Episode:01
साउथ अटलांटिक ओसियन में अपनी मंज़िल की और बढ़ रहा हारमनी ऑफ़ थे सीज नमी शिप, उस शिप के अंतिम फ्लोर की छत पर खड़ा हुआ ठाकुर दक्ष सिंह.
अपने देश से हज़ारों मिले दूर, अपणु से 6 साल से दूर एक मरीन लाइफ जी रहा था दक्ष. सब उसके लिए मर चुके थे और वो सब के लिए..
6 इयर्स.....
6 सालों से दक्ष ठाकुर ने किसी की कोई भी खबर नहीं ली थी. वहां से निकले जाने के बाद (धुत्कार कर, ज़लील करके निकाले जाने के बाद) कोण इस दुन्या में आया और कोण इस दुन्या से गया. दक्ष ठाकुर नहीं जनता था.
दादा, दादी, माँ, पापा, भाई बेहेन, चाचा चची, उनके बच्चे और दूसरे सब अभी भी जी रहे हाँ या मर गए हाँ. दक्ष ठाकुर नहीं जनता था. और न hi जानना चाहता था. दक्ष ठाकुर किसी के बारे में जान्ने की ज़रूरत भी नहीं समझता थी.
एवरीवन हॉटेड हिम एंड हे हॉटेड एवरीवन
सालों से सबसे दूर था दक्ष फिर भी.. वो आवाज़ें, वो चीखें, वो अल्फ़ाज़, वो नफरत वो धुत्कार, उसे आज भी याद थी. जब भी उन आवाज़ों की गूँज उसके अंदर गूंजती थी तो वो पागल सा होने लगता हों.
ज़िन्दगी......
ज़िंदा रहने को दिल नहीं चाहता था दक्ष का. पर मर भी नहीं सकता था.. इतना दर्द भर दिए गया था उसके अंदर. अपने शरीर के अंदर से आत्मा तक को निकाल बहार करने के लिए दक्ष ठाकुर क्या कुछ नहीं कर जाया करता था. दुन्या का कोनसा ऐसा खतरनाक काम था, जो दक्ष ठाकुर ने न किया हो. समुद्र की उस गहराई तक वो जा पोहंचा था, जहाँ तक पोहंच पाना शायद किसी के लिए मुमकिन न रहा हो..
पर दक्ष ठाकुर.....
दक्ष ठाकुर बिना किसी डर खौफ के हर खतरनाक गहराई में उतर जाया करता था. सुसाइड करने की कोशिश कभी नहीं की थी दक्ष ठाकुर ने. हाँ जिस काम में उसकी जान जाने के 80%-90% भी चान्सेस करते तो वो ज़रूर कर जाया करता था.
दुन्या में कोई भी काम 100% डेंजरस नहीं था दक्ष ठाकुर के लिए.. अगर होता तो वो कब का मर चूका होता.. उसे मिला दर्द उसे इस दुन्या को छोड़ कर जाने भी नहीं देता था.
दीक्ष बेकमे ा multi-talented मन बिकॉज़ ऑफ़ थे दन्गेर्स हे फसद.
शायद वो मरना भी नहीं चाहता था. अगर मर जाता तो फिर वो उसे कैसे हासिल कर पता. एक वही तो थी जिसके लिए वो मरना नहीं चाहता था.. वो भी दक्ष से नफरत करती थी..
शी हॉटेड हिम इममेंसेलय.....
वही थी जिसकी वजा से दक्ष की ज़िन्दगी बर्बाद हो गई थी, वही थी जिसकी वजा से दक्ष ठाकुर को मौत नहीं आ रही थी. वही थी जिसके मिलने की आस लिए दक्ष ठाकुर हमेशा hi खतरों से लड़ जाया करता था. जहाँ यकीनी मौत हुआ करती थी, दक्ष ठाकुर वहां से भी बच जाया करता था.
वही थी जिसने दक्ष ठाकुर को बर्बाद कर दिए था.. वही थी जिसे पाने के लिए दक्ष ठाकुर हमेशा से बेताब रहा था. वही थी, जो शायद कभी बदल कर दक्ष ठाकुर की ज़िन्दगी में फिरसे भी आ जाए तो दक्ष ठाकुर कभी भी उसे न अपना सकूँ..
कुछ ऐसे hi विचार दक्ष ठाकुर के थे.
कैसी अजीब बात थी, जिसे दक्ष ठाकुर बेइंतेहा चाहता था, जिसे पाने के लिए दक्ष ठाकुर मरना भी नहीं चाहता था. जिसे पाने के लिए दक्ष ठाकुर ज़िंदा था. अगर कभी वो दक्ष ठाकुर की ज़िन्दगी में आ भी जाती तो दक्ष ठाकुर उसे पाए बिना साइड से निकल जाता..
जिस तरह से दक्ष ठाकुर को धुत्कार दिए गया था. शायद वो भी कभी मौका मिलने पर उसे धुत्कार देता..
"मुझे नफरत है तुमसे शदीद नफरत... ी हेट यू दक्ष.. ी हेट यू.. एंड ी विल ऑलवेज हेट यू.. मर जाना पर कभी मुझसे अपनी सूरत मैट दिखाना thuuuuuuuuuu.."
"तुम.. तुम.. मेरे भाई नहीं हो सकते दक्ष.. नहीं.. नहीं.. तुम मेरे भाई नहीं हो सकते.. ऐसी नीच हरकत करने वाला कभी मेरा भाई हो hi नहीं सकता.. दफा हो जाओ हमारी ज़िन्दगी से हमेशा हमेशा के लिए.. कभी अपनी घट्टिया सूरत लेके मेरे सामने भी मैट आना"
"तू मेरी कोख में hi क्यों नहीं मर गया पापी.. काश मुझे पता होता तू ऐसा निकले गए. तोह मैं खुद तुझे अपने हाथों से अपनी कोख में hi मार देती.. अगर ऐसा किया होता तो आज ऐसा दिन देखना नसीब नहीं होता"
"कितना छह थी मुझे एक वारिस की.. कितनी खुशियां मनाई थी हम सब ने तेरे जनम दिन पर.. पर तुम.. तुम तो हमारा खून कहलवाने लायक नहीं हो. दफा हो जाओ मेरी हवेली से.. फिर कभी यहाँ मैट आना"
"हमेशा hi मैं खुद पर गर्व किया करता था तुझे अपना बीटा पा कर.. पर तू.. पर तू hi मेरे और मेरे खंडन की इज़्ज़त को मिटटी में मिला गया.. अपने hi घर की बहु बेटियों की इज़्ज़त के साथ खेलने लगा.. थूऊऊऊ है तुझ पर.. निकललललल जाए मेरे घर से.. निकल जा हम सब की ज़िंदगियों से..
"निकलल जा"
"निकलल जा"
"निकलल जा"
"निकलल जा"
आकाश में बदल नहीं थे, चांदनी रात थी, स्टार्स चमक रहे थे. ठंडी ठंडी हवा चल रही थी. मौसम सुहाना था, तूफ़ान के आने का कोई ामकान नहीं था.. पर जो तूफान बार बार दक्ष ठाकुर के अंदर आने लगता था. वो समुद्री तूफ़ान से कहीं बढ़ कर था..
कुछ भी तो नहीं भुला था दक्ष ठाकुर.. सब कुछ ऐसे याद था दक्ष ठाकुर को, जैसे कुछ समय पहले की बात हो.. फिरसे सब याद आने लगा तो उसके अंदर की आग फिरसे बढ़ने लगी. ऐसे समय में कोई काम hi उसके सामने आया करता था.. वेह्शी बन जाया करता था दक्ष ठाकुर. वो पागल तो नहीं होता था. लेकिन पागल पैन की हद्द से भी कहीं बढ़ जाया करता था.
दक्ष ठाकुर शिप पर पिछले 3 साल से अस ा इंजीनियर काम कर रहा था. इस काम में भी दक्ष ठाकुर सलफमादे था. देख कर सब सीख गया था. बिना डिग्री के hi वो शिप पर अस ा नेनेर काम कर रहा था...
दक्ष ठाकुर के अंदर की घुटन बढ़ने लगी तो छत छत पर मौजूद इण्टरकॉम से नीचे कॉल करके बताने लगा
"मैं समुद्र में उतरना चाहता हों"
दक्ष ठाकुर की बात का धयान हमेशा hi रखा जाता था. कुछ देर में शिप धीरे होकर समुद्र में hi रुक गया..
रात का आखरी पहर था. तोह शिप के स्टाफ के शिव सरे पैसेंजर्स सो रहे थे.. अपने कपडे उतार कर, एक अंडरवियर में छत पर रहते हुए hi एक लॉन्ग जम्प लगाया दक्ष ठाकुर ने और दोनों हाथ आगे करते हुए सीधा समुद्र के पानी में जा पोहंचा..
पानी को चीरते हुए वो बहुत नीचे तक गया... फिर वापिस ऊपर की और उठने लगा.. जल्द hi वो पानी की सतह पर था. दक्ष ठाकुर फिरसे पानी में जाने hi वाला था कह ऊपर आस्मां से एक तेज़ रौशनी की लकीर सी चमकती हुई नीचे अपनी और आते हुए दक्ष को दिखी..
रौशनी की उस लकीर की स्पीड बहुत ज़यादा थी. दक्ष हैरान होता उससे पहले hi वो रौशनी की लकीर निचे आते hi उससे टकरा गई..
रौशनी के टकराने से दक्ष ठाकुर को 440 वाल्ट का झटका लगा.. दक्ष बिना तड़पे hi पानी में बहुत नीचे जा कर बेहोश हो गया... हाई वोल्टेज से लगने वाला झटका वो सहन नहीं कर पाया था.
होश आने पर दसख ने आंख खोल कर पहले राइट फिर लेफ्ट देखा.. खुद को साहिल पर लेते हुए पाया तो फिरसे ऑंखें बंद कर लीं.. फर्स्ट तो दक्ष को याद hi नहीं रहा था रात वो शिप पर था और समुद्र में नाहा रहा था..
जैसे hi उसे सब याद आया वह एक झटके में उठ बैठा.. उठते hi वो फिरसे पीछे की और गिर पड़ा.
दक्ष खुद से.. ये मुझे इतनी वीकनेस क्यों फील हो रही है. ऐसे जैसे मैं सालों से भूका हों. जैसे मैंने अपने अंदर की साडी शक्ति का उपयोग कर लिया हो. दक्ष जैसे भी करके खुद के अंदर बची ख़ुशी शक्ति को इकठा करने लगा.. वो लड़खड़ाते हुए उठ खड़ा हुआ. दक्ष आस पास देखने लगा.. देखने पर पाया कह वो तो एक मिनी आइलैंड पर था.
व्हाट इस थिस.. हाउ इस थिस पॉसिबल.. मैं तोह शिप के पास नाहा रहा था. यहाँ कैसे आ गया..
दक्ष समुद्र किनारे खड़ा आइलैंड को देखने लगता तोह कभी समुद्र में.. दूर दूर तक उसे वो शिप नज़र नहीं आ रहा था.. वहां एक आइलैंड के शिव कुछ भी नहीं था. कुछ था तोह चरों और समुद्र का पानी था.
"तुम भूल गए हो दक्ष, तुम समुद्र में नाहा रहे थे.. मैं आस्मां से गिरते हुए तुमसे टकरा गई thi..tumse टकराते hi मैं तुममे समाती चली गई थी.. तुम मेरी पावर को सहन नहीं कर पाए और बेहोश हो गए"
लड़की की आवाज़ सुनकर दक्ष फिरसे लड़खड़ा गया.. वह चरों दिशाओं में देखने लगा.. पर कोई आस पास नहीं था.
"यहाँ तुम्हारे आस पास कोई नहीं है दक्ष. जो तुम्हे नज़र आएगा. यहाँ इस सनसन आइलैंड पर तुम हो और एक मैं हों"
दक्ष की हैरत काम hi नहीं हो रही थी.
दक्ष : तुम कहाँ हो, तुम मुझे नज़र क्यों नहीं आ रही.. क्या तुम इनविजिबल हो..
"मैं तुम्हारे अंदर हों"
दक्ष : व्हाट नॉनसेंस.. ऐसा कैसे हो सकता है. कोई किसी के अंदर कैसे समा सकता है. तुम ज़रूर इनविजिबल हो. और मुझसे झूट बोल रही हो.
"i'm नॉट लाइंग दक्ष.. मैं सच में hi तुम्हारे अंदर हों.. रात मैं तुमसे टकराते hi तुममे समा गई थी. यही वजा बानी जो मेरे दुश्मन मुझे प् नहीं सके"
दक्ष फिरसे बैठ गया.. अपने सर्र को दोनों हाथों से थाम कर वो उस आवाज़ वाली से बोलै
दक्ष : अरे यू स्टिल किडिंग में?
"नहीं दक्ष मुझे क्या ज़रूरत है.. तुमसे मज़ाक करने की"
दक्ष : तो मुझे बताओ, तुम... तुम कैसे मेरे अंदर समा सकती हो और तुम हो कोण, आस्मां से कैसे आ सकती हो तुम.. आस्मां से आने वाला ऐसे तो नहीं आता. कोई आ भी जाए तो उसका ज़िंदा बच पाना मुमकिन नहीं है.
"ेहेहेहेहे.. एक साथ इतने सवाल"
दक्ष : तो बताओ मुझे, खुद से hi सब बता दो..
"यूनिवर्स में इतने सीक्रेट्स हाँ, किसी भी प्लेनेट पर रहने वाले पुरे यूनिवर्स के सीक्रेट्स नहीं जान सकते.. मैं भी ऐसे hi पालनेट से आई हों"
दक्ष : थिस इस आल नॉनसेंस.. ऐसा कुछ भी नहीं है.. पृथ्वी के शिव किसी और प्लेनेट पर ज़िन्दगी मुमकिन नहीं है. अगर है तोह पृथ्वी पर उसका पोहंच पाना मुमकिन नहीं है..
"दक्ष ठाकुर इस यूनिवर्स में सब मुमकिन है.. अपनी दुन्या के बारे में बताओ, हज़ारों साल पहले रहने वाले किसी एक भी वियक्ति को ज़िंदा करके आज की दुन्या दिखा दी जाए तो वो देख कर यही कहेगा "असंभव" ये नहीं हो सकता.. दक्ष एवरीथिंग इस पॉसिबल इन थिस यूनिवर्स.. ऐसे बहुत से सीक्रेट्स हाँ, जिन्हे कोई प् नहीं सका"
उसकी बातें सुनकर दक्ष के सर्र में दर्द होने लगा था.
दसख : मुझे बस इतना बता दो, अगर तुम सच में hi मेरे अंदर हो तो मई तुम्हे महसूस क्यों नहीं कर प् रहा.
" दक्ष मैं तुम्हारे अंदर से बहार निकल कर तो तुम्हारे साँमे विज़िबल नहीं हो सकती. हाँ तुम मुझे देख सकते हो"
दक्ष : वो कैसे?
"वो ऐसे कह तुम अपनी ऑंखें बंद कर अपनी दोनों आँखों के बेच में देखो"
दक्ष उसकी बात सुनकर ऑंखें बंद कर गया.. फिर वो उसी के बताये हुवे पर अमल करने लगा
दसख : ये क्या मुझे तो वाइट वाइट दिख रहा है सब
"अब अपनी आँखों पर दोनों हाथ रख कर देखो"
दक्ष ने अपनी आँखों में दोनों हाथ रख कर देखा तोह
दक्ष : ओह माय गॉड तुम तो मुझे सच में दिख रही हो.. तुम्हारी सूरत मुझे पूरी क्यों नहीं दिखा दे रही. तुम्हारा चढ़ा धुंदला धुंदला क्यों दिखा दे रहा है मुझे.
"तुम अभी मुझे क्लियर नहीं देख सकते.. उसके लिए तुम्हे अपनी ब्रेन पावर बढ़ानी होगी.. दक्ष तुमने अपनी काम हो चुकी पावर को भूल चुके हो"
दक्ष : हाँ ये बात तो मैं सच में भूल hi गया था. तुमने मुझे कुछ सोचने लायक छोड़ा hi कहाँ था. तुम्हे अपने अंदर पा कर मैं शॉक हो गया था.
"तुम बेहोश हो गए थे तो मैं अपने दुश्मनो की पोहंच से दूर होने के लिए अपनी पावर का उसे करते हुए, बेहोशी में hi तुम्हे इस आइलैंड पर ले आई.. ये आइलैंड उस शिप से 300 मिले दूर है.. इसी वजा से तुम्हारी पावर डाउन हुई है दक्ष.. जितनी स्पीड मैंने उसे करि है, वो तुम्हारी पावर से कहीं बढ़ कर है"
अपने दोनों हाथ हटा कर दक्ष ने अपनी ऑंखें खोल दीं..