्वागत के लिए हमने यहाँ क्या इंतजाम किया हुआ है. खेर बड़ी आसानी से वो सब पकड़ लिए गए. पहले तो उन्होंने भागने की कोशिश की मगर फिर आखिर पकड़ hi लिए गए. इस वक्त वो सब हमारी गिरफ्त में हैं." पुलिस इंस्पेक्टर ने ये कहा तो मैंने और शायद दक्षिणा ने भी राहत की सांस ली. जबकि दक्षिणा ने कहा.

"ये तो अच्छी बात हुयी इंस्पेक्टर साहब. अब आगे का क्या.?" दक्षिणा ने ये कहा तो इंस्पेक्टर ने कहा.

"उनसे पूछताछ की जा रही है. जैसे hi वो सच उगलेंगे. हम उन्हें ले कर उस जगह जायेंगे जहा पर अमित ने उन्हें मिलने के लिए कहा है." इंस्पेक्टर ने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"ओह्ह ठीक है इंस्पेक्टर साहब आपको जो सही लगे कीजिये. मैं बस ये चाहती हु की अमित आपके हाथ से निकल न जाये. जब आप उसे पकड़ लेंगे तब मैं उससे पूछूगी की उसने ऐसा क्यों किया था.? आखिर वो ये कैसे सोच सकता था मेरे बारे में.?" दक्षिणा ने ये कहा तो इंस्पेक्टर ने कहा.

"Don't वोर्री दक्षिणा जी. अमित अब हमारे हाथ से बच कर कही नहीं जा पायेगा. जल्द hi हम उसे पकड़ लेंगे और उसे हवालात में दाल देंगे." इंस्पेक्टर ने ये कहा hi था की तभी सादे कपड़ो में एक पुलिस वाला आया और उसने इंस्पेक्टर से कहा.

"सर उन लोगो ने सच उगल दिया है. आप चाहे तो खुद एक बार उनसे सच पूछ सकते हैं." उस पुलिस वाले ने ये कहा तो इंस्पेक्टर ने कहा.

"वैरी good...un लोगो को उसी गाडी में बैठाओ जिसमे वो लोग आये थे. मैं आशिफ के साथ उनके hi साथ उनकी hi गाडी में रहुगा. बाकी तुम लोग मेरी वाली गाडी में पीछे पीछे आओगे. हमारे बीच इतना फासला रखना की किसी को किसी तरह का शक न होने पाए. आल राइट.??" इंस्पेक्टर ने ये कहा तो उस पुलिस वाले के साथ बाकी दो पुलिस वालो ने भी यस सर कहा.

उसके बाद इंस्पेक्टर दक्षिणा और मुझे देखते हुए कल मिलने का कह कर कमरे से बाहर निकल गया. उसके जाने के बाद दक्षिणा ने दरवाज़ा बंद किया और आ कर मेरे पास hi कुर्सी पर बैठ गयी.

"चलो ये तो अच्छा हुआ की अपहरण करने वाले पुलिस द्वारा पकडे गए और अब ऐसे hi अमित भी पकड़ लिया जाये तो बेहतर होगा." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"बस दुआ करो की पकड़ा hi जाये. वैसे वो भी काम चौकन्ना नहीं होगा. यानी इस बारे में उसने भी तो सोचा hi होगा की अगर उसके कारनामे की भनक किसी को लग गयी और उसके आदमी पकडे गए तो उस सिचुएशन में उसे क्या करना होगा.?" मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"हाँ क्यों नहीं. ऐसे काम करने वालो के दिमाग में सबसे पहले यही बात रहती है. जुर्म करने वाला सबसे पहले यही सोचता है की पकडे गए तो क्या होगा.? इस लिए वो उसका उपाय भी सोच लेता है की अगर ऐसा हो ता वो आसानी से बच निकलने में सफल हो जाये." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"इसी लिए कह रहा हु की बस दुआ करो की वो पकड़ा hi जाये. खेर चलो अब रात बहुत हो चुकी है. तुम अब आराम से सो जाओ." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने हाँ में सर हिलाया और झुक कर उसने मेरे होठो को एक बार चूमा और फिर दूसरी तरफ रखे बीएड की तरफ चली गयी. उसके जाने के बाद मैंने भी अपनी आँखे बंद कर ली.

भाई लोग....

आज के लिए इतना hi....

रीड एन्जॉय & गिव योर फीडबैक....

कीप सपोर्टिंग & स्टे विथ....

:थैंक्यू:
 
थैंक्स फॉर योर लवली कमेंट & सपोर्ट....

भय बात सिर्फ ट्विस्ट की डालने की नहीं है बल्कि बात इस बात की भी है की लाइफ में क्या क्या घटनाये ghat'ti रहती हैं. वैसे भी इस मामले को मैंने बेवजह नहीं डाला है स्टोरी में. बल्कि एक पॉसिब्लिटी को दिखने की कोशिश की है. अब आप ये बताओ की लाइफ में ऐसा हो जाता है की नहीं.??

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड....

रीड & एन्जॉय....
 
थैंक्स फॉर योर लवली कमेंट & सपोर्ट....

कामदेव भय धैर्य वाली बात नहीं है. धैर्य तो hai...main तो बस ये चाहता हु की चाहे जैसी भी हो मगर लोग अपनी बात रखते रहे. मुझे पता है की लाइफ में सब बिजी रहते हैं किसी न किसी वजह से. मगर आप ये सोचिये की जब टाइम निकाल कर अपडेट पढ़ते हैं तो दो पल लगा कर दो शब्द भी बोलै जा सकता है....

और भय इसके लिए मैं किसी को मजबूर नहीं कर रहा. ये तो अपनी अपनी मर्ज़ी की बात है. लोग अगर कमेंट न भी करेंगे तो भी चलेगा. क्यों की मैं तो स्टोरी लिखुगा hi. सो फ़िक्र कहे kuuuu....😉

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ों पेज no. 243....

रीड & एन्जॉय....
 
सब कुछ जायज़ है....

अपडेट = 55


"हाँ क्यों नहीं. ऐसे काम करने वालो के दिमाग में सबसे पहले यही बात रहती है. जुर्म करने वाला सबसे पहले यही सोचता है की पकडे गए तो क्या होगा.? इस लिए वो उसका उपाय भी सोच लेता है की अगर ऐसा हो ता वो आसानी से बच निकलने में सफल हो जाये." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"इसी लिए कह रहा हु की बस दुआ करो की वो पकड़ा hi जाये. खेर चलो अब रात बहुत हो चुकी है. तुम अब आराम से सो जाओ." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने हाँ में सर हिलाया और झुक कर उसने मेरे होठो को एक बार चूमा और फिर दूसरी तरफ रखे बीएड की तरफ चली गयी. उसके जाने के बाद मैंने भी अपनी आँखे बंद कर ली.

अब आगे पढ़िए....


रात पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी थी मुझे पता hi नहीं चला था. सुबह दक्षिणा के जगाने पर hi मेरी आँखे खुली. डकहीना ने hi बताया की सुबह के 6 बजे हैं. उसकी बात सुन कर मुझे याद आया की कल रात इंस्पेक्टर कुछ पुलिस वालो के साथ दक्षिणा के दामाद को यानी अमित बंसल को पकड़ने के लिए गया था. मैंने दक्षिणा से इस बारे में पूछा तो दक्षिणा ने बताया की उसने अभी कुछ देर पहले इंस्पेक्टर को फ़ोन किया था. इंस्पेक्टर ने बताया की अमित पकड़ा गया है और उसकी गिरफ्त में है.

डकहीना की इस बात से मैंने राहत की लम्बी सांस ली. मेरे सर से जैसे बहुत बड़ा बोझ और बहुत बड़ा खतरा हैट गया था. मेरी माँ बहनो को इस बात का पता भी नहीं चला था. अच्छा hi हुआ वर्ण वो सब बहुत ज़्यादा चिंतित और परेशां हो जाती.

"मैंने डॉक्टर से बात की थी कल. उन्होंने कहा है की मैं तुम्हे यहाँ से ले जा सकती हु. हाँ ये ज़रूर है की तुम्हारा अच्छे से ख़याल रखना होगा मगर तुम तो बेहतर जानते हो की हम सब यहाँ से बेहतर hi तुम्हारा ख़याल रख लेंगे." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"हाँ पता है. मैं भी यहाँ पर नहीं रहना चाहता अब. यहाँ चाहे जितनी भी सुख सुविधा हो या ख़याल रखा जाता हो मगर इसके बावजूद यहाँ पर घुटन सी होती है. खेर छोडो ये बताओ किरण के लिए क्या सोचा है तुमने.?" मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"वो मेरी बेटी है जान. मैं उस दोगले इंसान के पास अब और नहीं छोड़ सकती उसे. इस लिए मैंने उसे बुला लिया है. अमित से उसका तलाक हो जायेगा और वो मेरे साथ hi रहेगी." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"तो क्या किरण को साड़ी ज़िन्दगी अपने पास hi रखोगी तुम.?" मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"क्या तुम्हे इससे कोई प्रॉब्लम है डिअर.?" दक्षिणा ने उल्टा सवाल किया तो मैंने कहा.

"मुझे क्यों कोई प्रॉब्लम होगी यार.? मैं तो बस इस लिए ऐसा कह रहा हु की उसकी अपनी ज़िन्दगी है. अगर वो चाहे तो उसकी शादी दुबारा किसी अच्छे लड़के से करवा सकते हैं." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"इस बारे में किरण से hi पूछना पड़ेगा की वो अब क्या चाहती है.? वैसे मुझे नहीं लगता की वो दुबारा किसी से शादी करने के बारे में सोचेगी." दक्षिणा ने ये कहा तो मैं कुछ देर सोचता रहा फिर बोलै.

"चलो ठीक है और मेरे इस एक्सीडेंट के मामले वाली बात मेरी फॅमिली को पता नहीं चलनी चाहिए. मैं नहीं चाहता की वो सब इस बात से परेशान हो जाये." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"बताने में कोई प्रॉब्लम नहीं है जान. वैसे भी जिससे खतरा था वो तो पकड़ा hi गया है. इस लिए अब इस बात को अपनी फॅमिली से छुपाने का कोई मतलब नहीं है." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"बात सिर्फ इतनी नहीं है. अगर उन्हें पता चला तो वो सवाल करेंगे की अमित मुझे क्यों जान से मारना चाहता था.? इस सवाल का जवाब क्या देंगे हम.? क्या उन्हें ये बतायेगे की वो मुझे इस लिए जान से मारना चाहता था की कही तुम अपनी प्रॉपर्टी मुझे न दे दो. ये बात सुन कर मेरी माँ क्या सोचेगी.? उनके मन में सवाल उभरेगा की भला तुम अपनी प्रॉपर्टी मुझे क्यों देना चाहोगी.? इस सवाल से कई सवाल खड़े हो जायेगे. जिनका जवाब देना हमारे लिए मुश्किल पद जायेगा." मैंने ये सब कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"देर सावेर ये सच्चाई तो उनको पता चलनी hi है जान. शुरुआत कुसुम से होने वाली है. तुम अच्छी तरह जानते हो की वो मुझसे हमारे रिश्ते के बारे में डिटेल से जानना चाहती है और मैंने भी उससे कह दिया है की तुम्हारे घर आते hi मैं उसे सब कुछ बताऊगी. कुसुम को सब कुछ पता चलने के बाद संभव है की ऐसे हालात बन जाये जब मुझे या हम दोनों को हमारे बारे में सब से बताना पद जाये." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"बाकी लोगो का बाद में देखेंगे. खेर छोडो अभी क्या करने वाली हो तुम.?" मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"अभी तो मैं पुलिस स्टेशन जा रही हु. इंस्पेक्टर सावंत को मैंने फ़ोन किया था. उसने मुझे बताया की अमित को ले कर वो रात में hi आ गए थे और अमित अब हवालात में बंद है. इस लिए मैं पहले अमित से मिलना चाहुगी उसके बाद तुम्हे यहाँ से ले जाने की तैयारी होगी." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने ठीक है कहा.

उसके बाद दक्षिणा मेरे होठो पर किश करने के बाद कमरे से निकल गयी. उसके जाने के बाद मैं बीएड पर पड़ा इन सब बातो के बारे में सोचने लगा.

उधर दक्षिणा जब पुलिस स्टेशन पहुंची तो इंस्पेक्टर को अपना इंतज़ार करते हुए hi पाया. दक्षिणा के आते hi इंस्पेक्टर ने उसे बताया की अमित उसे फरीदाबाद में मिला था. फरीदाबाद में वो एक जगह पर था जहा पर एक नयी बिल्डिंग बन रही थी. मतलब साफ़ था की उसने उस बिल्डिंग को अपना अड्डा बनाया हुआ था. उसके आदमी जब विक्की को ले कर आते तो वो अपने तरीके से उसके साथ कुछ भी कर सकता था. इंस्पेक्टर की बाते सुनने के बाद दक्षिणा ने कहा की वो अमित से मिलना चाहती है.

दक्षिणा की इस बात से इंस्पेक्टर सावंत उसे ले कर हवालात की तरफ गया. कुछ hi देर में दक्षिणा इंस्पेक्टर के साथ उस जगह पहुंच गयी जहा पर अमित अपने आदमियों के साथ हवालात में बंद था. दक्षिणा पर नज़र पड़ते hi उसके चेहरे पर नफरत के भाव उभर आये. यही हाल दक्षिणा का भी था.

हवालात के पास आ कर दक्षिणा ने इंस्पेक्टर से कहा की वो अमित से अकेले में बात करेगी. दक्षिणा की इस बात को सुन कर सावंत वापस अपने केबिन की तरफ चला गया.

"इंस्पेक्टर को क्यों भेज दिया छिनाल औरत.? तुझे क्या लगता है उसे कुछ पता नहीं है.? हाहाहा मैंने उसे सब बता दिया है की तू और तेरी बेटी हकीकत में क्या हैं." अमित ने ठहाका लगते हुए ये कहा तो दक्षिणा पहले तो चौंकी फिर बोली.

"उससे कोई फर्क नहीं पड़ता नीच इंसान. सबकी अपनी अपनी ख्वाहिशे होती हैं. हर इंसान अपने तरीके से जीना चाहता है. अगर तूने मेरा और मेरी बेटी का सच उसे बता भी दिया है तो क्या हो गया.?" दक्षिणा ने ये कहा तो अमित ने गुस्से में कहा.

"वाह तुम दोनों माँ बेटी जो भी करो वो सब सही है और अगर अपनी ख्वाहिशो के लिए मैं कुछ करू तो वो गलत हो गया.?" अमित ने गुस्से में ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"हम माँ बेटी इस लिए सही हैं क्यों की हमने जो कुछ भी किया उसमे दोनों तरफ से सहमति थी मगर तुम जो मेरी बेटी के साथ करना चाहते थे उसमे मेरी बेटी की मर्ज़ी नहीं थी इस लिए वो गलत हो गया. खेर तुमने विकास को जान से मारने की कोशिश की जो की सरासर गलत है और इसके लिए तुम्हे सजा ज़रूर मिलेगी." दक्षिणा ने ये सब कहा तो अमित ने गुस्से से देखते हुए कहा.

"तुझे क्या लगता है की मैं यहाँ ज़िन्दगी भर ऐसे hi बंद रहुगा.? नहीं मेरी रंडी सासु माँ. मैं यहाँ से बहुत जल्द बाहर निकल आउगा. उसके बाद तुम सबका क्रिया कर्म इस बार अच्छे तरीके से करुगा. तुम दोनों माँ बेटियों को दो कौड़ी की रंडिया न बनाया तो मेरा नाम भी अमित बंसल नहीं." अमित ने ये कहा तो दक्षिणा को गुस्सा तो बहुत आया मगर उसने खुद को सम्हालते हुए कहा.

"हिजड़ो में इतना डैम कब से हो गया.? मुझे पता है की तुम खुद कुछ करने के लायक नहीं हो. इस लिए दुसरो के ऊपर hi निर्भर हो तुम. लगता है सारा खानदान ऐसा hi है. अगर बीटा हिजड़ा है तो बाप भी हिजड़ा hi होगा. इसका मतलब किसी हरामी की औलाद है तू." दक्षिणा ने ये कहा तो अमित गुस्से में आग बबूला हो गया.

"बहुत पछ्तायेगी तू. बस कुछ दिन सबर कर तू. उसके बाद देखना की क्या हसरा करता हु मैं तुम दोनों माँ बेटी का और हाँ उस हरामज़ादे का भी. जिसने तुम दोनों माँ बेटी को रंडी बनाया है. तुझे क्या लगता है मैंने सिर्फ प्रॉपर्टी के लिए उस मादरचोद की जान लेने की कोशिश की थी.? नहीं मेरी कुटिया सासु maa...mujhe सब पता है. तेरी बेटी के पेट में उसी हरामज़ादे का बच्चा है. तेरी बेटी ने मुझसे बेवफाई की. मुझे और मेरे प्यार को धोखा दिया है." अमित ने ये सब कहा तो दक्षिणा पहले तो ये जान कर हैरान हुयी की किरण पेट से है मगर फिर बोली.

"चलो मान लिया की मेरी बेटी ने तुझसे बेवफाई की तो तू उसके लिए उसे तलाक दे सकता था. किसी की जान लेना कौन सा सही काम था.?" दक्षिणा ने ये कहा तो अमित ने कहा.

"जैसे तुम माँ बेटी के लिए सब कुछ जायज़ है वैसे hi मैंने जो किया वो भी जायज़ है. मैं ये कैसे बर्दास्त कर लेता की मेरी बीवी के पेट में मेरे अलावा किसी गैर मर्द का बच्चा हो जाये.? इस लिए अपमान और गुस्से में जलते हुए मैंने वही किया जो हर वो पति करता जो मेरी जगह होता." अमित ने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"तुम्हे किसी की जान लेने का कोई हक़ नहीं था और न hi मेरी बेटी को किसी गैर मर्द के साथ सुलाने का." दक्षिणा ने ये कहा तो अमित ने कहा.

"मैं तो वही कर रहा था जो वो खुद करती थी. उसे गैर मर्द के साथ सेक्स करना अच्छा लगता था न. इस लिए मैंने वही किया. उसकी ख़ुशी के लिए hi उसके लिए गैर मर्द की तलाश की. मगर उस रांड को तो सिर्फ एक hi गैर मर्द चाहिए था और वो था वो कमीना विक्की. उसे तो मर hi जाना चाहिए था. इस बार तो बच गया मगर कब तक बचेगा वो हरामज़ादा.?" अमित ने गुस्से में तिलमिलाते हुए ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"अब तू उसका कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा. बल्कि इसके लिए अब तुझे ऐसा बना दिया जायेगा की तू कुछ करने के काबिल hi न रह जाये और हाँ भूल मत की तेरी भी माँ बहने हैं. अगर तूने विक्की के साथ कुछ बुरा करने का सोचा तो इस बात का ख़याल रखना की उसका अंजाम तेरे लिए तो बुरा होगा hi साथ hi तेरी माँ बहनो के लिए भी बुरा हो जायेगा. अगर तू ये समझता है की हम औरत हैं तो कुछ कर नहीं सकते तो ये तेरी भूल है. इतिहास खोल कर देख ले. तुझे औरतो का असली रूप समझ में आ जायेगा." दक्षिणा ने शेरनी की तरह गुर्राते हुए ये कहा तो अमित उसे देखता रह गया.

"विक्की ने बुरे से बुरे वक्त में हमें सहारा दिया और मेरे कारोबार को सम्हाला. आज उसी की वजह से मैं इस मुकाम पर हु की खड़े खड़े तुझे खरीद सकती हु. एक अच्छे इंसान के लिए अगर हम दोनों माँ बेटी के दिल में प्रेम जाग गया तो क्या गलत हो गया.? मैं तो अपनी बेटी की शादी विक्की से hi करना चाहती थी मगर उसका वो बेवड़ा बाप hi कबाब में हड्डी बन गया. पता नहीं उसे तुझ हिजड़े में ऐसा क्या दिखा था जिसकी वजह से उसने मेरी मासूम बेटी को तेरे साथ ज़बरदस्ती बाँध दिया. खेर छोड़ तू क्या समझेगा इन सब बातो को. मैं बस इतना कहना चाहती हु की अगर तेरी नज़र में हम गलत थे और मेरी बेटी ने तेरे साथ बेवफाई की तो तुझे उसे तलाक दे देना चाहिए था. अगर तुझे इतना सब पता है तो ये भी पता होगा की वो विक्की से प्यार करती है. तो अच्छे इंसान की तरह तुझे उसे उसके प्यार तक पंहुचा देना चाहिए था. उस तरह में तेरे लिए मेरे मन में इज्जत बढ़ती मगर ये सब करके तूने कौन सा सही काम कर दिया.?" दक्षिणा ने ये कहा तो अमित ने गुस्से से कहा.

"मुझे भाषण मत दे हरामज़ादी कुटिया. तुझे क्या पता की इस सबसे मेरे दिल पर क्या गुज़री है.? तुझे तो सिर्फ अपने और अपनी बेटी के प्यार की पड़ी है. तू ये क्यों सोचेगी की इस सबकी वजह से मेरे साथ कितना बुरा हो गया.? तू चाहे जितनी दलीले दे ले, मुझ पर कोई असर नहीं पड़ेगा. मैं तुम तीनो का खात्मा करके hi डैम लगा. अब दफा हो जा यहाँ से. मैं तेरी शकल भी नहीं देखना चाहता." अमित ने ये कहा तो दक्षिणा ने गुस्से में कहा.

"मुझे लगा था की शायद तुझे समझ आ जायेगा. मगर कोई बात nahi...agar तू यही चाहता है तो यही सही. ये ज़रूर याद रखना की अगर तूने ऐसी वैसी कोई घटिया हरकत की तो अंजाम अच्छा नहीं होगा." दक्षिणा ने ये कहा और फिर पलट कर तेज़ तेज़ कदमो से बाहर की तरफ आ गयी. कुछ hi देर में वो इंस्पेक्टर सावंत के सामने कड़ी थी.

"आपके चेहरे से लग रहा है की मुलाकात अच्छी नहीं रही दामाद से." इंस्पेक्टर सावंत ने मुस्कुराते हुए ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"कुछ लोग उस पेड़ की तरह होते हैं जो पूरा सूख चूका होता है और सुनसान जगह पर अकेला hi खड़ा होता है. वो किसी भी सिचुएशन में झुकना नहीं जनता. बल्कि अकड़ में खड़ा hi रहता है. उस अकड़ में उसका सामना एक दिन ऐसे तूफ़ान से होता है जो उसे जड़ से उखाड़ कर ऐसी जगह फेंक देता है जहा से कभी किसी को उसका नामो निशाँ तक नहीं मिलता." दक्षिणा ने ये कहा तो इंस्पेक्टर हैरानी से देखता रह गया उसे.

"वाह that's ग्रेट. कितनी कमाल की बात कही आपने. खेर chhodiye...waise आपके दामाद ने आपके और आपकी बेटी के बारे में मुझे जो कुछ भी बताया उसे सुन कर यकीन मानिये मैं हैरान रह गया था. मगर फिर मैंने सोचा की आज के परिवेश में ये सब तो आम बाते हैं." इंस्पेक्टर सावंत ने ये कहा तो दक्षिणा को थोड़ा शर्म सी महसूस हुयी. ये देख कर सावंत ने मुस्कुराते हुए कहा.

"ारी इसमें शर्माने की कोई ज़रूरत नहीं है दक्षिणा जी. मैं समझ सकता हु और मैं ये भी मानता हु की ये आपकी लाइफ है आप जैसे चाहे इसे एन्जॉय कर सकती हैं. खेर छोड़िये इन बातो को मुझे ये बताइये की अब आगे का क्या सोचा है आपने.? जहा तक मैं समझता हु आपका दामाद बहुत जल्द छूट जायेगा और मैं ये भी जानता हु की वो फिर से आप सबके लिए खतरा बनेगा. क्यों की जिन बातो की वजह से वो तिलमिलाया हुआ था उसकी शान्ति के लिए वो यही करेगा की वो अपने उस काम को फिर से अंजाम दे जिसमे वो नाकाम हुआ था." इंस्पेक्टर ने ये सब कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"हाँ मैं जानती हु इंस्पेक्टर साहब और इस लिए मैं पहले से hi उसके खिलाफ ऐसी फिर दर्ज़ करना चाहती हु जिसमे कभी भी अगर हम पर कोई ऐसी प्रॉब्लम आये तो उसका जिम्मेदार अमित को hi मन जाये." दक्षिणा ने ये कहा तो इंस्पेक्टर ने मुसकीरते हुए कहा.

"देखिये ये इतनी आसान बात भी नहीं है मगर शक की बिना पर और अभी ताज़ा तरीन हुए मामले को देख कर काम से काम मैं ऐसा कर सकता हु मगर मेरा कहना ये है की अगर आप अपने दामाद से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहती हैं तो उसके लिए मेरे पास एक बेहतरीन सुग्गेस्टिव है." इंस्पेक्टर सावंत ने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"कैसा सुग्गेस्टिव.?" दक्षिणा ने हैरानी से ये पूछा तो सावंत ने कहा.

"देखिये आप ये मत समझियेगा की मैं आपकी मज़बूरी का फायदा उठा रहा हु. अगर आपको मेरा सुग्गेस्टिव पसंद न आये तो आप बेझिझक इंकार कर सकती हैं." इंस्पेक्टर ने ये कहा तो डकहीना को समझ न आया की इंस्पेक्टर क्या बोल रहा है.

"मुझे समझ नहीं आ रहा की आप कहना क्या चाहते हैं इंस्पेक्टर साहब.?" दक्षिणा ने धड़कते दिल से ये कहा तो इंस्पेक्टर ने गहरी सांस ली फिर बोलै.

"इतना तो मैं समझ hi गया हु की इस सबके बाद अमित से आपकी बेटी का रिश्ता आगे आसानी से चलते रहना मुमकिन नहीं है. इस लिए मेरा सुग्गेस्टिव ये है की आप अपनी बेटी का अमित से तलाक करवा दे. मैं आपकी बेटी से शादी करने को तैयार हु." इंस्पेक्टर ने ये कहा तो दक्षिणा बुरी तरह हैरान रह गयी.

"ये आप क्या कह रहे हैं इंस्पेक्टर.? आप होश में तो हैं न.?" दक्षिणा ने ये कहा तो इंस्पेक्टर ने बहुत hi संतुलित लहजे में कहा.

"मैं पूरी तरह होश में हु दक्षिणा जी. मैं ये जानते हुए भी आपकी बेटी से शादी करने को तैयार हु की आपकी बेटी के पेट में उस इंसान का बच्चा है जिसका रिलेशन आपकी बेटी के अलावा आपसे भी है. कमाल की बात है न दक्षिणा जी की इतना सब कुछ जानते हुए भी मैं आपकी बेटी से शादी करने को तैयार हु. क्या आप उम्मीद कर सकती हैं की इतना कुछ जान्ने के बाद कोई भी दूसरा मर्द आपकी बेटी से शादी करना चाहेगा.?" इंस्पेक्टर ने ये सब कहा तो दक्षिणा को समझ न आया की वो क्या कहे. उसे तो यकीन hi नहीं हो रहा था की इंस्पेक्टर ऐसा कुछ सोचेगा और फिर ऐसा कुछ करेगा भी.

"देखिये मैं समझ सकता हु की आपने इस सबकी उम्मीद नहीं की थी मगर आप इस बात से भी इंकार नहीं कर सकती हैं की दुनिया में ऐसा कभी न कभी हो जाता है जिसकी हम कल्पना भी नहीं करते. खेर मुझे लगता है की आपको इस बारे में अच्छे से सोचना चाहिए और हाँ आप इस बात से बेफिक्र रहे की मैं आपको इसके लिए मजबूर करुगा. ये तभी होगा जब इसमें आपकी और आपकी बेटी की मर्ज़ी होगी." इंस्पेक्टर ने ये कहा तो दक्षिणा ने खुद के जज़्बातो को सम्हालते हुए कहा.

"मुझे ये समझ नहीं आ रहा की मेरी बेटी के बारे में इतना कुछ जानने के बाद भी आप उससे शादी करने के लिए कैसे तैयार हो सकते हैं.? आखिर ऐसी क्या वजह हो सकती है.?" दक्षिणा ने ये कहा तो इस बार इंस्पेक्टर के चेहरे पर गंभीरता उभर आयी.

"ज़िन्दगी बड़ी अजीब होती है दक्षिणा जी और कभी कभी वक्त और हालात भी हमें बहुत अजीब बना देते हैं. खेर असल बात ये है की एक वक्त था जब मैं एक खूबसूरत लड़की से बेइंतेहा प्यार करता था और उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था मगर मेरे माता पिता उस लड़की से मेरी शादी करने के लिए किसी भी हाल में राज़ी नहीं थे. ऐसा नहीं था की उस लड़की में कोई खराबी थी बल्कि वो तो हर तरह से परफेक्ट थी. मगर एक खराबी ऐसी थी जिसके चलते मेरे माता पिता उसे अपनी बहु नहीं बनाना चाहते थे. वो लड़की मांगलिक थी दक्षिणा जी. मुझे तो उसकी मांगलिक वाली बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था क्यों की मैं उसे दिलो जान से प्यार करता था और उसे हर तरह से अपनी पत्नी बनाने के लिए तैयार था. मगर मेरे माता पिता इस दर से उसे अपनी बहु नहीं बनाना चाहते थे की अगर उससे मेरी शादी हो गयी तो मेरी ज़िन्दगी खतरे में पद जाएगी और मेरे माता पिता अपना इकलौता बीटा हमेशा के लिए खो देंगे. मेरे माता पिता ने इसके लिए मुझे अपनी तो कसम दी hi साथ में उस लड़की की भी कसम दी और कहा की मैं उससे शादी न करू. उसके अलावा दुनिया की चाहे जिस लड़की से मैं शादी के लिए कहुगा तो वो करने के लिए तैयार रहेंगे. बस उसके बाद वही हुआ जो मेरे माता पिता चाहते थे. मैंने उस लड़की से साडी बाते बतायी. वो मेरी बाते सुनने के बाद बस हल्का सा मुस्कुरायी थी. उसकी उस मुस्कान में ज़माने भर का दर्द छिपा था मगर उसने मुझसे बस यही कहा की मैं वही करू जिसमे मेरे माता पिता की ख़ुशी हो. उसके बाद दूसरे दिन मैंने उसकी मौत की खबर सुनी. सच कहु तो उसकी खुद ख़ुशी से मेरी आत्मा तक हिल कर रह गयी थी. खेर उसके इस तरह चले जाने के बाद मैं मानसिक रूप से बहुत दुखी हो गया और फिर कभी शादी न करने का मन hi मन फैसला कर लिया. आज इस बात को गुज़रे हुए पंद्रह साल हो गए मगर इन सालो में ऐसा कोई लम्हा नहीं था जब वो मुझे याद न आयी हो. मेरे माता पिता भी उसकी इस तरह की मौत से दुखी हुए थे और खुद को उसकी मौत का जिम्मेदार मानते थे. ज़िन्दगी ऐसे hi गुज़रती रही. हम पुलिस वाले बहुत बदनाम होते हैं. लोग हमें ऐसी नज़र से देखते हैं जैसे हमने कितना बुरा काम किया है मगर मैंने तो आज तक कभी किसी के साथ गलत नहीं किया. मैंने हमेशा यही कोशिश की थी की मेरी वजह से कभी किसी का बुरा न होने पाए बल्कि उनका भला hi हो. उसके जाने के बाद मेरे माता पिता ने भी कभी मुझसे ये नहीं कहा की बीटा शादी कर लो. ऐसा शायद इस लिए क्यों की वो कही न कही खुद को मेरा और उस लड़की का दोषी मानते थे. मगर मैं जानता हु की उनके दिल में आज भी ये अरमान मचल रहे होंगे की वो अपने बेटे के सर में सेहरा सजा हुआ देखे." इंस्पेक्टर सावंत सांस लेने के लिए कुछ पल के लिए रुका उसके बाद फिर बोलै.

"ये तो था मेरी ज़िन्दगी का सच. कल रात जब मैंने आपके दामाद से आपकी बेटी का नाम सुना और उसके बारे में सुना तो दांग रह गया था. कितनी अजीब बात है. आपकी बेटी का भी वही नाम है जो उस लड़की का था जिसे मैं आज भी टूट कर प्यार करता हु. मैं रात भर इस सबके बारे में सोचता रहा. अपने माता पिता के अरमानो के बारे में सोचता रहा और उसके बारे में भी जो हर रात ख्वाबो में आ कर मुझसे बस यही कहती है की विक्रम कब तक मेरी यादो में खुद को तड़पाओगे और मुझे भी तड़पाओगे. क्या मेरे जाने के बाद भी तुम मुझे खुश नहीं देखना चाहते.? मेरी तो ख़ुशी इसी में है की तुम किसी लड़की से शादी कर लो और अपने माता पिता को खुशिया देते हुए अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ जाओ. मगर मैं कभी उसकी इन बातो को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ. मेरे दिल में और मेरी ज़िन्दगी में उसके अलावा कोई नहीं आ सकता था. मैं किसी को भी उसकी जगह नहीं देना चाहता था. खेर, जब आपकी बेटी के बारे में पता चला तो मैंने कल साड़ी रात इस सबके बारे में सोचा. मुझे लगा की अगर मैं आपकी बेटी से शादी कर लेता हु तो इससे कई बाते हो जाएँगी. पहली ये की मेरे पता खुश हो जायेंगे. उन्हें इस बात से कोई ऐतराज़ नहीं होगा की किरण के पेट में किसी दूसरे का बच्चा है. दूसरा ये की मैं अपनी मोहब्बत को भी खुश कर दुगा और लास्ट में मेरी एक ख्वाहिश ये की मेरी ज़िन्दगी में किरण के आ जाने के बाद भी मेरी ज़िन्दगी में सिर्फ मेरी मोहब्बत का hi हक़ रहेगा. आपकी बेटी को कुछ टाइम बाद बच्चा हो जायेगा. उसे मैं अपना नाम दे दुगा. मुझे खुद किसी बच्चे के लिए आपकी बेटी से जिस्मानी सम्बन्ध नहीं बनाना पड़ेगा. इस तरह मेरी कसम और मेरी मोहब्बत का मान भी बना रहेगा." इंस्पेक्टर सावंत ने ये सब कहा तो दक्षिणा किसी पत्थर की मूर्ती की तरह उसे देखती रह गयी.

इंस्पेक्टर विक्रम सावंत इंसान hi था या कोई अजूबा. ये बात दक्षिणा को समझ नहीं आ रही थी. कोई उस मोहब्बत के लिए इतना बड़ा त्याग कैसे कर सकता है जो इस दुनिया में है hi नहीं.? दक्षिणा को समझ नहीं आया की वो सावंत को क्या जवाब दे.?

"मेरी इन बातो से आप ये भी कह सकती हैं की अगर ऐसा होता है तो फिर आपकी बेटी का क्या.? मेरा मतलब है की अगर शादी के बाद मैं आपकी बेटी से जिस्मानी सम्बन्ध hi नहीं रखुगा तो फिर उसका क्या होगा.? आखिर आपकी बेटी अभी जवान hai....uski भी ज़रूरते हैं तो उसके लिए भी मैंने सोच लिया है. मैं उसे किसी बात के लिए कभी रोकूंगा नहीं. उसकी जो भी ज़रूरते हैं वो उन्हें जैसे चाहे पूरा कर सकती है. फिर भले hi उसके लिए उसे विक्की के पास जाना पड़े. मुझे इस बात से कोई ऐतराज़ नहीं होगा." इंस्पेक्टर सावंत ने ये कहा तो एक बार फिर से दक्षिणा बुरी तरह हैरान रह गयी. क्या इंस्पेक्टर सच में hi कोई अजूबा है.?

"मुझे समझ नहीं आ रहा इंस्पेक्टर साहब की आप किस मिटटी के बने हुए हैं.? अगर आपकी बाते सच हैं तो मैं यही कहुगी की इस संसार में इस तरह के लोग भी हो सकते हैं यकीन नहीं होता." डकहीना ने ये कहा तो इंस्पेक्टर ने कहा.

"दुनिया बहुत बड़ी है दक्षिणा जी. दुनिया में खोजने से मुझसे भी ज़्यादा अजीब लोग मिल जायेंगे आपको. असल में जब तक हमें ऐसे लोग मिलते नहीं तब तक हम ऐसे लोगो के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं मगर इसका मतलब ये नहीं होता की दुनिया में कोई आश्चर्य hi नहीं होता है." इंस्पेक्टर ने ये कहा तो दक्षिणा बस देखती रही उसकी तरफ.

"खेर छोड़िये ये sab...aap बताइये की क्या अब भी आपको किसी तरह का ऐतराज़ है.? क्या अब भी आपको लगता है की आपको अपनी बेटी की शादी मुझसे करने के लिए सोचना पड़ेगा.?" इंस्पेक्टर ने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"मुझे तो कोई ऐतराज़ नहीं है इंस्पेक्टर साहब मगर इसके लिए मुझे अपनी बेटी से भी पूछना पड़ेगा. जब तक उसकी मर्ज़ी नहीं होगी तब तक मैं आपसे ज़्यादा कुछ कह नहीं सकती. दूसरी बात ये की अभी तो अमित से उसका तलाक भी नहीं हुआ है और मुझे इस बात पर भी शंका है की अमित तलाक के पेपर्स पर अपने सिग्न करेगा भी की नहीं. आखिर वो मेरी बेटी को बेवफा समझता है और उसे बिना सजा दिए कैसे जाने देगा अपने हाथ से.?" दक्षिणा ने ये कहा तो इंस्पेक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा.

"इस बात की आप फ़िक्र मत कीजिये. अमित से तलाक के पेपर्स पर सिग्न करवाने का काम मैं कर दुगा. आप बस अपनी बेटी से इस बारे में बात कर लीजिये." इंस्पेक्टर ने ये कहा तो दक्षिणा ने हाँ में सर हिलाया.

उसके बाद डकहीना इंस्पेक्टर के केबिन से निकल कर वापस हॉस्पिटल की तरफ चल पड़ी. उसके मन में विचारो की आँधिया सी चलने लगी थी. वो सरे रास्ते इंस्पेक्टर के बारे में hi सोचती रही और फिर हॉस्पिटल पहुंच गयी. उसने मुझे भी इस बारे में सब कुछ बताया तो सुन कर मैं भी बुरी तरह हैरान रह गया था. दक्षिणा से मैंने कहा की इंस्पेक्टर कही हमसे कोई गेम तो नहीं खेल रहा.? मेरी इस बात से दक्षिणा ने कहा की हो सकता है. हमें उसके लिए उसके बारे में जानना होगा और उसके घर जा कर उसके माता पिता से भी मिलना पड़ेगा. अगर इंस्पेक्टर सही है तो समझो की वो दुनिया का सच में एक अजूबा इंसान है. मगर उससे पहले किरण से भी इस बारे में बात करनी होगी. क्यों की उसकी रज़ामंदी से hi कुछ हो सकता है.

भाई लोग....

आज के लिए इतना hi....

रीड एन्जॉय & गिव योर फीडबैक....

कीप सपोर्टिंग & स्टे विथ....

:थैंक्यू:
 
थैंक्स फॉर योर लवली कमेंट & सपोर्ट....

भय आपका कहना ठीक है. इसका तो यही मतलब हुआ की रीडर्स वही पढ़ना चाहते हैं जिसमे उनका सर दर्द न होने पाए. अच्छा है भय ये राइटर लोगो की गलती है की वो लोग सर दर्द वाली स्टोरी लिख डालते हैं. अपना भी सर दर्द करते हैं और अपने मासूम रीडर्स का भी....

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ों पेज no. 246....

रीड & एन्जॉय....
 
थैंक्स फॉर योर लवली कमेंट & सपोर्ट....

भय आपको एक बात तो खटकी मगर आपने इस बात को पूरी तरह शायद इग्नोर कर दिया की दक्षिणा इंस्पेक्टर से मिलने गयी थी जब उसकी बेटी का उसे फ़ोन आया था. अगर ये बात आपने पढ़ी है स्टोरी में तो आपको समझना चाहिए था की दक्षिणा ने इंस्पेक्टर को अमित के बारे में साडी बाते बतायी होंगी और उसकी पिछ भी उसे दी होगी....

खेर अच्छा लगा भय की आपने स्टोरी अच्छे से रीड की और अपना शक ज़ाहिर किया. मुझे उम्मीद है की आपके शक का समाधान हो गया होगा....

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ों पेज no. 246....

रीड & एन्जॉय....
 
भाई लोग....

शादियों की वजह से मैं अपडेट के लिए टाइम नहीं दे प् रहा हु. मैंने लिखने की कोशिश की मगर सही तरह से मन नहीं लगा पाया. इस लिए मैं कुछ टाइम का गैप लेना चाहता हु. प्ल्ज़ आप लोग मेरी इस बात से एंग्री मत होना. मैं होली के बाद से अपडेट देना स्टार्ट करुगा. क्यों की होली तक मेरे पास टाइम नहीं है. वैसे तो अप्रैल और मई में भी शादिया हैं जो की मेरे hi परिवार में हैं. अभी तो रिलेटिव्स में चल रही हैं....

ी होप आप लोग मंद नहीं करेंगे. अगर मुझे लिखने का टाइम मिला तो मैं तरय करुगा बीच में भी अपडेट देने का मगर 100% सूरे नहीं हु....

कीप सपोर्टिंग & स्टे विथ....

:थैंक्यू:
 
सब कुछ जायज़ है....

अपडेट = 56


"इस बात की आप फ़िक्र मत कीजिये. अमित से तलाक के पेपर्स पर सिग्न करवाने का काम मैं कर दुगा. आप बस अपनी बेटी से इस बारे में बात कर लीजिये." इंस्पेक्टर ने ये कहा तो दक्षिणा ने हाँ में सर हिलाया.

उसके बाद डकहीना इंस्पेक्टर के केबिन से निकल कर वापस हॉस्पिटल की तरफ चल पड़ी. उसके मन में विचारो की आँधिया सी चलने लगी थी. वो सरे रास्ते इंस्पेक्टर के बारे में hi सोचती रही और फिर हॉस्पिटल पहुंच गयी. उसने मुझे भी इस बारे में सब कुछ बताया तो सुन कर मैं भी बुरी तरह हैरान रह गया था. दक्षिणा से मैंने कहा की इंस्पेक्टर कही हमसे कोई गेम तो नहीं खेल रहा.? मेरी इस बात से दक्षिणा ने कहा की हो सकता है. हमें उसके लिए उसके बारे में जानना होगा और उसके घर जा कर उसके माता पिता से भी मिलना पड़ेगा. अगर इंस्पेक्टर सही है तो समझो की वो दुनिया का सच में एक अजूबा इंसान है. मगर उससे पहले किरण से भी इस बारे में बात करनी होगी. क्यों की उसकी रज़ामंदी से hi कुछ हो सकता है.

अब आगे पढ़िए....


अभी मैं और दक्षिणा बाते hi कर रहे थे की तभी दक्षिणा का मोबाइल बजा. दक्षिणा ने अपने मिनी पर्श से मोबाइल निकाल कर देखा तो पता चला की सविता का कॉल था. उसने कॉल पिक करके सविता से बात की. सविता उसे बता रही थी की मेरी माँ हॉस्पिटल आने के लिए तैयार हैं. सविता की इस बात से दक्षिणा ने उससे कहा की उन्हें अब यहाँ आने की ज़रूरत नहीं है क्यों की मुझे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर के दक्षिणा घर ला रही है.

दक्षिणा की इस बात को सुन कर सविता ने उधर मेरी माँ को ये बात बताई. शायद माँ सविता के पास hi थी और उन्होंने hi ने दक्षिणा को कॉल लगवाया था सविता से. खेर जब सविता ने दक्षिणा की ये बात बतायी तो माँ खुश हो गयी और फिर सविता से कहलवाया की ठीक है वो घर पर मेरे आने का इंतज़ार करेंगी.

सविता से बात करने के बाद दक्षिणा ने कॉल कट की और मोबाइल को वापस पर्श में रख दिया. उसके बाद वो मुझे बता कर डॉक्टर से मिलने चली गयी. उसके जाने के बाद मैं इन साड़ी बातो के बारे में सोचने लगा. मेरे मन में इंस्पेक्टर विक्रम की वो बाते चल रही थी जो उसने किरण से शादी करने के सम्बन्ध में दक्षिणा से कही थी.

मैं इस बात को हजम नहीं कर प् रहा था की किरण के बारे में इतना कुछ जान्ने के बाद भी इंस्पेक्टर उससे शादी करने की बात कह रहा था और इतना hi नहीं बल्कि वो इसके लिए भी तैयार था की किरण अपनी जिस्मानी ज़रूरतों के लिए कुछ भी करने के लिए आज़ाद है. उसने अपने बारे में जो साद लव स्टोरी और माता पिता की बाते बतायी थी उन बातो को आसानी से हजम कर लेना भी मेरे बस का नहीं था. इस दुनिया में ऐसा कौन मर्द होगा जो इतना संगीन काम करने की कूवत रखता हो.?

मैं काफी देर तक इंस्पेक्टर के बारे में यही सब सोचता रहा. मैंने और दक्षिणा ने ये सही फैसला किया था की इंस्पेक्टर के बारे में बारीकी से पता लगाया jaye....uske बाद hi इस शादी के बारे में किरण से बात की जाये. वैसे अगर किरण की मर्ज़ी नहीं होगी तो किसी भी हाल में हम उसकी शादी इंस्पेक्टर से नहीं करेंगे. भले hi ये इंस्पेक्टर किसी फ़रिश्ते से काम क्यों न हो.

काफी देर बाद दक्षिणा कमरे में आयी. उसके साथ डॉक्टर और एक नूरश भी थी. शायद दक्षिणा ने डॉक्टर से साड़ी बाते कर ली थी. डॉक्टर ने मुझसे कुछ ज़रूरी बाते की और फिर वो चला गया. कुछ देर बाद हॉस्पिटल के hi दो तीन कर्मचारी आये और मुझे बीएड से उठा कर स्ट्रेचर पर लिटा कर कमरे से ले जाने लगे. मैं भी समझ गया की ये लोग मुझे घर ले जा रहे हैं. इस बात से मैं भी मन hi मन थोड़ा खुश हुआ.

हॉस्पिटल से बाहर आये तो मैंने देखा बाहर एक एम्बुलेंस कड़ी थी. कुछ hi देर में मुझे एम्बुलेंस के अंदर सावधानी से शिफ्ट कर दिया उन लोगो ने. दक्षिणा डॉक्टर से कुछ बाते कर रही थी. कुछ देर बाद दक्षिणा भी एम्बुलेंस के अंदर मेरे पास आ कर शीट पर बैठ गयी. उसके बाद एम्बुलेंस घर की तरफ चल पड़ी.

मैं घर जाने की बात से अंदर से खुश भी था और थोड़ा घबराया हुआ भी. घबराया हुआ इस लिए क्यों की अब मेरा कुसुम दीदी से सामना होगा. मेरे मन में कई सरे सवाल उभर रहे थे. मैं सोच रहा था की क्या होगा उस वक्त जब कुसुम दीदी मेरे सामने आएँगी.? क्या वो मुझे देख कर मुझसे लिपट जाएँगी या हमेशा की तरह अपने जज़्बातो को दबा लेंगी.?

मेरा बहुत दिल कर रहा था की जब मैं कुसुम दीदी से मिलु तो वो सब कुछ भूल कर मुझसे लिपट जाये. ताकि मेरे बेकरार दिल को सुकून मिल जाये. मैं चाहता था की जब भी मेरी उनसे मुलाकात हो तो वो मुझसे खुल कर कहे की वो मुझे प्यार करती हैं. मेरे दिल की तो यही हसरत थी मगर मुझे भरोसा नहीं था की मेरे दिल की ये हसरत इस तरह से पूरी होगी.

सरे रास्ते मैं इन्ही सब बातो के बारे में सोचता रहा. डकहीना से मेरी कोई बात नहीं हुयी. क्यों की हॉस्पिटल के दो आदमी भी मेरे इस तरफ बैठे हुए थे. मगर मैं जनता था की दक्षिणा के मन में भी कई साड़ी बाते चल रही होंगी. वो भी सोच रही होगी की अब वो मेरी फॅमिली के बीच कैसे खुद को एडजस्ट करे या कैसे वो जब चाहे मेरे घर आ सकेगी.?

आखिर कुछ समय बाद एम्बुलेंस मेरे घर के सामने आ कर रुकी. हॉस्पिटल के जो कर्मचारी आये थे साथ में उन्होंने मुझे सावधानी से एम्बुलेंस से निकला. घर के बाहर जो स्टील का गेट था वही पर मेरी माँ मेरी बहने और रचना कड़ी थी. मगर कुसुम दीदी उनके बीच नहीं थी. ये देख कर पता नहीं क्यों मेरा मन उदास सा हो गया. मन hi मन मैंने इसके लिए भगवन को कोसा भी मगर जो नहीं हुआ उसका क्या कर सकता था मैं.?

कुछ hi देर में मुझे घर के अंदर लाया गया. ग्राउंड फ्लोर पर hi एक कमरे में मुझे शिफ्ट कर दिया गया. मेरी माँ और दोनों जुड़वाँ बहनो की आँखे नाम थी. रचना भी का भी यही हाल था. कमरे में बीएड पर मुझे लिटाने के बाद हॉस्पिटल के कर्मचारी चले गए. डॉक्टर ने दक्षिणा से कहा था की वो एक नूरश को रोज़ाना भेजेंगे मेरा चेक उप करने के लिए.

कमरे में मेरी फॅमिली का हर कोई मौजूद था सिवाय कुसुम दीदी के. माँ मेरे पास hi बैठ कर मेरी तरफ देख रही थी. मेरी दोनों बहने भी मेरे एक तरफ से मुझसे सात कर बैठ गयी थी. जबकि रचना कमरे से बाहर चली गयी थी. शायद सबके लिए जल पानी लेन के लिए.

"मैंने डॉक्टर से बात की है. उसने बताया है की फ़िक्र करने की कोई बात नहीं है. बस टाइम टाइम से दवा दारू करने की ज़रूरत है. पंद्रह बीस दिन के अंदर विक्की फिर से चलने फिरने लगेगा." दक्षिणा ने ये कहा तो माँ ने उसकी तरफ देखते हुए कहा.

"आपने इस हाल में हमारी बहुत मदद की है बहन जी. मैं आपकी जीवन भर अहसान मंद रहूगी. आज के वक्त में कोई अपना भी इतना कुछ नहीं करता." माँ ने नाम आँखों से ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"इसमें अहसान वाली कोई बात नहीं है. मैंने आपसे कहा था न की विक्की मेरा भी कुछ तो लगता hi है. वैसे भी पिछले पांच सालो से ये हमारे साथ hi था तो एक तरह से ये मेरे परिवार का hi सदस्य था. मैंने कभी इसे गैर नहीं मन. अगर मन होता तो ये सब करने का सवाल hi नहीं उठता. खेर छोड़िये इस बात को. मैं ये कह रही हु की अगर आपको ऐतराज़ न हो तो क्या मैं हर रोज़ विक्की को देखने आ सकती हु यहाँ.?" दक्षिणा ने जाने क्या सोच कर ये कहा तो माँ ने कहा.

"ऐसा क्यों कहती हैं बहन जी.? मैं तो ये कहती हु की ये आपका hi घर है और आप हमारे साथ hi यहाँ पर रहे. अब मैं भी आपको अपना hi समझती हु." माँ ने ये कहा तो उनकी ये बात सुन कर मैं मन hi मन हैरान हुआ जबकि दक्षिणा ने मुस्कुराते हुए कहा.

"आपने ये कह दिया यही बहुत बड़ी बात है मेरे लिए. मुझे बहुत अच्छा लगा की आप मुझे अपना समझती हैं. अब मुझे भी यहाँ आने में कोई संकोच नहीं होगा." दक्षिणा ने ये कहा तो माँ ने भी मुस्कुराते हुए कहा.

"जी बिलकुल, अपनों से किस बात का संकोच.?" माँ ने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"अच्छा क्या कुसुम से आपने बात की.?" दक्षिणा ने कुछ सोचते हुए ये कहा तो माँ ने कहा.

"हाँ मैं उससे मिली हु और उससे बात भी की है मैंने. वक्त और हालात ऐसे बन गए थे की मेरे मन में अपनी hi बेटी के लिए नफरत भर गयी थी. मगर अब ऐसी कोई बात नहीं है. मैं जानती हु की वो किस हाल से गुज़र रही थी. मैंने उससे आज कहा भी की वो वापस घर चले मगर उसने कहा की वो कुछ दिन आपके यहाँ hi रहेगी. जब उसे पता चला विक्की घर आ रहा है तो उसने मेरी तरफ आस भरी नज़रो से देखा था. मैं जानती थी की वो विक्की से मिलना चाहती है. इस लिए मैंने उसे कह दिया की वो विक्की से मिले और जो भी उसे अच्छा लगे करे." माँ ने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"चलिए ये अच्छा किया आपने. उसे देख कर मुझे ये समझ आया है की वो बहुत मासूम है और गंभीर भी." दक्षिणा ने ये कहा तो माँ ने कहा.

"हाँ वो शुरू से hi ऐसी थी. मुझसे कह रही थी आज की अगर मुझे बुरा न लगे तो वो विक्की का हर तरह से ख़याल रखे. मैं जानती हु वो अपनी गलतियों को किसी तरह से सुधारना चाहती है और सबसे अपनी नाराज़गी भी ख़तम करना चाहती है." माँ ने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"अभी उसके मन में अपराध बोझ है. मगर ये पक्की बात है की अब उसके मन में ऐसी वैसी कोई बात नहीं है." दक्षिणा ने ये कहा तो माँ ने कहा.

"हाँ मैं जानती हु और इसी लिए मैंने उससे कहा की उसे जो ठीक लगे वो करे." माँ ने ये कहा तो दक्षिणा ने हाँ में सर हिलाया और फिर मेरी तरफ देखने लगी.

मैं दोनों की बाते सुन रहा था और दीदी के बारे में भी सोचे जा रहा था. तभी रचना कमरे में आयी और दक्षिणा से नास्ते के लिए कहने लगी. उसकी बात सुन कर माँ ने भी दक्षिणा से नास्ते के लिए कहा तो दक्षिणा खुश हो कर उनके साथ जाने लगी. माँ ने जाते समय मेरी दोनों जुड़वाँ बहनो से कहा की वो मुझे ज़्यादा परेशान न करे. उन लोगो के जाने के बाद मेरी दोनों जुड़वाँ बहने मेरे सीने से छुपक कर सुबकने लगी. मैंने अपने दोनों हाथ ऊपर कर लिए थे.

"क्या हुआ तुम दोनों रो क्यों रही हो.?" मैंने मुस्कुराते हुए ये कहा तो पूजा ने उसी हालत में कहा.

"अगर आपको कुछ हो जाता तो हमारा क्या होता.?" पूजा ने ये कहा तो मैं ये सुन कर हैरान हुआ की पूजा ने मुझे 'आप' कहा. जबकि दोनों मुझे 'तुम' hi कहती थी. मुझे समझ न आया की ये क्या है.?

"ारी कैसे कुछ हो जाता मुझे.? जिसकी इतनी प्यारी बहने हो और वो मुझे इतना प्यार करती हो तो भला कैसे कुछ हो जाता मुझे.?" मैंने ये कहा तो दोनों ने सीधा बैठते हुए कहा.

"बाते न बनाइये अब. हम दोनों इस बात के लिए आपसे नाराज़ हैं." प्रिय ने ये कहा तो मैं फिर से 'आप' सुन कर हैरान हुआ.

"एक बात बताओ पहले की तुम दोनों मुझे 'आप' क्यों कह रही हो.? पहले तो ऐसा नहीं था न.?" मैंने ये कहा तो दोनों के चेहरे पर सुर्खी छ गयी. दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरायी फिर पूजा ने नज़रे झुकाते हुए कहा.

"बस ऐसे hi. हमें लगता है की अब हमें आपको 'तुम' नहीं कहना चाहिए." पूजा ने ये कहा तो मैंने हैरानी से कहा.

"ारी मगर ऐसा क्यों लगता है तुम दोनों को.?" मैंने ये कहा तो दोनों के चेहरे और भी ज़्यादा सुर्ख हो गए. दोनों मुझसे नज़रे चुरा रही थी. इस बार प्रिय ने नज़रे झुकाये हुए कहा.

"वो इस लिए की अब हम दोनों भी रचना दीदी की यारह आपकी bi..bi..wi...banengi. इस लिए हमने सोचा की अपने पति परमेश्वर को ' तुम' नहीं कहना चाहिए." प्रिय ने ये कहा और जल्दी से उठ कर कमरे से बाहर की तरफ तेज़ी से भाग गयी. उसके जाते hi पूजा भी हस्ते हुए भाग गयी. जबकि मैं दोनों के इस तरह भाग जाने से हैरान रह गया.

बड़ी अजीब बात थी. क्या क्या इन दोनों के मन में भर गया था इन कुछ दिनों में. इसका मुझे अंदाज़ा hi नहीं था. खैर उन दोनों के जाने के बाद अब मैं अकेला hi रह गया था कमरे में. मेरे कानो में अभी भी प्रिय की बात गूँज रही थी.

नास्ता करने के बाद दक्षिणा मुझसे मिलने के लिए या ये कहु के मुझे देखने के लिए एक बार मेरे कमरे में आयी और फिर चली गयी. कुछ देर बाद माँ मेरे पास आयी और मेरे करीब hi बैठ गयी.

"मैं जानती हु की तू यहाँ पर सबसे पहले अपनी दीदी को देखना चाहता था और यकीन मान वो भी यही चाहती थी. मैंने भी उससे यही कहा था की वो यहाँ आ जाये मगर उसने कहा की वो आना तो चाहती है मगर उसमे तेरा सामना करने की हिम्मत नहीं है. वो बहुत रो रही थी उस वक्त जब मैं दक्षिणा जी के घर उससे मिलने गयी थी." माँ ने ये सब कहा तो मैं हैरान हुआ.

"मैंने उसे समझा दिया है बीटा और तुझसे भी यही कह रही हु की तू उससे ऐसी कोई बात न करना जिससे उसे ऐसा लगे की उसने कितन बुरा किया है तेरे साथ." माँ ने ये कहा तो मैंने हैरानी से उनकी तरफ देखते हुए कहा.

"कमाल है माँ. इसके पहले तो आप दीदी से इतना ज़्यादा गुस्सा थी की उनकी शकल भी नहीं देखना चाहती थी और अब उनकी इतनी ज़्यादा तरफदारी कर रही हैं.?" मैंने ये कहा तो माँ ने मेरी तरफ देखते हुए कहा.

"तूने hi तो कहा था मुझसे की मुझे तेरी कुसुम दीदी से नाराज़ नहीं होना चाहिए क्यों की इस सब में उसकी कोई गलती नहीं थी." माँ ने ये कहा तो मैंने कहा.

"चलिए अच्छी बात है माँ. मुझे ख़ुशी है की आप दीदी से नाराज़ नहीं हैं और अब उनकी इतनी ज़्यादा फ़िक्र कर रही हैं. खेर आप बेफिक्र रहिये मैं दीदी से ऐसी वैसी कोई बात नहीं करुगा. आप तो जानती हैं की मैं खुद को चाहे जितनी भी तकलीफ दे दू मगर दीदी को तकलीफ देने के बारे में सोच भी नहीं सकता." मैंने ये कहा तो माँ ने मेरे चेहरे को प्यार से सहलाते हुए कहा.

"बस तू जल्दी से ठीक हो जा बीटा. उसके बाद मैं बड़ी धूम धाम से तेरी शादी अपनी बेटियों से करुँगी." माँ ने ये कहा तो मैंने कहा.

"और रचना से.???" मैंने ये कहा तो माँ ने मुस्कुराते हुए कहा.

"वो भी अब मेरी बेटी hi है. इसी लिए ऐसा कहा मैंने." माँ ने ये कहा तो मैं कुछ न बोलै. असल में मुझे अब बहुत अजीब सा लगने लगा था और शर्म भी महसूस हो रही थी. मैं समझ सकता था की माँ के लिए इस बात को हजम करना कितना मुश्किल रहा होगा की वो अपने hi बेटे की शादी अपनी hi बेटियों से करेंगी और अपनी hi औलाद की माँ और सास दोनों बन जाएँगी.

"क्या हुआ, तू चुप क्यों हो गया बीटा.?" माँ ने शायद मेरे मन की बात पढ़ ली थी इस लिए ये बोली तो मैंने कहा.

"बस ऐसे hi माँ. शायद किसी ने भी नहीं सोचा था की आने वाले समय में ऐसा कुछ होगा. इस बात को हजम कर पाना शायद बहुत मुश्किल है." मैंने ये कहा तो माँ ने कहा.

"तेरे पिता जी तो चले गए बीटा. मगर सोच की इतने समय से मैं भी इस बात को हजम करने की कोशिश hi कर रही हु. जब भी इस बात का ख़याल आता है की मैं अपने hi बच्चो की माँ और सास दोनों बानगी तो मेरा रोया रोया अजीब से अहसास से खड़ा हो जाता है. खुद पर भरोसा hi नहीं होता की मैंने तेरे पिता जी के कहने पर ऐसे रिश्ते को स्वीकार कर लिया. अगर किसी को इस सबके बारे में पता चल जाये तो शायद हमें इस दुनिया में कही भी मुँह छुपाने के लिए जगह न मिले." माँ ने ये सब कहा तो मैं कुछ बोल न सका. बोलता भी कैसे...? माँ जो भी कह रही थी वो एक ऐसा सच था जिसे दुनिया का कोई भी इंसान हजम नहीं कर सकता था.

"ऐसा कोई din....aisa कोई पल नहीं होता बीटा जब इस बात का ख़याल मेरे मन में आता न हो. हर wakt...har पल इस बात को हजम करने की कोशिश करती हु और अब तो ऐसा लगने भी लगा है की मैं इस बात को बहुत हद तक हजम करने में कामयाब हो चुकी हु. धीरे धीरे शायद बाकी भी हजम कर लगी." माँ ने ये कहा तो मैंने कहा.

"छोड़िये इस बात को माँ. इस बारे में जितना हम सोचेंगे उतना hi शायद उलझते जायेंगे." मैंने बेचैनी से बात को बदलने की गरज़ से ये कहा तो माँ ने एक गहरी सांस ली फिर कहा.

"सही कहा तूने. खेर कुसुम आती hi होगी. दक्षिणा जी ने कहा था की वो घर जाते hi उसे सविता के साथ यहाँ भेज देंगी. मैं चाहती हु की तुम दोनों एक दूसरे से खुल कर बाते कर लो." माँ ने उठते हुए ये कहा तो मैंने हाँ में पलके झपका दी. उधर दरवाज़े के पास पहुंच कर माँ रुकी और पलट कर मेरी तरफ देखते हुए कहा.

"मुझे लगता है की तुझे रचना से भी खुल कर बात कर लेनी चाहिए. मैं नहीं चाहती की उसके साथ किसी भी तरह की na-insaafi हो." माँ ने ये कहा और फिर बाहर चली गयी. जबकि मैं उनकी बातो के बारे में सोचता रहा.

ये सच था की अब तक मैंने रचना से खुल कर इस बारे में कोई बात नहीं की थी. यहाँ आने के बाद जब मैंने सोचा की अब सब कुछ ठीक करू तो मेरे साथ ये हादसा हो गया. मुझे अहसास था की मुझे रचना से बात करनी चाहिए. उससे कहना चाहिए की वो मेरे लिए कोई बोझ नहीं है और न hi वो खुद को ऐसा कुछ समझे. बल्कि यही समझे की उसके लिए मेरे दिल में अगर कुसुम दीदी की तरह चाहत नहीं है तो उनसे काम भी नहीं है. मुझे यकीन है की वो मेरी इस बात से बेहद खुश हो जाएगी.

भाई लोग....

आज के लिए इतना hi....

अब होली के बाद hi अपडेट दे पाउगा....

रीड एन्जॉय & गिव योर फीडबैक....

कीप सपोर्टिंग & स्टे विथ....

:थैंक्यू:
 
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