Zindagi : ek anjana safar - Page 6 - SexBaba
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Zindagi : ek anjana safar

अपडेट 47

तरुण : गुड नाईट दीदी ... टेक केयर ...

अपनी बहनो से बात करके तरुण को बहुत ाचा फील होता है वही उसकी आँखों में राहुल के लिए बेइंतेहा गुस्सा भी झलक रहा था .... अगर राहुल सच में उसके करीब होता तो उसको बीच से चिर डालता ....

आगे

तरुण के घर में उसकी तीनो बहने तो अब निश्चिंत से सो सो रही थी पर एक शक्श की आँखों से नींद गायब थी ये और कोई नहीं तरुण की माँ सुमित्रा थी ....

सुमित्रा (मन में) : क्या मैं सबके सामने अपनी बेटियों के लिए स्टैंड ले पाऊँगी ... नहीं नहीं मुझे लेना hi होगा अपनी इसी कमजोरी की वजह से एक प्यारे से बेटे को तो खो hi चुकी हु पर मैं किसी कीमत पर अपनी बेटी को नहीं खोऊंगी ..... मैं अपनी बेटियों के लिए साडी दुनिया से लड़ जाउंगी ..... उस बलखाती नागिन के फैन को कुचलना जरुरी है पर ये काम मैं अकेली नहीं कर सकती .... क्या मुझे दीदी का सपोर्ट लेना चाहिए .....

काफी सोचने विचरने के बाद सुमित्रा अपनी ननद यानि की तरुण की बुआ को कॉल लगाया .... तरुण की बुआ ने जब अपने मोबाइल में अपनी भाभी का कॉल देखा तो एक पल के लिए वो शॉक सी हो गयी क्यूंकि उनकी आपस में नहीं बनती थी अचे से और ये सब तरुण की वजह से था .... तरुण की बुआ ने बहुतो बार तरुण की माँ को अपने बेटे से ऐसे मिस्बेहावे करने से मन किया था पर वो तरुण को प्रताड़ित करने के कोई मौका hi नहीं छोड़ती थी .... इसी वजह से दोनों में बस फॉर्मेलिटी के लिए hi बात चित होती थी ....

तरुण की बुआ प्रिय ने पहली बार कोई रिस्पांस नहीं दिया तो सुमित्रा ने दूसरी बार रिंग किया इस बार प्रिय ने कॉल पिक किया ....

प्रिय : क्या हुआ इतनी रात को क्यों परेशान कर रही हो आप ...

सुमित्रा : सॉरी दीदी पर बात hi कुछ ऐसी है की आपको परेशान करना पड़ा .... मुझे आपकी हेल्प की जरुरत है ....

प्रिय : मैं आपकी बात क्यों मनु .... आज तक अपने मेरी कोई बात मणि है क्या .... मैंने आज तक तरुण के लिए आपसे इतनी बार मिन्नत की पर अपने क्या किया ... मुझे आपसे कोई वास्ता नहीं आपको जो करना है खुद कीजिये ... Bye

सुमित्रा : सॉरी दीदी ... मैं खुद बहुत सर्मिन्दा हु की मैंने अपने खुद के बेटे के साथ जानवरो जैसा बर्ताव किया और इसकी सजा मुझे नरक hi जाना है .... पर आज बात उसकी नहीं ऋचा की है ....

और फिर सुमित्रा ने अपनी ननद प्रिय को वो साडी बात बता दो जो उसको उसकी बेटियों में बताया था और उसने प्रिय को ख़ुशी और अपने ससुर के बिच के जिस्मानी रिश्ते के बारे में भी बता दिया ....

प्रिय : भाभी मुझे नहीं पता था की वो चुड़ैल इतनी घटिया मानसिकता की है उसके hi वजह से मेरे तरुण को इस घर में इतना कुछ सहना पड़ा .... पर पापा को क्या सुझा छी मुझे तो अब उस घटिया इंसान को अपना बाप कहने में भी शर्म सो महसूस होती है .... भाभी ऋचा और मेरी बच्चियों के लिए आप बेफिक्र रहो .... इस चुड़ैल को मज़ा चखना अब मेरा काम है इसके किये की सजा देना hi मेरा मकसद है ....

सुमित्रा : सुक्रिया दीदी ... बाकि कल सुबह आप जल्दी आ जाना क्यूंकि पता नहीं कब उस डायन को उसके बेटे की हालत के बारे में पता चलेगा तो वो कौन सा नया बखेड़ा खड़ा करेगी .....

*********************

अगली सुबह को सुमित्रा की नींद बहार हो रहे शोर सरबे के साथ खुलती है वो बहार जाती है तो पति है की उसकी मंझली जेठानी ख़ुशी राहुल के रूम में है और जोर जोर से चिल्ला रही है .... रूम में hi उसका पति लक्समन भी खड़ा है जो सर झुकाये हुए उसकी बातो को सुन रहा है ....


खुसबू : देखो देवर जी आपकी चुड़ैल बेटियों ने मेरे फूल से बच्चे का क्या हाल कर दिया है .... ऐसे भी कोई किसी अपने को मरता है क्या .... पहले खुद hi मेरे बेटे को रिझा कर अपने रूम में बुलाया और जब इसने उनकी बात मैंने से मन कर दिया तो अपनी डायन बहन के साथ मिल कर इसको खूब मारा और तो और रात को किसी को इसके बारे में बताया भी नहीं .... मैं पुलिस को कॉल करने जा रही हु अब वो लोग hi सही से इसका हल निकालेंगे .... इसके पापा नहीं रहे तो तुमलोग हमें दबाओगे hi .... इससे ाचा होता की तुमनलोग हम तीनो माँ बेटी को ज़हर hi दे दो इससे घर की साडी संपत्ति भी तुम्हारी हो जाएगी ...

लक्समन : नहीं भाभी प्लीज ऐसा न कहो और प्लीज पुलिस को मत बुलाओ ... मैं ये सब पापा पर छोड़ता हु वो इस घर के बड़े हैं और घर के मुखिया भी तो वो जो भी सजा देंगे हमें वो मंजूर होगा ... अब जब मेरी बेटियों ने गलती की hi है तो उन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए ....

खुसबू : ऐसे नहीं पहले मैं तुम्हारे बेटियों की हालत मेरे बेटे जैसे hi करुँगी उसके बाद न्याय अन्याय का फैसला होगा ....

सुमित्रा : जी नहीं पहले इनका जुर्म तो साबित हो जाये की सच में गलती किसकी है ....

लक्समन : सुमित्रा तुम होती कौन हो हमारे घर के बारे में फैसला लेने वाली ... भाभी हमसे बड़ी हैं उन्हें भी सही गलत का फैसला लेने का हक़ है .... भाभी आप पहले अपने मननकी कर लो उसके बाद पापा के पास जायेंगे ..... भाभी ये लो डंडा ....

खुसबू लक्समन के हाथ से डंडा ले लेती है और गुस्से से फुफकारती हुयी सीढिया उतर कर रुचिका का गेट नॉक करती है ....

गेट प्रियांशी खोलती है .... अपनी मंझली चची के हाथो में डंडा और बाकि लोगो को रूम के बहार देख वो सारा माजरा समझ जाती है ....

प्रियांशी : क्या हुआ चची आपको किस्से काम है ....

खुसबू : पूछ तो ऐसे रही है जैसे कुछ पता hi न हो जल्दी से अपनी दोनों बहनो को नीचे भेजो ....

प्रियांशी : ठीक है चची ....

खुसबू पेअर पटकती हुयी ग्राउंड फ्लोर पर आ जाती है ....

सुमित्रा : देखिये जी जो कुछ हो रहा है वो गलत हो रहा है गलती ऋचा की नहीं राहुल की थी वो hi ऋचा के रूम में जाकर उससे जबरदस्ती करने लगा जिसके बाद रुचिका ने उसको बचने के लिए राहुल को मारा है .... अगर उसने ये नहीं किया होता तो आज आपकी बेटी किसी को मुँह दिखने के काबिल न रहती ....

लक्समन : तुम चुप रहो मुझे मत सिखाओ क्या सही है और क्या गलत उन्होंने राहुल को ऐसे बेरहमी से मार कर ये साबित कर दिया है की वो गलत थी .... उन्होंने अपनी गलती छुपाने के लिए hi उसको ऐसे बुरे तरह से मारा है ... अब उन्हें भाभी hi उनके किये की सजा देंगी ... बस फैसला हो चूका है अब तुम जा सकती हो ....

तभी वह तरुण की बुआ प्रिय आ जाती है ....

प्रिय : वह भाई वह क्या फैसला सुनाया है ... आज तक अपने बेटे पर हो रहे अन्याय के खिलाफ तो एक शब्द भी न निकले आज अपने भतीजे राहुल के लिए तो बड़ा सॉफ्ट हेअरटेड हो रहा है और बड़ा टो दिखा रहा है ... कही वो तेरा hi बीटा तो नहीं है क्यूंकि मंझले भैया की तो वो औलाद hi नहीं है है ....

लक्समन : देखो दीदी आपको इज्जत करता हु इसका ये मतलब नहीं की आप जो मन में आये बोलो .... इस घर के निजी मामले में बोलने वाली आप होती कौन हो ....

प्रिय : वह लक्समन आज तूने साबित कर दिया की तू भी अपने गंदे और घटिया बाप की पैदाइश है ...

तभी वह तरुण का दादा बलबीर आ जाता है और अपनी बेटी के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ चिपका देता है ...

तब तक वह Richa,Rani,ruchika और प्रियांशी भी आ जाती है ....

ऋचा : दादा जी बुआ पर हाथ उठा कर अपने सही नहीं किया गलती हमने की है तो सजा बुआ को क्यों ....

रानी : ये और कर hi क्या सकते हैं छोटी आखिर बुआ ने सच जो कहा है और सच तो हमेसा कड़वा hi होता है ....

खुसबू (जोर से चिल्लाते हुए) : चुप हो जाओ रानी .... वर्ण मैं भूल जाउंगी की तुम मेरी बेटी हो .....

रानी : चिल्लाओ मत माँ चिल्लाना मुझे भी आता है .... बचपन से hi इस घर में अन्याय होता देखती आ रही हु तो आज न्याय की उम्मीद hi कहा है ... जानना चाहती हो अपने बेटे का सच तो हाँ वो हरामी बहुत hi घटिया इंसान है .....

खुसबू : तुम्हारे झूट कहने से मेरा बीटा गलत साबित नहीं हो जाता ....

प्रिय : वह अब सच बोल रही है महाराजा हरिश्चंद्र की बेटी .... अरे तुझमे कुछ शर्म हाय है की नहीं डायन .... और पापा आप आपको इस डायन में ऐसा क्या दिख गया की तीर्थ करने के उम्र में यहाँ अपनी बहु के साथ में hi खत कबड्डी खेलने में लगे हुए हो ... शर्म आती है मुझे आपको अपना बाप कहते हुए .... ठीक हुआ जो माँ मर गयी वर्ण आपको ऐसे देख कर हर रोज मर रही होती .... बहु भी बेटी का hi रूप होती है उसके साथ ऐसी घटिया हरकत .... छियई ....

लक्समन : तुम कहना क्या चाहती हो दीदी ....

प्रिय : यही सच है लक्समन की तुम्हारी पूजनीय भाभी और तुम्हारे पूजनीय पिता आपस में न जाने कितने सालो से शारीरिक सम्बन्ध बनाये हुए हैं और राहुल इनकी hi औलाद है क्यूंकि मंझले भैया ने इस चुड़ैल के हाव् भाव को पहले hi पहचान लिया था क्यूंकि एहि नहीं इसके मायके में भी इसके कुछ यार रह चुके हैं .... अब जब माँ बाप hi ऐसे हो तो उनका प्रोडक्ट कैसे सही रह सकता है .... एहि नहीं इस डायन ने तेरी बड़ी भाभी को भी इस हवशी दरिंदे के नीचे लिटाया .... ये तो तेरी बीवी को भी इसके हवाले करना चाहती थी और श्रुति को अपने बेटे के नीचे लिटाने की प्लानिंग भी थी इसकी .... सोच कितनी घटिया मानसिकता के हैं ये लोग .... और तो और तेरे बेटे की दुर्दशा की भी जिम्मेवार एहि कुटिया है इसने hi हमेसा से तेरी बीवी और पुरे घर वालो को तेरे बेटे के खिलाफ कर दिया ... माँ की भी मौत की जिम्मेवार एहि है इसने hi हमारे कुलगुरु को ब्लैकमेल करके तुम्हारे बेटे की गलत जन्मकुंडली बनवायी और इसने खुद hi तेरे बेटे के जन्म के बाद माँ तो सीढ़ियों से धकेल दिया और ये कहानी बना दी की सब कुछ तरुण के कुंडली डिश की वजह से हुआ है .... अब बोल क्या कोई इंसान इतना भी गिर सकता है .....

तभी एक जोरदार थप्पड़ की आवाज़ गूंज उठी ये थप्पड़ खुद बलबीर ने अपनी मंझली बहु को मारा था .... थप्पड़ की आवाज़ इतनी यस थी की वह एक अजीब सी शांति छ गयी ...

बलबीर : तूने मेरी कौशल्या को मुझसे छिना ..... मैं भी कितना पागल हु जो तेरी बातो में आ कर तरुण को इसका जिम्मेवार समझता रहा .... तुझे तो आज मैं जान से मार दूंगा ....

और बलबीर ने खुसबू को न जाने कितने थप्पड़ मरे .... ख़ुशी के दोनों गाल लाल हो चुके थे मनो उनमे से खून उतर आया हो ....

प्रिय : इसकी असली सजा मौत नहीं बल्कि इसका भी वैसा hi हाल होना चाहिए जैसा इसने मेरे तरुण का किया था इसको भी उस दर्द का एहसास होना चाहिए जो इसने तरुण ने इतने सालो से झेला है ....

तभी रानी खुसबू के नजदीक आती है और उसके मुँह पर थूक देती है ...

रानी : ये मेरे तरुण को हमसे दूर करने के लिए ... चिंता न करो तुम्हारे हर सुबह की शुरुआत ऐसे hi होनी है ....

घर के हर सदस्य ने खुसबू के मुँह पर थूका सिवाए राहुल राघव और तरुण के बड़े चाचा के .... खुसबू को एक छोटे से रूम में शिफ्ट कर दिया गया जिसमे सुख सुविधा की कोई चीज मौजूद नहीं थी .....


"तरुण ... देख आज मैंने तुम्हारा बदला ले लिया ... अब तो तू मुझे माफ़ कर देगा न बीटा ... देख आज मैंने सही गुनेहगार को सजा दिलवा दिया है ... मैंने अपनी बच्चियों को बचा लिया है "

"मुम्मा ... मुम्मा गेट खोलो न .... मुम्मा मुम्मा गेट खोलो न देखो मंझली चची ऋचा दीदी और रूचि को मरने गयी है ...."

गेट पर हो रहे दस्तक और प्रियांशी की घबराई हुयी आवाज़ से सुमित्रा की नींद खुलती है ....

"अरे मैं तो रूम में हु यानि की मैं ये सब सपना देख रही थी क्या ... "

सुमित्रा जल्दी से भाग कर गेट खोलती है तो बहार प्रियांशी आँखों में आंशू लिए गेट पर कड़ी थी ....

प्रियांशी : मुम्मा देखो न मंझली चची ऋचा दीदी और प्रियांशी को मरने गयी है डंडा लेकर .... उन्हें बचा लो मुम्मा ... पापा और दादा जी भी काफी गुस्से में हैं ..

सुमित्रा : तुम चलो बीटा मैं अभी आयी ड्रेस चेंज करके ....

थोड़ी देर में सुमित्रा ग्राउंड फ्लोर पर आती है तो देखती है की ऋचा और रुचिका सर झुकाये कड़ी थी और घर के सभी बड़े लोग वह खड़े थे और उसकी मंझली जेठानी एक डंडा लेकर गुस्से में न जाने क्या क्या अनाप सनाप बाके जा रही थी ....

लक्समन : ऋचा और प्रियांशी सच सच बताओ तुमने hi राहुल को मारा है क्या .... "

रुचिका : पापा पर गलती राहुल की थी ....

लक्समन : वो तुमसे बड़ा है तुम उसको भैया नहीं कह सकती क्या ....

रुचिका : जी नहीं उसने बड़ा भाई होने का कोई फ़र्ज़ नहीं निभाया मैं उस घटिया इंसान को कभी भैया नहीं कहूँगी ...

खुसबू : देख लिया देवर जी उस मनहूस और बेगैरत इंसान के साथ रह कर ये भी वैसी hi बन गयी है ..... आज तो मैं इनकी खाल उधेड़ दूंगी ....

बी. चची : अरे पहले सुन तो ले की सच क्या है और झूट क्या .. मेरा तो मन कहता है की ऋचा गलत नहीं हो सकती ...

सुमित्रा : रुचिका सच कह रही है गलती राहुल ने hi की थी उसने कल इवनिंग को hi मुझे बताया था ....

लक्समन : वह यानि की तुम भी इनकी गलती में शामिल हो .... ये नहीं की इनकी गलती के लिए इन्हे संमझाये या सजा दे ....

सुमित्रा : देखो जी आपको जब पता न हो तो ऐसे उछालो मत ...

लक्समन अपने जगह से खड़ा हो कर सुमित्रा के गाल पर 2 - 3 जोरदार थप्पड़ लगा देता है .... थप्पड़ इतना झन्नाटेदार था की सुमित्रा का गाल hi सुन्न हो जाता है ...

लक्समन : तू मुझसे जुबान लड़ाएगी .... रुक तुझे बताता हु रूम में ....

सुमित्रा बिचारि वही पर अपने गाल पर हाथ रख कर बैठ जाती है .... आज पहली बार लक्समन ने उसके ऊपर हाथ उठाया था उसके गाल पर पंजे के नीसाण उभर आये थे और होंठ भी थोड़े फैट गए थे जिनसे खून रिसने लगा था ....

बलबीर : बस करो लक्समन ऐसे बच्चो के सामने बहु को मत मारो ाचा नहीं लगता .... ऋचा बेटी मुझे सिर्फ तुम पर भरोषा है तुम कभी झूट नहीं बोलोगी बताओ बीटा कल क्या हुआ था और क्या तुम लोगो ने hi राहुल को मारा ....

ऋचा : दादा जी कल शाम को मैं अपने कमरे में लेट कर मूवी देख रही थी की राहुल मेरे रूम में आ गया और किसी बहाने से मेरे साथ गन्दी हरकत करने लगा .... जब बर्दास्त के बहार हो गया तो मैंने उसको एक थप्पड़ लगा दिए ... थप्पड़ लगने के बाद गुस्से में आ कर मेरे साथ बदतमीज़ी करना सुरु कर दिया और न जाने वो मेरे साथ क्या क्या करता की तभी कही से रुचिका आ गयी और उसने राहुल की पिटाई करके मुझे बचा लिया ....

खुसबू : वह अब तुम लोग कोई भी कहानी बना कर सुना डौगी तो मैं मान जाउंगी क्या .... मेरा राहुल ऐसी घिनौनी हरकत कर hi नहीं सकता .... वो तो तुम बहनो को अपनी बहन से भी ज्यादा प्यार एयर रेस्पेक्ट देता है ये सब तुम तीनो बहनो और उस कलमुहे तरुण की मिली भगत है .... मैं अब तुम लोगो को दिखती हु की मेरे बेटे पर हाथ उठाने का क्या अंजाम होता है ....

ख़ुशी डंडा उठा कर ऋचा को मरने को होती है की प्रिय अचानक से वह आ जाती है और डंडे को खुसबू के हाथो से छीन लेती है ...

प्रिय : ये क्या बेहूदगी है भाभी आप मेरी बच्चियों पर क्यों हाथ उठा रही हो .....

खुसबू : देखो प्रिय तुम इस घर की बेटी हो हमारे आपसी मामले में दखल देने वाली तुम कौन होती हो ....

प्रिय : वह क्या बात है .... पिताजी अब आप कुछ बोलेंगे क्या मेरा इस घर पर कोई अधिकार नहीं ...

बलबीर : नहीं बेटी ऐसा नहीं है तुम भी इस घर की मेंबर हो तुम्हे बोलने का पूरा हक़ है ....

खुसबू : आप चुप hi रहो .... इसको जब सचचई का पता hi नहीं है तो बिच में टांग क्यों ऐडा रही है ....

प्रिय : मुझे कल सुमित्रा भाभी ने सब बता दिया है ... कल जो भी हुआ उसमे आपके बेटे राहुल की गलती है ....

खुसबू : मैं नहीं मानती ... तुम्हारे पास कोई साबुत है क्या ...

प्रिय : वो तो आपके पास भी नहीं है .... अब बोलो ....

खुसबू : मुझे गुस्सा मत दिलवाओ प्रिय वर्ण ाचा नहीं होगा ....

प्रिय : ओह तो आप मुझे धमकी दे रही हो ... तरुण के वक्त तो मैं उसके लिए स्टैंड नहीं ले पायी जिसका अफ़सोस मुझे हमेसा रहेगा पर आज मैं अपनी भतीजियों पर कोई भी अत्याचार सहन नहीं करुँगी चाहे जो भी हो जाये ....

खुसबू : ठीक है मैं भी देखती हु कब तक तू इन्हे मुझसे बचा पायेगी ....

प्रिय ऋचा और रुचिका को लेकर अपने घर चली जाती है उसके साथ साथ hi प्रियांशी भी बुआ के घर hi चली जाती है ....

खुसबू : अब तुम लोग इधर नजर भी मत आना वर्ण मुझसे बुरा कोई न होगा ... (तरुण के दादा से) देख लिया अपने अपनी बेटी की करतूत कैसे इस घर के मामले में टांग अदने आ गयी ...

**************

इन् सभी बातो से अनजान तरुण की वह एक नयी सुबह हुयी थी और सुबह होते hi वो सुहानी के फ्लोर पर बने गयम में आ कर उसका वेट करने लगा ... सुहानी नियत समय से 5 मिनट लेट आती है .... उसने एक टाइट टॉप और ट्रॉउज़र पहना था .... उसके पेट के हिस्से में हलकी सी चर्बी थी ोथेरविसे शी वास् आल फिट ....

तरुण : आप पुरे 5 मिनट लेट हो .. आगे से ऐसी गलती न करना बिकॉज़ पुनक्तुअलिटी इस थे मोस्ट इम्पोर्टेन्ट थिंग इन अन्य वर्क बे आईटी स्टडी और स्पोर्ट्स ...

सुहानी : hi टीचर आगे से गलती नहीं होगी ...

तरुण : ok अब आप वेइटिंग मशीन पर कड़ी हो जाओ ... आज मैं आपकी फिजिकल बॉडी का सही से मेज़रमेंट लेना चाहता हु ताकि आगे आपकी इम्प्रूवमेंट के बारे में पता चल सके ...

तरुण सुहानी का वेट और बाकि फिजिकल डिटेल्स एक डायरी में नोट करता है ुर उसको बेसिक एक्सरसाइज के बारे में बताता है और खुद भी उसके साथ कुछ देर प्रैक्टिस करता है .... टाइम ख़त्म होते hi दोनों अपने अपने रूम्स अस जाते हैं ....

दोपहर तक शेर सिंह और कलुआ भी आ जाते हैं ... इवनिंग को फिर से तरुण सुहानी से एक्सरसाइज वगैरह करवाता है ...,
 
अपडेट 48

तरुण सुहानी का वेट और बाकि फिजिकल डिटेल्स एक डायरी में नोट करता है ुर उसको बेसिक एक्सरसाइज के बारे में बताता है और खुद भी उसके साथ कुछ देर प्रैक्टिस करता है .... टाइम ख़त्म होते hi दोनों अपने अपने रूम्स अस जाते हैं ....




दोपहर तक शेर सिंह और कलुआ भी आ जाते हैं ... इवनिंग को फिर से तरुण सुहानी से एक्सरसाइज वगैरह करवाता है ...,

आगे

इवनिंग को ऋचा अपने बुआ के घर में बीएड पर बैठी रो रही थी उसके पास में hi उसकी बुआ, प्रियांशी और रुचिका भी बैठी थी ....

ऋचा : बुआ आज मेरी वजह से पापा ने मुम्मा को मारा .... मुझे बहुत बुरा लग रहा है .... कही म. चची ने पुलिस कम्प्लेन कर दिया तो क्या होगा बुआ ....

प्रियांशी : अरे ऐसे कैसे पुलिस कम्प्लेन कर देगी .... हमने भी लॉ पढ़ी है ऐसे hi बिना सबूत के कोई किसी का कुछ नहीं बिगड़ सकता .... मुझे चिंता सिर्फ इस बात की है की पुत्र मोह में वो चुड़ैल हम लोगो में से किसी को कोई नुकसान न पहुंचा दे ... मुझे ये समझ नहीं आता की पापा आज इतने जोश में कैसे आ गए पहले तो कभी उन्हें ऐसे अंदाज़ में नहीं देखा ....

रुचिका : विनाश काळा विपरीत बुद्धि .... आज तक मेरे भाई के साथ हुए अन्याय के खिलाफ तो कभी आवाज़ नहीं उठायी उन्होंने आज तो बड़ा शेर बन रहे थे जरूर ये सारा किया धरा उस डायन का है .... आज बुआ ने हमें न बचाया होता तो ऋचा दीदी की आज पिटाई हो जनि थी ....

प्रियांशी : वह वह तू तो ऐसे बोल रही जैसे वो तुझे छोड़ देती ....

रुचिका : मार तो मैं ऋचा दीदी को भी खाने न देती उस डायन का डंडा छीन उसके hi गए... सॉरी बुआ ....

रुचिका फ्लो फ्लो में अपनी बात कहने hi वाली थी की उसको बुआ का ख्याल आ गया तो उसने अपनी बात को बीच में hi रोक दिया ....

प्रिय : कोई बात नहीं बीटा वो औरत गाली के hi काबिल है ... उसके वजह से hi आज तक मेरे बेटे को इतना कुछ सहना पड़ा .... मंझले भैया के गुजरने के बाद से ये और भी बौखला गयी है .... और मैं कैसे अपनी आँखों के सामने तुम्हे मार कहते देख सकती थी ...

ऋचा : पर बुआ अब हम लोग कहा रहेंगी उसने तो हमें धमकी दी है की उस घर में नहीं घुसने देगी ....

प्रिय : ऐसे कैसे नहीं घुसने देगी उसके बाप का घर है क्या .... अभी कुछ दिनों तुम लोग एहि रहो ये मामला ठंडा हो जाये उसके बाद देखती हु मैं भी की वो मेरे रहते तुम्हारा क्या बिगड़ लेगी ....

रुचिका : नहीं बुआ हम आपको किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहते ... अपने आज हमारे लिए जो किया वो hi काफी है .... ऐसी घटिया औरत का कोई भरोषा नहीं ... और माँ भी तो वह अकेली है ... न जाने वो लोग माँ के साथ कैसे ट्रीट कर रहे होंगे ...

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ऐसे hi धीरे धीरे 7 दिन बीत गए अब भी ऋचा और रुचिका अपनी बुआ के घर hi रह रही थी ऐसा नहीं था की वो लोग अपने घर जाने से दर रही थी पर वो लोग खुद घर वालो को सोचने समझने का टाइम देना चाहती थी ....

वो लोग ऐसे hi दोपहर में रूबी के रूम में बैठी बातें कर रही थी की प्रियांशी भगति हुयी उनके रूम में आती है ...

ऋचा : अरे प्रीयू तू इतनी जल्दी से कहा से भगति हुयी आ रही है कोई बात है क्या ...

प्रियांशी : दीदी दादा जी ने आप लोगो को बुलाने के लिए भेजा है ... अब आप लोग को यहाँ छुप कर रहने की कोई जरुरत नहीं ... पता नहीं रानी दीदी ने दादा जी से क्या बात की जिसके बाद दादा जी ने खुद मुझे आप लोगो को लिवाने के लिए भेजा है ...

रुचिका : दीदी पर कही ये उन् माँ बेटो की कोई चल तो नहीं ...

ऋचा : नहीं रे पागल दादा जी कभी भी मेरे साथ गलत नहीं कर सकते ... चलो अब वैसे भी अपना घर छोड़ कर कितना दिन बिचारि रूबी के रूम में अपना अधिकार जमाये ...

रूबी : अरे दीदी आप भी कैसी बात कर रही हो ... मुझे तो आप लोगो के आने से बहुत ाचा लगता है वर्ण तो पुरे घर में अकेले hi भूत के जैसे घूमती रहती हु ....

प्रियांशी : कोई न अब हम लोग यहाँ आती रहेंगी रूबी डार्लिंग ... फिर न कहना की मेरे हिस्से की मिठाई और आइस क्रीम खा ले रही है ....

रूबी : तू भी न पागल आज तक कभी मन किया है मैंने तुझे .... तू तो मेरी बस्ती है काम से काम तू तो ऐसा न बोल ...

प्रियांशी : अरे पगलू मैं तो मजाक कर रही थी .... तेरी मेरी और रानी दीदी की तिकड़ी ने तो पुरे घर की नाक में डैम किया हुआ था एक टाइम पर ....

ऋचा : तू एहि बातें करती रहेगी या साथ चलेगी भी .... मैं अपने रूम को इतने दिनों से मिस कर रही हु ...

रूबी : क्या दीदी आप भी ... आप तो ऐसे बोल रही हो की वो आपका रूम न होकर आपका बर्फ हो ...

सभी जोर जोर से हसने लगते हैं ....

उसके बाद तीनो बहने अपने घर आ जाती है ... उस वक्त शायद खुशबु अपने रूम में थी .... दादा जी की स्वीकृति पाकर ऋचा और रुचिका चौड़ी होकर अपने रूम आ जाती है .... उनका 7 दिनों का बनवास समाप्त हो गया था ... ऋचा और रुचिका भी अपने रूम में वापस आ कर बहुत खुस थी ... घर चाहे जैसा भी हो अपने घर की बात hi कुछ और होती है ....

उधर तरुण का डेली रूटीन बन चूका था सुबह उठ कर फ्रेश होकर 5 बजे सुहानी के गयम में जाकर उसको एक घंटे एक्सरसाइज करवाना और दिन भर रूम में टाइम पास करने के बाद इवनिंग को भी एक्सरसाइज करवाना और फिर इवनिंग को उसको साथ लेकर घूमने जाना एंड आल ....

लगे हाथो वो चुपके से शेर सिंह की जासूसी भी कर लेता था सबसे नजरे बचा कर .... अब तक तो उसको शेर सिंह के काफी गलत धंधो का भी पता चल चूका था .... शेर सिंह का ड्रग्स का भी कारोबार था जो की कलुआ hi ज्यादातर देखता था ... शेर सिंह ड्रग्स का ये काम अपने ंगो में करवाता था .... उस रात के बाद से मीरा ने तरुण के साथ कोई ऐसी वैसी हरकत नहीं करि थी .....

मीरा अब जान बुझ कर ज्यादा से ज्यादा कलुआ के सामने आने की कोसिस करती और कलुआ भी आदत से मजबूर उसको अपने नजरो से नंगा करने में लगा रहता था .... मीरा ऐसा करने से पहले ये जरूर देख लेती थी की आस पास उसका पति न हो ....

ऐसे hi एक दिन अचानक से शेर सिंह के ड्रग्स के अड्डे पर छपा पड़ता है जिसमे उसका सारा माल पकड़ा जाता है पर उसके आदमी इतने वफादार निकलते हैं की शेर सिंह या कलुआ दोनों में से किसी का नाम नहीं आता .... पर इस हादसे के बाद शेर सिंह काफी टेंशन में आ जाता है ....

एक अज्ञात जगह पर शेर सिंह एक रूम में बैठा हुआ था और उसके पास hi 3 और भी लोग बैठे हुए थे ....

शेर सिंह : ये ऐसा पहली बार हुआ है की हमारे माल पर किसी ने छपा मारा है ... पता करो की वो कौन सा अफसर था और उसको हमारे अड्डे के बारे में कैसे पता चला ....

आदमी 1 : सर जहा तक मैंने पता किया है वो अफसर नया नया इस एरिया में आया है .... उसका पास्ट रिकॉर्ड भी काफी क्लीन है ....

शेर सिंह : यानि की ईमानदारी का भूत उसके सर चढ़ कर बोल रहा है ....

आदमी 2 : सिंह साहब मुझे तो लगता है हमारे अपनों में से hi किसी ने इनफार्मेशन लीक किया है .... वर्ण आज तक तो कभी कोई छपा नहीं पड़ा है .... हम 7 - 8 सालो से ये कर रहे हैं पर पहले कभी ऐसा नहीं हुआ ... वैसे इस धंधे के बारे में किसको किसको पता है ....

शेर सिंह : ये बात तो हम चारो के अलावा सिर्फ कलुआ को hi पता है पर वो ऐसा नहीं कर सकता उसके ऊपर मुझे खुद से भी ज्यादा भरोषा है ...

आदमी 3 : सिंह साहब गलती तो हुयी है और उसको सही करना जरुरी है ... वो तो भला हो हमारे पकडे हुए आदमियों का की किसी ने हमारा नाम नहीं लिया वर्ण हम सलाखों के पीछे होते ...

आदमी 2 : हमें जल्दी से अपने बीच छुपे हुए गद्दार को ढूंढ़ना होगा वर्ण हम मुसीबत में आ सकते हैं ....

शेर सिंह : हाँ ... अगर वो पकड़ में आ गया तो उसको ऐसी मौत दूंगा की उसकी सात पश्तो तक की रूह काँप जाएगी .... हमसे टकराने का अंजाम तो वो मुखिया भुगत hi रहा है मौत से भी बदतर हालत कर दी है मैंने उसकी .... उसका बीटा भी उसकी hi तरह अपांग हो चूका है .... उसके मंझले भाई का भी मैंने एक्सीडेंट करवा दिया था .... दूसरे शब्दों में कहा जाये तो उसका पूरा परिवार hi मैंने तहस नहस कर डाला है ....

आदमी 2 : अब उस परिवार में सिर्फ बूढ़ा बाप और उस मुखिया का छोटा भाई hi बचा है ....

शेर सिंह : कोई न उनका भी जल्द hi टिकट कटवा कर इस एरिया में पूरी तरह से अपनी बादशाहत स्थापित कर लूंगा ....

आदमी 1 : सर कही इन् सब में ुशी परिवार का हाथ तो नहीं ...

शेर सिंह : नहीं मिश्रा अब उस परिवार वालो में इतनी हिम्मत hi नहीं बची की वो हमसे टकराने का सपना भी देख सके .... वैसे भी उस परिवार में हमारा एक इनफॉर्मर है जिसके वजह से hi हमने उस परिवार में इतनी आसानी से सेंध लगाया है .... 😂😂😂😂😂

उसके बाद इनकी सीक्रेट मीटिंग ख़त्म हो जाती है और सभी अपने अपने घरो को लौट जाते हैं ...

रात में शेर सिंह ने बहुत सोच विचार कर एक निर्णय लिया ...

अगले दिन शेर सिंह की मैरिज एनिवर्सरी थी तो वो दोपहर को पुरे घर वालो को ट्रीट देने के बहाने बहार ले जाता है और उसके अनुपस्थिति में कुछ लोगो ने आकर पुरे घर में सीक्रेट कामर्स लगवा दिए .... ये कामर्स इतनी चालाकी से लगाए गए थे की किसी को कुछ पता भी नहीं चलने वाला था .... ये बात कलुआ को भी नहीं बताया गया था .... उसने ऐसा इसलिए किया था की वो अपने घर के हर मेंबर पर नजर रख सके .....

3 - 4 दिन तो उसको ऐसी कोई खास बात नहीं दिखी जिससे किसी के ऊपर शक किया जा सके .... अब तो शेर सिंह को भी लगने लगा था की बेकार के hi उसने सभी पर शक किया .... गद्दार घर के बहार का hi कोई है ....

एक दिन दोपहर को शेर सिंह ने कलुआ को अपने मीटिंग वाले रूम में बुलाया ....

शेर सिंह : आओ कलुआ .... कैसे हो ...

कलुआ : जी ठीक hi हु हुकुम ....

शेर सिंह : कलुआ मैं दरअसल किसी काम के सिलसिले में कही बहार जा रहा हु और 2 दिनों के बाद लौटूंगा ..... मेरी गैरहाजिरी में पुरे घर की जिम्मेवारी तुम्हारे ऊपर hi रहेगी ...

कलुआ : हुकुम पर क्या मैं आपके साथ नहीं चल रहा क्या ....

शेर सिंह : नहीं कलुआ इस बार तुम्हे जाने की जरुरत नहीं तुम एहि रहकर घर की देखभाल करो ....

कलुआ : जैसी आपकी आज्ञा हुकुम ....

और फिर दोपहर को hi शेर सिंह निकल जाता है और दूर के एक सहर के होटल में एक रूम लेकर आराम करने लगता है .... वो घर से दूर इसी कारन से गया था की उसके हाथ कोई साबुत लगे .... वैसे उसको कलुआ और अपनी बेटी सुहानी को छोड़ कर हर किसी पर शक था ....

उसने जल्दी से रूम में अपना लैपटॉप ों किया और उसमे सीक्रेट कामर्स के लिंक को ओपन करके सारा सेट उप किया ..... और सभी चीजों की निगरानी करने लगा ....

रात के 11:30 बजे उसको सीढ़ियों पर कुछ हलचल दिखाई देती है ... ये रौशनी थी जो कलुआ के रूम में एंटर करती है ... उसके बाद शेर सिंह कलुआ के रूम वाले कैमरा पर फोकस करता है .... रूम में जैसे hi रौशनी की एंट्री होती है कलुआ उससे लिपट जाता है और फिर गेट बंद करके दोनों धीरे धीरे एक दूसरे को कपड़ो की कैद से आज़ाद करके आपस में गुथम गुथा होने लगते हैं और फिर वासना का एक दौर चलता है जिसके बाद फिर वह शांति छ जाती है ...

शेर सिंह : साला मेरे घर में ये सब चल रहा है जिससे मैं बिलकुल अनजान था .... वैसे इस कलुवे की hi मौज है की इसको रौशनी जैसी कंटाप औरत के साथ ये सब करने का मौका मिल रहा है ... सेल लोग मेरा कहते हैं और मेरे पीठ पीछे ये गुल खिला रहे हैं .... वैसे इनकी कामलीला देख कर तो मेरा भी उस्ताद सर उठाने लगा है ... लगता है इस रौशनी नाम की बाला से अपनी प्यास बुझानी hi पड़ेगी ... काश आज मीरा यहाँ होती तो उसको खूब छोड़ता .... (अपने लुंड से) कोई न बीटा सबर कर 2 दिन के बाद तुझे इस रौशनी की गुफा में hi सैर करवाऊंगा .....

थोड़े देर मसक्कत करने के बाद शेर सिंह को नींद आ जाती है ....



उसके बाद अगले दिन कोई खास बात नहीं होती पर रात में शेर सिंह ने कुछ ऐसा देखा की उसका खून hi खौल उठा ....
 
अपडेट 49

थोड़े देर मसक्कत करने के बाद शेर सिंह को नींद आ जाती है ....




उसके बाद अगले दिन कोई खास बात नहीं होती पर रात में शेर सिंह ने कुछ ऐसा देखा की उसका खून hi खौल उठा ....

आगे

राहुल की हालत अब लगभग ठीक हो चुकी थी पर उसके पिछवाड़े में अब भी दर्द था ... आखिर रुचिका ने तबियत से उसकी कुटाई जो करि थी .... रुचिका ने अपने छोटे भाई पर हुए ज्यादतियों का एक तरह से बदला भी साथ में hi निकल लिया था ...

खुसबू को जब ऋचा और रुचिका की घर वापसी का पता चला तो उसने लास्ट टाइम की तरह hi बवाल करना चाहा पर तरुण के दादा के सामने उसकी एक न चली तो हार मान कर उसने कोई दूसरा तरीका अख्तियार करने का निर्णय लिया ....

अपनी बेटियों के वापस लौट आने से सुमित्रा काफी खुस थी .... उसने पिछले 7 दिन कैसे गुजरे थे ये तो उसका दिल hi जनता था .... ुशी रात को उसका अपने पति से बेटियों के वजह से hi खूब झगड़ा भी हुआ था ....

सुमित्रा के दिल में अपनी ननद के लिए रेस्पेक्ट और बढ़ चुकी थी क्यूंकि उसकी वजह से hi ये संभव हो पाया था वर्ण वो तो अकेले अपनी बेटियों को बचा भी नहीं पति ...

वही ऋचा और रुचिका भी अपने घर में वापस आ कर बहुत खुस थे ....

*******************

उधर दिया का पति अपने बिसनेस के सिलसिले में किसी दूसरे देश जाने वाला था एक महीने के लिए तो उसने दिया को उसके मायके में hi छोड़ दिया ....

अपने मायके आ कर दिया हर बार की तरह खुस थी .... उसके लिए उसका पति एक मिस्ट्री से काम नहीं था दिन में वंकितना केयरिंग और लोवबले हस्बैंड बन कर रहता था पर रात होते hi न जाने उसको क्या हो जाता था की वो दिया के सामने एक दरिंदा बन जाता था जिसका मकसद सिर्फ एयर सिर्फ दिया के जिस्म को अपने तरीके से नोचना खसोटना होता था ... रात में उनके बीच जो भिभूता था उसमे सिर्फ हवस और दरिंदगी शामिल होती थी प्यार का तो नामोनिशान नहीं होता था ...

उसके लिए दिया बस जिस्म की भूक मिटने का एक जरिया होती थी .... इसीलिए दिया हमेसा थोड़ा तेनसेद रहती थी ... दिन भर वो खुद को हमेसा खुस दिखने की कोसिस करती थी और उसकी साडी रात दर्द और रोने में hi निकल जाती थी .... दिया का पति उसके साथ कभी रफ़ बड़सम तरय करता तो कभी उसको मार पीट कर हुमिलिएशन के साथ सेक्स करता ... कुछ महीनो में hi उसने दिया के छूट की हालत ऐसी कर दी थी की उसमे एक मोटा ताज़ा बैगन भी डालो तो वो आसानी से चला जाये ... पता नहीं ऐसा करके उसके पति को कौन सा सुख मिलता था ....

वैसे तो दिया अपने मायके आ कर काफी खुस की थी की काम से काम इतने दिनों के लिए उसको अपने इंसान के रूप में दरिंदे पति से तो छुकारा मिलेगा .... पर कारन ने ये नोटिस किया की दिया के स्माइल में भी एक दर्द छुपा है ....

वो बहुत दिनों से दिया से इस बारे में बात करना चाहता था पर हिम्मत नहीं जूता प् रहा था ...

एक दिन मौका देख डिनर के बाद वो दिया के रूम में आ पहुँचता है ...

कारन : hello दीदी सोने जा रही हो क्या ....

दिया : हाँ अब तो डिनर कर लिया है तो सोना hi है न .... चल आ बैठ ...

कारन : दीदी एक बात पुछु सच सच जवाब देना ...

दिया : हाँ पूछ न ...

कारन : आप अपनी शादी से खुस तो हो न ... ी मैं आपके बिच कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न ...

दिया : नहीं भाई तुम्हे ऐसा क्यों लग रहा है की मैं खुस नहीं हु ....

कारन : आपके चेहरे पर अब वो पहले जैसी मुस्कान नहीं रहती और आप हमेसा तेनसेद रहती हो ....

दिया : अरे बाबा तो अब क्या दिन भर पागलो के जैसे हस्ते रहा करू ....

कारन : मैंने वो नहीं कहा दीदी ... बताओ न क्या प्रॉब्लम है आपको ....

दिया : अरे बाबा सच्ची कोई प्रॉब्लम नहीं है ...

वैसे ये बात दिया ने कभी अपनी माँ तक को नहीं बताई थी तो कारन को क्या hi बताती .... उसने इसको अपनी किस्मत समझ कर जीना सिख लिया था ....

कारन : नहीं दीदी मुझे आपकी बहुत फिक्र है आप ठीक नहीं हो ....

दिया अब कारन को क्या hi जवाब देती की उसका पति उसको रात में बुरी तरह छोड़ता है और छोड़ छोड़ कर उसका कचूमर निकल देता है ....

कारन : नहीं ऐसे नहीं अपनमेरी कसम खा कर बोलो की सच में कोई प्रॉब्लम नहीं है ... मैं चला जाऊंगा ...

दिया अब क्या जवाब देती वो अपने भाई की झूटी कसम नहीं खाना चाहती थी ....

दिया : मेरा तो पता नहीं लेकिन तू खुस नहीं है लगता है तेरे लिए एक लड़की देखनी पड़ेगी वाइस वह मेरे बगल वाले घर में एक लड़की रहती है जो की बाला की खुबसुआरत है तेरे साथ उसकी जोड़ी अछि रहेगी ....

कारन : नहीं अभी नहीं करनी मुझे शादी ... वैसे आप बात को मत घुमाओ मेरी कसम खा कर बोलो की सच में कोई बात नहीं ....

दिया : मुझे प्रॉब्लम है पर वो इतनी बड़ी नहीं की मुझे अपने भाई की जरुरत आ पड़े ... मैं खुद hi हैंडल कर लुंगी तू बेफिक्र रह ....

कारन : यानि आप मुझे अपना भाई नहीं मानती .... दीदी बोलो न बोलो न आपके लिए मैं सरे ज़माने से लड़ जाऊंगा ...

अपने भाई का खुद के लिए ऐसा प्यार देख दिया की आँखें भर आयी ...

दिया : पागल इतना प्यार करता है अपनी बहन से ...

कारन : आप आजमा कर तो देखो ...

दिया : सच्ची बाबू कोई सीरियस प्रॉब्लम नहीं है अगर हुयी तो जरूर बता दूंगी अब खुस ...

कारन : ठीक है जब आप मुझे बताना hi नहीं चाहती तो मैं चलता हु ...

और कारन वह से जाने लगता है तो दिया उसका हाथ पकड़ लेती है ....

दिया : मत जा न आज एहि मेरे साथ सो जा ... प्लीज बाबू ...

कारन : ठीक है ...

और फिर दिया कारन को अपने साथ बीएड पर सुला लेती है .... अपने भाई की बांहो में उसको काफी रिलैक्स फील होता है और जल्द hi उसकी नींद भी लग जाती है ... वही कारन कभी दिया के चेहरे को देखता तो कभी उसकी बंद पलकों को ....

******************

इधर घर में सभी डिनर के बाद अपने अपने रूम्स में जा चुके थे ...

रात के करीब 11 बजे मीरा के रूम का गेट खुलता है जिससे वो बहार निकलती है .... मीरा ने अभी एक ब्लैक कलर की निघ्त्य पहनी हुयी थी जिसमे वो जबरदस्त लग रही थी .... काली निघ्त्य उसके गोर जिस्म की सुंदरता को और निखार रहा था .... वो किचन की तरफ जाने लगती है .... की तभी किसी ने पीछे से उसको जकड लिया ... मीरा काफी कोसिस में बावजूद भी उससे खुद को छुड़ाने में नाकाम साबित हो रही थी ....

उस शक्श ने अब मीरा के उन्नत चूचियों को मसलना सुरु कर दिया जिससे मीरा की दर्दभरी सिसकिया निकलने लगी ...

ये शक्श और कोई नहीं कलुआ hi था .... अपनी बीवी के साथ कलुआ की ये जबरदस्ती देख शेर सिंह का खून खौल उठा था जो की लाजिमी hi था .....

शेर सिंह ने पुरे घर में कैमरा तो जरूर लाःवया था पर साउंड रिकॉर्डिंग का कोई डिवाइस नहीं लगाया था ... यानि की वो ये साडी रिकॉर्डिंग सिर्फ लाइव देख सकता था कुछ सुन नहीं सकता था ...

शेर सिंह (गुस्से से) : इस हरामी कलुआ को मैंने क्या नहीं दिया .... पर इसने मेरे घर की इज्जत पर hi हाथ दाल दिया .... मैंने एक सांप को दूध पिलाया है तो ये तो होना hi था .... मन तो कर रहा है की अभी जा कर इसको गोलियों से भून दालु पर जब तक मैं वह पहुंचूंगा तब तक तो ये मेरी बीवी की इज्जत को तर तर कर चूका होगा ... कोई बहार से घर में भी नहीं जा सकता क्यूंकि वो तो अंदर से लॉक है .... उफ़ क्या करू मैं .... नीलम और रौशनी भी इसमें मेरी क्या hi हेल्प कर सकती है पर इन्हे ऐसे तो नहीं छोड़ सकता .... क्या पता इस दरिंदे का ये मेरी बेटी के साथ भी गलत कर सकता है .... तरुण है उसको hi कॉल करता हु .... वो hi सबसे परफेक्ट शक्श है जो मेरी हेल्प कर सकता है इस वक्त ...

शेर सिंह ने तुरंत तरुण को कॉल लगाया जिसे की तरुण ने पहली रिंग में hi उठा लिया ....

तरुण : गुड नाईट सर ... अपने मुझे इतनी रात को याद किया सब ठीक तो है न ....

शेर सिंह : हाँ यहाँ सब ठीक है तरुण पर घर में कुछ ठीक नहीं है .... वो हरामी कलुआ तेरी मालकिन की इज्जत लूटने की कोसिस कर रहा है .... तुम जल्दी से जाकर उसको बचाओ .....

तरुण : कलुआ ... मैं कुछ समझा नहीं सर ....

शेर सिंह : कलुआ वह बहार में तुम्हारी मालकिन यानि की मेरी बीवी मीरा के साथ जबरदस्ती कर रहा है जाकर उसको बचा लो ....

तरुण : जी सर जाता हु ...पर वो इतने हट्टे काटते और मैं उनके सामने शायद hi टिक पौन ....

शेर सिंह : अभी बहस का टाइम नहीं है समझो वो तुम्हारी मेमसाहब नहीं तुम्हारी कोई अपनी है तो उसके लिए तुम्हारा क्या फ़र्ज़ बनता है ....

तरुण : जी सर अभी जाता हु और मेरे लिए दुआ कीजिये की मैं अपने मकसद में कामयाब राहु ...

शेर सिंह : जाओ आज तुम्हे अपनी वफादारी दिखने का मौका दे रहा हु .... जैसे भी कर के आज मेरी मीरा की इज्जत बचा लो ... इसके लिए मैं सदा तुम्हारा आभारी रहूँगा ....

तरुण : पर मालिक अगर उन्हें बचने में कलुआ अंकल .....

शेर सिंह : तुम्हे जैसे भी बचाना हो बचाओ ... अगर कुछ हुआ तो उसकी जिम्मेवारी मैं लेता हु ...

तरुण को तो अब शेर सिंह की स्वीकृति मिल चुकी थी उसने जल्दी से फ़ोन रखा और रूम में पड़े एक लोहे के रोड को उठा लिया क्यूंकि वो जनता था की कलुआ से खली हाथ पार पाना उसके बस की बात नहीं है ...

वो गेट खोल कर बहार निकलता है ... बहार उसको किचन के रस्ते में हाल में कलुआ मीरा के साथ दिखा .... वह का सन काम इरोटिक नहीं था .... कलुआ ने मीरा को अब तक पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया था और खुद भी नीचे से नंगा हो चूका था .... वो जोर जोर से किसी दरिंदे की तरह मीरा की चूचियों को मसल मसल कर लाल कर चूका था .....

उसने मीरा को अब नीचे फर्श पर लिटा दिया और उसके ऊपर आ कर मिशनरी पोज़ में अपने खड़े लुंड को मीरा की छूट के मुहाने पर सताया hi था की पीछे से तरुण ने उसके सर पर रोड से एक जोरदार प्रहार किया .... प्रहार इतना जोरदार था की खटाक की एक जोरदार आवाज़ के साथ कलुआ का दिमाग hi कुछ सेकण्ड्स के लिए सुन्न सा हो गया ...

अभी कलुआ कुछ रियेक्ट करता उससे पहले hi तरुण ने दूसरी बार रोड से कलुआ के पीठ पर वॉर किया जिससे वो तड़प कर मीरा के ऊपर से हैट कर दूसरे तरफ लुढ़क जाता है .... आज तरुण के पास कलुआ से अपने दिल की भड़ास निकलने का ाचा मौका था इस मौके के लिए hi तो इतने दिनों से अपने घर दूर यहाँ आया था ....

अब तक मौका देख मीरा वह से भागे ली थी .... हलाकि ये सब उसके प्लान में तहत पर कलुआ की दरिंदगी देख उसकी तो हवा hi निकली हुयी थी ....

तरुण ने अपना तीसरा वार किया hi था की कलुआ ने उस लोहे के रोड को हवा में hi पकड़ लिया हलाकि ऐसा करने से उसके हाथ में चोट भी आयी थी .... कलुआ ने तरुण के हाथ दे रोड को छीन लिया और सँभालते हुए धीरे धीरे खड़ा होने लगा पर तरुण इस मौके को नहीं गंवाता है और जोर से एक किक कलुआ के मुँह पर दे मरता है जिससे उसके मुँह से खून की धरा बह निकली ....

तरुण : ma@@@###chod ये है मेरे मंझले चाचा का बदला .... अब खड़ा हो न m@@@###chod ....

तरुण ने अब पूरी ताकत से कलुआ के सर पर 3 - 4 करारे पंच लगा दिए जिससे कलुआ का पूरा वजूद hi हिल गया और धीरे धीरे उसकी आँखें स्वतः hi बंद होने लगी ....



क्या ये शेर सिंह के साम्राज्य का अंत था ????? क्या कलुआ वाकई में मर चूका है या उसको अभी और दर्द सहना बाकि रह गया है ???? लास्ट बूत नॉट लीस्ट : कलुआ आज hi ऐसे मीरा पर भूखे भेड़िये की तरह क्यों टूट पड़ा ????
 
अगले अपडेट के कुछ अंश ...

तरुण ने कलुआ के रूम का गेट खोला .... जैसे hi उसकी नजर सामने चेयर पर पड़ी तो उसका दिल hi दहल गया ...

कलुआ तो अब भी चेयर पर बंधा हुआ था पर उसके पूरा जिस्म खून से सना हुआ था ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसके सरीर में हज़ारो बार चाकू से वार किया हो ... उसके दोनों आँख भी फोड़ दिए गए थे ... उसके जीभ भी बहार कटा हुआ मिला .... व्होले इन शोले किसी ने बड़ी बेरहमी और निर्ममता से बंधे पड़े हुए कलुआ को मारा था ...
 
अपडेट 50

तरुण : ma@@@###chod ये है मेरे मंझले चाचा का बदला .... अब खड़ा हो न m@@@###chod ....

तरुण ने अब पूरी ताकत से कलुआ के सर पर 3 - 4 करारे पंच लगा दिए जिससे कलुआ का पूरा वजूद hi हिल गया और धीरे धीरे उसकी आँखें स्वतः hi बंद होने लगी ....

आगे

अब तक मीरा दूसरे कपडे पहन कर वह आ चुकी थी ....

मीरा : तरुण अब छोड़ दो उसको ... उसको जान से मार डोज क्या ....

तरुण कलुआ को छोड़ देता है की तभी उसके मोबाइल पर शेर सिंह का कॉल आता है ....

शेर सिंह : hello तरुण तुमने बहुत ाचा काम किया मैं तुमसे बहुत खुस हु .... वैसे वो मर तो नहीं गया न ....

तरुण : नहीं सर अभी तो वो जिन्दा है .... सर एक बात समझ नहीं आयी आप कही फिर हो तो आपको कैसे ये सब पता चला की यहाँ क्या हो रहा है या होने वाला है ...

शेर सिंह : पुरे घर में कक्तव टीवी कैमरा लगे हुए हैं उससे hi ... आज अगर ये न लगा होता तो मुझे इस गद्दार का कैसे पता चलता .... तुम्हे बस एक काम और करना है उस हठी को उसके रूम ले जाकर बांध दो बाकि सब मैं देख लूंगा ..

तरुण : पर सर कैमरा कहा कहा हुआ है मुझे तो नहीं दिख रहा ...

शेर सिंह : वो बस छुपे हुए हैं तुम्हे उससे मतलब जो बोलै है वो करो ....

तरुण और मीरा उस पहाड़ जैसे कलुआ को खींच कर उसके रूम पहुंचा देते हैं और एक चेयर पर बिठा कर बांध देते हैं .... कलुआ अभी मारा नहीं था .... उसकी दिल की धड़कने बहुत धीमे धीमे चल रही थी ....

अब तरुण और मीरा कलुआ के रूम को बंद करके बहार आ गए ...

वैसे तो तरुण कलुआ को ओने ों ओने में तो शायद hi हरा पता वो तो उस वक्त कलुआ हवस की आग में जल रहा था जिसके वजह से वो कलुआ को निपटने में कामयाब रहा ...

शेर सिंह को तो अपने सबसे वफादार कलुआ की हालत देख ाचा तो नहीं लग रहा था पर उसने करम hi ऐसे किये थे की उसको उसके खिलाफ एक्शन लेना hi पड़ा .... कलुआ शेर सिंह का लेफ्ट राइट दोनों हाथ था .... शेर सिंह आज जो कुछ भी था उसके पीछे कलुआ का बहुत बड़ा हाथ था ....

कलुआ शेर सिंह के ड्राइवर का बीटा था .... बचपन से hi उसको कुश्ती और पहलवानी का बड़ा शौक था .... वो अपने माँ बाप का एकलौता चिराग था .... उसकी माँ उसको बचपन में hi छोड़ कर चल बसी थी ....

एक दिन अचानक से खबर आयी की शेर सिंह के पापा का दूर किसी सहर में एक्सीडेंट हो गया है .... कलुआ के पापा की तो घटनास्थल पर hi मौत हो गयी थी और शेर सिंह के पापा हॉस्पिटल में िक में पड़े पड़े अपनी अंतिम सांसें गईं रहे थे ....

जब तक शेर सिंह वह पहुंचा उनके प्राण पखेरू उड़द चुके थे ....

शेर सिंह ने अनाथ कलुआ को सहारा दिया और उसको अपने hi घर रख लिया और धीरे धीरे कलुआ किस सहायता से शेर सिंह ने पुरे इलाके में अपनी धक् जमा ली ...

मीरा और तरुण ने मिल कर फर्श पर गिरे हुए कलुआ के खून को साफ़ किया और फिर अपने अपने रूम्स में सोने चले गए ....

सुबह तड़के hi शेर सिंह वापस घर आ गया ... उसने बेल्ल बजायी तो किसी ने न सुना तब उसने तरुण को कॉल करके जगाया ....

शेर सिंह तरुण के साथ hi अंदर आया ....

शेर सिंह : वो कलुआ अभी तक होश में नहीं आया है न ....

तरुण : रात में तो बेहोश hi था अभी जा पता नहीं ....

तरुण ने कलुआ के रूम का गेट खोला .... जैसे hi उसकी नजर सामने चेयर पर पड़ी तो उसका दिल hi दहल गया ...

कलुआ तो अब भी चेयर पर बंधा हुआ था पर उसके पूरा जिस्म खून से दाना हुआ था ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसके सरीर में हज़ारो बार चाकू से वार किया हो ... उसके दोनों आँख भी फोड़ दिए गए थे ... उसके जीभ भी बहार कटा हुआ मिला .... व्होले इन शोले किसी ने बड़ी बेरहमी और निर्ममता से बंधे पड़े हुए कलुआ को मारा था ...

शेर सिंह : तरुण तुमने ऐसा किया है क्या ????

तरुण : नहीं सर मैं तो रात में इस रूम को बंद करके बहार आ गया था उसके बाद अभी जस्ट उठा हु आपके रिंग से ....

शेर सिंह : तो बंद घर में कौन आ कर इसको ऐसे मार सकता है ...

तरुण : सर मेरा बिस्वास करो मुझे नहीं पता पर मैंने नहीं मारा है ...

शेर सिंह : पर रिजल्ट तो तुम्हारी आँखों के सामने है ....

तरुण : सर क्यों नहीं आप रात वाली फुटेज देख लो ....

शेर सिंह : कोई फायदा नहीं उसमे सिर्फ लाइव hi चलता है रिकॉर्डिंग की कोई फैसिलिटी नहीं है .... चलो छोडो जो होना था सो हो गया .... वैसे भी उसको मरना hi था ... मैं इसको दूर कही जंगल में फिंकवाने का इंतजाम करता हु और तुमने मेरे लिए जो किया है उसके लिए थैंक्स ...

तरुण वह से अपने रूम आ जाता है पर उसको समझ नहीं आता की आखिर किसने कलुआ की ऐसे निर्मम हत्या की होगी ...

शेर सिंह ने अपने कुछ वफादार लोगो से नीलकर कलुआ की लाश को दूर कही जंगल में ले जाकर जला दिया ...

तरुण ने भी कलुआ की निगरानी करने के लिए उसके रूम में सीक्रेट कैमरा लगाया था .... वो अपने कैमरा की फुटेज चेक करने लगा ....

2 बजे रात तक तो कुछ नहीं हुआ था पर करीब रात के 2:05 ऍम पर कलुआ के रूम का गेट खुलता है .... तरुण बड़े ध्यान से ये सब देखने लगता है .... रूम में आने वाला शक्श कोई औरत hi थी जिसके हाथो में एक चमचमाता हुआ चाकू था और उसने एक हूडि वाला जैकेट पहना हुआ था और उसने हाथ में ग्लव्स पहने हुए थे मनो वो पूरी तयारी के साथ आया था ....

कलुआ अभी हलके हलके होश में आने लगा था पर उसके मुँह पर टेप लगा हुआ था ....

उस शक्श ने आते hi जोर से कलुआ के गाल पर एक करारा थप्पड़ मारा और फिर न जाने कितने मुक्के मरे ... वो कलुआ के मुँह पर तब तक मरता रहा जब तक वो थक नहीं गया .... कलुआ का पूरा चेहरा खून से सं गया ... अब उस शक्श ने कलुआ की एक आँख में चाकू मार दिया जिससे कलुआ मुँह में टेप लगे होने के बावजूद चीख पड़ा .... हलाकि ये आवाज़ बहार तक नहीं गयी ... अब उस शक्श ने दूसरी आँख में भी चाकू मार कर उसको भी फोड़ डाला .... कलुआ इस असहनीय पीड़ा को सहन नहीं कर पता और बेहोश हो जाता है ...

इससे भी उस शक्श का मन नहीं भरता तो वो कलुआ पर अंधाधुन चाकू मरने लगता है .... इस बीच पता hi नहीं चलता की लैब कलुआ के प्राण पखेड़ु उड़द गए .....

अब वो शक्श कलुआ के कपडे में hi अपना खून से सना हुआ चाकू साफ़ करता है और बहार जाने लगता है उसके चेहरे पर मास्क लगा हुआ था ... तभी तरुण ने कुछ उस शक्श की कोई खास बात नोटिस की और उसके मुँह से बस इतना hi निकला .... रौशनी काकी

तरुण ये जनता था की ये सब रौशनी ने किया है पर क्यों इस बात का जवाब जानना वो जरुरी नहीं समझता ....

शेर सिंह का मकसद पूरा हो चूका था इसलिए उसने घर के सरे सीक्रेट कामर्स को निकलवा दिया ....

ऐसे hi धीरे धीरे वक्त पंख लगा कर उड़ता रहा .... अब कलुआ को मरे हुए 15 - 20 दिन बीत चुके थे .... शेर सिंह ने अभी तक कोई नया बॉडीगार्ड नहीं रखा था .... उसने अब तरुण को अपने कामो में शामिल करने का मन बना लिया था ....

एक्सरसाइज करवाते करवाते तरुण और सुहानी भी अब थोड़े करीब आ चुके थे .... एक दिन मौका देख तरुण ने सुहानी से पूछ hi लिया ...

तरुण : मैडम ... अपने कहा था की आपके पापा ने आपकी शादी अपने दोस्त के बेटे के साथ फिक्स की है और 3 महीने बाद आपकी शादी होने वाली थी ... अब तो 15 दिन होने को आये हैं ....

सुहानी : अरे हाँ वो रौशन के साथ न ... है होगी hi जल्द ... वैसे मुझे इस घर से बहार भिजवाने की बड़ी जल्दी है तुम्हे ... इतनी बुरी हु क्या मैं ...

तरुण : अरे नहीं मैडम ये तो आपका hi घर है मैं कौन होता हु आपको भागने वाला .. वैसे जहा तक मुझे याद है आपके उसे दिन ऋषि नाम बताया था उसका और आज रौशन बता रही हो ...

सुहानी (हड़बड़ाए हुए ) : हाँ हाँ ऋषि hi बोलै था वो जुबान फिसल गयी ....

सुहानी (मन में) : ये लड़का भी न बिलकुल उल्लू है इतने दिनों मेरे साथ रहा है पर इसको कुछ पता hi नहीं है ... मैं क्या झूट बोल रही और क्या सच बोल रही हु इसको कुछ खबर hi नहीं .... उस दिन इसको नौकर बोलने भर से मेरे दिल पर क्या बीती ये मैं hi जानती हु .... पता नहीं जब इस उल्लू को मेरी फीलिंग्स का पता चलेगा ... मैं तो इसकी दीवानी तब hi हो गयी थी जब से इसने मुझे और मेरी माँ को बचाया था .... अभी तो इस बुद्धू से मेरे बर्थडे वाला सरप्राइज गिफ्ट भी लेना है ...

तरुण : क्या हुआ मैडम कहा खो गयी ... होता है कभी कभी हम बोलना कुछ चाहते हैं और बोल कुछ जाते हैं ऐसा मेरे साथ भी बहुत बार हुआ है कोई बात नहीं ..... चलिए अब आज के लिए रहने देते हैं .... वैसे आप बहुत ाचा कर रही हो आपके ऋषि साहब आपको ऐसे देख बड़े खुस होंगे ...

सुहानी : ok थैंक्स तरुण ...

और फिर सुहानी तरुण को गले लगा लेती है ... सुहानी के गले लगते hi तरुण को ऐसा फील हुआ जैसे वो जिन्दा hi जन्नत में पहुँच गया हो ... पर तभी उसको ख्याल आता है की सुहानी किसी और की अमानत है तो वो अपने दिल पर कण्ट्रोल करके सुहानी से अलग हो जाता है ....

तरुण : ok मैडम अब चलता हु शाम में फिर से मिलते हैं ....

सुहानी (मन में) : पता नहीं इस बुद्धू में ऐसा कौन सा जादू है की जब भी इसके साथ होती हु वक्त और हालात का पता hi नहीं चलता .... मुझे नहीं पता इस फीलिंग को क्या कहते हैं पर जो भी है बड़ा सुकून मिलता है ....

एक दिन मौका देख मीरा तरुण के रूम में रात को आती है ... शेर सिंह के कैमरा लगाने के बाद ये पहली दफा था की मीरा तरुण के रूम आयी थी ....

तरुण : मेमसाब आप मेरे रूम में सब खैरियत तो है न ....

मीरा : हाँ सब ठीक है .... अब तो मेरे पति ने कैमरा भी हटा दिया है अब कैसा दर ....

तरुण : बस यु hi .... अब आप खुस हो न आपका रास्ता साफ़ हो गया है ... वैसे आपके पति नहीं हैं क्या अभी ...

मीरा : नहीं वो तो किसी काम से दूसरे सहर गए हुए हैं अब शायद कल hi आएंगे ... रौशनी और नीलम तो यहाँ है hi नहीं .... सुहानी तो वैसे भी रात को अपने रूम से बहार काम hi निकलती है ... और तुमने सही कहा कलुआ के गुजरने के बाद अब बहुत सुकून सा रहता है ... अब तो लगता है की कोई बहुत बड़ी दीवार गिर गयी है ....

तरुण : क्या अब भी आप अपने पति को मरना चाहती हैं ...

मीरा : हाँ इसीलिए तो कलुआ को रस्ते से हटाया है वर्ण उसके लिए ट्रैप क्यों तैयार करती ... हरामी ने मेरे प्राइवेट पार्ट्स को मसल मसल कर लाल कर दिया था .... 4 - 5 दिन तो हालत ख़राब थी अब जेक कुछ ठीक हुआ है .... वैसे कैमरा वाली बात तुझे कैसे पता चली ....

तरुण कुछ देर चुप रहने के बाद बोलना सुरु करता है ...

तरुण : दरअसल मुझे कलुआ पर पहले से hi शक था की वो मेरी जासूसी करता है इसलिए मैंने एक बार मौका देख कर उसके रूम में एक हिडन कैमरा लगा दिया था .... आपको तो याद hi होगा आपके पति का जिस दिन बर्थडे था उसके अगले दिन वो हम सबको पार्टी के लिए ले गए थे ... ुशी दिन यहाँ सरे सीक्रेट कैमरा लगे थे ... मैंने जब अपने कैमरा का फुटेज देखा तो आपको सावधान कर दिया था ... शायद कलुआ को ये बात पता नहीं थी और वो बलि चढ़ गया .... वैसे अपने कलुआ को ट्रैप कैसे किया ये बात मेरी समझ में नहीं आयी अब तक ...

मीरा : वो मैंने रौशनी की हेल्प से कलुआ को उस दिन लंच में सेक्स होर्मोनेस को बढ़ने वाली दवाई दी थी जिसका असर 7 - 8 घंटे के बाद होता है .... रौशनी उस रात को जल्दी hi सबका डिनर ले कर ऊपर hi चली गयी ताकि कलुआ उसको सेक्स होर्मोनेस बढ़ने की वजह से टारगेट न करे .... कलुआ शायद सेक्स की आग में जल रहा था .... ऊपर का गेट लॉक रहने की वजह से वो ऊपर नहीं जा सकता था ... घर के मैं गेट में तो 8 बजे hi टाला लगवा दिया था मैंने ... तो बची सिर्फ मैं और मैंने भी कोई कसार नहीं छोड़ी ठीक 11 बजे अपने रूम से निकली और फिर रेस्ट इस थे हिस्ट्री नाउ ...

तरुण : वो सब तो ठीक है पर अपने रौशनी से कलुआ को इतनी बेरहमी से क्यों मरवाया ...

मीरा : कलुआ से उसकी भी कुछ खुन्नस थी और मैं नहीं चाहती थी की कलुआ मेरे पति को जिन्दा मिले ...

तरुण : अब तो मुझे आपसे भी दर लगने लगा है ...

मीरा : डरो मत मैं तुम्हे कुछ नहीं करुँगी न hi तुम्हे कुछ होने दूंगी .... यू अरे वैरी स्पेशल तो में ... मैं तो तुम्हे प्यार करने आयी हु ... तुमने मेरे ऊपर बहुत सरे एहसान किये हैं तो बस तुम्हे अपनी तरफ से एक छोटा सा नजराना देने आयी हु ...

तरुण : मेमसाहब ये सब सही नहीं है मैंने आपको कभी उस नजर से नहीं देखा है ...

मीरा : प्लीज न ... आज मेरा बड़ा मन है ये सब करने का .... जिंदगी का क्या भरोषा आज हु कल न राहु ... मैं आज इस पल को जीना चाहती हु ...

तरुण : पर ...

मीरा : कोई पर वॉर नहीं .... कैसे इंसान हो इतनी हॉट एंड सेक्सी औरत तुम्हारे सामने अपनी छूट खोले कड़ी है की आओ मेरी प्यास बुझा दो और तुम हो की इग्नोर किये जा रहे हो .... क्या तुम्हे मैं अछि नहीं लगती ...

तरुण : नहीं मेमसाहब ऐसी बात नहीं है ...

मीरा : आज मैं तुम्हारी कोई मेमसाहब वेमसाहब नहीं बस मैं तुम्हारी मीरा हु और तुम मेरे प्यारे तरुण .....

और फिर मीरा तरुण के ट्रॉउज़र के ऊपर से hi उसका लुंड टटोलने लगती है ....

मीरा : हाहाहा तुम तो मन कर रहे हो पर मेरा ये छोटा यार तो मुझे अपनी हामी दे रहा है कितना दमदार लुंड है तुम्हारा और तुम हो की इसको पिटारे में कैद करके रखते हो ....

और फिर मीरा तरुण को खड़ा करती है नीचे झुक कर एक hi झटके में उसके ट्रॉउज़र को अंडरवियर समेत नीचे खिंच देती है ... ट्रॉउज़र के हटने के साथ hi तरुण का लुंड किसी स्प्रिंग की तरह उछलता हुआ उसके चेहरे से टकरा जाता है ....

मीरा : ोूउउउक्छ्ह ... इसने तो मुझसे दोस्ती करना सुरु भी कर दिया है ... हेहेहे .....

फिर मीरा तरुण के नंगे लुंड को पकड़ लेती है और उसकी लम्बाई और मोटाई नापने लगती है ...

मीरा : यार तुम्हारा लुंड तो बिलकुल ा-1 क्लास का है ... तुम्हारी बीवी की तो मौज हो जाएगी ...

तरुण अब समझ चूका था की मीरा मैंने वाली तो है नहीं तो क्यों न खुल कर मज़े लिए जाये ... वैसे भी मीरा बहुत hi खूबसूरत थी ... उसने मीरा को पूर्णतया नग्न अवस्था में पहले भी देखा था ...

तरुण : आज के लिए तो आप hi मेरी बीवी हो ... अपने अपने पति को तो नंगा कर दिया और खुद कपडे पहने हुए हो ये कहा का इंसाफ है भला ...

मीरा : पतिदेव जी आप hi उतर दो न अपनी बीवी के कपडे ...

और मीरा कड़ी हो जाती है ... कुछ hi देर में तरुण ने मीरा को भी पूरी तरह से नंगा कर दिया ... कपडे के नाम पर मीरा के जिस्म पर एक रेशा तक न था ...

मीरा के बड़े बड़े साइज के चुके उसकी खुबसुआरति में चार चाँद लगा रहे थे .... मीरा की चूचिया बड़ी तो थी पर उनमे लटकपन बिलकुल भी नहीं था ...

बूब्स के नीचे हलकी सी चर्बी की रंगत लिए पेट जिसके बीच में गहरी सी नाभि थी ... नाभि के कुछ इंच नीचे छोटे छोटे त्रिम्मेद प्यूबिक हेयर थे जो की सैनिक की तरह अपनी रानी की रक्षा कर रहे थे ... बालो के आवरण के नीचे मीरा की प्यारी सी छूट थी जिसकी खुदाई ज्यादा अछि तरह से नहीं हुयी थी ... मीरा के चूतड़ भी पीछे को निकले हुए थे जो की उसको और भी कामुक टच देते थे ... शौर्य सिंह ने तो बहुतो बार उसकी छूट में लुंड डाला था पर मीरा ने उसको अपने बैकडोर में कभी एंट्री नहीं दी थी ....

मीरा : अब बस घूरते hi रहोगे या तारीफ भी करोगे अपनी बीवी की ...

तरुण : बिलकुल कंटाप माल हो ... आप तक आपके इस खेत में कितने लोगो ने हल चलाया है ...

मीरा : बस दो hi ने यार आज तुम तीसरे हो ... वैसे इसमें अपना लुंड सताने वाले तो दो और थे जिन्हे तुमने मार डाला ...

तरुण : यार आप बहुत सेक्सी हो अब मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा ...

मीरा : तो कण्ट्रोल कर hi क्यों रहे हो ... आज रात मैं तुम्हारी बीवी hi तो हु ... आगे बढ़ो और फ़तेह कर लो मेरे किले को ....

तरुण मीरा को गॉड में उठा लेता है और बड़े प्यार से बीएड पर फेंक देता है ... और मीरा के ऊपर झुकने लगता है और अपने होंठो को मीरा के होंठो से जोड़ लेता है ... तुरंत hi दोनों फुल जोश में एक दूसरे के होंठो को चूसने लगते हैं ... दोनों काफी वाइल्ड तरीके से एक दूसरे के थूक को एक्सचेंज करने लगते हैं ... काफी देर बाद दोनों अलग होते हैं ... अलग होते hi दोनों हांफने लगते हैं ... साँसों को व्यवस्थित करने के बाद तरुण मीरा के चूचियों को सहलाने लगता है ...

मीरा : अले अले लगता है मेले बच्चे को भूक लगी है मुम्मा का न सही आज बीवी के दूध से hi अपनी भूक मिटा लो ...

और मीरा पुचकारते हुए तरुण का मुँह अपने बूब्स पर रख देती है और तरुण भी उसकी बात मानते हुए उसके निप्पल को चूसना सुरु कर देता है ... तरुण एक बूब्स को चुस्त है तो दूसरे को अपने हाथ से मसलने लगता है ...

तरुण के दूध चुसाई से मीरा इतनी गरम हो जाती है की अपने छूट में खुद hi ऊँगली करने लगती है ...

जब तरुण का मन मीरा के मदमस्त चूचियों से भर जाता है तो वो नीचे सरक कर मीरा के दोनों टैंगो के बीच आ जाता है और रास से सराबोर मीरा की छूट पर एक चुम्मी दे देता है ....

मीरा : वह सारा मज़ा तुम hi लोगे क्या मुझे भी मेरा खिलौना दे दो ...

तरुण उसकी बात समझ कर 69 पोजीशन में आ जाता है अब मीरा के मुँह के पास तरुण का लुंड था तो मीरा के छूट के पास तरुण का मुँह ....

मीरा किसी भूखी कुटिया की तरह तरुण के मोठे हलब्बी लुंड को अपने जीभ से चाटने लगती है .... इधर तरुण ने भी अपने जीभ से मीरा की छूट को चेतना सुरु कर दिया था ....

दोनों का ये खेल तब तक चलता रहता है जब तक की दोनों झाड़ नहीं जाते .... मीरा तरुण का पूरा का पूरा वीर्य जातक जाती है वही तरुण भी मीरा के छूट से निकले रास का कुछ हिस्सा अपने हलक में उतर लेता है ...

मीरा : यार जब ट्रेलर में इतना मज़ा आया तो पूरी फिल्म में कितना मज़ा आएगा ... यू अरे सो गुड यार ...

तरुण : अब मेरी बीवी ने ख्वाहिस जताई है तो उसको नीरस कैसे कर सकता हु ...

कुछ देर बाद तरुण मीरा के टांगो के बीच आ जाता है और अपने लुंड को मीरा की गीली छूट पर निशाना सेट करके एक जोरदार धक्का लगा देता है जिससे मीरा के मुँह से एक दर्द और मस्ती भरी सिसकारी निकल जाती है ....

दर्द इसलिए क्यूंकि अब तक उसकी छूट ने जो दोनों लुंड खाये थे उनसे तरुण का लुंड ज्यादा लम्बा और मोटा था ....

तरुण के लुंड का आधा भाग मीरा की छूट में धंस चूका था .... अब तरुण ने अपने लुंड को थोड़ा बहार खिंचा और फिर से एक करारा शॉट लगा दिया जिससे मीरा बीएड पर पड़ी हुयी बिन पानी मछली की तरह छटपटा उठी ... उसकी आँखों से आंशू बह निकले थे पर उसने तरुण को आगे बढ़ने को कहा ... तरुण ने फिर से थोड़ा सा लुंड को हल्का बहार खिंचा और एक जबरदस्त स्ट्रोक लगा दिया .... इस बार तरुण का पूरा लुंड hi मीरा की छूट में समां गया ....

मीरा की हालत और भी ख़राब हो चुकी थी पर वो अभी भी खुद को नार्मल दिखने की कोसिस कर रही थी ...

तरुण : मीरा डार्लिंग ठीक तो हो न आप ...

मीरा : हाँ मैं ठीक हु जितना दर्द होना था हो गया अब तो मज़े की बरी है ....

मीरा की स्वीकृति पाकर तरुण धीरे धीरे अपने लुंड को अंदर बहार करने लगा क्यूंकि मीरा की छूट में उसका लुंड के लायक जगह अभी नहीं बानी थी .... कुछ देर ऐसे hi चलता रहा ... इस घर्षण के प्रभाव से मीरा की छूट ने पानी छोड़ दिया था जिससे अब तरुण को अब थोड़ी आसानी हो रही थी और अब वो हल्का तेज़ झटके मरने लगा .... दोनों के मिलान से फच फच की मधुर ध्वनि उत्पन्न होने लगी थी .... कुछ देर ऐसे hi करने के बाद जब तरुण को लगा की वो अब झड़ने वाला है तो उसने अपना लुंड बहार निकल लिया और खुद बीएड पर लेट कर मीरा को अपने ऊपर आने का इशारा किया ... मीरा भी अब कड़ी हो जाती है और तरुण के लुंड पर अपनी छूट टिका कर बैठ जाती है ... पूरी तरह बैठने के बाद वो धीरे धीरे ऊपर नीचे होना सुरु कर देती है .... तरुण मीरा की बड़ी बड़ी चूचियों को अपने हाथो में थामे नीचे से मीरा की छूट में धक्के लगाने लगा ...

अब वो खड़ा हो जाता है और मीरा को अपने गॉड में उठा लेता है मीरा उसके लुंड को अपनी छूट का रास्ता दिखा देती है और वो पुरे तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगता है ... इस पोजीशन में सेक्स करने में दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था ... दोनों के लिए इस पोजीशन में ये पहली बरी थी पर तरुण काफी अचे तरीके से स्ट्रोक लगा रहा था और मीरा की छूट में अपना गरम वीर्य छोड़ देता है वही मीरा भी तरुण के गधे गरम वीर्य को अपने अंदर महसूस करके खुद भी झाड़ जाती है ....

अब तरुण अपने लुंड को मीरा की छूट से निकल लेता है और बीएड पर लिटा देता है ...

तरुण : उफ्फ्फ जोश जोश में मैंने अपना पानी आपकी छूट में छोड़ दिया ... आप कही प्रेग्नेंट हो गयी तो ...

मीरा : नहीं होउंगी मेरे नन्हे बालम ... मैंने सुहानी के होने के बाद hi अपना ऑपरेशन करवा लिया था ... आज तुमने मुझे एहसास दिला दिया की यू अरे थे बेस्ट .. मैं कहा गोभी के फूल में खुसबू की तलाश कर रही थी .... काश मैंने तुम्हे पहले hi निपटा दिया होता तो कितना ाचा होता ....

तरुण : कोई नहीं अब तो आपको मिल गया हु न ... वैसे आपकी गांड बड़ी मस्त है ...

मीरा : इतनी जल्दी मेरे छूट से मन भर गया तुम्हारा क्या जो अब मेरी गांड की डिमांड कर रहे हो वैसे तुम्हारी जानकारीके लिए बता दू की वो बिलकुल कोरी है मैंने वह किसी को एंट्री नहीं दी है ... पर तुम्हे जरूर दूंगी बिकॉज़ यू अरे माय बेस्ट बडी .... पर आज नहीं उसके लिए तुम्हे कुछ दिन इंतजार करना होगा ....

तरुण : हाँ हाँ क्यों नहीं कर लूंगा इंतजार ... वैसे आपकी छूट तो पहली बार hi टास्ते किया है मेरे नन्हे शैतान ने ... अभी तो दोनों में अचे तरह से दोस्ती होनी बाकि है ...

मीरा : हाँ हाँ क्यों नहीं मेरे नन्हे बालम ...

कुछ देर ऐसे hi आपस में मदमस्त बाते करने के बाद मीरा अपने कपडे पहन के तरुण के रूम से अपने रूम आ जाती है ....

तरुण के लुंड ने आज मीरा का किला भी फ़तेह कर लिया था ....
 
आने वाले अपडेट के कुछ अंश

नीलम और रौशनी के होंठ किनारे से फटे हुए थे जिनके पास सूखे हुए खून के कतरे थे .... दोनों गाल तो लाल हो चुके थे जैसे की किसी ने उन्हें बड़ी बेरहमी से मारा हो .....

अपनी मालकिन को होश में आता देख दोनों के चेहरे पर दर्द में भी एक मुस्कान आ जाती है .... अभी वह कोई आस पास मौजूद नहीं था इसलिए रौशनी धीमी आवाज़ में मीरा से बात करना सुरु करती है ...
 
अपडेट 51

मीरा : हाँ हाँ क्यों नहीं मेरे नन्हे बालम ...


कुछ देर ऐसे hi आपस में मदमस्त बाते करने के बाद मीरा अपने कपडे पहन के तरुण के रूम से अपने रूम आ जाती है ....

तरुण के लुंड ने आज मीरा का किला भी फ़तेह कर लिया था ....

आगे

आज की रात तो तरुण और मीरा के लिए खुसियो की रात थी दोनों जैसा चाहते थे बिलकुल वैसा hi हुआ उन्होंने दिमाग का सदुपयोग करते हुए बड़ी आसानी से अपने रस्ते के सबसे बड़े कांटे यानि की कलुआ को हटा दिया था .... अब उन्हें लग रहा था की उन्होंने अपने मिशन को लगभग अचीव भी कर लिया है और आज की रात उनके बीच जो कुछ भी हुआ वो इस बात का सबूत था की वो अपनी जीत से कितने खुस थे ....

दोनों अपने अपने रूम्स में सोये हुए थे इस बात से अनजान की अगले दिन उनकी जिंदगी में क्या क्या उथल पुथल होने को है ....

सुबह सुबह को मीरा के मोबाइल पर रौशनी के मोबाइल से एक मैसेज आता है ....

"मेमसाहब ... आप जल्दी से मेरे पुराने वाले घर पर आ जाइये और हाँ तरुण को मत बताना की आप यहाँ आ रही हो ... मैं और नीलम एहि हैं .... आपसे कुछ जरुरी बात करनी है जो मैं वह घर में नहीं कर सकती .... मुझे शेर सिंह के खिलाफ एक बहुत बड़ा सबूत मिला है जिससे हम आसानी से उसको बर्बाद कर सकते हैं ... "

मीरा ने जब ये मैसेज देखा तो उसको नार्मल hi लगा क्यूंकि कलुआ की प्लानिंग भी उन्होंने रौशनी के पुराने घर में hi की थी ...

पर फिर भी उसका दिल नहीं मंटा तो वो तरुण के मोबाइल पर मैसेज कर देती है की वो रौशनी के पुराने वाले घर जा रही है और शायद दोपहर तक लौटेगी .... रात में तरुण देर से सोया था इसलिए अभी उसकी नींद भी नहीं खुली थी और वो तरुण के नींद को भी डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी ... मैसेज करने के बाद उसने पता नहीं क्यों अपने मोबाइल से उस मैसेज को डिलीट कर दिया ....

मीरा खुद hi अपनी कार ड्राइव करके रौशनी के घर पहुँचती है .... घर का मैं गेट खुला हुआ hi था इसलिए मीरा दनदनाती हुयी अंदर घुस जाती है ....

पुरे घर में शांति छायी हुयी थी ... वो रौशनी और नीलम का नाम पुकारते हुए सभी जगह उन्हें ढूंढ़ने लगती है तभी वो एक रूम के पास पहुँचती है जिसका गेट सिर्फ सताया हुआ था पर वो अंदर से लॉक नहीं था ....

वो गेट को हलके से धक्का देती है तो वो खुल जाता है वो जब सामने देखती है तो पति है की उस रूम में भी कोई नहीं है .... वो उस रूम से बहार निकलती इस पहले hi किसी ने उसके मुँह पर स्प्रे कर दिया जिससे उसकी आँखें धीरे धीरे बोझिल होने लगती है .... और कुछ hi लम्हो में वो बेहोश होकर नीचे फर्श पर गिर जाती है .....


तरुण ब्रेकफास्ट के टाइम नोटिस करता है की घर में सुहानी के अलावा और कोई न था ....

जब उसका दिल नहीं मंटा तो वो सुहानी से पूछ hi लेता है ...

तरुण : सुहानी जी ... मेमसाहब घर में नहीं दिख रही .... और नीलम और रौशनी काकी अब तक घर नहीं पहुंचे क्या ...

सुहानी : नहीं पता तरुण ये दोनों तो अब तक नहीं आयी हैं और मुम्मा पता नहीं सुबह से नहीं दिख रही रात में तो डिनर के वक्त तो एहि थी ... क्यों तुम्हे उनसे कोई काम है क्या ....

तरुण : नहीं वो नहीं दिख रही तो पूछ लिया ....

सुहानी : ok कोई बात नहीं ....

अब तो दोपहर से शाम होने को आयी थी पर अब तक मीरा का कोई अत पता न था ...

तरुण (मन में) : ऐसा तो आज से पहले कभी नहीं हुआ था की मीरा मेमसाहब घर से बहार गयी हो बिना किसी को बताये ... और तो और अब तक एक कॉल करके बताना भी जरुरी नहीं समझा उन्होंने ....

उधर करीब दोपहर को मीरा को होश आया तो उसने देखा की वो एक बड़े से हॉल में चेयर से बंधी पड़ी है और उसके बगल में hi रौशनी और नीलम भी उसकी hi तरह चेयर से बंधी पड़ी थी .....

नीलम और रौशनी के होंठ किनारे से फटे हुए थे जिनके पास सूखे हुए खून के कतरे थे .... दोनों गाल तो लाल हो चुके थे जैसे की किसी ने उन्हें बड़ी बेरहमी से मारा हो .....

अपनी मालकिन को होश में आता देख दोनों के चेहरे पर दर्द में भी एक मुस्कान आ जाती है .... अभी वह कोई आस पास मौजूद नहीं था इसलिए रौशनी धीमी आवाज़ में मीरा से बात करना सुरु करती है ...

रौशनी (धीरे से) : मेमसाहब जैसा अपने कहा था की चाहे कुछ भी हो जाये तरुण का नाम हमारे जुबान से न निकले ... ठीक वैसे hi हमने उसका नाम नहीं लिया .... उन्होंने इतना ज्यादा टॉर्चर किया की मेरे नीलम ने दर के मरे आपका नाम ले लिया .... उसको तरुण के बारे में पता नहीं था .... आपके लिए तो मैं हस्ते हस्ते अपनी जान दे सकती हु मेमसाहब .... पर एक बात समझ नहीं आयी अपने ऐसा क्यों कहा था की उस तरुण के बारे में नहीं बताने को ...

मीरा : वो मेरी वजह से इसमें शामिल हुआ है वैसे भी उसके मुझ पर इतने सरे एहसान हैं की मैं तुम्हे गिनवा नहीं सकती .. तुम्हारी क्या अगर उसको प्रोटेक्ट करते हुए मेरी भी जान चली जाये तो मुझे कोई ग़म नहीं ...

हुआ ये था की कल शाम को रौशनी अपने किसी रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए घर से निकली थी और उसने नीलम को भी अपने साथ ले लिया था ....

वो लोग जब रौशनी के पुराने वाले घर पहुंची तो उनके पीछे से hi शेर सिंह और उसके आदमी भी घर में घुस गए ....

शेर सिंह को अपने घर में देख एक पल को तो रौशनी घबरा गयी पर अपनी साँसों को व्यवस्थित कर उसने शेर सिंह से सवाल किया ....

रौशनी : मालिक आप यहाँ इस गरीब की झोपडी में ... आइये मैं बैठने का कुछ लती हु ....

रौशनी और नीलम जल्दी से उनके लिए दो चेयर ले आते हैं ....

रौशनी : जी मालिक बैठिये ... आप पहली बार हमारे घर आये हैं ... यहाँ कुछ खाने पिने का भी नहीं है आपको ऐसे भूखे पेट तो नहीं रख सकती ... नीलम बीटा जरा सा पास के दुकान से कुछ खाने पिने का तो लेकर आ ...

नीलम के जाते hi शेर सिंह के आदमियों ने गेट को अंदर से बंद कर दिया ...

शेर सिंह : वह क्या बात है ाचा खातिरदारी करती हो और किसी को मरती भी हो तो पूरी शिद्दत से मरती हो ....

रौशनी : मालिक मैं कुछ समझी नहीं ...

शेर सिंह : वह एक्टिंग भी ाचा करती hi तुम्हे तो फिल्म इंडस्ट्री में होना चाहिए ... लेकिन मुझे ये समझ नहीं आया की जब तुम कलुआ से प्यार करती थी तो उसको इतनी बेरहमी से क्यों मारा ....

रौशनी के तो पैरो टेल जमीन hi खिसक गयी .... ऐसा कुछ होगा उसने एक्सपेक्ट भी नहीं किया था ...

रौशनी (घबराते हुए) : M....ma .....मालिक M....maaa....maine कहा कुछ किया है ....

शेर सिंह : तो ाचा तेरा ये झुमका वह कैसे कलुआ की लाश के पास से बरामद हुआ .... देख अब तो तू फास चुकी है .... अब बहाने बनाने से कोई फायदा नहीं ....

रौशनी : मालिक सच में मैंने कुछ नहीं किया है ये सब झूट है ....

शेर सिंह : ाचा लगता है तू ऐसे नहीं मानेगी .... रे झबरु साली के सरे कपडे उतर कर साली को नंगी कर दे ....

अभी वो लोग कुछ करते इससे पहले hi गेट नॉक होने लगता है .... शेर सिंह ने इशारे से गेट खोलने को कहा ....

रौशनी : भाग जा नीलम बीटा .... मत आ यहाँ .....

अभी रौशनी कुछ और बोलती इससे पहले hi झबरु उसको पकड़ कर उसका मुँह बंद कर देता है .... वैसे भी आवाज़ बहार नहीं गयी थी ... नीलम जैसे hi अंदर घुसती है शेर सिंह के आदमी उसको बंद कर देते हैं ...

अब तक झबरु ने रौशनी की साड़ी निकल दी थी और अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में सब के सामने कड़ी थी .... रौशनी की हालत देख नीलम के सरीर में कंपकपी छूट गयी ....

झबरु ने अब रौशनी के पेटीकोट की डोरी भी खिंच ली थी जिससे उसकी पेटीकोट सरसरा कर नीचे गिर गयी ... अंदर पंतय न होने के कारन वो नीचे से पूरी तरह से नंगी सबके सामने कड़ी थी .... झबरु एहि तक नहीं रुकता और रौशनी के बदन पर लिपटे हुए आखिरी कपडे को भी उतर कर उसको पूरा नंगा कर देता है ... रौशनी अपनी छूट को अपने हाथो से ढकने की नाकाम कोसिस करने लगती है ...

शेर सिंह : वह यार क्या नायब जिस्म है तुम्हारा ... ऐसे hi नहीं कलुआ तेरा दीवाना था ... तुमने भी बहुत खूब आशिकी लड़ाई उससे पहले उसको अपने हुस्न से घायल किया और फिर उसका hi बेरहमी से कतल किया ....

रौशनी : मालिक आपको कैसे पता की कलुआ का कतल मैंने किया है और मैं कलुआ को क्यों मरूंगी मैं तो उसको प्यार करती थी ...

झबरु जोर से रौशनी के चूचियों को मसल देता है ....

झबरु : साली मालिक से जुबान लड़ती है ...

अभी झबरु ने इतना बोलै hi था की एक गोली उसके माथे में धंस जाती है और वो वही गिर जाता है ....

ये गोली किसी और ने नहीं शेर सिंह ने चलायी थी ....

शेर सिंह : ma@@$+$d कुछ ज्यादा hi तेज़ हो रहा था ... रौशनी अब तुम कपडे पहन लो तुम्हे दर्द देने का हक़ सिर्फ मेरा है .... अब भी वक्त है सच सच बता दो तुम्हारी जान बक्श दूंगा ...

रौशनी जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन लेती है क्यूंकि उसको बहुत शर्म आ रही थी ....

शेर सिंह : चलो बे यहाँ से इन् दोनों को भी साथ ले लो और अड्डे पर पहुंचो और इस कुत्ते की लाश का भी हिसाब किताब कर देना ... और हाँ याद रहे इन् दोनों के साथ कोई भी बदतमीज़ी नहीं करेगा सिवाए मेरे आर्डर के ....

शेर सिंह के आर्डर से उसके पालतू कुत्तो ने नीलम और रौशनी को खाना खिला दिया ..

करीब 12 बजे रात को वह शेर सिंह की एंट्री होती है .... उसको देखते hi रौशनी की हवा निकल जाती है .....

शेर सिंह : तो बताओ रौशनी मेरी जान किसी ने तुम्हे तंग तो नहीं किया न ...

रौशनी : अब तो हमें छोड़ दो मालिक ....

शेर सिंह : चलो ठीक है मैं तुम्हे जाने दे दूंगा पर उससे पहले मुझे ये बता दो की तुम लोगो ने कैसे कलुआ को मारा और तुम्हारे साथ और कौन है .... और तुम्हारा प्लान क्या था ....

रौशनी और नीलम चुप चाप बैठी रहती है ....

शेर सिंह : लगता है तुम लोग ऐसे नहीं मानोगी ... जग्गा और भीमा थोड़ा दोनों महिलाओ का स्वागत तो करो ....

जाएगाऔर भीमा आगे बढ़ने और रौशनी और नीलम के चेहरे पर थप्पड़ मरने लगे वो ऐसा तब तक करते रहे जब तक शेर सिंह ने उन्हें रुकने को नहीं बोलै ....

शेर सिंह : देखो रौशनी मैं लड़कियों या औरतो के खिलाफ शख्ती से पेश आना नहीं चाहता पर तुम लोग co-operate नहीं कर रही तो मैं क्या करू ....

रौशनी : मैं तो सच कह रही साहब ....

शेर सिंह : तुम लोग लातो की भूत हो तो बातो से कहा मानोगी ....

नीलम : मैं सब कुछ बताती हु पर आप वादा करो की आप हमें उसके बाद छोड़ डोज ....

शेर सिंह : ये हुयी न बात .... चलो मैं वडा करता हु की तुम्हे कुछ नहीं करूँगा ....

नीलम उसको सब कुछ बता देती है जो वो जानती थी .... उसकी पूरी कहानी सुनने के बाद शेर सिंह की मुठ्ठी गुस्से में भींच जाती है .... नीलम को तरुण के बारे में नहीं पता था की वो इसमें शामिल है ....

शेर सिंह : साली मेरी बिल्ली और मुझसे hi मयाव .... मीरा डार्लिंग तुम्हे तो मैं कल देखता हु ... आज की रात जी ले अपनी जिंदगी क्यूंकि कल तुम्हे वो मौत मिलेगी की आने वाली पीढ़िया अपने पति के खिलाफ जाने से पहले दस बार सोचे ...

शेर सिंह : भीमा इस रौशनी को मेरे रूम में ले चलो .... मैं भी तो देखु जिसने कलुआ जैसे खतरनाक इंसान को इतनी बुरी मौत दो उसके अंदर कितनी गर्मी है ....

भीमा रौशनी को ले जाने लगता है ....

नीलम : मालिक अपने तो वडा किया था की आप हमें छोड़ डोज अगर मैं सच बताऊ तो ...

शेर सिंह : तो मैं कहा अपने वादे से मुकर रहा मैंने तो कहा था की मैं तुम्हे छोड़ दूंगा ... इस रौशनी को छोड़ने की बात कहा हुयी थी इससे तो मैं छोडूंगा ...

और फिर रात में न जाने कितनी बार शेर सिंह ने रौशनी की अस्मत लूटी ....

******************

बैक तो प्रेजेंट ....

तरुण को इवनिंग में अचानक से याद आता है की उसका रिचार्ज तो कल रात को hi ख़त्म हो गया था ....

वो भाग कर जाता है रिचार्ज करवाने .... रिचार्ज करवाने के बाद जब उसने मोबाइल डाटा ों किया तो उसको व्हाट्सप्प पर एक मैसेज का नोटिफिकेशन आता है ....

तरुण जब मैसेज चेक करता है तो वो मीरा का hi था की वो रौशनी के पुराने वाले घर जा रही है ....

तरुण (मन में) : ये क्या बवासीर है कल नीलम और रौशनी उस घर में गयी थी तब से hi दोनों गायब है और आज मीरा भी वही से गायब हुयी है ... कही वो गड़बड़ तो नहीं हो गयी जो मैं सोच रहा हु ... सबसे पहले रौशनी के घर जा कर देख लेता हु ...

तरुण वह जाता है तो उसके घर का गेट तो खुला था पर पुरे घर में कोई मौजूद नहीं था ....

तभी उसको एक रूम में एक कान का झुमका मिलता है जिसे की तरुण बखूबी जनता था क्यूंकि ये झुमका मीरा का था .... अब तरुण को पक्का यकीं हो गया की सारा भंडाफोड़ हो चूका है ....

तरुण (मन में) : अभी मुझे सुहानी को सेफ जगह पर पहुँचाना होगा क्यूंकि अगर शेर सिंह को पता चला की वो उसकी बेटी नहीं है तो वो उसको भी नुकसान पहुंचा सकता है ....

पर सबसे बड़ा सवाल था की वो उसको छोड़े तो छोड़े कहा .... क्यूंकि अपने घर तो वो उसको नहीं ले जा सकता था .... की तभी उसको शहनाज़ की याद आयी एक वही थी जिसके ऊपर वो आँख बंद करके भरोषा कर सकता था ....

वो जल्दी से उसको कॉल करता है तो पता चलता है वो अभी अपने मायके आयी हुयी थी जो किस्मत से उस गाँव से एक घंटे की ड्राइविंग डिस्टेंस पर थी .... उसके मायके में उसके बूढ़े अम्मी और अब्बू के अलावा और कोई न था ... तरुण को सबसे सेफ ऑप्शन एहि लगा ....

तरुण उसको शेर सिंह के गाँव के पास वाले मार्किट में आने को कहता है जो की हाफ ान ऑवर के ड्राइविंग डिस्टेंस पर था ....

तरुण जल्दी से घर जाकर सुहानी को उसका बैग पैक करने को कहता है और खुद भी वो उसमे उसकी हेल्प करता है ....

वो जल्दी से सुहानी को लेकर निकल पड़ता है ... जल्द hi उसको मार्किट में शहनाज़ मिल जाती है ....

तरुण शहनाज़ को सुहानी से इंट्रोडस करवा कर उसका सामान उसके गाडी में रखवा देता है .....

सुहानी अभी शहनाज़ की गाडी में बैठी हुयी थी ....

तरुण : शहनाज़ ये मेरा सबसे अनमोल खज़ाना है इसकी अचे से हिफाज़त करना ... मुझे वडा करो तुम इसके ऊपर आंच तक नहीं आने डौगी ....

शहनाज़ : हाँ बाबा पहली बार तुमने मुझसे कुछ काम को कहा है ये मेरी जान से भी बढ़ कर है और तुम ऐसी बहकी बहकी बात क्यों कर रहे हो ....

तरुण : शहनाज़ पता नहीं मैं जिस मिशन पर जा रहा हु वह से ज़िंदा वापस लौटूंगा या नहीं .. बस इसको मेरी अमानत समझ कर अपनी बेटी की तरह रखना ....

शहनाज़ : तुम पागल हो क्या ... मेरा प्यार इतना कमजोर नहीं हो सकता तुम वापस जरूर आओगे .... तुम इसकी तरफ से बिलकुल निश्चिंत रहो ... अब तो मुस्कुरा दो तुम उदास अचे नहीं लगते ....

तरुण एक स्माइल पास करके वापस सुहानी के पास आ जाता है ....

तरुण : सुहानी जी ये मेरी मैडम हैं कुछ दिनों के लिए आप इनकी मेहमान हो .... मैं जल्द hi आपको लेने आ जाऊंगा .... मीरा मेमसाब ने आपको मुझे इनके पास छोड़ने को कहा था ... Ok bye अब आप जाओ जल्द hi मिलते हैं ....

पता नहीं सुहानी को क्या हुआ वो गाडी का गेट खोल कर बहार निकल आयी और जोर से तरुण को हुग कर लेती है .... सुहानी के इस हुग से तरुण को बहुत सुकून मिलता है ...

सुहानी : जल्दी आना .... मुझे तुम्हारा इंतजार रहेगा ....

सुहानी के आँखों से दो बूँद आंशू गिर जाते हैं ....

सुहानी के बैठते hi शहनाज़ गाडी को भगा ले जाती है और तरुण नाम आँखों से उस गाडी को तब तक देखता रहता है जब तक वो उसकी आँखों से ओझल नहीं हो जाती है ....

तरुण : अब तो वापस आना hi पड़ेगा ...

तरुण गाडी स्टार्ट करके वापस शेर सिंह की हवेली के लिए निकल जाता है ... सुहानी के जाने से अब तरुण की घबराहट भी ख़त्म हो गयी थी अब उसको किसी का दर नहीं था .... उसने रस्ते में hi गाडी को एक जगह रोक कर उस पुलिस वाले को साडी बात बता दी जिसके थ्रू उसने शेर सिंह का ड्रग्स पकड़वाया था .....

अभी तरुण गाडी स्टार्ट करके कुछ फिर hi गया था की उसके मोबाइल पर शेर सिंह के नंबर से कॉल आ गया ....

शेर सिंह : hello तरुण ... कहा हो ....

तरुण (मन में) : लगता है इसको अभी उनलोगो ने मेरे बारे में नहीं बताया है ...

तरुण : बस बहार आया था ....

शेर सिंह : और सुहानी कहा है ...

तरुण : वो तो अपनी सहेली के पास गयी है ...

दरअसल तरुण ने पहले hi सुहानी के मोबाइल को बड़ी चालाकी से उसके बैग से निकल लिया था ताकि वो और शेर सिंह आपस में बातें न कर सके ....

शेर सिंह : ाचा वो सब छोड़ तू जल्दी से हमारे अड्डे पर आ जा ... रुक मैं लोकेशन सेंड करता हु .... मैंने उन् सभी गद्दारो को पकड़ लिया है जिसने मेरे पीठ पीछे मेरी hi घर में रह कर मेरी मौत की साज़िस रची थी .... तुम जल्दी से यहाँ आ जाओ तुम्हारे लिए एक सरप्राइज तुम्हारा इंतजार कर रहा है ...

तरुण : ठीक है मैं जल्द आता हु ....

तरुण हवा की रफ़्तार से गाडी उडाता हुआ उस अड्डे पर पहुँचता है ....

शेर सिंह के पंटर जो वह की रखवाली कर रहे थे वो उसको अंदर जाने देते हैं ....

शेर सिंह : आओ तरुण आओ ... देखो एहि तीन लोग हैं जो मेरे घर में रहकर मेरे खिलाफ ज़हर उगल रहे थे ..... कलुआ को भी उतनी दर्दनाक मौत इस रौशनी ने hi दी थी .... देखो तो कोई कह सकता है की एक औरत इतनी ज़ालिम हो सकती है .... वह क्या सन है मेरे सरे दुश्मन एक hi छत के नीचे बंधे पड़े हैं ....

तभी पीछे से आवाज़ आती है ....

"फूफा जी अभी कहा आपका असली गुनेहगार तो यहाँ है जिसे देख कर और इसकी सच्चाई जानकार शायद आपका खून भी खौल उठे "

ये कोई और नहीं विकाश था जो की शौर्य सिंह के हाथ को बांध कर और उसके मुँह पर टेप चिपका कर वह लाया था ...

शेर सिंह : क्या बात है भांजे .... तुम अपने बाप को ऐसे क्यों लाये हो ....

विकाश : इसकी करतूत पता चलेगी तो आप खुद hi इसकी जान ले लोगे ....

और फिर विकाश उसको शौर्य सिंह और मीरा की साडी दास्ताँ सुना देता है और साथ hi साथ ये भी बता देता है की सुहानी शेर सिंह की नहीं बल्कि शौर्य सिंह की बेटी है ....

शेर सिंह को जब ये पता चलता है वो शौर्य सिंह के चेहरे पर लास्ट घूंसो से उसकी खातिरदारी करता है .... और जब उसका चेहरा lahu-luhan हो जाता है तो उसके मुँह से टेप हटा देता है ....

शौर्य सिंह जोर जोर से दर्द के मरे चीखे जा रहा था ... उसकी ऐसी हालत देख मीरा की भी आँखें भर आती है ... आख़िरकार वो उसका सागा बड़ा भाई जो था और उन्होंने साथ साथ कुछ क्वालिटी टाइम्स भी तो बिताये थे ....

शेर सिंह एहि नहीं रुकता है वो अपनी बन्दुक निकल कर शौर्य सिंह के माथे में 6 गोलिया उतर देता है ....

शेर सिंह : वह भांजे तुमने तो मेरा दिल खुस कर दिया .... बोल तुम्हे क्या इनाम चाहिए ....

विकाश : फूफा जी अब तो आप मीरा बुआ से कोई रिश्ता तो रखोगे नहीं और शायद hi आप उन्हें जिन्दा छोड़ोगे तो मैं चाहता हु की जो मज़ा मेरे बाप ने जिंदगी भर लुटा है वो मज़ा मैं आखिरी बार बुआ से लुटू ....

शेर सिंह : चल तू भी क्या याद करेगा ... जा ऐश कर .... हम थोड़ा बहार से आते हैं .... तरुण ... इनकी देखभाल करना अगर कोई ज्यादा छू चपड़ करे तो खिंच के एक कंटाप लगा देना ... अब तुम hi हो जो कलुआ की जगह ले सकता है ...

तरुण : hi साहब आपको शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा ....

शेर सिंह बहार चला जाता है और एक आदमी को बोल कर विकाश मीरा को अपने साथ एक रूम में ले जाता है ....

****************

शेर सिंह अपने अड्डे से निकल कर अपने खास आदमियों के साथ एक ढाबे पर पहुँच कर अपनी जीत का जश्न मानाने में लगा हुआ था की तभी उसके मोबाइल पर किसी का कॉल आता है ....

शेर सिंह : हाँ बोल मेरी रांड ... कैसी है ... अब तो तेरा पति भी मर चूका है अब तुझे कोई दिक्कत तो नहीं ....

*********** : मैं ठीक hi हु सिंह साहब आपकी दया से .... आपकी मेहेरबानी से hi तो मैं अब इस घर की मालकिन बनने जा रही हु बस उस सपोले का कुछ इंतजाम हो जाये उसके बाद तो कोई टेंशन hi नहीं नहीं ....

शेर सिंह : तुम किसकी बात कर रही हो ... अब तो उस घर में दोनों लूले लँगड़ो के अलावा तुम्हारा देवर hi है न ... तुमने तो कहा था की वो बिलकुल तुम्हारे बैश में है तो अब ये रंडी रोना क्यों ....

अब तक तो आप समझ hi गए होंगे की फ़ोन पर बात करने वाली औरत कौन हो सकती है .... जी हाँ ये खुसबू hi थी तरुण की मंझली चची .... इस घर की मंत्र ...

खुसबू : उस भड़वे से कहे का दर उसका एक बीटा है तरुण नाम है उसका ....

शेर सिंह : क्या कहा तूने फिर से बोलो ....

खुसबू : उसका एक बीटा है तरुण नाम है उसका ....

शेर सिंह : ओने मिनट ... तुम्हारे पास उसकी कोई फोटो वगैरह है क्या ....

खुसबू : मेरे पास तो नहीं है सिंह साहब ... क्यों क्या हुआ ...

शेर सिंह : रुक मैं तुझे एक फोटो भेजता हु ... उसको अचे से देख कर रिप्लाई दियो ....

शेर सिंह ने अपने गैलरी से तरुण की एक फोटो खुसबू के पास सेंड कर दी और उसके रिएक्शन का वेट करने लगा ....

खुसबू काफी देर तक उस फोटो की देखती है फिर खुस होते हुए बोलती है ....

खुसबू : हाँ सिंह साहब एहि है बस चेहरा थोड़ा सा अलग लग रहा ... इस लड़के के चेहरे पर बस मौसताचे और हलकी बियर्ड की कमी है ....

शेर सिंह : ी गोत तहत रास्कल .... तुम चिंता न करो मैं उसको ऐसी मौत दूंगा की उसकी सात पुष्टि तक खुआफजादा हो जाएँगी ....

और शेर सिंह सिंह गुस्से के मरे टेबल पर एक हाथ मरता है जिससे वो टूट जाता है ....
 
हैप्पी इंडिपेंडेंस डे तो आल माय फ्रेंड्स ❤️♥️♥️♥️♥️

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अपडेट 52

शेर सिंह : ी गोत तहत रास्कल .... तुम चिंता न करो मैं उसको ऐसी मौत दूंगा की उसकी सात पुष्टि तक खुआफजादा हो जाएँगी ....

और शेर सिंह सिंह गुस्से के मरे टेबल पर एक हाथ मरता है जिससे वो टूट जाता है ....

आगे

इधर शेर के अड्डे पर उसके जाने के बाद

का हाल ....

तरुण : भीमा तुम इन्हे देखो तब तक मैं थोड़ा मूत कर आता हु ...

भीमा : जी बॉस ...

तरुण : बड़ी जल्दी बॉस बना लिया तूने तो ... नीस

भीमा : अब मालिक ने कह दिया की आप कलुआ बॉस की जगह लेने वाले हो तो आप बॉस hi हुए न ....

तरुण सर हिलाया हुआ वह से चला जाता है .... उस अड्डे पर वाशरूम उधर hi थे जहा शेर सिंह का रूम था जिसमे अभी विकाश गया हुआ था मीरा के साथ ...

रूम के अंदर का दृश्य

विकाश ने अब तक मीरा की साड़ी उसके बदन से उतर फेंकी थी .... अभी वो कुछ आगे बढ़ता की तभी किसी ने उसको एक लौ ब्लो दे डाला था ये कोई और नहीं तरुण था .....

तरुण : ma@&$$&&$d कुछ करने से पहले गेट तो बंद कर लेता ....

अभी विकाश और कुछ बोलता इससे पहले hi तरुण उसकी गर्दन पकड़ कर मदद चूका था और विकाश के प्राण पखेड़ु उड़द चुके थे ....

मीरा के चेहरे पर चोट के नीसाण बने हुए थे और उसके होंठ भी फाटे हुए थे ... दिन भर शेर सिंह ने बिचारि को बहुत दर्द दिए थे .... वो तरुण को खुद के लिए लड़ता देख अपने दर्द को भूल मुस्कुरा पड़ती है ....

मीरा : क्यों दुश्मनो से भरी इस नरक में वापस आये मेरे नन्हे बालम ... अब यहाँ कुछ नहीं है ... शायद हमारे किस्मत में अपना बदला पूरा करना लिखा hi नहीं था ... अब मैं बस पल दो पल की मेहमान हु .... किस किस से मेरी हिफाज़त करोगे .... 😭😭😭😭😭 हमारा साथ एहि तक था तुम्हारे साथ बितायी हुयी कल की रात मेरी ज़िन्दगी के सबसे हसीं लम्हे थे .. अब अफ़सोस सिर्फ इतना है की पहली बार तुमने मुझसे कुछ माँगा पर वो मैं दे न सकीय ... अभी भी वक्त है मेरे नन्हे बालम भाग जाओ यहाँ से कही इतनी दूर की इस जल्लाद की परछाई भी वह न पहुंचे ...

तरुण : मैं हु न मैं आपको इस दनवनगरी से बहार निकलूंगा ...

मीरा : सुहानी कहा है अब तो शेर सिंह उसको नहीं छोड़ेगा ...

तरुण : आप उनकी चिंता न करो मैंने पहले hi उन्हें सेफ जगह पहुंचा दिया है ... आप कुछ देर एहि रहना तब तक मैं बहार थोड़ी साफ़ सफाई करके आता हु ....

चाँद लम्हो में hi तरुण ने अड्डे पर मौजूद शेर सिंह के 10 - 12 गुंडे मार गिराए ....

तरुण : मैडम अब आप बहार आ सकती हो ...

मीरा बहार आती है तो देखती है की शेर सिंह के सरे गुंडे मरे पड़े थे ....

मीरा और तरुण ने मिल कर रौशनी और नीलम को बंधन से आज़ाद कराया ....

तरुण : मेमसाब ये लो गाडी की चाभी ... आप नीलम और रौशनी काकी को लेकर निकल जाओ मैं हु यहाँ शेर सिंह के लिए ....

रौशनी : नहीं मैं इतनी बुजदिल नहीं की तुम्हे दुश्मनो के बीच अकेला छोड़ कर चली जॉन ... जो काम हमने साथ सुरु किया था वो साथ hi ख़त्म करेंगे ....

रौशनी (नीलम से) : बीटा तू जल्दी से मालकिन के साथ यहाँ से भाग जा .... तू अगर सही सलामत निकल गयी तो मैं समझूंगी की मैं जीत गयी ....

नीलम : नहीं आंटी आपको छोड़ कर मैं नहीं जाने वाली साथ जिए हैं तो साथ मरेंगे ....

पर रौशनी जिद्द करके नीलम को वह से निकल देती है .... मीरा ने नीलम के साथ जाने से मन कर दिया था ....

तरुण : मैं तो अब भी कहता हु आप लोग चली जाओ ... ये लड़ाई आप लोगो की नहीं है मेरी है और मैं इसको ख़त्म कर के hi रहूँगा चाहे मैं कल का सुबह देखने को ज़िंदा राहु या न राहु ....

और फिर तरुण ने उन्हें अपनी साडी कहानी शॉर्टकट में सुना डाली .....

रौशनी : ये तो और ाचा है हमारा मकसद एक है वजह चाहे जो भी हो ....

तरुण : ok ठीक है तो यहाँ के स्टोर रूम में ढेर सरे गैर क़ानूनी हथियार और बॉम्ब्स पड़े हैं जिनका इस्तेमाल हम कर सकते हैं ....

तरुण, मीरा और रौशनी को वो स्टोर रूम दिखता है और उनके साथ अपना प्लान डिसकस करने लगता है ....

**********************

और फिर शेर सिंह का फ़ोन कट हो जाता है ....

खुसबू (खुस होते हुए) : हेहेहे सपोले अब तेरा खेल ख़त्म हो जायेगा ... अब तुम्हे शेर सिंह के पंजो से कोई नहीं बचा सकता .... याहू अब मैं इस घर की मालकिन बनने से चाँद इंच hi दूर हु ...

शेर सिंह के साथ खुसबू की हुयी ये बात चित रानी ने सुन लिया था वो पागलो की तरह भगति हुयी रुचिका के रूम पहुँचती है ...

रानी : रूचि बाबू तरुण को बचा लो ... उसको फ़ोन कर के बोल दो की उसके बारे में शेर सिंह को सब पता चल चूका है .... वो किसी भी वक्त उसका बुरा कर सकता है ....

रुचिका : भला वो कैसे ....

रानी उसको अपनी माँ और शेर सिंह के बीच हुयी साडी बात जल्दी से बता देती है ..

रुचिका पहले तो रानी की बात का भरोषा नहीं करती पर बात तरुण की थी इसलिए वो बिना वक्त गंवाए तरुण को कॉल कर देती है ....

तरुण ने भी उससे बात करने के लिए hi ये सिम लगाया था ....

रुचिका ने जल्दी जल्दी साडी बात बता दी ...

तरुण : ok दीदी थैंक यू ....

रुचिका : भाई तुम जहा भी हो जल्दी से वह से भाग जाओ ....

तरुण : नहीं दीदी अब hi तो असली मज़ा आएगा ... मैं भी तो देखु इस शेर सिंह ने अपनी माँ का कितना दूध पिया है .... Bye दीदी ... अपना और पुरे परिवार का अचे से ख्याल रखना ... अलविदा ...

और फिर तरुण अपना मोबाइल स्वित्चेद ऑफ कर लेता है ....

शेर सिंह ने रस्ते में hi अपने आदमी भीमा को कॉल लगाया पर भीमा ने कॉल नहीं पिक किया .... शेर सिंह के साथ अभी 12-13 लोग और थे .... उसको लग रहा था की अब तक शायद तरुण ने उसके अड्डे पर अब तक शायद उसके सभी आदमियों को निपटा दिया होगा इसलिए उसने अपने सभी आदमियों को बुला लिया .... वो जनता था की तरुण वह अकेला hi होगा पर वो कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था ....

थोड़े hi देर में दो और गाड़िया शेर सिंह के काफिले में शामिल हो गया ... उसको ये भी दर था की कही वो वह से भाग तो नहीं गया होगा पर अब तक उसने जितना भी तरुण को जाना था उसके हिसाब से वो मुश्किलों से भागने वाला तो बिलकुल भी नहीं मालूम होता था ... अगर उसको अपनी मौत का इतना hi दर होता तो वो दुश्मनो से भरे घर में अकेले एंट्री लेने की हिम्मत तो बिलकुल भी नहीं करता ... अभी शेर सिंह के काफिले में उसके अलावा कुल 4 गाड़िया थी ... और हर गाडी में हथियार से लैश आदमी थे ... शेर सिंह का काफिला काफी तेज़ी से अपने चलते हुए उसके अड्डे पर आ पहुंची थी .... जैसे hi पहली गाडी मैं गेट के अंदर घुसती है की बोओओओओओओओममममम की आवाज़ के साथ गाडी के चीथड़े उड़द जाते हैं और गाडी में बैठे 8 - 10 आदमी का टिकट कट जाता है ... किस्मत से शेर सिंह थर्ड वाली गाडी पर बैठा था नहीं तो उसका भी अब तक रोस्टेड शेर विथ तंदूरी का एक नया डिश रेडी हो चूका होता 😂😂😂...

शेर सिंह के गोले बारूद को तरुण उसके hi खिलाफ उसे कर रहा था .... इसको कहते हैं दुसमन के पैसो से उसके लिए hi मौत का सामान खरीदना ....

पहली गाडी के उड़ते hi बाकियो ने अपनी गाड़िया तो रोकी पर काफी तेज़ स्पीड होने की वजह से सभी आपस में hi टकरा जाते हैं .... इस जबरदस्त कलिसिओं से भी लोगो को छोटे आयी ....

अब सभी लोग अपनी अपनी गाड़ियों से बहार निकल आते हैं क्यूंकि गाड़ियों से अंदर जाना सेफ नहीं था ....

शेर सिंह : मन्ना पड़ेगा इस लड़के को .... इस अकेले ने hi हमारी नाक में डैम कर रखा है पहले इसने मेरा ड्रग्स पकड़वाया और उसके लिए मेरे बेस्ट बडी कलुआ को फसवा कर मेरी hi अनुमति से उसको दर्दनाक मौत भी दिलवा दी .... पता नहीं आगे क्या होगा .. अगर ये मेरा दुश्मन न होता तो मैं इसको आज गले लगा लेता ... पर कोई नहीं अगर से शिकारी है तो मैं भी शेर हु और ये मेरा जंगल है .... मैं इसको चिर फाड़ दूंगा ....

शेर सिंह ने अपने 3 आदमियों को अंदर घुसने को कहा वो धड़कते दिल के साथ अंदर घुसे पर उन्हें कुछ नहीं हुआ ये देख शेर सिंह के बाकि सरे आदमी भी पैदल hi अंदर आ गए .... अब वो अड्डे के मैं एंट्रेंस के बहार खड़े थे ... शेर सिंह जनता था की यहाँ भी तरुण ने कुछ इंतजाम जरूर किया होगा इसलिए उसने अपने 5 आदमियों को एक साथ भेजा ... वो लोग जैसे hi गेट के अंदर घुसे की अस एक्सपेक्टेड एक जबरदस्त धमाके के साथ वो सभी भी उड़द गए ... अब तो शेर सिंह की हालत ख़राब हो चुकी थी एक एक करके उसके 30 आदमी मरे जा चुके थे .... अब भी उसकी टोली में 12 - 13 आदमी थे ....

अब शेर सिंह ने अपने 3 आदमी एक साथ भेजे ... वो आराम से अंदर घुस तो गए पर कुछ दूर आगे जाने पर hi गोलिया चलने की आवाज़ आयी उसके बाद सब कुछ शांत हो गया .... शेर सिंह समझ चूका था की वो लोग भी मरे जा चुके हैं ...

तभी शेर सिंह का एक आदमी नीलम को पकडे हुए उसके पास आता है ....

आदमी : मालिक ये वह बाउंड्री के पास झाड़ियों में छुपी हुयी मिली .... इसने मुझपर चाकू से हमला कर दिया .... इसको पकड़ने के चक्कर में मेरा बांह भी जख्मी हो गया .... आपकी आज्ञा हो तो इसको मौत के घर उतर दू क्या ....

नीलम को देख शेर सिंह ख़ुशी से झूम उठा ....

शेर सिंह : पागल हो क्या ये hi तो अंदर जाने की चाभी है ....

शेर सिंह ने नीलम को बालो से पकड़ लिया .... और धीरे धीरे अंदर की तरफ बढ़ने लगा ...

शेर सिंह (जोर से) : अब बस करो तरुण तुम्हारे गैंग का एक अहम् मोहरा मेरे पास है ... अगर तुम इसकी सलामती चाहते हो तो अपने हथियार फेंक दो वर्ण मैं इसको मौत के घाट उतर दूंगा .....

नीलम : नहीं तरुण ये धोखेबाज आदमी है ... इसकी बात का भरोषा मत करो ... वैसे भी मेरी जान उतनी इम्पोर्टेन्ट नहीं है ... मेरा इस दुनिया में है hi कौन मैं अगर चली भी गयी तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला .... इस इलाके को जुल्म से मुक्त करने का जो बीड़ा तुमने उठाया है वो ज्यादा जरुरी है इसके लिए एक नीलम तो क्या हज़ारो 10 नीलम भी कुर्बान हो जाये तो कोई ग़म नहीं ...

शेर सिंह नीलम को एक थप्पड़ मार देता है .... जिससे नीलम दर्द से सिसक जाती है ....

तरुण : शेर सिंह मैं अपने हथियार दाल देता हु पर पहले तुम प्रॉमिस करो तुम नीलम को कुछ नहीं करोगे और उसको जाने डोज ....

शेर सिंह : ok मैं प्रॉमिस करता हु की उसको कुछ नहीं करूँगा ...

तरुण और रौशनी वह खड़े थे उन्होंने अपने हथियार वही जमीन पर रख दिए ....

शेर सिंह : ये हुयी न बात चलो रे उनके हथियार ले लो और उनको चेयर से बांध दो ....

अब बाज़ी शेर सिंह के हाथ में थी .... उसके आदमियों ने बंधे हुए तरुण और रौशनी को खूब मारा .... तरुण और रौशनी की हालत अब काफी ख़राब हो चुकी थी उसके गाल सूज चुके थे और होंठ भी फैट चुके थे जिनसे खून रिस रहा था .... और रौशनी बिचारि की तो जिंदगी पिछले दिन से ऐसी hi थी ....

शेर सिंह : तरुण तुम कभी शेर सिंह की टक्कर के थे hi नहीं ... शेर सिंह बनने के लिए रिश्ते नाते प्यार सहानुभूति की भावना को खत्म करना पड़ता है ... अब तुम्हे क्या लगता है तुमने नीलम के लिए सरेंडर किया तो वो बच जाएगी ... नहीं बिलकुल नहीं ... हाहाहाहा😂😂😂.....

तरुण : शेर सिंह तुमने तो वादा किया था की तुम नीलम को छोड़ डोज ...

शेर सिंह : चलो तुम्हारी बात भी रख लेता हु ाचा मैं नहीं मरूंगा उसको पर शायद मेरे पुँतेर्स को उसका जिन्दा रहना मंजूर नहीं ....

शेर सिंह का इशारा मिलते hi उसके एक आदमी ने नीलम के माथे के बीचो बिच में गोली मार दी ....

रौशनी : शेर सिंह तुम इंसान नहीं राक्षस हो ... आज तुम्हे दुनिया की कोई शक्ति नहीं बचा सकती ... एक माँ की बद्दुआ है तुझे ....

शेर सिंह : हाहाहा मुझे मरेगा कौन ... तुम दोनों तो बंधे हुए हो और मेरे रहमो करम पर hi जिन्दा हो .... ओने मिनट ये मीरा कही नहीं दिख रही ....
 
अपडेट 53

रौशनी : शेर सिंह तुम इंसान नहीं राक्षस हो ... आज तुम्हे दुनिया की कोई शक्ति नहीं बचा सकती ... एक माँ की बद्दुआ है तुझे ....




शेर सिंह : हाहाहा मुझे मरेगा कौन ... तुम दोनों तो बंधे हुए हो और मेरे रहमो करम पर hi जिन्दा हो .... ओने मिनट ये मीरा कही नहीं दिख रही ....

आगे

अभी शेर सिंह ने इतना कहा hi था की लाइट चली जाती है ....

शेर सिंह : अबे कोई देखो तो जाकर की लाइट कैसे चली गयी है ....

शेर सिंह के कुछ आदमी वह के इलेक्ट्रिसिटी सेक्शन में चले जाते हैं ...

उन्हें वापस आने में थोड़ा देर लग जाता है .... जब लाइट आयी तो सारा खेल hi बदल चूका था .... तरुण और रौशनी चेयर पर नहीं थे .... शेर सिंह अभी कुछ समझता उससे पहले hi किसी ने उसके कनपटी पर बन्दुक तान दी थी .... ये कोई और नहीं तरुण hi था ....

तरुण : अबे ोये भाड़े के टट्टुओ अपने अपने हथियार नीचे दाल दो वर्ण तेरे मालिक की खोपड़ी hi उड़ा दूंगा ....

शेर सिंह के सभी आदमियों ने अपने अपने बन्दुक नीचे रख दिए जिसे रौशनी और मीरा ने उठा लिए और उनसे दूर रख दिए ....

तरुण : रौशनी काकी आप नीलम का बदला ले सकती हो ...

रौशनी : इससे मेरी बेटी वापस तो नहीं आ सकती पर उसकी ये देख उसकी आत्मा को शांति जरूर मिलेगी ....

रौशनी ने एक बड़ा सा चाकू लिया और उस आदमी के पास पहुंची जिसने नीलम को मारा था ... रौशनी किसी पशिचो किलर की तरह उसके ऊपर चाकू से वार करने लगी वो उसको तब तक चाकू मरती रहती है जब तक वो मर नहीं जाता ....

अब तक मेरे ने भी शेर सिंह के दो आदमियों की गिनती काम करके अपना बहुमूल्य योगदान दे दिया था ....

अब तरुण के ग्रुप में टोटल 3 लोग थे वही शेर सिंह के ग्रुप में भी 3 hi लोग थे ... तरुण शेर सिंह के अंडाशय में एक जोर का किक मरता है जिससे वो दर्द से बिलबिलाता हुआ जमीन पर लौटने लगता है .... ऐसा लग रहा था की जैसे उसका अंडा hi फुट गया हो .....

तरुण : अब हो गया बराबरी का गेम .... अब तुम भी 3 और हम भी 3 ... बोल कुत्ते तेरी आखिरी ख्वाहिस क्या है ...

तभी एक के बाद एक दो गोली चलने की आवाज़ आती है ... वो गोली रौशनी के सीने में लगी थी .... और कुछ लम्हो में तड़पते हुए रौशनी भी नीलम के पास जा चुकी थी ....

शेर सिंह ने तरुण से बन्दुक छीन ली ...

शेर सिंह : चलो बच्चे बहुत हुआ ... अब इस खेल को ख़त्म करने का वक्त आ चूका है .... चलो अब तुम दोनों वह उस कोने में खड़े हो जाओ .... मैं तुम्हे तड़पा तड़पा कर मरूंगा .... अब तुम दोनों भी रौशनी और नीलम के पास जाने को तैयार जो जाओ वह तुम्हारी चौकड़ी ज्यादा अछि लगेगी ...

शेर सिंह तरुण के ऊपर दो गोली चला देता है पर मीरा तरुण के आगे आ जाती है और दोनों गोलिया मीरा की पीठ में धंस जाते हैं .... अभी शेर सिंह और गोली चलता उससे पहले hi उसके हाथ में एक गोली लगती है जिससे उसका बन्दुक उसके हाथ से छिटक के दूर जा गिरता है ....

नया आदमी : it's पुलिस ... शेर सिंह एंड तुम्हारा खेल ख़त्म हो चूका है ... पुलिस ने तुम्हे चारो तरफ से घेर लिया है ... शेर सिंह के आदमी भी अपना हथियार दाल देते हैं ...... पुलिस शेर सिंह और उसके पुन्तारो को लेकर बहार आ जाती है ....

अब सिर्फ तरुण और मीरा hi अंदर बचे थे ... मीरा जमीन पर लेती हुयी थी और तरुण उसके माथे को अपनी गॉड में लिए हुए उसके सिरहाने बैठा हुआ था ....

तरुण : मेमसाब मुझे बचने के लिए अपने अपनी जान खतरे में क्यों डाली .... ी ऍम नॉट सो इम्पोर्टेन्ट .... 😢😢

मीरा : सशह्ह्हह्ह ... अब तो मैं इस दुनिया से अलविदा लेने वाली हु अब मैं तुम्हारी मालकिन कहा रही ... अब तुम मुझे मेरे नाम से hi बुला लो न मेरे नन्हे बालम .... और तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की तुम इतने इम्पोर्टेन्ट नहीं हो .... तुमने मेरे लिए जितना किया है उतना शायद hi किसी अपने ने मेरे लिए किया है .... यू अरे जस्ट नेक्स्ट तो g@d फॉर में ...

तरुण (मीरा के होंठो को चूमते हुए) : क्या मीरा डार्लिंग आप भी न ....

मीरा : मेरे नन्हे बालम तुम्हे क्या लगता है की मुझे अभी पता चला है की तुम यहाँ क्यों आये हो और तुम्हारा मकसद क्या है ... तुम्हारी असलियत तो मुझे मेरे मायके में hi पता चल गयी थी .... मेरे लिए मेरी भाभी का बदला उतना इम्पोर्टेन्ट नहीं था मैंने ये सब बस तुम्हारे लिए किया है .... मेरी भाभी के लिए बदला तो बस तुम्हे तुम्हारी मंजिल तक पहुँचाने का एक बस एक जरिया hi था ... आज तुमने फाइनली अपना बदला पूरा कर लिया मैं बहुत खुस हु तुम्हारे लिए .... मुझे जिंदगी से बस एक अफ़सोस रहेगा की मैंने तुम्हारी वो अनल वाली ख्वाहिस पूरी न कर पायी .... अब इस जनम में हमारा साथ एहि तक था मेरे नन्हे बालम .... काश हर जनम में मुझे तुम्हारा hi साथ मिले ... मेरी सुहानी का ख्याल रखना बड़े नाज़ो से पला है मैंने उसको ... उसको कभी अपनी माँ की कमी महसूस न होने देना .... वो भी तुम्हे बहुत चाहती है पर शायद hi कभी जाता पाए ....

तरुण : आप ऐसे क्यों बोल रही हो अभी मैं आपको हॉस्पिटल ले चलता हु आप तुरंत ठीक हो जाओगी ....

मीरा : नहीं मेरे नन्हे बालम अब मेरा वक्त आ चूका है .... कभी कभी अपनी इस दोस्त को याद कर लिया करना ... अब बस मुस्कुरा कर अपनी इस दोस्त को अलविदा नहीं कहोगे ....

तरुण उसके होंठो को चुम लेता है और उसकी आँखों में प्यार से देखते हुए ...

तरुण : अलविदा मेरी प्यारी दोस्त ी लव यू ....

जवाब में मीरा मुस्कुरा पड़ती है ....

मीरा : लव यू तू मेरे नन्हे बालम ...

ये शब्द मीरा के आखिरी शब्द थे ... मुस्कुराते हुए hi उसने इस दुनिया को अलविदा कह दिया ..... उसने अपनी जिंदगी में बहुत सरे रंग देखे कभी ख़ुशी तो कभी ग़म पर एहि होती है ज़िन्दगी .... और ज़िन्दगी के रस्ते में कब कैसा मोड़ आ जाये किसे क्या पता .... कभी कोई अपना बेगाना हो जाता है तो कोई अनजान किसी अपने से भी कही बढ़ कर आपके लिए इम्पोर्टेन्ट हो जाता है की उसके लिए अपनी जान तक की आपको परवाह नहीं होती है एहि है ज़िन्दगी एक अंजना सफर ...

तरुण पागलो की तरह मीरा के होंठो को चूमे जा रहा था पर मीरा तो कब की इस दुनिया से जा चुकी थी ... तरुण की आँखों से आंशू जहर जहर कर गिर रहे थे .... मीरा आज तरुण के लिए कुर्बान हो चुकी थी ....

तभी वह वो पुलिस इंस्पेक्टर आ जाता है ... ये वही था जिसकी सहायता से तरुण ने शेर सिंह का ड्रग्स पकड़वाया था ...

इंस्पेक्टर : तरुण ी ऍम रियली वैरी वैरी सॉरी ... मुझे यहाँ आने में काफी देर हो गयी ... वो क्या है की हमें एक प्रोसेस के थ्रू चलना पड़ता है और मुझे परमिशन लेते लेते काफी देर हो गयी ..... पर कोई नहीं मेरे पास तुम्हारे लिए एक गिफ्ट है ...

वो तरुण को अपने साथ लेकर बहार आ जाता है ... पुलिस की बाकि सभी गाड़िया तो जा चुकी थी .... बस इंस्पेक्टर की hi गाडी बची थी जिसके पीछे हथकडियो में बंधा हुआ शेर सिंह बैठा हुआ था ....

पुलिस इंस्पेक्टर : तरुण ये लो बन्दुक है और अपने हाथो से इस पापी को मार कर इसकी सल्तनत को ख़त्म कर दो .... मैं अपने सिस्टम को जनता हु जेल में जाने के बाद ये किसी तरह छूट hi जायेगा इससे ाचा है ऐसे लोगो का खत्म बहार hi कर देना सही रहेगा ....

तरुण : हाँ बिलकुल सही कहा है अपने ....

तरुण शेर सिंह के पास आता है और उसके मुँह पर एक जोरदार पंच मार देता है .... पंच इतना जोरदार था की शेर सिंह का जबड़ा hi हिल गया था ... वो तब तक शेर सिंह को मरता रहता है जब तक उसका मुँह lahu-luhan नहीं हो जाता ....

उसके बाद तरुण ने एक चाकू लिया और उससे शेर सिंह के दोनों आँख फोड़ डेल ... शेर सिंह की दर्द भरी चीख वह के शांत वातावरण में फैल गयी ....

अब भी तरुण का मन नहीं भरा था तो उसने कुछ कपडे जमा किये और उनके ऊपर पेट्रोल दाल कर जला दिए और शेर सिंह के ऊपर भी पेट्रोल दाल कर उसको उस आग में फेंक दिया ..... शेर सिंह की दर्दनाक चीख तरुण को काफी सुकून दे रही थी ...

तरुण : गुड bye शेर सिंह .... मेरे परिवार को बर्बाद करने की सजा है ये ....

और तरुण ने इंस्पेक्टर के हाथ से बन्दुक लिए और पूरी 6 की 6 गोलिया शेर सिंह की छाती में दाल दिए .... अब तरुण का बदला ऑफिशियली पूरा हो चूका था ...

पुलिस इंस्पेक्टर ने तरुण के लिए वह एक एम्बुलेंस बुलवा लिया और तरुण ने उसमे Roshni,Neelam और मीरा की लाश को लोड करवाया और चल दिया पास के hi शमशान आ जाता है ताकि सभी का अंतिम संस्कार कर सके .... रस्ते में hi उसने शहनाज़ को सुहानी के साथ वह आने को कहा था ...,

जब सुहानी वह पहुँचती है तो पहले तरुण उसको साडी कहानी बताता है जिसे सुन कर सुहानी तो पहले जी भर कर तरुण से लिपट कर रोटी है ....

सुहानी : मुझे नहीं पता था की मेरी माँ की मुस्कान के पीछे कितना दर्द भरा था .... मुझे अपने आप से घिन आ रही है की मैं इतने सालो तक उस इंसान को पापा कह कर बुलाती रही जो की इंसान कहलाने के लायक hi नहीं था ....

उसके बाद तीनो का अंतिम संस्कार होता है और फिर तरुण सुहानी को अपने साथ लेकर पहले उसके घर जाता है वह सुहानी अपनी साडी जरुरत के सामान को पैक करती है और अपनी माँ के रूम जाकर उसके फोटो को अपनी गॉड में लेकर फुट फुट कर रोने लगती है ...

तभी तरुण वह आ जाता है .... वो सुहानी को अपने साथ लेकर उसके घर को बहार से लॉक करके अपने साथ अपने घर की तरफ निकल पड़ता है एक नए अध्याय को सुरु करने क्यूंकि शेर सिंह का chapter तो क्लोज हो चूका था ....

कहने को तो सुहानी के और भी रिस्तेदार थे पर उसको उन् सबसे ज्यादा भरोषा अगर किसी पर था तो वो तरुण hi था ....

सुबह को 10 बजे तरुण अपने घर पहुँचता है ... उसको हॉल में hi रुचिका और प्रियांशी दिख जाती है .... तरुण को देख कर वो चीखती चिल्लाती हुयी अपनी ख़ुशी जाहिर कर उसके पास भगति हुयी आती है उसके गले लग जाती है ....

रुचिका तो बस बार बार तरुण का गाल को चूमे जा रही थी वही प्रियांशी भी अपनी बारी आने का इंतजार कर रही थी जैसे hi रुचिका ने तरुण को छोड़ा उसने भी तरुण के गालो पर अपनी चुम्मी चिपका दी ....

अब उनका ध्यान सुहानी पर गया ....

रुचिका : भाई ये कौन है ....

तरुण : ये सुहानी जी हैं मीरा जी की बेटी ....

प्रियांशी : ये क्यों नहीं कहते की ये हमारे दुश्मन शेर सिंह की बेटी है ... इसके बाप की वजह से hi हमें ये बुरे दिन देखने पड़े हैं ...

तरुण प्रियांशी को एक कोने में ले जाता है ...

तरुण : प्रियांशी दीदी ऐसे नहीं बोलते ... ये उसके जैसी बिलकुल नहीं हैं .... इन्होने और इनकी माँ ने वह मेरा बहुत अचे से ख्याल रखा ... कल hi इन्होने अपनी माँ को खो दिया है .... अब इनका इस दुनिया में कोई नहीं मेरे सिवा .... क्या हम इन्हे अपने परिवार में शामिल नहीं कर सकते ....

प्रियांशी : पागल पहले बोलना चाहिए था न बेवजह बिचारि को इतना सुना दिया ... वैसे है बड़ी क्यूट जस्ट लिखे माय भाभी टाइप मटेरियल ....

प्रियांशी की बात सुन सुहानी की आँखों में आंशू दबदबा आये थे जिस लड़की से आज तक उसके घर में किसी ने ऊँची आवाज़ में बात तक न की थी उसको आज क्या क्या सुन्ना पद गया ... वो अपने ट्राली को लेकर पलट कर बहार को जाने लगी थी ...

तभी प्रियांशी उसके सामने आ जाती है और कान पकड़ कर सॉरी बोलने लगती है ...

थोड़े देर मानाने से hi सुहानी मान जाती है .... सुहानी को श्रेया वाला रूम दे दिया जाता है ... तरुण अपने घर में सबसे बड़े प्यार से मिलता है ... तरुण की बड़ी चची तो बार बार उसको गले लगा कर उसके गाल को चूमे जा रही थी आख़िरकार तरुण ने काम hi ऐसा किया था .... श्रुति भी तरुण को सही सलामत देख काफी खुस हुयी ...

तरुण की माँ ने जब तरुण के आने की खबर सुनी तो जोश जोश में वो भी तरुण को गले लगाने उसके पास आयी पर तरुण वह से हैट कर दूसरी तरफ चला गया ....

तरुण की माँ के चेहरे पर अचानक से आयी ख़ुशी फिर से हवा हो गयी .... पर वो दिल से खुस थी की उसका बच्चा सही सलामत घर लौट आता है ....

रूचि और प्रियांशी ने साथ मिलकर उसके फेस पर आये चोट का इलाज़ किया ....

तरुण की बुआ को जब तरुण के लौट आने की खबर मिली तो वो अपनी बेटी के साथ भगति हुयी अपने जिगर के टुकड़े के पास आती है और आते hi उसको सीने से लगा लेती है ....

सुहानी जल्द hi इस घर में तरुण की बहनो के साथ घुल मिल जाती है ... तरुण की बहनो में भी उसको कभी ऐसा लगने नहीं दिया की वो इस घर का हिस्सा न हो ... सुहानी का सारा काम भी ये लोग हसी ख़ुशी कर देती मनो ये सच में उसकी भाभी hi हो ....

इवनिंग को प्रियांशी तरुण के रूम आती है ...

तरुण : कैसी हो मेरी गर्लफ्रेंड ... 😜

प्रियांशी : ठीक hi हु पर अब मैं इस घर में सेकंड नंबर पर आ चुकी हु खूबसूरती के मामले में ....

तरुण : क्यों पहले नंबर पर कौन है ...

प्रियांशी : मेरी भाभी सुहानी ....

तरुण : ाचा जी अब आप मेरी hi टांग खुंच्ने लगी ...

और तरुण प्रियांशी की खिंच कर उसको बीएड पर लिटा कर उसके पेट में गुदगुदी करने लगता है .... प्रियांशी बिन पानी मछली की तरह छटपटाने लगती है ....

प्रियांशी : ok ok बाबा अब मजाक नहीं करुँगी ....

तरुण : पक्का प्रॉमिस न ...

प्रियांशी : हाँ बाबा पक्का वाला प्रॉमिस ....

अब तरुण प्रियांशी को छोड़ देता है तो वो धीरे से बीएड से उठ जाती है और गेट के पास पहुँचती है ...

प्रियांशी : भाई ....

तरुण : हाँ दीदी बोलो ...

प्रियांशी : नीचे सुहानी भाभी बुला रही है ....

तरुण उसको पकड़ने को भागता है पर तब तक प्रियांशी वह से भाग चुकी थी .... वो सीढ़ियों के पास से जीभ निकल कर तरुण को चिढ़ाती हुयी वह से भाग लेती है ...

तरुण : आपको बाद में देखता हु दीदी ...

प्रियांशी : भैया को भाभी से प्यार हो गया .... पहली नजर में पहला प्यार हो गया ... दिल जिगर दोनों घायल हुए teer-e-najar दिल के पार हो गया....

अपने बेटे और बेटियों को ऐसे हस्ते खेलते देख सुमित्रा भी दिल से बहुत खुस होती है ....

तरुण में लिए सबसे बड़ी ताज्जुब की बात तो ये थी की जब से वो आया था तब से उसने न तो खुसबू को देखा था न hi राहुल को ....

रात में तरुण ने श्रेया से बात की उससे बात करके उसको बहुत ाचा लगा .... क्यूंकि अब श्रेया उसके बच्चे की माँ जो बनने वाली थी ...

उसके बाद तरुण को दिया का ख्याल आया ... वो जनता था की उसको कितनी गाली सुनने को मिलने वाली है .....

पहली रिंग में तो कोई भी कॉल पिक नहीं करता पर दूसरे रिंग पर कॉल पिक होती है ...

तरुण : hello ...

दिया : hello कौन ....

तरुण : दीदी नमस्ते it's में तरुण ...

दिया : कौन सो दीदी और मैं किसी तरुण को नहीं जानती सो don't डिस्टर्ब में ....

तरुण : दीदी मैं तरुण हु आपका भाई ....

दिया : देखो मिस्टर मेरा सिर्फ एक भाई है और ये जबरदस्ती रिश्ता बनाने की कोसिस न करो ... चलो फ़ोन रखो ....

तरुण : सॉरी दीदी मैं जनता हु की आप मुझसे गुस्सा हो पर पहले मेरे कॉल न कर पाने की वजह तो जान लो ....

उसके बाद तरुण ने पूरी कहानी शॉर्टकट में सुना दी जिसके बाद दिया का गुस्सा मच शांत हुआ ....

दिया : तुम्हारे साथ इतना कुछ हो गया था तो तूने हमें कुछ बताया क्यों नहीं अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो ...

तरुण : दीदी ऐसे कैसे मुझे कुछ हो जाता मेरी इतनी प्यारी दीदी हर रोज़ मेरे लिए दुआ जो करती है ....

दिया : चुप कर लड़के अब और बटरिंग करने की जरुरत नहीं मेरा गुस्सा ठंडा हो चूका है ....

तरुण : और बताओ दीदी कहा हो और जीजू कैसे हैं ...

दिया : अभी ससुराल आयी हुयी हु ... तेरे जीजू भी ठीक hi हैं ... आ जा न मिलने तुझसे मिले हुए काफी दिन हो गए ... अपनी इस दीदी को तो भूल hi गए हो ....

तरुण : ऐसी बात नहीं है दीदी पहले उसे चला गया था और अब ये सब में गैस गया था आज hi फ्री हुआ हु ... कब तक हो आप वह ...

दिया : पता नहीं यार शायद एक महीने या उससे काम hi ...

तरुण : ok दीदी वैसे आप ऐसा क्यों नहीं करती 24 को मेरा बर्थडे है उसमे hi यहाँ आ जाओ .. मेरे फॅमिली वालो से भी मिल लेना उसके बाद आपके साथ hi चला चलूँगा ...

दिया : जी नहीं अभी बर्थडे में 13 दिन है ऐसा कर की तू hi यहाँ आ जा उसके बाद साथ चली जाउंगी ... कारन से भी बात कर लेना वो भी काफी गुस्से में है ...

तरुण : कर लूंगा मेरी जान 😜 ...

दिया : ाचा बीटा दीदी से सीधे जान ... लगता है वह जा कर काफी बिगड़ गया है ...

तरुण : वो तो पता नहीं मिलोगी तो खुद जान लोगी आप ... ाचा डार्लिंग रखता हु फ़ोन गुड नाईट एंड लव यू ...

दिया : हेहेहे लव यू तू मेरा बच्चा ...

दिया और श्रेया से बात करके तरुण को बहुत ाचा लगता है ...

अभी तरुण बीएड पर लेता hi था की किसी ने उसका गेट नॉक किया ... ये रुचिका थी ...

तरुण : hello रूचि दीदी आप ... सब खैरियत तो है ....

रुचिका : चल परे हैट आज मुझे इस रूम में hi सोना है ...

तरुण : ठीक है सोवो मैं आपके रूम चला जाता हु ...

रुचिका : कही जाने की जरुरत नहीं चुप चाप बीएड पर लेट जा ....

तरुण रुचिका की बात मान कर चुप चाप बीएड पर लेट जाता है .... रुचिका भी उसके बगल में आकर लेट जाती है ... रुचिका शायद शावर लेकर hi यहाँ आती थी क्यूंकि उसके बालो से बहुत hi प्यारी भीनी भीनी खुसबू आ रही थी ...



रुचिका बड़े प्यार से तरुण के साथ कुड्लिंग करके सो जाती है .... दोनों भाई बहन जल्द hi एक प्यारी सी नींद में खो जाते हैं .....
 
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