Episode:17
दसख के पिता ठाकुर अर्जुन सिंह, राजा ठाकुर की बात पर बोल गए थे, वो खुद hi देख लेंगे इन ऑर्ग वळून को. किसी में इतना दुम्म नहीं जो उनके बरसों की म्हणत से खड़े किये हुए बिज़नेस एम्पायर को दक्ष के लिए यौन तबाहो बर्बाद कर दें.
ठाकुर परिवार में पावर के मामले में कोई भी काम नहीं था. अर्जुन ठाकुर भी काम नहीं था. हाई लेवल पर रिलेशन्स थे तोह बात करने का ढंग भी जनता था. उसकी आवाज़ में, बात में पावर भी थी.
पर असली पावर राजा ठाकुर की थी. और राजा ठाकुर ने खुद को इस मामले से अलग कर दिए था. हर बात वही करता तोह उसके बाद कौन इस परिवार को स्टैंड बी कर सकता था. कोण ऐसे लोस्स पुहंचने वळून को जवाब दे सकता था, टकरा सकता था.
पर अर्जुन ठाकुर राजा ठाकुर के बराबर न होते हुए भी काम नहीं था. जितनी पावर और वज़नदार आवाज अर्जुन सिंह की थी, उतनी विक्रम सिंह की नहीं थी.
अर्जुन ठाकुर ने अपने रिलेशन्स का इस्तेमाल किया और CM,PM से लेके सभी सभी नेताओ से बात कर डाली. अर्जुन सिंह का बिज़नेस बहार hi डिस्ट्रॉय हुआ था, बहुत से कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल हुए थे. तोह कइयों ने साथ छोड़ दिए था. इंडिया में अभी भी उनके कई बड़े बड़े प्रोजेक्ट चल रहे थे. कुछ आर्मी वळून के साथ थे तोह कुछ देश के जाने माने बड़े बड़े बिल्डर्स के साथ.
अर्जुन सिंह सबपर ऐसे बरसे सबको अपना आप खतरे में महसूस होने लगा. सब जानते थे, बोलने वाला अर्जुन सिंह नहीं राजा ठाकुर है, और राजा ठाकुर के कहे को नकारना मतलब खुद के लिए तबाही लाना था. पं तक को अपनी कुर्सी खतरे में दिखाई देने लगी. ऐसी hi पावर रखते हुए राजा ठाकुर.. फ़ौरन hi रपो के बड़ों से बात की गई तोह अर्जुन सिंह की बात सुनते हुए रपो ने बिगड़े सभी काम फिरसे सुधरने शुरू कर दिए.
रपो एक वर्ल्ड बेस्ट ऑर्ग थी. शराफत से रहते तोह कभी ऑर्ग अपने पैरों पर कड़ी नहीं रह सकती थी. वो क्या जाने किसी को, राजा ठाकुर क्या, राजा ठाकुर से हरज़ गुना बढ़कर पॉवरफुल इंसान उनके सामने कोई वैल्यू नहीं रक्त था. रपो वाले तोह अपने देश की सर्कार चलाया करते थे. कैसे वो राजा ठाकुर या फिर किसी और की सुन सकते थे. उनका लिया फैसला गलत गलत भी होता तोह भी वो अपनी hi मन मर्ज़ी किया करते थे.
पर इंडिया के साथ बने अच्छे रिलेशन्स और ढेरों कॉन्ट्रैक्ट के चलते वो गिरगिट बन गए. रंग बदलने लगे. जो किया उसपर सॉरी तोह नहीं बोली. पर फिरसे राजा ठाकुर के साथ वो ऐसा नहीं करेंगे ऐसा बोल दिए.
पर दर पर्दा वो अपने दूसरे खेल में लग गए. साज़िशें करना hi तोह उनका असली काम था. वो समझ गए थे, जितना पॉवरफुल परिवार डीके का है. ऐसे hi चलता रहा तो वो कुछ नहीं कर पाएंगे. और डीके हमेशा उनकी पोहंच से बचता रहेगा. इंडिया में भी कई ऐसे हरामज़ादे भी थे, जो पैसों के लिए अपनी माँ, बहनो को भी बेच दिए करते थे. और ऐसे लोग दुन्या के कोने कोने में भी पाए जाते हाँ.
रपो ने कुछ इंडिया से तो कुछ दूसरों कन्ट्रीज के गैंगस्टर्स को कॉन्ट्रैक्ट दे दिए. राजा ठाकुर के परिवार के टोटली बिज़नेस को डिस्ट्रॉय करने के लिए. डीके कभी लौट कर अपने परिवार में आये भी तोह वहां पोहंच के सुरक्षित न रह पाए. उसका परिवार अपनी पावर खो बैठे. डीके को इंडिया में कहीं छुपने के लिए जगा न मिले.
राजा ठाकुर ने अर्जुन सिंह को शाबाशी नहीं दी....
राजा ठाकुर जान गए थे, अब जल्द hi वो समय आने वाला है, जब उनके सरे रूल्स और ाँ बाण शान मिटटी में मिलने वाली है. सब देख के भी वो कुछ नहीं कर पाएंगे.
राजा ठाकुर भी दुन्या देख चुके थे, जानते थे, ओरगजीनेशन वलु से बिगड़ के कभी कोई सुरक्षित नहीं हो पाया. ऑर्ग अगर खुल के कुछ न करे तोह चतुराई पर उतर आती है. फिर ऐसे खेल खेलती है, कोई उनके सामने खड़ा रहने की हिम्मत नहीं कर पता.
मास्टर CHI-FANG इस बारे भी खुल कर राजा ठाकुर को बता चुके थे. और राजा ठाकुर ने यकीं भी कर लिया था. पहले वो देश में रहते हुए, अपने इलाके में रहते हुए, आम जनता की भलाई का काम किया करते थे. अब उनका पोता आल वर्ल्ड में घूम घूम के वही काम करने वाला था. राजा ठाकुर को ये सोच के ख़ुशी थी.
दर था तोह बस इतना के इत्तिहास ऐसी कई घटनाओं से भरा पड़ा है. जब जब कोई समाज सेवाज जन्मा है तोह उससे जुड़े हुओं के साथ दुश्मनो ने कभी अच्छा बर्ताव नहीं किया. अब भी राजा ठाकुर अपने परिवार के लिए चिंतित थे. दक्ष के मैदान में उतरने से पहले hi दुश्मन बिज़नेस के पीछे पद गए थे. जल्द hi वो सबकी जान को भी आने वाले थे.
अर्जुन ठाकुर इंडिया में बिज़नेस की देख रेख करने लगा. कुछ दिन ठीक रहा सब. फिर वही हुआ जो राजा ठाकुर ने सोचा था. जो रपो वळून ने प्लान किया था.
बहार के, इंडिया के अंदर के बहुत से कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल होने लगे. कइयों पर अजीब अजीब घंटाएं घटने लगी. कहीं किसी लाश मिलती तोह कहीं कोई किसी लड़की का रपे करके लड़की को वही फ़ेंक देता. कई जगा पर तोह भयंकर ब्लास्ट भी होने लगे. तीन बड़े शिप जो माल लेके फॉरेन जा रहे थे, वो समुद्र की गहराइयों में पोहंचा दिए गए.
राजा एम्पायर को तबाह करने के लिए दुश्मन कैसे कैसे खेल खेलने लगा था. राजा ठाकुर और परिधि नार्मल रहे तोह सब के पैरों टेल ज़मीन खिसकने लगी. कई सालों की म्हणत से खड़ा किया बुसिनेस एम्पायर दिनों में hi रेट के महक के जैसे ज़मीन बोस होने लगा.
विक्रम सिंह, उसकी पत्नी और बच्चे खुश थे. डेस्टोरी होने वाले बिज़नेस में उनका ओनली 10% hi था. 90% राजा ठाकुर, अर्जुन ठाकुर और परिवार के दूसरे मेंबर्स के नाम पर था.
पूरा देश ये देख के हैरान था, कितनी जल्दी राजा ठाकुर एम्पायर का नाम ख़तम हो रहा हटा.. एक ऐसा एम्पायर जिसकी बुलंदी देखने वाले पीछे को गिर जाया करते थे. ऐसी बुलंदी जिसकी आखरी ऊँचाई तक पोहंच पाना किसी के लिए मुमकिन नहीं था. एक ऐसा परिवार जो देश का सबसे पॉवरफुल परिवार था. राजा ठाकुर जो अपने hi इलाके में खुद की अदालत लगाया करता था. खुद hi फैसले किया करते और खुद hi सजा भी सुनाया करते थे.
राजा ठाकुर का आल वर्ल्ड में पहला हुआ बिज़नेस एम्पायर ऐसे तबाह ो बर्बाद हो रहा था, जैसे भयंकर तूफ़ान आने पर झोंपड़ियों का हाल हुआ करता है. छोटे पेड़ पोड़ों का हाल हुआ करता है.
अर्जुन ठाकुर भाग भाग के थक गया था. शुरू में सब उसके लिए भाग दौड़ करते रहे, फिर वो भी पीछे हैट गए. अर्जुन ठाकुर अपने आदमियों के साथ इंडिया के कभी एक सिटी की और भागता तोह कभी दूसरी सिटी की ऑर्डर. कई बार तोह गंगटेरस से उसका आमना सामना भी हुआ,. कुछ अर्जुन ठाकुर तोह कुछ उसके आदमियों ने गुंडों को मार गिराया. तोह कुछ आदमी अर्जुन ठाकुर के भी मारे गए.
अर्जुन ठाकुर बिज़नेस के बाद अपने ामदियों का लोस्स सहन नहीं कर पाया और घर लौट आया. वो समझ गया था वो कुछ नहीं कर पायेगा. देश में और दुन्या के दूसरे कन्ट्रीज में जैसा सब हो रहा है, ये सब रपो hi कर रही है. ऐसा सब समझ रहे थे. सबको यकीं भी था.
पर रपो ने इस सब से इंकार कर दिए था. ंप और दुसरो ने भी रपो के बड़ों से बात की, इस सब को बंद करने के लिए कहा. पर रपो ने कह दिए. डीके के पीछे केवल वो hi नहीं हाँ. डीके के पीछे वर्ल्ड की और भी दूसरी कई ऑर्गनिज़तिओन्स लगी हुई हाँ. और फिर राजा ठाकुर ने अब तक जैसी लाइफ जी है, उसके सेंकडो दंशमन भी तो हाँ. इस मोके का फायदा वो क्यों नहीं उठा सकते. ज़रूर राजा ठाकुर के सताए हुए hi ऐसा सब कर रहे हाँ. रपो ने ऐसा बयां देकर सबके मोहन बंद कर दिए. रपो ने कुछ गलत भी नहीं कहा था.
और राजा ठाकुर के सताए हुए भी काम पॉवरफुल नहीं थे. अब तोह वो राजा ठाकुर से भी बढ़कर पॉवरफुल बन गए होंगे. राजा ठाकुर की पावर बिज़नेस से थी, रैलाशंस से थी. अब न बिज़नेस रहा था और न hi रिलेशन्स. बिना पावर और बिज़नेस के रिलेशन्स रख के कोई करता भी तोह क्या.
बहुत से परिवार ऐसे भी थे, जो राजा ठाकुर से खर खाये हुए थे. कई राजस्थान में आये बिगड़े लड़को की घट्टिया हरकतों के चलते राजा ठाकुर ने उन्हें वहीँ सजा सुना दी थी. कइयों को रपे के चलते जान से मार दिए था. कइयों के हाथ तोह कइयों के पेअर काट डाले थे. कैयो की तो जीब काट डाली थी तोह कइयों की ऑंखें. अपने बनाये रूल्स पर राजा ठाकुर इतना hi सख्त दिल भी था.
अब वही रपो गैंगस्टर्स के साथ साथ अपना खेल भी खेलने में लग गए थे. सब मिलकर राजा ठाकुर परिवार को पूरी तरह से बर्बाद कर देना चाहते थे. रॉ या देश का कोई और इदारा इस मामले में कुछ नहीं कर पा रहा था. कैसे कुछ करते, कोई एक होता तोह उसके खिलाफ एक्शन भी लेते. रपो ने इंकार कर दिए था. कई गैंगस्टर्स गैंग अलग अलग इलाकों में, अलग अलग अंदाज़ में काण्ड कर रहे थे.
पैसे भी राजा ठाकुर परिवार के पास तेज़ी से कम् होने लगा.. जिनके साथ राजा ठाकुर, अर्जुन सिंह ने कॉन्ट्रैक्ट्स किये थे, वो पैसों की डिमांड करने लगे. वो भी तोह राजा ठाकुर के साथ बर्बाद हो रहे थे. राजा ठाकुर या अर्जुन ठाकुर कैसे सबकी भरपाई कर सकते थे.
अलका जो दिल्ली में रह रही थी. पावर के न रहने से उसके लिए भी खतरे बढ़ने लगे थे. अलका की सिक्योरिटी पर डेप्लॉयड गार्ड्स भी कुछ नर्वस होने लगे. राजा ठाकुर के कहने पे अलका को भी राजस्थान लौटना पड़ा. अलका जब लौटी तोह बदली हुई थी. सतीश ठाकुर को मिल के अलका ने बुरा मोह नहीं बनाया था. ऐसे मिली थी अलका सतीश से, जैसे वो सतीश से मोहब्बत करने लगी हो. सतीश खिल उठा था. अलका को पा के. अलका को बदला हुआ देख के. अलका की खुद के लिए स्माइल और आँखों में चमक पर सतीश बहुत खुश हुआ था.
हालत कुछ और बिगड़े तोह सबके लिए वहां रहना मुश्किल होने लगा. राजा ठाकुर जानते थे, रपो ने हमें कमज़ोर करने के लिए जो खेल खेला था, वो आखरी हद तक पोहंच चूका है. राजा एम्पायर नहीं रहा था अब. तोह सेंकडो दुश्मन उठ खड़े हुए थे.
वैल्यू अक्सर इंसान की नहीं हुआ करती. वैल्यू पावर की हुआ करती थी. और पावर में राजा ठाकुर सबसे बढ़ कर थे. अब वो सबसे बढ़कर नहीं रहे थे. उनकी पावर जो ख़तम हो गई थी.
राजा ठाकुर ने समझ लिया, अब यहाँ से उनका दाना पानी ख़तम होने को है. यहाँ रहे तोह दुश्मन लड़ने के लिए आएगा और लड़ने पर जहाँ दुश्मन के आदमी मरेंगे वहीँ उनके अपने भी कई मारे जायेगे. और राजा ठाकुर अब ऐसा नहीं होने देने चाहते थे.
दक्ष की हक़ीक़त न खुलती तोह राजा ठाकुर न बदलते. राजा ठाकुर न बदलते तो किसी के माई के लाल की इतनी हिम्मत hi कहाँ होती कह वो राजा ठाकुर से टकरा सकता. राजा ठाकुर अब भी इतनी पावर रखते थे. राजा ठाकुर के लिए अब भी कई मर मिटने के लिए तैयार थे. पर राजा ठाकुर अब ऐसा नहीं चाहते थे. जितना जीना था, जी चुके थे, जितने फैसले लेने थे, ले चुके थे. बहुत राज कर लिया था राजा ठाकुर ने सबपर. अब उसके पोते की बारी थी.
ये सरे बिगड़े हालत कोई ठीक नहीं कर पा रहा था. राजा ठाकुर का शेर पोता दसख ठाकुर hi एक ऐसा शेर था, जो सरे बिगड़े हालत ठीक कर सकता था.
हालत ने भयंकर रुख तब बदला. जब दसख की बड़ी सिस्टर पायल सिंह का रिश्ता टूटा. पहले राजा ठाकुर का परिवार देश का सबसे बड़ा परिवार था, तो कोई भी ठाकुर परिवार से जुड़ के खुद को खुशनसीब hi समझता. पर अब ठाकुर परिवार सड़क पर आ गया था. तो कोई उन्हें देखने वाला नहीं था. कोई वैल्यू भी तोह नहीं रह गई थी ठाकुर परिवार की.
सब बहुत दुखी हो गए थे रिश्ता टूटने पर. पायल सिंह रोने लगी थी. ये रिश्ता उसे बोहुअत पसंद था. पसंद की शादी नहीं थी, अर्रंगे मर्रिज थी. पर पायल सिंह को लड़का भ गया थम उसके साथ कई बार घूमने भी जा चुकी थी. अच्छी बॉन्डिंग हो गई थी दोनों में. बहुत से सपने भी देख डाले थे पायल सिंह ने. सरे सपने टूट कर बिखर गए थे. बहुत से प्लान बनाये थे पायल सिंह ने, सब धरे रह गए थे.
पायल सिंह : ये सब उस कमीने की वजा से hi हो रहा है. घर से निकल के भी हमें चैन से जीने नहीं दे रहा. सारा बिज़नेस, साडी इज़्ज़त मिटटी में मिला दी कमीने ने. सिसकते हुए... मेरे घर बनने से पहले hi उजाड़ दिए कमीने ने..
विक्रम सिंह : सही कहा पायल बेटी तुमने, ये सब उस कमीने की वजा से hi हो रहा है.
राजा ठाकुर, रानी देवी और परिधि भी सब देख सुन रहे थे. राजा ठाकुर तोह सुकून से रहे, वो जानते थे, जल्द hi वो लौट के आएगा, फिर दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. पायल अब जो उसे बुरा भला कह रही है. जब सब उसके सामने आएगा तोह कैसे अपनी hi नज़रों में गिर जाएगी.
पर परिधि चुप नहीं रही वो चीख पड़ी...
परिधि : मेरे भाई को कुछ मत कहना दीदी. मेरे भाई ने जो भी किया बहुत सही किया. उनकी अपनी लाइफ है, जैसे चाहें वो जियें. स्ट्रॉन्गेर्स को मार कर पुण्य का काम किया है मेरे भाई ने. कोई पाप नहीं किया और माफ़ करना दीदी आप की शादी भाई के कारण नहीं टूटी है. कच्चे रिश्ते हमेशा hi ऐसे टूट जाया करते हाँ, मतलब के रिश्ते भी ऐसे hi कभी भी साथ छोड़ जाया करते हाँ. एक बार पहले भी आप सब ने भाई को धुत्कार कर घर से निकल दिया था. आप सब से खून का रिश्ता था भाई का. पर रिश्ता कच्चा था आप सब का भाई से. पक्का होता तोह, अटूट विश्वास होता तोह आप सब सोचते भाई ऐसा कर भी कैसे सकते हाँ. कुछ नहीं किया था मेरे भाई ने. ज़रूर किसी दुश्मन ने कोई चाल चली थी. और आप सब कच्चे रिश्तों में बंधे मेरे भाई पर आरोप लगा कर उसे धुत्कार कर, उसपर थूक कर उसे घर से निकल गए.
अलका भी चीख पड़ी : सही किया जो उसे घर से निकल दिए था. वो था hi इस लायक. कमीना कहीं का.
अर्जुन सिंह और रोहिणी सिंह बस देख रहे थे. एक बार फिरसे बरसों बाद हवेली में दसख का ज़िक्र हो रहा था. एक बार फिरसे उसे लेके हवेली में सब बहस करने लगे थे. पर बिज़नेस के देह जाने से वो भी टूट चुके थे. साडी इज़्ज़त सारा नाम मिटटी में मिल चूका था. दक्ष के कारण hi ऐसा सब हुआ है, ये वो भी मान रहे थे. वो दसख की फवोइ में नहीं बोले.
सतीश तो अलका का पालतू बना हुआ था. वो अलका की सपोर्ट में बोल पड़ा.
सतीश : कितना दर्द दिए था उस कमीना ने तुम्हे. कितने बरस तुम दुःख में रही हो अलका. मैं कभी तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा अलका. हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा.
अलका प्यार से सतीश को देखने लगी. तोह सतीश की बहने और माँ भी दसख को लेके बातें करने लगे. वो साडी बातें फिरसे दोहराई जाने लगी जो बरसों पहले हुई थी.
राजा ठाकुर एक साइड बैठे हुए सब को देख रहे थे. वो किसी को कैसे कह सकते थे, तुम सब गलत हो, गलत तो वो भी थे, अब भी वो खामोश थे, किसी से नहीं कह सकते थे. बंद करो सब अपनी अपनी बकवास मेरा पोता कभी गलत नहीं था, न कल और न hi आज. वो कभी गलत हो hi नहीं सकता था. हम सब की बुद्धि hi उस समय भ्रष्ट हो गई थी. अपने hi खून को हम पहचान नहीं पाए थे. कितना बड़ा आरोप अपने hi खून पर लगा बैठे थे. कितना बड़ा ज़ुल्म हम अपने hi खून पर कर बैठे थे. पर राजा ठाकुर कुछ बोल नहीं सकते थे. जिसका खेल था, लौटने के बाद अब उसी को अपना खेल खेलना था.
सब दक्ष को गलत कह रहे थे तोह परिधि भी राजा ठाकुर की छूट मिलने पर चीख चीख कर अपने भाई को बेगुनाह बोल रही थी. अर्जुन सिंह, रोहिणी सिंह जो पहले दक्ष को लेके ग़ुस्से में थे. वो राजा ठाकुर को खामोश तोह परिधि को बढ़ चढ़ कर बोलते देख कर हैरान थे.
रोहिणी माँ थी, एक गलती के बाद कई साल अपनी hi कोख से जन्मे बच्चे को गलत बोलती आ रही थी. आज राजा ठाकुर को खामोश देखा, परिधि को खुल कर बोलते सुना तोह उसके दिल की धड़कन बेकाबू होने लगी. आज बरसों बाद उसके दिल में अपने बेटे के लिए कुछ हलचल हुई थी. आज उसे भी लग रहा था, जैसे सच में hi कुछ गलत हुआ था उसके बेटे के साथ. वर्ण राजा ठाकुर ऐसे चुप न रहते, उसकी बेटी इतना न बोलती. दसख का भाई भी साइड में था. उसे अपने भाई को सही गलत कहने की काम hi आदत थी. हाँ उसे समय ज़रूर वो भी दूसरों के साथ मिलके कुछ गलत बोल गया था. फिर बरसों दसख का ज़िक्र नहीं हुआ तोह वो भी दक्ष को भूल गया. न अच्छे अंदाज़ में याद करता और न hi बुरे अंदाज़ में.. आज उसे ये दुःख ज़रूर था, दसख के कारन उसकी लाइफ भी बर्बाद हो रही थी. वो भी सबके साथ सड़क पर आ गया था.
अलका जो इतने दिनों से खामोश थी, डाब की बातें सुनकर कभी कभी वो भी दक्ष के खिलाफ बोल लेती थी. सतीश के साथ ऐसे जुड़ के कड़ी थी वो, जैसे उसने मैं से सतीश को अपना मान लिया हो. दक्ष की फवौर में एक भी बात उसके मोह से नहीं निकल रही थी. और यही बात परिधि का ग़ुस्सा भी बढ़ा रही थी. एक अलका hi उसके भाई पर विश्वास कर लेती तोह वो कभी भी इतने समय तक दूर न रहता. जितना वो टूट गया था, इतना कभी न टूटा. अलका दसख की ज़िन्दगी थी, अलका की ज़िन्दगी भी दसख था. अलका को तोह दक्ष पर अपना विश्वास बनाये रखना चाहिए था. यदि बनाये रखती तोह हालत बदले होते.
पर ऐसा नहीं हो पाया था. अलका ने भी दक्ष पर थूक दिए था. अपनी बेपनाह नफरत के साथ अपनी ज़िन्दगी से निकल फेंका था. पर दिल से नहीं निकल पा रही थी. अब जाने क्यों वो दक्ष के खिलाफ होक सतीश से चिपकी हुई थी. शायद राजा एम्पायर के साथ साथ उसके पिता का सारा बिज़नेस भी ब्लास्ट हो गया था. इसी कारण उसका ग़ुस्सा बढ़ा हुआ था.
अलका के पापा का सारा बिज़नेस राजा ठाकुर, अर्जुन ठाकुर hi संभल रहे थे.
रत के समय विक्रम सिंह, रुपाली सिंह और उसके बेटे बेटियां मिलके प्लान बनाने लगे.
अगली सुबह सब फिरसे एक साथ थे.
विक्रम सिंह राजा ठाकुर से : बाबू जी हमें यहाँ से चल देना चाहिए, यहाँ सबके लिए अब खतरा बढ़ गया है. हम बेटियों वाले हाँ बाबू जी कभी भी कुछ भी हो सकता है. दुश्मन बहुत hi नीच है, कैसे थोड़े से दिनों के हमें सड़क पर ले आया है.
राजा ठाकुर विक्रम सिंह को देखने लगे. तोह सब विक्रम सिंह की बात पर हैरान रह गए थे. सब सोचने लगे. सच में hi अब हवेली रहने लायक नहीं रही थी. यहाँ रहे तोह कभी भी कुछ भी हो सकता था. दुश्मन एक नहीं था, बहुत से दुश्मन थे, और कोण कोण था, ये भी नहीं जानते थे. कोण कोण राजा ठाकुर के लिए, पुरे परिवार के लिए दिल में खार रखे हुए था, कोई नहीं जनता था.
राजा ठाकुर सबको देखने लगे. सब एक दूसरे को देख रहे थे. सबके चेहरों के भाव विक्रम सिंह की बात को सही मान रहे थे. यहाँ सब सुरक्षित नहीं थे. ये सबको लग रहा था.
सोहिनी सिंह जो अपने दिल में आयी बहुत सी बातें "जो दसख ठाकुर के बारे में थे" अर्जुन सिंह से कर चुकी थी. अर्जुन सिंह भी रोहिणी की बात पर दूसरे एंगल से सोचने लगा था. पर उसका दिल नहीं माना. वो रोहिणी से यही कहता रहा, दक्ष hi गलत था. जैसा उनके किया था, कैसे कोई और बात हो सकती थी. दक्ष को कुछ भी करने पहले हम सबके बारे में सोचना चाहिए था. अर्जुन सिंह को भी अपनी साख बड़ी पायरी थी. अब वो सड़क पर आ गया था. तोह कैसे दसख को सही कह सटका था.
रोहिणी सिंह इस समय बस दक्ष के बारे में hi सोच रही थी. उसे लेके विचारों में उलझी हुई थी. तो परिधि ठाकुर अपने दादा को देख रही थी, जो पुरकुसुं थे.
राजा ठाकुर : यहाँ से कहीं और कहाँ जायेंगे हम सब.. राजा ठाकुर विक्रम को परखती नज़रों से देखते हुए बोले.
अलका जिसे सतीश पहले hi सब बता चूका था.
अलका : दादा जी आप सब मेरी खानदानी हवेली पर चले चलिए, वहां आज भी मेरे इंतज़ार में हाँ सब. वहां सब सेफ भी रहेंगे.
राजा ठाकुर : वहां जाना सही नहीं रहेगा. कुछ दिन और इंतज़ार कर लेते हाँ. फायर देखते हाँ, क्या करना सही रहेगा.
रुपाली दसख की चची बोली : माफ़ करना बाबू जी, पर मैं अब यहाँ नहीं रह सकती और न hi मेरे बच्चे अब यहाँ रहेंगे. मई किसी को खतरे में नहीं दाल सकती. यहाँ रही तोह कभी भी कुछ भी हो सकता है.
अलका : दादा जी मैं भी अब यहाँ नहीं रहना चाहती. मुझे लगता है, अब मुझे अपनी खानदानी हवेली लौट जाना चाहिए. पता नहीं क्यों मुझे अब यहाँ पर घुटन होने लगी है. और फिर वहां भी तोह मेरा बरसों से इंतज़ार किया जा रहा है. मेरी असल भी तोह वही है न दादा जी. आपने मेरे लिए बहुत कुछ किया है दादा जी. पर मैं यहाँ नहीं रह सकती. अब तोह यहाँ का सब ख़तम भी हो चूका है तोह यहाँ रह के मैं खुद को खतरे में नहीं दाल सकती.
राजा ठाकुर लका को दुःख से देखने लगे. अलका ऐसी बात बोल जाएगी, राजा ठाकुर ने सोचा नहीं था. राजा ठाकुर अलका को देखते रह गए. पायल सिंह भी चुप नहीं रही वो भी बोल पड़ी.
पायल सिंह : मैं भी अब यहाँ नहीं रहना चाहती दादा जी. मुझे भी चाचा चची और सबके साथ किसी सेफ जगा जाना है. अरु सेफ जगह अलका की हवेली है तोह मई भी वहां जाना चाहूंगी. यहाँ रही तोह उस कमीने के दुश्मन सबके साथ मुझे भी मार देंगे. उस कमीने के किये काण्ड पर अब मुझे कोई भरोसा नहीं रहा है. जैसे दुश्मन उसके, हम सब के पीछे पड़ें हुए हाँ, यहाँ कोई भी सेफ नहीं है, मैं भी नहीं. इसलिए मैं भी यहाँ से जाना चाहूंगी. रिश्ता क्या टूटा था, पायक सिंह को भी हिम्मत मिल गयी थी. शायद वो भी जान गई थी, अब राजा ठाकुर "राजा ठाकुर" नहीं दादा ठाकुर बांके रह गए हाँ. तभी उसमे भी हिम्मत आ गई थी. बिना झिझके वो खुल के बोल गई थी.
पायल सिंह की बात पर राजा ठाकुर को दुःख नहीं पोहंचा. कितना प्यार करती थी पायल अपने भाई से, जब अपने उसी भाई को थप्पड़ मार मार के, ज़लील करके घर से निकलने में सबसे आगे रही तोह अब भी कुछ भी कर जाती, राजा ठाकुर को दुःख नहीं पोहचने वाला था. राजा ठाकुर अपने टूटते परिवार को देख रहे थे. पर वह इसे टूटने से बचा भी नहीं सकते थे.
रोहिणी सिंह के दिल में हो रही हलचल और भी बढ़ने लगी थी.
रोहिणी सिंह : न पायल बेटी तुम ऐसा कोई फैसला मत करो. जैसा बाबू जी बोलते हाँ, वही सही रहेगा. रोहिणी अपनी सास के पास पोहंची. रानी देवी भी सब मिटटी में मिल जाने पर बहुत दुखी थी. राजा ठाकुर ने उसे भी कुछ नहीं बताया था दक्ष के बारे में. वो भी अब तक दक्ष को hi गलत माँ रही थी.
रोहिणी सिंह : माँ जी रोक लें न मेरी पायल को. उसे बोल दें वो ऐसा फैसला न ले.
रानी : दसख के कारण हम सब बर्बाद हो चुके हाँ रोहिणी बेटी. पायल की शादी भी टूट चुकी है. मैं या कोई और कैसे उसके दर्द को काम कर सकते हाँ. इस समय पायल को जो सही लगेगा, वही करेगी. और हम उसे रोक भी नहीं सकते. और फिर ठीक hi तो कहा है उसने. उसके साथ साथ सबको खतरा है यहाँ पर. मैं तोह कहती हों हम सब को यहाँ से चले जाना चाहिए.
रानी राजा ठाकुर को देखते हुए बोली : सुनिए जी सबका यहाँ से जाना सही रहेगा. आप सबको जाने की परमिशन दे दें.
राजा ठाकुर : आप कुछ नहीं जानती महालक्ष्मी जी, अलका के पुरखो की हवेली जाना सही फैसला नहीं है. वहां न हम अब जायेंगे और न hi फिर कभी. वाहन जाना किसी के लिए भी सेफ नहीं है. जानती हाँ न आप वो कहाँ पर है. देहरादून के पहाड़ों में बसी एक बस्ती में है वो हवेली और वहां किसी को भी गए बरसों बीत चुके हाँ. नहीं वहां कोई नहीं जायेगा. वहां सब और भी खरते में आ जायेंगे. वहां दुश्मन पोहंचा तोह निकलने का रास्ता भी नहीं मिलेगा.
रानी देवी अपने पति की बात पर खामोश हो गई. वो कह तोह सकती थी. पर बात मनवा नहीं सकती थी. फैसला तोह राजा ठाकुर का hi होना था. जो भी फैसला करते, रानी देवी को मानना पड़ता.
रुपाली : पर मैं अपने बच्चू के साथ यहाँ नहीं रह सकती.
विक्रम सिंह : हम आज hi यहाँ से निकल जायेंगे बाबू जी. अब हम यहाँ पर नहीं रह सकते. यहाँ अब कुछ भी नहीं रह गया.
सतीश : अलका तुम साथ हो न मेरे.. अलका सतीश की आँखों में देखती हुई.
अलका : हाँ सतीश अब मैं और एक पल भी यहाँ नहीं रह सकती. हम आज hi यहाँ से निकलेंगे.
सतीश खुश हो गया.
पायल सिंह : मुझे भी अपने साथ hi लेते जाना सतीश, मुझे भी वहीँ जाना है. मैं जा के पैकिंग करती हों..
पायल उठ के चली गई. विक्रम सिंह, उसकी पत्नी, बेटे और बेटियां भी उठ के पैकिंग करने चले गए.
राजा ठाकुर : अर्जुन सिंह तुम नहीं जाना चाहोगे विक्रम के साथ.
अर्जुन सिंह : नहीं बाबू जी, मैं आपके साथ hi रहना चाहूंगा. हालत जैसे भी हुए, मिलकर रहेंगे. खतरा हुआ तो आपके साथ मिलके लडूंगा. जान भी चली जाए तो भी ग़म नहीं है बाबू जी..
राजा ठाकुर मैं में.. तुम न होते तोह दक्ष भी ऐसा न होता. तुमने कभी कोई गुनाह नहीं किया, हमेशा मेरी hi मानी है, मैं तुमसे खुश तोह हो अर्जुन सिंह, पर तुम भी अपने बेटे को दोषी मान बैठे. तुमने भी उसे गलियां देकर, धुत्कार कर घर से निकला था. हाहहह काश कोई उस समय मुझे ये फैसला लेने से रोक सकता. तो आज ये दिन न देखने पड़ते. कैसे सामना कर पाऊँगा मैं अपने पोते का.
रोहिणी पायल के जाने का सुनके दुखी थी. वो आंसू बहाने लगी थी. वो छह के भी उसे रोक नहीं प् रही थी. ज़िद्दी भी थी पायल सिंह.
पायल सिंह, अलका और सबके साथ हवेली से चली गई. किसी ने भी जाने वळून को अलविदा नहीं कहा. राजा ठाकुर को मास्टर CHI-FANG ने बोल दिए था, जो हो रहा है, होने दो. समय खुद से खेल खेल रहा है. तोह उसे खेलने दो. जल्द hi दक्ष का खेल शुरू होने वाला है. परिवार बिखर रहा है तोह वो बिखरा hi रहेगा. आज बिखर रहा है तोह बाद में भी बिखरेगा hi.
राजा ठाकुर दुखी थे, बेहद दुखी. पर कुछ कर नहीं सकते थे. शर्मसार थे, बहुत ज़यादा. पर उनका सर अब जल्दी उठने वाला नहीं था. दक्ष के आने पर शायद उनका झुका सर कभी उठ सके. ये तोह बात की बात थी.
दसख की बुआ का परिवार इन सभी झमेलों से बचा हुआ था. उनका बिज़नेस अलग था, उनके डीके मटर से कोई लेना देना नहीं था.. रपो ने उन्हें कुछ नहीं kaha.Unke बिज़नेस को डिस्ट्रॉय नहीं किया.
एक दो चक्कर हवेली के लगा के वो चले गए थे. वो कोई मदद भी तोह नहीं कर सकते थे. करने की कोशिश करते तो उन्हें भी सड़क पर ले आया जाता. सभी की दुश्मनी थी तोह राजा ठाकुर के परिवार से थी. बुआ परिवार से कोई दुश्मनी नहीं थी. वो भी किसी से काम नहीं थे. उनका अपना बहुत बड़ा खंडन था, कुछ पॉलिटिक्स में थे तोह कुछ बहुत बड़े बिजनेसमैन. एक को डिस्टर्ब करते तोह सब को करना पड़ता. सबको करते तोह देश का बहुत बड़ा नुकसान हो सकता था.
इसी कारण बुआ परिवार बचा हुआ था. राजा ठाकुर ने भी उनको अपने घर में खुश रहने को बोल दिए था. कोई भी मदद करने से मन कर दिए था. राजा ठाकुर समझ गए थे, अब उनका ज़वाल शुरू हो चूका था. अब जो समय शुरू होगा वह होगा उनके पोते का समय. राजा ठाकुर के बाद वो बनेगा असली सम्राट, पुरे देश का नहीं, पुरे वर्ल्ड का नहीं, निमुनिका का भी. इतना वो समझ रहे थे. दसख की षिमुना से सांगत पर भी वो बहुत कुछ जान गए थे. और फिर मास्टर CHI-FANG ने भी उन्हें कुछ कुछ बता दिया था. तभी तोह राजा ठाकुर शांत थे. खुश थे, बिगरे हालातों पर भी चिंतित नहीं थी. साख बिड़द गई थी. इज़्ज़त मिटटी में मिल गई थी. बिज़नेस रहा न पास कोई पैसा. फिर भी वो शांत थे. बेहद शांत. शायद आने वाले समय की आहात उन्हों ने सुन ली थी.
बुआ और सब बहुत दुखी भी हुए थे, दिल से वह सब भी राजा ठाकुर की मदद करना चाहते थे. पर इंटरनेशनल लेवल मटर था, कैसे वो कुछ कर सकते थे. हाई लेवल पर राजा ठाकुर एम्पायर को डिस्ट्रॉय किया गया था, कैसे कोई उनकी मदद कर सकता था.
कोई बीच में आता तोह रपो खेल बदल बदल कर खेलती. पर जीत उसी की होती.
रॉ की नज़र थी राजा ठाकुर के परिवार पर. उनके बहुत से एजेंट्स बस्ती में दूर दूर तक पहले हुए थे. राजा ठाकुर को वो बर्बाद होने से तोह नहीं बचा पाए थे. पर राजा ठाकुर के परिवार की सुरक्षा के लिए वो ज़रूर मैदान में उत्तरी हुई थी. मैं से वह भी डीके को सही कह रहे थे. मटर रपो का था, पॉलिटिशंस किसी के नहीं होते, ये रॉ वाले जानते थे. वो भी परदे में रहते हुए बहुत कुछ करना चाहते थे.
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सोफिए निमंस के वापिस लौट जाने के बाद डीके, षिमुना की और आकर्षित हो गई थी. सोफिए ने ीबन मार्श को ये मिशन दिए था. खुद वहां होती तोह शायद रिजल्ट hi कुछ और होता. ीबन मार्श फ़ैल हो गया था, पहले मिशन में. षिमुना को देख कर भी अपने कब्ज़े में नहीं कर पाया था. wang-zhi और षिमुना ने सबको तिगनी का नाच नचा दिए था.
उस घटना के बाद wang-zhi तोह टेम्पल में नज़र आती रही. पर षिमुना किसी को नज़र नहीं आये. सिमोना के सामने आ जाने से टाइगर की मौजूदा लुक भी रिकॉर्ड से निकल ली गई थी. डीके अब टाइगर के नाम से एक चिनेसे hi सूरत में रह रहा है, ये बात जान के सबको झटका लगा था.
षिमुना नज़र आणि बंद हुई तोह टाइगर पहले से hi सबकी नज़रों से ओझल था. Wang-zhi टेम्पल में ओपनली घूमती फिरती, टेम्पल के अंदर किसी किसम की कोई करवाई नहीं की जा सकती थी. यहाँ तक कह टेम्पल के अंदर सटेललिते द्वारा भी नहीं देखा जा सकता था. मास्टर CHI-FANG नहीं चाहते थे, कोई ऐसा कर पाए. और फिर चीन किसी को इतनी इजाज़त कहाँ देता क कोई टेम्पल को सॅटॅलाइट से देख भी सके.
कई एजेंट्स टेम्पल के अंदर रहते हुए षिमुना और dk(tiger) को खोजते रहे. पर दोनों किसी को भी नहीं मिल पाए.
मार्गरेट भी बाओ एजेंट्स को देख कर है दिए करती थी. वो जानती थी, टेम्पल में जो खो जाए उसे ढूंढा नहीं जा सकता था. और फिर कोई ऐसा करता भी तो मार्गरेट खुद से उसकी जान ले लेती. रपो वाले बहार hi कोशिश कर रहे थे. बाओ वाले अंदर घुस कर कोशिश कर रहे थे. मार्गरेट यहाँ ट्रैंनिंग कर रही तोह उसने रपो को बोल दिया था, डीके या षिमुना अगर टेम्पल के अंदर हाँ भी तोह उन्हें ढूंढा न जाये. जब वो बहार निकले तोह फिर उनके साथ कुछ भी किया जा सकता है. वह खुद कुछ भी सब कर जायेगी. पर टेम्पल के अंदर किसी किसम की कोई करवाई करने की इजाज़त मार्गरेट भी रपो को नहीं दे सकती थी. और रपो मारगरेट की कोई बात ताल भी नहीं सकते थे. मार्गरेट रपो की स्पेशल एजेंट थी. उसकी बात हमेशा मानी जाती थी.
समय बीतने लगा. टाइगर अपनी ट्रैंनिंग में निकलता जा रहा था. Wang-zhi और षिमुना की बाओ एंड रपो वळून से फाइट को 2 महीने बीत चुके थे.
टाइगर को टेम्पल आये हुए और ट्रैंनिंग करते हुए 3 महीने से ऊपर का समय हो चूका था. आज के hi दिन राजा ठाकुर हवेली पर सब एक साथ बैठे हुए दक्ष के कारण होने वाले लोस्स पर बहस कर रहे थे. आज के hi दिन पायल सिंह अलका और चाचा परिवार के साथ देहरादून के पहाड़ों में बसी एक बड़ी बस्ती में मौजूद हवेली के लिए निकल चुकी थी.
टाइगर फाइटिंग के साथ साथ टेलिपाथी की ट्रैंनिंग में लगा हुआ था. फाइटिंग तो टाइगर सभी नहीं सीख पाया था. बहुत सी फाइटिंग स्किल वो ज़रूर सीख चूका था. पर उसने भी अपना फोकस सबसे ज़यादा टेलिपाथी पर hi बढ़ाया हुआ था. मास्टर ने भी कह दिए था, टेलिपाथी सबसे बढ़कर है, फाइटिंग समय के साथ साथ सीखी जा सकती है. पर टेलिपाथी की सीख में वक़्फ़ा मुमकिन नहीं है.
टाइगर को दो महीने लगे थे, हज़ारों लाखों आवाज़ों में से किसी एक आवाज़ पर अपना फोकस बनाने में. टाइगर के लिए ये काम सबसे मुश्किल काम सबत हुआ था. इंसानी आवाज़ें, जनवाज़ो की आवाज़ें, ाहूँ सिसकियों की आवाज़ें सुन सुन के अक्सर टाइगर का धयान टूट जाया करता था. कभी ऐसा भी होता के सभी आवाज़ें एक साथ मिलके इतने भयंकर शोर में बदल जाया करती थी. टाइगर को लगने लगता, कहीं सच में hi उसका मेन्टल बैलेंस न बिगड़ जाए. टाइगर को रेयर थिंग्स का कारण मिली पावर और दोनों मास्टर्स की दी गई ख़ास योग ट्रैंनिंग hi बचा पायी थी. वर्ण जिस तेज़ी से टाइगर आगे बढ़ रहा था, टाइगर वाकई पागल हो सकता था.
टाइगर अब टेलिपाथी की लास्ट स्टेज पर था. या ये कहना सही रहेगा, टाइगर टेलिपाथी सीख चूका था. एक आवाज़ पर उसका कण्ट्रोल बन चूका था. और अक्सर वो एक समय पर एक आवाज़ पर धयान देते हुए धयान में व्यस्त रहता.
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रात देहरादून सिटी में मौजूद एक कोठी में बिता कर सब अगले दिन की सुबह बस्ती के लिए निकल चुके थे. बड़े hi भयंकर सफर के बाद दिन के 4 बजे सब हवेली पर जा पोहंचे. अलका को देख के पूरी बस्ती में शोर मच उठा था. सब चीख चीख कर एक दूसरे को बुलाने लगे. अलका भी सबको देख कर बहुत खुश हुई. पायल सिंह यहाँ आने पर थकन तो महसूस कर रही थी. पर अंगेजमेंट के टूटने पर मिलने वाले ग़म से वह फ़िलहाल निकल चुकी थी.
पायल सिंह को ये एडवेंचर बेहद पसंद आ रहा था. अलका और अपनी कौसिन्स के साथ रहते हुए उसने इस सफर को खूब एन्जॉय किया था.
कुछ hi देर में पूरी बस्ती हवेली के बहार थी. हवेली के 1सत फ्लोर पर स्टेज बना हुआ था. मतलब जहाँ अलका और सब थे, वो एक छत थी, निचे एक कमरे था, पीछे हवेली का फर्स्ट फ्लोर उस छत से आत्ताच था. ये ख़ास बस्ती वळून से बात चित करने के लिए अलका के बाप दादा न बनवाया था.
अलका भी सबके साथ वहीँ थी, अलका को विक्रम सिंह ने एक बड़ी कुर्सी कर, जो अलका के पुरखो की ख़ास कुर्सी थी, उसपर बिठाया था.
अलका वहीँ बैठ के अपनी बस्ती वळून से बात करने लगी. बस्ती वाले अलका को फिरसे अपने बीच पा के बहुत खुश थे. अलका के नाम की जय जय कार कर रहे थे. इतने खुश थे, ख़ुशी के मारे रो रहे थे. हज़ार से ऊपर का मजमा था.
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सतीश : अलका क्या तुम मुझसे शादी के लिए तैयार हो.
अलका कुछ हेरात से सतीश को देखने लगी.
सतीश : अलका सच कहूं तोह मई बहुत समय से तुम्हारे लिए बेचैन हों, एक पल भी अब तुम्हारे बिना नहीं रहा जाता. कितनी देर हो गई है अलका हमारी सगाई हुए. अब शादी कर लेनी चाहिए.
अलका सतीश को देखती रही. कुछ देर बाद वो बोली.
अलका : सतीश मेरी ज़िन्दगी में पहले दसख था, तुम अच्छे से जानते hi हो. पर अब वो नहीं है, मेरी तुमसे सगाई भी हो चुकी है. मैं से न भी सही, पर मैंने तुमसे शादी की हामी भरी है. मोहब्बत तो मैं तुमसे नहीं कर सकती, पर तुम्हारी पत्नी ज़रूर बांके रहूंगी. बाद में भी करनी hi है तोह अब हो जाये क्या फर्क पड़ता है.
अलका ने कहा तोह सतीश ख़ुशी से झूम उठा. वो सोच भी नहीं सकता था, अलका उसे इतनी बड़ी खुश खबरि सुनाएगी. कहाँ वो उससे बात करना भी गवारा नहीं करती थी, कहाँ अब वो उससे चिकपणे भी लगी थी. उससे अच्छे से बात भी करने लगी थी. अब शादी के लिए भी फ़ौरन hi मान गयी थी.
सतीश ने सबको बता दिए था, अलका शादी के लिए तैयार है. पायल सिंह और सतीश के भाई बहनो ने बहुत ख़ुशी मनाई.
बस्ती के बड़ों से बात की गई. जब पुजारी जी से बात हुई तोह वो बोले.
पुजारी : अलका बेटी मुझे तुमसे अकेले में बात करनी है. पुजारी की बात पर सब वहां से दूर होक खड़े हो गए. पुजारी जी और अलका दोनों वही रह गए.
पुजारी : अलका बेटी क्या तुम जिस लड़के से शादी करने जा रही हो, उसे पुरे मैं से स्वीकार कर रही हो.
अलका : जो पुजारी जी, बहुत समय पहले hi मेरी सतीश से सगाई भी हो चुकी है. मैं इस शादी से खुश हों.
पुजारी : पर मुझे वो लड़का सही नहीं लगा रहा अलका बेटी.
अलका : पर मेरे लिए वही सही है पुजारी जी. उसके शिव मैं किसी और से शादी नहीं करना चाहती.
पुजारी अलका को घोर से देखने लगे. अलका की चीन पर एक टिल था, पुजारी वो देखने लगे.
फिर वो बोले.
पुजारी : अलका बेटी तुम्हारे ये टिल कबसे है, क्या ये बनाया हुआ टिल है.
अलका : पुजारी जी कैसे बात करते हाँ, क्या टिल भी बनाया जा सकता है.
पुजारी मैं में-- शमा करना अलका बेटी, तुम बहुत समय बाद आई हो तोह परख करना ज़रूरी है.
पुजारी ऐसे hi कुछ और सवाल अलका से पूछता गया. और अलका पुजारी को जवाब देती गई.
पुजारी फिर बोलै : अलका बेटी क्या तुम अपने खानदानी राज़ के बारे में कुछ जानती हो.
अलका हैरान होक : कैसा राज़ पुजारी जी, मैं किसी राज़ के बारे में नहीं जानती.
पुजारी जी अलका की आँखों में देख रहा था. अलका की आँखों में देख के पुजारी को लगा, अलका सच में कुछ नहीं जानती. ये देख के पुजारी जी कुछ पुरसुकून हो गए..
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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..
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