अपडेट 2
मुकेश गाड़ी से उतर कर उस लड़के से पास जाता है, लड़का मुँह के बल जमीं पर पड़ा था तो मुकेश पहले उसे सीधा करता है और जब उस लड़के का चेरा सामने अत है तो मुकेश हैरान हो जाता है
अब ाजी
मुकेश जब उस लड़के को पलट कर सीधा करता है तब वो देखता है की लड़के का पूरा चेहरा खून से सना हुआ था जिस वजा से उसका चेहरा बी पहचाना नहीं जा रहा था, लड़के की हालत देख कर लग रहा था की उसे किसी गाड़ी वाले ने तकर मरी है, मुकेश आगे बाद कर उस लड़के को चेक करता है तो मुकेश फिर हैरान हो जाता है क्योकि लड़का मर चूका था, पहले तो मुकेश को बोहत दुःख होता फिर वो जैसे hi पुलिस को इन्फॉर्म करने के लिए मोबाइल निकलता है, तभी वह पर इक साडू बाबा आ जाते है, साडू बाबा लड़के के पास बेथ जाते है और जब साडू बाबा को मालूम पड़ता है की लड़का मर चूका है तो उनकी आँखों में आंसू आ जाते है, साडू बाबा को देख कर मुकेश का लगता सायद ये इस लड़के के पिता होंगे या कोई जनन पहचान वाले, फिर अचानक साडू बाबा खड़े हो जाते है और उनकी आँखों में गुस्सा साफ़ दिख रहा था और उसी गुस्से से वो मुकेश को बोलते है
SB(sadu बाबा) – डस्ट इंसान तूने एसा क्यों किया, क्या बिगाड़ा था मेरे बेटे ने तुम्हरा जो तुमने उसकी जनन ले ली
मुकेश बाबा की बात सुन के हैरान हो जाता है तो जब वो बोलता है
म – बाबा मैंने
साडू बाबा उसे बोलने से रोक देते है और खुद बोलते है
सब – तुजे बोलने का कोई हक़ नहीं है पापी
फिर साडू बाबा कुछ मंतर पद कर मुकेश को बोलते है
सब – मैं तुजे सराप देता हूँ, जैसे तेरी वजा से मेरा पुत्र दूर चला गया है उसी तरह तेरा अन्य वाला पुत्र तेरे सरे परिवार से दूर हो जाये गए
मुकेश को ये सुन कर झटका लगता है, साडू बाबा कुछ और बोलने वाले होते है तभी वह पर साडू बाबा की तरह और इक साडू आ जाता है और आते hi बाबा से बोलता है
S(sadu) – गुरुदेव रुकिये ये आप किया कर रहे है, आपके पुत्र की मिर्त्यु इनकी वजा से नहीं हुयी है
Guru(sadu बाबा) – ये तुम किया कह रहे हो, बल्कि जब मैं यहाँ पर आया तो ये डस्ट मेरे बेटे के पास बैठा हुआ कुछ कर रहा था
स – गुरुदेव मैं आपको सबकुछ बताता हूँ क्योकि मैं आपके पुत्र के साथ था जब ये दुर्घटना हुयी
फिर साडू बताता है कैसे जब ये लड़का सड़क क्रॉस कर रहा था तब इक गाड़ी वाला इसको तकर मर का यहाँ से बैग जाता है और मैं जब किसी को मदद के लिए बोलने जाता हूँ तभी सायद ये aadmi(mukesh) आपके पुत्र की मदद के लिए उसके पास अत है पर तबतक आपके पुत्र की मिर्त्यु हो गयी होगी, सच पता चलने के बाद गुरु मुकेश के सामने हाथ जोड़ के कहता है
गुरु – मुझे माफ़ कर देना पुत्र मैंने बिना सच जाने तुमेय दोषी बना दिया
म – बाबा आप ये किया कर रहे हैं, आपको माफ़ी मांगने की कोई जरूरत नहीं है, अगर आपकी जगह मैं होता तो सायद मैं बी एसा hi बर्ताब करता
गुरु – पुत्र ये तुम्हरा बादःपं है, मैं अपने दिए हुए सराप को वापिस तो नहीं ले सकता, पर मैं तुमेय इक उपाय बताता हूँ, अन्य वाले समय में इक एसी घंटना घाटी गई जिसमे तुम और तुम्हरे पुरे परिवार को लगे गए की गलती तुम्हरे पुत्र की है पर तुम आँखों देखि घंटना पर विस्वाश मत करना और अपने पुत्र पर भरोसा रखना, और इक बात तुम्हरे पुत्र का नाम आद्यंत रखा जाये गए पर तुमेय एसा होने से रोकना है
बाबा की बात सुन के मुकेश हैरान हो जाता है और हैरानी में बोलता है
म – पर बाबा एसा क्यों
गुरु – अगर तुम्हरे पुत्र का नाम आद्यंत रखा गया तो उस से तुम्हरे परिवार में बोहत कुछ एसा होगा जिसे तुम कबि नहीं चाहो गए की एसा कुछ तुम्हारे परिवार में हो
म – बाबा आप कहना किया चाहते हो मैं कुछ समज नहीं प् रहा हूँ
गुरु – पुत्र मैं छह कर बी तुमेय कुछ नहीं बता सकता क्योकि अगर मैने अभी तुमेय भविस्य के बारे में कुछ बी बताया तो तुम कुछ गलत कदम न उठा लो
म – बाबा किया कुछ बोहत बुरा हनी वाला है हमरे साथ
गुरु – नहीं पुत्र कुछ बुरा नहीं होगा तुम्हारे साथ, तुम्हारे और तुम्हारे परिवार के साथ अन्य वाले समय में कबि कुछ बुरा नहीं होगा
म – ठीक है बाबा
फिर मुकेश गुरुदेव को उनके पुत्र को लेजाने में मदद करने के लिए कहता है तो गुरुदेव उसे मन कर देते है, और दूसरे साडू की मदद से अपने पुत्र को वह से ले जाते है.
मुकेश को इन सब chizo(sarap वगैरा) पर विश्वाश नहीं था पर वो उस वक्त बाबा की भावनाओं को तहस नहीं पोछना चाहता था इसलिए कुछ नहीं बोलता, एसा नहीं है की मुकेश को भवगान पर विश्वाश नहीं है बीएस वो बाकि चीज़ो पर विश्वाश नहीं करता था.
मुकेश सोचता है की बाबा इक तरफ तो कह रहे थे की मेरे परिवार में कुछ एसा होगा जो मैं नहीं चाहता की हो और इक तरफ कह रहे थे की सब कुछ ाचा hi होगा, आखिर बाबा कहना किया चाहते थे फिर मुकेश ज्यादा नहीं सोचता और सब बातो को बुला के घर की तरफ चल पड़ता है, ेसे hi समय गुजरने लगता है और खन्ना परिवार सेहर में सिफत हो जाता है.
आज खन्ना परिवार के घर फिर खुसियां छायी हुयी थी वजा थी भावना ने एक लड़के और अर्चना ने इक लड़की को जनम दिया है, जिनको आज हॉस्टिपल से डिस्चार्ज करने के बाद घर लाया जा रहा है, कुछ दिन बाद बचो का नाम कारन होता है, जिसमे काम की वजा से मुकेश शामिल नहीं हो पता, लड़के का नाम आद्यंत रखा जाता है और लड़की का नाम रागनी रखा जाता है, दोनों के नाम से पूरा परिवार बोहत खुश था, जब रात को मुकेश काम से वापिस अत है तो उसे नाम बताया जाता है.
मुकेश नाम सुन कर खुश होता है क्योकि वो उसदिन साडू बाबा के साथ जो बात चित हुयी थी उसे भुला चूका था, ेसे hi समय बीतने लगता है और तीनो भाइयो का नाम बड़े बड़े बिजनेसमैन में अन्य लगता है, इसी बिच भावना एक और बेटी को जनम देती है जिसका नाम रूचि रखा जाता है.
शांति और राधा बी अपने नए परिवार के साथ उसी सेहर में सिफत हुए थे जिस सेहर में मुकेश का परिवार सिफत हुआ था, शांति और राधा के पति दोस्त थे इसी लिए उनका घर अगल बगल में hi था, मुकेश का घर बी उनके घर से कुछ ज्यादा दूर नहीं था, इसीलिए शांति और राधा मुकेश के घर चली जाती थी और साथ में शांति की ननद और राधा की jethani(sunita) बी होती थी, कबि कबि शांति राधा और सुनीता घर वापिस चली जाती थी पर गीता और तीनो की बेतिया वही सू जाती थी, मुकेश के बगल में राजन और मीणा का घर है जिस वजा से दोनों परिवारों में बोहत बनती है जिस वजा से अभी और ज्योति बी मुकेश के घर में उनके बचो के साथ कहलते रहते hai(smile सी बात सभी भाई बहनो को बचपन एक साथी hi गुजरा hai,jisme अभी जोय्ति गीता और जूही बी शामिल है).
सभी भाई बहने आपस में खूब मस्ती करते थे, सभी बहने अदि से बोहत प्यार करती है, ज्यादा तर टाइम उसके पास रहना, उसके साथ कहलना, साथ खाना, सभी बहना के बिच कबि कोई लड़ाई जगदा नहीं होता था अगर होता था तो वो बी इस बात पर की अदि के साथ कोण सोये गए, अदि तो छोटा था तो उसे तो उनकी बातो से कोई मतलब hi नहीं था जब वो लड़ती थी तब अदि उनकी तरफ देख कर बीएस मुस्कुराता रहता था, सभी बहने जब अदि को मुस्कुराते हुए देखती थी तो अपनी नोक जोक भूल कर अदि के तरफ देखने लगती थी और जब फिर सोने की बात थी फिर ladne(masti मजाक में) लगती थी एसा तब तक चलता था जब तक भावना आ कर कूद किसी दो बहनो को अदि के पास सोने के लिए कहती थी, राघव को कबि बुरा नहीं लगता था की सभी बहने अदि से ज्यादा प्यार करती है क्योकि वो खुद बी अदि से बोहत प्यार करता है, उल्टा सभी बहने राघव से नाराज हो जाती थी की वो उनसे ज्यादा अदि को प्यार करता है.
ेसे hi टाइम बीतने लगता है और देखते hi देखते सभी भाई बहिन बड़े होने लगते है पर उनके बिच के प्यार में कोई कमी नहीं अति. अब आदित्य राघव और डिंपल 8तह स्टैण्डर्ड में, सोनिया और मधु 7तह स्टैण्डर्ड में, प्रिय तानिया ज्योति और रुपाली 6तह स्टैण्डर्ड में, अदि अभी और रागनी 5तह स्टैण्डर्ड में और रूचि 1सत स्टैण्डर्ड में आ जाते है, सभी भाई बहिन इक hi स्कूल में पढ़ते है.
इक दिन अदि स्कूल के तरफ से अपनी क्लास के साथ इक रिसर्च सेण्टर में जाता है, उसदिन रागनी बीमार होने की वजा से उसको ज्वाइन नहीं कर पति और अभी अपनी फॅमिली के साथ किसी फंक्शन में जाने की वजा से ज्वाइन नहीं कर पता.
रिसर्च सेण्टर में टोटल 5 अलग अलग लैब है लैब1 तो लैब5 जो की 5 अलग अलग एरिया में एरिया1 तो एरिया5
जब सब बचे सेण्टर से बहार आ जाते है पर अदि अंदर लैब5 में चल रहे एक्सपेरिमेंट को देखने में बिजी होता है, अदि पूरी एक्ससिटेमेंट के साथ अंदर देख रहा था जिस वजा से उसे पता hi नहीं चलता कब सब बहार चले गए, अदि अभी एरिया5 में था उस एरिया में अब सिर्फ चार साइंटिस्ट बचे थे जो की लैब5 में कुछ एक्सपेरिमेंट करने में बिजी थे उस एरिया के बाकि साइंटिस्ट बहार बाकि बचो और टीचर्स के साथ बात चित कर रहे थे, अंदर चल रहे एक्सपेरिमेंट के टाइम इक साइंटिस्ट के हाथ से इक तुबे निचे गिर जाती है जिसमे लिक्विड भर हुआ था, जैसे hi तुबे निचे गिरती है और लिक्विड का कांटेक्ट ज़मीं से होता है लिक्विड लाल रंग के dhuan(smoke) में बदलने लगता है और धीरे धीरे पूरी लैब में धुआं होना लगता है, धुंए की वजा से अंदर काम कर रहे साइंटिस्ट को चाकर अन्य लगते है, चाकर अन्य की वजा से एक साइंटिस्ट का हाथ लैब में पड़ी कुछ तुबेस से टकरा जाता है जिनमे अलग अलग रंग के लिक्विड होता है, साइंटिस्ट का हाथ तुबेस से टकराने से तुबेस निचे गिर जाती है, तुबेस के टूटने से उनमे भरा लिक्विड बी धुवन में बदलने लगता है, जहा ध्येन पहले लाल रंग का था अब उसको रंग बदलने लगता है और धुंए का रंग पर्पल रंग में बदलने लग जाता है, जब पूरी लैब पर्पल रंग के धुंए से भर जाती है तभी अचानक लैब का दरवाजा खुल जाता है जो अंदर एक साइंटिस्ट के हाथ लगने से खुला था, लैब का दरवाजा खुलने की वजा से धुआं लैब से बहार निकलने लगता है, लैब के बहार खड़ा अदि पहले तो धुंए को देख गबरा जाता है, पर फिर जब अदि थोड़ा सम्बल कर बहार की तरफ जाने लगता है तभी साँस लेने की वजा से धुआं अदि की बॉडी में जाने लगता है और जैसे hi अदि थोड़ा ागी जाता है धुंए का असर अदि पर बी हनी लगता है जिस वजा से अदि को चाकर अन्य लगते है और उसकी आँखों के सामने थोड़ा थोड़ा अँधेरा हनी लगता है पर अदि हिम्मत नहीं हारता और चलते चलते बहार की तरफ जाने लगता है, धीरे चलने के वजा से धुआं अदि की बॉडी में लगातार जा रहा था, जब अदि रिसर्च सेण्टर के बहार अत है तबतक उसकी बॉडी में बोहत ज्यादा मात्रा में धुआं जा चूका था, अदि जब रिसर्च सेण्टर से थोड़ी दूर जाता है तो वो निचे गिरने वाला होता है की तबीईई
तो बे कंटिन्यू..