Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 15 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge

सही कहा आपने भाई.. अपडेट बहुत hi बोर था..

डिटेल में बताता हों कैसे....


सही कहा आपने फालतू की बातें ज़यादा हो रही हाँ स्टोरी में...

हम्म दक्ष हवेली में पोहंच सकता था.. हवेली पोहंच कर उसे बिना किसी से बातें किये हक़ीक़त खोल कर बदला लेना चाहिए था.. 2 उपदटेस में बदला लेकर, तीसरे चौथे अपडेट में पांचू पत्नियों से शादी करके, पांचवें छाते अपडेट में लिनिजोना से लड़ाई करते हुए उसे मार देता.. सातवें अपडेट में एअर्थ के सभी दुश्मनो को मार देता..

बाकी के तीन अपडेट में निमुनिका जा कर लोजान को मार कर षिमुना के परिवार को बचता..

कुल मिला कर आप कहते हाँ... 10-12 अपडेट में स्ट्रोय समाप्त कर दूँ... ???

मेरे ख्याल से आप पांचू लड़कियों के कारनामे पढ़ कर असल बात की तह तक नहीं पोहंचे हाँ.??

क्यों अलका, कोमल, क्वीन, संजना अलग रूप में सामने आयी हाँ..??

बिना किसी कारण तोह कुछ भी नहीं होता!

बिना सब समझे hi आप स्ट्रोय रीड कर रहे हाँ क्या... ???

ऐसे कैसे मज़ा आएगा आपको..

समझ कर पढ़ने की कोशिश करें..

और....

पढ़ कर समझने की कोशिश करें...

शुक्रिया....
 




Episode:39




नताशा का क्वीन के रूप में खुल कर सामने आया उसके लिए, उसके परिवार के लिए अच्छा नहीं हुआ था.

नताशा जान गयी. अब उसके परिवार के लिए खतरा बढ़ जायेगा. जबकि वह ऐसा नहीं चाहती थी. पर एक्सपीरियंस न होने के कारण वह गलती कर बैठी थी.

अब फिरसे कोई और गलती नहीं करना चाहती थी. पहले hi बरसों से अपने परिवार से दूर रही थी. साथ में संजना भी सबसे दूर हो गयी थी.. अब जैसे हालत बन चुके थे, वह अपने परिवार के किसी सदस्य को खोना नहीं चाहती थी.

क्वीन को पाने के लिए, अपने अंडर लेने के लिए दुश्मन कुछ भी कर जाते.. उसके किसी भी प्यारे को अपनी कस्टडी में लेके उसे मजबूर कर सकते थे..

जोश में आते हुए उसने एक गलत कदम उठा लिया था. अब कोई और गलत कदम नहीं उठाना चाहती थी.

रात हुई तोह नताशा क्वीन बनकर, इनविजिबल होकर पुरे एरिया को सर्च करने लगी. उसे पता चला, कई ऑर्ग के एजेंट्स और गुंडे उसके घर पर नज़र बनाये हुए हाँ.

मतलब....

एक बार फिरसे उसे कोई खोना नहीं चाहता था. ऑर्ग वाले नहीं चाहते नहीं चाहते थे. क्वीन न कहें तोह नताशा एक बार फिरसे उनकी नज़रों से ओझल हो सके. वह न सही तोह उसके परिवार का hi कोई सदस्य उनके कब्ज़े में आ जाये.. पहले शूज वाला मटर था तोह अब इंविसिबिलिटी के चलते सब उसके पीछे पद गए थे.. शूज द्वारा क्वीन उड़ सकती थी. तोह इंविसिबिलिटी उसने कैसे प्राप्त करि.. सबके लिए ये बात सबसे बड़ी वैल्यू रखती थी.

मतलब उड़ने से भी ख़ास चीज थी. किसी को दिखाई न देना..

नताशा के लिए बड़ी आज़माइश कड़ी हो गयी थी.. अपने परिवार को बचने के लिए उसे बड़ी म्हणत की ज़रूरत थी..

यहाँ बदली सिचुएशन देख कर वह कुछ घबरा भी गई थी. सब सोचते हुए उसे पसीना आने लगा था.

एक गलती.......

उसके परिवार का कोई न कोई सदस्य या तोह मारा जा सकता था. या फिर दुश्मनो के कब्ज़े में जा सकता था. अब दुश्मन इतने थे तोह सबको जान पाना मुमकिन भी नहीं था..

बड़ी हिम्मत के साथ क्वीन ने अपनी फीलिंग्स पर काबू पाया और पुरे एरिया को सर्च करके वहां मौजूद गैंगस्टर्स को ख़ामोशी के साथ ख़तम करने लगी.. बड़ी सावधानी बारात रही थी क्वीन..

एक घटने में hi वह आस पास के सभी गुंडों को ख़तम कर चुकी थी. फिर वहां से कक्तव कामर्स को भी तोड़ फोड़ कर वह कई गाड़ियों में अपने परिवार को साथ लिए वहां से निकल पड़ी..

जब कक्तव पर क्वीन का हमला हुआ तोह क्वीन दिखाई नहीं दे रही थी.. ऐसे समय पर उन कामर्स द्वारा नज़र रखे हुए ऑर्ग और गैंगस्टर्स वाले हड़बड़ा गए..

जितनी देर में वह सब सावधान हुए.. जितनी देर में वह सब अपने आदमियों को चेक करने में लगे रहे.. जितनी देर में नए आदमियों को मिशन पर लगाया गया.. क्वीन सबके साथ वहां से फुर्र्र हो चुकी थी..

एक बड़ी गलती के बाद क्वीन ने दूसरी गलती नहीं करि थी.. बड़ी सफाई से अपने परिवार को सबसे बचा कर ले गयी थी..

इतनी जल्दी वह इंडिया से निकल नहीं सकती थी. ऐसे hi अपने परिवार को आइलैंड पर नहीं ले सकती थी. स्पेशल प्लेन लेजाना पड़ता और फिर वहां प्लेन के लिए लैंडिंग प्लेस भी नहीं थी.. प्लेन से जाने पर वह सबकी नज़रों में आ जाती..

ये बात बड़ी खतरनाक थी...

अब समुद्री रस्ते से hi ले जाया जा सकता था. उसके लिए बड़े मेजर प्लान की ज़रूरत थी. पर अब क्वीन कोई गलती नहीं करना चाहती थी.. सुकून से सब काम करना चाहती थी..

शहर से बहार एक हवेली में सबको लेकर वह पोहंच गयी.. हवेली उसने पहले hi सर्च कर ली थी.. अब वह किसी हद तक रिलैक्स थी..

संजना ने उसके साथ जाने से इंकार कर दिए था.. उसे अपने hi देश में रहना था. अपने hi देश की सेवा करनी थी. अपने hi देश के क्रोरो ज़रूरत मांडो के दर्द को बाँटना था..

सबने बहुत कहा पर...

संजना : मम्मी! मुझे कुछ नहीं होगा. जैसे माँ ने अब तक मेरी रकसह की है. जैसे अब मुझे आप सब से मिलाया है. वैसे hi आगे की लाइफ में मेरी आप सबसे जुड़े रहते हुए hi बीतेगी. अब देश को, धरम को मेरी ज़रूरत है तोह मैं स्वार्थी नहीं बन सकती माँ.

मुझे जब तक जीना है, अपने लिए नहीं, आपके लिए सबके लिए, देश भर के लाखों क्रोरो मासूमो, बक्सों और लाचारों के लिए जीना है. मेरा असल सफर और लक्ष तोह अब शुरू हुआ है माँ. संजना माँ मुझे ऐसे hi नहीं बना दिए गया है. ये सब माँ की कृपा है. देश को ऐसे समय पर ज़रूरत भी है एक माँ की.. आप सब मुझे मिल गए, मेरी ज़रूरत और हर छह पूरी हुई. ऐसे hi आप सब को मैं और दीदी भी मिल गए हाँ तोह आप सब के दिलों को भी सुकून मिल गया है. आप सब के दिलों का दर्द भी ख़तम हो गया..

अब माँ ने हम सब को सुकून वाली लाइफ जीने को दी है. तोह जिनकी लाइफ में सुकून नहीं है. उनके लिए भी तोह कुछ होना चाहिए न..

संजना ने बड़े प्यार से ये शब्द बोले थे. और ऐसे बोले थे. सब सुन और समझ कर प्रसन्न हुए..

मम्मी : सही कहा तुमने संजना बेटी.. मैं भी स्वार्थी होकर सोचने लगी थी. मुझपर तोह माँ ने सबसे बढ़कर कृपा करि है. मैं तोह जानती भी नहीं थी. मेरी बेटी ज़िंदा भी है. ऐसे में माँ ने तुझे मुझे लौटा कर वह ख़ुशी दी, जिसकी कभी मैंने कल्पना भी नहीं की थी. तुम जिओ अपनी ज़िन्दगी बेटी.. सच कहा तुमने.. देश में और भी कई मायें परेशानहाल हाँ. जा उनके परेशानियां दूर कर. किसी के जिगर का टुकड़ा उससे दूर है तोह उसे उसकी माँ से मिला कर उस माँ को सुकून दे.. उसे सुख दे, उसकी ज़िन्दगी में भी हमारे जैसी खुशियां आएँगी तोह मुझे और सबको बेहद ख़ुशी होगी. माँ ने आज तक तुम्हारी रक्षा करि है. तुम्हे इतना बड़ा मुकाम भी दिए है तोह आगे भी माँ तुम्हारी रक्षा करेगी और तेरे मुकाम को बढ़ाएगी..

सब सुनकर और भी प्रसन्न हुए.. सब कुछ न कुछ बोलने लगे..

क्वीन मीठी नज़रों से संजना को देख रही थी... वह जानती थी, उसके जैसे संजना की लाइफ में सीढ़ी नहीं होने वाली.. जितनी खुशियां मिल रही हाँ. उतनी hi कठनाइयां भी आने वाली हाँ. पर सब उपरवाले के आशीर्वाद से अच्छा hi होता चला जाएगा. उस मकसद में उन्हें सफलता मिलती जाएगी..

संजना बातें करती हुई अपने दादा जी के घुटनो से लगी बैठी हुई थी... बैठे बैठे hi उसके मैं में जाने क्या आया था वह बातें करते करते अपने दादा के घुटमो को भी मसलती गयी थी.

दादा जो उसकी बातें सुन रहे थे. वह अपने अंदर एनर्जी सी बढ़ते हुए महसूस कर प् रहे थे.. संजना और उसकी माँ की बातें ख़तम हुई तोह वह उठे और संजना को भी थाम कर खड़ा कर दिए..

सब देख कर हैरान हुए तोह दादा ने संजना के माथे को चुम कर गले से लगा लिया.

सब ख़ुशी से चीख पड़े थे..

दादा जी ठीक हो गए थे..

संजना भी देख कर हैरान हो गई थी. वह भी बड़ी खुश दिखने लगी थी.

दादा : तुम सच में काली माँ का अवतार हो संजना बेटी.. तुम्हारा जनम ज़रूर किसी बड़े करए के लिए हुआ है. अब मैं कुछ कुछ उन महान ज्ञानी की बातों का अर्थ समझ रहा हों. बहुत सी बातें तब जो मेरी समझ में नहीं आयी थी. अब आ रही हाँ.

परिवार के बड़े भी महान ज्ञानी की बातों को याद करने लगे.. उन्हें भी लगने लगा था. क्वीन और संजना का उनसे दूर होना किसी बड़े मकसद के लिए था..

सब को असली ख़ुशी प्राप्त होने लगी. सब खुद को अंदर से महकता हुआ महसूस करने लगे...

संजना अगली सुबह सबसे जुड़ा होकर वहां से बहुत दूर के एक बड़े मंदिर की और निकल पड़ी थी. उसे अपनी कोई चिंता नहीं थी.. उसकी रक्षा करने के लिए माँ काली उसके साथ थी...

क्वीन भी अपने परिवार को साफल्य मुंबई लेजाने का इंतेज़ाम करने लगी.. वह एक जीनियस लड़की थी. पहले दिन अपने परिवार से मिलने के चलते हुए दिमाग से सोच नहीं पायी थी. अब वह एक एक बात पर बहुत धयान दे रही थी.. एक एक पॉइंट पर बहुत अच्छे से विचार कर रही थी...

रात वह अपने आइलैंड पर भी एक चक्कर लगा आई थी. वहां से कुछ सामान भी वह ले आई थी..



{::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


लाइव स्ट्रीमिंग के कारण एक बार तोह पूरी दुन्या में तहलका मच उठा था.

संजना माँ ने स्कूल में जो किया था. उस कारण दुन्या भर में चर्चा होने लगी थी. संजना माँ को एक ब्रेव गर्ल का नाम दिए गया था..

वहीँ बाद में संजना माँ और नराशा बचपन से hi अपने परिवार से दूर रही हाँ. सब जान कर हैरान हुए थे..

असल हैरानगी तोह तब बढ़ी थी. जब पता चला था. नताशा hi क्वीन है..

वहीँ जब सम्राट भी वहीँ मौजूद पाया गया तोह और भी तहलका मच उठा.. पूरी दुन्या की नज़रें इंडिया पर लग गयी थी..

पूरी दुन्या इंडिया के तीन स्ट्रॉन्गेर्स को लाइव देख और सुन रही थी..

संजना माँ का भयानक रूप कुछ कुछ सब लाइव देख चुके थे. पर सम्राट ने जैसा खेल मिनिस्टर और नारायण मिश्रा के मोठे के साथ खेला था.. देख कर जो जहाँ बैठा हुआ था. अपनी पंत गीली कर गया था..

बहुत से अब भी इसे सच नहीं मान रहे थे. सब इसे कोई बहुत बड़ी गेम भी बोल रहे थे..

बहुत से सम्राट के लिए पागल हो उठे थे. वह सोचने लगे, सम्राट उन्हें मिल जाए तोह उनकी लाइफ सेट हो जाएगी.. वह दुन्या के किंग बन सकते हाँ..



हाहाहा...



सम्राट यानी की किंग को अपने वाश में करके खुद किंग बनने का सोच रहे थे.

सम्राट तोह खुद दुन्या का बना बनाया किंग था...

वहीँ रपो का पूरा स्ट्रक्चर कोमल ने बिगड़ कर रख दिए था. उनके पोलिटिकल से जुड़े हुए कुछ लोगों ने कुछ अलग अलग किसम के बयां ज़रूर दिए थे. पर ज़यादा बात नहीं करि थी..

बाओ वाले खुल कर नहीं बोले थे.. वह अपने hi किसी प्लान पर चर्चा में लगे हुए थे..

अंडरवर्ल्ड हमेशा का लालची रहा है.. वह संजना, नताशा या फिर सम्राट तीनो में से जो भी मिल जाए. उसे साथ मिलकर और भी पॉवरफुल बनने की सोचने लगे थे..

बहुत से QUEEN's हाउस पर नज़र बनाये हुए थे..

बाद में...

जब क्वीन ने अपना खेल खेलते हुए साफल्य सबकी नज़रों से बचते हुए अपने परिवार को कहीं ले गई थी. वह सब हाथ मलते रह गए..

कहीं तो कोई ये भी बोलै था..




साला क्वीन को कैसे कोई अपने काबू में कर सकता है.. वह तोह किसी को दिखाई HI नहीं देती.




इंडिया खुश भी था और नहीं भी..

बहुत से इंडियन खुश थे तोह कुछ की रातों की नींदें उडी हुई थी. वह अपने लिए खतरा महसूस करने लगे थे.




सम्राट...

क्वीन....

संजना माँ....




इन तीनो से कैसे बचेंगे.. तीनो के खुल कर सामने आने के बाद बुरे लोग बुरे करम खुल कर नहीं कर सकते थे...



{::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


देवधर पैलेस का सिक्योरिटी चीफ देश के हालत देख कर परेशान हो गया था..

देवधर तोह खुद चाप में लगा हुआ था. सिक्योरिटी चीफ को लड़कियों के इंतेज़ाम का बोलै हुआ था.. पर सम्राट के आ जाने से सारा खेल बिगड़ने लगा था.. चीफ किसी से मश्वरा भी नहीं कर सकता था..

सब उससे निचे थे.. देवधर उससे ऊपर था. उसका मालिक था. शैतानी ताकतों का मालिक था.. वही उसे कोई बेस्ट मश्वरा दे सकता था.. पर वह अपने चाप में मगन था. चाप छोड़ कर चीफ को कोई सलाह नहीं दे सकता था..

अब बेचारा चीफ जितना दिमाग रखता था.. उतना hi उसका उपयोग कर सकता था..

देश भर में कई सुप्पल्लिएर्स के पास से लड़कियों को पुलिस ने रिकवर कर लिया था.. अब सम्राट आ गया था तोह कैसे और लड़कियों को किडनैप करके पैलेस में लाया जाए.

ये सोच कर चीफ बेहद परेशां tha..usay कोई सुझाव नहीं मिल रहा था..

रात के 1 बजे उसने पं को कॉल की..

पं तोह नंबर देख कर फ़ौरन hi उठ बैठा.. अभी अभी वह कुछ देर सस्टने के लिए लेता था.. दिन भर देश में जो जो हुआ था. उसपर बोल बोल कर वह बहुत थक गया था..

देवधर के सिक्योरिटी चीफ का नंबर देखा तोह घबरा गया..

साला एक पं होकर घबरा गया था.

क्या करता.. देवधर की दहशत थी hi इतनी.. देवधर साला बड़े बड़े नेताओ को अपनी काली शक्तियों से डरा चूका था..

पं : jjj...ji..ji

चीफ ग़ुस्से से : देखो पं.. मुझे किसी भी हाल में अपने मालिक का कहा पूरा करना पड़ता है.

पं : mm..main मतलब नहीं समझा aa..aapka सर!

चीफ : जितनी भी लड़कियों को आज के दिन रिकवर किया गया है.. वह सबकी सब मुझे चाहिए.. उन लड़कियों में से मुझे कुछ लड़किओं की फोरि ज़रूरत है. मुझे मतलब मेरे मालिक को.

पं : पर आप को उन लड़कियों से क्या लेना है.

चीफ : प्रश्न मत उठा कुत्ते.. जितना कहा है उतना कर.

पं को बड़ा ग़ुस्सा आया. पर वह कुछ बोल नहीं सकता था. कैसे बोलता. देवधर उसके साथ साथ उसके पुरे खंडन की गर्दन उदा देता.. 2 4 लाइव शो पं देख भी चूका था. देवधर कितना बड़ा दरिंदा है. वह बहुत अच्छे से जनता था. इसलिए देवधर के सिक्योरिटी चीफ की बातें और गली भी सहन कर गया.

पं : देश भर में सम्राट की जय जय हो रही है. वह कहीं भी पोहंच जाता है. ज़रूर वह साडी लड़कियां भी उसी के कारण मिली होंगी पुलिस वळून को.

चीफ पं को गाली देते हुए : तू फिरसे उल्टा बोलने लगा.

पल : इसके शिव मेरे पास बोलने को कुछ है भी नहीं.. मैं जनता हों, मैंने ऑर्डर्स दे भी दिए तोह भी कुछ नहीं हो पायेगा.. सम्राट के क़हर को सबने लाइव देख लिया है. अब आपकी नहीं मंटा तोह मरता हों. मंटा हों तोह भी सम्राट मुझे नहीं छोड़ेगा..

फिर जैसे वह मैं में कोई फैसले लेते हुए : आपको कल तक जवाब मिल जाएगा..

पं ने कॉल डिसकनेक्ट करि और मोबाइल ऑफ कर दिए...

वह सोचने लगा : देवधर काली शक्तियों का मालिक है. मेरे साथ साथ मेरे पुरे परिवार को मार सकता है. मैं देश का गद्दार भी नहीं हों. बस देवधर की काली शक्तियों से दर गया हों.

नहीं मुझे अब नहीं डरना चाहिए.. मैं न तोह बुज़दिल हों और देश के अगेंस्ट जाने वाला व्यक्ति. परिवार से भी बढ़कर है देश.. देवधर शैतानी ताकतों का मालिक है तोह क्या हुआ..

जैसी पावर में अब सम्राट, क्वीन और संजना माँ आ गए हाँ. ज़रूर वह सब मिलकर देवधर से निपट सकते हाँ..

पं ये बात सोचते hi हरकत में आ गया.

कुछ देर में पं का बयां टीवी पर दिखाया जा रहा था.

"SAMRAT..QUEEN..SANJANA माँ आप को आपके देश के प्रधान मंत्री का नमस्कार.. अब से पहले मैंने खुल कर आप सब के बारे में नहीं बोलै.. खुल कर बोलता तोह बहरी देशों के बड़े बड़े नेता मेरा बोलना हज़म नहीं कर पाते.. पर अब मुझे किसी की कोई परवा नहीं है..

एक मामले में मैं कुछ दर गया था..

बड़ा अजीब लग रहा होगा आप सबको सुनकर.. पर ये सच है.. पं होते हुए भी मैं दर गया था.

मेरा डरना बनता है....

दर तोह हर इंसान के अंदर होता है. कोई खुद के लिए डरता है तोह कोई अपने परिवार के लिए.. मैं भी दर गया था. जहाँ मुझे अपनी जान की भी चिंता हुई थी. वहीँ मुझे परिवार की चिंता सताने लगी थी. अपने देश के क्रोरो लोगों की चिंता सताने लगी थी.

पारर...

अब मेरा दर जा चूका है. मेरी जान जाती है तोह जाए, मेरा परिवार मरता है तोह मर जाए.. मैं अपने hi देश की बहु बेटियों की इज़्ज़त के साथ, अपने देश के मासूमो की ज़िन्दगियों के साथ किसी को खेलता हुआ नहीं देख सकता..

मेरे देश का कोई सैनिक बुज़दिल नहीं है. हाँ दुश्मन कहीं कहीं बहुत बढ़कर हाँ. जिनके रहते कइयों की हिम्मत जवाब दे जाती है. ऐसा hi एक दुश्मन और भी है हमारे देश में..

देवधर...

देवधर के बारे में आधा देश जनता है. वह काली शक्तियों पर राज करने वाला एक दुष्ट पापी है. कुछ देर पहले उसके सिक्योरिटी चीफ का फोन आया था मुझे. इन तीन दिनों में जयंती भी लड़कियों को मेरे देश के बहादुर सिपाहियों ने अपनी जान पर खेल रिकवर किया है. देवधर का चीफ उन लड़कियों को अपने पास लेने की बोल रहा था.

मैं पं होते हुए भी एक आम इंसान भी हों. देवधर जैसे काली शक्तियों वाले के साथ मैं नहीं लड़ सकता..

सम्राट...

सम्राट, क्वीन और संजना माँ से मैं कहता हों... देवधर जैसे पापी से लड़ कर देश की रक्षा करो.. जो मासूम बच्चे अपने परिवार को वापिस मिले हाँ. जो मेरी बेटियां अपने घर में वापिस लौटी हाँ. उन्हें फिरसे उनके अपणु से दूर मत होने देना.. मैं नहीं जानता आगे क्या होने वाला है. मैं नहीं जनता था देवधर का चीफ क्यों मुझसे लड़कियों की डिमांड कर रहा था.

पर इतना ज़रूर समझ गया हों. देवधर पापी है.. काली शक्तियां पाने के लिए कुछ भी कर सकता है. इसलिए मैं हाथ जोड़ता हों SAMRAT,QUEEN और संजम माँ के आगे.. मेरे देश के बच्चू की और बेटियों की रक्षा करो..

पं की ऑंखें नाम हो गई थी..

वहीँ जो जग रहे थे. जो सुन रहे थे, सब पं की बातें सुनकर शॉकेड हो गए. देवधर के बारे में कैयो ने बहुत सुन रखा था. पर देवधर इतना खतरनाक भी हो सकता है. किसी को अंदाज़ा नहीं था..

पं की स्पीच बार बार हर चैनल पर लाइव दिखाई जा रही थी.. जिन जिन घरों से बच्चे और लड़कियां किडनैप हुई थी. वह सब परेशान हो गए.. मैं में सम्राट को हेल्प के लिए बोलने लगे..

भगवन को भी याद कर रहे थे.. पर जैसे रूप में सम्राट सामने आया था.. उसी को hi भगवन भगवन का औतार कर पुकारने लगे थे..

वहीँ सिक्योरिटी चीफ बाज़ी पलटते देख कर थार थार कांपने लगा.. ग़ुस्से से नहीं अपनी मौत की आहात प् कर वह थार थार कांप रहा था... उसने सोचा पं से बोल कर, उसे दर्रा धमका कर लड़कियों को फिरसे अपने अंडर ले सकेगा..

पर हुआ इसके उलट...

वह अपने सर थाम कर बैठा रह गया.. वह सोचने लगा, अब तोह देवधर जैसे hi चाप से उठेगा.. लकड़ियों की डिमांड करेगा. लड़कियां पूरी न देख कर उसका सर काट देगा..

चीफ पं की स्पीच सुनकर कई बार अपनी गर्दन काटते हुए देख चूका था.. इतना मूट उसके लिंग से नहीं निकला था. जितना पसीने उसके पुरे बदन से निकल चूका था..



{::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


मैं एक गाडी में बैठा हवेली से कुछ दूरी पर था.. दिन के 4 बजे का टाइम था...

ड्राइविंग सीट पर बैठा मैं ठाकुर दक्ष सिंह बदले हुए फेस के साथ था.. जैसे hi गाडी हवेली से 2कम की दूरी पर पोहंची तोह रुपाली को फिरसे नागिन के रूप में ले आया मैं.

ऋचा उसके साथ hi बैठी हुई थी. अब तक वह कुछ भी नहीं समझ पायी थी. वह नहीं समझ पाई थी. उसकी माँ क्यों कभी मेरी घुलम बन जाया करती थी तोह कभी एक नागिन बनकर ज़हरीले शब्दों से मुझपर चढ़ दौड़ती थी..

जानती थी तोह बस इतना कह मैं काला जादू जनता हों. उसी कारण ऐसा सब कर प् रहा हों..

रुपाली होश में आई तोह इधर उधर देखने लगी

रुपाली : ऋचा हम कहाँ जा रहे हाँ.

ऋचा ने अपनी माँ को देखा और मोह कर बोली

हवेली..

रुपाली घबरा कर : क्याआआआ..?? नहीं.. दक्ष गाड़ी वापिस मोड़ो, मुझे हवेली नहीं जाना है.

दक्ष : क्यों..?? वहां कोसना तुझे सूली पर लटकाया जाने वाला है.

रुपाली : वहां पायल होगी.. वहां राजा ठाकुर होगा..

दक्ष : हाहाहा! दर गयी क्या..??

रुपाली ग़ुस्से से : दररर! एक बार मुझे मेरे परिवार में लौट जाने दो.. मुझे कुछ दिन की छूट दे दो.. फिर तुझे दिखाऊँगी मैं, डर किस बाला का नाम है. फिर दिखाऊँगी मैं तुझे. मैं डर रही हों या तुम डर रहे हो..

दक्ष : जहाँ जा रही हो, वहां तुझे तेरे परिवार को भी देखने का मौका मिलेगा.

रुपाली के साथ साथ ऋचा भी झटके खा गयी.. रुपाली का नागिन रूप एकदुम्म से जैसे बादलों की ूत में जा छुपा था..

दक्ष : हाहाहा! ऋचा तुम्हारा डरना नहीं बनता.. हवेली पोहंच कर तुझे सबत करने का मौका दिया जाएगा. तुझे कुछ ऐसा करने को बोलै जायेगा, जिसे तू कर नहीं पाएगी. अगर तू वह सब कर गयी तोह तुझे मैं अपने जंतर मंतर में लिए बिना hi अपनी घुलम मान लूंगा..

ऋचा बैठी बैठी थार थार कांपने लगी. उसे अंदाज़ा हो गया था. मैं ज़रूर कुछ भयानक काम उससे करवाने वाला हों..

रुपाली तोह बस बड़बड़ाये जा रही थी.. मेरा परिवार भी हवेली पर पोहंचा हुआ है.. nnn..nahi...nahi..nahi ऐसा नहीं हो सकता.. ऐसा नहीं होना चाहिए.. ऐसा हुआ तोह fir..fir तोह सब.. फिर तोह सब ख़तम होक रह जाएगा.. कैसे मैं दक्ष के चुंगल से निकल सकुंगी.. नहीं.. नहीं.. मेरा परिवार इतना कमज़ोर नहीं हो सकता.. वह दक्ष के चुंगल में कैसे फँस सकता है..

रुपाली सदमे जैसी हालत में होते हुए बड़बड़ाने लगी तोह मैं उसे देख कर हसने लगा.. ऋचा दरी सहमी कभी मुझे तोह कभी बहार देखने लगती.. उसकी जीब उसके होंटो पर ऐसे चल रही थी. जैसे कुत्तिया गर्मी की शिद्दत से बहाल हो.. और दूर दूर तक पानी भी न हो..


.

.

.

.

.

आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::



 
जैसे किया था रुपाली ने दक्ष के साथ. अब दक्ष उसका बदला ले रहा है. रुपाली को घुलम बना कर उसके साथ खेल रहा है. रंडी है उसे नुदे तोह रखेगा hi..

.


रुपाली के साथ ऐसा hi होना बनता था. सोचा नहीं था उसने उसके साथ ऐसा भी कुछ हो सकता है.

ऋचा के साथ हवेली में सब करने का सोचा है डीके ने. देखते हाँ हवेली पोहंच कर क्या करता है

पायल ख़ास थी डीके के लिए. विश्वास नहीं बना पाई. अब सजा तोह उसे भी मिलेगी.
 
Episode:40

TIME:03:58:PM



मैं गाडी में बैठा हवेली से कुछ hi दूरी पर था.. षिमुना भी उसी समय एक गाडी में बैठे मेरे बराबर आ गई थी.. मुझे देख कर थम्ब्स उप किया और एक क्यूट स्माइल पास कर दी.. एक फ्लाइंग किश भी करि और खिलखिला कर है पड़ी..

मैं उसके दिमाग में जा घुसा : साली तुम तोह मेरे hi इलाके की कोई ठकुराइन दिखाई देने लगी हो. वाह्ह्ह क्या तौर है तुम्हारी.

षिमुना : ेहेहेहे! अभी तुमने मेरे जलवे देखे hi कहाँ हाँ मर. दक्ष ठाकुर.

दक्ष : तुमने सब देख लिया है ना आस पास.. कोई निगरानी के लिए तोह मौजूद नहीं है न..

षिमुना : नहीं है. होता तोह जान से मारा जा चूका होता.. हवेली के आस पास तोह क्या दूर दूर तक कोई नहीं है. अभी सबका धयान डीके से हटकर सम्राट, क्वीन और संजना पर लगा हुआ है.



{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


03:40:पं

परिधि राजा ठाकुर के साथ हवेली के लॉन से कुछ दूरी मौजूद एक पेड़ के निचे बैठी हुई थी.

दोनों बातों में लगे हुए थे. राजा ठाकुर बदल गए थे. परिधि की राजा ठाकुर से दोस्ताना बातें होने लगी थी. राजा ठाकुर को भी अपनी पोती परिधि में दक्ष की खुशबु आने लगी थी. परिधि hi केवल एक ऐसी थी. जिसने पुरे मैं से दक्ष को सही बोलै था. उसपर अपना विश्वास बनाये रखा था..

राजा ठाकुर को परिधि पर बड़ा गर्व था.

हवेली का बड़ा गेट हुए खुला और 4 लैंड क्रूजर अंदर आती हुई दिखें. राजा ठाकुर और परिधि उधर देखने लगे..

आगे पार्किंग एरिया में जा के चरों लैंड क्रूजर जा कर रुकीं. फिर एक साथ चरों लैंड क्रुइसेरस के दूर खुलने लगे. एक एक करके सब गाड़ियों से बहार निकले.

जो आये थे. उन्हें देख कर राजा ठाकुर उठ खड़े हुए.. परिधि राजा ठाकुर को देख कर हैरान रह गयी.

परिधि : दादा जी कोण हाँ ये सब लोग.

राजा ठाकुर परिधि को देखे बिना hi बोले : मेरा भाई करणवीर.

परिधि शॉकेड हो गयी : kyaaaaaaaaaaaa..?? पर वह तोह हमारे जनम से भी पहले hi आप से दूर हो गए थे. कभी इनको हवेली में नहीं देखा. कभी इनका ज़िक्र भी ज़यादा नहीं हुआ हवेली में..

राजा ठाकुर : चलो मेरे साथ..

राजा ठाकुर परिधि का हाथ थाम कर उधर hi चलने लगे. जहाँ सब मौजूद थे. और एक साथ खड़े होकर हवेली की और देख रहे थे. एक की नज़र राजा ठाकुर और परिधि पर पढ़ी तोह वह सबको बताने लगा.. सब भी राजा ठाकुर को देखने लगे. सब बिना भाव के राजा ठाकुर को देख रहे थे. न वह खुश दिखाई दे रहे थे, न hi दुःख या ग़ुस्से में.

राजा ठाकुर और परिधि भी वहीँ जा पोहंचे

राजा ठाकुर : कैसे आना हुआ करणवीर..??

राजा ठाकुर ने पूछे तोह करणवीर राजा ठाकुर को देखने लगे..

करणवीर : नहीं जनता मैं यहाँ पर क्यों आया हों. नहीं जनता मेरी यहाँ आने की वजा क्या बानी. नहीं जनता एकदुम्म से मेरा और सब का यहाँ आने का मैं कैसे बन गया.. मैं तोह यहाँ कभी आना hi नहीं चाहता था..

राजा ठाकुर बड़ा हैरान होक सबको देख रहा था. जितना वह हैरान था. परिधि भी उतनी हैरान थी. बिना किसी एक्सप्रेशन के सबके सब उसके सामने खड़े थे..

उसी समय पर राजा ठाकुर के दिगमग में मास्टर chi-fang बोल पड़े : कुछ देर में दक्ष बीटा पोहंच रहा है. ये सब खुद की मर्ज़ी से नहीं आये हाँ. सब दक्ष बेटे के द्वारा सम्मोहित हाँ. सबको यही कहीं बैठने का बोल दें. कुछ भी और कहने की ज़रूरत नहीं है. दक्ष बेटे का काम है. तोह वही आ कर इन्हे देख लेगा.

राजा ठाकुर : ठीक है मास्टर जी! जैसा आप कहें..

राजा ठाकुर ने सिक्योरिटी इंचार्ज को इशारे से पास बुलाया और सबके लिए वहीँ पेड़ों के निचे बैठने का इंतज़ार करने को बोल दिए..

राजा ठाकुर ने परिधि के कान में दक्ष के आने का बोल दिए.. सुनकर परिधि ख़ुशी से उछाल पड़ी.

इंचार्ज इंतेज़ाम में लग गया. उसे समय फिरसे हवेली का गेट खुला और 4 लैंड क्रूजर और अंदर आती हुई दिखीं. परिधि ने उन्हें देखा तोह हैरान हो गयी. ख़ुशी से चीखती हुई आगे वाली लैंड क्रूजर की और भागने लगी..

अब के आने वाला परिवार बुआ का परिवार था. परिधि वहां पोहंची तोह गाडी रुक चुकी थी. सब गाड़ी से बहार निकले तोह

परिधि बेपनाह ख़ुशी से चहकती हुई : व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज बुआ जनि..

बुआ : हाहाहा.. क्यों मेरा इतना ब्यूटीफुल फेस ख़राब कर रही हो. पता है, इसे चमकाने में कितना समय लगता है.

परिधि : ेहेहेहे! अब क्या ज़रूरत है आपको फेस चमकने की बुआ जानी.. इतने नमूने जान लिए हाँ आपने. किसी और की अब ज़रूरत hi क्या है अब..

बुआ हस्ते हुए : तू बड़ी चहक रही है परिधि.. कितने सालों बाद आज तुझे पहले जैसी देख रही हों. शुक्र है भगवन का. जो तेरा हस्ता मुस्कुराता चेहरे देखने को मिला..

परिधि : अब ये चेहरे हमेशा hi खिला रहेगा बुआ जानी..

देविका ; अरे भाई हमसे भी मिल लो. कितनी देर मेरी बाहें तुझे अपने अपनी लपेट में लेने के लिए बेक़रार हाँ.

परिधि नक् टेढ़ी करती हुई : jaao..jaao.. बड़ी आई मेरे लिए बेक़रार होने वाली.. इतनी hi फ़िक्र होती तोह जल्दी मिलने न आ जाती.

देविका आगे बढ़ कर परिधि के गले लग कर उसके गाल को चूमती हुई : अब आ गई हों तोह जितना ग़ुस्सा करना है कर लो. तू तो जानती hi है. पढाई में समय hi नहीं मिल पता मुझे तोह.

परिधि : हाँ पता है.. सब पता है. तू दुन्या की सबसे ज़हीन लड़की है. एक दिन भी पढाई मिस करि तोह तेरी ज़हानत को जंग लग जाएगा..

उर्वशी हस्ते हुए : जंग लगे न लगे. मोबाइल पर चाट के लिए समय पूरा मिलना चाहिए..

परिधि : क्या..?? ये चाट में बिजी रहती है. ऐसा है तोह फिर तोह इसकी खैर नहीं. मुझे कभी संस क्यों नहीं किया मुझे.

देविका : ऐसे hi झूट बोल रही है.. ये तोह मेरे अच्छे नंबरो से जेएलओसी फील करती है. इसे लगता है मैं चाट करती हों. अरे बाबा चाट के लिए मेरे पास फुर्सत hi कहाँ है.

उर्वशी फिर अक्षरा भी परिधि से मिली.. सब मिलकर बहुत खुश हुए.. कुणाल बुआ का बीटा भी आया हुआ था. वह भी परिधि से मिला

कुणाल : राज़ क्या है. भैया के जाने के तो तुम बहुत साद हो गई थी. अब कैसे इतनी खुश दिख रही हो.

परिधि झूमते हुए : कुछ hi देर में भाई आ रहे हाँ.

सब : kyaaaaaaaaaa..??

बुआ पागल सी होकर परिधि की कलाई थाम गयी. जोश से पकड़ कुछ ज़यादा hi मज़बूत हो गई थी बुआ की. सबके चेहरों पर भी कुछ ऐसे hi भाव थे..

दक्ष के जाने के बाद अपनी लाइफ में मस्त हो गए थे. दक्ष से नफरत करने वळून में ये सब शामिल नहीं थे. ये उस समय यहाँ पर मौजूद नहीं थे. जो सुना था, उसे सुनकर हैरान परेशां ज़रूर हुए थे. दक्ष के लिए दुखी भी थे और ग़ुस्से में भी.

बुआ : कक.. क्या तुम सब कह रही हो परिधि.?

परिधि : हाँ बुआ जनि! मैं सच कह रही हों.

बुआ : क्या उसने अपने आने की खबर दी है.?

परिधि : ऐसा hi समझ लें बुआ.. कुछ देर में भाई पोहच रहे हाँ.

हवेली के अंदर भी सब जान गए थे. दादी, रोहिणी सिंह और पायल सिंह भी वहीँ आने लगी.. अर्जुन सिंह और अविराज को भी खबर मिल गयी थी. वह भी वहीँ पोहचने लगे..

विक्रम सिंह और परची ऊपर खिड़की में खड़े हुए सबको देख रहे थे.. सोच रहे थे. कभी हम भी ऐसे सबसे मिला करते थे.

जहाँ वह हैरान थे. वहीँ पेड़ों के निचे बेथुन हुओं को देख कर बहुत ज़यादा चिंतित भी थे..


{:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::}


मैं सब जान प् रहा था. हवेली के अंदर कोण कोण पोहंच चूका है. कोण कोण किस हाल में है. को क्या सोच रहा है. मैं सब साथ साथ जान रहा था.

सच कहूं तोह मेरे दिल की धड़कन कुछ फ़ास्ट हो गयी थी. सबसे मिलने की बेकरारी तोह नहीं थी. फिर भी हवेली मेरा जनम स्थान था. बरसों बाद लौट रहा था. तोह दिल की हालत का ऐसा होना बनता था.

षिमुना मेरी हालत देख कर सीरियस हो गयी थी. मैंने अपनी आँखों पर चश्मा सजा लिया था. ऑटोमैटिक मैं कुछ सीरियस भी हो गया था.

हवेली के गेट के सामने में जा पोहंचा.. गेट पर खड़े हुए गेटकीपर और गॉर्डस के दिमाग में मैं पहले hi पोहंच चूका था.

फ़ौरन hi गेट खोल दिया गया.. मैं गाडी अंदर घुसता चला गया. मेरे पीछे पीछे षिमुना भी हवेली में एंटर होने लगी.

ऋचा की हालत पतली थी. तोह रुपाली बहुत ज़यादा बेचैन हो उठी थी. वह बहार अपने परिवार को देखने लगी. जैसे hi रुपाली की नज़र अपने खंडन पर पड़ी तोह वह चीख पड़ी..

रुपाली : nnn..nahi..nahi..ye सही नहीं हुआ.. yy..yee..in..sab..ko..yahan..nahi..hona chahiye..tha..

सब हमें देखने लगे.. maa,papa,bhai, दादा, दादी और परिधि के साथ साथ बुआ कर परिवार भी हमें देखने लगा.. सबसे हटके हालत परिधि की थी. मेरे लिए उसके दिल की धड़कने भी बढ़ी हुई थी.

मुझे बदले हुए फेस के साथ फ्रंट सीट पर देखा तोह पहचान नहीं पाई.

मैं गाडी कुछ पीछे hi रोक कर बहार निकल पड़ा.. षिमुना भी गाडी के अंदर से निकल पद बोनट से लग कर कड़ी हो गयी.

साली ऐसे कड़ी हो गई थी. जैसे वह यहाँ पर तमाशा देखने आई हो.. हवेली पर मौजूद सभी महिलाओं से बढ़कर हसीं थी षिमुना.. उसका कातिलाना हुसैन क़यामत ख़ेज़ था.. सब उसे भी देखने लगे.. बुआ की बेटियां तोह उसे देख कर मोह hi खोल गई थी..

ऋचा और रुपाली भी कांपते बदन के साथ गाडी से बहार आने लगी..

परिधि मुझे न देख कर गाडी के अंदर देखने लगी.. अपने भाई के लिए वह बहुत बेचैन थी.. बाकि सब मुझे, ऋचा को और रुपाली को हिअर्ट से देखने लगे.. तोह कभी षिमुना को..

मैंने एक नज़र मुद कर षिमुना को देखा. फिर

मैं बारी बारी सबको देखने लगा.. सबसे पहले मैं राजा ठाकुर को देखा.. हवेली के पास आते hi मैंने चश्मा आँखों पर सजा लिया था. वही चश्मा उतार कर मैं राजा ठाकुर को देखने लगा.. जैसे hi मेरी आँखों में उन्हों ने ग़ौर से देखा. उनके चेहरे के भाव बदलने लगे.. उनका सर झुकता चला गया.. उनके साथ hi दादी थी.. दादी मुझे हैरानगी से देख रही थी. वह मुझे नहीं पहचान सकीय थी.

साथ कड़ी थी परिधि.. वह भी अब मुझे, ख़ास कर मेरी आँखों में देख रही थी. वह मुझे पहचानने की कोशिश करने लगी. उसका दिल बोल रहा था. उसका भाई hi उसके सामने खड़ा है. पर मेरा बदला फेस उसे उलझाए हुए था.

मैं उसे देख कर स्माइल कर गया.

परिधि के चेहरे के भाव भी बदल गए.. मैं जितना भी बदल गया था. मेरे स्माइल करने का अंदाज़ नहीं बदल सकता था. परिधि अपनी अटल पथल साँसों पर काबू पाते हुए मुझे देखने लगी. अपने होंटो भी काट रही थी. वह अभी तक कश्मकश में थी..

मैंने माँ, पापा को देखा.. माँ भी मुझे घोर से देख रही थी. वह भी मुझे देख कर कुछ कंफ्यूज थी.. वह नै जान पायी थी. मैं आज लौट रहा हों..

पायल दीदी भी मुझे देख रही थी. जितना मैंने पायल दीदी के साथ समय बिताया था. उतना अलका के साथ भी नहीं बिताया था.. घर के किसी फारद के साथ भी नहीं बिताया था..

मेरी मुस्कान पर वह सबसे पहले मुझे पहचान गयी. फोरि तौर पर वह मेरे साथ हुए बर्ताव को भूल कर मेरे लिए जोश से भरने लगी.. वह होल होल कांपने लगी थी. उनके चेहरे पर भाव बदल बदल कर आने लगे..

मैं ऐसे hi तोह नहीं पायल दीदी को अपने लिए स्पेशल मन करता था.. वह सच में स्पेशल थी. मेरी एक एक बात, एक एक मूवमेंट पर हमेशा hi उनका धयान रहा करता था. बस उस दिन सब भूल गई थी. किसी बात पर धयान नहीं दे पाई थी.. उनकी मोहब्बत पर, अकाल पर पर्दा पद गया था. दिल के प्यार और विश्वास वाले एरिया पर जैसे लॉक लग गया था.

पायल दी मुझे पहचान गई थी. फिर धीरे धीरे जैसे उन्हें सब याद आने लगा वह खुद पर काबू पाने लगी. उनके चेहरे पर मेरे लिए नफरत नहीं आई थी. पर ग़ुस्सा ज़रूर आने लगा था. मेरे लिए जो कभी मोहब्बत उनके दिल में हुआ करती थी. वह भी नज़र आने लगी.

बुआ, कुणाल भाई, तीनो बहनो को देख कर मैंने फिरसे परिधि को देखा और अपनी बहन पहला दीं..

दक्ष : सिर्फ चेहरा hi बदला है. अंदाज़ और आवाज़ तोह वही है नाआ..

बस फिर क्या था.....

भाआआई....

परिधि चीख पड़ी... सब जैसे होश में आ गए.. सब सुन और जान कर झटके खाने लगे..

परिधि चीखती हुई भाग कर मेरी और बढ़ने लगी. मेरी ऑंखें एक बार के लिए नाम हो चुकी थी.. कुछ hi पालो में परिधि आ कर मेरी बहन में समां गयी और फूट फूट कर रोने लगी..

जहाँ सब बहुत ज़यादा हैरान थे. वहीँ राजा ठाकुर सर झुका कर खड़े थे.. मैं उनके दिमाग में नहीं गया. फिर भी मैं समझ गया वह अपनी पूरी लाइफ में इतना शर्मिंदा नहीं हुए थे. जितनी शर्मिंदगी का सामना उन्हें आज करना पद रहा था.

परिधि मेरी बहन में समायी फूट फूट कर रोने लगी.. मैं उसे पाचकरते हुए उसकी पीठ सहलाने लगा..

बुआ, बुआ का बीटा, बेटियां सब भाग कर मेरे पास आ गए थे. बाकि कोई और मेरे पास नहीं आया था.. वह तोह हैरत से मुझे देख रहे थे. सोच भी नहीं सकते थे. मैं कभी लौट कर आऊँगा. वह भी बदले हुए चेहरे के साथ. ऋचा और रुपाली के साथ..

सब ये सोच कर भी हैरान थे.. ऋचा और रुपाली मेरे साथ कैसे आ सकती हाँ..

बुआ : मुझसे मिले बिना hi तुम चले गए थे दक्ष बीटा.. कितना गलत किया था तुमने..

मेरे अंदर का ज़हर इतनी जल्दी तोह काम होने से रहा.. परिधि को अपनी बहन में भरे हुए मैं बुआ से बोलै

दक्ष : क्या आप को मैं गलत नहीं लगा था. सच सच बताना..

बुआ नज़रें चुरा गयी..

मैंने कुणाल और बहनो से पूछा : क्या मेरे बारे में जान कर तुम सब भी मुझे बेकसूर समझे थे..

कुणाल : भाई मैं तोह उतना समझदार नहीं था. मुझे क्या पता..

कुणाल अपनी साइड बचने लगा..

परिधि : भाई इनसे कुछ मत कहें. ये सब गलत नहीं थे. बस कुछ समय के लिए इन्हे भी आप गलत लगे थे.. फिर सब मेरे जैसे hi आपको निर्दोष समझने लगे थे.

परिधि भीगी आँखों से रुंधी आवाज़ में बोली.. मैं उसके आंसू साफ़ करने लगा.

दक्ष : अच्छा हुआ बुआ आप और सब यहाँ पर नहीं थे. वर्ण आप भी मुझे खुल कर बुरा भला कहते.. आप सब के लिए और मेरे लिए अच्छा हुआ. मुझे कुछ तोह ऐसे मिले जो मुझे गलत नहीं समझे थे. कुछ तोह ऐसे होने चाहिए थे. जो मेरी और से मिलने वाली सजा से बच सकेंगे.

अंत में मैं माँ, पापा, भाई और पायल दी को देखते हुए बोलै.. तोह पायल दीदी अपने होंठ काटते हुए मुझे ग़ुस्से से देखने लगी. वह इतनी देर में सब याद कर बैठी थी. उसे अब भी मैं hi गलत लग रहा था.

मैंने पलट कर रुपाली और ऋचा को देखा.. वह कभी मुझे तोह कभी अपने परिवार को देख रही थी..

मैंने हवेली की और नज़र करि तोह परची 2ंद फ्लोर के एक कमरे की खिड़की में कड़ी हुई मुझे देख रही थी.. साथ कुछ फैसले पर चाचा विक्रम सिंह भी इधर hi देख रहे थे..

मेरी नज़रों को फॉलो करते हुए सब भी उधर देखने लगे.

मैं फिर बुआ और उनके बच्चू से मिला. सब से मैं नोर्मल्ली hi मिला.. एक परिधि से थी. जिसे मैं पुरे चाओ के साथ मिला था..

मैंने मुद कर षिमुना को देखा.. वह स्माइल करती हुई पास आने लगी.

षिमुना पास आई मेरी बहन से फिरसे लिपटी परिधि को खेंच कर अपने गले से लगा लिया..

हाहाहा... षिमुना का अंदाज़ ऐसा था. मैं देख कर है पड़ा... परिधि हैरान हुई तोह षिमुना भी परिधि के दोनों गाल चुम कर है पड़ी

षिमुना : बड़ी ब्यूटीफुल कुड़ी है तू परिधि.. ummmmha..ummmmmha

परिधि कुछ शर्मा गयी. और षिमुना की बहन से निकलने लगी

षिमुना : दर मत. मैं भी लड़की hi हों. क्यों दक्ष.. ेहेहेहे!

दक्ष : हाहाहा.. सूरत से तोह दिखती हो. अब पता नहीं तुम सच लड़की हो भी क नहीं हो.

सब हसने लगे. परिधि भी हसने लगी.

दूसरे सब हमें हस्ते देख कर हैरान थे. मैं जब यहाँ से गया था तोह टूटा हुआ था. दुखी था. इस कदर दुखी था. कोई सोच भी नहीं सकता था. मैं फिरसे पहले जैसे भी बन सकता हों.

दक्ष : शिमि! जो पेड़ो के निचे बैठे हाँ. उन्हें यहीं लाने का इंतेज़ाम करो.

षिमुना : जी महाराज! जो आज्ञा आपकी. षिमुना सर झुका कर एक दासी के जैसे बोली.

रुपाली का परिवार सब मेरे ट्रांस से बहार आ चूका था. सब कुछ देर में वहीँ मौजद थे. सब रुपाली को, राजा ठाकुर को और सब को देख रहे थे.

मैंने षिमुना को देखा तोह वह स्माइल करती हुई अपनी गाड़ी की और बढ़ी और एक बैग अपने साथ ले आई.

दादी भी अब रुपाली के परिवार को देख कर बड़ी हैरान हो रही थी. दादी का मोह खुला हुआ था. वह शॉकिंग फेस के साथ सब को देख रही थी.

षिमुना मेरे पास आई और मुझसे बोली : बाकियो को भी बुलवा लेते इधर hi.

मैं समझ गया

दक्ष : परिधि, चाचा, परची और विनय को भी यहीं लाने का इंतेज़ाम करो.

अगले 10 मींचने में वह भी सबके बीच मौजूद थे. एक बार के बाद मैं फिरसे पायल दी या माँ, पापा, भाई और दादी को नहीं देखा था.

पायल दी जहाँ बहुत ग़ुस्से में आने लगी थी. वही माँ आंसू बहाने लगी थी. बड़ी जल्दी हालात बदल रहे थे. मुझे इतनी जल्दी हालत बदले हुए नहीं चाहिए थे.

विनय की हालत देख कर रुपाली चीखती हुई भाग पड़ी थी. विनय से लिपट कर विनय के ज़ख़्म देखने लगी थी.

ऋचा भी अपने भाई का हाल देख कर दुखी हो गई थी. परची का हाल भी बुरा था.

दक्ष : बुआ जानी! आप चाहें तोह अंदर जा सकती हाँ. यहाँ जो होने जा रहा है. वह आप देख नहीं सकेंगी.

बुआ : नहीं मैं यही रहूंगी. मैं अंदर नहीं जाऊँगी. जो भी होगा मेरे सामने hi होगा. मैं भी देखना चाहती हों तुम क्या करने वाले हो.

मैं कंधे उचका कर : जैसे आपकी मर्ज़ों. बाद में फिर मुझे ये न कहना. मैं कुछ ज़यादा कर रहा हों.

बुआ : नहीं कहूँगी.

षिमुना ने एक शॉटगन निकली और उसके कारतूस भरने लगी.. सब देख कर चौंक गए. राजा ठाकुर के लिए वहीँ एक चेयर ला के रख दी गई थी. वह वहीँ बैठे हुए सब देख रहे थे. हवेली के रखवाले दूर खड़े हुए सब देख रहे थे. आज का दिन उन सब के लिए भी बड़ा अजीब होने वाला था. पुराने गार्ड मुझे देख कर हैरान थे. तोह नए गार्ड्स दूसरों से मेरे बारे में पूछ रहे थे.

शॉटगन में कारतूस भर कर षिमुना ने शॉर्टगन मुझे थमा दी.. मैं शॉटगन को पकड़ कर पलट पलट कर देखने लगा.

फिर एकदुम्म से hi मैंने वह शॉटगन करणवीर की और कर दी.. वह खड़ा खड़ा काँप गया..

दक्ष : हाहाहाहा.. मैं ज़ोर ज़ोर से हसने लगा.. मैंने रुपाली को देखा तोह वह विनय को थामे मुझे hi देख रही थी. मुझे करणवीर को निशाना बनाते देखा तोह वह दरी नहीं थी.

करणवीर के परिवार के बारे में बता दूँ.

करणवीर के साथ उसकी पत्नी आई थी.

उसके तीन बेटे. तीन बहुएं.. 2 बेटियां, उनके पति और सभी के बच्चे आये हुए थे.

इस पुरे परिवार के 3 सदस्य यहाँ पर नहीं आये थे. वह यहाँ इंडिया में नहीं थे. उन्हें बाद में देख लेता मैं..

शॉटगन का रुख मैंने करणवीर के बेटे की और किया फिर रुपाली को देखा. वह फिर भी नहीं दरी.. बरी बरी मैंने करणवीर के दूसरे दोनों बेटों की और भी गन करि.. पर रुपाली मुझे दरी हुई नहीं दिखी..

फिर जैसे hi मैंने करणवीर की मंझली बहु की और शॉटगन करि तोह रुपाली के चेहरे पर मुझे दर दिखाई देने लगा..

दक्ष : HAHAHA....HAHAHA.. डर गयी.. HAHAHA..rupali तू डर गयी.. रीइचःहहआ चल आ मेरे पास.. आ और आ कर अपनी वफादारी सबत कर..

ऋचा डर्टी कनपटी मेरे पास आई.. मैंने सबके सामने hi ऋचा को पीछे से बहन में ले लिया.. उसके हाथ में शॉटगन देकर करणवीर की मंझली बहु के बेटे की और निशाना बांधने लगा.. साथ hi मैं ऋचा के गाल से अपना गाल भी रगड़ने लगा था.

अब मैं बेशरम तोह बन hi चूका था. कइयों ने मुझे रुपाली रंडी के साथ नंगा देखा था. तोह सबने मुझे रुपाली रंडी के साथ चुदाई करते सुना था. अब कैसे शर्म.

ऋचा सिसकने लगी थी. डर भी रही थी. सबके सामने अपने साथ हो रहे बर्ताव पर शर्म भी महसूस कर रही थी.

दक्ष : चल ऋचा! रख ऊँगली ट्रिगर पर और उदा अपने मां के बेटे का एक घुटना.

ऋचा : nn..nahi..nahi..bhai..plz..mujhse..ye..kaam..mat..karwao..

ऋचा रट हुए बोली..

दक्ष : सोच लो. तुम ऐसा नहीं करोगी तोह यही शॉटगन विनय का सर उड़ाएगी.

ऋचा काँप गई. उसकी आँखों से आंसू तोह बह hi रहे थे. वह अब कंपनी भी लगी थी.

मैंने फिरसे रुपाली को देखा तोह उसका चेहरा धुआं धुआं होने लगा था.

मैंने एक नज़र सबको देखा. राजा ठाकुर सुकून से बैठे हुए थे. वह मुझे तोह नहीं देख रहे.. ऋचा के साथ ऐसी हालत में वह मुझे कैसे देख सकते थे. वह तोह ऐसा करने वाले को सरे आम मार दिए करते थे. ऐसे hi उसूल वह बना कर बरसों जिए थे..

सरे उसूल अब रेज़ा रेज़ा हो रहे थे.

मैंने ऋचा के हाथ को घुमाया और विनय की और कर दिए.. ऋचा के साथ साथ परची, विनय और रुपाली चीख पड़े थे.

रुपाली : दक्ष! भूल कर भी ऐसा सोचना मैट.. वर्ण

दसख : HAHAHA...warna.. कुछ नहीं कर पायेगी तू.. तू तोह अब मेरी रंडी है.

माँ या पायल दी को मैंने अब भी नहीं देखा था. इग्नोर करना hi सही था.

दक्ष : बोल ऋचा! अपने भाई का सर उड़ाएगी या फिर अपने मां के बेटे का..

ऋचा कुछ नहीं बोल रही थी. वह कांपते हुए रो रही थी..

परिधि : भाई आप ऐसा क्यों कर रहे हो. मत करो न ऐसा प्ल्ज़.

मैंने परिधि को देखा तोह वह मेरी आँखों में देख कर षिमुआ के पीछे जा छुपी. ऐसा hi ज़हर मेरी आँखों में दिखाई दे रहा था.

बड़ी मुश्किल से मैं खुद पर काबू पाए हुए थे. न पता तोह अब तक यहाँ कई मरे पड़े होते. अब तोह मैं खून का खेल भी खेलने लगा था. अब मुझे खून बहा कर सोचने की आदत भी नहीं रही थी.

ऋचा का हाथ घुमा कर मैंने ऋचा के दिमाग को थोड़ा सा कण्ट्रोल में लिया और मंझले मां के बेटे के घुटने का निशाना लेकर गिरे कर दिए..

भयंकर आवाज़ आए.. और उसका घुटना hi नहीं उदा. उसकी आधी टांग उसके शरीर से अलग हो कर निचे गिर पड़ी थी. वह और उसके परिवार के सरे सदस्य बुरी तरह से चीखने लगे थे.. जिसकी आधी टांग उडी थी. वह तोह ऐसे चीखने लगा था. जैसे उसका गाला काटा जा रहा हो.

रुपाली भी विनय को छोड़ कर चीखती हुई भाग कर उसके पास जा पोहंची. रुपाली रोने लगी थी. करणवीर की मंझली बहु वह जैसे सदमे में हो गई थी..

मैंने अपने परिवार को देखा तोह वह सब शॉकेड खड़े देख रहे थे. किसी को यकीं hi नहीं आ रहा था. कुछ ऐसा भी देखने को मिल सकता है.

बुआ भी अब मुझे अजीब सी नज़रों से देखने लगी थी. मैं बुआ को मुस्कुरा कर देखने लगा.. ऋचा के हाथ से गन लेकर मैं उसे छोड़ दिए था. वह निचे घुटनो पर बैठी फूट फूट कर रोने लगी थी.

करणवीर : राजा ठाकुर! ये सब बहुत गलत हो रहा है. इसे बंद कर दीजिये.. वर्ण अच्छा नहीं होगा..

सब राजा ठाकुर को देखने लगे.. सब देखना चाहते थे राजा ठाकुर क्या बोलते हाँ.

राजा ठाकुर : मेरा समय ख़तम हो चूका है करणवीर. तुम क्यों आये हो. मैं नहीं जनता. दक्ष बेटे को तुम सब से क्या लेना देना है. मैं नहीं जनता. मैं बस एक hi बात जनता हों. मेरे पोते के अंदर मेरा hi खून है. वह जो भी करेगा. सही करेगा. वह कुछ भी कभी भी गलत नहीं कर सकता.. राजा ठाकुर का एक hi जानशीन है. वह है दक्ष ठाकुर.. उसे पूरा हक़ है हर किसम के फैसले लेने का.

सब राजा ठाकुर की बात सुनकर हैरान हो गए थे. माँ, पापा, भाई, पायल दी और सब बड़ी हैरानगी से राजा ठाकुर को देखने लगे. राजा ठाकुर फिरसे खामोश हो गए थे. वह मुझसे कुछ नहीं बोल रहे थे. उनकी ऑंखें बोल रही थी. वह मुझे कुछ भी कर जाने के लिए बोल रहे थे.

मैं चलता हुआ रुपाली के पास जा पोहंचा. और उसके बराबर बैठ कर मैं बोलै

दक्ष : अब दूसरे घुटने की बारी है. चल उठ और उदा इसका दूसरा घुटा.. फिर एक एक करके तुझे और भी कई घुटने उड़ने हाँ. नहीं उड़ाएगी तोह... तू सब समझती है....

hahaha..tu सब समझती है. तुझे कुछ भी समझने की ज़रूरत नहीं है. चल उठा और देर न कर. खेल काफी देर तक चलने वाला है. समय काम है. और खेल बहुत लम्बा..

रुपाली को उठा कर मैंने खड़ा कर दिए. फिर उसके हाथ में शॉटगन थमा दी..

दक्ष : चल उदा दूसरा घुटना भी..

रुपाली हाथ में शॉटगन लिए कभी मुझे तोह कभी शॉटगन को देखने लगी. उसकी आँखों में आंसू भी थे और मेरे लिए बेपनाह नफरत भी.

रुपाली ने शॉटगन अपने भाई के बेटे के दूसरे घुटन की और करि तोह मंझली बहु बोल पड़ी.

"दीदी प्ल्ज़ ऐसा मत करो. मेरे बेटे के साथ ऐसा ज़ुल्म मत करो. दीदी ye..ye..ye..

दक्ष : हाहाहा.. बोल न आगे.. ये.. ये.. ये क्या रही है.. हाहाहा.. तू नहीं बोलेगी.. नहीं बोलेगी तोह मैं बुलवा लूंगा. चल रुपाली रंडी उदा दूसरा घुटना..

रुपाली नागिन थी साली. इतनी जल्दी हार कैसे मान सकती थी. अपने भतीजे के दूसरे घुटने की और करि शॉटगन एकदुम्म से राजा ठाकुर की और करते हुए फायर कर गयी..




.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::



 
नफरत तो बढ़ेगी hi कोमल के दिल में रपो वळून के liye...uski ज़िन्दगी के इतने कीमती साल जो वास्ते कर दिए रपो वळून ने.. उसे उसकी देश सेवा से हटा कर अपना घुलम बना लिया था. कैसे सहन करती.

ये तोह है. अलका की नयी लाइफ हुई है. उसे भी मकसद मिला है. और माला के कारण उसके अंदर बदलाव भी आ रहे हाँ. माला से जुडी शक्त्यियाँ उसे खुद hi सब बताती चली जाएँगी

थैंक्स ा लोट भाई. साथ बने रहे ✨
 
:लाफिंग:

अलका ट्रैंनिंग ले रही थी... वहां के इंस्टक्टर्स भी उसे बहुत सराह रहे थे. अब अलका ठहरी एक आम लड़की.. उसकी प्रोग्रेस अच्छी ज़रूर गई थी. पर उसे बांस पर ज़यादा चढ़ाया जा रहा था. और ऐसा सभी इंस्ट्रक्टर्स करते हैं

जैसी सिचुएशन में वह फँसी थी. वह उसके लिए नई थी.. इसलिए घबरा गई... :अफ्रेड:

वर्ण तोह एक मरीन लाइफ जीने वाला डीके... खुद को खतरों में डालने वाला डीके भी मास्टर शूं ली की पहली परीक्षा के आगे फ़ैल हो गया था.. सब इतनी जल्दी माहिर नहीं हो जाते.. और फिर दूसरों का भी तोह काम बता है. नताशा को अलका से मिलाने के लिए भी नियति ने ऐसा खेल खेलना था.


नताशा अपना गुज़रा समय याद कर खून के आंसू रोइ.. रोना hi चाहिए था उसे.. कहाँ उसने ऐसा सब सोचा था. कहाँ उसे ऐसी लाइफ जेने को मिलने वाली थी. कहाँ उसने सोचा था. उसके लिए इतने रोने वाले भी मौजूद हाँ.

बहुत बहुत शुक्रिया ज़ोरो भाई.. ♥️♥️
 
अलका अपनी पहली की लाइफ को भूल कर नयी मिल चुकी लाइफ में मगन हो गई है. उसे देश सेवा का मौका मिला है तोह जान कर खुश हो गई है

होने को ये भी होना मस्त है.

रपो वाले भी काम फ़ास्ट नहीं हाँ. वो भी पूरी जान लड़ा कर मार्गरेट को ढूंढ रहे हाँ..

मस्ती ज़रूरी थी.. जब मस्ती बढ़ जाए तोह कुछ और अनएक्सपेक्टेड देखने सुनंने को मिलता है. जितनी मस्ती जारी है. बाद में कुछ हैरत अंगेज़ चंगेस ज़रूर आएगा

हम्म्म ये तो सच में देखने वाला सन होगा.. दक्ष का हवेली पोहंचा और फिर उसका काण्ड.. सब देखने लायक होगा.

बहुत बहुत शुक्रिया भाई ♥️♥️
 
हाहाहा..

ये उनकी हाईएस्ट लेवल की ट्रैंनिंग थी या नहीं..

पर किसी को भी अपने अंडर करने के लिए मीठा बोलने के साथ साथ बांस पर भी चढ़ाना पड़ता है. ता की वह हमेशा साथ बना रहे.. घुलम होक भी वह समझे.. वह अपनी मर्ज़ी की लाइफ जी रहा है.. कुछ दिनों में अलका स्ट्रांग तोह बन सकती है. पर एक सुपर एजेंट नहीं बन सकती..
 




Episode:41


मैं टेलिपाथी न जनता होता तोह जो सीक्रेट्स रुपाली या उसके असली परिवार के दिमागों में मौजूद थे, वह कभी नहीं जान सकता था. कुछ ऐसा hi प्लान बनाया गया था. जो दिमाग को पहाड़ कर रख दे.

ऐसे ऐसे खेल खेले गए थे. मैं भी रुपाली के दिमाग में घुस कर सब जान कर चक्र गया था.. ऐसी अजीब दास्ताँ जान्ने को मिली थी. मैं hi क्या, कोई भी जान जाने के बाद चक्र कर रह जाता.

रुपाली इस कहानी के एक मुख्य करैक्टर (राजा ठाकुर) को ठिकाने लगाने के लिए अपने भतीजे के घुटने को उड़ने की बजाये राजा ठाकुर की और शॉटगन कर रुख करके ट्रिगर दबा गयी थी.

रुपाली रंडी hi नहीं थी. वह बहुत बढ़िया निशाने बाज़ भी थी. वह hi नहीं उसके परिवार के कुछ और मेंबर्स भी बेस्ट निशेबाज़ थे..

पर रुपाली छह कर भी ऐसा कर नहीं सकती थी. रुपाली ने ट्रिगर दबाया ज़रूर था. पर वह केवल अपने दिमाग में hi सोच के ऐसा कर सकीय थी. उसका दिमाग तोह मेरे कण्ट्रोल में था. वह छह कर भी ट्रिगर दबा नहीं पायी थी. वह छह कर भी शॉटगन से फायर करके राजा ठाकुर का सर उदा नहीं पायी थी. मैं ऐसा कैसे होने दे सकता था. मेरे रहते कोई कैसे मेरे परिवार की और आंख उठा कर देख सकता था. कैसे कोई मेरे परिवार के किसी सदस्य को शूट कर सकता था. सामने तोह फिर भी हमारे पुरे खंडन के सबसे बड़े मेंबर थे. सबसे महान इंसान थे. एक गलती के शिव कभी कोई और गलती नहीं करि थी राजा ठाकुर ने. राजा ठाकुर अगर कसूर वॉर थे तोह मेरे थे. उन्हें सजा दे सकता था तोह मैं दे सकता था. रुपाली या कोई और कैसे उन्हें कोई घाव दे सकता था. मैं ऐसा सोचने वाले का वजूद hi हज़ारों टुकड़ो में न बदल कर रख देता..

सब के सब रुपाली को राजा ठाकुर की और शॉटगन का रुख करते देख कर चीख पड़े थे. फायर नहीं हुआ तोह सब को चैन की सांस आई थी.

मैं ज़ोर ज़ोर से हसने लगा..

hahahahahaha...hahahahahaha..

दक्ष : कहा था तुझसे रुपाली रंडी.. कहा था न तुझसे, मैं अफ्रीका से काला जादू सीख के आया हों. तू कुछ भी अपनी मर्ज़ी से नहीं कर सकती. तू चाहे तोह अपनी जगा से हिल भी नहीं सकती..

रुपाली पुरे ज़ोर, पुरे जोश के साथ शॉटगन राजा ठाकुर की और किये ट्रिगर दबाने की कोशिश कर रही थी. पर वह ऐसा कर नहीं सकती थी. उसके पास समय था. जब मई बोल रहा था. मुझे उसके दिमाग से निकलना पड़ा था. तब वह राजा ठाकुर को शूट कर सकती थी. पर मेरी बात सुनने के चक्कर में वह ये भूल गई थी.

वह कुछ जानती भी तोह नहीं थी.

लम्हो का खेल हुआ करता है. फैसले भी लम्हो में लिए जाते हाँ. लम्हों में hi बाज़ी को पलटना पड़ता था.. जैसे पहले मुझसे रपे का आरोप लगा था तोह लम्हो में hi सब बदल कर रह गया था. सब मेरे खिलाफ हो गए. रुपाली बहुत बड़ी बाज़ी जीत गयी थी.

अब वही खेल मैं खेल रहा था. अब लम्हों पर मेरी पकड़ थी. कैसे कोई समझ सकता था. मेरे से बढ़ कर कोई खिलाडी भला कैसे हो सकता था.. अभी तो मैं नया था इस खेल के मैदान में. फिर भी बहुत बढ़िया परफॉरमेंस दे रहा था.

मैं चलता हुआ रुपाली के सामने जा पोहंचा और उसके हाथ से शॉटगन लेके षिमुना की और फ़ेंक दी. फिर खेंच के एक थप्पड़ रुपाली के गाल पर जड़ दिए.

रुपाली चीखते हुए दूर जा गिरी.. उसके मोह से खून निकलने लगा. थप्पड़ था भी बड़ी पावर का.. पूरा पंजा रुपाली के मोह पर छाप गया था.

विक्रम चाचा वहीँ खड़े हुए सब देख रहे थे. विनय भी अब कुछ नहीं बोल रहा था. उसके साथ पायल दी ने जो कर दिए था. वह उसके लिए बहुत था. वह पहले hi मार खा के डरा हुआ था. अब और भी दर गया था.

रुपाली को सर के बालों से पकड़ कर मैंने फिरसे उठाया और उससे बोलै

रुपाली : तूने क्या समझा था. जो खेल तू और तेरा परिवार खेल रहा है. तू या तेरा परिवार सफल हो जायेगा. मेरे रहते ऐसा कैसे हो सकता है भला. राजा ठाकुर की सल्तनत ख़तम हुई तोह मैं ठाकुर दक्ष सिंह लौट आया. तुझे और तेरे परिवार को मौका मिल गया था राजा ठाकुर और मेरे सरे परिवार को मार देने का. पर तू और तेरा परिवार लालच में आ कर अलका के खानदानी ख़ज़ाने के चक्कर में पद गया.. अपना असली मकसद भूल गया.. लालच न करते तोह शायद तू और तेरा परिवार सफल भी हो जाता. पर तुमने देर कर दी. देर कर दी तुमने रुपाली सिंह..

रुपाली जल्द hi खुद पर काबू प् कर उठ कड़ी hui..wo भी अब बहुत ग़ुस्से में आ गई थी..

रुपाली : तेरा जो मैं करता है बोल ले दक्ष.. मेरा टाइम न पहले कभी ख़तम हुआ था. न कभी होगा. अब तेरी बारी है. तू खेल ख़तम करना चाहता है तोह मार दे मुझे. मार दे मेरे परिवार को. मार दे सबको.. तू बच सकता है, मुझे और मेरे परिवार को मार कर. तू बचा सकता है खुद को और अपने परिवार को मुझसे और मेरे परिवार से.. मार दे मुझे दक्ष.. जितनी जल्दी हो सकता है मार दे मेरे परिवार को दक्ष.. कोई एक भी बचा तोह तू नहीं बचेगा.. तेरे परिवार का भी कोई भी सदस्य नहीं बचेगा.. मारे जाएंगे सब के सब. एक को भी ज़िंदा नहीं रहने दूंगी.

दक्ष : अब बोली है न तूने अपनी असली बात. अब दिखाया है न तूने अपना असली चेहरा..

मैं सबको देखने लगा. सब पागलों के जैसे मुझे और रुपाली को देख रहे थे. उन्हें कुछ समझ तोह नहीं आया था. बस इतना hi समझ में आया था रुपाली गड़बड़ है. रुपाली से जुड़े हाँ बहुत से राज़. कुछ तोह ऐसा है, जिससे वह अनजान हाँ. कुछ तोह ऐसा भयंकर है, जो सामने आया तोह नजाने क्या कुछः हो जाएगा.

राजा ठाकुर भी हैरान होक रुपाली को देख रहे थे. कोई मुझसे कुछ भी नहीं पूछ रहा था. सब मोह खोले देख रहे थे.

मैं षिमुना को देखा तोह उसने फिरसे वह शॉटगन मेरी और फ़ेंक दी.. मैंने कैच करि. फिरसे उसके अंदर कारतूस भरे और रुपाली को देखने लगा.

दक्ष : अब तुझे मैं अपना निशाना दिखाओ. रुपाली के चेहरे पर फिरसे मुझे दर दिखा. पर मेरे लिए नफरत की इन्तहा भी उसके अंदर आ गई थी. वह मुझे ग़ुस्से देखने लगी.

रुपाली : आज तेरा टाइम आ गया है दक्ष तोह जो तेरा मैं कर रहा है तू करेगा. कर ले, जो तू करना चाहता है, करले. मैं छह कर भी तुझे रोक नहीं सकुंगी.. न चाहते हुए भी मुझे अपनी ज़िन्दगी के सबसे बड़े दर्द से गुज़ारना पड़ेगा. मेरा खेल शरू होने से पहले hi तूने अपना खेल खेलना शुरू कर दिए. उठा ले इस मोके का फायदा. मैं ज़िंदा रही और मुझे मौका मिला तोह मैं भी मौका का पूरा पूरा फायदा उठाऊँगी.. और ऐसा फायदा उठाऊँगी. तू तड़पेगा, मेरे पैरों पर सर रगड़ रगड़ कर रोयेगा. पर उस समय मुझे भी तुझपर दया नहीं आएगी. आ भी नहीं सकती. दया न मेरे अंदर रत्ती बराबर है और न hi मेरे परिवार के किसी सदस्य के अंदर. तू ज़रूर अपने काले जादू से सब जान गया होगा. अगर जान hi चूका है तोह खेल जा आज तू अपना खेल.. कर जा हर हद पार. बहा दे मेरे पायरो का खून. खेल ले उनके खून से खून की होली.

रुपाली अपनी मुट्ठियां भींचती हुई मुझसे बोल रही थी. सच में रुपाली एक नागिन दिख रही थी. एक ऐसी नागिन जिसे एक भी मौका मिलता तोह अपने ज़हर से पल भर में hi मुझे या सब को दस लेती. और जितना ज़हर उसके अंदर भरा हुआ था. उतने ज़हर के दस से कोई पानी भी न मांग सकता. दूसरा सांस भी न ले सकता.

जिस लड़के का मैंने ऋचा के हथु घंटा उदय था. उसी के सर का निशाना लेकर मैंने ट्रिगर दबा दिए..

भयंकर आवाज़ हुई फायर की और लड़के का सर उड़ गया..

रुपाली भी भयंकर चीखते हुए निचे गिर पड़ी.. और अपने सर ज़मीन पर मारने लगी. रुपाली ऐसे चीख रही थी. जैसे वह पागल हो गयी हो. जैसे उसे उसकी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा दर्द सहन करना पद रहा हो.

ऐसा hi दर्द उस लड़के के माँ बाप को भी हुआ.. वह भी दर्द से चीखते हुए दहाड़ें मार मार कर रोने लगे. लड़के की माँ और रुपाली का चीखना सबसे भयंकर था..

उस लड़के का एक और भाई भी था. वह उससे बड़ा था. मैंने उसका सर भी उदा दिए. फिरसे कारतूस भरे और रुपाली के बराबर जा बैठा..

आस पास ऐसा सन्नाटा छाया था. जैसे दुन्या में इंसानो का नाम ो निशान hi मिट चूका हो.. बस रोने वळून की आवाज़ें hi सुनाई दे रही थी. उसके शिव जो थे. वह सब सांस तक लेना भूल गए थे..

राजा ठाकुर के चेहरे पर भी मुझे दहशत के भाव नज़र आये.. हाहाहा मेरी दरिंदगी देख कर वह भी दहशत में आ गए थे. ऐसा लाइव सन पहले कभी देखा नहीं था न.. इसलिए...

मैं रुपाली को रोटा छोड़ कर उठ खड़ा हुआ...

दक्ष : करणवीर.. मैंने अपने दादा के भाई को उनके नाम से बोलै.

वह भी आँखों में आंसू लिए हुए थे. वह भी हलकी आवाज़ में रो रहे थे. उनकी पत्नी का भी कुछ ऐसा hi सन था.. वह भी खून के आंसू रो रही थी. करणवीर के परिवार के सब रो रहे थे.

दक्ष : करणवीर किसके लिए आंसू बहा रहे हो आप. आप हमेशा से बेवक़ूफ़ थे. बेवक़ूफ़ हाँ और रहेंगे.. सुना आपने, आप सदा से स्टुपिड थे. किसी की बातों में आ कर आपने अपने hi भाई को छोड़ दिए था. शान ो शौकत की ज़िन्दगी को छोड़ दिए था. अपने hi परिवार की दौलत को ठुकरा दिए था. अपने hi खंडन से दुश्मनी पाल बैठे थे आप.. सुना आपने ठाकुर करणवीर सिंह.. जिसे आप अपना परिवार समझ रहे हाँ. वह आपका परिवार नहीं है.. सुना आपने... वह आपका परिवार नहीं है.. नहीं है कोई भी आपका अपना. न बीटा न बेटी. न पोता न पोती.. कोई भी आपका खून नहीं है.

मेरी बात करणवीर के साथ साथ सबके सब सन्नाटे में आ गए..

करणवीर ग़ुस्से में आ गए वह मेरी ये बात बर्दाश्त नहीं कर पाया था : ये क्या नयी बकवास शुरू कर दी है तुमने. मेरे दो पोतों को मार कर भी तुम ऐसे घिनोने घाव दे रहे हो मुझे.. शर्म से डूब मारो.

मैंने राजा ठाकुर को देखा.. वह भी हरित के समंदरों में होते खा रहे थे.

किस किस को मैं देखता.. जिसे भी देखता सबका यही हाल था.. मेरी माँ और पायल सिंह ज़रूर अंदर से पूरी तरह से हिल गई थी.

दक्ष : रुपाली किसकी बेटी है.?

करणवीर : ये क्या बकवास है. रुपाली मेरी hi बेटी है.

दक्ष : और आपकी मंझली बहु.

करणवीर : वह मेरे दोस्त की बेटी है.

दक्ष : हाहाहा! कहा था न. आप सदा से बेवक़ूफ़ रहे हाँ. आप कभी कुछ समझ hi नहीं सके. जैसे जैसे आपको सब बताया जाता था. आप वैसे hi मान जाया करते थे.

करणवीर ग़ुस्से से : कहना क्या चाहते हो तुम.

दक्ष : गोवर्दान को जानते हाँ आप.

मेरी बात पर करणवीर hi नहीं राजा ठाकुर भी अचंबित हो गए.

करणवीर : go..go..govardhan.. wo..wo..uska इस सब से क्या लेना देना है.

करणवीर की पत्नी जो उनके साथ hi कड़ी थी.. उनका नाम रेखा था.

दक्ष : शकुंतला कोण है.?

करणवीर भी अब उलझने लगा था. वह मेरी बातों का जवाब फ़ौरन hi देने लगा था.

करणवीर : मेरी दूसरी पत्नी.

दक्ष : रुपाली उसकी बेटी है न.

करणवीर हैरान होक : हाँ. पर तुझे कैसे पता. ये बात तोह बहुत काम लोग जानते हाँ.

दक्ष : सोनाली आपकी मंझली बहु कोण है.?

करणवीर : मेरे दोस्त की बेटी.

दक्ष : हाहाहा.. ऐसा नहीं है करणवीर.. रुपाली और सोनाली दोनों सगी बहने हाँ. दोनों का एक hi बाप है. वह है गोवर्धन.

करणवीर : yy..ye क्या बकवास है. मेरा गोवर्धन से कोई लेना देना नहीं है. मैं उससे कभी मिला भी नहीं. बरसों पहले से hi मैंने उसे छोड़ दिए था..

दक्ष : हाहाहा.. यही तोह वह खेल है. जो तेरे साथ साथ राजा ठाकुर के साथ भी खेला गया था. न तू समझ सका. न hi राजा ठाकुर समझ सके. आपकी दूसरी पत्नी असल में गोवर्धन की रखेल थी. वह आपके साथ नहीं रहती थी. वह दूसरे गाओं में रहती थी. आप कभी कभी उससे मिलने जाया करते थे. वहां मज़े आप करते थे. पर वह मज़े नाम के थे. असल में सरे मज़े गोवर्धन किया करता था. शकुंतला उसके साथ मिली हुई थी. कभी आपके साथ नहीं रही वह. जानते हाँ आप. इसलिए कह कहीं खेल बिगड़ न जाए. और आपकी पहली पत्नी रेखा..

मैंने रेखा को देखा तोह वह अब कंपनी लगी थी. शर्म से उसका सर झुका हुआ था..

दक्ष : इससे पूछें कोई भी बच्चा आपके बीज से उसकी कोख में पला था. नहीं. कोई भी नहीं. आप मर्द होते हुए भी बच्चे पैदा नहीं कर सकते थे. या ऐसा कह लें, गोवर्धन ने ऐसा होने hi नहीं दिए था. वह राजा ठाकुर के साथ साथ आपका भी दुश्मन था. वह आपके साथ खेलता रहा.. पैसा आप कमाते रहे, खता वह रहा. आपके शिव इस बात को सब जानते हाँ. सब के सब गोवर्धन की मुठी में हाँ. रुपाली को भी प्लान से तेरे पास रहने को भेजा गया था. रुपाली बहुत तेज़ थी. बहुत चालक थी. रुपाली ने वह वह काम किये हाँ. जिसे जान कर आप सदा खुश होते रहे.. पर असली ख़ुशी गोवर्धन को मिलती थी. आप तोह फोकर में hi खुश हुआ करते थे. हाहाहा

करणवीर चक्र कर गिरने वाला था. पर कैसे भी करके उसने खुद को संभल लिया था..

मैंने शॉटगन से एक और फायर किया.. इस बार का फायर ऊपर आस्मां की और करके किया था.

दक्ष : गोवर्धन ने कैसी कैसी गेम खेली, कोई जान hi नहीं सका. पल पल वह अपने मोहरे बदलता रहा. सब को अपने इशारों पर नाचता रहा. जो मोहरा उसे ख़ास लगा, उसे उसने आगे बढ़ा दिए. यहाँ मौजूद लोगों में सिर्फ एक रुपाली hi सबसे खास है. और रुपाली के लिए कई ख़ास.. गोवर्धन के पास आपकी साडी प्रॉपर्टी के पेपर्स मौजूद हाँ. राजा ठाकुर की जितनी भी दौलत आपने रुपाली द्वारा, विक्रम सिंह द्वारा हासिल की है. वह सब आपके नाम पर केवल दिखावा है. असल में उस साड़ी परोपेर्टी का मालिक है गोवर्धन..

और गोवर्धन के पास इतना पैसा है. जितना कभी राजा ठाकुर के पास भी नहीं स्टॉक हो पाया था. वह अपना पैसा शो नहीं करवा पाया था. डरता था राजा ठाकुर की पावर से.. अब करवाएगा. अब राजा ठाकुर की पावर जा चुकी है. अब वह खुल कर सामने आएगा..

अलका की दौलत भी पा लेने का लालच उसके दिल में आ गया था. वह दौलत, वह खज़ाना उसे प्राप्त हो जाता तोह ज़रूर वह खुद को भगवन भी बोल देता. वह सब पर ईविल गॉड बनकर टूट पड़ता.. फिर कोई उसे रोक नहीं सकता था.. उसके ज़ुल्म से खुद को बचा नहीं सकता था.

ऐसा उसका सोचना था. और सोचने वाले कुछ भी सोच जाया करते हाँ.. पर होता वही है, जो मंज़ूरे खुदा होता है.

सब को जैसे सांप सूघ गया था.. सब के सब अभी भी बिना सांस लिए खड़े हुए थे. या सांस तोह ले रहे थे. पर साँसों की आवाज़ सांस लेने वळून को भी सुनाई नहीं दे रही थी.

रुपाली अब भी मुझे ग़ुस्से से देख रही थी. जिन जिनको मैंने मारा था. वह रुपाली के भतीजे नहीं, भांजे थे. मंझली बहु रुपाली की भाभी नहीं, उसकी सगी बेहेन थी..

साले गोवर्धन ने कैसा खेल खेला था. दिमाग की चलें hi हिल कर रह गयी थी. कितना लम्बा खेल खेला था उसने. करणवीर ये भी नहीं जान पाया, सोनाली भी शकुंतला की बेटी है. कितना बड़ा स्टुपिड था वह.

जितनी उम्र रुपाली की थी. उससे भी कुछ साल पहले से ये खेल खेलना उसने शुरू किया था. बड़ी ख़ामोशी से वह ये खेल खेल रहा था..

सब को साडी हक़ीक़त बता कर मैं षिमुना के पास जा पोहंचा. रुपाली की कलाई पकड़ी और उसे लेकर साथ चलने लगा.

अब बाकि का खेल राजा ठाकुर और करणवीर ठाकुर खुद से खेलते.. दोनों भाइयो के सामने मैंने हक़ीक़त खोल कर रख दी थी.

वह दोनों और बाकि सरे वहीँ खड़े हुए थे. सब के सब जैसे स्टेचू बने खड़े थे. मैं षिमुना और रुपाली को लिए हवेली के अंदर चला गया..

रुपाली वहीँ रहती तोह या तोह वह कुछ ऐसा कर जाती. जिससे उसकी जान चली जाती. या फिर कोई और उसे ग़ुस्से में आ कर मार देता..

कोई और मारता या न maarta..payal दी ज़रूर मार देती. और मैं ऐसा होने नहीं दे सकता था. पायल दी कैसे रुपाली को सजा दे सकती थी. अपने hi भाई पर विश्वास न करने की सजा तोह उसे भी मिलनी थी. रुपाली जैसी भी थी. एक नागिन थी. ज़हरीली नागिन थी.

पर जहाँ प्यार की इन्तहा हो, वहां तोह ज़हर भी बेअसर हो जाया करता था. कैसा प्यार था, उसका मेरे लिए. जो पल भर में hi बंद मुठी में रेट के जैसे फिसल गया था.

दूर को अंदर से लॉक करके मैं बीएड पर जा बैठा.. रुपाली वहीँ कड़ी आँखों में आंसू और आग लिए मुझे और षिमुना को देख रही थी.

षिमुना जो मुझे कातिल नज़रों से देखते हुए बीएड की और बढ़ रही थी..... षिमुना की मस्त चाल देख कर मेरा मूड खुद से अच्छा होने लगा. षिमुना की मस्त चाल जहाँ मेरे अंदर हलचल मचा गयी थी. वहीँ उसके होंटो की दिलफरेब मुस्कान मेरे दिल को भी रहत पोहंचा रही थी.. षिमुना बीएड पर आई और मेरे बराबर आ कर लेट गयी. एक हाथ मेरे सीने पर रख कर वह अपनी उँगलियाँ मेरे सीने पर चलने लगी..

सामने रुपाली की सूरत आग और ज़हर था.. तोह षिमुना एक महकते गुलिस्तां के जैसे

मेरी बहन में थी..


.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
 
जहाँ जहांन सम्राट होगा. कैसे किसी न कसी की बोलती बंद होगी..

करना hi था.. सम्राट का अब करम hi यही है.. दुष्टो का नाश करना.

अब परची या किसी और के लिए माफ़ी कैसी.. बाज़ी पलट जाने के बाद तोह सब hi सर झुका कर सॉरी बोल कर खुद को बचने की करते हाँ.

बहुत बहुत शुक्रिया भाई....🙏🙏

🙏🙏🙏

🙏🙏

अलका को भी उसकी लाइफ का असली मकसद मिल चूका है. वह भी अपनी नयी लाइफ से बहुत खुश है

🙏🙏

🙏🙏

🙏🙏

🙏🙏

🙏🙏

🙏🙏

थैंक्स फॉर लव & सपोर्टिंग... 🙏🙏🙏❤️❤️♥️♥️
 
Back
Top