Episode:37
विक्रम सिंह, विनय और परची सिंह हवेली में पोहंच कर कैद हो गए थे. अपनी मर्ज़ी के बिना वह राजा ठाकुर की हवेली में पोहंचे थे. जैसा पायल सिंह के साथ वह कर गए थे.. खुद को हवेली के अंदर एक कैदी hi समझ रहे थे..
पायल सिंह ने विनय को देखा तोह दूर से hi चीख पड़ी थी..
वह भगति हुई वहीँ पोहंची तोह गार्ड्स तीनो को घेर कर खड़े थे..
पायल सिंह खुनी नजरो से विनय को देखने लगी. विनय जो अपनी कोठी पर रहते हुए पायल सिंह को लेके फिरसे सुहाने सपने देखने लगा था. पायल सिंह को सामने देखा तोह उसके सुहाने सपनो फुर्र्र कर के उड़ गए.. साथ hi पायल सिंह को देख कर उसके चेहरे का रंग भी उड़ गया...
ऊपर से जैसे पायल सिंह विनय सिंह को देख रही थी. विनय सिंह पायल सिंह की आँखों की आग सहन नहीं कर पाया और नज़रें चुरा गया..
पायल सिंह चीखती हुई : बड़ी हैरानगी की बात है विनय, मेरे साथ इतना सब करके भी तुम हवेली लौट आये. भूल गए थे, यहाँ आने के बाद मैं तुम्हारे साथ कैसा बर्ताव करुँगी.. अच्छा hi हुआ जो तुम मेरे सामने आ गए विनय.. मैं सोच भी नहीं सकती थी, तुम इतने नीच और घट्टिया भी हो सकते थे..
पायल सिंह फिर अपने गार्ड्स से चीखती हुई : विनय को टार्चर रूम में ले जाओ.
विक्रम सिंह राजा ठाकुर को hi देख रहा था.. राजा ठाकुर बिना चेहरे पर कोई भी भाव लाये सबको देख रहे थे. जो हो रहा था, वह सही था, या गलत. राजा ठाकुर को जैसे कोई फर्क hi नहीं पद रहा था.
परची : पायल दीदी! जो भी हुआ था, उसमे भाई का कोई दोष नहीं था.. एक्चुअली वह सबब---
पायल सिंह परची की बात पर ज़ोर ज़ोर से हसने लगी
पायल सिंह : हाहाहा! क्या कहा तुमने अभी. ज़रा फिरसे कहना..
परची को भी अंदाज़ा हो गया था पायल सिंह क्यों उसका मज़ाक उदा रही है. उसका सर जो विनय से चुद जाने का जान कर झुक गया था. अब और भी झुकता चला गया. अपनी माँ और भाइयो के साथ मिलकर पायल सिंह के साथ जो करने जा रही थी. वह सच में hi बहुत घट्टिया काम था. अब एक कैद पंछी के जैसे सब विचार उसने मैं में आने लगे थे..
पायल सिंह : गिरगिट भी इतने रंग नहीं बदलता होगा.. जितने रंग तुम सब बदलते हो.. विक्रम सिंह को देखते हुए.. चाचा जी आप भी तोह वहीँ थे न. आपने भी कुछ नहीं किया था मेरे लिए.. आप भी वहां जा कर बदल गए थे.. या शायद पहले से hi बदले हुए थे. तभी मुझे अपने साथ ले जाने के लिए फाॅर्स कर रहे थे. मेरा मंद डाइवर्ट करने के लिए बदले हालत का बखूबी फायदा उठा था आपने भी..
विक्रम सिंह भी सर झुका गया.. गार्ड्स विनय को लेकर अंदर जाने लगे तोह विनय राजा ठाकुर को देखने लगा.
पायल सिंह : परची तुम मेरे क़हर से बच नहीं सकोगी.. पहले विनय कुत्ते को देख लोन. फिर तुझे भी देख लुंगी मैं..
पायल सिंह कुछ देर में टार्चर रूम में जा पोहंची. विनय को उसके कहने पर ज़ंजीरो से बांध दिए गया..
पायल सिंह ने हंटर लिए और विनय की खाल उधेड़ने लगी..
पायल सिंह : विनय तूने वह सब करके मेरी आत्मा पर बहुत बड़ा घाव लगाया है. मुझे ऐसा दर्द दिए है. जिसके चलते मेरी रातों की नींदें हराम हो गई हाँ. सोच कर hi मुझे झटके लगने लगते हाँ. मैं इतनी भी गयी गुज़री नहीं थी, कितना सस्ता कर दिए था तुम सब ने मिलकर मुझे...
विनय बेचारा कोई भी जवाब देने की बजाये पुरे ज़ोर से चीख रहा था. उसके कपडे फट कर खून में नहाने लगे थे. हंटर लगने से जगा जगा उसके शरीर पर घाव बनने लगे थे..
कुछ देर पायल सिंह ऐसे hi विनय पर हंटर बरसाती रही.. पायल सिंह तब रुकी ताज किसी के ज़ोर ज़ोर से क्लैपिंग करने की आवाज़ें सुनाई देने लगी..
पायल सिंह ने रुक कर देखा तोह कुछ फासले पर उसकी दादी, रानी देवी, उसकी माँ रोहिणी सिंह और परिधि कड़ी हुई थी..
परिधि ृदीकुलौस्ल्य भाव चेहरे पर सजाये क्लैपिंग कर रही थी.. दादी और माँ भी परिधि को देख कर हैरान थी.. कितनी बदल गई थी परिधि.. कैसे अपनी दीदी का मज़ाक उदा रही थी...
परिधि : वाह्ह्ह! वाह्ह्ह! क्या बात है दीदी.. आपके हाथ में हंटर.. अपने साथ विश्वासघात करने वाले को सजा दे रही हाँ आप.. ज़बरदस्ती शादी करने पर विनय के शरीर पर कोड़े बरसा रही हाँ. विनय जो हमारा भाई भी है. क्या बात है दीदी. आप तोह फूलन देवी hi बन बैठी हाँ..
पायल सिंह परिधि को देख कर उसकी बातें सुनकर हंटर फ़ेंक गई.. ग़ुस्से से परिधि को देखते हुए बोली : मेरे साथ ऐसे अंदाज़ में बात मत किया कर..
परिधि : क्यों! सहन नहीं होती मेरी बातें आपसे दीदी. ओह्ह! मुझे खुद पर कण्ट्रोल बनाये रखना चाहिए.. कहीं आप ग़ुस्से में आ कर मुझे भी न मारने लगें..
पायल सिंह : maaaaaaaaaaaaa!! परिधि को समझा लें. सच में किसी दिन मैं खुद पर कण्ट्रोल भूल जाओं और वह कर जाऊं, जिसके बाद आप सब मुझे बुरा भला कहें. इससे कह दें, मुझे ऐसे शब्द सुनने की आदत नहीं है.
परिधि : किसी और को भी ऐसे hi ज़हरीले शब्द सुनने को मिले थे दीदी. परिधि को अचानक से hi याद आया तोह वह आगे बोलने से खुद को रोक गयी..
पायल सिंह : हाँ बोल! पूरी बात बोल न.. बता आगे क्या बोलने वाली थी तू..
परिधि : आगे मैं क्या बोलूंगी दीदी.. विनय को देखते हुए परिधि आगे बोली.. मुजरिम आपके सामने हाँ, फिर भी मुझसे पूछ रही हाँ. मैं क्या कहने वाली हों. जिन्हे सच जानने की छह होती है. वह तोह पहाड़ों को खोद डालते हाँ.
फिर अपनी माँ और दादी को देखते हुए.. पर किसी के अंदर पहाड़ खोदने की शक्ति hi नहीं होती.. अपनी काम हिम्मती का रोना रो कर, अपने hi किसी प्यारे को किसी के बनाये जाल में फँस कर दोषी मान जाते हाँ कुछ अपने प्यारे लोग..
परिधि वहीँ नहीं रुकी और वहां से चलती बानी..
रोहिणी सिंह की आँखों में आंसू आने लगे तोह पायल सिंह परिधि की बातों का मतलब समझने की कोशिश करने लगी..
वहीँ दादी भी कभी रोहिणी सिंह को तोह कभी पायल सिंह को देखने लगी..
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Margaret(Komal) ब्रेन मास्टर के खुफ़िआ ठिकाने से निकली तोह उसे देर हो चुकी थी..
रपो के तीनो अड्डे उदा कर कोमल ने जहाँ रपो का पूरा स्ट्रक्चर बिगड़ दिए था. वहीँ अपने लिए खतरों को और भी बढ़ा दिए था..
रपो का मैं हेडक्वार्टर कहाँ था. ये तोह अमेरिकन प्रेजिडेंट को भी नहीं पता था..
ब्रेन मास्टर को रपो का हेड बना कर रपो की पूरी ऑर्ग उसके कण्ट्रोल में दे दी गई थी.
र्रिचड को ब्रेन मास्टर बनाने वळून ने कुछ ऐसा सेटअप बनाया था. कुछ भी कहीं भी होता था तोह सारा रिकॉर्ड आटोमेटिक उन तक पोहच जाया करता था..
सभी कंट्रोल्स उनके पास नहीं थे. पर साडी जानकारी वह ज़रूर रखते थे. ऑर्ग को कण्ट्रोल करने के लिए डायरेक्ट सिस्टम उनके पास नहीं था. वह केवल richad(brain मास्टर) के पास हुआ करता था..
और ब्रेन मास्टर के खुफ़िआ ठिकाने पर कोमल ने जो कुछ भी किया था. वह साडी डिटेल कुछ स्पेशल किसम के हिडन कामर्स में रिकॉर्ड होकर आगे पोहंच प् रही थी.
कोमल की गुडलुक ये हुई थी. जिस समय वह ये सब कर रही थी. उस समय "जहाँ ब्रेन मास्टर के खुफिया ठिकाने का सारा रिकॉर्ड पोहंच रहा था" वहां कोई देखने वाला नहीं था.. वहां 24 हरष में 2 से 3 बार hi ब्रेन मास्टर से ऊपर के लोग उस रिकॉर्ड को देखा करते थे..
जैसा सब कोमल ने कर दिखाया था. ऐसा कुछ भी हो सकता है. किसी को भी उम्मीद नहीं था..
पर कोमल ने सब करके सबकी उमीदों पर पानी फेर दिए था.. देर से hi सही, पर वहां का रिकॉर्ड देखने के लिए कोई मौका पर पोहंच गया था..
देख कर उनसे स्पेशल अलार्म बजा दिए.. ये अलार्म कुछ सीनियर्स लोगों के लिए था.. जो अपने अपने ठिकानो पर सेक्रेटली रपो के हेड थे..
वह सब भी लाइव होकर ब्रेन मास्टर के ठिकाने पर कोमल को उसके चंडी के रूप को देखने लगे..
कोमल ने जो जो बोलै था. वह सब रिकॉर्ड हो गया था. उसके कहे सभी शब्द जान कर स्पेशल फाॅर्स को काम पर लगा दिए गया..
ये फाॅर्स ऐसे hi इमरजेंसी के राखी गई थी.. तीनो बेसेस तोह कोमल ने ब्लास्ट कर दिए थे. साथ में ब्रेन मास्टर के ख़ुफ़िया ठिकाने को भी डिस्ट्रॉय मोड पर सेट कर दिए था.
जितनी देर में सब ब्लास्ट होता.....
उतनी देर में वह सीनियर्स बैकअप के लिए बिजी हो गए..
साथ में कोमल के लिए, और दूसरे तीनो बेसेस से निकल चुके एजेंट्स के लिए भी बिजी हो गए..
कोमल जो नार्मल रहते हुए गाडी में बैठी हुई एक रोड से गुज़र रही थी. उसे एकदुम्म से कई गाड़ियों उसे फॉलो करते हुए दिखाई देने लगी..
कोमल सुपर एजेंट थी. पल भर में hi सब समझ गयी...
कोमल : ओह्ह्ह! तोह ये बात है. बड़ी जल्दी फॉर्म में आये गए रपो की स्पेशल फाॅर्स वाले.
चल इन्हे भी देखती हों..
देखते hi देखते शहर की सड़कें रेस का मैदान बन गयी.. ेकेलि कोमल के पीछे स्पेशल फाॅर्स के साथस साथ पुलिस की भी कई गाड़ियां लग चुकी थी.
सुपर एजेंट होने के साथ साथ कोमल माला की रे के कारण बहुत बदल चुकी थी. सोचने समझने और फैसला लेने की शक्ति पहले भी उसमे बहुत थी. अब और भी बढ़ चुकी थी.
कोमल रिलैक्स मूड के साथ गाडी ड्राइव लार रही थी. गाडी रपो से रिलेटेड थी. और गाडी के अंदर क्या कुछ था. ब्रेन मास्टर जनता था. या फिर कोमल..
दूसरा कोई और नहीं जनता था..
कोमल अंधी तूफ़ान बानी स्पीड के साथ गाडी ड्राइव कर रही थी. और गाडी आखरी स्पीड के साथ दौड़ रही थी. डैशबोर्ड खोल कर कोमल ने एक पिस्तौल निकला अपनी साइड का मिरर डाउन करते हुए पीछे की और हाथ करके एक साथ तीन फायर कर दिए..
पहला फायर कोमल के पीछे वाली गाडी के ड्राइवर के माथे पर लगा. दूसरा फायर फ्रंट बैक, दोनों मिरर को तोड़ता हुआ उससे भी पीछे वाली गाड़ी के ड्राइवर के सर में जा ghusa..teesra फायर अगली गाड़ी के आउट ऑफ़ कॉन्ट्रोल हो जाने के कारण उसकी बॉडी पर लग गया था...
फ़ौरन hi कोमल की गाडी पर फायरिंग शुरू कर दी गई..
कोमल : हाहाहा! करो, करो, जितनी चाहे फायरिंग करो.. ये स्पेशल गाडी भी तोह तुम रपो वळून की hi दें है. अब यही गाडी मुझे प्रोटेक्ट भी करेगी और तुम सबकी लाशें भी गिराएंगी..
शहर भर में सनसनी पहेली हुई थी.. रात का समय था और एक गाडी के पीछे कई पुलिस की गाड़ियां लगी हुई थी..
देखते hi देखते कई गाड़ियां तबाह होने लगी.. कोई भी कोमल को पकड़ नहीं प् रहा था.
कोमल वाली गाडी में पीछे और आगे को मशीन गन भी नसब थी.. कोमल कभी पिस्तौल या मिनी गन से बहार फायर करने लगती तोह कभी गाडी में लगी मशीन गन्स द्वारा फायरिंग करते हुए पीछा कर रहे एजेंट्स और पुलिस वळून को मारने लगती.
डेढ़ घंटे तक कोमल ने शहर भर में तबाही मचा कर रख दी थी.. एक हेलीकाप्टर भी कोमल को पकड़ने के लिए आया था.. जिसे पास आने से पहले hi कोमल ने हवा में hi ब्लास्ट कर दिए था..
कोमल : रपो वालो! बस तुम देखते जाओ. मैं करती क्या हों तुम सबब के साथ. अभी तोह शुरुआत है. आज पहले दिन है. ब्रेन मास्टर से और खुद से वडा किया था मैंने.. कभी भी रपो को फिरसे अपने पैरों पर खड़ा नहीं होने दूंगी..
अब कोई कोई गाडी hi कोमल के पीछे थी... कोमल भी अब रेस्ट करने के मूड में थी.. उसका ज़ख़्म भी अब दर्द करने लगा था..
वह अपने ख़ुफ़िया ठिकाने पर पोहंची.. 5 घंटे बाद वह एक नए रूप में, एक नयी आइडेंटिटी के साथ अमेरिका से उड़ान भर चुकी थी..
वह प्लेन में बैठी हुई फ्रांस जा रही थी.. वहां से उसे अपने देश जाना था. फ्रांस पोहंच कर वहां से फिर वह एक और नहीं नयी आइडेंटिटी के साथ इंडिया लौटने वाली थी..
रपो के सीनियर्स हथु से निकल चुके एजेंट्स को फिरसे अपने कण्ट्रोल में ले चुकी थी.. उन्हें नए बेसेस पर ट्रांसफर कर दिए गया था..
रपो का सारा सेटअप डिस्ट्रॉय हो चूका था. उन्हें बहुत समय लगने वाला था. फिरसे रपो को पहले जैसा बनाने के लिए..
जिस सिटी में margaret(komal) ने तहलका मचाया था. उस सिटी में आस पास के कुछ सिटीज में कोमल को स्पेशल एजेंट्स, पुलिस, और फबि के थ्रू ढूंढा जा रहा था.
लोगों के घरों में घुस घुस कर कोमल फंड आउट किया जा रहा था. पर वह वहां होती तोह मिलती. वह कबकी फ्रांस के लिए फ्लाई कर चुकी थी.
अगली शाम कोमल फ्रांस पोहंच कर अपने स्पेशल ठिकाने पर थी. एक दिन की रेस्ट करने के बाद वह इंडिया के लिए फ्लाई करने वाली थी..
रपो से लड़ने के लिए बहुत समय था उसका.. अपने देश से बरसों से दूर थी वह.. तोह अपने देश की मिटटी उसे खेंच रही थी अपनी और.. वह बिना देरी वहां पोहंच जाना चाहती थी..
कोमल तड़पने लगी थी अपने देश की मिटटी की खुशबु सूंघने के लिए. अपने देश की मिटटी को चूमने के लिए. अपने देश के लोगों से मिलने के लिए.. जहाँ उसके अपने भी थे..
कोमल एक नई फेस में आने के बाद बीएड पर लेट कर सो गयी...
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दक्ष : वाह्ह्ह्ह! क्या बात है. बड़ा hi स्वादिष्ट खाना बनाया है. खा कर तोह मज़ा hi आ गया...
ऋचा खुश हो गई... तोह चौकीदार की पत्नी होंठ भींचे स्माइल करने लगी. असल टास्ते तोह उसके हथुन का था. ऋचा भूल गई थी. मैं सब जान सकता हों. ऋचा खुद को आगे करते हुए सारा क्रेडिट ले रही थी..
रुपाली घुलमो के जैसे साइड कड़ी हुई मुझे खाते देख रही थी..
रुपाली : मालिक! आपने मुझे उठाया नहीं. वर्ण इससे भी अच्छा खाना आपको खाने को मिलता.. आपकी दासी खाना बहुत अच्छा बना लेती है.
दक्ष : तुम तोह और भी बहुत कुछ अच्छा अच्छा बना लेती हो..
रुपाली : मालिक की ज़र्रा नवाज़ी है.. वर्ण दासी की इतना औकात कहाँ.
दक्ष : क्यों ऋचा! तेरी माँ की औकात इतनी hi है या बढ़के है.
ऋचा सब समझते हुए : मैं क्या कहूं भाई.. ओह्ह सॉरी मालिक!.. आप मुझसे बेटर समझते हाँ.
मैं खाना खता रहा और दोनों मुझे सर्वे करती रही..
मैंने चैकीदार की पत्नी को देखा, जो आँखों में हैरत लिए देख रही थी.
दक्ष : नाम क्या है तुम्हारा..???
चैकीदार की पत्नी से मैंने पुछा तोह वह घबरा कर उठ कड़ी हुई.. मेरे होंटो पर मुस्कराहट आ गई.
वह : mmm..ww..jj..ji वो माला.
माला घबरा कर बोली तोह हसने लगा
दक्ष : ऐसे क्यों घबरा रही हो तुम.. आओ मेरे साथ मिलकर खाओ..
वह और भी घबरा गई. सोचने लगी, कहीं उसे खुद के करीब करने की कोशिश में तो नहीं हों.
हाहाहा.....
रुपाली की दुमदार चुदाई देख कर अभी तक दरी हुई थी..
दक्ष : जो देखा था वह सब सही नहीं था. तुम्हे डरने की ज़रूरत नहीं है.
वह पहले तोह मुझे प्रश्न भरी नज़रों से देखने लगी. मेरी बात का उत्तर उसकी समझ में नहीं आया था. पर जैसे hi उसे समझ आया तोह लाल पीली होकर सर झुका गई.. वह होल होल कांपने लगी थी. उसे लगा मई उसपर लाइन मार रहा हों..
हाहाहा...
मैं कोई जल्लाद थोड़ी न था.
न hi मैं ठरकी था. वह सुंदर नहीं थी. जवान भी नहीं थी. पर भरे जिस्म वाली थी. सेक्सी जिस्म वाली थी. उसे देख कर कइयों का इमां दोल जाता. पर मेरा नहीं दोल सकता था.
मैं उसके साथ मस्ती तोह कर सकता था. पर सेक्स नहीं..
दक्ष : घबराओ नहीं. जाओ अपने पति को बुला कर लाओ. मिलकर कहते हाँ.
वह बेयक़ीनी के साथ मुझे देखने लगी.
दक्ष : हाँ! जाओ बुला कर लाओ. तुम गरीब हो, कोई गिरे पड़े तोह नहीं. जल्दी से बुला कर लाओ. मिलकर कहते हाँ..
वह भाग कड़ी हुई.
जल्द hi वह अपने पति के साथ आती हुई दिखी.
चौकीदार : कैसी बात करती हों तुम माला. वह मालिक हाँ. हमें कैसे अपने साथ बेथ कर खाने को बोल सकते हाँ.
माला : पता नहीं जी. पर मुझे उनकी आँखों में देख कर लगा, वह दूसरे से अलग हाँ.
इतनी देर में वह अंदर थे.
चौकीदार : साब आपने सच में--
दक्ष : हाँ! मैं सही कहा था. जाओ हाथ धु कर आओ, फिर तीनो मिलकर खाना कहते हाँ. वह भी सुनकर हैरान हुआ था. फिर माला के साथ हाथ धु कर आया और कुर्सी पर बेथ गया..
दक्ष : रुपाली ये दोनों मेरे लिए ख़ास हाँ. तुम और ऋचा दोनों मिलकर उन दोनों को अच्छे से सर्वे करो.
ऋचा : पर..??
रुपाली : रीछा! मालिक ने कहा है तोह मानना हमारा धरम है. हम कोई भी सवाल नहीं कर सकती.
रुपाली सही मानो में घुलम बानी ऋचा के साथ मिलकर चौकीदार और माला की सेवा करने लगी..
दोनों खुश खुश खाने लगे. देर नहीं लगी और दोनों की आँखों में आंसू आयने लगे.
गलत समझे आप....
मिर्ची से आंसू नहीं आये दोनों की आँखों से.....
सम्मान और अपनापन मिले तोह भी आंसू बहने लगते हाँ. दोनों पति पत्नी जज़्बाती होकर आंसू बहते हुए, कहते हुए मुझे देखने लगे.
मुझे दोनों को देख कर बड़ा सुकून मिल रहा था. रुपाली और ऋचा को मेंटली टार्चर तोह हो hi रहा था. पर दो भले मानस लोगों को कुछ खुशियां भी मिल गई थी.
साथ में मुझे असीम शांति भी प्राप्त होने लगी थी..
खाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया.. वहीँ ऋचा और रुपाली भी कुछ देर में आ गई..
दोनों मेरे पाऊँ दाबने लगी..
मैं विकास के दिमाग में जा पोहंचा. जो अपने बहुत से पार्टनर्स के साथ मीटिंग में वेस्ट था...
सम्राट को लेके चर्चा चल रही थी..
विकास : सम्राट का कोई इंतेज़ाम करना पड़ेगा.. अगर वह हमारे दिमाग में घुसा तोह सब चौपट हो जायेगा. हम भी बुरे करम करने वाले हाँ.. अगर वह कभी हमारे पास पोहंच गया तोह सब बर्बाद हो जायेगा..
एक पार्टनर डरा सेहमा बैठा हुआ था वह बोलै : मैं तोह कहता हों, कुछ समय के लिए हमें सरे धंदे बंद कर देने चाहिए.. पता नहीं सम्राट क्या बाला है. कहीं ऐसा न हो हम सब भी मारे जाएँ..
एक जो उसके साथ hi बैठा हुआ था. वह बड़ा कुत्ता बाँदा था. बड़े कल्ट किये थे उसने. वह सम्राट नाम की दहशत में नहीं आया था. वह पहले वाले के कंधे पर ज़ोर का लाफा मारते हुए बोलै
"साला मेरे होते हुए भी तुम दर रहे हो. सम्राट है तो क्या, हम सब अपना धंदा छोड़ कर बेथ जाएँ"
कोई और उसकी हिमायत में बोलै : सही कहा तुमने. ऐसे बुज़दिलों की तरह से चुप बैठे रहे तोह कर लिया हमने धंदा..
विकास : बंद करो तुम सब अपनी बकवास.. क्या तुम सबने देखा नहीं था. सम्राट कितनी बुरी बाला है.. धनञ्जय ठाकुर और उसका पूरा परिवार, पूरा गैंग ख़तम होगया. मिनिस्टर मारा गया.. नारायण मिश्रा जैसा बिज़नेस टीकों मारा गया..
अब्ब भी तुम कह रहे हो. सम्राट से डरने की ज़रूरत नहीं है. कर hi क्या सकते हो तुम. सम्राट एक भयानक बाला बनकर नाज़िल हुआ है. नहीं जानते, वह कब और कहाँ पोहंच जाए. कोण कोण इसकी पकड़ में आता है. और क्या क्या करता है...
वह सबसे पहले पार्टनर डरा था. वह एकदुम्म से अपनी जगा से उठा खड़ा हुआ.. अब वह घबराया हुआ नहीं दिख रहा था. उसके साथ बैठा जल्लाद सिफत गुंडा देख कर कुछ हैरान हुआ.
"सही कहा तुमने vikas...tum या कोई भी कुछ नहीं कर sakta..main सच में hi एक भयानक बाला हों. जहाँ भी जाता हों, तबाही पहला देता hon..koi नहीं जनता, मैं कब कहाँ और कैसे पोहंच सकता हों.."
विकास और कई दूसरे बहुत ज़यादा दर गए तोह साथ बैठा हुआ गुंडा उसे घोरसे देखने, सुनने लगा.
अचानक से hi उसने पिस्तौल निकला और जिसके अंदर मैं था. उसके सर में गोली मार दी..
साले ने एकदुम्म से अचानक किया था. मुझे क्या होना था. मैं जिसके अंदर था. उसके सर में गोली घुसी तोह वह मोके पर hi मर गया..
मैं उसके अंदर था.. अचानक से उसके सर में गोली उत्तरी तोह मुझे भी एक शदीद झटका लगा था..
बड़ी हैरत की बात थी ये मेरे लिए.. ऐसा पहले मैंने फील नहीं किया था.. मैं खुद को नार्मल करते हुए फिरसे वहीँ जा पोहंचा..
"देखा सम्राट कुछ नहीं कर सकता.. देखा कैसे भगा दिए मैंने उसे"
वह अपनी मूछों को ताओ देते हुए बोलै.. मैं उसके दिमाग में घास और उसे किसी हद तक अपने कण्ट्रोल में ले लिया..
जहाँ वह अपनी मूछूँ को ताओ दे रहा था. वहीँ उसका दूसरा hath"jis हाथ में गन थी" उसकी कनपटी पर जा लगा..
सब देख कर शॉकेड हो गए..
मैंने उसके दिमाग को और भी ढीला छोड़ा तोह वह अपनी कनपटी पर अपना hi पिस्तौल देख कर घबरा गया..
फ़ौरन पिस्तौल को अपनी कनपटी से हटा लेना चाहता था. पर ऐसा कर नहीं प् रहा था..
वह अब देहशान्त में आने लगा..
वो : nn..nahi..nahi..SAMRAT.. pp..plz मुझे शमा कर दें. मैंने आपकी शान में गुस्ताखी की है. मैं भूल गया है. आप तोह सम्राट हाँ. और सम्राट सबसे बढ़ कर होता है.
मैंने उसे आज़ाद छोड़ दिए. पिस्तौल उसके हाथ से छूट कर निचे गिर पड़ा..
वह नार्मल होकर खुश हो गया. उसे लगा मैंने उसे माफ़ कर दिए है.. उसके साथ खड़े हुए के व्यक्ति ने कुर्सी उठा कर पूरी ताक़त से उसके सीने पर मार दी..
वह उछाल कर दूर जा गिरा..
सम्राट.... साले तू क्या समझा था. तेरे जैसे चूतियों को मैं छोड़ दूंगा.. कभी नहीं. तुझ जैसो को छोड़ दिए तोह और कई घर बर्बाद हो जायेंगे.. तुम लोगों का धंदा है न. देश के मासूम बच्चू को किडनैप करना. इज़्ज़तदार बेटियों को किडनैप करके बेचना. उन्हें धंदे पर लगा देना..
थूऊऊऊऊ.. पैसो के लिए अपने hi देश को खोखला कर रहे हो तुम..
कुर्सी वाला पार्टनर फिरसे कुर्सी लिए उसपर टूट पड़ा.. वह क़ातिल बहुत एक्सपर्ट भी था. पर मेरे आगे उसकी नहीं चल सकती थी..
बड़े करतब दिखा कर वह खुद को कुर्सी की मार से बचने की कोशिश कर रहा था.. एक समय पर विकास वहां से भागने लगा तोह कुर्सी हवा में उड़ती हुई उसके ऊपर का गिरी.. वह चीखता हुआ निचे गिर पड़ा और दर्द से कराहने लगा..
इतनी देर में पहले जिसे कुर्सी से पीट रहा था. वह पिस्तौल उठा कर पार्टनर को शॉट कर चूका था..
मैंने फिरसे उसे कण्ट्रोल में लिया और पिस्तौल उसकी कनपटी पर जा लगा. वह फिरसे दहशत में आ गया. वह फिरसे चिल्लाना लगा..
एक्दम्मम से पिस्तौल फिरसे उसके सर से अलग हुआ और दूसरे पार्टनर्स के सीनो की और होते हुए उन्हें शूट करता चला गया..
पिस्तौल खली हुआ तोह क़ातिल ने पिस्तौल फ़ेंक दिए और विकास के पास जा क्र बेथ गया..
"विकास बाबू, बड़ा पैसे कमा लिया है न तूने.. कितने बच्चू को, बेटो को बेटियों को तूने अपने परिवार से दूर किया है. जनता है.. नहीं जनता तू.. भूल चूका है तू सब.. चल तुझे एक सबक़ देता हो मैं..
क़ातिल ने विकास में मोह में हाथ कर उसकी ज़ुबान खेंच दी. पूरी ज़ुबान hi विकास में मोह से अलग होते हुए क़ातिल के मोह में आ गई.
"विकास तुझे अब मैं मरने नहीं दूंगा.. तू पल पल मरेगा.. जितना पैसे तूने कमाया है न.. वह अब तेरे काम नहीं आएगा. आएगा तोह केवल तेरे इलाज के लिए. तू अब मरेगा नहीं.. तू पल पल तड़पेगा अपने बच्चू के लिए.. तेरी पत्नी मारेगी तोह तेरे बेटे, बेटियां सदा के लिए तुझसे दूर हो जायेंगे.."
विकास जो अपनी ज़ुबान खो कर चीख रहा था. अपने अंजाम को जान कर उसकी आँखों में इल्तिजा आ गयी.. वह ऐसा भयानक अंजाम अपने लिए नहीं चाहता था..
मुझे उसपर रेहम तोह आने से रहा..
क़ातिल ने पहले विकास को वहां से निकला.. उसे एक जगा छोड़ कर ाबमुलेन्स के लिए कॉल कर दी..
वहीँ एक ऊंची बिल्डिंग की छत पर चढ़ कर क़ातिल ने छलांग लगा दी..
खास काम जहाँ पाक.....
उसी रात मैंने विकास के बच्चू के ब्रेन अपने कण्ट्रोल में लेकर वाश कर दिए.. उन्हें ऐसी मेडिसिन के उसे करने का आर्डर दे दिए.. जिसके कारण कुछ hi समय में उनकी याददाश्त चली जाती.
विकास की पत्नी भी उसके बुरे कर्मो की साथी थी.. उसे भी अपने ट्रांस में लेकर मैंने कुछ दिन विकास के देवा करते रहने के बाद सुसाइड का बोल दिए..
विकास का भी अंत हो चूका था..
जितने भी पार्टनर्स मैंने मारे थे. सबके दिमाग से मैंने ज़रूरी इन्फो निकल ली थी...
वह मैंने अपने पास मौजूद एक पेपर पर लिख डाली थी..
षिमुना को वह साड़ी इन्फो दे दी मैंने.. षिमुना फिरसे उसी ईमानदार पुलिस में घुसी और हाई लेवल पर मटर को लाते हुए मेजर ऑपरेशन की मांग करि..
देखते hi देखते कुछ घंटों में सेंकडो बच्चे, उन ठिकानो से बरामद क्र लिए गए..
मीडिया ने इस बार बड़े अच्छे अंदाज़ में इस सभी घटना को लाइव दिखाया था..
एक hi दिन में पुरे देश में नजाने क्या कुछ हो गया था..
स्कूल वाला मटर.. टेर्रोरसिट्स को मार कर संजना माँ पुरे देश को मिल गयी थी..
सम्राट इंडिया से है, सब कान कर बहुत खुश हुए थे..
वहीँ क्वीन भी इंडियन है, ये जान कर सब और भी खुश हुए थे..
दो दिन पहले बहुत से बच्चे और लड़कियां मिले थे तोह आज के दिन और भी कई मासूम बेटे अपनी माओं के पास जा पोहंचे थे.. बहुत सी इज़्ज़तदार बेटियां अपनी इज़्ज़त लुटाते से बच गई थी. वह अपने परिवार में शामिल हो गई थी..
जहाँ बहुत से दुष्ट पापियों का अंत हुआ था. वहीँ बहुत सी खुशियां भी देश वासियों को मिल गयी थी..
कुल मिला कर आज का दिन देश भर के लिए सुर्प्रिसिंग रहा था.
खुशियों से भरपूर बन गया था..
चरों और खुशियां hi खुशियां पहेली हुई थी. पुरे देश में लोग जगह जगह खड़े होकर इस बारे में चर्चा कर रहे थे..
तोह बहुत से टीवी के सामने बैठे हुए लाइव चर्चा सुनकर अपने अपने विचार पेश करने में लगे हुए थे..
आज के जो कुछ भी उन्हें देखने सुनने को मिला था. वह कैयो दिनों तक के लिए एक बेस्ट टॉपिक बनकर रह गया था..
दुःख के बाद खुशियां मिलती हाँ तोह खुशियों के बाद दुःख मिलते हाँ....
जहाँ पूरा देश खुशियां मन रहा था.. वहीँ बहुत से पापी पालननिंग में लगे हुए थे.. ऐसे तोह वह जी नहीं सकते थे. सम्राट का कुछ न कुछ तोह करना hi था...
मिनिस्टर मारा था...
धनञ्जय ठाकुर मारा था...
नारायण मिश्रा और उसके परिवार के मर्द मरे थे...
विकास मारा था, उसके साथ साथ और भी बहुत से विकास के पार्टनर्स मरे थे.
एक पार्टनर एक ऊंची ईमारत से कूद कर मारा था..
बहुत कुछ हुआ था आज के दिन...
जिन्हे दुःख पोहंचा होता है. वह किसी की ख़ुशी सहन नहीं कर सकते.....
जितनी खुशियां एक hi दिन में देश को मिली थी.. लगता था. जल्द hi बहुत से ग़म भी उन्हें मिलने वाले हाँ...
जहाँ बहुत से देश के गद्दार देश के खिलाफ पालननिंग करने में लगे हुए थे..
वहीँ......
रपो जो कोमल पर बहुत ज़यादा ग़ुस्से थी.. कोमल इंडिया से थी.. क्वीन और सम्राट भी इंडिया से थे..
कोमल के साथ साथ क्वीन और सम्राट भी रपो वळून के लिए वांटेड हो गए थे.. वह भी अब चैन से नहीं बैठने वाले थे.
बाओ के दो प्लेन के साथ साथ बहुत से बेस्ट एजेंट्स भी मारे गए थे.. वह भी बड़े दुःख में थे..
उन्हें भी किसी करवट चैन नहीं था.. वह भी बदला लेने के लिए, अपनी पावर को बढ़ने के लिए प्लानिंग में लगे हुए थे...
इंडिया में एक hi दिन में जितने भी बुरे लोग मरे थे.. वह डायरेक्ट या इंदिरेक्ट किसी न किसी ऑर्ग से जुड़े हुए लोग थे.. और ऑर्ग वाले ऐसा लोस्स सहन नहीं कर प् रहे थे..
जिन जिन का भी लोस्स हुआ था.. वह सब के सब बेहद ग़ुस्से में आये हुए थे...
सबका ग़ुस्सा मिलकर एक बहुत बड़े तूफ़ान का रूप धारण कर सकता था...
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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..
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