Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 14 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge

थैंक्स भाई!

कन्फूसिओं तोह होना hi था. लास्ट का सन लॉन्ग था तोह ऐड नहीं किया जा सकता था. डिटेल के साथ लिखना पड़ता. नेक्स्ट अपडेट में सभी डिटेल सामने आ जाएगी.

संजना भी वहां क्यों पोहंची है तोह इसका मतलब क्या बना. ये तोह देखना पड़ेगा.. :वेटिंग1:

हम्म माला के कारण सभी एक दूसरे से जुड़ चुकी हाँ तोह फीलिंग्स तोह आएँगी hi..

विक्रम एंड विनय भी अपने अंजाम स्थान पर जा पोहंचे.. पहले जहाँ वह राजाओं के जैसे रहा करते थे. अब वहीँ वह खुद को एक कैद खाने में प् रहे हाँ.. देखते हाँ उनके साथ आगे चल कर क्या होता है

साथ बने रहे ✨
 
माला के कारण संजना बहादुर बन गई. वहीँ उसे सम्मान मिलने लगा. वहीँ उसे सब संजना माँ का ख़िताब दे गए.

बाओ वाले कैसे पीछा छोड़ सकते हाँ अलका और माला का. कितनी म्हणत करनी पड़ी थी माला के लिए. सोफिए जैसी एजेंट इन्जुरेड हुई माला के लिए. गेब्रियल जैसे सांड मारा माला के लिए.. माला बहुत ख़ास है

विक्रम ंद विनय विथ परची हवेली का पोहंचे.. जाना था नाना की हवेली.. पोहंच गए राजा ठाकुर की हवेली :लाफ:

शुक्रिया भाई.. साथ बने रहे
 
बुसिनेस वीमेन है न तोह पैसा कमाने का कोई भी ओप्तिओंस मिस नहीं करेगी.. :लाफ:

बुरे लोग इतनी जल्दी सुधरते नहीं हाँ. अपनी रह में आने वळून को कैसे भी करके ख़तम करने की कोशिश करते हाँ. यहाँ संजना ने उनका काम बिगाड़ा तोह उसे जान से मार देने की सोचे हुए हाँ.

पायल भी विनय और सबको देख कर चीख पड़ी. उसके साथ जोहुआ था अब वह कैसे इन्हे माफ़ी दे सकती है

देखते हाँ दोनों बहने हाँ या कुछ और.;. अगली अपडेट में खुलासा हो जायेगा

बहुत बहुत शुक्रिया भाई... साथ बने रहे ✨
 
Episode:34

नताशा : हाँ! मैं hi तारा हों. आप सबकी तारा.. किसी से भी मिलने से पहले मुझे एक काम करना है.. आप सब प्ल्ज़ पीछे खड़े हो जाएँ..

नताशा बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू बनाये हुए थे. वर्ण वह अपने परिवार से मिलने के लिए बहुत बेचैन हो रही थी. बड़ी मुश्किल से उसने ये शब्द अपने मोह से निकलने थे. अपनी माँ के साथ साथ अपने सरे परिवार की तड़प का उसे बहुत अच्छे से एहसास भी हो रहा था.

पर क्या करती. वह तारा थी तोह एक क्वीन भी थी. उसके दूसरे परिवार को मार कर उसे नताशा से क्वीन बनने पर मजबूर कर दिए गया था.

कैसे वह अपने परिवार के सबसे बड़े दुश्मन को माफ़ कर देती. पैदा होते hi कुछ पल अपने परिवार के साथ बिताने के बाद उसे उसके परिवार से अलग कर दिए गया था. कैसे उसके प्यारे बरसों तक उसके लिए तड़पते रहे थे.

बीटा होता तोह सहन भी कर लेते. पर उनके परिवार की बेटी, उनकी इज़्ज़त को उनसे दूर कर दिए था दुश्मन ने. बेटी की जुदाई का दर्द, बेटे की जुदाई से कहीं बढ़कर होता है.

उसी दर्द में तड़प रहे थे सब. नताशा भी अपने परिवार के दर्द को फील करते हुए अपनी गाड़ी की और पलटी और दूर खोल कर एक एक करके तीनो को सर के बालों से पकड़ कर बहार घसीट लायी..

सब देख कर चीख पड़े..

"नारायण मिश्रा"

किसी को यकीं hi नहीं हो रहा था. नारायण उनके सामने था.. जो हमेषा गॉर्डस के बीच रहा करता था. गार्ड्स के बिना कभी कहीं नहीं जाया करता है. कैसे उनकी तारा उन्हें मामूली गुंडों के जैसे उठा लाइ थी.

सब देख कर शॉकेड हो गए. संजना भी सिचुएशन को समझने की कोशिश कर रही थी. कोई धीरे से बड़बड़ाने लगा तोह कोई खुल कर बोलने लगा.

संजना जान गई, आने वाली सबकी लाड़ली तारा है. जो उसके जैसे hi अपने परिवार से दूर हो गई. संजना ये भी जान गयी. तारा लौटते hi अपने परिवार के दुश्मनो को भी अपने साथ लाइ थी.

संजना तारा को देख कर बहुत खुश हो गई थी. संजना को तारा की और से वेव्स आ रही थी. ऐसी कशिश उसे अपने परिवार के किसी भी सदस्य की और से नहीं आई थी. जितनी तारा से आने लगी थी. संजना को तारा अपने लिए स्पेशल दिखने लगी थी.


नताशा ने अपनी बेल्ट में एड्स हुआ खंजर निकला और नारायण के बराबर जा बैठी.. तीनो अभी तक बेहोश थे.

सब नारायण और उसके बेटो को देख कर जहाँ सुरप्रीसेड थे. वहीँ अब तारा के हथु में खंजर देख कर शॉकेड हो गए. उनकी तारा तोह एक मर्द बानी हाथ में खंजर थामे उनके दुश्मन के पास बैठी हुई थी.

नताशा सबको देखते हुए बोली : यही हाँ न वह दुश्मन जिसने मुझे आप सब से दूर कर दिए था. यही है न वह दुश्मन, जिसे छह कर भी आप सब मार नहीं सके. जिसके वार से आप सब चोट पर चोट कहते आये हाँ न आप सब.. पर अब मैं लौट आयी हों. आप सबकी तारा लौट आई है. अब से तारा के परिवार का कोई भी दुश्मन ज़िंदा नहीं रहेगा.. किसी की भी हिम्मत नहीं होगी, तारा के परिवार की और आंख उठा कर भी देख सके.

नताशा खूंखार लहजे में बोली और फिर खनजर से छोटे छोटे चीरे देते हुए तीनो को होश में लाने लगी. कुछ hi देर में तीनो होश में आ गए. होश में आते hi तीनो चीखने लगे.

जैसे hi सबकी नज़रें अपने दुश्मनो पर पड़ी तोह उनका चीखना वहीँ थम गया. नारायण ने अपने सामने दिलीप शर्मा को देखा तोह उसका मोह खुला रह गया. नारायण जनता था दिलीप शर्मा कमज़ोर राइवल नहीं है. इसीलिए नारायण मिश्रा और उसके परिवार का कोई भी मेंबर्स कभी भी बिना सिक्योरिटी के कहीं भी नहीं आया जाया करता था.

**************************

नताशा परिवार का इंट्रो..

**************************

दिलीप sharma..dada

नरगिस sharma.dadi

राजीव sharma..papa

solanchna......mummy

ashok..bhai

umesh..bhai

ayushman..bhai

rahul.....bhai

नताशा...

गौतम sharma..chacha

गीता sharma...chachi

चाचा के तीन बेटे..

संजय..

रवि....

राकेश..

अंजलि.. बुआ

रोशन.. फूफा

बुआ के तीन बेटे..

भारत..

सचिन..

विनोद...

**********************************************

नताशा के पापा राजीव शर्मा ने फ़ौरन hi एक नौकर से कह कर अपने पापा को वहीँ लाने को कह दिए.

कुछ देर में दिलीप शर्मा भी वहीँ थे.. नताशा ने अपने दाद्दु को व्हील पर बैठे देखा तोह उसे बड़ा दुःख हुआ. व्हील चेयर को पास लाने का इशारा किया तोह दाद्दु अपने दुश्मन को न देख कर तारा को देखने लगे.

नताशा : दादा जी! आपकी तारा आपके सामने है.

दादा की आंसुओं भरी आँखों में चमक आ गई. होंठ थरथरा उठे.

दादा जी : तारा बेटी!

नताशा : अब भी आंसू बहाएंगे आप दादा जी.. अपने दुश्मन का अंजाम नहीं देखेंगे.

दादा जी ने नारायण को देखा जो अब बहुत ज़यादा घबराया गया था.

दादा : क्यों नारायण मिश्रा! आ गए न तुम मेरे पैरों में. मेरा कोई भी बीटा या पोता तुझे मेरे सामने नहीं ला सका. मेरी पोती कैसे तुझे और तेरे बेटो को च्यूंटियो के जैसे मेरे पैरों में ले आई है. तुम्हारे लिए डूब मरने का मुकाम है नारायण मिश्रा. ज़रूर मेरी पोती तुझे तेरे बिल से निकल लाइ होगी.

दादा जी एकदुम्म से बदले अंदाज़ में बोले तोह नारायण को अपनी रीथ की हड्डी में सनसनाहट सी महसूस होने लगी.

नताशा : जी दादा जान. इसके क़िले से इसे उठा लाइ हों.

दादा : क्यों नारायण मिश्रा! अब कहाँ गई तुम्हारी फाॅर्स.. बड़ी सुरक्षा में रहा करते थे तुम. कहाँ गए तुम्हारी सुरक्षा करने वाले.

नारायण : देखो दिलीप! मुझे और मेरे बेटो को यहाँ से जाने दो. नहीं तोह--

दादा : तुम अब भी नहीं समझे हो narain.jitni आसानी से तुम मेरी पोती के हाथ लगे हो. इससे तुमने अंदाज़ा नहीं लगाया. तेरा और तेरे परिवार का समय अब समाप्त होने को है.

तारा बेटी इसने तुम्हे हम सबसे दूर करके जितना दर्द दिए था. उतना hi दर्द तुम्हे भी हमसे दूर होने पर सहना पड़ा होगा. अपने हथु से इसे अंजाम तक पोहंचा कर अपना बदला लो. हमसे कहीं बढ़ कर तुम्हे दुःख उठाने पड़े होंगे.

नताशा : दादा जी आपने कभी खून नहीं बहाया क्या..??

दादा : तुम्हारे लिए खून के आंसू तो बहुत रोया हों मैं तारा बेटी. पर किसी मनुष का खून नहीं बहाया. खून बहाना हमें जेब नहीं देता. हम नारायण के जैसे घट्टिया विचार नहीं रखते तारा बेटी.

संजना आगे बढ़ी तोह नताशा उसे देख कर चौंक गयी. उसका मोह हैरत से खुला रह गया. पहले वह धयान नहीं दे पाई थी. अब धयान दिया तोह चौंक उठी. उसे सनजना के अंदर से अलका जैसी वेव्स आने लगी थी. वह बड़ी हैरान हुई. फिर उसे जैसे सब याद आने लगा. अब वह समझी, क्यों गुरु जी ने उसे अलका के लिए काम दिए था. अलका का नाम नहीं जानती थी. बड़ी स्पीड के साथ उसके अलका की मदद करि थी. अलका को आइलैंड पर छोड़ कर वहां से निकल ली थी.

अब सब याद आने लगा तोह अलका के गले में मौजूद माला का भी उसे एहसास होने लगा था. उसे माला के अंदर से जो कशिश फील हुई थी. वहीँ अलका के बदन से उसे फील हुआ था. वहीँ अब संजना से उसे फील होने लगा था.

संजना ने भी नताशा को देखा तोह वह भी कुछ कुछ समझ गयी.. आँखों से hi कुछ इशारा किया और फिर दादा जी की व्हील चेयर के पैरों में बेथ कर दादा जी के हथु को थाम गई.

संजना : दादा जी! इस कुत्ते ने तारा दीदी को hi नहीं आप सब से दूर किया था. मुझे भी आप सब से दूर कर दिए था.

संजना की बात पर तारा, दादा जी, और दूसरे सब सन्नाटे में आ गए. वह तोह ऐसा कुछ भी नहीं जानते थे. संजना कैसे इस परिवार की लड़की हो सकती थी.

दादा : संजना माँ! मैं कुछ समझा नहीं.

संजना के होंटो पर एक दर्द भरी मुस्कान आ गई.

संजना : संजना माँ तोह मैं दूसरों के लिए बानी हों दादा जी. मैं तोह आपकी पोती हों.. इतना बोल कर संजना ने अपनी मम्मी की और देखा.

संजना : मम्मी क्या मुझे देख कर भी आपको नहीं लगा, मैं आपकी बेटी हों. संजना की आँखों से फिरसे आंसू बहने लगे तोह संजना की मम्मी तड़प कर बोली..

संजना मम्मी : बेटी! जब से तुम्हे देखा है. मेरे दिल की हालत बहुत ख़राब है. बार बार ऐसे विचार मैं में आने लगे हाँ, जैसे तुमसे मेरा कोई नाता है. क्या नाता है, समझ नहीं पा रही. एक hi बात मैं में आती थी. पर जो सब बीता था गुज़रे समय में. उसे भी तोह नहीं झुटलाया जा सकता.

संजना मम्मी रोने लगी थी. संजना उसकी बेटी है, जान कर तड़प उठी थी.

संजना ने तारा के हथुन से खंजर लिया और नारायण की जांग में घुसा दिए.. नारायण हलक़ पहाड़ कर चीख पड़ा

संजना खुनी अंदाज़ में : बोल कुत्ते!! इस परिवार की एक नहीं दो दो बेटियों को तूने सबसे दूर किया था. बूललललल... संजना ने फिर दूसरी जांग में भी खंजर उतार दिया..

नारायण चीखता हुआ : हाआअन्न! हाआआआं! मैंने गौतम की बेटी को भी हॉस्पिटल से उठवा लिया था. उसे एक अनाथ की ज़िन्दगी जीने पर मजबूर कर दिया था.

दादा : तोह वह मुर्दा बच्ची..??

नारायण : ww..woh सब पहले से hi फिक्स्ड था.. पहले से hi एक मुर्दा बच्ची अर्रंगे कर ली गयी थी..

सब सुनकर गहरे सदमे में आ गए थे. कितना बड़ा खेल खेला था नारायण मिश्रा कुत्ते ने.

दादा जी संजना से : ttt..tum भी मेरी पोती हो.

संजना : हैं दादा जी.. संजना दादा जी से लिपट गयी. दादा दो दो पोतियों को पा कर ख़ुशी से निहाल हो उठे थे. वह रोने लगे थे. भगवन ने एक साथ दो दो तारा उन्हें लौटा दी थी.

संजना दादा जी से अलग हुई और पलट कर अपनी मम्मी को देखने लगी.. तारा अपने दुश्मनो को एक्सपिरे करने के लिए तीनो के हथु और पैरों में खंजर से घाव लगाने लगी.

अब मिलान का समय आ गया था. संजना के बोलने के कारण कोई भी खुद पर काबू नहीं रख पा रहा था.

संजना नताशा के चाचा की बेटी थी.

संजना और तारा की मम्मी दोनों चीखती हुई दोनों से लिपट गयी.. सभी परिवार वाले भी आँखों में ख़ुशी के आंसू लिए वहीँ दोनों को घेर कर खड़े हो गए..

बड़ा दर्द भरा मिलान था. ख़ुशी का रोना था. पर दादी, मम्मी और चची बिलक बिलक कर रो रही थी... बरसों बाद तारा मिली थी. तोह संजना जिसकी कोई उम्मीद hi नहीं थी वह भी मिल गयी थी.

बहुत देर तक ये सन चलता रहा. संजना और तारा के भाई, बुआ के बेटे सब भी बहुत ज़यादा खुश हो गए थे. उन्हें दो दो बहने मिल गयी थी.

दादा, dadi,mummy, पापा, चाचा चची, भाई, भाभियाँ दूसरे सभी रिलेटिव्स बहुत ज़यादा खुश थे..

नताशा और संजना बारी बारी सभी से मिली. किसी का मैं hi नहीं हो रहा था दोनों से अलग होने का.. नताशा या संजना जिसके भी गले lagti.woh खूब उसे चूमता प्यार करता. खुद से अलग करने को मैं hi नहीं कर रहा था. पर पहला मिलान था और मिलने वाले बहुत थे.

सबसे ज़यादा दोनों मम्मियों को समय दिए गया. दोनों खूब बिलक बिलक कर रो रही थी. नताशा और संजना की ऑंखें भी गंगा जमुना बानी हुई थी.

सभी का मिलान चल hi रहा था. सिक्योरिटी इंचार्ज भागता हुआ आया

इंचार्ज : बहुत सी गाड़ियों बड़ी स्पीड क साथ आती हुई दिखाई दे रही हाँ.. मुझे लगता है सर! वह हमारे दुश्मनो की गाड़ियां हाँ.

सब हड़बड़ा गए.

संजना : ज़रूर कोठी के अंदर का कोई है, जिसने खबर दी होगी.

नताशा : मम्मी पापा! आप सब प्ल्ज़ कोठी के अंदर जाएँ. हम देख लेते हाँ.

मम्मी दर गयी : नहीं! अब मैं तुम्हे खुद से दूर नहीं जाने दूंगी तारा बेटी.

नताशा के होंटो पर मुस्कान आ गयी

नताशा : मम्मी आपकी बेटी लोहे की बानी है. अभी तोह आपने अपनी बेटी को जाना hi कहाँ है. संजना को सभी जान गए, पर तारा को कोई नहीं जनता..

मुमयम : फिर भी बेटी, मेरा दिल नहीं मंटा. अब मैं तुझे एक पल भी खुद से दूर नहीं जाने दूंगी.

नताशा : भाई! आप मम्मी को अंदर ले जाएँ. आप सब भी अंदर जाएँ. मैं देखती हों आने वळून को.

चरों भाई सीना तान कर : हम हाँ न सबकी रक्षा करने के लिए. अब तक हम hi तोह पुरे परिवार की रक्षा करते आये हाँ.

संजना : आपकी बहने भी काम नहीं हाँ भाई.

संजना की बात पर सब के होंटो पर स्माइल आ गई.

नताशा : देर मत करें, आप सब अंदर जाएँ.. नताशा सबसे बोलती हुई कोठी के अंदर मौजूद सभी नौकर और गॉर्डस को भी देख रही थी. संजना भी साथ में देख रही थी. उनकी यकीं था कोठी के अंदर कोई न कोई दुश्मनो का आदमी ज़रूर मौजूद है. वर्ण इतना जल्दी उन्हें खबर नहीं हो सकती थी.

नताशा की नज़र एक गार्ड पर पड़ी. नताशा ज़मीन से 2 फ़ीट ऊपर फ्लाई करते हुए पल भर में hi उसके पास जा पोहंची. वह नताशा को देख कर घबरा गया था. गन सीढ़ी करके फायर करने hi वाला था. नताशा ने उसकी गन छीन कर उसके बाज़ो को पकड़ा और दूसरे hi पल वह गार्ड नारायण मिश्रा के ऊपर गिरा पड़ा था.

नताशा : देखा नारायण कुत्ते! ऐसे hi तेरे परिवार के सभी मर्दों का अंत करुँगी मैं.

नारायण क्वीन की पावर पहले सुन चूका था. अब्ब उसे उड़ते हुए देखा तोह बहुत ज़यादा दर गया.

नारायण : क्वीन! प्ल्ज़ मुझे माफ़ कार्डो. मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई थी. आप चाहें तोह मुझे जान से मार दें. पर मेरे बेटों को जाने दें. जितना दोनों के साथ आपने कर दिए है. ये भी बहुत है. आप महान हाँ, दयालु हाँ, मेरे बेटों की जान बख्शी कर दें.

नताशा नारायण की बात सुनकर हसने लगी तोह बाकी सभी जो नताशा को फ्लाई करते देख कर हैरान हुए थे. अब नारायण के मोह से क्वीन शब्द सुना तोह सबको क्वीन वाली न्यूज़ याद आ गई. ये जान कर उनकी तारा hi क्वीन हाँ, अजीब सी हालत हो गई थी सभी की.

नताशा : दयालु.. हाहाहा.. दयालु तोह मैं हों नारायण.. कइयों पर दया करुँगी मैं. मैं क्वीन हो ठहरी.. एक क्वीन दया नहीं करेगी तोह उसे क्वीन कोण कहेगा.. मैं भी दया का दमन कभी नहीं छोडूंगी.. तुझ जैसे पापी को इस दुन्या से मुक्त करके, तेरे पापी बेटों और पोतों को इस दुन्या से मुक्त करके मैं कइयों पर दया करुँगी. दया hi तोह है ये भी.. तुझ पर न सही, तुझ जैसे जिसपर ज़ुल्म करते होंगे. उनपर तोह दया hi है.

नारायण नताशा के शब्द सुनकर, उसके लहजे की खुंखारी जान कर चीखने लगा. फरियाद करने लगा..

पर नताशा को उसपर दया नहीं आने वाली थी. इतनी देर में बहार से फायरिंग की आवाज़ आने लगी. बहार नारायण एक बीटा और पोते चीखने लगे..

"मेरे दादा और चाचाओं को बहार भेज दो. वर्ण इस कोठी की ईंट से ईंट बजा दूंगा मैं"

नताशा : वाह्ह्ह्ह!! क्या बात है नारायण. तेरा कोई पोता इतना दलेर भी है. चल देखती हों उसकी दलेरी भी. अब वह यहाँ आ hi गया है तोह उसे भी तेरे साथ hi ख़तम करती हों.

नताशा ने मुद कर सबको देखा.. जो शॉकेड हालत में उसे hi देख रहे थे.

संजना सुकून से थी.....

नताशा : आप सब अंदर जाएँ प्ल्ज़.. कुछ देर में हम मिल बैठते हाँ. भाई दादा जी को अंदर ले जाएँ.

मम्मी हैरत भरी आवाज़ में : तारा बेटी! तुम hi क्वीन हो..

नताशा : हाँ मम्मी आपकी बेटी hi क्वीन है.. बाद में आपसे बात करती हों. अभी आप सब अंदर जाएँ.

सब न चाहते हुए भी अंदर चले गए.

संजना वहीँ कड़ी रही थी........

दादा, दादी और सबको को छोड़ कर नताशा और संजना के पापा, चाचा और भाई वापिस आ गए. उन्हें वापिस आते देख कर संजना और नताशा मंद मंद मुस्कुराने लगी..

उमेश : बहने भाइयो से कहीं बढ़कर भी ताक़तवर हो जाएँ. और भाई जितने भी अपनी बहनो से कमज़ोर हो जाएँ, बहनो की रक्षा की ज़िम्मेदाजी हमेशा उनकी hi हुआ करती है.

राहुल : पहले कभी हमें अपनी जान से पायरी बहनो के लिए लड़ने का मौका नहीं मिला था. पहले हम बच्चे थे. वर्ण दुश्मन कभी तुम दोनों को हमसे अलग नहीं कर सकते थे.

रवि : हम अगर लड़ाई से बच के रहते हाँ तोह इसका मतलब ये नहीं हम कायर हाँ.

सब कुछ न कुछ बोलने लगे. नताशा और संजना के होंटो की मुस्कान और भी गहरी हो गई.

इंचार्ज एक वैपोन बॉक्स ले आया था. सबने एक एक गन उठा कर अपने हथु में करि.

अपने परिवार की रक्षा के लिए अपने दुश्मनो से दो दो हाथ करने के लिए सब किसी भी हद तक जाने के लिए बेताब हो गए थे.....
 




Episode:35


राजीव शर्मा भी आज फुल फॉर्म में थे. एक गन उनके हाथ में भी थी...

सबसे पहले उस गद्दार गार्ड को बंधा गया. फिर सब अपने लिए जगा का चुनाव करने लगे. परिवार के मर्द पहले कभी ऐसे मूड में नहीं आये थे. आज खुशियां मिली थी तोह खून की होली खेलने के लिए भी तैयार थे.

संजना ने नताशा के हाथ को थाम लिया : दीदी आप तोह बड़ी कमाल की निकली..

नताशा जिसे पूरा पूरा अब संजना को लेके पूरा पूरा एहसास हो गया था : हम दोनों एक सम्मान हाँ न. हम दोनों एक hi तार से जुडी हाँ न. मुझे लगता है--

संजना : गुरु जी आये होंगे आपके पास.

नताशा ने गुरु जी का सुना तोह संजना को बड़ी शिद्दत के साथ खुद से लिप्त गयी..

नताशा : मेरी बेहेन, मैं बता सकती मैं कितनी खुश हों. मुझे लगता है, जिससे मैं मिली थी वह भी हम पांचू में से एक थी.

संजना खुश होक : दीदी किस्से मिली थी आप.

नताशा : बाद में बताऊँगी. पहले इनको देख लेते हाँ.

संजना : लड़ना सही नहीं है दीदी. हमें दूसरे तरीके से इस मटर को हैंडल करना होगा. जैसी सूरत इ हाल बानी है, मुझे लगता है कुछ hi देर में मीडिया भी पोहंच जायेगी.

नताशा को भी लगा उसका क्वीन के रूप में सामने आना सही नहीं होगा..

नताशा : ठीक है, पर मैं इन कुत्तों को नहीं छोड़ सकती.

संजना : मैं कोनसा इनको छोड़ने वाली हों. ये और बहार के कुत्ते वह भी ख़तम होंगे दीदी.

वही हुआ जो संजना ने अनुमान लगाया था. वाकई में hi बहार मीडिया की कई गाड़ियां आ गई.

संजना : भाई घर में कोई लाउड स्पीकर है क्या.

नताशा : उसका क्या करने वाली हो तुम..??

संजना : मई छत पर जा कर मीडिया से बात करुँगी..

संजना को अपनी वैल्यू का बखूबी एहसास हो गया था...

कोठी के अंदर से संजना को उसके मतलब सा सब मिल गया था.. सिक्योरिटी के लिए ऐसा इंतेज़ाम किया गया था. संजना कुछ देर में छत पर कड़ी हुई बहार देख रही थी.

कोठी को चरों साइड्स से नारायण के आदमियों ने घेरा हुआ था.. कुछ दूरी पर संजना को पुलिस और मीडिया की गाड़ियां भी दिखी..

वहीँ मीडिया वाले भी संजना को देख गए थे.. संजना को तोह दूर खड़े हुए आम लोग भी देख गए थे. जहाँ वह पहले हैरान हुए थे. अब संजना को देख कर शोर मचने लगे. संजना माँ के नाम की माला जपने लगे..

संजना को फ़ौरन hi लाइव दिखाया जाने लगा..

संजना : आप सब मुझे यहाँ देख कर हैरान हो रहे होंगे.. मैं आप सब को बता दूँ. स्कूल में जो कुछ भी हुआ था. वह मैंने नहीं किया था. वह सब माँ काली के आशीर्वाद से मुमकिन हुआ था. हज़ारों बच्चू की ज़िन्दगियों की रक्षा करने के लिए माँ ने मुझे शक्ति दी थी.

मैं तोह लड़ना नहीं जानती थी. लड़ना भी सीख गयी और सभी आतंवादियो को मार कर अपने बच्चू की जान भी बचा गई.

ये सब माँ की दी हुई शक्ति से हुआ है. माँ ने hi मेरी लाइफ से जुड़ा हुआ सारा ज्ञान मेरे मैं में उतारा.. मैं जान गयी, मैं अनाथ लड़की नहीं हों. मैं दिल्ली के फेमस बिज़नेस टीकों दिलीप शर्मा की पोती हों. मैं गौतम शर्मा की बेटी हों.

बड़े दुःख के साथ मुझे ये कहना पद रहा है. हमारे प्यारे देश में बहुत से लोग ऐसे भी हाँ, जो बिना मतलब की दुश्मनी के लिए इन्तेहाई घट्टिया पत्र पर उतर आते हाँ.

इसी सिटी के फेमस बिज़नेस टीकों नारायण मिश्रा मेरे परिवार के बिज़नेस राइवल हाँ. ये बात पूरा शहर भी जानता है.

बड़े पापा राजीव शर्मा की बेटी तारा जिसके बारे में आप में बहुत से लोगों ने सुना होगा. वह डेढ़ साल की उम्र में hi लापता हो गई थी. मेरा जनम एक हॉस्पिटल में हुआ था. वहीँ से मुझे मेरे परिवार से दूर कर दिए गया था.

ऐसा सब करने वाला कोई और नहीं नारायण मिश्रा और उसका परिवार है.

निचे कोठी के अंदर भी सब लाइव देखने लगे थे. सब सुनकर दुखी होने लगे. संजना का बोलै एक एक शब्द सच था.

संजना रुक कर सबको देखने लगी.. मिछ अपने मोह के सामने किये वह बोल रही थी.

सब सुन रहे थे. मीडिया सब लाइव टेलीकास्ट कर रही थी.

संजना : मैं और मेरी बेहेन दोनों पर hi माँ की कृपा हुई है. मेरी तरह वह भी लौट आई है. तारा दीदी लौटते समय अपने साथ नारायण मिश्रा और उसके दो बेटों को भी अपने साथ लाइ है. नारायण मिश्रा और उसके दोनों बेटों के साथ साथ उसके परिवार के सभी सदस्य हमारे कसूरवार हाँ. और हम उन्हें माफ़ नहीं कर सकते.

अपने बच्चू को बचने के लिए मैंने बहुत से अनगिनत आतंवादी मार दिए.. तोह नारायण मिश्रा जैसे लोग भी मेरी नज़र में किसी रियायत के लायक नहीं हाँ. मैं आप सब से कह देना चाहती हों. नारायण मिश्रा और उसके परिवार के कारण मुझे और मेरी दीदी को बरसों अनाथो की ज़िन्दगी बितानी पड़ी है. मेरे पुरे परिवार को खून के आंसू रोना पड़ा है. मैं और मेरी दीदी नारायण मिश्रा और उसके परिवार से बदला ले कर रहेंगे.

संजना के एक एक शब्द में गूँज थी. मातुरित्य थी. आम जनता तोह संजना माँ के लिए पागल हो चुकी थी. संजना के मोह से निकला एक एक शब्द उनके लिए जैसे धरम बन के रह गया था.

पर पुलिस या नारायण मिश्रा के परिवार के लिए ये सब सहन कर जाना मुमकिन नहीं था.

संजना के इस लाइव टेलीकास्ट ने पुरे देश में तहलका मचा कर रख दिए था.. नारायण मिश्रा हरामी था. गन्दी नेचर का था. बुरा था तोह बुरे लोगों से भी उससे सम्बन्ध थे.

नारायण मिश्रा और उसके बेटे ये सब सुनकर डरे नहीं थे. उन्हें आस मिल गई थी. वह जान गए थे. संजना के ऐसा कर जाने से देश भर में मौजूद उनके फ्रेंड्स, पार्टनर्स उनको बचने के लिए कुछ भी कर जाएंगे..

संजना खामोश हुई तोह कोठी में रह रहे सभी को संजना की एक एक बात सही लगी. वहीँ पुरे देश में टेलीफोन की, मोबाइल की घंटियों पर घंटियां बजने लगी.

नताशा भी वहीँ छत पर आ गयी..

संजना ने मिछ साइड रख दिए था. अब वेट के शिव के कोई और चारा नहीं रहा था.

नताशा भूल गई थी. उसे सब सूरत से पहचानते हाँ. महीनो पुराणी बात वह भूल गई थी. उसी समय मीडिया ने उसे लाइव टेलीकास्ट करना शुरू किया तोह एक नया हंगामा शुरू हो गया..

पहले भी नताशा को लेकर पुरे देश में न्यूज़ चलती रही थी. फिरसे चलने लगी तोह संजना वाले तहलके से भी बड़ा तहलका मच उठा.

नताशा जो संजना से उसकी कही बात कर चर्चा कर रही थी. निचे से एक नौकरानी भगति हुई आई..

नौकरानी : मालिकान आप नताशा हाँ न.. वही जुटु के साथ उड़ने वाली.. टीवी पर आपके बारे में बता रहे हाँ.

नताशा को खुद पर ग़ुस्सा आया. वह फ़ौरन निचे जाने लगी. संजना भी उसके साथ निचे जाने लगी. अब उसे भी याद आ गया था. नताशा को तोह पहले भी टीवी पर देख चुकी थी.

मम्मी : तारा बेटी, तुम तोह सब के सामने एक्सपोज़ हो गई हो.

नताशा : मम्मी! जो होना था वह हो गया. अब आगे का सोचते हाँ.

भाभियाँ तोह बस संजना और नताशा को hi देख रही थी. वह बड़ी हैरान थी. कैसे घर में बियाह कर आयी हाँ. जहाँ की दो दो लड़कियां एक्स्ट्राऑर्डिनरी थी.

दोनों वहीँ बेथ कर न्यूज़ देखने लगी..

संजना : दीदी ये तोह सच में गड़बड़ हो गयी. ऐसे तोह हमारे परिवार के लिए प्रोब्लेम्स क्रिएट होने लगेंगी.

एक भाभी ने चैनल चेंज किया तोह वहां संजना पर कुछ चर्चा चल रही थी.

भाभी : सही तोह कुछ भी नहीं हुआ. आपने जो कहा वह भी किसी को हज़म नहीं हुआ.

दादी : अब नारायण के सरे दोस्त मिलकर उसे बचने की सोचेंगे.

संजना : कुछ भी करते तोह ऐसा सब तोह देखने को मिलना hi था. कोठी में मार देते तोह भी हमारे लिए परेशानियां कड़ी हो जाती. अब उन्हें छोड़ नहीं रहे हाँ तोह भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. छोड़ दिए तोह बाद में भी ऐसे hi हालातों से वास्ता पड़ता रहेगा. अब दुश्मनी खुली है तोह लड़ाई भी खुल कर होगी.

संजना मम्मी : जैसा हाल तारा बेटी ने उन तीनो का किया है. मीडिया तोह खूब उछलेगी इस बात को.

मम्मी : नारायण या उसके परिवार वाले अब चुप नहीं रहेंगे. पहले हमारी लड़ाई इस हद तक नहीं आई थी.

नताशा : अब यहाँ रहना सेफ नहीं रहेगा.. मेरे पास एक आइलैंड है. वहीँ सब मिलकर रहेंगे.

kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa..?? आइलैंड!!

सब हैरान हो गयी

नताशा : हाँ! क्वीन बानी हों तोह एक सीक्रेट बेस की भी ज़रूरत थी मुझे. बहुत बड़ा आइलैंड है वह. वहां हम सब मिलकर रहेंगे.

भाभियाँ एक्ससिटेड हो गई थी..

एक भाभी : वूववव! हाउ रोमांटिक! ऐसा hi तोह मैंने सपना देखा था, एक आइलैंड पर रहने का. जो सिर्फ और सिर्फ हमारा हो.

सब हसने लगी.

नारायण का एक बीटा और पोते जो कोठी के बहार मौजूद थे. वह लाइव टीवी पर दिखाई दे रहे थे. हथुन में गन्स लिए वह बहुत ग़ुस्से से बोल रहे थे. नारायण मिश्रा और दोनों को बचने के लिए वह कुछ भी कर जायेंगे. ऐसा बोल रहे थे.

पुलिस के बड़े बड़े अधिकारी भी वहीँ आ गए थे. खूब हंगामा मच उठा था. अब लड़ाई तोह होने से रही. लाइव लड़ाई कोई भी नहीं लड़ सकता था.

िग ऑफ़ पुलिस वहीँ एक कैमरा के सामने बोलने लगा.

"संजना माँ ये सब क्या है. प्ल्ज़ आप इस सब को बंद कर दें. ये सब सही नहीं है. ऐसे लड़ाई बढ़ जाएगी. और खून की नदियां बहने लगेंगी. पूरी दुन्या में हमारे देश का मज़ाक बनकर रह जायेगा"

मम्मी : संजना बेटी! िग सर! सही बोल रहे हाँ.

संजना भी टीवी पर िग को सुनते हुए : क्यों दीदी! क्या करना सही रहेगा.

नताशा : छोड़ तोह नहीं सकते हम तीनो को.

दादी : तारा बेटी! बाद में भी तोह सबको मार सकती हो. अब छोड़ना hi सही रहेगा.

एक भाभी : तारा hi नताशा भी है. तोह अब शूज वाले मटर को लेके भी सब चुप नहीं बैठेंगे. मामला बहुत ऊपर तक जाने वाला है.

दूसरी भाभी : मेरे पापा भी तोह मिनिस्टर हाँ. वह कुछ नहीं होने देंगे अपनी बेटी के ससुराल वळून को.

संजना : कोई हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता भाभी.

बुआ : तारा बेटी! जैसे तुम पहले इन्हे इनके बिल से निकाल ले थी. बाद में भी वैसे hi निकाल सकती हो. अब तुमसे तोह ये छुप नहीं सकते.

नताशा : सही कहा बुआ जी आपने.. मुझसे बच पाना अब उनके लिए मुमकिन नहीं रहेगा.

नताशा और संजना उठी तोह मम्मी और सब भी उठ कड़ी हुई. अब फायरिंग का कोई खतरा नहीं था. इसलिए सब भी कोठी से बहार निकलने लगी.

नारायण मिश्रा और उसके बेटो के पास पोहंचे तोह पापा, चाचा, फूफा और सरे भाई भी वहीँ आ गए.

पापा : तोह बरसों बाद मिलने वाली पहले कामयाबी हमसे दूर होने जा रही है.

एक भाई गन को लहराते हुए : मार देते हाँ तीनो को. जो होगा देखा जायेगा. एक बार ये हमारी नज़रों से दूर हुआ तोह मिलना मुश्किल हो जाएगा. सांप को जितनी जल्दी मार दो, उतना hi अच्छा है. पता नहीं फिर बाद में किस बिल से निकल कर दस ले.

दूसरा भाई : सही कहा तुमने भाई. फिर नताशा को देखता हुआ.. तारा मेरी बेहेन पहले कहाँ से मिले थे तुम्हे ये तीनो. और कैसे उठा लाइ थी तुम तीनो को.

नताशा : भाई मैं क्वीन भी तोह हों न. क्वीन किसी को दिखाई नहीं देती.

सब को याद आया तोह चिंता वाले भाव सभी के चेहरों पर से जाते रहे.

बहार और भी कई बड़े बड़े मिनिस्टर्स आये हुए थे. वह भी पब्लिक वॉर नहीं चाहते थे. पर ज़यादा तर ऐसे भी थे जो नारायण मिश्रा को मरने नहीं देना चाहते थे. नारायण मिश्रा उनके बड़े काम का बाँदा था.

एक मिनिस्टर वह भी था, जिसके टेर्रोरिस्ट्स को संजना ने स्कूल में मार दिए था. वह भी इस मोके का भरपूर फायदा उठाने की सोचे हुए थे.

संजना अपने भाइयो के साथ गेट पर गयी और छोटा गेट खोल कर िफ़ ऑफ़ पुलिस के साथ साथ दो और को अंदर आने को बोल दिए.. नारायण मिश्रा का बीटा और पोते भी आना चाहते थे. पर उन्हें नहीं आने दिए गया.

वह अंदर पोहंचे तोह गेट बंद कर दिए गया.. अंदर नारायण मिश्रा और उसके बेटो का हाल देख कर घबरा गए.

िग : संजना माँ! ये सही नहीं हुआ है. ऐसे बात संभाली नहीं जाएगी.

संजना : िग सर! इनके लिए बाद में भी कोई माफ़ी नहीं है. ये अब नहीं तोह बाद में ज़रूर मरेंगे. फिर बात जितनी भी बिगड़ती है बिगड़ जाए. अभी देश की शांति का मटर बना हुआ है तोह इन्हे छोड़ रहे हाँ. वर्ण हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं था.

िग पुलिस और उसके साथ आये बाकि के दो भी कड़वे घूंट पि कर रह गए.

नताशा : िग सर! आप इन्हे लेजाने का इंतज़ार कर सकते हाँ. लेकिन पहले बहार के खड़े हुओं को पहले यहाँ से हटा दिए जाए. कहीं ऐसा न हो हमारा इरादा बदल जाए और ताल चुकी वॉर फिरसे शुरू हो जाए. देख रहे हाँ आप मेरे पापा, चाचा, फूफा और भाइयों को. सब के सब मार देने और मर जाने के लिए रेडी हाँ.

िग और दूसरे दोनों बड़े अधिकारी सबको देखने लगे.

फूफा : आप मुझे जानते hi होंगे िग सर!. मैं कितनी शांत नेचर का हों. मटर हमारे खंडन की बच्चियों का, इज़्ज़त का है, हम मर तोह सकते हाँ, पर पीछे नहीं हैट सकते. हमने कुछ समय के लिए अपने हाथ रोके हुए हाँ. कुछ समय के लिए खुद पर कण्ट्रोल बनाये हुए हाँ. जो मैं में ठान लेते हाँ, वह कर के रहते हाँ. मेरी बेटियों ने कह दिए. अब इन सभी कुत्तों का आखरी समय शुरू हो चूका है तोह ऐसा hi होगा. अब से हम सब का एक hi मकसद है. अपने दुश्मनो का खत्म. जब तक ये हरामज़ादे रहेंगे. हमें चैन से जीने नहीं देंगे.

कुछ मिंटो में कोठी के सामने से नारायण और उसके बेटे पोतों को साइड कर दिए गया. मीडिया की गाड़ियां भी कुछ दूरी पर जा कड़ी हुई थी.

तीन एम्बुलेंस कोठी के अंदर दाखिल हुई, जो इमरजेंसी के लिए वहीँ कुछ फैसले पर कड़ी थी. एम्बुलेंस को अंदर घुसते देख कर नारायण का बीटा और पोते ग़ुस्से में आ गए. वह समझ गए, अंदर उनके अपणु को टार्चर किया गया है.

नारायण को जब एम्बुलेंस में डाला जाने लगा तोह खुनी आँखों से सबको देखने लगा.

नारायण : देख लूंगा, सब को देख लूंगा. अब दुश्मनी के रंग बदल hi चुके हाँ तोह मैं भी दिखा दूंगा मैं कितनी पावर में हों.

पापा : कुत्ते की जान क्या बची कुछ देर के लिए, शेर बनने लगा.

हाहाहाःहाहा.. सब ज़ोर से हसने लगे.

नताशा : जाओ जाओ नारायण मिश्रा जाओ. तुम हॉस्पिटल भी पोहंच पाते हो या नहीं. बाकि सब भूल कर बस इतना hi सोचो. जैसे पहले तुझे और तेरे पिल्लों को उठा लाइ थी. ऐसे hi फिरसे उठा लाऊँगी. और इस बार किसी को खबर भी नहीं होने दूंगी. इस बार तू अकेला नहीं होगा. तेरे परिवार के सभी मर्द होंगे. तेरे सामने hi एक एक को काटूंगी. सबसे आखिर में तेरा अंत करुँगी.

नारायण मिश्रा क्वीन को भूल गया था. जैसे hi क्वीन की बातें सुनी तोह घबरा कर नज़रें चुरा गया.

कुछ देर में तीनो एम्बुलेंस कोठी के बहार थी. कोठी का गेट बंद हो चूका था.

तीनो एम्बुलेंस नारायण के बेटे और पोतों के पास पोहंच कर रुक चुकी थी. दूर खोल कर अंदर ज़ख्मो से छूट तीनो को लेते देखा तोह सब ग़ुस्से से पागल होने लगे..

एक पोता गन ऊपर आकाश की और करते हुए फायर करने लगा..

"कोई भी कुत्ता ज़िंदा नहीं बचेगा. सब को मार दूंगा. मेरे दादा, मेरे पापा और चाचू को टार्चर करके मौत को आवाज़ दी है.. मैं किसी को भी ज़िंदा नहीं छोंगा.

मीडिया भी भाग कर आगे आने लगी तोह उसे आगे नहीं आने दिए गया. वह दूर रहते हुए hi एम्बुलेंस के अंदर का सन कैप्चर करने लगे. पर जितने गुंडे वहां थे. तीनो एम्बुलेंस के अंदर का व्यू दिखाई नहीं दे रहा था.

गैंगस्टर मिनिस्टर भी चीखने लगा : अब आप सबको यकीं आ गया होगा. संजना माँ वह नहीं हाँ, जो दिखाई दे रही हाँ. ज़रूर वह खुद भी एक टेररिस्ट रही होंगी. जो टेर्रोरिस्ट्स स्कूल में मरे थे. अब्ब तोह मुझे लगता है, वह सब संजना माँ के साथी होंगे. सब पहले से प्लनेड था. दुश्मन देश की कोई बहुत बड़ी चाल थी. अपने कुछ आदमी मरवा कर संजना जैसे आम लड़की को संजना माँ बना दिए. हम सबकी आँखों में धूल झोंकने के लिए इतना बड़ा प्लान बनाया गया है. दुश्मन देश ने इससे पहले भी कई बार ऐसी hi चलें चल कर हमारे देश की शांति की भांग करने की साज़िशें रची हाँ. इस बार ज़रूर कोई मास्टरमाइंड इस सब के पीछे है.

मिनिस्टर के जोशीले अंदाज़ पर सबके छक्के छूट गए.. सबकी सोचों की धरा बदलने लगी.

अंदर मौजूद संजना के साथ साथ नताशा और सब भी भोचक्के रह गए.. एकदुम्म से कैसे इस हरामी मिनिस्टर ने बाज़ी hi पलट कर रख दी थी. देश की मासूम जनता दुश्मन देश से जुडी कोई भी बात बिना समझे सच मान लिया करती थी.

संजना माँ के लिए जनता के मैं में आया सम्मान टूटने लगा. पूरा देश इस समय सब लाइव देख रहा था. कुछ घंटे पहले जो सब संजना माँ, संजना माँ कर रहा था. एकदुम्म से सब अपने विचारों में हलचल सी मचती हुई महसूस करने लगे.

मिनिस्टर सबके चेहरे देख रहा था. वह मैं में बोलै.. अब देखना संजना माँ मैं तेरा क्या हाल करता हों. तूने मेरा सारा प्लान चौपट कर दिए था. पर अब देखता हों कैसे मेरा प्लान आगे नहीं बढ़ता. कैसे मैं इस देश का मुख्य मंत्री नहीं बनता. तुझे hi सीढ़ी बना कर मैं देश भर की जनता में और भी फेमस हो जाऊँगा. फिर देखते hi देखते मैं बन जानोंगे इस देश का मुख्य मंत्री.

नताशा और संजना दोनों अंदर कोठी के अंदर जा घुसी थी. वह न्यूज़ पर जनता के विचार जानना छह रही थी. मीडिया किसी को हीरो हीरोइन बना देती है तोह पल भर में hi किसी को भी हीरो से जीरो भी बना देती है.

यहाँ मिनिस्टर के बयां के बाद मीडिया ने अलग एंगल से बातें करनी शुरू की तोह कुछ hi देर में लोगों के विचार बड़ी स्पीड के साथ बदलने लगे.

कोठी का गेट बंद था. अंदर सभी हथियार लिए तैयार थे.

मिनिस्टर : मुझे लगता है अब मीडिया को नारायण मिश्रा और उसके बेटो का हाल जान्ने की ज़रूरत है.

नारायण मिश्रा भी मिनिस्टर की बात सुन गया था. वह भी दिलीप शर्मा को मात देने के लिए कोई भी रास्ता चूसे कर सकता था. ज़ख़्मी था, पर दुश्मनी के आगे वह खुद को भूल कर दुश्मन को चोट देने की सोच बैठा था. तीनो का फर्स्ट ट्रीटमेंट भी चालू था. तीनो के ज़ख़्म एम्बुलेंस में hi क्लीन करके ड्रेसिंग की जा रही थी. उसी समय पर नरियन मिश्रा और उसके बेटे, पोटो के साथ साथ गुंडे भी पीछे हैट गए और मीडिया को आगे आने दिए.

नारायण मिश्रा : जैसा कुछ देर पहले संजना ने कहा था. वह सब झूट था. हमारी दिलीप शर्मा से बिज़नेस को लेके दुश्मनी तोह है, पर हम इतने घट्टिया नहीं हो सकते, उनके घर की बेटियों को किडनैप करें. मई नहीं जनता दोनों लड़कियां कोण हाँ. सच में hi वह दोनों लड़कियां दिलीप मिश्रा की पोतियां हाँ, ये दिलीप मिश्रा और उसका परिवार दुश्मन देश के साथ मिलकर कोई साज़िश रचने में लगा हुआ है.

नारायण का बीटा और पोता तोह नारायण मिश्रा को पलटते देख कर हैरान हो गए थे. नारायण मिश्रा के बयां बदल देने पर वह सब भी उसी के अंदाज़ में सोचने लगे. वह भी फिर उसी अंदाज़ में बातें करने लगे.

संजना माँ के लिए जो अच्छे विचार अब्ब भी कइयों के मैं में थे. वह नारायण मिश्रा की बातों पर बदलने लगे.

नारायण मिश्रा : कोठी के अंदर मैंने इतनी गन्स देखि है. ऐसा लगा मुझे, जैसे पुरे शहर को उड़ने का प्लान बना रखा हो दिलीप शर्मा ने.

कोठी के अंदर सब के सब अब अपने सर को थामे बैठे थे. किसी ने गुमान तक नहीं किया था. सिचाईओं ऐसी दिशा भी बदल सकती है.

संजना और नताशा दोनों सब को देख रही थी. वह दोनों नहीं घबराई थी. बाकि सब अब घबराने लगे थे.

मम्मी : तारा बेटी! तुम कितने बरसों बाद मुझे मिली हो. कहीं तुम मुझसे फिरसे दूर तोह नहीं हो जाओगी.

नताशा : अरे नहीं मम्मी जी.. ऐसा कभी नहीं होगा. अब तोह हमारा आइलैंड पर रहना मज़बूरी भी बन गई है. हम जल्द hi आइलैंड के लिए निकल पड़ेंगे.

सब टीवी पर बैठे हुए नारायण मिश्रा और उसके बेटो के साथ साथ मिनिस्टर की भी कड़वी बातें सुन रहे थे.

नारायण मिश्रा ने ये भी बता दिए था. कोठी के अंदर की दूसरी लड़की क्वीन है..

हालत बहुत ज़यादा ख़राब हो चुके थे. संजना और नताशा सब को मारने लगती तोह भी आम जनता में अपना नाम नहीं बचा सकती थी. कोई सलूशन नहीं बचा था दोनों के पास. दुश्मन को तोह कभी भी मार सकती थी. पर जो देश दरोहि होने का खिताब इन्हे दिए जा रहा था. उसके जवाब में वह कुछ भी नहीं बोल सकती थी.

नताशा भी चाहती तोह क्वीन बनकर बहुत कुछ बदल सकती थी. कइयों को मार तोह सकती थी. पर किसी के विचार नहीं बदल सकती थी. विचार बदलने के लिए अच्छे करम करने पड़ते हाँ. और यहाँ कोई भी करम करने को अच्छा नहीं था.

गुरु जी भी इस समय उनके पास नहीं आये थे. कोई भी बात नहीं करि थी उन्हें ने.

नारायण मिश्रा का एक पोता जो हथुन में गन लिए हुए टीवी पर दिखाई दे रहा था.

वह एकदुम्म से hi ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगा..

HAHAHA..HAHAHA..HAHAHA..HAHAHA..HAHAHA..HAHAHA..HAHAHA..HAHAHA..HAHAHA..HAHAHA..

कोठी के अंदर के सभी टीवी पर उसे पागलों के जैसे हस्ते हुए देखने लगे. वहीँ बहार मीडिया उसे लाइव कैप्चर करते हुए हेरात में गम थी.

मिनिस्टर को भी लगा, नारायण का ये पोता ज़रूर पागल हो गया है.

फिरर...

कुछ hi देर में उसका पागलपन दिखाई भी देने लगा. उसके हाथ में मौजूद गन का रुख अपने hi पापा की और हुआ..

"HAHAHA.....HAHAHA......PAAPi है तू साले.. कितने झूट बोलेगा तू सब से.. ए नारायण मिश्रा, साले हरामी, चूतिये, गन्दी नाली के KEEDE..TUJH जैसा पापी भी भला इस दह्रति पर कोई होगा.. थूऊ है तुझपर नारायण मिश्रा.. कोठी के अंदर तोह पैरों में गिर कर माफ़ी मांग रहा था.. जान की भीक मांग रहा था.. बहार आते HI कुत्ते से शेर बनने लगा HA..APNE HI देश के हरजोन मासूमो को बचने वाली एक मासूम लड़की को देश दरोहि बोलता है...."

फिर उसकी गन का रुख मिनिस्टर की और हुआ....

ोये मिनिस्टर.. साला तू खुद मुख्य मंत्री बनने के लिए श्कूल में आतंकवादी भेजता है.. मासूम बच्चू को जान से मार देने की धमकी देकर अपने मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स को जेल से बहार करने की साज़िश रचता है. एक आम सी लड़की जिसके अंदर माँ काली उतर आई थी. तू उसे दुश्मन देश की साज़िश बोलता है. थूऊऊऊ है तुझपर. एक कुर्सी के लिए तू एक ऐसी लड़की पर आरोप लगता है. जिसके अंदर माँ काली की शक्तियों की झलक दिखाई दी हो..

अफ़सोस है मुझे मेरे देश की जनता पर भी... जो एक पल में अपनी HI बेटी को "संजना माँ" बना देते हाँ तोह दूसरे HI पल इन हरामी मिनिस्टर्स के झूठे, मैं घडत शब्दों पर अपना धरम तक बदलने लगते हाँ..

नारायण मिश्रा के साथ साथ सब मोह फाड़े उसे देख रहे थे. इसे किया हुआ. कुछ देर पहले यही बढ़ चढ़ कर बोल रहा था. यही सबसे आगे था. यही सबसे कह रहा था. कोठी को hi उदा दो.

अब यही कह रहा था. सब झूठे हाँ. फरेबी हाँ. मक्कार है, दग़ाबाज़ हाँ.

उसका पापा उसके सामने आया और उसके मोह पर थप्पड़ मार दिए.

"क्या बकवास कर रहा है तू"

थप्पड़ के बदले में आवाज़ सुनाई दी..

HAHAHA...HAHAHA...HAHAHA...




SAMRAT.....SAMRAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAATTTTTTTT होओओओओ मैं...




जैसे hi ये शब्द उसके मोह से निकले तोह कोठी एक अंदर बैठी हुई नताशा उठ कर नाचने लगी..

"ओह्ह जिओ मेरे SAMRAT..SAHI समय पर आये हो"

सबको क्वीन और सम्राट वाली पूरी बात याद आ गई..

सबके मोह से बस इतना hi निकला... क्या सम्राट सच में है...

नताशा : हाँ!! क्वीन है तोह सम्राट भी है. अब देखना कैसे सारा मटर सोल्वे होता है.

सब टीवी पर नज़रें गड़ाए बैठी हुई थी. पूरी कोठी में एकदुम्म से शांति फेल गयी थी.


.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
 
एक साथ दो ुदापतेस फिरसे पोस्ट कर दिए हाँ मित्र.. एंजोयिंग

छल से तोह बाओ वळून का पुराण नाता है. कैसे अलका और माला को अपने हाथ से जाने देते.

अब गुनह्गारु का काउंटडाउन शुरू हुआ है.. कोई नहीं बचेगा. जिसकी जितनी सजा बनती है उतनी उसे मिलेगी..

संजना और नताशा दोनों कोण हाँ. नेक्स्ट पोस्टेड उपदटेस में ज़िक्र कर दिए दिए है मित्र..

बहुत बहुत शुक्रिया भाई.. साथ बने रहे ✨
 




Episode:36


धनञ्जय के बाद मैं षिमुना के पास गया था. उससे कुछ देर की बातें करि और फिर वापिस से अपने रूम में हाज़िर हो गया था..

रुपाली को देखा तोह वह छूट में जलन लिए बेसुध पड़ी सो रही थी. ऋचा को देखा तोह वह नहाने के बाद खाना बनाने में लगी हुई थी. वह चौकीदार की पत्नी के साथ खाने की तैयारी कर रही थी.

उसके सभी विचार जोह मुझे लेके थे. सरे बदले हुए थे. वह पुरे मैं से मेरी दासी बांके रहना चाहती थी.

जहाँ उसे मुझसे बछङे की कोई रह सुझाई नहीं दे रही थी. वहीँ वह मेरे लौड़े को लेके भी बहुत मस्त किसम के विचार बनाये हुए थी.. मुझसे दरी हुई थी. मुझसे छोड़ने के लिए बेचैन हो उठी थी.

हाहाहा.....

कितनी जल्दी उसके विचारों में बदलाव आ गया था. उम्र भर मुझे लेके अपनी माँ के जैसे बन कर रही थी. अब माँ मेरी घुलम बानी तोह माँ की छत्तर छाया से निकल कर मेरी छत्तर छाया में आने को बेताब थी.

कितनी जल्दी लोगों के विचार बदल जाया करते हाँ.

और....

कहीं कहीं उम्र भर नहीं बदला करते...

जैसे...

रुपाली नागिन के विचारों में कोई बदलाव नहीं आया था.. जैसे hi उसे मौका मिलता था. वह डसने को बेताब हो जाया करती थी..

ऋचा के लिए मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं था. मैं उसके साथ रियायत करने के मूड में नहीं था. साली अपने परिवार के साथ मिलकर मेरे दीदी के साथ कैसा घट्टिया खेल खेलने जा रही थी. अपने हरामी भाई के साथ मेरी दीदी की शादी करने जा रही थी.

अब मेरे दाम में आई थी तोह शरीफ बच्ची बनने पर उतर आई थी...

मैं फिर विकास के पास जा पोहंचा..

विकास.....

धनञ्जय ठाकुर विकास को hi बच्चे और लड़कियां किडनैप करके बेचा करता था. विकास एक बड़ा डीलर था.. वह देश भर में लोगों को उनकी ज़रूरत के हिसाब से बच्चे लड़कियां और लड़के बेचा करता था. विकास का ये धंदा बहुत बढ़िया से चल रहा था.

हरामज़ादा साथ में सोशल वर्किंग के लिए भी बहुत एक्टिव था. अपने धंदे से हटकर रहा करता था. बड़े बड़े सप्लायर के साथ मिल लिया करता था. वर्ण उसके आदमी hi सारा धंदा संभाला करते थे.

धनञ्जय ठाकुर के साथ उसकी अच्छी दुआ सलाम थी.

मैं विकास के दिमाग में रहते हुए साडी जानकारी प्राप्त करने में लगा हुआ था. वहीँ से मुझे बहुत कुछ और भी जान्ने को मिला..

जो जान्ने को मिला, वह मेरे लिए बहुत इंटरेस्टिंग था..

एक बात का पता चला तोह मैं उससे रिलेटेड साडी इन्फो जो विकास के दिमाग में थी.. वह प्राप्त करने लगा.. मुझे विकास के दिमाग से नताशा नाम की एक लड़की का पता चला.. शूज वाली बात भी मेरे नॉलेज में आई.

इन टाइम नताशा वाला मटर hi मेरे देश में गूँज रहा था. साथ hi संजना माँ वाला मटर भी जुड़ कर मीडिया पर दिखाया जा रहा था.

मैं दो दो स्ट्रेंज लड़कियों के बारे में इन्फो जान कर हैरान रह गया.. मुझे कोई मेरे जैसा एक्स्ट्राऑर्डिनरी दिखे और मैं आगे न बधु, उसके बारे में सब न जणू.. ये कैसे हो सकता था.

विकास टीवी के सामने बैठा हुआ था. वह कइयों के साथ फोन पर भी बात कर रहा था. मैं टीवी से आ रही आवाज़ों को सुनकर वहीँ जा पोहंचा..

वहां मुझे सही से साडी इन्फो प्राप्त करने में समय लग गया था. कई दिमागों में जाना पड़ा था मुझे. कैसे कैसे खेल खेले जा रहे थे मेरे देश में. मैं जान कर हैरान भी हुआ.

वहीँ मिनिस्टर और नारायण के उसके बेटों और पोटो के भी दिमाग में घुस कर सरसरी सी इन्फो प्राप्त करि. सारा मटर मेरी समझ में आ गया.

वहीँ रहते हुए मुझे संजना माँ की पूरी डिटेल भी मिली और क्वीन के बारे में भी जानने को मिला.. कितना हटके था सब.. क्वीन फिर संजना माँ के दिमाग में भी घुसा तोह झटके खता हुआ मैं वापिस भी पलट आया था..

संजना माँ और क्वीन के दिमाग में घुसने पर मुझे पता चला.. साला ये तोह शामे 2 शामे अलका और षिमुना वाले ब्रेन्स हाँ.. मैं सब समझ गया.

क्यों एक hi दिन में इतने चमत्कार हो रहे हाँ. ये सोचना छोड़ कर मैं वहीँ कोठी के सामने जा पोहंचा और अपना खेल खेलने लगा..

नारायण के पोते को अपने कण्ट्रोल में लिया तोह मिनिस्टर के साथ साथ सबकी पोल खोलने लगा..

सब सुनकर जहाँ हैरान हुए थे.. वहीँ कुछ चेहरों पर शर्मिंदगी भी थी.. संजना माँ के लिए अच्छे विचार अपने मैं में ला कर वह उन्हें बुरा भला कहने लगे थे. कितने गलत थे वह. कितनी जल्दी मॉनिटर की बातों में आ कर वह संजना माँ को गलत मानने लगे थे. भूल गए थे.. संजना माँ ने कितना कुछ कर दिए था. अपने बच्चू को, देश भर के बच्चू को बचने के लिए खुद को खतरे में दाल दिए था.. कई माओ के चिराग़ बुझने से बचा लिए थे.

मेरी बातों के जवाब में जहाँ सब शर्मिंदा थे, लाजवाब थे. वहीँ मिनिस्टर ग़ुस्से में आए गया..

मिनिस्टर : क्या बकवास कर रहे हो तुम.. मैं एक देश भगत था, हों और हमेशा रहूँगा..

मैं नारायण के पोते पर कण्ट्रोल बनाये हुए था.. वह वह नहीं रहा था. अब मैं था

दक्ष : हाहाहा.... किसे बेवक़ूफ़ बना रहा है मिनसिटेर.. सम्राट को... सम्राट तोह तेरे अंदर का वह सच भी बहार निकल सकता है. जिसे तूने आज तक सबसे छुपा कर रखा है.

मिनिस्टर कुछ घबरा गया-- kk...kaisa सच!

मैंने गन मिनिस्टर के पैरों की और सीढ़ी करि और ट्रिगर दबा दिए.. गोली उसके घुटने पर लगी तोह उसका घुटना hi उड़ गया.. वह चीखता हुआ वहीँ गिर पड़ा.. सबकी गन्स का रुख मेरी और हो गया था..

मैं खूंखार लहजे में सबकी और घूर कर देखा और फिर पुरे ज़ोर से चिल्ला उठा.

दक्ष : सुनो मेरे देश के स्टुपिड रखवालो.. तुम जैसे रखवाले केवल ऐसे घट्टिया नेताओं की hi रक्षा कर सकते हाँ. न देश की रक्षा कर सकते हाँ, न धरम की रक्षा कर सकते हाँ. न hi अपने देश के हज़ारों लाखों मासूमो की रक्षा कर सकते हाँ..

आज सबके सामने दूध का दूध और पानी का पानी होगा. मैं तोह हो रहा है. जितने भी पापी हाँ. सब को एक hi समय पर जान से मार डालूं. पर सब को मार नहीं सकता. मैं भगवन नहीं हों. भगवन का एक अवतार हों. भगवन जहाँ कइयों को बदलने के अनेको मोके देता है. वहीँ मैं भी दूंगा. मैं तुममे से बहुत से पापियों को नहीं मारूंगा. मैं भी तुम्हे बदलने का मौका दूंगा. कोई भी गन उठाये न रखे. सब के सब अपनी गन्स का रुख निचे कर लें..

मैं तोह मरूंगा नहीं.. मरेगा तोह नारायण का पोता..

किस किस को मारोगे तुम लोग. कितने शरीर बदल सकता हों मैं. तुम सब नहीं जानते.

मारने वाला काम तोह आज मैं करने वाला हों..

मीडिया लाइव सब कवर कर रही थी.. मिनिस्टर निचे गिरा पड़ा दर्द से तड़प रहा था. अपने चकनाचूर हो चुके घुटने को थामे वह चिल्लाये जा रहा था.

दक्ष : मैं मीडिया से कहता हों. जहाँ देश ने बहुत से मामलों में तरक्की करि है. वहीँ मीडिया को भी आज़ादी मिली है. मीडिया जबसे आज़ाद हुआ है, हमेशा अपने मैं की करता आ है. मीडिया में भी सब अच्छे नहीं हुआ करते. मीडिया का काम होता है, देश में कहीं कोई अन्याय हो रहा हो तोह उसे लाइव दिखा कर देश के बुरे लोगों के खिलाफ एक्शन लेने में आसानी बन सके. जहाँ बुरे लोग अपने अंजाम को पोहचते हाँ तोह वहीँ भले और मासूम लोगों को जीने की आस भी दिखाई देने लगती है.

पर सब इसके उलट हो रहा है. मीडिया भी ढेरों पैसा कमाने के लिए अपने मतलब का सब लाइव दिखती है. चटपटा मसालेदार दिखने के लिए जनाब शनाब बकने लगती है.

कुछ भी बको, पर मेरे देश के किसी भी मासूम, बेबस और लचर को कभी कुछ नहीं होना चाहिए.. कोई कितना भी बुरा अधिकारी हो, कर्रप्ट हो, उसके खिलाफ बोलो.. यदि ऐसा नहीं करोगे तोह आज से देश भर में जितने भी मीडिया से जुड़े हुए बुरे लोग हाँ, उन सब की पोल में मैं लाइव खोलना शुरू कर दूंगा.

अभी भी यहाँ पर कई ऐसे जर्नलिस्ट्स मौजूद हाँ. जो केवल अपना नाम बनाने के लिए पैसा कमाने के लिए जौर्नालिस्ट बने फिरते हाँ. मैं एक एक की पोल खोलने लागूं तोह देश भर में एक हंगामा मच उठेगा..

इसलिए आज से दो काम करो.. एक तोह ऐसी न्यूज़ टेलीकास्ट मत करना, जिससे मेरे देश की दुन्या भर में जग हंसाई हो.

दूसरे देश की तरक्की के लिए, अपने देश के मासूमो, बेकसों और लाचारों के लिए अपनी जर्नलिज्म का उपयोग करो. नहीं करोगे तोह परिणाम क्या होगा.. आज के मिले सबक़ से तुम सब बहुत अच्छे से समझ सकोगे.

सबसे पहले मैं इस मिनिस्टर की बात करूँगा..

तुम सब ने केलिए डाकू का नाम तोह सुना होगा.. आज से 21 साल पहले का केलिए डाकू आज एक मिनिस्टर बन कर तुम सब के सामने है. प्लास्टिक सर्जरी से एक फेमस बिजनेसमैन का चेहरा अपनाये हुए है ये केलिए डाकू..

मेरी इस बात पर सबको बहुत बड़ा झांकता लगा था. झटका तोह मिनिस्टर को भी सच में बहुत बड़े वाला लगा था. जो बात कोई नहीं जनता था. वह सम्राट जान गया था..

कुछ देर की और बातों के बाद मैंने मिनिस्टर को सबके सामने केलिए डाकू सबत कर दिए.. ये जान कर पूरी सर्कार हिल कर रह गई थी. वहीँ उस मिनिस्टर को हथकड़ी लगाई जाने लगी..

दक्ष : ऐसे पापियों को कभी छूट नहीं दी जा सकती.. ऐसो के बड़े हाई लेवल के रिलेशन्स हुआ करते हाँ. बहुत से अब भी इस मिनिस्टर को मरता हुआ नहीं देख सकते. भले hi ये मिनिस्टर कभी केलिए डाकू रहा हो.

उसी पल एक गोली चली और मिनिस्टर के माथे पर छेड़ बना गई..

िग पुलिस वॉर दूसरे बड़े बड़े अधिकारी सब देखते रह गए.. जहाँ वह मेरे लिए खुश थे. वहीँ वह मेरे ऐसे इक़दाम पर ग़ुस्से में भी आ गए थे. सजा देने है हक़ मुझे नहीं था..

दक्ष : क्यों! बुरा लगा क्या.. आज यहाँ पर मौत का नंगा नाच खेला जाएगा.. सब मीडिया अपने अपने कामर्स को ऑफ कर दें.. अब से कुछ भी लाइव नहीं दिखाया जायेगा..

मेरा आर्डर था. कैसे फिर वह अमल न करते.. कुछ देर में सभी मीडिया केवल तमाशा देखने के लिए hi वहां कड़ी रह गई थी. मैंने कोठी की छत पर नज़र दौड़ाई तोह क्वीन, संजना माँ समेत सब कोठी की छत पर खड़े हुए बहार देख रहे थे. टीवी पर अब लाइव नहीं दिखाया जा रहा था.

बस न्यूज़ hi चल रही थी.. जो यहाँ से रिलेटेड थी..

मैं गन को वहीँ पटक कर नारायण के पोते के अंदर से निकला और नारायण के दिगमग में जा समाया.. वह जो बहार देख रहा था. सब सुन और देख कर परेशान था. मेरे कण्ट्रोल में आया तोह एक ज़ोर की लात अपने एक पोते को मारी.

नारायण एक जवान लौंडे के जैसे एम्बुलेंस से बहार निकला और एक गुंडे से गन छीन कर अपने उस पोते को शूट क्र दिए. जिसके दिमाग में मैं पहले था. वह निचे गिरा खुद को सँभालने में लगा हुआ था.

गोली सीधे उसके माथे में छेड़ बना गई.. वह दूसरे सांस नहीं ले पाया. उसकी आत्मा उसके शरीर को छोड़ कर जा चुकी थी.

नारायण : हाहाहा.. सम्राट.. सम्राट कुछ भी कर सकता है.. देखो, तुम सब लोग देखो, कैसे मैं इतना ज़ख़्मी होकर भी अपने पैरों पर खड़ा हों.. देखो, कैसे मेरे हाथ में गन है. और मैं किसी हीरो से काम भी नहीं दिख रहा.. हाहाहा... बुद्धा होकर मैं हीरो बन गया.. हाहाहा.. ये सब सम्राट कर रहा है..

SAMRAT...SAMRAT महान है....

नारायण पलटा और अपने एक बेटो को गोली मार दी.. सब पुलिस वाले एक दूसरे का तोह कभी अपने ऑफिसर्स का मोह ताकने लगे.. गुंडे भी सोचने लगे नारायण मिश्रा को गोली मारे या न मारें..

नारायण मिश्रा के बेटे और पोते भी ऐसे hi विचारों में उलझ पड़े थे..

नारायण मिश्रा ने गन को ऊपर आस्मां की और किया और ट्रिगर दबा कर पूरा मैगज़ीन खली कर दिए..

सब डरे सहमे नारायण मिश्रा को देख रहे थे.

नारायण : सम्राट... सम्राट को किसी की जान लेने के लिए गन की ज़रूरत नहीं है... सुना तुम सबने.. सम्राट को गन की ज़रूरत नहीं है, किसी की भी जान लेने के लिए..

बताओं कैसे वह किसी की भी जान ले सकता है......

नारायण मिश्रा गन फ़ेंक कर सबको देखते हुए ज़ोर से बोलै तोह जिस दिशा में गन उछाल कर गई थी. वहां से पुलिस वाले और गुंडे 4 4 कदम पीछे हैट गए थे. मेरे कारण ऐसा hi दहशत भरा माहौल बन चूका था..

नारायण : देखो! अब मैं अपनी सांस रोकने जा रहा हों. तुममे से कोई माई का लाल हिम्मत और ताक़त रखता हो तोह वह मुझे सांस लेने पर मजबूर करके दिखाए, मुझे सम्राट के हथु मरने से बचाये..

इतना बोल कर नारायण मिश्रा ने सांस रोक ली..

उसने क्या रोकनी थी..

मैं उसके अंदर था. उसका दिमाग मेरे कण्ट्रोल में था.. उसके अंदर रहते हुए मैंने उसके दिमाग पर कण्ट्रोल बनाते हुए उसकी सांस रोक दी थी.. अब मैं ठहरा मरीन लाइफ जीने वाला इंसान... एक योग का माहिर.. जितनी देर मैं सांस रोक सकता था, नारायण मिश्रा का शरीर उतनी देर तक बिना सांस के नहीं रह सकता था..

कुछ hi देर में नारायण मिश्रा ज़मीन पर गिर कर तड़पने लगा.. मजाल है जो वह सांस भी प् रहा हो..

ऐसे hi कुछ देर तड़पते रहने के बाद नारायण मिश्रा के शरीर से आत्मा निकल गयी.. मुझे उसके दिमाग में जगह मिलनी बंद हो गई थी..

मैंने ऐसे hi नारायण मिश्रा के बेटो के साथ भी किया.. वह भी नारायण मिश्रा के साथ वहीँ सड़क पर सबके बीच मुर्दा हालत में पड़े हुए थे.

नारायण मिश्रा के पोते बहुत ज़यादा घबरा गए थे. वह अपने दादा, पिता और चाचाओं को वहीँ छोड़ कर भागने लगे..

पर मैंने सब को वहीँ मार देने का सोच लिया था..

कुछ देर में वहां नारायण मिश्रा के परिवार के सभी मर्द हज़रात मुद्रा हालत में पड़े हुए थे..

मौत की सी ख़ामोशी वहां छाई हुई थी.. कोई सांस तक नहीं ले पा रहा था. बहुत से तोह वहां से बहुत पीछे हैट कर खड़े हो गए थे..

कोई ऐसा नहीं था, जो बेपनाह दहशत में न आया हो.. सब के सब लाइव मौत का नंगा नाच देख कर अधमरे हो गए थे..

क्वीन और संजना को देखने के लिए मैं उन्ही के परिवार की एक महिला के दिमाग में जा घुसा.. वहां से दोनों को देखने लगा.. दोनों मेरे खेल से खुश भी थी.. पर वह भी मौत का ऐसा खेल देख कर शॉकेड थी..

बाकी के सभी मेंबर्स तोह वैसे hi सबके जैसे दहशत में आये हुए थे.. कहाँ कभी ऐसा मौत का खेल उन सब ने लाइव देखा था....

 
Episode:37

विक्रम सिंह, विनय और परची सिंह हवेली में पोहंच कर कैद हो गए थे. अपनी मर्ज़ी के बिना वह राजा ठाकुर की हवेली में पोहंचे थे. जैसा पायल सिंह के साथ वह कर गए थे.. खुद को हवेली के अंदर एक कैदी hi समझ रहे थे..

पायल सिंह ने विनय को देखा तोह दूर से hi चीख पड़ी थी..

वह भगति हुई वहीँ पोहंची तोह गार्ड्स तीनो को घेर कर खड़े थे..

पायल सिंह खुनी नजरो से विनय को देखने लगी. विनय जो अपनी कोठी पर रहते हुए पायल सिंह को लेके फिरसे सुहाने सपने देखने लगा था. पायल सिंह को सामने देखा तोह उसके सुहाने सपनो फुर्र्र कर के उड़ गए.. साथ hi पायल सिंह को देख कर उसके चेहरे का रंग भी उड़ गया...

ऊपर से जैसे पायल सिंह विनय सिंह को देख रही थी. विनय सिंह पायल सिंह की आँखों की आग सहन नहीं कर पाया और नज़रें चुरा गया..

पायल सिंह चीखती हुई : बड़ी हैरानगी की बात है विनय, मेरे साथ इतना सब करके भी तुम हवेली लौट आये. भूल गए थे, यहाँ आने के बाद मैं तुम्हारे साथ कैसा बर्ताव करुँगी.. अच्छा hi हुआ जो तुम मेरे सामने आ गए विनय.. मैं सोच भी नहीं सकती थी, तुम इतने नीच और घट्टिया भी हो सकते थे..

पायल सिंह फिर अपने गार्ड्स से चीखती हुई : विनय को टार्चर रूम में ले जाओ.

विक्रम सिंह राजा ठाकुर को hi देख रहा था.. राजा ठाकुर बिना चेहरे पर कोई भी भाव लाये सबको देख रहे थे. जो हो रहा था, वह सही था, या गलत. राजा ठाकुर को जैसे कोई फर्क hi नहीं पद रहा था.

परची : पायल दीदी! जो भी हुआ था, उसमे भाई का कोई दोष नहीं था.. एक्चुअली वह सबब---

पायल सिंह परची की बात पर ज़ोर ज़ोर से हसने लगी

पायल सिंह : हाहाहा! क्या कहा तुमने अभी. ज़रा फिरसे कहना..

परची को भी अंदाज़ा हो गया था पायल सिंह क्यों उसका मज़ाक उदा रही है. उसका सर जो विनय से चुद जाने का जान कर झुक गया था. अब और भी झुकता चला गया. अपनी माँ और भाइयो के साथ मिलकर पायल सिंह के साथ जो करने जा रही थी. वह सच में hi बहुत घट्टिया काम था. अब एक कैद पंछी के जैसे सब विचार उसने मैं में आने लगे थे..

पायल सिंह : गिरगिट भी इतने रंग नहीं बदलता होगा.. जितने रंग तुम सब बदलते हो.. विक्रम सिंह को देखते हुए.. चाचा जी आप भी तोह वहीँ थे न. आपने भी कुछ नहीं किया था मेरे लिए.. आप भी वहां जा कर बदल गए थे.. या शायद पहले से hi बदले हुए थे. तभी मुझे अपने साथ ले जाने के लिए फाॅर्स कर रहे थे. मेरा मंद डाइवर्ट करने के लिए बदले हालत का बखूबी फायदा उठा था आपने भी..

विक्रम सिंह भी सर झुका गया.. गार्ड्स विनय को लेकर अंदर जाने लगे तोह विनय राजा ठाकुर को देखने लगा.

पायल सिंह : परची तुम मेरे क़हर से बच नहीं सकोगी.. पहले विनय कुत्ते को देख लोन. फिर तुझे भी देख लुंगी मैं..

पायल सिंह कुछ देर में टार्चर रूम में जा पोहंची. विनय को उसके कहने पर ज़ंजीरो से बांध दिए गया..

पायल सिंह ने हंटर लिए और विनय की खाल उधेड़ने लगी..

पायल सिंह : विनय तूने वह सब करके मेरी आत्मा पर बहुत बड़ा घाव लगाया है. मुझे ऐसा दर्द दिए है. जिसके चलते मेरी रातों की नींदें हराम हो गई हाँ. सोच कर hi मुझे झटके लगने लगते हाँ. मैं इतनी भी गयी गुज़री नहीं थी, कितना सस्ता कर दिए था तुम सब ने मिलकर मुझे...

विनय बेचारा कोई भी जवाब देने की बजाये पुरे ज़ोर से चीख रहा था. उसके कपडे फट कर खून में नहाने लगे थे. हंटर लगने से जगा जगा उसके शरीर पर घाव बनने लगे थे..

कुछ देर पायल सिंह ऐसे hi विनय पर हंटर बरसाती रही.. पायल सिंह तब रुकी ताज किसी के ज़ोर ज़ोर से क्लैपिंग करने की आवाज़ें सुनाई देने लगी..

पायल सिंह ने रुक कर देखा तोह कुछ फासले पर उसकी दादी, रानी देवी, उसकी माँ रोहिणी सिंह और परिधि कड़ी हुई थी..

परिधि ृदीकुलौस्ल्य भाव चेहरे पर सजाये क्लैपिंग कर रही थी.. दादी और माँ भी परिधि को देख कर हैरान थी.. कितनी बदल गई थी परिधि.. कैसे अपनी दीदी का मज़ाक उदा रही थी...

परिधि : वाह्ह्ह! वाह्ह्ह! क्या बात है दीदी.. आपके हाथ में हंटर.. अपने साथ विश्वासघात करने वाले को सजा दे रही हाँ आप.. ज़बरदस्ती शादी करने पर विनय के शरीर पर कोड़े बरसा रही हाँ. विनय जो हमारा भाई भी है. क्या बात है दीदी. आप तोह फूलन देवी hi बन बैठी हाँ..

पायल सिंह परिधि को देख कर उसकी बातें सुनकर हंटर फ़ेंक गई.. ग़ुस्से से परिधि को देखते हुए बोली : मेरे साथ ऐसे अंदाज़ में बात मत किया कर..

परिधि : क्यों! सहन नहीं होती मेरी बातें आपसे दीदी. ओह्ह! मुझे खुद पर कण्ट्रोल बनाये रखना चाहिए.. कहीं आप ग़ुस्से में आ कर मुझे भी न मारने लगें..

पायल सिंह : maaaaaaaaaaaaa!! परिधि को समझा लें. सच में किसी दिन मैं खुद पर कण्ट्रोल भूल जाओं और वह कर जाऊं, जिसके बाद आप सब मुझे बुरा भला कहें. इससे कह दें, मुझे ऐसे शब्द सुनने की आदत नहीं है.

परिधि : किसी और को भी ऐसे hi ज़हरीले शब्द सुनने को मिले थे दीदी. परिधि को अचानक से hi याद आया तोह वह आगे बोलने से खुद को रोक गयी..

पायल सिंह : हाँ बोल! पूरी बात बोल न.. बता आगे क्या बोलने वाली थी तू..

परिधि : आगे मैं क्या बोलूंगी दीदी.. विनय को देखते हुए परिधि आगे बोली.. मुजरिम आपके सामने हाँ, फिर भी मुझसे पूछ रही हाँ. मैं क्या कहने वाली हों. जिन्हे सच जानने की छह होती है. वह तोह पहाड़ों को खोद डालते हाँ.

फिर अपनी माँ और दादी को देखते हुए.. पर किसी के अंदर पहाड़ खोदने की शक्ति hi नहीं होती.. अपनी काम हिम्मती का रोना रो कर, अपने hi किसी प्यारे को किसी के बनाये जाल में फँस कर दोषी मान जाते हाँ कुछ अपने प्यारे लोग..

परिधि वहीँ नहीं रुकी और वहां से चलती बानी..

रोहिणी सिंह की आँखों में आंसू आने लगे तोह पायल सिंह परिधि की बातों का मतलब समझने की कोशिश करने लगी..

वहीँ दादी भी कभी रोहिणी सिंह को तोह कभी पायल सिंह को देखने लगी..


{::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}

Margaret(Komal) ब्रेन मास्टर के खुफ़िआ ठिकाने से निकली तोह उसे देर हो चुकी थी..

रपो के तीनो अड्डे उदा कर कोमल ने जहाँ रपो का पूरा स्ट्रक्चर बिगड़ दिए था. वहीँ अपने लिए खतरों को और भी बढ़ा दिए था..

रपो का मैं हेडक्वार्टर कहाँ था. ये तोह अमेरिकन प्रेजिडेंट को भी नहीं पता था..

ब्रेन मास्टर को रपो का हेड बना कर रपो की पूरी ऑर्ग उसके कण्ट्रोल में दे दी गई थी.

र्रिचड को ब्रेन मास्टर बनाने वळून ने कुछ ऐसा सेटअप बनाया था. कुछ भी कहीं भी होता था तोह सारा रिकॉर्ड आटोमेटिक उन तक पोहच जाया करता था..

सभी कंट्रोल्स उनके पास नहीं थे. पर साडी जानकारी वह ज़रूर रखते थे. ऑर्ग को कण्ट्रोल करने के लिए डायरेक्ट सिस्टम उनके पास नहीं था. वह केवल richad(brain मास्टर) के पास हुआ करता था..

और ब्रेन मास्टर के खुफ़िआ ठिकाने पर कोमल ने जो कुछ भी किया था. वह साडी डिटेल कुछ स्पेशल किसम के हिडन कामर्स में रिकॉर्ड होकर आगे पोहंच प् रही थी.

कोमल की गुडलुक ये हुई थी. जिस समय वह ये सब कर रही थी. उस समय "जहाँ ब्रेन मास्टर के खुफिया ठिकाने का सारा रिकॉर्ड पोहंच रहा था" वहां कोई देखने वाला नहीं था.. वहां 24 हरष में 2 से 3 बार hi ब्रेन मास्टर से ऊपर के लोग उस रिकॉर्ड को देखा करते थे..

जैसा सब कोमल ने कर दिखाया था. ऐसा कुछ भी हो सकता है. किसी को भी उम्मीद नहीं था..

पर कोमल ने सब करके सबकी उमीदों पर पानी फेर दिए था.. देर से hi सही, पर वहां का रिकॉर्ड देखने के लिए कोई मौका पर पोहंच गया था..

देख कर उनसे स्पेशल अलार्म बजा दिए.. ये अलार्म कुछ सीनियर्स लोगों के लिए था.. जो अपने अपने ठिकानो पर सेक्रेटली रपो के हेड थे..

वह सब भी लाइव होकर ब्रेन मास्टर के ठिकाने पर कोमल को उसके चंडी के रूप को देखने लगे..

कोमल ने जो जो बोलै था. वह सब रिकॉर्ड हो गया था. उसके कहे सभी शब्द जान कर स्पेशल फाॅर्स को काम पर लगा दिए गया..

ये फाॅर्स ऐसे hi इमरजेंसी के राखी गई थी.. तीनो बेसेस तोह कोमल ने ब्लास्ट कर दिए थे. साथ में ब्रेन मास्टर के ख़ुफ़िया ठिकाने को भी डिस्ट्रॉय मोड पर सेट कर दिए था.

जितनी देर में सब ब्लास्ट होता.....

उतनी देर में वह सीनियर्स बैकअप के लिए बिजी हो गए..

साथ में कोमल के लिए, और दूसरे तीनो बेसेस से निकल चुके एजेंट्स के लिए भी बिजी हो गए..

कोमल जो नार्मल रहते हुए गाडी में बैठी हुई एक रोड से गुज़र रही थी. उसे एकदुम्म से कई गाड़ियों उसे फॉलो करते हुए दिखाई देने लगी..

कोमल सुपर एजेंट थी. पल भर में hi सब समझ गयी...

कोमल : ओह्ह्ह! तोह ये बात है. बड़ी जल्दी फॉर्म में आये गए रपो की स्पेशल फाॅर्स वाले.

चल इन्हे भी देखती हों..

देखते hi देखते शहर की सड़कें रेस का मैदान बन गयी.. ेकेलि कोमल के पीछे स्पेशल फाॅर्स के साथस साथ पुलिस की भी कई गाड़ियां लग चुकी थी.

सुपर एजेंट होने के साथ साथ कोमल माला की रे के कारण बहुत बदल चुकी थी. सोचने समझने और फैसला लेने की शक्ति पहले भी उसमे बहुत थी. अब और भी बढ़ चुकी थी.

कोमल रिलैक्स मूड के साथ गाडी ड्राइव लार रही थी. गाडी रपो से रिलेटेड थी. और गाडी के अंदर क्या कुछ था. ब्रेन मास्टर जनता था. या फिर कोमल..

दूसरा कोई और नहीं जनता था..

कोमल अंधी तूफ़ान बानी स्पीड के साथ गाडी ड्राइव कर रही थी. और गाडी आखरी स्पीड के साथ दौड़ रही थी. डैशबोर्ड खोल कर कोमल ने एक पिस्तौल निकला अपनी साइड का मिरर डाउन करते हुए पीछे की और हाथ करके एक साथ तीन फायर कर दिए..

पहला फायर कोमल के पीछे वाली गाडी के ड्राइवर के माथे पर लगा. दूसरा फायर फ्रंट बैक, दोनों मिरर को तोड़ता हुआ उससे भी पीछे वाली गाड़ी के ड्राइवर के सर में जा ghusa..teesra फायर अगली गाड़ी के आउट ऑफ़ कॉन्ट्रोल हो जाने के कारण उसकी बॉडी पर लग गया था...

फ़ौरन hi कोमल की गाडी पर फायरिंग शुरू कर दी गई..

कोमल : हाहाहा! करो, करो, जितनी चाहे फायरिंग करो.. ये स्पेशल गाडी भी तोह तुम रपो वळून की hi दें है. अब यही गाडी मुझे प्रोटेक्ट भी करेगी और तुम सबकी लाशें भी गिराएंगी..

शहर भर में सनसनी पहेली हुई थी.. रात का समय था और एक गाडी के पीछे कई पुलिस की गाड़ियां लगी हुई थी..

देखते hi देखते कई गाड़ियां तबाह होने लगी.. कोई भी कोमल को पकड़ नहीं प् रहा था.

कोमल वाली गाडी में पीछे और आगे को मशीन गन भी नसब थी.. कोमल कभी पिस्तौल या मिनी गन से बहार फायर करने लगती तोह कभी गाडी में लगी मशीन गन्स द्वारा फायरिंग करते हुए पीछा कर रहे एजेंट्स और पुलिस वळून को मारने लगती.

डेढ़ घंटे तक कोमल ने शहर भर में तबाही मचा कर रख दी थी.. एक हेलीकाप्टर भी कोमल को पकड़ने के लिए आया था.. जिसे पास आने से पहले hi कोमल ने हवा में hi ब्लास्ट कर दिए था..

कोमल : रपो वालो! बस तुम देखते जाओ. मैं करती क्या हों तुम सबब के साथ. अभी तोह शुरुआत है. आज पहले दिन है. ब्रेन मास्टर से और खुद से वडा किया था मैंने.. कभी भी रपो को फिरसे अपने पैरों पर खड़ा नहीं होने दूंगी..

अब कोई कोई गाडी hi कोमल के पीछे थी... कोमल भी अब रेस्ट करने के मूड में थी.. उसका ज़ख़्म भी अब दर्द करने लगा था..

वह अपने ख़ुफ़िया ठिकाने पर पोहंची.. 5 घंटे बाद वह एक नए रूप में, एक नयी आइडेंटिटी के साथ अमेरिका से उड़ान भर चुकी थी..

वह प्लेन में बैठी हुई फ्रांस जा रही थी.. वहां से उसे अपने देश जाना था. फ्रांस पोहंच कर वहां से फिर वह एक और नहीं नयी आइडेंटिटी के साथ इंडिया लौटने वाली थी..

रपो के सीनियर्स हथु से निकल चुके एजेंट्स को फिरसे अपने कण्ट्रोल में ले चुकी थी.. उन्हें नए बेसेस पर ट्रांसफर कर दिए गया था..

रपो का सारा सेटअप डिस्ट्रॉय हो चूका था. उन्हें बहुत समय लगने वाला था. फिरसे रपो को पहले जैसा बनाने के लिए..

जिस सिटी में margaret(komal) ने तहलका मचाया था. उस सिटी में आस पास के कुछ सिटीज में कोमल को स्पेशल एजेंट्स, पुलिस, और फबि के थ्रू ढूंढा जा रहा था.

लोगों के घरों में घुस घुस कर कोमल फंड आउट किया जा रहा था. पर वह वहां होती तोह मिलती. वह कबकी फ्रांस के लिए फ्लाई कर चुकी थी.

अगली शाम कोमल फ्रांस पोहंच कर अपने स्पेशल ठिकाने पर थी. एक दिन की रेस्ट करने के बाद वह इंडिया के लिए फ्लाई करने वाली थी..

रपो से लड़ने के लिए बहुत समय था उसका.. अपने देश से बरसों से दूर थी वह.. तोह अपने देश की मिटटी उसे खेंच रही थी अपनी और.. वह बिना देरी वहां पोहंच जाना चाहती थी..

कोमल तड़पने लगी थी अपने देश की मिटटी की खुशबु सूंघने के लिए. अपने देश की मिटटी को चूमने के लिए. अपने देश के लोगों से मिलने के लिए.. जहाँ उसके अपने भी थे..

कोमल एक नई फेस में आने के बाद बीएड पर लेट कर सो गयी...


{::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}

दक्ष : वाह्ह्ह्ह! क्या बात है. बड़ा hi स्वादिष्ट खाना बनाया है. खा कर तोह मज़ा hi आ गया...

ऋचा खुश हो गई... तोह चौकीदार की पत्नी होंठ भींचे स्माइल करने लगी. असल टास्ते तोह उसके हथुन का था. ऋचा भूल गई थी. मैं सब जान सकता हों. ऋचा खुद को आगे करते हुए सारा क्रेडिट ले रही थी..

रुपाली घुलमो के जैसे साइड कड़ी हुई मुझे खाते देख रही थी..

रुपाली : मालिक! आपने मुझे उठाया नहीं. वर्ण इससे भी अच्छा खाना आपको खाने को मिलता.. आपकी दासी खाना बहुत अच्छा बना लेती है.

दक्ष : तुम तोह और भी बहुत कुछ अच्छा अच्छा बना लेती हो..

रुपाली : मालिक की ज़र्रा नवाज़ी है.. वर्ण दासी की इतना औकात कहाँ.

दक्ष : क्यों ऋचा! तेरी माँ की औकात इतनी hi है या बढ़के है.

ऋचा सब समझते हुए : मैं क्या कहूं भाई.. ओह्ह सॉरी मालिक!.. आप मुझसे बेटर समझते हाँ.

मैं खाना खता रहा और दोनों मुझे सर्वे करती रही..

मैंने चैकीदार की पत्नी को देखा, जो आँखों में हैरत लिए देख रही थी.

दक्ष : नाम क्या है तुम्हारा..???

चैकीदार की पत्नी से मैंने पुछा तोह वह घबरा कर उठ कड़ी हुई.. मेरे होंटो पर मुस्कराहट आ गई.

वह : mmm..ww..jj..ji वो माला.

माला घबरा कर बोली तोह हसने लगा

दक्ष : ऐसे क्यों घबरा रही हो तुम.. आओ मेरे साथ मिलकर खाओ..

वह और भी घबरा गई. सोचने लगी, कहीं उसे खुद के करीब करने की कोशिश में तो नहीं हों.

हाहाहा.....

रुपाली की दुमदार चुदाई देख कर अभी तक दरी हुई थी..

दक्ष : जो देखा था वह सब सही नहीं था. तुम्हे डरने की ज़रूरत नहीं है.

वह पहले तोह मुझे प्रश्न भरी नज़रों से देखने लगी. मेरी बात का उत्तर उसकी समझ में नहीं आया था. पर जैसे hi उसे समझ आया तोह लाल पीली होकर सर झुका गई.. वह होल होल कांपने लगी थी. उसे लगा मई उसपर लाइन मार रहा हों..

हाहाहा...

मैं कोई जल्लाद थोड़ी न था.

न hi मैं ठरकी था. वह सुंदर नहीं थी. जवान भी नहीं थी. पर भरे जिस्म वाली थी. सेक्सी जिस्म वाली थी. उसे देख कर कइयों का इमां दोल जाता. पर मेरा नहीं दोल सकता था.

मैं उसके साथ मस्ती तोह कर सकता था. पर सेक्स नहीं..

दक्ष : घबराओ नहीं. जाओ अपने पति को बुला कर लाओ. मिलकर कहते हाँ.

वह बेयक़ीनी के साथ मुझे देखने लगी.

दक्ष : हाँ! जाओ बुला कर लाओ. तुम गरीब हो, कोई गिरे पड़े तोह नहीं. जल्दी से बुला कर लाओ. मिलकर कहते हाँ..

वह भाग कड़ी हुई.

जल्द hi वह अपने पति के साथ आती हुई दिखी.

चौकीदार : कैसी बात करती हों तुम माला. वह मालिक हाँ. हमें कैसे अपने साथ बेथ कर खाने को बोल सकते हाँ.

माला : पता नहीं जी. पर मुझे उनकी आँखों में देख कर लगा, वह दूसरे से अलग हाँ.

इतनी देर में वह अंदर थे.

चौकीदार : साब आपने सच में--

दक्ष : हाँ! मैं सही कहा था. जाओ हाथ धु कर आओ, फिर तीनो मिलकर खाना कहते हाँ. वह भी सुनकर हैरान हुआ था. फिर माला के साथ हाथ धु कर आया और कुर्सी पर बेथ गया..

दक्ष : रुपाली ये दोनों मेरे लिए ख़ास हाँ. तुम और ऋचा दोनों मिलकर उन दोनों को अच्छे से सर्वे करो.

ऋचा : पर..??

रुपाली : रीछा! मालिक ने कहा है तोह मानना हमारा धरम है. हम कोई भी सवाल नहीं कर सकती.

रुपाली सही मानो में घुलम बानी ऋचा के साथ मिलकर चौकीदार और माला की सेवा करने लगी..

दोनों खुश खुश खाने लगे. देर नहीं लगी और दोनों की आँखों में आंसू आयने लगे.

गलत समझे आप....

मिर्ची से आंसू नहीं आये दोनों की आँखों से.....

सम्मान और अपनापन मिले तोह भी आंसू बहने लगते हाँ. दोनों पति पत्नी जज़्बाती होकर आंसू बहते हुए, कहते हुए मुझे देखने लगे.

मुझे दोनों को देख कर बड़ा सुकून मिल रहा था. रुपाली और ऋचा को मेंटली टार्चर तोह हो hi रहा था. पर दो भले मानस लोगों को कुछ खुशियां भी मिल गई थी.

साथ में मुझे असीम शांति भी प्राप्त होने लगी थी..

खाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया.. वहीँ ऋचा और रुपाली भी कुछ देर में आ गई..

दोनों मेरे पाऊँ दाबने लगी..

मैं विकास के दिमाग में जा पोहंचा. जो अपने बहुत से पार्टनर्स के साथ मीटिंग में वेस्ट था...

सम्राट को लेके चर्चा चल रही थी..

विकास : सम्राट का कोई इंतेज़ाम करना पड़ेगा.. अगर वह हमारे दिमाग में घुसा तोह सब चौपट हो जायेगा. हम भी बुरे करम करने वाले हाँ.. अगर वह कभी हमारे पास पोहंच गया तोह सब बर्बाद हो जायेगा..

एक पार्टनर डरा सेहमा बैठा हुआ था वह बोलै : मैं तोह कहता हों, कुछ समय के लिए हमें सरे धंदे बंद कर देने चाहिए.. पता नहीं सम्राट क्या बाला है. कहीं ऐसा न हो हम सब भी मारे जाएँ..

एक जो उसके साथ hi बैठा हुआ था. वह बड़ा कुत्ता बाँदा था. बड़े कल्ट किये थे उसने. वह सम्राट नाम की दहशत में नहीं आया था. वह पहले वाले के कंधे पर ज़ोर का लाफा मारते हुए बोलै

"साला मेरे होते हुए भी तुम दर रहे हो. सम्राट है तो क्या, हम सब अपना धंदा छोड़ कर बेथ जाएँ"

कोई और उसकी हिमायत में बोलै : सही कहा तुमने. ऐसे बुज़दिलों की तरह से चुप बैठे रहे तोह कर लिया हमने धंदा..

विकास : बंद करो तुम सब अपनी बकवास.. क्या तुम सबने देखा नहीं था. सम्राट कितनी बुरी बाला है.. धनञ्जय ठाकुर और उसका पूरा परिवार, पूरा गैंग ख़तम होगया. मिनिस्टर मारा गया.. नारायण मिश्रा जैसा बिज़नेस टीकों मारा गया..

अब्ब भी तुम कह रहे हो. सम्राट से डरने की ज़रूरत नहीं है. कर hi क्या सकते हो तुम. सम्राट एक भयानक बाला बनकर नाज़िल हुआ है. नहीं जानते, वह कब और कहाँ पोहंच जाए. कोण कोण इसकी पकड़ में आता है. और क्या क्या करता है...

वह सबसे पहले पार्टनर डरा था. वह एकदुम्म से अपनी जगा से उठा खड़ा हुआ.. अब वह घबराया हुआ नहीं दिख रहा था. उसके साथ बैठा जल्लाद सिफत गुंडा देख कर कुछ हैरान हुआ.

"सही कहा तुमने vikas...tum या कोई भी कुछ नहीं कर sakta..main सच में hi एक भयानक बाला हों. जहाँ भी जाता हों, तबाही पहला देता hon..koi नहीं जनता, मैं कब कहाँ और कैसे पोहंच सकता हों.."

विकास और कई दूसरे बहुत ज़यादा दर गए तोह साथ बैठा हुआ गुंडा उसे घोरसे देखने, सुनने लगा.

अचानक से hi उसने पिस्तौल निकला और जिसके अंदर मैं था. उसके सर में गोली मार दी..

साले ने एकदुम्म से अचानक किया था. मुझे क्या होना था. मैं जिसके अंदर था. उसके सर में गोली घुसी तोह वह मोके पर hi मर गया..

मैं उसके अंदर था.. अचानक से उसके सर में गोली उत्तरी तोह मुझे भी एक शदीद झटका लगा था..

बड़ी हैरत की बात थी ये मेरे लिए.. ऐसा पहले मैंने फील नहीं किया था.. मैं खुद को नार्मल करते हुए फिरसे वहीँ जा पोहंचा..

"देखा सम्राट कुछ नहीं कर सकता.. देखा कैसे भगा दिए मैंने उसे"

वह अपनी मूछों को ताओ देते हुए बोलै.. मैं उसके दिमाग में घास और उसे किसी हद तक अपने कण्ट्रोल में ले लिया..

जहाँ वह अपनी मूछूँ को ताओ दे रहा था. वहीँ उसका दूसरा hath"jis हाथ में गन थी" उसकी कनपटी पर जा लगा..

सब देख कर शॉकेड हो गए..

मैंने उसके दिमाग को और भी ढीला छोड़ा तोह वह अपनी कनपटी पर अपना hi पिस्तौल देख कर घबरा गया..

फ़ौरन पिस्तौल को अपनी कनपटी से हटा लेना चाहता था. पर ऐसा कर नहीं प् रहा था..

वह अब देहशान्त में आने लगा..

वो : nn..nahi..nahi..SAMRAT.. pp..plz मुझे शमा कर दें. मैंने आपकी शान में गुस्ताखी की है. मैं भूल गया है. आप तोह सम्राट हाँ. और सम्राट सबसे बढ़ कर होता है.

मैंने उसे आज़ाद छोड़ दिए. पिस्तौल उसके हाथ से छूट कर निचे गिर पड़ा..

वह नार्मल होकर खुश हो गया. उसे लगा मैंने उसे माफ़ कर दिए है.. उसके साथ खड़े हुए के व्यक्ति ने कुर्सी उठा कर पूरी ताक़त से उसके सीने पर मार दी..

वह उछाल कर दूर जा गिरा..

सम्राट.... साले तू क्या समझा था. तेरे जैसे चूतियों को मैं छोड़ दूंगा.. कभी नहीं. तुझ जैसो को छोड़ दिए तोह और कई घर बर्बाद हो जायेंगे.. तुम लोगों का धंदा है न. देश के मासूम बच्चू को किडनैप करना. इज़्ज़तदार बेटियों को किडनैप करके बेचना. उन्हें धंदे पर लगा देना..

थूऊऊऊऊ.. पैसो के लिए अपने hi देश को खोखला कर रहे हो तुम..

कुर्सी वाला पार्टनर फिरसे कुर्सी लिए उसपर टूट पड़ा.. वह क़ातिल बहुत एक्सपर्ट भी था. पर मेरे आगे उसकी नहीं चल सकती थी..

बड़े करतब दिखा कर वह खुद को कुर्सी की मार से बचने की कोशिश कर रहा था.. एक समय पर विकास वहां से भागने लगा तोह कुर्सी हवा में उड़ती हुई उसके ऊपर का गिरी.. वह चीखता हुआ निचे गिर पड़ा और दर्द से कराहने लगा..

इतनी देर में पहले जिसे कुर्सी से पीट रहा था. वह पिस्तौल उठा कर पार्टनर को शॉट कर चूका था..

मैंने फिरसे उसे कण्ट्रोल में लिया और पिस्तौल उसकी कनपटी पर जा लगा. वह फिरसे दहशत में आ गया. वह फिरसे चिल्लाना लगा..

एक्दम्मम से पिस्तौल फिरसे उसके सर से अलग हुआ और दूसरे पार्टनर्स के सीनो की और होते हुए उन्हें शूट करता चला गया..

पिस्तौल खली हुआ तोह क़ातिल ने पिस्तौल फ़ेंक दिए और विकास के पास जा क्र बेथ गया..

"विकास बाबू, बड़ा पैसे कमा लिया है न तूने.. कितने बच्चू को, बेटो को बेटियों को तूने अपने परिवार से दूर किया है. जनता है.. नहीं जनता तू.. भूल चूका है तू सब.. चल तुझे एक सबक़ देता हो मैं..

क़ातिल ने विकास में मोह में हाथ कर उसकी ज़ुबान खेंच दी. पूरी ज़ुबान hi विकास में मोह से अलग होते हुए क़ातिल के मोह में आ गई.

"विकास तुझे अब मैं मरने नहीं दूंगा.. तू पल पल मरेगा.. जितना पैसे तूने कमाया है न.. वह अब तेरे काम नहीं आएगा. आएगा तोह केवल तेरे इलाज के लिए. तू अब मरेगा नहीं.. तू पल पल तड़पेगा अपने बच्चू के लिए.. तेरी पत्नी मारेगी तोह तेरे बेटे, बेटियां सदा के लिए तुझसे दूर हो जायेंगे.."

विकास जो अपनी ज़ुबान खो कर चीख रहा था. अपने अंजाम को जान कर उसकी आँखों में इल्तिजा आ गयी.. वह ऐसा भयानक अंजाम अपने लिए नहीं चाहता था..

मुझे उसपर रेहम तोह आने से रहा..

क़ातिल ने पहले विकास को वहां से निकला.. उसे एक जगा छोड़ कर ाबमुलेन्स के लिए कॉल कर दी..

वहीँ एक ऊंची बिल्डिंग की छत पर चढ़ कर क़ातिल ने छलांग लगा दी..

खास काम जहाँ पाक.....

उसी रात मैंने विकास के बच्चू के ब्रेन अपने कण्ट्रोल में लेकर वाश कर दिए.. उन्हें ऐसी मेडिसिन के उसे करने का आर्डर दे दिए.. जिसके कारण कुछ hi समय में उनकी याददाश्त चली जाती.

विकास की पत्नी भी उसके बुरे कर्मो की साथी थी.. उसे भी अपने ट्रांस में लेकर मैंने कुछ दिन विकास के देवा करते रहने के बाद सुसाइड का बोल दिए..

विकास का भी अंत हो चूका था..

जितने भी पार्टनर्स मैंने मारे थे. सबके दिमाग से मैंने ज़रूरी इन्फो निकल ली थी...

वह मैंने अपने पास मौजूद एक पेपर पर लिख डाली थी..

षिमुना को वह साड़ी इन्फो दे दी मैंने.. षिमुना फिरसे उसी ईमानदार पुलिस में घुसी और हाई लेवल पर मटर को लाते हुए मेजर ऑपरेशन की मांग करि..

देखते hi देखते कुछ घंटों में सेंकडो बच्चे, उन ठिकानो से बरामद क्र लिए गए..

मीडिया ने इस बार बड़े अच्छे अंदाज़ में इस सभी घटना को लाइव दिखाया था..

एक hi दिन में पुरे देश में नजाने क्या कुछ हो गया था..

स्कूल वाला मटर.. टेर्रोरसिट्स को मार कर संजना माँ पुरे देश को मिल गयी थी..

सम्राट इंडिया से है, सब कान कर बहुत खुश हुए थे..

वहीँ क्वीन भी इंडियन है, ये जान कर सब और भी खुश हुए थे..

दो दिन पहले बहुत से बच्चे और लड़कियां मिले थे तोह आज के दिन और भी कई मासूम बेटे अपनी माओं के पास जा पोहंचे थे.. बहुत सी इज़्ज़तदार बेटियां अपनी इज़्ज़त लुटाते से बच गई थी. वह अपने परिवार में शामिल हो गई थी..

जहाँ बहुत से दुष्ट पापियों का अंत हुआ था. वहीँ बहुत सी खुशियां भी देश वासियों को मिल गयी थी..

कुल मिला कर आज का दिन देश भर के लिए सुर्प्रिसिंग रहा था.

खुशियों से भरपूर बन गया था..

चरों और खुशियां hi खुशियां पहेली हुई थी. पुरे देश में लोग जगह जगह खड़े होकर इस बारे में चर्चा कर रहे थे..

तोह बहुत से टीवी के सामने बैठे हुए लाइव चर्चा सुनकर अपने अपने विचार पेश करने में लगे हुए थे..

आज के जो कुछ भी उन्हें देखने सुनने को मिला था. वह कैयो दिनों तक के लिए एक बेस्ट टॉपिक बनकर रह गया था..

दुःख के बाद खुशियां मिलती हाँ तोह खुशियों के बाद दुःख मिलते हाँ....

जहाँ पूरा देश खुशियां मन रहा था.. वहीँ बहुत से पापी पालननिंग में लगे हुए थे.. ऐसे तोह वह जी नहीं सकते थे. सम्राट का कुछ न कुछ तोह करना hi था...

मिनिस्टर मारा था...

धनञ्जय ठाकुर मारा था...

नारायण मिश्रा और उसके परिवार के मर्द मरे थे...

विकास मारा था, उसके साथ साथ और भी बहुत से विकास के पार्टनर्स मरे थे.

एक पार्टनर एक ऊंची ईमारत से कूद कर मारा था..

बहुत कुछ हुआ था आज के दिन...

जिन्हे दुःख पोहंचा होता है. वह किसी की ख़ुशी सहन नहीं कर सकते.....

जितनी खुशियां एक hi दिन में देश को मिली थी.. लगता था. जल्द hi बहुत से ग़म भी उन्हें मिलने वाले हाँ...

जहाँ बहुत से देश के गद्दार देश के खिलाफ पालननिंग करने में लगे हुए थे..

वहीँ......

रपो जो कोमल पर बहुत ज़यादा ग़ुस्से थी.. कोमल इंडिया से थी.. क्वीन और सम्राट भी इंडिया से थे..

कोमल के साथ साथ क्वीन और सम्राट भी रपो वळून के लिए वांटेड हो गए थे.. वह भी अब चैन से नहीं बैठने वाले थे.

बाओ के दो प्लेन के साथ साथ बहुत से बेस्ट एजेंट्स भी मारे गए थे.. वह भी बड़े दुःख में थे..

उन्हें भी किसी करवट चैन नहीं था.. वह भी बदला लेने के लिए, अपनी पावर को बढ़ने के लिए प्लानिंग में लगे हुए थे...

इंडिया में एक hi दिन में जितने भी बुरे लोग मरे थे.. वह डायरेक्ट या इंदिरेक्ट किसी न किसी ऑर्ग से जुड़े हुए लोग थे.. और ऑर्ग वाले ऐसा लोस्स सहन नहीं कर प् रहे थे..

जिन जिन का भी लोस्स हुआ था.. वह सब के सब बेहद ग़ुस्से में आये हुए थे...

सबका ग़ुस्सा मिलकर एक बहुत बड़े तूफ़ान का रूप धारण कर सकता था...


.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
 
♥️♥️

♥️♥️♥

:हहै:

♥️♥️

:thank_you:

सभी ओप्तिओंस बारे सोच गई ऋचा.. मैं से घुलम बन के रहने में hi उसे भलाई दिख रही है

परिधि को भी चैन नहीं है. अब उसे बोलने का मौका मिला है तोह खूब बोलने लगी है

😃

नागिन पर भरोसा करेगा तोह मारा जायेगा.. नागिन का दसा तोह पानी भी नहीं मांग सकता

let's सी टुगेदर

ये बात तो है

चाचा की

👌

🙏🙏

पॉलिटिशियन है तोह खेल तोह खेलेगा hi..

ये तोह पक्की बात है. पावर बढ़ जाने से मेंटली पावरफुल भी हो जाना आसान नहीं है. फैसले लेना आसान काम नहीं है. म्हणत भी करनी पड़ेगी और समय भी लगेगा.

जितना सोच सकती थी. उतना सोच गई थी. सब यही करेगी तोह सम्राट फिर क्या करेगा

वह बोलते हाँ न.. मर्द, मर्द hi होता है..

बहुत बहुत शुक्रिया भाई.. 🙏🙏👌👌👏👏
 


Episode
:38


कोमल अपने सीक्रेट हाउस में बने एक विप रूम के एक विप बीएड पर सो रही थी..

उसे सोये हुए 3 घंटे hi हुए थे. अचानक से उसकी आंख खुल गई. कोमल वाल क्लॉक को देखते हुए सोचने लगी. अचानक से कैसे आंख खुल गयी. वह तोह इतनी जल्दी उठने के मूड में नहीं थी.. वह तोह अपनी मंद में टाइम सेट करके सोई थी.

ये सब सोचने में कोमल में एक लम्हा hi लगाया था. दूसरे hi शान वह बीएड से कूद पड़ी. और रूम को चरों और से देखने लगी. एक hi चक्कर में उसे सब समझ आ गया था.

कोमल दूर की निचले हिस्से को देखने लगी. जहाँ से एक पाइप की नाली अंदर घुसी हुई थी. और कोई गैस उस नाली से बहार आ रही थी.

उसी गैस की हलकी सी आवाज़ पर वह उठ गयी थी.. कोमल ने फ़ौरन से भी पहले अपनी सांस रोकी.. चलती हुई एक अलमारी के पास पोहंची. उसके अंदर से फॉस्फोरस बम निकला.. और 3 मिंट का टाइम सेट कर दिए..

फ़ौरन hi वह फिर अपना ज़रूरी सामान समेत कर बीएड के निचे .. वहां फर्श को दबाया तोह 2 स्क्वायर फुट का एरिया बिना आवाज़ किये वहां से सरकने लगा.. कोमल उसी जगा से निचे उत्तरी. फिर एक हैंडल घुमा कर वापिस से फर्श को बंद कर दिए..

निचे स्ट्रिस जा रही थी. कोमल बड़ी स्पीड के साथ स्टैर्स उतरती हुई निचे जाने लगी..

रपो के एजेंट्स दुन्या भर में पहले हुए थे. सभी को काम पर लगा दिए गया था. कोमल ने अपने हिसाब से तोह अपने सभी अड्डे सीक्रेट hi रखे हुए थे. पर कोनसा उसका ठिकाना रपो की नज़रों में आ चूका था. वह नहीं जानती थी.

रपो के 12 एजेंट्स इस समय कोमल की सीक्रेट ठिकाने पर थे.. कोमल का ये ठिकाने पेरिस के बहरी साइड पर था. हाउस के सामने रोड था. रोड की दूसरी साइड में वरन एरिया था.

लेफ्ट साइड में 20 फ़ीट की दूरी पर मकानों का सिलसिला शुरू हो जाता था. राइट साइड में 50 फ़ीट तक कोई हाउस नहीं था..

डियर से hi सही पर रपो कोमल के बारे में जान गई थी..

कोमल का पता चलते hi उसके रूम में बेहोश कर दी जाने वाली गैस स्प्रे की जाने लगी थी. कोमल कितनी खतरनका एजेंट है. सब hi जानते थे. इसलिए उसे बेहोश करके hi काबू में कर सकते थे..

जैसे hi उन्हें लगा अब अंदर कोमल बेहोश हो चुकी होगी.. तोह एक एजेंट ने लॉक में वायर दाल कर लॉक खोल दिए.. लॉक बिना आवाज़ के खुला था.

इतने hi एक्सपर्ट थे रपो के एजेंट्स.. जैसे hi वह अंदर घुसे तोह रूम को खली देख कर वह चौंक गए..

"वह कहाँ गई.. हमारी इन्फो के मुताबिक़ तोह वह यहाँ आने के बाद कहीं नहीं गई थी"

"चलो देखते हाँ"

अभी उसने इतना hi कहा था.. टाइमर पर सेट किया हुआ फॉस्फोरस बम पहात गया.. पुरे रूम में आग लग गई. दोनों एजेंट्स जो रूम में घुसे थे. आग की लपेट में आ गए..

वह चीखने चिल्लाने लगे.. दूसरे एजेंट्स जो पोसिशन्स पर मौजूद थे. उनमे से 4 रूम की और भागे..

कोमल जो ख़ुफ़िया रस्ते से होती हुई रोड की दूसरी साइड वेरने में मौजूद एक पेड़ के बीच में से बहार निकली थी.. पेड़ के रस्ते को क्लोज करके वह इधर उधर देखने लगी.

कोमल आते हुए अपनी तैयारी भी कर गई थी. उसके हाथ में दो सीलेंसर लगे पिस्टल्स थे.. वह दबे पाऊँ सड़क की और बढ़ने लगी. सड़क क्रॉस करके वह अपने घर में जाना चाहती थी. वहां मौजूद एजेंट्स को मार देना चाहती थी.

पर एकदुम्म से hi उसे निचे गिर जाना पड़ा था.

ऐसा उसने खुद से किया था. उसकी 6तह सेंस ने उसे वारं किया था. कोमल जैसे hi निचे गिरी एक बुलेट उसके ऊपर से गुज़र कर आगे उसके हाउस की दीवार से जा टकराई थी..

कोमल ने एक साथ दो काम किये..

लेते लेते hi उसने पलट कर फायर भी कर दिए और क्रॉडिले मूव द्वारा बड़ी स्पीड के साथ एक जगा से दूसरी जगा जाने लगी..

जैसे hi उसके पिस्तौल से गोली निकली थी.. फ़िज़ा में किसी की चीख गूंज गई थी. कोमल का निशाना बड़ा पक्का था. एक पल में hi वह रपो एजेंट की लोकेशन फंड करके फायर कर गई थी. और उसके पिस्तौल से निकली गोली ने उसे धोका भी नहीं दिए था..

इसके साथ जिस जगा रहते हुए कोमल ने फायर किया था. कोमल के अपनी जगा छोड़ते hi कई गोलियां उस जगा पर आ कर लगी थी.

एक साथ कई गन्स के भयंकर शोर के कारण वह एरिया गूँज उठा.. एक साइड में बने हुए हाउसेस में लाइट्स ों होने लगी..

कोमल : मरने को आ hi गए हो तोह मुझे भी तुम सब को मौत देकर ख़ुशी hi मिलेगी रपो के कुत्तो.. कोई भी ज़िंदा नहीं बचेगा मेरे हथु.. आज नहीं तोह कल एक एक को चुन चुन कर मारूंगी..

कोमल सबकी नज़रों से ओझल हो चुकी थी. रपो एजेंट्स कोमल को ढूंढ़ने में लगे थे.. अंदर जिन एजेंट्स को आग लगी थी. वह जल कर कोयला बन चुके थे. आग बुझाने का इंतेज़ाम करके वह नहीं आये थे..

और फिर कोमल के साथ होने वाली फायरिंग ने भी उन्हें सब भुला कर कोमल के साथ लड़ने पर मजबूर कर दिए था...

कोमल बीस फ़ीट दूर एक और पेड़ की ारः में होकर सबको देखने लगी..

वहां जितने भी एजेंट्स थे. कोमल सबको एक नज़र देख कर दोनों पिस्टल्स को फायरिंग मोड पर लाते हुए भाग कड़ी हुई..

3 सेकंड बाद वह फिरसे गिर पड़ी थी.

इस बीच उसके पिस्तौल से 6 गोलियां निकल चुकी थी. वेरने में एजेंट्स भी इतने hi थे..

एक hi झटके में कोमल ने सबको शूट कर दिए..

कोमल 9 को मार चुकी थी. अब कोमल को कोई और एजेंट दिखाई नहीं दे रहा था. दूर बहुत दूर पुलिस गाड़ियों के साईरन की ौज़ें भी सुनाई देने लगी थी..

कोमल ने बाकि बचे एजेंट्स को मरने का इरादा तारक कर दिए.. कोमल ने वहां से निकल जाना सही समझा..

कोमल : ले लो जितनी साँसे मिल रही हाँ, अपने फेफड़ों में उतार लो.. जल्द hi मैं वह साँसे ख़तम करने के लिए मैदान में उतरने वाली हों. अभी मुझे अपने देश जाना है. मेरे देश की मिटटी मुझे बुला रही है. जल्दी न होती तोह रपो का कोई भी कुत्ता मैं ज़िंदा नहीं रहने देती..

कोमल वहां से निकल पड़ी.. कुछ घंटों बाद उस प्लेन में बैठी इंडिया के लिए रवाना हो चुकी थी..

वहीँ रपो के बड़े सर पकडे बैठे हुए थे.. कोमल को सुपर एजेंट बनाने के लिए कितना कुछ किया था.. अब वह सुपर एजेंट बनकर उनको hi तिगनी का नाच नचाये हुए थी.

सभी बड़े एक दूसरे को देख नहीं सकते थे.. ओनली टेक्स्ट द्वारा hi एक दूसरे से राब्ते में रहते थे..

एक दूसरे के सामने होते तोह ज़रूर एक दूसरे का मोह तकते रह जाते..



{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}






अलका जिस आइलैंड पर पोहंची हुई थी..




वहां....

पिछले 3 महीने से कुछ रॉ एजेंट्स फंसे हुए थे.. अलका को वहां उन्ही रॉ एजेंट्स को बचने के लिए hi भेजा गया था..

अलका इस बारे कुछ नहीं जानती थी...

वह नार्मल चाल चलते हुए आगे बढ़ रही थी.. 1 घंटे बाद उस आइलैंड पर हूटर की आवाज़ सुनाई देने लगी.

अलका समझ नहीं पाई, ये अलार्म किश मकसद के लिए बज रहा है.. उसका ऐसा कोई एक्सप्रिएंस नहीं था.. वह नहीं समझ सकीय ये कोई गैंगस्टर्स एरिया भी हो सकता है..

अगले बीस मिनट्स के बाद अलका हैरातो के समुद्र में डूब रही थी, तैर रही थी.

माला के कारण अब उसे दर नहीं लगता था. माला न होती तोह ज़रूर वह दर जाती..

अलका अपने सामने कई जंगली लोगों को देख रही थी. आधे नंगे, अलग अलग रंगों से रेंज जंगली अलका के सामने थे.. अलका सब को देख कर हैरान थी.

जंगली जो बनावटी जंगली थे. एक ऑर्ग से रिलेटेड थे. अपने ठिकाने को सेफ रखने के लिए ऐसे रूप में सामने आया करते थे.. अलका को डरा हुआ न देख कर हैरान हो गए. उनके हथु में लोहे के भले थे..

60 के करीब जुंगलियो में एक लीडर भी था.. वह अजीब सी भाषा में अपने साथियो से कुछ बोलै तोह सबके सब अलका के गिर्द घेरा दाल कर घेरा को तंग करने लगे.. अलका तोह बस सब को देखती hi रह गई थी..

कुछ देर में बहुत से भले अलका के शरीर के साथ लग चुके थे. फिर अलका को ऐसे hi घेरे में एक साइड ले जाय जाने लगा.. अलका भी कुछ सोच कर सुकून से उनके साथ जाने लगी.

जब लोहे के नोकदार भले उसके शरीर से मास्स हुए थे तोह अलका को न तोह कोई ज़ख़्म आया था और न hi दर्द का एहसास हुआ था.

ये जान कर अलका ने माला को थाम लिया था. माला की एक और खासियत अलका को मालूम पद गई थी..

20 मिंट बाद अलका को एक जंगली पत्तों से बानी बस्ती में पोहंचा दी गया.. वहां और भी बहुत से जुन्गील मौजूद थे..

अलका सब को देख कर हैरान हुई.. उनका रहन सहन भी किसी अफ्रीकी कबीले जैसा hi था. पर वह सब सूरत से अफ्रीकी नहीं थे.

अलका के गले में मौजूद माला बेरंग हो गई थी. देखने से वह आम सी माला दिखाई देने लगी थी. किसी जंगली ने भी माला की और धयान नहीं दिए था..

वहीँ एक लकड़ी के मोठे मोठे तनो से बड़ी एक झोंपड़ी में अलका को कैद कर दिए गया.. तनो के बीच में से अलका को बहार का सब दिखाई दे रहा था. अलका बहार का व्यू देखने लगी..

जैसे hi सब अलका को बंद करके वहां से गए तोह माला फिरसे चमकने लगी..

अलका को कुछ आवाज़ें सुनाई देने लगी..

"विनोद कब तक हम यहीं फंसे रहेंगे.. हमें जल्द hi यहाँ से निकलना होगा"

ऐसी आवाज़ आई, जैसे विनोद ने अपने साथी के होंटो पर ऊँगली रख दी हो..

कुछ देर ख़ामोशी छै रही.. फिर धीरे से आवाज़ सुनाई दी..

विनोद : शेखर! पहले भी कहा है तुमसे कहा है. ऐसे hi कोई भी शब्द मोह से मत निकला करो.. पहले डिवाइस को ऑफ कर दिए करो. हमारी साडी बातें रिकॉर्ड हो रही हाँ. हमारे लिए हमारी ज़िन्दगी से भी बढ़कर है, हमारा मिशन..

टोटल 5 एजेंट थे.. जो आइलैंड पर कैद थे..

vinod..varun..subhash..shekhar और अजय..

शेखर : सॉरी यार! क्या करूँ. महीनो से सूरज भी देखने को नहीं मिला.. तबियत में कुछ चिड़चिड़ा पैन आ गया है.

विनोद : जल्द hi हम यहाँ से निकलेंगे..

वरुण : हमें किसी भी हाल में दुश्मन को अपने मकसद में कामयाब नहीं होने देना है.

अजय : देश के लिए तोह हमने पहले दिन hi मर मिटने की सौगंध खा ली थी. जान की परवा क्या करनी.

सुभाष : हमें किसी भी हाल में वह पार्ट्स लेकर अपने देश लौटना होगा.. नहीं तोह हमारे देश का बहुत बड़ा नुकसान हो जायेगा.

ष्शठ्ठ-------

किसी की आवाज़ आई.. उसके बाद जैसे फिरसे ख़ामोशी छा गयी.. माला भी फिरसे बेरंग हो गयी थी.

अब अलका को सब समझ में आने लगा था.. क्यों वह अनजान व्यक्ति उसे इस आइलैंड पर छोड़ गया था. क्यों माला के कारण अलका को अपने hi देश के कुछ एजेंट्स की आवाज़ें सुनाई दे गयी थी.

अलका सब जान कर बहुत खुश हुई. उसे अपने देश की सेवा करने का मौका मिल रहा था. अपने देश के जानिसार एजेंट्स को बचने का मौका मिल रहा था. देश के लिए ज़रूरी पार्ट्स देश में पुहंचने में वह देश के सैनिको की मदद करने जा रही थी.

ये जान कर अलका बहुत खुश थी.....



{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}



एहहहहहए!!




दक्ष : बड़े दन्त निकल रहे हाँ तुम्हारे.

षिमुना : क्या करूँ दक्ष. तुम सामने होते तोह मेरे दन्त और भी ज़यादा दीखते.. चमकदार भी तोह बहुत हाँ न.. दिखते रहने को मैं करता है mera..hehehe

दक्ष : बस! बस! खुश तोह ऐसे हो रही है. जैसे दन्त न हुए, रेयर मोती हो गए.

षिमुना : ेहेहेहे! मोती नहीं है मेरे दन्त. पर रेयर तोह हाँ. पूरी धरती पर किसी के भी ऐसे दन्त नहीं दिखेंगे. मैं निमुन्निसा से हों न.. तोह मेरे दांत भी निमुनिका के हाँ..

दक्ष : हाहाहा! लो मैं है दिए.. अब खुश.

षिमुना : हसी तोह तुम्हारी अब निकलती hi रहेगी. हंसी की आवाज़ के साथ साथ और भी कई किसम की आवाज़ें सुनाई देंगी तुम्हारे वजूद से.. बस पांचू के एक साथ होने की देर है. जब पांचू एक साथ हो जायेंगे तोह फिर देखना, सब मिलकर तुम्हारी कैसे दुर्गत बनती हाँ.

दक्ष : मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं होने वाला. भूल है तुम्हारी.. मैं hi नहीं बदला, मेरे अंदर का भी सब बदल गया है. पांच क्या, अब तोह 50 भी आ जाएँ तोह भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला.

षिमुना : तुम एक बार मेरे सामने तोह आओ, फिर बताती हों तुम्हे. कोई फ़र्क़ पड़ता भी है कह नहीं.

दक्ष : मज़े लेते हुए) कसम से जबसे तुमने मेरी इच्छा पूरी करने के लिए कसम खाई है न.. तब से तुमसे milne...........ke लिए बेताब होने लगा हों.........

आखरी 6 शब्द मुझे अपने रूम में एक्टिव रहते हुए बोलने पड़े थे. षिमुना ने साँस रोक कर मुझे अपने दिमाग से भगा दिए था.. हाहाहा

मैं फिरसे उसके दिमाग में जा घुसा

दक्ष : हाहाहा! ऐसे भगा कर क्या हासिल कर लोगी तुम.

षिमुना : दक्ष! तुम सच में बड़े कमीने बन गए हो. जब देखो, एक hi बात की रत लगाए रखते हो.

दक्ष : हाहाहा! क्या करूँ, तुम--

षिमुना : अब और बकवास नहीं.. समझे तुम.. वर्ण मुझे फिरसे सांस रोक कर तुम्हे भागना पड़ेगा.

दक्ष : ठीक है.. ठीक है.. अब नहीं kar..ta bak..waaas.

षिमुना : वैसे कैसा लगा था तुम्हे संजना और क्वीन के दिमाग में जा कर.

दक्ष : मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा.. मुझे फर्क पद भी कैसे सकता है. मैं तोह सिचुएशन जानने के लिए "वह दोनों स्ट्रेंज गर्ल्स हाँ" ये जान्ने के लिए उनके दिमाग में घुसा था. पर वहां जा के पता चला वह भी पवित्र आत्माये हाँ. तोह मैं फिरसे नहीं गया उन दोनों के दिमाग में.

षिमुना : जाना चाहिए था तुम्हे. उन्हें बात करो, hello हाय करो. उनके बारे में जानो. कुछ अपने बारे में बताओ. मिलने का बोलते----

दक्ष : बस! बस! मेरी भुलझडी.. मिलने के लिए एक तुम हो न मेरे पास. अब तोह रुपाली भी है. ऋचा भी है. तीन तीन काफी हाँ मज़े करने के लिए मेरे पास.

षिमुना : फिरसे बकवास शुरू कर दी न तुमने. मैं तुम्हारे साथ तुम्हे मज़े देने के लिए हों क्या..?? और ऋचा रुपाली को तुम्हे अपने मज़े के लिए रखा हुआ है, या बदले के लिए.

दक्ष : लो अब खुद hi बदल रही हो. भूल गई क्या.. टेम्पल की लास्ट निंगहत हमने जो मज़े किये थे.. अब हम दोनों एक लेवल पार कर hi चुके हाँ तोह आगे के लेवल्स क्यों अधूरे छोड़ने. अब खेल शुरू हुआ है तोह नयी नयी दुन्येन डिस्कवर करेंगे.

षिमुना : पहले की बात और थी दक्ष.. सच कहूं तोह जबसे मैं चेंज हुई हों, मेरे अंदर भी बहुत से बदलाव आ गए हाँ.

दक्ष : मुझे बदली हुई षिमुना नहीं चाहिए, समझी तुम.. पहले वाली षिमुना बनकर मिलो तोह अच्छा होगा.. नहीं तोह--

षिमुना भड़क उठी : नहीं तोह क्या..?? हाँ बोलो.. जवाब दो.

दक्ष : हाहाहा... हे साली तू तो मेरी लुगाई बांके मुझपर hi चढाई करने लगी है. काटने लगी है. बिल्ली है या कुत्तिया.

षिमुना : ेहेहेहे! लुगाई तोह मुझे उपरवाले ने तुम्हारी बना hi दिए है दक्ष.. तुम जितना भी भाग लो. अब मुझसे तोह बच नहीं सकते. बिल्ली हों कह नहीं हों, कुत्तिया हों कह नहीं हों. नहीं जानती..

दक्ष : तोह फिर तुम इलू इलू के लिए रेडी हो न..

षिमुना : हाँ! बिलकुल रेडी हों न मैं. तोह कब पोहच रहे हो हवेली.

दक्ष : क्या बात है. लगता है मेरी खूब सेवा करने के मूड में हो तुम.

षिमुना : हाँ! क्यों नहीं! सेवा तोह अब मेरे नसीब में लिखी जा चुकी है. तुम बस पोहंचु सही. फिर करती हों न मैं तुम्हारी सीएवववा..

दक्ष : साली! तुम कुछ ज़यादा hi रंग नहीं बदलने लगी हो.

षिमुना : जब मिलोगे तोह दिखाऊँगी, कितने रंगों में ढल चुकी हों मैं.

कुछ देर और षिमुना से बात करने के बाद मैं उसके दिमाग से निकल आया.

षिमुना से बात करके मूड बहुत अच्छा हो जाया करता था मेरा.. षिमुना सच में बहुत हटके लड़की थी. बड़ी चुलबुली, बड़ी नटखट और मज़ाकिया लड़की थी. अब तो कई और रंग भी उसमे आ गए थे..

षिमुना से बात करि तोह मुझे मार्गरेट और wang-zhi दोनों की याद आ गई. उस इंसिडेंट के बाद मुझे मार्गरेट के दिमाग में जाने का समय नहीं मिला था. टेम्पल से निकलने के बाद मैंने wang-zhi से राब्ता नहीं किया था.

राब्ता तोह मैंने मास्टर chi-fang अरु मास्टर shoon-li से भी नहीं किया था..

सबसे पहले मैं मास्टर chi-fang के पास hi गया था.. अब तक वही आ रहे थे मेरे पास.. दो दिन से वह भी मेरे पास नहीं आये थे..

दक्ष : कैसे मिज़ाज है मास्टर आपके.

मास्टर chi-fang के दिमाग़ में रहते हुए मुझे अंदाज़ा हुआ, मास्टर chi-fang बहुत खिल उठे थे मेरे उनके पास जाने से..

chi-fang : मैं ठीक है दक्ष बीटा.. तुम सुनाओ.. तुम कैसे हो.

दक्ष : मैं भी अच्छा हों मास्टर! अब इंडिया पोहंच चूका हों. कल हवेली जाने की सोच रहा हों.

chi-fang : अच्छी बात है. अब हवेली लौटना बनता भी है. आगे के सफर पर भी तोह तुम्हे निकलना है. तुम्हारा लक्ष भी तोह तुम्हे पुकार रहा है.

दक्ष : हाँ! ये भी आपने सही कहा मास्टर. अभी घर पोहंचा भी नहीं और मेरा लक्ष मुझे अपनी और आकर्षित कर रहा है. मास्टर दुन्या कितनी चेंज हो गई है. इन कुछ दिनों में मैंने कितना कुछ देख लिया है. कितने रंग बदल चुके हाँ दुन्या के. तीन दिनों में hi कितना कुछ करना पद गया है मुझे.

chi-fang : ये सब तुम्हारे लिए नया है न दक्ष बीटा. तोह तुम्हे ऐसा लग रहा है.

दुन्या के रंग तोह सदियों से बदले हुए हाँ. पावर की हवस में हर कोई एक दूसरे से बरतर रहने के लिए दरिंदगी की इन्तहा किये हुए है.. जितना 3 दिनों में तुमने किया है. ये तोह कुछ भी नहीं है. हिस्ट्री खंगाल कर देखो तोह पता चलेगा, पावर पाने के लिए कुछ लोगों ने, कुछ देशों ने क्या कुछ नहीं कर दिए. जितना तुमने किया है. ये बहुत काम है. हाँ जैसे अंदाज़ में किया है. वह कइयों के लिए बड़ा घातक सबत हुआ है.

तुम्हारे लिए आगे की रस्ते भी अब कठिन होने वाले हाँ. आज नहीं तोह कल सम्राट को खुल कर सामने आना hi था. आज आ गया है तोह कोई चिंता की बात नहीं है. बस इतना hi कहूंगा, अपने दिमाग का इस्तेमाल ज़यादा करना. टेलिपाथी भी वहां बेअसर हो जाती है. जहाँ दिमाग काम करना बंद कर दे, कोई सुझाव दिखाई न दे..

हम इंसान हाँ, दायरे में रहते हुए हमें लोक सेवा करा करनी पड़ती है. जल्लाद बनकर लोगों को मारना हमारा काम नहीं है. जैसे तुमने नारायण मिश्रा और उसके बेटो, पोतों को मारा. ऐसे में अगर तुम उसके सभी गुंडों को मारते, विकास के गुंडों को मारते तोह सारा सिस्टम बदल कर रह जाता.. तुम भी जल्लादों की लिस्ट में आ जाते.

बुराई को ख़तम करो. न कह इंसानो को. जितना को मारना ज़रूरी हो, उतना को ख़तम करो. सबको ख़तम करके भी तुम बुराई को ख़तम नहीं कर सकते.. दिमाग का इस्तेमाल ज़यादा करो. बुरे लोग बदल जाएँ तोह अच्छा है. नहीं तोह डरते हुए बुरे करम से पीछे हैट जाएँ.

दक्ष : सब समझता हों मास्टर! आपकी सभी बातों का धयान रखूँगा.

chi-fang : wang-zhi बहुत याद कर रही थी तुम्हे.. जाओ उसके पास भी कुछ समय बिता लो.

मैं मास्टर chi-fang से दो चार बातें और करने के बाद मास्टर shoon-li से बात करि.

वह भी बड़े खुश हुए. मुझे दुआएं दी और सलाह भी..

फिर मैं वांग ची के पास पोहंचा तोह वह मुझे महसूस करके खुश हो गई.

wang-zhi : कैसे हो दक्ष!

दक्ष : अच्छा नहीं हों यार.

wang-zhi : (सुरप्रीसेड) क्यों..??

दक्ष : षिमुना की वजा से!

wang-zhi : क्या हुआ उसे. क्या कर दिए उसने.

wang-zhi मेरे लहजे से कुछ सीरियस हो गई थी.

दक्ष : बड़ी कामिनी हो गई है वह.. मुझे बड़ा परेशान करने लगी है वह.

wang-zhi : वह कैसे..??

wang-zhi पांच पत्नियों वाली बात नहीं जानती थी. मैंने उसे सब बता दिए. सब जान कर wang-zhi हसने लगी

wang-zhi : अब तोह तुम्हारी खैर नहीं है दक्ष.. पांच तोह फिक्स्ड हाँ. और पता नहीं कितनी आने वाली हाँ.

दक्ष : हाँ! आने वळून को कोण रोक सकता है. मेरा क्या है, बैठी रहें मेरे इंतज़ार में. फिर चाहे उनके चेहरों पर झुर्रियां आ जाएँ या फिर सर के बाल hi क्यों न सफेद हो जाएँ.

wang-zhi कुछ शर्माए से अंदाज़ में स्माइल कर गयी.

wang-zhi : सब किस्मत का खेल है. जो और जैसा जिसके नसीब में लिखा होगा. उसे वैसे hi हालातों में जीना होगा. और सुनाओ, कब लौट रहे हो हवेली.

दक्ष : कल का सोच रहा हों. आगे का सफर बहुत लम्बा है तोह एक chapter को जल्द hi क्लोज कर दूँ तोह अच्छा है.

wang-zhi : हम्म सही कहा दक्ष तुमने. पर धयान रखना, परिवार के साथ ज़यादा सख्त नहीं होना. गलती हो जाया करती है. पर--

दक्ष : डोंट वोर्री.. वहां पोहंचुगा तोह देखूंगा. अभी अच्छे मूड में हों तोह ऐसा कुछ भी सोचना नहीं चाहता..

कुछ देर wang-zhi के साथ बिता कर मैं लौट आया.

बहुत देर से टेलिपाथी का उसे कर रहा था. थोड़ा सा थक गया था. अब आदत भी होने लगी थी. फिर भी नया नया था फील्ड में. तोह थकन भी होने लगती थी.

मुझे काम hi समय एक्टिव रहने को मिल प् रहा था. ज़यादा तर मुझे टेलिपाथी के साथ बिजी रहना पद रहा था.

टेलिपाथी बड़े मज़े की चीज भी थी.. दिमागों की बड़ी अजीब अजीब दुन्येन देखने को मिलती थी..

जैसे अब wang-zhi के दिमाग में रहते हुए उससे बातें कर रहा था. मेरी बातों पर wang-zhi के अंदर कुछ भी चेंज आता था.. कुछ भी विचार आते थे, तोह एक विज़न सा बन जाया करता था. वह मुझे भी दिखाई देने लगता था. wang-zhi मेरे और षिमुना के कुछ किस्सेस लाइव देख चुकी थी. अब भी वो मुझसे बातें करते हुए उन किस्सेस के बारे में सोच गयी थी.

मैंने उसे बता कर उसे शर्मिंदा नहीं किया. मैं भी ये लव शव वाले एंगल से दूर hi रहना चाहता था. वर्ण जैसे मनज़र मुझे wang-zhi के दिमाग में देखने को मिले थे. wang-zhi की जगा षिमुना होती तोह खूब मस्ती करता.

wang-zhi के साथ अभी मेरा खुलने का मूड नहीं बन रहा था.. अब सिवाए सोने के मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं था.. इसलिए सरे दिन की थकन मिटने के लिए मैं अपने दिमाग को इंडिकेटिंस देकर सो गया..

ये मेरी आदत बन चुकी थी. सोने से पहले अपने दिमाग को जैसे आर्डर दे दिए करता था. मेरी नींद के दौरान hi मेरे लिए कोई खतरा बने तोह मुझे फ़ौरन hi नींद से जगा दे..

ऐसे मामले में मेरा दिमाग एक स्पेशल दिमाग बन गया था. कमरे में सुई भी गिरती तोह मेरी आंख खुल सकती थी.

सुई अगर मेरे लिए खतरे का कारण हो तोह.. वर्ण अगर मेरे लिए खतरा न हो तोह भले hi कोई ढोल भी बजाये, तोह भी मेरी आंख नहीं खुल सकती थी. मैं ऐसे hi एक अजीब ो गरीब दिमाग का मालिक बन चूका था.. मेरा दिमाग टोटली मेरे कण्ट्रोल में था..

मैं इस दुन्या का अजीब ो गरीब इंसान बन चूका था..


.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
 
Back
Top