Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 18 - SexBaba
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Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge

आपने भाई सही समझा.. देवधर अवंतिका का hi घुलम था.. बाकि सब समझ रहे थे, देवधर hi आशाराम का असली दुश्मन है. असली दुश्मन अवंतिका थी और है..

अवंतिका का कुछः परिचय नेक्स्ट पोस्टेड अपडेट में दर्ज है

जो भी होगा अपने समय पर होगा.. देखते हाँ, कब वह समय आता है.

बहुत बहुत शुक्रिया भाई...

:)
 
होने को तोह कुछ भी हो सकता है भाई.. पर ऐसा नहीं है.. दक्ष को मौका मिला तोह उसे बाज़ी मार ली.. बड़े बड़े पहलवान भी एक hi दो में आ के चित हो जाया करते हाँ.

यहाँ बी कुछ ऐसा hi सन बना है..

और भी ज़यादा शक्तियां पाने के लिए देवधर मंडल चाप में व्यस्त था.. अब कोई जादू टोना करने वाला तोह उसका कुछ बिगड़ नहीं सकता था. टेलिपाथी द्वारा वह मार खा गया..

देवधर की मौत से एक बात और भी समझ में आएगी.. देवधर जैसे टेलिपाथी के आगे कुछ नहीं हाँ तोह आगे चल के डीके की राह में कैसे कैसे आएंगे..

ज़रूर ऐसे आएंगे जो देवधर से बढ़के होंगे.. देवधर सम्राट को भी नहीं जनता था.. इसलिए खुद की सेफ्टी नहीं कर सका.. जो सम्राट को जान गया. वह अपनी सेफ्टी ज़रूर करेगा..

अब आगे चल के देखना पड़ेगा.. कोण कोण सम्राट के लिए चैलेंज बनता है.. और कोण कोण सम्राट की टेलेपर्त्य से खुद को सेफ रखता है..
 
Episode:48

षिमुना के साथ अच्छे लम्हे बिताते हुए अंत में मुझे ऐसा लगने लगा.. जैसे मुझे कोई देख रहा हो.. जैसे कोई मुझे याद कर रहा हो. जैसे कोई मुझे ऐसे लम्हो को जीते देख कर दुखी हो..

मैं कुछ समझ नहीं पाया. जहाँ मैं षिमुना के साथ मज़े कर रहा था. वहीँ मेरे दिल में भी कुछ कुछ होने लगा था. षिमुना को मैं कुछ बोल नहीं सकता था.

एक ेकी मेरा मैं होने लगा.. मैं षिमुना के साथ जो कर रहा हों, वह छोड़ कर शांत लेट जाऊं.

पता नहीं मेरी ऐसी हालत क्यों होने लगी थी. ऐसा करके मैं षिमुना को दर्द भी नहीं दे सकता था. ऐसे लम्हो से पलटना पार्टनर को बहुत पीडन भी दे जाया करता है.. इतना आगे बढ़कर पीछे हैट जाना.. कैसे कोई सहन कर सकता था.

षिमुना सहन कर जाती.. पर उसे अच्छा न लगता. मैं भी रूम में इधर उधर देख कर सर झटक कर षिमुना के साथ बिजी हो गया..


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सुबह मेरी आंख जल्दी खुल गयी. मैं हिला तोह षिमुना भी तुरंत ऑंखें खोल कर मेरी आँखों में देखने लगी..

मुझे उठा देख कर मुझे किश करने लगी. मैं भी उसे किश करने लगा..

दोनों hi फिर कुछ देर में बीएड से उतरे.. ऐसे hi एक साथ बाथरूम में जा घुसे.. बाथ लिया और रूम में आ के कपडे चेंज करने लगे.

षिमुना : अब बताओ, रात का सब मुझे.

मैं षिमुना के बालों में उँगलियाँ फेरते हुए : चलो पहले एक राउंड और खेलते हाँ.

षिमुना हेहेहे कर के हस्ते हुए मुझे खुद से दूर करने लगी.

षिमुना : मुझे इतनी भी भूक नहीं है समझे.. बताओ उस चीफ का क्या बना.

मैं षिमुना को लिए बीएड पर बैठते हुए : वहां तोह खेल hi और जान्ने को मिला मुझे.

षिमुना : खेल.? कैसा खेल.?

षिमुना मुझे सोचों में गम देख के हैरान हुई..

मैं कुछ देर सब सोचने के बाद षिमुना को देख के बोलै

दक्ष : देवधर.. देवधर नाम का एक व्यक्ति जो काली शक्तियों में बहुत आगे था.. बड़ी दहशत पहला राखी थी उसने देश भर में.. पं तक उससे डरता था.. अवंतिका नाम की एक जादूगरनी उसकी गुरु थी. लखनऊ में रहती है वह.. उसके बारे में बड़ा अजीब सुनने को मिला है..

षिमुना : क्या मतलब..?? अजीब से क्या मतलब है तुम्हारा.?

दक्ष : एक आश्रम है मनाली के पहाड़ों में.. उस आशाराम का कोई चक्कर है. वहां के गुरु जी के साथ देवधर की ठानी हुई थी. ऐसा मुझे देवधर के दिमाग से जान्ने को मिला.. मज़ीद देवधर के दिमाग की गहराईयों में उतरा तोह पता चला.. देवधर आशाराम के लिए जो विचार खुद में रखता है. वह विचार उसके अपने नहीं हाँ. अवंतिका के कण्ट्रोल में था देवधर.. जैसे अवंतिका ने उसके ब्रेन में सब फिट किया.. वहीँ सब देवधर करता रहा है आज तक..

षिमुना हैरान होक : कोण है ये अवंतिका.

दक्ष : पता नहीं..? ये तोह उसके दिमाग में घुस के hi पता करना पड़ेगा.

षिमुना तोह घुसो न उसके दिमाग में..

दक्ष : इतना भी आसान नहीं होता किसी के भी दिमाग में घुस पाना..

षिमुना : तुम्हारे लिए कुछ भी मुश्किल कैसे हो सकता है.

षिमुना की बात पर मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई.

दक्ष : लगता तोह मुझे भी कुछ मुश्किल नहीं है. पर जैसे तुम्हारा और गुरु जी का दिमाग है.. वैसे और भी कई दिमाग होंगे. देवधर मुझे महसूस नहीं कर पाया.. वह शराबी कबाबी था.. इसलिए मुझे उसका अंत करने में मुश्किल नहीं हुई.. वर्ण हर किसी के दिमाग में घुस के उसपर कण्ट्रोल बना लेना आसान नहीं है.

षिमुना : चलो तोह देखते हाँ, अवनितिका का दिमाग भी तुम्हारे कण्ट्रोल में आता है, या उसका दिमाग भी स्ट्रेंज ब्रेन्स की लिस्ट में शामिल होता है.

देवधर के दिमाग से अवंतिका के कुछ कॉन्टेक्ट्स मिले थे मुझे.. ऐसा hi एक पर्सनल नंबर भी मुझे मिला था अवंतिका का..

अवंतिका से वास्ता तोह अब पड़ते hi रहना था.. आशाराम का भी मटर था और नाकि और बड़ी का भी.. वह बुराई बरपा करने वाली थी और मैं बुराई का अंत करने के लिए मैदान में कूड़ा हुआ एक खिलाडी.

कई अंजाम लोगों को भी मैं जनता था. जिन्हे मैंने अपनी ब्रेन मेमोरी में फिट किया था.. ऐसे hi एक बिजनेसमैन के दिमाग में मैं घुसा.. वह अपनी पत्नी से लिपट के सो रहा था. मैंने उसे कण्ट्रोल में लिया..

वह उठा और अपना मोबाइल उठा कर अवंतिका का नंबर डायल करने लगा.. अवंतिका के मोबाइल पर बेल जाने लगी..

दूसरी hi पल मुझे अवंतिका की नींद में बड़बड़ाई आवाज़ सुनाई दी.. मैं बिजनेसमैन के दिमाग से निकल से निकल पर अवंतिका के दिमाग में जा घुसा..

वह उछाल पड़ी.. उसकी नींद पल भर में hi उड़न छू हो गयी.. ऐसे जैसे वह कभी सो hi नहीं रही थी.. मैं उसके दिमाग में उतर के सर्चिंग करने लगा..

पर अवंतिका का दिमाग भी मुझे भूल भुलैयों लगा..

उसी समय मुझे अवंतिका की आवाज़ सुनाई दी...

"सवागत है सम्राट तुम्हारा मेरे दिमाग की दुन्या में"

अवंतिका की आवाज़ सुनकर मुझपर हैरतों के पहाड़ टूट pade..main फ़ौरन उसके दिमाग से निकल पर षिमुना के पास हाज़िर हो गया..

षिमुना मुझे hi देख रही थी. मेरे चेहरे पर आई हैरत देख कर वह बोली.

षिमुना : क्या हुआ दक्ष! तुम इतना शॉकिंग फेस क्यों बनाये हुए हो.

"शिमि यार, बड़ी खतरनाक बाला है वह तोह.. मैं जैसे hi उसके दिमाग में घुसा.. उसकी नींद ऐसे भागी.. जैसे वह सोइ hi न हो.. मैं उसके दिमाग को रीड करने लगा. तोह साला उसका दिमाग hi अजीब निकला.. उसकी कोई भी सोच किसी एक जगह ठहर hi नहीं रही थी.

दूसरा उसे पता भी चल गया.. कोई उसके दिमाग में घुसा है.. उसने मुझे सम्राट कह के बुलाया..

षिमुना : kyaaaaaaaaaaaaaaaa..??

षिमुना भी मेरी तरह हैरतों के समुद्र में होते लगाने लगी. उसका मोह पूरा खुल गया था..

मेरी तरह वह भी अवंतिका के बारे में जान कर शॉक हो गई थी.

मैं एक लम्बी सांस लेता हुआ : अब तोह लगता है.. कुछ खतरनाक होने वाला है.

"इतना खतरनाक कह तुम सोच भी नहीं सकते"

मुझे मेरे दिमाग में गुरु जी की आवाज़ सुनाई दी.. मैं सीधा होक बेथ गया.

षिमुना भी सीढ़ी होक बैठी.. मुझसे पहले वह बोल पड़ी.

षिमुना : परनाम गुरुदेव.

गुरु जी : सदा कल्याण हो तुम्हारा पुत्री. दक्ष बीटा.. अच्छा किया जो तुमने उसे अपनी आवाज़ नहीं सुनाई. वर्ण वह बिना देरी के तुम्हारे बारे में सब जान जाती.

दक्ष : गुरु जी! कोण है ये अवंतिका.

गुरु जी : समय खुद हर सवाल का उत्तर देगा दक्ष बीटा. अवंतिका काली शक्तियों के मामले में बहुत आगे निकल चुकी है. पुरे भारत में कोई भी उसकी टक्कर का नहीं है.

दक्ष : गुरु जी! कैसे फिर मैं उससे लड़ सकूंगा..??

गुरु जी : नियति का रचा ये सारा खेल है. बस तुम अब से किसी भी दिमाग में अपनी रियल आवाज़ में मत बोलना.. पांचू पवित्र नारियों को छोड़ कर. जिनके बारे में षिमुना ने तुम्हे बता दिए है. जब जब तुम इनमे से किसी एक के साथ रहोगे.. सदा सफलता पाओगे.. कोई भी काली शक्ति तुम्हे हानि नहीं पोहंचा सकेगी. जान तोह तुम्हारी काली शक्तियों के कारण कभी नहीं जायेगे. ये एक आगे की बात मैं तुम्हे बता रहा हों. परन्तु कष्ट बहुत उठाने पड़ेंगे. तुम से जुड़े हुओं को भी कष्ट उठाने पद सकते हाँ. उसके लिए तुम्हे सिवाए आश्रम के कोई और ठिकाना पूरी धरती पर नहीं मिलेगा. कष्ट बारे में तुम्हे कोई ज्ञान नहीं दूंगा.. आगे तुम्हारी हिम्मत तुम्हे सफलता देगी.. अवंतिका से जो भी जुड़ा, वह तुम्हे बहुत कष्ट देगा. देवधर का समय हो गया था इस धरती को छोड़ कर जाने का. इसलिए तुम्हे मौका मिल गया. अन्यथा तुम्हारे लिए आसान शिकार नहीं रहता.. उसके पीछे अवंतिका जो थी. सदा सावधान रहना.

दूसरे लोक से आये हुए भी जल्द hi तबाही मचने वाले हाँ. ऐसे में तुमसे जुड़े हुओं के लिए ख़तरात बढ़ जायेंगे. किस किस को बचते फिरोगे तुम. एक को बचाओगे तो दूसरा कष्ट में पद जायेगा. दूसरे को बचाओगे तो तीसरा.. लोक सेवा कब करोगे और परिवार की सुरक्षा कब. विजयी भाव पुत्रो.

गुरु जी चले गए.. वर्ण षिमुना गुरु जी कुछ से पूछना चाहती थी.

षिमुना का मोह खुला रह गया था..

षिमुना : मुझे गुरु जी से पूछना था. हम पांचू के लिए कोई खतरा है या नहीं.

दक्ष : ये तो सीढ़ी सी बात है. तुम पांचू के रहते मुझे काली शक्तियों से हानि नहीं पुहंचेगी..

षिमुना : ओह्ह हाँ! फिर तो तुम्हारे पास hi रहना पड़ेगा मुझे.

दक्ष : ऐसे तो तुम मेरे साथ 24 हरष नहीं रह सकती.

षिमुना : मैं तुम्हारे अंदर समां जाया करुँगी. सच में कितना अच्छा समय था वह.. तुम्हारा अंदर का ठिकाना मेरे लिए बहुत मस्त एडवेंचर था दक्ष.. ी लव योर बॉडी हाउस.. षिमुना मस्त नज़रों से मुझे देखते हुए बोली.

दक्ष : सही कहा तुमने षिमुना.. किसी के अंदर रहना बड़ा hi मस्त होता है. जब तक किसी के अंदर रहो तोह मज़ा hi मज़ा है

षिमुना चहकते हुए : और नहीं तोह क्या..

मैंने षिमुना को अपनी बहन में भर लिया.. चलो न मैं तुम्हारा अंदर समता हों.

रात बड़ा मज़ा आया तुम्हारा अंदर समां कर.

पहले तोह षिमुना का मोह खुल गया. अब वो सही से समझी थी. फिर वह खिलखिला कर हसने लगी..

बेशरम.... जब देखो एक hi बात के पीछे पड़े रहते हो.. चलो अब चलते हाँ..

मैं भी हस्ता हुआ षिमुना के साथ कमरे से बहार निकल पड़ा..

बाकि सब अभी सो रहे थे. शायद वो नहीं रहे थे. कैसे सो सकते थे सब. सबकी नींदें तो मैंने उदा के रख दी थी.

मैं षिमुना के साथ हवेली के घूमने लगा.. कुछ देर चलने के बाद हम जॉगिंग के अंदाज़ में दौड़ने लगे.

हवेली में कई गॉर्ड जाग कर हवेली की सुरक्षा कर रहे थे. सुरक्षा.. हाहाहा.. हवेली को बहार से खतरा था या नहीं. पर अंदर से खतरा बढ़ चूका था. कैयो की जान खतरे में थी.. कैयो का वक़ार मिटटी में मिल गया था. कई अपनी नजरों में गिर गए थे. गार्ड्स केवल बहार से hi सबकी प्रोटेक्शन में लगे हुए थे. अंदर से किसी के लिए कुछ नहीं कर सकते थे.

हवेली का एरिया बहुत बड़ा था. 2 घंटे में मैं और षिमुना दौड़ते रहे.. बातें करते रहे.. थकन तो थी hi नहीं हममे...


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कोमल ने जगन्नाथ के साथ जुड़े हुए और भी कइयों के पास जा कर उनका काम तमाम किया.. जिस जिससे जो जो मिला.. वह सब लेकर कोमल निकल पड़ी. एक के पास से एंड्राइड फोन हासिल करके कोमल मिले फाइल्स की स्नैप्स लेके के एक जगा मेल भी करती जा रही थी...

पूरी रात कोमल का क़हर दिल्ली शहर के कई बुसिनेस्स्में पर जारी रहा.. दिल्ली में जैसे रात हुई hi नहीं थी. पुलिस मीडिया सब भाग दौड़ में लगे हुए थे.. कोमल कहीं भी हाथ नहीं आ रही थी..

कोमल सच में hi शेरनी थी. जो बड़ी सावधानी से अपना शिकार कर रही थी.. किसी की नज़रों में आये बिना वह तबाही पहला रही थी..

एक hi रात में उसने कइयों को अंजाम तक पोहंचा दिए था. जो कोमल को शेरनी के रूप में पहले से hi जानते थे.. वह सभी अपने अपने पार्टनर्स को फोन खडका रहे थे. शेरनी से बचने की बातें कर रहे थे..

पर सब केवल बातें hi करते रह गए थे.. जब भी कोमल को लेके बात करते तोह न्यूज़ पर कोमल का कोई और काण्ड टेलीकास्ट होने लगता..


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रॉ चीफ को भी नींद नहीं आ रही थी.. वह कभी लेट जाता तोह कभी उठ कर टहलने लगता.. देलगी शहर में हो रही घटना पर वह भी सोच विचार में लगा हुआ था... सम्राट, क्वीन और बहुत कुछ था उसके पास सोचने के लिए.. अब शेरनी मैदान में उतर ै थी तोह चीफ के पास सोचने के लिए और भी बहुत कुछ बढ़ गया था..

चीफ अपने कमरे में टहल रहा था. ये चेइफ़ का सीक्रेट रूम था.. उसी रूम में लगा हुआ एक रेड बल्ब स्पार्क करने लगा.. साथ hi एक टोन भी बजने लगी..

चीफ तुरंत उसी रूम से जुड़े हुए एक सीक्रेट दूर के पास का पोहंचा. देखने से वह केवल एक दीवार hi दिखाई देती थी. एक जगा चीफ ने अपना पूरा पंजा पहला कर रखा तो कुछ रेज़ निकली और चीफ के पूंजी को वेरीफाई करने लगी..

दूर ोपण हो गया. चीफ अंदर प्रवेश कर गया.. दूर ऑरोमाटिक था.. खुद से बंद हो गया.. वहां पड़े एक पक पर भी नोटिफिकेशन टोन आ रही थी. चीफ ने देखा तो कई मेल्स थी..

मेल्स देख कर चीफ उछाल पड़ा.. चीफ मेल्स रीड करने लगा.. पढ़ते hi वह ख़ुशी उछाल पड़ा..

चीफ : गुड जॉब शेरनी.. तुम लौट आई तोह तुम्हारी टीम भी संपर्क में आ गयी.. कितनी शिद्दत से छह थी मुझे तुम्हारी, तुम्हारी टीम की..

चीफ मेल्स पढ़ने लगे.. कुछ मेल्स कोमल की थी. कुछ उसकी टीम मेंबर्स की थी. चीफ कोमल की मेल्स उसकी टीम को सेंड करने लगा..

अपने काम से फ्री होकर चीफ में वहां लगे एक बटन को प्रेस कर दिए.. अब कोई भी उसे डिस्टर्ब नहीं karta..jab तक वह खुद से सीक्रेट रूम से बहार नहीं निकलता..

चीफ वहीँ मौजूद एक स्माल किचन में घुस के खुद के लिए कॉफ़ी बनाने लगे.. आज बड़ी मुद्दत के बाद उन्हें अपने हाथ से कॉफ़ी बनाने में मज़ा आ रहा था..

कॉफ़ी बनाने के बाद वह कॉफ़ी मैग उठाये सीक्रेट रूम में टहलते हुए कॉफ़ी के सिप लेने लगे..


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कोमल को 4 बज गए the..ab तक वह 8 जगह तबाही पहला चुकी थी.. अभी उसका रुकने का मैं नहीं था.. अभी वह थकी नहीं थी. उसके अंदर की आग बुझी नहीं थी.. बुरे लोग अभी भी बहुत थे.. इतने सालों से बहुत सा कचरा इकठा हो गया था.. कोमल जितना ज़यादा हो सके कचरा साफ़ कर देना चाहती थी..

बड़ा प्यार था उसे अपने देश से.. अपने देशवासियो से.. घटिया और देश के दुश्मनो को मार के वह अपने देश के लाखों मसुमुन की ज़िन्दगी में सुख ले आना चाहती थी.

एक जगह से वह गुज़र रही थी. वह एक लम्बोर्गिनी गाड़ी में थी. गाड़ी उसने एक कोठी से हासिल करि थी.

अचानक से hi एक बुलेट कहीं से चली और लम्बोर्गिनी के अगले टायर में घुस गयी.. कोमल गाड़ी को बड़ी स्पीड के साथ चलाये जा रही थी. अचानक से हुए फायर को जान नहीं सकीय. टायर फ्लैट हुआ तोह गाड़ी स्पीड में होने के कारन उसके कण्ट्रोल से बहार होने लगी..

गाडी कई उन बैलेंस हुई और पलटिनियाँ खाने लगी.. ऐसे hi एक चक्कर के दौरान कोमल टूट चुके मिरर के अंदर से छलांग लगा कर बहार कूद गई..

सीटबेल्ट भी वह कूदते समय तुरंत खोल गई थी.. कोमल एक सुपर एजेंट थी. पहले भी काम नहीं थी. एक शेरनी थी. एक एक लम्हा एक्टिव रहना उसकी आदत थी. ऐसे खतरों से बच निकलना उसके लिए आम बात थी.

लम्बोर्गिनी दूर तक लुढ़काकहति चली गई थी. कोमल रोड से हटके एक खड़ा हथु घुटनो के सहारे झुकी बैठी गाड़ी को देख रही थी.

कोमल को फिर अपने पास hi किसी के होने का एहसास हुआ तोह कोमल ने सर उठा कर देखा.

देखा तो पाया चार व्यक्ति सर से लेके पैरों तक काळा कपड़ो के लिपटे हुए कमर पर हाथ रखे उसके सामने खड़े थे..

सब के सब कोमल को घूर रहे थे. कोमल उनको देख कर उठ कड़ी हुई और अपनी कमर पर हाथ रख कर उन्हें देखने लगी.

एक एन्ड से कोमल उनको घूर रही थी तोह दूसरे एन्ड से वह चरों व्यक्ति कोमल को.

फिर देखते hi देखते वह चरों कोमल के गिर्द खड़े हो गए.. चरों फाइटिंग पोजीशन में आ गए.. कोमल के होंटो पर मुस्कान आ गई चरों को ऐसे अंदाज़ में देख कर..

चरों फिर एक hi टाइम पर कोमल पर टूट पड़े.. चरों के मोह से अलग अलग किसम की आवाज़ें निकलने लगी. कोई घूमते उछालते हुए कोमल को पंच मारता तोह कोई किक.

कोई भी एक hi जगह पर ठहर नहीं रहा था.. सब बिजली की सी तेज़ी से अपनी जगह बदल रहे थे.. बड़ी महारत से वह कोमल के साथ लड़ रहे थे. पर कोई भी पंच या किक कोमल को नहीं लग रहा था.. लग्न तो दूर की बात है.. कोमल को कोई छू भी नहीं पा रहा था..

कोमल हसने लगी... क्या हुआ.. दुम्म कम् हो गया है क्या.. माँ के दूध का असर ख़तम हो गया है क्या.. या रगों में दौड़ रहा खून पानी हो गया है.

चरों रुक गए.. कोमल भी रुक गयी.. फिर कोमल हसने लगी. तोह चरों भी हसने लगे..

पांचू मिलकर हसने लगे.. कुछ पल पांचू की हंसी की आवाज़ गूंजती रही.. फिर एकदुम्म से पांचू इमोशनल होने लगे.. पांचू की आवाज़ में इमोशंस थे.. चरों कोमल के पुराने साथी थी. चरों लड़कियां थी..

चरों चीखती हुई कोमल से लिपट गई.. चरों के सिसकने की आवाज़ें आने लगी. कोमल एक शेरनी होकर अपनी आवाज़ को भीगने से न बचा सकीय..

एक न नाम vidya..dusri का नाम neha..teesri का नाम अनु.. चौथी का नाम रेनू था..

अनु : कहीं चली थी तुम.. हाँ.. भूल गई थी क्या तुम.. हमारी ज़िन्दगी में तुम्हारे शिव कोई नहीं है..

विद्या : जाने से पहले एक बार भी हमारे बारे में नहीं सोचा. जिसकी ज़िन्दगी का मकसद hi तुम्हारे साथ रहना है.. तुमने hi तो दी है हमें ये ज़िन्दगी..

रेनू : वर्ण हम अनाथो की ज़िनदगी में कोई रंग था hi कहाँ.. एक तुम hi तोह थी हमारा सब कुछ. एक दोस्त, एक बहन.. तुम से hi तोह हमारा परिवार थी कोमल.. क्यों छोड़ कर चली गई तुम हम सबको..

नेहा : मेरा भी नहीं सोचा तुमने.. जिसका तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं गुज़रता.. अपनी नेहा से इतनी दूर चली गई. कोई खबर भी नहीं दी अपनी..

चरों सुबकने लगी थी. कोमल को सबपर बड़ा प्यार आने लगा था..

कोमल : मैं कहाँ गई थी तुम सब से दूर.. मुझे तोह कुछ दिन hi पहले याद आया है सब कुछ.. वर्ण तोह बरसों तक मैं खुद से अनजान रही थी. रपो की वफादार बनकर उनकी सेवा करती रही थी इतने बरसों तक..

kyaaaaaaaaaaaaa..?? रपो की वफादार..

कोमल : हाँ! कुछ ऐसी hi बात है.. तभी तोह लौटने के बाद ऐसी तबाही मचा रही हों. कितने बरस मुझे मेरे देश की सेवा से दूर रहना पड़ा. कितना गंध फेल चूका है मेरे न रहने से.. ज़रूर तुमने भी कुछ नहीं किया होगा मेरे बाद.

चरों साद होक.. कोमल तुम्हारे जाने के बाद दिल hi नहीं लगता था किसी काम में. देश की सेवा में भी नहीं. तुम्हारी कोई खबर भी नहीं थी न हमारे पास. और फिर तुम्हारे होने से hi तोह हममे जोश भर जाया करता था. अब तुम लौट आई हो न तोह देखना कोई भी देश का दुश्मन ज़िंदा नहीं छोड़ेंगी हम सब मिलकर..

कोमल फिर उनके साथ मिलकर उन्हें खुद पर गुज़री बताने लगी. चरों एक गाड़ी में आयी थी. कोमल उनके साथ जाने लगी. अभी मिशन पूरा नहीं हुआ था.. बातों और मिशन की बातें करते हुए वह वहां से निकल पड़ी..

फिर सुबह होने तक पांचू मिल कर दिल्ली शहर में क़यामत बरपा करने लगी.. ऐसी तबाही लाने लगी जो आज तक कोई नहीं ला सका था..

पुरे दिल्ली शहर में कोहराम मच उठा था.. सबकी नींदें उड़ गई थी. पहले एक कोमल थी. अब पांच हो गई थी. पांचू मिलकर कुछ hi घंटो में वह कर गुज़री जो रॉ का कोई भी एजेंट नहीं कर पाया था..

ऐसे ऐसे पॉवरफुल लोगों को पांचू ने मार गिराया था.. जिन तक पोहंच पाना, जिन को मार पाना किसी के बस में नहीं था.. जिनपर हाथ उठाते हुए पुलिस या कोई और इदारे वाले सोच भी नहीं सकते थे.. या केवल सोच सकते थे. उनके खिलाफ कभी एक्शन नहीं ले सकते थे..

पांचू के साथ साथ मीडिया ने भी कोहराम मचा दिए था.. मीडिया कोमल के पुराने कारनामे भी रिपीट करने लगी थी.. बड़े बड़े अधिकारी शोर मचने लगे थे. कोमल को एक टेररिस्ट गर्ल बताने लगे थे.. उसे पकड़ कर शूट ों थे स्पॉट के लिए शोर मचा रहे थे..

कोमल अपने घर न जा कर अपनी फ्रेंड्स के साथ अपने पुराने एक ख़ुफ़िया ठिकाने पर जा पोहंची. पूरी रात गुज़र गई थी देश के दुश्मनो को फना करते करते.. दिन निकल आया था. सब थक भी चुकी थी.. सब एक साथ एक hi बीएड पर लेट कर सो गई...


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मैं षिमुना के साथ डाइनिंग टेबल पर बैठा हुआ था.. मैं सबसे पहले वहां पोहंचा हुआ था..

रुपाली आज फिर कल वाले ड्रेस में थी.. आज फिर वह ट्रांस से बहार थी.. आज फिर वह सबसे के लिए नौकरानी का काम कर रही थी.. एक बार फिरसे उसकी आँखों में आग दहकने लगी थी.

कुछ देर में एक एक करके सब आने लगे. मैं चाहता तोह सबसे अलग रहते हुए अपने ब्रेकफास्ट कर सकता था. पर मैंने ऐसा नहीं किया.. सबके सामने रहते हुए सबको पूरा पूरा एहसास करा देना चाहता था.. मेरे साथ सबने क्या किया था..

अपणु को सजा देने का ये सबसे बढ़िया तरीका होता है. अपणु से हुए बुरे बर्ताव पर सबको मारा पीटा तो जा नहीं सकता था.. आत्मगलनि में सब hi डूबे हुए थे.. ये भी सबके लिए बहुत बड़ी सजा थी.. ऐसी सजा जो अंदर hi अंदर खाने लगती है..

शरीर की मार से बड़ी मार होती है आत्मग्लानि..

सबका कसूर था.. मुझपर विश्वास न करने का..

सबसे पहले राजा ठाकुर अपने भाई करणवीर के साथ आये. मुझे देखा.. फिर अपनी अपनी चेयर पर बेथ गए. राजा ठाकुर भी आत्मगलनि में थे.. बूढ़े हो गए थे. उम्र की ऐसी स्टेज पर उनसे चूक हो गई थी. मेरे बारे में वह सही निर्णय नहीं ले सके थे.. मुझे दोषी मन था सबकी तरह..

करणवीर तोह hi पापी.. मेरे और सबके.. पर वह दिल के अच्छे थे. पर दिमाग के कच्चे.. जैसा गोवर्धन ने सबसे उसे नचाया.. वैसे नाचते गए.. आत्मग्लानि के साथ साथ और भी बहुत कुछ खो चुके थे करणवीर.. बहुत बड़ी सजा खुद अपने लिए चूसे करि थी करणवीर ने..

फिर पापा और माँ ए. मुझे देखा.. नज़र झुका कर अपनी अपनी चेयर्स पर बेथ गए.

उनकी झुकी नज़रें मुझे पसंद नहीं आयी थी. पर ऐसे hi तोह नहीं मैं उन्हें फ़ौरन माफ़ कर देता. या सब भूल जाता.. अभी तोह बात अटकी हुई थी..

विश्वास और अविश्वास पर... अभी तोह मैं बहुत कुछ ऐसा करने वाला था. जिस के कारण सबके विश्वास फिरसे डगमगाने लगते..

ये मेरी और से सजा भी थी और सबके लिए सीख भी.. विश्वास पर दुन्या तिकी है तोह परिवार भी..

बिना विश्वास के तोह कुछ भी नहीं होता.. न दुन्या सलामत रह सकती और न hi रिश्ते.

न पायल दी.. वह कल जो सोच रही थी. अब उनकी सोच में चंगेस था. एक बार फिरसे मैंने उनकी सोच में हलचल मचाई थी. माँ के साथ भी कुछ ऐसा hi सन था..

दादी बुआ और सबके साथ आई.. दादी दादा जी के साथ बैठी.. बुआ और सब मेरे गिर्द कल वाली सीट पर आ कर बेथ गई.. परिधि और देविका नहीं आई थी..

विक्रम चाचा और ऋचा परची को भी आज आने का कहा गया था.. वह भी आते हुए दिखाई दिए..

उनको देख कर सबकी आँखों में हैरत दर आयी.. सब के सब नौकरो वाले ड्रेस में थे.. ऋचा और परची बहुत शर्म फील कर रही थी.. मैंने रुपाली को देखा.. तोह उसकी आँखों में ऐसा सब देख कर कोई एक्सट्रा भाव नहीं आये.

जितना उसके साथ हो रहा था. वह भी बहुत था...

फिर पायल दी आयी.. उसकी ऑंखें देख कर लगता था.. वह साडी रात सोइ नहीं हाँ. लाल ऑंखें जो जगराते को बया कर रही थी.. वह मुझे देख कर इस बार पायल दी की नज़रें नहीं झुकी.. कुछ शान मेरी आँखों में घोर से देखा.. फिर अपनी चेयर पर बेथ गई..

षिमुना झुक कर मेरे कान के पास बोली : इसे क्या हुआ.. रात की पायल और अबकी पायल में कितना फ़र्क़ है..

दक्ष : क्या एक hi बार में सारा मटर सुलझा दूँ.. एक hi बार में सबके ब्रेन को ट्रांस में ला कर विश्वास लायक बना दूँ.. विश्वास ऐसे hi तोह नहीं बन जाता.. जब तक अंदर के सरे विचार पाक साफ़ न हो जाएँ, विश्वास नहीं बन सकता. रात हमारे दूर के पास आयी थी वह.. उसे सब पता चल गया है.. एक बार फिरसे उसका विश्वास डगमगाने लगा है..

षिमुना सुनकर एक बार तोह शर्मा गई..

षिमुना : तुम भी तोह रत जानवर बन गए थे. ज़रूर सबने मेरी चीख भी सुनी होगी.

मैं धीरे से हसने लगा..

दक्ष : चीख तो सबने सुनी थी तुम्हारी.. तुम भी तोह गाला पहाड़ कर चीखी थी.. कैसे सबके कानो तक न पोहंचती.

षिमुना ने मेरी कमर पर चुटकी काट दी.. फिर उसका मोह जैसे हैरत के बारे खुल गया.. मैं उसे देख के हैरान हुआ.. वह सामने देख रही थी.. मैं भी उधर देखने लगा..

मेरा मोह भी हैरत से खुल गया.

ये kyaaaaaaaaaa..

मैं स्टैर्स पर देखने लगा.. जहाँ से परिधि और देविका आ रही थी. दोनों एक hi जैसे ड्रेस में थी. एक जैसा मेकअप, एक जैसा हैरस्टीले एक जैसी चाल.. और तो और एक जैसी मुस्कान दोनों के होंटो पर थी..

सूरत में कुछ चेंज था.. वर्ण तोह दोनों को देख कर ऐसा लगने लगा था. जैसा दोनों ट्विन्स हों..

षिमुना बड़बड़ाई.. इन दोनों को क्या हुआ.. किसी फैशन शो में हिस्सा तोह नहीं लेने जा रही.. जो हवेली पर hi रिहर्सल करने लगी हाँ..

मैं बुआ, कुणाल, अक्षरा और उर्वशी हसने लगे..

दोनों परियां बानी एक hi अंदाज़ में सीढ़ियां उतरने के बाद चलती हुई हमारी और आने लगी.. बड़ी hi जानदार मुस्कान थी दोनों के चेहरों पर....


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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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Episode:55






वाया 3रद पर्सन




दक्ष हवेली के लॉन में टहल रहा था. लॉन में टहलते हुए वो लम्बे लम्बे सांस ले रहा था. वो कुछ घुटन सी महसूस कर रहा था. कुछ देर तक वो ऐसे hi टहलता रहा, पर उसके अंदर की घुटन काम होने में नहीं आयी.

एक जगा ग्रास पर वो पथ्य मार कर बेथ गया. एक ख़ास अंदाज़ जो मास्टर chi-fang जी ने दक्ष को सिखाया था. दक्ष अपने ब्रेन में एक खास पॉइंट पर अपना फोकस बनाये हवा को अपने अंदर खेंचता और फिर धीरे धीरे बहार निकलता. कुछ देर तक दक्ष ऐसा hi करता रहा. फिर वो सांस रोक रोक कर रुक रुक कर 3-3 4-4 सेकण्ड्स के वक्फे से सांस बहार निकलता..

दक्ष ऐसे hi बैठा रहा. धीरे धीरे उसके अंदर की घुटन काम होती चली गयी. वो शांत होता चला गया. दक्ष ने ऑंखें खोली तो अपने सामने षिमुना को देख कर हैरान रह गया.

दक्ष : तुम कब आई. मुझे खबर hi नहीं मिली.

षिमुना जो बड़ी देर से दक्ष को hi देख रही थी.

षिमुना : मुझे आये 40 मिनट होने वाले हाँ दक्ष. ये कोनसा टाइम है योग का. बात क्या है?

दक्ष : टाइम क्या हुआ है?

दक्ष ने अपने पेट में दौड़ रहे चुचु से अंदाज़ा लगाया, डिनर को बहुत समय बीत चूका है.

षिमुना: 11पं हो चुके हाँ. तुम तो जैसे सब कुछ भूले बैठे थे. बात क्या है

दक्ष ने षिमुना को देख और उठ खड़ा हुआ

दक्ष: कुछ नहीं शिमि यार. बस ऐसे hi, मैं कुछ बेचैन था इसलिए

षिमुना: किस लिए बेचैन था.?

दक्ष: छोडो, चलो अंदर चलते हाँ

षिमुना दक्ष को घूर कर देखने लगी.

षिमुना: तुम कबसे आना की करने लगे? दक्ष!

दक्ष: छोडो यार, हर बात बताने वाली नहीं होती

षिमुना हैरान रह गयी

षिमुना: हर बात बताने वाली नहीं होती! दक्ष ये क्या बकवास है, बताओ मुझे क्या बात है.

कुछ देर तक षिमुना पूछती रही और षिमुना दक्ष को फाॅर्स करती रही. षिमुना एकदम से इनविजिबल हुई और दक्ष एक अंदर समां गयी. दक्ष षिमुना को रोक नहीं सका ऐसा करने से. कुछ hi सेकेंड्स में षिमुना दक्ष के दिमाग से बहार निकल आयी.

षिमुना: तो तुम्हे अब रीलीज़ हो रहा है, जो कुछ कर गुज़रे हो, वो कुछ ज़यादा hi था.

दक्ष: अब तुमने जान hi लिया है, तो मैं क्या कह सकता हो.

षिमुना: दक्ष!

षिमुना "दक्ष" बोल कर खामोश हो गयी और दक्ष की आँखों में देखने लगी. दक्ष भी उसकी आँखों में देखने लगा. षिमुना को दक्ष की आँखों में दर्द दिखा.

षिमुना: तुम ऐसा करना नहीं चाहते थे, जूनून की हालत में ऐसा कर गुज़रे. जैसे बेसमेंट में किया था. वहां तो तुम खुद को किसी हद तक कण्ट्रोल में रख गए. पर किचन में रूम में खुद को कण्ट्रोल में नहीं रख सके. दक्ष! जहाँ तक मैं समझती हों, एक हिसाब से अभी तुम्हारा घर लौटने का समय नहीं हुआ था. तुम्हे कुछ समय लेट घर लौटना चाहिए था. ी क्नोव दक्ष! तुम्हे अपने परिवार से उतनी नफरत नहीं है, जितना तुम्हे अलका से दूर होने का ग़म है. उसकी जुदाई तुम आज भी सहन नहीं कर पा रहे हो. तुम प्यार से दूर भागते हो, पर तुम्हारे अंग अंग चीख चीख कर ये कह रहा है, कैसे भी करके तुम्हारी लाइफ पहले जैसी हो जाये. अलका फिरसे तुम्हारी लाइफ में शामिल हो जाये. पर जो कुछ तुम्हारे साथ हुआ है, जो कुछ सबने मिलकर तुम्हारे साथ किया है, वो तुम भूल कर भी नहीं भूल प् रहे. बिकॉज़ तुम अलका को खो चुके हो. एक वही थी, जो तुम्हे सबसे बढ़कर प्यारी थी. मैंने तुम्हारे दिमाग की, दिल की गहराई में उतर कर देखा है दक्ष!. अलका से दूरी तुम्हारी मौत है. ऐसा तुम्हारा अंग अंग बोल रहा है, तुम्हारे दिल की एक एक धड़कन ऐसा बोल रही है. पर तुम अलका को पाने के साथ साथ अलका के हुए बर्ताव को लेके भी दुविधा में हो. कभी तुम चाहते हो, अलका तुम्हे वापिस मिल जाये. कभी तुम चाहते हो, जब अलका कभी तुम्हे मिले, तो तुम अलका के साथ ये करो, अलका के साथ वो करोगे. पर इस सब के बावजूद तुम चाहते हो, अलका कैसे भी करके फिरसे तुमसे जुड़ जाये.

षिमुना सांस लेने को रुकी और आज बहुत समय के बाद दक्ष ने षिमुना को अलका के लिए बोलने से रोका नहीं.

षिमुना फिरसे बोली

आज जो हुआ, उसमे साडी मेरी गलती है दक्ष. फर्स्ट टाइम बिना किसी की सलाह के मैंने अपने हिसाब से तुम्हे वो जंगली जड़ीबूटियां खिला दी थी. ये सब उसी के कारन है दक्ष. तुम देखने में नार्मल लगते हो, पर हो नहीं. जब भी तुम उस घटना को याद करते हो तो तुम जुनूनी होने लगते हो. तुम्हारी ट्रैंनिंग भी अधूरी रह गयी है न इसलिए भी ऐसा सब हो जाता है तुमसे. पर एक बात याद रखो. गुरु जी ने कहा था, तुमसे कुछ गलत नहीं हो सकता. इसका एक मतलब ये भी बनता है दक्ष. कुछ गलत हुआ तो ज़रूर उसके बाद तुम ज़रूर कुछ ऐसा करोगे जो तुम्हारे पहले के किये गलत को बढ़िया से सही भी कर देगा. मुझे तो ऐसा लगता है. जैसे कुछ ाचा होने वाला हो.

दक्ष तो बस षिमुना को देखता hi रह गया था. इतनी डिटेल में दक्ष बारे किसी ने बात नहीं की थी. षिमुना ने भी पहले कभी ऐसी बातें नहीं की थी..

दक्ष ने एक लम्बी सांस ली.. बोलै कुछ नहीं. वो किचन में जो हुआ उसके बारे में hi सोच रहा था. माँ तो माँ होती है, वो न पहले कभी ऐसा था, न अब था. हाँ पर जो दर्द मिला था. जितनी ज़िल्लत मिली थी, उसी का परिणाम था. समुद्री जड़ीबूटियां न खाई होती तो शायद वो खुद पर काबू पा जाता. पर उसके अंदर खून में जैसे शरारे से दौड़ रहे थे. एक तो नारी स्पर्श में आते hi वो आनंदी सा होने लगता था. इसलिए भी कुछ ज़यादा बहक गया था.

दक्ष: टेम्पल से निकलने के बाद मैंने योग पर धयान भी काम कर दिया. अब से मुझे योग में कोताही नहीं करनी है..

षिमुना दक्ष को नार्मल देख कर खुश हुई. दक्ष को गले से लगा कर एक किश किया. दक्ष ने भी षिमुना के रसीले होंटो का रास खड़े खड़े थोड़ा सा चूसा, फिर छोड़ दिया..

दोनों एक दूसरे की बहन में बहन डाले अंदर जाने लगे. जैसे hi षिमुना और दक्ष कमरे में दाखिल हुए.. कमरे के अंदर रोहिणी सिंह एक शाल लपेटे कड़ी हुई थी.

दोनों उसे देख कर अचंबित हो गए. दोनों उसे देख कर एक दूसरे को देखने लगे. रोहिणी सिंह चलती हुई दूर के पास पोहंची और दूर को लॉक कर दिया.

षिमुना और दक्ष रोहिणी सिंह को हैरत भरी नज़रों से देख रहे थे. रोहिणी सिंह की आँखों में देख कर दक्ष का लगा, जैसे उसकी माँ का मानसिक संतुलन अपनी जगा पर सलामत नहीं है. वो चलती हुई दक्ष एक पास पोहंची और दक्ष की आँखों में देखते हुए बोली.

रोहिणी: तुम्हे मैं एक नारी लगती हों न. सुप्रिया के सामने तुमने मुझे अपनी बहन में भर कर मुझे अपनी गफ के जैसे ट्रीट किया था न.

षिमुना के माथे पर पसीने के कतरे चमकने लगे. उसने दक्ष के बाज़ो को कसके पकड़ लिया. रोहिणी सिंह की मेंटली कंडीशन देख कर वो टेंशन में आ गयी थी.

ऐसी hi हालत कुछ दक्ष की भी थी. उसने ऐसा सब नहीं सोचा था. उससे भूल हुई थी, तभी तो उसे घुटन सी होने लगी थी.

रोहिणी: मैं दो जवान बेटियों की hi माँ नहीं हों, दो दो जवान बेटे भी हाँ मेरे. तुम्हे कहा, मैं आज भी वैसी hi हसीं हों, जैसी अपनी जवानी के समय पर हुआ करती थी. तुमने ऐसा कहा, ज़रूर तुम्हे मैं पसंद आई होंगी. ज़रूर तुम्हे मेरा ये सुंदर शरीर पसंद आया होगा. लोओओओओओ दीखहोओओओ

रोहिणी सिंह ने ऊपर लपेटी शाल एक झटके में उतार कर फ़ेंक दी. निचे रोहिणी सिंह ब्रा और पंतय के ऊपर ट्रांसपैरंट निघ्त्य पहनी हुई थी. जो उसके घुटनो तक थी.

षिमुना काँप उठी तो दक्ष दो कदम पीछे हैट गया.

रोहिणी: क्यों? पीछे क्यों हैट गए तुम. मेरा ये शरीर तुम्हारे लिए एक माँ का शरीर नहीं है न. तुम्हारे लिए तो ये सिर्फ एक शरीर है. जो केवल भोगने के लिए है. एक नारी तो होती hi एक मर्द के भोगने के लिए है. तुम्हे मई ऐसे पसंद हों, तो ऐसे hi सही. तुम मेरे बेटे बनकर मुझे न मिल सको. तो जैसे भी मिल सको.. मुझे मंज़ूर है. तुम्हे बुआ पसंद आ गयी है, तू माँ को भी पसंद कर लो. पर मुझसे दूर मत जाओ. मुझसे नफरत मत करो. मुझसे भूल हुई, एक माँ से भूल हुई. एक माँ को अपने दूध पर शक नहीं करना चाहिए था. पर कर गयी. उस कुत्तिया ने षड़यत्र hi ऐसा रचा था. मैं क्या सब hi उसका शिकार बन गए. किस किस ने तुमपर शक नहीं किया. पायल.. तुम मुझसे भी ज़यादा पायल से प्यार करते थे. अलका.. तुम अलका से भी मुझसे ज़यादा प्यार करते थे. जब वो दोनों तुझपर शक कर गयी तो मैं तो उन दोनों के यकीं पर यकीं कर बैठी. रुपाली ऐसी हो सकती है, मुझे अंदाज़ा नहीं था. एक मर्द के चरित्र पर शक किया जा सकता है. पर एक नारी के चरित्र पर नहीं.. जवानी दीवानी होती, जवानी में किसी से भी गलतियां हो सकती है. बास यही मुझसे भूल हुई.. शोर मचा, सब सुना तो, पायल और अलका की बातों पर, रुपाली के आंसुओं पर, उसकी हालत पर कैसे शक करती मैं. दूध पर यकीं की बात करते हो तो पायल को भी पिलाया है मैंने दूध. तुझपर शक न करती तो उसपर करती. एक बेटे पर शक न करती तो एक बेटी को झूठा कहना पड़ता.. मैं किस साइड जाती. उस समय तो साडी सुध बुध hi खो बैठी थी मैं...

रोहिणी सिंह की हालत बहुत ख़राब थी. उसका रोना देख कर उसकी दिमागी हालत का अंदाज़ा लगाया जा सकता था. दक्ष पहले hi गिलटी फील कर रहा था. बास शो नहीं करवा रहा था. खुद के अंदर के बदलाव के कारन भी परेशां था. अब माँ की बातें सुनी तो ऐसा लगा, जैसे पैरों के निचे से ज़मीन खिसकने लगी हो

रोहिणी सिंह उसी टोन में: मुझे बेरा वापिस चाहिए. एक hi तो शेर बीटा था मेरा. जिसे शाज़िशियों ने मुझसे दूर कर दिया. अब जैसे मेरे बेटे की छह की छह, वही मेरी छह.. तुझे मैं ऐसे मीलों या वैसे. बास मेरे सीने से लग जा. या मुझे अपने सीने से लगा ले. मुझमे समां जा, या मुझे खुद में सामने दे.

दक्ष तो स्तब्ध खड़ा माँ की बातें सुन रहा था. दक्ष कुछ न बोलै, न आगे बढ़ा.

रोहिणी सिंह एकदुम्म से दक्ष के पैरों में गिर पड़ी.. दक्ष के पेअर थाम कर उससे माफ़ी मांगने लगी.. पर दक्ष बड़ी तेज़ी से दो कदम पीछे हैट गया. षिमुना की तो चीख hi निकल गयी थी..

रोहिणी: मुझे माफ़ करदे दक्ष बीटा. एक माँ को माफ़ करदे. भूल हुई मुझसे दक्ष बीटा. मैं तेरी गुनहगार हों, मुझे शमा करदे..

अब की बातों से रोहिणी सिंह की हालत और भी बिगड़ने लगी थी. दक्ष को लगा, अब उसने अपनी माँ को न संभाला तो ज़रूर उसके साथ कुछ गलत हो जायेगा.. दक्ष तड़प कर आगे बढ़ा, झुका और अपनी माँ को कंधो से थाम कर खड़ा कर दिया. रोहिणी सिंह का बदन ठंडा पड़ने लगा था.

दक्ष: मा.. maaaaaaa...maaaaaaaa..

रोहिणी सिंह ने खुद को दक्ष की बहन में पाया. तो धीरे से उसके होंठ हिले. "मुझे माहाफ़...."

फिर उसका सर एक तरफ ढलक गया.. वो बेहोश हो गयी थी. उसने डिनर भी नहीं किया था. दिन के समय और शाम के बाद दो बार दक्ष को गलत हालत में देखा था. तब से उसकी मेंटली कंडशन थोड़ी थोड़ी बदलने लगी थी. ऐसा बन कर लौटेगा उसका बीटा. उसने सोचा नहीं था.

दक्ष ने रोहिणी सिंह को गॉड में उठा कर बीएड पर लिटाया..

दक्ष: षिमुना माँ के अंदर समां कर माँ को चेक करो.

षिमुना: वो तो तुम भी चेक क्र सकते हो

दक्ष: जितना कहा है, अभी उतना करो

दक्ष सख्त लहजे में बोलै तो षिमुना ग़ायब होकर रोहिणी सिंह के अंदर समां गयी. कुछ hi देर में वो वापिस पहले जैसी हालत में हो गयी..

दक्ष: क्या बात है.. माँ बेहोश क्यों हुई.. और माँ ऐसे ठंडी क्यों पद रही है

षिमुना नराजा होते हुए: तुम्हारे कारन. सुबह थोड़ा सा नाश्ता किया था, उसके बाद न लंच किया और न hi डिनर. साथ में तुम्हारे हुए दोनों काण्ड में उनकी मेंटली हेल्थ बिगड़ दी है. चिंता की ज़रूरत नहीं है. मैं पानी और कुछ खाना ले कर आती हों. तुम प्यार से खिलाओगे तो ठीक हो जायेंगे.

षिमुना कमरे से निकली और कुछ देर लौट भी आयी.

दक्ष: सॉरी माँ! मैं जैसा भी था, हमेशा से एक ाचा बीटा बनकर रहने की कल्पना की है. न बुरा कभी बना, और न hi कभी बनने की सोची. सॉरी मेरी नफरत ने आपकी ये हालत कर दी.

षिमुना ने ठंडा पानी रोहिणी सिंह के चेहरे पर डाला तो वो कसमते हुए होश में लौटने लगी. दक्ष को देखा तो हाथ जोड़ने लगी.

रोहिणी सिंह: शमा कर---

दक्ष ने रोहिणी सिंह के हाथ एक हाथ से थाम लिए. दूसरे हाथ से माँ के मोह को बंद कर दिया.

दक्ष: माफ़ी मुझे आपसे मांगनी चाहिए. एक बेटे को कभी भी वो नहीं करना चाहिए, जो मैंने किया... हो सके तो आप मुझे शमा कर दें.

षिमुना: माँ जी, जो भी हुआ, उसमे दक्ष की भी कोई गलती नहीं है. दक्ष को आप सब से पैर न होता तो लौटता hi क्यों. अब जो अपने hi परिवार से प्यार करता हो, वो कैसे उनका अपमान कर सकता है. कैसे उन्हें दर्द दे सकता. जबकि वो साडी सच्ची जनता भी हो. देखा नहीं था क्या आपने. करणवीर कितने बड़े दोषी थे. फिर भी दक्ष ने उन्हें न केवल माफ़ कर दिया. बल्कि उन्हें बदला लेने का अवसर भी दिया..

षिमुना की बात सुनकर रोहिणी सिंह के चेहरे का उतरा रंग वापिस लौटने लगा. उसकी आँखों की चमक भी वापिस लौटने लगी. षिमुना फिरसे बोली

षिमुना: बात ये है, आपने सुना होगा, ानोथेर प्लेनेट से आये हुए के बारे में खरब डीके से जोड़ी जा रही हाँ.. मैं वही हो, मैं दूसरे प्लेनेट से आई हों..

रोहिणी सिंह अब हैरान होने लगी

षिमुना: मुझसे एक गलती हुई, दक्ष को समंदर की कुछ ऐसी रेयर जड़ीबूटियां खिला दीं, जिसके कारण ये ऐसा बन गया है. कभी कभी इसके अंदर का जानवर बेकाबू होने लगता है. ये सब उसी के कारन हुआ है. मैं इसमें बराबर की कसूरवार हों.

रोहिणी सिंह झटके से उठी और दक्ष को गले से लगा कर रोने लगी.

रोहिणी: दक्ष बीटा तुमने मुझे माफ़ तो कर दिया न. मैंने अपने दूध पर शक किया.

दक्ष की टोन माँ के बिगड़ी हालत पर साद हो गयी थी. दिल में सच्चा प्यार था, जो वापिस लौट रहा था.

दक्ष: माँ, माफ़ी तो मुझे आपसे मांगनी चाहिए. पहले जो हुआ, वो षड्यंत्र था. मैंने जो किया वो खुद से किया. मेरी गलती बड़ी है. आप मुझे शमा कर दें. एक माँ का अपमान हुआ है मुझसे.

रोहिणी का दिल का दर्द का चूका था. उसे उसका बीटा वापिस मिल गया था. वो दक्ष की आँखों में देखते हुए उसके चेहरे को चूमने लगी.

जब षिमुना खाने लेने गयी थी. तब तक दक्ष ने शाल उठा कर अपनी माँ के शरीर पर लपेट दी थी. जो भी था, पर माँ के शरीर को देख कर उसके अंदर सनसनी सी ज़रूर दौड़ गयी थी. ये एक नयी मुसीबत थी.. जो उसकी लाइफ का एक हिस्सा बन कर रह गयी थी. पर वो नार्मल भी था.

षिमुना और दक्ष मिलकर रोहिणी सिंह को खाना खिलने लगे. रोहिणी सिंह बार बार दक्ष के गालों को चुम रही थी. बरसों बाद बीटा मिला था. उसके हाथ से खा रही थी. साथ में एक गुलाब जैसी बहु भी मिल गयी थी. बातें करते हुए, प्यार बांटते हुए खाना भी चलता रहा.

खाना ख़तम होने में कुछ देर बाकि थी. एक फायर की आवाज़ सुनाई दी. कुछ देर में कई फायर हुए.. फिर तो जैसे जुंग का महुअल बन गया. दक्ष और षिमुना तुरंत उठ खड़े हुए..

दक्ष: माँ आप दूर को अंदर से लॉक कर लें. मैं और षिमुना अभी लौट कर आते हाँ.

रोहिणी ने दक्ष को अपने सीने से लगा लिया

रोहिणी: नहीं. अब मैं अपने बेटे को दूर नहीं जाने दूंगी.

दक्ष: माँ आप मुझपर धयान दिए रखेंगी तो हमारे पुरे परिवार के साथ कुछ गलत हो जायेगा. '

रोहिणी सिंह ने सुना तो घबरा कर दक्ष को छोड़ दिया.. इस बीच षिमुना कमरे से निअक्ल कर ग़ायब हो चुकी थी.

कोठी में, कोठी के बहार फायरिंग के साथ साथ चीखों की आवाज़ें भी सुनाई दे रही थी..

दक्ष बहार निकला तो रोहिणी सिंह ने दक्ष को पीछे से देखते हुए, भगवन से परपथना करते हुए दूर बंद कर दिया. आज बोहत दुःख झेलने के बाद उसे असीम आनंद भी प्राप्त हुआ था. वो अंदर तक निहाल थी. पर अब फायरिंग के चलते चिंतित भी थी..

 
हाहाहा..

लास्ट का तो पता नहीं. पर कहानी के बीच में ज़रूर बहुत कुछ हो सकता है. ऐसे hi रिव्यु देते रहेंगे तो पता चलता रहेगा, कहाँ मिस्टेक हुई है.

पर पहले का अपडेट कुछ अधूरा था. और आपने दक्ष के बारे में सब नहीं पढ़ा था.

ये कहाँ लिखा है, दक्ष से कुछ गलत नहीं हो सकता. इंसान खता का पुतला है, जोश, नफरत और जूनून में कुछ भी कर जाता है.

सम्राट बना है.. पर रियल में बनकर दिखाना पड़ेगा..

अभी तो सम्राट का टाइटल अपने नाम किया है उसने.. दूसरों ने उसे सम्राट के ख़िताब से नवाज़ा नहीं है.
 


Episode
:56



शकुंतला ने बाओ, रपो और अंडरवर्ल्ड वळून को खबर कर दी थी. डीके लौट आया है, वो इस समय अपनी हवेली पर मौजूद है.

डीके से भी बढ़कर वैल्यू थी षिमुना की. डीके के साथ रहती थी षिमुना. ानोथेर प्लेनेट से जुडी साडी इन्फो. कोई भी इस मोके को खोना नहीं चाहता था.

जैसे hi ये खबर सब तक पोहंची. सब ने अपनी अपनी फील्डिंग राजा ठाकुर के इलाके में सेट करनी शुरू कर दी. देखते hi देखते हवेली के आस पास के एरिया में कई ऑर्ग के एजेंट्स ाँ पोहंचे. वहां सब ने एक दूसरे को देखा तो, खबर देने वाले पर बड़ा गुसा आया. सब पहले यही समझ रहे थे, डीके के हवेली पर होने की खबर केवल उनको hi है. पर शकुन्तला बड़ी कुट्टी चीज़ थी. सब को एक साथ खबर कर दी थी उसने. वहां उसके भी आदमी मौजूद थे. जो रुपाली और सोनाली के लिए ए थे.

वो सबकी नज़रों से दूर एक जगा पोजीशन लिए हुए थे.

सोहपा एक बाज़ो से इन्जुरेड लाइव सब एक स्क्रीन पर देख रही थी. कुछ अछि अवस्था में थी वो. मिशन को लीड वही कर रही थी. ीबन मार्श उसके कनेक्ट में था. वो भी इस समय हवेली के आस पास अपने एजेंट्स के साथ मौजूद था. एजेंट्स में देशी बिदेशी सभी मौजूद थे. ीबन मार्श सोफिए के घायल हो जाने के बाद से बड़े घुसे में था. उसकी बॉस का एक हाथ बुरी तरह से घायल हो गया था. ीबन मार्श ये सोच कर किसी भी हद तक जाने को तैयार था. वो जनता था, अलका की माला के कारण सोफिए इस हालत को पोहंची है और अलका का कनेक्शन भी डीके हवेली से था. डीके से था.

सोफिए: मैं महसूस कर रही हो ीबन तुम कुछ घुसे में हो.. कूल डाउन ीबन.

ीबन: मैडम! जबसे आप को दर्द में देखा है, आपको घायल देखा है, तब से मुझे किसी पल चैन नहीं है. जब तक मैं किसी का खून न बहा लून, मुझे चैन नहीं आएगा. बहुत समय से मई घुटन में जी रहा हों.

ीबन मार्श की बात सुनकर सोफिए बड़े मीठे स्वर में, बड़े धीमे लहजे में बोली

सोफिए: ीबन मुझे गर्व है तुम पर. तुम मेरे सच्चे साथी हो. पर यहाँ गुसा नहीं चलेगा. हमें डीके या शिमि को अपने अंडर लेने के लिए ठन्डे दिमाग से सोचने की ज़रूरत है. डीके या फिर शिमि. ये दोनों नहीं तो डीके फॅमिली का कोई मेंबर मुझे मेरी कस्टडी में चाहिए.. तुम जानते हो न ीबन. हमारे लिए ये मिशन कितना इम्पोर्टेन्ट है. कितने महीनो में हम हाथ पर हाथ धरे बैठे हाँ. अब मौका मिला है तो इसे हम खो नहीं सकते.. कैसे भी करके डीके को कब्ज़े में लेना है. उसके लिए सावधानी और हिम्मत के साथ साथ शांति की भी ज़रूरत है. इसलिए कलम डाउन.

अभी सोफिए और ीबन बात कर hi रहे थे. एक फायर हुआ.

सोफिए: ये किस उल्लू के पाते ने फायर कर दिए.

ीबन भी हैरान हुआ. वो अपने सामने लगी स्क्रीन्स पर अपने आदमियों की पोस्टिव देखता हुआ बोलै: ये फायर हमारे आदमियों ने नहीं किया है मैडम!.

उसी समय कुछ फायर और हुए, उसके बाद तो जैसे सेंकडो गन्स का मोह hi खुल गया.

सोफिए चीखती हुई: ीबन मूव फ़ास्ट.. लगता है, खेल गलत तरीके से खेला जाने लगा है. ज़रूर इन्फो देने वाले ने अपना कोई प्लान सेट करके रखा है. हुर्री उप! जो फ़ास्ट.. हवेली के पास जो एजेंट्स हाँ, उन्हें तुरंत कैसे भी करके हवेली में घुसने का आर्डर दे दो... साथ hi स्पेशल हेलीकाप्टर को भी रेडी रहने को बोल दो. dk,shimi को फंड आउट करो. कब्ज़े में करने की कोशिश करो. न आ सकें तो डीके की माँ या बहनो में से किसी को भी साथ लेकर तुरंत निकल पदों. ये भी कर गए तो बड़ी बात होगी.

ीबन मार्श फ़ौरन हरकत में आया और गाड़ी से निकल कद दौड़ पड़ा. वो और उसके आदमी बुलेटप्रूफ जैकेट्स पहने हुए थे.

सोफिए रेगुलर इस मिशन को लीड कर रही थी. एक एक बात जान कर वो ीबन मार्श को गाइड कर रही थी. घायल थी, पर शारीरिक तुअर पर.. मानसिक तौर पर वो पहले जितनी एक्टिव थी. इस समय उसका दिमाग बिजली की सी स्पीड से दौड़ रहा था. मोके पर बड़े सही फैसले कर रही थी..

उसी समय कहीं से एक राकेट लांचर से फायर हुआ और हवेली की एक दीवार धमाके से उड़ गयी.. कुछ देर में दूसरी ऑर्डर से भी राकेट लांचर से फायर हुआ और दूसरी साइड वाली दीवार भी उड़ गयी..

धुंए और मिटटी की धुल से हवेली के गार्ड्स को दिखाई देना बंद हो गया..

सोफिए: जितनी जल्दी हो सके, हवेली में घुसो ीबन. मिशन हमारी तवक्कु से भी ज़यादा हार्ड है.. इसे पूरा करना हर सूरत में..

वहीँ रपो और अंडरवर्ल्ड वाले भी सुरप्रीसेड रह गए थे. पहले तो समझ नहीं सके, फायरिंग की शुरुआत किसने की.. कोण ये ब्लास्ट कर रहा है.. पर जब जुंग छिड़ hi चुकी थी तो वो भी मैदान में कूद पड़े.. शकुन्तला साली जुंग लड़ना नहीं जानती थी. पर दिमाग बहुत था उसके पास.. दो साइड्स में उसके एक एक आदमी ने फायरिंग करके सबको एक दूसरे से भिड़ा दिया था. दूसरी दोनों साइड्स में उसके आदमी हवेली की दीवारें ब्लास्ट करते हुए ख़ामोशी से हवेली की ऑर्डर बढ़ने लगे. उन्हें कोई परेशानी नहीं बानी और वो हवेली के अंदर घुसते चले गए..

वहीँ रपो वळून के पास स्पेशल एजेंट्स तो थे, पर कोई सुपर एजेंट नहीं था. जो थे वो सरे मार्गरेट के तांडव के चलते नए सिरे से रपो को स्ट्रांग बनाने में व्यस्त थे. रपो वळून ज़यादा तर लोकल गुंडे को हिरे किया था डीके के लिए, षिमुना के लिए. वो भी समझते थे, ये बाज़ी वो नहीं जीत सकते. फिर भी मैदान में कूद पड़े थे.

सभी गैंग्स वाले हवेली की और दौड़ पड़े...

षिमुना दक्ष से पहले कमरे से निकल कर गायब हो गई थी. वो बड़ी स्पीड के साथ हवेली से बहार निकल ली थी. दक्ष भी बिना देरी के अपनी माँ को रूम अंदर से लॉक करने को बोल कर निकल पड़ा. फायरिंग के शोर के साथ हैली के मकीनो का शोर भी सुनाई दे रहा था. सब कमरों से निकल कर चीखने लगे थे. सब घबरा गए थे. बाद में हुए धमाकों में तो सब hi दहल उठे.

दक्ष को पहले बुआ दिखी

दक्ष: बुआ जनि आप सबको एक साथ करें. तब तक मैं खबर लेकर आता हों. हमले करने वाला को हाँ..

बुआ: बेतु! मेरा दिल बहुत घबरा रहा है

दक्ष: बुआ जनि, आप प्ल्ज़ सब को लेकर निचे पोहंचे.. मैं यहाँ ज़यादा देर ठहर नहीं सकता.. आप से बात नहीं कर सकता. मैंने कहा था न, आपसे मेरे चलते आप सब भी खतरे में आ जायेंगे. खतरा सर पर आएं पोहंचा है. बातों में समय वास्ते न करें. जो कहा है वो करें. दक्ष इतना बोल कर दौड़ता हुआ निचे जाने लगा. बुआ भी सभी कमरों से सबको साथ मिलाये दक्ष वाले कमरे में जाने लगी.

जैसे hi दक्ष निचे पोहंचा. वहां राजा ठाकुर के साथ करणवीर और सिक्योरिटी चीफ दक्ष मिले..

दक्ष: दादा जान, हमारा हवेली से जाने का समय हो चूका है. आप सब खुफया रस्ते से हैली से निकलने की कोशिश करें.

दक्ष जबसे हवेली में आया था, पहली बार राजा ठाकुर से बात की थी. एक बार तो राजा ठाकुर की आँखों में नमी सी दौड़ने लगी. पर वो खुद पर काबू पते हुए हाँ में सर हिला गए.. करणवीर का हाथ थाम कर बोले

राजा ठाकुर: चलो करणवीर परिवार को सुरक्षित करते हाँ.

हवेली के अंदर फायरिंग का शोर बढ़ा तो दक्ष सिक्योरिटी चीफ के साथ भागता हुआ हवेली की बिल्डिंग से बहार जाने लगा.

बहार जाते hi दक्ष षिमुना के दिमाग में पोहंचा.. षिमुना गायब अवशता में एक मशीन गन लिए टूटी दीवार से कुछ फैसले पर कड़ी हुई बहार फायरिंग कर रही थी. वो चाहती तो बिजली की स्पीड से उड़ती हुई सबको मार सकती थी. पर अभी इसकी ज़रूरत नहीं समझी थी उसने..

दक्ष: षिमुना तुम फायरिंग बंद करो और हवेली से दूर खड़े हुए के पास जा पोहंचु. मैं उनके दिमाग में घुस कर सबको फना करता हों.

षिमुना ने तुरंत दक्ष की बात मानी.. वो पालक झपकते hi हवेली से दूर जाने लगी. बहार कुछ फैसले पर खड़े हुए गुंडों के पास पोहंची. उनमे से एक बोलै..

"भागो, अंदर से फायरिंग होना बंद हो चुकी है.."

दक्ष उसके दिमाग में घुसा तो पता चला.. ये लोकल गुंडे हाँ और सबको सोनाली रुपाली के लिए हिरे किया गया है. दक्ष उसके दिमाग के रहते हुए उसकी गन का रुख उसके साथियों की ऑर्डर करते हुए फायरिंग करने लगा. देखते hi देखते उस साइड वाले ढेर होने लगे.. वो सब सामने hi ऑर्डर फोकस बनाये हुए थे. अपने hi साथियो में से कोई उन्हें शूट कर देगा. ये किसी ने सोचा नहीं था. देर नहीं लगी और वहां से सरे गुंडे मारे गए.. दक्ष वहां से षिमुना के पास पोहंचा. षिमुना दूसरी ऑर्डर की टूट चुकी दीवार के बहार कड़ी हुई थी. अब उसके हाथ में एक तलवार थी. षिमुना अदृश्य अवस्था में वहां के गुंडों को काट रही थी. दक्ष जब वहां पोहंचा तो षिमुना सब को काट चुकी थी.

षिमुना: दक्ष कुछ गुंडे अंदर घुस चुके हाँ

दक्ष: क्याआआआ??

षिमुना: हैरान बाद में हो लेना.. पहले उनको ख़तम करो. मैं दुसरो को देखती हों.

उसी समय ऊपर से एक हेलीकाप्टर हवेली की छत पर से गुज़रता चला गया.. दक्ष ने देखा, तो देख कर उसके रोगटे खड़े हो गए. हेलीकाप्टर हवेली की छत पर से गुज़रता हुआ गया था. 2 सेक् के लिए वो छत पर रुका था. पहले से hi लटक रही रस्सियों से दो एजेंट्स 'जाने वो किस गैंग के थे' हवेली की किसी महिला को अपने साथ लिए वहां से दूर जाने लगे.

मैं चीख पड़ा" शिमि कहाँ हो तुम.. ऊपर देखो

मैं एक बार तो भोखला गया था. फायरिंग के बेपनाह शोर में पहले तो मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया था. अब षिमुना को पुकारा तो कैसे वो मेरी आवाज़ सुन सकती थी.. मैं हवेली के अंदर भागता हुआ षिमुना के दिमाग में जा घुसा..

दक्ष: ऊपर हेलिसोप्टेर को देखो. किसे लेके जा रहे हाँ वो

षिमुना: अभी देखती हों.

अब षिमुना के पास कोई चारा नहीं था फ्लाई करने के शिव..

दक्ष सिक्योरिटी चीफ के पास गया..

दक्ष: हवेली के अंदर जो भी घुसा है, उसे जाने न दिया जाये. सब को टुटी दीवारों पर लगा दो. जो भी बहार का दिखा. बिना सोचे समझे उसे उदा दो.

दक्ष फिर राजा ठाकुर के दिमाग में घुसा.. जो ख़ुफ़िया रस्ते से सबको साथ लेकर जा रहे थे. दक्ष राजा ठाकुर के दिमाग में रहते हुए चेक करने लगा उसके साथ साथ कोण है. पर उसे वहां देर हो रही थी. दक्ष राजा ठाकुर के दिमाग से निकल कर षिमुना के दिमाग में पोहंचा. षिमुना हेलीकाप्टर से दूर रहते फ्लाई कर रही थी.

रस्सियों से लटक रहे जल्द hi हेलीकाप्टर के अंदर पोहंच चुके थे. हेलीकाप्टर के दोनों डोर्स बंद थे.

दक्ष: तुमने अभी तक कुछ किया क्यों नहीं. किसे ले रहे हाँ वो किडनैप करके

षिमुना बेबसी से बोली: दक्ष हेलीकाप्टर बाओ वलु का है. ीबन मार्श जिसके साथ चीन में पन्गा हुआ था. वो भी मौजूद है हेलीकाप्टर में.. सब के सब गैस मास्क में हाँ. हेलीकाप्टर के अंदर कोई गैस छोड़ी गई है. जैसे hi मैं हेलीकाप्टर के पास पोहंची तो गैस के कारण मुझे चक्कर आने लगे. मैं हेलीकाप्टर के पास जाऊँगी तो बेहोश हो जाउंगी. ऐसा मुझे लगा. पायल है, जिसे किडनैप किया जा रहा है.

दक्ष: kyaaaaaaaaaaa?? पायल दी.... पर वो छत पर क्या कर रही थी..

षिमुना: मैं नहीं जानती दक्ष.

षिमुना की आवाज़ में बेबसी और घुसा बहुत था. लाइफ में पहली बार वो खुद को बेबस महसूस कर रही थी.

'

दक्ष: तुम्हारे पास कुछ है क्या

शूइम्युना: क्या?

दक्ष: कुछ भी ऐसा वैसा.. जससे हेलीकाप्टर को हिट किया जा सके

षिमुना: हाँ एक खंजर है मेरे पास.

दक्ष: तो फ़ेंक के मारो पायलट को. तोड़ दो शीशा. साडी गैस बहार निकल जाएगी. फिर तुम्हारे लिए कोई परेशानी नहीं रहेगी.

षिमुना: ओह्ह हैं. ये तो मैंने सोचा hi नहीं. अभी पायलट का सर उड़ाती हों.

षिमुना तेज़ी से घूम कर राइट साइड में पायलट वाली साइड आयी. और खंजर हाथ में लिए फेंकने लगी.

जैसे hi षिमुना का हाथ खंजर फेंकने के लिए उठा. उसी पल पायलट ने खंजर एक हाथ उठा दिया. उसके हाथ में रिमोट था.. ये देख कर मैं और षिमुना दोनों दिल मासूस कर रह गए..

इस बीच मैंने पायल दी के दिमाग के जाने की कोशिश करि थी. पर पायल दी भेहोष थी. होश में होती तो अंदर की आवाज़ सुनकर मैं किसी के भी दिमाग में जा सकता था.

हेलीकाप्टर बाओ वळून का था. सब एजेंट्स थे. ीबन मार्श को षिमुना ने पहचान लिया था. वो एक बेस्ट एजेंट था. योग का माहिर तो होगा hi.. ये सोच मैं उसके दिमाग में नहीं घुसा था.

उसी पल हेलीकाप्टर से लाउड स्पीकर दवारा कोई बोलने लगा.

"कोई चालाकी काम नहीं आएगी तुम्हारे.. वर्ण ये रिमोट देख रही हो तुम. पायल के जिस्म पर एक ऐसी जैकेट है, अगर रिमोट का बटन प्रेस कर दिया गया. तो पल भर में hi पायल कोयले में बदल जाएगी..

षिमुना: सिसकते हुए) दक्ष मैं क्या करूँ

दक्ष की तो खुद की बोलती बंद हो चुकी थी. वो क्या जवाब देता.. हालत ऐसा रुख बदलेंगे, उसने सोचा नहीं था.

दक्ष रूखी मैं से: हेलीकाप्टर के ऊपर रहते हुए उसका पीछा करती रही..

उसी समय पर दक्ष को षिमुना के कानो में कई और हेलिकोप्तेर्स के शोर की आवाज़ सुनाई दी.

षिमुना ने मुद कर देखा तो

षिमुना: shitttttttttt.. नहीं दक्ष, मैं ऐसे इनका पीछा नहीं कर सकती. रात का समय है, और शूज की लाइट से पीछे से फायर किया जा सकता है. मैं निघून से छुप कर बाओ वळून का पीछा नहीं कर सकती..

दक्ष का गुसा बढ़ने लगा: ऐसा करो, निचे कहीं उतरा देखो. कोई पत्थर मिले तो पीछे आने वाले हेलिकोप्तेर्स को उदा दो.. कैसे भी करके पायल दी से संपर्क टूटना नहीं चाहिए..

षिमुना: ाचा देखती हों

दक्ष वापिस अपनी जगह हाज़िर हो गया. वो एक जगा फायरिंग से बचे रहते हुए षिमुना से संपर्क में था..

दक्ष एक एक करके सबके दिमाग में जाने लगा.. देखने लगा, कोई और मुसीबत में नहीं है. दक्ष को पहली बार कई दिशाओं में बिजी होना पद रहा था. उसके लिए बड़ी परेशानी बन्न रही थी. हवेली पर हमला हुआ था, परिवार खतरे में आ गया था. वो बोखला गया था. अभी टेलिपाथी या दिमागी स्किल्स को उसे करने में माहिर नहीं हुआ था. इतनी जल्दी और कई गैंग्स से हुई इस मुद भीड़ में वो बुरी तरह से हार रहा था..

अब तक हवेली के अंदर बहुत ज़यादा फायरिंग होने लगी थी. कई चीखें गूंजी थी. दक्ष नहीं जनता था, कोण कोण मारा जा चूका है. अब दक्ष ने धयान दिया तो उसे पता. हवेली पर बहार के दूसरे गैंग्स वाले भी चढ़ दौड़े थे.. हवेली के ज़यादा तर गार्ड्स मारे जा चुके थे. कई धमाके भी हवेली में हो चुके थे. दक्ष अपनी जन्मभूमि को बचा नहीं पाया था तबाह होने.. जगह जगह मलबे का ढेर पढ़ा हुआ था.

दक्ष ने बेसमेंट के कैदियों की खबर ली तो

ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. दक्ष को एक झटका लगा.. करणवीर के हरामी परिवार की महिलाएं और जो वहीँ कैद थी. ब्लास्ट के कारण वो एरिया बेथ गया था. वहीँ एक साइड में विनय भी था.. वो सब मारे गए थे..

विक्रम, ऋचा और परची राजा ठाकुर और कुछ गार्ड्स के साथ ख़ुफ़िया रस्ते से निकलने में सफल रहे थे. दक्ष ने सोनाली और रुपाली पर धयान दिया..

दक्ष फ़ौरन hi लेफ्ट साइड की टूटी दीवार की और भाग खड़ा हुआ.. भागते हुए hi दक्ष ने एक मशीन गन रस्ते में पड़ी हुई उठा ली.. जैसे hi दक्ष टूटी दीवार से बहार पोहंचा.. कुछ दूरी पर रुपाली और सोनाली को कुछ गार्ड्स लिए जा रहे थे.

जब हमला हुआ था, तब रुपाली ट्रांस से बहार थी.. दक्ष ने फ़ौरन hi रुपाली के दिमाग कोडवर्ड बोल कर उसे वापिस से ट्रांस में लिया और उसे आर्डर दे दिया..

दक्ष: किसी एक से गन छीन कर जितना को मार सकती हो मर दो. खुद को भी सेफ रखना.

रुपाली जो दक्ष से दूर जाने पर खुश थी. एकदम से दक्ष की घुलम बानी साथ वाले गुंडे से गन छीन कर फायरिंग करने लगी. दक्ष भी टूटी दीवार के मलबे की आध में होक फायरिंग करने लगा.

दक्ष रुपाली सोआली को सेफ रखते हुए फायरिंग करने laga.daksh और रुपाली की गन से एक एक करके सरे गुंडे गिरने लगे.. गुंडों ने जब पैसा पलटते देखा, रुपाली को अपने hi साथियों को शूट करते देखा तो घुसे में आ गए.. एक को गोली लगी तो वो निचे गिर पड़ा था. उसे लगा अब वो नहीं बचेगा.. घुसे में आते हुए उसने रुपाली की ऑर्डर गन का रुख करते हुए फायरिंग कर दी..

सोनाली जो फायरिंग से घबराई हुई थी.. रुपाली के सामने आ गई. रुपाली को लगने वाली गोलियां सोनाली को लग गयी.. रुपाली फ़ौरन घूमी और उस मर रहे गुंडे के सीने में गोलियां उतार कर उसे दूसरा सांस लेने से भी महरूम कर दिए.

वहां के सरे गुंडे मारे गए.. दक्ष सिक्योरिटी चीफ के दिमाग में गया.. उसे भी दो गोलियां लग चुकी थी. पर वो बड़ी मच्चिने गन संभाले हवेली से बहार एक साइड में फायरिंग कर रहा था.

दक्ष ने जाना, अब हवेली के आस पास के और अंदर बहुत काम गुंडे रह गए हाँ. दक्ष के पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं था. जो जान सकता.. दूर रहते कोण फायरिंग कर रहा था. वर्ण वो सबको मार देता..

दक्ष भाग कर सेकुयर्टी चीफ के पास पोहंचा.. उससे सहारा दे कर साइड लिटा दिए.. खुद से मशीन गन संभल कर फायरिंग करने लगा.. मशीन गन की बुलेट्स ख़तम होने वाली थी.. दक्ष ने पीछे मुद कर हवेली को देखा. जो अब एक खण्डार दिखाई देने लगी थी.. ये देख कर दक्ष के अंदर ज्वालामुखी दहकने लगा.. अपना घर तबाह होते हुए कोई भी नहीं देख सकता. दक्ष के लिए भी ये सब देख पाना और भी सहन कर पाना मुमकिन नहीं था.. दक्ष ने कसम खा ली, बहुत भयानक अंजाम करेगा वो सबका..

दक्ष ने फायरिंग बंद की.. सिक्योरिटी चीज को बहन में उठा और दूसरे खुड़िया रस्ते की ऑर्डर बढ़ने लगा.. इससे पहले उसने रुपाली को उस जगा जाने का बोल दिए था. रुपाली को अभी अपनी बहन सोनाली का ज़यादा ग़म नहीं था. होश में होती तो अपनी बहन को मरता देख कर खूब चीखती..

दक्ष ये सोच कर थोड़ी देर के लिए हैरान ज़रूर हुआ. सोनाली अपने पति और बेटियों को लेकर क्यों नहीं निकली थी..

शायद उन्हें मौका न मिल सका हो और बेसमेंट के डिस्ट्रॉय हो जाने के बाद केवल वही बची हो.. या कोई और वजा रही होगी.. दक्ष ने इस पर ज़यादा नहीं सोचा. और सिक्योरिटी चीफ को लिए ख़ुफ़िया रस्ते की ऑर्डर बढ़ता चला गया. इस बीच दक्ष को 4 गार्ड और भी दिखे.. जो बोहत ज़यादा ज़ख़्मी थे.. दक्ष ने उनको हिम्मत करके अपने साथ आने को कहा. जान बचने के लिए वो सब दक्ष के साथ ख़ुफ़िया रस्ते से होते हुए दूर जाने लगे..

जैसे hi दक्ष और सब ख़ुफ़िया रस्ते में घुसे.. दक्ष ने एक गार्ड को कह कर वो रास्ता बंद कर दिए..

उसी पल रपो वाले और अंडरवर्ल्ड वाले हवेली में घुसते चले गए थे.. पर अब वहां सिवाए लाशों और टूटी हवेली के कुछ नहीं रहा था. इस जुंग बाओ वाले ज़रूर किसी हद तक कम्यर रहे थे. पर देखना, क्या वो सच में अपने मकसद में सफल रहे थे.

बाओ वळून ने कामयाबी भी पायी और अपने लिए भयंकर खतरों को भी दावत दे दी थी. दक्ष और भी फिर षिमुना से बच पाना उसने लिए बहुत मुश्किल होने वाला था.

 


Episode
:57


मास्टर chi-fang साडी करवाई देख रहे थे. पर अब उनका लोक सेवा का समय बीत चूका था. अब समय शुरू होआ था दक्ष का, सम्राट का.. गुरु जी भी सब जानते थे. कुछ भी उनसे छुपा हुआ नहीं था. वो तो पहले से hi जानते थे. पर किसी की हेल्प नहीं करि. दक्ष की और न उसके परिवार की. हमले होने से पहले का कुछ नहीं बताया गुरु जी ने. ऐसा hi कुछ मास्टर chi-fang के मामले में भी था.

ये सफर की शुरुआत थी.. दक्ष के सम्राट बनने तक के सफर की. हालात कैसे कैसे बदल कर आ करते हाँ ज़िन्दगी में. ये बताया नहीं जाता.. समय खुद बताया करता है. दक्ष को भी पता चल रहा था. खली टेलीपेथी से वो तो क्या दुन्या का कोई भी शक्तिशाली इंसान कुछ नहीं कर सकता. budhhi...dimag..brain के उसे से बदलती हाँ तक़दीरें भी और हालात भी. कण्ट्रोल में आती है आती दुन्या और हलाती. अगर बुद्धि हो आपके पास.. दक्ष के पास टलेपथी के साथ साथ बुद्धि भी थी और षिमुना जैसी सुपरनैचरल पावर रखने वाली निमंस भी.. फिर भी दक्ष पायल के अपहरण को रोक नहीं सका. फिर भी दक्ष अपनी हवेली को तबाह होने से बचा नहीं सका.

सतर्क रहना पड़ता है हर दुम्म और ये बात भी मंद में बिठानी पड़ती है. जब भी कोई बुद्धि के इस्तेमाल में बरतरी सबत कर गया.. वो विजेता कहलायेगा..

खेल खेला था शकुंतला ने.. बुद्धि का इस्तेमाल किया था शकुंतला ने. अंडरवर्ल्ड wale..BAO वाले रपो वाले हवेली पर चढ़ दौड़े.. सब का एक hi लक्ष था.

डीके या षिमुना....

या डीके को घुटने टेकने पर मजबूर करने के लिए कोई भी डीके के परिवार का खास सदस्य.

और इस मामले में बाज़ी मार गयी थी सोफिए.. जो घायल भी थी.. एक बाज़ो से एक हिसाब से महरूम भी थी.. अपने देश में बैठी वो बुद्धि का उसे करते हुए दक्ष को, सबको चीट कर गयी थी. अपनी स्ट्रांग बुद्धि का लोहा मनवा लिया था सोफिए ने...

सोफिए के हाथ पायल लगी तो वो अपना सारा दर्द, सारा ग़म भूल गयी.. और ख़ुशी से चीख उठी.... वही उसके बड़े सरे बा भी अपने अपने केबिन में मौजूद सब लाइव जान प् रहे थे. एक दूसरे से बात कर रहे थे.. सोफिए को बधाई दे रहे थे. और सोफिए अपने मिशन की ऑर्डर पहले कामयाब कदम पर ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी.. अनफिट होते हुए भी उसने एक मोहिं सर कर ली थी..

षिमुना ने पीछे आने वाले रपो और अंडरवर्ल्ड एक 3 हेलिकोप्तेर्स के टुकड़े टुकड़े हवा में hi बिखेर कर रख दिए थे. वो सब षिमुना के लिए थे. वो सब बाओ के हेलीकाप्टर पर हमला करके उससे उसका शिकार छीन लेना चाहते थे. डीके पर उनका पलड़ा भरी रहे. ये सोच कर वो आये थे. पर बाओ वळून को कुछ करना hi नहीं पड़ा.. षिमुना ने hi बिना पत्थरो के तीनो हेलिकोप्तेर्स उदा दिए थे.. उन हेलिकोप्तेर्स के गैस नहीं थी.. षिमुना को देर नहीं लगी और तीनो चॉपर्स मार गिराए..

पर षिमुना यहाँ सफल होक भी असफल रही.. वो पायल के लिए कुछ नहीं कर सकीय.

बाओ वाले पहले hi साडी तयारी कर चुके थे. हेलीकाप्टर का रुख मुंबई से साइड था.

षिमुना ने देखा.. वहां पहले से एक सबमरीन मौजूद थी. पायल को उस सबमरीन में दाल कर वहां से लेजाया जाने लगा.

षिमुना दुखी होक सोच रही थी. दक्ष की दीदी के लिए वो कुछ नहीं कर सकीय.

ऐसे समय पर दक्ष उसके दिमाग में पोहंचा.. सब देखा और जाना तो बड़े शांत मैं से बोलै.

दक्ष: जो होना था वो हो गया शिमि.. तुम लौट आओ. बाओ वाले तो क्या, उनकी माँ भी मेरी दी को वापिस करेगी. एक बार मैं सबको सेफ कर लोन. फिर उनको भी देख लूंगा.

षिमुना दुखी होते हुए: दक्ष हमसे लापरवाही हुई.

दक्ष: नहीं! ऐसा मत सोचो. हम से कोई कोताही नहीं हुई है. बस किस्मत का फेर था. न तुमसे कोई गलती हुई न मुझसे. पायल दी को छत पर रात के इस समय जाने की ज़रूरत hi क्या था. उनके जाते hi सब होना था. कई गैंग्स का मिलकर हवेली पर चढ़ाई करना हमारी नाकामी का रीज़न बना है शिमि. और अभी हम इस खेल के माहिर खिलाडी भी नहीं है.

षिमुना: तो बनो न दक्ष! ऐसे तो सब कुछ ख़तम भी हो सकता है.

दक्ष: समय! शिमि समय! दुन्या की किसी भी फील्ड में शामिल हो जाओ. कभी भी दिनों में पूरी तरह कोई भी ट्रेंनेड नहीं हो सकता. तुमने देखा, हमने एक और धयान दिया तो दूसरी और से मात खा गए. मैं सम्राट बनकर सामने आता तो भी खेल बिगड़ सकता था.

षिमुना: तो बन जाते न सम्राट.. पायल तो बच जाती.

दक्ष: दी को अब भी कुछ नहीं होगा शिमि.. हेलीकाप्टर के अंदर की आवाज़ सुनकर भी मैं उस आवाज़ वाले के दिमाग में नहीं घुसा. वो सुपर एजेंट्स थे सबके सब.. ऐसे समय पर अगर सम्राट वहां पोहचता तो वो समझ जाते. डीके और शिमि के साथ सम्राट का कुछ न कुछ सम्बन्ध ज़रूर है.. ऐसे में दी के लिए खतरा बढ़ जाता. दुन्या पहले hi मेरे तुम्हारे पीछे हाँ. पावर बढ़ने के लिए कुछ भी कर जाये ये दुन्या. ऐसे में मेरी टेलिपाथी वाली पावर जान कर मेरे लिए और भी पागल हो जाती. दी के लिए तो फिर वो और भी खतरनाक हो जाते.. मैं समझ गया हों शिमि. खेल केवल टेलिपाथी से नहीं दिमाग से भी खेलना पड़ेगा मुझे. ऐसा मुझे मास्टर chi-fang ने भी बताया था. पर अचानक से हुए हमले में भी एक्टिव रहना बड़ी बात होती है. और इस मामले में हम दोनों hi नाकाम हुए. पर बाकि सब को बचा कर सफल भी रहे हम.

षिमुना ने एक लम्बी सांस ली और: कहाँ हो तुम इस समय.

दक्ष: एक सेफ हाउस पर हों. वहां से सब को आशाराम की और रवाना करने वाला हों.

षिमुना: हाँ अब किसी का यहाँ पर रहना सही नहीं है. तुम्हे याद है न, गुरु जी ने कहा था. निमंस कभी भी तबाही मचने के लिए मैदान में कूद सकते हाँ. ऐसे में सबको सेफ करना ज़रूरी होगा.

दक्ष: मैं अभी नहीं जा सकता. तुम ऐसा करो. तुम सबको आशाराम तक पोहंचा आओ. फिर हम दी के लिए निकलते हाँ.

षिमुना: मैं हर दम तुम्हारे साथ रहना चाहती हों दक्ष

दक्ष: पहले यहाँ तो आओ.. सब को छोड़ आओ. फिर देखते हाँ.

वहीँ अलका को खबर मिली हवेली पर कई ऑर्गस ने मिलकर हमला किया है. सुनकर अलका घुसे और चिंता में आ गयी.

तुरंत रॉ टीम के साथ हेलीकाप्टर में बेथ कर वहां के लिए निकल पड़ी. वहां पोंछी, तब तक बचे खुचे एजेंट्स वहां से फरार हो चुके थे. अलका हवेली की तबाही देख कर दुखी हो गयी. यही वो जगा थी, जहाँ उसे उसके परिवार को खो देने के बाद एक नया परिवार मिला था. ये वही स्थान था, जहाँ उसने ज़िन्दगी की गुमशुदा खुशियां फिरसे पायी थी. यहाँ के डरो दीवार उसकी अछि बुरी यादों के गवाह थे. अलका हसरत से टूटी हवेली की दीवारों को, बिल्डिंग को देखने लगी.

अलका की ऑंखें नाम हो चुकी थी. वो माला थाम कर आगे बढ़ने लगी. उसकी धड़कने बहुत तेज़ चलने लगी थी. उसे पता नहीं था, हवेली के रहने वाले ज़िंदा बच गए हाँ, या सबके सब मारे जा चुके हाँ. या मलबे के निचे दबे हुए हाँ. अलका सब को सोचते हुए बड़ी hi दुखी हुई आगे बढ़ने लगी. रॉ चीफ भी एक हेलीकाप्टर में वहीँ आ पोहंचा.

अलका मरे हुए क़दमों के साथ आगे बढ़ती दिखी तो उसके पास जा पोहंचे..

चीफ ने अलका के कंधे पर हाथ रख दिए.. चीफ जनता था, अलका इसी हवेली में पल कर जवान हुई है.

चीफ: मैं तुम्हारे ग़म में बराबर की शरीक हों अलका बेटी. राजा ठाकुर परिवार के सभी सदस्य सेफ हाँ सिवाए एक के..

अलका: सर जो भी कहना है, खुल कर कहें!

चीफ: खबर मिली है, हवेली दवारा हवेली से किसी को किडनैप किया गया है. किसे? ये पता नहीं चल सका. और डीके के साथ साथ दूसरे प्लेनेट से आयी एक लड़की भी यही पर पायी गयी थी.

अलका चौंक कर चीफ को देखने लगी.. बड़बड़ायी: dk...dusre प्लेनेट की लड़की..

फ़ौरन hi अलका की आँखों के सामने उस रात का दिखा सपने में दिखा दृश्य लहरा गया. अलका के दिल में डीके और षिमुना दोनों के लिए नफरत के भाव आ गए. सपने में अलका ने डीके और शिमि को सेक्स करते देखा था.

अलका: सर! मुझे डीके या उस बेहया लड़की से कुछ लेना देना नहीं है. मुझे ये बताएं, कैसे पता चला, किसी को किडनैप किया गया है.

चीफ: बस्ती में हमारे एजेंट्स फेल चुके हाँ. वही डिटेल कलेक्ट कर रहे हाँ. मुझे साडी इन्फो साथ साथ दी जा रही है..

फ़ौरन hi चीफ अपने कान में लगी डिवाइस को दबा कर दूसरी और से कुछ सुनने लगे. अलका धयान से चीफ को देखने लगी.

बात करने के बाद चीफ अलका से बोले: किसी महिला को किडनैप किया गया है अलका बेटी.

अलका एक पल को खुश हुई: कहीं वो किडनैप होने वाली लड़की दूसरे प्लेनेट वाली तो नहीं.

अब तक ये खबर रॉ वाले भी जान चुके थे. डीके के साथ हवेली में प्रवेश करने वाली एक लड़की थी.. अनुमान यही था, हेलीकाप्टर की और फ्लाई करने वाले शूज उसी लड़की ने पहने होंगे. जिसे सभी ऑर्ग वळून ने और हवेली के आस पास के रहने वळून ने देख लिया था.. इसी बिना पर चीफ और सब का यही अंदाज़ा था, वो लड़की hi ानोथेर प्लेनेट वाली है. क्यों की उसके कद काठ की भी बातें हो रही थी.

चीफ: नहीं! जिसे किडनैप किया गया है, वो लड़की कोई और है. कोण है, ये पता नहीं चल पाया. पर वो दूसरे प्लेनेट से आयी लड़की नहीं है. मुंबई की और बढ़ रहे एक हेलीकाप्टर में उसी लड़की को लेजाया जा रहा है और रिपोर्ट्स के अनुसार वो स्ट्रेंजर लड़की भी हेलीकाप्टर के पीछे है.

बाद की चेकिंग में हवेली में कई लाशें देखने को मिलें. हवेली के बहार सोनाली की लाश देख कर अलका चौंक गयी.

अलका: सर! ये कोण है?

चीफ: तुम नहीं जानती हो क्या इसे?

अलका: नहीं सर! मैंने इसे पहले कभी नहीं देखा.

हवेली के डिजास्टर की डिटेल तो सुबह तक hi साडी कलेक्ट होती..

वहीँ आशाराम में क्वीन का परिवार जो सोया नहीं था. बातों में लगा हुआ था. न्यूज़ पर डीके हवेली की ख़बरें चली तो जान कर सब हैरान रह गए..

नताशा पापा: (शॉकेड) राजा ठाकुर की हवेली पर हमला! राजा ठाकुर इतने कमज़ोर कबसे हो गए..

नताशा चाचा: सुना नहीं था आपने भाई साब! कुछ महीनो से राजा ठाकुर के हालत बिगड़ कर रह गए थे. जबसे वो डीके वाला मटर बना था.

नताशा पापा: ोोू हैं! बेटियों क्या आयी. मैं तो सब भूल hi गया. नताशा भी टीवी देख रही थी. उठ कर अपने पापा के पास आई और उनके गाल पर किश करके कंधे पर सर रख दिए..

नताशा: लव यू पापा.. मुझे भी तो सब कुछ भुला हुआ है... फिर कुछ में आते हुए.. मुझे तो मेरे दूसरे परिवार का क़र्ज़ भी चुकता करना था. जो अभी तक मुझपर क़र्ज़ है.

mummy:b बुरी बात है बेटी. ये तो पहले करने वाला काम था.

नताशा: सॉरी माँ! पहले सब आसान नहीं था. मेरा मिशन लम्बा था. फिर आप सब के बारे में पता चला तो आप सब के पास आ गयी.

चची: कोई बात नहीं बेटी. बास अब किसी दुष्ट पापी को छोड़ना मैट

भाई: अब तो हम सब यहाँ सेफ हाँ. यही से अपना बिज़नेस भी हैंडल कर सकते हाँ.

सब इसी हिसाब से बातें करने लगे.. और नताशा सोचने लगी. डीके भी आम बाँदा नहीं है. दूसरे प्लेनेट से आने वळून से उसका नाम जुड़ चूका है. कुछ तो बात होगी उसमे.

दूसरे प्लेनेट की बात किसी के मैं में भी आती थी तो वो उत्सुकता में आ जाता था. एअर्थ के बाद किसी और प्लेनेट पर लाइफ है, पहले कोई नहीं जनता था. अब सब जान रहे थे. तो दूसरे प्लेनेट बारे बहुत सी बातें सबके मैं में आने लगी थी. क्वीन भी इस बारे में सोचने लगी.

11:50:पं

कोमल अपनी टीम के साथ दिल्ली शहर से बहार कुछ दूरी पर वेरने में बने एक बड़े hi-fi फार्महाउस से कुछ फैसले पर मौजूद थी..

कुछ सेकण्ड्स hi गुज़रे थे. फार्महाउस की लेफ्ट साइड वाली पूरी दीवार कई धमाकों के कारण ब्लास्ट हो गयी.. ईंटें दूर दूर तक गिरती चली गयी.. फार्महाउस के अंदर कोहराम मच गया. अंदर मौजूद कुछ दीवार के ब्लास्ट होने से उड़ने वाली ईंटों का निशाना बन गए. कुछ दूर थे, वो गन उठा के कुछ पीछे हटकर बिना देखे, टूटी दीवार वाली दिशा में गन का रुख किये, मारे घबराहट के फायरिंग करने लगे..

अभी उनकी गन्स खामोश भी नहीं हुई थी. राइट साइड वाली पूरी दीवार भी कई धमाके एक साथ होने के कारण ब्लास्ट हो गयी. वहां से उड़ती ईंटें कइयों को घायल कर गयी. कुछ गन खामोश हुई तो कुछ गन्स रुख बदल कर फायरिंग करने लगी.

किसी को कुछ समझ hi नहीं आ रहा था. ये हो क्या रहा है. जब भी कोई सोचने की सोचता.. उस समय कोई न कोई दीवार ब्लास्ट हो जाती..

लेफ्ट फिर राइट साइड की दीवार उडी.. जैसे hi सब कुछ शांत हुए.. फार्महाउस के पीछे वाली दीवार भी धमाकों से उड़ने लगी.. फिर तो सब ऐसे दहशत में आये.. जो बच चुके थे. गन फ़ेंक कर निचे लेट गए और जान की अमन के लिए चीखने लगे.

फार्महाउस की छत पर के एक हेअवयमचीने लगी हुई थी. वहां एक बाँदा बैठा हुआ बहार देख रहा था. पर उसका पूरा शरीर पानी पानी होने लगा था. कई धमाकों ने उसके मसल्स को डैमेज कर के रख दिए था. उसकी ऊँगली तो हैवी मशीन गन के ट्रिगर पर थी. पर उसे अपनी ऊँगली में शक्ति का अहसास नहीं हो प् रहा था. उसका पूरा शरीर लरज़ रहा था. और कान साइन साइन कर रहे थे..

ऐसे hi समय एक गोली ख़ामोशी से चली और उसके सर के पार हो गयी.

फ्रंट दीवार भी धमाकों की नज़र हो चुकी थी. अंदर चीखें काम सुनाई दे रही थी. धुंआ और धुल मिटटी ज़यादा उड़ने लगी थी.

नेहा: भगवन की कसम मज़ा आ गया. बरसों बाद कोमल के साथ ऐसा खेल खेल के मज़ा आ गया.

विधि: और मुझे भी.. कुत्तों की ऐसी hi चीखें सुन सुनकर तो मुझे चैन की नींद आती है.

अनु: मैं तो जब तक कुत्तों का खून नहीं देख लूंगी मुझे मज़ा नहीं आएगा

रेनू: और मैं जब तक कुत्तों के बड़े कुत्ते की बोटी बोटी नहीं काट लूंगी मुझे चैन नहीं मिलेगा..

कोमल सब को बरी बरी देख रही थी. उसके होंटो पर बड़ी प्यारी मुस्कान थी.

कोमल: तुम्हारे रहते hi ये कुत्ते शेर बने हाँ.. मेरे ग़म में न डूब कर पहले hi इनका काम तमाम कर देती तो ये कुत्ते कबसे कुत्ते की मौत मर चुके होते.

नेहा: हेहेहे.. चीफ, तुम्हारे साथ के बिना शिकार का मज़ा नहीं आता हमें.

विधि: तुम hi तो हो, हमारी असली ताकत.

कोमल: चलो अब बेहोशी वाले फायर करो.. बहुत हो गया तमाशा.

सबने एक साथ मिलकर बेहोश कर देने वाली बुलेट फायर करने शुरू कर दी.. ये मिनी साइज के कैप्सूल थे. जो किसी चीज़ से टकराते hi पहात जाते थे. और उसके अंदर की बिना बू वाली स्मेल किसी को भी पल भर में बेहोश कर देती थी.

ये मिशन ख़ामोशी से भी अंजाम दिया जा सकता था. पर सबके सर पर खून सवार था. कोमल को भी ऐसा खेल खेलने में मज़ा आता था.

10 मिनट के वेट के बाद पांचू फार्महाउस की और बढ़ रही थी. धुआं और धुल अब काम हो चुकी थी. सब ख़ामोशी से अंदर पड़ी लाशों को देखते हुए आगे बढ़ने लगी..



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आज के लिए इतना hi मित्रो.. मिलते हाँ अगले episode के साथ जल्द hi..

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दिमाग से खेलना अलग बात है. पूरी तरह से सतर्क रहना अलग बात है भाई. सब कुछ hi दक्ष पहले से जान ले तो दक्ष तो फिर एडवांस में hi सम्राट बन गया.

सम्राट बनने का सफर अभी शुरू हुआ है दोस्त..

आने वाली घटना बारे तो ज्ञानी hi जान सकते हाँ. या जो सिर्फ सोच रहे हों. दक्ष सालों बाद घर लौटा है तो उसके विचार डेविड हो चुके हाँ..

दुश्मन इतना भी शातिर और तेज़ हो सकता है. ये तो दक्ष को समय के साथ साथ hi पता चलेगा.. सब कुछ ऐसे hi तो नहीं उसके हाथ में आ जायेगा.. मेहनत तो दक्ष को खूब करनी पड़ेगी.. और बिना प्रैक्टिकल के सब पता भी नहीं चलता.. सब समझ में भी नहीं आता..
 
ये तो हो hi था भाई. दक्ष मेंटली डिस्टर्ब भी है. दो तरह की आग है दक्ष के अंदर. नफरत और बदले की और जड़ीबूटीओ की..

अभी वो परिवार में और बदले में बिजी है तो स्टार्क नहीं हो पाया. दुश्मन कैसे कैसे चलें चल सकते हाँ. समय के साथ अचे से समझ में आएगा.

वो भी प्रैक्टिकल करते हुए, पूरी तरह से एक्टिव रहते हुए...


थैंक फॉर थे कमेंट भाई..
 


Episode
:58


कोमल अपनी टीम के साथ फार्महाउस में घुसी इधर उधर देख रही थी. चरों ऑर्डर लाशें hi लाशें, खून hi खून बिखरा पड़ा था..

नेहा: उम्मम्मम दिल खुश हो गया.

विद्या: आअह्ह्ह कितने समय के बाद खून की होली खेली है.. ऐसा लग रहा है, जैसे बरसों बाद नहीं हों. मैं इतना हल्का हो गया है.

अनु: मेरा भी कुछ ऐसा hi हाल है.

रेनू: मुझे तो किसी कुत्ते के खून का टास्ते करना है.

कोमल एक एक को देखने लगी

कोमल: पहले सब सर्च कर लो. कहीं कोई बचा रह गया तो पता चले, वो हमारे खून से स्नान करने लगे.

चरों है पड़ी.. फिर खुनी अंदाज़ में बोली: स्नान वो भी हमारे खून से.. हाहाहा कुत्ते की मौत मरेगा वो..

कोमल: हाँ जानती हों, तुम सब का खून ज़हरीला है.. जिसके गले से भी utrega..ediyan रगड़ रगड़ कर मर जाएगा..

नेहा: ेहेहेहे! हमसे तो नागिन भी पनाह मांगती है.

विधि: अरे ज़हरीली नागिन में इतना दुम्म कहाँ. हमें देख के वो रास्ता बदल लेती है.

अनु: हम काट कर रख देंगी

रेनू: हम जला कर रख देंगी.

कोमल: ोोू किसी हिंदी फिल्म की हेरोइंस.. पहले अंदर की खबर लो.

सब ऐसे हस्ती हुई अंदर जाने लगी. जैसे किसी एक्सहिबिशन में आई हों. खतरों की खिलाडी थी सब की सब.

फार्महाउस की मैं बिल्डिंग सलामत थी.

सब मिलकर फार्महाउस के अंदर घुसी एक एक चीज़ को देखने लगी. बेहोश पड़े हुए को किक्स मार मार कर चेक करने लगी.

कोमल: बी1 फायर किये हाँ हमने. कोई होश में रह hi नहीं सकता.. चलो मशीन चलो करो. और बेसमेंट तलाश करो.. सब मचिनेस निकल कर एक दूसरे से अलग हुई और पहले सरे रूम्स सर्च करने के बाद बेसमेंट ढूंढ़ने लगी..

नेहा: कोमल इधर एक बेसमेंट का रास्ता मिला है मुझे.

विधि: अरे एक इधर भी है

कोमल: कहीं तुम दोनों एक hi साइड में तो नहीं हो?

नेहा: नहीं लेफ्ट साइड में हों!

विधि: और मैं राइट साइड में!

अनु की आवाज़ सुनाई दी: कोमल यहाँ मुझे शर्त बेहोश पड़ा मिला है.

अनु की बात सुनकर सब चौंक गए

शर्ता!!!

कोमल: शर्ता! ये कैसे हो सकता है अनु, उसे तो हम सब ने मार दिए था.

अनु: पता नहीं कोमल पर ये शर्त hi है.. पर नहीं वो मरना वाला कोण था ये कोण है!

कोमल: तुम शर्त के उठा के नेहा के पास जाओ. वहां बेसमेंट में उसे होश में ला के चेक करते हाँ.

कुछ देर में सब नेहा वाले बेसमेंट में थे..

वहां कई बेहोश लोगो को देख कर सब चौंके हुए थे.

कोमल: साला यहाँ तो शारता के साथ साथ रोबिन भी है. और रोबिन फिरसे अपनी गैंग बना बैठा.. ज़रूर इस बार कुछ हटके करने की सोच रहा होगा. पहले ऐसे मिनिस्टर्स कुत्ते तो रोबिन के साथ नहीं हुआ करते थे. ज़रूर कुछ बड़ी गेम खेली जा रही है. जिसके बारे में सब बेखबर होंगे.

नेहा: और तुम्हारे बिना हमने इसपर कभी धयान नहीं दिया.

अनु: इसी लिए इसे फिरसे स्ट्रांग बनने का समय मिल गया.

कोमल खुनी अंदाज़ में: लाओ इस माँ के शेर को होश में

रेनू ने एक चेयर पर कास के रोडस के साथ बांध दिए था. फिर उसकी नाक और मोह बंद कर दिए.. सांस बंद रहने से रोबिन का शरीर फड़फड़ाने लगा.. कुछ देर में वो होश में आने लगा.. ऐसा hi कुछ दूसरे लोगों के साथ भी किया जाने लगा.. देखते hi देखते सब होश में आने लगे..

जैसे hi रोबिन होश में आया.. तुरंत उसने उठने की कोशिश की. पर बंधा होने के कारण वो कसमसा कर रह गया.

वो एक एक को देखने लगा.. जैसे hi उसकी नज़र पांचू शेरनियों पर पड़ी. शिद्दत इ हैरत से वो उछाल पड़ा..

सब होश में आ चुके थे. सब कोमल ंद टीम को चिंतित निगाहो से देख रहे थे.

कोमल: ओह्ह तो माय डिअर रोबिन एंड शर्त.. तुम मुझे तो नहीं पहचान सके होंगे. मई बदले हुए फेस के साथ हों न. पररररररर.. पर मेरी आवाज़ से तो तुम दोनों अनजान नहीं होंगे...

रोबिन और शर्त एक साथ उछाल पड़े.. दोनों कोमल को ऑंखें पहाड़ पहाड़ कर देख रहे थे..: kkk..komallll!!

कोमल: हाहाहाहा!! हाँ!! komall!!sherni!! कैसा लगा एक बार फिरसे मुझे अपने सामने प् कर.

वहां एक मिनसिटेर भी था: kk..kya matlab..tt..tum सब अंदर कैसे आये. ख़ुफ़िया रास्ता कैसे ढूंढा तुम सब ने.

अनु: ओह्ह काठ के उल्लू! हम! हम्म्म्म्म हनननन!!

रेनू: जहाँ हम्म हों वहां हमारे कोई रास्ता हमारे सामने ठहर भी कैसे सकता है.

विधि: न कोई दीवार ठहर सकती है!

नेहा: न hi कोई हथियार हमारा रास्ता रोक सटके हाँ!

कोमल: सब मिनिस्टर, शर्त और रोबिन को छोड़ कर फालतू के जितने भी कुत्ते हाँ. सब को मार दो.. नहीं पहले ऐसा करो.. ऊपर जा कर जितने कुत्ते बेहोश पड़े हुए हाँ. पहले उनका काम तमाम कर दो..

अगले 20 मिनट में सब फिरसे बेसमेंट में थे.. वहां लगी स्क्रीन्स पर बेसमेंट में कैद सब ऊपर अपने कुत्तों को कुत्ते की मौत मरते हुए देख रहे थे..

मिनिस्टर ग़ुस्से से फुंकारता hua:tt..tum सब भी कुत्ते की मौत मारे जाओगे

कोमल; रेनू मेरी बहन! ज़रा मिनसिटेर साब के साथ बंधे कुत्ते का ट्रीटमेंट तो करना.. मिनसिटेर को कभी किसी ने दोसे नहीं दी. तभी ये इतना उछाल रहा है..

रेनू के साथ साथ सब कोमल के लौट आने से मूड में आए गयी थी.. बरसों से बंद दरिंग्डी का दौड़ फिरसे शुरू हो चूका था.. सब ने मिलकर देश को खोखला करने वळून को चुन चुन कर चीयर डालने की कसम खा ली थी..

रेनू ने खंजर हाथ में लिया और मिनसिटेर के साथ बंधा मिनिस्टर का ख़ास कुत्ता.. उसके सबसे पहले तो रेनू ने कान काटे, फिर उसकी नक्, फिर उसकी एक आंख, फिर उसकी दूसरी आँख.. धीरे धीरे वो उसके चेहरा का नक्शा hi बदलने लगी.. मिनसिटेर का तो मूट hi निकल गया. इतनी चीखें मिनिस्टर के कुत्ते की नहीं निकल रही थी. जितनी मिनिस्टर की निकल रही थी...

अंत में रेनू ने मिनिस्टर के कुत्ते की गर्दन काटी.. और मिनिस्टर को घूरते हुए हवा में hi खंजर चला दिए.. मिनिस्टर को लगा उसका, कान नक् या आंख गयी..

परररर

रेनू: हाहाहाहाहा.. हाहाहाहाहा

सब: हाहाहाःहाहा

मिनिस्टर का बचा खुचा मूट भी निकल गया.. उसका चेहरा ऐसे सफेद पद गया जैसे उसने सच में यमराज को देख लिया हो..

कोमल: चलो सब शुरू हो जाओ और एक एक को काटने लगो. बुझा लो अपनी सालों की पियास... मैं ज़रा रोबिन और शारता की खातिरदारी कर लून.

कोमल ने मुद कर रोबिन और शर्त को देखा तो दोनों के चेहरे पर भी मौत की ज़र्दी छै हुई थी..

कोमल: ओह्ह्ह! माय डिअर रोबिन! मज़बूरी है, तुम्हारे सामने मुझे ऐसी दरिंदगी का मुज़ाहिरा करना पड़ा.. सॉरी!! वैरी वैरी सॉरी!! वे अरे ह्यूमन ना! वे अरे ह्यूमन ना.. हमें ऐसा करना जेब नहीं देता.. क्यों रोबिन ंद शर्त मैं सही बोली न.. बोल! मई सही बोली नाआ.... बुल्ल्ल्ल माआआईईईन्न्नन्नं सहीईईई बोलललललललीई naaaaaaaaaaaaaa

कोमल ऐसे चिंघाडी शर्त और रोबिन दोनों के शरीरों में कैद आत्मा तक फड़फड़ा उठी.

कोमल: हाहाहाहा.. कितना मज़ा आ रहा है न मुझे ऐसा बोलने.. तुम्हे भी सुनकर मज़ा आ रहा हो..

रोबिन: mm..mmm..

कोमल: mm..mm क्या कर रहा है. मैं कोई भेड़ों की रखवाली करने वाली नहीं हों.

रोबिन: मम.. मुझे माफ़ करदे कोमल. मम मेरे पास जितना भी पैसा है, वो सारा ले.. tt.tum सोच भी नहीं सकती हो, मेरे पास कितना पैसा ha.tt तुम वो सारा पैसा ले लो.

कोमल: और शर्त तुम! तुम कबसे रोबिन के साथ मिल गए

शर्त दहशत में आया हुआ था: मम.. कोमल मुझसे गलती हुई, मुझे रोबिन के साथ नहीं मिलना चाहिए था.. शर्त बोल कोमल से रहा था.. देख चरों शेरनियों को रहा था.

सब अब तक सरे बंधे कुत्तों को तसली से काट चुकी थी..

कोमल: गलती! हाहाहा! गलती और वो भी तुझसे.. तू पहले तो ये बता तू ज़िंदा कैसे बचा.. तुझे तो हमने मार दिए था.

शर्त डरता डरता बोलै: वव.. वो मैं नहीं मेरा एक डुप्लीकेट था..

कोमल चीखती हुई: चारो सुनो, शर्त और रोबिन के गर्दन की स्किन काट काट कर चीख करो, ये दोनों भी नकली हाँ या असली हाँ.. और ऐसी हालत करो दोनों की ये खुद से बता दें. दोनों के अब के मिशन क्या है..

कोमल घूमी और मिनिस्टर के पास जा पोहंची.. सबसे पहले तो कोमल ने मिनिस्टर के मोह कर थूका... फिर उसके लौड़े पर किक मार दी..

वो दर्द के मारे चीख उठा.. लौड़े का दर्द उससे सहन नहीं हुआ..

कोमल: बोल कुत्ते! क्या मिला तुझे अपने hi देश से गाडरी करके.. बोल जितने पैसे तूने इन कुत्तों के तलवे चाट चाट कर इकठे किये थे. वो अब तेरे किश काम आएंगे.

मिनिस्टर से बोलै hi नहीं जा रहा था. दहशत में भी था और थूक के कारण बेपनाह बेइज़्ज़ती के अहसास में भी.. आज तक भला किस की इतनी हिम्मत हुई थी, को उसके सामने खड़ा भी हो सके. कहाँ कोमल ने उसके मोह पर थूक दिए था..

मिनिस्टर थूक पर ऐसे तिलमिलाया जैसे कोमल ने उसपर थूक नहीं तेज़ाब फेंका हो.

कोमल: तुझसे कुछ पूछने में समय hi क्यों वास्ते करना.. तुझे ज़िंदा रहने hi नहीं देना चाहिए.. तुझे जैसे देश को खोखला करने में लगे रहेंगे और गरीब मासूम भूके पियासे मरते रहेंगे.. पारर नहीं... अब से नहीं.. अब मैं लौट आयी हों.. अब से गरीब मासूम पेट भर कर चैन की नींद सोया करेंगे और तुझ मेरी हैवानियत का शिकार होंगे..

कोमल अपने हथु से मिनिस्टर को कांटे lagi..minister की चीखें भी बेसमेंट में गूंजने लगी. कुछ शानो में मिनिस्टर का भी राम नाम सत्य हो गया..

कोमल वापिस मुड़ी तो शर्त की गर्दन ढलक चुकी थी.

कोमल: कुछ बताया कुत्ते ने या?

रेनू: बताएगा क्यों नहीं.. सब बता दिए!

उसी पल विधि चीख पड़ी: Eeeeeeeeeehhhhhh

कोमल और तीनो ुसत देखने लगी

विधि: कुत्ते का बचा.. कायर... थोड़ा सा टार्चर भी सहन नहीं कर सका.. मर गया साला.

कोमल: क्या हुआ विधि?

विधि शर्म से सर झुकाते हुए: सॉरी कोमल मैंने धयान नहीं दिए.. पर रोबिन कुछ भी बताने से पहले मर गया.

कोमल: कैसे? कोमल हरित भरे लहजे में बोली

विधि: इसने अपनी दाढ़ चबा ली..

कोमल: ओह्ह्ह! शित्त्त!! मैंने भी धयान नहीं dia..zarur ये किसी का सुपर एजेंट बन गया होगा.. और सुपर एजेंट जब देखें, की अब मौत मिलनी hi मिलनी है तो मौत को गले से लगा लेते हाँ.

फिर बोली

कोमल: एक मिनट!! एक मिनट!!.... पहले तो ऐसा कुछ नहीं था रोबिन की लाइफ में.

रेनू: ज़रूर इन कुछ सालों रोबिन की लाइफ में बहुत से बदलाव ए होंगे. ज़रूर ये किसी ऑर्ग से जुड़ा होगा.. ज़रूर ये किसी ख़ास मिशन पर इंडिया में रह रहा होगा..

कोमल: शर्त ने कितना कुछ बताया है इस बारे में?

रेनू: रोबिन के साथ इसके अरबों डॉलर का एग्रीमेंट हुआ था..

कोमल: और क्या बताया शर्त ने?

रेनू: कुछ कुछ अंदाज़ा हुआ है मुझे.. यहाँ सर्कार तोड़ने के साथ साथ देश के टुकड़े करने की भी साज़िशें रची जा रही हाँ..

कोमल चौंक कर: इतनी भयंकर शाजिश.. सुनो डी1 इंजेक्शन साथ लाइ हो क्या तुम?

चरों एक साथ: नहीं वो नहीं लायी हम!

कोमल: सब सामान चेक करो... चीफ को रिपोर्ट do...sharta को साथ लेकर अपने सीक्रेट अड्डे पर चलते हाँ. वही इसका असली ट्रीटमेंट करते हाँ.. फिर देखती हों, कैसे अपने अंदर की बात हमसे छुपा के रखता है..

सब अपने अपने काम में बिजी हो गयी..

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दक्ष समेत सब सीरियस बैठे हुए थे. रोहिणी सबके सामने दक्ष से चिपक कर बैठी थी. इस बात पर सब बड़े हैरान भी थे.. पारर सब खुश भी थे.. दक्ष में रोहिणी के लिए हरित अंगेज़ चेंज आया था.. बाकि को भी उम्मीद की किरण दिखाई पद रही थी.

रुपाली एक साइड सम्मोहित कड़ी हुई थी..

सब पायल के लिए दुखे थे.

रोहिणी सिंह जितनी दक्ष के लिए खुश थी. उतनी hi पायल के लिए दुखी भी. जवान बेटी भेड़ियों के कब्ज़े में थी.

रोहिणी; दक्ष बीटा, पायल!!

दक्ष; कुछ नहीं होगा माँ दी को! मैं उसे कुछ होने भी नहीं दूंगा. किस में इतनी हिम्मत है जो मेरी दी को कुछ भी कह सके.

करणवीर: दक्ष बीटा! दुश्मन खतरनाक हो तो कुछ भी कर जाया करता है. देर करना सही नहीं है.

परिधि: दादा जान! मेरा भाई भी किसी से कम् नहीं है.. ज़रूर भाई दीदी को वापिस ले आएगा. देखना दीदी जल्द hi हमारे बीच में होंगी.

दादी: भगवन तेरी ज़ुबान मुबारक करे परिधि बेटी!

राजा ठाकुर: मेरे पोते पर कोई कभी शक मत करे. वो अकेला hi सबपे भरी है.

दक्ष को बदला देख कर राजा ठाकुर में भी हिम्मत आ गयी थी..

दक्ष: बास आप सब एक बार सेफ हो जाएँ. फिर मैं निकलता हों दी के लिए.

रोहिणी: तू भी मेरे साथ चल दक्ष बीटा. कितने बरसों बाद मिला है न तू

दक्ष: हाहाहा! माँ क्या दीदी को वहीँ छोड़ कर आपकी गॉड में बेथ जाऊं.

रोहिणी दोनों तरफ खेंचि जा रही थी. दक्ष को फिरसे अपनी नज़रों से दूर नहीं करना चाहती थी और जवान बेटी की इज़्ज़त और जान की बात भी थी..



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आज के लिए इतना hi मित्रो.. मिलते हाँ अगले episode के साथ जल्द hi....

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