Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
09-05-2020, 02:09 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
फ़ैसले के मुताबिक मंडे को सब जड़ी बूटी का इंतेज़ाम कर के दवा बनाना शुरू कर दिया. दवा बनाना मुश्किल नही था मगर लंड को बड़ा करने और ताक़त बढ़ाने की दवा बनाने मे चार पाँच घंटे लग गये मगर दवा बन ही गया. चूँकि चूत को टाइट बनाने के लिए किसी दवा के बनाने की ज़रूरत नही थी इसके लिए लड़की को 15/20 दिन तक रोज़ाना तीन से चार बार अपनी चूत को फिटकिरी (आलम) के पानी से चूत
के अंदर तक 10 मिनिट तक धोना था इससे चूत खुद बखुद बिल्कुल कवारी लड़की की चूत की तरह टाइट हो जाती सिर्फ़ शर्त यह थी कि
इस बीच चुदाई नही क़ी जाए.

रोज की रुटीन की तरह दिन गुज़रने लगे मैने बनाई हुई दवा को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था. इसकी ख़ास बात यह थी कि इसके
इस्तेमाल के बीच चुदाई से मना नही किया गया था.

दसवीं (10थ.) दिन मुझे दुकान पहुँचे हुए घंटा ही हुआ था कि पापा का फोन आया कि सब अभी अभी वापस घर पहुँच चुके हैं. इस खबर को सुन कर मैं खुशी से उछल पड़ा और खास कर मम्मी को देखने के लिए बे-चैन हो गया. थोड़ी देर तो दूसरी सिटी मे माल भेजने के लिए इन्वाइस बनाते हुए वक़्त गुज़ारा फिर मुझ से रहा नही गया तो मैं मुंशी जी को बता कर घर के लिए चल पड़ा. घर पहुँचा तो उस वक़्त दिन के 3 बजे थे और सब लोग लंच खा रहे थे. मुझे देख कर पापा नाराज़ तो नही हुए सिर्फ़ इतना कहा, “तुम से रहा नही गया और दुकान छोड़ कर आ गये.” खाने के बाद पापा सफ्दर अंकल के यहाँ कार लेने गये और कह गये कि वो कार ले कर दुकान जाएँगे फिर दुकान बंद करके ही वापस आएँ गे. चाचा भी पापा के साथ ही चले गये. चूँकि वो सब ट्रेन के 1स्ट क्लास एसी मे बड़े आराम से सफार कर के आए थे इसलिए
किसी को सफ़र की थकावट नही थी. पापा के जाने के बाद हम सब टीवी लाउंज मे बैठ गये.

मैं बार बार चोर नज़रों से मम्मी को देखते हुए
ऊन सब के इस टूर की कहानी सून रहा था. मम्मी को देखते हुए पैंट मे मेरा लंड खुद बखुद तन गया था और आज मम्मी मुझे बिल्कुल मुख्तलिफ और बहुत अच्छी लग रही थी. बातों मे वक़्त गुज़रने का अहसास ही नही हुआ और 5 बज गये तो नजमा सब के लिए चाए बना कर
ले आई. चाए के ख़तम होते ही चारों बच्चे पार्क जाने के लिए ज़िद करने लगे तो नानी जान और चाची सब बच्चो को ले कर पार्क चली गई
और जाते जाते नजमा के लाख मना करने के बावजूद उसे भी साथ लेगयि.

सब के जाते ही मम्मी ने कहा “शहाब जल्दी से दरवाज़ा बंद करके आओ एक बहुत ज़रूरी बात करना है.” वो बहुत डरी हुई और परेशान लग रही थी….

मैं उनकी परेशानी, डर और घबराहट को देख कर खुद परेशान हो गया और दिल मे तरह तरह के ख्याल आने लगे, मैं फ़ौरन बाहर के सब दरवाज़े को अंदर से लॉक कर के वापस आ कर मम्मी के बराबर सोफे पर बैठ गया और फ़िकरमंद और उलझे हुए लहजे मे पूछा, “मम्मी सब ठीक तो है ना, आप बहुत परेशान लग रही हैं.”

“शहाब गजब हो गया मैं प्रेग्नेंट हो गयी हूँ क्यूंकी मेरे महीने की तारीख को गुज़रे हुए हफ्ते से ज़्यादा हो गया और मेरा महीना नही हुआ. तेरे
पापा तो मुझे चोदते नही हैं फिर क्या जवाब दूँगी कि मेरे पेट मे बच्चा कहाँ से आ गया.

यह बहुत बड़ी बात थी और मम्मी का ख़ौफ़ और परेशानी ग़लत नही थी, मगर मुझे इस खबर को सुन कर कोई परेशानी नही हुई क्यूंकी मैं जानता था कि शाहजी के पास इसकी ऐसी खास दवा है जिस के खाने से दो महीने की प्रेग्नेंट औरत का बच्चा भी गिर जाता है. मैं बहुत मुतमईन लहजे मे मम्मी को तस्सल्ली देता हुआ बोला. “इतनी मामूली बात पर परेशान हो ने की ज़रूरत नही है.क्यूंकी शाहजी के पास इस
चीज़ की ख़ास दवा है जिस के खाते ही आप का रुका हुआ महीना फ़ौरन शुरू हो जाए गा. मैं आज ही जा कर उससे दवा ले आउन्गा आप
रात को सोने से पहले खा लीजिएगा फिर सुबह तक आप का महीना शुरू हो कर आप की परेशानी को ख़तम कर देगा.
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09-05-2020, 02:09 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
यह बहुत बड़ी बात थी और मम्मी का ख़ौफ़ और परेशानी ग़लत नही थी, मगर मुझे इस खबर को सुन कर कोई परेशानी नही हुई क्यूंकी मैं जानता था कि शाहजी के पास इसकी ऐसी खास दवा है जिस के खाने से दो महीने की प्रेग्नेंट औरत का बच्चा भी गिर जाता है. मैं बहुत मुतमईन लहजे मे मम्मी को तस्सल्ली देता हुआ बोला. “इतनी मामूली बात पर परेशान हो ने की ज़रूरत नही है.क्यूंकी शाहजी के पास इस
चीज़ की ख़ास दवा है जिस के खाते ही आप का रुका हुआ महीना फ़ौरन शुरू हो जाए गा. मैं आज ही जा कर उससे दवा ले आउन्गा आप
रात को सोने से पहले खा लीजिएगा फिर सुबह तक आप का महीना शुरू हो कर आप की परेशानी को ख़तम कर देगा.

मेरी बात सुन कर मम्मी के चेहरे पर थोड़ा सकून तो फैल गया मगर फिर भी शक भरे लहजे मे बोली. “तुम को यक़ीन है कि शाहजी की दवा ठीक कम करेगी.”

“हंड्रेड पार्सेंट कम करे गा आज़माई हुआ दवा है, अब आप अपने बारे मे फिकर करना छोड़ दें और मेरी फ़िक्र करें क्यूंकी बगैर चुदाई के मैं पागल हो रहा हूँ.” यह कहते हुए मैं एक हाथ से मम्मी की रान को सहलाने लगा और दूसरे हाथ से पैंट की ज़िप को नीचे कर के अपने लंड को जो अब किसी नाग की तरह फनफना रहा था बाहर निकाल कर सहलाते हुए बोला.

मेरी दवा वाली बात पर मम्मी को पूरा यक़ीन आ गया था और अब उनके चेहरे से परेशानी ख़तम हो गयी थी क्यूंकी वो मेरी बात सुन कर मुस्कुराते हुए मेरे लंड देख कर कहने लगीं. “मुझे तेरी हालत का अहसास है, इसलिए सोचा है कि कल जब तेरी नानी घर जाएँ गी तो हम सब भी उनके साथ चले जाएँ क्यूंकी लाहोर और *****आबाद से तेरे मामू और ममानी के लिए जो तोहफे लाए हैं उसे मैं खुद अपने हाथ से उन को दूं. तेरे पापा से कहूँगी कि सुबह दुकान जाते हुए हम सब को अम्मा के घर छोड़ दें और शाम को आते हुए हमे ले कर आ जाएँ. मैं नजमा को यही घर पर छोड़ जाउन्गी और तेरे पापा से कह कर कल तेरी भी छूट्टी करवा दूँगी. अब कल दिन भर नजमा तेरे पास हो गी तू दिल खोल कर उसे चोद लेना और अगर चाहे तो शाहजी को भी बुलवा लेना वो बेचारा भी चुदाई के लिए तरस रहा होगा.”

मम्मी की बात सुन कर मैं खुश हो गया और मम्मी के हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रखता हुआ बोला, “कल जो हो गा वो कल हो गा अभी मैं पागल हो रहा हूँ इसलिए अभी आप अपने हाथ से मेरा मूठ मार कर मुझे ठंडा तो कर दें.” इतने दिनों मधुबाला की फ़िल्मे देख देख कर उसके हुश्न और अदाओ ने मुझे उसका दीवाना बना दिया था चूँकि मम्मी बिल्कुल हूबहू मधुबाला थी और मेरे पास थी शायद इसी लिए मैं मम्मी से इश्क़ करने लगा था और . चोदने की ख्वाहिश मेरे दिल और दिमाग़ पर पूरी तरह क़ब्ज़ा कर चुकी थी.

फिल्म देखते हुए अपने लंड को सहलाता हुआ यही सोचता रहता कि मम्मी ने तो बिल्कुल सॉफ सॉफ कह दिया है कि मैं कभी भी उनको चोदने की कोशिश तो दूर की बात है उनको चोदने के बारे मे सोचु भी नही.फिर . कैसे चोद सकूँगा ? बहुत सोचने के बाद यही एक रास्ता समझ मे आया कि जो तरीक़ा नजमा पर आज़मा कर उसको चुदाई के लिए राज़ी किया था बिल्कुल वही तरीक़ा मम्मी पर भी आज़माउंगा और जब भी मौका मिलेगा मैं उनसे बिल्कुल नंगी नंगी बातें करूँगा, कभी उनके मम्मो को पकड़ लूँगा, कभी उनकी चूत को सहलाउंगा और उनके हाथ को पकड़ करअपने लंड पर रख दूँगा, इस तरह से आहिस्ता आहिस्ता उनका ब्रेन वॉश करना हो गा तो हो सकता है कि कभी कोई एक लम्हा ऐसा आजाए कि वो जज़्बात से बे-क़ाबू हो कर मुझ से चुदवा लें, बस एक बार चुदाई हो जाए फिर तो यह सिलसिला चल पड़ेगा. इसी लिए मैं उनके हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख कर उनसे मूठ मारने के लिए कह रहा था.
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09-05-2020, 02:09 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
मेरी बात सुन कर मम्मी जो अब मेरे लंड को देख रही थी एकदम खप से मेरे लंड पकड़ कर दबाते हुए हंस कर बोली, “तुम अपनी माँ से मूठ मारने के लिए कह रहे हो तुम्हें शरम नही आती.”

“ऊफ्फ मम्मी मैं चुदवाने के लिए तो नही कह रहा हूँ सिर्फ़ मूठ मारने की ही तो बात है फिर शरम कैसी वैसे भी आप उस दिन मेरा मूठ मार चुकी हैं फिर आज क्यूँ नही, प्लीज़ मम्मी, और वैसे भी अब आप ने जब मेरे लंड को पकड़ ही लिया है तो अब मूठ मार कर इस बहेन चोद लंड को ठंडा कर ही दें.”

मैं पहले भी मम्मी से नंगी और चुदाई की बात करता था मगर आज और पहले मे फरक यह था कि उस वक़्त जब शाहजी मम्मी को चोद रहा होता था और मम्मी चुदाई के नशे मे डूबी मज़े ले कर चुदवा रही होती थी मगर आज तीसरा कोई नही था सिर्फ़ हम दोनो थे और मैं देखना चाहता था कि अकेले मे इस तरह की बात करने से मम्मी किस तरह का रिएक्ट करती हैं ताकि उनके रिएक्ट को सामने रख कर फ्यूचर मे उनको चोदने का कोई प्लान बना सकूँ.

मम्मी मेरे लंड को सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरे गाल की चुटकी लेते हुए मुस्कुराते हुए बोली. “तुम बहुत ज़िद्दी हो मानो गे नही, ठीक है तुम्हारे लंड की गर्मी निकाल ही दूँ ताकि तुम्हारा दिमाग़ भी ठंडा हो जाए, मगर यहाँ नही क्यूंकी तुम्हारे लंड से निकला हुआ पानी टीवी लाउंज के कार्पेट पर गिर कर अपनी निशानी छोड़ देगा और जब सब आ कर यहाँ बैठेंगे तो सब देख कर मालूम नही क्या कुछ सोचने लगें, इसलिए मेरे कमरे मे चलो.”
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09-05-2020, 02:09 PM,
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मम्मी मेरे लंड को सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरे गाल की चुटकी लेते हुए मुस्कुराते हुए बोली. “तुम बहुत ज़िद्दी हो मानो गे नही, ठीक है तुम्हारे लंड की गर्मी निकाल ही दूँ ताकि तुम्हारा दिमाग़ भी ठंडा हो जाए, मगर यहाँ नही क्यूंकी तुम्हारे लंड से निकला हुआ पानी टीवी लाउंज के कार्पेट पर गिर कर अपनी निशानी छोड़ देगा और जब सब आ कर यहाँ बैठेंगे तो सब देख कर मालूम नही क्या कुछ सोचने लगें, इसलिए मेरे कमरे मे चलो.”

मम्मी की बात सुन कर और उनके पॉज़िटिव रिएक्ट को देख कर मैं दिल ही दिल मे खुशी से उछल पड़ा और मुझे यक़ीन होने लगा कि किसी ना किसी दिन मम्मी मुझ से ज़रूर चुदवा लें गी. मैं जल्दी से खड़ा हो गया मेरे खड़े होते ही मम्मी भी मेरे लंड को छोड़ कर खड़ी हो गईं. हम
दोनो साथ साथ मम्मी के कमरे की तरफ जाने लगे, चलते हुए मैने कहा, “मम्मी मेरी नज़र मे आप दुनिया की सब से खूबसूरत औरत हैं मैं
सिर्फ़ आपके चेहरे की खूबसूरती की बात नही कर रहा हूँ बल्कि आप पूरी की पूरी हुश्न और जमाल का एक शाहकार हैं.”

इस वक़्त तक हम कमरे के दरवाज़े तक पहुँच चुके थे और कमरे मे घुसने ही वाले थे कि मम्मी मेरी बात सुन कर रुक गयी और मेरा लंड जो अभी तक पैंट की ज़िप से बाहर निकला हुआ ऊपर नीचे झटके ले रहा था उसे पकड़ कर हल्के हल्के दबाते हुए हंस कर बोली. “तेरे
इस लंड को ठंडा करने के लिए ही तो कमरे मे ले जा रही हूँ इसलिए अब इतना मक्खन लगाने की ज़रूरत नही है.”

मम्मी की बात सुन कर मैने एकदम उनकी चुचियों को पकड़ लिया और हल्के हल्के दबाता हुआ बोला, “मैं मक्खन नही लगा रहा हूँ, सच कहता हूँ आप की छातियाँ तनी हुई, खूबसूरत और सख़्त हैं जैसे किसी ने इन्हे हाथ भी नही लगाया हो,” यह कह कर मैं अपना हाथ कपड़े के ऊपर ही से उनकी चूत पर रख कर सहलाते हुए कहा, “आप की छोटी सी फूली हुई रेशम की तरह नरम नाज़ुक चूत को देख कर यही लगता है कि अभी तक इस चूत ने किसी लंड की शकल भी नही देखी है,” यह कह कर मैं अपना हाथ उनके चुतड़ों पर रख कर कपड़े के
ऊपर ही से उनकी गान्ड के सुराख को उंगली से सहलाता हुआ बोला, “आपकी गान्ड की क्या तारीफ़ करूँ उसे देख कर बस दिल यही चाहता है कि आप के दोनो चुतड़ों को चीर कर आपकी गान्ड के सुराख को ज़बान से सहलाया जाए, चाटा जाए और गान्ड मे ज़बान घुसा कर ज़बान से आप की गान्ड मारी जाए.”

उस दिन पहली बार मुझे अंदाज़ा हुआ कि मेरी बातों मे एक ऐसा जादू है जो लड़कियों के दिल मे उतर कर उसके जज़्बात को बारूद का ढेर बना सकती है. मैने उसका असर मम्मी पर देखा क्यूंकी उन्होने मेरे हाथ को पकड़ कर मुझे रोकने की कोशिश नही की और चुप चाप खड़ी मेरी बातों को सुनते हुए मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से सहलाना शुरू कर दिया और उनके मुँह से लज़्ज़त भरी हल्की हल्की सिसकारी भी निकलने
लगी थी साथ साथ उनकी आँखों मे जज़्बात की लाली भी उतर आई थी. मेरी बात सुन कर वो मेरी तरफ देखने लगीं और हल्की आवाज़ मे
बोली. “अब बस कर तू मुझे पागल बना देगा.” यह कह कर वो मेरे लंड को छोड़ कर कमरे के अंदर चली गयी.
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09-05-2020, 02:09 PM,
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मैं भी उनके पीछे कमरे मे गया और जल्दी से अपने पैंट और अंडरवेर को उतार कर बिस्तर पर चित लेट कर मम्मी की तरफ देखा जो
बिस्तर के पास खड़ी मुझे देख रही थी…

मम्मी आगे आ कर बिस्तर पर बैठ गयी और मेरे लंड को पकड़ कर सहलाते हुए बोली, “तेरा लंड शाहजी से थोड़ा छोटा ज़रूर है मगर तेरी उम्र के हिसाब से बड़ा ही है और हर लड़की को चुदाई का पूरा मज़ा देने के क़ाबिल है, देख लेना एक दो साल मे तेरा लंड शाहजी से भी
बर्डा और मोटा हो जाएगा फिर जो भी एक बार तुझ से चुदवा ले गी वो तेरी दीवानी हो जाएगी.”

मैने कोई जवाब नही दिया क्यूंकी मम्मी ने जब लंड सहलाना शुरू किया तो मुझे ऐसा लगा कि मैं हवा मे उड़ रहा हूँ और लज़्ज़त से मेरी आँखें बंद होने लगीं और बे-इख्तियार हाथ बढ़ा कर मम्मी के एक मम्मे को पकड़ कर दबाते हुए बोला, “ऊऊफ्फ मम्मी बहुत मज़ा आ रहा है बस
दिल चाहता है कि इसी तरह आप मेरे लंड को सहलाती रहे.”

पहली बार जब शाहजी ने मम्मी को चोदा था और मम्मी ने जिस तरह अपनी सब शरम को भूल कर शाहजी का साथ दे कर भरपूर तरीक़े से चुदाया था उसी दिन चुदाई मे उनकी दीवानगी को देख कर समझ गया था कि वो सेक्स की भूकी और बे-इंतेहा गरम औरत हैं. अब जब उनके हाथ मे मेरा लंड था और चुदाई की बातें हो रही थी तो वो गरम कैसे नही होती. यक़ीनन वो बहुत गरम हो चुकी थी क्यूंकी जैसे ही मैने
उनके मम्मो को पकड़ कर दबाना शुरू किया वो एक सिसकी ले कर मेरा हाथ पकड़ कर अपने मम्मों से हटा दिया और और अपनी क़मीज़ को ऊपर करके ब्रा को नीचे ला कर अपने मम्मों को नंगा करके दोबारा मेरे हाथ को पकड़ कर अपने मम्मो पर रखते हुए बोली, “ऊऊफफफ्फ़ श…श…शहाब लो अब ठीक से मसल डालो मेरी छाती को.”

मैं फ़ौरन उनके निपल को दो उंगलिओ के बीच ला कर दबाने लगा और मुट्ठी मे उनकी चुचि को पकड़ कर दबाता हुआ बोला, “म्‍म्म्मम्मी ऊऊफ़फ्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है, अगर आप मेरे लंड को चूस लेंगी तो और मज़ा आएगा.”
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09-05-2020, 02:09 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
मैं फ़ौरन उनके निपल को दो उंगलिओ के बीच ला कर दबाने लगा और मुट्ठी मे उनकी चुचि को पकड़ कर दबाता हुआ बोला, “म्‍म्म्मम्मी ऊऊफ़फ्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है, अगर आप मेरे लंड को चूस लेंगी तो और मज़ा आएगा.”

मेरी बात सुन कर मम्मी ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड को सहलाते हुए बोली, “ज़्यादा फैलने की कोशिश मत करो, जो कर रही हूँ इतना भी बहुत है, हाँ अगर तू बेटा नही होता तो तेरे खूबसूरत लंड को खूब चुस्ती और दिन रात तुझ से चुदवाती, अब कल तक सबर करले फिर अपनी बहन
से अपने लंड को दिल भरके चुस्वा लेना.” यह कहते हुए मम्मी ज़ोर ज़ोर से मूठ मारने लगीं.

मैं जज़्बात की इंतेहा को पहुँचा हुआ था इसलिए और नही टिक सका, मम्मी के दो चार ज़ोरदार झटको ही मे झड गया.

थोड़ी देर मे मेरे उठने के बाद मम्मी ने बिस्तर के चादर को बदला फिर हम दोनो वापस टीवी लाउंज मे आकर बैठ गये. मैं मम्मी से चिपक
कर बैठ गया और उन से पूछा. “मम्मी उस दिन मेरे दुकान जाने के बाद शाहजी कब गया ?”

“ओह उस दिन क़िस्मत अच्छी थी कि हम बाल बाल बच गये, क्यूंकी इधर शाहजी पिछले दरवाज़े से निकला ही था कि तुम लोग आ गये अगर
पाँच मिनिट भी देर हो जाती तो हम रंगे हाथो पकड़े जाते.” मम्मी उस दिन को याद करके काँप गई.

“शूकर है कि बच गयी, आप जब चुदवाती हैं तो आप को सिवाए चुदाई के कुछ याद नही रहता है, वैसे उस दिन कितनी बात चुदवाया.”

“तेरे जाने के बाद चुदाई तो सिर्फ़ एक बार और ही हुई, बस हम दोनो एक दूसरे से लिपट कर लेटे हुए बातें करते रहे और बातों मे वक़्त गुज़रने का पता ही नही चला. मम्मी ने यह कह कर मेरी तरफ तिरछी नज़र से देखा और सर हिलाते हुए मुस्कुरा कर कहने लगीं. “उस दिन शाहजी ने शुरू से आख़िर तक तेरे बारे मे सब कुछ बता दिया कि तूने अपनी कंवारी बहन को शाहजी के पास ले जा कर कितने पैसे मे उसे शाहजी से चुदवाया, फिर उसके दोस्तों से कितने पैसे नजमा की चुदाइ के लिए और हर बार उसकी चुदाई के कितने पैसे लेता है, फिर मुझे
शाहजी से चुदाने का प्लान बना कर किस तरह और कितने पैसे मे मुझे शाहजी से चुदवा दिया……..” शाहजी ने मम्मी को ए टू ज़ेड सब कुछ बता दिया था और तो और वो करमू के बारे मे भी डीटेल से सब कुछ बताया था, अब मम्मी सब कुछ दोहरा कर बोली. “अब तू खुद
बोल कि क्या तूने अपनी माँ और बेहन को पैसे की ललाच मे किसी रंडी की तरह चुदवा कर ठीक किया ?”

जवाब देने से पहले मैने घड़ी (वॉल क्लॉक) की तरफ देखा, सब को पार्क गये हुए अभी तो 1 ½ घंटे से भी कम हुआ था जबकि मैं समझ रहा था उनको गये हुए 2 ½ 3 घंटा तो गुज़र ही चुका हो गा और अब वो आने वाले होंगे , क्यूंकी वो सब पार्क से 2 ½ 3 घंटे से पहले वापस नही आते थे. घड़ी देख कर मुझे इतमीनान हो गया कि हमारे पास अभी भी बातें करने का वक़्त है. मम्मी की बातें सुन कर मुझे शाहजी पर बहुत गुस्सा आ रहा था क्यूंकी मुझे बिल्कुल उम्मीद नही थी कि वो मम्मी को हर बात बताएगा, मैं अपने सर को खुजलाता हुए सोचा कि चलो अच्छा है कि मम्मी को हर बात का पता चल गया, फिर मैने मम्मी को शुरू से आख़िर तक के सब हालात बिल्कुल सच सच बता कर बोला. “मम्मी
नजमा को तो चुदना ही था अब अगर इस चुदाई के बदले चुदाई के मज़े के साथ साथ अपना कुछ फ़ायदा कर लिया तो क्या बुरा किया, अब रही आप की बात तो जब मुझे मालूम हुआ कि आप इस भरपूर जवानी मे सालों से चुदाई के लिए तरस रही हैं और आप को चोदने वाला कोई नही है तो सोचा आप मुझ से तो चुदवायेन्गी नही तो मेरे सामने सिर्फ़ शाहजी था इसी लिए मैं शाहजी को सब कुछ बता कर उसे आप
को चोदने के लिए राज़ी कर लिया क्यूंकी मैं खुद आप को तो नही चोद सकता था, अब खुद सोचिए कि मैने आप का कितना बड़ा मसला
हल कर दिया अब अगर इस के बदले कुछ पैसे ले रहा हूँ तो इस मे क्या बुराई है.”
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09-05-2020, 02:09 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
“मुझे नही मालूम था कि तू इस तरह की बातें भी कर सकता है, तुझे तो बातों का जादूगर कहना चाहिए. चल ठीक है तूने जो कुछ किया वो तो हो गया मुझे सिर्फ़ यह शिकयात है कि तूने मेरा बहुत कम दाम लगाया क्या मैं तुझे इतनी सस्ती नज़र आती हूँ ? और नजमा वो तो बहुत कमसिन, खूबसूरत और कंवारी थी और तूने सिर्फ़ चन्द सौ मे उसके कंवारे पन को बेच दिया. खैर अब एक बात कान खोल कर सून ले वो
यह कि तू कभी भी मुझे या नजमा को अपने भडवे दोस्त करमू के ज़रिए रंडी बना कर चुदवाने के लिए अरबी शेखो के पास भेजने के बारे मे सोचना भी नही.” मम्मी मेरे गाल को चुटकी मे दबा कर मुस्कुरा कर बोली.

जवाब मे मैने ज़ोर से मम्मी की निपल को मसल्ते हुए बोला, “फिकर मत करें मैने इस बारे मे सोचा भी नही है.” यह कह कर मैं थोड़ा रुका फिर मम्मी से पूछा. “आप इतनी जल्दी फ्री हो कर मुझ से खुल जाएँगी यह मैने कभी सोचा भी नही था जबकि नजमा को फ्री होते होते महीनो लग गये.”

मम्मी ने मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा और कहने लगीं. “नजमा बहुत कम उम्र की कंवारी लड़की थी और उसके लिए यह सब चीज़ें बिल्कुल नयी थी उसके आसानी से जल्दी फ्री ना होने की सब से बड़ी वजह भाई बेहन का रिश्ता था, अगर तुम दोनो भाई बेहन नही होते तो वो बहुत जल्द फ्री होजाति, रही बात मेरी तो जब मैने देखा कि अब तुम से छुपाने, सिमटने और शरमाने के लिए कुछ भी बाक़ी नही बचा तो मैने सोचा कि अब नज़रें चुराने और झिझकने से क्या फ़ायदा अब आगे जो होता है खुल कर हो और हम सब सब रिश्ते को भूल कर एक दोस्त की तरह जवानी का खुल कर मज़ा लिया करें, बस खुद ही देख लो कि मैं बिल्कुल खुल गयी.”
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09-05-2020, 02:09 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
mammi bistar ke chaadar se apna chehra our sina saaf karte hue mujh se boli. “dekho shahab ab tak jo kuch hogaya yeh sab bhi nahi hona chaahiye tha magar ab to ho hi gaya hai, ek baat yaad rakhna aage isse jyada our kuch na ho, mera matlab yeh hai ke tum kabhi mujhe chodane ka sochna bhi nahi yeh main kabhi na to bardaasht karungi na hi hone dungi samjhe. tum beshak najma ko jab our jis tarah chaaho chodo main nahi rokungi balki lahore se aane ke baad kisi na kisi tarah tum dono ki chudayi ka raasta nikal lungi. ek baat our wo yeh ke maine notice kia hai ke too apni dono bhabhion ke chakkar me hai, dekh main tujhe abhi se samjha rahi hoon ke too un dono me se kisi ko chodane ki koshish bhi mat karna, wo dono bahut alag qism ki hain our tera koi bhi galat qadam ham sab ko marwa dega.”

mammi ki baat sun kar main apne our mammi ki chudayi wali baat par to kuch nahi bol saka magar bhabhi wali baat par bola, “mammi dono bhabhi itni khoobsurat hain ke unhen dekh kar mera lund khudbakhud khada ho jata hai kia karoon, phir bhi main wadaa karta hoon ke main oon dono ko kabhi chodane ki koshish nahi karungaa bas aap kisi tarah mujhe dono ko kam se kam nanga hi dekh lene ka koi raasta paida kar den.”

mammi meri baat sun kar chup chaap thodi der kuch sochti rahe phir meri taraf dekh kar muskuraate hue boli, “tum bahut hi kamine hogaye ho, khair tumhari yeh khwaahish kisi na kisi tarah main poora karwaane ki koshish karungi.”

shahji ke aane ke baad mammi bath room chali gayi. maine waqt dekha to yaad aaya ke mujhe dukan jana hai. papa ke dar se main fauran kapde badal kar taiyaar hogaya our mammi ke bathroom se wapas aane ke baad UNSE keh kar dukan ke liye rawana hogaya. shahji mere jane ke baad vahin ruka raha kyunki wo our mammi ek baar our chudayi ka mazaa lena chahtee thee.

programe ke mutabiq sab lahore ke liye chale gaye, ghar me sirf main our nani jaan rah gayi. jis din sab lahore gaye usi din main madhubaalaa ki film mughal-e-azam our half ticket ki vdo casset le kar aa gaya our bhabhi ke vcr our unke kamre ka 18 inch ka color tv la kar apne kamre me movie dekhne ke liye laga diya. raat ko nani jan ke soone ke baad movie dekhna shuru kia. movie me madhubaalaa ko dekh kar main itna hairaan hua ke kia kahoon, mujhe to aisa lag raha tha ki movie me madhubaalaa nahi balki mammi hain, dono me koi faraq nahi tha our mujhe logon ki baaton par yaqin aa raha tha jo wo mammi ke baare me kehte the. phir yeh silsila chal pada main roz madhubaalaa ki filme la la kar dekhne laga. movie me madhubaalaa ke hushrooba dance uski adaayen jab dekhta to mujh par ek nasha taari ho jata our mera haath khud bakhud mere lund par pahunch kar mere lund ko sahlaana shuru kar deta our tasawwar me mammi ka nanga jism UNKI khobsoorat choot our UNKI gaanD nazar aane lagti. insab baaton ne mujhe mammi ke ishq me mubtula kar diya our main mammi ki mohabbat me deewaana sa hogaya our mammi mujhe meri maa ki jagah mujhe meri mahbooba nazar aane lagi.

insab baaton ke saath saath main rozana sobah dukan jaane laga tha our hamare munshi ji (manager) jo papa ke paas mere paida hone se pahle hi se kam karte the mujhe business our kam ke baare me batana our sikhana our maine poori dilchaspi ke saath sikhna shuru kar diya tha…
sab ko lahore gaye hue ek hafta guzar gaya, papa roz dukan par phone karke munshiji se sab report zaroor lete. munshi ji se khaas taur par mere baare me zaroor poochte, chunki main papa ke jane ke baad poora waqt dukan pe rah kar munshi ji se pooch pooch kar dilchaspi our mehnat ke saath sab kuch seekh our samajh raha tha isliye munshi ji papa se meri khoob taareef karte jis ki wajah se papa mujh se bahut khush the. jab papa ne dekha ke main ab poori zimmedari se kam me dilchaspi le raha hoon to waapsi ke programe ko extend kar ke *****abad our murre jane ka programe bana kar phone par mujhe bata diya.

chunki abhi mere paas driving licence nahi tha isliye papa ne car ko iss dar se safdar uncle ke ghar rakhwa diya tha taki main chalaa na sakoon. main roj 5c ke bus se aata our jataa tha jo hamare ghar ke paas hi se chalti thi our bikul dukan ke saamne utarti thi.. saturday ko ham dukan 3 baje band kar diya karte the our sunday ko chutti. wo saturday ka din tha dukan band karke main paidal hi sadar bazar ki taraf chal padaa taki wahaan ladkiyon ko dekh kar thoda masti maze kar ke ghar jaaoon. ek deDH gante sadar me idhar udhar ghoomta raha phir footpath par secondhand book bechne waale ke paas rok kar filmi magazine our digest dekhne laga our chaand kitaben khareed kar wapas jaane hi wala tha ki meri nazar ek aisi kitab par padi jiska cover page bhi phata hua tha our uske gale hue papar ko dekh kar saaf maaloom hota tha ki yeh koi bahut hi poorani kitab hai. uske pahle page par sirf yeh likha tha, “qadimi (old) nushkhoo (formula) ka khazaana jo aap ki zindagi badal sakti hai”
is sentence ne mujhe iskitab ko lene par majboor kar diya, chunki main chand kitaben khareed chuka tha isliye kitab waale ne wo kitab mujhe muft dedi.

ghar aa kar sab kitaben ek taraf rakha our shaawar lene ke baad so gaya. 8 baje utha to dinner taiyaar tha, maine our nanijan ne saath hi dinner liya phir main kal ke laaye hue movie ko le kar ghar se nikal kar pahle movie wapas ki phir madhubaalaa ki dusri movie le kar pahle ghar par rakha phir shahji ki taraf gaya. sab ke lahore jaane ke baad main rojana dinner ke baad shahji ke paas zaroor jata. jahan ham dono mammi our najma ki chudayi ki baaten karte phir main shahji se gaanD marwa kar wapas aa jata. dusre din chunki sunday tha our chutti thi isliye main der tak shahji ke paas raha. shahji ke paas rasheed, zahid our shareef bhi aaye hue the our tinon baithe hue sharab pi rahe the. wo tinon mujhe dekh kar bahut khush hogayee our mammi ki wapsi ke baare me poochne lage. in tinon ne mammi ko abhi tak nahi dekha tha magar shahji ki zabani unke husn ki taareef sun kar wo tino mammi ko chodane ke liye pagal ho rahe the. maine unke waapsi ke programe ke baare me bata diya. maine bhi unke saath thoda pi kar charon se gaanD marwa kar wapas aa gaya. naani so chuken thi, mujh par sharab ka khumaar chadha hua tha main kamra band karke apne kapde utar kar nanga hogaya our madhubaalaa ki laai huyi film “boy frid” laga kar dekhne laga. roz ki tarah film to madubala ki chal rahi thi magar mere tassawar me madubala ki jagahh mammi ko dekh raha tha our dekhte hue aahista aahista muth mar raha tha. film ke khatam hone tak main do baar muth mar kar jhaD chuka tha. jab se madhubaalaa ki film dekhni shuru ki thi din raat uthte baithte chalte phirte har waqt mere dil dimaag par mammi hi hooten. shahji ko maine madubala ki film dekhne ke baare kuch nahi bataya tha our na hi use apne dil ki haalat batana chahta tha. meri raazdar sirf najma thi main use kuch nahi chupata our ab be-chaini se use sab kuch batane ke liye uski waapsi ka intzaar kar raha tha.

main paani pi kar soone ke liye let gaya, chaar chaar logon se gaanD marwa kar meri gaanD me bahut jalaan our takleef ho rahi thi our do baar muth maar kar main bilkul dhila ho chuka tha. main bahut der tak karwat leta raha kyunki neend nahi aa rahi thi, jab bahut der tak neend nahi aai to aaj khareede hue kitaboon ko le kar baith gaya our bagair naam waali phati huyi poorani kitab ko dekhne laga ke aakhir yeh kis qism ki kitab hai. yeh kitab ek hakimi (ayurvedic) kitab thi jis me mard our ourtoon ke sex ki bimaari our kamjori ke bade bataya gaya tha our elaaj ke liye jaari booti se dawa banane ka formule likh kar explaine kia gaya tha. poore kitab me khas kar teen (3) cheezen mujhe apne kam ki lagi. pehla lund ko mota, bara our taqatwar banane ke medicine ka taiqa, dusra sex ke power ka badhana our lambi umr tak sex ke taaqat ko qayam rakhna, teesra khuli huyi choot ko kanwari ladki ki tarah tight karna. ise maine najma ke liye yeh soch kar chona tha ki chudawa chudawa kar uski choot bahut khul gayi hai kahen suhaag raat me uske shauhar ko shak na ho jaae isliye agar iss dawa se uski choot tight ho jaati hai to isse achi our kia baat ho sakti hai. main sab ko banane ka tariqa likh liya our faisla kia ke monday ko sab chijon ka intezaam kar ke dawa bana kar istemaal karna shuru kar dungaa.

faisle ke motabiq monday ko sab jaari booti ka intezam kar ke dawa banana shuru kar diya. dawa banana mushkil nahi tha magar lund ko bara karne our taqat badhane ki dawa banane me chaar paanch ghante lag gaaye magar dawa ban hi gaya. chunki choot ko tight banane ke liye kisi dawa ke banane ki zaroorat nahi thi iske liye ladki ko 15/20 din tak rozana teen se chaar baar apni choot ko fitkiri (alum) ke paani se choot ke andar tak 10 minute taah dhona tha isse choot khud bakhud bilkul kawari ladki ki choot ki tarah tight ho jaati sirf shart yeh thi ke is beech chudayi nahi kia jaaye.

roj ki routine ki tarah din guzarne laga maine banai huyi dawa ko istemaal karna shuru kar diya tha. iski khaas baat yeh thi ke iske istemaal ke beech chudayi se mana nahi kia gaya tha.

dasween (10th.) din mujhe dukan pahnche hue ghanta hi hua tha ki papa ka phone aaya ke sab abhi abhi wapas ghar pahunch chuke hain. iss khabar ko sun kar main khushi se uchhal pada our khas kar mammi ko dekhne ke liye be-chain hogaya. thodi der to dusre city me maal bhejne ke liye invoice banate hue waqt guzara phir mujh se raha nahi gaya to main munshi ji ko bata kar ghar ke liye chal pada. ghar pahuncha to us waqt din ke 3 baje the our sab log lunch kha rahe the. mujhe dekh kar papa naraaz to nahi hue sirf itna kaha, “tum se raha nahi gaya our dukan chod kar aa gaye.” khane ke baad papa safdar uncle ke yahan car lene gaye our kah gaye ke wo car le kar dukan jaayenge phir dukan band karke hi wapas aayen ge. chacha bhi papa ke saath hi chale gaye. chunki wo sab train ke 1st claas ac me bade aaram se safaar kar ke aaye the isliye kisi ko safar ki thakawat nahi thi. papa ke jaane ke baad ham sab tv lounge me baith gaye. main baar baar chod nazaron se mammi ko dekhte hue oon sab ke iss tour ki kahani soon raha tha. mammi ko dekhte hue paint me mera lund khud bakhud taan gaya tha our aaj mammi mujhe bilkul mukhtalif our bahut aachi lag rahi thi. batonmen waqt guzarne ka ahsaas hi nahi hua our 5 baj gaye to najma sab ke liye chae bana kar le aai. chae ke khatam hote hi charon bache park jane ke liye zid karne lage to nani jaan our chaachi sab bachooko le kar park chali gai our jaate jaate najma ke laakh mana karne ke bawajood use bhi saath legayi.

sab ke jaate hi mammi ne kaha “shab jaldi se darwaaza band karke aaoo ek bahut zaroori baat karna hai.” wo bahut dari huyi our pareshan lag rahi thi….
main UNKI pareshani, dar our ghabrahat ko dekh kar khud pareshan hogaya our dil me tarah tarah ke khyaal aane laga, main fauran bahar ke sab darwaze ko andar se lock kar ke wapas aa kar mammi ke baraabar sofe par baith gaya our fikarmand our ooljhe hue lehje me poocha, “mammi sab theek to hai na, aap bahut pareshan lag rahi hain.”

“shahab ghazab hogaya main pregnant hogayi hoon kyunki mere mahine ki taarekh ko guzre hue hafte se jyadah hogaya our mera mahina nahi hua. tere papa to mujhe chodte nahi hain phir kia jawab dungi ke mere pet me bach-chaa kahan se aa gaya.

yeh bahut badi baat thi our mammi ka khauf our pareshani ghalat nahi thi, magar mujhe iss khabar ko sun kar koi pareshani nahi huyi kyunki main jaanta tha ki shahji ke paas iski aisi khas dawa hai jis ke khaane se do mahine ki pregnant ourat ka bach-cha bhi gir jaata hai. main bahut mutmaeen lehje me mammi ko tassaali deta hua bola. “itne maamooli baar par pareshaan ho ne ki zaroorat nahi hai.kyunki shahji ke paas iss cheez ki khaas dawaa hai jis ke khaate hi aap ka ruka hua mahina fauran shuru ho jaae ga. main aaj hi ja kar use dawaa le aaungaa aap raat ko soone se pahle kha leejye ga phir subah tak aap ka mahina shuru ho kar aap ki pareshani ko khatam kar dega.

meri baat sun kar mammi ke chehre par thoda sakoon to phail gaya magar phir bhi shak bhare lehje me boli. “tum ko yaqeen hai ke shahji ki dawaa theek kam kare ga.”

“hundred parcent kam kare ga aazmaya hua dawa hai, ab aap apne baare me fikar karna chod den our meri fikr karen kyunki bagair chudayi ke main pagal ho raha hoon.” yeh kehte hue main ek haath se mammi ki raan ko sahlaane laga our dusre haath se paint ki zip ko niche kar ke apne lund ko jo ab kisi naag ki tarah phanphana raha tha bahar nikal kar sahlaate hue bola.
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09-05-2020, 02:10 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
meri dawaa wali baat par mammi ko poora yaqeen aa gaya tha our ab unke chehre se pareshaani khatam hogayi thi kyunki wo meri baat sun kar muskuraate hue mere lund dekh kar kehne lagin. “mujhe teri haalat ka ahsaas hai, isliye socha hai ke kal jab teri naani ghar jaaen gi to ham sab bhi unke saath chale jaayen kyunki lahore our *****abad se tere maamoon our mammaani ke liye jo tuhfe laaen hain use main khud apne haath se oon ko doon. tere papa se kahungi ke subah dukan jaate hue ham sab ko amma ke ghar chod den our sham ko aate hue hamen le kar aa jaaen. main najma ko yahen ghar par chod jaaungee our tere papa se kah kar kal teri bhi chutti karwa doongi. ab kal din bhar najma tere paas ho gi too dik khol kar use chod lena our agar chaahe to shahji ko bhi bolwa lena wo bechara bhi chudayi ke liye taras raha hoga.”

mammi ki baat sun kar main khush hogaya our mammi ke haath ko pakad kar apne lund par rakhta hua bola, “kal jo hoga wo kal hoga abhi main pagal ho raha hoon isliye abhi aap apne haath se mera muth mar kar mujhe thanda to kar den.” itne dinoo madhubaalaa ki filme dekh dekh kar uske husn our adaaoon ne mujhe uska diwana banadiya tha chunki mammi bilkul hoobahoo madhubaalaa thi our mere paas thi shayad isi liye main mammi se ishq karne laga tha our oonko chodane ki khwaahish mere dil our dimaag par poori tarah qabza kar chuka tha. film dekhte hue apne lund ko sahlaata hua yahi sochta rahta ke mammi ne to bilkul saaf saaf kah diya hai ke main kabhi bhi oonko chodane ki koshish to door ki baat hai oonko chodane ke baare me sochon bhi nahi.phir oonko kaise chod sakungaa ? bahut sochne ke baad yehi ek raasta samajh me aaya ke jo tariqa najma par aazma kar usko chudayi ke liye raazi kia tha bilku wahi tariqa mammi par bhi aazmaaungaa our jab bhi mouka milega main UNSE bilkul naangi naangi baaten karungaa, kabhi unke mammoon ko pakad lungaa, kabhi UNKI choot ko sahlaaungaa our unke haath ko pakad kar apne lund par rakh doonga, iss tarah se aahista aahista unka brain wash karna hoga to ho sakta hai ke kabhi koi ek lamha aisa aajaaye ke wo jazbaat se be-qaboo ho kkar mujh se chudawa len, bas ek baar chudayi ho jaae phir to yeh silsils chal padega. isi liye main unke haath ko pakad kar apne lund par rakh kar UNSE muth maarne ke liye kah raha tha.

meri baat sun kar mammi jo ab mere lund ko dekh rahi thi ekdam khap se mere lund pakad kar dabate hue hans kar boli, “tum apni maa se muth marne ke liye kah rahe ho tumhen sharram nahi aati.”

“ooff mammi main chudawaane ke liye to nahi kah raha hoon sirf muth marne ki hi to baat hai fir sharam kaisi waise bhi aap us din mera muth mar chuki hain fir aaj kyun nahi, please mammi, our waise bhi ab aap ne jab mere lund ko pakad hi liya hai to ab muth maar kar is bahen chod lund ko thanda kar hi den.” main pahle bhi mammi se nangi our chudayi ki baat karta tha magar aaj our pahle me farak yeh tha ki us waqt jab shahji mammi ko chod raha hota tha our mammi chudayi ke nashe me doobi maze le kar chudawa rahi hoti thi magar aaj teesra kooi nahi tha sirf ham dono the our main dekhna chahta tha ki aakele me iss tarah ke baat karne se mammi kis tarah ka act karti hain taki unke act ko saamne rakh kar future me oonko chodane ka kooi plan bana sakoon.

mammi mere lund ko sahlaate hue dusre haath se mere gaal ko chootki lete hue muskuraate hue boli. “tum bahut ziddi ho maano ge nahi, theek hai tumhare lund ki garmi nikal hi doon taki tuhara dimaag bhi thanda ho jaae, magar yahan nahi kyunki tuhare lund se nikla hua paani tv lounge ke carpet par gir kar apni nishaani chod dega our jab sab aa kar yahaan baithi ge to sab dekh kar maaloom nahi kia kuch sochne lagin, isliye mere kamre me chaloo.”

mammi ki baat sun kar our unke positive act ko dekh kar main dil hi dil me khushi se uchhal pada our mujhe yaqeen hone laga ke kisi na kisi din mummi mujh se zaroor chudawa len gi. main jaldi se khada hogaya mere khade hote hi mammi bhi mere lund ko chod kar khadee hogaaen. ham dono saath saath mammi ke kamre ki taraf jaane lage, chalte hue maine kaha, “mammi meri nazar me aap duniya ki sab se khubsoorat aurat hain main sirf aapke chehre ki khubsoorti ki baat nahi kar raha hoon balki aap poori ki poori husn our jamaal ka ek shahkar hain.”

iss waqt tak ham kamre ke darwaaze tak pahunch chuke the our kamre me ghusne hi waale the ke mammi meri baat sun kar ruk gayi our mera lund jo abhi tak paint ki zip se bahar nikla hua oopar niche jhatke le raha tha use pakad kar halke halke dabate hue hans kar boli. “tere iss lund ko thanda karne ke liye hi to kamre me le ja rahi hoon isliye ab itna makhaan lagane ki zaroorat nahi hai.”

mammi ki baat sun kar main ekdam unke ko pakad liya our halke halke dabata hua bola, “main makhaan nahi laga raha hoon, sach kehta hoon aap ki chaatiyaan tani huyi, khubsoorat our sakht hain jaise kisi ne ise hath bhi nahi lagaya ho,” yeh keh kar main apna haath kapde ke oopar hi se UNKI choot par rakh kar sahlaate hue kaha, “aap ki choti si phooli huyi resham ki tarah naram nazuk choot ko dekh kar yahi lagta hai ke abi tak iss choot ne kisi lund ki shakal bhi nahi dekhi hai,” yeh keh kar main apna haath onki shotar par rakh kar kapde ke oopar hi se UNKI gaanD ke surakh ko ungli se sahlaata hua bola, “aapke gaanD ki kia taareef karoon use dekh kar bas dil yahi chahta hai ke aap ki dono chutdon ko cheer kar aapke gaanD ke surakh ko zabaan se sahlaaya jaaye, chaata jaaye our gaanD me zabaan ghusa kar zabaan se aap ki gaanD maari jaaye.”

us din pehli baar mujhe andazaa hua ke meri batonmen ek aisa jaadoo hai jo ladkiyon ke dil me utar kar uske jazbaat ko baarood ka dher bana sakti hai. maine uska asar mammi par dekha kyunki unhone mere haath ko pakad kar mujhe rokne ki koshish nahi ki our chup chaap khadee meri baaton ko sunate hue mere lund ko zor zor se sahlaana shuru kar diya our unke munh se lazzat bhari halki halki siskari bhi nikalne lagi thi saath saath unke aankhon me jazbaat ki laali bhi utar aai thi. meri baat sun kar wo meri taraf dekhne lagin our halki aawaaz me boli. “ab bas kar too mujhe pagal bana dega.” yeh kah kar woo mere lund ko chod kar kamre ke andar chali gayi.

main bhi unke piche kamre me gaya our jaldi se apne paint our underwear ko utar kar bistar par chit let kar mammi ki taraf dekh jo bistar ke paas khadee mujhe dekh rahi thi…
mammi aage aa kar bistar par baith gayi our mere lund ko pakad kar sahlaate hue boli, “tera lund shahji se thoda chota zaroor hai magar tere umr ke hisab se baraa hi hai our har ladki ko chudayi ka poora mazaa dene ke qabil hai, dekh lena ek do saal me tera lund shahji se bhi baraa our mota ho jaayega phir jo bhi ek baar tujh se chudawa le gi wo teri diwaani ho jaayegi.”

maine koi jawab nahi diya kyunki mammi ne jab lund sahlaana shuru kia to mujhe aisa laga ke main hawaa me oor raha hoon our lazzaat se meri aankhen band hone lagin our be-ikhteyaar haath badha kar mammi ke ek mamme ko pakad kar dabate hue bola, “ooooff mammi bahut mazaa aa raha hai bas dil chahta hai ke isi tarah aap mere lund ko sahlaati rahe.”

pehli baar jab shahji ne mammi ko choda tha our mammi ne jis tarah apne sab sharam ko bhool kar shahji ka saath de kar bharpoor tariqe se chuaya tha usi din chudayi me UNKI diwaangi ko dekh kar samajh gaya tha ki wo sex ki bhuski our be-inteha garam ourat hain. ab jab unke haath me mera lund tha our chudayi ki baaten ho rahi thi to wo garam kaise nahi hooten. yaqinan wo bahut garam ho chuki thi kyunki jaise hi maine unke mammoon ko pakad kar dabana shuru kia wo ek siski le kar mara haath pakad kar apne mammoon se hata diya our our apni qameez ko oopar karke bra ko niche la kar apne mammon ko nanga karke dobara mere haath ko pakad kar apne mammoon par rakhte hue boli, “ooooffff sh…sh…shahab lo ab theek se masal daalo meri chaati ko.”

main fauran unke nipple ko do unglioon ke beech la kar dabane laga our mutthi me UNKI chaati ko pakad kar dabata hua bola, “mmmmammi oooofff bahut maza aa raha hai, agar aap mere lund ko chus lengi to our maza aayega.”

meri baat sun kar mammi zor zor se mere lund ko sahlaate hue boli, “jyada phailne ki koshish mat karoo, jo kar rahi hoon itna bhi bahut hai, haan agar too beta nahi hota to tere khubsoorat lund ko khoob chusti our din raat tujh se chudawati, ab kal tak sabar karle phir apni bahan se apne lund ko dil bharke chuswalena.” yeh kehte hue mammi zor zor se muth marne lagin.

main jazbaat ki inteha ko pahuncha hua tha isliye our nahi tik saka, mammi ke do chaar zordar jhatkoon hi me jhar gaya.

thodi der me mere uthne ke baad mammi ne bistar ke chaadar ko badla phir ham dono wapas tv lounge me aakar baith gaye. main mammi se chipakad baith gaya our on se poocha. “mammi us din mere dukan jaane ke baad shahji kab gaya ?”

“oh us din qismat aachi thi ke ham baal baal bach gaye, kyunki idhar shahji pichle darwaaze se nika hi tha ki tum log aa gaye agar panch minute bhi der ho jaati to ham raange haanthoon pakre jaate.” mammi us din ko yaad karke kaanp gaaen.

“shukar karen ke bachhat hogayi, aap jab chudawai hain to aap ko siwae chudayi ke kuch yaad nahi rahta hai, waise us din kitni baat chudawaya.”

“tere jaane ke baad chudayi to sirf ek baar our hi huyi, bas ham dono ek dusre se lipat kar lete hue baaten karte rahe our batonmen waqt guzaarne ka pata hi nahi chala. mammi yeh kah kar meri taraf tirchi nazar se dekha our sal hilate hue muskura kar kehne lagin. “os din shahji ne shuru se aakhir tak tere baare me sab kuch bata dia ke tune apni kanwari bahan ko shahji ke paas le jaa kar kitne paise me use shahji se chuaya, phir uske doston se kitne paise najma ki chooai ke liye our har baar uski chudayi ke kitne paise leta hai, phir mujhe shahji se chudane ka plan bana kar kis tarah our kitne paise me mujhe shahji se chudawa diya……..” shahji ne mammi ko a to z sab kuch bata diya tha our to our wo karmoo ke baare me bhi detail se sab kuch bataya tha, ab mammi sab kuch dohra kar boli. “ab too khud bol ke kia tune apni maa our behan ko paise ki lalaach me kisi randi ki tarah chudawa kar theek kia ?”

jawab dene se pahle maine ghari (wall clock) ki taraf dekha, sab ko park gaye hue abhi to 1 ½ ghante se bhi kam hua tha jabke main samajh raha tha oonko mgayee hue 2 ½ 3 ghanta to guzaar hi chuka hoga our ab wo aane waale honge , kyunki wo sab park se 2 ½ 3 ghante se pahle waapas nahi aate the. ghari dekh kar mujhe itmenaan hogaya ke hamare paas abhi bhi baaten karne ka waqt hai. mammi ki baaten sun kar mujhe shahji par bahu ghusa aa raha tha kyunki mujhe bilkul oomeed nahi thi ke wo mammi ko har baat batae ga, main apne sar ko khujlata hue socha ke chaloo achha hai ke mammi ko har baat ka pataa chal gaya, phir maine mammi ko shuru se aakhir tak ke sab haalaat bilkul sach sach bata kar bola. “mammi najma ko to chuana hi tha ab agar iss chudayi ke badle chudayi ke maze ke saath saath apna kuch faida kar liya to kia bura kia, ab rahi aap ki baat to jab mujhe maaloom hua ke aap iss bharpoor jawaani me saaloon se chudayi ke liye taras rahi hain our aap ko chodane wala koi nahi hai to socha aap mujh se to chudawaen gi nahi to mere saamne sirf shahji tha isi liye main shahji ko sab kuch bata kar use aap ko chodane ke liye raazi kar lia kyunki main khud aap ko to nahi chod sakta tha, ab khud sochiye ke maine aap ka kitna bara masla hal diya ab agar iss ke badle kuch paise le raha hoon to iss me kia burai hai.”

“mujhe nahi maaloom tha ki too iss tarah ki baaten bhi kar sakta hai, tujhe to baaton ka jaadoogar kena chahiye. chal theek hai tune jo kuch kia wo to hogaya mujhe sirf yeh shikayaat hai ke tune mera bahut kam daam lagaya kia main tujhe itni sasti nazar aati hoon ? our najma wo to bahut kamsin, khubsoorat our kanwaari thi our tune sirf chand saoo me uske kawanre pan ko bech diya. kair ab ek baat kaan khol kar soon le wo yeh ke too kabhi bhi mujhe ya najma ko apne bharwe dost karmoo ke zariye randi bana kar chudawaane ke liye arbi shekhoon ke paas bhejne ke baare me sochna bhi nahi.” mammi mere gaal ko chootki me daba kar muskura kar boli.

jawab me maine zor se mammi ki nipple ko masalte hue bola, “fikar mat karen maine iss baare me socha bhi nahi hai.” yeh keh kar main thoda ruka phir mammi se poocha. “aap itni jaldi free ho kar mujh se khul jaaengi yeh maine kabhi socha bhi nahi tha jabke najma ko free hote hote mahinoon lag gaye.”

mammi ne muskura kar meri taraf dekha our kehne lagin. “najma bahut kam umr ki kanwaari ladki thi our uske liye yeh sab cheezen bilkul nayaa tha uske aasaani se jaldi free na hone ki sab se badi wajah bhai behan ka rishta tha, agar tum dono bhai behan nahi hote too woo bahut jald free hojaati, rahi baat meri to jab maine dekha ke ab tum se chupane, simatne our sharmaane ke liye kuch bhi baaqi nahi bachha to maine socha ke ab nazaren chodane our jhijhakne se kia faida ab aage jo hota hai khol kar ho our ham sab sab rishte ko bhool kar ek dost ki tarah jawani ka khol kar maza liya karen, bas khud hi dekh lo ke main bilkul khol gayi.”
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09-05-2020, 02:10 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
हम दोनो थोड़ी देर इसी तरह बातें करते रहे फिर जब सब वापस आ गये तो मैं मम्मी के लिए दवा लेने शाहजी की तरफ रवाना होगया. शाहजी से दवा ले कर वापस आया और मोक़ा देख कर दवा मम्मी को दे दिया. बाक़ी का पूरा वक़्त सब के साथ बैठ कर लाहोर और इधर उधर की बातों मे गुज़र गया. रात को डिन्नर के बाद जब हम सब लाउंज मे बैठ कर गप शॅप करते हुए टीवी देख रहे थे तो नींद का बहाना
करके टीवी लाउंज से निकल गया ताकि मेरी गैर मौजूदगी मे मम्मी पापा से मेरी कल की छुट्टी की बात कर लें. मैं बाहर आकर चोरी छुपे अंदर की बात सून-ने लगा. थोड़ी देर बाद मम्मी ने पापा को कल का प्रोग्राम बताया तो पापा ने कहा. “ठीक है सब को छोड़ तो दूँगा मगर एक गाड़ी मे इतने लोग कैसे जाएँ गे.”

“नजमा हमारे साथ नही जा रही है इसलिए कल शहाब को दुकान मत ले जाएँ ताकि वो नजमा के साथ घर पर ही रहे क्यूंकी दिन भर नजमा का घर मे अकेला रहना ठीक नही है. जब दोनो नही जाएँ गे तो गाड़ी मे जगह हो जाएगी” मम्मी ने पापा से कहा.

“नही उसे रोज़ दुकान जाना होगा, अगर वो बिलावजह छुट्टी करने लगे गा तो उसकी आदत खराब हो जाएगी फिर क्या वो खाक मेरे बाद
बिज़्नेस को संभाल सके गा.” पापा सॉफ सॉफ मुझे छुट्टी देने से मना कर दिया.

मम्मी ने शायद पहले ही से सब कुछ सोच रखा था इसलिए वो फ़ौरन बोलने लगीं. “आप समझते क्यूँ नही, अभी तक उस पर किसी ज़िम्मेदारी का बोझ नही था और वो अभी तक खुले सांड़ की तरह आज़ाद ज़िंदगी गुज़ारता आया है अब अगर एकदम उसे बाँध देंगे तो वो बाघी ना हो
जाए इसलिए मैं तो कहती हूँ क़ जब तक आप अमेरिका नही जाते हैं हफ्ते मे एक आध बार खुद से उसको छुट्टी दे दिया करें इस तरह
उसका दिल खुश हो जाएगा और वो दिल लगा कर काम करे गा.”

पापा के कुछ बोलने से पहले चाचा बोल पड़े. “भाय्या भाभी बिल्कुल ठीक कह रही हैं और शहाब तो बचपन ही से पागल दिमाग़ का ज़िद्दी लड़का है अगर एक बार पटरी से उतर गया तो उसे रास्ते पर लाना बहुत मुश्किल होगा.” चाचा के कहने से चाची और नानी जान भी मम्मी
और चाचा की हाँ मे हाँ मिलाने लगीं.

पापा की समझ मे शायद यह बातें आ गई थी इसलिए वो सर हिलाते हुए कहने लगे. “शायद तुम लोग ठीक कहती हो एकदम उस पर सख्ती करने से वो बिगड़ भी तो सकता है.”

मैं बाहर से सब कुछ सून रहा था और खुश था कि मम्मी ने सारे मामले को बहुत अच्छे तरीक़े से हॅंडल कर के पापा को राज़ी कर ही लिया. दूसरे दिन सुबह सब कुछ उसी तरह हुआ सब लोग पापा के साथ चले गये और घर पर सिर्फ़ मैं और नजमा रह गये. जाने से पहले जब सब लोग जाने के लिए कार पर बैठ गये तो मम्मी किसी चीज़ के भूलने का बहाना करके सब को कार मे छोड़ कर अकेली हमारे पास आ गयी और आते ही नजमा के सामने एकदम मेरे लंड को पकड़ कर हल्की आवाज़ मे मुस्कुराते हुए बोली. “आज का पूरा दिन तुम्हारे पास है अब
दिन भर खूब दिल भर के नजमा को चोद कर अपने लंड को ठंडा कर लेना, क्यूंकी फिर मालूम नही कब चुदाई का मौका मिले.” यह कह कर नजमा को देखते हुए कहने लगीं. “तू भी बहुत प्यासी है क्यूंकी बहुत दीनो से तूने भी नही चुदवाया है अब खूब अच्छे से चुदवा कर सारी
कसर पूरी कर ले.” इतना कह कर मम्मी मुस्कुराते हुए वापस चली गयी.

पिछले दिनो जो कुछ हुआ चूँकि नजमा उसमे शामिल नही थी और नही उसे कुछ बताने का मौका मिला था इसलिए उसे कुछ नही मालूम था. वो बिल्कुल नही जानती थी कि मैं और मम्मी बिकुल फ्री हो चुके हैं और मम्मी तो अब मेरा मूठ भी मारने लगी हैं और मैं उनके मम्मे वग़ैरह सब कुछ पकड़ कर मसल्ने और सहलाने लगा हूँ, अब मम्मी ने आ कर जिस तरह मेरा लंड पकड़ा और जो कुछ उन्होने बोला वो सब नजमा
को इंतेहा हैरान करने के लिए काफ़ी था, मम्मी के जाते ही वो हैरत से मूर्ति बनी मुझे देखते हुए सिर्फ़ इतना बोली. “कि..क..क्या तुम ने मम्मी को चोद लिया है ?”

“नही बिल्कुल नही चोदा है, ठहरो पहले दरवाज़ा बंद कर के आजाओ फिर तुम्हें शुरू से आख़िर तक सब कुछ बताउन्गा.” यह कह कर मैं
जा कर दरवाज़े को ठीक से बंद करके वापस आया और नजमा को बाहों ले कर पागलों की तरह उसे प्यार करना शुरू कर दिया.

“ऊओफ़ छो….छोड़ो पहले सब कुछ बताओ उसके बाद मैं चोदने दूँगी.” नजमा खुद को छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली.

मैने नजमा को छोड़ने की बजाए उसे गोद मे उठा कर कमरे की तरफ ले जाता हुआ बोला. “इस दुनिया मे सिर्फ़ तुम ही मेरी राज़दार हो अब तुम्हें नही बताउन्गा तो और किसे बताउन्गा, अभी मेरे दिमाग़ मे सिर्फ़ चुदाई है ऐसी हालत मे ठीक से बता भी नही पाउन्गा, इसलिए पहले
चोद कर गर्मी निकाल लूँ उसके बाद आराम से सब कुछ बता सकूँगा.”
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