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अपडेट-13 (ा) (मेघा अपडेट)
"देख नहीं leti...........memsaheb ने सब देख भी लिया hain...............aur समझ bhi.....................aab तू देख ले ki..............tujhe मेमसाहेब को कैसे संभालना हैं.............." और हरी जैसे शांति पे बम फोड़ देता हैं वहीँ शांति के चेहरे का रंग फीका होता चला जाता हैं..............................
अब आगे........................................................................
शांति के चेहरे पर अभी भी बारह बजे हुए they.......................chudai का नशा जो कुछ देर पहले उसके सर चढ़कर बोल रहा था....................... वो अब उतर चूका था..................... उसेक हाथ पवन दुर्र से फूल गए they..................usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे!!!!!!!!!!!!!
"मेमसाहेब को मैं क्या bolungi.............agar वो पूछेगी तो.............." और शांति बुझे मुन्न से बोल पड़ती हैं .............वो ये सोच सोचकर परेशां हो रही थी की वो अपनी मेमसाहेब का सामना कैसे karegi...........magar सामना तो उसे करना hi tha..............wahin हरी उसे देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता hain.............ye देख शांति गुस्से से बौखला जाती हैं............
" मेरी जान पे बन आयी हैं और तुझे हंसी सूझ rahi..............sach में तू बड़ा कमीना हैं................." और शांति जैसे गुस्से से हरी के तरफ देखने लगती हैं वहीँ हरी कुछ देर तक हँसता हैं फिर वो चुप होकर शांति से आगे कहना शुरू करता हैं.........
" मैं तुझे बचा तो सकता हूँ मगर बदले में मुझे क्या मिलेगा....................." और हरी धीरे से अपने मुन्न की बात कहता हैं वहीँ शांति कुछ देर तक चुप रहती हैं फिर वो धीरे से बोल पड़ती हैं.........
" जो तू chahe....................meri छूट ले लेना इससे ज़्यादा मैं तुझे और क्या दे सकती हूँ..........." हालाँकि शांति के लिए ऐसे ओपन वर्ड्स उसे करना कोई बड़ी बात नहीं thi..............wo इस माहोल में रहती आयी thi..........wahin हरी उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं............
" वैसे मुझे तेरे में कोई ख़ास दिलचस्पी nahin...........................choot....................choot तो चाहिए mujhe...........magar तेरी nahin...............kisi और ki..................tu समझ रही हैं न की मेरा इशारा किसकी तरफ हैं................" और हरी अपने गंदे दांत दिखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं वहीँ शांति बुरा सा मुँह बना लेती hain..............wo बहुत ाचे से हरी का इशारा समझ रही थी...........
" वो तो तुझे मिलने से rahi.....................memsaheb की छूट तो kya...........tu तो उसकी पवन की जूती भी नहीं बन sakega..................ye दिन में सपने देखना बंद कर de..............tera कुछ नहीं हो सकता................" और शांति जैसे हरी को समझती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं.............
"milegi.............ek न एक दिन वो मुझे ज़रूर milegi................aur इस काम में तू मेरी अब मदद karegi.................badle में जो तुझे चाहिए वो मैं तुझे देता rahunga............aur haan..........ye बात हमारे बीच hi बस रेहनी chahiye...............wo क्या हैं न की मुझे अपनी मेमसाहेब से मोहबात हो गयी hain...............aab तो मैं उन्हें पूरी शिद्दात से पाना चाहता hoon...............aur तू कह रही हैं न पांव की jooti....................to याद रख मैं उनके गले की हार banunga..............aur क्या कुछ नहीं हैं मेरे paas..................jo मेरे पास हैं वो यहाँ किसी और के पास नहीं................." और हरी इस बार अपने लोअर के ऊपर से अपने लौड़े को सहलाता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ शांति भी जवाब में हंस देती hain..............sach hi तो कह रहा था हरी...................
तू औरत हैं तो बहुत ाचे से समझती होगी की छूट में जब आग लगती हैं तो क्या होती hain................main धीरे धीरे मेमसाहेब की छूट में आग भरता जावूंगा और इतना आग भर दूंगा की वो humesha.................har पल बेचैन रहने lagegi............har वक़्त परेशां सी rahegi.............uska चैन करार सब कुछ चीन loonga.............wo सिर्फ मेरे लुंड के लिए बस tadpegi...........is लुंड के लिए वो कुछ भी karegi...................aur जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन वो सरे शर्म लाज लिहाज़ सब कुछ chodhkar................sirf..............aur सिर्फ मेरे पास चली aayegi....................us दिन मैं उससे जो marzi................jaisi marzi..............wo सब कुछ karwaunga............apni रंडी बनाकर rakhunga..............is दिल में जो भी अरमान दबे हैं सरे एक एक कर मैं पूरा karunga.............aur वो शौक से मेरे हर अरमान को पूरा करने में मेरा बराबर का साथ degi....................yahan तक की वो अपने शौहर को भी छोड़ने को राज़ी हो जाएगी...................
और जिस दिन ऐसा हो गया उस din...................kasam से मेरा सपना सच हो jayega.............aur जो मैं कहता हूँ उसे कैसे भी करके हासिल कर hi लेता hoon................ye सच हैं की मेमसाहेब जैसी खूबसूरत औरत आज तक मैंने कभी देखि भी नहीं................." और एक बाद फिर से कहते हुए हरी की आंखें चमक जाती हैं वहीँ उसके लुंड में एक तेज़्ज़ सनसनाहट होने लगती hain........wahin शांति बुरा सा मुँह बनाये उसके चेहरे को बस देखे जा रही थी............
" बंद कर अपनी ये ख्याली पुलाव banana...................tu भी यहीं हैं और मैं bhi................chal मैं तेरी मदद करने को तैयार hoon............main भी देख लेती हूँ की तू क्या उखाड़ पता hain...........wo सब छोड़ और ये बता की मेमसाहेब से क्या बोलना हैं.............." और शांति हामी भर्ती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं वहीँ हरी कुछ देर तक खामोश रहता हैं फिर वो शांति को कुछ समझने लगता हैं जिससे सुनकर शांति के चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं.........
" अरे wah..................tu तो बहुत बड़ा खिलाडी हैं re................magar मुझे तेरा लुंड चाहिए अपनी छूट mein............dekh मुझे तेरा लुंड इस दिल में उतर गया hain.............aab जब तक मैं इसे लूंगी नहीं मुझे चैन नहीं milega.................magar जब भी तू डालना बहुत आराम से dalna...................mujhe और औरतों की तरह बेहोश नहीं होना hain...........aab chal...........kaam पे चलते हैं............." और शांति इतना कहकर आगे मुड़ती हैं और जैसे hi वो जाने लगती हैं हरी उसकी गांड पर एक दो कसकर चपाती लगता हैं जिससे शांति की चीख निकल जाती हैं मगर जब वो पीछे मुड़कर देखती हैं तो उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती हैं.............
" मैं न कहता था की ये छूट की आग बहुत खतरनाक होती hain.............iske आगे बड़े से बड़ा sanskar...............mazhab............jaat paat...........rishtey नाते ............सब फीके पढ़ जाते हैं............" और हरी हामी भरता हुआ अपनी सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ता हुआ अपने मंज़िल की ओरे बढ़ जाता हैं .................उसका दिमाग अब काम करना शुरू कर दिया tha..............wo अब आसमा को हर हाल में हासिल कर लेना चाहता tha.................har कीमत पर..............
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थोड़े देर बाद शांति और हरी अपने अपने काम पे लग gaye................shanti दूसरे रूम की सफाई कर रही थी और हरी दूसरे रूम की ....................जब हरी अंदर आया तो आसमा तिरछी नज़रियों से उसे hi देख रही thi.............wahin हरी अपना सर jhukaye.....................apne दोनों हाथ बंधे खड़ा tha..................kisi गुनेहगार की tarah.................aasma उससे उस वक़्त तो कुछ नहीं बोली मगर उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहे थे................
थोड़े देर बाद आसमा शांति के कमरे में gayi............shanti अंदर के कमरे को साफ़ कर रही thi...............jab शांति की नज़रें आसमा पर पड़ी एक बार तो उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क utha......................magar वो फिर से नार्मल होती हुई आसमा के तरफ देखने लगी................
" shanti.................kya चल रहा था ander....................sach सच batawo........................main कोई दूध पीती बाची नहीं हूँ जो इतना भी न समझूँ....................." और आसमा जैसे शांति की तरफ देखती हुई घूरने लगती हैं वहीँ शांति अपना काम छोड़कर आसमा के तरफ पलटती हैं और धीरे से एक लुम्बी सांस लेती हुई आगे कहना शुरू करती हैं...........
" memsaheb......................aap जो समझ रही हैं वो सब सच hain......................magar................ismein न उसका दोष हैं .................और न मेरा......................." और शांति इतना कहकर फिर से चुप हो जाती हैं वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता hain.................wo बड़े गौर से शांति के चेहरे को देखे जा रही थी...................
" क्या मतलब हैं tumhara..........................tum कहना क्या चाहती हो................." और आसमा धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ शांति अपना सर नीचे की तरफ झुकाई हुई थी...............
" memsaheb..................aapko ये बात पता नहीं होगा की हरी की बीवी को मरे हुए पूरे 10 साल हो चुके hain...............na hi उसकी कोई औलाद hain.....................uski बीवी को बीमारी हो गयी थी जिसका इलाज़ वो सही समय पर पैसों की वजह से नहीं करा पाया tha.................jissey उसकी मौत हो gayi...........tab हरी ने दूसरी शादी नहीं ki...............usi गाँव में रहकर म्हणत मज़दूरी किया karta............aur जो मिलता खा leta.................haan ये बात सच हैं की उसका पहले कई औरतों से चकार रहा hain..........magar इस वक़्त वो बिलकुल अकेला hain..........aab वो ये सरे काम छोड़ चूका हैं..........." और शांति इतना कहकर फिर से चुप हो जाती हैं वहीँ आसमा बड़े गौर से उसकी एक एक बातें सुन रही थी.............
"तो fir..........tumhein देखकर उसने दुबारा से ये काम फिर से शुरू कर दिया .......हैं ना.................." और आसमा तिरछी बोली बोलती हुई शांति के तरफ घूरती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ शांति कुछ देर चुप रहने के बाद फिर से दुबारा बोलना शुरू करती हैं..............
"देख नहीं leti...........memsaheb ने सब देख भी लिया hain...............aur समझ bhi.....................aab तू देख ले ki..............tujhe मेमसाहेब को कैसे संभालना हैं.............." और हरी जैसे शांति पे बम फोड़ देता हैं वहीँ शांति के चेहरे का रंग फीका होता चला जाता हैं..............................
अब आगे........................................................................
शांति के चेहरे पर अभी भी बारह बजे हुए they.......................chudai का नशा जो कुछ देर पहले उसके सर चढ़कर बोल रहा था....................... वो अब उतर चूका था..................... उसेक हाथ पवन दुर्र से फूल गए they..................usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे!!!!!!!!!!!!!
"मेमसाहेब को मैं क्या bolungi.............agar वो पूछेगी तो.............." और शांति बुझे मुन्न से बोल पड़ती हैं .............वो ये सोच सोचकर परेशां हो रही थी की वो अपनी मेमसाहेब का सामना कैसे karegi...........magar सामना तो उसे करना hi tha..............wahin हरी उसे देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता hain.............ye देख शांति गुस्से से बौखला जाती हैं............
" मेरी जान पे बन आयी हैं और तुझे हंसी सूझ rahi..............sach में तू बड़ा कमीना हैं................." और शांति जैसे गुस्से से हरी के तरफ देखने लगती हैं वहीँ हरी कुछ देर तक हँसता हैं फिर वो चुप होकर शांति से आगे कहना शुरू करता हैं.........
" मैं तुझे बचा तो सकता हूँ मगर बदले में मुझे क्या मिलेगा....................." और हरी धीरे से अपने मुन्न की बात कहता हैं वहीँ शांति कुछ देर तक चुप रहती हैं फिर वो धीरे से बोल पड़ती हैं.........
" जो तू chahe....................meri छूट ले लेना इससे ज़्यादा मैं तुझे और क्या दे सकती हूँ..........." हालाँकि शांति के लिए ऐसे ओपन वर्ड्स उसे करना कोई बड़ी बात नहीं thi..............wo इस माहोल में रहती आयी thi..........wahin हरी उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं............
" वैसे मुझे तेरे में कोई ख़ास दिलचस्पी nahin...........................choot....................choot तो चाहिए mujhe...........magar तेरी nahin...............kisi और ki..................tu समझ रही हैं न की मेरा इशारा किसकी तरफ हैं................" और हरी अपने गंदे दांत दिखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं वहीँ शांति बुरा सा मुँह बना लेती hain..............wo बहुत ाचे से हरी का इशारा समझ रही थी...........
" वो तो तुझे मिलने से rahi.....................memsaheb की छूट तो kya...........tu तो उसकी पवन की जूती भी नहीं बन sakega..................ye दिन में सपने देखना बंद कर de..............tera कुछ नहीं हो सकता................" और शांति जैसे हरी को समझती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं.............
"milegi.............ek न एक दिन वो मुझे ज़रूर milegi................aur इस काम में तू मेरी अब मदद karegi.................badle में जो तुझे चाहिए वो मैं तुझे देता rahunga............aur haan..........ye बात हमारे बीच hi बस रेहनी chahiye...............wo क्या हैं न की मुझे अपनी मेमसाहेब से मोहबात हो गयी hain...............aab तो मैं उन्हें पूरी शिद्दात से पाना चाहता hoon...............aur तू कह रही हैं न पांव की jooti....................to याद रख मैं उनके गले की हार banunga..............aur क्या कुछ नहीं हैं मेरे paas..................jo मेरे पास हैं वो यहाँ किसी और के पास नहीं................." और हरी इस बार अपने लोअर के ऊपर से अपने लौड़े को सहलाता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ शांति भी जवाब में हंस देती hain..............sach hi तो कह रहा था हरी...................
तू औरत हैं तो बहुत ाचे से समझती होगी की छूट में जब आग लगती हैं तो क्या होती hain................main धीरे धीरे मेमसाहेब की छूट में आग भरता जावूंगा और इतना आग भर दूंगा की वो humesha.................har पल बेचैन रहने lagegi............har वक़्त परेशां सी rahegi.............uska चैन करार सब कुछ चीन loonga.............wo सिर्फ मेरे लुंड के लिए बस tadpegi...........is लुंड के लिए वो कुछ भी karegi...................aur जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन वो सरे शर्म लाज लिहाज़ सब कुछ chodhkar................sirf..............aur सिर्फ मेरे पास चली aayegi....................us दिन मैं उससे जो marzi................jaisi marzi..............wo सब कुछ karwaunga............apni रंडी बनाकर rakhunga..............is दिल में जो भी अरमान दबे हैं सरे एक एक कर मैं पूरा karunga.............aur वो शौक से मेरे हर अरमान को पूरा करने में मेरा बराबर का साथ degi....................yahan तक की वो अपने शौहर को भी छोड़ने को राज़ी हो जाएगी...................
और जिस दिन ऐसा हो गया उस din...................kasam से मेरा सपना सच हो jayega.............aur जो मैं कहता हूँ उसे कैसे भी करके हासिल कर hi लेता hoon................ye सच हैं की मेमसाहेब जैसी खूबसूरत औरत आज तक मैंने कभी देखि भी नहीं................." और एक बाद फिर से कहते हुए हरी की आंखें चमक जाती हैं वहीँ उसके लुंड में एक तेज़्ज़ सनसनाहट होने लगती hain........wahin शांति बुरा सा मुँह बनाये उसके चेहरे को बस देखे जा रही थी............
" बंद कर अपनी ये ख्याली पुलाव banana...................tu भी यहीं हैं और मैं bhi................chal मैं तेरी मदद करने को तैयार hoon............main भी देख लेती हूँ की तू क्या उखाड़ पता hain...........wo सब छोड़ और ये बता की मेमसाहेब से क्या बोलना हैं.............." और शांति हामी भर्ती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं वहीँ हरी कुछ देर तक खामोश रहता हैं फिर वो शांति को कुछ समझने लगता हैं जिससे सुनकर शांति के चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं.........
" अरे wah..................tu तो बहुत बड़ा खिलाडी हैं re................magar मुझे तेरा लुंड चाहिए अपनी छूट mein............dekh मुझे तेरा लुंड इस दिल में उतर गया hain.............aab जब तक मैं इसे लूंगी नहीं मुझे चैन नहीं milega.................magar जब भी तू डालना बहुत आराम से dalna...................mujhe और औरतों की तरह बेहोश नहीं होना hain...........aab chal...........kaam पे चलते हैं............." और शांति इतना कहकर आगे मुड़ती हैं और जैसे hi वो जाने लगती हैं हरी उसकी गांड पर एक दो कसकर चपाती लगता हैं जिससे शांति की चीख निकल जाती हैं मगर जब वो पीछे मुड़कर देखती हैं तो उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती हैं.............
" मैं न कहता था की ये छूट की आग बहुत खतरनाक होती hain.............iske आगे बड़े से बड़ा sanskar...............mazhab............jaat paat...........rishtey नाते ............सब फीके पढ़ जाते हैं............" और हरी हामी भरता हुआ अपनी सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ता हुआ अपने मंज़िल की ओरे बढ़ जाता हैं .................उसका दिमाग अब काम करना शुरू कर दिया tha..............wo अब आसमा को हर हाल में हासिल कर लेना चाहता tha.................har कीमत पर..............
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थोड़े देर बाद शांति और हरी अपने अपने काम पे लग gaye................shanti दूसरे रूम की सफाई कर रही थी और हरी दूसरे रूम की ....................जब हरी अंदर आया तो आसमा तिरछी नज़रियों से उसे hi देख रही thi.............wahin हरी अपना सर jhukaye.....................apne दोनों हाथ बंधे खड़ा tha..................kisi गुनेहगार की tarah.................aasma उससे उस वक़्त तो कुछ नहीं बोली मगर उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहे थे................
थोड़े देर बाद आसमा शांति के कमरे में gayi............shanti अंदर के कमरे को साफ़ कर रही thi...............jab शांति की नज़रें आसमा पर पड़ी एक बार तो उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क utha......................magar वो फिर से नार्मल होती हुई आसमा के तरफ देखने लगी................
" shanti.................kya चल रहा था ander....................sach सच batawo........................main कोई दूध पीती बाची नहीं हूँ जो इतना भी न समझूँ....................." और आसमा जैसे शांति की तरफ देखती हुई घूरने लगती हैं वहीँ शांति अपना काम छोड़कर आसमा के तरफ पलटती हैं और धीरे से एक लुम्बी सांस लेती हुई आगे कहना शुरू करती हैं...........
" memsaheb......................aap जो समझ रही हैं वो सब सच hain......................magar................ismein न उसका दोष हैं .................और न मेरा......................." और शांति इतना कहकर फिर से चुप हो जाती हैं वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता hain.................wo बड़े गौर से शांति के चेहरे को देखे जा रही थी...................
" क्या मतलब हैं tumhara..........................tum कहना क्या चाहती हो................." और आसमा धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ शांति अपना सर नीचे की तरफ झुकाई हुई थी...............
" memsaheb..................aapko ये बात पता नहीं होगा की हरी की बीवी को मरे हुए पूरे 10 साल हो चुके hain...............na hi उसकी कोई औलाद hain.....................uski बीवी को बीमारी हो गयी थी जिसका इलाज़ वो सही समय पर पैसों की वजह से नहीं करा पाया tha.................jissey उसकी मौत हो gayi...........tab हरी ने दूसरी शादी नहीं ki...............usi गाँव में रहकर म्हणत मज़दूरी किया karta............aur जो मिलता खा leta.................haan ये बात सच हैं की उसका पहले कई औरतों से चकार रहा hain..........magar इस वक़्त वो बिलकुल अकेला hain..........aab वो ये सरे काम छोड़ चूका हैं..........." और शांति इतना कहकर फिर से चुप हो जाती हैं वहीँ आसमा बड़े गौर से उसकी एक एक बातें सुन रही थी.............
"तो fir..........tumhein देखकर उसने दुबारा से ये काम फिर से शुरू कर दिया .......हैं ना.................." और आसमा तिरछी बोली बोलती हुई शांति के तरफ घूरती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ शांति कुछ देर चुप रहने के बाद फिर से दुबारा बोलना शुरू करती हैं..............