शुक्रिया avsji भाई आपका बहुत बहुत शुक्रिया आभार l मेरी इस तरह से इस अपडेट की प्रस्तुति से आपको एहसास हो गया कि कहानी बड़ी तेजी से अपनी समाप्ति की ओर भाग रहा है l
जी बिल्कुल l रुप अभीतक सलामत भी इसी वज़ह से है क्यूँकी भैरव सिंह को इस बात का गुमान है कि रुप उसकी बेटी है l
बाकी अब भैरव सिंह सही मायने में अकेला हो गया है l जैसे कि वैदेही ने उसे श्राप दिया था l
कुछ बातेँ हैं जिसे औरतें कभी भी अपनी पेट में नहीं रख सकते l तो जाहिर है उगलना तो पड़ेगा l नागेंद्र से बढ़िया ऑपशन कुछ था ही नहीं l बाकी रही चरित्र भाई मैं भी अपनी अनुभव की आधार पर प्रस्तुत किया है
कहानी की आधार वैदेही ही है l भैरव सिंह की बर्बादी की मुल भी वैदेही ही है l राजा अपनी लगातार हार से पागल हुआ जा रहा है और सारे के सारे दुश्मन मक्कार हैं l इसलिए वैदेही पर खतरा बढ़ता ही जा रहा है l
हाँ सेबती अब एक मात्र कड़ी है l पर भैरव सिंह चूँकि अब तक आश्वस्त है l मैं और ज्यादा छेड़ना नहीं चाहता l जब तक सच्चाइ सामने आएगी तब तक चिड़िया खेत चुग चुकी होगी l
हाँ पर जैसे कि कहानी में विश्व अनजान था l वर पक्ष से केवल वैदेही ही जानती थी l सेनापति दंपति को पीड़ा तो होगी ही पर वह आपस में समझा लेंगे l रही गाँव वालों की बात अब उन्हें इतना मालूम हो गया है कि वर भाग गया है l और बात को बतंगड़ करने के लिए सात दिन बहुत होते हैं l बाकी आप समझ सकते हैं l
हाँ भाई जैसा कि मैंने पहले भी कहा था l कहानी में अनायास ही कुछ चरित्रों को जोड़ दिया l अब जब कहानी में आ गए हैं तो उनके चरित्रों को उपयोग के साथ साथ न्याय भी करना पड़ेगा l और सच कहूँ भाई छोटी छोटी नाटक लिखने वाला जब इतना बड़ा कहानी लिखेगा l डर तो रहेगा कहीं कहानी में कोई भटकाव ना हो जाए l और ऊब जाना स्वाभाविक लगता है l
भाई इस कहानी से जुड़ने वाले बहुत से मित्रों ने यही सुझाव दिया है l हाँ इच्छा तो है पर सच यह भी है कि कहानी में कुछ परिवर्तन आवश्यक है l चूंकि इस फोरम के अनुरूप कहानी को गढ़ने की प्रयास में हाथ आजमाने की चेष्टा की थी l पर विफल रहा l कहानी को समाप्त हो जाने दीजिए मैं आपसे ना सिर्फ सहायता लूँगा बल्कि आपसे जुड़ना भी चाहूँगा l
अवश्य l
