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तरुण : गुड नाईट दीदी ... टेक केयर ...
अपनी बहनो से बात करके तरुण को बहुत ाचा फील होता है वही उसकी आँखों में राहुल के लिए बेइंतेहा गुस्सा भी झलक रहा था .... अगर राहुल सच में उसके करीब होता तो उसको बीच से चिर डालता ....
आगे
तरुण के घर में उसकी तीनो बहने तो अब निश्चिंत से सो सो रही थी पर एक शक्श की आँखों से नींद गायब थी ये और कोई नहीं तरुण की माँ सुमित्रा थी ....
सुमित्रा (मन में) : क्या मैं सबके सामने अपनी बेटियों के लिए स्टैंड ले पाऊँगी ... नहीं नहीं मुझे लेना hi होगा अपनी इसी कमजोरी की वजह से एक प्यारे से बेटे को तो खो hi चुकी हु पर मैं किसी कीमत पर अपनी बेटी को नहीं खोऊंगी ..... मैं अपनी बेटियों के लिए साडी दुनिया से लड़ जाउंगी ..... उस बलखाती नागिन के फैन को कुचलना जरुरी है पर ये काम मैं अकेली नहीं कर सकती .... क्या मुझे दीदी का सपोर्ट लेना चाहिए .....
काफी सोचने विचरने के बाद सुमित्रा अपनी ननद यानि की तरुण की बुआ को कॉल लगाया .... तरुण की बुआ ने जब अपने मोबाइल में अपनी भाभी का कॉल देखा तो एक पल के लिए वो शॉक सी हो गयी क्यूंकि उनकी आपस में नहीं बनती थी अचे से और ये सब तरुण की वजह से था .... तरुण की बुआ ने बहुतो बार तरुण की माँ को अपने बेटे से ऐसे मिस्बेहावे करने से मन किया था पर वो तरुण को प्रताड़ित करने के कोई मौका hi नहीं छोड़ती थी .... इसी वजह से दोनों में बस फॉर्मेलिटी के लिए hi बात चित होती थी ....
तरुण की बुआ प्रिय ने पहली बार कोई रिस्पांस नहीं दिया तो सुमित्रा ने दूसरी बार रिंग किया इस बार प्रिय ने कॉल पिक किया ....
प्रिय : क्या हुआ इतनी रात को क्यों परेशान कर रही हो आप ...
सुमित्रा : सॉरी दीदी पर बात hi कुछ ऐसी है की आपको परेशान करना पड़ा .... मुझे आपकी हेल्प की जरुरत है ....
प्रिय : मैं आपकी बात क्यों मनु .... आज तक अपने मेरी कोई बात मणि है क्या .... मैंने आज तक तरुण के लिए आपसे इतनी बार मिन्नत की पर अपने क्या किया ... मुझे आपसे कोई वास्ता नहीं आपको जो करना है खुद कीजिये ... Bye
सुमित्रा : सॉरी दीदी ... मैं खुद बहुत सर्मिन्दा हु की मैंने अपने खुद के बेटे के साथ जानवरो जैसा बर्ताव किया और इसकी सजा मुझे नरक hi जाना है .... पर आज बात उसकी नहीं ऋचा की है ....
और फिर सुमित्रा ने अपनी ननद प्रिय को वो साडी बात बता दो जो उसको उसकी बेटियों में बताया था और उसने प्रिय को ख़ुशी और अपने ससुर के बिच के जिस्मानी रिश्ते के बारे में भी बता दिया ....
प्रिय : भाभी मुझे नहीं पता था की वो चुड़ैल इतनी घटिया मानसिकता की है उसके hi वजह से मेरे तरुण को इस घर में इतना कुछ सहना पड़ा .... पर पापा को क्या सुझा छी मुझे तो अब उस घटिया इंसान को अपना बाप कहने में भी शर्म सो महसूस होती है .... भाभी ऋचा और मेरी बच्चियों के लिए आप बेफिक्र रहो .... इस चुड़ैल को मज़ा चखना अब मेरा काम है इसके किये की सजा देना hi मेरा मकसद है ....
सुमित्रा : सुक्रिया दीदी ... बाकि कल सुबह आप जल्दी आ जाना क्यूंकि पता नहीं कब उस डायन को उसके बेटे की हालत के बारे में पता चलेगा तो वो कौन सा नया बखेड़ा खड़ा करेगी .....
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अगली सुबह को सुमित्रा की नींद बहार हो रहे शोर सरबे के साथ खुलती है वो बहार जाती है तो पति है की उसकी मंझली जेठानी ख़ुशी राहुल के रूम में है और जोर जोर से चिल्ला रही है .... रूम में hi उसका पति लक्समन भी खड़ा है जो सर झुकाये हुए उसकी बातो को सुन रहा है ....
खुसबू : देखो देवर जी आपकी चुड़ैल बेटियों ने मेरे फूल से बच्चे का क्या हाल कर दिया है .... ऐसे भी कोई किसी अपने को मरता है क्या .... पहले खुद hi मेरे बेटे को रिझा कर अपने रूम में बुलाया और जब इसने उनकी बात मैंने से मन कर दिया तो अपनी डायन बहन के साथ मिल कर इसको खूब मारा और तो और रात को किसी को इसके बारे में बताया भी नहीं .... मैं पुलिस को कॉल करने जा रही हु अब वो लोग hi सही से इसका हल निकालेंगे .... इसके पापा नहीं रहे तो तुमलोग हमें दबाओगे hi .... इससे ाचा होता की तुमनलोग हम तीनो माँ बेटी को ज़हर hi दे दो इससे घर की साडी संपत्ति भी तुम्हारी हो जाएगी ...
लक्समन : नहीं भाभी प्लीज ऐसा न कहो और प्लीज पुलिस को मत बुलाओ ... मैं ये सब पापा पर छोड़ता हु वो इस घर के बड़े हैं और घर के मुखिया भी तो वो जो भी सजा देंगे हमें वो मंजूर होगा ... अब जब मेरी बेटियों ने गलती की hi है तो उन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए ....
खुसबू : ऐसे नहीं पहले मैं तुम्हारे बेटियों की हालत मेरे बेटे जैसे hi करुँगी उसके बाद न्याय अन्याय का फैसला होगा ....
सुमित्रा : जी नहीं पहले इनका जुर्म तो साबित हो जाये की सच में गलती किसकी है ....
लक्समन : सुमित्रा तुम होती कौन हो हमारे घर के बारे में फैसला लेने वाली ... भाभी हमसे बड़ी हैं उन्हें भी सही गलत का फैसला लेने का हक़ है .... भाभी आप पहले अपने मननकी कर लो उसके बाद पापा के पास जायेंगे ..... भाभी ये लो डंडा ....
खुसबू लक्समन के हाथ से डंडा ले लेती है और गुस्से से फुफकारती हुयी सीढिया उतर कर रुचिका का गेट नॉक करती है ....
गेट प्रियांशी खोलती है .... अपनी मंझली चची के हाथो में डंडा और बाकि लोगो को रूम के बहार देख वो सारा माजरा समझ जाती है ....
प्रियांशी : क्या हुआ चची आपको किस्से काम है ....
खुसबू : पूछ तो ऐसे रही है जैसे कुछ पता hi न हो जल्दी से अपनी दोनों बहनो को नीचे भेजो ....
प्रियांशी : ठीक है चची ....
खुसबू पेअर पटकती हुयी ग्राउंड फ्लोर पर आ जाती है ....
सुमित्रा : देखिये जी जो कुछ हो रहा है वो गलत हो रहा है गलती ऋचा की नहीं राहुल की थी वो hi ऋचा के रूम में जाकर उससे जबरदस्ती करने लगा जिसके बाद रुचिका ने उसको बचने के लिए राहुल को मारा है .... अगर उसने ये नहीं किया होता तो आज आपकी बेटी किसी को मुँह दिखने के काबिल न रहती ....
लक्समन : तुम चुप रहो मुझे मत सिखाओ क्या सही है और क्या गलत उन्होंने राहुल को ऐसे बेरहमी से मार कर ये साबित कर दिया है की वो गलत थी .... उन्होंने अपनी गलती छुपाने के लिए hi उसको ऐसे बुरे तरह से मारा है ... अब उन्हें भाभी hi उनके किये की सजा देंगी ... बस फैसला हो चूका है अब तुम जा सकती हो ....
तभी वह तरुण की बुआ प्रिय आ जाती है ....
प्रिय : वह भाई वह क्या फैसला सुनाया है ... आज तक अपने बेटे पर हो रहे अन्याय के खिलाफ तो एक शब्द भी न निकले आज अपने भतीजे राहुल के लिए तो बड़ा सॉफ्ट हेअरटेड हो रहा है और बड़ा टो दिखा रहा है ... कही वो तेरा hi बीटा तो नहीं है क्यूंकि मंझले भैया की तो वो औलाद hi नहीं है है ....
लक्समन : देखो दीदी आपको इज्जत करता हु इसका ये मतलब नहीं की आप जो मन में आये बोलो .... इस घर के निजी मामले में बोलने वाली आप होती कौन हो ....
प्रिय : वह लक्समन आज तूने साबित कर दिया की तू भी अपने गंदे और घटिया बाप की पैदाइश है ...
तभी वह तरुण का दादा बलबीर आ जाता है और अपनी बेटी के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ चिपका देता है ...
तब तक वह Richa,Rani,ruchika और प्रियांशी भी आ जाती है ....
ऋचा : दादा जी बुआ पर हाथ उठा कर अपने सही नहीं किया गलती हमने की है तो सजा बुआ को क्यों ....
रानी : ये और कर hi क्या सकते हैं छोटी आखिर बुआ ने सच जो कहा है और सच तो हमेसा कड़वा hi होता है ....
खुसबू (जोर से चिल्लाते हुए) : चुप हो जाओ रानी .... वर्ण मैं भूल जाउंगी की तुम मेरी बेटी हो .....
रानी : चिल्लाओ मत माँ चिल्लाना मुझे भी आता है .... बचपन से hi इस घर में अन्याय होता देखती आ रही हु तो आज न्याय की उम्मीद hi कहा है ... जानना चाहती हो अपने बेटे का सच तो हाँ वो हरामी बहुत hi घटिया इंसान है .....
खुसबू : तुम्हारे झूट कहने से मेरा बीटा गलत साबित नहीं हो जाता ....
प्रिय : वह अब सच बोल रही है महाराजा हरिश्चंद्र की बेटी .... अरे तुझमे कुछ शर्म हाय है की नहीं डायन .... और पापा आप आपको इस डायन में ऐसा क्या दिख गया की तीर्थ करने के उम्र में यहाँ अपनी बहु के साथ में hi खत कबड्डी खेलने में लगे हुए हो ... शर्म आती है मुझे आपको अपना बाप कहते हुए .... ठीक हुआ जो माँ मर गयी वर्ण आपको ऐसे देख कर हर रोज मर रही होती .... बहु भी बेटी का hi रूप होती है उसके साथ ऐसी घटिया हरकत .... छियई ....
लक्समन : तुम कहना क्या चाहती हो दीदी ....
प्रिय : यही सच है लक्समन की तुम्हारी पूजनीय भाभी और तुम्हारे पूजनीय पिता आपस में न जाने कितने सालो से शारीरिक सम्बन्ध बनाये हुए हैं और राहुल इनकी hi औलाद है क्यूंकि मंझले भैया ने इस चुड़ैल के हाव् भाव को पहले hi पहचान लिया था क्यूंकि एहि नहीं इसके मायके में भी इसके कुछ यार रह चुके हैं .... अब जब माँ बाप hi ऐसे हो तो उनका प्रोडक्ट कैसे सही रह सकता है .... एहि नहीं इस डायन ने तेरी बड़ी भाभी को भी इस हवशी दरिंदे के नीचे लिटाया .... ये तो तेरी बीवी को भी इसके हवाले करना चाहती थी और श्रुति को अपने बेटे के नीचे लिटाने की प्लानिंग भी थी इसकी .... सोच कितनी घटिया मानसिकता के हैं ये लोग .... और तो और तेरे बेटे की दुर्दशा की भी जिम्मेवार एहि कुटिया है इसने hi हमेसा से तेरी बीवी और पुरे घर वालो को तेरे बेटे के खिलाफ कर दिया ... माँ की भी मौत की जिम्मेवार एहि है इसने hi हमारे कुलगुरु को ब्लैकमेल करके तुम्हारे बेटे की गलत जन्मकुंडली बनवायी और इसने खुद hi तेरे बेटे के जन्म के बाद माँ तो सीढ़ियों से धकेल दिया और ये कहानी बना दी की सब कुछ तरुण के कुंडली डिश की वजह से हुआ है .... अब बोल क्या कोई इंसान इतना भी गिर सकता है .....
तभी एक जोरदार थप्पड़ की आवाज़ गूंज उठी ये थप्पड़ खुद बलबीर ने अपनी मंझली बहु को मारा था .... थप्पड़ की आवाज़ इतनी यस थी की वह एक अजीब सी शांति छ गयी ...
बलबीर : तूने मेरी कौशल्या को मुझसे छिना ..... मैं भी कितना पागल हु जो तेरी बातो में आ कर तरुण को इसका जिम्मेवार समझता रहा .... तुझे तो आज मैं जान से मार दूंगा ....
और बलबीर ने खुसबू को न जाने कितने थप्पड़ मरे .... ख़ुशी के दोनों गाल लाल हो चुके थे मनो उनमे से खून उतर आया हो ....
प्रिय : इसकी असली सजा मौत नहीं बल्कि इसका भी वैसा hi हाल होना चाहिए जैसा इसने मेरे तरुण का किया था इसको भी उस दर्द का एहसास होना चाहिए जो इसने तरुण ने इतने सालो से झेला है ....
तभी रानी खुसबू के नजदीक आती है और उसके मुँह पर थूक देती है ...
रानी : ये मेरे तरुण को हमसे दूर करने के लिए ... चिंता न करो तुम्हारे हर सुबह की शुरुआत ऐसे hi होनी है ....
घर के हर सदस्य ने खुसबू के मुँह पर थूका सिवाए राहुल राघव और तरुण के बड़े चाचा के .... खुसबू को एक छोटे से रूम में शिफ्ट कर दिया गया जिसमे सुख सुविधा की कोई चीज मौजूद नहीं थी .....
"तरुण ... देख आज मैंने तुम्हारा बदला ले लिया ... अब तो तू मुझे माफ़ कर देगा न बीटा ... देख आज मैंने सही गुनेहगार को सजा दिलवा दिया है ... मैंने अपनी बच्चियों को बचा लिया है "
"मुम्मा ... मुम्मा गेट खोलो न .... मुम्मा मुम्मा गेट खोलो न देखो मंझली चची ऋचा दीदी और रूचि को मरने गयी है ...."
गेट पर हो रहे दस्तक और प्रियांशी की घबराई हुयी आवाज़ से सुमित्रा की नींद खुलती है ....
"अरे मैं तो रूम में हु यानि की मैं ये सब सपना देख रही थी क्या ... "
सुमित्रा जल्दी से भाग कर गेट खोलती है तो बहार प्रियांशी आँखों में आंशू लिए गेट पर कड़ी थी ....
प्रियांशी : मुम्मा देखो न मंझली चची ऋचा दीदी और प्रियांशी को मरने गयी है डंडा लेकर .... उन्हें बचा लो मुम्मा ... पापा और दादा जी भी काफी गुस्से में हैं ..
सुमित्रा : तुम चलो बीटा मैं अभी आयी ड्रेस चेंज करके ....
थोड़ी देर में सुमित्रा ग्राउंड फ्लोर पर आती है तो देखती है की ऋचा और रुचिका सर झुकाये कड़ी थी और घर के सभी बड़े लोग वह खड़े थे और उसकी मंझली जेठानी एक डंडा लेकर गुस्से में न जाने क्या क्या अनाप सनाप बाके जा रही थी ....
लक्समन : ऋचा और प्रियांशी सच सच बताओ तुमने hi राहुल को मारा है क्या .... "
रुचिका : पापा पर गलती राहुल की थी ....
लक्समन : वो तुमसे बड़ा है तुम उसको भैया नहीं कह सकती क्या ....
रुचिका : जी नहीं उसने बड़ा भाई होने का कोई फ़र्ज़ नहीं निभाया मैं उस घटिया इंसान को कभी भैया नहीं कहूँगी ...
खुसबू : देख लिया देवर जी उस मनहूस और बेगैरत इंसान के साथ रह कर ये भी वैसी hi बन गयी है ..... आज तो मैं इनकी खाल उधेड़ दूंगी ....
बी. चची : अरे पहले सुन तो ले की सच क्या है और झूट क्या .. मेरा तो मन कहता है की ऋचा गलत नहीं हो सकती ...
सुमित्रा : रुचिका सच कह रही है गलती राहुल ने hi की थी उसने कल इवनिंग को hi मुझे बताया था ....
लक्समन : वह यानि की तुम भी इनकी गलती में शामिल हो .... ये नहीं की इनकी गलती के लिए इन्हे संमझाये या सजा दे ....
सुमित्रा : देखो जी आपको जब पता न हो तो ऐसे उछालो मत ...
लक्समन अपने जगह से खड़ा हो कर सुमित्रा के गाल पर 2 - 3 जोरदार थप्पड़ लगा देता है .... थप्पड़ इतना झन्नाटेदार था की सुमित्रा का गाल hi सुन्न हो जाता है ...
लक्समन : तू मुझसे जुबान लड़ाएगी .... रुक तुझे बताता हु रूम में ....
सुमित्रा बिचारि वही पर अपने गाल पर हाथ रख कर बैठ जाती है .... आज पहली बार लक्समन ने उसके ऊपर हाथ उठाया था उसके गाल पर पंजे के नीसाण उभर आये थे और होंठ भी थोड़े फैट गए थे जिनसे खून रिसने लगा था ....
बलबीर : बस करो लक्समन ऐसे बच्चो के सामने बहु को मत मारो ाचा नहीं लगता .... ऋचा बेटी मुझे सिर्फ तुम पर भरोषा है तुम कभी झूट नहीं बोलोगी बताओ बीटा कल क्या हुआ था और क्या तुम लोगो ने hi राहुल को मारा ....
ऋचा : दादा जी कल शाम को मैं अपने कमरे में लेट कर मूवी देख रही थी की राहुल मेरे रूम में आ गया और किसी बहाने से मेरे साथ गन्दी हरकत करने लगा .... जब बर्दास्त के बहार हो गया तो मैंने उसको एक थप्पड़ लगा दिए ... थप्पड़ लगने के बाद गुस्से में आ कर मेरे साथ बदतमीज़ी करना सुरु कर दिया और न जाने वो मेरे साथ क्या क्या करता की तभी कही से रुचिका आ गयी और उसने राहुल की पिटाई करके मुझे बचा लिया ....
खुसबू : वह अब तुम लोग कोई भी कहानी बना कर सुना डौगी तो मैं मान जाउंगी क्या .... मेरा राहुल ऐसी घिनौनी हरकत कर hi नहीं सकता .... वो तो तुम बहनो को अपनी बहन से भी ज्यादा प्यार एयर रेस्पेक्ट देता है ये सब तुम तीनो बहनो और उस कलमुहे तरुण की मिली भगत है .... मैं अब तुम लोगो को दिखती हु की मेरे बेटे पर हाथ उठाने का क्या अंजाम होता है ....
ख़ुशी डंडा उठा कर ऋचा को मरने को होती है की प्रिय अचानक से वह आ जाती है और डंडे को खुसबू के हाथो से छीन लेती है ...
प्रिय : ये क्या बेहूदगी है भाभी आप मेरी बच्चियों पर क्यों हाथ उठा रही हो .....
खुसबू : देखो प्रिय तुम इस घर की बेटी हो हमारे आपसी मामले में दखल देने वाली तुम कौन होती हो ....
प्रिय : वह क्या बात है .... पिताजी अब आप कुछ बोलेंगे क्या मेरा इस घर पर कोई अधिकार नहीं ...
बलबीर : नहीं बेटी ऐसा नहीं है तुम भी इस घर की मेंबर हो तुम्हे बोलने का पूरा हक़ है ....
खुसबू : आप चुप hi रहो .... इसको जब सचचई का पता hi नहीं है तो बिच में टांग क्यों ऐडा रही है ....
प्रिय : मुझे कल सुमित्रा भाभी ने सब बता दिया है ... कल जो भी हुआ उसमे आपके बेटे राहुल की गलती है ....
खुसबू : मैं नहीं मानती ... तुम्हारे पास कोई साबुत है क्या ...
प्रिय : वो तो आपके पास भी नहीं है .... अब बोलो ....
खुसबू : मुझे गुस्सा मत दिलवाओ प्रिय वर्ण ाचा नहीं होगा ....
प्रिय : ओह तो आप मुझे धमकी दे रही हो ... तरुण के वक्त तो मैं उसके लिए स्टैंड नहीं ले पायी जिसका अफ़सोस मुझे हमेसा रहेगा पर आज मैं अपनी भतीजियों पर कोई भी अत्याचार सहन नहीं करुँगी चाहे जो भी हो जाये ....
खुसबू : ठीक है मैं भी देखती हु कब तक तू इन्हे मुझसे बचा पायेगी ....
प्रिय ऋचा और रुचिका को लेकर अपने घर चली जाती है उसके साथ साथ hi प्रियांशी भी बुआ के घर hi चली जाती है ....
खुसबू : अब तुम लोग इधर नजर भी मत आना वर्ण मुझसे बुरा कोई न होगा ... (तरुण के दादा से) देख लिया अपने अपनी बेटी की करतूत कैसे इस घर के मामले में टांग अदने आ गयी ...
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इन् सभी बातो से अनजान तरुण की वह एक नयी सुबह हुयी थी और सुबह होते hi वो सुहानी के फ्लोर पर बने गयम में आ कर उसका वेट करने लगा ... सुहानी नियत समय से 5 मिनट लेट आती है .... उसने एक टाइट टॉप और ट्रॉउज़र पहना था .... उसके पेट के हिस्से में हलकी सी चर्बी थी ोथेरविसे शी वास् आल फिट ....
तरुण : आप पुरे 5 मिनट लेट हो .. आगे से ऐसी गलती न करना बिकॉज़ पुनक्तुअलिटी इस थे मोस्ट इम्पोर्टेन्ट थिंग इन अन्य वर्क बे आईटी स्टडी और स्पोर्ट्स ...
सुहानी : hi टीचर आगे से गलती नहीं होगी ...
तरुण : ok अब आप वेइटिंग मशीन पर कड़ी हो जाओ ... आज मैं आपकी फिजिकल बॉडी का सही से मेज़रमेंट लेना चाहता हु ताकि आगे आपकी इम्प्रूवमेंट के बारे में पता चल सके ...
तरुण सुहानी का वेट और बाकि फिजिकल डिटेल्स एक डायरी में नोट करता है ुर उसको बेसिक एक्सरसाइज के बारे में बताता है और खुद भी उसके साथ कुछ देर प्रैक्टिस करता है .... टाइम ख़त्म होते hi दोनों अपने अपने रूम्स अस जाते हैं ....
दोपहर तक शेर सिंह और कलुआ भी आ जाते हैं ... इवनिंग को फिर से तरुण सुहानी से एक्सरसाइज वगैरह करवाता है ...,
तरुण : गुड नाईट दीदी ... टेक केयर ...
अपनी बहनो से बात करके तरुण को बहुत ाचा फील होता है वही उसकी आँखों में राहुल के लिए बेइंतेहा गुस्सा भी झलक रहा था .... अगर राहुल सच में उसके करीब होता तो उसको बीच से चिर डालता ....
आगे
तरुण के घर में उसकी तीनो बहने तो अब निश्चिंत से सो सो रही थी पर एक शक्श की आँखों से नींद गायब थी ये और कोई नहीं तरुण की माँ सुमित्रा थी ....
सुमित्रा (मन में) : क्या मैं सबके सामने अपनी बेटियों के लिए स्टैंड ले पाऊँगी ... नहीं नहीं मुझे लेना hi होगा अपनी इसी कमजोरी की वजह से एक प्यारे से बेटे को तो खो hi चुकी हु पर मैं किसी कीमत पर अपनी बेटी को नहीं खोऊंगी ..... मैं अपनी बेटियों के लिए साडी दुनिया से लड़ जाउंगी ..... उस बलखाती नागिन के फैन को कुचलना जरुरी है पर ये काम मैं अकेली नहीं कर सकती .... क्या मुझे दीदी का सपोर्ट लेना चाहिए .....
काफी सोचने विचरने के बाद सुमित्रा अपनी ननद यानि की तरुण की बुआ को कॉल लगाया .... तरुण की बुआ ने जब अपने मोबाइल में अपनी भाभी का कॉल देखा तो एक पल के लिए वो शॉक सी हो गयी क्यूंकि उनकी आपस में नहीं बनती थी अचे से और ये सब तरुण की वजह से था .... तरुण की बुआ ने बहुतो बार तरुण की माँ को अपने बेटे से ऐसे मिस्बेहावे करने से मन किया था पर वो तरुण को प्रताड़ित करने के कोई मौका hi नहीं छोड़ती थी .... इसी वजह से दोनों में बस फॉर्मेलिटी के लिए hi बात चित होती थी ....
तरुण की बुआ प्रिय ने पहली बार कोई रिस्पांस नहीं दिया तो सुमित्रा ने दूसरी बार रिंग किया इस बार प्रिय ने कॉल पिक किया ....
प्रिय : क्या हुआ इतनी रात को क्यों परेशान कर रही हो आप ...
सुमित्रा : सॉरी दीदी पर बात hi कुछ ऐसी है की आपको परेशान करना पड़ा .... मुझे आपकी हेल्प की जरुरत है ....
प्रिय : मैं आपकी बात क्यों मनु .... आज तक अपने मेरी कोई बात मणि है क्या .... मैंने आज तक तरुण के लिए आपसे इतनी बार मिन्नत की पर अपने क्या किया ... मुझे आपसे कोई वास्ता नहीं आपको जो करना है खुद कीजिये ... Bye
सुमित्रा : सॉरी दीदी ... मैं खुद बहुत सर्मिन्दा हु की मैंने अपने खुद के बेटे के साथ जानवरो जैसा बर्ताव किया और इसकी सजा मुझे नरक hi जाना है .... पर आज बात उसकी नहीं ऋचा की है ....
और फिर सुमित्रा ने अपनी ननद प्रिय को वो साडी बात बता दो जो उसको उसकी बेटियों में बताया था और उसने प्रिय को ख़ुशी और अपने ससुर के बिच के जिस्मानी रिश्ते के बारे में भी बता दिया ....
प्रिय : भाभी मुझे नहीं पता था की वो चुड़ैल इतनी घटिया मानसिकता की है उसके hi वजह से मेरे तरुण को इस घर में इतना कुछ सहना पड़ा .... पर पापा को क्या सुझा छी मुझे तो अब उस घटिया इंसान को अपना बाप कहने में भी शर्म सो महसूस होती है .... भाभी ऋचा और मेरी बच्चियों के लिए आप बेफिक्र रहो .... इस चुड़ैल को मज़ा चखना अब मेरा काम है इसके किये की सजा देना hi मेरा मकसद है ....
सुमित्रा : सुक्रिया दीदी ... बाकि कल सुबह आप जल्दी आ जाना क्यूंकि पता नहीं कब उस डायन को उसके बेटे की हालत के बारे में पता चलेगा तो वो कौन सा नया बखेड़ा खड़ा करेगी .....
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अगली सुबह को सुमित्रा की नींद बहार हो रहे शोर सरबे के साथ खुलती है वो बहार जाती है तो पति है की उसकी मंझली जेठानी ख़ुशी राहुल के रूम में है और जोर जोर से चिल्ला रही है .... रूम में hi उसका पति लक्समन भी खड़ा है जो सर झुकाये हुए उसकी बातो को सुन रहा है ....
खुसबू : देखो देवर जी आपकी चुड़ैल बेटियों ने मेरे फूल से बच्चे का क्या हाल कर दिया है .... ऐसे भी कोई किसी अपने को मरता है क्या .... पहले खुद hi मेरे बेटे को रिझा कर अपने रूम में बुलाया और जब इसने उनकी बात मैंने से मन कर दिया तो अपनी डायन बहन के साथ मिल कर इसको खूब मारा और तो और रात को किसी को इसके बारे में बताया भी नहीं .... मैं पुलिस को कॉल करने जा रही हु अब वो लोग hi सही से इसका हल निकालेंगे .... इसके पापा नहीं रहे तो तुमलोग हमें दबाओगे hi .... इससे ाचा होता की तुमनलोग हम तीनो माँ बेटी को ज़हर hi दे दो इससे घर की साडी संपत्ति भी तुम्हारी हो जाएगी ...
लक्समन : नहीं भाभी प्लीज ऐसा न कहो और प्लीज पुलिस को मत बुलाओ ... मैं ये सब पापा पर छोड़ता हु वो इस घर के बड़े हैं और घर के मुखिया भी तो वो जो भी सजा देंगे हमें वो मंजूर होगा ... अब जब मेरी बेटियों ने गलती की hi है तो उन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए ....
खुसबू : ऐसे नहीं पहले मैं तुम्हारे बेटियों की हालत मेरे बेटे जैसे hi करुँगी उसके बाद न्याय अन्याय का फैसला होगा ....
सुमित्रा : जी नहीं पहले इनका जुर्म तो साबित हो जाये की सच में गलती किसकी है ....
लक्समन : सुमित्रा तुम होती कौन हो हमारे घर के बारे में फैसला लेने वाली ... भाभी हमसे बड़ी हैं उन्हें भी सही गलत का फैसला लेने का हक़ है .... भाभी आप पहले अपने मननकी कर लो उसके बाद पापा के पास जायेंगे ..... भाभी ये लो डंडा ....
खुसबू लक्समन के हाथ से डंडा ले लेती है और गुस्से से फुफकारती हुयी सीढिया उतर कर रुचिका का गेट नॉक करती है ....
गेट प्रियांशी खोलती है .... अपनी मंझली चची के हाथो में डंडा और बाकि लोगो को रूम के बहार देख वो सारा माजरा समझ जाती है ....
प्रियांशी : क्या हुआ चची आपको किस्से काम है ....
खुसबू : पूछ तो ऐसे रही है जैसे कुछ पता hi न हो जल्दी से अपनी दोनों बहनो को नीचे भेजो ....
प्रियांशी : ठीक है चची ....
खुसबू पेअर पटकती हुयी ग्राउंड फ्लोर पर आ जाती है ....
सुमित्रा : देखिये जी जो कुछ हो रहा है वो गलत हो रहा है गलती ऋचा की नहीं राहुल की थी वो hi ऋचा के रूम में जाकर उससे जबरदस्ती करने लगा जिसके बाद रुचिका ने उसको बचने के लिए राहुल को मारा है .... अगर उसने ये नहीं किया होता तो आज आपकी बेटी किसी को मुँह दिखने के काबिल न रहती ....
लक्समन : तुम चुप रहो मुझे मत सिखाओ क्या सही है और क्या गलत उन्होंने राहुल को ऐसे बेरहमी से मार कर ये साबित कर दिया है की वो गलत थी .... उन्होंने अपनी गलती छुपाने के लिए hi उसको ऐसे बुरे तरह से मारा है ... अब उन्हें भाभी hi उनके किये की सजा देंगी ... बस फैसला हो चूका है अब तुम जा सकती हो ....
तभी वह तरुण की बुआ प्रिय आ जाती है ....
प्रिय : वह भाई वह क्या फैसला सुनाया है ... आज तक अपने बेटे पर हो रहे अन्याय के खिलाफ तो एक शब्द भी न निकले आज अपने भतीजे राहुल के लिए तो बड़ा सॉफ्ट हेअरटेड हो रहा है और बड़ा टो दिखा रहा है ... कही वो तेरा hi बीटा तो नहीं है क्यूंकि मंझले भैया की तो वो औलाद hi नहीं है है ....
लक्समन : देखो दीदी आपको इज्जत करता हु इसका ये मतलब नहीं की आप जो मन में आये बोलो .... इस घर के निजी मामले में बोलने वाली आप होती कौन हो ....
प्रिय : वह लक्समन आज तूने साबित कर दिया की तू भी अपने गंदे और घटिया बाप की पैदाइश है ...
तभी वह तरुण का दादा बलबीर आ जाता है और अपनी बेटी के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ चिपका देता है ...
तब तक वह Richa,Rani,ruchika और प्रियांशी भी आ जाती है ....
ऋचा : दादा जी बुआ पर हाथ उठा कर अपने सही नहीं किया गलती हमने की है तो सजा बुआ को क्यों ....
रानी : ये और कर hi क्या सकते हैं छोटी आखिर बुआ ने सच जो कहा है और सच तो हमेसा कड़वा hi होता है ....
खुसबू (जोर से चिल्लाते हुए) : चुप हो जाओ रानी .... वर्ण मैं भूल जाउंगी की तुम मेरी बेटी हो .....
रानी : चिल्लाओ मत माँ चिल्लाना मुझे भी आता है .... बचपन से hi इस घर में अन्याय होता देखती आ रही हु तो आज न्याय की उम्मीद hi कहा है ... जानना चाहती हो अपने बेटे का सच तो हाँ वो हरामी बहुत hi घटिया इंसान है .....
खुसबू : तुम्हारे झूट कहने से मेरा बीटा गलत साबित नहीं हो जाता ....
प्रिय : वह अब सच बोल रही है महाराजा हरिश्चंद्र की बेटी .... अरे तुझमे कुछ शर्म हाय है की नहीं डायन .... और पापा आप आपको इस डायन में ऐसा क्या दिख गया की तीर्थ करने के उम्र में यहाँ अपनी बहु के साथ में hi खत कबड्डी खेलने में लगे हुए हो ... शर्म आती है मुझे आपको अपना बाप कहते हुए .... ठीक हुआ जो माँ मर गयी वर्ण आपको ऐसे देख कर हर रोज मर रही होती .... बहु भी बेटी का hi रूप होती है उसके साथ ऐसी घटिया हरकत .... छियई ....
लक्समन : तुम कहना क्या चाहती हो दीदी ....
प्रिय : यही सच है लक्समन की तुम्हारी पूजनीय भाभी और तुम्हारे पूजनीय पिता आपस में न जाने कितने सालो से शारीरिक सम्बन्ध बनाये हुए हैं और राहुल इनकी hi औलाद है क्यूंकि मंझले भैया ने इस चुड़ैल के हाव् भाव को पहले hi पहचान लिया था क्यूंकि एहि नहीं इसके मायके में भी इसके कुछ यार रह चुके हैं .... अब जब माँ बाप hi ऐसे हो तो उनका प्रोडक्ट कैसे सही रह सकता है .... एहि नहीं इस डायन ने तेरी बड़ी भाभी को भी इस हवशी दरिंदे के नीचे लिटाया .... ये तो तेरी बीवी को भी इसके हवाले करना चाहती थी और श्रुति को अपने बेटे के नीचे लिटाने की प्लानिंग भी थी इसकी .... सोच कितनी घटिया मानसिकता के हैं ये लोग .... और तो और तेरे बेटे की दुर्दशा की भी जिम्मेवार एहि कुटिया है इसने hi हमेसा से तेरी बीवी और पुरे घर वालो को तेरे बेटे के खिलाफ कर दिया ... माँ की भी मौत की जिम्मेवार एहि है इसने hi हमारे कुलगुरु को ब्लैकमेल करके तुम्हारे बेटे की गलत जन्मकुंडली बनवायी और इसने खुद hi तेरे बेटे के जन्म के बाद माँ तो सीढ़ियों से धकेल दिया और ये कहानी बना दी की सब कुछ तरुण के कुंडली डिश की वजह से हुआ है .... अब बोल क्या कोई इंसान इतना भी गिर सकता है .....
तभी एक जोरदार थप्पड़ की आवाज़ गूंज उठी ये थप्पड़ खुद बलबीर ने अपनी मंझली बहु को मारा था .... थप्पड़ की आवाज़ इतनी यस थी की वह एक अजीब सी शांति छ गयी ...
बलबीर : तूने मेरी कौशल्या को मुझसे छिना ..... मैं भी कितना पागल हु जो तेरी बातो में आ कर तरुण को इसका जिम्मेवार समझता रहा .... तुझे तो आज मैं जान से मार दूंगा ....
और बलबीर ने खुसबू को न जाने कितने थप्पड़ मरे .... ख़ुशी के दोनों गाल लाल हो चुके थे मनो उनमे से खून उतर आया हो ....
प्रिय : इसकी असली सजा मौत नहीं बल्कि इसका भी वैसा hi हाल होना चाहिए जैसा इसने मेरे तरुण का किया था इसको भी उस दर्द का एहसास होना चाहिए जो इसने तरुण ने इतने सालो से झेला है ....
तभी रानी खुसबू के नजदीक आती है और उसके मुँह पर थूक देती है ...
रानी : ये मेरे तरुण को हमसे दूर करने के लिए ... चिंता न करो तुम्हारे हर सुबह की शुरुआत ऐसे hi होनी है ....
घर के हर सदस्य ने खुसबू के मुँह पर थूका सिवाए राहुल राघव और तरुण के बड़े चाचा के .... खुसबू को एक छोटे से रूम में शिफ्ट कर दिया गया जिसमे सुख सुविधा की कोई चीज मौजूद नहीं थी .....
"तरुण ... देख आज मैंने तुम्हारा बदला ले लिया ... अब तो तू मुझे माफ़ कर देगा न बीटा ... देख आज मैंने सही गुनेहगार को सजा दिलवा दिया है ... मैंने अपनी बच्चियों को बचा लिया है "
"मुम्मा ... मुम्मा गेट खोलो न .... मुम्मा मुम्मा गेट खोलो न देखो मंझली चची ऋचा दीदी और रूचि को मरने गयी है ...."
गेट पर हो रहे दस्तक और प्रियांशी की घबराई हुयी आवाज़ से सुमित्रा की नींद खुलती है ....
"अरे मैं तो रूम में हु यानि की मैं ये सब सपना देख रही थी क्या ... "
सुमित्रा जल्दी से भाग कर गेट खोलती है तो बहार प्रियांशी आँखों में आंशू लिए गेट पर कड़ी थी ....
प्रियांशी : मुम्मा देखो न मंझली चची ऋचा दीदी और प्रियांशी को मरने गयी है डंडा लेकर .... उन्हें बचा लो मुम्मा ... पापा और दादा जी भी काफी गुस्से में हैं ..
सुमित्रा : तुम चलो बीटा मैं अभी आयी ड्रेस चेंज करके ....
थोड़ी देर में सुमित्रा ग्राउंड फ्लोर पर आती है तो देखती है की ऋचा और रुचिका सर झुकाये कड़ी थी और घर के सभी बड़े लोग वह खड़े थे और उसकी मंझली जेठानी एक डंडा लेकर गुस्से में न जाने क्या क्या अनाप सनाप बाके जा रही थी ....
लक्समन : ऋचा और प्रियांशी सच सच बताओ तुमने hi राहुल को मारा है क्या .... "
रुचिका : पापा पर गलती राहुल की थी ....
लक्समन : वो तुमसे बड़ा है तुम उसको भैया नहीं कह सकती क्या ....
रुचिका : जी नहीं उसने बड़ा भाई होने का कोई फ़र्ज़ नहीं निभाया मैं उस घटिया इंसान को कभी भैया नहीं कहूँगी ...
खुसबू : देख लिया देवर जी उस मनहूस और बेगैरत इंसान के साथ रह कर ये भी वैसी hi बन गयी है ..... आज तो मैं इनकी खाल उधेड़ दूंगी ....
बी. चची : अरे पहले सुन तो ले की सच क्या है और झूट क्या .. मेरा तो मन कहता है की ऋचा गलत नहीं हो सकती ...
सुमित्रा : रुचिका सच कह रही है गलती राहुल ने hi की थी उसने कल इवनिंग को hi मुझे बताया था ....
लक्समन : वह यानि की तुम भी इनकी गलती में शामिल हो .... ये नहीं की इनकी गलती के लिए इन्हे संमझाये या सजा दे ....
सुमित्रा : देखो जी आपको जब पता न हो तो ऐसे उछालो मत ...
लक्समन अपने जगह से खड़ा हो कर सुमित्रा के गाल पर 2 - 3 जोरदार थप्पड़ लगा देता है .... थप्पड़ इतना झन्नाटेदार था की सुमित्रा का गाल hi सुन्न हो जाता है ...
लक्समन : तू मुझसे जुबान लड़ाएगी .... रुक तुझे बताता हु रूम में ....
सुमित्रा बिचारि वही पर अपने गाल पर हाथ रख कर बैठ जाती है .... आज पहली बार लक्समन ने उसके ऊपर हाथ उठाया था उसके गाल पर पंजे के नीसाण उभर आये थे और होंठ भी थोड़े फैट गए थे जिनसे खून रिसने लगा था ....
बलबीर : बस करो लक्समन ऐसे बच्चो के सामने बहु को मत मारो ाचा नहीं लगता .... ऋचा बेटी मुझे सिर्फ तुम पर भरोषा है तुम कभी झूट नहीं बोलोगी बताओ बीटा कल क्या हुआ था और क्या तुम लोगो ने hi राहुल को मारा ....
ऋचा : दादा जी कल शाम को मैं अपने कमरे में लेट कर मूवी देख रही थी की राहुल मेरे रूम में आ गया और किसी बहाने से मेरे साथ गन्दी हरकत करने लगा .... जब बर्दास्त के बहार हो गया तो मैंने उसको एक थप्पड़ लगा दिए ... थप्पड़ लगने के बाद गुस्से में आ कर मेरे साथ बदतमीज़ी करना सुरु कर दिया और न जाने वो मेरे साथ क्या क्या करता की तभी कही से रुचिका आ गयी और उसने राहुल की पिटाई करके मुझे बचा लिया ....
खुसबू : वह अब तुम लोग कोई भी कहानी बना कर सुना डौगी तो मैं मान जाउंगी क्या .... मेरा राहुल ऐसी घिनौनी हरकत कर hi नहीं सकता .... वो तो तुम बहनो को अपनी बहन से भी ज्यादा प्यार एयर रेस्पेक्ट देता है ये सब तुम तीनो बहनो और उस कलमुहे तरुण की मिली भगत है .... मैं अब तुम लोगो को दिखती हु की मेरे बेटे पर हाथ उठाने का क्या अंजाम होता है ....
ख़ुशी डंडा उठा कर ऋचा को मरने को होती है की प्रिय अचानक से वह आ जाती है और डंडे को खुसबू के हाथो से छीन लेती है ...
प्रिय : ये क्या बेहूदगी है भाभी आप मेरी बच्चियों पर क्यों हाथ उठा रही हो .....
खुसबू : देखो प्रिय तुम इस घर की बेटी हो हमारे आपसी मामले में दखल देने वाली तुम कौन होती हो ....
प्रिय : वह क्या बात है .... पिताजी अब आप कुछ बोलेंगे क्या मेरा इस घर पर कोई अधिकार नहीं ...
बलबीर : नहीं बेटी ऐसा नहीं है तुम भी इस घर की मेंबर हो तुम्हे बोलने का पूरा हक़ है ....
खुसबू : आप चुप hi रहो .... इसको जब सचचई का पता hi नहीं है तो बिच में टांग क्यों ऐडा रही है ....
प्रिय : मुझे कल सुमित्रा भाभी ने सब बता दिया है ... कल जो भी हुआ उसमे आपके बेटे राहुल की गलती है ....
खुसबू : मैं नहीं मानती ... तुम्हारे पास कोई साबुत है क्या ...
प्रिय : वो तो आपके पास भी नहीं है .... अब बोलो ....
खुसबू : मुझे गुस्सा मत दिलवाओ प्रिय वर्ण ाचा नहीं होगा ....
प्रिय : ओह तो आप मुझे धमकी दे रही हो ... तरुण के वक्त तो मैं उसके लिए स्टैंड नहीं ले पायी जिसका अफ़सोस मुझे हमेसा रहेगा पर आज मैं अपनी भतीजियों पर कोई भी अत्याचार सहन नहीं करुँगी चाहे जो भी हो जाये ....
खुसबू : ठीक है मैं भी देखती हु कब तक तू इन्हे मुझसे बचा पायेगी ....
प्रिय ऋचा और रुचिका को लेकर अपने घर चली जाती है उसके साथ साथ hi प्रियांशी भी बुआ के घर hi चली जाती है ....
खुसबू : अब तुम लोग इधर नजर भी मत आना वर्ण मुझसे बुरा कोई न होगा ... (तरुण के दादा से) देख लिया अपने अपनी बेटी की करतूत कैसे इस घर के मामले में टांग अदने आ गयी ...
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इन् सभी बातो से अनजान तरुण की वह एक नयी सुबह हुयी थी और सुबह होते hi वो सुहानी के फ्लोर पर बने गयम में आ कर उसका वेट करने लगा ... सुहानी नियत समय से 5 मिनट लेट आती है .... उसने एक टाइट टॉप और ट्रॉउज़र पहना था .... उसके पेट के हिस्से में हलकी सी चर्बी थी ोथेरविसे शी वास् आल फिट ....
तरुण : आप पुरे 5 मिनट लेट हो .. आगे से ऐसी गलती न करना बिकॉज़ पुनक्तुअलिटी इस थे मोस्ट इम्पोर्टेन्ट थिंग इन अन्य वर्क बे आईटी स्टडी और स्पोर्ट्स ...
सुहानी : hi टीचर आगे से गलती नहीं होगी ...
तरुण : ok अब आप वेइटिंग मशीन पर कड़ी हो जाओ ... आज मैं आपकी फिजिकल बॉडी का सही से मेज़रमेंट लेना चाहता हु ताकि आगे आपकी इम्प्रूवमेंट के बारे में पता चल सके ...
तरुण सुहानी का वेट और बाकि फिजिकल डिटेल्स एक डायरी में नोट करता है ुर उसको बेसिक एक्सरसाइज के बारे में बताता है और खुद भी उसके साथ कुछ देर प्रैक्टिस करता है .... टाइम ख़त्म होते hi दोनों अपने अपने रूम्स अस जाते हैं ....
दोपहर तक शेर सिंह और कलुआ भी आ जाते हैं ... इवनिंग को फिर से तरुण सुहानी से एक्सरसाइज वगैरह करवाता है ...,