Zindagi : ek anjana safar - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Zindagi : ek anjana safar

hotaks

Administrator
Staff member
Joined
Dec 5, 2013
Messages
137,809
फ्रेंड्स, मेरी ये स्टोरी एक आम से लड़के की है जिसकी ज़िन्दगी में तरह तरह के उतर चढ़ाव आते हैं .... राजेश खन्ना साहब का एक मशहूर गाना याद है न ज़िन्दगी एक सफर है सुहाना इसमें कल क्या हो किसने जाना .... ठीक hi ुशी तरह हमारी ज़िन्दगी भी है कब किस मोड़ पर क्या हो जाये क्या पता .... जब तक हमारी सांसें चल रही है तब तक hi हमारे सरे रिश्ते नाते हैं और जैसे hi सांस थम गयी एवरीथिंग स्टॉप्स तेरे ....

1c290482f02352a2d147bea67b7060ea.jpg




डेली अपडेट देने का वादा तो नहीं कर सकता पर हाँ वीक में 2 अपडेट देने की कोसिस जरूर करूँगा ... अगर आप लोगो का सहयोग रहा तो ये स्टोरी जरूर hi पूरी होगी ... सो, let's स्टार्ट थे जर्नी ....
 
अपडेट 1



शाम ढल चुकी थी और आसमान काळा काळा बदलो से घिर चूका था ... हवाएं ने भी अपनी रफ़्तार पकड़ ली थी जो की इस बात का संकेत दे रहे थे की जल्द hi मूसलाधार बारिस होने की आशंका है .... पर समुद्र के किनारे एक बड़ी सी चट्टान पर बैठा एक लड़का किसी और hi दुनिया में गम बस समुद्र की लहरों की तरफ ध्यान से देखे जा रहा था जैसे उसे वक्त का कोई अंदाज़ा hi न हो ...

वो ऐसे hi किसी सोच में गम था की उसके कंधे पर किसी ने हाथ रख कर झकझोर कर उसको उसके ख़याली दुनिया से बहार निकला ....

" अबे तू यहाँ बैठा है मैं तुझे दोपहर से hi सरे हॉस्टल में ढूंढ ढूंढ कर थक गया ... तू वैसे यहाँ कर क्या रहा है देख नहीं रहा अँधेरा हो चला है और ऊपर से मौसम भी आज काफी खौफनाक लग रहा .... लगता है बड़े जोरो की बारिस होने को है ... चल जल्दी से तू भूल गया क्या आज तेरा बर्थडे है और हम सबने मिलकर तेरे लिए एक छोटी सी पार्टी ऑर्गेनिसे की है .... चल जल्दी से ..."

"यार उसकी क्या जरुरत थी वैसे भी तुम लोगो ने मेरे लिए बहुत कुछ किया है .... जब जब मुझे किसी अपनों की जरुरत महसूस हुयी तुम लोगो ने हमेसा मेरा साथ दिया ... ये रिश्ते नाते क्या होते हैं सब कुछ तुम लोगो से hi तो जाना है मैंने ... शायद पिछले जनम में मैंने कोई बहुत बड़ा पुण्य का काम किया होगा जो मुझे तुम जैसे दोस्त मिले हैं ... "

"हम अचे दोस्त हैं और हमेसा रहेंगे .... वैसे तूने भी तो हमें अपनी फॅमिली hi मन है हमेसा .... मेरी दीदी कहने को तो मेरी बहन है पर मेरे से ज्यादा वो तुझे अपना भाई मानती है ... ये सब छोड़ आज तेरे लिए एक इम्पोर्टेन्ट दिन है और तू ये क्या रंडी रोना ले कर बैठ गया है ... वैसे भी कल कॉलेज का आखिरी दिन है अब पता नहीं फिर कब मुलाकात हो ..... चल अब मूड ठीक कर और चल जल्दी ... "

वो लड़का बस अपने चेहरे पर झूटी मुस्कराहट लिए उसके साथ साथ चल देता है ... अभी वो लोग चाँद मैडम hi चले थे की बारिस के बूंदो ने उनका स्वागत किया .....

खैर उनका हॉस्टल वह से ज्यादा दूर न था पर फिर भी रूम तक पहुँचते पहुँचते वो पूरी तरह से भीग चुके थे ....

आप लोग सोच रहे होंगे की ये क्या बिना किसी को इंट्रोडस किये hi कहानी सुरु कर दी ... तो स्टोरी में जो पहला वाला लड़का इंट्रोडस हुआ वो है तरुण सिंह और दूसरा लड़का है कारन शर्मा .... दोनों 4 साल पहले इसी इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले थे और तब से hi दोनों की दोस्ती एक मिसाल बन गयी .... चोट एक को लगता तो दर्द दूसरे को होता था कुछ ऐसी बॉन्डिंग थी दोनों की बिलकुल शोले के जय वीरू टाइप ....

कारन एक उप्पेर मिडिल क्लास फॅमिली से बिलोंग करता है उसके पापा का प्रॉपर्टी डीलिंग का बिज़नेस था तो उसको पैसो की कोई कमी न थी ...

कारन की फॅमिली में उसके पेरेंट्स के अलावा एक बड़ी बहन भी थी ...

मदन शर्मा : कारन के फादर. आगे 48 इयर्स ... स्वभाव से सख्त पर अपने बच्चो पर जान लुटाते थे ...

राधिका शर्मा : कारन की माँ .. आगे 42 इयर्स ... एक ंगो में काम करती है और काफी सॉफ्ट हेअरटेड लेडी है .... बाला की खूबसूरत हैं और योग से खुद को काफी मेन्टेन किया हुआ है .... अपने बच्चो को बहुत प्यार करती है ....

दिया शर्मा : ये है कारन की बड़ी बहन ... आगे 23 इयर्स ... साउथ इंडियन एक्ट्रेस श्रिया सरन की तरह दिखती है ... जल्द hi इसकी शादी होने वाली है .... ये तरुण और कारन दोनों पर hi अपनी जान छिड़कती थी ....

बैक तो स्टोरी

रात को कारन और उसके कुछ फ्रेंड्स तरुण का बर्थडे मानते हैं और काफी देर रात तक सभी का नाच गण चलता है वैसे भी कल को उन्हें ये कॉलेज और हॉस्टल छोड़ कर जाना hi था तो वो इस बर्थडे को एक यादगार लम्हा बनाने की कोसिस कर रहे थे ....

अगले दिन सभी लोग एक दूसरे से गले मिल कर अपने पिछले चार सालो की यादो को शेयर कर सरे गीले शिकवे दूर कर रहे थे .... सच hi है न जब हम किसी के साथ रहते हैं तो दोस्ती प्यार लड़ाई झगडे सरे hi मोमेंट से गुजरना पड़ता है पर उस वक्त ये सब बेतुके लगने लगते हैं जब हमें पता चलता है की क्या पता हम उस सामने वाले शक्श से लाइफ के किसी मोड़ पर दोबारा मिलेंगे या नहीं .... खैर पुरे कॉलेज में काफी इमोशनल माहौल बना हुआ था ... टीचर्स स्टूडेंट्स सभी की आँखें नाम थी ...

कारन को लेने के लिए उसके पापा और उसकी बड़ी बहन आयी हुयी थी .... कारन और तरुण उनसे बड़े प्यार से मिलते हैं .... कारन और तरुण मिलकर कारन का लगेज उसके कार में लोड करते हैं ...

दिया : तरुण ... तुम्हारे घर से कोई नहीं आया क्या ....

तरुण : नहीं दीदी ... अब क्या फरक पड़ता है अब तो वापस वही जाना है तो क्यों बेकार का उन्हें टेंशन देता मैं खुद hi चला जाऊंगा ...

कारन : भाई तुम ऐसा क्यों नहीं करते हमारे साथ hi घर चलो वह कुछ दिन रह कर अपने घर को चले जाना ...

तरुण : नहीं भाई अभी नहीं फिर कभी जरूर आऊंगा ...

दिया : सच hi कहा तूने हम हैं hi तेरे कौन जो तुम हमारे साथ चलोगे ....

तरुण (दिया के कदमो में घुटनो के बल बैठ कर) : नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं ... बहन क्या चीज होती है इसका एहसास अपने hi दिलाया है मुझे ... अभी तो नहीं जा सकता पर आपकी शादी में जरूर आऊंगा आप नहीं बुलाओगी तो भी आऊंगा ....

दिया : शादी में नहीं आएगा तो तेरी टांगें न तोड़ दू मैं .... अरे हमारे साथ घर नहीं जायेगा तो काम से काम साथ में स्टेशन तक तो चल सकता है ...

तरुण : जी क्यों नहीं ...

तरुण भी अपना लगेज गाडी में दाल कर उनके साथ स्टेशन तक जाता है और वो लोग उसको वह छोड़ अपने घर की तरफ रवाना हो जाते हैं ...

तरुण स्टेशन में एक खली पड़े बेंच पर बैठ कर अपने ट्रैन का इंतजार करने लगता है थोड़े hi देर में उसकी ट्रैन प्लेटफार्म पर आ जाती है और वो अपने लगेज को अपने सीट पर रख देता है ....

वो आज 8 साल बाद अपने घर को जा रहा था .... वैसे देखा जाये तो आम तौर पर सभी लोग इतने लम्बे आरसे के बाद अपने घर जाते हैं तो उनको काफी एक्ससिटेमेंट होती है पर तरुण के केस में ऐसा न था ... उसका चेहरा इमोशनलेस था ... अब इसकी क्या वजह थी ये वो खुद hi जाने ....



आज के लिए बस इतना hi मिलते हैं अगले अपडेट में आगे की कहानी के साथ ....
 
अपडेट 2



वो आज 8 साल बाद अपने घर को जा रहा था .... वैसे देखा जाये तो आम तौर पर सभी लोग इतने लम्बे आरसे के बाद अपने घर जाते हैं तो उनको काफी एक्ससिटेमेंट होती है पर तरुण के केस में ऐसा न था ... उसका चेहरा इमोशनलेस था ... अब इसकी क्या वजह थी ये वो खुद hi जाने ....



आगे



अभी तरुण को अपने सीट पर बैठे कुछ hi वक्त बिता था की आसमान में फिर से काळा बदल घिर आये और फिर से बारिस सुरु हो ाजति hi तरुण को ये बारिस का मौसम बहुत पसंद था बचपन से hi तो वो खिड़की से बहार का नजारा देखने लगता है .....

जमीन पर गिरती हुयी बारिस की बूंदो ने hi उसको अपने अतीत की कुछ यादो के तरफ धकेल दिया .... कुछ hi देर में उसकी आँखों से भी बारिस होनी सुरु हो गयी ....

तरुण (धीरे से बड़बड़ाते हुए) : आखिर मैंने क्या किया था और मेरी क्या गलती थी ....

लेट में इंट्रोडस सम नई चरक्टेर्स तो थे स्टोरी ....

बलबीर सिंह : आगे 72 इयर्स , तरुण के दादा, एक रिटायर्ड आर्मी अफसर. सवभाव से काफी स्ट्रिक्ट. इनके पूर्वज जमींदार हुआ करते थे इसलिए रिटायरमेंट के बाद आप गाँव में hi अपनी फॅमिली के साथ रहकर अपने पुरज़ो से मिली अमानत का सदुपयोग करते थे.

कौशल्या सिंह : आगे 70 इयर्स, तरुण की दादी..

बलबीर और कौशल्या जी की 4 संतान थी 3 बेटे और 1 बेटी.

1.यदुनंदन सिंह, आगे 51 इयर्स, बलबीर और कौशल्या जी का बड़ा बीटा.


f315cdb62334af7e7e5d3768cc50d95d.jpg




मल्टी सिंह : आगे 49 इयर्स, सिंह खंडन की बड़ी बहु ी मैं यदुनंदन जी की dharm-patni.

इन्हे 1 बेटी और एक बीटा है


f8f0a614ef088126805e79abb191c89e.jpg




श्रेया सिंह : आगे 30 इयर्स, इसकी शादी हो चुकी है और ये अपने ससुराल में रहती है.

राघव सिंह : आगे 28 इयर्स, इसकी भी शादी हो चुकी है


ff1d83cd7ad90ce1cf5bd45aa99938a0.jpg




शिवानी सिंह : आगे 25 इयर्स, ये राघव की बीवी है.

2. शैलेन्द्र सिंह : आगे 49 इयर्स, घर का मंझला बीटा.


de437e5310a899321e2da26d05460d70.jpg




खुसबू सिंह : आगे 47 इयर्स, शैलेन्द्र जी की वाइफ.

इनकी भी अपने बड़े भैया की तरह दो hi संतान है एक बीटा और एक बेटी ..


images-1.jpg




राहुल सिंह : आगे 22 इयर्स, इसकी अभी शादी नहीं हुयी है और ये घर में सबका लाडला भी है..


c9a6881f257e700a3a1c9f21396f6b9a.jpg




रानी सिंह : आगे 24 इयर्स, बहुत hi खूबसूरत है और थोड़ी नकचढ़ी भी ..


DSC00683af.jpg




3. प्रिय सिंह : आगे 46 इयर्स, बलबीर जी की एकलौती बेटी और तरुण की बुआ .

मनोहर सिंह : आगे 49 इयर्स, प्रिय के पति और सिंह खंडन के एकलौते दामाद.

इनकी एक बेटी hi है


4726f22f5657d5a4237840bba4ef1766.jpg




रूबी सिंह : आगे 24 इयर्स, रानी से काफी अछि जमती है इसकी ..

4. लक्समन सिंह : आगे 44 इयर्स, जैसा नाम है बिलकुल वैसे hi हैं अपने बड़े भाइयो और पिता की कही हुयी हर बात इनके लिए इनकी जान से बढ़ कर है.


OIP-pyf-YCOe-Yab-Qm-GMUKfcp4w-Ha-Ha-pid-Api-dpr-1.jpg




सुमित्रा सिंह : आगे 41 इयर्स, तरुण की माँ और घर की छोटी बहु.

इनकी 4 संतान है ..


8128d61f8edf39d6a5ba739e33436239.jpg




ऋचा सिंह : आगे 23 इयर्स, अपने दादा की लाड़ली है, घर के किसी भी सदस्य को अगर अपनी कोई बात मनवानी होती है तो इससे hi सिफारिस लगवाता है..


91e4cd9cc84624009323f04ae6bf30b8.jpg




प्रियांशी सिंह : आगे 21 इयर्स, rani,ruby और इसकी तिकड़ी पुरे घरवालों की नाक में डैम करके रखती है .


images.jpg




रुचिका सिंह : आगे 21 इयर्स, ये प्रियांशी की जुड़वाँ बहन है, जहा प्रियांशी काफी छलबलि और नटखट है वही ये काफी शांत स्वाभाव की है ...

अब मिलते हैं घर के लास्ट मेंबर से जो घर का सबसे छोटा होने के बावजूद भी किसी का लाडला नहीं है और किसी को इसके होने या न होने से कोई फर्क भी नै पड़ता ...


images.jpg




तरुण सिंह : आगे 19 इयर्स, ये जस्ट अभी अभी 19 का हुआ है ..

घर में कुछ नौकर चाकर भी हैं ..

बैक तो स्टोरी

बलबीर जी की बस एक hi ख्वाहिस थी की उनकी पूरी फॅमिली एक साथ रहे इसलिए hi उन्होंने अपने गाँव में hi अपने बेटी के रहने का भी इंतजम करवायब था जो की इनके मुख्या निवास के पास में hi दूसरे घर में रहते थे .... बलबीर जी के सभी सन्तानो में अपर प्रेम था ... ये बलबीर जी के दिए गए संस्कार hi थे की दिन भर जो भी चाहे कहीं भी रहे पर रात का खाना सभी एक साथ hi करते थे ...

बलबीर जी ने गाँव में hi अपने सभी बेटे और दामाद के लिए काम काज की व्यवस्था कर दी थी जैसे यदुनंदन जी गाँव के मुखिया थे ... लक्समन जी खेती बरी का काम देखते थे तो शैलेन्द्र जी अपने बहनोई मनोहर जी के साथ मिल्क डेरी के कामो की देख रेख करते थे ....

यु तो घर में कुछ नौकर चाकर भी थे जो साफ़ सफाई और अन्य कामो के लिए लिए रखे हुए थे पर खाना बनाने का काम सिर्फ घर की महिलाये hi देखती थी ....

इनका घर किसी हवेली से काम न था .... इनका घर तीन फ्लोर का बन हुआ था .... ग्राउंड फ्लोर पर hi एक कमरे में बलबीर जी रहते थे उनके अलावा उनके दोनों बड़े बेटे भी ग्राउंड फ्लोर पर hi रहते थे .... फर्स्ट फ्लोर पर एक रूम में राघव अपनी वाइफ के साथ रहता था उसके बगल वाले रूम दोनों जुड़वाँ बहनो का था और राघव के सामने वाले रूम में ऋचा रहती थी जिसे की अकेले hi रहना ज्यादा पसंद था जिसके लिए उसने सेपरेट रूम रखा हुआ था ... ऋचा के बगल वाले रूम में श्रेया रहती थी शादी से पहले और अब भी कभी वो यहाँ आती थी तो अपने रूम में hi ठहरती थी ....

सेकंड फ्लोर पर एक रूम लक्समन जी का था, उनके बगल वाले रूम में रानी रहती है ... एक रूम राहुल का था जो की घर में सबसे ज्यादा स्पेसियस और वेल डेकोरेटेड था ... रानी के सामने वाला रूम तरुण का था ... हर फ्लोर पर एक एक कॉमन वाशरूम बने हुए थे .... किचन और दिंनिंग रूम्स ग्राउंड फ्लोर पर hi मौजूद थे ....

गाँव होने के बावजूद इनके घर में सहर की तरह साडी सुख सुविधा की चीजें मौजूद थी ....

इवनिंग को तरुण की ट्रैन उसके गाँव के पास वाले सहर में पहुँच चुकी थी ... वो अपना लगेज उठा कर ट्रैन से बहार आया hi था की उसका मोबाइल रिंग होने लगता है सर अस एक्सपेक्टेड कॉल कारन का hi था ....

कारन : hello भाई पहुँच गए क्या अपने घर ....

तरुण : नहीं भाई अभी ट्रैन से जस्ट उतरा hi हु .... यहाँ से अभी आधे घंटे का और सफर बाकि है .... तुम लोग ठीक से पहुँच गए न ...

कारन : हाँ भाई हम तो कल इवनिंग को hi पहुँच गए ... ले दिया दीदी तुझसे बात करेंगी ...

दिया : hello हीरो, पहुँच गए अपने घर क्या ...

तरुण : नहीं दीदी अभी तो नहीं .... थोड़े देर में पहुँच hi जाऊंगा ...

दिया : अपने घर पहुँच हमें न भूल जइयो ...

तरुण : क्या दीदी आप भी न अपनों को कोई भूल सकता है क्या ...

दिया : ठीक है बाबू अपना ख्याल रखना ... बाद में बात करती हु ... Bye

तरुण : ok दीदी bye ...

स्टेशन से बहार निकल कर तरुण एक ऑटो से अपने गाँव के तरफ निकल जाता है .... जैसे hi उसका ऑटो उसके गाँव में एंटर करती है अपने अतीत के कुछ लम्हो को याद कर उसके आँखों में आंशू बाह चलते हैं पर कुछ hi लम्हो में वो खुद को संभल कर अपने आंशू पॉच लेता है और ड्राइवर को आगे का रास्ता बताता है .... कहंद hi लम्हो में वो अपने घर के सामने खड़ा था ... लास्ट टाइम जब वो अपने घर को छोड़ कर गया था उस वक्त के घर और आज के घर में कोई खास अंतर आया था ...

ड्राइवर को पैसे देकर विदा करने के बाद वो अपने दोनों हाथो में ट्राली बैग लिए अपने घर में एंटर करता है उसका दिल बहुत जोरो से धड़क रहा था .... इतने सालो के बाद वो सबसे मिलने वाला था ... न जाने सब उसके साथ कैसा बेहवे करेंगे एंड आल एहि सब सोचता हुआ वो धीरे धीरे अपने घर की तरफ अपने कदम बढ़ने लगता है ...

घर में एंटर होते hi उसको गेट पर hi उसके दादा जी दिख जाते हैं .... वो अपने बैग छोड़ कर धड़कते हुए दिल के साथ अपने दादा के पाओ को छूटा है .... बलबीर जी अपने पोते 8 साल बाद देख रहे थे पर उनकी अनुभवी आँखों ने तुरंत hi उसको पहचान लिया ... वो बस उसके सर को छू कर एक नार्मल सा रिएक्शन देकर वह से चले जाते हैं ...

तरुण अब अपने घर के आँगन से होते हुए अंदर आने लगता है ... उस वक्त घर में उसके दोनों चाचा, पापा और राघव भैया के अलावा सभी लोग मौजूद थे .... जैसा तरुण ने एक्सपेक्ट किया था ठीक वैसा hi रिएक्शन उसको मिला .... उसकी बहनो और माँ चची सभी ने उसको इग्नोर hi किया सिवाए उसकी बड़ी चची के .... उसको बचपन से hi अपने परिवार से ऐसा hi रिएक्शन मिलता आया था तो उसके लिए आज ये कोई नयी बात न थी .... न जाने कैसी नफरत थी सबके दिलो में जो 8 साल उसको घर से दूर रखने के बाद भी उनको चैन न आया था ....

उसको न तो राघव की शादी में बुलाया गया न hi श्रेया की शादी में ... वो तो आज तक अपनी भाभी से कभी मिला भी नहीं था पर वो भी उसको वैसे hi इग्नोर कर देती है जैसे घर के बाकि लोगो ने किया था ... पहले भी उसको घर में सिर्फ दो लोगो से hi थोड़ी बहुत सिम्पथी मिलती थी एक उसके मंझले चाचा शैलेन्द्र जी से और दूसरी उसकी बुआ से .... घर के सभी लोगो की उसके प्रति बेरुखी देख कर hi उसके मंझले चाचा ने उसके रहने और पढ़ने का इंतजाम वह से काफी दूर में कर दिया था .... ताकि उस मासूम को रोज रोज ऐसे जिल्लत और तनो भरी जिंदगी से छुटकारा मिल सके .... उसके चाचा साल में एक बार उससे मिलने को उसके हॉस्टल जरूर जाते थे .... लास्ट ईयर भी वो उससे मिलने गए थे और लौटने के वक्त उसके कुछ फोटोज क्लिक कर लिए थे जिससे उसके घर वालो ने उसको पहचान लिया था .. उसके पढ़ाई और रहने के खर्चे का इंतजाम भी उसके मंझले चाचा ने hi किया था .... कुछ पैसे वो part टाइम जॉब करके भी कमा लेता था ...

तरुण की बड़ी माँ ने उसके रूम की कीस लेकर उसको दे दिए ....

बी. माँ : बीटा तुम अपने रूम जाकर फ्रेश हो जाओ मैं gayatri(ghar की नौकरानी) से तुम्हारा नास्ता तुम्हारे रूम पर hi भिजवा देती हु ...

तरुण भरी मन से अपने बैगेज लेकर सीढ़ियों से होते हुए जाकर अपने रूम का गेट खोलता है ... उसके रूम का हाल बिलकुल वैसा hi था जैसा वो उसको छोड़ कर गया था .... सिवाए इसके की उसके रूम में सिर्फ मकड़ी के जले भरे हुए थे और रूम के अंदर की हर चीज़ पर धूल ने अपना कब्ज़ा जमाया हुआ था ....

खैर उसको पता था की अब क्या करना है ... अपने बैग को एक कोने में रख कर गेट को अंदर से लॉक करके वो साफ़ सफाई में जुट जाता है .... एक घंटे की कड़ी म्हणत के बाद उसका रूम इंसान के रहने के लायक हो जाता है ... अभी वो सफाई करके आराम बीएड पर बैठा hi था की उसके गेट पर नॉक होता है ... वो ुशी हालत में गेट खोलता है ... बहार और कोई नहीं उसके मंझले चाचा hi थे ... उन्हें देखते hi तरुण उनसे आशीर्वाद लेता है ...

म. चाचा : ये कैसी हालत बना राखी है तुमने ... घर में इतने लोग हैं और नौकर चाकर हैं ....

तरुण ( भर्राये गले से ) : छोड़िये न चाचा जी अब क्या hi फरक पड़ता है .... अब मुझे इन सब की आदत हो गयी है ... सोचा था की अब कभी वापस लौट कर इस घर में नहीं आऊंगा पर अपने कसम दी थी तो आना पड़ा ...

म. चाचा : बीटा मैंने तो सबको बतलाया था की तुम आने वाले हो तो किसी ने तुम्हारा रूम नहीं साफ़ किया .... कैसे केयरलेस लोग हैं इस घर में ... रुको मैं सबको बुला कर दांत लगता हु ...

तरुण : छोड़िये न चाचा जी क्यों मेरी वजह से आप टेंशन ले रहे हो ... मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता ... बचपन से सहता आया हु अब तो बड़ा हो गया हु अब कोई दिक्कत नहीं है .... सब सच hi तो कहते हैं की मैं म..

म. चाचा : ख़बरदार जो फिर से तूने वो सब बोलै तो ... मैंने मन किया था न ...

तरुण और उसके मंझले चाचा के आँखों में आंशू दबदबा आये थे ...

थोड़ी देर बाद तरुण अपने कुछ कपडे लेकर वाशरूम जाकर शावर लेकर तरोताज़ा हो जाता है .... उसके चाचा ने उसके लिए उसका ब्रेकफास्ट रूम पर hi भिजवा दिया था तो नास्ता करके वो सफर और साफ़ सफाई में हुए थकन को मिटने के लिए सो जाता है ...

इवनिंग को फ़ोन की रिंग से उसकी नींद खुलती है .... कॉल दिया का था ...

तरुण : hello दीदी कैसी हो ...

दिया : मैं तो ठीक हु तू बता तू कैसा है ... मिल लिया घर वालो से ....

तरुण : हाँ दीदी ... और मैं तो ठीक hi हु ...

दिया : पर तेरी आवाज़ से तो लग रहा तू ठीक नहीं है ...

तरुण (जबरदस्ती हस्ते हुए) : क्या दीदी आप भी न मैं तो ठीक हु ....

दिया : बच्चे उम्र में तुझसे बड़ी हु ... बता सच में क्या क्या हुआ ...

तरुण सिर्फ साफ़ सफाई वाली बात छुपा कर साडी बात बता देता है ...

दिया : कैसे लोग हैं तुम्हारे घर वाले ... इतना प्यारे से बच्चे से कैसी दुश्मनी निकल रहे सभी .... तू अगर मेरा भाई होता न तो तुझे अपने पलकों में छुपा कर रखती ...

तरुण : क्या दीदी अपने भी मुझे पराया कर दिया न ... मैं आपका भाई नहीं हु न ...

दिया : अरे पागल मेरे कहने का वो मतलब नहीं था ... तू तो मेरी जान है एक पल को तो मैं कारन को भूल सकती हु पर तुझे नहीं ... तूने मेरे लिए जितना किया है उतना तो कोई सागा भाई भी नहीं करता ....

तरुण : छोडो दीदी ये सब मैं तो मजाक कर रहा था ... मैं जनता हु आप मुझे कितना प्यार करती हो ...

दिया : ok भाई बाद में बात करती हु ... Bye एंड टेक केयर ...

तरुण : bye दीदी ...

इवनिंग को तरुण की बुआ उससे मिलने आती है ... उसके मंझले चाचा के अलावा एक वही थी जिसके दिल में तरुण के लिए कोई गलत भावना नहीं थी ... वो काफी देर तक तरुण के साथ बातें करती और फिर वापस आने का बोल अपने घर को आ जाती है ....

रात को भी उसका खाना उसके रूम में hi आ जाता है जबकि बाकि लोग साथ बैठ कर अपना डिनर करते हैं ...

डिनर के बाद घर की साडी लड़किया दोनों जुड़वाँ बहनो के रूम में बैठी हुयी थी ...

रानी : यार प्रियांशी इतने दिनों से तो हमारी लाइफ मस्त चल रही .... आज ये मनहूस फिर से यहाँ आ गया ... अब न जाने यहाँ ककया अपसकुन होने वाला है ....

प्रियांशी : अगर ऐसा कुछ हुआ तो अबकी बार मैं खुद अपने हाथो से उसकी जान ले लुंगी ...

रानी : नहीं ले पायेगी यार देखा नहीं वो कितना लम्बा चौड़ा सांढ़ की तरह हो गया है .... पहले हम उसको कितने मजे टॉर्चर करके मज़ा किया करते थे ...

ऋचा : अरे वो अब भी हमारा कुछ नहीं बिगड़ पायेगा .... दादा जी से बोल कर उसको घर से hi हमेसा के लिए निकलवा दूंगी .... दादा जी मेरी कोई बात नहीं टलेंगे ...

रुचिका : दीदी पर मुझे ये बात समख नहीं आती की हम उससे इतनी नफरत क्यों करते हैं .... है तो वो आखिर हमारा छोटा भाई hi न ....

ऋचा : ये तू कैसी बात कर रही है तू छोटी वो मनहूस और हमारा भाई .... हमरे सिर्फ दो hi भाई हैं एक राघव भैया और दूसरे राहुल भैया ...

रुचिका: दीदी अपने शायद ध्यान नहीं दिया कितना मासूम है वो ... आखिर उसने ऐसा क्या किया है जो आप लोग उसके साथ ऐसा बेहवे करती हो जैसा किसी अनजान शक्श के साथ भी नहीं करना चाहिए .... आज मैंने उसके और मंझले चाचा के बीच हुयी थोड़ी सी बातचीत सुनी है ... वो बहुत hi इनोसेंट है दीदी ... हमारे रैवैये से वो बिलकुल टूट सा गया है .... अगर हम ऐसे hi उसके साथ बेहवे करते रहे तो कही वो कोई गलत कदम न उठा ले ....

रानी : वो मर भी जाये तो क्या hi फर्क पड़ेगा ... वो तो और ाचा होगा की एक मुसीबत टलेगी और हम खुल का सांस ले सकेंगे ....

रुचिका : क्या दीदी ये कैसी बात बोल रही हो ऐसा तो कोई किसी दुश्मन के बारे में भी नहीं कहता .... अगर ऐसा hi कोई राहुल भैया के बारे में कहे तो आपको कैसा लगेगा ....

रानी तुरंत hi रुचिका के दोनों गालो पर थप्पड़ लगा देती है ...

रानी : ख़बरदार जो तूने मेरे छोटे भाई के बारे में ऐसा कहा तो मैं तेरी जान ले लुंगी ....

ऋचा : क्या रुचिका तू पागल तो नहीं है न ... एक मनहूस के लिए तू राहुल जैसे प्यारे भाई के बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकती है .... कहा राहुल और कहाँ वो मनहूस ....

प्रियांशी : क्या रूचि तू भी क्या बेकार की बात ले कर बैठ गयी है ... सोच जिस मम्मी पापा ने उसको जन्म दिया है वो तक उससे नफरत करते हैं उसकी परछाई भी खुद पर पड़ने देना नहीं चाहते तू उस मनहूस की वकालत कर रही है ...

रुचिका : मैं किसी की वकालत नहीं कर रही .... मैं तो बस कह रही की उस मासूम पर अब तक के अत्याचार क्या काम थे जो आप लोग उसको और परेशां करने की सोच रहे हो ...

ऋचा : छोड़ अब उसकी बातें ... क्यों उसके लिए हम लोग आपस में बहस कर रहे हैं ... चल छोटी तू सो जा ... हम लोग भी सोने जा रहे हैं ... गुड नाईट ..



उसके बाद इनकी मीटिंग डिसमिस हो जाती है ...
 
अपडेट 3

सभी गेट्स एक दिंनिंग टेबल पर तो सभी लेडीज दूसरे दिंनिंग टेबल पर बैठे थे जबकि सबको परोसने का काम घर की नौकरानियाँ कर रही थी ....

आगे

अभी सब का खाना लग hi रहा था की रुचिका ने वो बोलना सुरु किया जो वो प्लानिंग करके आयी थी ....

रुचिका : दादा जी आपको नहीं लगता की आज कल घर के लोग आपकी बात को नहीं मानते ...

दादा (हस्ते हुए) : अरे क्या बात है आज पहली बार तुम मुझसे किसी की शिकायत करने वाली हो .... बताओ बीटा क्या बात है किसने मेरी गुड़िया का दिल दुखाया है ...

रुचिका : दादा जी जब से मैंने होश संभाला है तब से hi मैंने ये नोटिस किया है हम सब लोग साथ में डिनर किया करते हैं पर .... दो दिनों से ये रूल तोडा जा रहा है पर अपने किसी को कुछ भी नहीं कहा ...

दादा (आस पास देखते हुए) : क्या बात करती हो बेटी सब लोग तो एहि हैं ....

रुचिका : एक बार फिर से ध्यान से देखो दादा जी एक शक्श गायब है .... ये तो आपके नियम के खिलाफ है न दादा जी ....

दादा : हाँ बीटा ... मैंने ध्यान नहीं दिया ....

वो एक नौकरानी से तरुण को बुलाने को कहते हैं ....

थोड़े देर में तरुण सबके सामने था और सबके साथ उसने भी डिनर किया जो उसकी याद से शायद पहली बार hi हुआ था ... उसको ये समझते देर न लगी ये उसकी बहन की अपने छोटे भाई के हक़ के लिए पहली लड़ाई थी जिसे उसने बखूबी अंजाम दिया था थे....

पर रुचिका के इस रवैये से बहुत लोग जल भून कर रह गए ... पर ये जब दादा जी का hi फरमान था तो वो क्या कर सकते थे ....

अगली सुबह को फिर से तरुण की मुलाकात उसके दादा जी के साथ हुयी ... तरुण ने आज भी उनके पाओ छू कर मॉर्निंग विश किये .... जवाब में दादा जी ने उसको कल से ज्यादा ाचा रिस्पांस दिया ... तरुण खुस था की चलो धीरे धीरे hi सही उसके दादा जी उसको रिस्पांस तो देने लगे हैं ...

रानी के रूम में एक सीक्रेट मीटिंग लगी हुयी थी जिसमे तरुण और रुचिका को छोड़ कर घर के सरे बच्चे मौजूद थे ....

रानी : आखिर कल रात को उस रुचिका की बच्ची ने पार्टी बदल hi ली .... देखा नहीं कैसे उस मनहूस को हमारे साथ खाना खाने को बुलवाया ... मेरी हलक से तो खाना नीचे उतर hi नहीं रहा था उसको वह देख कर ....

राहुल : अब से हम में से कोई भी इस रुचिका से बात नहीं करेगा न hi उससे कोई मतलब रखेगा ... उसका भी अबसे वही अंजाम होना चाहिए जो उस .... मुझे तो उसके नाम से hi घिन आती है ....

ऋचा : मुझे ये बिलकुल भी अंदाज़ा न तहत की रूचि हमारे साथ ऐसा करेगी ... अब अगर वो हमारे साथ नहीं है इसका मतलब वो हमारे खिलाफ है ... हमें उसकी अकाल भी ठिकाने पर लेन hi होंगे .... बस हमें उसकी कमजोरी को ढूंढ कर उसके वार करना होगा ... प्रियांशी तू क्यों नहीं उसको अपने रूम से निकलवा देती है ....

प्रियांशी भले hi तरुण से कितनी भी नफरत करती हो पर वो रुचिका से बहुत प्यार करती थी शायद ये ट्विन होने का इफ़ेक्ट हो या जो भी हो ....

प्रियांशी : ये आप कैसी बात कर रही हो दीदी आप सब को उस मनहूस के साथ जो भी करना हो करो पर बात अगर रुचिका की आएगी तो मैं आप लोगो के साथ नहीं हु ... वो बहुत hi सीढ़ी सधी है और जल्द hi किसी के साथ इमोशनली आत्ताच हो जाती है ... जरूर उसने कोई जादू टोना कर दिया है उसके ऊपर जिसके वजह से वो ऐसा बेहवे कर रही है ... मैं उसको समझाउंगी तो वो मान जाएगी ...

राहुल : वो मान जाये तो hi बढ़िया है ...

ऋचा : फ़िलहाल ये सब छोडो हर साल की तरह इस बार भी हम सबने साथ घूमने के लिए जाना है .... दादा जी बता रहे थे की उन्होंने हमें परसो hi निकलना है सो अपनी अपनी बैगेज की पैकिंग सुरु कर दो हमें पुरे एक हफ्ते वह रहना है ...

रानी : वाओ ये तो बड़े मेक की बात कही ... वैसे ये तो बताओ की जाना कहा है ...

ऋचा : समवन हैवे अन्य गेस गाइस ...

प्रियांशी : गोवा

रानी : no वे ... मेरे ख्याल से कश्मीर .... इस गर्मी के मौसम में तो वह मजा hi आ जायेगा ...

ऋचा : वैसी hi जगह है बूत नॉट तहत ... भाई तू भी गेस कर ले ...

राहुल : दादा जी ने बुकिंग कराती है तो कोई रिलीजियस टूर hi होगा ...

ऋचा : नहीं गाइस हमें शिमला जाना है .... और यू शुड बे ग्लैड तो हेअर तहत हमारे साथ कोई ओल्ड जनरेशन के लोग नहीं होंगे तो वह कोई रेस्ट्रिक्शन्स भी नहीं होगी और वह हम फुल एन्जॉय कर सकेंगे ...

प्रियांशी : यू मैं no मम्मी डैडी, ौंटी अंकल न आल ...

ऋचा : यस मेरी बहन ... मैं तो अभी से hi काफी एक्ससिटेड हु ...

राहुल : वो भी जा रहा है क्या वह ..

ऋचा : मैंने तो बहुत मन किया पर क्या करे घर का मेंबर है तो ...

प्रियांशी : अरे जाने दो वो अपनी दुनिया में रहेगा और हम अपनी दुनिया में ...

राहुल : वो सब तो ठीक है अगर उसने वह हमसे उलझने की कोसिस की तो मैं सच में उसकी जान ले लूंगा ....

रानी : इतनी हिम्मत उसमे नहीं है देखा नहीं रात में खाने के वक्त हमसे आँखें भी नहीं मिला प् रहा था ...

प्रियांशी : काश हमारे साथ श्रेया दीदी भी होती तो कितना मज़ा आता ...

ऋचा : वो भी आज शाम तक आ जाएँगी don't वोर्री ... वह फुल तो धमाल होने वाला है ... बस हमें किसी की बुरी नजर न लग जाये ....

राहुल : बुरी नजर वाला तो हमारे साथ hi होगा तो नजर तो लग hi जनि है ...

इवनिंग को एक रूम में घर की सभी औरते भी किसी गंभीर विषय पर बातें कर रही थी ...

बी. चची : आज श्रेया आ रही है इवनिंग में ... इसलिए बहु राघव को टाइम से स्टेशन भिजवा देना ....

शिवानी : हाँ माँ जी आप चिंता न करो ... मैं उन्हें टाइम से भेज दूंगी ...

म. चची : सुना है इस बार फॅमिली टूर में हम बूढ़े लोगो को मन किया गया है जाने से ...

बी. चची : अब हमारी तो उम्र ढल गयी अब हम शिमला विल्मा जाकर कौन का झंडा गाड़ देंगे ...

तरुण की माँ : हाँ अभी झंडा गड़वाने की बरी तो शिवानी बिटिया की है ... हमने तो अपने वक्त में खूब मज़े लिए हैं ऐसे फॅमिली टूर के ... इसकी ये पहली फॅमिली टूर है ... राघव बेटे के साथ साथ थोड़ा मेरे राहुल बेटे को भी टास्ते करवा दियो .... आखिर उसका भी तो हक़ है उसकी भाभी पर ....

शिवानी (सरमाती हुयी) : क्या चची जी आप भी कैसी बात करती हो ...

म. चची : वैसे कल रात उस रुचिका

को क्या हो गया था जो वो उस कलमुहे को हमरे साथ खाना खिलवाने को ले आती थी ... वो तो पापा जी का आर्डर था वर्ण मैं उसका मुँह नोच लेती .... उसके वापस आ जाने से अब न जाने कौन सी विपदा आने वाली है हमारे परिवार पर ... ऊपर से वो कलमुँहा भी फॅमिली टूर पर जाने वाला है ... मुझे तो दर है कही कोई अनहोनी न हो जाये जैसा कुछ आज से 19 साल पहले हुआ ...

शिवानी : क्या हुआ था चची जी 19 साल पहले ... वैसे हमलोग उनसे इतनी नफरत क्यों करते हैं ... वो मेरी शादी में भी मौजूद नहीं आये थे शायद .... कल रात को पहली बार मैंने उन्हें ध्यान से देखा है वो उतने बुरे भी तो नहीं लगते ....

म. चची : वो कभी बाद में बताउंगी बहु तुम्हे ... मैं तो बस तुम्हे इतनी सलाह दूंगी की अगर घर की सलामती चाहती हो तो उससे दूर hi रहना ... हम लोग उसको किसी सुबह कार्य का हिस्सा बनने hi नहीं देते ताकि कोई अनहोनी न हो जाये ... रही बात उसके बुरे लगने की तो जो जैसा होता है वैसा देखता नहीं ...

तरुण की माँ : क्या दीदी आप भी क्यों बार बार उसकी बात छेड़ देती हो ... आपको पता है न मुझे उसके बारे में बात करना भी पसंद नहीं ... न जाने वो कौन सी अशुभ घडी थी जब मैंने उसको जन्म दिया था .... उसके पैदा होते hi हमारे हस्ते खेलते परिवार पर मातम का साया छ गया ... मेरे लिए तो इस घर में सिर्फ दो hi बेटे हैं एक राघव और दूसरा राहुल ...

बी. माँ : अब जो हो गया सो हो गया ... क्यों तुम लोग बार बार उस गड़े मुर्दे को उखड़ती रहती हो ...

उसके बाद इस टॉपिक पर और कोई बात नहीं होती ...

इवनिंग को श्रेया भी आ जाती है ... एक बात बता दू की श्रेया के दिल में तरुण के लिए कोई बाद फीलिंग नहीं थी ... वो अपनी शादी में भी तरुण को बुलवाना चाहती थी पर घर के बड़ो ने मन किया हुआ था इसलिए वो मन मार कर रह गयी ...

राघव के साथ घर आते वक्त उसको पता चल चूका था की तरुण भी घर आ चूका है ...

जैसा उसने एक्सपेक्ट किया था ... सरे घर वाले उसको ग्राउंड फ्लोर पर hi मिल गए थे सिवाए तरुण के ...

तरुण की माँ : बेटी अकेले hi आयी हो दामाद जी को भी साथ ले आती तो कितना मज़ा आता ...


श्रेया : चची जी ये फॅमिली टूर था तो इसमें उनकी क्या जरुरत ... ाचा सो लोग बातें करो मैं अपने रूम से चेंज करके आती हु फिर आराम से बातें करेंगे ... अब तो मैं एहि हु तो बातें तो होती रहेंगी ...
 
अपडेट 4

श्रेया : चची जी ये फॅमिली टूर था तो इसमें उनकी क्या जरुरत ... ाचा आप लोग बातें करो मैं अपने रूम से चेंज करके आती हु फिर आराम से बातें करेंगे ... अब तो मैं एहि हु तो बातें तो होती रहेंगी ...

आगे

श्रेया का लगेज राघव ने उसके रूम में hi भिजवा दिया था इसलिए वो रूम जा कर जल्दी से ड्रेस चेंज करके एक निघ्त्य दाल लेती है .... और बिना वक्त गंवाए सीढिया चढ़ कर तरुण के रूम के गेट को नॉक करती है ... तरुण गेट खोलता है तो उसकी नजर सामने कड़ी श्रेया पर पड़ती है .... लास्ट टाइम जब उसने श्रेया को फेखा था तो स्लिम सी थी ... पर अब उसका बदन थोड़ा भर गया था और वो अब हॉट भी लगती थी .... पहले भी सबसे नजरे बचा कर वो तरुण से मिलने आया करती थी और कभी कभी उसको अपने हाथो से खाना भी खिला दिया करती थी ...

तरुण की आँखें श्रेया को सामने प् कर नाम हो जाती है .... तरुण को ऐसे इमोशनल होता देख श्रेया की भी आँखें नाम हो जाती है ...

तरुण झुक कर उसको पाओ छूने को होता है तो श्रेया उसको पकड़ कर अपने सीने से लगा लेती है ... एहि नहीं वो अपने हाथो से उसके आंशू साफ़ करती है और उसके चेहरे पर चुम्बनों की बौछार कर देती है ....

श्रेया : कैसे हो मेरे लिटिल चैम्प ... तुम अब भी रट हुए बिलकुल बन्दर लगते हो ....

तरुण : आप भी तो रो रही हो ... अंदर आओ न दीदी आप गेट पर hi कड़ी हो तब से ...

फिर दोनों अंदर आ जाते हैं ...

श्रेया : मैं तो तुझसे इतने सालो बाद मिली हु इसलिए तो रही हु ... सॉरी बाबू मैं तुम्हे अपनी शादी में नहीं बुला पायी वजह तुम तो जानते hi होंगे ....

तरुण : मुझे पता है दीदी .... पर कोई नहीं .... जीजा जी भी आये हैं क्या ....

श्रेया : नहीं भाई उन्हें छुट्टी नहीं मिली और वैसे भी फॅमिली ट्रिप में उनका क्या काम ...

तरुण : ये कैसी ट्रिप है दीदी ...

श्रेया : ये लास्ट 7 साल से सुरु हुआ है और हर साल हम फॅमिली वाले देश के किसी टूरिस्ट प्लेस पर एक साथ जाते हैं ... ये सब दादा जी के hi मन की उपज है .... चल अब नीचे चलते हैं शायद बुआ भी मिलने आयी होंगी ...

तरुण : आप जाओ दीदी मैं बाद में आऊंगा ....

श्रेया : जी नहीं अब तुम्हारी ये बड़ी बहन आ गयी है अब तुम्हे किसी से डरने की कोई जरुरत नहीं .... पहले मैं तुम्हारा खुल कर सपोर्ट नहीं कर पति थी पर अब तेरी बहन कमजोर नहीं है ....

और फिर श्रेया तरुण को अपने साथ नीचे ले जाती है .... जहा तरुण को श्रेया के साथ देख राहुल न उसकी पल्टन की आँखें बहार निकल आयी थी वही रूचि एंड उसकी बुआ उन्हें साथ देख खुस थे ....

बुआ : क्या बात है लाडो हम यहाँ इंतजार करते रह गए और तुम्हे कपडे बदलने में इतना देर हो गया ...

श्रेया : नहीं बुआ जी वैसी बात नहीं बस वो चेंज करने के बाद थोड़ा तरुण से मिलने को गयी थी ... वैसे रूबी नहीं दिख रही ...

बुआ : वो अपने पापा के साथ मॉल गयी है शायद कुछ शॉपिंग करनी थी उसको .... आज तुम्हे हमारा और तरुण के डिनर का अरेंजमेंट आज हमारे घर पर हुआ है .... वही तुम लोगो को साथ लिवाने आयी हु .... बाकि लोग तो एहि होते हैं सोचा टूर पर जाने से पहले हमारे साथ भी कुछ वक्त बिता लेते तो ाचा रहता ....

बी. चची : अरे आप क्यों तकलीफ करती हो ... ये लोग कभी बाद में आ जायेंगे अभी तो मैंने अपनी बेटी से अचे से बात भी नहीं किये ....

बुआ : भाभी आप तो जानती hi हो की मैं कितनी जिद्दी हु मैंने जो एक बार जो कमिटमेंट कर दी उसके बाद मैं खुद के बाबूजी की नहीं सुनती ....

प्रियांशी : वाओ बुआ आप तो दब्बंग स्टार निकली ...

बुआ : तो तुम्हे क्या लगता है की सिर्फ तुम बच्चे hi फिल्में देखते हो अरे हमने भी अपने ज़माने में बहुत गुल खिलाये हैं ...

ऐसे hi थोड़े देर सभी लोगो के बीच हसी मजाक का माहौल बना रहता है .... थोड़े देर के बाद बुआ तरुण और श्रेया को अपने साथ घर लिए जाती है ....

जब वो घर पहुँचती है तब तक टार्न के फूफा और रूबी घर लौट आये थे .... रूबी अभी सोफे पर बैठ कर अपने लाये हुए ड्रेसेस को देख रही थी ... तरुण और श्रेया को उसके फूफा जी गेट के पास hi मिल गए थे तो वो उनसे वही प्रणाम कर लेते हैं ....

श्रेया : क्या देख रही है गुड़िया ..

रूबी जब श्रेया की आवाज़ सुनती है तो कूद कर उसके गले लग जाती है ....

बुआ : बंदरिया कही की ... ऐसे भी कोई किसी से मिलता है क्या ...

रूबी : आपको क्यों जलन हो रही है माँ मैं तो अपनी दीदी से ऐसे hi मिलती हु ...

उसके बाद रूबी तरुण को भी गले लगा कर उसका हाल चल पूछती है ...

बुआ : अब मिलना जुलना हो गया हो तो चलो किचन दीदी और बाबू आज एहि हमारे साथ hi रुकेंगे ....

रूबी : अरे ये तो बहुत यही बात है ... वैसे भी ज मेरे एक्साम्स फिनिश हो गए हैं तो मुझे दीदी से ढेर साडी बातें करनी है ....

साडी लेडीज किचन जाकर खाना रेडी करती हैं और सभी लोग एक साथ खाना कहते हैं ....

खाना खाने के बाद थोड़ी देर सभी साथ टीवी देखते हैं जिसके बाद तरुण के फूफा सोने को चले जाते हैं ....


श्रेया रूबी के रूम में सोने चली जाती है तो बुआ तरुण को एक रूम में भेज देती है और कुछ देर बाद वो भी उसके रूम में आ जाती है ... अभी उसने एक निघ्त्य पहनी हुयी थी जो वो सोने के टाइम उसे किया करती थी .... वो तरुण के सिरहाने बैठ कर उसका सर अपनेगोड़ में ले लेती है और उसके सर को सहलाने लगती है ...

बुआ : बीटा घर में सभी लोग कैसा बर्ताव कर रहे अब तुम्हारे साथ ....

तरुण : बाकि सब तो अस उसुअल वैसे hi हैं पर कल रात को रुचिका दीदी खुद hi मिलने आयी थी मुझसे ... वो भी बहुत देर तक रोटी रही ... उनके वजह से hi कल मैंने सबके साथ डिनर किया ...


बुआ : वो भी बहुत प्यारी बच्ची है ... सब से अलग ...

तरुण : बुआ जी मुझे बहुत सालो बाद ऐसा लम्हा नस्सेब हो रहा .... अगर आप बुरा न मने तो क्या आप मेरे साथ एहि सो सकती हो ... माँ के प्यार तो अपने hi मुझे दिया है .... मैं उस लम्हे को एक बार फिर से महसूस करना चाहता हु ...

बुआ : अरे पागल मैं तो तुम्हारे साथ hi तो सोने आयी हु इसमें बुरा लगने वाली कौन सी बात है ... एक माँ अपने बेटे के साथ नहीं सो सकती क्या ... बीटा छोटा हो या बड़ा माँ की नजर में हमेसा बच्चा hi रहता है ...

वो तरुण के दोनों गालो को चुम लेती है और लाइट ऑफ करके नाईट बल्ब जला कर उसके साथ hi सो जाती है .... तरुण को भी किसी अपने को अपने साथ पाकर इतनी प्यारी नींद आती है जैसा शायद hi उसको इतने सालो में कभी आयी हो ....

सुबह को जल्दी hi तरुण की बुआ की नींद खुल जाती है ... नींद खुलते hi वो पति है की तरुण किसी बच्चे की तरह कुड्लिंग करके सोया हुआ था .... अगर वो उठ जाती तो तरुण की नींद खुल सकती थी इसलिए वो भी वैसे hi फिर से सो जाती है .... तरुण के अंदर उन्हें अपना बीटा नजर आता था जिसके लिए hi वो उसको मानती थी ....

ठीक 8 बजे तरुण की नींद खुलती है तो वो पता है की वो अकेले hi रूम में सोया हुआ है .... वो पहले फ्रेश हो लेता है फिर रूम से बहार आता है .... लाउन्ज पर उसको रूबी बैठी हुयी दिखती है जो की टीवी देख रही थी ....

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ... श्रेया दीदी चली गयी क्या ...

रूबी : गुड मॉर्निंग भाई ... वो 6 बजे hi चली गयी तुम्हे आराम से सोता देख उन्होंने तुझे डिस्टर्ब नहीं किया ....

तरुण : ठीक है दीदी चलता हु ... बुआ जी से कह दीजियेगा की मैं चला गया ...

रूबी : कही जाने आने की जरुरत नहीं मुम्मा ने तुझे ब्रेकफास्ट करवा कर भेजने को कहा है ... जाओ फटाफट ब्रश करके आ जाओ मैं ब्रेकफास्ट निकलती हु ....

तरुण : नहीं दीदी आपको कष्ट करने की कोई जरुरत नहीं घर पर hi खा लूंगा वैसे भी मैं ब्रश लेकर कहा आया ...

रूबी : रुको मैं लती हु ...

उसको बाद रूबी तरुण को ब्रश करवा कर खुद hi उसके घर तक छोड़ आती है ....

पिछले दो दिन में hi तरुण की जिंदगी में बहुत सरे रंग दिख गए थे ...

तरुण जब अपने घर पहुंचा था तो वह सिर्फ लेडीज hi थी ... जवानो की टोली पहले hi शॉपिंग के लिए निकल चुकी थी ...


जब वो अपने रूम की तरफ जा रहा था तो उसको अपने मम्मी पापा का रूम खुला हुआ दिखा .... रूम में उसकी मम्मी अकेली बैठी हुयी किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी ... वो अपनी माँ से बात करना चाहता था पर छह कर भी वो हिम्मत नहीं जूता प् रहा था ...

इसी kash-m-kash में थोड़े देर वही खड़ा रह गया .... फ़ोन पर बात करते हुए hi अनायास hi उसकी नजर गेट के बहार खड़े तरुण पर पड़ी जो उसके hi तरफ देख रहा था ... तरुण को यु अपने गेट पर खड़ा देख वो जल भून गयी .... अपना फ़ोन बीएड पर रख वो किसी जहरीली नागिन की तरह फुफकारती हुयी आती है और उसके गालो पर एक जोर का थप्पड़ जड़ देती है ... थप्पड़ इतना झन्नाटेदार था की तरुण का जबड़ा तक हिल गया ...

टी माँ : किसी ने तुम्हे तमीज़ नहीं सिखलाया है क्या .... पहले मनहूस तो थे hi और अब बद्तमीज़ भी हो गए हो ... तुम कही जा कर मर क्यों नहीं जाते ....

तरुण बिना कुछ बोले hi अपने गालो को सहलाता हुआ वह से अपने रूम चला जाता है और अपना गेट लॉक कर लेता है ...

थप्पड़ की आवाज़ इतनी तेज़ थी की ग्राउंड फ्लोर तक आवाज़ चली गयी थी ... तरुण की बड़ी चची और भाभी भागी हुयी सेकंड फ्लोर पर आयी तो पाया की तरुण की माँ अपने रूम के बहार कड़ी तरुण के रूम की तरफ घूरे जा रही थी ....

तरुण की बड़ी चची उसको पकड़ कर उसके रूम ले जाती है ...

बी. चची : क्या हुआ सुमि ( वो तरुण की माँ को सुमित्रा की जगह सुमि hi बोलै करती थी) ये इतनी तेज़ आवाज़ किस चीज की थी ....

तरुण की माँ : अरे कुछ नहीं दीदी वही वो है न इस घर का मनहूस ...

बी. चची : तुम तरुण की बात कर रही hi क्या ... अभी तो वो सबके बारे में पूछ कर ऊपर आया था ... उसने क्या कर दिया ...

तरुण की माँ : करना क्या है मेरे रूम को खुला देख बहार से hi घर रहा था और मुझे फ़ोन पर बात करते हुए सुन रहा था ...

बी. चची : तो तुमने क्या किया ...

तरुण की माँ : करना क्या था लगा दिए हरामी के गाल पर एक रख के ... मेरा बस चलता तो उस हरामी का मुँह नोच लेती ....

बी. चची : तुम्हे लगता है की तूने सही किया है ...

तरुण की माँ : है नहीं तो और क्या ... ऐसे लोगो को किस तरह से सबक सीखना है मुझे अछि तरह आता है ...

बी. चची : क्या अगर तरुण की जगह राहुल या राघव होता तब भी तुम ऐसा hi करती ...

तरुण की माँ : नहीं उनके साथ मैं ऐसा कैसे कर सकती हु मैं उन्हें जानती उनकी राग राग दे वाकिफ हु वो ऐसा कुछ कर hi नहीं सकते ...

बी. चची : गलत तो खैर तरुण ने भी नहीं किया है ... तुम कहती हो की तुम राहुल और राघव की राग राग से वाकिफ हो और उन्हें जानती हो पर तरुण तो तुम्हारा अपना खून है ... मैं सिर्फ आज के घटनाओ के आधार पर कह सकती हु की इसमें तरुण की कोई गलती नहीं ...

तरुण की माँ : पर उसको अगर कोई काम था तो आवाज़ देकर पूछना चाहिए था ...

बी. चची : वह सुमि चित भी तुम्हारी और पैट भी तुम्हारी ... तुमने कभी उसको अपने आस पास फटकने भी दिया है ... आज की hi बात ले लो तो ये भी तो हो सकता है की वो तुम्हे अकेला प् कर तुमसे कुछ कहना चाहता हो पर तुम्हारे उसके प्रति बिहेवियर की वजह से वो छह कर भी अंदर न आ प् रहा हो ...

तरुण की माँ : नहीं दीदी ऐसा नहीं हो सकता वो है की कमीना ...

बी. चची : देख सुमि तुमसे बड़ी होने के नाते मैं तो बस इतना कहूँगी की ये नफरत के बीज सिर्फ घरो को तोड़ सकते हैं जोड़ नहीं सकते ... सोच लो कही इतना भी देर न हो जाये की तुम्हे पछताने का कोई मौका भी न मिले ...

इतना बोल कर तरुण की बड़ी चची वह से चली जाती है ... अब वह सिर्फ शिवानी और तरुण की माँ बच जाती है ...

इधर रूम में रट रट तरुण को नींद आ जाती है ...

3 बजे के आस पास तक सभी लोग शॉपिंग करके घर वापस लौट आये थे ... अपने हाथ में 2 बैग्स लिए श्रेया तरुण का रूम खटखटाने लगती है ...

कुछ देर बाद hi गेट खुलता है ... वो हस्ते हुए अंदर घुसती है ...

श्रेया : ये लो भाई इसमें मैंने तुम्हारे लिए कुछ ड्रेसेस परचेस की है ... तरय करके देख और बता की मेरी चॉइस कैसी है ...

तरुण : इसकी क्या जरुरत थी दीदी ... मेरे पास पहले से hi बहुत ड्रेसेस हैं ...

श्रेया : इधर तो दिखा अपने गाल ... ये तेरे गाल पर ये पांच उंगलियों के नीसाण कैसे ... कही किसी ने तुझे मारा तो नहीं ... सच सच बता तुझे किसने मारा है ...

तरुण : छोडो न दीदी क्यों छोटी मोती बात को इतना हाईलाइट कर रही हो ... W..wo मैं खुद से hi आइना में देख कर खुद को मरने की प्रैक्टिस कर रहा था ...

श्रेया : मेरी कसम खा कर बोल तो की तू सच कह रहा है ...

ठीक तभी श्रेया को ढूंढ़ती हुयी शिवानी वह अस जाती है जो कुछ देर से उनकी बात सुन रही थी ...

शिवानी : ये नहीं बताएँगे दीदी कुछ भी ... इन्हे इनकी मम्मी ने मारा है ...

और फिर शिवानी श्रेया को सब कुछ बताती है ...

श्रेया : यार ये कैसी माँ हैं वो ... अपनी औलाद के साथ भी कोई ऐसा बेहवे करता है ...मन की तुम्हारे अतीत में कुछ बुरा हुआ था पर उसमे तुम्हारा क्या दोष ...

तरुण : नहीं दीदी ऐसा नहीं गलती मेरी hi थी ... मुझे उनके रूम में ऐसे नहीं झांकना नहीं चाहिए था ...

श्रेया : वो सब छोड़ चलो आज तुम्हे एक जगह ले चलती हु ताकि तुम्हारा मूड ठीक हो जाये ... भाभी आज हम बहार hi खा कर आएंगे इसलिए हमारा वेट नहीं कीजियेगा ...

तरुण : पर दीदी ऐसी हालत में बहार जाऊंगा तो लोग क्या कहेंगे ...

श्रेया : तुम भी न अरे हीरो कोविद में बाद एक hi चीज तो ाचा किया है हमें मास्क दे दिया है ... वही उसे करो .... तुम रेडी होकर मेरे रूम में आओ मेरे पास अछि क्वालिटी के कुछ मास्क पड़े हुए हैं ...

और फिर श्रेया वह से चली जाती है ... आज पहली बार तरुण ने शिवानी को इतने गौर से देखा था उसको अपने भैया की पसंद पर नाज़ हो रहा था ...

थोड़े देर बाद तरुण अपने रूम से निकल कर फर्स्ट फ्लोर पर आता है और श्रेया के रूम में बिना नॉक किये hi घुस जाता है ... रूम के अंदर का नजारा देख उसकी आँखें बड़ी हो जाती है पर कुछ hi लम्हो बाद वो घूम जाता है और बहार आ जाता है ... उसके ऐसा करने की वजह ये थी की अंदर अभी श्रेया अपनी ड्रेस चेंज कर रही थी नीचे तो वो फुल ड्रेस में थी पर ऊपर उसने सिर्फ ब्रा पहना हुआ था और एक सूट पहन रही थी ... उसने तरुण को देख लिया था उसको ऐसे ु टर्न लेकर जाते देख उसके चेहरे पर स्माइल अस जाती है ...

श्रेया : बहार क्यों खड़ा है चैम्प अंदर आ जा ...

तरुण : वो दीदी सॉरी मैंने ये जान बुझ कर नहीं किया था ...

श्रेया : मुझे पता है और तुझ पर भरोसा भी ... ये लो मास्क ...

और फिर दोनों एक कार से निकल पड़ते हैं ... कार को श्रेया hi ड्राइव कर रही थी ... कुछ hi देर में उनकी कार गाँव को क्रॉस करके सहर में एंटर कर जाती है ...

श्रेया जब कार को एक मल्टीप्लेक्स के सामने रोकती है तो तरुण उसको प्रश्नवाचक दृस्टि से देखता है ...

श्रेया : अब मुझे ऐसे क्या देख रहा है ... वो मैंने सोचा की पहले तेरा मूड ठीक कर दू उसके बाद खाना वन होता रहेगा ... चल जा पहले दो टिकट ले आ ...

तरुण जाकर 2 टिकट ले आता है ...

श्रेया : यार बहुत दिन हो गए थे किसी मल्टीप्लेक्स या सिनेमा हॉल में मूवी देखे हुए ...

तरुण : क्यों जीजू नहीं ले जाते हैं क्या आपको मूवी दिखलाने ... वैसे अभी शो सुरु होने में आधा घंटा है ...

श्रेया : चल कार में बैठ कर hi टाइम पास करते हैं ... कुछ देर बाद चलेंगे ...

तरुण : दीदी वैसे ये कोई हॉलीवुड मूवी मालूम होती है ...

श्रेया : क्या फरक पड़ता है ... बस हमने टाइम hi तो पास करना है ...

तरुण : आप यहाँ पहले भी आती हो क्या ...

श्रेया : हाँ भाई बहुतो बार ... कभी भैया के साथ कभी किसी बहन के साथ ... 2 - 3 बार तो अपने बॉयफ्रेंड के साथ भी आ चुकी हु ... अब तू ये न कहना की तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है ...

तरुण : सच्ची दीदी मैंने कभी कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनाया ... क्या सच में आपका कोई बॉयफ्रेंड था ....

श्रेया : और नहीं तो क्या मैं तुझसे झूट बोल रही हु ...

तरुण : वैसे आपको देख कर तो नहीं लगता की आपका कोई बॉयफ्रेंड होगा ...

श्रेया : तो क्या बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड बनाने का जिम्मा सिर्फ तुम सहर वालो ने उठा रखा है ...

तरुण : नहीं दीदी मेरे कहने का मतलब है की आप बहुत सीढ़ी सधी लगती हो ...

श्रेया : बच्चू अभी तूने मुझे सही से जाना hi कहा है ... Don't वोर्री आज तुम्हे छोटा सा ट्रेलर दिखा दूंगी अपनी सराफत का ...

तरुण : चलो दीदी टाइम हो गया है ...

उसके बाद दोनों अंदर घुस जाते हैं ... मूवी शायद काफी दिनों से लगी हुयी थी जिसके वजह से अंदर ज्यादा रश नहीं था ... तरुण पॉपकॉर्न के लिए लाइन में लग चूका था ...

वो पॉपकॉर्न लेकर इधर उधर श्रेया को ढूंढ़ता है तो पता है की वो एक लड़के के साथ बात करने में लगी हुयी थी ... वो उनके पास पहुँचता है ...

श्रेया : तरुण इससे मिलो ये मेरा फ्रेंड है मयंक और मयंक ये है मेरा छोटा भाई तरुण ...

मयंक तरुण को hi करता है ...

मयंक : तो तुम अपने भाई के साथ hi मूवी देखने आयी हो क्या श्रेया ...

श्रेया : हाँ तो क्या दिक्कत है ... वैसे तुम किसके साथ आये हो ...

मयंक : मैं तो अकेले hi आया हु ... मैं अकेला कहा बोर होऊंगा मैं भी तुम लोग के साथ hi हो लेता हु अगर तुम्हे ऐतराज़ न हो तो ...

श्रेया : अस यू विश ... मुझे क्या ऐतराज़ hi सकता है ...

श्रेया कार्नर सीट पर थी और तरुण उन्दोनो के बीच में बैठा हुवा था ...

श्रेया (मन में ) : न जाने कहा से ये हरामी चिपकू बीच में आ गया ... सोची थी की तरुण के साथ थोड़ी बहुत मस्ती करुँगी ताकि उसका मन बहाल जाये पर इस मयंक के बच्चे ने सारा गुड़ गोबर कर दिया ...

मूवी ख़त्म होने के बाद तीनो बहार निकलते हैं ...

श्रेया : कितनी वाहियात मूवी थी ... ऐसे मूवीज लोग क्यों बनाये हैं ...

तरुण : हॉलीवुड में ज्यादातर मूवीज ऐसी hi होती है दीदी साद एंडिंग के वाली ...

मयंक : गोली मारो मूवी को ... वैसे श्रेया एक बात तो माननी होगी तुम शादी के बाद और भी खूबसूरत हो गयी हो ...

श्रेया : थैंक्स .. वैसे अंकुश का क्या हाल है ...

मयंक : तुम्हारी शादी के बाद तो वो बेवड़ा हो गया था ... लास्ट मंथ hi उसकी शादी हुयी है ...

श्रेया : और तुम्हारा ...

मयंक : मैं तो पहले भी सिंगल तहत आज भी सिंगल hi हु ...

श्रेया : ok मयंक अब हम चलते हैं ... हमें घर भी जाना है ...

उसके बाद श्रेया और तरुण एक होटल से खाना खाने के बाद कार से घर की तरफ चल देते हैं ...

तरुण : एहि आपका बॉयफ्रेंड था क्या दीदी ...

श्रेया : नहीं रे पागल तुम्हे मेरी चॉइस इतनी ख़राब लगती है ...

तरुण : अजीब सा फ़्रस्ट्रेटेड इंसान था अब भी आपके ऊपर लाइन मरने का मौका नहीं छोड़ रहा था ...

श्रेया : तुम्हे बड़ा पता है की कैसे लाइन मारा जाता है .... अरे वो हमेसा से ऐसा hi है ...

तरुण : वैसे उसने गलत तो नहीं कहा था दीदी आप सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो आज ...

श्रेया : तुम्हारे कहने का क्या मतलब है पहले मैं सुन्दर नहीं थी ...

तरुण : वो सब मुझे क्या पता दीदी मैं तो कुछ hi दिन से आपको देख रहा हु ...


श्रेया : ाचा ाचा अब ज्यादा इमोशनल होने की जरुरत नहीं है ... लो अब घर भी आ hi गया ...
 
अपडेट 5

तरुण : वो सब मुझे क्या पता दीदी मैं तो कुछ hi दिन से आपको देख रहा हु ...

श्रेया : ाचा ाचा अब ज्यादा इमोशनल होने की जरुरत नहीं है ... लो अब घर भी आ hi गया ...


आगे

इवनिंग को श्रेया अपने रूम में कल के लिए अपने बैग्स पैक कर रही थी की उसका गेट नॉक होता है ... जब वो गेट खोलती है तो पति है की राहुल वह खड़ा था ...

राहुल : क्या बात है दीदी लगता अपने छोटे भाई के आने के बाद अपने मुझे पराया कर दिया .. उसको hi अपने साथ घूमती फिरती हो और हमेसा उसके hi साथ दिखती हो ...

श्रेया : अरे पागल किसने कहा की मैं तुझसे प्यार नहीं करती ... चल आ यहाँ ...

और फिर श्रेया उसके दोनों गाल को चुम लेती है ...

श्रेया : अब भी तुम्हे मुझसे कोई शिकायत है क्या ...

राहुल ( हस्ते हुए) : अगर ऐसे hi किस्सेस रोज मिलते रहे तो मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं रहेगी ...

श्रेया : तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की मैं तुमसे प्यार नहीं करती ...

राहुल : जबसे आप आयी हो हमेसा उसके साथ hi रहती हो या उसका hi साथ देती हो ...

श्रेया : अरे नहीं भाई ऐसा कुछ नहीं है तुम लोगो के साथ तो मैं हमेसा से रहती आयी हु ... उसके साथ तो मैंने चाँद लम्हे hi बिताये हैं जिंदगी के ...

अभी श्रेया ने एक डीप गले की निघ्त्य पहनी हुयी थी जो वो उसुअल्ल्य सोने के टाइम उसे करती थी ... शादी के बाद अस उसुअल उसके बूब्स के साइज में इन्क्रीमेंट हुआ था ... तो उसके क्लीवेज का हिस्सा काफी कामुक लग रहा था ... राहुल बात तो श्रेया से कर रहा था पर उसका ज्यादातर ध्यान श्रेया के क्लीवेज पर hi था ....

राहुल : दीदी क्या मुझे और किस्सेस मिलेगी ...

श्रेया : चल भाग बड़ा आया किस्सेस लेने वाला ... साडी किस्सेस तुझे hi बाँट दूंगी तो तेरे जीजा जी को क्या दूंगी ...

राहुल (मन में ) : काश दीदी बस एक रात के लिए पैट जाये तो मैं खुद को सबसे खुसनसीब इंसान समझूंगा ... शादी के बाद दीदी के चूचियों को जीजा जी ने आते के जैसा गूथ दिया है शायद इसलिए तो ये इतने बड़े बड़े हो गए हैं .... जब ऊपर का माल इतना जायकेदार है तो नीचे वाला सुख के झरने से तो अमृत की बारिस होती होगी ... एक न एक दिन तो उनके अमृत कलस से hi डायरेक्ट अमृत पिऊंगा hi ...

श्रेया : ाचा अभी तू जा मैं अभी बैग पैक कर रही हु ... तूने कर की क्या ....

राहुल : मेरा बैग तो रानी दीदी पैक करती हैं ... वो hi करेंगी ...

उसके जाने के बाद श्रेया राहुल और तरुण के बीच कपरिसों करने लगती है ... वो अपने तीनो भाइयो को एक सामान ट्रीट किया करती थी पर तरुण के केस में उसकी थोड़ी इमोशनल बॉन्डिंग भी अटैच्ड थी ... वही राघव तो उसका सागा भाई था उसकी शादी के बाद से उसने राघव पर अपना अधिकार जाताना काम कर दिया था ...

श्रेया (मन में) : दोनों में कितना अंतर है एक मुझे कपडे बदलते देख शर्मा कर घबरा गया तो दूसरा तो लगता है आज मेरे कपड़ो के अंदर स्कैन कर रहा था ... अगर मेरे बारे में इसकी ऐसी फीलिंग है तो सबके साथ भी ऐसे hi ट्रीट किया करता होगा ... मुझे इसके ऊपर विशेष ध्यान रखना होगा ....

अगले दिन दोपहर को इनकी फ्लाइट थी तो सभी टाइम से निकल लिए ... उनकी सीट्स इकनोमिक क्लास की थी जिसमे इनकी सीट्स 3 थ्री सीटर थी तो एक बन्दे को किसी दूसरे लोगो के साथ सीट शेयर करना था ... अब ये किस्मत कहो या कुछ और की तरुण की सीट उन्ही दोनों के बिच मिली थी जिन्हे वो फूटी आँख भी नहीं सोहता था यानि की तरुण की सीट रानी और ऋचा के बीच वाली मिली थी, दूसरी थ्री सीटर में रुचिका और रूबी के बीच में प्रियांशी बैठी थी तो तीसरे थ्री सीटर में राघव और श्रेया के बीच में शिवानी बैठी थी ... जबकि राहुल को दो एज्ड पीपल के साथ सीट शेयर करना था ... रानी और ऋचा ने एयर होस्टेस से बहुत सिफारिस की पर उसने उनकी बात को ये कह कर नकार दिया को 2 घंटे की hi तो बात है .... एक hi हालत में सीट इंटरचेंज हो सकती थी अगर राहुल और तरुण को कोई ऐतराज़ न हो ... राहुल तो तुरंत एग्री हो गया पर तरुण ने सीट एक्सचेंज करने से मन कर दिया ... तो आखिर में मन मार कर उन्हें वैसे hi बैठना पड़ा ...

दोनों उसके दोनों साइड बैठ तो गयी पर मुँह टेढ़ा किये हुए थी ... वो ये भी जनता था की दोनों उससे बहुत hi ज्यादा हेट करती थी ... तरुण ने उनकी हालत का थोड़ा मजा लेना चाहा ...

तरुण : ऐसे मुँह टेढ़ा मत करो वर्ण अगर सही में मुँह टेढ़ा हो गया तो तुम लोगो से शादी कौन करेगा ....

रानी ( गुस्से से) : ये क्या बेहूदगी है हम तुमसे बात नहीं करना चाहती तो तुम हमें क्यों छेड़ रहे हो ... अगर यहाँ हम पब्लिक प्लेस में नहीं होते तो अभी तेरा मुँह तोड़ देती ...

तरुण : मैंने आपको तो नहीं कहा ...

ऋचा : यानि की तुम मुझे ये सब कह रहे7 थे ... रुको हमें शिमला पहुँचने दो फिर मैं तेरा वो हाल करुँगी की तू हर वक्त सोचा करेगा की तू शिमला क्यों गया ...

तभी एक एयरहोस्टेस ने आ कर उन्हें शांत रहने को कहा ...

थोड़े hi देर में उनकी फ्लाइट टेक ऑफ कर लेती है ... सभी लोग आपस में हलकी फुलकी बातें करके सफर का मज़ा ले रहे थे वही ऋचा की आँखें नींद से बोझिल होने लगी थी ... वो कभी तरुण के साइड शिफ्ट हो जा रही थी तो कभी बहार की साइड क्यूंकि तरुण अभी मिडिल के थ्री सीटर पर बैठा हुआ था ... ऐसे में hi एक बार वो तरुण के कंधे पर निढाल हो जाती है तो वो उसके सहूलियत के लिए हल्का सा बेंड हो कर उसके सर को अचे से अपने कंधे पर सेट कर लेता है ताकि वो आराम से सो सके ... उसके बाल खुले हुए थे जिसके वजह से कुछ बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे जिससे उसको नींद में hi प्रॉब्लम हो रही थी ... तरुण ऋचा की परेशानी को समझ जाता है और उसके बालो को धीरे से उसके कान के पीछे कर देता है .... दूसरे रौ में ऋचा के पास रुचिका बैठी हुयी थी जो बड़े देर से इनकी हर एक्टिविटी को देख रही थी ... तरुण के द्वारा ऋचा बालो को उसके कान के पीछे रखते हुए देख मन hi मन मुस्कुरा पड़ती है ...

रुचिका (मन में) : एक मेरी बहन है जो अपने भाई से बेपनाह नफरत करती है और ये मेरा भाई है जो की अपनी बहन की नींद तक ख़राब होने नहीं देना चाहता ...

फाइनली जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट पर उनकी फ्लाइट लैंड कर जाती है ... फ्लाइट के लैंड होते hi ऋचा की नींद खुल जाती है ... वो अभी भी तरुण के कंधे पर सर रख कर सोई हुयी थी ... वो इतनी जल्दी उसके कंधे से सर हटती है जैसे उसको दर हो की कोई उसको तरुण के कंधे पर सर रख कर सोते हुए देख न ले ...

एयरपोर्ट की फॉर्मलिटीज को पूरा करके वो लोग बहार आते हैं और दो कैब बुक कर लेते हैं क्यूंकि वो 10 लोग थे तो एक कैब में उनका जाना पॉसिबल नहीं था ... उनका होटल वह से करीब 23 - 24 किलोमीटर था ...

आधे घंटे में वो लोग होटल में थे ... होटल में उन्होंने 5 रूम्स बुक किये हुए थे ... एक रूम में दोनों मैरिड कपल में बुक कर लिए तो दूसरे रूम में रानी और राहुल ने अपने सामान को रख दिए, अब बाकि बचे 3 रूम्स में एक में ऋचा और रुचिका शिफ्ट हो गयी, रूबी ने अपनी बस्ती प्रियांशी को अपना रूम पार्टनर सेलेक्ट किया अब श्रेया और तरुण hi बचे थे तो उन्होंने भी अपने लगेस बाकि बचे एक रूम में शिफ्ट कर लिए ... सभी रूम्स के बीएड अटैच्ड थे ....

श्रेया : भाई मैं तो सबसे पहले शावर लेने वाली हु ... खाना वगैरह आये तो रखवा देना ...

तरुण : जी दीदी ...

श्रेया कपडे लेकर वाशरूम में घुस जाती है ...

सर्विस बॉय आ कर सभी के रूम्स में बरी बरी से इवनिंग स्नैक्स दे जाता है ...

थोड़े देर बाद hi श्रेया वाशरूम से निकलती है ... श्रेया ने अभी एक लूसे निघ्त्य पहनी हुयी थी ...

श्रेया : लिटिल चैम्प अब जा तू भी शावर ले कर आ जा फिर हम साथ खाएंगे ...

तरुण भी अपनी बड़ी बहन की बात मान शावर लेने चला जाता है .... कुछ देर बाद वो सिर्फ एक टॉवल लपेटे हुए रूम में एंटर करता है और मिरर के सामने खड़ा हो कर अपने बैग से कपडे निकलने लगता है ... जब उसकी नजरे श्रेया की तरफ गयी तो वो उसको hi गौर से देख रही थी ...

तरुण यु श्रेया को खुद को देखता प् कर घबराहट के मरे जल्दी जल्दी कपडे पहनने लगता है ...

उसको ऐसे बड़बड़ाते हुए देख श्रेया जोर जोर से हसने लगती है ...

श्रेया : ऐसे कैसा चलाएगा हीरो ... अभी तो हमें साथ में 7 दिन रहना है ... तू तो ऐसे शर्मा रहा है मनो तू कोई लड़की है आउट मैं लड़का हु ... अरे तू मुझसे क्यों शर्मा रहा है इन्ही हांथो में मैंने तुम्हे खेलाया है ... बचपन में मैं या बुआ hi थी जो तुम्हे नहलाती थी ...

तरुण : नहीं दीदी मैं कहा घबरा रहा हु वो भूक लगी है इसलिए जल्दी जल्दी पहन लिया ... और दीदी अब मैं कोई बच्चा तो नहीं रहा ...

श्रेया : मेरे लिए तो तू बचा था है सर रहेगा ... चल बाल ठीक कर और आ जा खाने के लिए ... जरा देखु तो क्या क्या आया है भूक तो मुझे भी बड़े जोर की लगी है ... ओह्ह Momo's और पास्ता है ... वाओ मज़ा अस जायेगा ...

अभी उन्होंने अपना खाने वाला प्रोग्राम निपटाया hi था की उनके गेट नॉक होने लगता है ... बहार राघव और उसकी वाइफ शिवानी खड़े थे ...

राघव : दीदी आपको कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न ... आप कहे तो मैं कोई दूसरा रूम बुक कर दू या आप चाहो तो हमारे रूम में शिफ्ट हो सकती हो .,.. जीजाजी का कॉल आ रहा था की आप कॉल नहीं पिक कर रही हो ...

श्रेया : अरे नहीं भाई मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है .. अरे मेरा मोबाइल लगता है एयरोप्लेन मोड में hi रह गया है इसलिए ऐसा हुआ है रुको अभी कॉल करती हु उन्हें ...

शिवानी : आज का कोई खास प्रोग्राम तो नहीं है न दीदी ....

श्रेया : नहीं भाभी आज तो वैसे hi सभी थके हुए होंगे ... आप लोग बेफिक्र हो कर अपना हनीमून मन सकते हो ...

शिवानी : क्या दीदी आप भी बड़े मजाकिया हो ... वैसे जीजू को लती तो आपका भी आज हनीमून हो जाता ... वैसे आप चाहो तो अब भी हनीमून मन सकती हो ...

श्रेया : ाचा जी वो भला कैसे ...

शिवानी : अरे यार जिसके 3 - 3 मुश्तंडे भाई हो उसको क्या प्रॉब्लम हो सकती है ...

श्रेया : लगता है अपने खूब मैनेज हैं अपने भाइयो के साथ हनीमून ...

शिवानी : मेरा कहा कोई भाई है दीदी ... हम तो बस दो बहने hi थी ...

राघव : ाचा आज तुम्हारी मम्मी जी से कहता हु की वो तुम्हे एक भाई दे दे ताकि तुम हनीमून मन सको ...

राघव की बात सुन कर तरुण और श्रेया जोर जोर से हसने लगते हैं वही शिवानी का मुँह बन जाता है ... इनकी हसी की आवाज़ सुन कर बाकि बचे हुए लोग भी आ जाते हैं ...

ऐसे hi हसी और मजाक का दौर चल पड़ता है ... तरुण सिर्फ हसने का काम कर रहा था कुछ बोल hi नहीं रहा था ... वही पर हर दिन कहा कहा घूमने जाना है उसका प्रोग्राम फिक्स होता है ...

डिनर के वक्त होने पर सभी ने डीडे किया की वो खुद hi होटल के काउंटर पर hi जा कर खाना खाएंगे और ऐसा hi उन्होंने किया भी ... राघव ने होटल वाले से जा कर अपने घूमने का प्लान डिसकस किया तो होटल के ओनर ने उन्हें दो गाड़िया ड्राइवर के साथ देने का प्रॉमिस कर दिया ....

अब आज तो और कुछ खास था नहीं तो सब अपने अपने रूम्स में सोने को चले जाते हैं ...

अपने रूम में घुसते के साथ राघव शिवानी को अपनी गॉड में बैठा कर उसके चूचियों से खेलना सुरु कर देता ...

शिवानी : उफ़ जब देखो तब मेरी चूचियों को दबाना सुरु कर देते हो ... ये मेरी चुकी है श्रेया दीदी की नहीं ... शादी को 1 साल हुए हैं इतने में hi अपने मेरी चुकी को दबा दाना कर दीदी जितने बड़े कर दिया है ...

राघव और जोर जोर से उसकी चूचियों को मसलने लगता ...

शिवानी : ओहो दीदी का नाम सुन कर तो और जोश में आ गए ... आज तो लगता है मेरी खैर नहीं ...

राघव तुरंत hi शिवानी के जिस्म को कपड़ो की कैद से आज़ाद कर देता है सर बीएड पर लिटा कर उसके जिस्म के हर उतर चढ़ाव को बड़े ध्यान से देखने लगता है ...

शिवानी एक बहुत hi सुन्दर जिस्म की मालकिन थी ... दूध की तरह गोरी तो hi और जिस्म भी बिलकुल भरा हुआ था ... बड़ी बड़ी सुडौल चूचियों के बिच में चोकलाती और फुलनि रंगत लिया हुआ किसमिस साइज के निप्पल राघव के फेवरेट थे .... वो दिन भर में काम से काम दो बार उसकी चूचियों का रसपान किया करता था ...

पेट पर नाम मात्रा की चर्बी थी जो की उसके नाभि को और भी सेक्सी बनती थी ... उसके नाभि के कुछ इनचेस नीचे ट्रिम की हुयी प्यारी सी छूट थी जो की काफी रसीली मालूम होती थी ... पर राघव का उसको चूसने चाटने का कोई इरादा नहीं था ... उसके अनुसार ये सब गन्दा काम था ... वो बस छूट में घुसा कर धक्के लगाने में ज्यादा बिस्वास रखता था ...

आज भी कुछ ऐसा hi हुआ शिवानी की छूट में अपने 6.5 इंच का लुंड को घुसा कर ताबड़तोड़ धक्के लगाने के बाद ढेर हो जाता है ... कुछ सी बाद दोनों खुद को साफ़ करके नाईट ड्रेस पहन कर बीएड पर लेट जाते हैं ...

राघव : जान दूसरे हनीमून पर मज़ा आया न ...

शिवानी : हाँ राघव जी ... मैं भी यहाँ आ कर बहुत खुस हु ...

राघव : अभी तो हमारी ट्रिप सही से सुरु भी नहीं हुयी है ... अभी आगे आगे देखो होता है क्या ...

शिवानी : मेरी एक बात मानियेगा ....

राघव : बोल कर तो देखो ...

शिवानी : देखिये मैं तो नहीं जानती की आपके घर में पहले कब क्या हुआ था ... पर जितने दिनों से आपके छोटे भाई आये हैं मैंने ये नोटिस किया है की सब उनसे नफरत करते हैं ... मैं उसका रीज़न तो नहीं जानती न hi जानना चाहती हु ... पर मेरी सिर्फ एक ख्वाहिस है की क्या आप लोग पुछलि बातो को भुला कर उन्हें काम से काम इस ट्रिप में आपस में घुलने मिलने का मौका नहीं दे सकते ...

राघव ( कुछ देर सोचने के बाद ) : अरे यार अब मैं किसी को फाॅर्स तो नहीं कर सकता न ... और जब सब बड़े लोग hi उससे नफरत करते हैं तो मैं क्या hi कर सकता हु ...

शिवानी : मैं तो सिर्फ इस टूर की बात कर रही ...

राघव : कही तुम्हारा उसके ऊपर दिल तो नहीं आ गया ...

शिवानी : क्या जी सो भी ... मैंने आज तक उनसे कभी बात भी नहीं की है और रही बात दिल की तो मेरे दिल में सिर्फ और सिर्फ आप बेस हो ...

राघव : ओह that's सो स्वीट ... ाचा मैं अपनी तरफ से वादा करता हु की उसको इस ट्रिप में कोई दिक्कत नहीं होने दूंगा ... अब खुस ...

शिवानी : है बहुत ... हम सब एन्जॉय करेंगे और वो ऐसे गम शुभ रहेंगे तो ाचा नहीं लगेगा न ...

राघव : ok जानू अब चलो सोते हैं काफी रात हो गयी है ...

उस समय रात के 12 बज चुके थे ...

सभी रूम्स में तो सब सो चुके थे सिवाए एक रूम के ...


अब इस रूम में ऐसा क्या खास हो रहा है जानने के लिए मिलते हैं अगले अपडेट में ... 😂🙄🧐
 
अपडेट 6



आज भी कुछ ऐसा hi हुआ राघव शिवानी की छूट में अपने 6.5 इंच का लुंड को घुसा कर ताबड़तोड़ धक्के लगाने के बाद ढेर हो जाता है ... और फिर दोनों मिया बीवी नंगे hi एक दूसरे से लिपट कर सो जाते हैं ... उस समय रात के 12 बज चुके थे ...

सभी रूम्स में तो सब सो चुके थे सिवाए एक रूम के ...



आगे



ये रूम और कोई नहीं राहुल और रानी का था ... ताज्जुब की बात ये थी की अभी दोनों के जिस्म पर कपड़ो के नाम पर एक रेशा तक न था ... रिश्ते में तो दोनों सेज भाई बहन थे पर उन्हें ऐसी हालत में देख कोई भी ये बात मैंने को तैयार न होता ...

रानी भी बिलकुल गोरी चिट्टी थी ... वो एवरेज बॉडी टाइप की थी और उसकी चूचिया संतरे की साइज की थी .... पेट में चर्बी का नामोनिशान नहीं था जिसके वजह से वो काफी अट्रैक्टिव भी लगती थी ...

राहुल रानी के ऊपर लेता हुआ उसके होंठो को चूसने में लगा हुआ था ... रानी के हाथ अभी राहुल के चूतड़ों पर घूम रहा था ...

थोड़े देर के बाद राहुल थोड़ा निचे सरक कर रानी के गोर गोर चूचियों को चूसने लगता है ... रानी मज़े से अपना सर इधर उधर किये जा रही थी ...

रानी : अब बस भी कर राहुल मेरे भाई ... इन्हे ज्यादा न चूस मुझे इन्हे झुलवाना नहीं है ... चल नीचे सरक कर मेरी चासनी तो चख कर बता की वो कैसी है ...

रानी की छूट क्लीन शवेद थी ... उसके छूट के दोनों होंठ आपस में चिपके हुए थे जो उसके वर्जिन होने का सबूत दे रहे थे ...

राहुल किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह अपनी बहन की छूट पर झुक जाता है .. और जीभ निकल कर बड़े मज़े से उन्हें चूसने लगता है ... रानी की तो मज़े के मरे आँखें बंद थी और वो राहुल के सर में उंगलिया घुमाये जा रही थी कभी कभी वो जोर से उसका सर अपनी छूट पर दबा देती थी मनो वो उसको अपनी छूट में घुसा लेना चाहती हो ...

ऐसे hi थोड़े देर चूसने के बाद वो जोर जोर से झड़ने लगती है ... राहुल का पूरा चेहरा उसकी सगी बहन की छूट के पानी से भीग गया था ...

राहुल उठ कर रानी के चेहरे के पास अपने चेहरा ले आता है ... रानी मज़े से राहुल के चेहरे पर लगे खुद के छूट रास को चाटने लगती है ...

रानी : यार भाई आज तो मज़ा hi आ गया ...

राहुल : दीदी मेरा तो अभी बाकि है ...

रानी : लाओ हिला कर तेरा भी पानी निकल देती हु ...

राहुल : दीदी क्या हम असली वाला सेक्स नहीं कर सकते ...

रानी : चुप कर मन किया था न तुझे की अभी मैं ये सब तेरे साथ नहीं कर जितना मज़ा मिल रहा उतने से hi काम चला फ़िलहाल ...

राहुल साद सा फेस बना लेता है जिससे रानी को बुरा लग जाता है आखिर वो उसको इतना चाहती जो थी ...

रानी : अरे पगलू भाई अब तेरे मेरे बिच कोई पर्दा hi कहा है सब चीज तो तुझे दिखा और चखा hi चुकी हु ... वैसे hi कभी तुमसे सेक्स भी करवा लुंगी ...

राहुल : यानि की पहले अपने बॉयफ्रेंड के साथ छुड़वाने के बाद मुझसे सेक्स करोगी ...

रानी : नहीं रे पागल वैसे तेरे साथ इतना कुछ कर चुकी हु पर उसकी लिमिट बस किश तक hi है ... हाँ एक उसने बहुत फाॅर्स किया था तो एक बार फुल नुदे हो कर दिखला दी थी उसको .,.. चल ला तेरे छोटे राहुल को इधर देख तो कैसे मचल रहा है अपनी बहन के हाथ में आने के लिए ...

रानी अपने कोमल हाथो में राहुल का 6 इंच का लुंड पकड़ लेती है जो की सख्त हो कर फुफकारे जा रहा था ... वो पहले से hi काफी एक्ससिटेड था इसलिए रानी के हाथ में जाने के कुछ देर बाद hi झाड़ जाता है ...

झड़ने के बाद कुछ देर राहुल यु hi बीएड पर पड़ा रहता है जबकि रानी वाशरूम जा कर अपने हाथ और छूट को अचे से पानी से धो लेती है और रूम में आ कर अपने कपडे पहन लेती है ... राहुल भी वाशरूम जा कर खुद को साफ़ कर अपने कपडे पहन कर बीएड पर रानी के बगल में आ कर लेट जाता है ...

इनके बीच ये सब आज से hi नहीं बल्कि एक दो महीने पहले से hi सुरु हुआ था ... उसके बाद से hi मौका मिलते hi ये दोनों एक दूसरे को ठंडा कर लिया करते थे ....

सुबह को मोबाइल के रिंग होने से तरुण की नींद खुलती है ... कॉल उसके बस्ती कारन का था ... वो तुरंत कॉल पिक करता है ...

कारन : hello भाई कैसा है ...

तरुण : मैं तो ठीक हु भाई ... तू बता तू कहा है सर घर वाले सब कैसे हैं ...

कारन : मैं घर में hi हु और कहा जाऊंगा ... और घर में भी सब ठीक थक hi है ... वो बात ये है 12 को दीदी की शादी का डेट फिक्स हुआ है ...

तरुण : वाओ ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है ... 12 को यानि की अभी 20 दिन हैं शादी में ... ठीक है 1 - 2 दिन पहले आ जाऊंगा ...

दिया : क्या कहा तूने 1 - 2 दिन पहले ... अगर शादी के 10 दिन पहले न आया तो तेरी टांगें न तोड़ दू मैं ...

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ... लगता है आपको मेरी टांगें बहुत पसंद है ... कैसी हो दीदी और मेरे होने वाले जीजा जी से दिन भर में कितने बार फ़ोन करती हो ...

दिया : अच्छा बच्चू घर जा कर बड़ी बड़ी बातें करने लगा है क्या बात है ...

तरुण : अभी घर में नहीं शिमला आया हुआ हु फॅमिली टूर पर ...

दिया : वाओ that's नीस ... मैं भी आ जॉन क्या ...

तरुण : तो आ जाओ न दीदी ...

दिया : अभी नहीं रे ... अभी घर वाले अकेले मार्किट तक नहीं जाने देते तो उतनी दूर कहा से जाने देंगे .... चल बाबू तू मस्ती कर और हाँ वह की फोटोज भेजना न भूलना ... Bye बाबू

तरुण : bye दीदी ...

उसके बात करने से श्रेया की नींद भी खुल जाती है ...

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ... कैसी नींद आयी आपको ...

श्रेया : बहुत अछि नींद आयी ... और तू ये किस्से सुबह सुबह बात कर रहा था ...

तरुण : मेरे फ्रेंड की दीदी थी .. दिया नाम है उनका ... वो मुझे बिलकुल अपने सेज भाई जितना मानती है ... वो हैं भी बहुत प्यारी ...

श्रेया : ओह that's नीस ... चलो मैं पहले फ्रेश हो लेती हु ... हमें 9 बजे घूमने के लिए निकलना भी है ...

8:30 बजे तक सभी लोग रेडी हो दोनों कार्स में बैठ चुके थे ... ये 10 लोग थे इसलिए 5 - 5 का ग्रुप बना कर दोनों कार्स में बैठ जाते हैं ...

एक कार में raghav,Shivani,Shreya,ruby और प्रियांशी बैठे थे तो दूसरे में Rahul,rani,Richa,ruchika और तरुण ... तरुण ड्राइवर के साथ बैठा था और बाकि लोग बैक सीट पर ...

ऋचा : भाई राघव भैया में आज कहा जाने की प्लानिंग की है ...

रानी : आज बस एक जंगल ट्रिप है ... आज हमें जंगल में घूमना है और फिर खाना वन खा कर वापस ...

राहुल (ड्राइवर से) : भैया और अभी हमें कितनी फिर जाना है ...

ड्राइवर जो की एक 30 -35 साल का आदमी था ...

ड्राइवर : सर अभी आधे घंटे की ड्राइविंग बाकि है फिर जब जरुरत हो कॉल कर दीजियेगा ... हम आपको रिसीव करने आ जायेंगे ...

रोड के दोनों साइड्स के हरे भरे नज़ारे और पहाड़ काफी हसीं लग रहे थे ...

रुचिका : दीदी कितनी मस्त जगह है लगता है की यही बस जॉन ...

राहुल : तू चिंता न कर तेरे लिए यही का दूल्हा देखूंगा फिर घूमती रहियो जी भर कर ...

ऋचा : अभी पहले रानी दीदी के लिए जीजा ढूंढ लो उसके बाद उसके लिए देखना ...

ऐसे hi मस्ती मजाक करते हुए वो अपने डेस्टिनेशन पर पहुँच जाते हैं ... उन्होंने अपने लगेस निकले जिसमे उनके कुछ ड्रेसेस और खाने पिने की चीजे राखी हुयी थी ... राघव ने गाडी को वापस भेज दिया था ...

राघव : देखो अब यहाँ से हमें कच्चे रस्ते से अंदर जाना है ... एहि रास्ता एक वाटर फॉल को जाता है ... आज हमें एहि रहना और गुमना फिरना है ... फिर इवनिंग को वापस होटल निकलना है ...

श्रेया : ओह तो हमें आज वॉटरफॉल जाना है ... वाओ आज तो मजा hi आ जायेगा ... तभी तो मैं सोचु की तू क्यों हमें कपडे रखने को बोल रहा है ...

राघव : हाँ दीदी और हम सभी को साथ hi रहना है ... कोई इधर उधर नहीं जायेगा क्यूंकि ये जंगल है तो जंगली जानवर भी हो सकते हैं ... खाने पिने की चीजें आलरेडी बैग्स में है ...

ऋचा : जी बॉस .... और कोई आज्ञा हो तो फरमाइए ...

प्रियांशी : अब आगे चलना भी है या एहि साडी प्लानिंग करनी है ...

रूबी : वो सब तो ठीक है पर ये बैग्स उठाएगा कौन ...

श्रेया : अरे 3 - 3 मुस्टंडे लड़के हैं तो उनके होते हुए हम लड़कियों बैग्स उठाएंगी क्या ....

राहुल : दीदी आप कहो तो आपको भी उठा लू ये बैग्स क्या चीज है ...

श्रेया : ाचा बच्चू ... फ़िलहाल तो ये बैग्स hi उठाओ ...

तरुण : दीदी ी थिंक अब हमें चलना चाहिए .... अभी हमें न जाने कितनी दूर चलना होगा और फिर वापस भी तो आना होगा ...

रानी : तो फिर बैग उठाओ न ... कोई यहाँ तुम्हारा नौकर थोड़े hi है ...

तरुण एक बैग अपने पीठ पर तंग लेता है और एक बैग हाथ में लटकाये आगे आगे निकल पड़ता है ...

श्रेया : रानी ये क्या बेहूदगी है ... छोटे भाई से भी कोई ऐसे बात करता है ...

ऋचा : दीदी रानी दीदी ने गलत भी क्या बोलै है राहुल ने या हमने कभी कोई लगेज थोड़े hi उठाया है ... जाने दो इसी बहाने हमारा लगेज तो पहुँच जायेगा ... दादा जी में भी शायद इसी वजह से उसको हमारे साथ भेजा होगा ताकि हमें कोई दिक्कत न हो ... अब हमें चलना चाहिए ...

शिवानी : अब छोड़िये ये सब अब हमें चलना चाहिए ... राघव जी आप ये बचा हुआ बैग उठा लीजिये ... देखिये वो तरुण जी काफी आगे निकल गए हैं ...

राघव बचा हुआ एक बैग अपने कंधे पर टांग लेता है ... उसको भी रानी और ऋचा का बिहेवियर ठीक नहीं लगता ... वो बैग लिए हुए तरुण के तरफ चल देता है और सभी लोग उसके पीछे हो लेते हैं ...

राहुल अस उसुअल मस्ती में सभी लड़कियों का लाडला बना हुआ हसी ठिठोली करता हुआ बढ़ा जा रहा था ...

करीब एक घंटे पैदल चलने के बाद सभी के कानो में पानी गिरने की आवाज़ आने लगी ... जिससे सभी के चेहरे पर ख़ुशी की लहार दौड़ जाती है ...

बीच में एक दो बार रुचिका या श्रेया ने तरुण से लगेज माँगा पर तरुण ने ये कह कर ताल दिया की मर्द का काम मर्द hi करे तो बढ़िया है ...

खैर वो लोग वॉटरफॉल के पास पहुँच चुके थे ...

ये एक खूबसूरत जगह थिस जहा एक छोटे से पहाड़ी से साफ़ पानी गिर रहा था और जहा पानी गिरता था वह थोड़ा गधा हो गया था जहा कुछ पानी जमा हुआ था एयर फिर कुछ छोटी छोटी नालियों के रूप में पानी जंगल में कही गम हो जाता था ... और सबसे बड़ी बात की वह और कोई मौजूद भी नहीं था .. तरुण और राघव ने एक सेफ जगह देख कर लगेज को रख दिए ...

प्रियांशी : वाओ भैया थैंक यू ... इतनी सुन्दर जगह लेन के लिए ... ये कितना सुन्दर झरना है ... ऐसे जगह मैं सिर्फ सपने में देखा करती थी ...

राघव : मैं एक बार कॉलेज टूर पर कुछ लड़को के साथ यहाँ आया था तो मुझे इस जगह के बारे में पता चला था ...

शिवानी : सच में ये जगह बहुत hi खूबसूरत है ...

श्रेया : क्या हुआ तरुण तुम ऐसे गुमशुम क्यों हो ... तुम्हे यहाँ आ कर ख़ुशी नहीं हुयी क्या ...

तरुण : नहीं दीदी वैसी कोई बात नहीं ... मैं तो बहुत खुस हु ... भैया में जब हमें इतने प्यार से यहाँ लाया है तो जगह तो खूबसूरत होनी hi थी ... ठीक है आप लोग जाओ नाहा लो तब तक मैं यहाँ लगेज की देखभाल करता हु ...

राहुल : हाँ तो और तू क्या hi कर सकता है ... ठीक से देख भल करियो वर्ण कोई ऊंच नीच हुयी तो हमसे बुरा कोई नहीं होगा ... और ये ले एक कला चस्मा लगा ले ताकि हमें तुम्हारी बुरी नजर न लगे ... जब से आया है मेरी सभी बहनो को घर घर कर देखे जा रहा है ...

तरुण : जी भैया ठीक है आप लोग जाओ ... आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा ...

रुचिका : ए हीरो तुम्हारी मजाल कैसे हुयी मेरे भाई के साथ ऐसे बोलने की ... और ये बुरी नजर बुरी नजर क्या लगा रखा है ...

ठीक तभी रुचिका के गालो पर एक जोरदार तमाचा पद जाता है ... रुचिका को मरने वाली और कोई नहीं ऋचा थी ...

ऋचा : ये कैसी बेहूदा लैंग्वेज उसे क्र रही है तू ... वो तुमसे बड़ा है या छोटा ... लगता है तेरे ऊपर भी उप अस ाहस बे कोई जादू कर दिया है ...

प्रियांशी : ऋचा दीदी आपको ऐसे मेरी बहन पर हाथ नहीं उठाना चाहिए था ... इस कलमुहे की वजह से न जाने और क्या क्या होने को है ... सरे फसाद की जड़ एहि है ... आज इसका खेल hi ख़त्म कर देती हु ...

इतना कह कर प्रियांशी तरुण की तरफ गुस्से से बढ़ती है ... वो तरुण के चेहरे पर एक जोरदार तमाचा जड़ देती है और ऐसा hi कुछ दूसरे गाल के साथ भी होता है जिसके रिस्पांस में तरुण बस थोड़ा पीछे को जाता है और प्रियांशी आगे बढ़ कर तरुण के गाल पर दूसरा तमाचा जड़ने को होती है की पत्थर की चिकनाहट के वजह से उसके पाओ फिसल जाते हैं और वो गिरने लगती है ... उसका सर पास वाले hi एक बड़े से चट्टान से टकराने को होता है की किसी का हाथ उसके सर और चट्टान के बीच आ जाता है ... अचानक हुए इस हादसे की वजह से प्रियांशी की तो आँखें hi दर के मरे बंद हो गयी थी ... जब उसको महसूस होता है की वो किसी की बांहो में है तो वो धीरे से अपनी आँखें खोल कर देखती है तो पति है की उसको बचने वाला और कोई नहीं वही था जिसको वो यु ब्राह्मो की तरह मार रही थी उसने hi उसको बचाया है ...

बाकि लोग भी वह पहुँच जाते हैं और सहारा देकर दोनों को उठाते हैं ... तरुण के एक हाथ से खून रिस रहा था जिसके वजह से उसके वाइट शर्ट का एक बांह लाल हो गया था ...

श्रेया उसको हालत देख चीख पड़ती है ...

श्रेया : राघव बैग से वो फर्स्ट अिध किट तो देखो तो तरुण के हाथ से खून निकल रहा है ...

वो लोग जल्दी जल्दी तरुण के शर्ट को निकल कर उसके जख्म का मुआयना करते हैं ... जख्म हल्का फुल्का hi था हो की पत्थर पर घिसने की वजह से हुआ था ...

ऋचा : तू ठीक तो है न प्रियांशी ... मैं पहले hi तुझे मन करती थी न की इस हरामजादे से दूर रहा कर ... वो तो भला है की तुझे कुछ न हुआ वर्ण मैं मम्मी पापा को क्या मुँह दिखती ...

रुचिका (ऋचा की बात सुन कर तड़प जाती है ) : अब इसमें भी आपको मेरे छोटे भाई की hi गलती दिख रही है ... जरा उसकी हालत तो देखो ... उसका हाथ काट गया है ...

ऋचा : अरे तो उसमे क्या हुआ वो उसकी वजह से hi तो गिरी थी ... तो उसने कौन सा बड़ा तीर मार दिया ... वैसे भी कौन सा उसका हाथ काट कर अलग hi गया है या वो मर गया है ... सही सलामत तो दिख रहा है ...

अब श्रेया से ऋचा की ऐसी जहरीली बात बर्दास्त नहीं होती वो ऋचा के गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ देती है ...

श्रेया ( गुस्से से फुफकारते हुए ) : अरे कैसी बहन है तू मुझे समझ नहीं आता ... यहाँ तेरे भाई का हाथ कटा है तू उसके मरने की बात रही है ... अरे बहने तो अपने भाई की सलामती के लिए खुद की जान देने से भी नहीं हिचकिचाती है ... शर्म आती है मुझे तुम्हे अपनी बहन कहते हुए ...

ऋचा : वो मेरा भाई नहीं है ... नहीं मानती हु मैं उसको अपना भाई वो मरे या जिए मुझे उससे कोई मतलब नहीं ...

राघव : चलो अब छोडो ये सब हम यहाँ एन्जॉय करने आये हैं और आप लोग यहाँ अलग hi काम को अंजाम देने में लगे पड़े हैं ... अब मुझे कोई भी झगड़ा फसाद नहीं चाहिए यहाँ वर्ण मैं दादा जी से कहकर ये टूर कैंसिल करवा दूंगा ...

रुचिका : सॉरी भैया पर ये लड़ाई राहुल ने सुरु की थी ... वो ऐसे मेरे छोटे भाई को बुरा भला नहीं कह सकता ...

रानी : चल चल बड़ी आयी मेरे भाई को बोलने वाली ... सरे फसाद की जड़ तेरा वो मनहूस भाई है ... मेरे भाई के बारे में कुछ बोलै न तो मैं सच में तेरा मुँह नोच लुंगी ...

शिवानी : आप लोग फिर से सुरु हो गए ... क्या हम लोग सब कुछ भूल कर इस टूर को एन्जॉय नहीं कर सकते ... ऐसे कुत्ते बिल्लियों की तरह लड़ना जरुरी है क्या ... अगर आप लोगो को ऐसे hi लड़ना झगड़ना है तो फिर यहाँ रहने का कोई मतलब hi नहीं निकलता हम आज और अभी hi वापस चलते हैं ...

रुचिका : नहीं भाभी अब आपको मेरे तरफ से कोई प्रॉब्लम नहीं होगी इस टूर में ...

ऋचा : हाँ भाभी सॉरी ... हम यहाँ एन्जॉय करने आये हैं लड़ने झगड़ने नहीं ...

राघव : तो ठीक है चलो हैंडशेक करो फिर चलते हैं वॉटरफॉल का मजा लेने ... वैसे hi काफी टाइम निकल चूका है और लगेज के पास किसी को रहने की जरुरत नहीं ... वो हमारी आँखों के सामने hi है तो कोई प्रॉब्लम नहीं होगी वैसे भी यहाँ कोई आता भी नहीं ...

राघव की बात मान कर ऋचा और रुचिका आपस में हैंडशेक करती है ... प्रियांशी बस कभी कभी तरुण की तरफ देख ले रही थी ... जबकि तरुण बस इधर उधर झाड़ियों की तरफ देखे जा रहा था ...

ठोस देर साथ में वॉटरफॉल का मजा लेने के बाद सभी झाड़ियों में जाकर अपने अपने कपडे चेंज कर लेते हैं ...

फिर एक अछि जगह देख कर एक चादर बिछा कर सभी खाने पिने की चीजों को निकल कर एक जगह पर जमा करते हैं ... तरुण पास में hi हरे हरे नरम घास पर अकेले बैठा हुआ था आस पास के पेड़ पौधों को देख रहा था ...

तभी शिवानी उसको यु अकेले गम शुभ देख कर उसके पास आती है ...

शिवानी : क्या हुआ देवर जी अब तक नाराज हो ... आइये आप भी कुछ खा पि लीजिये वैसे भी आपका ढेर सारा खून बाह गया है .. सबकी तरफ से सॉरी ...

तरुण : नहीं भाभी जी मैं किसी दे नाराज नहीं हु बल्कि मुझे ाचा लगा की मरने के hi बहाने से सही मेरी बहनो में मुझे छुवा तो सही ... पिछले 8 सालो से उनके एक - एक टच के लिए तड़पा हु ... वैसे भी मैं सबसे छोटा हु तो उनके daant,maar या तिरस्कार का बुरा नहीं मंटा ... मैं जनता हु की वो सब दिल के अच्छे हैं और एक न एक दिन वो मुझे अपना hi लेंगे ...

तरुण की बात सुन कर शिवानी की आँखें भी नाम हो आयी थी ...

शिवानी ( अपने मन में ) : क्यों इतने प्यारे से भाई के साथ ये लोग ऐसा बेहवे करती है ... इत्तनी सो आगे में hi कितनी मातुरे बातें करते हैं ... अगर ऐसा मेरा कोई भाई होता तो मैं उसको एक पल के लिए भी खुद से दूर न करती ...

तरुण : भाभी कहा खो गयी ... भैया और बाकि लोग आपको खाने के लिए बुला रहे हैं ...

शिवानी : आप भी चलिए न ...

तरुण भी उसके साथ सबके पास आ जाता है ... श्रेया तरुण को अपने पास बिठा लेती है ...

श्रेया : तेरे तो राइट हाथ में तो चोट लगी है न ... ला मैं तुझे खिला देती हु ...

तरुण : नहीं दीदी कोई बात नहीं मैं मैनेज कर लूंगा ...

श्रेया : चुप चाप बैठ नहीं तो अबकी बार मैं तेरी पिटाई कर दूंगी ...

उसके बाद कुछ खास नहीं होता सब आराम से खाना कहते हैं ...

अब तो वैसे भी उनके बैग्स में बहुत काम सामान बचा था तो एक बैग राघव उठा लेता है तो दूसरा रूबी और तीसरे वाले को ऋचा तंग लेती है ...

रिटर्निंग के वक्त तरुण सबसे पीछे चल रहा था ...

थोड़े hi देर में उनकी कार आ जाती है और शाम होते होते वो अपने होटल आ जाते हैं ... रस्ते में hi श्रेया गाडी रुकवा कर पहले तरुण के हाथो में सही से ड्रेसिंग करवा देती है ...

डिनर के बाद एक रूम में सीरियस मीटिंग जारी थी ...

रानी : यार आज जो भी हुआ ाचा नहीं हुआ ... रुचिका और श्रेया दीदी तो पूरी तरह से उस मनहूस के जाल में फास चुके हैं ...

ऋचा : हाँ दीदी श्रेया दीदी ने उसके वजह से मुझे थप्पड़ भी मारा ... इस थप्पड़ को तो मैं भूल नहीं सकती ... पर अब हमें सोच समझ कर सब कुछ करना होगा ...

राहुल : अरे दीदी वो तो रुचिका बीच में आ गयी वर्ण मैं तो आज hi निपटा देता उस हरामजादे को ... वैसे प्रियांशी ने क्या मस्त करते तमाचे जेड हैं उसके गालो पर ... मज़ा hi आ गया ...

रानी : भाई उससे अकेले में भिड़ने की सोचना भी मत आज मैंने उसको नहाते हुए देखा है उसने अछि कड़ी बॉडी बना राखी है ...

राहुल : अरे जो दीखता है वो होता नहीं ... देखा नहीं अपने कैसे मेरी बात पर hi भीगी बिल्ली बन गया था ... एक उलटे हाथ की लगा देता तो वही पंत में मूत देता ... अपने मेरी ताकत देखि hi कहा है ...

ऋचा : देखो तुम लोग भी अब काम से काम इस टूर पर उससे उलझने की कोसिस मत करना ... घर जाते hi उसका हिसाब किताब करवाती हु ...

रानी : हाँ यार सही कहा तूने ...

ऋचा : ठीक है तुम लोग भी अब सो जाओ रात काफी हो चुकी है ... मैं भी अपने रूम में सोने जा रही हु ... रूचि मेरा रूम में इंतजार कर रही होगी ... कितने मानाने से वो मणि है ...

राहुल : दीदी आप ऐसा क्यों नहीं करती की यही सो जाओ ...

ऋचा : जगह तो दो लोगो के सोने की है मैं तीसरी कहा सोऊंगी ...

राहुल : कोई नहीं मैं बीच में सो जाऊंगा और आप दोनों मेरे अगल बगल में सो जाना ...

ऋचा : चल भाग ... इतनी भी जगह की कमी नहीं है ... Ok गुड नाईट

रानी और राहुल : गुड नाईट दीदी ...

उसके जाने के बाद राहुल गेट लॉक करता है ...

राहुल : क्यों दीदी सुरु करे अब अपना कल वाला प्रोग्राम ...

रानी : नहीं यार भाई आज मेरा मूड नहीं है चल अपन आज जल्दी से सो जाते हैं ...

राहुल का तो बड़ा मन था पर मन मर कर वो भी सो जाता है ....

ऐसे अगले दिन ज़ू जाने का प्रोग्राम बनता है तो सभी लोग वह खूब मज़ा करते है. ...

प्रियांशी के दिल में अब तरुण के लिए जो कड़वाहट भरी पड़ी थी वो काफी हद्द तक काम हो चुकी थी ... पर अभी भी दोनों के बीच कोई बात चित नहीं हुयी थी ...

ऐसे धीरे धीरे अब उनका टूर का आखिरी दिन आ पहुंचा था उन्होंने ये दिन रेस्ट के लिए रिज़र्व कर रखा इस टूर में उन्होंने लगभग शिमला के सभी फेमस प्लेसेस देख लिए थे ... अगले दिन उन्हें यहाँ से निकलना था ... ऋचा और रुचिका की बंधन भी अब पहले जैसी hi हो गयी थी ... तरुण को ruchika,Shivani और श्रेया की सिम्पथी मिलती hi रहती थी ...

उधर घर में सब कुछ ठीक थक hi था ... की एक दिन तरुण के घर में एक साधु महात्मा पधारे हुए थे ... ये साधु महात्मा उनके घर के कुलगुरु के शिष्य थे तो उनकी अछि ावभहत की गयी ... उन्होंने तरुण की माँ को अकेले में प् कर एक चिठ्ठी थमाई और चलते बने ... उन्होंने तरुण की माँ को ये चिठ्ठी अकेले में hi पढ़ने की हिदायत दी थी ...



अब ये चिठ्ठी में क्या है और क्यों तरुण की माँ को उसने अकेले में इसको पढ़ने की हिदायत दी थी ... और भी बहुत कुछ जानने के लिए मिलते हैं अगले अध्याय में ...
 
अपडेट 7

उधर घर में सब कुछ ठीक थक hi था ... की एक दिन तरुण के घर में एक साधु महात्मा पधारे हुए थे ... ये साधु महात्मा उनके घर के कुलगुरु के शिष्य थे तो उनकी अछि ावभहत की गयी ... उन्होंने तरुण की माँ को अकेले में प् कर एक चिठ्ठी थमाई और चलते बने ... उन्होंने तरुण की माँ को ये चिठ्ठी अकेले में पढ़ने की हिदायत दी थी ...

आगे

सुबह को तरुण की नींद खुलती है तो वो पता है की श्रेया उसके बगल में बैठी बड़े गौर से उसके चेहरे को देख रही थी ... श्रेया को ऐसे खुद को देखता प् कर एक पल को तो वो घबरा जाता है ...

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ... क्या बात है इतने गौर से मुझे क्यों देख रही हो मेरे चेहरे में कुछ लगा हुआ है क्या ...

श्रेया : नहीं रे पागल ... अब मैं तुझे देख भी नहीं सकती क्या ...

तरुण : अब मैंने ऐसा तो नहीं कहा दीदी ... आपका मेरे ऊपर पूरा हक़ है ... आज कही जाना तो नहीं है न ..

श्रेया : नहीं भाई आज रेस्ट डे है ... अब तेरे जख्म कैसे हैं ...

तरुण : आपके होते हुए मुझे क्या हो साल्ट है दीदी मेरा जख्म पूरी तरह से भर गया है ... ये सब आपकी वजह से hi संभव हुआ है ...

श्रेया : मैं क्या किया ... आज हमारे टूर का आखिरी दिन है फिर कल हम लोग घर चले जायेंगे और संभव हो की उसके अगले दिन शायद तेरे जीजू आ जाएं और फिर मैं तुम लोगो से दूर अपने ससुराल वापस चली जॉन ... पता नहीं आगे कब मुलाकात हो ...

तरुण : तो इसी लिए आप साद हो ...

श्रेया : और नहीं तो क्या ... कितने सालो बाफ मुझे तुम मिले हो ... अभी मैंने तुमसे ढंग से प्यार जताया भी नहीं की हम फॉर से किड्स हो जायेंगे ...

तरुण : ok दीदी तो आप hi बताओ हमें क्या करना चाहिए ...

श्रेया : फ़िलहाल तो मुझे एक प्यारा सा हुग चाहिए उसके बाद की बाद में बताउंगी ...

तरुण उठ कर श्रेया को जोर से खुद से चिपका लेता है ... गले लगने से तरुण को अपने चेस्ट पर श्रेया के बड़े बड़े बूब्स फील होते हैं ... उसने ब्रा नहीं पहने थे जिसके वजह से उसके कड़े निप्पल्स भी तरुण को महसूस होने लगे थे ... पर उसके मन में कोई गलत विचार का नामोनिशान नहीं था जिसके वजह से ो उसको इग्नोर कर देता है ..

कुछ देर बाद तरुण श्रेया से अलग होता है ...

तरुण : अब तो खुस हो न दीदी ...

श्रेया : तुम्हे क्या लगता है ...

तरुण : मुझे तो बहुत खुस दिख रही हो ...

श्रेया : ठीक है पहले तू जा कर फ्रेश हो जा फिर मुझे नहाना भी है ...

तरुण फ्रेश hi कर निकलता है उसके बाद श्रेया वाशरूम में घुस जाती है ...

10 - 15 मिनट बाद वाशरूम का दरवाजा खुलता जिससे तरुण की नजर उधर hi चली जाती है ... उसकी तो आँखें पलके झपकना hi भूल गयी थी क्यूंकि नजारा hi कुछ ऐसा था ... श्रेया अभी सिर्फ एक टॉवल लपेटे हुए बहार निकली थी ... टॉवल उसने अपने बूब्स के ऊपर बंधे हुए थे और वो उसके घुटनो के कुछ ऊपर तक आता था ... तरुण का दिल तो जोरो से धड़क रहा था ... श्रेया भी तरुण को ऐसे खुद को देखता प् कर मन hi मन मुस्कुरा रही थी ...

श्रेया (मुस्कुराते हुए) : ोये चैम्प बस भी कर कभी किसी हसीं लड़की को ऐसे कपड़ो में नहीं देखा है क्या ...

तरुण : सॉरी दीदी ...

और वो दूसरे तरफ मुँह करके घूम जाता है ...

श्रेया उसके सामने आ जाती है ...

श्रेया : अरे पागल मैं तुझे दांत नहीं रही ... बस तुझसे पूछ रही थी ... ाचा ये बता मैं कैसी लग रही हु ...

तरुण (एक नजर श्रेया को देख फिर नजरे झुका लेता है ) : आप बहुत खूबसूरत हो दीदी ...

श्रेया : तो खूबसूरत चीजों को देखा जाता है उनसे नजरे नहीं चुराई जाती ...

तरुण : पर मुझे तो शर्म आती है ...

श्रेया : अब लड़का होकर इतना शरमाएगा तो कैसे चलेगा बाबू ...

तरुण : पर आप मेरी दीदी हो आपको कैसे ऐसे हाल में देख सकता हु ...

श्रेया : दीदी से पहले तो एक लड़की hi हु न ...

तरुण : फिर भी दीदी मैं आपको ऐसे हाल में नहीं देख सकता ... आप अपने कपडे पहन लो ...

श्रेया : यानि की तुम मुझे नहीं देखोगे न ..

तरुण : नहीं दीदी ...

श्रेया : तो ठीक है ये ले ...

तरुण ने जब सामने देखा तो उसका गाला hi सूखने लगा ... वजह थी की श्रेया ने अपने जिस्म पर लिपटी हुए टॉवल को भी हटा दिया था ... अब उसके उसके जिस्म पर कपडे का एक रेशा तक न था यानि की अभी वो जन्मजात नंगी थी ... उसके गोर गोर बड़े चुके तरुण को पलके न झपकने को विवश कर रहे थे ... केले के सामान मोती चिकनी जांघो के बीच छोटे छोटे झांटो के झुरमुट से घिरी उसकी सुहानी छूट काफी दिलकश नजारा पेश कर रही थी ..

उसके होंठ और गले सुख चुके थे ... ऐसा इसलिए था की वो पहले बार किसी लड़की या औरत को ऐसे लाइव नंगी देख रहा था ...

तरुण की हालत देख श्रेया को उसके ऊपर तरस आने लगा था ...

श्रेया : जी भर के देख लिए हो तो पर्दा लगा लू ...

तरुण : वो सॉरी दीदी ... है है आप कपडे पहन लो नहीं तो कोई आ जायेगा ..

श्रेया : चलो ये बात भी सही है ... पर पहले इन्हे भी तो देख लो ... जब सब देख hi लिया तो ये क्यों बाकि रहे ...

और फिर श्रेया पीछे घूम जाती है ... उसके घूमते hi उसके चौड़े चौड़े चूतड़ तरुण की आँखों के सामने आ जाते हैं ... चूचियों और छूट का जादू क्या काम था जो श्रेया में अपने चूतड़ों का नजारा तरुण को दिखा दिया था ...

श्रेया : बस अब शो ख़त्म ... जरा मैं भी तो देखु की तुम मुझे कितनी रेटिंग दे रहे हो ... चलो अब नीचे आ कर चुप चाप खड़े हो जाओ ...

तरुण श्रेया की बात मन कर नीचे आ कर खड़ा हो जाता है ...

श्रेया तरुण के ट्रॉउज़र को नीचे सकने लगती है तरुण का हथियार अकड़ चूका था जिसके वजह से उसको तरुण के ट्रॉउज़र को सरकनेमे दिक्कत हो रही थी इसलिए वो उसके ट्रॉउज़र में हाथ डालती है तो उसकी आँखें हैरत से फैल जाती है ... वो उत्सुकतवा वास् कैसे भी करके तरुण के ट्रॉउज़र को नीचे सरका देती है ...

श्रेया ( आश्चर्य से) : OMG अबे ये क्या है ... क्या सच में किसी का ऐसा भी होता है ... लगता है मैं कोई ख्वाब तो नहीं देख रही ... मैं तो तुम्हे बच्चा समझती थी पर तू तो सबका बाप निकला ...

तरुण : दीदी कोई प्रॉब्लम है क्या ...

श्रेया : नहीं रे मेरे हीरो तू तो रियल मर्द है ... ऐसा हथियार तो किस्मत वालो को hi नसीब होता है ...

अभी वो लोग कुछ और एडवेंचर करते उससे पहले hi उनके गेट पर नॉक हो जाता है ... अब दोनों hi नंगे पुंज हालत में थे तो गेट खोलने का सवाल hi नहीं पैदा होता था ... श्रेया ने जल्दी से तरुण को वाशरूम भेज दिया क्यूंकि उसका हथियार इतना ज्यादा ेरेक्ट पोजीशन में था दूर से hi उसके ट्रॉउज़र में बना तम्बू दिख सकता था ...

श्रेया ने जल्दी से बिना ब्रा पंतय के hi एक निघ्त्य दाल ली जो उसके घुटनो से कुछ ऊपर तक hi आती थी और उसने गेट को खोल दिया ... बहार उसकी भाभी शिवानी कड़ी थी ...

शिवानी : खु दीदी बफी देर लगा दी गेट खोलने में कही अंदर देवर जिनके साथ hi तो नहीं लहि पड़ी थी नन्दोई जी की कमी पूरी करने के लिए ...

शिवानी की बात सुन वो घबरा जाती है की कही शिवानी ने कुछ सुन तो नहीं लिया ...

श्रेया : क्या भाभी आप भी न ... ाचा बताइये कैसे आना हुआ ...

शिवानी : कुछ नहीं दीदी बस मन किया तो अस गयी ... आपके भाई कही कुछ काम से गए हैं तो अकेले अकेले बोर हो रही थी तो आ गयी ...

श्रेया : ठीक किया ... आओ बैठो ...

मैं जरा सा रूम में झाड़ू लगा लू ... वो झुक कर झाड़ू लगाने लगती है झुकने की वजह से उसको निघ्त्य पीछे से उठ जाती है और उसकी प्राइवेट चीजें दिखने लगती है क्यूंकि उसने पंतय नहीं पहनी थी ...

शिवानी ये नजारा देख हॉट हॉट से हसने लगती है ...

श्रेया : क्या भाभी यु पागलो की तरह है क्यों रही हो ...

शिवानी : अब ऐसे अपना खज़ाना खुले आम दिखाओगी तो हसु भी नहीं क्या ... अरे वो तो ठीक है आपके भाई साथ नहीं आये वर्ण अभी hi आपको झुका कर आपके ख़ज़ाने की चोरी कर लेते ...

श्रेया सीधी हो जाती है और बीएड पर आ कर अपनी भाभी के ऊपर टूट पड़ती है ... धीरे धीरे करके दोनों के जिस्म से कपडे काम होने लगते हैं और एक आलम ऐसा भी आता है की वो दोनों फुल नंगी एक दूसरे से लिपटी पड़ी थी ... उन्हें ये भी ख्याल न रहा की अभी उनके अलावा रूम में और भी कोई मौजूद है ... वाशरूम का गेट खोल कर जैसे hi तरुण रूम में आता है उसकी नजर दोनों ननद बहु पर पड़ती है जो की उसकी बहन और भाभी भी लगती थी ... उसकी आँखों के सामने hi उसकी बहन उसकी भाभी की छूट में ऊँगली कर रही थी ... गेट खुलने की आवाज़ से hi दोनों चौंक जाती है ... तरुण को वह खड़ा देख दोनों जल्दी से चादर से खुद को कवर कर लेती है ... श्रेया ने तो खुद थोड़े सी पहले अपने भाई को अपनी नंगी जवानी के दर्शन कराये थे पर अपनी भाभी के सामने वो कैसे खुद को न ढकती ...

तरुण तुरंत hi फिर से वाशरूम घुस जाता है ... दोनों लोग जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन लेती हैं ...

श्रेया : भाई आ जा बहार हमने कपडे पहन लिए हैं ...

तरुण फिर से रूम में आ चूका था ... अब तक दोनों ने कपडे पहन लिए थे ... तीनो शहत थे और एक दूसरे से नजरे चुरा रहे थे ...

श्रेया : सॉरी भाई हमें ध्यान नहीं रहा की तू रूम में hi मौजूद है ...

शिवानी : देवर जी प्लीज ये बात किसी ko.mat बताइयेगा वर्ण मैं किसी को मुँह दुखने के काबिल नहीं रहूंगी ...

श्रेया : हाँ भाई प्लीज ये बात अपने तक hi सिमित रखना तुम भी ये नहीं चाहोगे की तुम्हारे घर के किसी सदस्य की इज्जत पर कोई आंच आये ...

तरुण : ठीक है दीदी आप निश्चिंत रहो ...

कुछ देर में राघव भी आ जाता है तो बात करने का टॉपिक दूसरी तरफ मुद जाता है ...

उधर गाँव में तरुण की माँ उस लेटर को पढ़ती है जिसमे लिखा हुआ था की उसके घर के कुलगुरु में उसको बुलावा भेजा था और ये भी हिदायत दी थी की वो अकेले hi वह जाये और उसके जाने की खबर भी किसी को न होने पाए ...

तरुण की माँ के मन में तरह तरह के विचार आ रहे थे की आखिर क्यों उसके कुलगुरु ने उसको ऐसे बुलवाया है ... खैर उसके मन में काफी उत्सुकता बानी हुयी थी जिसके वजह से अगले दिन सुबह को hi अपनी किसी सहेली से मिलने जाने का बहाना करके घर से अकेले hi निकल पड़ती है ... उसके कुलगुरु वह से 200 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर बानी कुटिया में निवास करते थे ...

वो कार ड्राइव करना जानती थी इसलिए अपने कर से hi वो वह के लिए निकल पड़ती है .... 4 घंटे की ड्राइविंग करने के बाद वो आख़िरकार अपने डेस्टिनेशन पर पहुँच hi जाती है ...

कार के हॉर्न की आवाज़ सुन कर वो hi साधु कुटिया से बहार को निकलते हैं जो उसके घर को आये हुए थे ... उसने उनको नमस्कार किय जवाब में उन्होंने उसको अंदर आने को कहा ...

वो थोड़ी देर वही एक चेयर पर बैत जाती है थोड़े देर बाद वो साधु फिर से बहार आते हैं और उसको एक रूम में जाने का इशारा करते हैं ....

वो धड़कते दिल के सटे बताये गए रूम में एंटर करती है तभी उसकी नजर बिस्तर पर पड़े हुए उसके कुलगुरु पर पड़ती है ...

वो जा कर उनसे आशीर्वाद लेती है ... जवाब में कुलगुरु की ाँहें दबदबा आयी थी ...

कुलगुरु : सौभाग्य आती भवः पुत्री ... पुत्री अब मैं अपनी की अंतिम साँसे ले रहा हु ... पता नहीं कब मेरी आंखें बंद हो जाये ...

सुमित्रा : कुलगुरु आप ऐसा क्यों कह रहे हैं आपको कुछ नहीं हो सकता ... आपके बात हमारे कुल को रास्ता कौन दिखलायेगा ...

अब मैं कुलगुरु को क लिखूंगा और सुमित्रा को स,

क : पुत्री मैंने पाने जिंदगी बहुत सरे सही औरगलट फैसले लिए हैं पर तुम्हारे साथ जो अघ्न्या अपराध मुझसे हुआ है उसकी यादें मुझे चैन से मरने भी नहीं देंगी ....

स : गुरुदेव मैं कुछ समझी नहीं की आप कहना क्या चाहते हैं ...

क : बेटी मैंने तुमसे वो छिना है जिसके लिए शायद hi तुम मुझे कभी माफ़ कर पाओ ... मैं ये तो अनहि कहूंगा की तुम मुझे माफ़ कर दो पर अगर हो सके तो उस गलती को समय रहते सुधरने की कोसिस जरूर कर सकती हो ...

स : ऐसी क्या बात है गुरुदेव ... कृपया करके साफ़ साफ़ शब्दों में अपनी बात को बतलाये ...

क : पुत्री तुम्हारे बेटे की जो मैंने janm-kundali बनायीं थी वो सही नहीं है ... मैंने उसमे बहुत कुछ बदलाव किये थे .. और ये सब मैंने अपनी मर्जी से नहीं बल्कि तुम्हारी मंझली जेठानी के कहने से की थी ... उसके पास मेरा एक राज़ दफ़न था जिसके वजह से उसने मुझसे ये अनर्थ कावाया था ... और तो और मुझे लगता है तुम्हारी सास की मौत में भी उसका hi हाथ था ... ये मैं कन्फर्म तो नहीं कह सकता पर हाँ मैंने एक बार उसको फ़ोन पर किसी से इस बारे में बात करते हुए सुना था ...

सुमित्रा के तो मनो पाओ टेल जमीन hi खिसक गयी थी ... जिस बेटे को बचपन से आज तक वो दोषी मान क्र सजा देती आयी थी वो तो निर्दोष था ... उसके आँखों के सामने अँधेरा सा छाने लगा ... वो वही बेहोश सी हो जाती है और नीचे गिर जाती है ...

थोड़े देर बाद जब वो होश में लायी जाती है तो उसके आँखों से आंशू थम hi नहीं रहे थे ... वो वापस ुशी रूम में पहुंची जहा वो अपने कुलगुरु से मिली थी ...

स : आखिर क्यों गुरुदेव क्यों ... अपने ऐसा क्यों किया ... अपने जीते जी एक माँ को क्यों मार दिया ... अब मैं अपने बेटे से कैसे आँख मिला पाऊँगी ... मैंने उसको जितना दर्द दिया है उतना सायद कोई माँ अपनी सौतेली औलाद को भी न दी होगी ... जब जब उसको मेरे सहारे की जरुरत थी मैंने उसको दुत्कारा है ... अब उसके चरणों में अपने प्राण भी दे दू तो बी मुझे माफ़ी नहीं मिलेगी ... गुरुदेव बोलिये गुरुदेव बोलिये ....

पर गुरुदेव वह होते तब न कुछ बोलते उनके तो प्राण पखेरू hi उड़द गए थे .... वो तो जैसे बस अपने दिल पर पड़े इस बोझ को उतर कर इस दुनिया से विदा लेने का मन बना कर सही समय का इंतजार कर रहे थे ...

थोड़े hi देर में कुटिया में चीख पुकार मच जाती है ...

कुलगुरु के शिष्य ने तरुण की माँ को लौट जाने को कहा पर वो जानते थे की वो किस मनोदशा से गुजर रही है इसलिए उन्होंने अपने एक शिष्य जय को उसके घर का एड्रेस बता कर छोड़ आने को कहा ... पुरे रस्ते वो बूत बानी बस खिड़की से बहार देख खोयी खोयी सी किसी सोच में डूबी हुयी थी ...

जब उसका घर आ गया तो जय ने उसको आवाज़ देकर उसको अतीत से वर्तमान में लाया ...

जय : भाभी जी आपका घर आ गया है ...

स : आप भी अंदर चलिए न ...

जय : जी नहीं आप आराम कीजिये मुझे जल्दी hi वह पहुंचना होगा गुरु जी के अंतिम संस्कार में मुझे शामिल भी होना है ...

स : जैसी आपकी मर्जी ... कभी आइयेगा जरूर ...

जय : जी हाँ क्यों नहीं ...

और फिर वो वह से चला जाता है ... उसके बाद सुमित्रा बोझिल कदमो से घर में प्रवेश करती है ...

उसके हालत को देख उसकी बड़ी जेठानी उसके पास आ जाती है ...

बी. चची : क्या हुआ सुमि तू ऐसे खामोश सी क्यों है ...

सुमित्रा अभी सारा सच किसी को बताना नहीं चाहती थी क्यूंकि उसको अभी सही से पता hi कहा था की इस शाजिश में किस किस का हाथ है ....

स : वो हमारे कुलगुरु नहीं रहे ...

बी. चची : तुम्हे कैसे पता ...

स : मुझे फ़ोन आया था ...

बी. चची : रुको मैं सबको इसकी जानकारी दे देती हु ... वैसे भी बच्चे कल तक वापस आ hi जायेंगे ...

स. : मंझली दीदी नहीं दिख रही ...

बी. चची : अरे उसका पता नहीं ... हाँ यार आया वो अपने पति के साथ मार्किट गयी है ...

स : ok दीदी मैं अपने रूम जा रही हु ...

सुमित्रा धीरे धीरे अपने रूम में पहुँचती है और अपना गेट लॉक करके नॉट जोर से रोने लगती है ... आज उसको अपनी बड़ी जेठानी की कही हुयी बात याद आ रही थी की उसको अपने बेटे को पहचानने में इतनी भी देर न हो जाये की फिर वापसी संभव hi न हो सके ... उसको वो हर लम्हे याद आ रहे थे जो उसने तरुण को प्रताड़ित करते हुए गुजरे थे ...

सुमित्रा (मन में) : मैं कितनी बदनसीब माँ हु जिसने अपने कलेजे को टुकड़े को आज तक सीने से नहीं लगाया ... जिस दूध पर उसका अधिकार था उसको वो आज तक कभी पिलाया hi नहीं ... दुनिया में आज तक शायद hi कोई माँ होगी जिसने अपने बच्चे को इतना दुःख दिया हो ... क्या मेरा बीटा कभी मुझे माफ़ करेगा ... नहीं नहीं मेरे कर्म hi इतने घटिया थे की वो छह कर भी मुझे माफ़ नहीं कर पायेगा ... वो जैसा भी बेहवे करे पर मैं अब उसको खिड़ से दूर नहीं जाने दूंगी ... मैं उसको वो सब प्यार दूंगी जिसका वो हक़दार था ... पर एक बात मेरी समझ में नहीं आयी की ये मंझली दीदी मुझे हमेसा मेरे बेटे से दूर क्यों करना चाहती थी मैंने तो इसका ध्यान hi नहीं दिया ... इस बार भी जब से मेरा बीटा आया है वही है जो हमेसा आग लगाने में लगी रहती है ... आखिर उनका मकसद क्या है और वो क्यों मुझे मेरे बेटे से दूर करना चाहती हैं जबकि मैं हमेसा से उनके बेटे को अपना सागा बीटा मानती आयी हु ... उफ़ मैं जितना इस बारे में सोचती हु मेरा सर चकराने लगता है ...

और ऐसे hi सोचते सोचते कब उसकी नींद लग जाती है उसको पता भी नहीं चलता ...
 
अपडेट 8

आखिर उनका मकसद क्या है और वो क्यों मुझे मेरे बेटे से दूर करना चाहती हैं जबकि मैं हमेसा से उनके बेटे को अपना सागा बीटा मानती आयी हु ... उफ़ मैं जितना इस बारे में सोचती हु मेरा सर चकराने लगता है ...

और ऐसे hi सोचते सोचते कब उसकी नींद लग जाती है उसको पता भी नहीं चलता ...


आगे

उधर शिमला में आज सभी रेस्ट hi कर रहे थे ...

रुचिका और रूबी अभी तरुण के रूम में थी जबकि श्रेया राघव और शिवानी के रूम में और बाकि बचे सभी लोग ऋचा के रूम में गप्पे हेंक रहे थे ...

ऐसे hi धीरे धीरे दिन ढल जाता है और रात घिरने लगती है ... राघव में डिनर के बाद सभी लोगो को ऋचा के रूम में मिलने को कहा था क्यूंकि ये रूम बाकि के रूम्स के मुकाबले थोड़ा बड़ा था ...

तो सभी लोग आज जल्द hi डिनर कर के ऋचा के रूम में पहुंचे हुए थे ...

राघव : तुम लोग तो जानते hi हो की आज हमारे फॅमिली टूर का आखिरी दिन है तो मैंने सोचा की क्यों नहीं हम लोग इस रात को कुछ यादगार बनाते हैं ...

प्रियांशी : भैया तो क्यों न सिंगिंग गेम अंताक्षरी खेलते हैं ...

श्रेया : न यार ये तो बहुत घिसा पिता सा गेम है ... हमें कुछ अलग खेलना चाहिए ...

ऋचा : तो दीदी क्यों न हम ट्रुथ एंड डरे वाला गेम खेलते हैं ... इस बहाने से हमें एक दूसरे के कुछ सीक्रेट भी मालूम हो जायेंगे और बहुत लोगो के लिए शायद ये गेम नया है ...

राहुल : हाँ दीदी मज़ा आएगा ... पर उसके लिए हमें एक बोतल की जरुरत होगी और हमें एक बड़ा सा सर्किल बना कर बैठना होगा ... और है इस गेम में कोई भी चीटिंग नहीं करेगा ... जिसे जो टास्क मिले वो करना भी होगा ...

रानी : चलो इसको भी तरय करके देखते हैं ...

सभी लोग एक बड़ा सा सर्किल बना लेते हैं ... और फिर राहुल एक बोतल को बीच में रख कर घूमता है ... बोतल रुचिका के आगे रूकती है और वो डरे चूसे करती है ...

राहुल की आँखों में एक चमक सी आ जाती है ...

राहुल : तुम्हे तरुण के गाल पर एक चांटा मरना होगा ...

रुचिका : नहीं ये मैं नहीं कर सकती ...

रानी : अब ये तो रूल होता है तुमने खुद hi ये चूसे किया है तो ये टास्क तो तुम्हे करना hi होगा ... और हाँ चांटे की आवाज़ तेज़ होनी चाहिए वर्ण फिर से तुम्हे ये करना होगा ...

रुचिका : चलो ठीक है अगर आप सबको इससे hi ख़ुशी मिलती है तो ये hi सही ...

रुचिका उठ कर तरुण के करीब आती है और उसके गाल पर एक जोर का चांटा जड़ देती है ...

चांटे से दोनों की आँखों में आंशू अस जाते हैं ...

अब रुचिका बोतल घूमती है ... बोतल राघव के आगे रुकता है ... राघव ने ट्रुथ hi चुना ...

रुचिका : भैया आप हम भाई बहनो में सबसे ज्यादा किसे प्यार करते हैं ...

राघव : ये तो काफी टफ सवाल है ... मैं तुम सब में सबसे ज्यादा प्रियांशी को प्यार करता हु क्यूंकि ये नटखट तो बहुत है पर बहुत hi साफ़ दिल की लाड़ली है ...

अब राघव बोतल घूमता है और बोतल ऋचा के पास जा कर रुकता है ... ऋचा भी ट्रुथ hi चूसे करती है ...

राघव : मेरा सवाल रूचि के सवाल का अन्टोनीम है .. ी मैं तुम हम सभी भाई बहनो में सबसे ज्यादा नफरत किसे करती हो और क्यों ?

ऋचा : भैया ये तो काफी इजी सवाल है ... वैसे इसका जवाब तो सब hi जानते हैं पर फिर भी मैं बता hi देती हु ... मुझे सबसे ज्यादा नफरत तरुण से है ... उसके लिए मेरे दिल में सिर्फ नफरत hi नफरत है मैं उसकी शकल तक देखना पसंद नहीं करती ...

अब ऋचा बोतल घूमती है ... और संयोग से बोतल तरुण के सामने आ रुकता है ... जिसे देख ऋचा की आँखों में चमक अस जाती है ... तरुण डरे चूसे करता है ...

ऋचा : मैंने सुना है की तुम एथलिट टाइप पर्सन हो ... तो तुम्हारा टास्क ये है की तुमको 2 मिनट तक सिर्फ एक हाथ के सहारे खड़े रहना है ... अगर तुम फ़ैल हुए तो और भी हार्ड टास्क मिलेगा ...

राहुल : वाओ दीदी मज़ा आ गया ... आज सही मौका हाथ लगा है ... बड़ा माचो मन बना घूमता है आज इसकी औकात दिख जाएगी ....

रानी : वैसे ऋचा में तो कोई खास टास्क नहीं दिया ... मैं होती तो ... खैर छोडो ... चल कुत्ते लग जा अपने काम पर ...

राहुल : दीदी ये तो मुझे खुजली वाला कुत्ता लग रहा है ...

श्रेया : राहुल और रानी तुम ये क्या क्या बोले का रहे हो ये एक गेम है इसको एक गेम की तरह hi खेलो ... Ok तरुण तुम अपना डरे करो ...

तरुण बिना कुछ बोले hi पहले पंजो के बल हो कर पाओ को हवा में उठा देता है और फिर धीरे धीरे बैलेंस बना कर अपने एक हाथ को भी ऊपर उठा कर सिर्फ एक हाथ के सहारे खड़ा हो जाता है ... एयर फिर ऋचा स्टॉप वाच में 2 मिनट की टाइमिंग लगाने लगती है ... पर उसने 2 की बजाये 3 मिनट का टाइम लगाया था ... स्टॉप वाच टाइम पूरा होते hi बजने लगता है और तरुण फिर खुद को बैलेंस करके खड़ा हो जाता है और वापस अपने सीट पर बैठ जाता है ...

अब बरी तरुण के बोतल घूमने की थी ... अबकी बार बोतल राहुल के आगे रूकती है ... ये देख तरुण के खून में उबाल आ चूका था इस टूर में उसने ये फील किया था की उसको सबसे ज्यादा हेट करने वाले तीन hi लोग हैं - Rahul,Rani और ऋचा ...

राहुल ने तरुण की आँखों में धधक रहे ज्वाले को पहचान लिया था इसलिए उसने होशियारी दिखते हुए ट्रुथ चूसे किया ...




तरुण : तुम हमेसा लड़कियों या औरतो में hi क्यों घुसे रहते हो मर्द भी हो या सिक्सर किंग हो ... अगर मर्द हो तो मर्दो की तरह के काम किया करो ...

रानी : ोये हरामी ये कैसा बेहूदा सवाल है ... ऐसे घटिया लैंग्वेज में बात करने की तुमने हिम्मत कैसे की ...

तरुण : ोये गरीबो की सस्ती महारानी ... मैंने कोई गलत तो नहीं पूछा और ये गेम का hi हिस्सा है ... मैंने आपसे तो नहीं आपके लादले से सवाल किया है तो जवाब तो उसको देना होगा या मेरी कही गयी साडी बातें सच है ...

राहुल : तुम मुझे घर जाने दे फिर मैं सबको बोल कर तुम्हारा वो हाल करवाऊंगा की तेरी सात पुष्टि भी काँप उठेंगी ...

तरुण : क्यों तेरे पिछवाड़े में गुड्डा नहीं है क्या कुछ करने की ... मर्द की औलाद है तो आ भीड़ के देख ले मैं अकेला hi हु ...


ठीक तभी तरुण के बगल बैठी हुयी रूबी ने उसको हिलाया ...

रूबी : अरे भाई कहा खो गए तुम्हे राहुल को कोई डरे देना है उसने डरे चूसे किया है ...

तरुण (मन में) : OMG यानि की मैं बैठे बैठे hi सपने देख रहा था ... चलो ाचा है इसने डरे चूसे किया है ... थोड़ा इसको भी इसके hi मर्ज़ की दवा दे दू ...

तरुण : मैं चाहता हु की आप रानी दीदी के दोनों गालो पर एक एक थप्पड़ लगाए ... और हाँ थप्पड़ की आवाज़ जोरदार होनी चाहिए वर्ण फिर थप्पड़ मेरे हाथो से खाना होगा ...

राहुल उठ कर रानी के पास जा कर उसके गालो पर धीरे धीरे दो थप्पड़ लगता है ...

ये देख तरुण अपनी जगह से खड़ा हो जाता है और राहुल के करीब जाता है ... राहुल अब तक कुछ समझ पता इससे पहले hi तरुण उसके गाल पर एक करारा थप्पड़ जड़ देता है ... थप्पड़ इतना करारा था की राहुल जमीन पर गिर जाता है ... राहुल के गाल तो लाल हो hi चुके थे उसके होंठ भी फैट गए थे जिससे थोड़ा थोड़ा खून रिसने लगा था ...

तरुण : थप्पड़ इसको कहते हैं बड़े भाई ... अब समझ गए या एक और लगाऊं ... चलो अब जल्दी से अपना टास्क पूरा करो .. अपने hi कहा था न की ये गेम का उसूल है ...

रानी और ऋचा अपनी जगह से खड़े हो कर तरुण की तरफ बढे hi थे की श्रेया और राघव ने गेम का हवाला देकर बीच बचाव किया ...

अब राहुल को फिर से रानी की दो थप्पड़ लगाने थे ... तरुण के एक थप्पड़ ने हो उसको हिला डाला था तो वो अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था ...

राहुल ने रानी के दोनों गालो पर एक एक करारे थप्पड़ चिपका दिए ... अब राहुल और रानी की आँखों में आंशू आ गए थे .. रुचिका बड़े प्यार से तरुण की तरफ देख रही थी मनो वो इशारो से hi कहना चाहती हो वेल दोने बरोथेर ...


ऐसे hi थोड़े देर और ये गेम खेलने के बाद सभी लोग अपने अपने रूम्स में सोने को चले जाते हैं ...
 
अपडेट 9

आगे

राहुल और रानी भी अपने रूम आ चुके थे पर दोनों के हाथ उनके गालो पर थे ... तरुण के एक hi थप्पड़ से राहुल को अंदाज़ा हो गया था की उससे पार पाना उसके अकेले के बस का नहीं है ...

श्रेया भी तरुण के साथ रूम में थी

..

श्रेया : बाप रे तूने तो आज कमल hi कर दिया ... वैसे तूने ये सब कहा से सीखा ...

तरुण : दीदी जब रूचि दीदी ने मेरे गालो पर थप्पड़ लगाए थे तो मैंने रूचि दीदी की आँखों में आंशू देख लिए थे ... आपके और बुआ के अलावा एक वो hi हैं जिनकी आँखों में मैं आंशू नहीं देख सकता ... और उन् भाई साहब को मैंने सुरु से hi नोटिस किया है की वो हमेसा सबको मेरे खिलाफ भड़कता hi रहता है ... अरे बर्दास्त की भी कोई लिमिट होती है और अब मैं कोई बच्चा भी तो नहीं रहा ...

श्रेया : वो तो मैं सुबह hi देख चुकी हु लिटिल चैम्प की तुम छोटे पैक में बड़ा धमाका हो ... मैं बहुत खुस की अब तुम अपने हक़ के लिए खुद hi लड़ सकते हो ...

तरुण : क्या दीदी आप भी इस एक इंसिडेंट से सब कुछ तो नहीं बदल जाता न मैं अब भी आपका वही छोटा सा भाई हु जिसे आप छुटपन में चुप करने के लिए अपनी ऊँगली चुसवाया करती थी ...

श्रेया : तो तुम्हे वो सब याद है ... OMG

तरुण : मेरी पास्ट लाइफ में चाँद लम्हे hi ऐसे हैं दीदी जिन्हे मैं याद रख सकू ...

श्रेया : चल चल अब ज्यादा इमोशनल होने की जरुरत नहीं है .. आज मैं तुम्हे डायरेक्ट अपनी इससे hi दूध पीला देती हु ... 😂😂😂😂

तरुण : नहीं दीदी हमारा रिश्ता पवित्र धागो से बंधा है और मैं किसी कीमत पर आपके और मेरे रिश्ते को ख़राब नहीं करना चाहता ...

श्रेया : अरे पागल तुझे किसने कहा की ऐसा करने से हमारा रिश्ता ख़राब हो जायेगा ... मैं तो बस तुझे अपना दूध पिलाना चाहती हु ...

तरुण : पर दीदी ...

श्रेया : मैं कुछ नहीं सुन्ना चाहती ... चल बीएड पर लेट जा ...

तरुण और श्रेया को मन करके उसका दिल नहीं दुखाना चाहता था इसलिए वो बीएड पर लेट जाता है ...

श्रेया अपनी निघ्त्य का बटन खोल कर अपना राइट चुका बहार निकल लेती है ... तरुण पहली बार किसी की चुकी को देख रहा था इतने करीब से ...

गोर गोर चूचियों पर किसमिस की तरह चिपके हुए निप्पल तरुण का ध्यान अपनी तरफ खोमच रहे थे .. तरुण अपने जीभ निकल कर श्रेया के निप्पल को चाटने लगता है ... तरुण के गरम जीभ की छुवन अपने निप्पल के चारो तरफ फील करके hi श्रेया की आँखें बंद हो जाती है ...

तरुण ऐसे hi धीरे धीरे करते हुए उसकी निप्पल को अपने होंठो के अंदर दबा कर चूसने लगता है ... धीरे धीरे ये चूसने की रफ़्तार तेज़ होने लगती है ... अब श्रेया खुद hi अपने चूची को तरुण के मुँह पर दबा रही थी ... तरुण से अपने चूचियों को चुसवा कर उसको अद्भुत सुख की अनुभूति हो रही थी ...

अब श्रेया अब लेफ्ट वाला चुका तरुण के मुँह में थुश देती है और उसका हाथ अपनी दूसरी चुकी पर रख देती है ... तरुण भी मज़े से अपनी बड़ी बहन की एक चुकी को चूस रहा था तो दूसरी को धीरे धीरे सहला रहा था ...

तरुण के जीभ के जादू के सामने वो ज्यादा देर टिक नहीं पति है वो तरुण को जोर से भींच कर डिस्चार्ज हो जाती है ...

कुछ देर वो ऐसे हो लेते हुए सुस्ताने लगती है फिर वाशरूम जाकर खुद को साफ़ करके वापस तरुण के बगल में आ कर लेट जाती है ...

श्रेया : ी मस्ट से तू बहुत अचे से दूध चुस्त है ... कही तूने किसी से ट्रेनिंग तो नहीं ली है ...

तरुण : अरे नहीं दीदी ... आपको इतना ाचा लगा ...

श्रेया : हाँ यार तेरे जीजू को चूसना चूसना पसंद नहीं है वो तो सिर्फ खोल कर सुरु हो जाये हैं ...

श्रेया ने फ्लो फ्लो में ये सब बोल तो दिया था पर अब वो खुद hi सरमने लगी थी ...

थोड़े देर शांत रहने के बाद तरुण ने फिर से अपने मन की बात श्रेया से कहना सुरु किया ...

तरुण : दीदी एक बात पुछु बुरा तो नहीं मानोगी न ...

श्रेया : पूछो ...

तरुण : अपने उस दिन बताया तहत की आपके शादी से पहले hi आपके boyfriend's थे तो क्या वो सच कहा था ....

श्रेया : हाँ यार मैंने तो तुम्हारी बात भी अपने एक फ्रेंड से करवाई थी ...

तरुण : तो क्या दीदी अपने उसके साथ भी कुछ किया था क्या ...

श्रेया : हाँ सब कुछ किया था सिर्फ सेक्स के अलावा क्यूंकि उस वक्त मैं उसके लिए तैयार नहीं थी ....

तरुण : तो दीदी अपने मेरे साथ ये सब क्यों किया ... ी मैं यु खुद के कपडे उतर कर मुझे अपना जिस्म दिखाना और अभी वो सब ...

श्रेया : तू मुझे ाचा लगता है और तुम्हारे लिए मेरे दिल में एक इमोशनल बॉन्डिंग भी है ... वैसे भी तुम लड़कियों के मामले में कोरे कागज़ हो तो मैंने सोचा क्यों न कोरे कागज़ पर कुछ स्केचेस बना लिए जाएं ... 😂😂 ... वैसे ी मस्ट से यू अरे सो स्वीट ... अगर तुम मेरे भाई न होते तो आज तेरा खता भी खोल देती पर मैं हमारे रिश्ते को यही तक सीमित रखना चाहती हु ...

तरुण : तो क्या मेरी जगह कोई और होता तो आप उसके साथ वो सब कर लेती क्या ???

श्रेया : पागल है क्या मैं तो तुम्हारे बारे में कह रही थी की अगर तुम मेरे भाई न होते तो तुम्हारे साथ कर लेती ... वैसे भी मैं अपने पति से पूरी तरह से संतुस्ट हु मुझे इधर उधर मुँह मरने की कोई जरुरत नहीं ... वो तो मैं तुम्हे बस लड़कियों के मामले में थोड़ा कम्फर्टेबले महसूस करवाना चाहती थी ... वैसे हमारी भी क्या जोड़ी है न तुम घर के सबसे छोटे मेंबर और मैं अपने जनरेशन की सबसे बड़ी लड़की ...

तरुण : ी लव यू दीदी ...

श्रेया : लव यू तू मेरा बच्चा ... चल अब अपन सोते हैं कल हमें यहाँ से निकलना भी है ...

वो झपकी दाल कर तरुण को खुद से चिपका लेती है ...

ठीक तभी उनके गेट पर नॉक होता है ... बहार और कोई नहीं रुचिका थी ...

श्रेया : क्या बात है रूचि इतनी रात को तुम यहाँ ...

रुचिका : वो दीदी मुझे नींद नहीं आ रही थी ... क्या मैं आज आप लोगो के साथ सो जॉन ...

श्रेया : अरे तो इसमें पूछने की क्या बात है ... चल आ जा सो जा ... श्रेया तरुण और रुचिका के बीच सो जाती है ...

अगली सुबह को ये लोग अपने बैगेज को पैक करके फ्लाइट से अपने घर के लिए रवाना हो जाते हैं ...

घर पहुँचते hi सभी के चेहरे पर स्माइल आ जाती है ... वही तरुण काफी घबराया हुआ था जिसका कारन लास्ट नाईट वाला इंसिडेंट था ... उसको दर था की कही राहुल और उसकी चमची बहनो ने नमक मिर्च लगा कर उसके बारे में बता दिया तो कही वो लोग जो उससे पहले से hi नफरत करते हैं वो कही उसके अगेंस्ट कोई बड़ा एक्शन न ले ले ...

जब ये लोग घर पहुँचते हैं तब तक शाम घिर आयी थी ... घर के सभी मेंबर्स अभी घर पर hi मौजूद थे ...

उसने भी बाकियो के तरह सभी के पाओ छुए ... अस एक्सपेक्टेड बुआ के अलावा बाकियो ने फीका सा रिएक्शन hi दिया ...

रात में सभी एक साथ दिंनिंग टेबल पर मिलते हैं ....

दादा : कैसा रहा टूर मेरे बच्चो ...

राघव : बहुत ाचा था दादा जी ... हमने खूब मेक किये वह ...

बी. चाचा : तुम बताओ प्रियांशी बीटा ... कैसा रहा तुम्हारा टूर ... वह खाने पिने की कोई दिक्कत तो नहीं हुयी न ...

प्रियांशी : अरे नहीं बड़े पापा ... मुझे तो वह खूब मज़ा आया ... कितनी सुन्दर जगह है मेरा मन तो कर रहा था की वही बस जॉन ... वैसे दादा जी मंझले पापा नहीं दिख रहे ...

दादा : अरे बीटा वो हमारे कुलगुरु का देहांत हो गया है तो वो उनके अंतिम संस्कार में गया हुआ है ....

श्रेया : कब दादा जी ...

दादा : वो बीटा कल hi उनका देहांत हुआ है ...

राघव : तो क्या दादा जी हमें भी वह जाना होगा ...

दादा : हमने उनके क्रियाक्रम के लिए जरुरी सामान और कुछ पैसे अभी भिजवा दिया है ....

ऐसे hi कुछ देर नार्मल बात चित के बाद सभी अपने अपने रूम्स को लौट जाते हैं ...

अभी श्रेया तरुण के रूम पर आयी हुयी थी ...

तरुण : दीदी अभी तो आप यही रहोगी न ...

श्रेया: नहीं आज तुम्हारे जीजा जी का कॉल आया था की वो नहीं आ पाएंगे मुझे लेने इसलिए राघव के साथ मुझे जाना होगा ... क्यों कोई बात है क्या या तुम मुझे अपने घर में नहीं रहने देना चाहते 😂😂

तरुण : अरे नहीं दीदी ऐसी बात नहीं ... वो बात ये है की मुझे मेरे बेस्ट फ्रेंड की बहन की शादी में जाना है ... शादी में अभी 14 दिन बाकि है पर उसकी दीदी ने मुझे शादी से 10 दिन पहले hi वह जाने को कहा है ... वो मुझे अपने सेज भाई जितना hi मानती है तो मैं उनका दिल नहीं तोड़ सकता ....

श्रेया : ये तो बहुत अछि बात है मेरी शादी में न सही काम से काम उसकी शादी तो अटेंड कर लो वैसे कहा रहते हैं वो लोग ...

तरुण उसको अपने कारन की होमेसिटी के बारे में बताता है ...

श्रेया : अरे ये तो बड़ी अछि बात है अपन कल hi यहाँ से निकल चलेंगे ... तू कभी अपने जीजा जी से भी नहीं मिला है उनसे भी मिल लियो और मेरे ससुराल भी हो देख लेना ... तुम्हारे फ्रेंड का घर मेरे ससुराल से 4 - 5 घंटे की दुरी पर hi है .... तो तो बेस्ट रहेगा ... पता नहीं राघव को इतने दिनों की छुट्टी के बाद और छुट्टी मिले या नहीं ... लगे हाथो हम दोनोकाभी काम हो जायेगा ...

तरुण : हाँ दीदी ... पर मैं आपके यहाँ ज्यादा दिन नहीं रुकूंगा ...

श्रेया : ok यार मैं ज्यादा फाॅर्स नहीं करुँगी तुझे जितने दिन मन हो उतने hi दिन रहना ... मेरी पैकिंग तो पहले से hi हुयी पड़ी है तो हमें कल निकलने में कोई दिक्कत भी नहीं होगी ... तो ये मैं दोने समझू न ...

तरुण : हाँ दीदी ये भी ाचा रहेगा ... इससे कुछ दिन और आपके साथ रहने का मौका मिलेगा ...

श्रेया : अरे कही मेरे चैम्प का दिल तो नहीं आ गया अपनी इस बहन पर ...

तरुण : दिल तो पहले से hi आया हुआ है दीदी ... यू अरे माय स्वीटू दीदी आफ्टर आल ...

श्रेया : चलो मेरी जान अब मैं सोने छति हु ... तू भी जल्दी सो जा कल मॉर्निंग में hi हमें निकलना होगा ... गुड नाईट बाबू ... 😘😘

तरुण : गुड नाईट दीदी ...

और फिर दोनों अपने अपने रूम्स जाकर सो जाते हैं ...

रात में ठीक 1 बजे के करीब उसकी नींद खुल जाती है ... वजह थी की उसको जोरो की प्यास लगी थी ... रात में उसकी घर की नुकरणी शायद उसके रूम में पानी रखना भूल गयी थी ...

पिने का पानी तो किचन में hi मौजूद था इसलिए वो सीढ़ियों से होते हुए ग्राउंड फ्लोर पर जाने लगता है ...

किचन से पानी पिने के बाद वो वापस सीढ़ियों के तरफ जाने लगता है की उसको अपने दादा जी के रूम की लाइट जाली हुयी दिखती है ... वो थोड़ा सा आगे बढ़ कर उनके रूम की तरफ जाने लगता है तो उसको रूम में से किसी की दबी हुयी सिसकिया सुनाई देने लगती हैं ...

तरुण ( मन में ) : दादा जी के रूम से ये कैसी आवाज़ आ रही है ... कही दादा जी की तबियत ख़राब तो नहीं हो गयी जो वो ऐसे कराह रहे हैं ... अब कैसे पता लगाऊं ... अगर सब सही होता तो रूम नॉक भी कर सकता था ... पहले मुझे अंदर झांक कर देखना होगा की क्या बात है ...

वो रूम के अंदर देखना का जुगाड़ ढूंढ़ने लगता है ... पुराण घर होने की वजह से उसको खिड़की में एक छोटा सा होल दिख जाता है जिससे वो अंदर झाँक सकता था ...

वो जल्दी से अंदर झांकना चाहता था ... उसने उस छोटे से होल पर अपनी आँख लगायी तो अंदर का नजारा देख उसकी सांसें hi थम गयी क्यूंकि उसके दादा जी अंदर नंग अवस्था में किसी औरत के साथ चुदाई में लगे पड़े थे और ये सिसकिया ुशी औरत की थी ... औरत का चेहरा अभी दूसरी तरफ था ...

उस औरत की बड़ी बड़ी और गोरी गांड हर धक्के के साथ हिल रही थी जो की काफी दिलकश नजारा पेश कर रही थी ... उसके दादा जी उसके चूतड़ों को पकड़ कर तेज़ स्पीड से करारे धक्के लगाए जा रहे थे ..

तरुण की दादी का तो स्वर्गवास काफी साल पहले hi हो चूका था तो उसके दादा जी के रूम में किसी औरत का इस हाल में होना कही न कही तरुण की उत्सुकता को और बढ़ा रहे थे ....

तरुण (मन में) : दादा जी को इस उम्र में ये सब करते शर्म नहीं आती है क्या ... पर सबसे खास बात ये है की इतनी रात में दादा जी के रूम में ये कौन सी औरत है ... घर में तो रात में किसी नौकर को भी रुकने को नहीं दिया जाता तो ये कही घर की hi कोई औरत तो नहीं ... नहीं नहीं ये नहीं हो सकता कोई अपने घर की अमानत के साथ ये सब करने की सोच भी नहीं सकता ... जरूर ये घर की कोई नौकरानी होगी जो पैसे के लालच में उसके दादा जी का बिस्तर रंगीन कर रही होगी ....

तरुण का दिल तो बड़े जोरो से धड़क रहा था ... उसके दादा जी उस औरत को डोगग्य पोजीशन में झुका कर उसकी छूट में सत्ता सात लुंड पेले जा रहे थे ... वो औरत बस कन्टिन्यूसली सिसकिया लिए जा रही थी ...

खैर कुछ देर बाद ये धक्काम पेल का सिलसिला थम जाता है ... शायद उसके दादा जी का पानी निकल चूका था ... अब वो औरत भी सीढ़ी कड़ी हो जाती है ... उस औरत का चेहरा देख तरुण की आंखें हैरत से फैल जाती है ...


वो अब और वह रुकना नहीं चाहता था क्यूंकि उसके पकडे जाने का खतरा था इसलिए वो सावधानी से चलता हुआ पाने रूम में आ कर बीएड पर लेट जाता है ... उसके सांसें काफी तेज़ी से चल रही थी उसको तो अब भी यकीन नहीं हो रहा था की वो अभी थोड़े देर पहले क्या देख कर आ रहा है ... उसको अब भी यकीन नहीं हो रहा था की उसके दादा जी ऐसा कुछ कर सकते हैं ...
 
Back
Top