Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 8 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge

ये बात तोह है. अपडेट काफी लेंथी हो जनि थी तोह सब नहीं लिखा जा सकता था. नेक्स्ट में बहुत कुछ खुल के सामने आएगा.

अलका है या नहीं, आने वाली अपडेट में पता चलेगा. स्नैक्स उसके साथ क्या करते हाँ ये भी दिख जायेगा.

खूब कहा आपने...

थैंक्स भाई.. साथ बने रहे .. ✨ नेक्स्ट अपडेट आज hi सेकंड टाइम पोस्ट होगी
 
बहुत बहुत शुक्रिया ज़ोरो भाई.. 🙏🙏🙏

दक्ष और षिमुना ने कमल तोह करना hi था. पायल को भी बचाना था. षिमुना तोह पहले भी काम नहीं थी. अब तोह वह और भी बेस्ट होगी है. और फिर दक्ष के परिवार के लिए तोह वो कुछ भी कर जाएगी.

अलका जहाँ सतीश के साथ पोहंची हुई थी. वहां सतीश मारा तोह अलका के लिए जान के लाले पद गए.. सोफिए उसकी कुछ मदद नहीं कर सकती थी तोह ऐसा hi उसे बोलना था. उसे वैसे भी किसी की परवा क्यों होने लगी.

सहक्रिया ज़ोरो भाई.. आज पोस्ट होने वाली अपडेट में कुछ डिटेल खुल के सामने आ जाएगी... 🙏🙏👌👌👌
 
नताशा hi थी वह भाई. शूज वाली गर्ल

आज की अपडेट में पता चल जायेगा

सोफिए को हिरे की छह नहीं है. उसे माला से मतलब है. और ऑर्ग वाले तोह कैसे भी करके कोई खबर सुनकर बाल की खाल निकल कर साडी इन्फो प्राप्त कर लेते हाँ. सोफिए भी जान गई थी.

वेट भाई.. सब सामने आ जायेगा

डेंजर में तोह अब ठाकुर परिवार रहेगा hi. और निमंस के कारण पूरी वर्ल्ड भी. शुक्रिया भाई. साथ बने रहे ✨
 
Episode:21


रूस में मौजूद लड़की नताशा थी. जो स्टुपिड से मिले पेंट पर एक्सपेरिमेंट करके सही मानो में इनविजिबल हो गयी थी. खुद भी एक साइंस स्टूडेंट थी. जीनियस थी, स्टुपिड से सब जान कर, रिसर्च करते हुए एक ऐसा पेंट बना डाला, जिसे जब चाहे उतरा भी जा सकता था.

डेमें उस एरिया का सबसे बड़े गैंग का सबसे बड़ा बॉस था. कई सालों की म्हणत से उसके ये मुक़ाम हासिल किया था. गंगतर था पर दिल का साफ़ इंसान था. तभी नताशा उसके पास गई थी.

नताशा : दमें मुझे पुरे वर्ल्ड में अपने काम के लोग कहीं से भी मिल सकते हाँ. पर मुझे तुम काली सूरतों वाले, मैं के सच्चे कहीं नहीं मिल सकते. हम सब साथ मिलकर काम करेंगे. तुम्हे जहाँ भी कठनाइयां हुई मई सोल्वे कर दिया करुँगी. कोई ऐसा काम जो तुम नहीं कर सकते. मैं कर दिया करुँगी. तुम यहाँ पर सैंकड़ों के लीडर हो तोह मेरे साथ मिल जाने से हज़ारों लाखों के लीडर बन सकते हो. पूरी वर्ल्ड में कहाँ कहाँ नहीं हो तुम लोग. तुम सब पावर में भी कइयों से बढ़ कर हो. बूत थिस पावर ओनली फिजिकल पावर.. तुम्हे चाहिए मैनपावर, पॉलिटिकन पावर. फिर कभी कोई तुम्हे तोड़ न सके, मोड़ न सके. तुम्हे झुका न सके, तुम्हारे सामने सर उठा न सके. और ऐसी पावर मेरे साथ रहते तुम्हे प्राप्त हो सकती है दमें..

नताशा की बात पर सबके पिस्टल्स वाले हाथ झुकते चले गए. सब एक दूसरे को देखने लगे और नताशा वहीँ एक खली चेयर पर बेथ गयी. चेयर पर केवल सीट का दबा होना hi दिखाई दिया था सबको..

एक बोलै : बॉस कितनी सही बात की है इस लड़की ने.

दूसरा बोलै : बरसों से हम भी ऐसी hi पावर की तोह कल्पना में रहे हाँ बॉस.

दमें : हाँ और ऐसी hi पावर के लिए हमें गैंगस्टर बनना पड़ा. जो हमारे लिए बहुत तकलीफ रह रहा है.

नताशा : गैंगस्टर तोह तुम सब पुलिस की नज़रों में हो दमें.. खुद की नज़रों में नहीं. सोचो, तुमने कभी भी कोई ऐसा काम नहीं किया, जो तुम्हारी आत्मा को घायल कर गया हो. नहीं दमें तुम अच्छे इंसान hi नहीं हो. तुम एक कमाल के इंसान भी हो. नताशा उठी और चलती हुई आगे बढ़के दमें के हाथ को थाम लिया.

नताशा : हमें पॉवरफुल बनना है दमें. उसके लिए हम बुरे काम करेंगे. पर कोई ऐसा काम नहीं करेंगे, जिनके करने से हमारी आत्मा ज़ख़्मी होती रहे. हमें भी पल पल मारती रहे. मुझे भी ऐसे क्वीन नहीं बनना है दमें.. मुझे अपनी आत्मा का सुख भी चाहिए है साथ में. क्वीन बनना मेरा सपना बन गया है. पर अपने इस सपने को पूरा करने के लिए मैं थोड़ा थोड़ा करके खुद को नहीं मार सकती.

दमें : ऐसी बात है तोह फिर आजसे आप मेरे लिए क्वीन हाँ. मैं आपको क्वीन कह कर hi बुलाऊँगा.

बाकि भी दमें की हाँ में हाँ मिलाने लगे.

नताशा : मेरे बारे में जान लो पहले तुम सब. में इंडिया से हों. कुछ महीने पहले सुनी ख़बरों में तुमने सुना होगा. एक लड़का फ्लाइंग शूज के साथ उड़ता हुआ दिखाई दिया था. फिर उन्ही शूज के साथ एक इंडियन लड़की का ज़िक्र होने लगा. उस लड़की के परिवार को उन शूज के लिए अंडरवर्ल्ड वळून ने मार दिया था. दमें मैं वहीँ लड़की हों.

दमें समेत सब ये जान कर झटके से उठ खड़े हुए.. पहले दमें नताशा के आगे झुका, फिर दूसरे सब भी नताशा के आगे झुकते चले गए. ये कालों का ख़ास अंदाज़ हुआ करता था.

दमें : क्वीन हम सोच भी नहीं सकते थे. आप जैसी महान हस्ती हमारे बीच भी आ सकती हाँ. आप महान पावर से नहीं अपने कर्मो से बानी हाँ क्वीन.. परिवार को खो देने के बाद भी आपके अंदर वो बात नहीं आई जो किसी के भी अंदर समां जाया करती है. ऐसी घटना के बाद कोई भी क्रिमिनल बन जाता है क्वीन.. आपके विचार जान कर मुझे बेहद ख़ुशी हुई.

नताशा : ऐसी hi उम्मीद मुझे तुम सब से थी दमें. यक़ीनन हमारा साथ बहुत लम्बा और बहुत अच्छे से चलने वाला है.

दमें : क्वीन! हमारे लिए क्या हुकम है.

नताशा : सबसे पहले मुझे उडनेरवोर्ल्ड को ख़तम करने है. पूरी तरह से ख़तम न भी हो सके तोह जिस हद तक उसे ख़तम किया जा सकता है, उतना उसे ख़तम करेंगे. अपने देश में मैं अंडरवर्ल्ड को देखना नहीं चाहती. मैं नहीं चाहती मेरे देश में कोई और परिवार अंडरवर्ल्ड के हथुन ख़तम हो. इसलिए मेरे देश से अंडरवर्ल्ड को जड़ से उखड फेंकना है.. अंडरवर्ल्ड का सारा पैसा हमें अपने अंडर लेना है. मैं एक आइलैंड भी देख चुकी हों दमें.. वहीँ हम अपना हेडक्वार्टर बनाएंगे.. सबसे पहले उस आइलैंड को अपने अंडर लेना है. उसे इस हद तक सुरक्षित बनाना है, कोई जान कर भी हमें वहां से निकाल न सके. इतनी पावर हासिल करनी है हमें. कोई माई का लाल वहां हमारा मुकाबला न कर सके. फिर वह वर्ल्ड की कोई भी आर्गेनाइजेशन hi क्यों न हो.

वहां मुझे एक ज़बरदस्त किसम की सइंटफिक लैब भी बनानी है. मुझे ऐसे साइंटिस्ट्स की डिटेल भी चाहिए होगी. जो किसी के पास मजबूरन काम कर रहे हों, अपने परिवार को बचने के लिए वह अंडरवर्ल्ड के पास बंधक हों, या किसी दूसरी ऑर्ग के पास. मुझे सब की डिटेल चाहिए. फिर मैं उसके परिवार को बचा कर उस साइंटिस्ट को वहां से निकल कर अपने साथ ले आऊँगी. ऐसे hi लोगों की ज़रूरत रहेगी हमें दमें.. और ऐसे hi लोग सदा जान देने के लिए भी तैयार रहते हाँ. अपना परिवार तोह मैं खो hi चुकी हों. किसी और को परिवार के खोने के दुःख में नहीं देख सकती.

भगवन ने मुझे शक्ति दे hi दी है तोह मैं अपने बदले के साथ साथ ऐसे लोगों के भी काम आना चाहती हों. जो अपने लिए कुछ कर नहीं सकते. शायद ऐसे मुझे अपने परिवार के खो देने के दर्द से छुटकारा मिल सके.

नताशा की आवाज़ कुछ भीग सी गई थी. दमें और उसके साथी भी नताशा की भीगी आवाज़ पर साद हो गए थे. मैं के सच्चे न होते तोह ऐसे दुखी न होते...



{::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


शहर में रहते हुए hi सोफिए सब को कण्ट्रोल कर रही थी. अब तक वो किसी भी मिशन में खुद से शामिल नहीं हुई थी. चीन में डीके एंड षिमुना के मामले में भी वह खुद आगे नहीं बढ़ी थी.

इंडिया में भी गुफा वाला सीक्रेट सामने आया तोह सोफिए सबको उनका काम समझा कर उन्हें ऑर्डर्स देने लगी. जानती थी कोई भी मिशन आसान मिशन नहीं है. उसे आसान मिशन पर काम करने में मज़ा भी नहीं आता था. अभी वहां उसे खुद की मौजूदगी ज़रूरी नहीं लगी थी. इसलिए वहां नहीं गई थी. और फिर उसका असल मिशन तोह निमंस, डीके एंड षिमुना मिशन था. सोफिए फ्री भी तोह अलका के मटर में कूद पड़ी थी.

राजा ठाकुर और अलका की डिटेल मिली.. तोह अलका की डिटेल जान कर उसे कुछ अजीब सा लगा. अलका के परिवार एक पॉवरफुल परिवार था, फिर भी सबके सब एक साथ मारे गए थे. इस बात पर सोफिए खटक गई थी. उसे लगा कुछ तोह है इस सब में..

कोई और काम भी नहीं था सोफिए के पास तोह वह अलका की डिटेल के लिए मसरूफ हो गई. बस्ती से जुडी अलका बारे इन्फो प्राप्त हुई तोह सोफिए फिर वही करने लगी तोह सोफिए जैसी एजेंट्स किया करती थी.

अलका के परेसन्ट्स से जुड़े हुए लोगों से, बस्ती में रहने वाले लोगों से वो इन्फो कलेक्ट करने लगी. वही से उसे अलका के खानदानी सीक्रेट बाने जानने को मिला. कई दिनों की म्हणत के बाद गुफा और फिर माला वाली बात सुनने को मिली.

ये जानकारी भी सोफिए ने बड़ी ज़हानत से प्राप्त करि थी. कैसे करि थी, इसकी डिटेल बाद में सामने आएगी.

गुफा के इर्द गिर्द सोफिए ने पहले से hi फील्डिंग सेट क्र दी थी. ऐसा hi कुछ विक्रम सिंह ने भी किया था. सोफिए हर एक बात पर नज़र रख रही थी. कुछ एजेंट्स प्लेन से भी उतरे थे गुफा वाले माउंटेन पर.

बाओ गैंग और विक्रम सिंह गैंग दोनों आपस में भीड़ गए तोह विक्रम सिंह गैंग को अपनी जान से हाथ धोने पड़े. आम गुंडे कैसे बाओ के एजेंट्स का सामना कर सकते थे. बहुत से मारे गए तोह कुछ भाग कर जान बचने में सफल रहे.

विक्रम सिंह और रुपाली भी उन्ही भाग जाने वाले गुंडों में शामिल थी. विक्रम सिंह और रुपाली शाम के बाद हवेली जा पोहंचे थे. सतीश और अलका के लिए चिंतित थे, पर कुछ कर भी तोह नहीं सकते थे. वहां रेहत तोह मारे जाते. गुफा में रहते तोह भी ज़िंदा बचने के चान्सेस नहीं थे. पुजारी के बात पर, पुजारी की मुस्कान और अंदाज़ पर भी विक्रम सिंह बहुत कुछ समझ गया था. वो रुपाली के साथ भाग कर वापिस हवेली लौट आया था.

वहीँ सोफिए के कहने पर एजेंट्स ने बड़ी कोशिश करि थी गुफा में घुसने की, पर घुस नहीं पाए थे. जो भी अंदर जाता, बेशुमार सांपो का सामना करना पड़ता. बहुत से एजेंट्स मारे गए थे. कुछ बहार भाग कर खुद को बचा गए.

सोफिए कुछ और प्लान करने लगी. सोफिए बाओ से थी, तोह कुछ भी कर जाती, पर जो उसके सामने आया था. उसे किसी भी कीमत पर वो हासिल करती. वहां पाए जाने वाला खज़ाना भी स्पेशल था. एक पूरा सिटी सोने से बनाया जा सकता था. पर बाओ वळून के पास पैसे की कमी नहीं थी. आल वर्ल्ड में पहले हुए बाओ एजेंट्स वल्र्ड रिचेस्ट एजेंट भी थे. सोफिए भी डायमंड्स को न सोचते हुए माला को सोचने लगी.

और माला पाने के लिए सोफिए को वो पहाड़ भी उड़ाना पड़ता, रेज़ा रेज़ा करना पड़ता तोह सोफिए ये भी कर गुज़रती.

सोफिए या बाओ एजेंट्स कुछ और कर पते. वहां पर इंडियन आर्मी के हेलिकोप्तेर्स आने लगे.

रॉ के भी दो हेलिकोप्तेर्स भी थे.

सोफिए को पहले hi ये खबर मिल चुकी थी. उसने तुरंत सबको वहां से हैट जाने को कह दिए. जो मारे गए थे, उनकी लाशें वहीँ छोड़ कर बाकि बाओ एजेंट्स वहां से खिसक लिए थे.

सोफिए सोचने लगी, अब उसे क्या करना चाहिए. अब वहां इंडियन आर्मी और रॉ वाले पोहंच रहे थे. जैसी भयंकर फायरिंग वहां हुई थी. जितनी लाशें वहां पर पड़ी थी, आर्मी या रॉ वाले वहां से जल्दी जाने वाले नहीं थे.

बाओ के मरने वाले एजेंट्स बिना किसी पहचान के वहां गए थे. वेपन्स से भी बाओ का कनेक्शन सामने नहीं आ सकता था. इस मामले को लेके सोफिए संतुष्ट थी.

NO:4 से भी अब कोई राब्ता उसका नहीं रहा था. जब दोनों स्नैक्स NO:4 के गिर्द घूम रहे थे, उसी समय NO:4 की आँखों में लगे लेंस, जिनमे ट्रांसपेरेंट कामर्स द्वारा सोफिए सब कुछ देख रही थी. दोनों स्नैक्स के कारण वह लेंस बेअसर हो गए थे. कानो में मौजूद एअर्रिंग वाली देवीकेस भी अपना असर खो चुकी थी. सोफिए कोई आवाज़ भी नहीं सुन सकती थी.

रॉ वाले, आर्मी वाले वहां लैंड हुए और वहां का सब देखने लगे.. वर्ज़न एरिया अब रेडज़ोने एरिया में बदल गया था.

लाशें, वेपन्स देख कर सब हैरान थे. वो कुछ जानते नहीं थे. अंदर गुफा में भी कई लाशें देख कर आर्मी वाले, रॉ वाले हैरान रह गए. अंदर मरे हुओं की लाशें पानी छोड़ रही थी. कुछ सांप भी वहीँ मरे पड़े थे. कुछ आर्मी वाले और रॉ वाले तोह वोमिटिंग करने लगे. लाशों की हालत बहुत ख़राब होने लगी थी. अजीब सी स्मेल आने लगी थी लाशों से.

बहार जा कर अपने अपने ऑफिसर्स को सब बांटने लगे. अमरय और रॉ के बड़े वही खड़े होक साडी घटना पर चर्चा करने लगे.

फिर रॉ वाले आर्मी वळून को वहीँ छोड़ कर बस्ती के लिए निकल पड़े. वहां हवेली पर पोहंच कर विक्रम सिंह से मिले

विक्रम सिंह रॉ अफसर से बोलै : सर मैं कुछ नहीं जनता. मैं तोह सब देख कर हैरान रह गया था. मेरा बीटा और बहु अलका उस गुफा में गए थे. लौट कर नहीं आये. बहुत चिंता हो रही है मुझे. ये भी नहीं जनता दोनों गैंग किस मकसद से वहां आये थे. और क्यों एक दूसरे से भीड़ गए थे.

रॉ अफसर : सिंह साब आप कुछ नहीं जानते तोह फिर आप यहाँ आये hi क्यों हाँ. यहाँ आते hi इतना सब हो गया. और कह रहे हाँ, आप कुछ नहीं जानते. मरने वळून में आपके आदमी भी तोह थे.

विक्रम सिंह को रॉ अफसर की ऐसी बात पर ग़ुस्सा ा गया. साला राजा ठाकुर के आगे भीगी बिल्ली था. पर किसी और के आगे वह कमज़ोर नहीं था. विक्रम सिंह न तोह घबराया और न hi कंफ्यूज हुआ. रॉ ऑफिसर्स की आँखों में देखते हुए वो बोलै

विक्रम सिंह : सर! आप मेरे बारे में सब जानते हाँ न. फिर भी ऐसे अंदाज़ में बात कर रहे हाँ. वहां के बिगड़े हालत के कारण hi हम सब यहाँ आये थे. वहां हम सब की जान को खतरा था. इसी कारण हम सब को यहाँ आना पड़ा. यहाँ आते hi अलका बेटी की शादी मेरे बेटे सतीश करवा दी गई. दोनों की सगाई बारे तोह आप सब भी जानते hi होंगे न. वहीँ शादी के समय पुजारी जी "जो इस बस्ती के सबसे बड़े पुजारी हाँ" ने हमें सब बताया, शादी के बाद अलका बेटी को और मेरे बेटे सतीश को उस गुफा में जाना होगा. ये अलका बेटी के परिवार की परंपरा रही है, शादी के बाद एक बार उस गुफा में जाना होता है. आप चाहें तोह पूरी बस्ती वळून से पूछ सकते हाँ.

विक्रम सिंह का लाइफ स्टाइल भी रॉ वळून की नज़रों में था. गड़बड़ का अंदाज़ा होते हुए बी वह वीरकम सिंह पर चढ़ाई नहीं कर पाए थे. अभी रॉ वळून को राजा ठाकुर परिवार से काम भी था. खुद से भी राजा ठाकुर परिवार की रक्षा भी कर रहे थे. दसख के लिए ये सब किया जा रहा था. दक्ष रॉ वळून की नज़र में देश के लिए हीरा था. वो दक्ष को खोना नहीं चाहते थे. विक्रम सिंह दक्ष का चाचा था. विक्रम सिंह से कुछ और बातें करके वो वहां से निकल पड़े. रॉ वळून ने बस्ती वळून से भी बात करि. पर कुछ भी हाथ नहीं लगा. गुफा का सीक्रेट कोई कोई hi जनता था. रॉ नहीं जान पाई थी, पर सोफिए जान गई थी.

रुपाली आते hi अपने कमरे में चली गई थी. विक्रम सिंह उसे डिस्टर्ब न करे, ये भी रुपाली ने कह दिए था.

विनय वही नशे में धुत सो रहा था. ऋचा और परची भी एक कमरे में थी. विक्रम सिंह भी किसी से नहीं मिला था. अपने बचे हुए आदमियों के पास था. गुफा के अंदर का सब सोचते हुए विक्रम को बड़ी परेशानी भी थी. जिस मकसद के लिए ये सारा खेल रचा गया था. उसक बारे कोई इन्फो नहीं थी विक्रम सिंह के पास. ऊपर से दूसरे गैंग को लेके भी विक्रम सिंह बड़ा परेशान था. जितना परेशां था, उतना hi वो ग़ुस्से में भी था. बन रहा काम नए आने वळून की वजा से ख़राब हो गया था. अब पता नहीं काम बनता था भी कह नहीं. सोच सोच के विक्रम के दिमाग की नसें डैमेज होने लगी थी. रॉ या किसी और की विक्रम सिंह को कोई परेशानी नहीं थी. परेशानी थी किसी और से. विक्रम सिंह उसके बारे में भी सोच सोच कर परेशान था.



{::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


"मास्टर कोई दिमाग ऐसा भी हो सकता है क्या, टेलिपाथी द्वारा उस दिमाग में घुस कर हम कुछ प्राप्त न कर पाएं"

मैं मास्टर के सामने बैठा मास्टर से पूछ रहा था. मास्टर chi-fang उल्फत भरी नज़रों से मुझे देखने लगे.

chi-fang : दक्ष बीटा ज़रूर तुम किसी अनोखे दिमाग में घुसे होंगे. तभी मुझसे ऐसा सवाल कर रहे हो.

दक्ष : जी मास्टर! अब जब दिमाग के खेल खेलने लगा हों तोह मुझे अनेको दिमागों में जाना होगा. मैं जानना चाहता हों मास्टर! अगर किसी के दिमाग में घुस कर भी कुछ प्राप्त न हो सके तोह इसका क्या अर्थ हो सकता है.

chi-fang : दक्ष बीटा, इस धर्मी को बनाने वाले ने इसे ऐसो रंगों से बनाया है. जिसे कोई समझ नहीं सकता. कई बार कोई आम सी दिखने वाली चीज भी इतनी खास बन जाया करती है. कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता. जैसे कोहिनूर हिरा. ऐसे hi बहुत कुछ ऐसा है इस धरती पर, इस पुरे यूनिवर्स पर. जिसके बारे में जान्ने पर हम हैरान रह जाएँ.

ऐसे hi कई ब्रेन्स भी ऐसे हाँ. जिनमे घुसने पर तुम्हारी टेलिपाथी be-asar हो जाएगी. तुम उसके दिमाग को कण्ट्रोल नहीं कर सकोगे. उसके दिमाग से कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं कर सकोगे.

दक्ष : मास्टर ऐसे दिमाग किसके पास होते हाँ.

chi-fang : मेरे दिमाग में आओ. तुम्हे कुछ दिखता हों.. मैं मास्टर की बात पर मास्टर के दिमाग में गया. तोह मास्टर के दिमाग में रहते हुए मुझे दिखा मास्टर किसी ऐसे दिमाग में थे. जहाँ ढूंढ hi ढूंढ थी. ठंडक का भी मुझे एहसास हो रहा था. सुकून भी बहुत प्राप्त हो रहा था मुझे. दिल की धड़कन एंटी नार्मल हो गई थी. बता नहीं सकता.

मैं कुछ बोलता आवाज़ सुनाई di..chi-fang कैसे आना हुआ मेरे दिमाग में.

मैं सुन कर हैरान hi नहीं हुआ था. इतनी मीठी और दिल को छू लेने वाली आवाज़ थी. मैं होने लगा, बार बार सुनता hi जाओं.

chi-fang : गुरु जी आप सब जानते हाँ, फिर भी मुझसे पूछ रहे हाँ

गुरु जी : chi-fang रस्मे दुन्या भी तो निभानी पड़ती है. दक्ष बीटा कैसे हो तुम..

मैं तोह आवाज़ के नशे में भी खोया हुआ था. आवाज़ उनके hi दिमाग में गूँज रही थी. पर मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे दिमाग में, मेरे पुरे वजूद में गूँज रही हो. उनकी आवाज़ मेरे लिए जैसे एक हुकम भी था. मैं बिना देरी के बोल पड़ा.

दक्ष : भगवन की दया से मैं ठीक हों गुरु जी.

गुरु जी : दक्ष बीटा बहगवां की दया तोह हमेशा तुमपर रही है. तुम्हारी ज़िन्दगी में जितने भी कष्ट ए हाँ. सब नियति का खेल था. तुम्हे परखना था, तुम्हे आज के मिले इस नए रूप में लाना था. तुम अपने बारे में सब नहीं जानते. नियति ने तुम्हे अच्छे कर्मो के लिए चुन लिया था. और जिसे नियति अच्छे कर्मो के लिए चुन लेती है. उसके साथ ऐसे hi खेल खेले जाने लगता हाँ. ऐसे hi खेलों से वह जो ज्वालामुखी उसके अंदर जनम लेता है, उसी ज्वालामुखी से जनम होता है एक शूरवीर का. तुम भी अपने अंदर देहक रहे ज्वालामुखी में तप कर कुंदन बन रहे हो दक्ष बीटा. तुम हो आज के समय के शूरवीर. यही तुम्हारी किस्मत थी और यही नियति का खेल. हम जल्द hi मिलेंगे दसख बीटा.. तब तक तोह अपने अंदर देहक रहे ज्वालामुखी से तप कर कुंदन बनते जाओ. ज़माने के पापियों का सर्वनाश करते हुए एक महान शूरवीर बनने की राह पर निकल जाओ. उसी राह में मिलूंगा मैं तुम्हे दक्ष बीटा.

मास्टर chi-fang कुछ नहीं बोले. गुरु जी से परमिशन लेके वापिस लौट आये.

मैं न केवल खुद को बहुत ज़यादा हल्का महसूस कर प् रहा था. जो ठंडक मेने गुरु जी के दिमाग में महसूस करि थी. वो अब मुझे अपने पुरे बदन में उतरती महसूस हो रही थी. इतना सुकून मुझे अपनी पूरी लाइफ में नहीं मिला था. नशे से मेरी पलकें भरी होने लगी थी.

chi-fang : क्या हुआ दक्ष बीटा. मास्टर chi-fang मंद मंद मुस्कुरा रहे थे.

दक्ष : मास्टर जी! कोण हाँ ये गुरु जी.. ऐसा महान ज्ञानी मेने अपनी लाइफ में अब तक नहीं देखा मास्टर. उनकी बातें भी बड़ी अजीब थी. पर मैं साडी समझ गया था. एक एक शब्द खुद से मुझे सब समझा रहा था. ऐसा लग रहा था. जैसे उनका एक एक शब्द मेरे शरीर के अंग अंग में उतर रहा हो. ऐसी शांति प्राप्त होने लगी थी मुझे. जो मेने अपनी पूरी लाइफ में पहले कभी नहीं पाई.

chi-fang : दक्ष बीटा वह तुम्हारे hi देश के एक महान ज्ञानी है. मैं उनके बारे में तुम्हे क्या बता सकता हों. वह जब चाहेंगे तुम्हे अपने बारे में सब ज्ञान दे दें गए. होगा वे जो वह चाहेंगे और जैसे चाहेंगे. और फिर उन्हों ने कहा न तुमसे.. तुम जल्द hi उनसे मिलोगे. बहुत कुछ बदलने वाला है तुम्हारी लाइफ में दक्ष बीटा. लोक सेवा का मैंने तुम्हे बता दिए है. पर और भी तुम क्या कुछ करने वाले हो, ये केवल गुरु जी hi जानते हाँ. मैं तो तुम्हे दिमाग दिखने के लिए गुरु जी के दिमाग में गया था. देखा गुरु जी के दिमाग को, ऐसे दिमाग उनके हुआ करते हाँ, जो महान ज्ञानी हों या फिर जो पवित्र आत्माएं हों. जिनपर लार्ड बुद्धा, खुदा, भगवन की ख़ास नज़र हो..

मास्टर chi-fang से मैंने ये सब इसलिए पूछा था. क्यूंकि एक ऐसा सच भी था. जिसे बयां करते हुए मुझे बड़ा अजीब भी लग रहा है.

जब मैं देहरादून की बस्ती गया था. वहां न चाहते हुए भी मुझे पायल दी के दिमाग में घुसना पड़ा. वहां के हालत जाने. फिर चाचा चची और उनके बेटे बेटियों के दिमाग में भी घुसा.. वहीँ पर मुझे वो कुछ जान्ने को मिला. जिसे जान कर मैं जी जान से लरज़ कर रह गया था.

एक तोह पायल दी को लेके प्लान बन रहे थे विनय हरामज़ादे के साथ शादी के लिए.. दूसरे सतीश की शादी अलका से हो रही थी.

अलका....

अलका शादी कर रही थी सतीश से.....

हालत कैसे भी रहे हों. जिससे आप अपनी जान से भी बढ़कर प्यार करते हों. उसकी शादी किसी और के साथ होते हुए नहीं देख सकते..

मैं भी अलका की शादी को लेके बहुत दर्द में हो गया था. दिल की धड़कन डूबती हुई महसूस होने लगी थी. 6 साल पहले का अलका की ज़ुबान से निकला एक एक शब्द याद था.

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.....

कैसे भूल सकता था मैं. जिनसे आप मोहब्बत करते हों. जिन्हे अपने दिल में बसाये आपने एक एक सांस ली हो. वह आपसे या आप उससे नाराज़ हों तोह भी उसकी शादी किसी और के साथ होते हुए नहीं देख सकते.

मैं भी ऐसा सब जान कर जी जान से हिल कर रह गया था. मैं खवाब ो ख्यालों में भी नहीं सोच सकता था, अलका किसी और के साथ शादी कर सकती है. अलका मेरे शिव किसी और की भी हो सकती है. मुझसे मोहब्बत hi इतनी करती थी अलका. जैसे मेने किसी और से शादी नहीं करि थी. ऐसे hi अलका को भी नहीं करनी चाहिए थी..

ऐसा भी ख्याल मेरे मैं में आया था...

नफरत करने लगी थी मुझसे.. करती रहती मुझसे नफरत पर शादी.. मुझे छोड़ के किसी और से शादी.....

ये होते हुए मैं कभी नहीं देख सकता था....

और मैं ऐसा होने भी नहीं दे सकता था....

पता नहीं मुझे अलका से नफरत थी या कुछ और... मेरा दिल उसे अब्ब भी चाहता था या नहीं. पर ये मैं जनता था, अलका सिर्फ मेरी है. कभी भी किसी और की नहीं हो सकती. मेरी नहीं हुई तोह किसी और की भी नहीं हो सकती..

जैसा सब हुआ था. उसे भुला भी नहीं सकता था. सब भूलना आसान भी तोह नहीं था. दुश्मनो ने बहुत भयंकर चाल चली थी. जो ड्रिंक मुझे अलका ने पीने को दिया था वह भी चची का hi प्लान था. अलका इस बारे कुछ नहीं जानती थी.

ये बात भी मैं जान गया था.....

अलका के लिए तोह पहले भी मैंने ऐसा नहीं सोचा था. शरबत पिने से hi मेरे अंदर चेंज आया था. बाद में मैं ये जान गया था. पर अलका को लेके ये कभी नहीं सोचा था मैंने कह अलका मेरे साथ ऐसा सब कर सकती थी. इतनी hi प्यार और विश्वास था मुझे अपनी अलका पर..

पर वह साज़िशियों की चाल में आते हुए मुझे वह ड्रिंक भी पीला गई और बाद में भी उन्ही की चाल में आते हुए मुझे दोषी मान गई थी. ठीक है जब उसने मुझे देखा था तोह मैंने चची को छोड़ रहा था.

जी हाँ ऐसा hi मुझे दिमाग में घुस के मालूम हुआ था. पायल दी और अलका जिस समय चची के कमरे में आयी थी. मैं बीएड पर चची को छोड़ रहा था. ज़बरदस्ती नहीं कर रहा था. ये सब प्लान था.

पर पायल दी और अलका के कमरे में आते hi चची ने ऐसा दिखावा किया. जैसे मैं उनका रपे कर रहा हों. मैं होश में था hi कहा.. मुझे तोह कुछ खबर hi नहीं थी.

चची के पास hi एक स्प्रे भी था. फ़ौरन hi मेरे नाक से लगा कर तकिये के निचे सरका दिए था. एक मिंट में hi मैं होश में भी आ गया था. पायल दी अलका कैसे मुझपर विवश्वास कर सकती थी..

पर उनको करना चाहिए था मुझ पर विश्वास.....

उन दोनों के लिए मैं hi तोह सब कुछ था.....

एक ऐसा इंसान जो केवल प्यार के लिए बना हुआ था. जिस का एक एक पल प्यार में बीत रहा था. एक एक पल शेर के जैसी जी रहा था.

कैसे वह इतनी घट्टिया हरकत कर सकता था...

पर वह दोनों ये सब भूल कर जो उन्हें दिखाया गया. उस पर यकीं कर बैठी.. और मुझे मेरी hi नज़रों में गिरा दिए.

जो हुआ था.. सब बहुत गलत था. बहुत घट्टिया था. पर मुझपर विश्वास बनाये रखना चाहिए था दोनों को...

कह देती..

नहीं हमारा दक्ष मर तोह सकता है.. पर ऐसा घट्टिया काम कभी नहीं कर सकता.. ऐसा hi विश्वास मैं डेसेर्वे भी करता था. मेरी लाइफ का एक एक पल तोह सबके सामने था. आईने की तरह थी मेरी लाइफ अलका और पायल दी की नज़रों में.. उन दोनों के साथ hi तोह मेरा ज़यादा समय बीता था..

कभी मेरे बारे में कुछ भी ऐसा वैसा नहीं सुना गया था. फिर भी मुझे रेपिस्ट घोषित कर दिए गया..

कितना बड़ा आरोप लगा दिया जाया दोनों ने hi मुझपर.....

कैसे मैं ये सहन कर सकता था. मेरे कहे बिना hi सबको समझ जाना चाहिए था. ऐसा होना मुमकिन नहीं है. ज़रूर कोई और बात रही होगी...

पर मेरे कहे पर भी किसी ने विश्वास नहीं किया था. और ज़लील करके घर से निकल दिए था.

पायल और अलका इस सब में सबसे आगे थी. पायल दी के दिमाग में घुस कर मैंने सरसरी सी डिटेल प्राप्त करि थी. फ़ौरन hi उनके दिमाग से निकल भी गया था. फिरसे नहीं गया था मैं पायल दी के दिमाग में... जाने को मैं hi नहीं हुआ था मेरा.

अलका के होंटो से निकला एक एक शब्द मुझे आज भी याद था. उसका दुत्कारना, मुझसे नफरत का इज़हार करना. मुझे रेपिस्ट बोलना.. अपनी ज़िन्दगी से साफा हो जाने के लिए बोलना...

सब कुछ hi तोह याद था मुझे..

कैसे भूल सकता था मैं सब..

कुछ भी भुलाये नहीं भूलता था...

पर शादी वाला मटर..

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़..

जान न चली जाए मेरी..

अगर अलका किसी और की हो जाए तोह.....

सोच के hi जान निकलने वाली हो गई थी.. मुझे अलका के शब्दों पर दुःख हुआ था. उसकी धुत्कार पर मैं टूट गया था. रेज़ा रेज़ा होकर बिखर गया था. उसने एक बार भी मुझे टूट से, रेज़ा रेज़ा होने से नहीं बचाया था. उसने तो मुझे सारा hi तोड़ डाला था. कैसे मैं उसकी ऑर्डर अब पलट सकता था..

पर उसकी शादी होते हुए भी नहीं देख सकता था...

बहुत दर्द मिला था मुझे अलका की शादी का सुनकर.. ये जान कर, अलका ने खुद से शादी के लिए कहा था. जब सगाई के लिए वह मान गई थी तोह शादी के लिए भी तोह उसे मानना hi था.

पर मुझसे ये सहन नहीं हो रहा था.....

अब जब में जान गया था. ये साड़ी साज़िश थी. सब प्लान था. एक प्लान के तहत बहुत से खेल खेले गए थे. अलका को भी हासिल करना प्लान का हिस्सा था.

तोह...

अलका अगर मेरी नहीं हो सकती तोह मैं उसे यौन बर्बाद होते हुए भी नहीं देख सकता था.

इसी लिए मुझे उसके दिमाग में जाना पड़ा...

पर ये क्या....

उसके दिमाग में जाते hi पता चला वह तोह बाओ की एजेंट है.. ये एजेंट थी तोह अलका क्यों बानी हुई थी. ये जान कर जहाँ मुझे ख़ुशी भी हुई कह सतीश की शादी जिससे हो रही है वह अलका नहीं है.

मैं जैसे फिरसे ज़िंदा हो गया था.....

पर अलका की भी मुझे चिंता होने लगी थी. हमारे बीच का मटर अलग था. बाओ वळून की इतनी हिम्मत.. अलका को अपने अंडर लेके उसकी जगा डुप्लीकेट अलका ले आये थे. मुझे ग़ुस्सा आने लगा..

पर....

मुझे शांत भी रहना था. ऐसे तोह खेल बिगड़ सकता था. अलका को नुकसान भी पोहंच सकता था. बाओ कोई छोटी ऑर्ग नहीं thi...isliye मैं ख़ामोशी से हालत जानने लगा. गुफा का मटर भी में जान गया था. बाओ वाले किसी माला के लिए ये सब खेल खेल रहे थे..

क्यों खेल रहे थे..

ये मैं नहीं जान पाया.. NO:4 के hi दिमाग में मुझे किसी मैडम सोफिए की आवाज़ सुनाई दी, जो NO:4 को इंस्ट्रक्शंस दे रही थी.

मैं सोफिए के दिमाग के गया तोह मुझे फ़ौरन hi लौटना भी पड़ा.

सोफिए के दिमाग से बस इतना hi मुझे पता चल पाया था, सोफिए बाओ की बेस्ट एजेंट है और अलका को अपने देश भिजवा चुकी है.. उसका मिशन मुझे, षिमुना को और निमंस को पाना था.

सोफिए के दिमाग में मुझे कुछ सेकंड hi रहने की परमिशन मिल सकीय थी. मैं सोफिए के दिमाग में घुसा तोह सोफिए को बेचैनी होने लगी. वो समझ नहीं पाई थी. क्यों उसे बेचैनी हो रही है तोह अपनी बेचैनी को काम करने के लिए उसने सांस रोक ली थी.

सोफिए एक एजेंट होने के साथ साथ योग में भी एक्सपर्ट थी. तभी वह मेंटली बहुत सेंसिटिव थी. योग के किसी भी माहिर के ब्रेन में कोई भी टेलिपाथी वाला नहीं घुस सकता. उसका ब्रेन बहुत सेंसिटिव, एक्टिव होता है. तोह उसे कुछ बेचैनी होने लगती है. सोफिए को भी बेचैनी हुई तोह उसने सांस रोक ली. सांस रुकते hi मेरा सोफिए के ब्रेन से संपर्क टूट गया था.

मैं समझ गया, मैं सोफिए के ब्रेन में बार बार नहीं जा sakta..warna उसे कुछ शक हो जायेगा. टेलिपाथी आम नहीं थी तोह वो ज़रूर इस बात से अनजान होगी. मेरे बार बार जाने पर कोई किसी से सलाह लेती तोह उसे पता चल जाता, कोई टेलिपाथी वाला उसके दिमाग में घुसने की कोशिश कर रहा था.

ऐसे काम ख़राब हो सकता था. मुझे अभी सबकी नज़रों से बचे रहना था..

अब अलका के बारे में जानना ज़रूरी था तोह मैं अलका को याद करने लगा. अपनी मेमोरी को ओपन करके अलका का मैं को मोह लेने वाला चेहरा देखने लगा. फिर उसकी आँखों में उतारते हुए उसके दिमाग में जा घुसा..

मैंने मास्टर chi-fang से जो स्ट्रेंज ब्रेन बारे सवाल किया था. फिर मास्टर chi-fang मुझे गुरु गई के दिमाग में ले गए थे. गुरु जी के दिमाग में मुझे जैसी ढूंढ दिखाई दी थी. अलका के दिगमग में भी मुझे वही सब कुछ देखने को मिला.. बस मुझे ठंडक या शांति का एहसास नहीं हुआ...

बहुत अजीब था अलका का दिमाग भी...

मुझे अलका के दिमाग से कोई भी इन्फो प्राप्त नहीं हो सकीय. टेलेपत्थ्य द्वारा किसी के भी दिमाग में जाया जाए.. तोह जिस किसी के भी दिमाग में हम जाते हाँ. वह व्यक्ति जो कुछ भी देखता है. एक टेलिपाथी जानने वाला भी वही कुछ देख सकता है.

पर मुझे अलका के ब्रेन में सिवाए ढूंढ के और कुछ दिखाई नहीं दिया. अलका इजराइल में थी. इजराइल के किस सिटी में थी. ये मैं नहीं जान पाया. सोफिए के दिमाग में रहते हुए भी मैं ये नहीं जान पाया था. समय hi नहीं मिल पाया था.

अलका के दिमाग में घुस के मैं हैरान रह गया था. कोई इन्फो मैं प्राप्त नहीं कर पाया था. पर इतना जान गया था. अलका वहां सुरक्षित है.. इससे ज़यादा मैं अलका के बारे के कुछ और नहीं जान पाया था. अलका अकेली थी, या कोई और भी उसके साथ था. मैं नहीं जान सका था.

गुरु जी के कहे अनुकर फिर तोह अलका भी एक पवित्र आत्मा थी. ज़रूर यही बात थी. ये जान कर मैं बहुत हैरान भी हुआ था. अलका के लिए मेरी चाहत और भी बढ़ने लगी. उसके लिए जो ग़ुस्सा या इतर विचार थे, उनमे कमी आने lagi..par सब एकदुम्म से तोह रूटीन पर नहीं आ सकता था..

बाद में गुफा के समय जो भी हुआ था. या हो रहा था. मैं ख़ामोशी से विक्रम सिंह के दिमाग में रहते हुए सब देख रहा था. वहां पुजारी जी की बातें भी सुनी. हरामी चाचा और हरमन चची जब डरते हुए बहार निकले तोह मैं उनके दिमाग से निकल कर NO:4 के दिमाग के घुस गया था.

उसके बाद जो हुआ मैंने सब देखा था. खज़ाना देख कर मैं भी बहुत हैरान हुआ था. इतना बड़ा स्टॉक मैं अपनी लाइफ में पहली बार देख रहा था.

सतीश की मौत पर मुझे कुछ अफ़सोस भी हुआ.. जैसा सब मेरे साथ किया गया था. सतीश समेत सबके साथ मैं अपने अंदाज़ से बदला लेना चाहता था. वहां रहते मैं कुछ कर भी तोह नहीं सकता था.

सतीश मारा गया और मैं अपने एक दुश्मन को मौत के मोह में जाते हुए देखता रह गया. अपने बदला भी उससे नहीं ले सका...

दोनों सांप जब NO:4 के गिर्द घूमने लगे तोह मुझे NO:4 के दिमाग से निकलना पड़ा. पता नहीं क्या हुआ था. मैं कुछ समझ नहीं पाया था.

फिरसे NO:4 के ब्रेन में जाने की कोशिश करि तोह जा नहीं पाया. मुझे उसका ब्रेन hi नहीं मिला..

वापिस गुफा से बहार लौटा वह अब वहां मेरा कोई काम नहीं रह गया था. मैं वापिस से अपनी जगा लौट आया था. wang-zhi मेरे सामने बैठी मुझे मुस्कुरा कर देख रही थी.

wang-zhi : कितनी देर से देख रही हों दक्ष. कहाँ बिजी थे तुम.

दक्ष : वहीँ बस्ती में था. फिर वहां जो कुछ देखा वह शॉर्टली wang-zhi को बता दिए.

wang-zhi भी सब सुनकर हैरान रह गई थी.

wang-zhi : strange..very स्ट्रेंज दक्ष.. दो बड़े बड़े स्नैक्स त्रैझ की सिक्योरिटी के लिए वहां गुफा में मौजूद थे. ऐसा सब तोह हम जब छोटे थे तोह अपने बड़ों से सुना करते थे.

दक्ष : हाहाहा मैं भी ऐसी hi कहानियां सुन सुन के बड़ा हुआ हों. पर कुछ भी असंभव नहीं है.. मैं 3 महीने में टेलिपाथी सीख कर लोगों के ब्रेन में घुसने लगा हों. षिमुना है, जो ानोथेर प्लेनेट से आई है. निमंस जो षिमुना के पीछे हाँ. सब सुनने में कितना अजीब लगता है. पर सब सच है. आज भी कुछ लोग ऐसे हों जो टीवी पर निमंस की ख़बरें सुनकर भी विश्वास नहीं कर पाए होंगे..

वांग ज़ही भी हसने लगी : जल्द hi सबको पता चल जायेगा. जल्द hi वह आने वाले भी होंगे.. फिर सबको पता चलेगा, निमंस सच में हाँ या सिर्फ न्यूज़ hi हाँ..

दक्ष : हम्म्म्म सही कहा तुमने wang-zhi... फिर एक लम्बी सांस लेके मैंने wang-zhi के दोनों हाथ थाम लिए. wang-zhi चौंक कर आँखों में देखने लगी. मेरी आँखों में कुछ देख कर wang-zhi नज़रें चुरा गई.

दक्ष : देखो wang-zhi हम बहुत अच्छे दोस्त हाँ. मैं देख सकता हों, समझ सकता हों. जैसे एक लड़की अपनी और उठी नज़रों बारे जान जाया करती है. ऐसे hi मैं भी तुम्हारी नज़रों को पहचानता हों.

wang-zhi का चेहरा शर्म से लाल पड़ने लगा. कुछ चमक भी बढ़ गई थी उसके फेस की. फिरसे वो मेरी आँखों में देखने लगी. जहाँ अनगिनत जब्ज़े मचल रहे थे. wang-zhi सच में मुझसे बहुत मोहब्बत करने लगी थी.

दक्ष : wang-zhi मेरे बारे में तुम जानती हो न. मेरे अपने hi परिवार ने, मेरी अपनी मोहब्बत ने मेरे साथ कैसा बर्ताव किया है. तुम भी यक़ीनन जान गई होगी.

wang-zhi : हाँ दक्ष मुझे बाबा ने बता दिया था. पर मैंने सब अपने तक hi रखा था. मुझे अफ़सोस है दक्ष, तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुआ था. ी ऍम सो साद फॉर यू दक्ष..

wang-zhi भी मेरे दर्द को महसूस करने लगी थी.

दक्ष : वो मेरा गुज़रा हुआ कल था. पर उसका असर अब्ब भी बाकि है. wang-zhi तुम मेरे लिए अपने दिल में जो भी जज़्बात रखती हो, मैं उसकी कदर करता हों. पर मई तुमसे प्यार नहीं कर सकता wang-zhi.. मैं--

wang-zhi ने मुझे टोक दिए...

wang-zhi : दक्ष सुना है प्यार मतलब के लिए नहीं किया जाता.. इवन प्यार तो हो जाता है. जैसे तुम्हे अलका से और अलका को तुमसे.. इतना सब होने के बाद भी तुम उसे नहीं भूल प् रहे.. किसी और से भी प्यार करना नहीं चाहते.. मेरा प्यार भी तुम्हारे लिए ऐसा hi हाँ दक्ष.. मैं जानती हों दक्ष घर से निकलने के बाद तुमने किसी लाइफ जी है. मैं उसे सोच कर भी तुम्हारे लिए बहुत दुखी हों दक्ष.. पर एक सच ये भी है.. अब मैं भी तुम बिन किसी और को नहीं सोच सकती. मैंने अभी कहा प्यार मतलब के लिए नहीं होता तोह मैं लार्ड बुद्धा से प्रे करुँगी. कुछ ऐसा हो जाए तुम और अलका दोनों फिरसे मिल जाओ. तब तोह शायद मेरे लिए भी कोई उम्मीद की किरण रोशन हो जाए. दक्ष तुम मेरे दिल में हो. वहां अब कोई और नहीं पोहंच सकता.. तुम कल जा रहे हो न तोह ख़ुशी ख़ुशी जाओ दक्ष.. मैं हमेशा तुम्हारे इंतज़ार में रहूंगी. अभी हमें मिले समय hi कितना हुआ है. कुछ महीने hi तो हुए हाँ. अभी पूरी उम्र बाकि है दक्ष.. हम मिलते रहेंगे. मेरी ट्रैंनिंग अभी बाकि है. मैं भी जल्द hi तुम्हे ज्वाइन करुँगी. बाबा के बाद मैं hi अपने परिवार में एक ऐसी हों जिसने अपनी लाइफ लोक सेवा के लिए दान कर दी है दक्ष. और ऐसा करके मैं बहुत खुश भी हों. मेरी ख़ुशी तब और बी बढ़ गई थी दक्ष. जब तुम्हे देखा था, तुम्हारे बारे में तोह मैं बाबा से बहुत समय से सुनती hi आ रही हों. पर कभी दिल वाला मामला नहीं हुआ था. अब की बात और है. मैं अपनी इस लाइफ में तुम्हे पा कर बहुत हैप्पी हों दक्ष.

wang-zhi की बात पर मेरे दिल पर जो बोझ था, वो उतरने लगा था. wang-zhi मेरे लिए दिल में जज़्बात रखती है. षिमुना से ये जान कर मुझे झटका भी लगा था. कैसे मैं अलका के बाद wang-zhi को अपना सकता था. कैसे wang-zhi से प्यार कर सकता था. षिमुना जैसे रिलेशन भी मैं wang-zhi के साथ नहीं रख सकता था.

मास्टर chi-fang भी कुछ नहीं कह सकते थे. क्यों की शादी के लिए तोह मर्ज़ी wang-zhi की hi चलनी थी. wang-zhi की अपनी लाइफ थी. जो चाहे फैसला ले सकती थी.

wang-zhi का दिल न दुःख जाए, मुझे इस बात की बड़ी चिंता थी. पर wang-zhi की बातों ने मेरी साड़ी चिंता दूर कर दी थी. मैं wang-zhi के हाथ थाम कर खड़ा हो गया.

wang-zhi अब भी कुछ कुछ शर्मा रही थी. पर उसकी आँखों में मेरी लिए बहुत प्यार था. बहुत सम्मान भी था. और ऐसी मोहब्बत का जवाब अगर मोहब्बत से न दिए जा सके तोह सम्मान ज़रूर देना चाहिए था.

wang-zhi के दोनों हाथ छोड़ कर मैंने wang-zhi को गले से लगा लिया.. wang-zhi भी मचल कर मेरी बहन में समाती चली गई.

wang-zhi : आज मुझे वह सब मिल गया है दक्ष.. जो हर लड़की के दिल की छह होती है. मुझे यकीं है दक्ष जल्द hi वह समय भी आएगा, जब तुम भी मेरी मोहब्बत का इकरार कर लोगे.. अलका जल्द लौट कर तुम्हारी ज़िन्दगी में आएगी. तुम फिरसे पहले वाले दक्ष बन जाओगे. जो हर किसी से प्यार किया करता था..

दक्ष : wang-zhi मैं नहीं जनता ऐसा समय कब आएगा. क्यूंकि मेरे दिल में तुम्हारे लिए सम्मान भी है और एक दोस्त के जैसी मोहब्बत भी. जैसे जज़्बात तुम्हारे दिल में मेरे लिए हाँ. वैसे hi मेरे दिल में भी जनम लेंगे या नहीं ये मैं नहीं जनता. पर इतना ज़रूर कहूंगा.. तुम्हे पा के मुझे भी बेहद ख़ुशी मिली है wang-zhi.. तुम्हारे विचार जान कर, तुम्हारे प्यार की शिद्दत और हद देख कर भी मई बहुत खुश हुआ हों. ऐसे hi तोह होता है प्यार wang-zhi.. ऐसे hi प्यार से तोह संस्कार बना है.

wang-zhi : और ऐसे संसार में अगर तुम जैसा जेवण साथी मिल जाए तोह फिर मरने को जी भी न चाहे..

दक्ष : काश मेरी अलका भी ऐसी hi मोहब्बत मुझसे करती रहती.. मुझपर बना अपना विश्वास बनाये रखती तोह आज सब और भी अच्छा होता.

wang-zhi : होगा दक्ष! सब पहले से भी अच्छा होगा.. बीच में ये जो कुछ भी हुआ है. उसे लार्ड बुद्धा की मर्ज़ी जान कर भूल जाओ. बाबा ने क्या कहा था, तुम लोक सेवा के लिए चुने गए हो दक्ष.. तुमसे बढ़कर महान कोण हो सकता है. लार्ड बुद्धा की नज़रों में तुम महान हो, तभी तोह तुम्हारा ऐसे महान कार्य के लिए सिलेक्शन हुआ है दक्ष..

मास्टर chi-fang, मास्टर shoon-li और wang-zhi एक hi बात कर रहे थे. सच में hi बड़े महान काम के लिए मुझे चूसे किया गया था. अपने परिवार से दूर होने के बाद मेरी लाइफ में कोई रंग नहीं रह गए थे. षिमुना के आने के बाद मेरी ज़िन्दगी में कुछ रंग आने लगे थे. षिमुना एक बेहतरीन दोस्त बन गई थी मेरी.

फिर षिमुना के hi कहने पर मैं मास्टर chi-fang से मिला. वहीँ से मुझसे असली चेंज आया. मुझे मेरी ज़िन्दगी का मकसद मिला. मैं और भी बदलने लगा. ट्रैंनिंग करके एक बेस्ट फाइटर बना तोह टेलिपाथी सीख कर एक महान इंसान.

ऐसा महँ इंसान जो दूसरों से अलग था. अब मुझे मेरे कर्मो से खुद को महान सबत भी करना था. कितना कुछ बदल गया था मेरी ज़िन्दगी में. कैसे कैसे तमाशे ज़िन्दगी ने मुझे दिखने शरू कर दिए थे.

पहले के खेल ने जहाँ मुझसे मेरी ज़िन्दगी के सारे रंग छीन लिए. वहीँ और मुझे कई ऐसे रंग भी बख्श दिए थे. जिनकी कल्पना भी मैं नहीं कर सकता था.

गुरु जी ने मुझसे बात करके मुझमे ज़िन्दगी की एक नयी लेहेर भी दौड़ा दी थी. ये जान कर मेरे देश के सबसे महान ज्ञानी मेरे बारे में सब जानते हाँ. मुझे लेके अच्छे विचार लिए हुए हाँ. मुझे एक महान शूरवीर के रूप में देखना चाहते हाँ.

क्या कुछ नहीं मिल रहा था मुझे. इतना सब प् लेने की छह भी मैंने कभी नहीं की थी. सब पा लेने के रस्ते पर चलने के लिए मैं बहुत बेचैन होने लगा.

wang-zhi मेरी बहन में सिमटी हुई थी. मोहब्बत नहीं थी मुझे wang-zhi से. फिर भी मेरे सीने से लगी हुई थी. दोस्ती के लिए, उसकी मोहब्बत को सम्मान देने के लिए मैंने उसे सीने से लगाया हुआ था.

सब सोचते हुए मैंने अपनी बहन की ग्रिफ्ट कुछ सख्त करदी.. बदले में wang-zhi ने मेरे गिर्द लिपटी बहन कास दें. वह भी अपनी मोहब्बत में और पुरजोश होने लगी थी. उसे तोह मेरे सीने से लग कर मुझसे भी ज़यादा सुकून मिल रहा होगा..

मैंने धयान नहीं दिए था. पर कुछ फासले पर खड़े मास्टर chi-fang हम दोनों को बड़े प्यार से देख रहे थे. मेरे लिए और अपनी पोती दोनों के लिए वह बहुत खुश थे.



{::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


मनाली सिटी से 20कम दूर पहाड़ों में मौजूद एक आशाराम... जो 3 कम के एरिया पर पहला हुआ था...

एक ऐसा आश्रम..

जो अपनी मिसाल आप था... वह केवल एक आश्रम नहीं था.. एक इंस्टिट्यूट, एक यूनिवर्सिटी भी था. जहाँ पढ़ रहे स्टूडेंट्स आल इंडिया के hi नहीं, आल वर्ल्ड के सबसे बेस्ट स्टूडेंट्स थे. वहां हर किसी को एडमिशन नहीं मिल पता था. वहां किस्मत के धनि hi एडमिट हो पाया करते थे. वहां से स्टडी करके गए हुए स्टूडेंट आल इंडिया, आल ओवर थे वर्ल्ड में जहाँ जिस फील्ड में भी मौजूद थे. वह वहां के बेस्ट ब्रेन कहलाये जाते थे. वह कोई किसी फर्म के काम कर रहा रहा कोई एम्प्लोयी हो या फिर कोई पायलट..

कोई नेता हो या बिजनेसमैन....

वह एक मांझा हुआ, एम्प्लोयी, पायलट, बिज़नेस या फिर नेता बन चूका था...

ऐसा hi था वह आश्रम वह इंस्टिट्यूट वह यूनिवर्सिटी....

उस आश्रम को बनाने वाले, चलने वाले का नाम था.



गुरु मोहन शंकर.....



सब उन्हें गुरु जी hi कहा करते थे. बहुत काम लोग उनके असल नाम को जानते थे. 90+ की आगे के थे वह. 50 साल पहले उन्हों ने hi इस आश्रम को बनवाया था. गुरु जी मोहन शंकर hi इस आशाराम के सब कुछ थे. पर अब उनकी उम्र हो चुकी थी. उन्हें लग रहा था, अब उनकी साँसे बहुत काम रह गयी हाँ. उन्हें अपने इस बनाये आश्रम की बहुत चिंता थी.

वह इस आश्रम को किसी स्ट्रांग हैंड में देके जाना चाहते थे. बहुत से ज्ञानी थे उनके बाद जो आश्रम को बहुत अच्छे से चला सकते थे. पर वह केवल आश्रम को चला सकते थे. उनके अंदर पढ़ रहे स्टूडेंट्स को अच्छी शिक्षा दे सकते थे.

आश्रम के लिए फाइट नहीं कर सकते थे.. आश्रम से पढ़ के गए हुए सब आश्रम के लिए अपनी जान भी दे सकते थे. और आज तक ऐसा होता भी आया था. बहुत से पॉवरफुल लोगों ने उस आश्रम को अपने कब्ज़े में करने की सोची थी. पर कोई भी सफल नहीं हो पाया था. आश्रम के लिए मर मिटने वळून की कमी नहीं थी.

फिघ्टर्स, बिजनेसमैन, पॉलिटीकैं और दूसरे बहुत से लोग जो आश्रम से जुड़े हुए थे. आश्रम की और बुरी नज़र से देखने वळून के लिए चैलेंज बन जाया करते थे. कइयों के लिए आश्रम ज़िन्दगी बनाने का जरिया था तोह कइयों के लिए आश्रम एक हिरे की कान भी थी.

वहां क्या कुछ नहीं था....

स्टूडेंट्स से इतनी फीस ली जाती थी. जो वर्ल्ड के किसी भी इंस्टिट्यूट में नहीं ली जाती थी. किसी यूनिवर्सिटी में नहीं ली जाती थी..

ऐसा सब अमीरों के लिए था.. वर्ण बहुत से गरीब फ्री में भी पढ़ते थे..

वर्ल्ड बेस्ट साइंटिस्ट लैब तक वहां थी. एक ऐसी रिसर्च लैब, जो पुरे देश में कहीं भी नहीं थी. अपने मतलब के लिए बहुत से लोगों ने आश्रम पर कब्ज़ा करने की सोची थी. पर सफल नहीं हो पाए थे. आश्रम से स्टडी करके गए हुए इतने hi पॉवरफुल थे.

पारर.....

पर अब ज़माना बदल रहा था.

दुश्मन बदल रहे थे...

दुश्मनो की पावर बढ़ रही थी...

आश्रम के महान गुरु जी समेत जितने भी महान ज्ञानी थी. वह ऐसी कोई भी फाइट नहीं कर सकते थे. उनके पास जो शक्तियां थी. उनके चलते उनपर कुछ बांधषेण भी थी. वह शक्तिशाली होते भी आश्रम के लिए फाइट नहीं कर सकते थे. फाइट केवल आश्रम के लिए मर मिटने वाले hi कर सकते थे.

अब ज़माना बदल रहा था...

तोह....

दुश्मन भी बदल रहे थे..

बदल भी चुके थे...

दुश्मन कुछ ऐसे सामने आने लगे थे... जिनका मुकाबला अब आश्रम के महान स्टूडेंट्स भी नहीं कर पा रहे थे. सालों से आश्रम के लिए लड़ रहे स्टूडेंट्स जो जवान बूढ़े, मेल, फीमेल किसी भी फील्ड में थे. कुछ नहीं कर पा रहे थे. आश्रम के लिए खतरा बढ़ता जा रहा था.

गुरु जी अपने ख़ास कमरे में धयान में बैठे हुए थे. उस कमरे के दरवाज़ा खुला और एक व्यक्ति दो आदमियों के साथ अंदर दाखिल होता हुआ दिखाई दिया..

दोनों आदमियों के हथुन में दो बड़े बड़े टोकरे तेह.. उस व्यक्ति के इशारे पर दोनों आदमियों ने वह टोकरे वही एक साइड रख दिए और बहार चले गए..

पुरे आश्रम में किसी को भी गुरु जी के कमरे में बिना परमिशन के कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता था.. पर आने वाला व्यक्ति कुछ अलग टाइप का था.

व्यक्ति सीधा गुरु जी के क़दमों में जा गिरा..

"गुरु JI..GURU जी.. पाई लागो गुरु जी.. आज बड़े दिनों बाद आपके दर्शन हुए गुरु जी"

गुरु जी के पाऊँ छूने वाले व्यक्ति के चेहरे के भाव, उसके बोलने का अंदाज़ उसे बहुत hi घट्टिया व्यक्ति ज़ाहिर कर रहे थे.. वह था भी ऐसा hi.. इन्तहा का नीच और घट्टिया इंसान..

गुरु जी : कैसे आना हुआ देवधर.. देवधर जैसा भी था, पर गुरु जी ने उन्हें नफरत की निगाह से नहीं देखा.

देवधर : गुरु जी के दर्शन करने का मैं था तोह चला आया.. देवधर के होंटो पर ईविल स्माइल आ गई थी. आँखों में भी गुरु जी के लिए अपमान भरी चमक थी.

गुरु जी : दर्शन कर लिए हाँ तो अब तुम जा सकते हो.

देवधर : ऐसे कैसे चला जाऊँगा गुरु जी, अभी तोह आपने मुझे बताया hi नहीं. कब होने वाला है मेरा अंत.. कई महीनो से आप कह रहे हाँ. मेरा अंत बहुत करीब है. पर कोण है मेरा अंत करने वाला. कहाँ है मेरा अंत करने वाला, कब आएगा मेरा अंत करने वाला. आप मुझे कभी नहीं बताते.. आज तोह मैं जान के hi रहूँगा.. (वह गुरु जी के सामने गुरु जी के hi अंदाज़ में बेथ गया.. होंटो पर हरामियों वाली मुस्कान थी) मुझे भी तोह पता चले उस महान पुरुष के बारे में. जो मेरा अंत करने वाला है.

ऐसा बोलते समय देवधर के चेहरे पर ज़माने भर का हरामीपन था. गुरु जी के लिए बहुत ज़यादा अपमानिया विचार और भाव थे..

गुरु जी के होंटो पर रहसमे मुस्कान आ गई..

गुरु जी : बड़े चाओ से अपनी मौत का इंतज़ार कर रहे हो देवधर.

देवधर : क्या कहूं गुरु जी.. कसम से जबसे आपने कहा है ना. मेरा अंत करने वाला आ गया है तोह मुझे न दिन को चैन मिलता है और न hi रत को नींद आती है. सोच सोच के मैं बहुत ज़यादा परेशान हों. ऐसा कोण इस धरती पर पैदा हो गया जो मुझे मारने वाला है.

ऐसा बोलते समय भी देवधर गुरु जी का मज़ाक hi उदा रहा था..

गुरु जी : जल्दी क्या है देवधर, कहा न जल्द hi वह समय आने वाला है, जब तुम्हारा अंत होगा. जाओ और जा कर इंतज़ार करो. कुछ दिन ऐश के मिले हाँ तोह ऐश कर लो..

गुरु जी ने ऑंखें बंद कर ली.. तोह देवधर समझ गया.. अब गुरु जी उसकी किसी बात का जवाब नहीं देंगे..

देवधर गुरु जी को ग़ुस्से से देखता हुआ वापिस लौटने लगा तोह गुरु जी बोले.. देवधर अपने साथ लाये इन कचरे के डब्बो को भी अपने साथ लेते जाओ..

देवधर ने एक नज़र फिरसे गुरु जी को देखा और बहार निकल कर अपने साथ आये दोनों आदमियों से टोकरे उठाने को बोल दिए..

देवधर और दोनों आदमी चले गए तोह..

गुरु जी : देवधर तू मेरा सबसे महान शिष्य होकर ऐसा निकला.. बुराई का रास्ता न चुनता तोह मेरे बाद तू hi इस आश्रम का सब कुछ होता. पर तुमने लोक सेवा छोड़ कर बुराई का रास्ता चुना. और अब तू इस आश्रम को भी अपने कब्ज़े में करके इसे बुराई का सबसे बड़ा अड्डा बनाना चाहता है.. पर तू ऐसा कभी नहीं कर पायेगा.. आ रहा है तेरा अंत करने के लिए एक शूरवीर.. इंतज़ार कर, और कुछ दिन ऐश के जी ले.. बहुत झेल लिया इस धरती ने तेरे पापी शरीर को.. अब तेरा समय समाप्त होने वाला है.

वही देवधर ग़ुस्से से आश्रम से बहार निकला तोह दोनों आदमियों में से एक बोलै..

"महाराज आपसे बढ़कर कोण बलवान हो सकता है. आप चाहें तोह उस गुरु जी का भी अंत कर सकते हाँ"

देवधर जो बहुत ज़यादा ग़ुस्से में था..

ग़ुस्से से उस आदमी के गले को पकड़ लिया...

देवधर : सूअर के बच्चे तू अभी तक नहीं जान पाया.. मेरे साथ इतने बरसों से है.. फिर भी तू गुरु जी को नहीं जान पाया. मेरे दिन रात का चैन खो गया है तोह कहता है मैं गुरु जी को ख़तम कार्डों..

ऐसा करने की ताक़त होती मुझमे तोह मैं कबका उस बुड्ढे को मार न चूका होता.. वह कुछ भी गलत नहीं कहते.. पूरी दुन्या में उनके जैसा शक्तिशाली कोई नहीं है समझा तू. वह चाहें तोह एक hi पल में मुझे जान से मार सकते हाँ.. पर मुझे मारने की परमिशन नहीं है उसे..

देवधर में हाथियों जैसी ताक़त थी.. ग़ुस्से देवधर ने अपनी उँगलियों को दबाया तोह उस आदमी की गर्दन एक लम्हे में hi चूर चूर हो गई.. आश्रम के गेट के बहार देवधर की पूरी फाॅर्स मौजूद थी.. सब देवधर को देख कर थार थार कांपने लगे..

देवधर ने फिर उस आदमी के सीने पर ज़ोर की लात मारी तोह वह 10 मीटर दूर तक उड़ता हुआ जा गिरा...

देवधर ग़ुस्से से अपनी गाड़ी की और बढ़ा और गाडी में जा बैठा.. गाडी एक खली मैदान की और बढ़ने लगी. कुछ देर में देवधर एक हेलीकाप्टर के पास था. देवधर उस हेलीकाप्टर में बेथ के निकल गया..

देवधर गुरु जी के चेले थे. बहुत साल लगा कर देवधर ने गुरु जी से बहुत सा ज्ञान प्राप्त किया था. देवधर के मैं में लालच था.. तब गुरु जी देवधर के मैं को नहीं जान पाए थे. ऐसा hi था देवधर..

बहुत बाद में जब गुरु जी को और भी शक्तियां प्राप्त हुई तोह गुर जी ने देवधर को आश्रम से निकल दिए. निकलने से पहले उसे सुधरने का भी बहुत कहा था. पर देवधर नहीं सुधरा तोह गुरु जी ने उसे आश्रम से निकल दिए..

देवधर फिर काली शक्तियों की तलाश में निकल पड़ा और कई बरसों की म्हणत के बाद देवधर हिंदुस्तान का सबसे शक्तिशाली काली शक्तियों वाला मनुष्य बन गया.

समय के साथ साथ देवधर अपनी पावर बढ़ता चला गया और बहुत बड़ा गैंग उसने खुद का बना लिया... गुरु जी के लिए देवधर के दिल में बहुत खेद था. तोह वह आश्रम को अपने कब्ज़े में करके आश्रम को बुराई का सबसे बड़ा ग्रह बना कर गुरु की को ज़लील करना चाहता था..

पर ये उसकी भूल थी.. गुरु जी वो जानते थे.. जो देवधर नहीं जनता था...


.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::



 
एस बीआरओ..

दिल का अच्छा है दक्ष.. वांग ज़ही ने उसे परेशान भी नहीं किया और बहुत अच्छे से अपने प्यार का इज़हार भी कर दिए.

ये तो वाकई में देखने वाला सन होगा..

देखते हाँ आगे चल कर दक्ष को क्या कुछ मिलता है.

अब स्पेशल चरक्टेर्स हाँ ये सब.. तोह ज़िक्र तोह होता hi रहेगा. कभी काम तोह कभी ज़यादा.

शुक्रिया बट्टू भाई.. 🙏🙏
 
परिवार खो देने पर भी वह नेगेटिव नहीं बानी.. ये अच्छी बात है. पावर मिली है पर अच्छे संस्कार उसे बिगड़ने से बचा गए. अब्ब बहुत सोच समझ कर अच्छे लोगन को अपने साथ मिला गयी है.

यस! अब तोह दक्ष सब जान गया है. अब तोह सब कुछ सबके सामने लेक अपना रिवेंज लेना है. अब पीछे तोह हटेगा नहीं.

प्यार कभी दिल से नहीं जाता भाई..

ये बात तो है. देवधर के साथ दक्ष की खूब ठाणे गई

गुरु जी महान ज्ञानी हाँ. वो सब जानते हाँ. देवधर को भी उसके अंत बारे बता दिए.. खुद से कुछ कर नहीं सकते.

शुक्रिया भाई! 🙏🙏 साथ बने रहे ✨
 




Episode:22


देवधर अपने शिमला वाले ठिकाने पर जा पोहंचा....

देवधर के पुरे देश में बहुत से ठिकाने थे. काली शक्तियों के मामले में देवधर बहुत आगे निकल चूका था. पैसे की पावर में भी वह बहुत आगे निकल चूका था. पं तक उससे डरता था. जब पं उससे डरता तोह कोई और कैसे न फिर देवधर से डरता.

देवधर जब काली शक्तियां प्राप्त कर के लौटा था. तोह खुद को हर जगा इंट्रोडस भी करवा गया था. उसे पॉलिटिक्स में आने की कोई छह नहीं थी. वह ऐसे झंझट से दूर रहने वाला इंसान था. अगर चाहता तोह पं बन चूका होता.

पर उसे बनना था पूरी वर्ल्ड का किंग....

ऐसे hi ऊंचे ऊंचे खवाब वो देखने लगा था. इंडिया में अपनी ताक़त का लोग मनवा कर वह आश्रम पर कब्ज़े करने की सोचने लगा. गुरु जी ने देवधर को निकल दिए था. इस बात का ग़ुस्सा देवधर को बहुत था.

इसी लिए गुरु जी से मिलने, उन्हें बताने के लिए आश्रम जा पोहंचा था.

वहीँ उसे गुरु जी से अपने अंत बारे जानकारी मिली तोह वह अंदर से हिल कर रह गया था. जनता था गुरु जी बहुत बड़े ज्ञानी हाँ. जो कहेंगे, वह होक रहेगा..

गुरु जी कभी उसे खुद से नहीं मारेंगे ये बात वो जनता था. इसलिए अब तक वह बेख़ौफ़ घूम रहा था.

कहाँ वह इंडिया के बाद पूरी वर्ल्ड का किंग बनना चाहता था. वहीँ अब उसे अपने दुश्मन के लिए मसरूफ होना पद रहा था. उस दुश्मन के लिए, जिसके बारे में वो कुछ जनता नहीं था. जिसकी कोई खबर उसके पास नहीं थी.

देवधर का ठिकाना दो बड़े पदादों के बीच में बने एक बहुत बड़े महल में था. देवधर जैसी शक्ति प्राप्त कर गया था. उसे लगता था, अब वह किंग बांके hi रहेगा. कोई उसकी राह खोटी करने नहीं आएगा. कोई ऐसा था भी नहीं पूरी दुन्या में. जो उसका सामना कर सकता.

पर अब जो गुरु जी ने कह दिए था. कोई जल्द hi आने वाला है. जल्द hi उसका विनाश होने वाला है. देवधर जान कर डरा hi नहीं था. घुसे में भी आ गया था.

चिंतित भी बहुत हो गया था.

बहुत से जंतर मंतर करके कई कई दिन की चाप करके भी वह अपने दुश्मन बारे कुछ नहीं जान पाया था. इस बात का ग़ुस्सा भी उसे बहुत था.

देवधर महल पोहंचा...

महल में अंदर एक बहुत बड़ा हाल tha.us हाल में लोहे के अनगिनत पिंजरे रखे हुए थे. हर पिंजरे में एक जवान लड़की मौजूद थी. सबकी ऑंखें एक जैसी थी हलकी ग्रीन. सबकी एक hi आगे शामे थी. कुछ दिनों में सब की सब 18 की होने वाली थी.

ऐसी 100 लड़कियां देवधर को चाहिए थी और अभी केवल उसे 48 hi प्राप्त हो पायी थी.

देवधर सब को देख रहा था. सब लड़कियां काळा मन्त्रों के असर में थी. कोई भी ख़ौफ़ज़दा दिखाई नहीं दे रही थी. उन्हें जैसे अपनी कोई खबर hi नहीं थी. किसी किसम के भाव उनके चेहरों पर नहीं थे..

देवधर सबको देखकर वापिस मुदा और महल के सिक्योरिटी चीफ से बोलै..

देवधर : आज रात से मैं अपना चाट पूरा कर रहा हों. 40 दिन का चाप है. चालीस दिन बाद आने वाली अमावस की रात को लड़कियां की तादाद पूरी हो जनि चाहिए.. बहुत देर कर दी है तुम सबने.. अब और नहीं. अब की बार देरी हुई तोह मैं तुममे से किसी को भी ज़िंदा नहीं छोडूंगा..

देवधर इतना बोल कर निकल पड़ा. पीछे इंचार्ज दर के मारे थार थार कंपनी लगा.

वो मैं में बोलने लगा... मालिक हम कहाँ से ढूंढें इन लड़कियों को. एक जैसी लड़कियों को ढूंढा आसान काम तोह नहीं है. सरे आदमी लगे हुए हाँ. आसानी से मिलने वाली होती तोह कबकी यहाँ लाइ जा चुकी होती.



{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}



विनय की आंख खुली तोह उसका नशा उतर चूका था..




वह वैसे hi बीएड पर नंगा लेता हुआ था. खुद को नंगा देख कर उसे पायल सिंह के साथ बिताये समय पल याद आने लगे..

अब चूँकि उसका नशा उतर चूका था. पायल सिंह की छूट और गांड की करि धुनाई उसे सही से याद आने लगी थी.

वह बड़बड़ाने लगा....

साली तू भी रंडी निकली.. मैंने तोह सोचा था. तू मासूम है, भोली नहीं है, पर बिगड़ी हुई नहीं है. पर तू भी वह रंडी निकली.. देख लूँगा तुझे मैं.. विनय ग़ुस्से से उठा और कपडे पहन कर उसी फ्लोर पर बने हुए एक बाथरूम में जा के फ्रेश हुआ और चल पड़ा अपनी बहनो की और.. उसने सोचा शायद पायल वही होगी.

शाम का अँधेरा हो चूका था. रुपाली भी अभी तक सो रही थी. विक्रम सिंह निचे hi अपने आदमियों में बिजी था.

विनय को कोई नहीं दिखा तोह वो अपनी बहनो के रूम में जा घुसा..

विनय को देख कर परची सर झुका गयी और ऋचा बीएड से उतर कर विनय के पास जा पोहंची.. पास गयी तोह अभी भी उसे विनय के मोह से स्मेल आ रही थी. विनय ने माउथ वाश करने की ज़रूरत नहीं समझी थी.

ऋचा विनय को देख कर बोली : भाई मुझे आपसे बात करनी है.

विनय परची को शरमाते देख कर कुछ हैरान हुआ था. वह तोह पायल को ढूंढ़ता हुआ यहाँ आया था.

विनय : क्या बात करनी है ऋचा.. पायल कहाँ है. विनय कमरे में फिरसे देखता हुआ बोलै

ऋचा जो पायल को एक नौकर से कह के पूरी हवेली में तलाश करवा चुकी थी. निचे विक्रम सिंह को ये खबर हो गई थी, पर वह अलका और सतीश के लिए परेशान था. पायल सिंह पर फ़िलहाल उसने अपना फोकस हटा दिए था.

इस बात ने भी ऋचा को कन्फर्म कर दिए था. विनय की शादी परची से hi हुई है. और सुहागरात भी विनय और परची की हुई है. सूरत वाला मामला था. पर वह ये भी सोच गई थी, ज़रूर कोई चक्कर है. पायल सिंह पहले hi कहीं खिसक ली थी.

ऋचा : वह हवेली में नहीं है भाई.

ऋचा बोल तोह गयी. पर परची का सोच कर उसे परेशानी भी होने लगी थी.

विनय : kyaaaaaaaaaa??

विनय शॉकेड हो गया था.

ऋचा : जी भाई. पूरी हवेली में उसे चेक किया जा चूका है, वह कहीं भी नहीं है.

विनय : ये कैसे हो सकता है. इतने गार्ड्स के रहते वह हवेली से चली गयी. फिर सोचने लगा. जैसे उसकी गांड मारी है. कैसे वह हवेली से जा सकती थी.. ये बात उसने ऋचा से नहीं बोली.

ऋचा : भाई मेरे साथ चलें, मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

विनय न चाहते हुए भी परची के शर्म से लाल हो रहे चेहरे को देख कर ऋचा के साथ बहार जाने लगा. दूर के बहार खड़े होकर विनय ऋचा से बोलै.

विनय : परची को क्या हुआ है. उसका ऐसा फेस मैंने पहले कभी नहीं देखा.

ऋचा समेत सब खुल कर बात करने के आदि थे. पर ऐसी बात कभी नहीं करि थी. ऋचा कुछ कंफ्यूज होने लगी. कैसे कन्फर्म करे अपने भाई से. कैसे कहे उससे कह

"भाई मुझे डाउट है, आपकी शादी पायल सिंह से हुई है. सुहागरात दीदी के साथ हुई है तोह शादी भी आपकी दीदी के साथ hi हुई होगी"

पर ऋचा कह नहीं पायी. विनय और भी हैरान होने लगा. अपनी बहनो को ऐसे कभी नहीं देखा था उसने. वह तोह बहुत फ़ास्ट थी. अपने बर्फ बारे बातें भी खुल कर सबके सामने कर जाय करती थी. बस वर्ड्स कुछ लिमिट में उसे हुआ करते थे.

विनय : ऋचा तुम भी परची के जैसे क्यों बेहवे कर रही हो. बात क्या है, मुझे बताओ तोह सही. क्यों मुझे कुछ गलत होने का सिग्नल मिल रहा है. सब ठीक तोह है न.

ऋचा ने एक नज़र मुद कर कमरे में देखा, उसे परची नज़र नहीं आयी. अंदर परची भी विनय और ऋचा की बात सुन रही थी. वह और भी ज़यादा टेंशन में आने लगी थी. वह तो कुछ भी नहीं जानती थी. नहीं जानती थी, कैसे वह अपने भाई के निचे आ गई थी.

ऋचा : bhbh..bhai

विनय : हाँ बोलो.

ऋचा : पायल भाभी की जगा बीएड पर परची दीदी थी. ऋचा डरते डरते बोल गयी..

विनय ने सुनते hi एक जोर्का थप्पड़ ऋचा के मोह पर मार दिया.. ऋचा चीखती हुई निचे जा गिर पड़ी..

परची भी थप्पड़ की आवाज़ और ऋचा की चीख सुनकर, उठ कर, भाग कर बहार आ गयी.. ऋचा को बड़े ज़ोर का थप्पड़ लगा था. उसके होंठ पहात गए थे. खून निकलने लगा था.

विनय को ग़ुस्सा hi इतना आ गया था. बहनचोद वह नहीं था. उसे बनना पसंद भी नहीं था. परची के साथ वह बीएड पर था. ये सुनकर उसे बड़े वाला झटका लगा था. ग़ुस्से पर काबू नहीं रख पाया और ऋचा को थप्पड़ मार दिया था.

परची भगति हुई आयी तोह विनय उसके भागने के अंदाज़ को देख कर झटका खा गया था.

परची के भागने पर विनय को लगा, जैसे परची को भागने में दिक्कत हो रही हो.

परची को भी ग़ुस्सा आ गया था. वह ऋचा के बाज़ो को पकड़ कर उठा गयी. और विनय को देखते हुए ग़ुस्से से बोल पड़ी.

परची : इसपर ग़ुस्से उतरने की क्या ज़रूरत थी आपको.. ग़ुस्सा करना hi है तोह खुद पर करें. शेम ों यू भाई. शेम ों यू. आपने नशे में ये भी नहीं देखा, बीएड पर पायल है या आपकी बेहेन.

विनय : (चीखता हुआ) parrraaaaaaaachhhhhhhhiiiiiiiiiiiii

ऋचा : अब चीखने से क्या होगा भाई. दीदी सही कह रही हाँ. कोई शक है तोह आएं कमरे में.. दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. दीदी अब तोह भाई ने आपका सब कुछ देख hi लिया है तोह दिखा दें भाई को. कैसे वह पायल के साथ न सो कर आपके साथ जानवरो जैसा बर्ताव कर गए हाँ.

ऋचा भी ग़ुस्से में आ गई थी. जहाँ वह पहले कंफ्यूज थी, थप्पड़ खाने और परची के आ जाने से वह भी हिम्मत पकड़ गयी थी..

विनय शॉकिंग कंडीशन में खुले मोह के साथ दोनों को देख रहा था. उसे यकीं hi नहीं हो रहा था. जो परची और ऋचा बोल रही हाँ वह सच भी हो सकता है. मन कह वह नशे में था. पर नशे में वह पहली बार तोह नहीं हुआ था. बरसों से hi तोह शराब पि रहा था. और फिर नशे उतरने के बाद भी तोह उसे सब याद रहा था. जितने समय होश में रहते हुए उसने पायल सिंह की चुदाई करि थी. सब याद था..

शोर की आवाज़ सुनकर निचे से विक्रम भी ऊपर आ गया. वह पहले hi ग़ुस्से में था..

आते hi बोलै : क्यों शोर मचा रहे हो तुम सब.. ये खून कैसा है ऋचा.

विनय पलट कर अपने पापा को देखने लगा. वह अब भी टेंशन में hi था. उसे कुछ समझ नहीं आ रही थी.

परची नाम आवाज़ में : पापा! पायल कहाँ है.

विक्रम : ये तो विनय को पता होगा न. या तुम दोनों को. मैं तोह यहाँ था hi नहीं.

विनय : पापा ये दोनों कह रही हाँ. अब विनय की बारी थी बोलती बंद होने की. वह बोलने तोह लगा था. पर उसे कुछ समझ नहीं ा रही थी.

विक्रम : बोलो, चुप क्यों हो गए तुम.

ऋचा hi बोली : पापा मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है.

विक्रम : कैसी गड़बड़.. विक्रम ऋचा को घूरते हुए बोलै

ऋचा परची और विनय को देखते हुए बोली : पापा मुझे लगता है, पायल शादी से पहले hi हवेली से ग़ायब हो गई थी. और---

विक्रम : और क्या?

विक्रम को ऋचा की बेकार की बात पर अब ग़ुस्सा आने लगा था. कितना समय ले रही थी वह बताने में.

ऋचा ने फिरसे विनय और परची को देखा तोह दोनों ने सर झुका लिए

ऋचा : पापा मुझे लगता है... ऋचा खामोश हो गई

विक्रम ग़ुस्से से : क्या टुकड़ो में बात कर रही हो तुम ऋचा..

ऋचा दर गयी उसे लगा अब उसे अपने पापा से भी एक थप्पड़ खाना पड़ेगा. परची भी अब हिम्मत नहीं कर पायी थी. विनय भी नहीं बोल प् रहा था. ऋचा के सब बोल देने के बाद की सिचुएशन के लिए खुद को तैयार करने लगे.

ऋचा दो कदम पीछे हटकर डरते डरते बोली : पापा मुझे लगता है, भाई की शादी परची दीदी से हुई है.

सुनके विक्रम सिंह का भी वही हाल हुआ जो विनय का हुआ था. वो आगे बढ़ा और ऋचा को थप्पड़ मारना hi चाहता था कह पीछे से आवाज़ सुनाई दी..

"क्यों थप्पड़ मार रहे हो तुम विक्रम मेरी बेटी को"

सबने मुद कर देखा तोह ट्रॉउज़र शर्ट में क़यामत ढाती रुपाली अपने बालों का जुड़ा बनाते हुए, चलते हुए बोली..

विक्रम : रुपाली! सुना तुमने ऋचा क्या कह रही है.

रुपाली भी पास आ गयी ; क्या बात है ऋचा.. अरे ये तेरे मोह से खून कैसा निकल रहा है और गाल भी लाल हाँ. किसी ने मारा है तुझे..

रुपाली की आवाज़ हुकमिया थी. रुपाली ऐसे अंदाज़ में कभी कभी hi सामने आया करती थी. विनय ये देख कर घबरा गया.

रुपाली आगे बढ़ी और ऋचा के मोह की साइड लगा हुआ खून अपने एक ऊँगली पर लगा कर देखने लगी.

विक्रम भी रुपाली को देख के कुछ टेंशन में आ गया था.

रुपाली : ऋचा किसने थप्पड़ मारा है तुझे.. तेरे पापा ने.. रुपाली विक्रम सिंह को ग़ुस्से से देखती हुई बोली..

ऋचा : नहीं मम्मी! वो.. ऋचा विनय को देख कर खामोश हो गई

रुपाली चीख पड़ी : कसिने मारा है तुझे थप्पड़ ऋचा.

ऋचा अपने पापा से इतना नहीं डर्टी थी, जितना अपनी मम्मी से.

ऋचा : भाई ने.. ऋचा डरते डरते बोली.

रुपाली चीख पड़ी : kyuuuuuuuuuuunnnn?

ऋचा ने भी अपने शक का इज़हार कर दिए. सुनकर रुपाली को झटका नहीं लगा. वह नार्मल hi रही. ये देख कर सबको ज़रूर झटका लगा था.

रुपाली : चलो सब कमरे में..

विक्रम भी अब शांत था. मामला रुपाली ने अपने अंडर ले लिया था.

रुपाली : बताओ परची ऋचा ने जो कहा, क्या वह सब सच है. परची ने हाँ में सर हिला कर अपनी सहमति दे दी.

रुपाली एक एक को देखने लगी फिर विक्रम से बोली : विक्रम सतीश और अलका का क्या बना. कोई ख़राब मिली कह नहीं.

विक्रम : नहीं हम तोह वहां से लौट आये थे. रॉ वाले, आर्मी वाले अब वहां पोहंच चुके हाँ.

रुपाली : ठीक है तुम निचे जाओ और कोई भी खबर मिले तोह मुझे तुरंत बताना. विक्रम "ठीक है" बोल कर कमरे से निकल गया.

रुपाली के आगे इतनी hi औकात थी विक्रम की.....

रुपाली : विनय, जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था. अब जब ये सब हो चूका है तोह मैं कुछ नहीं कहूँगी. ग़ुस्सा करने से कुछ हासिल नहीं होगा. परची को देखते हुए बोली. परची तुम्हे भी अब दिल में खेद नहीं रखना है. ओपन माइंडेड तोह हो hi. इन्सेस्ट नहीं था हमारे परिवार में. पर अब तुम दोनों की शादी हो चुकी है. समाज की नज़रों में ये सही नहीं है. पर तुम दोनों की शादी हो चुकी है. तुम दोनों अब से पति पत्नी हो और हमेशा पति पत्नी hi रहोगे.

प्राची, विनय और ऋचा को शॉक लगा था. उनकी मम्मी ऐसी बात भी कर सकती है, कभी सोचा नहीं था.

परची : मम्मी ये आप किसी बात कर रही है. मेरी तोह इसमें कोई गलती नहीं है.

विनय : हाँ मम्मी!

रुपाली ने हाथ खड़े कर दिए : जो भी है. और परची एक बात सुन लो. अब से विनय के शिव कोई भी तुम्हारी ज़िन्दगी में नहीं आएगा. आएगा तोह मेरी परमिशन से.. तब तक तुम अपने सभी बर्फ को भूल जाओ. और ऋचा तुम भी ऐसा सब भूल जाओ. आज से तुम सब की लाइफ में चेंजिंग लायी जा रही है.

तीनो को और भी झटके खा गए..

ऋचा को अब ज़यादा दुःख होने लगा था. वह अब तक कुंवारी थी. बहुत मज़े कर चुकी थी. लेस्बियन और ओरल सेक्स खूब कर चुकी थी. बर्फ के साथ मस्ती भी खूब कर चुकी थी. पॉवरफुल थी तोह कोई भी बर्फ उसके साथ ज़बरदस्ती नहीं कर सका था. अब एक लड़का मिला था उसे.. उसी से ऋचा अपनी दोनों सील खुलवाने की छह दिल में पाले हुए थी. अपनी मम्मी की बात सुनकर उसे झटका लगा था. परची खुल के अपनी लाइफ को एन्जॉय कर चुकी थी. अब उसकी बारी आयी थी तोह वह उसकी मम्मी ने रोक लगा दी थी.

तीनो कुछ बोलते उससे पहले hi रुपाली बोल पड़ी

इतस ान आर्डर!!

और मेरा आर्डर.. जानते हो न तुम सब.. मेरे आर्डर को फॉलो न करने वाले के साथ मैं क्या करती हों...

रुपाली उठी और कमरे से निकल कर अपने कमरे में जाने लगी... पीछे तीनो सदमे में बैठे रह गए थे.

रुपाली अपने कमरे में पोहंची, दूर को लॉक किया और बीएड पर लेट गयी.

रुपाली : अब तोह आप खुश हाँ मुझसे मेरे मालिक..

"इसके शिव तुम कुछ और बोल भी तोह नहीं सकती थी"

रुपाली : हाँ! सही कहा आपने. अब तोह मैं आपकी घुलम बन चुकी हों मेरे मालिक. दासी के लिए कोई और हुकम..

"ज़रूरत पड़ी तोह बता भी दूंगा. जानती हो न अब्ब से तुम केवल मेरी हो. विक्रम चूतिये को कभी अपने शरीर को छूने भी मत देना"

रुपाली : उस कुत्ते की इतनी मजाल hi कहाँ है मेरे मालिक, जो वह मुझे मेरी मर्ज़ी के बिना छू भी सके.

"हमेशा मेरे माल को साफ़ करके, चमका के रखना.. जल्द hi मिलूंगा मैं अपना माल वसूलने के लिए"

रुपाली : मैं उस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करुँगी मेरे मालिक..



{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


पायल सिंह की आंख खुली तोह वह छत को ताकने लगी. इधर उधर मुद कर नहीं देखा था उसने. वो धयान नहीं दे पाई, ये नहीं जान पाई, जिस छत को वह तक रही है. वह तोह उसकी असली हवेली की छत है. उसके कमरे की छत है.

वह दुःख में छत को तकते हुए सोच रही थी. विनय के साथ कुछ देर में उसकी शादी कर दी जायेगी. वह खुद को कैसे भी करके बचा नहीं सकेगी. ये सोच कर उसकी आँखों में आंसू आने लगे. जो लुढ़कते हुए उनके कानो में जमा होने लगे.

"क्यों रो रही हो पायल बेटी"

पायल सिंह को आवाज़ सुनकर झटका लगा. झाकते से उठी तोह अपने गिर्द अपनी माँ को, दादी को, परिधि को देख कर शॉकेड रह गयी..

पायल सिंह रोटी हुई : aaa..aaa..aaap..aaap..sabbb..aa..gaye... पायल सिंह ज़ोर ज़ोर से रोने लगी. बड़े दुःख से रोने लगी. अब भी वह ये समझ रही थी. वह देहरादून की हवेली में है और सब उसके पास आये हाँ..

पायल सिंह :mm..mujhe..bacha..lo..maaaaaa...vinay..ke..sath..meri..shadi..karne.. wale..han..maa...

सबको झटका लगा..

रोहिणी : ये क्या कह रही हो तुम पायल बेटी.. विनय के साथ तुम्हारी शादी.. पर ये कैसे हो सकता है..

पायल हिचकियों में रट हुए : मुझे नहीं पता माँ. क्यों ऐसा सब कर रहे हाँ. माँ मुझे विनय से शादी नहीं करनी. माँ मुझे घर ले चलो माँ.. मुझे यहाँ नहीं रहना माँ. मुझे अपनी हवेली में रहना है माँ. मुझे वापिस ले चलो.. पायल सिंह की हालत सच में hi बहुत ख़राब होने लगी थी.

सब पायल की बात पर बहुत हैरान थी.

हुआ ये था. यहाँ आटे हुए पायल सिंह खुद से आयी थी. पर षिमुना उसके अंदर समय रही थी. षिमुना ने पायल सिंह को पता hi नहीं चलने दिए था. पायल सिंह अब तक यही समझ रही थी वह बस्ती वाली हवेली में hi है.

दादी : पायल बेटी तुम किसी बात कर रही हो. कुछ देर पहले hi तो तुम खुद से यहाँ आई हो. अभी कुछ देर पहले hi तोह तुम अपने बीएड पर लेती थी. अब कह रही हो तुम्हे घर जाना है. तुम घर में hi तोह हो..

रोटी हुई पायल को एक और झांकता लगा और वह अपने कमरे को देखने लगी.. एक एक चीज को देखने लगी. उसका सर चकराने लगा था. पर उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था. सर चकराने लगा तोह वो फिरसे तकिये पर सर गिरा गई..

रोहिणी : माँ जी क्या कह रही है ये, मुझे तोह कुछ समझ नहीं आ रही. खुद से आई है यहाँ और कमरे को ऐसे देख रही है. जैसे उसे यकीं hi नहीं ा रहा हो.

दादी : मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा है रोहिणी बेटी. शादी वाली बात भी मुझे कुछ सही नहीं लग रही. ऐसे कैसा हो सकता है. विनय कैसे पायल बेटी से शादी कर सकता है. मुझे तोह यकीं hi नहीं हो रहा.

परिधि जो सब देख रही थी. वह सब नहीं जानती थी. पर अपने चाचा और सबको कई बार परख चुकी थी. इसी लिए वह हमेशा hi सबसे दूर रहा करती थी.

परिधि : अब भी आप यकीं न करें.. यकीं करना आपको आता hi कहाँ है. एक बार पहले भी आप सब चाचा, चची और सब पर यकीं कर गए थे. मेरे भाई पर यकीं नहीं किया था आपने. अब पायल दी खुद से कह रही हाँ, विनय भाई पायल दी से शादी करने जा रहा था. अब भी आपको यकीं नहीं आएगा.. परिधि फिर पायल दी को देखते हुए उसे चोट देने की सोच गयी.. पायल दीदी वैसे हम क्यों यकीं करें आपकी बात पर. विनय हमारा भाई है और एक भाई कैसे अपनी बेहेन से शादी कर सकता है. ज़रूर आपको कोई गलत फेहमी हुई होगी.

परिधि की आवाज़ में बड़ी काट आ गई थी. रोहिणी और रानी देवी तोह परिधि को देखती hi रह गई थी. कितनी जल्दी कितना कुछ बदल गया था हवेली में, हवेली में रहने वळून के अंदर.. परिधि अब ऐसे अंदाज़ में अक्सर hi बात करने लगी थी. पहले राजा ठाकुर का दर था. पर अब वह भी नहीं रहा था. राजा ठाकुर ने सबको उनके हाल पर छोड़ दिए था. किसी को कुछ भी बोलने से नहीं टोकते थे.

पायल सिंह जो "यहाँ तक कैसे वह पोहंची" ऐसा सब सोच रही थी. अपनी कनपटियों को मसल रही थी. परिधि की बात और लहजे पर उसे घूर कर देखने लगी.

पायल सिंह ग़ुस्से में : तो क्या मैं झूट बोल रही हों.

परिधि : बोल भी सकती हाँ. कोनसी बड़ी बात है ये दीदी. अपने hi भाई पर जो विश्वास न कर पाए, वो झूट भी तोह बोल सकती है. और फिर हमारे चाचा के साथ साथ, चची और सब हाँ भी तोह अच्छे न.. कैसे वह कुछ गलत कर सकते हाँ. जब भाई के मामले में उन्हों ने कुछ गलत नहीं किया था. भाई ने गलत किया था. अब्ब भी ज़रूर आप hi झूट बोल रही होंगी. चाचा, चची और सब आज भी सही होंगे. वो सब गलत तोह हो hi नहीं सकते. वह सब तोह महान है ना..

मैंने सही कहा है न दीदी....

परिधि के शब्द ज़हर में बुझे हुए तीर थे. ऐसे शब्द जो किसी ने पहले कभी नहीं सुने थे. सुने थे तोह बाकि सबसे दक्ष ने सुने थे. किसी और ने किसी को कभी नहीं सुनाये थे.. रोहिणी जो अंदर hi अंदर दक्ष को लेके बहुत कुछ सोच रही थी. वह अब परिधि की बातों पर फिरसे आंसू बहाने लगी. रोहिणी ने तोह अलका, पायल और चची पर यकीं किया था. खुद से कुछ नहीं देखा tha.jo उसे बताया गया था उसपर यकीं कर गई थी... पिछले 6 सालों से उसे hi सच मानती चली आ रही थी. अब उनका यकीं भी डगमगाने लगा था. उनके अंदर की ममता जागने लगी थी. उन्हें भी अपने दक्ष बेटे के जीवन का एक एक पल याद आ रहा था. कितना प्यार करता था वह सबसे. कभी कुछ उसके बारे में गलत देखने सुनने को भी तोह नहीं मिला था.

दादी को भी झटका लगा था. पर वह रोहिणी जितनी गहराई में न जा सकीय. झटका तोह पायल को भी लगा था. वह भी सब याद करने लगी. पर जो देख चुकी थी उसे वह सब कहीं से भी गलत नहीं लगा था. आज भी वह दक्ष को गलत hi मान रही थी..

पायल : ऐसे अंदाज़ में मुझसे बात मत कर परिधि.. तेरी बड़ी बेहेन हों मैं. तब जो भी हुआ था, वह सब सच था. मैंने और अलका ने सब देखा था. अब का जो भी मैं बोल रही हों वह भी सब सच है. पहले वाला अलग था और अब का अलग है. इस बार----

पायल सिंह बोलती बोलती रुक गयी.. उसे चची के शब्द याद आने लगे..

"पत्नी बनेगी तोह ठीक नहीं तोह उम्र भर के लिए तुझे मेरे बेटे की रखेल बनना पड़ेगा"

पायल सिंह पढ़ी लिखी थी. समझदार भी बहुत थी. बस अपने भाई से ज़यादा उस देखि घटना पर विश्वास कर बैठी थी. पर अब जब चची के शब्द याद आये तोह साथ hi परची और ऋचा का बेहेवियर भी याद आने लगा..

पायल सिंह को झटके पर झटके लगने लगे.. वह बहुत कुछ सोच रही थी. उसकी चची, उसकी कौसिन्स इतनी एडवांस और घट्टिया तोह कभी भी नहीं थी..

वह सोचने लगी. कहीं सच में hi तोह कोई खेल तोह नहीं खेला गया था. चची जैसी अब की बार सामने आई है. चची ऐसी तोह कभी भी नहीं थी. कैसे एक बाज़ारी औरत के जैसे बातें कर रही थी. कैसे कितने घट्टिया शब्दों का उपयोग कर गयी थी. पायल सिंह विचारों में डूबती चली गई. मोहब्बत जो अपणु के लिए दिल में हो, वह कभी जा नहीं सकती. बस दूसरों के खेले गए खेल के चलते कहीं डाब के रह जाती है. अब पायल सिंह भी रोहिणी के जैसे विचारों में घिरने लगी थी. वह सभी एंगल से सोचती चली गई.

परिधि, रोहिणी और रानी देवी तीनो पायल सिंह को देखने लगी..

रोहिणी और देवी माँ पायल सिंह के लिए दुखी तोह तोह परिधि को घंटा भी फर्क नहीं पड़ा. हाँ अपने दिल की भड़ास निकल कर वह कुछ शांत हो गई थी. वह वहां से निकल कर राजा ठाकुर के कमरे में जा घुसी..

राजा ठाकुर : आओ आओ परिधि बेटी. कैसे आना हुआ..

राजा ठाकुर एक चेयर पर बैठे थे. परिधि वहीँ घुटने तक कर राजा ठाकुर के घुटनो पर सर रख गयी.

परिधि : बाबा पायल दी खुद से नहीं आई हाँ न यहाँ हवेली में.. बाबा फिर वह कैसे आई हाँ. मुझे जानना है.

राजा ठाकुर : तुम अब भी नहीं समझी हो परिधि बेटी..

परिधि ने सर उठा कर राजा ठाकुर को देखा. राजा ठाकुर की आँखों की चमक और होंटो पर दर्द भरी मुस्कान परिधि को बहुत कुछ बता गई थी.

परिधि खुश होक : मेरा भाई.. है न बाबा.. भाई ने दीदी को बचा के हवेली में पोहंचाया है न.

राजा ठाकुर : सब नहीं जनता बेटी.. पर तेरा भाई हम सब से फिरसे जुड़ चूका है. इतना मुझे बताया गया है. हर तूफ़ान को अब तुम्हारा भाई अपने सीने में समेटने के लिए मैदान में उतर आया है..

परिधि राजा ठाकुर के दोनों हाथ थाम कर चूमती हुई बोली : बाबा मुझे भाई की बहुत याद आ रही है. मैं करता है, उड़ के भाई के पास चली जाओ.

राजा ठाकुर मुस्कुरा कर परिधि के सर को थपथपाने लगे.



{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}



इन गुफा.........




दोनों स्नैक्स NO:4 के गिर्द कुछ देर घूमते रहे.. एक दूसरे को देखने के बाद दोनों स्नैक्स एक बार फिरसे NO:4 की आँखों में देखने लगे. NO:4 की आँखों के रास्ते कोई संदेस NO:4 के ब्रेन तक पोहंच रहा था.

कुछ देर में दोनों स्नैक्स एक साइड में चलने लगे. NO:4 भी उनके पीछे जाने लगी. ख़ज़ाने से हटकर एक दिवार के पास जा कर वह रुके तोह एक स्नेक की आँखों से ग्रीन लाइट निकली और दिवार पर पड़ने लगी. फ़ौरन hi वहां से दिवार साइड हटने लगी. दोनों स्नेक और NO:4 उस रस्ते से गुज़रते चले गए. कुछ आगे एक बॉक्स पड़ा हुआ था.

NO:4 ने वह बॉक्स उठाया और उसे खोल कर उसके अंदर से एक माला निकल ली.. NO:4 ने फिर वह माला अपने गले में दाल ली. ऐसे hi वापसी का सफर हुआ और कुछ देर में NO:4 फिरसे वहीँ थी. जहाँ कुछ देर पहले मौजूद थी.

दोनों स्नैक्स NO:4 को लेके एक दिशा में आगे बढ़ने लगे. डिफरेंट गुफाओं से गुज़रते हुए वह फिरसे एक दिवार के पास पोहंचे तोह पहले जैसे अंदाज़ ग्रीन लाइट अपनी आँखों से उस दिवार पर छोड़ने लगे. दिवार फिरसे हटी तो सामने बस्ती के पुजारी जी मौजूद थे. पुजारी जी पहले सामने के रुख पर फेस किये बैठे हुए थे. दिवार हटी, आवाज़ हुई तोह पलट कर देखने लगे.

जो दृश्य नज़र आया, वह देख कर पुजारी जी के टूटे कुछ कर गए. पुजारी जी पवित्र आत्मा होते हुए भी दोनों स्नैक्स को देख कर दर गए थे. दोनों स्नैक्स थे भी तोह विशाल स्नैक्स. उनकी आँखों में इतनी कशिश थी, पुजारी जी का दर जाने लगा. स्नैक्स ने पुजारी जी को भी सम्मोहित कर दिए. फिर उसके गिर्द घूमने लगे. कुछ देर बाद वह रुके तोह पुजारी जी की आँखों में देखने लगे.. दोनों स्नैक्स पुजारी जी को भी कोई संदेस आँखों के रस्ते दे रहे थे.

अगले दिन की सुबह होने तक पुजारी जी ने NO:4 को देहरादून शहर में पोहंचा दिया था.. पुजारी जी सबकी नज़रों से बचा कर NO:4 को लेके शहर पोहंचे थे. शॉर्टकट वे से वह शहर पोहंचे थे.

NO:4 सम्मोहित हालत में गले में माला डाले शहर की सड़कों पर चलने लगी. उसे नहीं पता था, वह कहाँ जा रही है. उसे अपनी मंज़िल का कुछ पता नहीं था. NO:4 को देख कर जहाँ दूर के लोग उसे देख कर वर्ल्ड बेओटीएस्ट गर्ल बोल रहे थे तोह पास वाले NO:4 को देख कर झटके कहते हुए दूर हो रहे थे. ऐसी hi कशिश थी NO:4 में.. कोई भी उसकी कशिश करीब से सहन नहीं कर प् रहा था. कशिश असल में माला की थी.

NO:4 को रास्ता मिलता गया और वह आगे बढ़ती चली गयी..

जैसे hi NO;4 शहर में पोहंची तोह उसकी आँखों में मौजूद के अंदर के सीएएम वर्किंग मोड में आ गए थे. बाकि जो भी देवीकेस के साथ वह थी, वह सब भी वर्किंग करने लगे थे.

सोफिए कोठी में बानी गयम में थी..

कुछ देर में एक एजेंट गयम के दूर पर खड़ा हुआ बोलै : मैडम NO:4 फिरसे संपर्क में आ गई है. वह देहरादून की सड़कों पर दिखाई दे रही है.

सोफिए : व्हॉट!! .. ठीक है तुम जाओ.. सोफिए भी एक टॉवल से अपने बदन को साफ़ करती हुई अपने कमरे की और बढ़ने लगी. वहीँ लैपटॉप खोल कर वह NO:4 को चेक करने लगी..

सोफिए : NO:4 यू अरे अलाइव? हाउ?

NO:4 भी सोफिए के बोलने पर कुछ नार्मल हो गई. वह अभी तक ट्रांस में थी. वह बोली तोह उसकी आवाज़ नार्मल थी. सोफिए जज नहीं कर पाई.

NO:4 : मैडम मुझे दोनों स्नैक्स ने अलका hi समझा था. वहीँ से मुझे माला भी प्राप्त हो गई है मैडम और-----

माला का ज़िक्र सुनते hi सोफिए और कुछ सुन न पायी..

सोफिए : क्याआआआ? ओह्ह्ह्ह ग्रेट... अब कहाँ है वह माला.. सोफिए बहुत खुश हो गई थी माला के मिल जाने का सुनकर..

NO:4 : मेरे गले में hi है मैडम..

सोफिए ने वहीँ से अपने आदमियों से कांटेक्ट किया जो खुद से hi NO:4 के पास पोहचने वाले थे. सोफिए को पता चला तोह बोली. NO:4 को फ़ौरन उसके पास पोहचा दिए जाए.

सोफिए : NO:4, एजेंट्स आ रहे हाँ. तुम हेलीकाप्टर से कुछ समय बाद मेरे पास पोहंच रही हो. माला का ख़ास ख्याल रखना. किसी और के हाथ नहीं लगनी चाहिए.

NO:4 : जी मैडम.. मैं धयान रखूंगी.

डेढ़ घंटे में NO:4 दिल्ली में सोफिए वाली कोठी में थी. और सोफिए ड्राइंग रूम में NO:4 के सामने कड़ी थी. सोफिए बड़े धयान से माला को देख रही. माला जो कह बहुत hi ख़ास थी. पर देखने में एक आम सी माल दिखाई दे रही थी.

सोफिए को कुछ अजीब सा लग रहा था. पर वह समझ नहीं प् रही थी.

सोफिए : यही है वह माला

NO:4 : जी मैडम.

सोफिए : उतार कर मुझे दो. सोफिए NO:4 को आर्डर देते हुए बोली तोह NO:4 ने बिना कुछ और सोचे वह माला गले से निकल कर सोफिए के हाथ पर रख दी. सोफिए जो माला को देख कर अपने हाथ में लेकर जांचने का सोच रही थी.

माला हाथ में आई तोह सोफिए धदममम से निचे गिर पड़ी. माला का वेट वह उठा hi नहीं पायी थी. उसे ऐसा लगा जैसे कोई पहाड़ उठा कर उसके हाथ पर रख दिया गया हो.

इतना hi वेट था माला का. सोफिए को राइट शोल्डर को ज़बरदस्त झटका लगा था. कोहनी को भी ज़बरदस्त झटका लगा था. कोहनी टूट गयी तोह कन्धा बुरी तरह से उतर गया.

सोफिए कंधे से बुरी तरह से इन्जुरेड हो गई थी.

सोफिए को कोहनी और कंधे के दर्द के साथ साथ एक झटका और भी लगा था. जहाँ माला का वेट बेपनाह था. वहीँ माला उसके हाथ पर आयी तोह सोफिए को ऐसा लगने लगा. जैसे अनगिनत अंगारे उसके हाथ में उतर के पुरे शरीर में दौड़ने लगे हों.

पूरी कोठी सोफिए की भयंकर चीखों से गूँज उठी. जो भी कोठी में था. वह दौड़ता हुआ वहां आया और सोफिए की हालत देख कर दांग रह गया.

सोफिए जैसी सुपर एजेंट इतने भयंकर अंदाज़ में चीख रही थी. चिल्ला रही थी. ज़मीन पर गिर कर तड़प रही थी. सब देख कर शॉकेड हो गए थे.

बाओ के एजेंट ये देख कर चीख पड़े... NO:4 माला को मैडम के हाथ से ले लो. NO:4 बिना किसी भाव के निचे झुकी और सोफिए के हाथ से माला लेकर वापिस से अपने गले में दाल ली.

माला के सोफिए से अलग होते hi सोफिए की चीखों में भी बदलाव आ गया था.. NO:4 नार्मल कड़ी रही थी. उसे सोफिए की चीखों से जैसे कोई फर्क hi नहीं पड़ा था.

सब एजेंट्स भाग कर सोफिए के पास जा पोहंचे..

सोफिए को अपने अपनी टूटी कोहनी और कंधे का hi दर्द रह गया था. दर्द की इन्तहा देखि थी सोफिए ने तोह उसका पूरा शरीर पसीना उगलने लगा था.

एक एजेंट बोलै : मैडम हम आपकी कुछ हेल्प करें.. सोफिए चीखती हुई हाँ में सर हिला गयी.. कोई उसे उसकी मर्ज़ी के बिना छू भी नहीं सकता था.

एजेंट्स ने सोफिए को उठा के सोफिए के कमरे में पोहंचाया और ीबन मार्श को खबर कर दी.. वह भी सब सुन और जान कर परेशान हो गया..

सोफिए बहुत ज़यादा इन्जुरेड हो गयी थी. कोहनी hi नहीं टूटी थी. कंधे के मसल्स भी हज़ारों टन वेट का बोझ सहन नहीं कर पाए थे.

सोफिए अब भी बोलने लायक नहीं हुई थी. ीबन मार्श ने स्पेशल प्लेन से सोफिए और NO:4 के साथ 4 एजेंट्स को इजराइल लौट जाने को बोल दिए..



{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}



कैसे हो रे तुम मेरे बालम..




दक्ष : ओह्ह मेरे देश की हवा तुझे भी लग गयी मेरी बुलबुल..

षिमुना : ेहेहेहेहे! हवा.. मुझे तोह तेरे देश का पुरे पानी भी लग चूका है मेरे सजनवा..

षिमुना हस्ता हुए बोली तोह मई भी उसका मतलब समझते हुए है पड़ा.

दक्ष : तेरी किस्मत में था न मेरा पानी तभी तोह---

षिमुना : तभी तोह सात प्लेनेट छोड़ कर तेरे प्लेनेट पर आई हों मेरे हीरो..

दक्ष : हाहाहा.. हमारे हाँ की कहावत है.. सात समंदर पार करके तेरे पास आया हों और तुम.. हाहाहा तुम तोह सबसे आगे निकल गयी. तुम तो 7 सात प्लेनेट पार करके आई हो

षिमुना : ेहेहेहे दक्ष.. कसम से मुझे मेरे परिवार की चिंता न होती न तोह मैं वापिस जाने का सोचती भी नहीं.. यहाँ का सब भी बहुत मैं को भा गया है मेरे.

दक्ष : और अगर मैं कभी तुम्हारे साथ तुम्हारे प्लेनेट पर गया तोह मेरा भी वापिस पृथ्वी पर लौटने को मैं नहीं करेगा.

षिमुना : ओह्ह्ह्ह दक्ष! तुम वापिस लौटने की बात क्या करोगे. तुम तोह सोच भी नहीं पाओगे. इतना hi खूबसूरत है मेरा प्लेनेट..

दक्ष : फिर तोह मैं वहां कभी जाने की सोचूंगा भी नहीं. बाप रे, वहां की तोह मुझे सब hi छोटी छोटी मिलेंगी.

षिमुना : क्या छोटी छोटी?

षिमुना को मेरी बात की समझ नहीं आई.

दक्ष : हाहाहा वही.. तुम्हारे प्लेनेट की गुफाएं.. कितनी मिनी हाँ न..

षिमुना खिलखिला कर हसने लगी. मैं भी हसने लगा..

एकदुम्म से hi षिमुना जैसे शांत पद गई थी. मैं हैरान हो गया.. षिमुना के दिमाग में था मैं.. तोह षिमुना एकदुम्म से खामोश हुई तोह मुझे षिमुना के दिमाग में एक फिल्म सी चलती हुई दिखाई देने लगी.

कई सीन्स थे उस फिल्म में.. आह्हः कितने hi मेरे देश की रोटी हुई मायें मुझे दिखाई देने लगी थी. उनके दर्द को षिमुना ने बड़े करीब से देखा था. मैं भी वही सब देख कर और भी करीब से महसूस करने लगा. सबकी चीखो पुकार षिमुना के दिमाग में गूंजने लगी तोह मैं भी सुनकर देहल उठा. एक माँ के दिल की दहला देने वाली चीख hi खून के आंसू रुला देती है.. षिमुना के दिमाग में तोह फिर भी कई मायें अलग अलग प्लेसेस पर दिखाई दे रही थी. सब इतने ज़यादा दिल दहला देने वाले अंदाज़ में रो रही थी. मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था.

मुझे पता hi नहीं चला कब मेरी आँखों से आंसू बह निकले..

दक्ष : ये सब क्या है षिमुना?

षिमुना भी आंसू बहाने लगी.. दक्ष मैंने गलत कहा था दक्ष. तुम्हारी एअर्थ बिलकुल भी रहने लायक जगा नहीं है दक्ष. मैं यहाँ नहीं रह सकती दक्ष.. कसम से यहाँ रही तोह लोगों का दर्द देख कर मेरा दिल फट जाएगा दक्ष. दक्ष कितने ज़ालिम लोग भी रहते हाँ जो हस्ते खेलते घर को उजाड़ जाते हाँ. दक्ष.. दक्ष..

दक्ष : मुझे सब डिटेल से बताओ षिमुना. तुमने क्या क्या देखा है. सब मैं क्यों रो रही हाँ.

षिमुना खुद पर किसी हद तक काबू पाते हुए बोली : दक्ष कुछ मायें एक hi घटना से जुडी हुई लगती हाँ मुझे. उनकी जवान बेटियां उठाई गई हाँ. कुछ माओ के बचे ग़ायब हाँ दक्ष. जल्दी आ जाओ दक्ष.. मिलके सब को वापिस लाते हाँ. कितने दर्द में हाँ सब. आओ मिलके उनका दर्द काम करें दक्ष.. सब को उनके खोये हुए नगीने लौटा दें.

दक्ष : बस मैं भी कुछ hi देर में निकलने था. सब तैयारी कम्पलीट हो चुकी है. एक नए फेस के साथ मैं निकलने वाला हों.

षिमुना : आ जाओ दक्ष! कसम से मुझसे सब का दर्द सहन नहीं हो रहा है. मुझे टेलिपाथी आती होती तोह कबका सबके दर्द को काम कर चुकी होती. मैं खुल कर भी सबके सामने नहीं आ सकती दक्ष. तुम जल्दी से आ जाओ. देखो कितने दर्द में हाँ तुम्हारे अपने hi देश के लोग.

कुछ देर और षिमुना से बात चित मैं करता रहा. फिर उसके दिमाग से निकल आया. लाइफ में पहली बार मैंने अपने देश वासियो के लिए इतना दर्द महसूस किया था. मैं अपने देश लौट कर अपने दुश्मनो से भीड़ जाना चाहता था. पर समाज सेवा ने पहले मुझे अपनी और आकर्षित कर लिया था.

अपने बदले से भी बढ़कर था मेरा ये वाला कर्तव्य..

एक लम्बी सांस लेके मैं ऊपर देखा. ऊपर थी तोह छत hi पर मैं खुले आसमान को इमेजिन करने लगा. भगवन से पराथना करने लगा. भगवन मुझे हर मिशन में सफलता देना. अभी तोह मैं दुश्मनो से लड़ने के मामले में अनारी भी था. किसे से लड़ने का मौका hi नहीं मिला था कभी मुझे.

अब्ब से मेरी नयी ज़िन्दगी शुरू होने जा रही थी. अपना बैग उठा कर मैं कमरे से निकल कर मास्टर के सामने जा पोहंचा. जहाँ मास्टर shoon-li, मास्टर chi-fang और wang-zhi मौजूद थे.

सबसे पहले तीनो मुझसे गले मिले.

shoon-li : दक्ष बीटा! समय की कमी के चलते तुम्हे सब नहीं सीखा पाया मैं. समय मिलने पर आते जाते रहना. मुझे तुममे अपना सारा फन उतरना है.

दक्ष : ज़रूर मास्टर जी! मई आता जाता रहूँगा. आप तोह मेरे बड़े हाँ. कैसे आप को भूल सकता हों मैं. आप के कारण hi तोह आज मैं दुन्या को फेस करने लायक हुआ हों.

shoon-li : खुश रहो बीटा

मास्टर : shoon-li दक्ष बेटे के नसीब में केवल हमारी hi विरासत प्राप्त करना नहीं लिखा है. और भी बहुत कुछ दक्ष बेटे के नसीब में लिखा जा चूका है. लार्ड बुद्धा जाने, वही सब जानते हाँ, हम तोह केवल उनके दिखाए रास्तों पर चल सकते हाँ.. दक्ष बीटा, यहाँ से निकलते hi तुम्हारी नयी ज़िन्दगी शरू हो जाएगी. कभी भी खुद को अकेला मत समझना. शरीर की ताक़त से ज़यादा दिमाग की ताक़त का उसे करना. दुश्मन सोये नहीं हाँ और न hi कभी सोयेंगे. तुम्हे पाने के लिए वह अब भी उतने hi बेचैन हाँ, जितने के पहले थे. सावधानी से एक एक कदम उठाना. जाओ लार्ड बुद्धा तुम्हारी रक्षा करे..

wang-zhi दोनों मास्टर्स के सामने अपने जज़्बात पर काबू पाए हुए थी. वर्ण वो मेरे जाने से बहुत उदास थी. ज़यादा समय उसके साथ नहीं बिता पाया था. पर जितना भी बिताया था. हम बहुत करीब आ गए थे. wang-zhi तो बहुत आगे निकल गयी थी. मुझसे प्यार करने लगी थी.

कुछ देर और वहां रहने के बाद मैं वहां से निकल पड़ा था.

जैसे लाइफ मुझे जीने को दे दी गई थी. वह लाइफ बहुत मस्त लाइफ थी. एक मकसद वाली िल्फे थी. एक ऐसी लाइफ थी, जिसकी कल्पना hi की जा सकती थी. पर किसी को नसीब नहीं हो सकती थी.

समाज सेवा करना बड़े पुण्य का काम था.

पर....

करना आसान नहीं था. कदम कदम पर मौत से सामना करना पड़ने वाला था. पिछले 6 सैलून में अनेको बार मैंने मरीन लाइफ जीते हुए मौत का सामना किया था. पर वह खतरे अलग थे.

अब के मेरी ज़िन्दगी में आने वाले खतरे अलग थे. पहले मैं खुद से ख़तरात में कूद जाया करता था. अब्ब भी मैं खुद से hi अपने लिए ऐसी ज़िंदगी को एक्सेप्ट कर गया था.

मतलब...

खुद से hi ख़तरात वाली ज़िन्दगी का चुनाव कर लिया था.

पर....

इस बार बात अलग थी. इस बार मैं किसी से भिड़ता तोह वह फिर मरते दुम्म तक मेरे पीछे रहने वाला था. मेरे हथु मर जाता या किसी और कारण मर जाता. तब तोह वह मेरा पीछा छोड़ सकता था.

ोथेरविसे..

वह मेरे पीछे hi रहने वाले थे..

मेरे पीछे तोह पूरी दुन्या वाले षिमुना के आते hi पद चुके थे. पर अब की बात और भी अलग होने वाली थी. अब मैं एक नए रूप में सबके सामने आने वाला था..

मैं एक खली मैदान में जा पोहंचा था. वहां एक हेलीकाप्टर मेरे लिए मौजूद था. मैं हेलीकाप्टर पर बेथ कर इंडिया चीन बॉर्डर की और जाने वाला था. ये सारा इंतेज़ाम मास्टर ने hi किया था.

हेलीकाप्टर मुझे लेके उत्तराखंड के बॉर्डर की और जाने वाला था. पता नहीं क्यों मास्टर ने मेरे लिए ये रास्ता चूसे किया था.

मैं एक दिन ठहर के फ्लाइट से इंडिया जा सकता था. मैंने इस बारे मास्टर से पूछा भी था तोह मास्टर ने मुझे ज़यादा कुछ नहीं बताया था.. बस इतना hi कहा था.

"तुम्हे खुद से बता चल जाएगा"

में हेलीकाप्टर में बैठा.. तोह हेलीकाप्टर मुझे लेके उड़न भरने लगा. मेरे दिल की धड़कन कुछ बढ़ने लगी थी. बरसों बाद मैं अपने देश लौट रहा था. वह हो रहा था जो मैंने पिछले 6 सालों में सोचा भी नहीं था.

अपने देश जाना पड़ेगा, ऐसे अंदाज़ में जाना पड़ेगा, ये भी नै सोचा था. हेलीकाप्टर में बैठा हुआ मैं ये सब सोच रहा था. हर गुज़रते पल के साथ मैं अपने देश के बॉर्डर के करीब और करीब होता जा रहा था.

कुछ घंटे बीत चुके थे हेलीकाप्टर की परवाज़ को...

इस बीच दो बार हेलीकाप्टर लैंड हुआ था फ्यूल डलवाने के लिए.. फ्यूल लेते हुए भी कुछ टाइम लग गया था..



{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


दक्ष टेम्पल से निकला तोह मास्टर shoon-li बोले : थे ग्रेट मास्टर आपने दक्ष बेटे को कुछ बताया क्यों नहीं.

wang-zhi भी सुन रही थी, पर उसे कुछ समझ नहीं आयी.

मास्टर CHI-FANG के होंटो पर मुस्कान आ गयी : आज नहीं तोह कल उसे ख़तरात से तोह गुज़ारना hi है. तोह कल को आने वाला खतरा आज hi आ जाये तोह हर्ज hi क्या है. और फिर उसे बताने की ज़रूरत हमें नहीं है shoon-li.. उसे खुद से ख़तरात से समझ के लड़ना सीखना होगा. आप भी वह नहीं जानते हाँ shoon-li जो मैं जनता हों.

wang-zhi अपने बाबा की बात पर हैरान रह गयी थी.

shoon-li : ऐसी क्या बात हो सकती है ग्रेट मास्टर!

chi-fang : समय खुद hi आपको बता देगा shoon-li

wang-zhi : बाबा दक्ष के लिए खतरा है तोह मुझे उसे बताने जाना होगा.

मास्टर chi-fang के होंटो की मुस्कराहट गहरी हो गई.

chi-fang : बेटी ज़ही तुम इतनी कमज़ोर कबसे हो गयी हो. चिंता अच्छी बात है. पर दक्ष के लिए ऐसी चिंता.

wang-zhi लाल पीली होने लगी तोह दोनों मास्टर है पड़े.. shoon-li भी सब जानते थे. wang-zhi मैं hi मैं में दक्ष को दिल दे बैठी है.

chi-fang : जो यहाँ से गया है.. क्या वो माँ का बना हुआ है.

wang-zhi ने मास्टर को देखा तोह उसे एहसास हुआ कह वह दक्ष की मोहब्बत में दक्ष के लिए कुछ ज़यादा hi चिंतित हो गई थी.

wang-zhi : नहीं बाबा! जो यहाँ से गया है, वह लोहे का बना हुआ है. वह एक फुळड भी है.

chi-fang : तोह क्या उसके लिए "खतरा है" जान कर हम चिंतित हो जायेंगे.

wang-zhi कुछ शर्मिंद हो गयी : नहीं बाबा. लाइफ में तोह हमेशा hi खतरे आते जाते रहते हाँ. आज नहीं तोह कल ख़तरात से आमना सामना तोह होना hi है.

chi-fang : तुम्हे शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं है ज़ही बेटी. चिंता तोह मुझे भी हमेशा रहेगी दक्ष बेटे की. जो नयी ज़िन्दगी उसे मिली है. ए दिन कोई न कोई घटना घटती hi रहेगी. जहाँ दक्ष बेटे को बहुत सी खुशियां, बहुत सी कामयाबियां मिलेंगी. वहीँ उसे बहुत से दर्द और बहुत से ज़ख़्म भी सहन करने पड़ेंगे.

लोक सेवा कोई आसान काम नहीं है ज़ही बेटी..



{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


मैं नहीं जनता था, बॉर्डर कितनी दूरी पर रह गया है. जितना समय बीत चूका था. उस हिसाब से मुझे लग रहा था, अब बॉर्डर बस कुछ hi दूरी पर है. पर बॉर्डर था कह आ hi नहीं रहा था..

हेलीकाप्टर में सभी चिनेसे आर्मी वाले थे. जब बैठा था तोह सरसरी सी बात चीत हुई थी सभी से. उसके बात मैं पुरे रस्ते या तोह षिमुना से बात करता आया था. या नज़ारे देखता रहा था.

सब ठीक चल रहा था...

पर एकदुम्म से hi कुछ गड़बड़ी हो गयी.. मुझे अंदाज़ा hi नहीं हो सका था. मेरे साथ ऐसा भी कुछ हो सकता है. मास्टर chi-fang द्वारा मैं हेलीकाप्टर में बैठा हुआ अपने देश की और बढ़ रहा था. इसलिए किसी के भी दिमाग में नहीं गया था मैं. मुझे ज़रूरत hi महसूस नहीं हुई थी. मैं इजी था. और बरसों बाद इंडिया जाने से रिलेटेड फीलिंग्स में व्यस्त था.

एकदुम्म से hi मेरे साथ बैठे हुए एक चिनेसे आर्मी वाले ने मेरी जांग पर एक पिन चुभा दी..

मैं चेहरा घुसा कर उसे हेरात से देखने लगा. बस फिर क्या था. मैं उसे देखता hi रह गया..

पता नहीं उस पिन की चुभन में ऐसा क्या था.

मैं जैसा बैठा था, वैसा hi बैठा रह गया. साला मैं परलीज़े कर दिया गया था. उसी समय हेलीकाप्टर भी लैंड हो गया..

मैं अपने हाथ पेअर तक नहीं हिला सकता था. जैसे बैठा था, वैसे hi बैठा बैठा अकड़ गया था. मुझे उठा कर हेलीकाप्टर से निचे उतरा गया.. मेरा फेस घूमा हुआ था. उसी कंडीशन में मैं चिनेसे आर्मी वळून के हथु में था. मुझे वहां राखी एक चेयर पर बिठा दिया गया.. जिस साइड मेरा फेस था. वहां मुझे कई हथियारबंद फॉरेन एजेंट्स दिखे.. मैं देख कर हैरान रह गया..

मैं केवल एक साइड hi देख सकता था. हिल सकता था और नहीं चेहरा घुमा कर किसी को देख सकता था.




"ॉव.. तोह MR.DK!! आखिरकार तुम मेरी कस्टडी में आ hi गए"




बोलने वाला चेहरा मेरे सामना आया तोह मैं उसे देख कर हैरान रह गया..




मुझे दिखाई देने वाला चेहरा मार्गरेट का था....


.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::



 
:लाफ: सही कहा भाई... लूडो तोह बिलकुल नहीं खिलाएंगे..

देखते हाँ अलका के साथ क्या होने वाला है. हो भी चूका है या नहीं,

लगता तोह ऐसा hi है.

कुछ तोह करना hi पड़ेगा दक्ष को. अभी तोह खेल शरू हुआ है.

:)

अब जैसी सिचुएशन होगी भाई उसी हिसाब से लिखूंगा. दक्ष भी तोह वही सब याद करने लगा था. चंगेस आते रहेंगे. जैसे चेंज आएंगे, जैसे दक्ष में विचारो में बदलाव आएगा, जैसी उसकी फीलिंग्स होंगी, वैसे hi दिखाया जायेगा.

थैंक्स भाई इतनी बारीकी से पढ़ने के लिए.. एक आप hi हाँ जो ऐसी ब्रिकीयो पर धयान देते हाँ. ♥️♥️♥️🙏🙏🙏
 
:थैंक्यू:

:अप्प्रोवे:

जल्द hi पता चल जायेगा भाई

देश के महान ज्ञानी हाँ. उनके ब्रेन के जैसा कहीं और देखने को नहीं milega.isliye मास्टर दक्ष को लेकर के गुरु जी के दिमाग में जा पधारे.

इसकी ज़रूरत भी है.

ये बात तोह है.

नेक्स्ट पोस्टेड अपडेट में no:4 का हाल बयां किया जा चूका है भाई

:गायलॉग़:

धन्यवाद भाई! 🙏🙏🙏
 
धन्यवाद भाई! 🙏🙏

वांग ज़ही खुद भी बहुत अच्छी है. दक्ष उसकी लाइफ में आया तोह अपने फीलिंग्स शेयर कर बैठी. दक्ष ने भी उसे निराश नहीं किया. वांग ज़ही खुश हो गई.

देखते हाँ दक्ष कैसे बचाया है अलका को. बचता भी है या कोई बात अलका को बचने का कारण बनेगी.

शुक्रिया भाई! 🙏🙏
 
Back
Top