Episode:39
नताशा का क्वीन के रूप में खुल कर सामने आया उसके लिए, उसके परिवार के लिए अच्छा नहीं हुआ था.
नताशा जान गयी. अब उसके परिवार के लिए खतरा बढ़ जायेगा. जबकि वह ऐसा नहीं चाहती थी. पर एक्सपीरियंस न होने के कारण वह गलती कर बैठी थी.
अब फिरसे कोई और गलती नहीं करना चाहती थी. पहले hi बरसों से अपने परिवार से दूर रही थी. साथ में संजना भी सबसे दूर हो गयी थी.. अब जैसे हालत बन चुके थे, वह अपने परिवार के किसी सदस्य को खोना नहीं चाहती थी.
क्वीन को पाने के लिए, अपने अंडर लेने के लिए दुश्मन कुछ भी कर जाते.. उसके किसी भी प्यारे को अपनी कस्टडी में लेके उसे मजबूर कर सकते थे..
जोश में आते हुए उसने एक गलत कदम उठा लिया था. अब कोई और गलत कदम नहीं उठाना चाहती थी.
रात हुई तोह नताशा क्वीन बनकर, इनविजिबल होकर पुरे एरिया को सर्च करने लगी. उसे पता चला, कई ऑर्ग के एजेंट्स और गुंडे उसके घर पर नज़र बनाये हुए हाँ.
मतलब....
एक बार फिरसे उसे कोई खोना नहीं चाहता था. ऑर्ग वाले नहीं चाहते नहीं चाहते थे. क्वीन न कहें तोह नताशा एक बार फिरसे उनकी नज़रों से ओझल हो सके. वह न सही तोह उसके परिवार का hi कोई सदस्य उनके कब्ज़े में आ जाये.. पहले शूज वाला मटर था तोह अब इंविसिबिलिटी के चलते सब उसके पीछे पद गए थे.. शूज द्वारा क्वीन उड़ सकती थी. तोह इंविसिबिलिटी उसने कैसे प्राप्त करि.. सबके लिए ये बात सबसे बड़ी वैल्यू रखती थी.
मतलब उड़ने से भी ख़ास चीज थी. किसी को दिखाई न देना..
नताशा के लिए बड़ी आज़माइश कड़ी हो गयी थी.. अपने परिवार को बचने के लिए उसे बड़ी म्हणत की ज़रूरत थी..
यहाँ बदली सिचुएशन देख कर वह कुछ घबरा भी गई थी. सब सोचते हुए उसे पसीना आने लगा था.
एक गलती.......
उसके परिवार का कोई न कोई सदस्य या तोह मारा जा सकता था. या फिर दुश्मनो के कब्ज़े में जा सकता था. अब दुश्मन इतने थे तोह सबको जान पाना मुमकिन भी नहीं था..
बड़ी हिम्मत के साथ क्वीन ने अपनी फीलिंग्स पर काबू पाया और पुरे एरिया को सर्च करके वहां मौजूद गैंगस्टर्स को ख़ामोशी के साथ ख़तम करने लगी.. बड़ी सावधानी बारात रही थी क्वीन..
एक घटने में hi वह आस पास के सभी गुंडों को ख़तम कर चुकी थी. फिर वहां से कक्तव कामर्स को भी तोड़ फोड़ कर वह कई गाड़ियों में अपने परिवार को साथ लिए वहां से निकल पड़ी..
जब कक्तव पर क्वीन का हमला हुआ तोह क्वीन दिखाई नहीं दे रही थी.. ऐसे समय पर उन कामर्स द्वारा नज़र रखे हुए ऑर्ग और गैंगस्टर्स वाले हड़बड़ा गए..
जितनी देर में वह सब सावधान हुए.. जितनी देर में वह सब अपने आदमियों को चेक करने में लगे रहे.. जितनी देर में नए आदमियों को मिशन पर लगाया गया.. क्वीन सबके साथ वहां से फुर्र्र हो चुकी थी..
एक बड़ी गलती के बाद क्वीन ने दूसरी गलती नहीं करि थी.. बड़ी सफाई से अपने परिवार को सबसे बचा कर ले गयी थी..
इतनी जल्दी वह इंडिया से निकल नहीं सकती थी. ऐसे hi अपने परिवार को आइलैंड पर नहीं ले सकती थी. स्पेशल प्लेन लेजाना पड़ता और फिर वहां प्लेन के लिए लैंडिंग प्लेस भी नहीं थी.. प्लेन से जाने पर वह सबकी नज़रों में आ जाती..
ये बात बड़ी खतरनाक थी...
अब समुद्री रस्ते से hi ले जाया जा सकता था. उसके लिए बड़े मेजर प्लान की ज़रूरत थी. पर अब क्वीन कोई गलती नहीं करना चाहती थी.. सुकून से सब काम करना चाहती थी..
शहर से बहार एक हवेली में सबको लेकर वह पोहंच गयी.. हवेली उसने पहले hi सर्च कर ली थी.. अब वह किसी हद तक रिलैक्स थी..
संजना ने उसके साथ जाने से इंकार कर दिए था.. उसे अपने hi देश में रहना था. अपने hi देश की सेवा करनी थी. अपने hi देश के क्रोरो ज़रूरत मांडो के दर्द को बाँटना था..
सबने बहुत कहा पर...
संजना : मम्मी! मुझे कुछ नहीं होगा. जैसे माँ ने अब तक मेरी रकसह की है. जैसे अब मुझे आप सब से मिलाया है. वैसे hi आगे की लाइफ में मेरी आप सबसे जुड़े रहते हुए hi बीतेगी. अब देश को, धरम को मेरी ज़रूरत है तोह मैं स्वार्थी नहीं बन सकती माँ.
मुझे जब तक जीना है, अपने लिए नहीं, आपके लिए सबके लिए, देश भर के लाखों क्रोरो मासूमो, बक्सों और लाचारों के लिए जीना है. मेरा असल सफर और लक्ष तोह अब शुरू हुआ है माँ. संजना माँ मुझे ऐसे hi नहीं बना दिए गया है. ये सब माँ की कृपा है. देश को ऐसे समय पर ज़रूरत भी है एक माँ की.. आप सब मुझे मिल गए, मेरी ज़रूरत और हर छह पूरी हुई. ऐसे hi आप सब को मैं और दीदी भी मिल गए हाँ तोह आप सब के दिलों को भी सुकून मिल गया है. आप सब के दिलों का दर्द भी ख़तम हो गया..
अब माँ ने हम सब को सुकून वाली लाइफ जीने को दी है. तोह जिनकी लाइफ में सुकून नहीं है. उनके लिए भी तोह कुछ होना चाहिए न..
संजना ने बड़े प्यार से ये शब्द बोले थे. और ऐसे बोले थे. सब सुन और समझ कर प्रसन्न हुए..
मम्मी : सही कहा तुमने संजना बेटी.. मैं भी स्वार्थी होकर सोचने लगी थी. मुझपर तोह माँ ने सबसे बढ़कर कृपा करि है. मैं तोह जानती भी नहीं थी. मेरी बेटी ज़िंदा भी है. ऐसे में माँ ने तुझे मुझे लौटा कर वह ख़ुशी दी, जिसकी कभी मैंने कल्पना भी नहीं की थी. तुम जिओ अपनी ज़िन्दगी बेटी.. सच कहा तुमने.. देश में और भी कई मायें परेशानहाल हाँ. जा उनके परेशानियां दूर कर. किसी के जिगर का टुकड़ा उससे दूर है तोह उसे उसकी माँ से मिला कर उस माँ को सुकून दे.. उसे सुख दे, उसकी ज़िन्दगी में भी हमारे जैसी खुशियां आएँगी तोह मुझे और सबको बेहद ख़ुशी होगी. माँ ने आज तक तुम्हारी रक्षा करि है. तुम्हे इतना बड़ा मुकाम भी दिए है तोह आगे भी माँ तुम्हारी रक्षा करेगी और तेरे मुकाम को बढ़ाएगी..
सब सुनकर और भी प्रसन्न हुए.. सब कुछ न कुछ बोलने लगे..
क्वीन मीठी नज़रों से संजना को देख रही थी... वह जानती थी, उसके जैसे संजना की लाइफ में सीढ़ी नहीं होने वाली.. जितनी खुशियां मिल रही हाँ. उतनी hi कठनाइयां भी आने वाली हाँ. पर सब उपरवाले के आशीर्वाद से अच्छा hi होता चला जाएगा. उस मकसद में उन्हें सफलता मिलती जाएगी..
संजना बातें करती हुई अपने दादा जी के घुटनो से लगी बैठी हुई थी... बैठे बैठे hi उसके मैं में जाने क्या आया था वह बातें करते करते अपने दादा के घुटमो को भी मसलती गयी थी.
दादा जो उसकी बातें सुन रहे थे. वह अपने अंदर एनर्जी सी बढ़ते हुए महसूस कर प् रहे थे.. संजना और उसकी माँ की बातें ख़तम हुई तोह वह उठे और संजना को भी थाम कर खड़ा कर दिए..
सब देख कर हैरान हुए तोह दादा ने संजना के माथे को चुम कर गले से लगा लिया.
सब ख़ुशी से चीख पड़े थे..
दादा जी ठीक हो गए थे..
संजना भी देख कर हैरान हो गई थी. वह भी बड़ी खुश दिखने लगी थी.
दादा : तुम सच में काली माँ का अवतार हो संजना बेटी.. तुम्हारा जनम ज़रूर किसी बड़े करए के लिए हुआ है. अब मैं कुछ कुछ उन महान ज्ञानी की बातों का अर्थ समझ रहा हों. बहुत सी बातें तब जो मेरी समझ में नहीं आयी थी. अब आ रही हाँ.
परिवार के बड़े भी महान ज्ञानी की बातों को याद करने लगे.. उन्हें भी लगने लगा था. क्वीन और संजना का उनसे दूर होना किसी बड़े मकसद के लिए था..
सब को असली ख़ुशी प्राप्त होने लगी. सब खुद को अंदर से महकता हुआ महसूस करने लगे...
संजना अगली सुबह सबसे जुड़ा होकर वहां से बहुत दूर के एक बड़े मंदिर की और निकल पड़ी थी. उसे अपनी कोई चिंता नहीं थी.. उसकी रक्षा करने के लिए माँ काली उसके साथ थी...
क्वीन भी अपने परिवार को साफल्य मुंबई लेजाने का इंतेज़ाम करने लगी.. वह एक जीनियस लड़की थी. पहले दिन अपने परिवार से मिलने के चलते हुए दिमाग से सोच नहीं पायी थी. अब वह एक एक बात पर बहुत धयान दे रही थी.. एक एक पॉइंट पर बहुत अच्छे से विचार कर रही थी...
रात वह अपने आइलैंड पर भी एक चक्कर लगा आई थी. वहां से कुछ सामान भी वह ले आई थी..
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लाइव स्ट्रीमिंग के कारण एक बार तोह पूरी दुन्या में तहलका मच उठा था.
संजना माँ ने स्कूल में जो किया था. उस कारण दुन्या भर में चर्चा होने लगी थी. संजना माँ को एक ब्रेव गर्ल का नाम दिए गया था..
वहीँ बाद में संजना माँ और नराशा बचपन से hi अपने परिवार से दूर रही हाँ. सब जान कर हैरान हुए थे..
असल हैरानगी तोह तब बढ़ी थी. जब पता चला था. नताशा hi क्वीन है..
वहीँ जब सम्राट भी वहीँ मौजूद पाया गया तोह और भी तहलका मच उठा.. पूरी दुन्या की नज़रें इंडिया पर लग गयी थी..
पूरी दुन्या इंडिया के तीन स्ट्रॉन्गेर्स को लाइव देख और सुन रही थी..
संजना माँ का भयानक रूप कुछ कुछ सब लाइव देख चुके थे. पर सम्राट ने जैसा खेल मिनिस्टर और नारायण मिश्रा के मोठे के साथ खेला था.. देख कर जो जहाँ बैठा हुआ था. अपनी पंत गीली कर गया था..
बहुत से अब भी इसे सच नहीं मान रहे थे. सब इसे कोई बहुत बड़ी गेम भी बोल रहे थे..
बहुत से सम्राट के लिए पागल हो उठे थे. वह सोचने लगे, सम्राट उन्हें मिल जाए तोह उनकी लाइफ सेट हो जाएगी.. वह दुन्या के किंग बन सकते हाँ..
हाहाहा...
सम्राट यानी की किंग को अपने वाश में करके खुद किंग बनने का सोच रहे थे.
सम्राट तोह खुद दुन्या का बना बनाया किंग था...
वहीँ रपो का पूरा स्ट्रक्चर कोमल ने बिगड़ कर रख दिए था. उनके पोलिटिकल से जुड़े हुए कुछ लोगों ने कुछ अलग अलग किसम के बयां ज़रूर दिए थे. पर ज़यादा बात नहीं करि थी..
बाओ वाले खुल कर नहीं बोले थे.. वह अपने hi किसी प्लान पर चर्चा में लगे हुए थे..
अंडरवर्ल्ड हमेशा का लालची रहा है.. वह संजना, नताशा या फिर सम्राट तीनो में से जो भी मिल जाए. उसे साथ मिलकर और भी पॉवरफुल बनने की सोचने लगे थे..
बहुत से QUEEN's हाउस पर नज़र बनाये हुए थे..
बाद में...
जब क्वीन ने अपना खेल खेलते हुए साफल्य सबकी नज़रों से बचते हुए अपने परिवार को कहीं ले गई थी. वह सब हाथ मलते रह गए..
कहीं तो कोई ये भी बोलै था..
साला क्वीन को कैसे कोई अपने काबू में कर सकता है.. वह तोह किसी को दिखाई HI नहीं देती.
इंडिया खुश भी था और नहीं भी..
बहुत से इंडियन खुश थे तोह कुछ की रातों की नींदें उडी हुई थी. वह अपने लिए खतरा महसूस करने लगे थे.
सम्राट...
क्वीन....
संजना माँ....
इन तीनो से कैसे बचेंगे.. तीनो के खुल कर सामने आने के बाद बुरे लोग बुरे करम खुल कर नहीं कर सकते थे...
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देवधर पैलेस का सिक्योरिटी चीफ देश के हालत देख कर परेशान हो गया था..
देवधर तोह खुद चाप में लगा हुआ था. सिक्योरिटी चीफ को लड़कियों के इंतेज़ाम का बोलै हुआ था.. पर सम्राट के आ जाने से सारा खेल बिगड़ने लगा था.. चीफ किसी से मश्वरा भी नहीं कर सकता था..
सब उससे निचे थे.. देवधर उससे ऊपर था. उसका मालिक था. शैतानी ताकतों का मालिक था.. वही उसे कोई बेस्ट मश्वरा दे सकता था.. पर वह अपने चाप में मगन था. चाप छोड़ कर चीफ को कोई सलाह नहीं दे सकता था..
अब बेचारा चीफ जितना दिमाग रखता था.. उतना hi उसका उपयोग कर सकता था..
देश भर में कई सुप्पल्लिएर्स के पास से लड़कियों को पुलिस ने रिकवर कर लिया था.. अब सम्राट आ गया था तोह कैसे और लड़कियों को किडनैप करके पैलेस में लाया जाए.
ये सोच कर चीफ बेहद परेशां tha..usay कोई सुझाव नहीं मिल रहा था..
रात के 1 बजे उसने पं को कॉल की..
पं तोह नंबर देख कर फ़ौरन hi उठ बैठा.. अभी अभी वह कुछ देर सस्टने के लिए लेता था.. दिन भर देश में जो जो हुआ था. उसपर बोल बोल कर वह बहुत थक गया था..
देवधर के सिक्योरिटी चीफ का नंबर देखा तोह घबरा गया..
साला एक पं होकर घबरा गया था.
क्या करता.. देवधर की दहशत थी hi इतनी.. देवधर साला बड़े बड़े नेताओ को अपनी काली शक्तियों से डरा चूका था..
पं : jjj...ji..ji
चीफ ग़ुस्से से : देखो पं.. मुझे किसी भी हाल में अपने मालिक का कहा पूरा करना पड़ता है.
पं : mm..main मतलब नहीं समझा aa..aapka सर!
चीफ : जितनी भी लड़कियों को आज के दिन रिकवर किया गया है.. वह सबकी सब मुझे चाहिए.. उन लड़कियों में से मुझे कुछ लड़किओं की फोरि ज़रूरत है. मुझे मतलब मेरे मालिक को.
पं : पर आप को उन लड़कियों से क्या लेना है.
चीफ : प्रश्न मत उठा कुत्ते.. जितना कहा है उतना कर.
पं को बड़ा ग़ुस्सा आया. पर वह कुछ बोल नहीं सकता था. कैसे बोलता. देवधर उसके साथ साथ उसके पुरे खंडन की गर्दन उदा देता.. 2 4 लाइव शो पं देख भी चूका था. देवधर कितना बड़ा दरिंदा है. वह बहुत अच्छे से जनता था. इसलिए देवधर के सिक्योरिटी चीफ की बातें और गली भी सहन कर गया.
पं : देश भर में सम्राट की जय जय हो रही है. वह कहीं भी पोहंच जाता है. ज़रूर वह साडी लड़कियां भी उसी के कारण मिली होंगी पुलिस वळून को.
चीफ पं को गाली देते हुए : तू फिरसे उल्टा बोलने लगा.
पल : इसके शिव मेरे पास बोलने को कुछ है भी नहीं.. मैं जनता हों, मैंने ऑर्डर्स दे भी दिए तोह भी कुछ नहीं हो पायेगा.. सम्राट के क़हर को सबने लाइव देख लिया है. अब आपकी नहीं मंटा तोह मरता हों. मंटा हों तोह भी सम्राट मुझे नहीं छोड़ेगा..
फिर जैसे वह मैं में कोई फैसले लेते हुए : आपको कल तक जवाब मिल जाएगा..
पं ने कॉल डिसकनेक्ट करि और मोबाइल ऑफ कर दिए...
वह सोचने लगा : देवधर काली शक्तियों का मालिक है. मेरे साथ साथ मेरे पुरे परिवार को मार सकता है. मैं देश का गद्दार भी नहीं हों. बस देवधर की काली शक्तियों से दर गया हों.
नहीं मुझे अब नहीं डरना चाहिए.. मैं न तोह बुज़दिल हों और देश के अगेंस्ट जाने वाला व्यक्ति. परिवार से भी बढ़कर है देश.. देवधर शैतानी ताकतों का मालिक है तोह क्या हुआ..
जैसी पावर में अब सम्राट, क्वीन और संजना माँ आ गए हाँ. ज़रूर वह सब मिलकर देवधर से निपट सकते हाँ..
पं ये बात सोचते hi हरकत में आ गया.
कुछ देर में पं का बयां टीवी पर दिखाया जा रहा था.
"SAMRAT..QUEEN..SANJANA माँ आप को आपके देश के प्रधान मंत्री का नमस्कार.. अब से पहले मैंने खुल कर आप सब के बारे में नहीं बोलै.. खुल कर बोलता तोह बहरी देशों के बड़े बड़े नेता मेरा बोलना हज़म नहीं कर पाते.. पर अब मुझे किसी की कोई परवा नहीं है..
एक मामले में मैं कुछ दर गया था..
बड़ा अजीब लग रहा होगा आप सबको सुनकर.. पर ये सच है.. पं होते हुए भी मैं दर गया था.
मेरा डरना बनता है....
दर तोह हर इंसान के अंदर होता है. कोई खुद के लिए डरता है तोह कोई अपने परिवार के लिए.. मैं भी दर गया था. जहाँ मुझे अपनी जान की भी चिंता हुई थी. वहीँ मुझे परिवार की चिंता सताने लगी थी. अपने देश के क्रोरो लोगों की चिंता सताने लगी थी.
पारर...
अब मेरा दर जा चूका है. मेरी जान जाती है तोह जाए, मेरा परिवार मरता है तोह मर जाए.. मैं अपने hi देश की बहु बेटियों की इज़्ज़त के साथ, अपने देश के मासूमो की ज़िन्दगियों के साथ किसी को खेलता हुआ नहीं देख सकता..
मेरे देश का कोई सैनिक बुज़दिल नहीं है. हाँ दुश्मन कहीं कहीं बहुत बढ़कर हाँ. जिनके रहते कइयों की हिम्मत जवाब दे जाती है. ऐसा hi एक दुश्मन और भी है हमारे देश में..
देवधर...
देवधर के बारे में आधा देश जनता है. वह काली शक्तियों पर राज करने वाला एक दुष्ट पापी है. कुछ देर पहले उसके सिक्योरिटी चीफ का फोन आया था मुझे. इन तीन दिनों में जयंती भी लड़कियों को मेरे देश के बहादुर सिपाहियों ने अपनी जान पर खेल रिकवर किया है. देवधर का चीफ उन लड़कियों को अपने पास लेने की बोल रहा था.
मैं पं होते हुए भी एक आम इंसान भी हों. देवधर जैसे काली शक्तियों वाले के साथ मैं नहीं लड़ सकता..
सम्राट...
सम्राट, क्वीन और संजना माँ से मैं कहता हों... देवधर जैसे पापी से लड़ कर देश की रक्षा करो.. जो मासूम बच्चे अपने परिवार को वापिस मिले हाँ. जो मेरी बेटियां अपने घर में वापिस लौटी हाँ. उन्हें फिरसे उनके अपणु से दूर मत होने देना.. मैं नहीं जानता आगे क्या होने वाला है. मैं नहीं जनता था देवधर का चीफ क्यों मुझसे लड़कियों की डिमांड कर रहा था.
पर इतना ज़रूर समझ गया हों. देवधर पापी है.. काली शक्तियां पाने के लिए कुछ भी कर सकता है. इसलिए मैं हाथ जोड़ता हों SAMRAT,QUEEN और संजम माँ के आगे.. मेरे देश के बच्चू की और बेटियों की रक्षा करो..
पं की ऑंखें नाम हो गई थी..
वहीँ जो जग रहे थे. जो सुन रहे थे, सब पं की बातें सुनकर शॉकेड हो गए. देवधर के बारे में कैयो ने बहुत सुन रखा था. पर देवधर इतना खतरनाक भी हो सकता है. किसी को अंदाज़ा नहीं था..
पं की स्पीच बार बार हर चैनल पर लाइव दिखाई जा रही थी.. जिन जिन घरों से बच्चे और लड़कियां किडनैप हुई थी. वह सब परेशान हो गए.. मैं में सम्राट को हेल्प के लिए बोलने लगे..
भगवन को भी याद कर रहे थे.. पर जैसे रूप में सम्राट सामने आया था.. उसी को hi भगवन भगवन का औतार कर पुकारने लगे थे..
वहीँ सिक्योरिटी चीफ बाज़ी पलटते देख कर थार थार कांपने लगा.. ग़ुस्से से नहीं अपनी मौत की आहात प् कर वह थार थार कांप रहा था... उसने सोचा पं से बोल कर, उसे दर्रा धमका कर लड़कियों को फिरसे अपने अंडर ले सकेगा..
पर हुआ इसके उलट...
वह अपने सर थाम कर बैठा रह गया.. वह सोचने लगा, अब तोह देवधर जैसे hi चाप से उठेगा.. लकड़ियों की डिमांड करेगा. लड़कियां पूरी न देख कर उसका सर काट देगा..
चीफ पं की स्पीच सुनकर कई बार अपनी गर्दन काटते हुए देख चूका था.. इतना मूट उसके लिंग से नहीं निकला था. जितना पसीने उसके पुरे बदन से निकल चूका था..
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मैं एक गाडी में बैठा हवेली से कुछ दूरी पर था.. दिन के 4 बजे का टाइम था...
ड्राइविंग सीट पर बैठा मैं ठाकुर दक्ष सिंह बदले हुए फेस के साथ था.. जैसे hi गाडी हवेली से 2कम की दूरी पर पोहंची तोह रुपाली को फिरसे नागिन के रूप में ले आया मैं.
ऋचा उसके साथ hi बैठी हुई थी. अब तक वह कुछ भी नहीं समझ पायी थी. वह नहीं समझ पाई थी. उसकी माँ क्यों कभी मेरी घुलम बन जाया करती थी तोह कभी एक नागिन बनकर ज़हरीले शब्दों से मुझपर चढ़ दौड़ती थी..
जानती थी तोह बस इतना कह मैं काला जादू जनता हों. उसी कारण ऐसा सब कर प् रहा हों..
रुपाली होश में आई तोह इधर उधर देखने लगी
रुपाली : ऋचा हम कहाँ जा रहे हाँ.
ऋचा ने अपनी माँ को देखा और मोह कर बोली
हवेली..
रुपाली घबरा कर : क्याआआआ..?? नहीं.. दक्ष गाड़ी वापिस मोड़ो, मुझे हवेली नहीं जाना है.
दक्ष : क्यों..?? वहां कोसना तुझे सूली पर लटकाया जाने वाला है.
रुपाली : वहां पायल होगी.. वहां राजा ठाकुर होगा..
दक्ष : हाहाहा! दर गयी क्या..??
रुपाली ग़ुस्से से : दररर! एक बार मुझे मेरे परिवार में लौट जाने दो.. मुझे कुछ दिन की छूट दे दो.. फिर तुझे दिखाऊँगी मैं, डर किस बाला का नाम है. फिर दिखाऊँगी मैं तुझे. मैं डर रही हों या तुम डर रहे हो..
दक्ष : जहाँ जा रही हो, वहां तुझे तेरे परिवार को भी देखने का मौका मिलेगा.
रुपाली के साथ साथ ऋचा भी झटके खा गयी.. रुपाली का नागिन रूप एकदुम्म से जैसे बादलों की ूत में जा छुपा था..
दक्ष : हाहाहा! ऋचा तुम्हारा डरना नहीं बनता.. हवेली पोहंच कर तुझे सबत करने का मौका दिया जाएगा. तुझे कुछ ऐसा करने को बोलै जायेगा, जिसे तू कर नहीं पाएगी. अगर तू वह सब कर गयी तोह तुझे मैं अपने जंतर मंतर में लिए बिना hi अपनी घुलम मान लूंगा..
ऋचा बैठी बैठी थार थार कांपने लगी. उसे अंदाज़ा हो गया था. मैं ज़रूर कुछ भयानक काम उससे करवाने वाला हों..
रुपाली तोह बस बड़बड़ाये जा रही थी.. मेरा परिवार भी हवेली पर पोहंचा हुआ है.. nnn..nahi...nahi..nahi ऐसा नहीं हो सकता.. ऐसा नहीं होना चाहिए.. ऐसा हुआ तोह fir..fir तोह सब.. फिर तोह सब ख़तम होक रह जाएगा.. कैसे मैं दक्ष के चुंगल से निकल सकुंगी.. नहीं.. नहीं.. मेरा परिवार इतना कमज़ोर नहीं हो सकता.. वह दक्ष के चुंगल में कैसे फँस सकता है..
रुपाली सदमे जैसी हालत में होते हुए बड़बड़ाने लगी तोह मैं उसे देख कर हसने लगा.. ऋचा दरी सहमी कभी मुझे तोह कभी बहार देखने लगती.. उसकी जीब उसके होंटो पर ऐसे चल रही थी. जैसे कुत्तिया गर्मी की शिद्दत से बहाल हो.. और दूर दूर तक पानी भी न हो..
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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..
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