Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
09-05-2020, 02:07 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
मैं पापा से बिल्कुल नॉर्मल लहजे मे कहा, “पापा, मैं आप को बताना भूल गया था कि कल दिन को 12; 30 की फ्लाइट से मेरा दोस्त साऊदी अरब अपने घर वालों के साथ जा रहा है क्यूंकी उसके पापा 5 साल से वही काम करते हैं अब जा कर उन्हें अपनी पूरी फॅमिली को साथ ले
जाने का वीसा मिला है, इसलिए मैं उसे सीऑफ करने एरपोर्ट जाउन्गा फिर वहाँ से सीधे दुकान आ जाउन्गा.”

मेरे नॉर्मल लहजे और टाइट बहाने से पापा को किसी क़िस्म का शक नही हुआ वो सर हिलाते हुए बोले, “ठीक है चले जाओ मगर देखो
एरपोर्ट से सीधे दुकान आना अगर इधर उधर गये तो चमड़ी ऊधेड़ दूँगा समझे.”

“नही पापा मैं सीधे दुकान ही आऊंगा.” मैने उनको यक़ीन दिलाया. बात ख़तम हो गयी और डिन्नर के बाद सब टीवी लाउंज मे बैठ कर टीवी
देखते हुए इधर उधर की बातें करने लगे, फिर आहिस्ता आहिस्ता एक एक कर के सब सोने के लिए कमरों मे चलेगये.

दूसरे दिन सुबह नाश्ते के बाद पापा सब को ले कर चलेगये. उनके जाते ही मैं मम्मी के पास गया जो टीवी लाउंज मे सोफे पर बैठी थी मैं उनके बराबर उनसे चिपक कर बैठ गया तो वो मेरी तरफ देख कर हल्की मुस्कुराहट के साथ बोली. “मैं जानती हूँ कि तू बहाने बना कर दुकान क्यूँ नही गया.”

मैं बिला झिझक उनकी रान पर हाथ रख कर बोला, “आज बहुत दिनों के बाद इतना अच्छा मौका मिला तो मैं दुकान कैसे जाता, आप शाहजी की हालत नही जानती हैं वो आप को चोदने के लिए पागल हो रहा है कल जब मैं उसके पास मिलने गया तो वो मेरी गान्ड मार कर अपने
लंड को ठंडा किया, अब मैं शाहजी के पास जा रहा हूँ और उसे लेकर आता हूँ.”

मम्मी की समझ मे यह बात आही गयी थी कि अब हमारे बीच झिझकने छुपाने और शरमाने के लिए कुछ भी बाक़ी नही बचा तो बिलवाजह झिझक कर सिमट कर मज़े को क्यूँ खराब किया जाए शायद इसी लिए वो बिलाझिझक मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली, “सिर्फ़ शाहजी क्यूँ मैं खुद चुदवाने के लिए पागल हो रही हूँ, मगर क्या करती मौका ही नही मिला, तुम थोड़ा ठहर कर शाहजी को बोलने जाना क्यूंकी मैने
दो दिन से नहाया नही है इसलिए पहले मैं शावर ले लूँ फिर तुम जा कर शाहजी को ले आना.”

“ठीक है आप जल्दी से नहा कर तैयार हो जाएँ फिर मैं शाहजी को लाने जाउन्गा और हाँ नहाने से पहले हेर रिमूवर से अपनी चूत के बाल
की सफाई भी ज़रूर कर लें क्योंकि शाहजी को बगैर बालों वाली चिकनी चूत पसंद है.” मैं उनकी चूत को सहला कर बोला.

जैसे ही मैने उनकी चूत को सहलाया था वो एकदम कंपकंपा गयी थी और हल्की सिसकारी ले कर मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी चूत से हटा कर खड़ी हो गई और लाल आँखो से मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा कर बोली, “तुम बहुत बदमाश हो गये हो.” इतना कह कर वो टीवी लाउंज
से नहाने के लिए निकल गई…

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09-05-2020, 02:07 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
जैसे ही मैने उनकी चूत को सहलाया था वो एकदम कंपकंपा गयी थी और हल्की सिसकारी ले कर मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी चूत से हटा कर खड़ी हो गई और लाल आँखो से मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा कर बोली, “तुम बहुत बदमाश हो गये हो.” इतना कह कर वो टीवी लाउंज
से नहाने के लिए निकल गई…

उनके नहा कर निकलने मे आधे घंटे से भी ज़्यादा लगा, उनके आते ही मैं शाहजी को बोलने निकल गया. रोज की तरह शाहजी अपनी दुकान पर बैठा अपने चन्द कस्टमर को समान दे रहा था, मैं चुप चाप खड़े हो कर सब के जाने का इंतज़ार करने लगा. सब के जाते ही उसे सब कुछ बता कर फ़ौरन चलने के लिए कहा. वो तो जैसे चुदाई के लिए लंड थामे तैयार बैठा था फ़ौरन दुकान के बंद होने का एक नोट लिख कर दुकान के बाहर लगाया और दुकान बंद करके मेरे साथ चल पड़ा. घर की गली मे बिल्कुल सन्नाटा था और कोई भी देखने वाला नही था, फिर
भी हम पूरी तसल्ली करने के बाद ही घर मे घुसे. मुझे मालूम था कि मम्मी अपने बेडरूम मे ही होंगी इसलिए शाहजी को लेकर सीधा उनके रूम मे गया वो वहीं अपने बिस्तर पर बैठी हमारा ही इंतज़ार कर रही थी हमे आता देख कर भागती हुई आई और शाजी से लिपट गयी
शाहजी भी उन्हें अपने बाहों मे भांच कर उनके होंठो पर अपने होंठ रखा और एक हाथ से उनके चुतड़ों को पकड़ कर उनके होंठ चूसने लगा.

शाहजी मम्मी को गोद मे उठा कर उन्हें प्यार करता हुआ बिस्तर की तरफ ले जाते हुए कहने लगा, “मेरी जान शहाब ने तुझे बताया ही हो गा कि मैं तुझे चोदने के लिए कितना पागल हो रहा था.”

“हाई जानू मैं खुद दिन रात तुम से चुदवाने के लिए तड़प रही थी अगर मेरे बस मे होता तो दिन रात तुम से चुदवाती रहती, अब आज मौका मिला है तो आज मुझे चोद चोद कर मेरी चूत फाड़ दो.” जवाब मे मम्मी मस्ती और जज़्बात मे डूबी आवाज़ मे शाहजी के चेहरे पर जगह जगह प्यार करती हुई बोली.

शाहजी मम्मी को बिस्तर पर बैठा कर उनके कपड़े उतारता हुआ कहने लगा. “मेरी रानी ज़रा तेरे ना-मर्द मियाँ को अमेरिका जाने दे फिर देखना मैं और मेरे दोस्त चोद चोद कर तेरा क्या हाल करें गे, मैने जब से अपने दोस्तों को तेरे बारे मे बताया है वो सब तुझे चोदने के लिए पागल हो रहे हैं. अभी से सुन ले मेरे दोस्तों से चुदवाने मे नखरे मत करना समझी.” शाहजी जो मम्मी को बिल्कुल नंगा कर चुका था अब अपने कपड़े उतारने लगा.

मैं बिस्तर के पास खड़ा चुप चाप सब कुछ देख रहा था और दोनो की बातें सून सुन कर अपने टनटनाए हुए लंड को सहला रहा था. मैने
मम्मी की चूत को देखा वो बिल्कुल सॉफ और चिकनी हो कर चमक रही थी उन्होने अपनी चूत के बालों को बहुत अच्छे से सॉफ किया था.
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09-05-2020, 02:08 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
मम्मी शाहजी को कपड़े उतारते हुए देख रही थी शाहजी की बात सुन कर कहने लगीं. “मेरे राजा फिकर मत करो तुम जिस-से भी कहोगे मैं
उसके लिए अपनी चूत खोल दूँगी, मुझे तो बस लंड चाहिए जो मेरी चूत मे घुस कर मेरी चूत की आग को ठंडा करता रहे.”

इतनी देर मे शाहजी अपने कपड़े उतार कर नंगा हो चुका था और मम्मी की बात को सूनता हुआ बिस्तर पर आया और लेट कर मम्मी को खैंच कर अपने ऊपर लेटता हुआ कहने लगा, “मेरी जान तेरी बात ने मेरे दिल को खुश कर दिया बस तू अपने मियाँ के जाने का इंतज़ार कर फिर देखना हम चारों दोस्त पहले शराब पिएँगे और तुझे भी पिला कर मस्त कर देंगे उसके बाद जब चुदाई शुरू हो गी तो हम चारों भी नशे
मे मस्त हो कर जब चोदना शुरू करेंगे तो तू मज़े मे पागल हो जाएगी और तू भी जब शराब के नशे मे डूब कर चुदवाये गी तो मज़े मे हमें पागल कर दे गी.”

मम्मी जो शाहजी की बात सुनते हुए अपना हाथ अंदर घुसा कर शाहजी के लंड को पकड़ कर सहलाने लगीं थी बोली. “जानू मैने कभी शराब
पीना तो दूर की बात है देखा भी नही है मगर तुम पिलाओ गे तो मैं मना कैसे कर सकती हूँ.”

मैं जो मम्मी के खूबसूरत चुतड़ों और गान्ड के सुराख को देख कर जज़्बात से बे-क़ाबू हो कर अपने कपड़े उतार कर अपने टनटनाए हुए बेक़ाबू लंड को सहला रहा था फ़ौरन बोल पड़ा, “मम्मी शाहजी ठीक कहता है कि जब आप शराब पी कर चुदायेन्गी तो आप को चुदाई का एक अनोखा ही मज़ा मिलेगा.”

मम्मी मेरी बात सुन कर अपने सर को घूमा कर मेरी तरफ देखा और मुझे लंड सहलाता देख कर कहने लगीं. “मुझ से ग़लती हो गयी मुझे नजमा को नही जाने देना चाहिए था. वो भी रहती तो तुम उसे चोदते और मैं शाहजी से चुदवा कर मज़े करती, अब मेरी और शाहजी की
चुदाई देख कर तू अपने जज़्बात को कैसे ठंडा करे गा.”

शाहजी मम्मी की बात सुन कर मम्मी को अपने ऊपर से उतारा और बैठ कर कहने लगा, “अरे हाँ हमें अपना ही ख्याल रहा और हम इस बेचारे को भूल गाए, खैर कोई बात नही इस के लंड को ठंडा करने का तरीक़ा मैं जानता हूँ,” फिर वो मम्मी को देखता हुआ बोला, “मेरी जान इस सेयेल के लंड को भी ठंडा करवा देंगे अभी हम अपनी चुदाई तो शुरू करें, अब जल्दी से मेरे लंड को चूसना शुरू कर और मैं तेरी चूत
को चूस्ता हूँ.” यह कह कर उसने मम्मी को चित लिटाया और खुद 69 की पोज़िशन मे मम्मी के ऊपर लेट कर मम्मी की चूत पर अपना मुँह
रखा और चूत को चूसने लगा.
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09-05-2020, 02:08 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
शाहजी मम्मी की बात सुन कर मम्मी को अपने ऊपर से उतारा और बैठ कर कहने लगा, “अरे हाँ हमें अपना ही ख्याल रहा और हम इस बेचारे को भूल गाए, खैर कोई बात नही इस के लंड को ठंडा करने का तरीक़ा मैं जानता हूँ,” फिर वो मम्मी को देखता हुआ बोला, “मेरी जान इस सेयेल के लंड को भी ठंडा करवा देंगे अभी हम अपनी चुदाई तो शुरू करें, अब जल्दी से मेरे लंड को चूसना शुरू कर और मैं तेरी चूत
को चूस्ता हूँ.” यह कह कर उसने मम्मी को चित लिटाया और खुद 69 की पोज़िशन मे मम्मी के ऊपर लेट कर मम्मी की चूत पर अपना मुँह
रखा और चूत को चूसने लगा.

मम्मी लज़्ज़त भरी सिसकारी ले कर शाहजी के लंड को जो उनके गाल से टकरा रहा था पकड़ कर अपने मुँह मे ले कर चूसने लगीं. मैं लज़्ज़त और बेखुदी के नशे मे ऊन दोनो को देखता हुआ अपने सब कपड़े उतार कर नंगा हो चुका था और अपने लंड को आहिस्ता आहिस्ता सहलाता हुआ शाहजी की कही हुई बात पर सोच रहा था कि आख़िर शाहजी को मुझे ठंडा करने का कौन सा तरीक़ा मालूम है, क्या वो मम्मी को चोदने के बाद मेरी गान्ड मार कर मुझे ठंडा करे गा,

इस सोच के साथ एकदम जैसे मेरे दिमाग़ मे बिजली का झटका लगा हो और बे- एख्तियार दिल ही दिल मे अपने आप से कहा, “कहीं शाहजी का मतलब यह तो नही है कि अपनी चुदाई के बाद मुझसे कहे कि मैं मम्मी को चोद कर अपने लंड की गर्मी निकाल लूँ.” यह सोचना था कि मेरे पूरे बदन मे जैसे करेंट दौड़ने लगा हो और मेरा जिस्म काँपने लगा, मेरा दिमाग़ बोझल सा हो गया और लगा कि मुझे नींद आ रही हो, मुझ पर बे-खुदी, खुमार और बे-पनाह लज़्ज़त ओ सूरूर तरी होने लगा,

मैं इसी कैफियत मे अपने लंड को एक दो बार ही ज़ोर से रगड़ा ही था कि एकदम झड गया और मेरे लंड से तेज पिचकारी की तरह पानी की धार निकल ने लगी. झड़ने के बाद मेरे जज़्बात को ठंडक मिलने की बजाए मेरी प्यास और बढ़ गयी थी. मैं आगे बढ़ कर बिस्तर के एक कोने पर बैठ गया और और दोनो को देखने लगा, दोनो ही मेरी तरफ से बे-खबर एक दूसरे की चूत और लंड को चूसने मे लगे हुए थे. थोड़ी देर मे
शाहजी मम्मी के ऊपर से उतरा और मम्मी की टाँगों के बीच बैठ गया, मम्मी फ़ौरन अपनी दोनो टाँगों को उठा कर मोड़ते हुए अपने सीने पर रख कर अपनी चूत को शाहजी के लिए खोल दिया. शाहजी बैठ कर अपने लंड को एक हाथ से पकड़ा और लंड के टोपे को मम्मी की खुली हुई चूत के सुराख पर रख कर रगड़ते हुए एक जोरदार धक्के मे आधा लंड चूत मे घुसा दिया.

जैसे ही शाहजी का लंड चूत मे घुसा मम्मी बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठी से पकड़ कर लज़्ज़त भरी सिसकारी ले कर अपनी आँखें बंद कर के बडबडाउठी, “ऊऊफ़फ्फ़ हाई मेरे राजा मैं तेरे लंड के क़ुरबान, क्या ज़बरदस्त धक्का मारा है मैं इतने दीनो से तेरे इसी धक्के के लिए
तरसी हुई थी.”

शाहजी फ़ौरन एक और धक्का मार कर अपने लंड को जड तक मम्मी की चूत मे घुसाया और मम्मी के ऊपर लेट कर मम्मी की दोनो चुचियों को मुट्ठी मे ले कर ज़ोर ज़ोर से मसलता और दबाता हुआ मम्मी के होंठ को चूमते हुए मस्ती और मज़े से डूबी हुई आवाज़ मे बोला, “मेरी जान तेरा और तेरी चूत का जवाब नही है, तू अपनी रेशम जैसी चिकनी चूत मे लंड को ले कर पूरी मस्ती मे डूबी इस तरह चुदवाती है कि मुझे मज़े मे डूबा कर पागल कर देती है.” शाहजी यह कहते हुए ज़ोरदार धक्के पर धक्का मारते हुए मम्मी को चोदने लगा.
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09-05-2020, 02:08 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
जैसे ही शाहजी ने धक्का मारना शुरू किया मम्मी अपनी दोनो टाँग उठा कर शाहजी की कमर पर रख कर शाहजी को अपनी दोनो टाँगो से जकड लिया और शाहजी के धक्के के जवाब मे खुद भी नीचे से चूतड़ उठा कर धक्का मारते हुए सिसकारी पर सिसकारी लेते हुए बोली,
“ऊऊफफफ्फ़ ऊओफफफ्फ़ जा…..जानू आ…आज ही तुम्हारे आने से पहले अपनी चूत की सफाई तुम्हारे लिए ख़ास कर किया था क्यूंकी शहाब ने बताया था कि तुमको चिकनी और बगैर बालों वाली चूत पसंद है.”

“शहाब ने तुझ से बिल्कुल ठीक कहा था, अब तुझे मेरी पसंद मालूम हो गयी है इसलिए अब हमेशा अपनी चूत को इसी तरह सॉफ रखना.” शाहजी पूरी ताक़त और रफ़्तार से धक्के पर धक्का मारते हुए किसी तेज़ रफ़्तार हयड्रोलिक पिस्टन की तरह अपने लंड को मम्मी की चूत मे घुसाता और निकालता हुआ बोला.

शाहजी इसी पोज़ मे 10 मिनिट तक मम्मी को चोदता रहा, फिर कुछ देर डॉगी स्टाइल मे चोदा आख़िर मे वो खुद बिस्तर पर चित लेट गया और मम्मी शाहजी के ऊपर आकर उसके लंड को अपनी चूत मे ले कर धक्के मारते हुए चुदवाने लगीं. मम्मी के ऊपर आजाने से मम्मी की गान्ड मेरे निगाहों के सामने थी. उनकी गान्ड के सुराख को देख कर मेरा लंड लोहे की तरह अकडा हुआ फनफना रहा था और मेरा दिल मचल रहा था कि मैं मम्मी के ऊपर सवार हो कर अपने लंड को उनकी गान्ड मे घुसा कर उनकी गान्ड मारना शुरू कर दूं. इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद मैं उनकी गान्ड मे अपने लंड को घुसाने की हिम्मत तो नही कर सका मगर जज़्बात की बेखुदी मे डूब कर बे-इख्तियार उनकी गान्ड को सहलाना शुरू कर दिया और एकदम अपनी उंगली उनकी गान्ड मे घुसा कर हिलाने लगा.

“हूओ हूओ ऊऊफफफ्फ़ ऊफ़फ्फ़ ककक्किया करते हो श…शहाब मेरी गान्ड से उंगली निकालो, हाअ हा ऊओफफफ्फ़ न्‍न्‍न्णनाही म्‍म्मत निकालो अपनी पूरी उंगली मेरी गान्ड मे अंदर तक घुसा कर हिलाओ, ब्ब्ब्बबबाहुत मज़ा आ रहा है.” जैसे ही मैने उनकी गान्ड मे उंगली घुसाई वो एकदम मना करने लगीं मगर शायद मेरे उंगली घुसाने से उन्हें बहुत ज़्यादा मज़ा आया था इसलिए वो फ़ौरन मुझे पूरी उंगली घुसाने के लिए कहने लगीं.
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09-05-2020, 02:08 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
शाहजी इसी पोज़ मे 10 मिनिट तक मम्मी को चोदता रहा, फिर कुछ देर डॉगी स्टाइल मे चोदा आख़िर मे वो खुद बिस्तर पर चित लेट गया और मम्मी शाहजी के ऊपर आकर उसके लंड को अपनी चूत मे ले कर धक्के मारते हुए चुदवाने लगीं. मम्मी के ऊपर आजाने से मम्मी की गान्ड मेरे निगाहों के सामने थी. उनकी गान्ड के सुराख को देख कर मेरा लंड लोहे की तरह अकडा हुआ फनफना रहा था और मेरा दिल मचल रहा था कि मैं मम्मी के ऊपर सवार हो कर अपने लंड को उनकी गान्ड मे घुसा कर उनकी गान्ड मारना शुरू कर दूं. इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद मैं उनकी गान्ड मे अपने लंड को घुसाने की हिम्मत तो नही कर सका मगर जज़्बात की बेखुदी मे डूब कर बे-इख्तियार उनकी गान्ड को सहलाना शुरू कर दिया और एकदम अपनी उंगली उनकी गान्ड मे घुसा कर हिलाने लगा.

“हूओ हूओ ऊऊफफफ्फ़ ऊफ़फ्फ़ ककक्किया करते हो श…शहाब मेरी गान्ड से उंगली निकालो, हाअ हा ऊओफफफ्फ़ न्‍न्‍न्णनाही म्‍म्मत निकालो अपनी पूरी उंगली मेरी गान्ड मे अंदर तक घुसा कर हिलाओ, ब्ब्ब्बबबाहुत मज़ा आ रहा है.” जैसे ही मैने उनकी गान्ड मे उंगली घुसाई वो एकदम मना करने लगीं मगर शायद मेरे उंगली घुसाने से उन्हें बहुत ज़्यादा मज़ा आया था इसलिए वो फ़ौरन मुझे पूरी उंगली घुसाने के लिए कहने लगीं.

मम्मी की बात से मुझे हौसला हुआ और मैं उनके पीछे खड़े हो कर अपनी उंगली से उनकी गान्ड मारने लगा और साथ साथ उनकी बे-दाग चुतड़ों को चूमता हुआ लज़्ज़त और बेखुदी मे डूब कर बोला, “हाई मम्मी आपकी गान्ड और चूतड़ नजमा से भी ज़्यादा खूबसूरत है.

इसी वक़्त शाहजी हांपते हुए बोला, “अबे मैं छूटने वाला हूँ तू अपनी माँ की गान्ड से उंगली निकाल कर इधर अपनी माँ के सामने आ कर खड़े होज़ा ताकि यह तेरे लंड को पकड़ कर तुझे मूठ मार कर तेरा पानी निकाल दे और तेरे साथ साथ मैं भी झड जाऊं.”

शाहजी की बात सुनते ही मैने जल्दी से मम्मी की गान्ड से अपनी उंगली निकाली और मम्मी के सामने आ कर खड़ा हो गया. यह अहसास कि मामी अपने नाज़ुक और खूबसूरत हाथ से मेरे लंड को पकड़ें गी मुझे नशा सा होने लगा था और मेरे पूरे बदन मे लज़्ज़त और शुरूर की सनसनाहट होने लगी थी. मेरा लंड बिल्कुल मम्मी की आँखों के सामने तना हुआ जज़्बात की इंतेहा को पहुँच कर खुद ब खुद ऐसे झटके ले रहा था जैसे कोई उसे पकड़ कर हिला रहा हो साथ साथ मेरे लंड से पानी के क़तरे भी निकलने लगे थे. मम्मी अपने होंठो को काटती हुई मेरे लंड को देखते हुए कुछ सोचने लगीं फिर आहिस्ता से अपने हाथ को उठा कर मेरे लंड को पकड़ लीं. जैसे ही मम्मी ने मेरे लंड को पकड़ा एक अनोखी और बे-पनाह लज़्ज़त से मैं सिसकारी पर सिसकारी लेता हुआ चीख कर बे-एख्तियार मम्मी के बालों को मुट्ठी मे पकड़ लिया,

“हूऊऊऊओ हू हााअ ऊऊऊओफफफफफफफफ्फ़,” अओए एक सेकेंड मे मेरे लंड ने पिचकारी की तरह पानी की धार पे धार निकालना शुरू कर दिया.मेरे लंड से निकलने वाली धार सीधी मम्मी के चेहरे और चुचियों पर गिरने लगी और वहाँ से शाहजी के सीने पर. मेरे झड़ते ही मम्मी भी एक लज़्ज़त भरी चीख मार कर अपनी चूत को शाहजी के लंड से दबा कर अपने चूतड़ हिलाते हुए झड़ने लगीं. मम्मी ने झड़ना शुरू ही किया था कि शाहजी मम्मी के चुतड़ों को पकड़ कर मम्मी को नीचे दबाते हुए झड़ने लगा. तीनो साथ साथ झड कर एकदम बेजान से हो गयी थे मम्मी शाहजी के ऊपर ही आँख बंद कर के ढीली हो कर लेट गयी थी, शाहजी भी ढीला होकर चुपचाप लेटा हुआ था मैं भी वही बिस्तर पर आखें बंद करके लेट चुका था. कमरे मे सिवाए हम तीनो के तेज़ तेज़ साँस लेने की आवाज़ के और कोई आवाज़ नही थी.

तक़रीबन 10 मिनिट के बाद हम तीनो एक एक कर के कसमसाते हुए उठ कर बैठ गये तो शाहजी मेरी तरफ देखता हुआ बोला, “अबे गान्डु तूने अपना पानी हम दोनो पर गिरा कर हमें गंदा कर दिया खैर मैं बाथ रूम से सॉफ करके अभी आता हूँ.” यह कह कर वो बिस्तर से उतर कर कमरे से निकल कर बाथ रूम चला गया.
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09-05-2020, 02:08 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
karmoo meri taraf dekh kar muskuraya our kehne laga, “main teri gaanD maar chuka hoon our too meri gaanD mar chuka hai isliye tujh se kia chupana isliye main tujhe sab kuch saaf saaf bata ta hoon,” yeh kah kar karmoo ek lamhe ke liye chup hua phir kehne laga, “iss kam ke liye maine 15/16 saal ke do ladkoon ko phans rakha hai our do ladkiyon ka bhi bandobast kar rakha hai. jo ladke ki gaanD marna chahta hai to main oon dono ko le ja ta hoon our kabhi kabhi khud bhi gaanD marwa leta hoon. jo ladkiyon ko chodanaa chahta hai unke liye bhi mere paas do ladkiaan hain jinhen main unke paas pahuncha deta hoon.

“yaar ladke ko phansana koi mushkil nahi magar ye bata ke do do ladkian tujhe kahaan se mil gaeen ? mujhe ladkiyon ke baare me karmoo ki kahi huyi baat par yaqeen nahi aa raha tha.

meri baat sun kar karmoo muskuraya our kehne laga, “tujh se kia parda, wo dono ladkiyaan koi our nahi meri dono choti behan hai.”

karmoo ki baat mere liye ek dhamaake se kam nahi thi, maine karmoo ki dono behnoo ko dekha tha wo bahut jyadah khubsoorat to nahi thi magar badsoorat bhi nahi thi, dono 16 our 18 saal ki thi, ek lamhe ke liye maine socha ke main bhi karmoo ko najma ke baare me bata doon magar shahji ka mashwara yad aate hi maine faisla kia ke abhi use kuch nahi bataaungaa, main sar ko jhattakta hua poocha, “mmmagar wo razi kaise hogaeen ?”

“abe yaar yeh ladkiaan jab jawan ho ti hain to UNKI choot me khujli shuru ho jati hai our wo kisi se bhi chudawaane ke liye taiyaar rahti hain, bas ek din mouka dekh kar badi wali ko pakad kar chod liya phir badi wali khud choti wali ko razi karke chudane ke liye mere paas le aai, uske baad dono ko dhandhe par lagana kaun sa mushkil kam tha.” karmoo muskurata hua bola.

main ek gehra saans le kar bola, “sale tere to maze hain chodane ke liye do do choot bhi mil gaya hai our paise bhi khoob kama raha hai.”

“yaar meri behan teri behan ki tarah khubsoorat to nahi hain magar phir bhi ek ek hazaar rupya onki chudayi ka mil jata hai. saale to bahut khushnaseeb hai ke teri bahen bahut khubsoorat hai meri maan mouka dekh kar too use chod le, ek baar chudawa le gi to baar baar chudawaane ke liye taiyaar rahe gi phir agar too kahe ga to use bhi ache paisoom me shaikoon se chudawa diya karungaa.” karmoo meri aankhon me dekhta hua bola.

karmoo ki baat sun kar main dil hi dil me socha ke iss saale ko kia pata ke main paisa le kar najma ko shahji our uske doston se chudawa raha hoon our ab to mammi ko bhi chudawaanaa shuru kar diya hai, magar use dekhane ke liye bade ghusse me bola, “behanchod kutte ki aulad tere dimaag me yeh baat aayi hi kyun, aaj to tune keh diya ab agar doobara kahe ga to randi ki aulad main tujhe zinda nahi chorungaa samjha.”

jawab me karmoo bhi mujhe gaali de kar samjhane wale lehje me bola, “bhosriwale main tera dost hoon maine tere faide ke liye kaha tha, maadarrchod too khud 10/20 rupae le kar shahji se gaanD warwa raha hai isliye maine yeh soch kar kaha tha ki too meri baat maan lega to tujh par paise ki barsaat ho jaayegi, saale teri bahen itni khubsoorat hai ke shaik log badi aasani se use chodane ke liye deDH do hazaar dedenge, ab agar teri samajh me meri baat nahi aati hai to mat kar.

maine jawab me kuch nahi kaha our ham dono khamoshi se apni chae khatam ki. thodi der me ham dono phir se normal ho kar baaten karne lage. taqriban do ghante ham dono gup shup karte rahe phir woo mujhe ghar ke paas utar kar chala gaya. uske jane ke baad maine ghari dekha to 1 ½ baj rahe the to maine socha shahji ab apni dukan band karke apne kamre me chala gaya hoga, yeh soch kar main sidha shahji ki taraf rawana hogaya kyunki mujhe karmoo ke baare me shahji ko sab kuch batane ki be-chaini ho rahi thi…
shahji ke paas pahuncha to wo khana khaa kar apne kamre me aaram kar raha tha. maine use karmoo ke baare me sab kuch tafseel se bata diya, meri sab baat sun kar wo kehne lagaa. “achha to saale ne apni dono behnoo ko dhandhe par laga diya hai.”

“haan shahji wo saala khoob maal kamaraha hai, tum bhi kisi din dono ko bolwa kar chod kar dekho to sahi kaisi hai.”

“abe saale jis ne najma our teri maan ko chod liya ho use dusri ladki se kia mazaa aayega, phir bhi kisi din dono ko chod kar zaroor dekhungaa, our haan saale too paise ka bahut laalchi hai isi liye teri bhalai ke liye tujhe samjha raha hoon ke too paise ki laalaach me apni behan our maa ko shaikhoon se chudawaane ke liye mat bhej dena warna too bahut badi musibat me phans jaayega kyunki police oon hoteloon par baraabar raid karti rehti hai our jo pakre jaate hain unke bade bade photo akhbarunmen chaap jata hai.” shahji mujhe dekhta hua bola.

waise bhi maine kisi ko shaikhoon se chudawaane ka baare me bilkul nahi socha tha isliye maine shahji ko yaqeen dilaya ke mere dimaag me aisi koi baat nahi hai.

shahji mere raan ko sahlaata hua bola, “saale main samajhta hoon ke tere ghar me abhi mehmaan hain isliye teri maa ka nikalna mushkil hai, magar najma to nikal sakti hai too use kyun nahi lata hai, yaar chudayi kiye hue bahut din hogaye hain ab mera lund be-qaboo ho raha hai.”

shahji ki baat sun kar maine use sab ke lahore jane ki baat our papa ka usa jaane ka poora plane tafseel se bata kar bola, “shahji ek do din sabar karlo phir unke lahore jane se pahle kisi na kisi tarah mammi our najma ki chudayi ka raasta nikal lungaa, phir najma ki shaadi ke baad jab papa usa chale jaayen ge to jab chaahe mammi ko chodanaa, abhi chaaho to meri gaanD maar kar apne lund ko thanda kar sakte ho.”

“saale tujhe kuch kehne ki zaroorat nahi hai, jab too aaya tha to usi waqt teri gaanD maar kar apne lund ki garmi nikalne ka soch liya tha. ab jaldi se kapde utar our aa ja.” shahji apna shalwaar utar ta hua bola.

do ghante ke baad main shahji se gaanD marwa kar ghar aa gaya to dekha ke tv lounge me chaachi, mammi, nani jaan our najma baith kar najma ki shaadi ke kaprunmen bail boote laga rahi thi. main kisi tarah mammi se akele me baat karna chahta tha magar mouka nahi mil raha tha. dono bhai bhi bhabhi ke saath apne kamre me the. chaha roj papa ke saath chale jaate our unke saath hi wapas aate. main naha dhoo kar khana khaya our apne kamre me chala gaya. ghar me sab ke hone se najma ko chodane ka kooi rasta nahi tha, dost bhi nahi mil rahe the ke UNKI gaanD hi maar sakoon isliye aajkal roj muth maar kar apne lund ko thnda karna par raha tha.

ek haafta guzar gaya, do din pahle bade bhai ka immigrant visa mil gaya tha our papa our raheem bhai ko bhi usa visa mil gaya tha. visa ka kam khatam hojane ke dusre hi din dono bhai bhabhi ke saath honeymoon ke liye rawana hogaye. papa logon ke train ki busking bhaion ke teen din ke baad thi our wo sab teesre di sham 6 baje karachi express se lahore rawana horahe the. aaj kar main roj papake saath dukan jane laga tha our sham ko unke saath hi wapas aata. us raat jab ham dinner le rahe the to UNKI baaton se maloom hua ke subah papa dukan jaate hue nani jan ko unke ghar chod te hue dukan jaaenge kyunki nani jaan ko apne ghar se kuch samaan lana tha taki sab ke lahore jane ke baad oonko hamare ghar rahte hue kisi cheez ki kami na ho, baton hi batonmen maaloom hua ke nani ke saath chaachi unke dono bache najma, kabeer our aasma bhi ja rahe hain ghar par sirf mammi rahe gi taaki wo lahore saath lejaane ke liye sab ke kapde our zaroori samaan pack kar saken. iss khabar ne mere kaan khaare kar diye auur socha kal mammi ko shahji se chudawaane ka bahut sunhara mouka hai, bas main dil hi dil me papa ke saath dukan na jaane ka raasta dhoondhne laga, aakhir ek tight bahana mere dimaag me aa gaya.

main papa se bikul normal lehje me kaha, “papa, main aap ko batana bhool gaya tha ki kal din ko 12; 30 ki flight se mera dost saudi arab apne ghar walon ke saath ja raha hai kyunki uske papa 5 saal se vahin kam karte hain ab ja kar unhen apni poori family ko saath le jane ka visa mila hai, isliye main use seaoff karne airport jaaungaa fir wahan se sidhe dukan aa jaaungaa.”

mere normal lehje our tight bahane se papa ko kisi qism ka shak nahi hua wo sar hilate hue bole, “theek hai chale jaao magar dekho airport se sidhe dukan aana agar idhar udhaar gaye to चमड़ी oodher doonga samjhe.”

“nahi papa main sidhe dukan hi aaoonga.” maine onko yaqeen dilaya. baat khatam hogayi our dinner ke baad sab tv lounge me baith kar tv dekhte hue idhar udhaar ki baaten karne lage, phir aahista aahista ek ek kar ke sab soone ke liye kamrunmen chale gaye.

dusre din subah naashte ke baad papa sab ko le kar chale gayee. unke jaate hi main mammi ke paas gaya jo tv lounge me sofe par baithi thi main unke baraabar उनसे chipak kar baith gaya to wo meri taraf dekh kar halki muskurahat ke saath boli. “main jaanti hoon ke too bahane bana kar dukan kyun nahi gaya.”

main bila jhijhak unke raan par haath rakh kar bola, “aaj bahut dinoo ke baad itna achha mouka mila to main dukan kaise jaata, aap shahji ki haalat nahi jaanti hain wo aap ko chodane ke liye pagal ho raha hai kal jab main uske paas milne gaya to wo meri gaanD maar kar apne lund ko thanda kia, ab main shahji ke paas ja raha hoon our use lekar aata hoon.”

mammi ki samajh me yeh baat aahi gayi thi ke ab hamare beech jhijhakne chupane our sharmaane ke liye kuch bhi baaqi nahi bachha to bilawajah jhijhak kar simat kar maze ko kyun kharab kia jaaye shayad isi liye wo bilajhijhak meri taraf dekhte hue muskura kar boli, “sirf shahji kyun main khud chudawaane ke liye pagal ho rahi hoon, magar kia karti mouka hi nahi mila, tum thoda thahar kar shahji ko bolane jaana kyunki maine do din se nahaya nahi hai isliye pahle main shaawar le loon phir tum ja kar shahji ko le aana.”

“theek hai aap jaldi se naha kar taiyaar ho jaaen phir main shahji ko laane jaaungaa our haan nahane se pahle hair remover se apni choot ke baal ki safai bhi zaroor kar len kyonki shahji ko bagair balon wali chikni choot pasand hai.” main UNKI choot ko sahlaa kar bola.

jaise hi maine UNKI choot ko selaya tha wo ekdam kanpkanpa gayi thi our halki siskari le kar mere haath ko pakad kar apni choot se hata kar khadee hogaaen our laal aankho se meri taraf dekh kar muskura kar boli, “tum bahut badmaash hogaye ho.” itna keh kar wo tv lounge se nahane ke liye nikal gaaen…
unke naha kar nikalne me aadhe ghante se bhi jyadah laga, unke aate hi main shahji ko bolane nikal gaya. roj ki tarah shahji apne dukan par baitha apne chand costumer ko samaan de raha tha, main chup chaap khade ho kar sab ke jaane ka intzaar karne laga. sab ke jaate hi use sab kuch bata kar fauran chalne ke liye kaha. wo to jaise chudayi ke liye lund thame taiyaar baitha tha fauran dukan ke band hone ka ek note likh kar dukan ke bahar lagaya our dukan band karke mere saath chal pada. ghar ki gali me bilkul sannata tha our koi bhi dekhne wala nahi tha, phir bhi ham poori tasalli karne ke baad hi ghar me ghusse. mujhe maaloom tha ki mammi apne bedroom me hi hoongi isliye shahji ko lekar sidha unke room me gaya wo vahin apne bistar par baithi hamara hi intzaar kar rahe thi hame aata dekh kar bhagti huyi aaen our shaji se lipat gayi shahji bhi unhen apne bahon me bhainch kar unke honth par apna honth rakha our ek haath se UNKI chutd ko pakad kar unke honth chusne laga.

shahji mammi ko gaud me utha kar unhen pyaar kata hua bistar ki taraf le jate hue kehne laga, “meri jaan shahab ne tujhe bataya hi hoga ke main tujhe chodane ke liye kitna pagal ho raha tha.”

“hai jaanoo main khud din raat tum se chudawaane ke liye tadap rahi thi agar mere bas me hota to din raat tum se chudawati rehti, ab aaj mouka mila hai to aaj mujhe chod chod kar meri choot phad do.” jawab me mammi masti our jazbaat me doobi aawaz me shahji ke chehre par jagah jagah piyar karti huyi boli.

shahji mammi ko bistar par baitha kar unke kapde utarta hua kehne laga. “meri rani zara tere na-mard mia ko america jaane de phir dekhna main our mere dost chod chod kar tera kia haal karen ge, maine jab se apne dootoon ko tere baare me bataya hai wo sab tujhe chodane ke liye pagal ho rahe hain. abhi se soon le mere doston se chudawaane me nakhre mat karna samjhi.” shahji jo mammi ko bilkul nanga kar chuka tha ab apne kapde utarne laga.

main bistar ke paas khada chup chaap sab kuch dekh raha tha our dono ki baten soon sun kar apne tantanae hue lund ko sahlaa raha tha. maine mammi ki choot ko dekha wo bilkul saaf our chikni ho kar chamaak rahi thi unhone apni choot ke balon ko bahut ache se saaf kia tha.

mammi shahji ko kapde utarte hue dekh rahe thi shahji ki baat sun kar kehne lagin. “mere raja fikar mat karo tum jis-se bhi kahoge main uske liye apni choot khol doongi, mujhe to bas lund chahiye jo meri choot me ghus kar meri choot ki aag ko thanda karta rahe.”

itne der me shahji apne kapde utar kar nanga ho chuka tha our mammi ke baat ko soonta hua bistar par aaya our let kar mammi ko khainch kar apne oopar letata hua kehne laga, “meri jaan tere baat ne mere dil ko khush kar diya bas too apne mia ke jaane ka intzaar kar phir dekhna ham charon dost pahle sharab piyen ge our tujhe bhi pila kar mast kar denge uske baad jab chudayi shuru ho gi to ham charon bhi nashe me mast ho kar jab chodanaa shuru karen ge to too maze me pagal ho jaayegi our too bhi jab sharab ke nashe me doob kar chudawae gi to maze me hamen pagal kar de gi.”

mammi jo shahji ki baat sunate hue apna haath andar ghusa kar shahji ke lund ko pakad kar sahlaane lagin thi boli. “jaanoo maine kabhi sharab pina to door ki baat hai dekha bhi nahi hai magar tum pilaao ge to main mana kaise kar sakti hoon.”

main jo mammi ki khoobsoorat chutdon our gaanD ke surakh ko dekh kar jazbaat se be-qaboo ho kar apne kapde utar kar apne tantanae hue beqaboo lund ko sahlaa raha tha fauran bol pada, “mammi shahji theek kehta hai ke jab aap sharab pi kar chuaaen gi to aap ko chudayi ka ek anokha hi maza milega.”

mammi meri baat sun kar apne sar ko ghooma kar meri taraf dekha our mujhe lund sahlaata dekh kar kehne lagin. “mujh se ghalti hogayi mujhe najma ko nahi jaane dena chahiye tha. wo bhi rahti to tum use chodte our main shahji se chudawa kar maje karti, ab meri our shahji ki chudayi dekh kar too apne jazbaat ko kaise thanda kare ga.”

shahji mammi ki baat sun kar mammi ko apne oopar se utara our baith kar kene laga, “are haan hamen apna hi khyaal raha our ham iss bechaare ko bhool gaaye, khair koi baat nahi is ke lund ko thanda karne ka tariqa main jaanta hoon,” phir wo mammi ko dekhta hua bola, “meri jaan iss saale ke lund ko bhi thanda karwa denge abhi ham apni chudayi to shuru karen, ab jaldi se mere lund ko chusna shuru kar our main teri choot ko chusta hoon.” yeh kah kar usne mammi ko chit letaya our khud 69 ki position me mammi ke oopar let kar mammi ki choot par apna munh rakha our choot ko chusne laga.

mammi lazzat bhari siskari le kar shahji ke lund ko jo unke gaal se takra raha tha pakad kar apne munh me le kar chusne lagin. main lazzat our bekhudi ke nashe me oon dono ko dekhta hua apne sab kapde utar kar nanga ho chuka tha our apne lund ko aahista aahista sahlaata hua shahji ki kahi huyi baat par soch raha tha ki aakhir shahji ko mujhe thanda karne ka kaun sa tariqa maaloom hai, kia wo mammi ko chodane ke baad meri gaanD maar kar mujhe thanda kare ga, iss soch ke saath ekdam jaise mere dimaag me bijli ka jhatka laga ho our be- ekhtiyar dil hi dil me apne aap se kaha, “kahen shahji ka matlab yeh to nahi hai ke apni chudayi ke baad mujhse kahe ke main mammi ko chod kar apne lund ki garmi nikal loon.” yeh sochna tha ki mere poore badan me jaise current doudne laga ho our mera jism kaanpne laga, mera dimaag boojhal sa hogaya our laga ke mujhe neend aa rahi ho, mujh par be-khudi, khumr our be-panah lazzat o sooroor taari hone laga, main isi kaifiyat me apne lund ko ek do baar hi jor se ragra hi tha ki ekdam jhaD gaya our mere lund se tej pichkari ki tarah paani ki dhaar nikal ne lagi. jhadne ke baad mere jazbaat ko thandaak milne ki bajaye meri pyaas our badh gayi thi. main aage badh kar bistar ke ek koone par baith gaya our our dono ko dekhne laga, dono hi meri taraf se be-khabar ek dusre ki choot our lund ko chusne me lage hue the. thodi der me shahji mammi ke oopar se ootra our mammi ki taangon ke beech baith gaya, mammi fauran apni dono taangon ko utha kar morte hue apne sine par rakh kar apni choot ko shahji ke liye khol diya. shahji do zaanoo baith kar apne lund ko ek haath se pakda our lund ke tope ko mammi ki khuli huyi choot ke surakh par rakh kar ragarte hue ek jordar dhakke me aadha lund choot me ghusa diya.

jaise hi shahji ka lund choot me ghusa mammi bistar ke chaadar ko apni mutthi se pakad kar lazzat bhari siskari le kar apni aankhen band kar ke baDabaDaaen, “oooofff hai mere raja main tere lund ke qurbaan, kia zabardast dhakka mara hai main itne dinoo se tere isi dhakke ke liye tarsi huyi thi.”

shahji fauran ek our dhakka mar kar apne lund ko jaD tak mammi ki choot me ghusya our mammi ke oopar let kar mammi ki dono chuchiyon ko mutthi me le kar zor zor se masalta our dabata hua mammi ke honth ko choomte hue masti our maze se doobi huyi aawaz me bola, “meri jaan tera our teri choot ka jawab nahi hai, too apni resham jaisi chikni choot me lund ko le kar poori masti me doobi iss tarah chudawati hai ke mujhe maze me dooba kar pagal kar deti hai.” shahji yeh kehte hue zordar dhakke par dhakka marte hue mammi ko chodane laga.

jaise hi shahji ne dhakka marna shuru kia mammi apni dono taang utha kar shahji ke kamar par rakh kar shahji ko apni dono taango se jakar liya our shaji ke dhakke ke jawab me khud bhi niche se chutd utha kar dhakka marte hue siskari par siskari lete hue boli, “ooooffff oooffff jaa…..jaanoo aa…aaj hi tumhare aane se pahle apni choot ki safaai tumhare liye khaas kar kia tha kyunki shahab ne bataya tha ki tumko chikni our bagair balon wali choot pasand hai.”

“shahab ne tujh se bilkul theek kaha tha, ab tujhe meri pasand maaloon hogayi hai isliye ab hamesha apni choot ko isi tarah saaf rakhna.” shahji poori taaqat our raftaar se dhakke par dhakka marte hue kisi tez raftaar hydrolic piston ki tarah apne lund ko mammi ki choot me ghusata our nikalta hua bola.

shahji isi pose me 10 minute tak mammi ko chodataa raha, phir kuch der doggy style me choda aakhir me wo khud bistar par chit let gaya our mammi shahji ke oopar aakar uske lund ko apni choot me le kar dhakke marte hue chudawaane lagin. mammi ke oopar aajane se mammi ki gaanD mere nigahoon ke samne thi. unke gaanD ke surakh ko dekh kar mera lund lohe ki tarah akraa hua fanfana raha tha our mera dil machhal raha tha ki main mammi ke oopar sawar ho kar apne lund ko UNKI gaanD me ghusa kar UNKI gaanD marna shuru kar doon. itna sab kuch ho jaane ke bawajood main UNKI gaanD me apne lund ko ghusane ki himmat to nahi kar saka magar jazbaat ki bekhudi me doob kar be-ikhteyar UNKI gaanD ko sahlaana shuru kar diya our ekdam apni ungli unke gaanD me ghusa kar hilane laga.

“hooo hooo ooooffff oofff kkkkia karte ho sh…shahab meri gaanD se ungli nikalo, haaa haa oooffff nnnnnahi mmmat nikalo apni poori oooungli mere gaanD me andar tak ghusa kar hilaaoo, bbbbbbahut maza aa raha hai.” jaise hi maine UNKI gaanD me ungli ghusaya wo ekdam mana karne lagin magar shayad mere ungli ghusne se unhen bahut jyadah maza aaya tha isliye wo fauran mujhe poori ungli ghusane ke liye kehne lagin.

mammi ki baat se mujhe hausla hua our main unke piche khade ho kar apni ungli se UNKI gaanD marne laga our saath saath UNKI be-daagh chutd ko choomta hua lazzat our bekhudi me doob kar bola, “hai mammi aapki gaanD our chutd najma se bhi jyadah khoobsurat hai.

isi waqt shahji haanpte hue bola, “abe main chootne wala hoon too apni maa ki gaanD se ungli nikal kar idhar apni maa ke samne aa kar khade hoja taaki yeh tere lund ko pakad kar tujhe muth maar kar tera paani nikalde our tere saath saath main bhi jhar jaaoon.”

shahji ki baat sunate hi main jaldi se mammi ki gaanD se apni ungli nikali our mammi ke samne aa kar khada hogaya. yeh ahsaas ke maami apne naazuk our khoobsurat haath se mere lund ko pakaden gi mujhe nasha sa hone laga tha our mere poore badan me lazzaat our soroor ki sansanaahat hone lagi thi. mera lund bilkul mammi ke aankhon ke saamne tanaa hua jazbaat ki inteha ko pahunch kar khudbakdut aise jhatke le raha tha jaise koi use pakad kar hila laha ho saath saath mere lund se paani ke qatre bhi nikalne lage the. mammi apne hontho ko kaatti huyi mere lund ko dekhte hue kuch sochne lagin phir aahista se apne haath ko utha kar mere lund ko pakad len. jaise hi mammi ne mere lund ko pakda ek anokhe our be-panaah lazzat se main siskari par siskari leta hua cheekh kar be-ekhtiyaar mammi ke balon ko mutthi me pakad liya, “hooooooooo hoo haaaaa ooooooofffffffff,” aaue ek second me mere lund ne pichkari ki tarah paani ki dhar pe dhaar nikalna shuru kar diya.mere lund se nikalne waali dhaar sidhi mammi ke chehre our chuchiyon par girne lagi our wahaan se shahji ke sine par. mere jharte hi mammi bhi ek lazzat bhari cheekh maar kar apni choot ko shahji ke lund se dabaa kar apne chutd hilate hue jhadne lagin. mammi ne jhadna shuru hi kia tha ki shahji mammi ki chutdon ko pakad kar mammi ko niche dabate hue jhadne laga. tino saath saath jhar kar ekdam bejaan se hogayee the mammi shahji ke oopar hi aankh band kar ke dhili ho kar let gayi thi, shahji bhi dhila hokar chupchaap leta hua tha main bhi vahin bistar par aakhen band karke let chuka tha. kamre me siwae ham tino ke tez tez saans lene ki aawaz ke our koi aawaz nahi thi.

taqriban 10 minute ke baad ham tino ek ek kar ke kasmasate hue uth kar baith gaye to shahji meri taraf dekhta hua bola, “abe gaanDu tune apna paani ham dono par gira kar hamen ganda kar dia khair main bath room se saaf karke abhi aata hoon.” yeh kah kar wo bistar se utar kar kamre se nikal kar baath room chala gaya.
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09-05-2020, 02:08 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
मम्मी बिस्तर की चादर से अपना चेहरा और सीना सॉफ करते हुए मुझ से बोली. “देखो शहाब अब तक जो कुछ हो गया यह सब भी नही होना चाहिए था मगर अब तो हो ही गया है, एक बात याद रखना आगे इससे ज़्यादा और कुछ ना हो, मेरा मतलब यह है कि तुम कभी मुझे चोदने का सोचना भी नही यह मैं कभी ना तो बर्दाश्त करूँगी ना ही होने दूँगी समझे. तुम बेशक नजमा को जब और जिस तरह चाहो चोदो मैं
नही रोकूंगी बल्कि लाहोर से आने के बाद किसी ना किसी तरह तुम दोनो की चुदाई का रास्ता निकाल लूँगी. एक बात और वो यह की मैने नोटीस किया है कि तू अपनी दोनो भाभयों के चक्कर मे है, देख मैं तुझे अभी से समझा रही हूँ कि तू उन दोनो मे से किसी को चोदने की कोशिश भी मत करना, वो दोनो बहुत अलग क़िस्म की हैं और तेरा कोई भी ग़लत क़दम हम सब को मरवा देगा.”

मम्मी की बात सुन कर मैं अपने और मम्मी की चुदाई वाली बात पर तो कुछ नही बोल सका मगर भाभी वाली बात पर बोला, “मम्मी दोनो भाभी इतनी खूबसूरत हैं कि उन्हें देख कर मेरा लंड खूदबखुद खड़ा हो जाता है क्या करूँ, फिर भी मैं वादा करता हूँ कि मैं उन दोनो को
कभी चोदने की कोशिश नही करूँगा बस आप किसी तरह मुझे दोनो को कम से कम नंगा ही देख लेने का कोई रास्ता पैदा कर दें.”

मम्मी मेरी बात सुन कर चुप चाप थोड़ी देर कुछ सोचती रहे फिर मेरी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली, “तुम बहुत ही कमिने हो गये हो, खैर तुम्हारी यह ख्वाहिश किसी ना किसी तरह मैं पूरा करवाने की कोशिश करूँगी.”

शाहजी के आने के बाद मम्मी बाथ रूम चली गयी. मैने वक़्त देखा तो याद आया कि मुझे दुकान जाना है. पापा के डर से मैं फ़ौरन कपड़े बदल कर तैयार हो गया और मम्मी के बाथरूम से वापस आने के बाद उनसे कह कर दुकान के लिए रवाना हो गया. शाहजी मेरे जाने के बाद वहीं रुका रहा क्यूंकी वो और मम्मी एक बार और चुदाई का मज़ा लेना चाहती थी.
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09-05-2020, 02:08 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
प्रोग्राम के मुताबिक़ सब लाहोर के लिए चले गये, घर मे सिर्फ़ मैं और नानी जान रह गयी. जिस दिन सब लाहोर गये उसी दिन मैं मधुबाला की फिल्म मुग़ले-ए-आज़म और हाफ टिकेट की वीडियो केसेट ले कर आ गया और भाभी के वीसीआर और उनके कमरे का 18 इंच का कलर टीवी ला कर अपने कमरे मे मूवी देखने के लिए लगा दिया. रात को नानी जान के सोने के बाद मूवी देखना शुरू किया. मूवी मे मधुबाला को देख कर मैं इतना हैरान हुआ कि क्या कहूँ, मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मूवी मे मधुबाला नही बल्कि मम्मी हैं,

दोनो मे कोई फरक़ नही था और मुझे लोगों की बातों पर यक़ीन आ रहा था जो वो मम्मी के बारे मे कहते थे. फिर यह सिलसिला चल पड़ा मैं रोज़ मधुबाला की फ़िल्मे ला
ला कर देखने लगा. मूवी मे मधुबाला का डॅन्स उसकी अदाएँ जब देखता तो मुझ पर एक नशा तरी हो जाता और मेरा हाथ खुद बखुद मेरे लंड पर पहुँच कर मेरे लंड को सहलाना शुरू कर देता और तसव्वर मे मम्मी का नंगा जिस्म उनकी खूबसूरत चूत और उनकी गान्ड नज़र
आने लगती. इन सब बातों ने मुझे मम्मी के इश्क़ मे मुब्तुला कर दिया और मैं मम्मी की मोहब्बत मे दीवाना सा हो गया और मम्मी मुझे मेरी
माँ की जगह मुझे मेरी महबूबा नज़र आने लगी.

इन सब बातों के साथ साथ मैं रोज़ाना सुबह दुकान जाने लगा था और हमारे मुंशी जी (मॅनेजर) जो पापा के पास मेरे पैदा होने से पहले ही से
काम करते थे मुझे बिज़्नेस और काम के बारे मे बताना और सीखना और मैने पूरी दिलचस्पी के साथ सीखना शुरू कर दिया था…

सब को लाहोर गये हुए एक हफ़्ता गुज़र गया, पापा रोज़ दुकान पर फोन करके मुंशिजी से सब रिपोर्ट ज़रूर लेते. मुंशी जी से ख़ास तौर पर मेरे बारे मे ज़रूर पूछते, चूँकि मैं पापा के जाने के बाद पूरा वक़्त दुकान पे रह कर मुंशी जी से पूछ पूछ कर दिलचस्पी और मेहनत के साथ सब कुछ सीख और समझ रहा था इसलिए मुंशी जी पापा से मेरी खूब तारीफ़ करते जिस की वजह से पापा मुझ से बहुत खुश थे. जब पापा
ने देखा कि मैं अब पूरी ज़िम्मेदारी से काम मे दिलचस्पी ले रहा हूँ तो वापसी के प्रोग्राम को एक्सटेंड कर के *****आबाद और मुर्री जाने का प्रोग्राम बना कर फोन पर मुझे बता दिया.

चूँकि अभी मेरे पास ड्राइविंग लाइसेन्स नही था इसलिए पापा ने कार को इस डर से सफ्दर अंकल के घर रखवा दिया था ताकि मैं चला ना सकूँ. मैं रोज 5सी की बस से आता और जाता था जो हमारे घर के पास ही से चलती थी और बिकुल दुकान के सामने उतारती थी.. सॅटर्डे को हम दुकान 3 बजे बंद कर दिया करते थे और सनडे को छुट्टी. वो सॅटर्डे का दिन था दुकान बंद करके मैं पैदल ही सदर बाज़ार की तरफ चल पड़ा ताकि वहाँ लड़कियों को देख कर थोड़ा मस्ती मज़े कर के घर जाऊं. एक डेढ़ घंटे सदर मे इधर उधर घूमता रहा फिर फूटपाथ पर
सेकेंडहॅंड बुक बेचने वाले के पास रोक कर फिल्मी मॅगज़ीन और डाइजेस्ट देखने लगा और चन्द किताबें खरीद कर वापस जाने ही वाला था कि मेरी नज़र एक ऐसी किताब पर पड़ी जिसका कवर पेज भी फटा हुआ था और उसके गले हुए पेपर को देख कर सॉफ मालूम होता था कि यह कोई बहुत ही पुरानी किताब है. उसके पहले पेज पर सिर्फ़ यह लिखा था, “क़दिमी (ओल्ड) नुश्कू (फ़ॉर्मूला) का ख़ज़ाना जो आप की ज़िंदगी बदल सकती है”

इस सेंटेन्स ने मुझे इस किताब को लेने पर मजबूर कर दिया, चूँकि मैं चन्द किताबें खरीद चुका था इसलिए किताब वाले ने वो किताब मुझे मुफ़्त
देदि.
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09-05-2020, 02:09 PM,
RE: Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा
इस सेंटेन्स ने मुझे इस किताब को लेने पर मजबूर कर दिया, चूँकि मैं चन्द किताबें खरीद चुका था इसलिए किताब वाले ने वो किताब मुझे मुफ़्त
देदि.

घर आ कर सब किताबें एक तरफ रखी और शावर लेने के बाद सो गया. 8 बजे उठा तो डिन्नर तैयार था, मैने और नानीजान ने साथ ही डिन्नर लिया फिर मैं कल के लाई हुई मूवी को ले कर घर से निकल कर पहले मूवी वापस की फिर मधुबाला की दूसरी मूवी ले कर पहले घर पर रखा फिर शाहजी की तरफ गया. सब के लाहोर जाने के बाद मैं रोजाना डिन्नर के बाद शाहजी के पास ज़रूर जाता. जहाँ हम दोनो मम्मी और नजमा की चुदाई की बातें करते फिर मैं शाहजी से गान्ड मरवा कर वापस आ जाता. दूसरे दिन चूँकि सनडे था और छूट्टी थी इसलिए मैं देर तक शाहजी के पास रहा. शाहजी के पास रशीद, ज़ाहिद और शरीफ भी आए हुए थे और तीनों बैठे हुए शराब पी रहे थे. वो तीनों मुझे देख कर बहुत खुश हो गये और मम्मी की वापसी के बारे मे पूछने लगे. इन तीनों ने मम्मी को अभी तक नही देखा था मगर शाहजी की ज़बानी उनके हुश्न की तारीफ़ सुन कर वो तीनो मम्मी को चोदने के लिए पागल हो रहे थे. मैने उनके वापसी के प्रोग्राम के बारे मे बता दिया.

मैने भी उनके साथ थोड़ा पी कर चारों से गान्ड मरवा कर वापस आ गया. नानी सो चुकी थी, मुझ पर शराब का खुमार चढ़ा हुआ था मैं कमरा बंद करके अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया और मधुबाला की लाई हुई फिल्म “बॉय फ्रेंड” लगा कर देखने लगा. रोज़ की तरह फिल्म तो मादुबला की चल रही थी मगर मेरे तस्सवर मे मधुबाला की जगह मम्मी को देख रहा था और देखते हुए आहिस्ता आहिस्ता मूठ मार रहा था. फिल्म के ख़तम होने तक मैं दो बार मूठ मार कर झड चुका था. जब से मधुबाला की फिल्म देखनी शुरू की थी दिन रात उठते बैठते
चलते फिरते हर वक़्त मेरे दिल दिमाग़ पर मम्मी ही छाई हुई थी. शाहजी को मैने मधुबाला की फिल्म देखने के बारे कुछ नही बताया था और ना ही उसे अपने दिल की हालत बताना चाहता था. मेरी राज़दार सिर्फ़ नजमा थी मैं उससे कुछ नही छुपाता और अब बे-चैनि से उसे सब कुछ बताने के लिए उसकी वापसी का इंतज़ार कर रहा था.

मैं पानी पी कर सोने के लिए लेट गया, चार चार लोगों से गान्ड मरवा कर मेरी गान्ड मे बहुत जलन और तकलीफ़ हो रही थी और दो बार मूठ मार कर मैं बिल्कुल ढीला हो चुका था. मैं बहुत देर तक करवट लेता रहा क्यूंकी नींद नही आ रही थी, जब बहुत देर तक नींद नही आई तो आज खरीदी हुई किताबो को ले कर बैठ गया और बगैर नाम वाली फटी हुई पूरानी किताब को देखने लगा कि आख़िर यह किस क़िस्म की किताब है. यह किताब एक हकीमी (आयुर्वैदिक) किताब थी जिस मे मर्द और औरतो के सेक्स की बीमारी और कमज़ोरी के बारे बताया गया था और इलाज के लिए जड़ी बूटी से दवा बनाने का फ़ॉर्मूले लिख कर एक्सप्लेन किया गया था. पुर किताब मे खास कर तीन (3) चीज़ें मुझे
अपने काम की लगी. पहला लंड को मोटा, बड़ा और ताक़तवर बनाने की मेडिसिन का तरीका, दूसरा सेक्स की पवर का बढ़ाना और लंबी उम्र तक सेक्स की ताक़त को क़ायम रखना, तीसरा खुली हुई चूत को कंवारी लड़की की तरह टाइट करना. इसे मैने नजमा के लिए यह सोच कर चुना था कि चुदवा चुदवा कर उसकी चूत बहुत खुल गयी है कहीं सुहाग रात मे उसके शौहर को शक ना हो जाए इसलिए अगर इस
दवा से उसकी चूत टाइट हो जाती है तो इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है. मैने सब को बनाने का तरीक़ा लिख लिया और फ़ैसला
किया कि मंडे को सब चीज़ों का इंतज़ाम कर के दवा बना कर इस्तेमाल करना शुरू कर दूँगा.

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