SAB KUCH JAYAZ HAI... - Page 10 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

SAB KUCH JAYAZ HAI...

थैंक्स फॉर योर लवली कमेंट....

भय थैंक्स फॉर योर लवली सुग्गेस्टिव. मुझे आपका ये सुग्गेस्टिव बहुत अच्छा लगा यारा....

मेरा एक सवाल है की इन सब के बीच में माँ को भी इन्सेस्ट में डालना कहा तक सही है. अपने बोलै की उसने लाइफ में कभी सुख नहीं देखा या उसने लाइफ को एन्जॉय नहीं किया तो भय उसको ख़ुशी रखने के लिए क्या ज़रूरी है की उससे जिस्मानी रिलेशन्स बना दिए जाये हीरो के.????

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ों पेज no. 171....

रीड & एन्जॉय....
 
थैंक्स फॉर योर लवली कमेंट....

थैंक्स भय फॉर योर सुग्गेस्टिव....

यारा आपका सुग्गेस्टिव गलत नहीं है मगर सिचुएशन सही नहीं है. आपकी फ्लैशबैक वाली बात सही है मगर उस फ्लैशबैक को ट्रैन में हीरो अपनी इमेजिनेशन के द्वारा बताये ये सही नहीं है बल्कि दक्षिणा से रिलेशन वाले फ्लैशबैक को हीरो के द्वारा उस टाइम दिखाया जाये जिस टाइम वो अपने और दक्षिणा के बारे में फॅमिली में से किसी को बता रहा हो. या फिर वो रचना को बताये. रचना को बताने से उसे फायदा भी हो सकता है. जस्ट थिंक अबाउट आईटी....

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ों पेज no. 171....

रीड & एन्जॉय....
 
सब कुछ जायज़ है....

अपडेट = 41


ट्रैन में बस ट्रैन के चलने का hi शोर हो रहा था. बाकी लोग शायद अब सोने लगे थे. कही कही से कुछ लोगो की यदा कड़ा आवाज़े आ जाती थी. मैंने अपनी हैंड वाच पर टाइम देखा तो रात के एक बजने वाले थे. आने वाला वक्त हम सबकी लाइफ को बदल देने वाला था. अभी मैंने टाइम देख कर एक तरफ को करवट hi लिया था की तभी मुझे ट्रैन के चलने से हो रहे शोर में एक जानी पहचानी आवाज़ सुनाई दी. मगर फिर मैंने सोचा की शायद ये मेरा वहां होगा इस लिए मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और करवट ले लिया.

मेरे मन में एकदम से ख़याल आया की ये आवाज़ कही प्रिय की तो नहीं. हो सकता है की वो सबके सो जाने के बाद मेरे पास आना चाहती हो. वो सोच रही होगी की मैं उससे नाराज़ हो गया होगा. इस लिए वो मेरे पास आ कर मुझे मानना चाहती होगी. मेरे भी दिमाग में ये बात आयी की सबके सोने के बाद अगर प्रिय मेरे पास hi आना चाहती है तो अच्छा hi है. मैं उसके साथ इस अँधेरे में बहुत कुछ कर सकता था. अभी मैं ये सब सोच hi रहा था की आवाज़ फिर से आयी तो मैंने धीरे से पलट कर आवाज़ की दिशा में देखने की कोशिश की तो हलके अँधेरे में मुझे एक साया नज़र आया जिसे मैं जल्द hi पहचान गया.

अब आगे पढ़िए....


उस साये को pahchan'ne के बाद मैंने जल्दी से इधर उधर देखा. सबसे पहले मेरी नज़र उस तरफ गयी जिस तरफ कुसुम दीदी लेती हुयी थी. मैंने ठीक से देखा तो पता चला की वो दूसरी तरफ करवट लिए सोई हुयी थी. दीदी को अच्छे से देखने के बाद मैंने उस साये की तरफ देखा जो की नीचे फर्श पर खड़ा था. ये साया किसी और का नहीं बल्कि पूजा का था.

पूजा ट्रैन के फर्श पर कड़ी थी और जिस जगह पर मैं लेता था ऊपर उस शीट से लगी हुयी थी वो. मेरे चेहरे के पास आ कर उसने धीरे से कहा सो गए थे क्या तो मैंने भी धीरे से hi कहा की और क्या करता. मेरी ये बात सुन कर उसने बताया की सब लोग गहरी नीड में सोये हुए हैं तो मैं तुम्हारे पास आ जाओ क्या. उसकी ये बात सुन कर मैंने कहा मेरे पास क्यों आओगी तो उसने कहा की बस ऐसे hi.

खेर मुझे भी लगा चलो जब ये कह hi रही है तो इसे अपने पास बुला hi लेता हु. शायद कुछ एन्जॉयमेंट hi हो जाये. मैंने पूजा को ऊपर आ जाने के लिए कह दिया तो वो सीढ़ियों से ऊपर आ गयी और मेरे इस तरफ hi आहिस्ता से लेट गयी जिस तरफ शीट की दिवार थी. इस तरफ से वो कुसुम दीदी को नहीं दिख सकती थी. वैसे भी आधे से ज़्यादा अँधेरा तो था hi.

"उस वक्त तुम और प्रिय इतना जल्दी क्यों चले आये थे.? मैं तो रचना दीदी को इसी लिए अपने साथ ले आयी थी की तुम दोनों शायद कुछ कर सको." पूजा ने बहुत hi धीरे से ये कहा तो मैंने कहा.

"हाँ वो मैं समझ गया था मगर वह पर कुछ नहीं हो सकता था. क्यों की बाकी के लोग उस तरफ भी देख रहे थे. इस लिए हमने कोई रिष्क नहीं लिया था." मैंने ये कहा तो पूजा ने कहा.

"हाँ ये सही किया तुम लोगो ने. खेर छोडो मुझे नींद नहीं आ रही थी. आज दिन में सोई थी न. मैं काफी देर से तुम्हारे पास आने के लिए सोच रही थी मगर दर रही थी की कही कोई जाग न जाये और मुझे तुम्हारे पास देख ले. माँ या दीदी ने अगर मुझे तुम्हारे पास इस तरह देख लिया तो हज़ारो सवाल करने लग जाएगी." पूजा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"चलो अब जब आ hi गयी हो तो क्या सोचना.? वैसे आज मेरा बहुत मन था की ट्रैन में हमारे बीच कोई रोमांस होता तो कितना मज़ा आता. मगर हालात ऐसे थे की ऐसा हो hi नहीं सकता था." मैंने ये कहा तो पूजा ने कहा.

"फ़िक्र क्यों करते हो जान.? मुझे पता था तुम क्या चाह रहे हो. इसी लिए तो इस वक्त मैं तुम्हारे पास आ गयी हु. वैसे सच कहु तो मेरा भी बहुत मन था तुम्हारे साथ सोने का." पूजा ने ये कहा तो मैं मुस्कुराया.

मैं अंदर से बड़ा खुश हो गया था पूजा के आने से. मैंने बात करने में अब वक्त बर्बाद करना सही नहीं समझा और थोड़ा सा आगे बढ़ कर मैंने अपने होठ पूजा के होठो पर रख दिए. मैंने अपने एक हाथ से पूजा को पीठ से पकड़ लिया था. हम दोनों एक दूसरे की तरफ करवट लिए हुए थे. वैसे भी शीट में हम दोनों सीधा लेट नहीं सकते थे. मेरी पीठ कुसुम दीदी की तरफ थी और मेरे सामने पूजा.

मैंने पूजा के होठो को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें मज़े से चूसने लगा. पूजा ने भी अपना एक हाथ मेरे बगल से निकाल कर मेरी पीठ पर कास लिया. हम दोनों के जिसम एक दूसरे से सटे हुए थे. मेरा लुंड कुछ hi सेकंड में तन कर खड़ा हो गया और पूजा की टांगो के बीच लगने लगा. मेरे लुंड का अहसास पूजा को ज़रूर हुआ होगा.

मैंने कुछ देर तक पूजा के होठो को चूसा उसके बाद उसके होठो से अलग हो कर उससे बोलै की वो अपना कुरता और समीज ऊपर कर ले. क्यों की मुझे उसके दुधु पिने थे. मेरी ये बात सुन कर पूजा ने धीरे से कहा खुद hi ऊपर कर दो न. उसकी इस बात से मैंने ऐसा hi किया. कुछ hi देर में मैंने पूजा का कुरता ऊपर कर दिया. उसके बाद जैसे hi मैंने उसकी छाती पर हाथ लगाया तो मुझे समीज की जगह पर ब्रा का आभास हुआ. उसका मतलब पूजा ने आज ब्रा पहन रखा था.

मैंने ब्रा के ऊपर से उसकी चुकी को मुट्ठी में भर कर दो चार बार दबाया तो पूजा की सिसकिया निकलने लगी. मैंने पूजा से पूछा की जब मैं उसकी छाती दबाता हु तो उसे कैसा लगता है तो उसने बताया की उसे बहुत मज़ा आता है और उसके पुरे जिसम में झुरझुरी होने लगती है.

मैंने पूजा की ब्रा को ज़ोर दे कर ऊपर किया तो उसके दोनों बूब्स बाहर आ गए. मुझे ठीक से दिखाई तो नहीं दिए मगर मैंने नीचे खिसक कर उसकी एक चुकी के निप्पल को टटोल कर मुँह में भर लिया और फिर ज़ोर ज़ोर से उसे चूसने लगा. मेरे ऐसा करते hi पूजा मचलने लगी और मेरे सर को पीछे से पकड़ कर अपनी उस छाती पर दबाने लगी. उसका एक बूब नीचे था इस लिए मैं उसे पकड़ नहीं सकता था.

मैं जैसे जैसे पूजा के निप्पल को चूस रहा था पूजा का जिसम मचले जा रहा था. पूजा ने अपनी एक टांग मेरी जांघो पर चढ़ा ली और अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी. मैं समझ गया की उसके अंदर गर्मी बढ़ती जा रही है. उसकी टांगो के बीच में मेरी टांग थी. मैंने अपनी उस टांग को थोड़ा ऊपर किया तो मेरा घुटना उसके प्राइवेट part से जा लगा. जैसे hi मेरी टांग का घुटना उसके प्राइवेट part से लगा तो पूजा ने ज़ोर से मेरे घुटने को अपनी टांगो के बीच दबा लिया.

"सशःह्शशश जान. बहुत मज़ा आ रहा है. हैए मुझे कुछ हो रहा है विक्की. कुछ karo..aaahaahhhasshhshsh." पूजा एकदम से मस्ती में आ गयी थी और मेरे कान के पास सिसकिया भर्ती जा रही थी. उसकी इन सिसकियों से मुझे और जोश आ रहा था. मैं उसकी चुकी को पूरा मुँह में भर कर काट लेता था. मैंने अपने उस घुटने को थोड़ा ऊपर की तरफ दबाया तो इस बार पूजा ने अपनी टांग को हल्का सा फैला लिया. मैं समझ गया की वो चाहती है की मैं उसके प्राइवेट part पर ऐसे hi अपने घुटने से दबाओ.

एक तरफ को करवट लिए लिए ये सब करने में मुश्किल भी हो रही थी इस लिए मैं पूजा से अलग हुआ और पीछे पलट कर कुसुम दीदी की तरफ ध्यान से देखा. वो उसी तरह सोई हुयी जैसे पहले सो रही थी. उन्हें देखने के बाद मैं पलटा और फिर उठ गया. उसके बाद मैंने पूजा को आराम से सीधा लेटने को कहा तो वो लेट गयी. उसका कुरता उसके गले तक ऊपर था और उसकी छतिया पूरी नंगी थी. अँधेरे में भी उनका गोरापन साफ़ नज़र आ रहा था.

पूजा के let'te hi मैं उसके ऊपर आ गया और फिर आराम से पहले उसके होठो को चूसा उसके बाद नीचे सरक कर मैंने फिर से उसकी छाती के निप्पल को मुँह में भर लिया. पूजा एक बार फिर से मचलने लगी. मैं उसकी टांगो के बीच से ऊपर था इस लिए वो अपनी टांगो को मेरी पीठ और कमर पर लगा रही थी. मैंने पूजा के दोनों बूब को जी भर के चूसा और दबाया और फिर नीचे सरकते हुए उसकी नाभि और पेट पर आया और यहाँ भी चूमने लगा.

पूजा की साँसे काफी तेज़ चल रही थी. इधर मेरा लुंड बुरी तरह तन्नाया हुआ था. मगर मैं उसका इलाज़ अभी नहीं कर सकता था. उसके लिए अभी ये सही वक्त नहीं था शायद और अगर था भी तो मुझे पूजा से उसके लिए कहने में बहुत झिझक हो रही थी. मैं जनता था की अगर मैं उससे कहुगा तो वो मन नहीं करेगी. मगर मुझे कहने में झिझक थी अभी.

पूजा की नाभि को चूमते हुए मैं थोड़ा और नीचे आया तो मेरा मुँह पूजा की शलवार के ऊपरी हिस्से पर आ गया. पूजा को मस्ती चढ़ी हुयी थी. उसे अब कुछ भी होश नहीं था. मैं थोड़ा और नीचे खिसका तो मेरी नाक में बहुत hi मादक खुशबु भर्ती चली गयी. इस खुशबु को पहचानने में मुझे ज़रा भी देर न लगी. ये खुशबु पूजा के योनि रास की थी. वो इतना गरम हो चुकी थी की उसकी गर्मी उसकी योनि के रास्ते से निकलने लगी थी.

इस खुशबु से मैं एकदम से पागल सा होने लगा और मुझ पर मदहोशी सी छाने लगी. मैंने एकदम से अपना मुँह शलवार के ऊपर से पूजा की योनि पर रख दिया. मैंने जैसे hi उसकी योनि पर मुँह रखा तो एकदम से मेरे सर पर पूजा के हाथ जैम गए और वो मेरे सर को अपनी योनि की तरफ दबाने लगी.

पूजा ने जैसे hi मेरे सर को अपनी योनि पर दबाया तो मैंने भी फिर झिझक न की और उसकी योनि पर अपना मुँह घिसने सा लगा तो पूजा बड़ी तेज़ी से मचलने लगी. मेरी नाक में उसके योनि रास की खुशबु समाती जा रही थी और मुझे पल पल पागल करती जा रही थी.

मुझे अपने मुँह पर पूजा की योनि का क्लियर आभास नहीं हो रहा था बस हल्का सा गुदगुदा सा फील हो रहा था. शलवार के अंदर उसने कच्छी पहन रखा था. मेरा बहुत दिल किया की मैं पूजा की योनि में खुल कर अपना मुँह दे दू. मगर मुझे लग रहा था की कही ये ज़्यादा न हो जाये.

मैं एकदम से ऊपर की तरफ आया और पूजा के होठो को दो तीन बार चूमा और फिर उसके कान में धीरे से मगर भारी आवाज़ में कहा की क्या मैं आगे बधु और क्या वो इसके आगे जाने की हालत में है. मेरी इस बात से पूजा ने अपने दोनों हाथो में मेरा चेहरा लिया और मेरे होठो को पहले चूमा फिर बोली की मैं तुम्हारी हु विक्की. मेरा सब कुछ तुम्हारा है तुम जो चाहो करो मगर मैंने ये सोचा है की मैं जब भी आखिरी वाला काम करू तो वो एक यादगार बन जाये मेरे लिए. पूजा की इस बात पर मैंने पूछा वो कैसे तो उसने कहा की वो मेरे साथ वो सब वैसे hi करना चाहती है जैसे एक नयी नवेली दुल्हन की सुहागरात होती है.

पूजा की इस बात से मैं हैरान रह गया. मगर जब सोचा तो मुझे समझ भी आ गया की वो ऐसा क्यों कह रही थी. वो मुझसे प्यार करती थी और चाहती थी की वो मेरी दुल्हन बने और तब वो मेरे साथ सुहागरात मनाये. ये बात hi ऐसी थी की इसे सोच कर मेरे जिसम में रोमांच की लहार दौड़ गयी. मैंने पूजा से कहा ठीक है जैसे तुम चाहती हो वैसा hi होगा मगर इस वक्त ऊपर ऊपर से तो कर सकता हु न. मेरी इस बात से पूजा ने कहा ठीक है कर लो.

पूजा की इजाज़त मिलते hi मैंने अपना एक हाथ नीच की तरफ बढ़ाया और फिर शलवार के अंदर हाथ दाल दिया मैंने. मेरे ऐसा करते hi पूजा बड़ा ज़ोर से मछली और अपनी टांगो को भींच लिया. इधर शलवार के अंदर जैसे hi मेरा हाथ आया तो मुझे उसकी कच्ची महसूस हुयी. मैंने कच्छी के ऊपर से hi पूजा की योनि पर अपना हाथ फेरा तो मुझे अपने हाथ पर गरम गरम और कुछ गीला गीला सा महसूस हुआ.

मैं अपनी उंगलियों से पूजा की योनि को सहलाने लगा. जिससे पूजा और ज़ोर ज़ोर से मचलने लगी और मेरे कान के पास वो बुरी तरह से आअह्ह्हे भरते हुए सिसकिया लेने लगी. वो तो अच्छा था की ट्रैन के चलने का शोर हो रहा था वर्ण पूजा की ये सिसकिया सब को ज़रूर जगा देती. पूजा की कच्छी उसकी योनि वाली जगह पर गीली हो गयी थी और मेरी उंगलियों में उसका वो गीलापन साफ़ साफ़ महसूस हो रहा था. मेरी उगलिया भी हल्का गीली हो गयी थी.

"आअह्ह्ह्हह जान ये क्या हो रहा है मुझे. ऐसा लग रहा है जैसे मैं हवाओ में उड़ रही हु. मेरे अंदर बहुत तेज़ कुछ दौड़ रहा है." पूजा आहे भरते हुए मेरे कान के पास बोले जा रही थी. जबकि मैं उसकी एक चुकी को मुँह में भरे चूसे जा रहा था.

इधर मैंने अपना हाथ उसकी शलवार से निकला और उसकी शलवार का नाडा खोलने लगा जो थोड़ी देर में खुल hi गया. जैसे hi नाडा खुला तो मैंने शलवार को नीचे खिसका दिया. पूजा ने अपनी कमर को उठा लिया था जिससे शलवार आराम से नीचे खिसक गयी थी. अब वो सिर्फ कच्छी में थी. मैंने अपने मुँह से उसकी चुकी को बाहर निकला और खिसक कर नीचे आया.

नीचे आते hi मैंने पूजा की कच्छी को पकड़ कर नीचे खिसकना चाहा तो पूजा ने जल्दी से मेरे हाथ पकड़ लिए. मैं समझ गया की शायद उसे अब शर्म आ रही है अपने फुल नंगी हो जाने से. मगर मैं न रुका और ज़ोर दे कर उसकी कच्ची को नीचे खिसकता hi चला गया. कच्छी जैसे hi नीचे हुयी तो मेरी नाक में एकदम से तेज़ खुशबु भर गयी.

मैंने उसकी कच्छी को जांघो तक hi खिसकाया था. उसके बाद मैंने ध्यान से देखा तो मुझे पूजा की योनि पर चारो तरफ बालो का आभास हुआ. बालो के बीच hi कही उसकी योनि छुपी हुयी थी. दिल्ली में दक्षिणा और किरण की छूट पर बाल नहीं होते थे. क्यों की वो हमेशा साफ़ करके रखती थी. मुझे चिकनी छूट बहुत पसंद थी. मगर यहाँ पूजा की योनि में बाल थे. मैंने अपने हाथ से उसकी योनि के चारो तरफ सहलाया तो मेरे हाथ में बालो का अहसास हुआ.

मैं एकदम से ऊपर आया और पूजा के कान में कहा की वो नीचे के बालो को साफ़ क्यों नहीं करती है. मेरी इस बात से पूजा ने सिसकी लेते हुए कहा की वो कैसे करती साफ़. उसके पास साफ़ करने का कोई साधन hi नहीं था कभी. मैं समझ गया की गांव में ऐसा ज़्यादातर होता है. उसकी भी गलती नहीं थी. मैंने उससे कहा की दिल्ली में मैं उसके लिए हर सामान और साधन ला कर दे दुगा.

मैं एक बार फिर से नीचे आया और पूजा की कच्छी को ऊपर सरका दिया. उसके बाद मैं उसकी कच्छी के ऊपर से hi उसकी योनि पर अपना मुँह रख दिया. मेरे मुँह पर गीला गीला अहसास हुआ और मेरी नाक में योनि रास की खुशबु भरने लगी जो मुझे पागल करने लगी थी. इधर जैसे hi मैंने पूजा की योनि में अपना मुँह रखा तो पूजा ने अपने दोनों हाथो को मेरे सर पर रख लिया.

मैंने अपनी जीभ निकाली और योनि में नीचे से ऊपर की तरफ फेरने लगा. मेरे ऐसा करते hi पूजा मचलने लगी. मेरी जीभ में पूजा की योनि का रास लगने लगा जिसका स्वाद मुझे काफी अच्छा लगा. मैंने जीभ से उसकी योनि को चाटने की रफ़्तार तेज़ कर दी. कभी कभी तो मैं उसकी योनि को मुँह में hi कच्छी के ऊपर से भर लेता था. जिससे पूजा बुरी तरह मचल कर रह जाती थी. मेरा खुद का बुरा हाल था. मेरा लुंड बुरी तरह ऐंठ गया था और अब उसमे दर्द भी होने लगा था.

पूजा मेरे सर के बालो को नोचने लगी थी और अब उसके जिसम में तेज़ तेज़ हलचल होने लगी थी. वो अपनी कमर उठा उठा कर शीट पर पटक रही थी. मैं समझ गया की ये अब झड़ने वाली है और वही हुआ भी. पूजा के जिसम को तेज़ तेज़ झटके लगने और वो झड़ने लगी. उसका गरम गरम पानी योनि से निकला जो कच्ची से छान कर बाहर आने लगा था. मैं तेज़ी से उसके उस छाने हुए पानी को छाते जा रहा था. कुछ hi पालो में पूजा एकदम से शांत पद गयी. जबकि मैं वैसे hi लगा रहा. मैंने कच्छी के ऊपर से उसके सरे पानी को चाट लिया था. उसकी योनि के रास का स्वाद और उसकी खुशबु गजब की थी. उसकी कच्छी अब पूरी तरह से गीली हो गयी थी.

मैं ऊपर आया और अपना मुँह उसके होठो पर रखा तो पूजा ने एकदम से अपने होठो को मुझसे अलग किया और बोली छियई ये क्या है भाई. उसकी इस बात से मैंने मुस्कुराते हुए कहा की मेरे होठो पर ये उसकी योनि से निकला हुआ पानी है जिसे अब तक मैं बड़े मज़े से चाट रहा था. मेरी बात सुन कर पूजा ने कहा हे भगवन कितने गंदे हो भाई तुम. कोई ऐसा भी करता है क्या. पूजा की इस बात पर मैंने कहा वाह इसके पहले तो बड़ा मज़ा आ रहा था तुम्हे जब मैं तुम्हारे पानी को मज़े से चाट रहा था. तब तुम्हे गन्दा नहीं लगा था और अब गन्दा लगने लगा.

मेरी बात सुन कर पूजा ने हस्ते हुए कहा की उसे किसी बात का होश hi नहीं था उस वक्त. मैंने कहा कोई बात नहीं अब तुम भी अपने पानी का स्वाद मेरे होठो से लो. मेरी बात सुन कर पूजा ने कहा नहीं भाई ये बहुत गन्दा है तो मैंने कहा कोई गन्दा नहीं है और उसके होठो को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा. पूजा मुझसे छूटने की कोशिश करती hi रह गयी. कुछ देर बाद मैं उससे अलग हुआ तो पूजा ने कहा की बहुत गंदे हो तुम.

मेरा लुंड अभी भी बुरी तरह तन्नाया हुआ था और मैं चाहता था की उसका भी पानी निकल जाये मगर कैसे निकालू ये समझ नहीं आ रहा था. मुझे पूजा से कहने में भी झिझक हो रही थी. मैं उससे कैसे कहता की वो मेरे लुंड का पानी निकाले.?

मैंने बहुत हिम्मत करके उससे कहा की उसकी गर्मी तो निकल गयी और अब वो शांत भी हो गयी है मगर मेरा क्या. मेरी इस बात से पूजा ने कहा की कैसी गर्मी भाई तो मैंने उसका हाथ पकड़ा और एकदम से अपने अकड़े हुए लुंड पर रख दिया. पूजा को जैसे hi अपने हाथ पर मेरे लुंड का आभास हुआ और उसे पता चला तो उसने बड़ी तेज़ी से अपने हाथ को हटाने की कोशिश की मगर मैं तो जानता hi था की ऐसा होगा इस लिए उसे अपना हाथ हटाने नहीं दिया. उसके बाद मैंने कहा इसकी गर्मी डिअर. तुम्हारी गर्मी तो निकल गयी और उसे मैंने मज़े से चाट भी लिया मगर मेरे इसकी गर्मी का क्या.

मेरी इस बात से पूजा कुछ बोल न सकीय. कुछ देर तक वो मेरे लुंड से अपना हाथ हटाने की कोशिश करती रही फिर उसने कोशिश बंद कर दी और फिर धीरे से बोली. भाई ये क्या है तो मैंने कहा की क्या तुम्हे पता नहीं है की ये क्या है. मेरी इस बात से पूजा ने कहा की हाँ पता तो चल गया है मगर क्या ये इतना बड़ा होता है.? उसकी इस बात से मैंने कहा ये इतना बड़ा तभी होता है जब इसमें गर्मी भर जाती है. बाकी नार्मल हालत में ये इससे छोटा रहता है.

मैंने पूजा के हाथ के ऊपर से hi अपने लुंड को हलके हलके दबाया. मैंने जीन्स का पेंट पहना हुआ था इस लिए ज़्यादा कुछ हो नहीं सकता था. मैंने पूजा से धीमी आवाज़ में कहा की अब इसकी गर्मी को कैसे निकालू. मेरी इस बात से पूजा ने कहा की मुझे क्या पता भाई. पूजा की इस बात पर मैं समझ गया की इसे अभी ज़्यादा कुछ पता नहीं है या फिर ये अनजान बनने का नाटक कर रही है. जबकि मेरा अब बुरा हाल था. मैं अब किसी भी तरह अपना पानी निकाल कर खुद को शांत करना चाहता था.

मैंने पूजा से कहा की वो अपने कपडे ठीक कर ले क्यों की मैं बाथरूम जा रहा हु. मेरी इस बात से पूजा ने कहा की बाथरूम क्यों भाई क्या सुसु आयी है तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा हाँ. मेरी इस बात से पूजा ने कहा की उसे भी सुसु आयी है. उसकी इस बात पर मेरे दिमाग में एकदम से एक बात आयी तो मैंने उससे कहा की चलो हम दोनों साथ hi बाथरूम चलते हैं.

मैं ऊपर की शीट से नीचे उतर आया. मेरे नीचे आने के बाद पूजा ने अपने कपडे सही किये और फिर वो भी सीढ़ियों से नीचे उतर आयी. मैंने आस पास देखा सब सोये हुए थे. सिंगल वाली शीट पर एक अधेड़ आदमी लेता हुआ था जबकि उसके ऊपर की शीट खाली थी. मैंने माँ दीदी रचना और प्रिय सब को ध्यान से देखा. ये सब गहरी नींद में सो रहे थे. ये देख कर मैं पूजा को ले कर बाथरूम की तरफ चल दिया.

रास्ते में भी मैं सब की तरफ देखता जा रहा था. ज़्यादातर लोग सो गए थे और इक्का दुक्का लोग जो जाग रहे थे वो मोबाइल में लगे हुए थे. मैं और पूजा थोड़ी hi देर में बाथरूम के पास आ गए. बाथरूम के पास वाली शीट पर भी लोग थे जो लेते हुए थे. मैंने ये महसूस किया की ट्रैन में ज़्यादा भीड़ वाली बात नहीं थी. वर्ण तो रिजर्वेशन वाले डिब्बे में भी भीड़ हो जाती थी. खेर ये मेरे लिए अच्छा hi था.

बाथरूम के पास आ कर मैंने पूजा से कहा वो पहले बाथरूम के अंदर जाये. मेरे कहने पर पूजा अंदर चली गयी तो मैं भी इधर उधर देखते हुए जल्दी से अंदर चला गया और फिर अंदर से बाथरूम की कुण्डी बंद कर दी. मैं जैसे hi अंदर आया तो पूजा ने हैरानी से मेरी तरफ देखा और बोली की मैं क्यों आ गया तो मैंने उसे समझाया की क्या करना है.

पूजा के चेहरे पर घबराहट दिख रही थी मुझे. मैं जनता था की वो यहाँ मेरी वजह से नहीं बल्कि इस वजह से घबरा रही है की अगर कोई यहाँ आ गया तो क्या होगा. खेर मैंने पूजा से कहा की वो वैसा hi करे जैसा मैंने उसे समझाया है. मुझे अजीब तो लग रहा था मगर मुझे अब अपना पानी निकालना था किसी तरह.

मैंने अपने पेंट के बेल्ट को खोल कर पेंट को नीचे सरकाया. कच्छे में मेरा तना हुआ लुंड साफ़ दिख रहा था. पूजा की नज़र जैसे hi कच्छे के अंदर मेरे तने हुए लुंड के उभार पर पड़ी तो उसने हैरानी से पहले देखा और फिर जल्दी से अपनी नज़रो को दूसरी तरफ कर लिया.

"क्या हुआ.??" मैंने ये कहा तो पूजा ने दूसरी तरफ देखते हुए hi कहा.

"मुझे बहुत शर्म आ रही है भाई." पूजा की बात पर मैंने मुस्कुराते हुए कहा.

"अब इससे क्या शर्माना माय डिअर.? आने वाले वक्त में इसी से सब काम होने हैं." मैंने ये कहा तो पूजा ने शरमाते हुए कहा.

"हाँ पर मुझे अभी तो शर्म आ रही है न भाई." पूजा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"अब शर्माना छोडो और जल्दी से इधर ध्यान दो और जो समझाया है वो करो. वर्ण कही ऐसा न हो की इधर कोई बाथरूम करने के लिए आ जाये." मैंने ये कहा तो पूजा ने कहा.

"मुझसे नहीं होगा भाई. तुम खुद hi कर लो न जो करना है तुम्हे." पूजा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"ठीक है जाओ तुम यहाँ से. मैं खुद hi कर लूँगा." मैंने थोड़ा नाराज़गी से ये कहा तो पूजा ने जल्दी से मेरी तरफ देखा और कहा.

"भाई नाराज़ न हो न. मुझे सच में बहुत शर्म आ रही है वैसा करने की बात सोच कर. इस लिए कह रही हु." पूजा ने ये कहा तो मैं ने कहा.

"हाँ तो ठीक है न जाओ तुम. मैं अपना काम खुद hi कर लूँगा." मैंने कहने के साथ hi पलट कर बाथरूम की कुण्डी खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तो पूजा ने एकदम से मेरा हाथ पकड़ लिया फिर बोली.

"रुक जाओ भाई मैं करती हु न." पूजा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"नहीं अब तुम्हे कुछ करने की ज़रूरत नहीं है. तुम जाओ यहाँ से." मैंने ये कहा तो पूजा मेरी तरफ देखती रह गयी.

मुझे सच में गुस्सा आ गया था. एक तो इतनी देर से मेरा बुरा हाल था और अब ये इस तरह की बात कर रही थी. पूजा समझ गयी थी की मैं अब उससे गुस्सा हो गया हु और यही वजह थी की वो अब वो सब करने के लिए कह रही थी जो करने के लिए मैं उससे कह रहा था पहले.

मैं जब न मन तो पूजा ने जल्दी से अपना हाथ बढ़ाया और मेरे कच्छे को कांपते हाथो से पकड़ कर नीचे करने की कोशिश की. मुझे गुस्सा तो अभी भी उस पर था मगर अब उसे ये करता देख अपने गुस्से को शांत करने लगा था.

पूजा ने धीरे धीरे करके मेरे कच्छे को नीचे कर hi दिया. कच्छा जैसे hi नीचे आया तो मेरा बुरी तरह अकड़ा हुआ लुंड उछाल कर बाहर आ गया. वो एकदम से ऊपर की तरफ तना हुआ था. पूजा की नज़र जैसे hi मेरे तने हुए लुंड पर पड़ी तो उसके मुँह से सिसकी निकल गयी. वो फटी फटी आँखों से उसे देखे जा रही थी. उसके चेहरे में एकदम से घबराहट आ गयी थी. मैं उसकी हालत को समझ सकता था. वो लाइफ में पहली बार किसी जवान मर्द का खड़ा हुआ लुंड देख रही थी और मेरा लुंड था भी ऐसा की उसकी लम्बाई और मोटाई देख कर किसी भी कुवारी लड़की की ये दसा हो जनि थी.

"अब इसे देखती hi रहोगी या आगे भी कुछ करोगी.?" मैंने ये कहा तो पूजा एकदम से दूसरी दुनिया से बाहर आयी और फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली.

"Ye...ye इतना बड़ा होता है क्या भाई.?" पूजा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"हाँ इससे भी बड़े होते हैं. कुछ लोग इसके बड़े आदमी होते हैं. खेर ये बाते छोडो और आगे का काम शुरू करो जैसा मैंने बताया था." मैंने ये कहा तो पूजा ने मेरे लुंड की तरफ देखा और फिर अपने कांपते हाथ को मेरे लुंड की तरफ बढ़ाया.

जैसे hi पूजा के कोमल हाथ ने मेरे लुंड को छुआ तो मेरे लुंड पर hi नहीं बल्कि मेरे पुरे जिसम में झुरझुरी हुयी. मैंने जल्दी से हाथ बढ़ा कर पूजा के हाथ के ऊपर से अपना हाथ अपने लुंड पर रखा और उसे मुट्ठी में ले लिया. मैंने पूजा से कहा की ऐसे hi पकड़ कर अब उसे आगे पीछे करती जाओ.

मेरे कहने पर पूजा वैसा hi करने लगी. वो बहुत ज़्यादा घबराई हुयी लग रही थी. मैंने उसके हाथ के ऊपर से अपना हाथ हटा लिया और फिर अपने दोनों हाथो से पूजा का चेहरा ले कर उसके होठो को चूसबे लगा. पूजा का जिसम कांप रहा था. वो मेरे लुंड को मुट्ठी में लिए धीरे धीरे आगे पीछे कर रही थी. मैंने उसके होठो से अलग हो कर उससे कहा की वो लुंड को मुट्ठी में कास कर पकडे और फिर थोड़ा जल्दी जल्दी आगे पीछे करे.

मेरे कहने पर पूजा ने ऐसा hi किया. अब पूजा अच्छे से करने लगी तो मैं फिर से उसके होठो को चूमने चूसने लगा. एक हाथ से मैंने उसके कुर्ते को ऊपर सरकाया और फिर उसकी ब्रा को भी ऊपर कर दिया और फिर मैं उसकी नंगी चुकी को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. बाथरूम में लाइट का प्रकाश था. इस लिए सब कुछ क्लियर दिख रहा था. पूजा के अंदर गर्मी आने लगी तो वो तेज़ी से मेरे लुंड को आगे पीछे करने लगी.

मैंने पूजा के होठो से अपना मुँह हटा कर पूजा की छतियो की तरफ देखा. उफ्फ्फ दूध की तरह गोरी उसकी चूचिया मुझे पागल कर रही थी. पिंक कलर के निप्पल मेरे मुँह में पानी ला रहे थे. मैंने एकदम से उसके एक निप्पल को मुँह में लिया और फिर ज़ोर ज़ोर से छूने लगा. पूजा बुरी तरह मचलने लगी और अपने एक हाथ से मेरे सर को पकड़ कर अपनी उस चुकी पर दबाने लगी.

इधर मेरे लुंड को वो तेज़ तेज़ आगे पीछे किये जा रही थी. मुझे अब बहुत मज़ा आ रहा था. मुझे लग रहा था की मैं पूजा को अभी नंगी करके उसको छोड़ना शुरू कर दू. मगर उसकी ख्वाहिश का सोच कर मैंने ऐसा करना ठीक नहीं समझा.

"आअह्ह्ह्ह pooja....meri jaan...aise hi तेज़ तेज़ आगे पीछे करती जाओ." मैंने उसके निप्पल को मुँह से निकाल कर आहे भरते हुए ये कहा तो पूजा और तेज़ी से अपना हाथ चलने लगी.

"Bhai...aisa कब तक करना पड़ेगा मुझे.? वो क्या है न मेरे हाथ में अब दर्द होने लगा है." पूजा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"बस थोड़ी देर और मेरी जान. थोड़ी hi देर में मेरा पानी निकल जायेगा तो मैं शांत पद जाउगा जैसे तुम शांत हो जाया करती हो." मैंने ये कहा तो पूजा कुछ न बोली और तेज़ तेज़ हाथ चलने लगी.

मेरा मज़े में बुरा हाल था. मेरी आँखे बंद हो चुकी थी. मुझसे अपनी टांगो पर खड़ा न रहा गया तो मैंने बाथरूम की दिवार पर अपनी पीठ टिका दी. कुछ hi पालो में मुझे मेरी रगो में दौड़ता हुआ खून उबलता महसूस होने लगा. मेरे अंदर बड़ी तेज़ी से रक्त संचार बढ़ने लगा. मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगी थी और फिर एकदम से मज़े की इन्तहा से मेरा जिसम अकड़ गया. पूजा बड़ी तेज़ी से मेरे लुंड की मुट्ठ मारे जा रही थी. मैं मज़े के सातवे आसमान में पहुंच गया और फिर एकदम से मेरे लुंड ने अपना पानी छोड़ना शुरू कर दिया. एक के बाद एक झटके लगते चले गए मुझे.

उधर जैसे hi मेरे लुंड से सफ़ेद पानी की पिचकारियां निकालनी शुरू हुयी तो पूजा आँखे फाड़ कर देखने लगी उसे. शायद वो पहली बार hi ये सब देख रही थी. मेरे लुंड से निकलती पिचकारियां उछाल कर सामने की दिवार पर निशाना बना रही थी. पूजा उसी तरह मेरी मुट्ठ मारे जा रही थी. मैंने एकदम से उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और उसे मुट्ठ मारने से रोका. उसकी खुद की साँसे भारी हो गयी थी.

बाथरूम के अंदर आया हुआ तूफ़ान थम गया था. मेरे जिसम से मेरी गर्मी निकल चुकी थी. मैं निढाल सा बाथरूम की दिवार से टिका खड़ा था. मेरी आँखे अभी भी मज़े में बंद थी. तभी पूजा की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी.

"भाई क्या हुआ tumhe....aur ये तुम्हारे उसमे से क्या निकला है. ये सुसु तो नहीं लग रहा मुझे." पूजा ने ये कहा तो मेरे होठो पर मुस्कान फ़ैल गयी. मैंने आँखे खोल कर उसकी तरफ देखा.

वो बड़ी hi मसुमियत से मेरी तरफ देख रही थी. मुझे उस पर be-inteha प्यार आया तो मैंने उसे खींच कर उसके होठो को चूमना शुरू कर दिया. कुछ देर उसके होठो को चूमने के बाद मैंने उससे कहा.

"हाँ सही कहा तुमने. वो सुसु नहीं था. वो मेरे जिसम के अंदर की गर्मी थी पूजा जो मेरे लुंड के रास्ते से निकल गयी है. तुम्हे पता है ये जो सफ़ेद पानी होता है na...ye जब किसी औरत की योनि के अंदर जाता है तो इसी से उस औरत को बच्चा होता है." मैंने ये कहा तो पूजा मुझे हैरानी से देखने लगी.

"जब पति पत्नी सेक्स करते हैं तब ये निकलता है और जब आदमी का ये सफ़ेद पानी औरत की योनि में जाता है तो एक ख़ास वक्त पर वो बच्चे की रूप रेखा बनाने लगता है. फिर नौ महीने बाद औरत को बच्चा होता है." मैंने ये कहा तो पूजा ने हैरानी से मेरी तरफ देखते हुए कहा.

"अच्छा ऐसे होता है क्या बच्चा.? मुझे तो पता hi नहीं था भाई. इसका मतलब हम सब भी ऐसे hi पैदा हुए हैं. पिता जी ने माँ के साथ......." पूजा ये कहते कहते अचानक रुक गयी. उसने अपनी बात को पूरा नहीं किया बल्कि शर्म से मुस्कुराते हुए उसने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया था.

"हाँ सही समझा तुमने. माँ और पिता जी ने आपस में सेक्स किया तभी हम सब भाई बहन पैदा हुए हैं." मैंने उसकी बात को पूरा किया तो पूजा ने कहा.

"अब यहाँ से चलो भाई. कही ऐसा न हो कोई आ जाये यहाँ." पूजा ने ये कहा तो मैंने हाँ कहा. वो सही कह रही थी. कोई भी आ सकता था. इस लिए मैंने जल्दी से अपने लुंड को वही पानी से धोया और फिर कच्चे को ऊपर करके पेंट को ठीक से पहन लिया.

"Bhai...wo मुझे न वह पर बहुत अजीब सा लग रहा है." पूजा ने शरमाते हुए धीरे से ये कहा तो मैंने कहा.

"कहा पर अजीब सा लग रहा है.?" मैंने ये पूछा तो पूजा ने शरमाते हुए अपनी योनि की तरफ उषारा किया. मैं समझ गया की उसकी कच्छी उसके पानी की वजह से गीली हो गयी थी जिससे उसे अब अजीब लग रहा है.

"तो उसको उतार दो और दूसरी पहन लो." मैंने ये कहा तो पूजा ने कहा.

"दूसरी तो बैग में डाली हुयी है भाई. इस वक्त उसे कैसे निकाल कर पहनुंगी.? कही ऐसा न हो कोई जाग जाये और मुझसे पूछने लगे की मैं क्या ढूढ़ रही हु.?" पूजा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"तो फिर एक काम करो. इसे उतार दो और बस शलवार में hi रहो. सुबह जब टॉयलेट के लिए यहाँ आना तो अपनी कच्छी ले कर आना और यही पहन लेना उसे." मैंने ये कहा तो पूजा ने कहा.

"हाँ ये ठीक रहेगा. मगर भाई बिना कच्छी के मुझे अजीब सा लगेगा अंदर से." पूजा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"कोई बात नहीं. अभी जा कर चुप चाप सो जाना बस." मैंने ये कहा तो पूजा ने कहा ठीक है. उसके बाद पूजा ने कहा की उसे सुसु करना है तो मैंने कहा कर लो. मेरी इस बात से पूजा ने हस्ते हुए कहा की वो मेरे सामने नहीं करेगी. मैंने भी सोचा टाइम बर्बाद न करू इन बातो से. इस लिए कुण्डी खोल कर पहले बाहर अच्छी तरह देखा उसके बाद मैं बाहर आ गया.

कुछ देर में जब पूजा बाथरूम से बाहर आयी तो मैं भी अंदर चला गया. लुंड से पानी निकलने के बाद कुछ देर में पेशाब भी ज़ोर का लगता है और मुझे पता था की लगेगा इस लिए अभी कर लेना ज़्यादा बेटर था.

थोड़ी देर में मैं और पूजा चुप चाप अपनी जगह पर आ गए. मैंने देखा की सब लोग वैसे hi सोये हुए थे. ये देख कर मैंने पूजा को इशारा किया तो वो अपनी शीट पर जा कर लेट गयी. उसके बाद मैं भी ऊपर आ गया और आराम से लेट गया.

लेते लेते मैं इस सब के बारे में सोचने लगा था. आज पूजा के साथ बहुत कुछ हो गया था और अब आखिरी वाला काम hi रह गया था. यही सब सोचते सोचते मुझे जाने कब नींद आ गयी और मैं सो गया.

सुबह माँ के जगाने पर hi मेरी नीड खुली. मैंने अपनी हैंड वाच में टाइम देखा तो सुबह के आठ बज रहे थे. ये देख कर मैं जल्दी से उठ कर बैठ गया. मैंने देखा की सामने वाली शीट खाली थी. नीचे सब लोग आमने सामने बैठे हुए थे. दिन हो गया था इस लिए ज़्यादातर लोग जाग गए थे और अपनी शीतो पर बैठे हुए थे. कुछ लोग अभी भी सो रहे थे.

मैं जब जाग गया तो माँ ने मुझे फ्रेश होने के लिए कहा तो मैं सीढ़ियों से नीचे उतर आया. बैग से अपना मंजन ब्रश ले कर मैं बाथरूम की तरफ चला गया. फ्रेश हो कर मैं आया और मंजन ब्रश को बैग में रख कर माँ के सामने वाली शीट पर hi बैठ गया. माँ वाली शीट पर खिड़की के पास कुसुम दीदी फिर माँ और फिर रचना बैठी हुयी थी. जबकि इस तरफ खिड़की के पास पूजा फिर प्रिय और फिर मैं बैठा हुआ था.

पूजा को देखते hi मुझे कल रात की साड़ी बात याद आयी तो मैं अंदर hi अंदर मुस्कुराया. पूजा ने एक बार मेरी तरफ देखा था और फिर उसने मुस्कुरा कर अपने चेहरे को खिड़की की तरफ कर लिया था. माँ ने मुझसे पूछा की अभी कितना टाइम लगेगा दिल्ली पहुंचने में तो मैंने बताया की दस बजे पहुंच कयेगे.

ट्रैन में hi हम सबने चाय पि और थोड़ा बहुत नास्ता किया जो घर से ले कर आयी थी माँ. उसके बाद मैं अपनी शीट से उठ कर बाथरूम की तरफ आया और दक्षिणा को कॉल लगाया. तीसरी रिंग पर दक्षिणा ने कॉल उठाया.

"गुड मॉर्निंग माय डिअर." दक्षिणा ने अपनी खनकती हुयी आवाज़ में ये कहा तो मैंने भी उसे गुड मॉर्निंग विश किया उसके बाद मैंने उसके पूछने पर बताया की अभी हम सब कहा पर हैं.

"ठीक है जान. मैं 9:45 तक रेलवे स्टेशन पहुंच जाओगी. अगर कहो तो मैं सबके लिए कुछ खाने पिने का भी इंतजाम कर दू.?" दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने उससे कहा.

"इसकी ज़रूरत नहीं है डिअर. मैं उन सब को आज बाहर से खाना ले आवग. शाम को माँ के हाथ का बना hi हम सब खायेगे. बाकी सब चीज़ो का इंतजाम तो कर hi दिया होगा न तुमने.?" मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"हाँ और तो सब हो गया है. मैंने अपना एक गैस सिलेंडर वह पर रखवा दिया है. राशन भी खरीद कर रखवा दिया है." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"चलो ठीक है डिअर. मैं वह आते hi सबसे पहले गैस का कनेक्शन करवाऊंगा. एक सिलेंडर में शायद गुज़ारा न हो पाए." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"हाँ ये सही कहा तुमने. गैस का कनेक्शन तो करवाना hi पड़ेगा. मेरे पास तीन हैं जिसमे से एक भरा हुआ था तो मैंने उसे तुम्हारे यहाँ रखवा दिया है." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने खुश होते हुए कहा.

"चलो ये बहुत अच्छा किया डिअर. आज तो सारा टाइम सबको ब्यवस्थित करने में hi लग जायेगा. कल से दूसरे काम देखूगा." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"और तो सब ठीक है जान. मुझे बस ये फ़िक्र है की तुम कही अपनी फॅमिली के लिए मुझे न भूल जाओ." दक्षिणा ने थोड़ा उदास हो के ये कहा तो मैंने कहा.

"फ़िक्र मत करो डिअर. मैं पूरी कोशिश करुगा की तुम्हे अकेला न रहना पड़े. मैं ये भी कोशिश करुगा की तुम्हारे बारे में अपनी फॅमिली को सब कुछ बता सकू. बाकी फ्यूचर पर छोड़ दो. देखते हैं क्या होता है.?" मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"ठीक है डिअर जैसा तुम्हे ठीक लगे वैसा करो. मैं तो बस ये चाहती हु की तुम्हारा थोड़ा सा प्यार मुझे भी मिलता रहे. ये मुझे भी पता है की तुम्हारे लिए अपनी फॅमिली के रहते हुए ये सब मैनेज करना इतना इजी नहीं है मगर कोशिश करते रहना." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने उसे हाँ कहा.

उसके बाद थोड़ी देर और मैंने दक्षिणा से बात की फिर मैंने कॉल कट कर दिया. उसने बताया की वो स्टेशन पहुंच कर कॉल करेगी मुझे. दक्षिणा से बात करने के बाद मैं वापस अपनी शीट पर आ कर बैठ गया. मेरी नज़र कुसुम दीदी पर पड़ी. वो मेरे सामने असहज महसूस करने लगती थी. इस वक्त भी मेरे आ जाने से उनके चेहरे पर हल्का परेशानी के भाव आ गए थे.

पूजा प्रिय के कान में जाने क्या खुसुर खुसुर करते हुए बाते कर रही थी. माँ रचना से बाते कर रही थी. इधर मैं अपने मोबाइल में लग गया था. ऐसे hi टाइम गुज़र गया और ट्रैन दिल्ली के हज़रात निजामुद्दीन स्टेशन पर आ कर कड़ी हो गयी. ट्रैन के खड़े होते hi हम सब शीतो से खड़े हो गए. प्रिय पूजा बड़ा खुश दिख रही थी. प्रिय बार बार मुझे देख कर मुस्कुरा देती थी. मैं समझ गया था की पूजा ने उसे रात की साडी कहानी बता चुकी है.

सारा सामान ट्रैन से निकाल कर मैंने प्रिय पूजा की मदद से बाहर रखवाया और सबको बाहर भी ले आया. मैंने आस पास किसी सूली की तलाश में नज़र घुमाई तो जल्द hi मुझे एक सूली नज़र आया. मैंने उसे बुलाया और उससे सारा सामान स्टेशन के बाहर ले जाने के लिए कहा तो वो तैयार हो गया.

कुछ hi टाइम में हम सब स्टेशन के बाहर आ गए. मैंने सूली को उसके पैसे दिए तो वो चला गया. बाहर आते hi ऑटो वाले और टैक्सी वाले हमें देख कर हमारे पास आये और हमसे पूछने लगे की किधर जाना है. मैंने एक टैक्सी वाले से गुरगाँव चलने को कहा तो वो सामान और हम सब को देख कर जाने के लिए तैयार हो गया. मैंने सारा सामान उसकी टैक्सी में रखवाया और माँ दीदी लोगो को भी टैक्सी के अंदर बैठाया. टैक्सी में सब के बैठ जाने के बाद मैं जैसे hi टैक्सी में बैठने लगा तो मेरा मोबाइल फ़ोन बजा.

मैं समझ गया की ये दक्षिणा का कॉल है. मैंने मोबाइल निकाल कर कॉल उठाया तो दक्षिणा ने बताया की वो मैं रोड पर है. मैंने उससे कहा की ठीक है मैं आता हु उसके पास. उसके बाद मैंने टैक्सी वाले को कहा की वो टैक्सी को मैं रोड पर ले चले. मैं उसमे बैठ कर मैं रोड पर आया और टैक्सी वाले से रुकने को कहा तो वो रुक गया.

मैं टैक्सी से उतर कर एक तरफ को बढ़ गया. कुछ hi दूरी पर मुझे दक्षिणा की कार दिखी. मैं चलते हुए दक्षिणा के पास आया. दक्षिणा की कार का मुँह ऑपोसिट साइड था इस लिए उसे पीछे से टैक्सी में बैठी माँ लोग नहीं देख सकती थी. मैं जैसे hi दक्षिणा के पास ड्राइविंग दूर के पास आया तो दक्षिणा ने मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखा.

"आखिर तुम आ hi गए जान. मैं तो तरस गयी थी तुम्हारी इस मोहिनी सूरत को देखने के लिए. मन तो करता है की तुमसे लिपट जाओ मगर यहाँ ये हो नहीं सकता." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा.

"अपना भी वही हाल है यार. खेर ज़्यादा वक्त नहीं है अभी. मुझे घर की चाभी दो. बाकी फ़ोन पर बात होगी." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने अपने मिनी पर्श से घर की चाभी निकाल कर मुझे दी और फिर बोली.

"क्या ऐसा नहीं हो सकता जान की एक घंटे के लिए तुम मेरे पास आ जाओ आज.?" दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"देखो अगर टाइम मिलेगा तो मैं तुम्हे कॉल करके बता दुगा. अच्छा अब मैं चलता हु बई." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने मुझे bye किया और फिर मुस्कुराते हुए एक फ्लाइंग किश भी दी मुझे. उसके बाद मैं पलट कर अपनी टैक्सी के पास आ गया.

टैक्सी में ड्राइवर के बगल से जैसे hi मैं बैठा तो पीछे से माँ ने मुझसे पूछा की कहा चला गया था मैं.? मैंने उन्हें बताया की एक दोस्त था जिसने मुझे मिलने को कहा था. मेरी बात सुन कर माँ कुछ न बोली. उसके बाद हम गुरगाँव की तरफ चल पड़े. मुझे पता था पीछे पीछे दक्षिणा भी अपनी कार में आ रही थी.

भाई लोग....

आज के लिए इतना hi....

रीड एन्जॉय & गिव योर फीडबैक....

कीप सपोर्टिंग & स्टे विथ....

:थैंक्यू:
 
भाई लोग....

यारा मैं अपडेट देता हु तो आप लोग भी रिस्पांस दो भय. यहाँ पर स्टोरी पढ़ने के बाद बिना कमेंट किये चले जाने का क्या मटकाब है. बाद में कमेंट करके कोई एहसान करते हो क्या मुझ पर. ईमानदारी से आप लोग स्टोरी को पढ़ कर उसी वक्त अपने कमेंट दो तो अच्छा लगे. वर्ण एक काम करो कोई भी मेरी स्टोरी पर कमेंट न करो. मैं स्टोरी को ऐसे hi कम्पलीट कर लगा जब तक में करना होगा तो. अगर आप लोग अक्सेप्टशन रखते हो तो मैं भी रखता हु....

मैंने उस दिन बोलै था की जब मैं आपको रिप्लाई देता हु तो उस रिप्लाई कमेंट को लिखे कर दिया करो मगर आप लोग नहीं करते. इसका यही मतलब होता है की आप लोग सिर्फ स्टोरी पढ़ने से मतलब रखते हो. राइटर की म्हणत से आपको कोई मतलब नहीं है और न hi उससे कोई लगाव है. अगर होता तो मुझे ये सब बोलना नहीं पड़ता. मैंने देखा है की यहाँ कितने hi राइटर स्टोरी को बीच में छोड़ कर चले जाते हैं और उसका दोष रीडर्स सिर्फ राइटर को hi देते हैं. इस फोरम में 8क+ मेंबर हैं और मुझे पता है की बहुत से मेंबर्स रात रात भर जाग कर स्टोरी पढ़ते हैं मगर कमेंट कुछ लोग hi करते हैं. अगर रीडर्स का अच्छा सपोर्ट मिले तो कोई राइटर अपनी स्टोरी बीच में छोड़ कर नहीं जायेगा. एक अपडेट पढ़ने में मुश्किल से 5 से 10 मिनट का टाइम लगते हो मगर 5 सेकंड लगा कर कमेंट नहीं कर सकते. हद है यार....

भाई लोग अगर यही करना है तो मेरी स्टोरी पर कोई भी कमेंट न करो. मैं बिना कमेंट मिले और बिना सपोर्ट के hi स्टोरी कम्पलीट कर लगा. काम से काम इस तरह में मूड तो खराब नहीं होगा....
 
giphy.gif


हैप्पी नई ईयर

*2020*

वेलकम फ्रेंड्स तो नई ईयर....

:party2::party2::party2::party2::party2::party2::party2::party2::party2::party2::party2::party2:

:पार्टी:
 
new-year-animated-gif-fireworks-2020.gif


हैप्पी नई ईयर

*2020*

:party2::party2::party2::party2::party2::party2::party2::party2:
 
सब कुछ जायज़ है....

अपडेट = 42


"अपना भी वही हाल है यार. खेर ज़्यादा वक्त नहीं है अभी. मुझे घर की चाभी दो. बाकी फ़ोन पर बात होगी." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने अपने मिनी पर्श से घर की चाभी निकाल कर मुझे दी और फिर बोली.

"क्या ऐसा नहीं हो सकता जान की एक घंटे के लिए तुम मेरे पास आ जाओ आज.?" दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"देखो अगर टाइम मिलेगा तो मैं तुम्हे कॉल करके बता दुगा. अच्छा अब मैं चलता हु बई." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने मुझे bye किया और फिर मुस्कुराते हुए एक फ्लाइंग किश भी दी मुझे. उसके बाद मैं पलट कर अपनी टैक्सी के पास आ गया.

टैक्सी में ड्राइवर के बगल से जैसे hi मैं बैठा तो पीछे से माँ ने मुझसे पूछा की कहा चला गया था मैं.? मैंने उन्हें बताया की एक दोस्त था जिसने मुझे मिलने को कहा था. मेरी बात सुन कर माँ कुछ न बोली. उसके बाद हम गुरगाँव की तरफ चल पड़े. मुझे पता था पीछे पीछे दक्षिणा भी अपनी कार में आ रही थी.

अब आगे पढ़िए....


रास्ते भर टैक्सी के अंदर प्रिय पूजा का hi शोर मचा रहा. वो दोनों सबसे पीछे बैठी हुयी थी और खिड़की के कांच के बाहर इधर उधर का नज़ारा कर के बड़ा खुश हो रही थी और तेज़ तेज़ आवाज़ में कुछ न कुछ कहती जा रही थी. उन दोनों को कई बार माँ ने डाटा भी मगर वो दोनों दो मिनट चुप रहती और फिर से शुरू हो जाती थी. मैं उन दोनों की हरकतों से मन hi मन मुस्कुरा रहा था. वो दोनों बड़ी भले hi हो गयी थी मगर उनकी हरकते अभी भी बच्चियों जैसी थी.

मैं साइड मिरर में पीछे लगी दक्षिणा की कार को भी देख लेता था बीच बीच में. दक्षिणा का ख़याल जब भी मेरे मन में आता था तो एक अजीब सा अहसास होता था मुझे. पांच साल पहले जब मैं घर से यहाँ आया था तो महीने भर इधर उधर भटकता रहा था. शुरू शुरू में तो मेरे अंदर गुस्सा दुःख और खुद को ख़तम कर लेने की hi बाते चलती रहती थी. भूख प्यास से बुरा हाल था मेरा. मेरे पास ज़हर खाने के लिए भी पैसे नहीं थे. अपने पेट की आग को शांत करने के लिए मैं हर होटल और ढाबे में गया मगर किसी ने भी मुझे बिना पैसो के खाना नहीं दिया था. पानी पि पि कर किसी तरह खुद को ज़िंदा किये हुए था और फिर जब जिसम ने जवाब दे दिया तो एक जगह चक्कर खा कर गिर गया था. उसके बाद मुझे होश नहीं रहा था की मैं किस हाल में हु और कहा हु.

किस्मत इंसान को क्या से क्या बना देती है और उसे कहा से कहा ला कर खड़ा कर देती है. कोई भोजन के एक निवाले के लिए तड़प रहा होता है तो कोई उस भोजन को कचरे में फेंक रहा होता है. दुनिया में हर तरह के लोग होते हैं और उन लोगो को हर तरह का दुःख और सुख होता hai...yahi ज़िन्दगी है.

पिछले पांच सालो का सफर कैसा था मेरा ये सोच कर hi जिसम में झुरझुरी सी होने लगती थी. मैं एक शरीफ घर का शरीफ लड़का था और आज मुझ में कितनी शराफत थी ये मुझे खुद पता नहीं था. जिन चीज़ो के बारे में मैंने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था वो चीज़े आज मेरी ज़िन्दगी का एक हिस्सा बन चुकी थी और उन चीज़ो के बारे में आज मैं हर पल सोचने लगा था. बल्कि अगर ये कहु तो गलत नहीं होगा की आज मैं उन चीज़ो को करने लगा था. मेरे माता पिता की ऊँची शख्सियत का आज ये सिला निकल रहा था और उनके दिए हुए अच्छे संस्कारो का आज इस तरह पतन हो रहा था. मैं अगर इसके बारे में सवाल करू की ऐसा क्यों तो शायद इसका जवाब मुझे दुनिया के किसी कोने में न मिले या फिर दुनिया का कोई भी इंसान इसका जवाब न दे सके. क्या ये हमारे द्वारा जान बूझ कर किये गए कर्म थे या फिर ये सिर्फ और सिर्फ ऊपर बैठे उस खुदा का hi खेल था जिसके हाथो की हम सब कठपुतलिया हैं.???

यु तो फ्यूचर में क्या होगा इसके बारे में कोई भी इंसान नहीं बता सकता मगर जिस तरह के हालात आज बन गए थे उस हिसाब से शायद कोई बच्चा भी ये बता देगा की इसका फ्यूचर क्या होगा. मगर फ्यूचर तक के इस लम्बे सफर में कैसे कैसे और क्या क्या होगा इसके बारे में शायद कोई सोच भी न सके.

इंसान भले hi भगवन के हाथो की कठपुतली हो और साडी दुनिया ये कहे की सब कुछ भगवन की मर्ज़ी से hi होता है मगर एक हकीकत तो यही होती है न की हमने hi अच्छा किया है या गलत किया है. उस ऊपर वाले पर कोई ऊँगली नहीं उठाएगा और न hi उस पर इलज़ाम लगाएगा की ये सब उसी का किया धरा है. हकीकत में तो हर बात के मायने hi बदल जाते हैं या फिर बदल दिए जाते हैं.

मैं ये मानता हु की शुरू से hi मैं कुसुम दीदी को पसंद करता था और हमेशा यही चाहता था की वो हर पल मेरे पास रहे. मगर ये तो मैंने नहीं सोचा था की मेरी उतनी सी ख्वाहिश का ये रिजल्ट निकल आएगा. कुसुम दीदी आज मेरी तरफ देखना भी नहीं चाहती और जिनके बारे में मैंने कभी ऐसा वैसा नहीं सोचा था उनके साथ मेरा रिश्ता बहुत आगे तक बढ़ चूका था. एक ऐसा रिश्ता जो सेज भाई बहन के बीच पाप के शिव कुछ नहीं था.

हम इंसानो की फितरत भी अजीब होती है. जब तक होश में रहते हैं तब तक हमें हर चीज़ की समझ होती है और ये अहसास भी होता है की क्या अच्छा है और क्या बुरा. मगर जब हम अपने होशो हवाश में नहीं रहते तो गलत चीज़े भी हमें सही लगती हैं और हम उन चीज़ो को बड़े शौक से करते जाते हैं.

यही हाल इस वक्त मेरा था. इस वक्त शायद मैं पूरी तरह होश में था इसी लिए ऐसी बाते सोच रहा था मगर जो कल रात ट्रैन में पूजा के साथ हुआ उसके बारे में मैं खुद से क्या सवाल करता और उसका क्या जवाब देता खुद को. शायद ये मेरे बस में नहीं था या फिर अब मुझ में ये हिम्मत hi नहीं थी की मैं ऐसे किसी सवाल को पैदा करता या उसका कोई जवाब देता.

आज जो हालात बन गए थे वो सब जान बूझ कर बनाये गए थे या फिर वो सब भगवन का hi खेल था. इस बारे में कोई जवाब नहीं मिलने वाला था और अगर मिलता भी तो शायद अब उस जवाब को कोई एक्सेप्ट नहीं करता. वक्त कभी पीछे नहीं जाता और ये भी सच है की तीर जब कमान से निकल जाता है तो वापस कमान में नहीं आता. अब मैं अगर चाहु भी तो इस सब को वापस उसी जगह पर नहीं ला सकता जिस जगह पर हम पांच साल पहले थे और हमारे रिश्ते पाक थे.

अब सवाल ये है की क्या ये सब यु hi चलता रहेगा.? क्या ये रुक नहीं सकता.? क्या इसे कोई भी नहीं रोक सकता और अगर कोई इस सब को रोकना चाहे तो क्या दूसरे इसे रोकने देंगे.? ये सवाल ऐसे थे जिनका जवाब बहुत हद तक हम सब जान सकते हैं. ऐसे hi हालातो में कुछ लोग कहते हैं की सब कुछ वक्त पर छोड़ दो. मगर क्या किसी ने ये सोचा की वक्त पर छोड़ देने से क्या होता है.? क्या सब कुछ सही हो जाता है या फिर आने वाले वक्त में हालात इससे भी बदतर हो जाते हैं.?

अभी मैं ये सब सोच hi रहा था की तभी टैक्सी ड्राइवर की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी तो मैं हकीकत की दुनिया में वापस आ गया. वो मुझसे पूछ रहा था की मैं इतनी देर से चुप चाप क्यों बैठा हु और ऐसी क्या बात है जिसमे मैं खोया हुआ हु.?

टैक्सी ड्राइवर के सवालों के मैं भला क्या जवाब देता.? उसे कैसे बताता की मैं कहा उलझा हुआ था अभी.? खेर मैंने उससे यही कहा की भाई मैं अपने काम के बारे में सोच रहा था. वो क्या है की महीने भर से अपने जॉब वाले काम से छुट्टी ले राखी थी इस लिए उसी के बारे में सोच रहा था.

टैक्सी ड्राइवर मेरी बात सुन कर पूछा की बाकी लोग क्या मेरी फॅमिली वाले हैं तो मैंने उसे बताया की हाँ ये सब मेरी फॅमिली वाले हैं और अब से ये यही मेरे साथ hi रहेंगे. खेर हम सब कुछ hi टाइम में अपने घर के पास पहुंच गए. टैक्सी ड्राइवर ने टैक्सी रोक दी तो हम सब गेट खोल कर टैक्सी से बाहर आ गए. मैंने पीछे की तरफ देखा तो रचना की कार कही न दिखी. मैं समझ गया की वो अपने घर चली गयी होगी.

मैंने घर की तरफ देखा तो हैरान रह गया. आखिर दक्षिणा ने अपने मन का hi किया था. घर को देख कर कोई भी कह सकता था की ये काम कीमत का नहीं हो सकता था. दक्षिणा का घर इससे बहुत बेटर था मगर जिस तरह के घर के लिए मैंने उससे कहा था ये उससे बहुत आगे था. मुझे समझ न आया की मैं अब दक्षिणा को क्या कहु. उसने एक और एहसान का बोझ मेरे सर पर रख दिया था.

अभी मैं ये सोच hi रहा था की तभी शोर हुआ. मैंने देखा की प्रिय पूजा चारो तरफ देख कर ख़ुशी से उछले जा रही थी और माँ उन्हें डाट रही थी. मैंने ड्राइवर की मदद से सारा सामान टैक्सी से निकाल कर नीचे रखा. उसके बाद मैंने माँ को आवाज़ दी तो माँ मेरे पास आयी और कहने लगी की बीटा हमारा घर कौन सा है तो मैंने उन्हें इशारे से बताया की यही है.

मेरे बताने पर माँ ने घर की तरफ देखा तो उनकी आँखे फटी की फटी रह गयी. मैं समझ गया की उन्हें ये देख कर हैरानी हो रही है की इतना अच्छा घर मेरा कैसे हो सकता है. क्या मेरे पास इतना ज़्यादा पैसा है की मैं इतना अच्छा घर बनवा सकता हु.? खेर मैंने माँ को घर की चाभी दी और उनसे कहा की आप सब घर के अंदर जाइये. असल में मैं चाहता था की उस घर में सबसे पहले मेरी माँ के hi कदम पड़े.

मुझसे चाभी ले कर माँ ने पहले चाभी से बाहर लगा स्टील का बड़ा वाला गेट खोला उसके बाद वो अंदर गयी. उनके अंदर जाते hi बाकी सब भी अंदर चली गयी. सब आँखे फाड़ फाड़ कर घर को चारो तरफ से देख रही थी. इधर मैं और ड्राइवर ने सारा सामान गेट के अंदर रखा उसके बाद मैंने ड्राइवर को उसके पैसे दिए तो वो खुश हो कर चला गया.

स्टील वाले गेट के अंदर एक बड़ा सा पोर्च था और साइड में भी काफी जगह थी जहा पर किनारे किनारे गमले रखे हुए थे और उन पर बड़े hi खूबसूरत हरे हरे पौधे लगे हुए थे. पोर्च के बगल से एक बड़ा सा लोहे का जालीदार गेट था. उस गेट के खुलने पर उसी में एक और गेट था जो लकड़ी का था और बड़ा hi खूबसूरत लग रहा था.

मैंने सबसे पहले बाहर लगे स्टील के गेट को बंद किया उसके बाद कुछ सामान उठा कर घर के अंदर की तरफ आ गया. अंदर आ कर मैंने प्रिय पूजा को आवाज़ लगा कर बुलाया और उनसे कहा की सामान अंदर रखने में मेरी मदद करे. मेरे कहने पर वो दोनों ख़ुशी ख़ुशी सामान उठा कर अंदर रखवाने लगी. वो दोनों बहुत hi खुश दिख रही थी और मुझसे कहे जा रही थी की भाई ये घर बहुत hi सुन्दर है और अब हम यहाँ महारानियो की तरह रहेंगे.

उनकी बाते सुन कर मैं मन hi मन हसे जा रहा था और वो पता नहीं क्या क्या बाके जा रही थी. सारा सामान अंदर रख कर मैंने दरवाजा बंद किया और फिर आ कर बड़े से ड्रिंगरूम में रखे सोफों में से एक पर बैठ गया. बाकी लोग घर को अच्छे से देखने में लगे हुए थे. घर सच में बहुत अच्छा था मगर मैं ये भी जनता था की इसकी कीमत भी उतनी hi बड़ी थी. दक्षिणा ने वही किया था जो उसके मन ने चाहा था.

घर दो मिन्जिला था. मैं दूर के अंदर आते hi एक बड़ा सा ड्रिंग रूम था जहा पर बहुत hi खूबसूरत सोफे गोलाकार रखे हुए थे और उनके बीच में कांच की एक टेबल. टेबल पर एक कांच का सुराहीदार गमला रखा हुआ था जिस पर कुछ फूल रखे हुए थे. ड्रिंगरूम के लेफ्ट साइड दिवार से लगी सीढिया थी जो ऊपर की मंजिल की तरफ जाती थी. राइट साइड में एक कोने पर संगेमरमर से बना एक खूबसूरत सा मंदिर था जिसमे राधा कृष्ण की बड़ी hi खूबसूरत मूर्ति थी.

मंदिर के सामने की तरफ दो कमरे थे जबकि उसके लेफ्ट में सीढ़ियों के पास एक कमरा था. सामे की तरफ बड़ा सा डाइनिंग हॉल और उसके बगल से बड़ा सा hi किचन था. ड्रिंगरूम में ऊपर छत पर एक बड़ा सा झूमर लटक रहा था जो बहुत hi खूबसूरत लग रहा था.

सब की तरह मैं भी अभी इस घर के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं जनता था. अभी मैं सोफे पर बैठा इधर उधर देख hi रहा था की तभी प्रिय पूजा मेरे पास आयी और सोफे पर मेरे अगल बगल बैठ गयी. फिर धीमी आवाज़ में कहने लगी की भाई कमरे तो नीचे भी हैं मगर हम लोग ऊपर वाले कमरों में रहेंगे जैसे गांव वाले में रहते थे. उनकी ये बात सुन कर मैंने कहा ठीक है.

मैंने देखा की माँ दीदी और रचना ऊपर जाने के लिए सीढ़ियों की तरफ जा रही थी तो हम तीनो भी उठ कर उनके पीछे चल दिए. सीढ़ियों से ऊपर आये तो घर के फ्रंट साइड में एक बड़ा सा हॉल था जो सामने की तरफ बालकनी तक था. जबकि पीछे दोनों तरफ कमरे थे. राइट साइड में एक तरफ किचन भी था. हमने घूम कर देखा तो पता चला की ऊपर सिक्स रूम थे और सभी रूम्स में बाथरूम अटैच था. मेरे दिमाग में सामने हॉल को देख कर एक ख़याल आया की यहाँ पर गयम बनाया जा सकता है. हॉल के बगल से एक बड़ा सा hi कमरा था उसी में गयम बनाने का विचार आया था मुझे.

घर को अच्छे से देखा हम सब ने और फिर नीचे आ कर सोफों पर बैठ गए. घर में हर जगह साफ़ कर दिया गया था. दक्षिणा ने शायद पुरे घर में नया पेंट भी करवाया था जिससे सब कुछ नया hi लग रहा था. मैंने माँ से कहा की आप सब के लिए मैं बाहर से खाना आर्डर कर देता हु. तब तक आप सब लोग फ्रेश हो जाइये. मेरी बात सुन कर माँ ने कहा की खाना बाहर से क्यों मगवायेगा हम यही बना लगे तो मैंने कहा की शाम का खाना बना लीजियेगा. अभी आप सब आराम कर लो.

उसके बाद माँ ने सबसे कहा की सब अपना अपना सामान अपने अपने कमरों में सेट कर लो. माँ के कहने पर दीदी रचना और प्रिय पूजा उठ कर चल दी. प्रिय पूजा अपना अपना सामान ले कर ऊपर की तरफ चली गयी. जब की कुसुम दीदी और रचना नीचे वाले कमरों में hi अपने सामान को ज़माने लगी. माँ का सामान भी नीचे के कमरे में सेट किया गया. मेरा जो सामान था उसे प्रिय पूजा खुद hi ऊपर ले कर चली गयी थी.

सामान सेट करने के बाद सब फ्रेश होने लगे तो मैं भी फ्रेश होने के लिए ऊपर अपने कमरे में आ गया. नीचे जो कमरे थे उनमे सभी में पहले से बीएड थे जबकि ऊपर वाले कमरों में से एक कमरे में hi बीएड था. प्रिय पूजा ने उसी कमरे में अपना सामान सेट कर लिया था. मुझे अपने लिए एक बीएड खरीदना पड़ेगा. ये देख कर मैंने दक्षिणा को कॉल किया और उससे बोलै की यहाँ पर एक बीएड काम पद रहा है. वैसे तो सभी कमरों में बीएड होना चाहिए था मगर फिलहाल एक बीएड की ज़रूरत थी. मेरी बात सुन कर दक्षिणा ने कहा बीएड के लिए मार्किट जाना पड़ेगा.

दक्षिणा से बात करने के बाद मैं फ्रेश हुआ और कपडे पहन कर नीचे आ गया. अभी मैं नीचे आया hi था की दूर बेल्ल बजी. मैंने जा कर दरवाजा खोला तो एक आदमी बाहर खड़ा था. ये वही आदमी था जिसको मैंने खाने का आर्डर दिया था. वो हम सबके लिए खाना ले कर आया था एक बड़े से पैकेट में. उससे मैंने खाना लिया और उसके पैसे दिए.

हम सबने खाना खाया और फिर मैंने सबको आराम करने के लिए कह दिया और खुद मार्किट की तरफ जाने के लिए घर से बाहर आ गया. बाहर आ कर मैंने सोचा की पहले दक्षिणा के पास जाया जाये. उसने मुझसे कहा था की टाइम निकाल कर उसके पास एक घंटे के लिए आ जाओ.

मैंने दक्षिणा को कॉल करके बताया की मैं आ रहा हु उसके पास. वो मेरी ये बात सुन बड़ा खुश हुयी. पैदल चलते हुए मैं करीब दस मिनट में उसके घर पहुंच गया. मैंने दूर बेल्ल बजायी तो उसने जल्द hi दरवाजा खोला तो मैं दरवाजे के अंदर आ गया.

दक्षिणा का ये घर मेरे वाले घर से भी ज़्यादा खूबसूरत था. इतने बड़े घर में वो अकेली hi थी. ये उसकी किस्मत hi थी की इतना पैसा और इतनी सुख सुविधा होने के बाद भी वो अकेली थी और उसे अपने अकेलेपन का दुःख था. वो चाहती तो इस उम्र में भी वो किसी से शादी कर के एक नयी ज़िन्दगी शुरू कर सकती थी मगर उसके दिल में सिर्फ मैं था. मेरे शिव उसे किसी की हसरत नहीं थी. मगर मैं किसका था या मैं किसकी किस्मत में था ये सवाल इस वक्त सोचने वाला था.

दक्षिणा मुझे ले कर सीधा अपने कमरे में आयी. उसका कमरा भी बेहद खूबसूरत था. आलीशान कमरे में आलीशान बीएड. मैं देख रहा था की मुझे आया देख कर दक्षिणा का चेहरा ताज़े गुलाब की तरह खिल गया था. उसके चेहरे पर ख़ुशी की चमक आ गयी थी.

"मेरी जान का मेरी जान के hi घर में वेलकम है जान." कमरे में पहुंचते hi दक्षिणा ने ख़ुशी से चहकते हुए ये कहा तो मैं मुस्कुरा उठा. जबकि ये कहने के साथ hi दक्षिणा एकदम से मुझसे लिपट गयी. उसने मुझे कास के पकड़ लिया था. उसकी भारी भारी छातिया मेरे सीने के हल्का नीचे धस गयी थी. उसके lipat'te hi मेरे जिसम में झुरझुरी सी हुयी.

"आअह्ह्ह्ह अब जेक सुकून मिला है जान. तुम नहीं समझ सकते की तुम्हारे बिना इतने दिन किस तरह गुज़ारे हैं मैंने." दक्षिणा ने भारी आवाज़ में ये कहा तो मैंने भी उसे कास के भीचते हुए कहा.

"मैं समझ सकता हु डिअर. इतना तो मैं भी जनता हु की तुम्हारे दिल और दिमाग में मेरे लिए क्या है. खेर अब तो मुझे हमेशा दिल्ली में hi रहना है. तुमको तो पता hi है की मैं गांव की अपनी ज़मीने अपना घर सब कुछ बेच कर और अपनी फॅमिली को ले कर hi यहाँ आ गया हु." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"ये अच्छा hi किया जान. मगर इस सब से मैं ये भी सोचती हु की अब तुम अपनी फॅमिली के साथ hi रहोगे तो भला मेरे पास कैसे आओगे तुम.? मैं ये नहीं कहती विकास की तुम अपनी फॅमिली के साथ न रहो क्यों की ऐसा कहना गलत hi होगा मगर जो सिर्फ तुम्हे जानती है और तुम्हारे hi सहारे पर है उसे अकेला न छोड़ देना." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने उसे खुद से अलग करते हुए कहा.

"नहीं छोड़ूगा डिअर. ये मेरा तुमसे वडा है की तुम्हारी आखिरी सांस तक मैं तुम्हे अकेला नहीं रहने दुगा. हाँ ये सच है की मैं अपनी फॅमिली के साथ रहुगा और उन्हें छोड़ भी नहीं सकता मगर ये भी सच है की इस सबके बाद भी मैं तुम्हे खुश hi रखुगा. इतना तो तुम भी समझ सकती हो की मैं यहाँ रात में रोज़ रोज़ नहीं आ पाउगा मगर दिन में एक बार ज़रूर आउगा और तुम्हे प्यार करुगा." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने खुश होते हुए कहा.

"तुमने ये कह दिया तो मेरा मन हल्का हो गया जान. मुझे तुम्हारी मज़बूरी का अहसास है इस लिए मैं तुम्हे अपने लिए कभी मजबूर नहीं करुँगी." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने आगे बढ़ कर उसका चेहरा अपनी हथेलियों में लिया और फिर झुक कर उसके गुलाबी रसीले होठो पर अपने होठ रख दिए.

मेरे ऐसा करते hi दक्षिणा भी मेरे होठो को चूमने लगी. धीरे धीरे हमारे जिसम गरम होने लगे. मैंने अपने एक हाथ से दक्षिणा की एक चुकी को मुट्ठी में भर कर ज़ोर से मसला तो दक्षिणा की सिसकी मेरे मुँह में hi डाब कर रह गयी. दक्षिणा पल भर में पागलो की तरह मुझे चूमने चाटने लगी थी.

मैंने एकदम से दक्षिणा को बाहो में उठा लिया और पास में hi रखे बीएड पर आहिस्ता से लेता दिया. दक्षिणा ने इस वक्त पिंक कलर की निघ्त्य पहन रखा था. मैं बीएड पर घुटनो के बल आ कर उसकी गोरी गोरी और चिकनी टांगो को चूमते हुए और एक हाथ से उसकी निघ्त्य को ऊपर सरकते हुए आगे बढ़ने लगा.

टांगो से चूमते चूमते मैं उसकी गुदाज जांघो पर आ गया. बीएड पर पड़ी दक्षिणा मचलने लगी थी. उसकी जांघो को चूमते चूमते मैं थोड़ा और ऊपर आया तो टांगो के बीच मुझे रेड कलर की पतली सी पैंटी नज़र आयी. मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी छूट पर हलके से किश किया तो दक्षिणा ने एकदम से घुटनो को मोड़ कर भींच लिया जिससे मेरा सर उसकी जांघो के बीच फास गया.

मैंने अपने हाथो से उसकी जांघो को फैलाया और फिर निघ्त्य को और ऊपर सरकते हुए उसके पेट और नाभि में चूमने चाटने लगा. कमरे में दक्षिणा की गरम आहे और सिसकिया गूंजने लगी थी. दक्षिणा की गहरी नाभि में मैंने अपनों जीभ घुसा दी तो दक्षिणा एकदम से मचल उठी और मेरे सर पर अपने दोनों हाथ जमा दिए उसने. कुछ देर तक मैं उसकी नाभि में जीभ दाल कर उसे कुरेदता रहा उसके बाद मैं उसकी निघ्त्य को ऊपर सरकते हुए ऊपर आ गया.

मैंने निघ्त्य की डोर खोल कर निघ्त्य को खोल दिया तो मेरी आँखों के सामने रेड ब्रा में दक्षिणा की भारी भरकम छातिया आ गयी जो ब्रा को फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रही थी. मैंने उसकी छतियो से नज़र हटा कर दक्षिणा की आँखों में देखा. वो मुझे hi देख रही थी. जैसे hi हम दोनों की नज़रे मिली तो उसने सिसकी लेते हुए कहा.

"आज मुझे खूब प्यार करो जान. ऐसा प्यार करो की मेरी इतने दिनों की तड़प और प्यास शांत हो जाये." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने ऊपर आ कर उसके होठो को मुँह में भर लिया और बेतहाशा चूसने लगा.

दक्षिणा अपने दोनों हाथो से मेरे सर को पकड़ लिया और वो भी पागलो की तरह मेरे होठो को चूमने चूसने लगी. काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के होठो को चूमते चूसते रहे. जब हम दोनों की साँसे उखाड़ने लगी तो हम दोनों एक दूसरे के होठो से अलग हुए. मैंने अपने दोनों हाथो से दक्षिणा की ब्रा में कैद उसकी भारी भरकम छातियों को ज़ोर ज़ोर से मसला और फिर मैंने दोनों हाथ नीचे उसकी पीठ में दाल कर ब्रा का हुक खोलने लगा. दक्षिणा ने अपनी पीठ को उठा लिया था जिससे हुक खोलने में मुझे आसानी हो गयी थी.

ब्रा का हुक खोल कर मैंने ब्रा को उसके जिसम से अलग किया तो उसके भारी भरकम बूब्स उछाल कर बाहर आ गए. उनको देख कर मैंने झट से एक चुकी के निप्पल को मुँह में भर लिया जबकि दूसरे को एक हाथ से ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा. दक्षिणा की सिसकारियां और तेज़ हो गयी थी. मैं पागलो की तरह उसके निप्पल को चूसता और काट भी लेता था. मेरा लुंड बुरी तरह अकड़ गया था जो जीन्स के पेंट के अंदर कच्चे में मुदा होने की वजह से दर्द करने लगा था.

मैं दक्षिणा से अलग हुआ और जल्दी से अपने पेंट को खोल कर उसे अपनी टांगो से अलग कर एक तरफ रख दिया. उसके बाद मैंने अपने बाकी कपडे भी उतार दिए. अब मैं फुल नुदे था. दक्षिणा ने जैसे hi मुझे फुल नुदे देखा तो उसकी सिसकी निकल गयी और वो एकदम से बीएड पर उठ बैठी. मैं समझ गया की अब ये अपने मन का करेगी.

उसने मुझे बीएड पर सीधा लेता दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी. उसने सबसे पहले मेरे होठो से शुरू किया और फिर धीरे धीरे नीचे की तरफ जाने लगी. मेरे जिसम के हर हिस्से को चूमते chaat'te हुए वो कुछ hi पालो में मेरे लुंड पर पहुंच गयी.

बुरी तरह तन्नाए हुए मेरे लुंड को उसने अपने एक हाथ की मुट्ठी में लिया और बिना एक पल की देरी किये उसने एकदम से मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से उसे लोल्लयपोप की तरह चूसने लगी. मेरे जिसम में मज़े की बड़ी तेज़ लहार दौड़ने लगी. दक्षिणा मेरे लुंड को इतना हार्डली शुक कर रही थी की थोड़ी hi देर में मुझे लगने लगा की मैं झाड़ जाउगा. ये महसूस करते hi मैंने दक्षिणा को बता दिया की मैं झाड़ जाउगा. मेरी बात सुनते hi उसने मेरे लुंड को अपने मुँह से निकला और फिर अपनी पैंटी को जल्दी से निकाल कर एक तरफ फेंका. उसके बाद वो दोनों तरफ को अपनी टाँगे करके मेरे लुंड पर अपनी छूट रखने लगी. उसने एक हाथ से मेरे लुंड को पकड़ रखा था और जैसे hi उसकी छूट मेरे लुंड के पास आयी तो वो लुंड को अपनी छूट के मुहाने पर सेट कर के मेरे लुंड पर बैठती चली गयी.

दक्षिणा की ग्र्राम गरम और रास छोड़ती छूट में मेरा लुंड जड़ तक समता चला गया. उसके बाद दक्षिणा ने अपने दोनों हाथो को मेरे सीने में जमाया और फिर अपनी गांड को मेरे लुंड पर तेज़ी से पटकने लगी. इसके साथ hi दक्षिणा की आहे अब उसकी चीखो में बदलने लगी. ये चीखे उसकी दर्द की नहीं होती थी बल्कि वो मज़े में hi पोर्न एक्ट्रेस की तरह चीखने लगती थी.

इस घर में हमारे अलावा कोई नहीं था जो उसकी चीखो को सुन सके. इस लिए दक्षिणा फुल वलयमे में चीखे जा रही थी और मेरे लुंड पर अपनी गांड ज़ोर ज़ोर से पटकती जा रही थी. मज़े में बुरा हाल तो मेरा भी था. मैं अपनी आँखे बंद किये इस चुदाई का मज़ा ले रहा था. तभी मेरे होठो को दक्षिणा ने अपने होठो में भरा और ज़ोर ज़ोर से शुक करने लगी. दूसरी तरफ वो मेरे लुंड पर अपनी गांड भी पटकती जा रही थी.

कुछ देर बाद दक्षिणा जब थक गयी तो वो उठ कर मेरे बगल से लेट गयी. मैं समझ गया की अब उसके ऊपर आने का नंबर मेरा है. इस लिए मैं उठा और उसकी टांगो को अपने दोनों कंधो में रख कर मैंने अपने लुंड को एक hi बार में उसकी छूट में अंदर तक पेल दिया. उसके बाद मैं दाना दान धक्के लगाने लगा. मेरे धक्के लगते hi दक्षिणा की चीखे एक बार फिर से पुरे घर में गूजने लगी. उसकी ऐसी सेक्सी चीखो से मुझे और भी जोश आता था और मैं और तेज़ी से उसकी चुदाई करने लगता था.

"आह्ह्ह्हह्ह जाआआं ऐसे hi छोड़ो मुझे. फाड़ डालो सशःह्शस आआह्ह्ह फाड़ डालो मेरी इस चूऊत्त को. श्शश आअह्ह्ह्ह इसने मुझे इतने दिनों में आआह्ह्ह एक दिन भी सशशश आआह्ह्ह्ह एक दिन भी चैन से रहने नहीं दिया." दक्षिणा बुरी तरह चीखते हुए बोलती जा रही थी और मैं तेज़ी से धक्के लगता जा रहा था.

कुछ देर बाद मैंने उसकी टांगो को उसके चेहरे की तरफ किया तो उसकी छूट और गांड दोनों hi थोड़ा ऊपर की तरफ हो गयी तो मैंने लुंड को निकाल कर उसकी गांड में एक hi बार में अंदर तक पेल दिया. जिससे दक्षिणा बुरी तरह कड़ाही. लुंड उसके छूट रास से गीला था इस लिए दक्षिणा को ज़्यादा दर्द नहीं हुआ. दक्षिणा की गांड में लुंड डालने के बाद मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा.

मुझे काफी टाइम बाद ऐसा मज़ा मिल रहा था. मैं ताबड़ तोड़ धक्के लगाए जा रहा था और दक्षिणा फुल वलयमे में चिल्लाये जा रही थी और न जाने क्या क्या बोलती जा रही थी. कुछ देर बाद मैंने उसकी गांड से लुंड निकला और फिर से उसकी छूट में दाल दिया.

"Viiiikaaaaaas....aaahhhhhhh हैइए री ईसीई के लीईई तो तड़प रही थी मैं. ऐसे hi ज़ोर ज़ोर से छोड़ो मेरे राजा. फाड़ डालो मेरी इस निगोड़ी चुत को. आअह्ह्ह्ह हाय मैं गयीईइ जाहां." दक्षिणा ज़ोर ज़ोर से चिल्लाते हुए झड़ने लगी. इधर झड़ने के करीब मैं भी था इस लिए मैं भी और तेज़ी से धक्के लगाने लगा.

मैं बुरी तरह हाफ रहा था और मेरे मुख से गुर्राहट सी निकल रही थी. कुछ hi देर में मेरा जिसम एकदम से अकड़ा और फिर मेरे अंदर का लावा मेरे लुंड के रास्ते दक्षिणा की छूट में निकलना शुरू हो गया. झड़ने के बाद मैं दक्षिणा के बगल से निढाल सा पद गया था. मेरा लुंड जो दक्षिणा और मेरे स्पिरम से गीला था वो धीरे धीरे शांत पड़ता चला गया.

काफी देर तक हम दोनों गहरी गहरी साँसे लेते हुए बीएड पर पड़े रहे. फिर जब हम दोनों की साँसे बहाल हुयी तो दक्षिणा एकदम से मुझे लिपट गयी और मेरे सीने पर चूमने लगी.

"आज तो मज़ा hi आ गया जान. मैं तो मस्त हो गयी तुम्हारे इस प्यार से." दक्षिणा ने मेरी आँखों में देखते हुए ये कहा तो मैंने कहा.

"मेरा भी वही हाल है डिअर. मैं भी तो इतने दिनों से ऐसे hi था." मैंने दक्षिणा से झूठ बोलै. वैसे इस झूठ बोलने पर एक बार को तो मेरी जुबान लड़खड़ा hi गयी थी मगर मैंने जल्दी से अपने आपको सम्हाल लिया था.

"चलो कोई बात नहीं जान, अब तो आ hi गए हो न तो प्रॉब्लम किस बात की होगी.? वैसे भी हमारे घरो के बीच ज़्यादा दूरी नहीं है. पैदल आने जाने में मुश्किल से दस मिनट भी नहीं लगेंगे." दक्षिणा ने ये कहा तो मुझे एकदम से याद आया की दक्षिणा ने अपने मन का hi घर मेरे लिए खरीदा था जबकि मैंने उसे सिंपल सा घर लेने के लिए कहा था.

"तो तुमने वही किया न दक्षिणा जो तुम्हारे मन में था. मैंने तुमसे कहा था न की मुझे अपने और अपनी फॅमिली के लिए एक सिंपल सा घर चाहिए मगर तुमने ऐसा घर लिया जो करोडो से भी ऊपर है." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने मुस्कुराते हुए कहा.

"तो क्या हो गया जान.? यहाँ के माहौल के हिसाब से ऐसा hi घर मिल रहा था और वैसे भी ज़्यादा कीमत का नहीं है. मैंने उसमे अपनी तरफ से बस तीन करोड़ hi लगाया है. तुम इसके लिए कुछ नहीं कह सकते क्यों की इतना तो मैं कर hi सकती हु अपनी जान के लिए. क्या तुम पर मेरा कोई हक़ नहीं बनता.?" दक्षिणा ने सीरियस हो के ये कहा तो मैंने सोचा की अब बात बढ़ने का क्या फायदा. उसकी इच्छा थी तो उसने कर दिया बात ख़तम.

"बात हक़ की नहीं है डिअर. मैं बस ये कहना चाहता हु की फालतू में इतना पैसा खर्चा करने की क्या ज़रूरत थी.?" मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"पैसा तो आता जाता रहेगा जान. वैसे भी दिन दिन महगाई बढ़ रही है. अगर हमने आज hi इतना अच्छा घर ले लिया तो फ्यूचर के लिए अच्छा hi होगा न." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा.

"चलो ठीक है. अच्छा अब मुझे जाना होगा. अभी मुझे अपने लिए बीएड खरीदना है और कुछ ज़रूरी सामान भी." मैंने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.

"चलो मैं भी तुम्हारे साथ चलती हु. इसी बहाने तुम्हारे साथ रहने का कुछ देर और मौका मिल जायेगा मुझे." दक्षिणा ने ये कहा तो मैंने कहा ठीक है.

उसके बाद मैं और दक्षिणा बाथरूम में जा कर अच्छे से फ्रेश हुए और फिर कपडे पहन कर घर से बाहर आ गए. दक्षिणा ने कार की चाभी मुझे दी तो मैंने ड्राइविंग शीट सम्हाली और दक्षिणा मेरे बगल से बैठ गयी. उसके बाद हम मार्किट के लिए निकल गए. रास्ते में मैंने दक्षिणा से कहा की एक कार मुझे भी लेना पड़ेगा और छोटे मोठे कामो के लिए एक मोटर सिक्ले भी.

भाई लोग....

आज के लिए इतना hi....

रीड एन्जॉय & गिव योर फीडबैक....

कीप सपोर्टिंग & स्टे विथ....

:थैंक्यू:
 
भय स्टोरी मैं कम्पलीट करुगा hi मगर अब उस हिसाब से नहीं जैसे रीडर्स चाहते हैं. मेरा जब दिल करेगा तभी अपडेट दुगा अब. मैंने देखा है जिन स्टोरीज में महीनो भर कोई अपडेट नहीं आता उनमे ये रीडर्स वेटिंग वेटिंग करते हैं और जहा टाइम से अपडेट आता है वह कमेंट करने में इनको सांप सूंघ जाता है. इस लिए भय अब से मैं अपनी मर्ज़ी से अपडेट दुगा. अब यही होगा की स्टोरी थोड़ा लेट कम्पलीट होगी तो यही सही....

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ों पेज no. 184....

रीड & एन्जॉय....
 
भय यही तो प्रॉब्लम है न. जो लोग कहते हैं की हम सपोर्ट करते हैं वो भी अपने मतलबीपन का सबूत दे देते हैं....

आप भी राइटर हो और ये भले hi कहो की दो लोग सपोर्ट लरते तो हैं मगर अंदर से तो आप भी यही एक्सपेक्ट करते हैं न की ज़्यादा से ज़्यादा लोग सपोर्ट करे और स्टोरी पर कमेंट करे. अपने आपको दिलासा देना अलग बात है और ख्वाहिशो की बात अलग है. ऐसा कोई नहीं है जो एक्सपेक्टेशन न रखता हो किसी से....

दोस्त और सुप्पोर्टर बनते हैं तो दिखाए भी उस तरह. मैं अगर उनके कमेंट पर लिखे कमेंट करके रिप्लाई देता हु तो क्या वो लोग मेरे उस रिप्लाई कमेंट को लिखे भी नहीं कर सकते. क्या एक सेकंड का भी उनके पास टाइम नहीं है की वो इतना सा काम कर दे....

भय आप अपने आपसे कितना समझौता करोगे और कितना खुद को दिलासा डोज. ये बाते छोटी छोटी भले hi हैं मगर हैं तो न. सबसे बड़ी बात ये की हमेशा राइटर hi समझौता क्यों करे. अगर एक सेकंड लगने वाले काम में कोई राइटर खुश हो सकता है तो रीडर्स उस राइटर को खुश क्यों नहीं कर सकते....

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ों पेज no. 184....

रीड & एन्जॉय....
 
भय आप भी दिलासा देने वाली और समझौता करने वाली बात hi कर रहे हैं. मैंने ये कब कहा की इस फोरम का हर मेंबर मेरी स्टोरी को पढ़ने आये. मैं तो बस ये कह रहा हु की जो लोग पढ़ते हैं वो कमेंट भी करे और अपना सुग्गेस्टिव दे....

यारा जिनके पास 10 मिनट लगा कर अपडेट पढ़ने का टाइम है उनके पास 2 सेकंड लगा कर कमेंट करने का टाइम नहीं है. ये कौन सी बात हुयी भय....

आपने ऐसा सुग्गेस्टिव दिया मुझे इसका मतलब ये हुआ की आपने समझौता कर लिया है और खुद को दिलासा भी दे दिया है. राइटर ने रीडर्स के लिए अपनी सोच को बदल लिया और मगर रीडर्स वरिटेरस के अपनी सोच नहीं बदल sakte...aisa क्यों.? खेर छोडो भय....

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ों पेज no. 184....

रीड & एन्जॉय....
 
Back
Top