Episode:55
वाया 3रद पर्सन
दक्ष हवेली के लॉन में टहल रहा था. लॉन में टहलते हुए वो लम्बे लम्बे सांस ले रहा था. वो कुछ घुटन सी महसूस कर रहा था. कुछ देर तक वो ऐसे hi टहलता रहा, पर उसके अंदर की घुटन काम होने में नहीं आयी.
एक जगा ग्रास पर वो पथ्य मार कर बेथ गया. एक ख़ास अंदाज़ जो मास्टर chi-fang जी ने दक्ष को सिखाया था. दक्ष अपने ब्रेन में एक खास पॉइंट पर अपना फोकस बनाये हवा को अपने अंदर खेंचता और फिर धीरे धीरे बहार निकलता. कुछ देर तक दक्ष ऐसा hi करता रहा. फिर वो सांस रोक रोक कर रुक रुक कर 3-3 4-4 सेकण्ड्स के वक्फे से सांस बहार निकलता..
दक्ष ऐसे hi बैठा रहा. धीरे धीरे उसके अंदर की घुटन काम होती चली गयी. वो शांत होता चला गया. दक्ष ने ऑंखें खोली तो अपने सामने षिमुना को देख कर हैरान रह गया.
दक्ष : तुम कब आई. मुझे खबर hi नहीं मिली.
षिमुना जो बड़ी देर से दक्ष को hi देख रही थी.
षिमुना : मुझे आये 40 मिनट होने वाले हाँ दक्ष. ये कोनसा टाइम है योग का. बात क्या है?
दक्ष : टाइम क्या हुआ है?
दक्ष ने अपने पेट में दौड़ रहे चुचु से अंदाज़ा लगाया, डिनर को बहुत समय बीत चूका है.
षिमुना: 11पं हो चुके हाँ. तुम तो जैसे सब कुछ भूले बैठे थे. बात क्या है
दक्ष ने षिमुना को देख और उठ खड़ा हुआ
दक्ष: कुछ नहीं शिमि यार. बस ऐसे hi, मैं कुछ बेचैन था इसलिए
षिमुना: किस लिए बेचैन था.?
दक्ष: छोडो, चलो अंदर चलते हाँ
षिमुना दक्ष को घूर कर देखने लगी.
षिमुना: तुम कबसे आना की करने लगे? दक्ष!
दक्ष: छोडो यार, हर बात बताने वाली नहीं होती
षिमुना हैरान रह गयी
षिमुना: हर बात बताने वाली नहीं होती! दक्ष ये क्या बकवास है, बताओ मुझे क्या बात है.
कुछ देर तक षिमुना पूछती रही और षिमुना दक्ष को फाॅर्स करती रही. षिमुना एकदम से इनविजिबल हुई और दक्ष एक अंदर समां गयी. दक्ष षिमुना को रोक नहीं सका ऐसा करने से. कुछ hi सेकेंड्स में षिमुना दक्ष के दिमाग से बहार निकल आयी.
षिमुना: तो तुम्हे अब रीलीज़ हो रहा है, जो कुछ कर गुज़रे हो, वो कुछ ज़यादा hi था.
दक्ष: अब तुमने जान hi लिया है, तो मैं क्या कह सकता हो.
षिमुना: दक्ष!
षिमुना "दक्ष" बोल कर खामोश हो गयी और दक्ष की आँखों में देखने लगी. दक्ष भी उसकी आँखों में देखने लगा. षिमुना को दक्ष की आँखों में दर्द दिखा.
षिमुना: तुम ऐसा करना नहीं चाहते थे, जूनून की हालत में ऐसा कर गुज़रे. जैसे बेसमेंट में किया था. वहां तो तुम खुद को किसी हद तक कण्ट्रोल में रख गए. पर किचन में रूम में खुद को कण्ट्रोल में नहीं रख सके. दक्ष! जहाँ तक मैं समझती हों, एक हिसाब से अभी तुम्हारा घर लौटने का समय नहीं हुआ था. तुम्हे कुछ समय लेट घर लौटना चाहिए था. ी क्नोव दक्ष! तुम्हे अपने परिवार से उतनी नफरत नहीं है, जितना तुम्हे अलका से दूर होने का ग़म है. उसकी जुदाई तुम आज भी सहन नहीं कर पा रहे हो. तुम प्यार से दूर भागते हो, पर तुम्हारे अंग अंग चीख चीख कर ये कह रहा है, कैसे भी करके तुम्हारी लाइफ पहले जैसी हो जाये. अलका फिरसे तुम्हारी लाइफ में शामिल हो जाये. पर जो कुछ तुम्हारे साथ हुआ है, जो कुछ सबने मिलकर तुम्हारे साथ किया है, वो तुम भूल कर भी नहीं भूल प् रहे. बिकॉज़ तुम अलका को खो चुके हो. एक वही थी, जो तुम्हे सबसे बढ़कर प्यारी थी. मैंने तुम्हारे दिमाग की, दिल की गहराई में उतर कर देखा है दक्ष!. अलका से दूरी तुम्हारी मौत है. ऐसा तुम्हारा अंग अंग बोल रहा है, तुम्हारे दिल की एक एक धड़कन ऐसा बोल रही है. पर तुम अलका को पाने के साथ साथ अलका के हुए बर्ताव को लेके भी दुविधा में हो. कभी तुम चाहते हो, अलका तुम्हे वापिस मिल जाये. कभी तुम चाहते हो, जब अलका कभी तुम्हे मिले, तो तुम अलका के साथ ये करो, अलका के साथ वो करोगे. पर इस सब के बावजूद तुम चाहते हो, अलका कैसे भी करके फिरसे तुमसे जुड़ जाये.
षिमुना सांस लेने को रुकी और आज बहुत समय के बाद दक्ष ने षिमुना को अलका के लिए बोलने से रोका नहीं.
षिमुना फिरसे बोली
आज जो हुआ, उसमे साडी मेरी गलती है दक्ष. फर्स्ट टाइम बिना किसी की सलाह के मैंने अपने हिसाब से तुम्हे वो जंगली जड़ीबूटियां खिला दी थी. ये सब उसी के कारन है दक्ष. तुम देखने में नार्मल लगते हो, पर हो नहीं. जब भी तुम उस घटना को याद करते हो तो तुम जुनूनी होने लगते हो. तुम्हारी ट्रैंनिंग भी अधूरी रह गयी है न इसलिए भी ऐसा सब हो जाता है तुमसे. पर एक बात याद रखो. गुरु जी ने कहा था, तुमसे कुछ गलत नहीं हो सकता. इसका एक मतलब ये भी बनता है दक्ष. कुछ गलत हुआ तो ज़रूर उसके बाद तुम ज़रूर कुछ ऐसा करोगे जो तुम्हारे पहले के किये गलत को बढ़िया से सही भी कर देगा. मुझे तो ऐसा लगता है. जैसे कुछ ाचा होने वाला हो.
दक्ष तो बस षिमुना को देखता hi रह गया था. इतनी डिटेल में दक्ष बारे किसी ने बात नहीं की थी. षिमुना ने भी पहले कभी ऐसी बातें नहीं की थी..
दक्ष ने एक लम्बी सांस ली.. बोलै कुछ नहीं. वो किचन में जो हुआ उसके बारे में hi सोच रहा था. माँ तो माँ होती है, वो न पहले कभी ऐसा था, न अब था. हाँ पर जो दर्द मिला था. जितनी ज़िल्लत मिली थी, उसी का परिणाम था. समुद्री जड़ीबूटियां न खाई होती तो शायद वो खुद पर काबू पा जाता. पर उसके अंदर खून में जैसे शरारे से दौड़ रहे थे. एक तो नारी स्पर्श में आते hi वो आनंदी सा होने लगता था. इसलिए भी कुछ ज़यादा बहक गया था.
दक्ष: टेम्पल से निकलने के बाद मैंने योग पर धयान भी काम कर दिया. अब से मुझे योग में कोताही नहीं करनी है..
षिमुना दक्ष को नार्मल देख कर खुश हुई. दक्ष को गले से लगा कर एक किश किया. दक्ष ने भी षिमुना के रसीले होंटो का रास खड़े खड़े थोड़ा सा चूसा, फिर छोड़ दिया..
दोनों एक दूसरे की बहन में बहन डाले अंदर जाने लगे. जैसे hi षिमुना और दक्ष कमरे में दाखिल हुए.. कमरे के अंदर रोहिणी सिंह एक शाल लपेटे कड़ी हुई थी.
दोनों उसे देख कर अचंबित हो गए. दोनों उसे देख कर एक दूसरे को देखने लगे. रोहिणी सिंह चलती हुई दूर के पास पोहंची और दूर को लॉक कर दिया.
षिमुना और दक्ष रोहिणी सिंह को हैरत भरी नज़रों से देख रहे थे. रोहिणी सिंह की आँखों में देख कर दक्ष का लगा, जैसे उसकी माँ का मानसिक संतुलन अपनी जगा पर सलामत नहीं है. वो चलती हुई दक्ष एक पास पोहंची और दक्ष की आँखों में देखते हुए बोली.
रोहिणी: तुम्हे मैं एक नारी लगती हों न. सुप्रिया के सामने तुमने मुझे अपनी बहन में भर कर मुझे अपनी गफ के जैसे ट्रीट किया था न.
षिमुना के माथे पर पसीने के कतरे चमकने लगे. उसने दक्ष के बाज़ो को कसके पकड़ लिया. रोहिणी सिंह की मेंटली कंडीशन देख कर वो टेंशन में आ गयी थी.
ऐसी hi हालत कुछ दक्ष की भी थी. उसने ऐसा सब नहीं सोचा था. उससे भूल हुई थी, तभी तो उसे घुटन सी होने लगी थी.
रोहिणी: मैं दो जवान बेटियों की hi माँ नहीं हों, दो दो जवान बेटे भी हाँ मेरे. तुम्हे कहा, मैं आज भी वैसी hi हसीं हों, जैसी अपनी जवानी के समय पर हुआ करती थी. तुमने ऐसा कहा, ज़रूर तुम्हे मैं पसंद आई होंगी. ज़रूर तुम्हे मेरा ये सुंदर शरीर पसंद आया होगा. लोओओओओओ दीखहोओओओ
रोहिणी सिंह ने ऊपर लपेटी शाल एक झटके में उतार कर फ़ेंक दी. निचे रोहिणी सिंह ब्रा और पंतय के ऊपर ट्रांसपैरंट निघ्त्य पहनी हुई थी. जो उसके घुटनो तक थी.
षिमुना काँप उठी तो दक्ष दो कदम पीछे हैट गया.
रोहिणी: क्यों? पीछे क्यों हैट गए तुम. मेरा ये शरीर तुम्हारे लिए एक माँ का शरीर नहीं है न. तुम्हारे लिए तो ये सिर्फ एक शरीर है. जो केवल भोगने के लिए है. एक नारी तो होती hi एक मर्द के भोगने के लिए है. तुम्हे मई ऐसे पसंद हों, तो ऐसे hi सही. तुम मेरे बेटे बनकर मुझे न मिल सको. तो जैसे भी मिल सको.. मुझे मंज़ूर है. तुम्हे बुआ पसंद आ गयी है, तू माँ को भी पसंद कर लो. पर मुझसे दूर मत जाओ. मुझसे नफरत मत करो. मुझसे भूल हुई, एक माँ से भूल हुई. एक माँ को अपने दूध पर शक नहीं करना चाहिए था. पर कर गयी. उस कुत्तिया ने षड़यत्र hi ऐसा रचा था. मैं क्या सब hi उसका शिकार बन गए. किस किस ने तुमपर शक नहीं किया. पायल.. तुम मुझसे भी ज़यादा पायल से प्यार करते थे. अलका.. तुम अलका से भी मुझसे ज़यादा प्यार करते थे. जब वो दोनों तुझपर शक कर गयी तो मैं तो उन दोनों के यकीं पर यकीं कर बैठी. रुपाली ऐसी हो सकती है, मुझे अंदाज़ा नहीं था. एक मर्द के चरित्र पर शक किया जा सकता है. पर एक नारी के चरित्र पर नहीं.. जवानी दीवानी होती, जवानी में किसी से भी गलतियां हो सकती है. बास यही मुझसे भूल हुई.. शोर मचा, सब सुना तो, पायल और अलका की बातों पर, रुपाली के आंसुओं पर, उसकी हालत पर कैसे शक करती मैं. दूध पर यकीं की बात करते हो तो पायल को भी पिलाया है मैंने दूध. तुझपर शक न करती तो उसपर करती. एक बेटे पर शक न करती तो एक बेटी को झूठा कहना पड़ता.. मैं किस साइड जाती. उस समय तो साडी सुध बुध hi खो बैठी थी मैं...
रोहिणी सिंह की हालत बहुत ख़राब थी. उसका रोना देख कर उसकी दिमागी हालत का अंदाज़ा लगाया जा सकता था. दक्ष पहले hi गिलटी फील कर रहा था. बास शो नहीं करवा रहा था. खुद के अंदर के बदलाव के कारन भी परेशां था. अब माँ की बातें सुनी तो ऐसा लगा, जैसे पैरों के निचे से ज़मीन खिसकने लगी हो
रोहिणी सिंह उसी टोन में: मुझे बेरा वापिस चाहिए. एक hi तो शेर बीटा था मेरा. जिसे शाज़िशियों ने मुझसे दूर कर दिया. अब जैसे मेरे बेटे की छह की छह, वही मेरी छह.. तुझे मैं ऐसे मीलों या वैसे. बास मेरे सीने से लग जा. या मुझे अपने सीने से लगा ले. मुझमे समां जा, या मुझे खुद में सामने दे.
दक्ष तो स्तब्ध खड़ा माँ की बातें सुन रहा था. दक्ष कुछ न बोलै, न आगे बढ़ा.
रोहिणी सिंह एकदुम्म से दक्ष के पैरों में गिर पड़ी.. दक्ष के पेअर थाम कर उससे माफ़ी मांगने लगी.. पर दक्ष बड़ी तेज़ी से दो कदम पीछे हैट गया. षिमुना की तो चीख hi निकल गयी थी..
रोहिणी: मुझे माफ़ करदे दक्ष बीटा. एक माँ को माफ़ करदे. भूल हुई मुझसे दक्ष बीटा. मैं तेरी गुनहगार हों, मुझे शमा करदे..
अब की बातों से रोहिणी सिंह की हालत और भी बिगड़ने लगी थी. दक्ष को लगा, अब उसने अपनी माँ को न संभाला तो ज़रूर उसके साथ कुछ गलत हो जायेगा.. दक्ष तड़प कर आगे बढ़ा, झुका और अपनी माँ को कंधो से थाम कर खड़ा कर दिया. रोहिणी सिंह का बदन ठंडा पड़ने लगा था.
दक्ष: मा.. maaaaaaa...maaaaaaaa..
रोहिणी सिंह ने खुद को दक्ष की बहन में पाया. तो धीरे से उसके होंठ हिले. "मुझे माहाफ़...."
फिर उसका सर एक तरफ ढलक गया.. वो बेहोश हो गयी थी. उसने डिनर भी नहीं किया था. दिन के समय और शाम के बाद दो बार दक्ष को गलत हालत में देखा था. तब से उसकी मेंटली कंडशन थोड़ी थोड़ी बदलने लगी थी. ऐसा बन कर लौटेगा उसका बीटा. उसने सोचा नहीं था.
दक्ष ने रोहिणी सिंह को गॉड में उठा कर बीएड पर लिटाया..
दक्ष: षिमुना माँ के अंदर समां कर माँ को चेक करो.
षिमुना: वो तो तुम भी चेक क्र सकते हो
दक्ष: जितना कहा है, अभी उतना करो
दक्ष सख्त लहजे में बोलै तो षिमुना ग़ायब होकर रोहिणी सिंह के अंदर समां गयी. कुछ hi देर में वो वापिस पहले जैसी हालत में हो गयी..
दक्ष: क्या बात है.. माँ बेहोश क्यों हुई.. और माँ ऐसे ठंडी क्यों पद रही है
षिमुना नराजा होते हुए: तुम्हारे कारन. सुबह थोड़ा सा नाश्ता किया था, उसके बाद न लंच किया और न hi डिनर. साथ में तुम्हारे हुए दोनों काण्ड में उनकी मेंटली हेल्थ बिगड़ दी है. चिंता की ज़रूरत नहीं है. मैं पानी और कुछ खाना ले कर आती हों. तुम प्यार से खिलाओगे तो ठीक हो जायेंगे.
षिमुना कमरे से निकली और कुछ देर लौट भी आयी.
दक्ष: सॉरी माँ! मैं जैसा भी था, हमेशा से एक ाचा बीटा बनकर रहने की कल्पना की है. न बुरा कभी बना, और न hi कभी बनने की सोची. सॉरी मेरी नफरत ने आपकी ये हालत कर दी.
षिमुना ने ठंडा पानी रोहिणी सिंह के चेहरे पर डाला तो वो कसमते हुए होश में लौटने लगी. दक्ष को देखा तो हाथ जोड़ने लगी.
रोहिणी सिंह: शमा कर---
दक्ष ने रोहिणी सिंह के हाथ एक हाथ से थाम लिए. दूसरे हाथ से माँ के मोह को बंद कर दिया.
दक्ष: माफ़ी मुझे आपसे मांगनी चाहिए. एक बेटे को कभी भी वो नहीं करना चाहिए, जो मैंने किया... हो सके तो आप मुझे शमा कर दें.
षिमुना: माँ जी, जो भी हुआ, उसमे दक्ष की भी कोई गलती नहीं है. दक्ष को आप सब से पैर न होता तो लौटता hi क्यों. अब जो अपने hi परिवार से प्यार करता हो, वो कैसे उनका अपमान कर सकता है. कैसे उन्हें दर्द दे सकता. जबकि वो साडी सच्ची जनता भी हो. देखा नहीं था क्या आपने. करणवीर कितने बड़े दोषी थे. फिर भी दक्ष ने उन्हें न केवल माफ़ कर दिया. बल्कि उन्हें बदला लेने का अवसर भी दिया..
षिमुना की बात सुनकर रोहिणी सिंह के चेहरे का उतरा रंग वापिस लौटने लगा. उसकी आँखों की चमक भी वापिस लौटने लगी. षिमुना फिरसे बोली
षिमुना: बात ये है, आपने सुना होगा, ानोथेर प्लेनेट से आये हुए के बारे में खरब डीके से जोड़ी जा रही हाँ.. मैं वही हो, मैं दूसरे प्लेनेट से आई हों..
रोहिणी सिंह अब हैरान होने लगी
षिमुना: मुझसे एक गलती हुई, दक्ष को समंदर की कुछ ऐसी रेयर जड़ीबूटियां खिला दीं, जिसके कारण ये ऐसा बन गया है. कभी कभी इसके अंदर का जानवर बेकाबू होने लगता है. ये सब उसी के कारन हुआ है. मैं इसमें बराबर की कसूरवार हों.
रोहिणी सिंह झटके से उठी और दक्ष को गले से लगा कर रोने लगी.
रोहिणी: दक्ष बीटा तुमने मुझे माफ़ तो कर दिया न. मैंने अपने दूध पर शक किया.
दक्ष की टोन माँ के बिगड़ी हालत पर साद हो गयी थी. दिल में सच्चा प्यार था, जो वापिस लौट रहा था.
दक्ष: माँ, माफ़ी तो मुझे आपसे मांगनी चाहिए. पहले जो हुआ, वो षड्यंत्र था. मैंने जो किया वो खुद से किया. मेरी गलती बड़ी है. आप मुझे शमा कर दें. एक माँ का अपमान हुआ है मुझसे.
रोहिणी का दिल का दर्द का चूका था. उसे उसका बीटा वापिस मिल गया था. वो दक्ष की आँखों में देखते हुए उसके चेहरे को चूमने लगी.
जब षिमुना खाने लेने गयी थी. तब तक दक्ष ने शाल उठा कर अपनी माँ के शरीर पर लपेट दी थी. जो भी था, पर माँ के शरीर को देख कर उसके अंदर सनसनी सी ज़रूर दौड़ गयी थी. ये एक नयी मुसीबत थी.. जो उसकी लाइफ का एक हिस्सा बन कर रह गयी थी. पर वो नार्मल भी था.
षिमुना और दक्ष मिलकर रोहिणी सिंह को खाना खिलने लगे. रोहिणी सिंह बार बार दक्ष के गालों को चुम रही थी. बरसों बाद बीटा मिला था. उसके हाथ से खा रही थी. साथ में एक गुलाब जैसी बहु भी मिल गयी थी. बातें करते हुए, प्यार बांटते हुए खाना भी चलता रहा.
खाना ख़तम होने में कुछ देर बाकि थी. एक फायर की आवाज़ सुनाई दी. कुछ देर में कई फायर हुए.. फिर तो जैसे जुंग का महुअल बन गया. दक्ष और षिमुना तुरंत उठ खड़े हुए..
दक्ष: माँ आप दूर को अंदर से लॉक कर लें. मैं और षिमुना अभी लौट कर आते हाँ.
रोहिणी ने दक्ष को अपने सीने से लगा लिया
रोहिणी: नहीं. अब मैं अपने बेटे को दूर नहीं जाने दूंगी.
दक्ष: माँ आप मुझपर धयान दिए रखेंगी तो हमारे पुरे परिवार के साथ कुछ गलत हो जायेगा. '
रोहिणी सिंह ने सुना तो घबरा कर दक्ष को छोड़ दिया.. इस बीच षिमुना कमरे से निअक्ल कर ग़ायब हो चुकी थी.
कोठी में, कोठी के बहार फायरिंग के साथ साथ चीखों की आवाज़ें भी सुनाई दे रही थी..
दक्ष बहार निकला तो रोहिणी सिंह ने दक्ष को पीछे से देखते हुए, भगवन से परपथना करते हुए दूर बंद कर दिया. आज बोहत दुःख झेलने के बाद उसे असीम आनंद भी प्राप्त हुआ था. वो अंदर तक निहाल थी. पर अब फायरिंग के चलते चिंतित भी थी..