Zindagi : ek anjana safar - Page 2 - SexBaba
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Zindagi : ek anjana safar

अपडेट 10

वो अब और वह रुकना नहीं चाहता था क्यूंकि उसके पकडे जाने का खतरा था इसलिए वो सावधानी से चलता हुआ पाने रूम में आ कर बीएड पर लेट जाता है ... उसके सांसें काफी तेज़ी से चल रही थी उसको तो अब भी यकीन नहीं हो रहा था की वो अभी थोड़े देर पहले क्या देख कर आ रहा है ... उसको अब भी यकीन नहीं हो रहा था की उसके दादा जी ऐसा कुछ कर सकते हैं ...

आगे

अगली सुबह को तरुण और श्रेया घर से निकल पड़ते हैं ... तरुण की माँ उससे बात तो करना चाहती थी पर ये वो भी अछि तरह से जानती की ये इतना आसान भी नहीं होगा ... इतने सालो की नाराजगी ैनवाय दो इमोशनल बातो से नहीं दूर की जा सकती थी ... और वो खुद भी किसी को फ़िलहाल नहीं जाताना चाहती थी की उसको कुलगुरु ने सच्चाई से अवगत करा दिया है ...

ट्रैन में 5-6 घंटे के सफर के बाद वो लोग फाइनली श्रेय के ससुराल पहुँच hi जाते हैं ... श्रेया ने अपने हस्बैंड को तरुण के बारे में नहीं बताया था .... श्रेया के ससुराल में ज्यादा लोग भी नहीं थे ... बस एक सास और एक बड़ी ननद थी जिसका डाइवोर्स हो चूका था और वो अब अपने मायके में hi रहकर एक स्कूल में टीचिंग किया करती थी .... इनका घर एक 3भक फ्लैट था जैसा की आमतौर पर बड़े सहरो में हुआ करता है .... 3 मैं रूम्स में सभी घर के लोग रहते थे और एक छोटे से स्टोर रूम को उन्होंने गेस्ट रूम बनवाया हुआ था ...

फ्यू नई करैक्टर इन थे स्टोरी ...

ऋषभ : श्रेया का हस्बैंड ... आगे 32 ... अपना इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का बिसनेस है और अक्सर कही न कही टूर पर hi होता है ...

काम्य सिंह : श्रेया की ननद ... आगे 34

विमला सिंह : श्रेया की सास

स्टेशन से एक तस्य लेकर दोनों भाई बहन श्रेया के ससुराल पहुँचते हैं ... उस वक्त घर में सिर्फ श्रेया की सास hi मौजूद थी ....

श्रेया : मम्मी जी ... दीदी अभी स्कूल से नै आई हैं क्या ...

विमला : नहीं बहु ... जाओ अपने भाई का सामान गेस्ट रूम में रखवा दो ... ऋषभ तो कल hi बेंगलोरे से लौटेगा ... वैसे तुम्हारे एक और भाई हैं तुमने हमें कभी बताया नहीं था ...

श्रेया : लम्बी कहानी है मम्मी जी फिर कभी फुर्सत में बताउंगी ... फ़िलहाल तो मुझे जोरो की भूक लगी हुयी है ... भाई तुम भी जाओ फ्रेश होकर आओ तब तक मैं कुछ खाने का रेडी करती हु ...

तरुण अपना सामान गेस्ट रूम में शिफ्ट करता है .,.. आमतौर पर ये रूम किसी दूर के रिस्तेदारो या फ्रेंड्स वगैरह के रुकने के लिए उसे होता था ... राघव या राहुल को भी या तो काम्य का रूम मिलता था या ऋषभ के न होने से वो श्रेया के साथ भी रुक लेते थे ...

ये रूम भी ठीक थक hi था बस स्पेसियस काम था ...

लंच के टाइम तक काम्य भी घर आ जाती है ... वो एक दिवोर्सड लेडी थी ... शादी के कुछ महीने बाद hi इसने अपने पति से डिवोर्स ले लिया था वजह दोनों मिया बीवी के अलावा किसी को पता न था ... ऋषभ के घरवालों ने इसको अपनी किस्मत मान कर अपने साथ hi रख लिया .... उसका रंग थोड़ा सांवला था पर उसका जिस्म पूरा भरा हुआ था और वो काफी हॉट दिखती थी ... तरुण से तो आज तक मिली नहीं थी .... राघव के साथ काफी अछि बॉन्डिंग थी उसकी .... अछि खासी वेल एडुकेटेड थी इसलिए उसने अपने तिमेपास के लिए पास के hi एक स्कूल में पढ़ना सुरु कर दिया था ... बोलने में थोड़ी मुँह फैट थी पर दिल की बहुत अछि थी...

पहले वो श्रेया से मिलती है ....

काम्य : अरे भाभी आप कब आयी ... और कैसा रहा आपका ट्रिप .... किसके साथ आयी हो ... कहाँ है राघव जी उनको कहा छुपा रखा है अपने ...

श्रेया (हस्ती हुयी ) : अरे अरे अत्निक सांस तो ले लो ... एक साथ इतने सरे सवाल ... हाँ दीदी आ गयी मैं और मेरा टूर मस्त था .... राघव तो नहीं आया है ...

राघव के न आने की खबर सुन काम्य का मुँह थोड़ा लटक सा जाता है .... श्रेया के अलावा एक वही तो था जिसके साथ वो खुल कर अपने दिल की बात किया करती थी ...

फिर श्रेया तरुण को आवाज़ देती है ... दीदी की आवाज़ सुन तरुण रूम से बहार आता है ...

श्रेया (हस्ते हुए) : भाई इनसे मिलो ये हैं मेरी प्यारी ननद काम सहेली काम्य दीदी ... और दीदी ये है मेरा सबसे छोटा भाई तरुण ... कुछ दिनों पहले hi पढ़ाई करके लौटा है ... इसको अपने फ्रेंड की बहन की शादी में इधर hi कही जाना था तो आते टाइम साथ लेती आयी ....

तरुण आगे बढ़ कर काम्य के पाओ छूने को झुकता है तो काम्य उसको बीच में hi रोक लेती है और उसको अपने सीने से लगा लेती है ... सीने से लगते hi तरुण को अपनी छाती पर काम्य के दो बड़े बड़े पपीते अचे से फील होते हैं क्यूंकि काम्य ने उसको जोर से भींच लिया था ...

श्रेया : बस बस दीदी बच्चे की जान लोगी क्या ?

काम्य : वैसे भाभी एक बात तो है आपके सरे भाइयो को उपरवाले ने फुर्सत से बनाया है ...

श्रेया : बस बस दीदी अब ये न कहना की राघव की hi तरह ये भी आपको पसंद आ गया ....

काम्य : राघव जी जितना तो नहीं पर आपके ये भाई भी मुझे अचे लगे ...

ऐसे hi थोड़े देर इनका हसी मजाक चलता रहता है .... उसके बाद सभी साथ में लंच करते हैं ...

रात में डिनर के बाद तरुण को कारन का फ़ोन आता है ...

कारन : hello भाई कैसा है और कहा है ....

तरुण : मैं तो ठीक हु भाई ... अभी अपनी बड़ी दीदी के ससुराल आया हुआ हु ...

कारन : ok भाई ... याद है न तुझे 3 दिनों तक यहाँ पहुँच जाना है वर्ण दिया दीदी का तो तू जनता hi है वो फिर तुमसे बात भी नहीं करेंगी ...

तरुण : कोई नहीं भाई मैं 2 - 3 दिनों में वह आ जाऊंगा ... दीदी को मत बताइयो मैं उन्हें सरप्राइज देना चाहता हु ...

कारन : चल ठीक है ... भाई मुम्मा डिनर के लिए बुलाती है ... तुमसे मिलकर बाकि बातचीत होगी ... bye

तरुण : ok bye ...

तरुण को नींद नहीं आ रही थी तो वो रूम में लेता हुआ छत की तरफ टकटकी लगाए हुए देख रहा था ... उसकी आँखों के सामने कल रात का देखा हुआ सारा सन किसी चलचित्र की तरह उभर कर आ रहा था ...

तरुण (मन में) : आखिर दादा जी को इस उम्र में ये सब करते हुए शर्म नहीं आयी क्या ... पता नहीं इस घर में और कौन कौन से राज़ दफ़न हैं ... क्या कोई अपने घर के लोगो के साथ hi ऐसा सम्बन्ध स्थापित कर सकता है ... पर मैंने भी तो श्रेया दीदी के दूध चूसे हैं और एक बार तो दीदी और भाभी दोनों को एक साथ नंगी भी देखा है ... पर मैंने कुछ गलत तो नहीं किया है ... दीदी ने मुझे हमेसा एक माँ सा प्यार दिया है ... उन्होंने मुझे उस वक्त सपोर्ट किया है जब कोई मुझे देखना तक पसंद नहीं करता था ... भले hi पहले वो खुल कर मुझे सपोर्ट नहीं करती थी पर उस वक्त मेरे लिए प्यार और स्नेह की एक बूँद भी किसी अमृत से काम न था ... मैं दीदी के लिए कुछ भी कर सकता हु किसी भी हद्द तक जा सकता हु .... मेरे और दीदी के बीच जो भी हुआ वो प्यार था कोई हवस नहीं ... पर दादा जी के केस में ये साफ़ हवस hi नजर आ रहा था .... कैसे वो अपने पति के होते हुए भी एक बुढ्ढे इंसान के साथ ये सब कर रही थी ....क्या जिस्म की आग एक रिश्ते से बढ़ कर है ....

उधर तरुण के गाँव में चांडाल चौकड़ी फिर से एक रूम में मीटिंग क्र रहे थे .... पहले और आज में फर्क सिर्फ इतना था की प्रियांशी न तो तरुण क सुप्पोर्ट में कुछ बोल रही थी न hi अपोजिट में ... पता नहीं चाहे वजह जो भी हो ....

मॉर्निंग को जल्दी hi तरुण की नींद खुल जाती है पर वो यहाँ कही रनिंग के लिए नहीं जा सकता था इसलिए वो फ्रेश होकर अपने रूम में hi एक ट्रॉउज़र और एक t-shirt में हलके फुल्के एक्सरसाइज किये जा रहा था ....

तभी हाथ में एक ट्रे में चाय लिए हुए काम्य उसके रूम में एंटर करती है .... अभी तरुण का मुँह गेट के दूसरी तरफ था .... इस ड्रेस में उसके मसल्स और बॉडी शेप और भी निखार रहा था .... काम्य तो कुछ पल बस उसको देखती hi रह गयी ....

काम्य : जनाब अगर आपका एक्सरसाइज वगैरह हो जाये तो चाय पि लीजिये वर्ण आपके घर वाले कहेंगे की बहन के ससुराल वाले आपको कुछ खिलते पिलाते नहीं थे क्या .... वैसे देखने से तो नहीं लगता था की काम कपड़ो में आप इतने हैंडसम लगते होंगे .... मेरा तो दिल आ गया है आपके ऊपर .... बच के रहिएगा जनाब कही मैं आपका रपे न कर दू .... 😂😂😂

तरुण : क्या दीदी आप भी न ... आइये बैठिये ...

काम्य : लो जी सारा गुड़ गोबर कर दिया न अपने .... कहा तो मैं सोच रही थी की आपको मैं अपना सजना बनाउंगी पर अपने तो मुझे प्यारी बहनिया बना लिया......

तरुण : आप भी न दीदी बहुत मजाक करती हो .... वैसे आप ये एक्सरसाइज या योग वगैरह नहीं करती क्या ...

काम्य (खुद की तरफ देखकर ) : मुझे देख कर आपको लगता है की मैं ये सब करती होउंगी .... अगर करि होती तो इतना फैल थोड़े hi जाती .... वैसे अगर आप शिखाएँगे तो वो भी कर लुंगी .... अपने तो रेड सिग्नल दे hi दिया है बूत don't वोर्री मेरा ओने साइडेड प्यार hi सही ....

तभी वह श्रेया की एंट्री होती है ....

श्रेया : किस्से आपको ओने साइडेड लव हो गया दीदी ...

काम्य : और किस्से आपके भाई साहब से ...

श्रेया : ाचा जी कुछ दिनों पहले तो आप राघव की माला जप्ती थी अब मेरे छोटे भाई पर डोरे दाल रही हैं ... लगता है आपको मेरे घर के मर्द बहुत पसंद आते हैं ...

काम्य : अपने भी मेरे घर के एकलौते मर्द को हथिया लिया है .... तो मैं क्यों छोड़ू ... 😂😂

श्रेया : दीदी आप चाहो तो अब भी ज्वाइन कर सकती हो वो तो वैसे भी हमेसा आपके बड़े बड़े ....

इतना कहकर श्रेया रुक जाती है क्यूंकि अचानक से उसको ख्याल आ जाता है की अपने छोटे भाई के सामने वो ये सब कैसे बोल सकती है ....

काम्य : रुक क्यों गयी बोलो न ओहो भाई के सामने शर्मा रही हो ... और मेरे भाई के साथ रूम में बंद होकर सिसकारियां लेती हो उसका क्या ... वैसे भी आज वो आ hi रहा है आज रात फिर से नाईट शो चलेगा ... इतने दिनों की साडी तड़प जो निकनि है ... आज तो आपके भाई भी हैं इन्हे भी साथ ले लेना ... ढिंका चिका न सही काम से काम अपनी बहन की साफ़ सफाई तो कर hi सकते हैं ... क्यों तरुण जी क्या ख्याल है ....

अभी वो कुछ और हसी मजाक करती इससे पहले hi श्रेया की सास आवाज़ देती है तो दोनों ननद भाभी तरुण के रूम से निकल जाती है ... तरुण ने भी रहत की सांस ली वर्ण दोनों ननद भाभी तो आज अपने हसी मजाक की हर सीमा से पार हो जाती ... वैसे उनका ये आज का नहीं है जब भी साथ होती हैं तो ऐसे hi एक दूसरे के साथ हसी मजाक करती रहती हैं...

इवनिंग को तरुण के जीजा यानि की ऋषभ भी आ जाते हैं .... काम्य hi दोनों को आपस में इंट्रोडस करवाती है ....

ऋषभ : वैसे श्रेया तुमने मुझे आज तक इनके बारे में कभी नहीं बताया ....

काम्य : अरे भाई इनसे बांड लिखवा लो वर्ण कब कहा से तेरे और सेल साली मिल जाएं क्या पता... 😂😂

विमला : हे उपरवाले क्या करू मैं इस लड़की का ... कब क्या बोल जाती है इसको पता भी नहीं चलता ... इसकी तरफ से मैं माफ़ी मांगती हु बीटा ...

ऐसे hi हसी मजाक करते हुए सबका डिनर समाप्त होता है और सभी लोग अपने अपने रूम्स में सोने चले जाते हैं .... तरुण को जो रूम मिला था और उसकी बहन के रूम के बीच सिर्फ एक दिवार का hi फैसला था ....

तरुण को आज भी नींद नहीं आ रही थी तो वो अपनी आँखें खोल कर छत की तरफ दरखे जा रहा था ....

ठोस hi देर में उसके कानो में किसी की दबी हुयी सिसकिया सुनाई देने लगी ... उसको समझते देर न लगी की ये किस तरह की आवाज़ें हैं और किधर से आ रही है ....

आज काफी दिनों बाद दोनों मिया बीवी मिले थे तो दोनों एक दूसरे की तड़प मिटने में लगे हुए थे ...

जहा श्रेया अपनी सिसकियों को कण्ट्रोल करने की पूरी कोसिस कर रही थी वही उसका पति अपनी बीवी के भाई को बगल वाले रूम में इमेजिन करके और जो शोर से लगा पड़ा था ... मनो आज उसकी सुहागरात हो और वो सम कुंवारेपन की साडी तड़प अपनी नयी ब्याहता से मिटने की कोसिस कर रहा हो ...

खैर आधे घंटे के धमाचौकड़ी के बाद इनका खेल ख़त्म हो जाता है और फिर से एक बात शांति छ जाती है ...

श्रेया नंगी बीएड पर पड़ी हुयी अपनी छूट को सहलाने लगती है ...

श्रेया (मुस्कुराती हुयी) : क्या बात है जनाब आज कुछ ज्यादा hi जोश में नजर आ रहे थे ... लगता है अपने मुझे इतने दिनोंकाफी मिस किया है ...

ऋषभ (उसके निप्पल को अपने मुँह से निकलते हुए) : जान तुम चीज hi ऐसी हो की इतने दिनों बाद तुम्हे वापस प् कर कण्ट्रोल नहीं हुआ ....

श्रेया : ाचा जी ... तो दीदी साथ में hi थी न बुला कर चढ़ जाते उनके ऊपर .... आखिर वो भी तो तड़प रही होंगी .... 😂

ऋषभ : तुम्हे बड़ा पता है उनकी तड़पन का ... इतना hi मन हो तो बगल वाले रूम में तुम्हारा भाई भी सोया हुआ है ... जाकर उससे hi चुद लो ...

श्रेया : छी ये आप कैसी बात कर रहे हो ... मैंने आपको कहा न मैं उसको अपने बेटे के जैसा प्यार करती हु ... उसके बारे में ये सब मैं नहीं सुन्ना चाहती ....

ऋषभ : यानि की राघव या राहुल के साथ करने में तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं ...

श्रेया : छी आपसे तो बात करना hi बेकार है जब देखो तब ऐसे hi उलटी सीढ़ी बातें करते रहते हो ... 😏😏

ऋषभ : अरे बाबा सॉरी न मैं तो बस मजाक कर रहा था पर ये सब तो तुमने hi सुरु किया था न और जब बरी खुद की आयी तो गुस्सा हो रही हो ...

श्रेया : बस अब मैं और कुछ नहीं सुन्ना चाहती ... मुझे नींद आ रही है ....

ऋषभ ने और कुछ बोलना सही नहीं समझा और वो दूसरी तरफ करवट करके सो जाता है ... .

अगले सुबह को फिर से आदत के मुताबिक तरुण अपने रूम में एक्सरसाइज कर रहा था की श्रेया उसके रूम में एंटर करती है .....

श्रेया : गुड मॉर्निंग भाई ... ये लो तुम्हारी चाय ...

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी .... दीदी आपके गालो पर ये क्या लगा हुआ है ...

श्रेया मिरर के सामने जा कर देखती है तो वो खुद से शर्मा जाती है ... दरअसल रात को ऋषभ ने चुम्मा छाती में उसके गालो पर दांत लगा दिए थे जिससे हल्का हल्का दाग सा बन गया था ...

तरुण : बोलो न दीदी आपको चोट लगा है क्या ...

श्रेया बस शर्मा कर उसके रूम से भाग जाती है ... ठोस देर में काम्य तरुण के रूम में एक टॉप और ट्रॉउज़र में आती है ...

तरुण काम्य को दो चार एक्सरसाइज की टिप्स देता है और रेगुलर रूटीन बना कर उसको इम्प्लीमेंट करने को कहता है ...

ऐसे hi अब वो दिन भी आ पहुंचा था हिज दिन तरुण को दिया की शादी को अटेंड करने को जाना था ... इस छोटी सी मुलाकात में hi तरुण और काम्य की अछि फ्रेंडशिप हो गयी थी .... ससुराल आने के बाद श्रेया ने तरुण को एक जादू की झप्पी तक नहीं दिया था ...

तरुण अपना बैग लिए हुए गेट के पास खड़ा था और सबसे बरी बरी से विदा ले रहा था ... ऋषभ ने एक कैब मंगवाया हुआ था जो की तरुण को उसके डेस्टिनेशन तक छोड़ने वाला था ...

श्रेया : भाई रिटर्निंग में इधर से hi होते जाना ...

तरुण : नहीं दीदी मौका नहीं मिलेगा ... आपको अपने ससुराल में खुस देख लिया अब और क्या चाहिए एक भाई को ... अपना और सबका ख्याल रखना ... Bye दीदी ...

काम्य गेट के पास कड़ी थी ... तरुण ने इतने दिनों में hi उसके दिल में जगह बना की थी (इमोशनल बॉन्डिंग न की कोई गलत जैसा आप समझ रहे हैं 😂) ...

तरुण को जाते देख काम्य की भी आँखें नाम हो गयी थी ....

तरुण : काम्य दीदी अपना अचे से ख्याल रखना ... इतने दिन आप लोगो के साथ रहा तो वक्त कब बीता कुछ पता hi न चला ... (धीरे से) हो सके तो कोई ाचा सा लड़का देख शादी कर लेना एक अकेली औरत कितने दिन बिना किसी अपने के साथ के रह सकती है ... पता नहीं अब आगे कभी मुलाकात हो न हो ... Bye ..

काम्य खुद पर कण्ट्रोल नहीं कर पति है और जोर से उसको अपने सीने से लगा लेती है ...

श्रेया (खुद से) : कौन कहता है की ये लड़का मनहूस है ... जो इटंर जल्दी किसी अनजान के साथ इतनी मजबूत बॉन्डिंग बना ले वो किसी का बुरा कैसे कर या सोच सकता है ...


श्रेया ऐसे hi अपनी सोच में hi गम थी की तरुण सबसे विदा लेकर अपने कैब से एक नए सफर पर निकल पड़ता है ... उसके जाने के बाद श्रेया का ध्यान टुटा ... पर तब तक तरुण की गाडी भी कही दूर गम हो चूका था ... श्रेया को ये अफ़सोस जरूर हुआ की वो आखिरी बार तरुण को अपने गले से भी न लगा पायी ...
 
अपडेट 11

श्रेया ऐसे hi अपनी सोच में hi गम थी की तरुण सबसे विदा लेकर अपने कैब से एक नए सफर पर निकल पड़ता है ... उसके जाने के बाद श्रेया का ध्यान टुटा ... पर तब तक तरुण की गाडी भी कही दूर गम हो चूका था ... श्रेया को ये अफ़सोस जरूर हुआ की वो आखिरी बार तरुण को अपने गले से भी न लगा पायी ...

आगे

कारन के घर तरुण पहले भी एक दो बार जा चूका था .... तरुण ने रस्ते में hi कॉल करके कारन को बता दिया था की वो रात में उसके घर पहुँच रहा है .... उसने कारन को दिया को ये सब बताने से मन किया था ... कारन के घर पर काफी नौकर चाकर आगे हुए थे जो की घर का हर काम कर दिया करते थे ....

तरुण के पहुँचने से पहले hi कारन ने अपने मम्मी की हेल्प से दिया को उसके रूम में hi बिजी करवा दिया और फिर कारन ने मौका देख तरुण को बिना दिया की नजर में आये अपने रूम में पहुंचा दिया ....

रात में डिनर के लिए सभी घर वाले एक साथ बैठे हुए थे सिवाए तरुण के .... दिया दिंनिंग टेबल पर तो बैठी थी पर उसका ध्यान अपने मोबाइल पर hi था ... हर 2 - 3 मिनट में वो किसी को कॉल कर रही थी पर बात नहीं हो प् रही थी ... एक लड़का वेटर का ड्रेस पहने हुए उनके प्लेट में खाना सर्वे कर रहा था उसने अभी मास्क लगाया हुआ था ...

कारन : दीदी क्या हुआ आप बार बार फ़ोन क्यों देख रही हो ... कही आज मेरे होने वाले जीजू से आपकी लड़ाई वडाई तो नहीं हो गयी है ....

दिया : चुप कर जा वर्ण मैंने तेरा मुँह तोड़ देना है .... वो अपने आप को समझता क्या है जब मैंने उसको कहा था की मेरी शादी के 10 दिन पहले आना है .... आना तो दूर जनाब का फ़ोन hi स्वित्चेद ऑफ आ रहा है .... आने दो उसको उससे बात hi नहीं करुँगी .... वैसे तो बड़ी बड़ी बातें किया करता था की मुझे इतना मंटा है उतना मंटा है .... मन तो कर रहा है की ....

और दिया गुस्से से अपना फ़ोन जोर से टेबल पर रख देती है ...

लड़का : मैडम जी किसी और का गुस्सा बेचारे फ़ोन पर मत उतरिये ...

दिया (गुस्से से) : हाउ डरे यू .... तुम होते कौन हो मेरी निजी जिंदगी में टांग अदने वाले ....

लड़का : सॉरी मेमसाहब पर जहा तक मैं जनता हु आपके सिर्फ एक hi सेज भाई हैं जो की आलरेडी यहाँ बैठे हुए हैं तो ये कौन इतना खास है जिसके लिए आप इतना टेंशन ले रही हो ... उसका फ़ोन ऑफ आ रहा इसका मतलब ये भी तो हो सकता है की उसका एक्सीडेंट हो गया हो ...

इतना सुनते hi दिया किसी शेरनी की तरह उस लड़के पर टूट पड़ती है ... ले थप्पड़ दे थप्पड़ ... ले घूंसे दे घूंसे ... मरने लगती है ....

दिया : कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुयी मेरे भाई में बारे में ऐसा बोलने की ... जान है वो मेरी ... तुमने ये कैसे बोलै की मेरा एक hi भाई मेरे दो - दो भाई हैं जो मेरी आँख के टारे हैं ....

और फिर उसको उसके हाल पर छोड़ वही जमीन पर बैठ कर रोने लगती है .... तभी एक हाथ उसके आँखों की तरफ बढ़ता है और उसके आंशू साफ़ करता है ... दिया अपनी नजर उठा कर देखती है की सामने hi वेटर की ड्रेस में लड़का खड़ा होता है उसने अपना मास्क हटा दिया था ... वो और कोई नहीं तरुण hi था ...

दिया उसको देख कर और जोर जोर से रोने लगती है ...

कारन : वह क्या बॉन्डिंग है दर्द इसको हो रहा है और रो ये रही हैं ... वैसे भाई मन्ना होगा सरप्राइज के चक्कर में तेरी अछि कड़ी धुनाई हो गयी .... 😂😂😂

दिया अपने आंशू को पॉच कर तरुण को गले लगा लेती है और बरी बरी से उसके गालो तो चूमने लगती है ...

कारन : वह क्या याराना है ... वैसे दीदी अपने मुझे ाकभी इतने प्यार से नहीं चूमा है ....

दिया : तो आ न पहले इसके जैसे तेरी पिटाई लगाती हु उसके बाद तेरे गाल भी चुम लुंगी ...

कारन : न न बाबा न मैं ऐसे hi ठीक हु ...

दिया : बाबू कही चोट तो नहीं लगी न ...

कारन की माँ : क्या नौटंकीबाज लड़की है पहले बेचारे की तबियत से कुटाई करती है और पूछती है की कही लगा तो नहीं ...

कारन के पापा : भाग्यवान इन् भाई बहनो के मटर में न hi पदों तो ाचा है ... ऊपर वाला करे इन्हे किसी की नजर न लगे ....

दिया : अब ठीक हुआ या और चुम्मिया लेनी होंगी ... वैसे गलती तेरी hi है तूने खुद के बारे में ऐसी बात hi कही की मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ ....

तरुण (दिया के गालो को चुम कर ) : अरे मुझे कुछ नहीं हुआ दीदी ... फूल से भी पत्थर को चोट लगते हुए सुना है ....

दिया : चल चल तुझे माफ़ किया .... तू भी क्या याद करेगा की किस दिलदार बहन से पला पड़ा है ...

और फिर दिया तरुण को अपने साथ बिठा कर उसके मुँह में अपने हाथो से निवाला बना कर खिलने लगती है ये देख कारन का मुँह बन जाता है दिया ये देख मुस्कुरा उठी है ...

दिया : चल नौटंकीबाज इधर आ तुझे भी अपने हाथ से खिला देती हु ...

और फिर दिया बरी बरी से तरुण और कारन को खिलाती है और वो दोनों दिया को खिलते हैं ...

इनका प्यार देख कारन के पेरेंट्स की आँखों में आंशू आ जाते हैं .... सच hi है न एक लड़की जब तक कुंवारी होती है वो अपने मायके तो एक सूत्र में बांध कर रखती है और जब उसकी शादी हो जाती है तो उससे उम्मीद की जाती है की वो अपने ससुराल को भी एक इनविजिबल धागे से बंधे रखे .... दिया आज खुद जल कर अपने मायके को रौशन क्र रही थी और 10 दिनों के बाद वो चिड़िया बन कर हमेसा के लिए इस घर को छोड़ किसी और के घर को रौशन करने वाली थी ...

थोड़े देर में इनके खाने खिलने का कार्यक्रम हो जाता है तो सभी साथ में बैठ कर टीवी देखने लगते हैं ...

दिया : मम्मी क्या आज मैं अपने दोनों भाइयो को अपने रूम में सुला सकती हु ... अब तो वैसे भी 9 दिन hi बचे हैं मेरी आज़ादी को .... मैं ये बचे हुए दिन अपने भाइयो के साथ गुजरना चाहती हु ...

कारन की माँ : अरे पागल तो इसमें पूछने वाली कौन सी बात है तेरे भाई हैं तुझे जो करना हो कर .... चलो बच्चो अब सोने का टाइम हो गया है ... कल से रिश्तेदारों का आना जाना सुरु हो जायेगा तो काम भी बढ़ जायेगा .... अभी शादी की भी साडी शॉपिंग बाकि है ये महारानी hi जिदद्कीये हुए थी की मेरा तरुण आएगा तब साथ में hi शॉपिंग करेगी ....

दिया न आल : ok गुड नाईट मदर इंडिया ....

थोड़े देर बाद तरुण और कारन दिया के रूम में थे .... दिया दोनों के बीच में सो जाती है .... उसके दोनों हाथ उसके दोनों भाइयो के सर पर थे और वो उन्हें बड़े प्यार से सहला रही थी .... इतना प्यार प् कर दोनों hi तुरंत नींद की वादियों में खो जाते हैं ... और फिर वैसी hi हालत में दिया की भी आँख लग जाती है ...

अगले दिन से शॉपिंग का काम सुरु हो जाता है और धीरे धीरे रिश्तेदार भी आने सुरु हो जाते हैं ....

शादी का सारा काम ठीक थक hi चल रहा था की तभी इनके घर में एक शक्श की एंट्री होती है जो इनके हस्ते खेलते परिवार पर शायद ग्रहण लगाने के इरादे से आया था ....

कारन की एक hi बुआ थी जो बड़े प्यार से दिया से मिल रही थी ....

बुआ : दिया बीटा इससे मिलो ये है तुम्हारे फूफा के बड़े भैया का इकलौता बीटा मयूर .... बचपन में तुम जब हमारे यहाँ जाती थी तो इसके साथ hi खेला करती थी ... इसको जब पता चला की तुम्हारी शादी hi रही है तो ये शादी में हाथ बांटने आ गया ....

दिया : बुआ जी मुझे तो याद नहीं पर कोई नहीं .... Hello मयूर जी ... आपका हमारे घर में स्वागत है ....

पर मयूर वह था hi कहा वो तो बस दिया को घर घर कर देखे जा रहा था ... दिया की बुआ hi उसको हिला कर होश में लती है .... वो दिया के बढे हुए हाथ को अपने हाथ में थम लेता है ....

दिया : मयूर जी अगर आपका मिलना हो गया हो तो मेरा हाथ छोड़े मुझे काम है ....

और फिर दिया मयूर से अपना हाथ छुड़ा कर वह से चली जाती है ....

कारन की बुआ को यु हमेसा तरुण का दिया के साथ रहना राश नहीं आता है वो जब भी मौका मिलता तो तरुण को खरी खोटी सुनाने से बाज़ नहीं आती थी ....

क. बुआ : भाभी ये मुआ लड़का कौन है जो हमेसा दिया बिटिया के आस पास मधुमक्खी की तरह मंडराता रहता है ...

क. माँ : दीदी ये तो तरुण है कारन का दोस्त छुम भाई .... दिया तरुण को भी अपने सेज भाई जितना hi मानती है ....

क. बुआ : क्या भाभी आप भी आपको मन करना चाहिए न ... है तो आखिर गैर hi न .... कही कोई ऊंच नीच हो गयी तो हम समाज में क्या मुँह दिखाएंगे ... रुको मैं इस लड़के का कुछ बंदोबस्त करवाती हु ....

कारन की माँ अपनी ननद की बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देती और वह से चली जाती है ....

क. बुआ : मयूर बिटवा अरे ो मयूर बिटवा ... कहा है मुआ ....

मयूर : जी चची जी क्या बात है ...

क. बुआ : बिटवा वो जो लड़का दुःख रहा है न उससे हमारी दिया बिटिया को खतरा हो सकता है .... हम नहीं चाहते की शादी के घर में कोई ऊंच नीच हो जाये तो हम तुमका एक ड्यूटी दिए देते हैं .... तुम उस लवंडे को दिया बिटिया के आस पास मंडराने मत देना ....

मयूर को तो मनो उसके मन की मुराद मिल गयी थी .... वो तो वैसे भी हमेसा दिया के आस पास रहने की कोसिस किया करता था और एहि नहीं हमेसा वो किसी न किसी बहाने से दिया को छूने की कोसिस जरूर किया करता था .... दिया को तो ये सब नार्मल लगता है क्यूंकि उसका आज तक ऐसे किसी शक्श से पला नहीं पड़ा था ...

मयूर : जी चची जी किसकी मजाल है जो मेरी दिया के साथ ऐसा वैसा करेगा .... उसके हाथ तोड़ कर उसके मुँह में दाल दूंगा ...

क. बुआ : शाबाश बिटवा ये हुयी न मर्दो वाली बात ....

मयूर वह से तरुण के पास जाता है और उसको घर घर कर देखने लगता है .... तरुण अभी किसी काम में लगा हुआ था तो उसको अपने आस पास से कोई खास मतलब नहीं था ....

रात में सरे रिश्तेदारों को खिलने के बाद diya,Karan,bua और कारन के पेरेंट्स खाने की टेबल पर बैठे थे दिया ने हमेसा की तरह अपने बगल वाला सीट तरुण के लिए राखी हुयी थी .... वो इधर उधर तरुण को देख hi रही थी उसके बगल वाले सीट पर मयूर अस कर बैठ जाता है ...

ठीक तभी तरुण वह आता हुआ दीखता है .... दिया मयूर को अपने बगल में बैठा देख कुछ बोलने को होती है की तरुण उसको इशारो से मन कर देता है ...

अगले दिन मेहँदी और संगीत का कार्यक्रम होने वाला था तो सभी लोग जल्दी hi अपने अपने रूम्स में सोने चले जाते हैं ...

अब तरुण कारन के रूम में उसके साथ रहता था जबकि दिया के रूम में उसके साथ उसके मां की बेटी रहती थी ....

अगला दिन अस उसुअल काफी बिजी था तरुण और कारन सुबह से hi काम पर लगे हुए थे ... आज मेहँदी और संगीत था तो सुबह से hi ब्यूटी पार्लर की लड़किया सबके हाथो में मेहँदी लगाए जा रही थी ....

मयूर भी दूर से दिया को मेहँदी लगवाते हुए देख रहा था उसको दिया की हर एक अदा काफी अछि लग रही थी ....

दिया चारो तरफ से लड़कियों से घिरी हुयी किसी राजकुमारी से काम नहीं लग रही थी .... उसकी मेहँदी भी उसके हाथो में काफी हसीं लग रही थी ....

इवनिंग होते hi संगीत का कार्यक्रम सुरु होता है .... अब तक सभी के हाथो की मेहँदी सुख चुकी थी इसलिए सभी लड़किया या औरते खुल कर डांस में पार्टिसिपेट करने वाली थी ....

पहले सभी रिश्तेदार या दिया की सहेलियों में डांस किया .... कारन के मम्मी पापा का भी एक कपल डांस था जिसके बाद खूब तालिया बजायी गयी ....

फिर तरुण और कारन का एक एक सोलो डांस हुआ जिसके जवाब में दिया ने भी अपने जगह से खड़े होकर अपनी ख़ुशी जताई क्यूंकि वो ताली नहीं बजा सकती थी मेहँदी जो लगी हुयी थी ...

आखिरी में स्टेज पर एक चेयर पर दिया बैठी हुयी दिखती है और "तारो का चमकता गहना हो ..... " वाला सांग प्ले होता है जिसमे तरुण और कारन के साथ साथ मयूर भी अपने मन से स्टेज पर आ जाता है ..... डांस करते हुए hi एक बार तरुण दिया को गले लगाने को होता है की मयूर उसको जोर से धक्का दे देता है जिससे तरुण लड़खड़ाता हुआ स्टेज से नीचे फिर जाता है ...

ये देख दिया का तो खून खौल उठता है और वो बिना अपने मेहँदी की परवाह किये मयूर के गालो पर एक करारा थप्पड़ जड़ देती है ....

दिया का थप्पड़ खा कर मयूर बौखला जाता है ... और वो दिया को भी जवाबी थप्पड़ लगाने को hi होता है पर उसके थप्पड़ को कारन हवा में hi ब्लॉक कर देता है ...

तरुण को खुद के लिए तो उतना बुरा नहीं लगता पर जब वो मयूर को दिया को थप्पड़ लगाने की कोसिस करते देखता है तो उसका खून खौल उठता है और वो उछाल कर स्टेज पर आता है पर तब तक कारन ने दिया मयूर के थप्पड़ को ब्लॉक कर लिया था .... तरुण न आव देखता है न टो वो मयूर के ऊपर जम्प मार देता है उसके बाद ले मुक्का दे मुक्का मयूर के थोबड़े को खून से रंग देता है ....

तरुण : हरामी की औलाद सेल तूने मेरी बहन को मरने की कोसिस कैसे की बे .... आज तो मैं तेरी जान hi के लूंगा ... Mad******d be********d ..... तरुण को इतने गुस्से में आज तक कारन ने भी नहीं देखा था ... तरुण का ये रौद्र रूप देख उसकी भी सिटी पित्ती गम हो जाती है ...

अब दिया hi आ कर तरुण के पीठ पर झूल जाती ...

दिया (रट हुए) : छोड़ दे उसको मेरे राजा भाई .... देख मैं तेरे सामने कड़ी हु ... मुझे कुछ नहीं हुआ बाबू मुझे कुछ नहीं हुआ ... छोड़ दो उसको वर्ण वो मर जायेगा ....

दिया की बात सुन तरुण मयूर को छोड़ कर खड़ा हो जाता है और दिया को अपने गले से लगा कर फिट फुट कर रोने लगता है ...

ठीक तभी कारन की बुआ वह स्टेज पर आयी है और दोनों को अलग करके तरुण को जोर से एक चांटा लगा देती है अभी वो दूसरा थप्पड़ लगा पति की वह पर कारन के पापा आ जाते हैं ....

क. पापा : निकल जा मेरे घर से इससे पहले की मैं अपना खो दू .... निकल जा मेरे घर से अपने इस हरामी सुवर के पिल्लै को साथ लेकर ... एहि सब करने आयी थी तू यहाँ डायन ....

और फिर कारन के पापा अपने आदमियों को बोल कर अपनी बहन को उसके सामान और टूटे फूटे भतीजे के साथ बहार फिंकवा देते हैं ....

अब तो वैसे भी इस फंक्शन में जो ग्रैहम लगा हुआ था वो धीरे धीरे साफ़ होने लगता है ... सभी लोग इस बात को भूल कर खाना वगैरह पर टूट पड़ते हैं .... घर की सभी लड़किया और महिलाये तरुण के हीरोइक अवतार से काफी इम्प्रेस्सेड हुए थे ... आज सभी महिलाओं के हाथ में मेहँदी थिस इसलिए उनके हस्बैंड में उन्हें खाना खिलाया ... तरुण और कारन ने भी दिया को अपने हाथो से खिलने का ये मौका हाथ से नहीं जाने दिया ...

खाने के बाद तरुण Karan,diya और उसकी ममेरी बहन दिया के रूम में बैठी हुयी थी ...

कारन : भाई आज तो तूने मुझे डरा hi दिया था मुझे तो लगा की डरा सिंह की आत्मा तुझमे समां गयी हो ...

तरुण : क्या यार तुम भी न कैसी बात करते हो मैं अपनी आँखों के सामने अपनी बहन पर कैसे आंच आने दे सकता था ... वैसे भी उस लड़के को मैंने लास्ट कुछ दिनों से नोटिस किया था उसके इरादे मुहे कुछ ठीक नहीं लग रहे थे ...

कारन की ममेरी बहन : हाँ तरुण जी वो हमेसा दीदी या घर की साडी लड़कियों को घर घर कर देखता रहता था ... ऐसे लोग बहुत hi ख़राब होते हैं ..

कारन : अरे तो गुड़िया तूने हमें पहले क्यूँनही बताया था उसको पहले hi निकलवा फेंकता ... मुझे अपनी एकलौती बहन की शादी में कोई लफड़ा नहीं चाहिए ...

दिया : ओहो that's माय स्वीटू भाई .... चलो अब आप लोग अपने रूम में जाओगे या सबने अपनी दीदी के साथ hi सोना है ....

कारन : मैंने तो आज एहि सोना है ... तरुण तेरा क्या इरादा है और गुड़िया तुम जाकर मेरे रूम में सो जाओ ....

तरुण : मैं भी दीदी के साथ कुछ क्वालिटी टाइम स्पेंड करना चाहता हु ...

गुड़िया : मुझे भी यही सोना है ... हमेसा से मेरी भी ख्वाहिस थी मेरा भी कोई भाई हो जो मेरे लिए जालिम दुनिया से ढिशुम ढिशुम करे ...

कारन : अरे पहली मैं भी तो तेरा भाई hi हु न .... चलो अब सबने एहि सोना है तो बीएड पर तो पॉसिबल नहीं है क्यों न नीचे hi चादर बिछा कर सो लेते हैं ...

उसके बाद वो सब बातें करते हुए सो जाते हैं ....
 
अपडेट 12

कारन : अरे पहली मैं भी तो तेरा भाई hi हु न .... चलो अब सबने एहि सोना है तो बीएड पर तो पॉसिबल नहीं है क्यों न नीचे hi चादर बिछा कर सो लेते हैं ...




उसके बाद वो सब बातें करते हुए सो जाते हैं ....

आगे

अब आखिर वो दिन आ hi पहुंचा था जिसका हर लड़के और लड़की को इंतजार होता है .... दिया के केस में भी ऐसा था उसने भी इस दिन के लिए बहुत सरे सपने सजाये हुए थे .... जहाँ वो खुस थी वही उसको दुःख भी था की उसको कल अपने उस घर को छोड़ कर जाना होगा जिसमे उसकी ढेरो साडी यादें बसी हैं ... उसके हर छोटी मोती ख़ुशी का ख्याल रखने वाले पेरेंट्स ... उसके ऊपर जान लुटाने वाले भाई थे .... सब कुछ छोड़ कर उसको एक ऐसे घर को जाना था जिसके बारे में वो कुछ भी नहीं जानती ... ऐसा नहीं है की वो लड़के के बारे में कुछ नहीं जानती थी कभी कभी उससे बात भी किया करती थी ....

शादी वाले दिन सुबह से hi सभी लोग इधर उधर के कामो में बिजी थे ...

तरुण भी अभी घर का डेकोरेशन वाला काम देख रहा था .... शादी घर से hi होने वाली थी ... तभी तरुण का मोबाइल रिंग होने लगता है .... कॉल किसी अननोन नंबर से था ....

तरुण ने कॉल पिक किया तो अपोजिट साइड से कोई आवाज़ तो नहीं आयी पर ध्यान से सुनने पर उसको किसी की सिसकिया सुनाई देती है .... तरुण का दिल घबरा सा जाता है .... उसका नंबर तो Shreya,bua,Karan,diya और उसके मंझले चाचा के अलावा और किसी के पास न था .... तरुण ने उस नंबर को त्रुइकॉलेर पर डाला तो पता चला की ये नंबर उसकी बड़ी बहन रुचिका के नाम से रजिस्टर्ड था ....

तरुण ने तुरंत कॉल बैक किया .... थोड़े देर बाद कॉल रिसीव हुआ ....

तरुण : hello रूचि दीदी ... कैसी हो ...

अपोजिट साइड से कोई आवाज़ तो नहीं आती बस सिसकिया सुनाई देती है ... तरुण को किसी अनहोनी की आशंका होती है ...

तरुण : दीदी बोलो न ... आपको मेरी कसम क्या हुआ बोलो न ...

...... : काश मैं रुचिका होती ... मैं भी तुम्हारी बहन हु पर आज तक मैंने तुम्हारी बहन होने का कोई फ़र्ज़ नहीं निभाया तो किस मुँह से तुम्हारी बहन होने का हक़ जाता स्लाक्ति हु ... मैं प्रियांशी हु .... तुम चाहो तो मुझे प्रियांशी hi कह सकते हो ...

तरुण : जी मैं आपको नहीं जनता न hi इस नाम के किसी इंसान को जनता हु तो आइंदा मुझे परेशां करने की कोसिस मत करना ....

प्रियांशी (रट हुए) : तुम्हे जैसा ठीक लगे वैसा बोलो मैं तो हु hi कसूरवार .... दरअसल मैंने कल रात को तुम्हारे बारे में एक बुरा सपना देखा था इसलिए मैं चाहती हु की तुम संभल कर रहना ...

तरुण : आप होती कौन हो मेरी चिंता करने वाली .... मैं जियु या मरू इससे आपको क्या मतलब है ... मैं तो तब hi मर गया था जब आप लोगो ने मुझे मेरी माँ ने hi अपनाने से इंकार कर दिया था ... जब माँ hi नहीं तो बाकि और किसी से क्या रिश्ता नाता ... मैं दुनिया का वो बदनसीब शक्श हु जिसकी माँ - बाप तो है पर मैं उनका बीटा नहीं ... कहने को 3 - 3 सगी बहने तो हैं पर मैं उनका भाई नहीं ... जब मेरे सेज hi अपने नहीं तो दुसरो से क्या उम्मीद राखु ... ऊपर वाले से दुआ करो की आपका सपना सच हो जाये .... काम से काम इससे आप लोगो को इस मनहूस से तो छुटकारा मिल जायेगा ...

और फिर इतना कहने के बाद तरुण ने फ़ोन कट कर दिया और कारन के रूम पर चला जाता है और कुछ कपडे लेकर वाशरूम में एंटर हो जाता है ... शावर के नीचे खड़ा होकर जोर जोर से रोने लगता है .... बहुत दिनों से उसने अपना जो दर्द दबा रखा था वो आज उसने फ़ोन पर निकल दिया था ... काफी देर रोने के बाद जब उसका मन हल्का हो जाता है तो वो वापस चेंज करके रूम में आ जाता है .... ठीक तभी उसको ढूंढ़ते हुए कारन की ममेरी बहन वह आ जाती है ...

क. बहन : तरुण भैया आप यहाँ ... मैं तो कब से आपको पुरे घर में ढूंढ़ती फिर रही हु ...

तरुण : हाँ छोटी कोई काम था क्या ...

क. बहन : वो भैया दिया दीदी ने आपको अपने रूम में बुलवाया है ...

तरुण : ठीक है छोटी तुम जाओ मैं अभी आता हु ...

थोड़े देर बाद तरुण दिया के रूम पर जाता है ... दिया के बीएड पर ढेर साडी सरिस राखी हुयी थी और दिया और कुछ लड़किया वही बैठी हुयी उन्हें देख रही थी ... तरुण को आता देख बाकि लड़किया रूम से चली जाती हैं ...

दिया : देख तो भाई कौन सी साड़ी अछि है ....

तरुण कुछ देर तक सभी साड़ी को देखता है तो उसको कुछ समझ नहीं आता ...

तरुण : जो भी आपको अछि लगे पहन लो न दीदी ... साडी hi सरिया अछि है ...

दिया : ये क्या बात हुयी ... अपनी बहन के लिए एक साड़ी पसंद नहीं कर सकते क्या ...

तरुण ने सभी सरिस को अचे से देखा और एक साड़ी चूसे की ...

दिया : वाओ ... यार तुम्हारी और मेरी सोच कितनी मिलती जुलती है ... मुझे भी एहि साड़ी पसंद है ... और ये तेरी आँखें लाल क्यों है ...

तरुण (बहाना बनाते हुए) : अरे वो क्या है न दीदी अब कल को आप हमें छोड़ कर हमेसा के लिए दूसरे घर चली जाओगी इसलिए मेरी आँखों में आंशू आ गए थे ...

दिया : ोोू ... मेरा कुटी पाई ... तुम भी पागल हो क्या बेतिया तो परायी अमानत होती है एक न एक दिन तो उन्हें घर छोड़ कर तो जाना hi होता है ... और किसने कहा की मैं तुम लोगो से इतनी दूर चली जाउंगी की मिलने भी न आ सकू ... चल इधर आ अपनी दीदी की बांहो में ...

दिया तरुण को अपने सीने से लगा लेती है ...

तालियों की आवाज़ से दोनों अलग होते हैं ... ये ताली बजने वाला और कोई नहीं कारन था ...

कारन : वह जी वह क्या इमोशनल सन है ... इसके ऊपर तो एक फिल्म बन जनि चाहिए ... अभी से hi अपने सरे इमोशंस वास्ते न करो कल को काम आएंगे ...

क. बहन : क्या कारन भैया आप हमेसा विलन बन कर आ जाते हो ... कितना ाचा भाई बहन का प्यार चल रहा था ...

तभी वह कारन की माँ की एंट्री होती है ...

क. माँ : चलो बच्चो अब तुम लोग बहार जाओ मेरी गुड़िया रानी को दुल्हन बनाने के लिए पारलर से लड़किया आ गयी है ...

सभी लोग बहार जा कर अपने अपने कामो में लग जाते हैं ...

इवनिंग को आतिशबाजियो के साथ बारात का आगमन होता है ... चूँकि ये घर की पहली शादी थिस इसलिए कारन के पापा ने शादी में कोई कमी नहीं छोड़ी थी ....

जब जयमाला के लिए दुल्हन को बुलाने की बरी आयी तो तरुण और कारन एक साथ दिया के रूम आते हैं ...

कारन दिया को पकड़कर खड़ा करता है ... जब दिया कड़ी हो जाती है तो तरुण उसको आगे घुटनो के बल बैठ जाता है और एक छोटा सा व्रैप किया हुआ गिफ्ट उसके आगे कर देता है ...

दिया : अरे भाई अब ये सब क्या है ...

तरुण : एक भाई की तरफ से अपनी बहन के लिए प्यार ... मैं चाहता हु की मेरी खातिर आप ये पहन कर जाओ ...

दिया जल्दी से गिफ्ट को खोलती है तो ये एक गोल्ड का खूबसूरत सा नेकलेस होता है ...

दिया : पागल अब इसकी क्या जरुरत है मेरे लिए तो तुम्हारा प्यार hi सब कुछ है ...

कारन : पहन लो न दीदी इतने प्यार से वो आपके लिए ये सब लाया है ...

दिया : अरे तो मैं पहनने से मन कहा कर रही हु ... लो तरुण अपने हाथो से अपनी दीदी की तयारी को पूरा कर दो ...

तरुण खड़ा हो कर दिया के गले में वो नेकलेस पहना देता है ...

दिया : अब कैसी लग रही हु मैं भाई ...

कारन : आज तो जीजू के साथ साथ सरे बारात वाले बेहोश होने वाले हैं ...

तरुण : दीदी आप दुनिया की सबसे खूबसूरत दुल्हन लग रही हो ... ऊपरवाला आपको दुनिया की हर बुरी नजर से भचये ...

दिया : उम्मंहहहआ थैंक यू तो बोथ ऑफ़ यू माय स्वीटू ...

दोनों दिया को साथ लेकर जयमाला के स्टेज पर पहुंचा देते हैं .... सरे बाराती दिया के होने वाले हस्बैंड की किस्मत से जलने लगते हैं ...

उसके बाद धीरे धीरे शादी की साडी रश्मि होने सुरु हो जाते हैं ...

दिया की मांग में सिंदूर लगा कर उस लड़के ने हमेसा हमेसा के लिए उसको अपनी दुल्हन बना लिया था ...

दोपहर को आख़िरकार वो घडी आ पहुंची थी जो हर माँ बाप के लिए सबसे मुश्किल पल होता है ... बेटी की विदाई ...

बाबुल की दुआएं लेती जा ..... के इमोशनल गाने ने समां को और भी इमोशनल कर दिया था ....

दिया सबसे पहले अपनी माँ के गले लग कर रोने लगती है .... काफी देर तक दोनों माँ बेटी एक दूसरे से लिपट कर रोटी रही ... उसके बाद दिया अपने पापा से जो लिपट के रोई ... जिसे देख कर वह खड़े हर शक्श की आँखों में आंशू आ गए ....

पापा से अलग होने के बाद वो घर के बाकि मेंबर्स से भी लिपट कर रोटी रही .... उसके बाद कारन खड़ा था जिसकी आँखों से पहले से hi गंगा जमुना बेब जा रही थी ... आज एक बहन अपने सबसे प्यारे खिलौने को छोड़ कर दूसरे घर जो जा रही थी ....

सबसे आखिरी में तरुण खड़ा था जो अब तक अपने आंशू को रोक कर वह खड़े था .... दिया जैसे hi तरुण के गले लगी तो उसके साबरा का बांध टूट कर आँखों के रस्ते बहार आने लगा ... वो दिया को खुद में समेटे जोर जोर से रोये जा रहा था ... इतना तो वो शायद तब भी न रोया होगा जब उसके घर वालो ने उसको घडी ग़ाफ़ि अपमानित किया था ...

दूल्हा तो पहले hi गाडी में बैठ चूका था ... तरुण भी दिया को साथ लेकर गाडी के पास ले जाने लगता है की तभी अचानक से तरुण ने कुछ देख कर दिया को कवर कर लिया ....

तरुण का वाइट कपडा धीरे धीरे लाल होने लगता है और चाँद लम्हो में hi उसकी आँखों के सामने अँधेरा सा छ जाता है और वो बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ता है .... उसकी सांसें भी बहुत धीमी हो चुकी थी ....

क्या ये वही अनहोनी थी जिसका सपना प्रियांशी ने देखा था ????? क्या ये तरुण ज़िन्दगी के सफर का थे एन्ड है ???????? 😢😢😢
 
अपडेट 13



तरुण का वाइट कपडा धीरे धीरे लाल होने लगता है और चाँद लम्हो में hi उसकी आँखों के सामने अँधेरा सा छ जाता है और वो बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ता है .... उसकी सांसें भी बहुत धीमी हो चुकी थी ....

आगे

1 दिन बाद

एक हॉस्पिटल में एक लड़का पेट के बल लेता हुआ था और उसके पास एक लड़की शादी के जोड़े में उसके हाथो को अपने हाथो में लिए बैठी थी ... उसके आँखें लाल हो गयी थी और चेहरे पर आंशू के सूखने के नीसाण बने हुए थे जो ये चीख चीख कर बता कर रहे थे की वो कितना रोई थी ....

तभी वह एक लेडी डॉक्टर आती है ...

डॉक्टर : मैडम आप यहाँ क्यों हैं मैंने आपको मन किया था न यहाँ आने से ...

लड़की : बताइये न मैडम इसको होश कब आएगा ...

डॉक्टर : देखिये मैं कोई भगवन तो हु नहीं की आपको बता सकू की इन्हे होश आएगा भी या नहीं ..... मैंने कहा था न की काफी क्रिटिकल सिचुएशन है .... गोली इनके दिल से कुछ दुरी पर हड्डियों की वजह से रुक गयी थी वर्ण इन्हे बचाना नामुमकिन हो जाता ... जब तक इन्हे होश नहीं आता कुछ भी कहना पॉसिबल नहीं है .... वैसे आप पेशेंट की क्या लगती हैं ....

लड़की : जी ये मेरा छोटा भाई है ... मुझे बचने के लिए इसने अपनी जान खतरे में दाल ली ...

डॉक्टर : देखिये मैं आपको बस इतनी सलाह दे सकती हु की पेशेंट से अभी दूर hi रहे ... जैसे hi इन्हे होश आता है मैं आपको इन्फॉर्म कर दूंगी .... फ़िलहाल आप बहार जाइये ...

लड़की : मैडम ये ठीक तो हो जायेगा न ...

डॉक्टर : इन्हे आज शाम या रात तक होश आ जायेगा ... उस वक्त अगर सब कुछ सही रहा तो ठीक है वर्ण पेशेंट कॉमा में भी जा सकता है ... हमारे doctor's में हाथ में तो जितना था उन्होंने कर दिया अब सिर्फ उपरवाले का hi सहारा है ...

वो लड़की कुछ देर और पेशेंट को देख कर रूम से बहार चली जाती है ....

वो लड़की और कोई नहीं दिया थी और बीएड पर लेता पेशेंट तरुण था .... और जो डॉक्टर थिस उसका नाम श्रुति था जो की 40 साल की थी ....

कल जब दिया को साथ लेकर तरुण उसको विदा करने के लिए गाडी में बिठाने जा रहा था तो उसको एक मास्क लगाए हुए आदमी की हाथ में बन्दुक दिख जाती है जिससे उसने दिया की तरफ गोली भी फायर कर दिया था .... गोली काफी नजदीक आ गयी थी तो उसने दिया को बचने के लिए खुद को गोली के सामने कर दिया ...

एक hi नहीं दो गोलिया उसकी पीठ पर लगी थिस जिससे वो वही गिर कर बेहोश हो गया था .... बेहोश होने से पहले उसकी आँखों के सामने बस उसकी बहन ऋचा का hi चेहरा था .....

वो मास्क वाला आदमी भाग नहीं पता है और उसकी जबरदस्त पिटाई की जाती है और फ़िलहाल वो पुलिस की हिरासत में है ....

कारन और उसके पेरेंट्स जल्दी से उसको दूल्हे वाले गाडी में hi बिठा कर हॉस्पिटल लिए जाते हैं ... दिया भी साथ hi थी ....

कारन के पेरेंट्स और दूल्हे के घरवालों ने दिया को उसके ससुराल भेजने की भरसक कोसिस की पर दिया ने किसी की न मणि और वो तरुण को ऐसे हाल में में छोड़ने को हरगिज़ तैयार न हुयी .... कहने को तो इन दोनों का आपस में कोई खून का रिश्ता न था पर एक दूसरे के लिए इनके दिल में बेशुमार प्यार जरूर था .... जो इंसान खुद की जान तक आपके लिए कुर्बान करने को तैयार हो उससे बढ़ कर आपके लिए अपना और कौन हो सकता है ....

ये hi नहीं दिया तरुण को छोड़ घर भी नहीं गयी थी ... उसका मन्ना था की वो अब घर या ससुराल तब hi जाएगी जब वो तरुण को सही सलामत न देख ले ....

दिया जब रूम से बहार आती है तो कारन उसको वही रूम के बहार खड़ा मिलता है ....

कारन : दीदी अब तो मेरी बात मान लो और घर चली जाओ ... मैं हु न उसकी देखभाल के लिए ...

दिया : नहीं डॉक्टर ने कहा है की उसको इवनिंग तक होश आ जायेगा ... उसके बाद मैं घर चली जाउंगी ... वैसे तुमने उसके घर फ़ोन किया क्या ....

कारन : दीदी उसके घर में किसी का नंबर मुझे पता नहीं है .... काश उसको ठीक थक से गोष आ जाये ....

दिया : पता लगा की किसने हमपे हमला करवाया था ....

कारन : और कौन हो सकता है आपकी वही नकचढ़ी बुआ के जेठ ने ... जिसके बेटे की संगीत वाले दिन पिटाई हुयी थी ... उन्होंने अपना जुर्म काबुल कर लिया है और फ़िलहाल वो पुलिस की हिरासत में है ... आप चिंता न करो दीदी मैं सबका चुन चुन कर बदला लूंगा .... उन्होंने आपकी जान लेने की कोइस की आपको बचने के चक्कर में मेरा भाई जैसा दोस्त इस हालत मैं है जब तक मैं उस गन्दी नाली के कीड़े को हाथ पाओ न तुड़वा दू मुझे चैन नहीं आएगा ....

दिया : हाँ भाई उन्हें माफ़ी मिलनी भी नहीं चाहिए ....

कारन : दीदी मैं आपके लिए खाना लाया हु आप ये खा लो .... कल से hi अपने कुछ खाया नहीं है .... ऐसे तो आप कमजोर हो जाओगी ... अगर आप hi कमजोर हो जाओगी तो आप तरुण की देखभाल कैसे करोगी ...

दिया : नहीं नहीं मुझे कमजोर नहीं होना है ... उसने अपने भाई होने का फ़र्ज़ नुभय है ... अब मेरी बरी है ...

और फिर दिया जल्दी जल्दी कारन का लाया हुआ खाना खाने लगती है जिसे देख कारन की आंखें भी नाम हो गयी थी .... कहने को तो वो दिया का सागा भाई था पर जितना प्यार उसने दिया और तरुण के बीच देखा था वो उसके मुकाबले कही ज्यादा था ...

इवनिंग को कारन और उसकी पूरी फॅमिली हॉस्पिटल में hi मौजूद थी .... वो लोग तरुण के होश में आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे ....

तब तक थोड़ा तरुण के घर का भी रुख कर लेते हैं ....

उधर जब से तरुण ने प्रियांशी को खरी खोटी सुनाई थी तब से वो लगातार रोई जा रही थी ... रुचिका ने उसका ये हाल देखा तो उसने इसका कारन पूछा तो जवाब में उसने रट रट साडी कहानी बता डाली ....

प्रियांशी के सपने का सुन तो रुचिका भी घबरा गयी पर प्रियांशी को सँभालने के लिए उसने बताया ये सिर्फ उसका बुरा कजवाब था और कुछ नहीं ... रुचिका में काफी समझने से प्रियांशी तो मान गयी पर रुचिका खुद टेंशन में आ जाती है क्यूंकि अब तरुण का मोबाइल स्वित्चेद ऑफ बता रहा था ....

रुचिका ने श्रेया से भी बात की पर रिजल्ट वही आ रहा था .... श्रेया ने रुचिका को ये कह कर मानाने की कोसिस की की शादी के घर में हो सकता है वो बिजी होने की वजह से फ़ोन पिक न कर प् रहा हो ....

इधर इवनिंग को एक नर्स भगति हुयी डॉक्टर श्रुति के केबिन में जाती है फिर जल्दी से वो लोग तरुण के पास पहुँचते हैं .... वो लोग तरुण को ठोस देर चेक करते हैं उसके बाद डॉक्टर बहार चले जाते हैं ....

नर्स : आपमें से इनके गार्डियन कौन हैं ... डॉक्टर साहब ने आपको केबिन में बुलाया है ...

दिया और उसके पापा डॉक्टर के केबिन में पहुँचते हैं ....

दिया : गुड इवनिंग डॉक्टर ma'am ... अब कैसी तबियत है मेरे भाई की ....

श्रुति : जी उन्हें होश तो आ गया है पर उनका मंद पूरी तरह से रेस्पोंद नहीं कर रहा है .... हो सकता है वो पहले किसी मेन्टल प्रॉब्लम से गुजर रहे हो या ये ज्यादा खून बाह जाने की वजह से ऐसा हुआ हो कह नहीं सकती .....

दिया : ma'am उसकी कंडीशन कैसी है ... क्या हम उसको घर ले जा सकते हैं ...

श्रुति : जैसा आप ठीक समझे पर कल सुबह को hi इन्हे डिस्चार्ज करवाए तो ाचा है .... टाइम तो टाइम चेक उप के लिए हमारे हॉस्पिटल से नर्स जाती रहेंगी जब तक वो पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते ... और एक बात आपको उनके साथ प्यार से पेश आना है जब तक की उनका सरीर पूरी तरह से रिकवर नहीं हो जाता ...

दिया : जी डॉक्टर ... आप चिंता न करे हम उसका पूरा ख्याल रखेंगे ...

श्रुति : जख्म भरने में एक वीक तक का समय लग सकता है .... हो सकता है पेशेंट कभी कभी बच्चो के जैसा बेहवे करे तो आपको घबराना नहीं है .... उन्हें पूरी तरह से मेंटली ठीक होने में महीनो लग सकते हैं पर अगर उनका अचे से ख्याल रखा गया तो वो जल्द भी रिकवर सकते हैं .... यहाँ से हमारा काम ख़तम हो जाता है और आपका काम सुरु हो जाता है ... बस आपको उन्हें इमोशनली सपोर्ट करना होगा और आपको ये ख्याल रखना होगा की उन्हें कोई मेन्टल स्ट्रेस या आघात न मिले वर्ण ये रिकवरी टाइम बढ़ भी सकता है ....

दिया के पापा : ठीक है डॉक्टर हम कल hi उसको डिस्चार्ज करवाएंगे ...

उसके बाद कारन के पापा अपनी बेटी के साथ केबिन के बहार आ जाते हैं ...

दिया बिना समय गंवाए तरुण के रूम जाती है .... तरुण बीएड पर लेता हुआ नार्मल सा दिख रहा था .... उसने सभी को सही से पहचान लिया ....

नर्स ने कुछ देर बाद सभी को रूम से बहार निकल दिया ....

कारन की माँ : बीटा अब तो सब कुछ ठीक है मैं आज hi तुम्हारे ससुराल में कॉल करके तुम्हे ससुराल भिजवा देती हु ....

दिया : जी नहीं माँ उसकी ये हालत मेरी वजह से hi है ... जब तक वो पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता मैं कही नै जाने वाली ....

कारन के पापा : बीटा एक्य बात हुयी हम यहाँ हैं न उसकी देख भल के लिए ...

दिया : पापा अपने साई से सुना नहीं क्या डॉक्टर ने कहा है की उसकी मेन्टल कंडीशन अभी सही नहीं है और उसको मेन्टल सपोर्ट की जरुरत है ....

क. माँ : तो हमे उसके परिवार वालो को फ़ोन करके उसको उन्हें सौंप देना चाहिए ...

दिया : माँ जहा तक मैं जानती हु उसके घर वाले हमेसा उसका तिरस्कार किया करते हैं ... ऐसी हालत में उसकी कंडीशन ठीक होने के बजाए और भी बिगड़ सकती है ....

क. पापा : पर बीटा अब तुम्हारी शादी हो चुकी है तुम अब हमारी नहीं अपने ससुराल वालो की अमानत हो ....

दिया : मैं वो सब नहीं जानती ... मुझे उसको पहले ठीक करना है उसके बाद hi मैं ससुराल जाउंगी ... आप चिंता न करो मैं वह बात कर लुंगी ...

इसके बाद और कोई बात नहीं होती ... अगली सुबह को तरुण को डिस्चार्ज करवा कर घर ले जाया जाता है ... कारन उसको अपने रूम में शिफ्ट करवाना चाहता था पर दिया ने जबरदस्ती तरुण को अपने रूम में रखवा दिया ताकि वो उसका सही से ख्याल रख सके ...

दिया ने अपने पति को फ़ोन करके अपनी साडी मज़बूरी बता दी थी .... उसका पति भी एक नेक दिल इंसान था उसने भी दिया को मंजूरी दे दी ....

अभी तरुण के सर में एक बैंडेज और पीठ पर कुछ स्टिचेस लगे हुए थे ....

कारन ने घर के नौकरो की हेल्प से तरुण को दिया के रूम में शिफ्ट करवा दिया ... दिया के रूम में डबल साइज बीएड लगा हुआ था ...

दिया : कैसा लग रहा है भाई ...

तरुण : ठीक हु दीदी बस कभी कभी थोड़ा अजीब सी बेचैनी सी लगी रहती है ... मेरा मोबाइल कहा है ....

दिया : अरे हाँ मैं तो भूल hi गयी थी वो मैंने तुम्हारा मोबाइल तुम्हारे बैग में रख दिया था .... रुको मैं उसको चार्ज में लगा के आती हु ....

दिया तरुण के बैग को अपने रूम में ले आती है और तरुण के मोबाइल को चार्जिंग पर लगा देती है ....



ऐसे hi धीरे धीरे 3 - 4 दिन बीत जाते हैं .... दिया तरुण का बड़े अचे से ख्याल रख रही थी .... उसने तरुण को उसके घर hi फ़ोन करने नहीं दिया था क्यूंकि वो नहीं चाहती थी की तरुण को रिकवर होने में ज्यादा समय लगे ....
 
अपडेट 14

ऐसे hi धीरे धीरे 3 - 4 दिन बीत जाते हैं .... दिया तरुण का बड़े अचे से ख्याल रख रही थी .... उसने तरुण को उसके घर hi फ़ोन करने नहीं दिया था क्यूंकि वो नहीं चाहती थी की तरुण को रिकवर होने में ज्यादा समय लगे ....

आगे

ऐसे hi एक रात को दिया सो रही थी की किसी के फुसफुसाहट से उसकी नींद खुल जाती है ये और कोई नहीं तरुण hi था जो की आँखें बंद किये हुए बड़बड़ा रहा था ....

तरुण : मम्मी मैंने कुछ भी नहीं किया है ... मम्मी मैं बेकसूर हु .... मम्मी मैं कभी ऐसा करने की सोच भी नहीं सकता ... व... वो राहुल भैया ने ये सब किया है .... आअह्ह्ह्ह मम्मी मुझे मत मारो मम्मी मत मारो न मैं मर जाऊंगा मम्मी ... मम्मी मुझे मत मारो मम्मी .... मम्मी प्लीज मम्मी मैं आपकी कसम खा कर कहता हु .... आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह नहीं मम्मी ... ाचा मैं खुद की कसम खा कर कहता हु मैंने कुछ भी नहीं किया है ... सब राहुल भैया ने किया है .... आअह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्हह मम्मी मत मारो न ... मैं मर जाऊंगा मम्मी .... मैं मर जाऊंगा मम्मी .... पापा बचाओ न दीदी बकहो न .... ओह्ह्ह्ह मम्मी ....

ऐसे hi तरुण खुद hi बड़बड़ाता हुआ बीएड पर इधर उधर छपटाते हुए रोये जा रहा था .... कुछ देर तक तो दिया को कुछ समझ नहीं आया फिर वो ये समझ जाती है की हो सकता है की ये तरुण का अतीत हो जो उसको आज अपने सपने में दिखाई दे रहा था ... तरुण का ये हाल देख दिया की आँखों में आंशू आ जाते हैं ....

दिया (मन में) : न जाने कितना कुछ सहा है इसने बचपन में .... सिर्फ एक झलक देख कर मेरी हालत ख़राब हो गयी तो न जाने इस मासूम ने कैसे अपना पूरा बचपन गुजरा होगा ... डॉक्टर ने सही hi कहा था की ये किसी मानशिक बीमारी की चपेट में भी आ चूका है ... मुझे hi इसको सहारा देना होगा ... मैं इसके सलामती के लिए किसी भी हद्द से गुजर सकती हु ...

वो उठ कर तरुण के सिरहाने बैठ जाती है और बड़े प्यार से उसके माथे को सहलाने लगती है और उसके आंशू साफ़ करने लगती है ....

दिया : बाबू आँखें खोलो ... मैं हु तुम्हारी दीदी ....

तरुण जल्दी से उठ कर दिया से लिपट जाता है ....

तरुण : दीदी दीदी मुझे बचा लो मम्मी मुझे मार डालेगी ... दीदी मैंने कुछ नहीं नहीं किया है वो सब राहुल भैया ने किया है ... पर मम्मी मेरी बात नहीं सुन रही है और मुझे मरे ज रही है ... बोलो न दीदी किसी को बिना गलती इतना मरना चाहिए क्या .... दीदी बचा लो मुझे ....

दिया : अब मैं आ गयी हु न अब कोई तुम्हे नहीं मरेगा मेरे बच्चे ... देखो तो कोई भी नहीं है तुम्हे मरने वाला ... मेरे रहते हुए तुझे कोई नहीं मरेगा ... कोई नहीं मरेगा ....

तरुण अब भी बिलकुल डरा हुआ था .... दिया उसके दर को ख़त्म करने का भरसक प्रयास कर रही थी पर तरुण बिलकुल किसी मासूम बच्चे की तरह डरा हुआ था ...

दिया उसका चेहरा अपने हाथो में थम लेती है और उसके चेहरे पर चुम्बनों की बरसात कर देती है .... खुद के लिए इतना प्यार देख तरुण धीरे धीरे नार्मल होने लगता है ... दिया कुछ देर ऐसे hi तरुण को अपने सीने से चिपकाये रहती है ...

कुछ देर बाद ...

तरुण : दीदी क्या हुआ अपने मुझे ऐसे गले क्यों लगा रखा है ...

दिया : वो तुम hi दर रहे थे इसलिए मैंने तुम्हे गले लगाया था ....

तरुण : क्या दीदी मैं कोई बच्चा थोड़े हु जो दर जाऊंगा .... चलो सो जाओ ... मुझे जोरो की नींद आ रही है ....

दिया और कुछ नहीं बोलती बस वो भी सो जाती है .... अभी जो कुछ भी हुआ वो उसकी समझ में नहीं आ रहा था ... पहले तो तरुण का रोना और डरना और फिर कुछ देर बाद यु नार्मल बेहवे करना ये सब उसके लिए बिलकुल नया था ... खैर उसने अगले दिन इसके बारे में डॉक्टर से इसके बारे में पूछने का सोच सोने का निर्णय लिया ...

अगले दिन दिया डॉक्टर श्रुति से कंसल्ट करती है और उसको सब कुछ बताती है ....

डॉक्टर : मिस दिया मुझे जिस बात का दर था वही हुआ है आपके भाई को बचपन में काफी मेंटली टॉर्चर किया गया है ... उन्होंने आज तक अपने इस बीमारी को सफलतापूर्वक कण्ट्रोल में रखा है पर रीसेंट इंसिडेंट के बाद उनके हेड से जो थोड़ी ब्लीडिंग हुयी है उसके hi असर से उस बीमारी में इनके ऊपर अपना असर दिखाना सुरु कर दिया ... पर चिंता की ज्यादा बात नहीं है ये अभी िन्तिअल फेज में है जिसके कारन हम उसको कण्ट्रोल कर सकते हैं .... मुझे पहले कंट्री के फेमस मनोचिकित्सक से कंसल्ट करना होगा और हमें आपसे भी फुल सपोर्ट की जरुरत है ....

दिया : जी डॉक्टर मैं कुछ भी कर सकती हु आप बस मेरे भाई को फिर से ाचा कर दीजिये .... उसके घर वालो ने इस मासूम को बहुत सत्ता लिया बस अब और नहीं मैं उसको ऐसा फौलाद बना कर भेजूंगी की वो सबसे अपने ऊपर हुए अत्याचार का बदला में सके ...

डॉक्टर : क्या आप वाकई में ये करना चाहती हो ... वैसे मैं खुद एक मब्ब्स डॉक्टर फिर भी आपको एक सलाह देना चाहूंगी की आप अगर बेस्ट रिजल्ट चाहती हो बिना किसी साइड इफ़ेक्ट कीप तो आपको मैं एक डॉक्टर सुग्गेस्ट करना चाहूंगी जो ऐसे केसेस में एक्सपर्ट हैं पर उनके इलाज करने का तरीका थोड़ा अलग है .... अगर आपकी इजाजत हो तो मैं आपकी उनसे कांफ्रेंस कॉल करवा सकती हु .... पर आपको भी पेशेंट के साथ वह जाना होगा और कुछ दिन उनके क्लिनिक पर hi रहना होगा .... ी थिंक वो आपका फुल सपोर्ट कर सकते हैं हर तरीके से ...

दिया : जी डॉक्टर मैं उसके लिए भी तैयार हु बस मुझे मेरा भाई सही सलामत चाहिए ....

उसके बाद वो डॉक्टर दिया की बात उस डॉक्टर से करवाती है ... पहले तो वो डॉक्टर न नुकुर करती है पर फिर मान जाती है .... उसने दिया को पेशेंट के साथ अगले दिन hi घर से निकल जाने को कहा और साथ में 2-3 हफ्ते का सामान भी पैक कर लेने को कहा क्यूंकि ट्रीटमेंट में लगभग 3 हफ्ते का समय लगने की उम्मीद थी ...

दिया ने सबसे परमिशन मांगी तो उसके हस्बैंड ने तो काफी मन करना चाहा पर दिया की जिद्द के आगे घुटने तक कर उसको परमिशन देनी पड़ी ...

अब तक तरुण के पीठ वाला जख्म काफी हद्द तक रिकवर हो चूका था इसलिए उसको जाने में कोई खास प्रॉब्लम नहीं थी .... कारन खुद hi उन्हें एयरपोर्ट तक ड्राप कर देता है और फाइनली वो सिक्किम के लिए निकल पड़ते हैं ... फ्लाइट और तस्य की हेल्प से आख़िरकार वो लोग उस जगह पहुँच hi जाते हैं जहा उस डॉक्टर ने उन्हें बुलाया था ....

ये सहर की भीड़ भाड़ से काफी दूर एक छोटा सा हॉस्पिटल था जहा आस पास का नेचर व्यू काफी खुशनुमा था .... दिया तस्य ड्राइवर की हेल्प से अपना लगेज हॉस्पिटल के अंदर लेकर आती है ... कॉल करने के थोड़े देर बाद hi एक आदमी उन्हें रिसीव करने आता है और थोड़े देर बाद वो एक केबिन के अंदर थे ...

कुछ देर बाद एक 35 - 40 साल की महिला रूम में एंटर करती है ....

लेडी : मिस दिया ... राइट

दिया : यस ma'am ....

लेडी : मर. तरुण .... नीस तो मीट यू जेंटलमैन ....

तरुण : गुड इवनिंग ma'am ...

वो लेडी तरुण और दिया से हाथ मिलती है ...

लेडी : यू मई कॉल में डॉ. छाया ... या फिर छाया जो आपको ठीक लगे ....

तरुण : no ma'am आप हमारी डॉक्टर हो तो मैं आपको नाम से कैसे बुला सकता हु ... डॉक्टर तो भगवन का रूप होता है ....

छाया : वाओ इंटरेस्टिंग पर्सन .... ी ऍम ग्लैड तो मीट यू .... लगता है हमारी अच्छी जमने वाली है .... आप लोगो के रुकने की व्यवस्था मैंने कैंपस में hi करवा दिया है बस आपको नॉमिनल सा पेमेंट करना है बाकि कभी भी 24 ऑवर कोई भी प्रॉब्लम हो आप मुझसे कांटेक्ट कर सकती हो ....

दिया : hi ma'am सुक्रिया .... फ़िलहाल तो हम काफी थक चुके हैं आज रेस्ट करुँगी ....

छाया : ok नॉट तो वोर्री डार्लिंग हम कल से hi ट्रीटमेंट सुरु करते हैं ....

छाया एक आदमी को आवाज़ देती है जो इनका सामान उनके रूम में पहुंचा देता .... रूम ज्यादा कोई खास तो नहीं था पर हॉस्पिटल में ऐसी रूम मिलना भी बड़ी बात होती है ...

हॉस्पिटल में कैंटीन भी मौजूद था जिसमे उनके खाने पिने का भी इंतजाम किया गया था ....

दिया : भाई कैसा लग रहा है ...

तरुण : बहुत अछि जगह है दीदी पर मुझे ये समझ नहीं आया की मैं तो अब ठीक थक hi हु तो मुझे यहाँ क्यों लायी हैं आप ....

दिया : मुझ पर ट्रस्ट है तुम्हे ....

तरुण : हाँ दीदी खुद से भी ज्यादा ....

दिया : तो चुप चाप जैसा मैं कहु करते जाओ .... मैं जरा शावर ले कर आती हु ... पुरे रस्ते सफर करते हुए थक गयी हु ... शावर लेने के बाद जैम कर खाना है उसके बाद आराम से सो जाउंगी ....

तरुण : क्या मैं भी शावर ले सकता हु ...

दिया : हाँ डॉक्टर ने तो सरे स्टिचिंग कट कर hi दिए हैं तो कोई प्रॉब्लम तो नहीं होनी चाहिए ... Don't वोर्री मैं hi तुझे नहला देती हु कुछ दिन प्रोटेक्शन के साथ .... उसके बाद मैं नाहा लुंगी ... चलो जल्दी से चेंज करके वाशरूम जाओ मैं भी आती हु ....

तरुण : ok दीदी .... तरुण एक शार्ट पहना हुआ वाशरूम में एंटर कर जाता है ....

थोड़े देर में दिया भी वाशत्रुम में एंटर करती है .... दिया ने अभी एक टॉप और एक पजमि डाली हुयी थी जो वो अक्सर वाशरूम जाते टाइम उसे किया करती थी ....

तरुण : दीदी मैं खुद महा लेता न आप क्यों टेंशन ले रही हो ....

दिया : क्यों दीदी से नहाने में शर्म आती है क्या ....

तरुण : नहीं दीदी वो बात नहीं है ... लो नहला दो ....

दिया तरुण को नहला देती है और फिर वो खुद अपने कपडे चेंज करके बहार आ जाता है उसके बहार आते hi दिया गेट लॉक करके खुद भी नाहा लेती है ....

उस दिन और कुछ खास नहीं होता वो लोग खाना खा कर आराम से सो जाते हैं ....

इधर तरुण के जाने के बाद कारन अपने मिशन मयूर पर लग जाता है ...

तब तक आइये थोड़ा तरुण के घर का भी रुख कर लेते हैं .... अभी तरुण के न लौटने से घर में 4 लोग काफी परेशान थे जिनमे से रुचिका और उसकी बुआ तो अपनी फीलिंग खुल कर जाता ले रही थी पर प्रियांशी या उसकी माँ अपनी फीलिंग दुसरो के सामने जाहिर भी नहीं कर पति थी ....

उस दिन तरुण से बात करके प्रियांशी को भी एहसास हो गया था की उससे या उसके परिवार वालो से आज तक कितनी गलतिया हुयी हैं .... वो ऊपर वाले से दुआ कर रही थी की तरुण किसी तरह वापस घर आ जाये .... उसके बाद वो अपने छोटे भाई को अपने सीने से लगा लेगी और उसको इतना प्यार देगी इतना प्यार देगी की उसको फिर कभी प्यार की कमी महसूस न हो ....

श्रेया और काम्य का भी हाल कुछ ऐसा hi था जब से तरुण गया था तब से पहले तो कभी कभार बात चित तो हो जय करती थी पर कुछ दिनों से तो उसका मोबाइल भी स्वीटहेड ऑफ आ राह था .... वो दिन भर में जब भी मौका मिले तब नंबर तरय करती थी पर हर बार शामे रिजल्ट स्वित्चेद ऑफ .....

दिया ने जान बुझ कर उसका मोबाइल स्वीटहेड ऑफ रखा था ताकि वो अपने अतीत के दुःख भरे यादो में न चला जाये और खड़ का नुकसान करवा बैठे ....

अगले दिन सुबह में hi दिया के साथ वो हॉस्पिटल के आस पास घूमने निकल जाते हैं ... वाकई ये जगह बहुत खूबसूरत था .... दूर दूर तक फैले पर्वतो और चारो तरफ की हरियाली मन को एक अजीब सा सुकून देता था .... मेन्टल पेशेंट के लिए ये शांति और ग्रीनरी एक दवा का काम करती थी ....

तरुण : दीदी ये जगह कितनी खूबसूरत है न ...

दिया : हाँ भाई .... मेरा तो अब एहि बस जाने का दिल कर रहा है ....

तरुण : तो जीजू को बुला लो एहि आपका हुए) हनीमून भी हो जायेगा जो मेरी वजह से hi डिले हो रखा है ....

दिया (सरमते हुए) : धत्त पागल ... अभी तुम्हे ठीक करना मेरे लिए ज्यादा जरुरी है ....

तरुण : दीदी आप मुझे कितना प्यार करती हो ... और एक मेरी बहने हैं जिनके लिए मेरा .....

दिया को जल्दी से तरुण का ध्यान अतीत की भयावह यादो से हटाना था तो जल्दबाजी में वो जो कर जाती है उसके बारे में वो सपनो में भी नहीं सोच सकती थी ....

वो तरुण का ध्यान बांटने के लिए जल्दी से अपने रसभरे होंठ तरुण के होंठो पर चिपका देती है .... कुछ पल तो तरुण को कुछ समझ hi नहीं आता की अचानक से ये क्या हो गया .... उनकी किसिंग 20 - 25 सेकंड की hi थी पर इतने में hi दिया तरुण का ध्यान भटकने में सफल हो जाती है जिसकी उसको बेहद ख़ुशी थी ....

तरुण हैरान परेशान अभी चाँद लम्हो पहले हुए इंसिडेंट के बारे में सोचे जा रहा था .... ऐसा न था की दिया ने कभी उसको किश नहीं किया था पर उसके होंठो पर किश करना ऐसा पहली बार हुआ था .... तरुण को किश करने के बाद दिया को भी खुद से गिलटी फील हो रही थी पर वो सिर्फ ये सोच कर खुस थी की वो ये सब सिर्फ तरुण की भलाई के लिए कर रही थी क्यूंकि डॉक्टर श्रुति ने उसे साफ़ साफ़ कह दिया था की जब तक तरुण पूरी तरह से ठीक न हो जाये उसका ध्यान उसके अतीत की तरफ जाने से रोकने का भरसक प्रयास करना है .... और उसको अभी तरुण का ध्यान भटकने का इससे ाचा कोई उपाय नजर नहीं आ रहा था इसलिए न चाहते हुए भी उसको ये सब करना पड़ा ...

दिया : अब ऐसे घर घर कर मुझे क्यों देख रहे हो ....

तरुण : दीदी अभी अपने मुझे किश ....

दिया : अब क्या एक बहन अपने भाई को एक किश भी नहीं कर सकती इतना भी अधिकार मुझे तुम्हारे ऊपर नहीं है ...

और वो जान बुझ कर साद सा फेस बना लेती है ....

तरुण : नहीं नहीं दीदी मेरा कहने का ये मतलब नहीं था आप चाहो तो दोबारा मुझे किश कर सकती हो ....

दिया : चल चल ज्यादा इमोशनल होने की जरुरत नहीं है .... चलो अब ब्रेकफास्ट करने के बाद डॉक्टर छाया से भी मिलना है ....

दोनों वापस रूम में आते हैं अभी भी दिया hi तरुण को शावर दिलवाती है ... वो ऐसा इसलिए कर रही थी क्यूंकि डॉक्टर ने उसके सर पर पानी डालने से मन किया हुआ था ....

11 बजे के लगभग वो लोग डॉक्टर छाया के केबिन में पहुँचते हैं .... कुछ देर उनसे बात करने के बाद छाया तरुण को एक रूम में ले जाती है और करीब आधे घंटे के बाद वो दोनों वापस केबिन में आते हैं .... छाया तरुण को बहार भेज देती है ....

दिया : डॉक्टर कैसी कंडीशन है उसकी ....

छाया : देखिये मिस दिया येतो बहुत अछि बात है की आप पेशेंट को जल्दी से हमारे पास ले आयी ... अभी इस बीमारी का इनके ऊपर बस थोड़ा सा hi इफ़ेक्ट हुआ है और अगर सब कुछ सही रहा तो आपका भाई 7 से 8 दिन में hi ठीक हो जायेगा बसर्ते आप उनका हर तरह से सपोर्ट करे और उनकी पास्ट की किसी भी भयावह याद को उनके ऊपर हावी होने से रोके ....

दिया : जी डॉक्टर मैं भरसक कोसिस करुँगी की ये अपने अतीत की यादो से दूर रहे ....

डॉक्टर : और हाँ आपको एक और खास बात बतानी है ....

और फिर डॉक्टर छाया ने दिया को कुछ बातें बताई जिसे सुनने के बाद थोड़ी देर केलिए तो दिया ब्लेंक हो जाती है पर कुछ देर सोचने विचरने के बाद वो एग्री हो जाती है ...

दिया जब डॉक्टर के केबिन से बहार आती है तो पति है की तरुण एक बेंच पर बैठा हुआ केबिन के गेट के hi तरफ देख रहा था .... जैसे hi उसकी नजर दिया पर पड़ती है वो खुस हो जाता है ....

तरुण : दीदी ... डॉक्टर न्र क्या कहा मेरे बारे में ....

दिया : एहि की तू जल्द hi ठीक हो जायेगा और हाँ तुझे अपनी दीदी की हर बात माननी होगी ताकि तू जल्द से जल्द ठीक हो सके ....

तरुण : हाँ दीदी मैं आपकी हर बात मानूंगा ....

दिया : चलो आज कही बहार घूमने चलते हैं ....


उसके बाद दिया और तरुण दोनों पैदल hi आस पास की हरी भरी वादियों में घूमने को निकल पड़ते हैं .... दिया ने कुछ खाने पिने की चीजें भी साथ ले ली थी .....
 
अपडेट 15



उसके बाद दिया और तरुण दोनों पैदल hi आस पास की हरी भरी वादियों में घूमने को निकल पड़ते हैं .... दिया ने कुछ खाने पिने की चीजें भी साथ ले ली थी .....

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दिन भर दिया तरुण का मन बहलाने में लगी हुयी थी और वो अपने मकसद में सफल भी हुयी थी ... तरुण को ऐसे प्रकृति की गॉड में एक अजीब सा सुकून मिल रहा था जिससे उसका अतीत उसकी रीसेंट मेमोरी में कही नहीं था या वो उसके ऊपर हावी नहीं था ...

खैर 2 दिन तक तो सब सही रहा पर तीसरी रात को फिर से दिया ने तरुण को ुशी रात के जैसे खुद से बड़बड़ाते हुए बात चित करते सुना .... तरुण आज भी बेहद डरे हुए अंदाज़ में था ....

दिया ने उस दिन के जैसे hi उसको अपने बांहो में भर कर सांत्वना दी पर आज तरुण कुछ ज्यादा hi डरा हुआ था .... और आज वो माँ नहीं बल्कि चची का नाम लेकर डरे जा रहा था ....

दिया (तरुण को गाल को चूमते हुए ) : देखो बाबू यहाँ कोई नहीं है .... वो लोग चले गए ... अब तुम्हे डरने की कोई जरुरत नहीं ... मैं हु न मैं तुम्हे बचाऊंगी ....

तरुण कुछ बोलता तो नहीं है बस दिया से जोर से चिपका हुआ था ... थोड़े देर ऐसे hi रहने के बाद दिया तरुण को बीएड पर अचे से सुला देती है और उसके बालो में उंगलिया फिरने लगती है ...

दिया के हर टच में तरुण को अपनापन महसूस हो रहा था ... वो बीच बीच में दिया के तरफ प्यार से देख लेता था ...

तरुण : आप मेरी क्या लगती हो ....

दिया : मैं तुम्हारी बड़ी बहन हु ... मेरा नाम दिया है ....

तरुण : आप बहुत अछि हो ... बिलकुल मेरे घर वालो से अलग ....

दिया : तुम भी बहुत प्यारे हो .... तुम्हे तुम्हारे घर में कौन कौन परेशान करते हैं ...

तरुण : सब hi एक से hi हैं बस बुआ और श्रेया दीदी मेरी थोड़ी बहुत केयर करती हैं ....

दिया : चलो अब तुम आराम से सो जाओ ... अब कोई तुम्हे तंग नहीं करेगा ...

कुछ देर दुलारने पुचकारने के बाद तरुण को तो नींद आ जाती है पर दिया ने साडी रात जागते हुए hi गुजर देती है ....

अगली सुबह को तरुण फिर से नार्मल बेहवे कर रहा था .... दिया ने डॉक्टर छाया से अकेले में मिल कर इस बात का जिक्र किया ....

छाया : देखो दिया .... तुम्हारे भाई के मन में बचपन की वो यादें कुछ ऐसे घर कर गयी हैं की वो छह कर भी उनसे अपना पीछा नहीं छुड़ा प् रहा है .... आज मैं उसके साथ पिचोथेरपी करने वाली हु .... अगर सब कुछ ठीक रहा तो उसको पूरी तरह तो नहीं काम से काम 90 - 95 परसेंट तो ठीक कर hi दूंगी ....

दिया : आपको जो भी करना हो बेफिक्र हो कर करो मैडम ... मुझे बस किसी हाल में मरा भाई ठीक चाहिए पैसे की कोई टेंशन नहीं है ... चाहे मुझे खुद को hi क्यों न बेचना पड़े ...

छाया : नहीं स्वीटहार्ट मुझे तुमसे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए मुझे पैसो से ज्यादा पेशेंट की सलामती पसंद है ... हो सकता है ट्रीटमेंटमे ज्यादा टाइम भी लग सकता है .... कभी कभी मेन्टल पेशेंट को ठीक करने के लिए टाइम थोड़ा ज्यादा भी लग जाता है पर मैं वादा करती हु की रिजल्ट पॉजिटिव hi रहेगा ....

दिया : ok डॉक्टर तरुण को ले आऊं क्या ...

छाया : नहीं दिया .... मैं तरुण का ट्रीटमेंट यहाँ नहीं अपने रूम पर काऊंगी क्यूंकि वह hi मैं उसको सही से टाइम दे पाऊँगी ....

दिया : पर मैडम आपके पति ...

छाया : वो भी एक डॉक्टर hi हैं .... फ़िलहाल तो 2 महीनो से उसे में हैं ... एक बीटा है जो की बोर्डिंग स्कूल में रहता है .... अगर तुम्हे कोई प्रॉब्लम न हो तो तुम इवनिंग को तरुण को लेकर आ जाना ... डिनर के बाद मैं अपना सेशन सुरु कर दूंगी ....

दिया : ok डॉक्टर जैसा आपको ठीक लगे ...

उसके बाद दिन भर तरुण के साथ स्पेंट करने के बाद इवनिंग को उसको लेकर डॉक्टर छाया के रूम पर पहुँचती है ... डॉक्टर छाया भी हॉस्पिटल के पास hi एक क्वार्टर में रहती थी जो की हॉस्पिटल के कंपाउंड के अंदर hi मौजूद था ...

दुर्बल की आवाज़ सुन कर छाया गेट खोलती है .... संभवतः वो कुछ देर पहले hi शावर लेकर आयी थी क्यूंकि उसने अपने बालो में एक टॉवल लपेटा हुआ था ....

छाया : आओ आओ अंदर आ जाओ ... मैं अभी जस्ट थोड़े देर पहले hi शावर लेकर आयी हु .... तुम लोग यहाँ सोफे पर बैठो ... मैं कॉफ़ी वगैरह भिजवाती हु .... मैं थोड़ा सा ड्रेस चेंज करके आती हु ....

वो लोग सोफे पर बैठ जाते हैं .... थोड़े देर में छाया की माइड उनके लिए कॉफ़ी लेकर आती है ... अभी वो लोग कफ निपटा hi रहे थे की वह डॉक्टर छाया आ जाती है .... छाया ने माइड को पहले hi दो लोगो का एक्स्ट्रा डिनर बनाने को कह दिया था ...

सभी लोग साथ में डिनर करते हैं .... डिनर के बाद सारा काम समेत कर छाया की माइड वह से चली जाती है ....

छाया : ok तो दिया अगर तुम चाहो तो रूम पर जा कर रेस्ट कर सकती हो ... तरुण की बीमारी अभी इनिशियल स्टेज में है और मुझे तो नहीं लगता की वो एग्रेसिव बेहवे करेगा ट्रीटमेंट के दौरान ....

दिया : नहीं डॉक्टर अपने शादी के जस्ट बाद इतनी दूर रेस्ट करने थोड़े hi आयी हु ... आप निश्चिंत होकर ट्रीटमेंट कीजिये मैं आपको डिस्टर्ब नहीं करुँगी .... मैं एहि पर रहती हु अगर आपको कभी मेरी जरुरत महसूस हो तो जरूर बताना ....

छाया : जरूर .... चलो हीरो तुम मेरे साथ ....

छाया तरुण को एक रूम में ले जाती है और बैठने को कहती है .... थोड़े देर बाद वो तरुण वाले रूम में वापस आती है उसके हाथ में एक सूटकेस था जिसमे उसके कुछ इंस्ट्रूमेंट होंगे ....

छाया : तरुण तुम उस चेयर पर बैठ जाओ .... हम अपना सेशन सुरु करते हैं ...

और फिर वो भी उससे थोड़ी दूर एक चेयर लेकर बैठ जाती है ....

छाया पहले उसको एक लाइट में देखने को कहती है और फिर उसकी आवाज़ को सुनते सुनते वो हिप्नोतिजे हो जाता है जैसा की हम आमतौर पर भूत प्रेत वाली फिल्मो में देखा करते हैं ....

छाया : बताओ तुम कौन हो और अपने बारे में अचे से बताओ ....

और फिर छाया अपने मोबाइल में रिकॉर्डिंग चालू कर देती है ....

तरुण : मैं तरुण हु मैं 9 साल का हु .... मेरे घर में कोई भी मुझे नहीं चाहता ... मेरे मम्मी पापा भाई बहन कोई भी नहीं ... सब मुझसे न जाने क्यों नफरत करते हैं .... कभी कभी तो मुझे लगता है की मैं अपनी जिंदगी hi ख़त्म कर दू पर कर नहीं पता क्यूंकि मुझे एक न एक दिन इन् सब के दिल में खुद के लिए प्यार जगाना है भले hi वो मेरी जिंदगी का आखिरी पल hi क्यों न हो ....

मैंने सबसे सुना है की माँ तो ममता की मूरत होती है वो अपने बच्चो से कभी भेदभाव नहीं करती पर शायद ऊपर वाले ने मेरे किस्मत शायद अलग hi श्याही से लिखी है .... मेरी सुबह की शुरुआत जिल्लत दांत फटकार मार पिट से सुरु होती है और इसका अंत भी कुछ ऐसे hi होता है ....

छाया : वो कौन है जो तुम्हे सबसे ज्यादा नफरत करती है ....

तरुण : मेरे पापा ने तो कभी मुझे मारा पीटा तो नहीं है पर कभी उन्होंने मुझे बचने की कोसिस भी नहीं की है हाँ कभी कभी वो दांत कर अपना दिल जरूर बहला लेते हैं .... मुझे सबसे ज्यादा नफरत शायद मेरी माँ और चची करती हैं ... पता नहीं क्यों मैं कुछ अच् भी करने की कोसिस करता हु तो वो उनके लिए बुरा क्यों बन जाता है .... गलती घर में किसी की भी हो पर दांत और मार मुझे पड़ती है .... आंटी कही आप मम्मी को तो नहीं बताने वाली हो ... नहीं मुझे आपको नहीं बताना है कुछ भी आप भी सब लोगो के जैसे मम्मी या पापा से शिकायत करके मेरी पिटाई लगवा डौगी ....

छाया : नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करुँगी ... मैं तुम्हारी मम्मी को कुछ भी नहीं बाटूंगी .... ाचा तुम्हे जब तुम्हारी मम्मी hi मरती है या कोई और भी मरता है ...

तरुण : ज्यादातर मम्मी hi मरती है ... चची भी कभी कभी मरती है और सबको मेरे खिलाफ भड़कती भी रहती है ...

छाया : तुम्हारी सगी बहने भी तुम्हारी मदद नहीं करती क्या ....

तरुण : पता नहीं क्यों वो लोग भी मुझसे नफरत hi करती है ... कभी कभी मेरी बुआ मुझे बचती है .... वो hi हैं जिन्होंने मुझे थोड़ा बहुत सपोर्ट किया है ... वो भले hi किसी को मुझे मरने से नहीं रोकती पर वो मुझे ऐसी हालत में देख कर अकेले में बहुत रोटी हैं ... एक मेरी सबसे बड़ी चचेरी बहन हैं श्रेया दीदी वो भी कभी कभी मुझे अकेले में रोटा देख मुझे प्यार जाता जाती हैं ... अब मुझ जैसे प्यार के भूखे बच्चे के लिए दोनों का इतना प्यार भी किसी अनमोल ख़ज़ाने से काम नहीं है ....

छाया : ाचा तुम मुझे बता सकते हो की तुम्हे किसने कहा है की तुम 9 साल के हो ....



तरुण : मैं आपको पागल लगता हु क्या मुझे मेरी आगे भी नहीं पता रहेगी क्या .... मैं 9 साल का hi हु ...
 
अपडेट 16



छाया : ाचा तुम मुझे बता सकते हो की तुम्हे किसने कहा है की तुम 9 साल के हो ....

तरुण : मैं आपको पागल लगता हु क्या मुझे मेरी आगे भी नहीं पता रहेगी क्या .... मैं 9 साल का hi हु ...

आगे

छाया : तुम्हे मुझ पर बिस्वास नहीं है तो तुम धीरे धीरे अपनी आँखें खोल कर देख लो ....

तरुण धीरे धीरे अपनी आँखें खोलता है .... सबसे अफ्ले उसकी नजर खुद के पहने कपडे पर जाती है .... उसने अभी एक अच्छा सा कपडा पहना हुआ था जो की शायद hi उसको कभी पहनने को दिया जाता था .... हाथ पाओ वगैरह को देखने के बाद भी उसको बिस्वास hi नहीं हो रहा था की वो अभी 9 साल का नहीं है बल्कि बड़ा हो चूका है ....

छाया : तुम्हे अब भी मुझ पर भरोषा नहीं है तो अपने पेंट के अंदर झांक कर देखो अब तुम बच्चे नहीं रहे ....

तरुण छाया की बात मान कर अपने पंत को नीचे सरका कर अपना हाथ अपने अंडरवियर में दाल कर देखता है तो वो बुरी तरह चौंक जाता है .... पहले जहा उसकी नुन्नी हुआ करती थी अब वह एक बड़ा सा लुंड हो चूका था ....

तरुण : कही मुझे कोई बीमारी तो नहीं हो गयी .... मेरा नुन्नी इतना बड़ा कैसे हो सकता है .... मेरे हाथ पाओ भी एक hi दिन में कितने बड़े हो गए ....

वो घबराये हुए अंदाज़ में खुद hi अपने अंडरवियर को नीचे सरका देता है ... उसके हाथ में पकडे हुए लुंड को देख कर तो छाया की भी हाट ख़राब हो चुकी थी क्यूंकि अभी सोये हुए हालत में तरुण का लुंड जितना बड़ा दिख रहा था उतना ऐडा तो उसके पति का ेरेक्ट होने के बाद नजर आता था ....

दो महीनो से पुरुष के संसर्ग से दूर छाया के मन में अब धीरे धीरे लालच ने जन्म लेना सुरु कर दिया था ...

छाया (मन में) : उफ़ यार कितना बड़ा लुंड है इसका .... क्यों न मैं इसकी बीमारी के बहाने अपना कुछ भला कर लू .... इसको तो वैसे भी कल को ये सब याद रहने वाला भी नहीं है .... हो सकता है मेरे इस तरह बिस्वास दिलाने का कोई पॉजिटिव रिजल्ट hi निकल आये .... अब टी मुझसे भी बर्दस्त नहीं होता कयाघोडे जैसा हथियार पायी है इस लड़के ने ... जो भी इसकी बीवी बनेगी बहुत किस्मत वाली होगी ....

छाया : देखा मैंने कहा था न की तुम बच्चे नहीं हो .... देखो मैं एक डॉक्टर हु ... मैं तुम्हारा इलाज कर सकती हु .... क्या तुम ठीक होना नहीं चाहते ....

तरुण : क्या आप डॉक्टर हो .... पर आपके पास वो कान में लगाने वाली मशीन तो नहीं है ....

छाया : है न वो मेरे सूटकेस में है ... ये देखो .... चलो आओ बीएड पर लेट जाओ मैं तुम्हारा इलाज सुरु करती हु .... और हां पुरे कपडे उतर कर hi आना ....

तरुण : जी डॉक्टर जल्दी से मुझे ठीक कर दो न वर्ण मेरे घरवाले मुझे घर घुसने भी नहीं देंगे ....

तरुण अपने सरे कपडे उतर कर बीएड पर लेट जाता है .... छाया स्टेथोस्कोप अपने कान में लगा कर तरुण के पास आती है और उसके छाती पर लगा कर ट्रीटमेंट करने का नाटक करने लगती है ....

कुछ देर चेक करने के बाद वो टेंशन में होने का नाटक करने लगती है ....

तरुण : क्या हुआ डॉक्टर मुझे कोई सीरियस बीमारी तो नहीं हो गयी है न ....

छाया : सीरियस तो नहीं है पर इसके इलाज के लिए मुझे भी अपने कपडे उतरने पड़ेंगे .... तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है ...

तरुण : नहीं डॉक्टर आप तो मेरा इलाज कर रही हो और इलाज करने के लिए तो डॉक्टर कुछ भी कर सकते हैं ...

छाया : मुझे तुमसे एहि उम्मीद थी ....

और फिर छाया धीरे धीरे अपना एप्रन उतरती है उसके बाद धीरे धीरे सरे कपडे उतर कर पूरी नंगी हो जाती है क्यूंकि उसको साबरा नहीं हो रहा था और वो ऐसा शानदार मौका गंवाना भी नहीं चाहती थी ....

तरुण छाया के बड़े बड़े बूब्स को देखता है तो देखता hi रह जाता है ... छाया खुद एक डॉक्टर थी और डॉक्टर होने के नाते वो खुद की फिटनेस पर भी खूब ध्यान रखती थी उसके बूब्स साइज में तो बड़े थे पर उनमे लटकपन बिलकुल भी नहीं था ... उसके नीचे सपाट पेट जिसके ऊपर चर्बी का namo-nisan नहीं था .... और थोड़ा नीचे जाने पर एक गहरी नाभि थी जो की उसके पेट की सुंदरता में और इजाफा कर रही थी ....

नाभि के कुछ इंच नीचे त्रिम्मेद बालो का एक छोटा सा झुरमुट था जिसके नीचे एक गेरी खाई थी जहा जाने का हर जवान या बूढ़े ख्वाब देखा करते हैं ....

तरुण : डॉक्टर आपके छाती पर ये दो बॉल्स क्यों हैं .... मेरे छाती पर तो नहीं है ...

छाया : क्यों तुम्हारी मम्मी ने कभी तुम्हे दूध नहीं पिलाया क्या ....

तरुण : मेरी मम्मी ने आज तक मुझे पानी का गिलास भी नहीं दिया तो वो दूध भला क्यों देगी ....

छाया को तरुण की भोली बात काफी भावुक क्र देती है ...

छाया : इन्हे चुकी कहते हैं ये हर लड़की या औरत में होता है ... जब लड़किया माँ बन जाती हैं तो इनमे से दूध निकलता है ... क्या तुम्हे ये पसंद आये ....

तरुण : हाँ ये बहुत अचे हैं क्या मैं इन्हे छू सकता हु ...

छाया : हाँ बाबू क्यों नहीं ... मैं तुम्हारा इलाज़ कर रही हु ... तुम्हे तो सब कुछ करवाउंगी भी और सिखाऊंगी भी ... लो अचे से छू कर देख लो ....

वो तरुण के ऊपर झुक जाती है .... तरुण पहले तो बड़े मज़े से उन्हें छूटा है फिर उन्हें हलके हलके दबाने लगता है ऐसा करके उसको बहुत ाचा लग रहा था ..

उसके बाद छाया तरुण को अपने निप्पल को मुँह में लेकर चूसने को कहती है .... तरुण बड़े मज़े से छाय के चूचियों को चूसने लगता है ... छाया को भी तरुण के ऐसा करने से बड़ा सुकून सा मिलता है ....

छाया : मज़ा आ रहा है न ...

तरुण : क्या डॉक्टर इनमे से तो दूध भी नहीं आ रहा है पर बहुत ाचा लग रहा है ...

छाया : हाँ ऐसे hi चूसते रहो ....

इन् सब के दौरान hi तरुण का लुंड धीरे धीरे खड़ा होने लगता है और कुछ hi लम्हो में वो किसी रोड की भांति टाइट हो जाट है ...... तरुण का ध्यान जब उसके लुंड पर जाता है तो वो कौतूहलवश उसको देखने लहता है ...

तरुण : डॉक्टर ये मेरी नुन्नी इतनी लम्बी कैसे हो गयी और ये इतना सख्त कैसे हो गया है .... लगता है पक्का मुझे कोई बीमारी हो गयी है ....

छाया : नहीं तुम्हे कोई बीमारी बीमारी नहीं हुयी है .... ये तुम्हारे साथ जो हो रहा है ये इस बात का प्रमाण है की तुम अब बड़े हो चुके हो कोई बच्चे नहीं रहे ... अभी देखते जाओ मैं तुम्हे आज ये प्रूफ दे कर रहूंगी की तुम अब 9 साल के नहीं बल्कि 19 साल के तरुण हो ....

तरुण : भला वो कैसे ....

छाया : आज मैं तुम्हारे साथ वो सब कर के दिखाउंगी जो की सिर्फ एडल्ट या बड़े लोग hi किया करते हैं .... तब तो तुम्हे बिस्वास होगा की तुम अब बड़े हो चुके हो .... तुम्हे ठीक होना है न ...

तरुण : जी डॉक्टर मुझे ठीक होना है ...

छाया : तो तुम्हे वो सब करना होगा जो मैं कहूँगी .... तुम मेरा साथ दो मैं तुम्हे ठीक करुँगी ....

तरुण : जी डॉक्टर ...

उसके बाद चाय तरुण को खड़ा होने को कहती है ... तरुण किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह बीएड के नीचे खड़ा हो जाता है और छाया नीचे झुक कर उसके उसके लम्बे खूंटे को पकड़ लेती है और धीरे धीरे हिलने लगती है ... उसके मुँह में बहुत पहले hi पानी आ चूका था इसलिए वो तरुण के सुपडे को पहले तो चुम लेती है फिर जीभ निकल कर चाटने लगती है ...

वो कभी कभी अपने पति का भी ब्लोजॉब दिया करती थी इसलिए उसको ये सब करने में ाचा लगता था ... और तरुण का बड़ा सा और मोटा लुंड तो वैसे भी उसके लिए एक जिज्ञासा की वस्तु बानी हुयी थी ... अब वो धीरे धीरे उसको अपने मुँह में भरकर ब्लोजॉब देने की कोसिस करने लगती है .... छाया के ऐसा करने से तरुण को असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी ....

वो धीरे धीरे मोअन करके अपनी ख़ुशी को जतला रहा था ....

करीब 5 - 10 मिनट ब्लोजॉब देने के बाद छाया के मुँह में दर्द होने लगता है तो वो तरुण को असली खेल के लिए रेडी करने लगती है ...

वो रूम में रखे हुए आयल की बोतल से ढेर सारा तेल निकल कर अपनी छूट को अचे से स्लिपरी बनाने में लग जाती है क्यूंकि उसको ये अंदाज़ा जरूर था की आज उसकी बंद बजने वाली है पर वो खुद hi तो ये चाहती थी ... कुछ ऐसा hi उसने तरुण के लुंड के साथ भी किया ....

अब वो बीएड के किनारे अपने पाओ को फैला कर तरुण को सब कुछ समझने लगती है की कैसे क्या करना है ....

तरुण के लिए औरत के जिस्म का ये हिस्सा बिलकुल अनबुझी पहेली थी ... वो कभी छाया की चिकनी छूट को देख रहा था तो कभी अपने लुंड को .... छाया की छूट खुली हुयी तो थी पर उसके खेत की ज्यादा जुताई नहीं हुयी थी ...

छाया खुद hi तरुण के लुंड के सुपडे को अपनी छूट के मुहाने पर सेट करके तरुण को धक्का लगाने को कहती है ... उसने पहले hi अपनी पंतय अपने मुँह में थुश ली थी क्यूंकि बहार दिया भी तो थी 😂😂😂

तरुण तो ठहरा अनादि जिसे छाया खिलाडी बनाना छह रही थी ... तरुण ने एक जोर का धक्का लगा दिया .... पर निशाना चूक गया और तरुण का लुंड साइड में फिसल गया ...

अब फिर से छाया निशाना सेट करती है और तरुण को हलके से झटका मरने को कहती है ... तरुण के लिए ये एक नए खेल जैसा था .... तरुण ने एक अचे स्टूडेंट होने का फ़र्ज़ निभाते हुए अबकी बार सही निशाना लगते हुए अपना पूरा सूपड़ा छाया के छूट में धसा दिया ... छाया को हलकी तकलीफ तो हुयी पर उसने तरुण का हौसला अफ्ज़ाफ़ी करते हुए फिर से धक्का लगाने को कहा .... तरुण ने फिर से एक जोर न झटका दिया उसका लुंड आधा से ज्यादा अंदर घुस चूका था .... छाया के छूट में इतने अंदर तक खुदाई हो चुकी थी इसलिए उसको ज्यादा तकलीफ तो नहीं हुयी थी ..... छाया हलके हलके मॉनिंग करके तरुण का जोश बढ़ा रही थी ....

तरुण ने तीसरे धक्के में पूरा का पूरा लुंड जड़ तक घुसा दिया .... तरुण के ऐसा करने से छाया की तो मनो जान hi निकल गयी क्यूंकि उसको ऐसा लग रहा था की किसी ने उसके छूट को दो हिस्सों में चिर दिया हो ... ऐसा दर्द तो उसको अपने सुहागरात में भी नहीं हुआ था .... वो जोर से चीख कर अपना दर्द जाताना चाहती थी पर बहार दिया बैठी थी इसलिए वो छह कर भी ऐसा नहीं कर सकती थी .... उसने तरुण को इशारे से रुकने को कहा और कुछ देर नार्मल होने के बाद उसने तरुण को आगे पीछे होने को कह दिया .... छोट की गर्मी और कसावट की वजह से 20 - 25 धक्को में hi तरुण के लुंड ने अपना सारा लावा छाया की छूट में hi उड़ेल दिया .... डिस्चार्ज होने के बाद तरुण को ऐसा लगा की लुंड के रस्ते hi उसकी साडी शक्ति निकली जा रही है ....

तरुण के गर्म गर्म वीर्य को अपनी छूट में महसूस करके छाया के चेहरे पर दर्द मिश्रित ख़ुशी के भाव छलक रहे थे ....

वो खुद hi लेते लेते hi तरुण के सिकुड़े हुए लुंड को अपनी छोट से निकलती है और उसके चेहरे को चुम लेती है .... उसकी हालत बहुत खस्ता थी पर वो तरुण से मिले इस आनंदमयी एहसास से तृप्त हो चुकी थी ...

थोड़े देर रेस्ट करने के बाद दोनों ने अपने अपने कपडे पहना लिए ... छाय की छोट तो सूज गयी थी पर वो खुद को नार्मल दिखने की कोसिस करती है .... अब फिर से दोनों चेयर पर बैठ चुके थे ....

छाया : अब बताओ तरुण तुम्हे कैसा लग रहा है ...

तरुण : ाचा लग रहा है डॉक्टर .... अब मेरी नुन्नी भी छपती हो गयी और अब दर्द भी है कर रहा ... सुक्रिया डॉक्टर जी अपने मेरा इलाज कर दिया ...

छाया : अभी पैट अहइ हमने क्या किया है ....

तरुण : जी नहीं डॉक्टर ....

छाया : इसको सेक्स कहते हैं ...

तरुण : मतलब ...

छाया : अभी हमने जो किया वो सिर्फ बड़े लोग किया करते हैं .... मैं तो तुम्हे पहले hi समझा रही थी की तुम 19 साल के हो 9 के नहीं .... अब कुछ समझ आया ... थोड़ा अपने दिमाग पर जोर डालो और अपने अतीत को छोड़ अपने वर्तमान में आने की कोसिस करो ....

दिया तरुण को एक पॉइंट पर फोकस करके सोचने को कहती है .... वो अपने दिमाग पर जोर दाल कर सोचने लगता है .... जिसके fal-swarup वो बेहोशी की हालत में जाने लगता है ....

छाया उसको वैसी hi हालत में छोड़ कर अपने कपडे सही करके रूम से बहार आती है .... बहार दिया सोफे पर hi पसर कर गहरी नींद में जा चुकी थी ....

छाया पहले अपने रूम में जा कर पैन किलर ले लेती है .... और वापस ुशी रूम में आती है जिस रूम में वो तरुण का ट्रीटमेंट कर रही थी .... तरुण अभी भी वैसे hi बेहोशी या नींद के हालत में था ....

अब थोड़ा तरुण के घर का भी रुख कर लेते हैं ....

घर में प्रियांशी और रुचिका काफी परेशान थी ... वो तरुण के घर न लौटने से काफी टेंशन में थी .... सच्चाई जानने के बाद तरुण की माँ भी काफी टेंशन में रहा करती थी ... दिन भर तो वो नार्मल दिखने की कोसिस करती थी पर अकेले में वो तरुण के बारे में hi सोचती रहती थी की उसने उसको कितने दुःख दिए हैं और वो उससे किस मुँह से माफ़ी मांगेगी ....

अगली सुबह को जब तरुण की आँख खुलती है तो वो एक चेयर पर hi बैठा हुआ था .... वो रात में चेयर पर hi बेहोश हो गया था और वैसे hi नींद की हालत में चला गया था ....

तरुण : अरे मैं यहाँ कैसे आ गया .... मैं किसके घर पर हु ....

तभी उसको धीरे धीरे सब याद आने लगता है .... उसको तब तक की साडी बातें याद थी जब तक छाया ने उसको हिप्नोतीजेड नहीं किया था ...

ऐसे hi 7 या 8 दिन तक छाया तरुण का काउन्सलिंग सेशन और चलता है पर सेक्स बस एक दिन hi हुआ था दोनों के बीच .... छाया ने अपनी अब तक की साडी पढ़ाई और रिसर्च का सारा ध्यान तरुण को ठीक करने के लिए लगा दिया था .... तरुण को अभी अब पहले की तरह अतीत के भयानक सपने आने बंद हो गए थे .... और वो अब लगभग पूरी तरह से ठीक होने की कगार पर hi था ...

उधर कारन ने कुछ बदमासो की मदद से मयूर का हिसाब किताब करवा दिया था ...

आज क्लिनिक में hi डॉक्टर छाया तरुण का काउन्सलिंग करने वाली थी .... उसने तरुण को अपने स्पेशल वार्ड में ले जा कर कौन्सेलिंग सेशन सुरु कर दिया .... काउन्सलिंग का पॉजिटिव रिजल्ट देख छाया काफी खुस होती है और वो अपने इमोशंस को कण्ट्रोल में नहीं रख पति है और तरुण को गले लगा कर उसके गालो पर एक किश भी जड़ देती है ...

छाया : वाओ तरुण मुझे बहुत ख़ुशी हुयी की मैं तुम्हे ठीक करने में कामयाब रही ....

तरुण : थैंक यू डॉक्टर ... अपने मेरे लिए जो किया है वो शायद hi कोई डॉक्टर अपने पेशेंट के लिए करे .... मैंने तो अब तक सिर्फ सुना था की डॉक्टर भगवन का रूप होते हैं पर आज देख भी लिया .... यू अरे नेक्स्ट तो गॉड फॉर में ....

वो दोनों वापस केबिन में आते हैं जहा दिया बैठी हुयी थी ....

छाया : दिया अब तुम्हारा भाई पूरी तरह से ठीक हो गया है अब तुम लोग चाहो तो अपने घर जा सकती हो ....

दिया ये सुन कर बहुत खुस होती है और वो जोर से तरुण को गले लगा लेती है ...

छाया : अरे अरे अब बस भी करो ... सारा प्यार एहि लुटा डौगी ... वैसे बहुत प्यार है तुम दोनों भाई बहनो में ... एक भाई है जो अपनी बहन की जान बचने के लिए खुद उसके हिस्से की गोली खा लेता है ... और बहन भी काम नहीं है अपने शादी को छड़ निकल पड़ी अपने भाई को ठीक करने के लिए ...

दिया : डॉक्टर ये सब आपके वजह से hi हुआ है की आज मेरा भाई सही सलामत मेरे सामने खड़ा है ... हम कल hi यहाँ से निकल जायेंगे ... ठीक है डॉक्टर मैं चलती हु अभी घरवालों को भी ये खुस खबरि देनी है ....

दिया अपने रूम में आ कर ये खुस खबरि कारन और अपनी माँ को बताती है तो वो बहुत खुस होते हैं ....

इवनिंग को दिया तरुण को उसका मोबाइल निकल कर देती है ....

दिया : लो भाई अब अपने घर वालो से भी बात कर लो वो लोग भी परेशान हो रहे होंगे ...

तरुण : तो अब तक अपने मेरे घर में किसी को नहीं बताया था क्या .....

दिया : नहीं भाई मैंने ये सब तेरी सलामती के लिए किया था ... मैं नहीं चाहती थी की तुझे फिर से कोई आघात पहुंचे जिससे तुम्हे रिकवरी करने में देर हो ....

तरुण : कोई बात नहीं दीदी ... वैसे भी मेरे वह नहीं होने से 2 - 3 लोगो को hi फर्क महसूस हुआ होगा ....

दिया : अब तक तुमने बहुत सह लिया अब और नहीं .... तुम्हारी ताकत तो मैंने संगीत वाले hi दिन देख ली थी ... मैंने इतने दिनों तुम्हे जो भी सिखाया वो सब वास्ते नहीं होना चाहिए अब तुम्हे मेंटली स्ट्रांग बनना होगा .... जुल्म करने वाले hi सिर्फ दोषी नहीं होते बल्कि जुल्म सहने वाले भी अपराधी होते हैं ... अब तुम्हे सबको करारा जवाब देना होगा ...

तरुण : ठीक है मेरी माँ अब जरा मुझे कुछ लोगो से बात भी कर लेने दो ...



दिया : तो मैंने कब मन किया बात करने से ...
 
अपडेट 17

तरुण : ठीक है मेरी माँ अब जरा मुझे कुछ लोगो से बात भी कर लेने दो ...




दिया : तो मैंने कब मन किया बात करने से ...

आगे

तरुण अपना फ़ोन ले कर छत पर चला जाता है और वो shreya,bua और रुचिका से बात किया .... तरुण के साथ हुए हादसे का सुन सभी को बहुत दुःख हुआ और उन्होंने गुस्सा भी जताया की उसने उन्हें खबर तक न की ... तरुण ने जल्द hi वापस लौटने का कह कर फ़ोन कट कर दिया ....

जब वो वापस रूम में आया तो दिया खिड़की के पास बैठ कर बहार के नज़ारे को देखने में व्यस्त थी ....

तरुण : क्या हुआ दीदी जीजू के बारे में सोच रही हो क्या ... अब तक तो उनकी लाइफ में कोई दूसरी आ गयी होगी ... 😂😂

दिया : ाचा बच्चू अब तू मजाक भी करने लगा ... रुक तुझे बताती हु ....

तरुण : मैं क्यों रुकू .... डैम है तो मुझे पकड़ कर दिखाओ ....

और फिर दिया तरुण को मरने के लिए उसके पीछे भगति है ... थोड़े देर टॉम एंड जेरी का खेल चलता है पर दिया उसको पकड़ नहीं पति है तो थक हार कर वो बीएड पर बैठ जाती है ...

तरुण भी उसके बगल में बैठ जाता है ... वो तुरंत तरुण को पकड़ लेती है ...

दिया : अब कहा जायेगा बच्चू ... मैंने तुम्हे पाद लिया न ....

तरुण : पर दीदी ये तो चीटिंग है ....

दिया : एवरीथिंग इस फेयर इन लव एंड वॉर ....

तरुण : ाचा जी ... यानि आपको मुझसे लव हो गया है ....

दिया : मैंने तो वॉर के बारे में बोलै था ...

तरुण : दीदी मेरी वजह से आपकी सुहागरात भी देय है ... चलो जीजू को फटाफट फ़ोन करके एहि बुला लो .... मैं कही होटल का इंतजाम कर दूंगा प् दोनों के लिए ... मेरी तरफ से आप लोगो का हनीमून गिफ्ट होगा ....

दिया : कोई जरुरत नहीं है ये सब करने की .... अब हम कल पहले घर जायेंगे ... उसको बाद तुम्हे तुम्हारे घर सही सलामत भिजवा दूंगी उसके बाद बाकि सब ...

तरुण : आपकी अरेंज्ड मैरिज है या लव मैरिज ....

दिया : अरेंज्ड hi है ...

तरुण : दीदी आप जीजू से ज्यादा प्यार करती हो या हम भाइयो से ....

दिया : ऑफ कोर्स तुम लोगो से ... वर्ण मैं ससुराल को छोड़ यहाँ क्यों होती .... वैसे भी उनसे अभी ज्यादा मिली hi खा हु ...

तरुण : सच बात है शादी के बाद से hi तो मेरे पास लगी पड़ी हो ....

दिया : तूने भी तो मेरी जान बचायी है ....

तरुण : काश आप मेरी सगी बहन होती तो कितना ाचा होता ...

दिया : हमारा रिश्ता खून का नहीं है तो क्या हुआ हमारी रूह एक दूसरे से जुडी है ...

तरुण : दीदी आप बहुत स्वीट हो ...

दिया : ोये तेरी की ... तूने मुझे कब टास्ते कर लिया ...

तरुण : कुछ दिन पहले hi आपने अपने होंठो को टास्ते करवाया था भूल गयी क्या ...

तरुण की बात सुन कुछ लम्हो के लिए दिया शर्मा जाती है ....

दिया : तो क्या एक गफ या बीवी hi किश कर सकती है क्या एक बहन का कोई अधिकार नहीं होता अपने भाई पर ...

तरुण : अरे तो मैंने कब मन किया आप चाहो तो अभी भी कर सकती हो ...

दिया : अरे तो मैं डर्टी हु क्या किसी से ...

तरुण : नहीं नहीं दीदी मैं तो बस मजाक कर रहा था ... अपने आइए भी मेरे लिए हं बहुत कुछ किया है ... चलिए न कही घूमने चलते हैं ... कल तो वैसे भी हमें यहाँ से चले जाना है ...

दिया : तुमने तो मेरे मन की बात छीन ली ... आज सभी के लिए कुछ शॉपिंग भी करनी है ... वैसे मेरी खुद की एक तो दो लिस्ट है जिसमे से मैंने सिर्फ एक काम नहीं किया है जो मैं शादी के पहले करना चाहती थी ....

तरुण : ऐसी क्या विश है दीदी बोल दो ...

दिया : मैं शादी के पाहे एक बार ड्रिंकिंग करके सोबर होना चाहती हु .... घर में तो ये सब पॉसिबल नहीं है तो मुझे तो ऐसा लग रहा था की मेरी ये तो दो लिस्ट ऐसे hi ुनफुलफिलड hi रह जाएगी ....

तरुण : तो इसमें कौन सी बुरी बात ही दीदी आज कल तो college-girl क्या school-gils भी ये सब पिने लगी है ...

वो दोनों रेडी होकर छाया की कार लेकर निकल पड़ते हैं मार्किट की तरफ .... पास का मार्किट तो ज्यादा बड़ा नहीं था पर वह जरुरत की साडी चीजें मौजूद थी ... काफी देर तक वो लोग इधर उधर घूमते रहते हैं और फिर शॉपिंग और उसके बाद कुछ खाने पिने की चीजें पैक करवा कर फाइनली 8 बजे वापस हॉस्पिटल लौट आते हैं ... रस्ते में तरुण ने दो बियर और एक वोडका की बोतल भी ले ली थी .... वैसे तरुण भी कोई हैवी ड्रिंकर नहीं था ... बस एक दो बार उसने कॉलेज में बियर टास्ते किया था ....

10 बजे के करीब इनका ड्रिंकिंग वाला प्रोग्राम सुरु होता है .... सुरु सुरु में तो दिया को बियर की स्मेल और टास्ते पसंद नहीं ात है पर जैसे जैसे उसको हल्का सुरूर चाँधने लागत यही वो गता गाठ बियर और वोडका अपने हलक में उड़ेले जा रही थी .... जिसके परिणाम स्वरुप उसको नशा तेज़ी से चढ़ने लगता है ... तरुण ने ज्यादा नहीं पि थी इसलिए वो बस हलके नशे में था ...

तरुण : लगता है दीदी आपको तो पूरी चढ़ गयी है ...

दिया : भक पागल कही का मुझे कोई नशा वषा नहीं हुआ है ... पर मुझे ये समझ नहीं आ रहा है की ये रूम धीरे धीरे घूम क्यों रहा है ....

तरुण ; अरे दीदी इसको hi तो नशा कहते हैं ... अब तो आप खुस हो की आपकी शादी क पहले की साडी तो दो लिस्ट कम्पलीट हो चुकी

है ...

दिया : खुस तो हु पर ये तुम्हारे दो दो मुँह कब से हो गए हैं ... ाचा है तेरा भी अब दोनों मुँह से खायेगा .... अब तेरे घर वाले भी तुम्हे तंग नहीं कर पाएंगे क्यूंकि अब तू दोनों मुँह से बोलेगा न ....

तरुण : क्या दीदी आप भी मेरा तो एक hi मुँह है ....

दिया : तो क्या मैं झूट बोल रही हु तुमसे ....

तरुण : ाचा अब आप सो जाओ कई रात हो चुकी है कल हमें यहाँ से निकलना भी है ....

दिया : पर मुझे तो नींद hi नहीं आ रही है .... वैसे तू आज बहुत क्यूट लग रहा है ....

तरुण : मेरी माँ अब सो भी जाओ ....

दिया : चुप कर सेल मैं तुम्हारी माँ नहीं हु .... तेरी माँ बहुत गन्दी है वो माँ के नाम पर कलंक है .... छी कोई ऐसी भी माँ हो सकक्ति है जो अपने बेटे के साथ इतना बुरा व्यवहार करे ....

तरुण : ठीक है मेरी प्यारी दीदी अब तो सो जाओ ....

दिया : यार ,ुझे तो जोर की सुसु आयी है मैं ऐसे सो जाउंगी तो बीएड गीली हो जाएगी .... मैं पहले मूत कर आती हु ....

दिया कड़ी होने लगती है पर उसके पाओ लड़खड़ा जाते हैं वो गिरने को होती है पर तरुण उसको थम लेता है ....

दिया : यार सच में लगता है मुझे ज्यादा चढ़ गयी है .... मुझे वाशरूम तक छोड़ दे न ...

तरुण दिया को सहारा देता हुआ वाशरूम तक ले आता है .... वो उसको दिवार के सहारे खड़ा कर देता है ....

तरुण : ठीक है दीदी आप वाशरूम करके आवाज़ दे देना मैं आ जाऊंगा आपको ले जाने के लिए ....

दिया : पागल है क्या मैं गिर जंगी तो मेरा दांत मुँह जहर जायेगा ...

तरुण : तो मन क्या कर सकता हु ....

दिया : अरे मैं भी तो तुझे नहलाती थी न तू आज वैसे hi मुझे सुसु करा दे ... और हाँ आँखें बंद कर लेना वर्ण मैं तेरी बहुत पिटाई करुँगी ....

वाशरूम में देसी स्टाइल की टॉयलेट शीट थी तो तरुण के लिए प्रॉब्लम और भी बड़हन hi था ....

तरुण फिर से दिया को सहारा देकर थोड़ा आगे बढ़ता है ार उसको कमोड के पास पहुंचा देता है ...

तरुण : ok दीदी अब आप कर लो मैं आँखें बंद करके घूम जाऊंगा ....

दिया को सहारा दिए हुए hi वो दूसरी तरफ मुँह कर लेता है .... दिया नशे की हालत में होने की वजह से अपने पजामी की डोरी तक नहीं खोल प् रही थी ....

दिया : यार मेरे से नहीं खुल रहा तू hi खोल दे न बहुत जोरो की लगी है कही लीक न हो जाये ....

अब तरुण क्या करे उसकी समझ में hi नहीं आ रहा था ....

तरुण : पर दीदी अपने hi तो आँख बंद करने को कहा है तो मैं कैसे आपकी पजामी खोलूंगा ..

दिया : अरे अभी आँख खोल ले ....

तरुण ने नीचे झुक कर दिया के पजामी की डोरी को खोल दिया ....

तरुण : खोल दिया दीदी अब कर लो ...

दिया : चल ठीक है अब दूसरी तरफ घूम जा और हाँ आँख बंद कर लियो ....

दिया पजामी को नीचे सरका देती है और पंतय की इलास्टिक में उंगलिया फसा कर धीरे धीरे बैठ कर अपनी टंकी खली करने लगती है .....

एक तेज़ सीटी की आवाज़ तरुण के कानो में पहुँचती है जिसे सुन उसका दिल पीछे घूमने को मचलने लगता है पर वो सख्त लौंडा बनने की कोसिस कर रहा था ....

अपना काम निपटने के बाद दिया कड़ी होने लगती है की उसका पाओ फिसल जाता है .... ऐन वक्त पर तरुण उसको गिरने से बचा लेता है .... तरुण का एक हाथ तो दिया की पीठ पर था पर दूसरा हाथ उसकी नंगी गांड पर था क्यूंकि अभी दिया ने अपनी पंतय ऊपर चढ़ाई hi नहीं थी ....

भले hi दोनों एक भाई बहन से भी बढ़ कर थे पर अभी सिचुएशन hi कुछ ऐसी थी की दोनों कुछ लम्हो के लिए अपने रिश्ते को भूल बहकने लगते हैं .... दिया तरुण की आँखों में ध्यान से देख रही थी तो तरुण उसकी आँखों में देखते हुए उसकेनाराम गद्देदार चूतड़ों को सहलाये जा रहा था ....

जल्द hi तरुण की चेतना लौट जाती है और वो दिया को सीधा खड़ा करके नीचे झुक जाता है और दिया की पंतय को ऊपर चढ़ा देता है .... हलाकि ऐसे करने के दरम्यान उसको दिया की मस्त अनछुई चिकनी छूट के दीदार हो hi जाते हैं .... पंतय को ठीक करने के बाद वो उसकी पजामी भी ठीक कर देता है ....



और फिर बिना कुछ बोले हुए hi वो दिया को बीएड पर ला कर सुला देता है .... दिया को बीएड पर सुलाने के बाद वो भी वाशरूम आ कर टॉयलेट करता है .... दिया को ऐसे हाल में देख उसका लुंड किसी सख्त रोड की तरह खड़ा हो चूका था .... वो इस बात को दरकिनार करके दिया के बगल में hi आ कर लेट जाता है .... दिया अब भी जगी हुयी थी पर कुछ बोल नहीं रही थी ....
 
अपडेट 18

और फिर बिना कुछ बोले हुए hi वो दिया को बीएड पर ला कर सुला देता है .... दिया को बीएड पर सुलाने के बाद वो भी वाशरूम आ कर टॉयलेट करता है .... दिया को ऐसे हाल में देख उसका लुंड किसी सख्त रोड की तरह खड़ा हो चूका था .... वो इस बात को दरकिनार करके दिया के बगल में hi आ कर लेट जाता है .... दिया अब भी जगी हुयी थी पर कुछ बोल नहीं रही थी ....




आगे

कुछ देर बाद तरुण बोलना सुरु करता है ....

तरुण : दीदी सो जाओ काफी रात हो चुकी है ....

दिया : नींद नहीं आ रही ...

तरुण : सोने की कोसिस करोगी तभी तो नींद आएगी ...

दिया : सर दर्द कर रहा ...

तरुण : रुको मैं आपका हेड मस्सगे कर देता हु ...

तरुण दिया के सर पर बाम लगा कर धीरे धीरे सहलाने लगता है जिससे दिया को ाचा महसूस होता है और वो धीरे धीरे नींद में जाने लगती है ...

दिया के सोने क बाद कुछ देर तक तरुण उसका हेड मस्सगे करता रहता है उसके बाद वो भी सो जाता है ....

सुबह को जब तरुण की नींद खुलती है तो वो पता है की दिया पहले hi उठ चुकी थी और वो नार्मल दिख रही थी ....

तरुण (मन में) : ाचा हुआ दीदी का हैंगओवर ख़त्म हो गया ... रात में तो परेशान कर दिया था इन्होने ...

दिया : अरे तू जाग गया ...

तरुण : हाँ दीदी क्यों कोई बात है क्या ....

दिया : रात में ड्रिंक करने के बाद क्या हुआ था ...

तरुण : नहीं तो बस उसके बाद आप सो गयी थी ....

दिया : सच में ... एहि हुआ था न ..

तरुण : हाँ दीदी क्यों क्या हुआ ....

दिया : नहीं कुछ लगता है मैंने कोई सपना देख लिया था ....

तरुण : क्या दीदी कौन सा सपना ....

दिया : छोड़ न वो सब .... ऐसे hi बेकार सा सपना था ....

तरुण (मन में) : अब आपसे क्या बोलू दीदी की रात में क्या क्या हुआ था ... मैं आपको सर्मिन्दा नहीं करना चाहता ....

दिया (मन में ) : मुझे अब भी पक्का यकीन है की रात में वो सब सच हुआ था मैंने कोई सपना नहीं देखा था ... प्रूफ ये है की मेरी पजामी की डोरी दूसरे स्टाइल से बंधी हुयी थी जैसा की मैं कभी नहीं बांधती ...

दिया : चल अब उठ जा आज हमें यहाँ से चलना है ... जल्दी जल्दी तैयार हो जा ... रुक पहले मैं शावर ले लेती हु ....

दोपहर को दोनों भाई बहन छाया से विदा लेकर अपने घर की तरफ निकल पड़ते हैं ....

तरुण के साथ बितायी हुयी वो रात छाया ने अपने यादो के झरोखो में छुपा लिया था ... अनजाने में hi सही पर तरुण की भी ओपनिंग हो चुकी थी ....

वो लोग गए तो थे फ्लाइट से पर उनकी वापसी ट्रैन से हो रही थी ....

उधर आज तरुण के घर में रुचिका ने सबको बता दिया था की तरुण के साथ शादी में क्या हुआ था ...

तरुण के भाई बहनो में जहा richa,rahul और रानी को ये सुन बहुत ख़ुशी हुयी वही प्रियांशी का तो दिल जोर जोर से धड़कने लगा क्यूंकि उसका देखा हुआ सपना सच हो चूका था ...

तरुण की माँ ने सब के सामने तो कुछ जाहिर नहीं किया पर वो तरुण क बारे में सुन कर बहुत टेंशन में आ गयी थी ....

तरुण के दादा ने चुप्पी को तोडा ....

टी. दादा : कैसा है अभी वो और कहा है ....

रुचिका : जी दादा जी वो अभी ठीक है ... उसके दोस्त की बहन ने उसकी अछि देख भल की जिसके वजह से उसकी रिकवरी फ़ास्ट हो पई है .... उसने कहा है की वो जल्द hi वापस आने वाला है ....

बी. चाचा : न जाने वो किस हाल में होगा और कैसे उसने ये सब अकेले सहा होगा ....

तरुण की माँ का चेहरा पूरा ब्लेंक हो चूका था तरुण के बारे में जान कर .... वो अजीब से द्वन्द में घिरी हुयी थी वो छह कर भी अपना कोई इमोशन जाहिर नहीं कर प् रही थी .... तरुण की मंझली चची उसके फेस को ध्यान से देख रही मनो वो उसको किसी के फेस को पढ़ने में कोई महारत हासिल हो ....

म. चची : जरूर इसने वह कोई बड़ा सा कांड किया होगा तभी तो ये सब हुआ वर्ण कोई किसी अनजान को क्यों मरना चाहेगा .... पहले से hi इस लड़के की वजह से हमें बहुत कुछ सहना पड़ा है .... अब वो न जाने यहाँ और क्या क्या मुसीबत लाएगा अपने साथ .... मैं तो कहती हु उसको यहाँ से कुछ हिस्सा दे कर यहाँ से कही दूर भिजवा देना चाहिए ताकि हमें उससे मुक्ति मिल जाये .... अभी की hi बात ले लो जैसे hi उसके कदम हमारे घर में पड़े हमारे कुलगुरु hi चल बेस अब मैं क्या hi बोलू ... वह भी न जाने उसके दोस्त की बहन पर क्या बीत रही होगी जो इस मनहूस की वजह से उसकी शादी के ख़ुशी के मौके पर उसको मातम मानना पड़ा होगा ....

रुचिका (गुस्से में) : चची अपने शायद ठीक से सुना नहीं उसने अपने दोस्त की बहन की जान बचायी है उसके हिस्से की गोली खुद ले कर .... और रही बाद कुल गुरु के मरने की तो इसमें उसका क्या दोष वो तो यहाँ था भी नहीं .... और ये प्लीज मनहूस मनहूस वाला खेल ख़त्म करो वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा .... बड़ा गुमान है न आपको अपने इस (राहुल की तरफ इशारा करके) नाली के कीड़े पर जब आपको इस हरामी की सच्चाई पता चलेगी तो आप इसके मुँह पर थूकना तक पसंद नहीं करोगी ...

टी. माँ : बीटा ये क्या तरीका है बड़ो से बात करने का माफ़ी मानगो तुम चची से .... इसकी तरफ से मैं आपसे माफ़ी मांगती हु दीदी ....

प्रियांशी : कोई जरुरत नहीं है उनकी तरफदारी करने की माँ ... रूचि ने कुछ भी गलत नहीं कहा है .... वो कोई भी बात बिना सोचे समझे नहीं कहती .... आप लोगो की वजह से हमने अपने फूल से भाई के साथ इतना बुरा बर्ताव किया है .... बस अब और नहीं आज के बाद अगर किसी ने भी मेरे भाई की तरफ बुरी नजर डाली तो उसकी आँखें नोच लुंगी ....

टी. पापा : बीटा तुम लोग अभी के अभी चची और राहुल को सॉरी बोलो ....

रुचिका : जी नहीं पापा मैंने या प्रिय ने कुछ भी गलत नहीं कहा अगर ये लोग मेरे छोटे भाई को बुरा भला कह सकते हैं तो इनमे भी सहने की ताकत होनी चाहिए .... जितना ये घर इनका है उतना hi मेरे भाई का भी हक़ है इस घर पर .... पहले मैं नासमझ थी जो खुद hi आप लोगो के बहकावे में आ कर अपने भाई से बुरा बर्ताव किया .... उसको उस गलती की सजा दी जो उसने किये hi नहीं ... अब मैं भी बड़ी हो गयी हु और क्या गलत है क्या सही है इसकी पहचान है मुझे ....

ऋचा : रूचि अब तुम हद्द से आगे बढ़ रही हो तुम्हे अपने से बड़ो से ऐसे बार करने का कोई हक़ नहीं ....

प्रियांशी : हमें समझने से पहले आप खुद अपने गिरेबान में झक कर देखो और सच सच बताना उस मासूम ने आपका क्या बिगाड़ा है .... वो वह जिंदगी और मौत के बीच लड़ कर बाल बाल बचा है और आप लोग उसके ऊपर सिम्पथी जताने के बजाये उसको दूध में पड़ी मख्खी की तरह फेंक देना चाहते हो ... मैंने भी लॉ की डिग्री की है अगर आप लोगो ने उसके खिलाफ आज के बाद कुछ भी किया तो मैं ये भूल जाउंगी की यहाँ मेरा कौन अपना है कौन पराया ...

राहुल : तो तुम हमारे hi पैसे से की गयी पढ़ाई करके हमें hi धमकी दे रही हो ...

रुचिका : तू तो शांत hi रह .... अगर मेरा मुँह खुल गया न तो तुझे चुल्लू भर पानी भी नहीं मिलेगी दुब मरने को ...

टी. दादा : बस बस ये क्या तुम लोगो ने यहाँ तो महाभारत से भी बड़ी लड़ाई छेड़ दी है ... कोई किसी को कही नहीं भगाएगा .... काम से काम मेरे जिन्दा रहते तो ये घर नहीं टूटेगा आगे तुम लोगो की मर्ज़ी ... मेरी भी बात सुन की सब लोग कान खोल कर तरुण भी इस घर का चिराग है और उसके साथ कोई भी आगे से बदसुलूकी नहीं करेगा ..... अब सब लोग चुप चाप खाना खाओ ...

ऐसे hi सबका डिनर समाप्त हुआ .... आज प्रियांशी और रुचिका के जवाबी हमले की किसी ने आशा भी न की थी ...

उधर तरुण के बुआ का घर हो या श्रेया का ससुराल दोनों जगह तरुण की खबर ने मातम सा माहौल बना दिया था ....

सभी लोग तरुण के घर वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे ....

बैक तो तरुण

तरुण और दिया ट्रैन से घर की तरफ लौट रहे थे उन्हें ट्रैन से लगभग 1 दिन का सफर तय करना था ..... उनकी बुकिंग फर्स्ट एक कोच में हुयी थी जो की एक फोर सीटर पर्सनल केबिन टाइप का था ....

ट्रैन टाइम से hi स्टेशन पर आ गयी और उन्होंने अपने लुगाग्गेस अपने सीट पर सेट कर लिए ... अभी उनके अलावा वह कोई और न था .... दोनों के सीट लोअर बर्थ के hi थे तो दोनों आराम से अपने अपने सीट पर बैठ कर आपस में बातें करने लगे .... थोड़े hi देर में तट ने आ कर उनका टिकट चेक किया ....

अगले स्टेशन पर ट्रैन रुकी तो तरुण कुछ खाने पिने की चीजें लेन के लिए उतर गया जब वो वापस आया तो दिया वाली सीट पर 2 नए लड़के बैठे हुए थे ... दिया उनके साथ काफी फ्रेंडली वे में बातें कर रही थी ....

दिया : तरुण इनसे मिलो ये मेरे कॉलेज फ्रेंड्स हैं .... और फ्रेंड्स ये है मेरे भाई का फ्रेंड और मेरा भाई तरुण ....

तरुण ने उनसे हाथ मिलाया ....

दिया : वैसे तुम लोग शादी म क्यों नहीं आये थे मैं तुम लोगो से नाराज़ हु ....

लड़का 1 : यार दिया तुम तो जानती hi हो की मैंने अपने पापा का बिसनेस संभाला हुआ है तो उसके hi सिलसिले में उस वक्त हम फॉरेन टूर पर थे .... सात्विक और मेरे पापा का बिसनेस कंबाइंड है इसलिए ये भी मेरे साथ hi था ... सॉरी हाँ हम लोग तुम्हारे शादी में नहीं आ सके ... कोई नहीं आज हम मिल hi गए हैं तो एहि पर छोटी सी पार्टी कर लेते हैं ....

दिया : पार्टी ... पर यहाँ कैसे ....

सात्विक : यार इसमें टेंशन क्या है ... बी लक तुम दोनों की नीचे वाली सीट है और हम दोनों की ऊपर वाली और 1सत एक कोच होने की वजह से यहाँ प्राइवेसी भी है ... शाम होने hi वाली है और कुछ देर के बाद यहाँ कौन आएगा ...

दिया : पर यहाँ पार्टी करने लायक चीजें कहा से होंगी ....

लड़का 1 : अरे यार दिया तुम शायद भूल रही हो की मैं कॉलेज के टाइम से hi जुगाड़ लगाने में माहिर रहा हु ... अगले स्टेशन पर ट्रैन करीब आधे घंटे के लिए रुकेगी तो ट्रैन के रुकते hi मैं हल्का फुल्का अर्रंगे कर hi लूंगा .... बस तुम हाँ तो करो ...

दिया एक बार तरुण की तरफ देखती है जो की बस खिड़की से बहार का नजारा देखने में बिजी था ...

दिया हाँ कर देती है और अगले स्टेशन पर दोनों लड़के उतर कर खाने पिने की चीजें ले आते हैं ....

सात्विक : बस सारा अरेंजमेंट हो चूका है अब बस 10 बजे तट की फाइनल विजिट होगी उसके बाद हम पार्टी कर सकेंगे ... वैसे पार्टी की एक और खास वजह है क्यूंकि आज मेरा बर्थडे भी है ...

दिया : ओह सॉरी मैं तो भूल hi गयी थी हैप्पी बर्थडे ...

दिया ने सात्विक को गले लगा कर विश किया ....

10:30 बजे तट ने आ कर उनका टिकट चेक किया उसके बाद उन्होंने केबिन को लॉक कर दिया ....

जल्दी hi सभी ने पार्टी सुरु की .... सत्वक ने केक कटा और सबसे पहले उसने दिया को केक खिलाई .... और दिया ने थोड़ा सा केक खुद खाया और वापस सात्विक के hi मुँह में दाल दिया .... तरुण ये सब बस देख रहा था उसको पता नहीं क्यों दिया का यु इन लोगो के साथ घुलना मिलना पसंद नहीं आ रहा था .... अब ये दिया के लिए एक भाई का प्यार था या इनलोगो से जलन पता नहीं ....

उसके बाद थोड़े देर नाच गाने का प्रोग्राम हुआ .... दिया भी खुल कर दोनों के साथ ठुमके लगा रही थी और तरुण बस एक मूक दरसक बना हुआ एक कोने में हल्का फुल्का डांस कर रहा था ....

नाच गाने का दौर ख़त्म होने के बाद सभी ने साथ मिलकर खाना खाया .... सात्विक बर्थडे बॉय था इसलिए कभी कभी दिया भी उसको अपने हाथो से खिल अड़े रही थी तो कभी वो भी अपने हाथो से दिय ाको खिला दे रहा था ... तरुण बस ये सब देह मन hi मन जल भून रहा था .... उसका बस चलता तो एहि दोनों को सुला कर उनकी g@@@d मार लेता ....

खाने खिलने का दौर ख़त्म होने के बाद तीनो लग गए अपने कॉलेज की कहानी शेयर करने और तरुण बैठा बोर हुए जा रहा था ....

दिया : भाई लगता है तुम बोर हो रहे हो .... वैसे भी रात भी हो चुकी है ... तुम ऐसा क्यों नहीं करते की तुम ऊपर वाले सीट पर जाकर सो जाओ .... हम बस अभी कॉलेज के दिनों की याद में लगे पड़े हैं ....

वो तरुण को अपने सीट के ऊपर वाले सीट पर सो जाने का इशारा करती है ....

वो दोनों लड़के अभी भी दिया वाली hi सीट पर बैठे बातें किये जा रहे थे .... तरुण अभी जहा पर सोया था वह से वो लोग तो नहीं दिख रहे थे बस उनकी आवाज़ें हलकी हलकी आ रही थी क्यूंकि अब उन्होंने धीमी धीमी आवाज़ में बैठें करना सुरु कर दिया था ....

तरुण को नींद तो नहीं आ रही थी पर मन मार कर वो सोने की कोसिस कर रहा था ...

करीब आधे घंटे के बाद तरुण को हलकी हलकी नींद आणि सुरु hi हुयी थी की उसके कानो में दिया की सिसकती हुयी आवाज़ आयी .... तरुण अभी लगभग आधी नींद में था .... लड़का 1 भी अभी साथ वाली उप्पेर बर्थ पर आ कर सो चूका था ....

"ोूउउउक्छ्हः सात्विक मैंने तुम्हे मन किया था की कोई बदमासी नहीं ... आज तुम्हारा बर्थडे है इसका मतलब ये नहीं की तुम कुछ भी करोगे .."

"सॉरी ... यार बस कण्ट्रोल नहीं हुआ ... अक्सर हम कॉलेज के दिनों में ऐसे hi एक दूसरे की बर्थडे मनाया करते थे ... "

"ाचा ाचा ठीक है लो कर लो मैं मन नहीं कर रही ..."

उसके बाद शान्ति छ जाती है और धीरे धीरे तरुण को फिर से नींद आ जाती है ....

करीब 1 बजे तरुण की नींद खुलती है .... वो पास वाले उप्पेर बर्थ की सीट पर देखता है वह कोई नहीं था ...

वो नीचे झाँक कर देखता है तो वो दोनों लड़के भी नहीं थे न hi दिया वह थी .... उसके मन में पल भर में hi गलत गलत ख्याल आने लगते हैं ... वो खुद को दिया के लिए काफी पोस्सेसिवे फील कर रहा था ....

तरुण (मन में ) : ये दिया दीदी कहा चली गयी ... ये लड़के भी नहीं दिख रहे आखिर वो लोग इतनी रात को कहा जा सकते हैं ... मुझे दिया दीदी से ऐसी उम्मीद नहीं थी .... आने दो मैं उनसे जिंदगी भर कभी बात hi नहीं करूँगा .... क्या दीदी उनके साथ .... छहियी मुझे तो ऐसा सोचने में भी घिन्न आ टी है .... पता नहीं दीदी कैसे .... छहियी ..... वो भी दो दो के साथ एक साथ ....

तरुण को बहुत hi बुरा फील हो रहा था ....



थोड़े देर बाद उसका गेट खुलता है जिससे दिया अंदर आती है ..... उसने अपना फेस वाश किया हुआ था .... वो अचानक से तरुण को नीचे अपने सीट के पास खड़ा देख थोड़ी हड़बड़ा सी जाती है ....
 
अपडेट 19

थोड़े देर बाद उसके गेट खुलता है है जिससे दिया अंदर आती है ..... उसने अपना फेस वाश किया हुआ था .... वो अचानक से तरुण को नीचे अपने सीट के पास खड़ा देख थोड़ी हड़बड़ा सी जाती है ....




आगे

दिया : अरे भाई तुम उठ गए ....

तरुण कुछ नहीं बोलता बस गुस्से से दिया की तरफ देख रहा था .... दिया तरुण की आँखों में गुस्से की झलक देख घबरा सी जाती है ....

दिया : क्या हुआ अभी तुम मुझे गुस्से से क्यों देख रहे हो ....

तरुण (गुस्से से ) : तो गुस्सा न होऊं तो क्या आपकी आरती उतारू ... मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी ... मुझे तो आपको दीदी कहते हुए भी शर्म आ रही है ...

दिया : तुम ऐसा क्यों कह रहे हो तुमने आज तक तो कभी मुहसे ऐसे बात नहीं की ... खुल कर बताओ तुम कहना क्या चाहते हो ....

तरुण : कितनी बेशर्म हो आप ... मेरे hi मुँह से सुन्ना चाहती हो ... मेरा मुँह न खुलवाओ मेरा मुँह खुल गया न तो आपके कान से खून निकलने लगेगा ....

दिया : अरे तो बताओ न की तुम ऐसे गुस्से में क्यों हो ....

तरुण : आपके दोनों यार अब तक नहीं आये .... कितनी रंगरेलिया मन ली अपने उनलोगो के साथ की इतनी बुरी वो थक गए हैं ....

अभी तरुण ने इतना कहा hi था की दिया जोर जोर से ठहाके लगा कर हसने लगी ....

उसको यु हस्ता देख टाउन और भी गुस्सा हो जाता है ... उसको मन तो कर रहा था की व दिया को चलती ट्रैन से बहार फेंक दे पर वो छह के भी ये नहीं कर सकता था .... वो दांत पिस्ता हुआ दिया को ट्रैन की गेट से सत्ता देता है और धीरे धीरे उसके गर्दन को पकड़ कर उसको ऊपर को उठाने लगता है ... दिया को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है तब जा कर वो उसको छोड़ता है ....

वो नीचे गिर कर जोर जोर से सांस लेने लगती है ...

दिया (हाफति हुयी ) : रुक क्यों गए जान ले लेते न मेरी ... पर पहले सच्चाई तो सुन लो ....

तरुण : अब सुनने समझने को बचा hi क्या है सब कुछ तो क्लियर दिख रहा है .... आने दो उन् हरामियों को उसके बाद यहाँ चार लाशें बिछेंगी ....

दिया : चार वो कैसे ....

तरुण : पहले मैं उन् दोनों हराम के पिल्लो को मरूंगा उसके बाद आपको और आपको मरने के बाद मैं क्या करूँगा जी कर तो खुद की भी जान ले लूंगा ....

दिया : इतना प्यार करता है तू मुझसे ....

तरुण : पता नहीं वो सब तो पहले था अब आपको तो दीदी कहने में भी शर्म महसूस होने लगी है ...

दिया पहले गेट को अचे से लॉक करती है और फिर गेट के पास वाला पर्दा लगा देती है ...

तरुण : अब गेट क्यों लगा रही हो अपने यारो को बचाना चाहती हो क्या ....

दिया : देखो मैं कोई भगवन तो हु नहीं की तुम्हे पास्ट के सरे इन्सिडेंट्स किसी दिव्या दृस्टि के सहारे दिखला सकू .... इसलिए खुद को सही साबित करने का मेरे पास सिर्फ एक hi तरीका है ....

और फिर दिया ने वो किया जो तरुण कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था ..... दिया ने धीरे धीरे कर के खुद के सरे कपडे उतर कर जन्म जाट नंगी हो जाती है ...

तरुण को तो खुद की आँखों पर भरोसा hi नहीं हो रहा था की दिया कुछ ऐसा कर सकती है ....

दिया (अपनी छूट की तरफ इशारा करके ) : लो खुद hi छू कर देख लो की मैं सच बोल रही हु या झूट .... अगर फिर भी बिस्वास न हो तो मेरे साथ वो सब कर के भी देख लो की मैं वर्जिन हु या नहीं .... मैं सब कुछ सह सकती हु खुद बस खुद पर लगाया ऐसा घटिया इल्जाम नहीं सह सकती ....

जो दिया अब तक हस्ते हुए जवाब दे रही थी उसकी आँखें अभी आंशू से भीगे हुए थे ... उसको रोटा देख तरुण का दिल भी पसीज जाता है ...

वो दिया के पास जा कर उसकी आँखों को अपने हाथो से पोछने लगता है ... दिया रट हुए उसके हाथ को हटाने की कोसिस करती है पर तरुण नहीं मंटा .... उसको सिसकते हुए देख तरुण को बुरा लगने लगता है ...

दिया बहुत बुरी तरह सिसक सिसक कर रोने लगती है ... तरुण को जब दिया को चुप करने का कोई तरीका समझ नहीं आता है तो वो दिया के होंठो पर अपने होंठ चिपका देता है .... दिया कुछ देर तो इसका विरोध करती है पर फिर वो खुद भी तरुण को किसिंग में सपोर्ट देने लगती है ....

उनका ये किश करीब 4-5 मिनट तक चलता है .... उसके बाद दोनों अलग होते हैं ....

तरुण : लो जल्दी से अपने कपडे पहन लो फिर मैं गेट खोल कर उन्हें अंदर आने देता हु ....

दिया : अरे पागल वो लोग तो लास्ट स्टेशन पर hi उतर गए ... उन्हें वही उतरना था तो उतर गए .... उन्हें सी ऑफ करने के बाद hi मैं बहार से गेट लॉक कर के वाशरूम गयी थी ... क्यूंकि तुम तो गहरी नींद में सोये हुए थे ...

तरुण : पर वो उनके साथ इतना चिपकना डांस वगैरह करना वो सब क्या था ... और तो और मेरे सोने के बाद आप उस सात्विक को किस लिए मन कर रही थी और सिसक रही थी ....

दिया : अरे यार वो मेरे स्कूल छुम कॉलेज फ्रेंड था तो उससे थोड़ी क्लोसनेस्स हो गयी है ... गलत मत समझना वो और मैं बस अचे फ्रेंड hi हैं .... और रात में तुमने जो सुना वो सिर्फ हमारा बर्थडे मानाने का एक तरीका है जिसमे जो बर्थडे बॉय या गर्ल होता था वो दूसरे वाले के दोनों गाल की चिकोटी कट्टा था ... तो वही उसने मेरे गाल की चिकोटी कटी थी और मैं ये हमारा खुद का बनाया रूल भूल चुकी थी इसीलिए मैंने सिसकते हुए उसको मन किया पर याद आते hi फिर उसको करने की इजाजत दे दी ... उन्हें थोड़े देर बाद hi उतरना था तो वो लोग उतर गए ....

तरुण : पर ये सब करने की जरुरत क्या थी और आप मुझे क्यों इग्नोर कर रही थी ....

दिया : वो डॉक्टर छाया ने तुम्हारे ठीक होने के बाद एक बार तुम्हे टेस्ट करने के लिए ऐसा करने को कहा था ... उनके अनुसार मुझे तुम्हे जलना होगा किसी दूसरे की तरफ अत्त्रक्ट होने का नाटक करते हुए .... अब मैं किसी अजनबी आदमी को कहा से ढूंढ़ती .... किस्मत से वो दोनों यहाँ मिल गए तो मैंने तुम्हे जलने की प्लानिंग कर ली ... और रिजल्ट भी काफी हद्द तक पॉजिटिव hi आया है .... बस ऐसे hi तुम्हे अपने गुस्से को अपना हथियार बना कर अपने घर वालो को उनके किये की सजा देनी है .... इसके लिए तुम्हे बहुत सरे तरीके अपनाने पद सकते हैं .... क्यूंकि सब की कमजोरिया अलग अलग होती है ... किसी की कमजोरी पैसा होती है तो किसी की कमजोरी उसका रुतबा तो किसी की शारीरिक भूख .... अब ये तुम्हारे ऊपर है की तुम कैसे किसी की कमजोरी का इस्तेमाल कर के उसकी कमजोरी को उसके hi खिलाफ उसे करोगे ... वैसे तुम उन्हें मेरे साथ देख इतना जल क्यों रहे थे ...

तरुण : मैं क्यों जलने लगा ... आपकी लाइफ है आप जिसके साथ जो भी करो मुझे क्या ....

दिया : ाचा जी वो तो तुम्हारे चेहरे को देख कर hi मालूम हो रहा था मुझे उनके साथ देख कर .... तुम्हे जलते हुए देख कर तो लग रहा था की तुम मेरे भाई नहीं बल्कि मेरे बॉयफ्रेंड या हस्बैंड हो ....

तरुण : ठीक है अब भाई के सामने नंगी क्यों कड़ी हो ....

दिया : अब जब नंगी हो hi गयी हु तो कुछ मस्ती भी कर लेती हु .... मेरी बचपन से hi ये एक डार्क फंतासी रही है की मैं ट्रैन में किसी के साथ थोड़ी मस्ती करू .... मेरा आज तक कोई बॉयफ्रेंड तो रहा नहीं .... पति से तो उम्मीद नहीं लग रही .... आज जब ऐसी हालत में आ hi चुकी हु तो क्यों न तुम मेरी हेल्प कर दो .... तुमने मेरी जान भी बचायी है तो उसके लिए एक छोटी सी ट्रीट समझ कर मेरी ख्वाहिश पूरी कर दो .....

तरुण : पर मैं तो आपका छोटा भाई हु न तो मैं कैसे ये सब कर सकता हु ....

दिया : ाचा जी किश कर सकते हो बहन की छूट गांड सब देख सकते हो ... उसको दुसरो के साथ इमेजिन करके जल सकते हो पर मेरी एक छोटी सी ख्वाहिस नहीं पूरी कर सकते हो ... मैं कौन सा तुम्हे रियल सेक्स करने को कह रही बस हम ओरल वाली करेंगे ....

तरुण : पर आप मेरी दीदी हो ... मेरे भाई जैसे दोस्त की बहन के साथ मैं ये सब कैसे कर सकता हु .... मैं उसको धोखा नहीं दे सकता ....

दिया : अब तुम करोगे या बगल के कम्पार्टमेंट में से किसी को बुला लू ... वैसे मेरी कमसिन काया देख तो शायद कोई नामर्द भी न मन कर सके ....

थोड़े देर तक तरुण किसी सोच में गम रहा .... तरह तरह के ख्याल उसके मन में आ रहे थे ...

तरुण : नहीं दीदी .... ी ऍम रेडी ... क्या क्या करना है ....

दिया : ये हुयी न मर्दो वाली बात ....

दिया वही अपनी सीट पर लेट जाती है और इशारे से तरुण को बुलाती है ....

दिया : अरे बाबा ऐसे नहीं तुम भी पुरे नंगे हो कर आओ ... जब मैं नंगी हु तो तुम कपड़ो में क्यों हो ...

तरुण ने भी एक एक करके अपने सरे कपडे उतर दिए और वो भी दिया के ऊपर लेट गया और उसके होंटो पर अपने होंठ रख देता है और वो दोनों एक लम्बे और मधुर किसिंग में खो जाते हैं ...

दिया ने अपने जीभ को तरुण के मुँह में दाल दिया ... वो आज अपने सरे पोर्न नॉलेज का बखूबी इस्तेमाल कर लेना चाहती थी .... सुहागरात से पहले वो आज चलती हुयी ट्रैन में रिहर्सल कर रही थी ...

काफी देर के बाद दोनों की किसिंग और स्मूचिंग का दौर ख़त्म होता है ...

अब तरुण को सीट पर लिटा कर दिया उसके ऊपर आकर अपने दायी चुकी के निप्पल को उसके मुँह में दे देती है ... तरुण बड़े मज़े से किसी बच्चे की तरह उसके निप्पल को चूसने लगता है ... तरुण ने श्रेया की चुकी को भी पहले चूसा तह एस्लिये वो अपने ज्ञान का सदुपयोग आज दिया के साथ कर रहा था ... तरुण की चुकी चुसाई से दिया की छूट में भी पानी आने लगा था ....

दिया : यार तेरा शैतान तो काफी गुस्से में लग रहा है ...

तरुण : शायद वो भी आपसे प्यार करना चाहता हो ....

दिया : और नहीं तो क्या ... जब तुमसे प्यार कर सकती हु तो उसको क्यों छोड़ू आखिर मेरे भाई का सबसे खास part जो है ....

अब दिया और नीचे सरक कर तरुण के सुपडे को चुम लेती है ...

तरुण : दीदी ये तो चीटिंग है आप तो अपनी मलाई चख रही हो मुझे भी तो आपकी चासनी का स्वाद ले लेने दो ...

दिया : अरे सब तेरा hi है आज ... तू भी क्या याद करेगा की किस दिलदार सेक्सी बाहन से पला पड़ा था ...

वो उठ कर तरुण के मुँह पर बैठ जाती हैऔर फिर 69 पोजीशन में लेट कर तरुण के गुस्साए लुंड को चूमने छटने लगती है .... तरुण भी दिया के छूट को चुम कर उससे रिस रहे रास को अमृत समझ कर चाटने लगता है ...

दोनों एक दूसरे के जिस्म के सबसे संवेदनशील अंग को प्यार जताने में जुट जाते हैं .... अब दिया तरुण के लुंड को मुँह में भर कर ब्लोजॉब देने लगती है वही तरुण उसकी चिकनी छूट को फैला कर उसका रास चखने का मज़ा ले रहा था .... कभी कभी वो दिया के गांड के सुनहरे भूरे छेड़ को भी चाट ले रहा था जिससे दिया और भी जोश में अपना काम किये जा रही थी ....

जैसे की हर खेल का अंत होता है वैसे hi इस खेल का भी अंत हुआ .... तरुण के लुंड ने जोर जोर से गाढ़ी मलाई छोड़नी सुरु की जिसे दिया किसी भूखी बिल्ली की तरह चाट जाती है .... दिया इस सुख से काफी तृप्त सी महसूस करती है और वो दूसरी बार अपना सारा रास तरुण इ मुँह पर उड़ेलने लगती है .... तरुण भी दिया के छूट रास का ज्यादातर हिस्सा अपने हलक में उड़ेल लेता है और फिर दोनों कुछ देर वैसे hi पड़े रहते हैं ...

अब दिया उठ कर तरुण के बगल में लेट जाती है ....

दिया : यार मज़ा आ गया ... तुमने मुझे आज बाउट ख़ुशी दी है .... ी लव सो मच ....

तरुण : लव यू तू दीदी ... आपके साथ भी ये सब करके बहुत ाचा लगा ...

दिया : सॉरी भाई इसके आगे मैं तुम्हारे साथ कुछ नहीं कर सकती ... मैं एक व्याहता हु और मेरा जैमर मुझे इससे आगे बढ़ने की गवाही नहीं देता ... काश की मैं तुम्हे वो सारा सुख दे सकती ....

तरुण : कोई नहीं दीदी मैं इतने से hi काफी खुस हु मुझ और की कामना भी नहीं है ....

दिया : यू अरे सो स्वीट बाबू ... चल न साथ में शावर ले लेते हैं अभी 3बज रहे हैं ... इतनी रात को कौन सा कोई जगा हु ाहोगा हमें देखने को ....

तरुण : पर यार दीदी ये काफी रिस्की हो सकता है ....

दिया : तूने मेरे दो सीक्रेट विशेष पुरे किये हैं तो उसके लिए ये बोनस समझ लो ....

तरुण : वो तो ठीक है पर हम वह क्या ऐसे hi नंगे जायेंगे ....

दिया : पागल है क्या ... तेरी दीवानी हु कोई रंडी थोड़े हु ...

उसके बाद वो दोनों अपने कपडे पहन कर दूसरे कपडे लेकर एक hi वाशरूम में घुस जाते हैं .... वह शावर लेने के दौरान भी दोनों एक दूसरे के जिस्मो से प्यार जाताना नहीं भूलते ....

शावर लेने के बाद दूसरे कड़े पहन कर वो वापस अपने रूम आ जाट हैं .... वो खुस थे की किसी ने उन्हें ऐसा करते देखा नहीं था ....



दिया अपने सीट को अपने पहले के पहने हुए कपडे से साफ़ करती है और फिर दोनों तरुण के सीट पर किसिंग करते हुए आराम से सो जाते हैं ....
 
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