Episode:21
रूस में मौजूद लड़की नताशा थी. जो स्टुपिड से मिले पेंट पर एक्सपेरिमेंट करके सही मानो में इनविजिबल हो गयी थी. खुद भी एक साइंस स्टूडेंट थी. जीनियस थी, स्टुपिड से सब जान कर, रिसर्च करते हुए एक ऐसा पेंट बना डाला, जिसे जब चाहे उतरा भी जा सकता था.
डेमें उस एरिया का सबसे बड़े गैंग का सबसे बड़ा बॉस था. कई सालों की म्हणत से उसके ये मुक़ाम हासिल किया था. गंगतर था पर दिल का साफ़ इंसान था. तभी नताशा उसके पास गई थी.
नताशा : दमें मुझे पुरे वर्ल्ड में अपने काम के लोग कहीं से भी मिल सकते हाँ. पर मुझे तुम काली सूरतों वाले, मैं के सच्चे कहीं नहीं मिल सकते. हम सब साथ मिलकर काम करेंगे. तुम्हे जहाँ भी कठनाइयां हुई मई सोल्वे कर दिया करुँगी. कोई ऐसा काम जो तुम नहीं कर सकते. मैं कर दिया करुँगी. तुम यहाँ पर सैंकड़ों के लीडर हो तोह मेरे साथ मिल जाने से हज़ारों लाखों के लीडर बन सकते हो. पूरी वर्ल्ड में कहाँ कहाँ नहीं हो तुम लोग. तुम सब पावर में भी कइयों से बढ़ कर हो. बूत थिस पावर ओनली फिजिकल पावर.. तुम्हे चाहिए मैनपावर, पॉलिटिकन पावर. फिर कभी कोई तुम्हे तोड़ न सके, मोड़ न सके. तुम्हे झुका न सके, तुम्हारे सामने सर उठा न सके. और ऐसी पावर मेरे साथ रहते तुम्हे प्राप्त हो सकती है दमें..
नताशा की बात पर सबके पिस्टल्स वाले हाथ झुकते चले गए. सब एक दूसरे को देखने लगे और नताशा वहीँ एक खली चेयर पर बेथ गयी. चेयर पर केवल सीट का दबा होना hi दिखाई दिया था सबको..
एक बोलै : बॉस कितनी सही बात की है इस लड़की ने.
दूसरा बोलै : बरसों से हम भी ऐसी hi पावर की तोह कल्पना में रहे हाँ बॉस.
दमें : हाँ और ऐसी hi पावर के लिए हमें गैंगस्टर बनना पड़ा. जो हमारे लिए बहुत तकलीफ रह रहा है.
नताशा : गैंगस्टर तोह तुम सब पुलिस की नज़रों में हो दमें.. खुद की नज़रों में नहीं. सोचो, तुमने कभी भी कोई ऐसा काम नहीं किया, जो तुम्हारी आत्मा को घायल कर गया हो. नहीं दमें तुम अच्छे इंसान hi नहीं हो. तुम एक कमाल के इंसान भी हो. नताशा उठी और चलती हुई आगे बढ़के दमें के हाथ को थाम लिया.
नताशा : हमें पॉवरफुल बनना है दमें. उसके लिए हम बुरे काम करेंगे. पर कोई ऐसा काम नहीं करेंगे, जिनके करने से हमारी आत्मा ज़ख़्मी होती रहे. हमें भी पल पल मारती रहे. मुझे भी ऐसे क्वीन नहीं बनना है दमें.. मुझे अपनी आत्मा का सुख भी चाहिए है साथ में. क्वीन बनना मेरा सपना बन गया है. पर अपने इस सपने को पूरा करने के लिए मैं थोड़ा थोड़ा करके खुद को नहीं मार सकती.
दमें : ऐसी बात है तोह फिर आजसे आप मेरे लिए क्वीन हाँ. मैं आपको क्वीन कह कर hi बुलाऊँगा.
बाकि भी दमें की हाँ में हाँ मिलाने लगे.
नताशा : मेरे बारे में जान लो पहले तुम सब. में इंडिया से हों. कुछ महीने पहले सुनी ख़बरों में तुमने सुना होगा. एक लड़का फ्लाइंग शूज के साथ उड़ता हुआ दिखाई दिया था. फिर उन्ही शूज के साथ एक इंडियन लड़की का ज़िक्र होने लगा. उस लड़की के परिवार को उन शूज के लिए अंडरवर्ल्ड वळून ने मार दिया था. दमें मैं वहीँ लड़की हों.
दमें समेत सब ये जान कर झटके से उठ खड़े हुए.. पहले दमें नताशा के आगे झुका, फिर दूसरे सब भी नताशा के आगे झुकते चले गए. ये कालों का ख़ास अंदाज़ हुआ करता था.
दमें : क्वीन हम सोच भी नहीं सकते थे. आप जैसी महान हस्ती हमारे बीच भी आ सकती हाँ. आप महान पावर से नहीं अपने कर्मो से बानी हाँ क्वीन.. परिवार को खो देने के बाद भी आपके अंदर वो बात नहीं आई जो किसी के भी अंदर समां जाया करती है. ऐसी घटना के बाद कोई भी क्रिमिनल बन जाता है क्वीन.. आपके विचार जान कर मुझे बेहद ख़ुशी हुई.
नताशा : ऐसी hi उम्मीद मुझे तुम सब से थी दमें. यक़ीनन हमारा साथ बहुत लम्बा और बहुत अच्छे से चलने वाला है.
दमें : क्वीन! हमारे लिए क्या हुकम है.
नताशा : सबसे पहले मुझे उडनेरवोर्ल्ड को ख़तम करने है. पूरी तरह से ख़तम न भी हो सके तोह जिस हद तक उसे ख़तम किया जा सकता है, उतना उसे ख़तम करेंगे. अपने देश में मैं अंडरवर्ल्ड को देखना नहीं चाहती. मैं नहीं चाहती मेरे देश में कोई और परिवार अंडरवर्ल्ड के हथुन ख़तम हो. इसलिए मेरे देश से अंडरवर्ल्ड को जड़ से उखड फेंकना है.. अंडरवर्ल्ड का सारा पैसा हमें अपने अंडर लेना है. मैं एक आइलैंड भी देख चुकी हों दमें.. वहीँ हम अपना हेडक्वार्टर बनाएंगे.. सबसे पहले उस आइलैंड को अपने अंडर लेना है. उसे इस हद तक सुरक्षित बनाना है, कोई जान कर भी हमें वहां से निकाल न सके. इतनी पावर हासिल करनी है हमें. कोई माई का लाल वहां हमारा मुकाबला न कर सके. फिर वह वर्ल्ड की कोई भी आर्गेनाइजेशन hi क्यों न हो.
वहां मुझे एक ज़बरदस्त किसम की सइंटफिक लैब भी बनानी है. मुझे ऐसे साइंटिस्ट्स की डिटेल भी चाहिए होगी. जो किसी के पास मजबूरन काम कर रहे हों, अपने परिवार को बचने के लिए वह अंडरवर्ल्ड के पास बंधक हों, या किसी दूसरी ऑर्ग के पास. मुझे सब की डिटेल चाहिए. फिर मैं उसके परिवार को बचा कर उस साइंटिस्ट को वहां से निकल कर अपने साथ ले आऊँगी. ऐसे hi लोगों की ज़रूरत रहेगी हमें दमें.. और ऐसे hi लोग सदा जान देने के लिए भी तैयार रहते हाँ. अपना परिवार तोह मैं खो hi चुकी हों. किसी और को परिवार के खोने के दुःख में नहीं देख सकती.
भगवन ने मुझे शक्ति दे hi दी है तोह मैं अपने बदले के साथ साथ ऐसे लोगों के भी काम आना चाहती हों. जो अपने लिए कुछ कर नहीं सकते. शायद ऐसे मुझे अपने परिवार के खो देने के दर्द से छुटकारा मिल सके.
नताशा की आवाज़ कुछ भीग सी गई थी. दमें और उसके साथी भी नताशा की भीगी आवाज़ पर साद हो गए थे. मैं के सच्चे न होते तोह ऐसे दुखी न होते...
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शहर में रहते हुए hi सोफिए सब को कण्ट्रोल कर रही थी. अब तक वो किसी भी मिशन में खुद से शामिल नहीं हुई थी. चीन में डीके एंड षिमुना के मामले में भी वह खुद आगे नहीं बढ़ी थी.
इंडिया में भी गुफा वाला सीक्रेट सामने आया तोह सोफिए सबको उनका काम समझा कर उन्हें ऑर्डर्स देने लगी. जानती थी कोई भी मिशन आसान मिशन नहीं है. उसे आसान मिशन पर काम करने में मज़ा भी नहीं आता था. अभी वहां उसे खुद की मौजूदगी ज़रूरी नहीं लगी थी. इसलिए वहां नहीं गई थी. और फिर उसका असल मिशन तोह निमंस, डीके एंड षिमुना मिशन था. सोफिए फ्री भी तोह अलका के मटर में कूद पड़ी थी.
राजा ठाकुर और अलका की डिटेल मिली.. तोह अलका की डिटेल जान कर उसे कुछ अजीब सा लगा. अलका के परिवार एक पॉवरफुल परिवार था, फिर भी सबके सब एक साथ मारे गए थे. इस बात पर सोफिए खटक गई थी. उसे लगा कुछ तोह है इस सब में..
कोई और काम भी नहीं था सोफिए के पास तोह वह अलका की डिटेल के लिए मसरूफ हो गई. बस्ती से जुडी अलका बारे इन्फो प्राप्त हुई तोह सोफिए फिर वही करने लगी तोह सोफिए जैसी एजेंट्स किया करती थी.
अलका के परेसन्ट्स से जुड़े हुए लोगों से, बस्ती में रहने वाले लोगों से वो इन्फो कलेक्ट करने लगी. वही से उसे अलका के खानदानी सीक्रेट बाने जानने को मिला. कई दिनों की म्हणत के बाद गुफा और फिर माला वाली बात सुनने को मिली.
ये जानकारी भी सोफिए ने बड़ी ज़हानत से प्राप्त करि थी. कैसे करि थी, इसकी डिटेल बाद में सामने आएगी.
गुफा के इर्द गिर्द सोफिए ने पहले से hi फील्डिंग सेट क्र दी थी. ऐसा hi कुछ विक्रम सिंह ने भी किया था. सोफिए हर एक बात पर नज़र रख रही थी. कुछ एजेंट्स प्लेन से भी उतरे थे गुफा वाले माउंटेन पर.
बाओ गैंग और विक्रम सिंह गैंग दोनों आपस में भीड़ गए तोह विक्रम सिंह गैंग को अपनी जान से हाथ धोने पड़े. आम गुंडे कैसे बाओ के एजेंट्स का सामना कर सकते थे. बहुत से मारे गए तोह कुछ भाग कर जान बचने में सफल रहे.
विक्रम सिंह और रुपाली भी उन्ही भाग जाने वाले गुंडों में शामिल थी. विक्रम सिंह और रुपाली शाम के बाद हवेली जा पोहंचे थे. सतीश और अलका के लिए चिंतित थे, पर कुछ कर भी तोह नहीं सकते थे. वहां रेहत तोह मारे जाते. गुफा में रहते तोह भी ज़िंदा बचने के चान्सेस नहीं थे. पुजारी के बात पर, पुजारी की मुस्कान और अंदाज़ पर भी विक्रम सिंह बहुत कुछ समझ गया था. वो रुपाली के साथ भाग कर वापिस हवेली लौट आया था.
वहीँ सोफिए के कहने पर एजेंट्स ने बड़ी कोशिश करि थी गुफा में घुसने की, पर घुस नहीं पाए थे. जो भी अंदर जाता, बेशुमार सांपो का सामना करना पड़ता. बहुत से एजेंट्स मारे गए थे. कुछ बहार भाग कर खुद को बचा गए.
सोफिए कुछ और प्लान करने लगी. सोफिए बाओ से थी, तोह कुछ भी कर जाती, पर जो उसके सामने आया था. उसे किसी भी कीमत पर वो हासिल करती. वहां पाए जाने वाला खज़ाना भी स्पेशल था. एक पूरा सिटी सोने से बनाया जा सकता था. पर बाओ वळून के पास पैसे की कमी नहीं थी. आल वर्ल्ड में पहले हुए बाओ एजेंट्स वल्र्ड रिचेस्ट एजेंट भी थे. सोफिए भी डायमंड्स को न सोचते हुए माला को सोचने लगी.
और माला पाने के लिए सोफिए को वो पहाड़ भी उड़ाना पड़ता, रेज़ा रेज़ा करना पड़ता तोह सोफिए ये भी कर गुज़रती.
सोफिए या बाओ एजेंट्स कुछ और कर पते. वहां पर इंडियन आर्मी के हेलिकोप्तेर्स आने लगे.
रॉ के भी दो हेलिकोप्तेर्स भी थे.
सोफिए को पहले hi ये खबर मिल चुकी थी. उसने तुरंत सबको वहां से हैट जाने को कह दिए. जो मारे गए थे, उनकी लाशें वहीँ छोड़ कर बाकि बाओ एजेंट्स वहां से खिसक लिए थे.
सोफिए सोचने लगी, अब उसे क्या करना चाहिए. अब वहां इंडियन आर्मी और रॉ वाले पोहंच रहे थे. जैसी भयंकर फायरिंग वहां हुई थी. जितनी लाशें वहां पर पड़ी थी, आर्मी या रॉ वाले वहां से जल्दी जाने वाले नहीं थे.
बाओ के मरने वाले एजेंट्स बिना किसी पहचान के वहां गए थे. वेपन्स से भी बाओ का कनेक्शन सामने नहीं आ सकता था. इस मामले को लेके सोफिए संतुष्ट थी.
NO:4 से भी अब कोई राब्ता उसका नहीं रहा था. जब दोनों स्नैक्स NO:4 के गिर्द घूम रहे थे, उसी समय NO:4 की आँखों में लगे लेंस, जिनमे ट्रांसपेरेंट कामर्स द्वारा सोफिए सब कुछ देख रही थी. दोनों स्नैक्स के कारण वह लेंस बेअसर हो गए थे. कानो में मौजूद एअर्रिंग वाली देवीकेस भी अपना असर खो चुकी थी. सोफिए कोई आवाज़ भी नहीं सुन सकती थी.
रॉ वाले, आर्मी वाले वहां लैंड हुए और वहां का सब देखने लगे.. वर्ज़न एरिया अब रेडज़ोने एरिया में बदल गया था.
लाशें, वेपन्स देख कर सब हैरान थे. वो कुछ जानते नहीं थे. अंदर गुफा में भी कई लाशें देख कर आर्मी वाले, रॉ वाले हैरान रह गए. अंदर मरे हुओं की लाशें पानी छोड़ रही थी. कुछ सांप भी वहीँ मरे पड़े थे. कुछ आर्मी वाले और रॉ वाले तोह वोमिटिंग करने लगे. लाशों की हालत बहुत ख़राब होने लगी थी. अजीब सी स्मेल आने लगी थी लाशों से.
बहार जा कर अपने अपने ऑफिसर्स को सब बांटने लगे. अमरय और रॉ के बड़े वही खड़े होक साडी घटना पर चर्चा करने लगे.
फिर रॉ वाले आर्मी वळून को वहीँ छोड़ कर बस्ती के लिए निकल पड़े. वहां हवेली पर पोहंच कर विक्रम सिंह से मिले
विक्रम सिंह रॉ अफसर से बोलै : सर मैं कुछ नहीं जनता. मैं तोह सब देख कर हैरान रह गया था. मेरा बीटा और बहु अलका उस गुफा में गए थे. लौट कर नहीं आये. बहुत चिंता हो रही है मुझे. ये भी नहीं जनता दोनों गैंग किस मकसद से वहां आये थे. और क्यों एक दूसरे से भीड़ गए थे.
रॉ अफसर : सिंह साब आप कुछ नहीं जानते तोह फिर आप यहाँ आये hi क्यों हाँ. यहाँ आते hi इतना सब हो गया. और कह रहे हाँ, आप कुछ नहीं जानते. मरने वळून में आपके आदमी भी तोह थे.
विक्रम सिंह को रॉ अफसर की ऐसी बात पर ग़ुस्सा ा गया. साला राजा ठाकुर के आगे भीगी बिल्ली था. पर किसी और के आगे वह कमज़ोर नहीं था. विक्रम सिंह न तोह घबराया और न hi कंफ्यूज हुआ. रॉ ऑफिसर्स की आँखों में देखते हुए वो बोलै
विक्रम सिंह : सर! आप मेरे बारे में सब जानते हाँ न. फिर भी ऐसे अंदाज़ में बात कर रहे हाँ. वहां के बिगड़े हालत के कारण hi हम सब यहाँ आये थे. वहां हम सब की जान को खतरा था. इसी कारण हम सब को यहाँ आना पड़ा. यहाँ आते hi अलका बेटी की शादी मेरे बेटे सतीश करवा दी गई. दोनों की सगाई बारे तोह आप सब भी जानते hi होंगे न. वहीँ शादी के समय पुजारी जी "जो इस बस्ती के सबसे बड़े पुजारी हाँ" ने हमें सब बताया, शादी के बाद अलका बेटी को और मेरे बेटे सतीश को उस गुफा में जाना होगा. ये अलका बेटी के परिवार की परंपरा रही है, शादी के बाद एक बार उस गुफा में जाना होता है. आप चाहें तोह पूरी बस्ती वळून से पूछ सकते हाँ.
विक्रम सिंह का लाइफ स्टाइल भी रॉ वळून की नज़रों में था. गड़बड़ का अंदाज़ा होते हुए बी वह वीरकम सिंह पर चढ़ाई नहीं कर पाए थे. अभी रॉ वळून को राजा ठाकुर परिवार से काम भी था. खुद से भी राजा ठाकुर परिवार की रक्षा भी कर रहे थे. दसख के लिए ये सब किया जा रहा था. दक्ष रॉ वळून की नज़र में देश के लिए हीरा था. वो दक्ष को खोना नहीं चाहते थे. विक्रम सिंह दक्ष का चाचा था. विक्रम सिंह से कुछ और बातें करके वो वहां से निकल पड़े. रॉ वळून ने बस्ती वळून से भी बात करि. पर कुछ भी हाथ नहीं लगा. गुफा का सीक्रेट कोई कोई hi जनता था. रॉ नहीं जान पाई थी, पर सोफिए जान गई थी.
रुपाली आते hi अपने कमरे में चली गई थी. विक्रम सिंह उसे डिस्टर्ब न करे, ये भी रुपाली ने कह दिए था.
विनय वही नशे में धुत सो रहा था. ऋचा और परची भी एक कमरे में थी. विक्रम सिंह भी किसी से नहीं मिला था. अपने बचे हुए आदमियों के पास था. गुफा के अंदर का सब सोचते हुए विक्रम को बड़ी परेशानी भी थी. जिस मकसद के लिए ये सारा खेल रचा गया था. उसक बारे कोई इन्फो नहीं थी विक्रम सिंह के पास. ऊपर से दूसरे गैंग को लेके भी विक्रम सिंह बड़ा परेशान था. जितना परेशां था, उतना hi वो ग़ुस्से में भी था. बन रहा काम नए आने वळून की वजा से ख़राब हो गया था. अब पता नहीं काम बनता था भी कह नहीं. सोच सोच के विक्रम के दिमाग की नसें डैमेज होने लगी थी. रॉ या किसी और की विक्रम सिंह को कोई परेशानी नहीं थी. परेशानी थी किसी और से. विक्रम सिंह उसके बारे में भी सोच सोच कर परेशान था.
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"मास्टर कोई दिमाग ऐसा भी हो सकता है क्या, टेलिपाथी द्वारा उस दिमाग में घुस कर हम कुछ प्राप्त न कर पाएं"
मैं मास्टर के सामने बैठा मास्टर से पूछ रहा था. मास्टर chi-fang उल्फत भरी नज़रों से मुझे देखने लगे.
chi-fang : दक्ष बीटा ज़रूर तुम किसी अनोखे दिमाग में घुसे होंगे. तभी मुझसे ऐसा सवाल कर रहे हो.
दक्ष : जी मास्टर! अब जब दिमाग के खेल खेलने लगा हों तोह मुझे अनेको दिमागों में जाना होगा. मैं जानना चाहता हों मास्टर! अगर किसी के दिमाग में घुस कर भी कुछ प्राप्त न हो सके तोह इसका क्या अर्थ हो सकता है.
chi-fang : दक्ष बीटा, इस धर्मी को बनाने वाले ने इसे ऐसो रंगों से बनाया है. जिसे कोई समझ नहीं सकता. कई बार कोई आम सी दिखने वाली चीज भी इतनी खास बन जाया करती है. कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता. जैसे कोहिनूर हिरा. ऐसे hi बहुत कुछ ऐसा है इस धरती पर, इस पुरे यूनिवर्स पर. जिसके बारे में जान्ने पर हम हैरान रह जाएँ.
ऐसे hi कई ब्रेन्स भी ऐसे हाँ. जिनमे घुसने पर तुम्हारी टेलिपाथी be-asar हो जाएगी. तुम उसके दिमाग को कण्ट्रोल नहीं कर सकोगे. उसके दिमाग से कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं कर सकोगे.
दक्ष : मास्टर ऐसे दिमाग किसके पास होते हाँ.
chi-fang : मेरे दिमाग में आओ. तुम्हे कुछ दिखता हों.. मैं मास्टर की बात पर मास्टर के दिमाग में गया. तोह मास्टर के दिमाग में रहते हुए मुझे दिखा मास्टर किसी ऐसे दिमाग में थे. जहाँ ढूंढ hi ढूंढ थी. ठंडक का भी मुझे एहसास हो रहा था. सुकून भी बहुत प्राप्त हो रहा था मुझे. दिल की धड़कन एंटी नार्मल हो गई थी. बता नहीं सकता.
मैं कुछ बोलता आवाज़ सुनाई di..chi-fang कैसे आना हुआ मेरे दिमाग में.
मैं सुन कर हैरान hi नहीं हुआ था. इतनी मीठी और दिल को छू लेने वाली आवाज़ थी. मैं होने लगा, बार बार सुनता hi जाओं.
chi-fang : गुरु जी आप सब जानते हाँ, फिर भी मुझसे पूछ रहे हाँ
गुरु जी : chi-fang रस्मे दुन्या भी तो निभानी पड़ती है. दक्ष बीटा कैसे हो तुम..
मैं तोह आवाज़ के नशे में भी खोया हुआ था. आवाज़ उनके hi दिमाग में गूँज रही थी. पर मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे दिमाग में, मेरे पुरे वजूद में गूँज रही हो. उनकी आवाज़ मेरे लिए जैसे एक हुकम भी था. मैं बिना देरी के बोल पड़ा.
दक्ष : भगवन की दया से मैं ठीक हों गुरु जी.
गुरु जी : दक्ष बीटा बहगवां की दया तोह हमेशा तुमपर रही है. तुम्हारी ज़िन्दगी में जितने भी कष्ट ए हाँ. सब नियति का खेल था. तुम्हे परखना था, तुम्हे आज के मिले इस नए रूप में लाना था. तुम अपने बारे में सब नहीं जानते. नियति ने तुम्हे अच्छे कर्मो के लिए चुन लिया था. और जिसे नियति अच्छे कर्मो के लिए चुन लेती है. उसके साथ ऐसे hi खेल खेले जाने लगता हाँ. ऐसे hi खेलों से वह जो ज्वालामुखी उसके अंदर जनम लेता है, उसी ज्वालामुखी से जनम होता है एक शूरवीर का. तुम भी अपने अंदर देहक रहे ज्वालामुखी में तप कर कुंदन बन रहे हो दक्ष बीटा. तुम हो आज के समय के शूरवीर. यही तुम्हारी किस्मत थी और यही नियति का खेल. हम जल्द hi मिलेंगे दसख बीटा.. तब तक तोह अपने अंदर देहक रहे ज्वालामुखी से तप कर कुंदन बनते जाओ. ज़माने के पापियों का सर्वनाश करते हुए एक महान शूरवीर बनने की राह पर निकल जाओ. उसी राह में मिलूंगा मैं तुम्हे दक्ष बीटा.
मास्टर chi-fang कुछ नहीं बोले. गुरु जी से परमिशन लेके वापिस लौट आये.
मैं न केवल खुद को बहुत ज़यादा हल्का महसूस कर प् रहा था. जो ठंडक मेने गुरु जी के दिमाग में महसूस करि थी. वो अब मुझे अपने पुरे बदन में उतरती महसूस हो रही थी. इतना सुकून मुझे अपनी पूरी लाइफ में नहीं मिला था. नशे से मेरी पलकें भरी होने लगी थी.
chi-fang : क्या हुआ दक्ष बीटा. मास्टर chi-fang मंद मंद मुस्कुरा रहे थे.
दक्ष : मास्टर जी! कोण हाँ ये गुरु जी.. ऐसा महान ज्ञानी मेने अपनी लाइफ में अब तक नहीं देखा मास्टर. उनकी बातें भी बड़ी अजीब थी. पर मैं साडी समझ गया था. एक एक शब्द खुद से मुझे सब समझा रहा था. ऐसा लग रहा था. जैसे उनका एक एक शब्द मेरे शरीर के अंग अंग में उतर रहा हो. ऐसी शांति प्राप्त होने लगी थी मुझे. जो मेने अपनी पूरी लाइफ में पहले कभी नहीं पाई.
chi-fang : दक्ष बीटा वह तुम्हारे hi देश के एक महान ज्ञानी है. मैं उनके बारे में तुम्हे क्या बता सकता हों. वह जब चाहेंगे तुम्हे अपने बारे में सब ज्ञान दे दें गए. होगा वे जो वह चाहेंगे और जैसे चाहेंगे. और फिर उन्हों ने कहा न तुमसे.. तुम जल्द hi उनसे मिलोगे. बहुत कुछ बदलने वाला है तुम्हारी लाइफ में दक्ष बीटा. लोक सेवा का मैंने तुम्हे बता दिए है. पर और भी तुम क्या कुछ करने वाले हो, ये केवल गुरु जी hi जानते हाँ. मैं तो तुम्हे दिमाग दिखने के लिए गुरु जी के दिमाग में गया था. देखा गुरु जी के दिमाग को, ऐसे दिमाग उनके हुआ करते हाँ, जो महान ज्ञानी हों या फिर जो पवित्र आत्माएं हों. जिनपर लार्ड बुद्धा, खुदा, भगवन की ख़ास नज़र हो..
मास्टर chi-fang से मैंने ये सब इसलिए पूछा था. क्यूंकि एक ऐसा सच भी था. जिसे बयां करते हुए मुझे बड़ा अजीब भी लग रहा है.
जब मैं देहरादून की बस्ती गया था. वहां न चाहते हुए भी मुझे पायल दी के दिमाग में घुसना पड़ा. वहां के हालत जाने. फिर चाचा चची और उनके बेटे बेटियों के दिमाग में भी घुसा.. वहीँ पर मुझे वो कुछ जान्ने को मिला. जिसे जान कर मैं जी जान से लरज़ कर रह गया था.
एक तोह पायल दी को लेके प्लान बन रहे थे विनय हरामज़ादे के साथ शादी के लिए.. दूसरे सतीश की शादी अलका से हो रही थी.
अलका....
अलका शादी कर रही थी सतीश से.....
हालत कैसे भी रहे हों. जिससे आप अपनी जान से भी बढ़कर प्यार करते हों. उसकी शादी किसी और के साथ होते हुए नहीं देख सकते..
मैं भी अलका की शादी को लेके बहुत दर्द में हो गया था. दिल की धड़कन डूबती हुई महसूस होने लगी थी. 6 साल पहले का अलका की ज़ुबान से निकला एक एक शब्द याद था.
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.....
कैसे भूल सकता था मैं. जिनसे आप मोहब्बत करते हों. जिन्हे अपने दिल में बसाये आपने एक एक सांस ली हो. वह आपसे या आप उससे नाराज़ हों तोह भी उसकी शादी किसी और के साथ होते हुए नहीं देख सकते.
मैं भी ऐसा सब जान कर जी जान से हिल कर रह गया था. मैं खवाब ो ख्यालों में भी नहीं सोच सकता था, अलका किसी और के साथ शादी कर सकती है. अलका मेरे शिव किसी और की भी हो सकती है. मुझसे मोहब्बत hi इतनी करती थी अलका. जैसे मेने किसी और से शादी नहीं करि थी. ऐसे hi अलका को भी नहीं करनी चाहिए थी..
ऐसा भी ख्याल मेरे मैं में आया था...
नफरत करने लगी थी मुझसे.. करती रहती मुझसे नफरत पर शादी.. मुझे छोड़ के किसी और से शादी.....
ये होते हुए मैं कभी नहीं देख सकता था....
और मैं ऐसा होने भी नहीं दे सकता था....
पता नहीं मुझे अलका से नफरत थी या कुछ और... मेरा दिल उसे अब्ब भी चाहता था या नहीं. पर ये मैं जनता था, अलका सिर्फ मेरी है. कभी भी किसी और की नहीं हो सकती. मेरी नहीं हुई तोह किसी और की भी नहीं हो सकती..
जैसा सब हुआ था. उसे भुला भी नहीं सकता था. सब भूलना आसान भी तोह नहीं था. दुश्मनो ने बहुत भयंकर चाल चली थी. जो ड्रिंक मुझे अलका ने पीने को दिया था वह भी चची का hi प्लान था. अलका इस बारे कुछ नहीं जानती थी.
ये बात भी मैं जान गया था.....
अलका के लिए तोह पहले भी मैंने ऐसा नहीं सोचा था. शरबत पिने से hi मेरे अंदर चेंज आया था. बाद में मैं ये जान गया था. पर अलका को लेके ये कभी नहीं सोचा था मैंने कह अलका मेरे साथ ऐसा सब कर सकती थी. इतनी hi प्यार और विश्वास था मुझे अपनी अलका पर..
पर वह साज़िशियों की चाल में आते हुए मुझे वह ड्रिंक भी पीला गई और बाद में भी उन्ही की चाल में आते हुए मुझे दोषी मान गई थी. ठीक है जब उसने मुझे देखा था तोह मैंने चची को छोड़ रहा था.
जी हाँ ऐसा hi मुझे दिमाग में घुस के मालूम हुआ था. पायल दी और अलका जिस समय चची के कमरे में आयी थी. मैं बीएड पर चची को छोड़ रहा था. ज़बरदस्ती नहीं कर रहा था. ये सब प्लान था.
पर पायल दी और अलका के कमरे में आते hi चची ने ऐसा दिखावा किया. जैसे मैं उनका रपे कर रहा हों. मैं होश में था hi कहा.. मुझे तोह कुछ खबर hi नहीं थी.
चची के पास hi एक स्प्रे भी था. फ़ौरन hi मेरे नाक से लगा कर तकिये के निचे सरका दिए था. एक मिंट में hi मैं होश में भी आ गया था. पायल दी अलका कैसे मुझपर विवश्वास कर सकती थी..
पर उनको करना चाहिए था मुझ पर विश्वास.....
उन दोनों के लिए मैं hi तोह सब कुछ था.....
एक ऐसा इंसान जो केवल प्यार के लिए बना हुआ था. जिस का एक एक पल प्यार में बीत रहा था. एक एक पल शेर के जैसी जी रहा था.
कैसे वह इतनी घट्टिया हरकत कर सकता था...
पर वह दोनों ये सब भूल कर जो उन्हें दिखाया गया. उस पर यकीं कर बैठी.. और मुझे मेरी hi नज़रों में गिरा दिए.
जो हुआ था.. सब बहुत गलत था. बहुत घट्टिया था. पर मुझपर विश्वास बनाये रखना चाहिए था दोनों को...
कह देती..
नहीं हमारा दक्ष मर तोह सकता है.. पर ऐसा घट्टिया काम कभी नहीं कर सकता.. ऐसा hi विश्वास मैं डेसेर्वे भी करता था. मेरी लाइफ का एक एक पल तोह सबके सामने था. आईने की तरह थी मेरी लाइफ अलका और पायल दी की नज़रों में.. उन दोनों के साथ hi तोह मेरा ज़यादा समय बीता था..
कभी मेरे बारे में कुछ भी ऐसा वैसा नहीं सुना गया था. फिर भी मुझे रेपिस्ट घोषित कर दिए गया..
कितना बड़ा आरोप लगा दिया जाया दोनों ने hi मुझपर.....
कैसे मैं ये सहन कर सकता था. मेरे कहे बिना hi सबको समझ जाना चाहिए था. ऐसा होना मुमकिन नहीं है. ज़रूर कोई और बात रही होगी...
पर मेरे कहे पर भी किसी ने विश्वास नहीं किया था. और ज़लील करके घर से निकल दिए था.
पायल और अलका इस सब में सबसे आगे थी. पायल दी के दिमाग में घुस कर मैंने सरसरी सी डिटेल प्राप्त करि थी. फ़ौरन hi उनके दिमाग से निकल भी गया था. फिरसे नहीं गया था मैं पायल दी के दिमाग में... जाने को मैं hi नहीं हुआ था मेरा.
अलका के होंटो से निकला एक एक शब्द मुझे आज भी याद था. उसका दुत्कारना, मुझसे नफरत का इज़हार करना. मुझे रेपिस्ट बोलना.. अपनी ज़िन्दगी से साफा हो जाने के लिए बोलना...
सब कुछ hi तोह याद था मुझे..
कैसे भूल सकता था मैं सब..
कुछ भी भुलाये नहीं भूलता था...
पर शादी वाला मटर..
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़..
जान न चली जाए मेरी..
अगर अलका किसी और की हो जाए तोह.....
सोच के hi जान निकलने वाली हो गई थी.. मुझे अलका के शब्दों पर दुःख हुआ था. उसकी धुत्कार पर मैं टूट गया था. रेज़ा रेज़ा होकर बिखर गया था. उसने एक बार भी मुझे टूट से, रेज़ा रेज़ा होने से नहीं बचाया था. उसने तो मुझे सारा hi तोड़ डाला था. कैसे मैं उसकी ऑर्डर अब पलट सकता था..
पर उसकी शादी होते हुए भी नहीं देख सकता था...
बहुत दर्द मिला था मुझे अलका की शादी का सुनकर.. ये जान कर, अलका ने खुद से शादी के लिए कहा था. जब सगाई के लिए वह मान गई थी तोह शादी के लिए भी तोह उसे मानना hi था.
पर मुझसे ये सहन नहीं हो रहा था.....
अब जब में जान गया था. ये साड़ी साज़िश थी. सब प्लान था. एक प्लान के तहत बहुत से खेल खेले गए थे. अलका को भी हासिल करना प्लान का हिस्सा था.
तोह...
अलका अगर मेरी नहीं हो सकती तोह मैं उसे यौन बर्बाद होते हुए भी नहीं देख सकता था.
इसी लिए मुझे उसके दिमाग में जाना पड़ा...
पर ये क्या....
उसके दिमाग में जाते hi पता चला वह तोह बाओ की एजेंट है.. ये एजेंट थी तोह अलका क्यों बानी हुई थी. ये जान कर जहाँ मुझे ख़ुशी भी हुई कह सतीश की शादी जिससे हो रही है वह अलका नहीं है.
मैं जैसे फिरसे ज़िंदा हो गया था.....
पर अलका की भी मुझे चिंता होने लगी थी. हमारे बीच का मटर अलग था. बाओ वळून की इतनी हिम्मत.. अलका को अपने अंडर लेके उसकी जगा डुप्लीकेट अलका ले आये थे. मुझे ग़ुस्सा आने लगा..
पर....
मुझे शांत भी रहना था. ऐसे तोह खेल बिगड़ सकता था. अलका को नुकसान भी पोहंच सकता था. बाओ कोई छोटी ऑर्ग नहीं thi...isliye मैं ख़ामोशी से हालत जानने लगा. गुफा का मटर भी में जान गया था. बाओ वाले किसी माला के लिए ये सब खेल खेल रहे थे..
क्यों खेल रहे थे..
ये मैं नहीं जान पाया.. NO:4 के hi दिमाग में मुझे किसी मैडम सोफिए की आवाज़ सुनाई दी, जो NO:4 को इंस्ट्रक्शंस दे रही थी.
मैं सोफिए के दिमाग के गया तोह मुझे फ़ौरन hi लौटना भी पड़ा.
सोफिए के दिमाग से बस इतना hi मुझे पता चल पाया था, सोफिए बाओ की बेस्ट एजेंट है और अलका को अपने देश भिजवा चुकी है.. उसका मिशन मुझे, षिमुना को और निमंस को पाना था.
सोफिए के दिमाग में मुझे कुछ सेकंड hi रहने की परमिशन मिल सकीय थी. मैं सोफिए के दिमाग में घुसा तोह सोफिए को बेचैनी होने लगी. वो समझ नहीं पाई थी. क्यों उसे बेचैनी हो रही है तोह अपनी बेचैनी को काम करने के लिए उसने सांस रोक ली थी.
सोफिए एक एजेंट होने के साथ साथ योग में भी एक्सपर्ट थी. तभी वह मेंटली बहुत सेंसिटिव थी. योग के किसी भी माहिर के ब्रेन में कोई भी टेलिपाथी वाला नहीं घुस सकता. उसका ब्रेन बहुत सेंसिटिव, एक्टिव होता है. तोह उसे कुछ बेचैनी होने लगती है. सोफिए को भी बेचैनी हुई तोह उसने सांस रोक ली. सांस रुकते hi मेरा सोफिए के ब्रेन से संपर्क टूट गया था.
मैं समझ गया, मैं सोफिए के ब्रेन में बार बार नहीं जा sakta..warna उसे कुछ शक हो जायेगा. टेलिपाथी आम नहीं थी तोह वो ज़रूर इस बात से अनजान होगी. मेरे बार बार जाने पर कोई किसी से सलाह लेती तोह उसे पता चल जाता, कोई टेलिपाथी वाला उसके दिमाग में घुसने की कोशिश कर रहा था.
ऐसे काम ख़राब हो सकता था. मुझे अभी सबकी नज़रों से बचे रहना था..
अब अलका के बारे में जानना ज़रूरी था तोह मैं अलका को याद करने लगा. अपनी मेमोरी को ओपन करके अलका का मैं को मोह लेने वाला चेहरा देखने लगा. फिर उसकी आँखों में उतारते हुए उसके दिमाग में जा घुसा..
मैंने मास्टर chi-fang से जो स्ट्रेंज ब्रेन बारे सवाल किया था. फिर मास्टर chi-fang मुझे गुरु गई के दिमाग में ले गए थे. गुरु जी के दिमाग में मुझे जैसी ढूंढ दिखाई दी थी. अलका के दिगमग में भी मुझे वही सब कुछ देखने को मिला.. बस मुझे ठंडक या शांति का एहसास नहीं हुआ...
बहुत अजीब था अलका का दिमाग भी...
मुझे अलका के दिमाग से कोई भी इन्फो प्राप्त नहीं हो सकीय. टेलेपत्थ्य द्वारा किसी के भी दिमाग में जाया जाए.. तोह जिस किसी के भी दिमाग में हम जाते हाँ. वह व्यक्ति जो कुछ भी देखता है. एक टेलिपाथी जानने वाला भी वही कुछ देख सकता है.
पर मुझे अलका के ब्रेन में सिवाए ढूंढ के और कुछ दिखाई नहीं दिया. अलका इजराइल में थी. इजराइल के किस सिटी में थी. ये मैं नहीं जान पाया. सोफिए के दिमाग में रहते हुए भी मैं ये नहीं जान पाया था. समय hi नहीं मिल पाया था.
अलका के दिमाग में घुस के मैं हैरान रह गया था. कोई इन्फो मैं प्राप्त नहीं कर पाया था. पर इतना जान गया था. अलका वहां सुरक्षित है.. इससे ज़यादा मैं अलका के बारे के कुछ और नहीं जान पाया था. अलका अकेली थी, या कोई और भी उसके साथ था. मैं नहीं जान सका था.
गुरु जी के कहे अनुकर फिर तोह अलका भी एक पवित्र आत्मा थी. ज़रूर यही बात थी. ये जान कर मैं बहुत हैरान भी हुआ था. अलका के लिए मेरी चाहत और भी बढ़ने लगी. उसके लिए जो ग़ुस्सा या इतर विचार थे, उनमे कमी आने lagi..par सब एकदुम्म से तोह रूटीन पर नहीं आ सकता था..
बाद में गुफा के समय जो भी हुआ था. या हो रहा था. मैं ख़ामोशी से विक्रम सिंह के दिमाग में रहते हुए सब देख रहा था. वहां पुजारी जी की बातें भी सुनी. हरामी चाचा और हरमन चची जब डरते हुए बहार निकले तोह मैं उनके दिमाग से निकल कर NO:4 के दिमाग के घुस गया था.
उसके बाद जो हुआ मैंने सब देखा था. खज़ाना देख कर मैं भी बहुत हैरान हुआ था. इतना बड़ा स्टॉक मैं अपनी लाइफ में पहली बार देख रहा था.
सतीश की मौत पर मुझे कुछ अफ़सोस भी हुआ.. जैसा सब मेरे साथ किया गया था. सतीश समेत सबके साथ मैं अपने अंदाज़ से बदला लेना चाहता था. वहां रहते मैं कुछ कर भी तोह नहीं सकता था.
सतीश मारा गया और मैं अपने एक दुश्मन को मौत के मोह में जाते हुए देखता रह गया. अपने बदला भी उससे नहीं ले सका...
दोनों सांप जब NO:4 के गिर्द घूमने लगे तोह मुझे NO:4 के दिमाग से निकलना पड़ा. पता नहीं क्या हुआ था. मैं कुछ समझ नहीं पाया था.
फिरसे NO:4 के ब्रेन में जाने की कोशिश करि तोह जा नहीं पाया. मुझे उसका ब्रेन hi नहीं मिला..
वापिस गुफा से बहार लौटा वह अब वहां मेरा कोई काम नहीं रह गया था. मैं वापिस से अपनी जगा लौट आया था. wang-zhi मेरे सामने बैठी मुझे मुस्कुरा कर देख रही थी.
wang-zhi : कितनी देर से देख रही हों दक्ष. कहाँ बिजी थे तुम.
दक्ष : वहीँ बस्ती में था. फिर वहां जो कुछ देखा वह शॉर्टली wang-zhi को बता दिए.
wang-zhi भी सब सुनकर हैरान रह गई थी.
wang-zhi : strange..very स्ट्रेंज दक्ष.. दो बड़े बड़े स्नैक्स त्रैझ की सिक्योरिटी के लिए वहां गुफा में मौजूद थे. ऐसा सब तोह हम जब छोटे थे तोह अपने बड़ों से सुना करते थे.
दक्ष : हाहाहा मैं भी ऐसी hi कहानियां सुन सुन के बड़ा हुआ हों. पर कुछ भी असंभव नहीं है.. मैं 3 महीने में टेलिपाथी सीख कर लोगों के ब्रेन में घुसने लगा हों. षिमुना है, जो ानोथेर प्लेनेट से आई है. निमंस जो षिमुना के पीछे हाँ. सब सुनने में कितना अजीब लगता है. पर सब सच है. आज भी कुछ लोग ऐसे हों जो टीवी पर निमंस की ख़बरें सुनकर भी विश्वास नहीं कर पाए होंगे..
वांग ज़ही भी हसने लगी : जल्द hi सबको पता चल जायेगा. जल्द hi वह आने वाले भी होंगे.. फिर सबको पता चलेगा, निमंस सच में हाँ या सिर्फ न्यूज़ hi हाँ..
दक्ष : हम्म्म्म सही कहा तुमने wang-zhi... फिर एक लम्बी सांस लेके मैंने wang-zhi के दोनों हाथ थाम लिए. wang-zhi चौंक कर आँखों में देखने लगी. मेरी आँखों में कुछ देख कर wang-zhi नज़रें चुरा गई.
दक्ष : देखो wang-zhi हम बहुत अच्छे दोस्त हाँ. मैं देख सकता हों, समझ सकता हों. जैसे एक लड़की अपनी और उठी नज़रों बारे जान जाया करती है. ऐसे hi मैं भी तुम्हारी नज़रों को पहचानता हों.
wang-zhi का चेहरा शर्म से लाल पड़ने लगा. कुछ चमक भी बढ़ गई थी उसके फेस की. फिरसे वो मेरी आँखों में देखने लगी. जहाँ अनगिनत जब्ज़े मचल रहे थे. wang-zhi सच में मुझसे बहुत मोहब्बत करने लगी थी.
दक्ष : wang-zhi मेरे बारे में तुम जानती हो न. मेरे अपने hi परिवार ने, मेरी अपनी मोहब्बत ने मेरे साथ कैसा बर्ताव किया है. तुम भी यक़ीनन जान गई होगी.
wang-zhi : हाँ दक्ष मुझे बाबा ने बता दिया था. पर मैंने सब अपने तक hi रखा था. मुझे अफ़सोस है दक्ष, तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुआ था. ी ऍम सो साद फॉर यू दक्ष..
wang-zhi भी मेरे दर्द को महसूस करने लगी थी.
दक्ष : वो मेरा गुज़रा हुआ कल था. पर उसका असर अब्ब भी बाकि है. wang-zhi तुम मेरे लिए अपने दिल में जो भी जज़्बात रखती हो, मैं उसकी कदर करता हों. पर मई तुमसे प्यार नहीं कर सकता wang-zhi.. मैं--
wang-zhi ने मुझे टोक दिए...
wang-zhi : दक्ष सुना है प्यार मतलब के लिए नहीं किया जाता.. इवन प्यार तो हो जाता है. जैसे तुम्हे अलका से और अलका को तुमसे.. इतना सब होने के बाद भी तुम उसे नहीं भूल प् रहे.. किसी और से भी प्यार करना नहीं चाहते.. मेरा प्यार भी तुम्हारे लिए ऐसा hi हाँ दक्ष.. मैं जानती हों दक्ष घर से निकलने के बाद तुमने किसी लाइफ जी है. मैं उसे सोच कर भी तुम्हारे लिए बहुत दुखी हों दक्ष.. पर एक सच ये भी है.. अब मैं भी तुम बिन किसी और को नहीं सोच सकती. मैंने अभी कहा प्यार मतलब के लिए नहीं होता तोह मैं लार्ड बुद्धा से प्रे करुँगी. कुछ ऐसा हो जाए तुम और अलका दोनों फिरसे मिल जाओ. तब तोह शायद मेरे लिए भी कोई उम्मीद की किरण रोशन हो जाए. दक्ष तुम मेरे दिल में हो. वहां अब कोई और नहीं पोहंच सकता.. तुम कल जा रहे हो न तोह ख़ुशी ख़ुशी जाओ दक्ष.. मैं हमेशा तुम्हारे इंतज़ार में रहूंगी. अभी हमें मिले समय hi कितना हुआ है. कुछ महीने hi तो हुए हाँ. अभी पूरी उम्र बाकि है दक्ष.. हम मिलते रहेंगे. मेरी ट्रैंनिंग अभी बाकि है. मैं भी जल्द hi तुम्हे ज्वाइन करुँगी. बाबा के बाद मैं hi अपने परिवार में एक ऐसी हों जिसने अपनी लाइफ लोक सेवा के लिए दान कर दी है दक्ष. और ऐसा करके मैं बहुत खुश भी हों. मेरी ख़ुशी तब और बी बढ़ गई थी दक्ष. जब तुम्हे देखा था, तुम्हारे बारे में तोह मैं बाबा से बहुत समय से सुनती hi आ रही हों. पर कभी दिल वाला मामला नहीं हुआ था. अब की बात और है. मैं अपनी इस लाइफ में तुम्हे पा कर बहुत हैप्पी हों दक्ष.
wang-zhi की बात पर मेरे दिल पर जो बोझ था, वो उतरने लगा था. wang-zhi मेरे लिए दिल में जज़्बात रखती है. षिमुना से ये जान कर मुझे झटका भी लगा था. कैसे मैं अलका के बाद wang-zhi को अपना सकता था. कैसे wang-zhi से प्यार कर सकता था. षिमुना जैसे रिलेशन भी मैं wang-zhi के साथ नहीं रख सकता था.
मास्टर chi-fang भी कुछ नहीं कह सकते थे. क्यों की शादी के लिए तोह मर्ज़ी wang-zhi की hi चलनी थी. wang-zhi की अपनी लाइफ थी. जो चाहे फैसला ले सकती थी.
wang-zhi का दिल न दुःख जाए, मुझे इस बात की बड़ी चिंता थी. पर wang-zhi की बातों ने मेरी साड़ी चिंता दूर कर दी थी. मैं wang-zhi के हाथ थाम कर खड़ा हो गया.
wang-zhi अब भी कुछ कुछ शर्मा रही थी. पर उसकी आँखों में मेरी लिए बहुत प्यार था. बहुत सम्मान भी था. और ऐसी मोहब्बत का जवाब अगर मोहब्बत से न दिए जा सके तोह सम्मान ज़रूर देना चाहिए था.
wang-zhi के दोनों हाथ छोड़ कर मैंने wang-zhi को गले से लगा लिया.. wang-zhi भी मचल कर मेरी बहन में समाती चली गई.
wang-zhi : आज मुझे वह सब मिल गया है दक्ष.. जो हर लड़की के दिल की छह होती है. मुझे यकीं है दक्ष जल्द hi वह समय भी आएगा, जब तुम भी मेरी मोहब्बत का इकरार कर लोगे.. अलका जल्द लौट कर तुम्हारी ज़िन्दगी में आएगी. तुम फिरसे पहले वाले दक्ष बन जाओगे. जो हर किसी से प्यार किया करता था..
दक्ष : wang-zhi मैं नहीं जनता ऐसा समय कब आएगा. क्यूंकि मेरे दिल में तुम्हारे लिए सम्मान भी है और एक दोस्त के जैसी मोहब्बत भी. जैसे जज़्बात तुम्हारे दिल में मेरे लिए हाँ. वैसे hi मेरे दिल में भी जनम लेंगे या नहीं ये मैं नहीं जनता. पर इतना ज़रूर कहूंगा.. तुम्हे पा के मुझे भी बेहद ख़ुशी मिली है wang-zhi.. तुम्हारे विचार जान कर, तुम्हारे प्यार की शिद्दत और हद देख कर भी मई बहुत खुश हुआ हों. ऐसे hi तोह होता है प्यार wang-zhi.. ऐसे hi प्यार से तोह संस्कार बना है.
wang-zhi : और ऐसे संसार में अगर तुम जैसा जेवण साथी मिल जाए तोह फिर मरने को जी भी न चाहे..
दक्ष : काश मेरी अलका भी ऐसी hi मोहब्बत मुझसे करती रहती.. मुझपर बना अपना विश्वास बनाये रखती तोह आज सब और भी अच्छा होता.
wang-zhi : होगा दक्ष! सब पहले से भी अच्छा होगा.. बीच में ये जो कुछ भी हुआ है. उसे लार्ड बुद्धा की मर्ज़ी जान कर भूल जाओ. बाबा ने क्या कहा था, तुम लोक सेवा के लिए चुने गए हो दक्ष.. तुमसे बढ़कर महान कोण हो सकता है. लार्ड बुद्धा की नज़रों में तुम महान हो, तभी तोह तुम्हारा ऐसे महान कार्य के लिए सिलेक्शन हुआ है दक्ष..
मास्टर chi-fang, मास्टर shoon-li और wang-zhi एक hi बात कर रहे थे. सच में hi बड़े महान काम के लिए मुझे चूसे किया गया था. अपने परिवार से दूर होने के बाद मेरी लाइफ में कोई रंग नहीं रह गए थे. षिमुना के आने के बाद मेरी ज़िन्दगी में कुछ रंग आने लगे थे. षिमुना एक बेहतरीन दोस्त बन गई थी मेरी.
फिर षिमुना के hi कहने पर मैं मास्टर chi-fang से मिला. वहीँ से मुझसे असली चेंज आया. मुझे मेरी ज़िन्दगी का मकसद मिला. मैं और भी बदलने लगा. ट्रैंनिंग करके एक बेस्ट फाइटर बना तोह टेलिपाथी सीख कर एक महान इंसान.
ऐसा महँ इंसान जो दूसरों से अलग था. अब मुझे मेरे कर्मो से खुद को महान सबत भी करना था. कितना कुछ बदल गया था मेरी ज़िन्दगी में. कैसे कैसे तमाशे ज़िन्दगी ने मुझे दिखने शरू कर दिए थे.
पहले के खेल ने जहाँ मुझसे मेरी ज़िन्दगी के सारे रंग छीन लिए. वहीँ और मुझे कई ऐसे रंग भी बख्श दिए थे. जिनकी कल्पना भी मैं नहीं कर सकता था.
गुरु जी ने मुझसे बात करके मुझमे ज़िन्दगी की एक नयी लेहेर भी दौड़ा दी थी. ये जान कर मेरे देश के सबसे महान ज्ञानी मेरे बारे में सब जानते हाँ. मुझे लेके अच्छे विचार लिए हुए हाँ. मुझे एक महान शूरवीर के रूप में देखना चाहते हाँ.
क्या कुछ नहीं मिल रहा था मुझे. इतना सब प् लेने की छह भी मैंने कभी नहीं की थी. सब पा लेने के रस्ते पर चलने के लिए मैं बहुत बेचैन होने लगा.
wang-zhi मेरी बहन में सिमटी हुई थी. मोहब्बत नहीं थी मुझे wang-zhi से. फिर भी मेरे सीने से लगी हुई थी. दोस्ती के लिए, उसकी मोहब्बत को सम्मान देने के लिए मैंने उसे सीने से लगाया हुआ था.
सब सोचते हुए मैंने अपनी बहन की ग्रिफ्ट कुछ सख्त करदी.. बदले में wang-zhi ने मेरे गिर्द लिपटी बहन कास दें. वह भी अपनी मोहब्बत में और पुरजोश होने लगी थी. उसे तोह मेरे सीने से लग कर मुझसे भी ज़यादा सुकून मिल रहा होगा..
मैंने धयान नहीं दिए था. पर कुछ फासले पर खड़े मास्टर chi-fang हम दोनों को बड़े प्यार से देख रहे थे. मेरे लिए और अपनी पोती दोनों के लिए वह बहुत खुश थे.
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मनाली सिटी से 20कम दूर पहाड़ों में मौजूद एक आशाराम... जो 3 कम के एरिया पर पहला हुआ था...
एक ऐसा आश्रम..
जो अपनी मिसाल आप था... वह केवल एक आश्रम नहीं था.. एक इंस्टिट्यूट, एक यूनिवर्सिटी भी था. जहाँ पढ़ रहे स्टूडेंट्स आल इंडिया के hi नहीं, आल वर्ल्ड के सबसे बेस्ट स्टूडेंट्स थे. वहां हर किसी को एडमिशन नहीं मिल पता था. वहां किस्मत के धनि hi एडमिट हो पाया करते थे. वहां से स्टडी करके गए हुए स्टूडेंट आल इंडिया, आल ओवर थे वर्ल्ड में जहाँ जिस फील्ड में भी मौजूद थे. वह वहां के बेस्ट ब्रेन कहलाये जाते थे. वह कोई किसी फर्म के काम कर रहा रहा कोई एम्प्लोयी हो या फिर कोई पायलट..
कोई नेता हो या बिजनेसमैन....
वह एक मांझा हुआ, एम्प्लोयी, पायलट, बिज़नेस या फिर नेता बन चूका था...
ऐसा hi था वह आश्रम वह इंस्टिट्यूट वह यूनिवर्सिटी....
उस आश्रम को बनाने वाले, चलने वाले का नाम था.
गुरु मोहन शंकर.....
सब उन्हें गुरु जी hi कहा करते थे. बहुत काम लोग उनके असल नाम को जानते थे. 90+ की आगे के थे वह. 50 साल पहले उन्हों ने hi इस आश्रम को बनवाया था. गुरु जी मोहन शंकर hi इस आशाराम के सब कुछ थे. पर अब उनकी उम्र हो चुकी थी. उन्हें लग रहा था, अब उनकी साँसे बहुत काम रह गयी हाँ. उन्हें अपने इस बनाये आश्रम की बहुत चिंता थी.
वह इस आश्रम को किसी स्ट्रांग हैंड में देके जाना चाहते थे. बहुत से ज्ञानी थे उनके बाद जो आश्रम को बहुत अच्छे से चला सकते थे. पर वह केवल आश्रम को चला सकते थे. उनके अंदर पढ़ रहे स्टूडेंट्स को अच्छी शिक्षा दे सकते थे.
आश्रम के लिए फाइट नहीं कर सकते थे.. आश्रम से पढ़ के गए हुए सब आश्रम के लिए अपनी जान भी दे सकते थे. और आज तक ऐसा होता भी आया था. बहुत से पॉवरफुल लोगों ने उस आश्रम को अपने कब्ज़े में करने की सोची थी. पर कोई भी सफल नहीं हो पाया था. आश्रम के लिए मर मिटने वळून की कमी नहीं थी.
फिघ्टर्स, बिजनेसमैन, पॉलिटीकैं और दूसरे बहुत से लोग जो आश्रम से जुड़े हुए थे. आश्रम की और बुरी नज़र से देखने वळून के लिए चैलेंज बन जाया करते थे. कइयों के लिए आश्रम ज़िन्दगी बनाने का जरिया था तोह कइयों के लिए आश्रम एक हिरे की कान भी थी.
वहां क्या कुछ नहीं था....
स्टूडेंट्स से इतनी फीस ली जाती थी. जो वर्ल्ड के किसी भी इंस्टिट्यूट में नहीं ली जाती थी. किसी यूनिवर्सिटी में नहीं ली जाती थी..
ऐसा सब अमीरों के लिए था.. वर्ण बहुत से गरीब फ्री में भी पढ़ते थे..
वर्ल्ड बेस्ट साइंटिस्ट लैब तक वहां थी. एक ऐसी रिसर्च लैब, जो पुरे देश में कहीं भी नहीं थी. अपने मतलब के लिए बहुत से लोगों ने आश्रम पर कब्ज़ा करने की सोची थी. पर सफल नहीं हो पाए थे. आश्रम से स्टडी करके गए हुए इतने hi पॉवरफुल थे.
पारर.....
पर अब ज़माना बदल रहा था.
दुश्मन बदल रहे थे...
दुश्मनो की पावर बढ़ रही थी...
आश्रम के महान गुरु जी समेत जितने भी महान ज्ञानी थी. वह ऐसी कोई भी फाइट नहीं कर सकते थे. उनके पास जो शक्तियां थी. उनके चलते उनपर कुछ बांधषेण भी थी. वह शक्तिशाली होते भी आश्रम के लिए फाइट नहीं कर सकते थे. फाइट केवल आश्रम के लिए मर मिटने वाले hi कर सकते थे.
अब ज़माना बदल रहा था...
तोह....
दुश्मन भी बदल रहे थे..
बदल भी चुके थे...
दुश्मन कुछ ऐसे सामने आने लगे थे... जिनका मुकाबला अब आश्रम के महान स्टूडेंट्स भी नहीं कर पा रहे थे. सालों से आश्रम के लिए लड़ रहे स्टूडेंट्स जो जवान बूढ़े, मेल, फीमेल किसी भी फील्ड में थे. कुछ नहीं कर पा रहे थे. आश्रम के लिए खतरा बढ़ता जा रहा था.
गुरु जी अपने ख़ास कमरे में धयान में बैठे हुए थे. उस कमरे के दरवाज़ा खुला और एक व्यक्ति दो आदमियों के साथ अंदर दाखिल होता हुआ दिखाई दिया..
दोनों आदमियों के हथुन में दो बड़े बड़े टोकरे तेह.. उस व्यक्ति के इशारे पर दोनों आदमियों ने वह टोकरे वही एक साइड रख दिए और बहार चले गए..
पुरे आश्रम में किसी को भी गुरु जी के कमरे में बिना परमिशन के कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता था.. पर आने वाला व्यक्ति कुछ अलग टाइप का था.
व्यक्ति सीधा गुरु जी के क़दमों में जा गिरा..
"गुरु JI..GURU जी.. पाई लागो गुरु जी.. आज बड़े दिनों बाद आपके दर्शन हुए गुरु जी"
गुरु जी के पाऊँ छूने वाले व्यक्ति के चेहरे के भाव, उसके बोलने का अंदाज़ उसे बहुत hi घट्टिया व्यक्ति ज़ाहिर कर रहे थे.. वह था भी ऐसा hi.. इन्तहा का नीच और घट्टिया इंसान..
गुरु जी : कैसे आना हुआ देवधर.. देवधर जैसा भी था, पर गुरु जी ने उन्हें नफरत की निगाह से नहीं देखा.
देवधर : गुरु जी के दर्शन करने का मैं था तोह चला आया.. देवधर के होंटो पर ईविल स्माइल आ गई थी. आँखों में भी गुरु जी के लिए अपमान भरी चमक थी.
गुरु जी : दर्शन कर लिए हाँ तो अब तुम जा सकते हो.
देवधर : ऐसे कैसे चला जाऊँगा गुरु जी, अभी तोह आपने मुझे बताया hi नहीं. कब होने वाला है मेरा अंत.. कई महीनो से आप कह रहे हाँ. मेरा अंत बहुत करीब है. पर कोण है मेरा अंत करने वाला. कहाँ है मेरा अंत करने वाला, कब आएगा मेरा अंत करने वाला. आप मुझे कभी नहीं बताते.. आज तोह मैं जान के hi रहूँगा.. (वह गुरु जी के सामने गुरु जी के hi अंदाज़ में बेथ गया.. होंटो पर हरामियों वाली मुस्कान थी) मुझे भी तोह पता चले उस महान पुरुष के बारे में. जो मेरा अंत करने वाला है.
ऐसा बोलते समय देवधर के चेहरे पर ज़माने भर का हरामीपन था. गुरु जी के लिए बहुत ज़यादा अपमानिया विचार और भाव थे..
गुरु जी के होंटो पर रहसमे मुस्कान आ गई..
गुरु जी : बड़े चाओ से अपनी मौत का इंतज़ार कर रहे हो देवधर.
देवधर : क्या कहूं गुरु जी.. कसम से जबसे आपने कहा है ना. मेरा अंत करने वाला आ गया है तोह मुझे न दिन को चैन मिलता है और न hi रत को नींद आती है. सोच सोच के मैं बहुत ज़यादा परेशान हों. ऐसा कोण इस धरती पर पैदा हो गया जो मुझे मारने वाला है.
ऐसा बोलते समय भी देवधर गुरु जी का मज़ाक hi उदा रहा था..
गुरु जी : जल्दी क्या है देवधर, कहा न जल्द hi वह समय आने वाला है, जब तुम्हारा अंत होगा. जाओ और जा कर इंतज़ार करो. कुछ दिन ऐश के मिले हाँ तोह ऐश कर लो..
गुरु जी ने ऑंखें बंद कर ली.. तोह देवधर समझ गया.. अब गुरु जी उसकी किसी बात का जवाब नहीं देंगे..
देवधर गुरु जी को ग़ुस्से से देखता हुआ वापिस लौटने लगा तोह गुरु जी बोले.. देवधर अपने साथ लाये इन कचरे के डब्बो को भी अपने साथ लेते जाओ..
देवधर ने एक नज़र फिरसे गुरु जी को देखा और बहार निकल कर अपने साथ आये दोनों आदमियों से टोकरे उठाने को बोल दिए..
देवधर और दोनों आदमी चले गए तोह..
गुरु जी : देवधर तू मेरा सबसे महान शिष्य होकर ऐसा निकला.. बुराई का रास्ता न चुनता तोह मेरे बाद तू hi इस आश्रम का सब कुछ होता. पर तुमने लोक सेवा छोड़ कर बुराई का रास्ता चुना. और अब तू इस आश्रम को भी अपने कब्ज़े में करके इसे बुराई का सबसे बड़ा अड्डा बनाना चाहता है.. पर तू ऐसा कभी नहीं कर पायेगा.. आ रहा है तेरा अंत करने के लिए एक शूरवीर.. इंतज़ार कर, और कुछ दिन ऐश के जी ले.. बहुत झेल लिया इस धरती ने तेरे पापी शरीर को.. अब तेरा समय समाप्त होने वाला है.
वही देवधर ग़ुस्से से आश्रम से बहार निकला तोह दोनों आदमियों में से एक बोलै..
"महाराज आपसे बढ़कर कोण बलवान हो सकता है. आप चाहें तोह उस गुरु जी का भी अंत कर सकते हाँ"
देवधर जो बहुत ज़यादा ग़ुस्से में था..
ग़ुस्से से उस आदमी के गले को पकड़ लिया...
देवधर : सूअर के बच्चे तू अभी तक नहीं जान पाया.. मेरे साथ इतने बरसों से है.. फिर भी तू गुरु जी को नहीं जान पाया. मेरे दिन रात का चैन खो गया है तोह कहता है मैं गुरु जी को ख़तम कार्डों..
ऐसा करने की ताक़त होती मुझमे तोह मैं कबका उस बुड्ढे को मार न चूका होता.. वह कुछ भी गलत नहीं कहते.. पूरी दुन्या में उनके जैसा शक्तिशाली कोई नहीं है समझा तू. वह चाहें तोह एक hi पल में मुझे जान से मार सकते हाँ.. पर मुझे मारने की परमिशन नहीं है उसे..
देवधर में हाथियों जैसी ताक़त थी.. ग़ुस्से देवधर ने अपनी उँगलियों को दबाया तोह उस आदमी की गर्दन एक लम्हे में hi चूर चूर हो गई.. आश्रम के गेट के बहार देवधर की पूरी फाॅर्स मौजूद थी.. सब देवधर को देख कर थार थार कांपने लगे..
देवधर ने फिर उस आदमी के सीने पर ज़ोर की लात मारी तोह वह 10 मीटर दूर तक उड़ता हुआ जा गिरा...
देवधर ग़ुस्से से अपनी गाड़ी की और बढ़ा और गाडी में जा बैठा.. गाडी एक खली मैदान की और बढ़ने लगी. कुछ देर में देवधर एक हेलीकाप्टर के पास था. देवधर उस हेलीकाप्टर में बेथ के निकल गया..
देवधर गुरु जी के चेले थे. बहुत साल लगा कर देवधर ने गुरु जी से बहुत सा ज्ञान प्राप्त किया था. देवधर के मैं में लालच था.. तब गुरु जी देवधर के मैं को नहीं जान पाए थे. ऐसा hi था देवधर..
बहुत बाद में जब गुरु जी को और भी शक्तियां प्राप्त हुई तोह गुर जी ने देवधर को आश्रम से निकल दिए. निकलने से पहले उसे सुधरने का भी बहुत कहा था. पर देवधर नहीं सुधरा तोह गुरु जी ने उसे आश्रम से निकल दिए..
देवधर फिर काली शक्तियों की तलाश में निकल पड़ा और कई बरसों की म्हणत के बाद देवधर हिंदुस्तान का सबसे शक्तिशाली काली शक्तियों वाला मनुष्य बन गया.
समय के साथ साथ देवधर अपनी पावर बढ़ता चला गया और बहुत बड़ा गैंग उसने खुद का बना लिया... गुरु जी के लिए देवधर के दिल में बहुत खेद था. तोह वह आश्रम को अपने कब्ज़े में करके आश्रम को बुराई का सबसे बड़ा ग्रह बना कर गुरु की को ज़लील करना चाहता था..
पर ये उसकी भूल थी.. गुरु जी वो जानते थे.. जो देवधर नहीं जनता था...
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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..
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