Incest इंस्पेक्टर की बेटी - Page 7 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here
बबलू की गन से निकली गोली सलोनी के चेहरे पर ज़ोर से टकराई और चारों तरफ छींटे उड़ाती हुई बिखर गयी

एक के बाद एक उसके लॅंड की पिचकारियों ने सलोनी के चेहरे को पूरा रंग दिया





उसके लॅंड की पिचकारियां उसने सीधा अपने मुँह में भी ली

क्योंकि पापा के लॅंड का पानी टेस्ट करने के बाद उसे इसका स्वाद अक्चा लगने लगा था

बबलू का टेस्ट थोड़ा अलग था पर एक अलग ही नशा था उसमें

जवानी का नशा

इसलिए वो अपने चेहरे पर लगे रस को भी उंगलियों से इकट्ठा करके चाट गयी

फिर उसने पास रखे वेट टिश्यू से अपने चेहरे को अच्छी तरह से साफ़ किया

कुछ ही देर में वो एकदम दमक रही थी उसके लॅंड से निकले पानी के तेज से

हो तो अभी बहुत कुछ सकता था

पर सलोनी ज़्यादा रिस्क नही लेना चाहती थी

बबलू आज अगर पापा के हाथों पकड़ा गया तो उसके साथ-2 वो भी बुरी फँसेगी

मॉम का तो पता नही क्या होगा

इसलिए अभी के लिए उसने अपनी सुलगती हुई चूत को दबाकर सांत्वना दी और बबलू को अपने कपड़े पहनने के लिए कहा

और खुद भी उसने टी शर्ट पहन ली और पहले जैसी हो गयी

उसके बाद उसने बबलू को समझा दिया की सामने वाला कमरा स्टोर रूम है

मॉम मों ने उसे वही छुपने के लिए कहा था और वो ही उसे निकालेगी पापा के सोने के बाद

फिर उसने धीरे से दरवाजा खोला, उसके रूम और स्टोर रूम की गॅलरी में कोई नही था

वहां से पापा का रूम भी नज़र नही आता था

वो ड्रॉयिंग रूम में होते तो नज़र आते पर आज वो अपने रूम में बैठकर पी रहे थे और टीवी देख रहे थे

ये उसके लिए अच्छा था

उसने धीरे से स्टोर रूम का दरवाजा खोला और उसे एक कोने में छुपकर माँ के आने का वेट करने की हिदायत दी और दरवाजा बंद करके वो अपने रूम में आकर लेट गयी

आज का पूरा दिन कितने एक्शन से भरा था

आज की शाम भी

और अब ये रात भी

आपने वाली रातें तो और भी रंगीन होने वाली थी

पापा के साथ और बबलू के साथ

बस यही सोचते-2 वो कब सो गयी उसे भी पता नही चला.
 
उसके बाद उसने बबलू को समझा दिया की सामने वाला कमरा स्टोर रूम है

मॉम ने उसे वही छुपने के लिए कहा था और वो ही उसे निकालेगी पापा के सोने के बाद

फिर उसने धीरे से दरवाजा खोला, उसके रूम और स्टोर रूम की गॅलरी में कोई नही था

वहां से पापा का रूम भी नज़र नही आता था

वो ड्रॉयिंग रूम में होते तो नज़र आते पर आज वो अपने रूम में बैठकर पी रहे थे और टीवी देख रहे थे

ये उसके लिए अक्चा था

उसने धीरे से स्टोर रूम का दरवाजा खोला और उसे एक कोने में छुपकर माँ के आने का वेट करने की हिदायत दी और दरवाजा बंद करके वो अपने रूम में आकर लेट गयी

आज का पूरा दिन कितने एक्शन से भरा था

आज की शाम भी

और अब ये रात भी

आपने वाली रातें तो और भी रंगीन होने वाली थी

पापा के साथ और बबलू के साथ

बस यही सोचते-2 वो कब सो गयी उसे भी पता नही चला.

**********

अब आगे

**********

सुबह जब मैं उठी तो पापा पुलिस स्टेशन जा चुके थे और माँ इधर-उधर भाग कर घर की साफ-सफाई का काम निपटा रही थी

अभी काम वाली नहीं आई थी, उस से पहले वो डस्टिंग का काम खुद ही करती थी

उन्होंने वही रात वाला गाउन पहनना हुआ था

मुझे नाश्ता करवाकर, साफ सफाई करके वो आराम से नहाती थी

यही उनकी रोज की दिनचर्या थी

मैं माँ के भरे हुए शरीर को देखकर सोचने लगी क्या मैं भी बाद में उनके जैसी हो जाऊँगी

हालांकि वो मोटी नहीं थी

पर उनके स्तन और गांड के हिस्से पर जरुरत से ज्यादा चरबी चढ़ी हुई थी





उन जगहों से वो मोटी थी

पर वही मोटे हिस्से तो मर्दों को पसंद आते हैं

और ये मर्दो का ही काम होता है उनको मसलकर, चूसकर, रगड़कर इस हालत में लाने का

मेरे शरीर पर भी मर्दो ने इसी तरह से काम किया तो वो भी ऐसी खास जगह से निखर जाएगा

ये सोच कर ही मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई

माँ: "खड़ी -2 क्यों मुस्कुरा रही है, आज कॉलेज नहीं जाना क्या...जल्दी नहा ले, मैं नाश्ता बनाती हूँ तेरा..."

मैंने सोचा, आज माँ से थोड़े पंगे के लिए जाए

इसलिए मैं बोली: “वो….माँ….कल रात को…कुछ आवाज़ें आ रही थी…।”

माँ काम करते-2 रुक सी गई, और धीरे से बोली: "आवाजें...कैसी आवाजें...कहाँ से..."

मैं "वो जैसे किसी के बात करने की...वहां ...स्टोर रूम से...।"

स्टोर रूम का नाम सुनते ही माँ के चेहरे का रंग उड़ गया

मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी दबाई

माँ: “वो….वो…..तुझे वहम हुआ होगा….ऐसा कुछ नहीं था…।”

मैं "सच में माँ...मैंने सोचा अंदर जाकर देख लू...और मैं गयी भी वहां ..."

ये सुनते ही माँ चौंक सी गयी और मुड़कर मुझे देखने लगी

दोनों की नजरें मिलीं

मैंने आंखो ही आंखो में मैंने उन्हें समझा दिया कि मुझे सब पता है...

बेचारी मां की आंख से आंसू निकल पड़े

मैं भागी-2 उनके करीब गई और उन्हें संभाला

“माँ….आप रोना मत ….ये बबलू वाली बात मैं किसी को नहीं बताऊँगी…वादा करती हूँ …पापा को भी नहीं..”

अब तो माँ को अच्छे से पता चल गया कि मैं उनका राज जानती हूँ,

ये सुनकर वो और जोर से रोने लगी

और बड़बड़ाने लगी

"आई एम सॉरी बेटा...मुझे पता नहीं क्या हो गया था...वो...मैं अपने ऊपर...कंट्रोल नहीं रख पाई...मुझसे गलती हो गई...प्लीज बेटा...ये बात किसी को नहीं बताना..."

मैं : "हाँ माँ...मैंने कहा ना, किसी को नहीं बताऊँगी...आप सही हैं अपनी जगह...पापा जिस तरह से आपको ऊपर कंट्रोल रखते हैं, आपको अपनी मर्जी से सब कुछ करने का पूरा अधिकार है"

मेरी बात अपने पक्ष में सुनकर माँ के आंसू रुक गए

वो मेरी तरफ प्यार से देखने लगी

शायद आज पहली बार उन्हें समझने वाला कोई मिला था

मैं : "माँ...मर्द बाहर निकल कर क्या करते हैं, ये कोई नहीं देखता, पर औरत पर सब पाबंदिया लगाते हैं, ये सही नहीं है, अपनी जिंदगी में आप अपनी मर्जी से कुछ भी करो, आपको जिसमें खुशी मिलती है, वो करो, और जो आपने किया है उसमें कुछ गलत नहीं है ...मैं आपके साथ हूं..."

इतना कहकर मैंने माँ को गले से लगा लिया, और उनके साथ -२ मैं भी रोने लगी

मज़ाक में शुरू हुई बात इमोशनल एंगल पर आकार ख़त्म हुई

पर ये सही था

हम मां बेटी के बीच कम से कम ये दीवार का गिरना जरूरी था

कल मैं भी उनकी जगह पर रहूंगी तो वो मुझे भी उतना ही समझेगी

खैर, मैं नहा धोकर नाश्ता करने के बाद कॉलेज के लिए निकल गई

आज तो मुझे श्रुति को बताने के लिए काफी मसाला था

बबलू वाला और फिर माँ के साथ वाली बात भी

और वो सब मैंने मसाला खाकर सुनाया भी उसे

वो भी मेरी जिंदगी में हो रहे उतार चढ़ाव की कहानी सुनकर हैरान रह गई

और बोली तेरी लाइफ पर तो एक सीरीज बन सकती है

सीरीज क्या, मैं तो पूरी फिल्म बनाने के चक्कर में हूं अब

क्योंकि मेरी चूत में अब कुछ ज्यादा ही खुजली होने लगी थी

मेरे चारों तरफ चुदाई हो रही थी

सिवाए मेरी चुदाई के

अब तो मुझे अपना सिडक्शन लेवल हाई करना पड़ेगा

और मैं पापा को अपनी तरफ आकर्षित करने के बारे में सोचने लगी थी

पर सबसे बड़ी दिक्कत तो माँ थी

उनके घर पर होते हुए मैं कुछ भी खुलकर नहीं कर सकती थी

अचानक मेरे दिमाग में एक आइडिया आया

मामू का घर

माँ को अपने मायके गये भी काफी दिन हो गये

वो वहां चली जाए तो बात बन सकती है

मेरे नाना नानी भी मामू के साथ ही रहते हैं, और उनकी एक ही बहन है, मेरी माँ

मैंने झट से अपने बंटू मामा (बलराज) को फोन लगाया, वो हमारे ही शहर में करीब 1 घंटे की दूरी पर रहते हैं

वो भी मेरी कॉल पाकर काफी खुश हुए

मैंने पहले तो इधर उधर की बातें की फिर उन्हें इमोशनल ब्लैकमेल करने लगी

मैं : "मामू , आपका तो पता नहीं पर मम्मी को आजकल आपकी और नाना नानी की बहुत याद आती है, आज सुबह भी वो रो रही थी, आपको तो कोई फ़िक्र ही नहीं है अपनी बहन की"

मामा भी एकदम सकते में आ गए

बात तो सच है

उन्होंने भी अपनी बहन से काफी दिनों से बात नहीं की थी और उन्हें मिले हुए भी करीब 4 महीने हो गए थे

वो तुरंत बोले: तू फिक्र ना कर सलोनी, मैं आज शाम ही घर आता हूँ और उसे जबरदस्ती घर लेकर आऊंगा, और वो भी पूरे हफ्ते दस दिन के लिए….पर .''

हफ्ता दस दिन...वाह

ये तो मेरे लिए बहुत है

लेकिन लास्ट में इन्होने पर क्यों बोला

“क्या हुआ मामू…..कुछ दिक्कत है क्या…”

मामू : "नहीं दिक्कत तो कुछ नहीं, असल में तेरी मामी भी अपने मायके गई हुई है कल से, और वो 5 दिन में आएगी...अगर ज्योति आई तो उसका होना भी जरूरी है ना घर पर...मैं ऐसा करता हु, उसे भी शाम तक या कल तक वापिस आने के लिए बोल देता हूँ फ़ोन करके "

मैं : "मामू, आप भी किस दुनिया में रहते हो, ऐसा कहा लिखा है कि लड़की जब अपने मायके आई तो उसकी भाभी का घर पर होना जरूरी है, वो अपने मायके गई है, उन्हें रिलैक्स करने दो, माँ अपने हिसाब से रिलैक्स करेंगी, वैसे भी 4-5 दिन बाद वो आ ही जाएगी ना , उन्हें आप अभी वहीं रहने दो और माँ को लेकर जाओ...ठीक है”

मामू: "मेरी सलोनी कितनी समझदार हो गई है, बिल्कुल अपने मामा पर गई है...है है ...ठीक है, मैं शाम को आता हूं"

मैं : "ठीक है मामू, थैंक यू , पर ये बात आप माँ को मत बोलना कि मैंने उनके रोने वाली बात कही है, वरना मेरी क्लास लगा देगी वो..."

माँ: "नहीं कहूंगी बेटी, चिंता मत करो, गलती मेरी ही है, अपने काम के चक्कर में अपनी बहन को भूले बैठा था, पर तूने मेरी आंखें खोल दी, मैं अभी निकल रहा हूं बस, फिर घर पर मिलते हैं..."
 
इतना कहकर उन्होंने फोन रख दिया

मैं ख़ुशी से उछल पड़ी

श्रुति भी भागती हुई मेरे पास आई और मेरी खुशी का करण पूछा, मैंने जब बताया तो वो भी चिल्लाती हुई मुझसे लिपट गई

उसे भी अपना फ़ायदा दिख रहा था शायद

पापा से चुदने के बाद उसकी चूत भी रह रहकर रिस रही थी





हालांकी इस बीच उसने अपने बॉयफ्रेंड के साथ भी एक बार चुदाई की थी

पर उसे वो मजा नहीं मिला जो उसे शमशेर अंकल यानी मेरे पापा ने दिया था

पापा ने उसकी चूत को खोल कर रख दिया था

अब तो उनका मोटा लंड ही वो कसावत वाली चुदाई दे सकता है जो उसे अंदर तक झंझोड़ कर रख दे

लंड जब चूत की अंदरुनी दिवारों पर रगड़ खाता हुआ अंदर बाहर होता है तो उस चुदाई का मजा ही अलग होता है

23002981.gif


कॉलेज खत्म होने के बाद शाम को जब मैं घर पहुंची तो मां ने दरवाजा खोला

उनके चेहरे पर एक अलग ही ख़ुशी थी

माँ: “सलोनी, पता है तेरे बंटू मामा आये हैं, और मुझे घर ले जाने की जिद्द कर रहे हैं…।”

अब मैं उन्हें क्या बोलती, ये सारा खेल मेरा ही रचा हुआ है

“बंटू मामा, वाह…।”

इतना कहकर मैं मामा -२ चिल्लाती हुई अंदर भागी

वैसा ही जैसा बचपन में भागती थी

मामा मेरी आवाज सुनते ही खड़े हो गए

और मुझे देखते ही उनके चेहरे के एक्सप्रेशन बदल गए

माँ से तो वो 4 महीने पहले मिले थे जब वो मायके गई थी, मुझे तो उन्होंने करीब 1 साल से देखा ही नहीं था

और इस बीच मेरे जिस्म में जो परिवर्तन आया था, मेरे कॉलेज पहनावे में जो अंतर आया था

उसे देखकर मामू का मुंह खुला का खुला रह गया

और तब तक मैं भागती हुई आकर उनसे लिपट गई

मेरे नन्हे अमरूद उनकी चौड़ी छाती में पिसकर रह गए

मेरे मामू थोड़े मोटे हैं, गोल मटोल से

और थोड़े से गंजे भी

पर एकदम क्लीन और चिकने बनकर रहते हैं, मुझे तो वो शुरू से ही वो बड़े क्यूट से लगते हैं





उनका मोबाइल का शोरूम है

सुबह से शाम तक बैठना और शाम को पैग लगाकर सो जाना, यहीं उनकी दिनचर्या थी

शायद इसलिए वो अपनी बहन को भूले बैठे थे

पर मैंने याद दिलाकर शायद अच्छा काम किया था

पर ये क्या

मामू ने मुझे ऐसे क्यों पकड़ा है

मैं मामू से लिपटी जरूर थी, क्योंकि उन्हें मैंने एक साल के बाद देखा था

पर उनकी बाहे मेरी कमर पर ऐसे लिपटी जैसे वो मुझे निचोड़ कर रख देंगे

मुझे वैसे तो कोई फर्क नहीं पड़ता पर मेरे पहले से बड़े हो चुके हैं बूब्स को जरूर फर्क पड़ रहा था

को उनकी छाती से पिसकर चपटे हो गए थे

ओह तेरी

अब मैं समझी

मामा के अंदर का मर्द जग रहा था शायद मेरे जवान जिस्म को देखकर

अपनी भांजी के जवान बदन की गर्मी को वो उसे निचोड़ कर महसूस कर रहे थे

माँ किचन में उनके लिए शाम का नाश्ता बना रही थी शायद, पकौड़ों की खुशबू आ रही थी

इसलिए मामा बेफिक्री से मुझे कसकर पकड़े रहे

मैं : "मामू, ये थोड़ा ज्यादा टाइट नहीं पकड़ रहे मुझे आप...।"

मामू: “तूने ये तो बता दिया कि मेरी बहन मुझसे 4 महीने से नहीं मिली तो वो मेरे लिए उदास हो गई, पर ये नहीं पूछा कि मैंने तुझे 1 साल से नहीं देखा तो मैं कितना उदास हुआ तेरे लिए …”

इतना कहकर उन्होंने मुझे हवा में उठा लिया

मैं किसी गुड़िया की तरह उनके सीने से लगकर झूल गई

ठीक वैसे ही जैसे वो मुझे बचपन में अपने गले से लगाकर झुलाया करते थे, घुमाया करते थे

मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए

उनके 50 साल की उम्र में भी इतनी ताकत है मुझे इसका अंदाज़ा भी नहीं था

पर रोंगटे खड़े होने का एक दूसरा कारण भी था

उनका खड़ा हुआ लंड महसूस कर पा रही थी अपनी चूत के सामने

यानी मेरे मामू मुझे देखकर उत्तेजित हो गए थे

ये तो होना ही था

आजकल मुझे देखकर अच्छे-अच्छों की हालत ख़राब हो जाती है, फिर इन्होने तो मुझे अपने बदन से चिपका रखा है

इनका ये हाल तो होना ही था

पापा के साथ मजे लेने के बाद रिश्तों में मुझे वैसे भी विश्वास नहीं रह गया था

एक औरत और एक मर्द में सिर्फ एक ही रिश्ता हो सकता है

जिस्म का

और इसलिए

जब मैंने अपने पापा को नहीं छोड़ा तो अपनी मामू को भला कैसे छोडूंगी

उनका भी मुझपर उतना ही हक है जितना पापा का

और यहां तो मामू ही मेरे पीछे पड़ गए हैं

इसलिए मैंने भी उनके रंग में रंग जाने का फैसला किया

और मैंने अपनी बाहें उनके गले में डाल दी

अपने होंठ उनके कानों के करीब लाई और अपनी गर्म सांसे छोड़ती हुई बोली

"मामू, मैं अब पहले जैसी नहीं रही, आपके ये बचपन वाले खेल अब मेरी समझ से बाहर है, खेलना है तो कुछ और खेलो"





इतना कहकर मैंने अपनी जीभ निकाल कर उनके कान पर लगा दी, मुंह में जितनी लार थी सब वहां उड़ेल दी मैंने

मेरी गरम जिभ उनके लाल हो चुके कान से लगी तो वो एकदम से कांप उठे

और उन्होंने मुझे नीचे उतार दिया

और तभी माँ किचन से पकौड़े और चाय की ट्रे लेकर बाहर आयी और बोली

“अब ये मामा भांजी का मिलन ख़त्म हो गया है तो चाय भी पी लो…वरना कहेगा कि ठंडी चाय पिला दी दीदी ने…”

उनकी बात सुनकर मामू खिसियाई हुई सी हंसी में हंस दिए

मैं भी उनके लंड वाले हिस्से को घूरते हुए अपने कमरे की तरफ चल दी

मामू भी मेरी भरी हुई गांड की मदमस्त चाल देखकर अपने कान पर लगी मेरी जीभ से निकली थूक साफ करने लगे

इतना रस छोड़कर आयी थी मैं उनके कान पर जो मेरे मुँह में था, वो सब उड़ेल आयी थी वहां

उन्हें शायद मुझे बच्ची समझा था पर मेरी बात सुनकर उन्हें पूरा अंदाज़ लग चुका था कि मैं कितना आगे जा चुकी हूं

पर अभी भी बेचारे और कुछ कर भी नहीं सकते

उनके पास टाइम ही नहीं था

मैं रूम में पहुंची और दरवाजा अंदर से बंद करके अपने सारे कपड़े निकाल फेंके

और नंगी जाकर शीशे के सामने खड़ी हो गई

144961-girls-with-glasses.jpg


मेरा पूरा जिस्म जल रहा था

ख़ासकर मेरे नन्हें बूब्स

जिन्हे मामा ने अपनी छाती से रगड़कर लाल टमाटर जैसा कर दिया था

मैंने उन्हें अपने हाथों में पकड़ा और जोरों से मसल दिया

मेरे नन्हें निप्पल उभरकर फटने को आ गए

मेरा तो मन कर रहा था कि इन्हें इतने जोर से दबाऊं कि निपल निकल कर शीशे से जा चिपके पटाक से

पर ऐसा नहीं हो सकता

मैंने मुंह नीचे करके उन्हें मुंह से लगाया और मुंह में लेकर एक जोरदार चुप्पा मारा

194983-fat-milky-boobies-1.gif


ये पहला मौका था जब मैं खुद का निप्पल चूस रही थी

हालांकी थोड़ी मुश्किल हुई पर मैंने स्ट्रेच करके ये कर ही दिया

दर्द भी हुआ पर मजा भी बहुत आया

काश मैं अपनी चूत भी चूस पाती खुद से ही

फिर तो मैं किसी के भरोसे ही नहीं बैठती

ख़ुद ही चूसती रोज़, और मज़े लेती

पर अभी के लिए बेसिरपेर की बाते सोचने का समय नहीं था

मैंने अपनी सुलगती हुई चूत पर हाथ रखा और उसे जोरों से दबा दिया

“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स…….आहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह…….माआआआआअम्म्मम्म्मम्म्म्मुउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउ...

मेरी आँखे बंद हुई और मुँह से खुद ब खुद मामू निकल गया

निकलता भी क्यों नहीं

ये आग उनके हाथों की ही तो लगाई हुई है

काश मामू इसी वक्त दरवाजा खोलकर अंदर आए और मुझे फिर से निचोड़ दे

अब तो मैं भी अपना जिस्म निचुड़वाने के लिए तैयार थी

पर अब भी तो माँ खड़ी थी बीच में

ये पता नहीं मेरा पीछा कब छोड़ेगी

इनसे पीछा छुड़वाने के लिए ही तो ये मामू वाला प्लान बनाया था

और अब मामू ने ही वो आग भड़का दी जिसे बुझाने के लिए वो माँ को लेने आये थे

मामला पेचीदा हो रहा था

या शायद मेरे जिस्म की आग बढ़ती जा रही थी

जो मेरे आस-पास के हर मर्द से मजे लेने की बात सोच कर बढ़ती जा रही थी

मुझसे और सब्र नहीं हो रहा था

मैं बाथरूम में गई और शॉवर ऑन करके उसके नीचे खड़ी हो गई

ठंडा पानी मेरे जिस्म को भी शांत करने लगा

पर सिर्फ ऊपर-2 से

अंदर से तो मैं अब भी सुलग रही थी

1.jpg
 
मैंने ढेर सारा शॉवर जेल लिया और अपने जिस्म पर रगड़ने लगी

पूरे बदन पर चिकनाहट और झाग फेल हो गई

ऐसी चिकनाहर में चूत में उंगली करने का अलग ही मजा मिलता है

मैं वहीँ फ़र्श पर बैठ गई और अपनी टाँगे खोलकर अपनी उंगली नुमा 2 सेनिक अपनी चूत से लड़ने के लिए उसके अंदर उतार दिए

अंदर जाकर वो सेनिक चिकनाहर से भरी दीवारें और बेहद संवेदनशील सी क्लिट के साथ जंग लड़ना शुरू हो गए

मेरी उंगली जितना अंदर जाकर उन्हें कुरेदती, मेरी जाँघे उतना ही दबाव बनाकर उन्हें चूत से बाहर निकाल फेंकती

इसी अंदर बाहर में मामू का प्यारा सा चेहरा मेरे सामने आ गया

और मुझे ऐसा एहसास हुआ जैसे मैं मामू के गले से झूल रहा हूं

पर वैसे नहीं जैसे कुछ देर पहले झूली थी

इस बार मैं उलटी लटक कर झूल रही थी

और वो भी पूरी नंगी

मेरी टाँगे उनके गले से लिपटी थी और मेरी चूत उनके मुंह के करीब थी

मेरा सर नीचे उनके घुटनों से थोड़ा ऊपर था जिसकी वजह से उनका मोटा लंड मेरे चेहरे के ठीक सामने था

यानि 69 का खड़ा हुआ पोज़ था वो

वो अपनी मोटी जीभ से मेरी छोटी चूत को को जोरों से चूस रहे हैं

और मैं बिलबिलाकर उनके मोटे लंड को चूसकर उनसे बदला ले रही थी

“ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह् हांस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्….माम्म्म्मुउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउ।

all-sizes-all-sexy-standing-001.gif


और आंखें बंद करके उस पल मैंने अपनी जिंदगी का सबसे तगड़ा ऑर्गेज्म महसूस किया

मेरी चूत से मेरा रस पिचकारी बनकर सामने की दीवार से जा चिपका

जैसे स्पाइडर मैन ने अपना जाला फेंक दिया हो

ठीक वैसे ही

दीवार पर मेरी चूत से निकला जाला छप सा गया

और धीरे-2 वो शॉवर के पानी की बूंदों के साथ घुलकर बहता हुआ नाली में चला गया

और मैं वही जमीन पर लेटकर ऊपर से गिरते शॉवर की बूंदे के नीचे नंगी लेटकर अपनी सांसों पर कंट्रोल करने लगी

करीब 5 मिनट तक अच्छे से मेरी चूत का पानी जब बाहर निकल गया तो मैं बेदम कदमो से उठी और शॉवर बंद करके वापस अपने रूम में आई

मन तो नहीं था अभी बाहर जाने का पर माँ को भी शायद निकालना था

इसलिए बाहर जाना ज़रूरी था

मैं एक छोटी सी शॉर्ट और बिना ब्रा के टी शर्ट पहन कर बाहर आ गई

झड़ने के बाद भी मेरे निपल्स की हालत में कोई कमी नहीं आई थी

वो निगोड़े अभी भी टी शर्ट से झाँक कर बाहर निकलने को आतुर थे

xn-4-t.jpg


जब मैं बाहर आई तो माँ पापा को कॉल करके उन्हें जाने के लिए बता रही थी

पापा को भला इस से क्या परेशानी हो सकती थी, उनके लिए तो ये सुनहरा अवसर था मेरे साथ खुलकर मजे करने का

मेरी नजर मामा की तरफ गई तो वो आंखें फाड़े मुझे देखे जा रहे हैं

और वो भी बड़ी बेशर्मी से

कोई भी लड़की होती तो उनकी ऐसी हरकत देखकर सहम जाती

पर मैं नहीं सहमी

मुझे तो मजा आ रहा था

उन्हें तड़पाने में

क्योंकि उनकी गिद्ध जैसी नजरें मेरे उभरे हुए निपल्स को घूर रही थी

वही निपल्स जिन्हे कुछ देर पहले मैं उनका नाम लेकर उमेठ रही थी

काश उनको बता पाती की मैंने उनके नाम की मोहर वहां पहले से ही लगा ली है

वो जब चाहे अपने हक की चुसाई कर सकते हैं

पर पापा की तरह उनके साथ खुलने में भी समय लग्न था और उसके लिए उनका साथ रहना जरूरी था, जो हो नहीं सकता था

इसलिए उन्हें अपनी अदाओं और हरकतों से मैं तड़पा रही थी ताकि उन्हें पता चले कि मैं क्या चीज हूं

मैं जान बुझकर उनके सामने घोड़ी बनकर टेबल के नीचे से माँ की सेंडल निकाल रही थी ताकि वो उन्हें अपने साथ ले जा सके

और मेरी फेली हुई गांड उस छोटी सी शॉर्ट में देख कर मामा का लंड बगावत पर उतर आया

मैं कनखियो से उनकी सब हरकतें नोट कर रही थी और धीरे-2 मुस्कुरा रही थी

करीब आधे घंटे बाद माँ ने अपना बैग तैयार कर लिया और वो खुद भी तैयार हो गई

जाने से पहले वो मुझे जोर से गले मिली और पापा का अच्छे से ध्यान रखने की हिदायत दी

उनके बाद मामा वो सुनहरा अवसर भला कहाँ छोड़ने वाले थे

उन्होंने भी मुझे गले लगाया और मेरे गालो पर एक गहरी सी पप्पी दी

और पप्पी देने के बाद उन्होंने भी अपनी जीभ से मेरे गालों पर वही हरकत की जो मैंने उनके कान के साथ की थी

अनहोनी भी अपनी जीभ निकाल कर मेरे गाल को धीरे से चाट लिया

मैं कसमसा उठी

मेरी आँखों में लाल डोरे उतर आये

पर मैं कुछ नहीं बोली

बस उन्हें अलविदा बोला और दरवाजा बंद करके भागकर अपने कमरे में आ गई

और एक बार फिर पहले की तरह पूरी नंगी होकर अपने बिस्तर पर लेट गई और मामा के नाम की भयानक तरीके वाली मुठ मारी

21212051.gif


सब कुछ शांत होने के बाद मैं उसी हालत में सो गई

करीब रात के 9 बजे मेरे फोन की घंटी बजी, मैंने देखा तो पापा को कॉल किया था

वो बाहर दरवाजे पर खड़े थे

मैने जल्दी से वही कपडे पहने और दरवाजा खोला

और कोई मौका होता तो वो बरस पड़ते, क्योंकि वो काफी देर से बेल बजा रहे थे उन्होंने जो मुझे सुनायी नहीं दी

पर आज उनका रवैय्या कुछ अलग ही था

साथ में वो पैकेट में कुछ स्नैक्स और खाने का सामान लाए थे

ताकी मुझे तकलीफ ना हो

तकलीफ तो मुझे होने वाली थी

क्योंकि आज की रात बहुत लम्बी होने वाली थी
 
सब कुछ शांत होने के बाद मैं उसी हालत में सो गई

करीब रात के 9 बजे मेरे फोन की घंटी बजी, मैंने देखा तो पापा को कॉल किया था

वो बाहर दरवाजे पर खड़े थे

मैने जल्दी से वही कपडे पहने और दरवाजा खोला

और कोई मौका होता तो वो बरस पड़ते, क्योंकि वो काफी देर से बेल बजा रहे थे उन्होंने जो मुझे सुनायी नहीं दी

पर आज उनका रवैय्या कुछ अलग ही था

साथ में वो पैकेट में कुछ स्नैक्स और खाने का सामान लाए थे

ताकी मुझे तकलीफ ना हो

तकलीफ तो मुझे होने वाली थी

क्योंकि आज की रात बहुत लम्बी होने वाली थी

***********

अब आगे

***********

पापा रह रहकर मेरी बिना ब्रा की टी-शर्ट से झाँक रहे निप्पल्स को घूर रहे थे

और मेरी शॉर्ट के नीचे की सुडोल जांघें भी उन्हें ललचा रही थीं।

कुछ देर पहले ही मैंने मास्टरबेट किया था इसलिए मैं काफी रिलैक्स मूड में थी

कोई और मौका होता तो खुद ही उत्तेजित होकर ऐसी वैसी हरकत कर बैठती कि पापा का काम आसान हो जाता पर अभी के लिए मुझे अपनी इच्छा शक्ति पर कंट्रोल करने का सुनहरा अवसर मिला हुआ था जो मैं अच्छे से कर भी रही थी।

201257.jpg


पापा ने अपनी वर्दी उतारी और उसे उतार कर अपनी कसावट वाली बॉडी सिर्फ अंडरवेयर में दिखाते हुए वो बाहर ड्राइंग रूम तक आए जहाँ मैं मोबाईल लेकर बैठी थी और टॉवल के बारे में पूछा

मैं जानती थी कि उन्हें पता है कि टॉवल मॉम कहाँ रखती है

पर फिर भी वो मुझसे पूछने आए

शायद अपने खड़े हुए लंड के दर्शन करा रहे थे वो मुझे अंडरवेयर के अंदर से

जो मैंने कर भी लिया और मन ही मन उसे नमन भी किया

करती भी क्यों नहीं ?

आखिर वही एक चीज़ है जो मुझे और मेरे पपा को मिलाने का काम करनी वाली थी

एक् ब्रिज बनकर हम दोनों के बीच...

images-1.jpg


उफ़ssssssss !

ये लंड के बारे में सोचते ही मेरी चूत क्यों रिसने लगती है?

मैंने तो कच्छी भी नहीं पहनी थी

इसीलिए गाड़े रस की लाइन मेरी जांघों से होते हुए नीचे जाने लगी

मैं जल्दी से भागकर मम्मी की अलमारी की तरफ गई और अंदर से टॉवल ढूंढकर उन्हें दिया

और जैसे ही मैं पलटी पापा एकदम से मेरे पीछे खड़े थे

मैं उनसे टकरा गई

पापा ने अपने हाथों से पकड़ कर मुझे गिरने से संभाला

अब आलाम यह था कि मेरी चूत से रस रिस रहा था और उसी चूत पर पापा का लंड किसी पहरेदार की तरह आकर बैठ गया था

हम दोनों के बीच सिर्फ़ 2 कपड़े का फासला था।

वरना उनके लंड ने मेरी चूत के रस सूँघ लिया होता तो वो मुझे वहीं पटक कर रगड़ देते

मेरे दूसरे हाथ में टॉवल था

मैंने जल्दी से उस टॉवल से बड़ी चालाकी से अपनी जांघों से निकल रहे रस को साफ कर लिया

पापा: “अरे… बेटा… संभल कर…”

संभल कर वो बोले तो रहें थे पर ये गिरना भी तो उनकी ही वजह से हुआ था

उनके हाथ अभी तक मेरी कमर पर थे

और नज़रें मेरी टी शर्ट को चीर बाहर आने के लिए उतारु निप्पल्स पर

shutterstock-2315444085-scaled.jpg


मैंने पापा के चेहरे के सामने अपनी चूत से पोंछा हुआ टॉवल लहरा दिया और बोली, “पापा… टॉवल …”

बेचारे पापा का चेहरा देखने लायक था

वो सिर्फ़ इतना ही बोले, “ऊम्म… हां … ओके… तुम… रुको… मैं नाहकर आता हूँ …"

इतना कहकर वो अपने खड़े लंड को छुपाते हुए बाथरूम में चले गए

मैं भी शरारती मुस्कान के साथ वापस ड्राइंग रूम में चली आई और एक अच्छी बेटी की तरह मैंने पहले सलाद की प्लेट तैयार की और फिर एक प्लेट में स्नैक्स निकाले और दूसरे में थोड़ी सी नमकीन

ठीक वैसे ही जिस प्रकार मम्मी करता है पापा के लिए

ऐसा करते हुए मुझे भी एक बीबी वाली फीलिंग आ रही थी

प्लेट्स तैयार होने के बाद मैंने वो सब लेजाकर ड्राइंग रूम में उनकी चेयर के सामने वाली टेबल पर रख दिया

और साथ ही एक ग्लास और उनकी बोतल भी, साथ में पानी और आइस भी।

और जब पापा बाहर निकले तो उन्होंने कपड़ों के बदले सिर्फ़ बाथ गॉउन पहना हुआ था, जिसकी डोरियां उनके पेट के सामने बंधी थीं और उनके लंड का उभार उसमें भी साफ दिखाई दे रहा था

साफ पता चल रहा था अंदर उन्होंने कुछ नहीं पहना।

टेबल पर लगा सामान को देखते ही उनकी आँखें खुशी से चमक उठी

"वाह… मेरी बेटी समझदार हो गई है, पता है कि मुझे क्या चाहिए…"

मैंने मासूमियत से अपने बूब्स उनकी तरफ ताने और बोली, "क्या चाहिए पापा… आपको."

short-t-shirt-qd-Zf-b.jpg


पापा बेचारे हक्के-बक्के रह गए

कभी वो अपनी शराब को देखते तो कभी मेरे बूब्स को

उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किसमें ज्यादा नशा मिलेगा

आखिरकार वो शराब की तरफ ही गए

मैं मन मसोस कर सामने वाले सोफ़े पर लेट गई और अपना मोबाइल चलाने लगी

पापा ने ग्लास में ढेर सारी आइस डाली और फिर उसे दारु से लबालब भर दिया—ऑन द रॉक्स।

images-2.jpg


और फिर कुछ देर बाद जब वो ठंडी हो गई तो एक लंबा सा सिप मारकर आँखें बंद कर ली

पहले पेग में ही उनके तन बदन में ठण्डक उतर गई थी

फिर वो भी अपना मोबाइल उठाकर देखने लगे

मैं कनखियों से देख रही थी

उनकी नज़र मुझपर ही थी

मेरी चिकनी टांगों पर

जांघों पर

पापा ने जब अपना पेग खत्म कर लिया तो उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया

मैं धड़कते दिल से उनके करीब गई तो उन्होंने मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे अपनी गोद में बैठा लिया—

जैसे 3 दिन पहले किया था, ठीक वैसे ही

पर आज उन्हें अपनी बीवी के आ जाने का खतरा नहीं था

मैं बैठ तो गई पर मुझे बाद में एहसास हुआ कि मैं किसी डंडे पर बैठी हुई हूँ

पापा को भी असहज महसूस हो रहा था

शायद कुछ देर पहले तक वो आधा अकड़ा हुआ सा उनकी जांघ पर पड़ा था

मेरे बैठने के बाद उसमें जान सी आने लगी थी

मुझे ऐसा एहसास हो रहा था जैसे मेरी गांड के नीचे कोई सांप रेंग रहा है

उत्तेजन के मारे उनका लंड धीरे -२ गहरी सांस छोड़ रहा था

और उनके लंड की नसें अकड़ कर उसे और बड़ा कर रही थी

images-3.jpg


पापा ने तब तक दूसरा पेग बना लिया

अब नशा उनपर चढ़ने लगा था
 
फिर वो धीरे से बोले, "सलोनी बेटा… अब तो तुम्हें कोई तकलीफ नहीं है ना?"

मैं: "तकलीफ… कैसी?"

पापा: "वो… वहां नीचे…तुम्हारी चूत में "

हैं........ चूत में। ......

ये पापा को क्या हो गया है

सीधा चूत वर्ड ही बोल दिया

पर शायद वो नशे में आ चुके थे

और नशे में इंसान नेचुरल तरीके से बोलता है , आम भाषा का इस्तेमाल करता है

पर उनका ये चूत बोलना मेरी चूत में आग सी लगा गया

और वो एक बार फिर से रिस गई

images-4.jpg


उनकी उँगलियो ने मेरी नंगी जांघ को छुआ और हाथ रेंगकर कर मेरी चूत के करीब लाये—बहुत करीब

मेरी सांसें अटक गईं

नीचे का अजगर और तेज फुफकारा

मैंने उसे अपनी नर्म गांड से कुचल दिया और बोली, "नहीं … पापा… अब तो ठीक है.."

मैंने झूठ बोला

पता नहीं क्यों

पर तकलीफ तो थी मुझे अभी भी…

पहले से ज्यादा

अब भी होने लगी थी अचानक से

जब से इनकी गोद में बैठी हूँ

पर शायद ये पापा जान-बूझकर पूछ रहे हैं

उन्हें पता है कि मेरी हालत क्या है इस वक्त और मम्मी के ना होने पर अब वो कुछ भी कर सकते हैं

चाहती तो मैं भी यही थी

पर इतनी आसानी से नहीं पापा

अब मैं भी बच्ची नहीं रही

इस खेल में मैं भी खिलाड़ी बन चुकी हूँ पापा

इसलिए जब पापा ने अपना पेग उठाया और उसे पीने लगे तो मैंने अपनी गांड पर जोर लगाकर उनके नाग को थोड़ा और कुछल दिया। बेचारे पीते-पीते रुक से गए और उनके मुंह से 'आहहह ' निकल गया।

मैं: "क्या हुआ पापा… आप ठीक तो है ना.."

पापा मेरी तरफ अजीब नज़रोँ से देखने लगे

मैं आँखो ही आँखो में मुस्कुरा रही थी

depositphotos-1370778-stock-photo-sexy-lady-sitting-on-mans.jpg


मैं बड़े आराम से उनकी गोद में बैठकर अपना मोबाइल देख रही थी और वो प्यासी नजरों से मेरे पिछवाड़े को

मेरे हिप्स उनके सामने ही थे , एक छोटी सी स्कर्ट में

उनके हाथ मेरी कमर के दोनों तरफ आ गए और वो मुझे धीरे -२ आगे पीछे करके हिलाने लगे

मेरा हल्का शरीर उनके धक्के से आगे पीछे होने लगा

और मैं इस वक़्त उनके लम्बे से लंड के ऊपर बैठी थी

ऐसा लग रहा था जैसे मई किसी पाइप पर फिसल कर आगे पीछे हो रही हूँ

मेरी चूत की फांके उनके लंड के दोनों तरफ रगड़ खा रही थी

और मेरे अंदर से निकल रहे रस ने उसे और रंवा कर दिया था

अब मेरी आँखे बंद सी होने लगी

मेरी शार्ट फिसल कर कब मेरी कमर पर चढ़ गयी, मुझे भी पता नहीं चला

और अब मैं अपनी नंगी गाँड और चूत लिए पापा के लंड पर फिसल रही थी

उम्मम्मम्म

ये पापा भी न

जो करना है एक ही बार में कर दे न

ऐसे तड़पाना कहाँ की समझदारी है भला

पर तड़पने के बाद उन्हें क्या मिलेगा, इसका उन्हें अच्छे से अंदाजा था

इसलिए वो मजे ले लेकर धीरे - २ आगे बढ़ रहे थे

कपडे की एक परत हट चुकी थी और अब सिर्फ पापा के गाउन का वो टॉवल वाला मखमली कपडा ही हमारे बीच रह गया था

धीरे-२ पापा ने अपने गाउन के दोनों सिरे पकड़ कर उन्हें खींचना शुरू कर दिया

मैं जब भी आगे जाती और फिर पीछे आती तो एक एक इंच करके वो कपडा दोनों तरफ पापा खींच रहे थे और करीब १ मिनट के अंदर ही वो पूरा हट गया मेरी चूत के नीचे से

और फिर मुझे एहसास हुआ

पापा के नंगे लंड का

मेरी नंगी चूत पर

ओह्ह्ह माय गॉड

मैं चिल्लाना चाहती थी

घूमकर पापा को स्मूच करना चाहती थी

उनके लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत में अंदर तक डालना चाहती थी

मैं चाहती थी की पापा मुझे वहीँ चोद डाले

अपनी शराब मेरे ऊपर डाले और मेरे नंगे बूब्स चूस ले

अपने हाथों से मेरी गांड को निचोड़े और मुझे कच्चा खा जाये बस

लेकिन

ये बस मेरी अंदर की वासना थी

जो सिर्फ मुझे ही महसूस हो रही थी

ऐसा कुछ करने की मेरी हिम्मत नहीं हो पा रही थी

पापा ने मेरी छोटी सी स्कर्ट के कपडे को समेटा और उसे मेरी कमर से ऊपर कर दिया

अब वो मेरे नंगे कूल्हे पीछे से साफ़ देख पा रहे थे

उनके हाथ मेरी कमर के सबसे निचले हिस्से पर रेंग रहे थे

मुझे एक सिहरन सी हो रही थी वहां हाथ लगवाने से

मैं कांप रही थी

मेरी लार निकल कर टेबल पर पड़े शराब के ग्लास में गिर रही थी जो पापा पीने वाले थे

अब मेरी चूत के लिप्स पापा के सख्त लंड पर स्लाइड करते हुए आगे पीछे हो रहे थे

मैंने नजरें झुका कर नीचे देखा तो मुझे उनके लंड का जामुनी सुपाड़ा अपनी चूत के आगे की तरफ से निकलता हुआ दिखाई दिया

ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड उग आया हो

पर ऐसा नहीं था, मैं ही उनके लंड पर कब्ज़ा किये बैठी थी

अचानक स्लाइड करते-२ उनके लंड का सूपाड़ा मेरी चूत के मुहाने पर आकर फंस गया

और मेरी साँसे हलक में अटक कर रह गई

images-5.jpg


पापा ने मेरी कमर पर दबाव डालकर मुझे आगे की तरफ किया और मैं टेबल पर झुकती चली गयी

मैंने सामने का सारा सामान साइड में कर दिया और अपने बूब्स को कांच के डाइनिंग टेबल पर टिका कर आँखे बंद कर ली

मेरी कमर सांप की तरह लहरा कर आने वाले नाग का इन्तजार कर रही थी

जिस चुदाई का सपना मैंने इतने टाइम से देखा था वो आज होने वाली थी

इसी टेबल पर

उफ्फ्फ्फ़

मैंने अपने आप को पापा के हाथ समर्पित कर दिया

पापा ने अपने लंड सीधा किया और धीरे से धक्का देकर उसे मेरी चूत के अंदर दाखिल कर दिया

लिसलिसी सी दीवारों में फंसकर पापा का लंड आगे जाने की शिद्दत करने लगा
 
पर वो एंगल ही ऐसा था की उस से आगे उनका लंड जा ही नहीं पा रहा था अंदर

शायद वहां जगह कम थी

पर इस वक़्त तो मुझे इस छोटी सी जगह में फंसकर पापा के लंड को अपनी चूत में महसूस करना बड़ा सकून दे रहा था

पापा भी समझ गए की इस से आगे डालने के लिए उन्हें मुझे बेड पर ले जाना पड़ेगा

पर इसके लिए उन्हें अपने पूरे सरूर में आना जरुरी था

और अभी के लिए वो अंदर जाना नहीं चाहते थे शायद

क्योंकि लंड चूत में फंसा हो तो आदमी उत्तेजित होकर कुछ भी कर डालता है

पर पापा बड़े इत्मीनान से लंड अंदर अटकाए बैठे थे

शायद उन्हें पता था की अभी नहीं तो बाद में उसे अंदर तो जाना ही है

अभी के लिए इस पल में उन्हें ज्यादा नशा मिल रहा था शायद

2560x1440-221.webp


इसलिए अपने लंड को उसी हद तक फंसाये हुए वो बैठे रहे और मैं कसमसाती हुई उस छोटी सी जगह में ही उनके लंड को अपने अंदर महसूस करके धीरे-२ खुद ही आगे पीछे होने लगी

मैंने झल्लाकर पापा की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रहे थे मेरी इस बेबसी पर

अगला पेग बन चूका था उनका

जिसे वो धीरे -२ पी रहे थे और मुझे उनके लंड को अंदर लेने की कसमसाहट में भरा देखकर मजे ले रहे थे

मेरी चूत से निकल रही चाशनी ने उनकी जांघो को पूरी तरह से भिगो दिया था

पापा के हाथ मेरी कमर पर फिसलने लगे

उन्होंने धीरे-२ मेरी टी शर्ट को ऊपर करके उसे निकाल फेंका और मुझे नंगा कर दिया

07020.gif


और फिर उन्होंने अपना हाथ खिसका कर आगे की तरफ कर दिया

मेरी साँसे तेज होने लगी

मेरी चूचियां उस डाइनिंग टेबल पर पीसी हुई पड़ी थी, मैंने उन्हें थोड़ा ऊपर उठाया और पापा के हाथ को आने का रास्ता दिया

और फिर उनके सख्त हाथो ने मेरे नन्हे कबूतरों को अपनी गिरफ्त में लेकर उन्हें धीरे-२ मसलना शुरू कर दिया

"उम्मम्मम्मम्मम।।।।।।। अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह उह्ह्ह पपायआ "

मेरी कमर ऊपर उठती चली गयी

मेरा सर पीछे होकर पापा के कंधे पर आ टिका और मेरा सीना तनकर सामने की तरफ किसी झंडे की तरह लहराने लगा

पापा के गर्म होंठ मेरे कानों पर आ लगे और वो उन्हें चूसने लगे

पापा अपने अंगूठे और उँगलियों से मेरे निप्पल्स को जोरों से मसल कर उन्हें बाहर की तरफ खींच रहे थे

जैसे उन्हें उखाड़ ही फेंकेंगे

"अह्ह्ह्हह उम्मम्मम्मम पापा स्स्सस्स्स्स अह्हह्ह्ह्ह।।।।। सक्क मी पापा सक्क मीईईssssss "

पापा ने मेरी एक बाजू अपने सर से घुमा कर दूसरे कंधे पर डाली और साइड में खिसक कर मेरे नन्हे बूब को अपने मुंह में लेकर उसे चूसने लगे

"ओह्ह्ह यससससस पापा , खा जाओ इन्हे।।।। पी डालो सारा जूस मेरा , ओह्ह्ह पापा , काटो इन्हे, जोर से काटो , उखाड़ डालो इन निगोडो को पापा "

images-7.jpg


मैं पता नहीं क्या -२ बड़बड़ा रही थी

मेरी टी शर्ट कब की निकल कर जमीन पर गिर चुकी थी और मैं टॉपलेस होकर पापा से अपने नन्हे अमरुद चुसवा रही थी

पापा का लंड अभी तक मेरी चूत की फांको में फंसा हुआ था

मैं उसे ऐसे महसूस कर पा रही थी जैसे कोई दिल धड़क रहा हो वहाँ नीचे

पापा मुझे बेतहाशा चूम रहे थे , चूस रहे थे , निचोड़ कर मेरा जूस निकाल रहे थे

और मैं उनका आधा अधूरा लंड अपनी चूत में लेकर उनकी गोद में बैठी किलकारियां मार रही थी

चिल्ला रही थी

तड़प -२ कर उन्हें और जोर से चूसने का आग्रह कर रही थी

पापा ने अपने पेग का एक सिप लिया और उस शराब वाले गीले होंठो को मेरे निप्पल पर लगा दिया

मैं सिहर उठी

पापा उन्हें काफी देर से चूस रहे थे , दारु लगने से वहां जलन सी होने लगी

पर दारु की महक ने मेरे निप्पल्स को और नशीला बना दिया

ये कॉकटेल पीकर पापा पर भी एक अलग क़िस्म का नशा चढ़ने लगा था

Gifs-Chupando-Peito-21.gif


अब मुझसे और पापा से और बर्दाश्त नहीं हो रहा था

पापा ने एक ही झटके में अपना पेग ख़त्म किया और मुझे अपनी बलशाली बाँहों में उठाकर मेरे बैडरूम की तरफ चलने लगे

मैंने पापा को रोका और बोली : "पापा, यहाँ नहीं, वहां , आपके बैडरूम में, मुझे माँ की जगह लेटना है, उनके बेड पर, और आपको अपना बनाना है, जैसे माँ बनाती है "

पापा मुस्कुरा दिए , उन्हें भला क्या दिक्कत हो सकती थी इसमें

पर ये मेरी फैंटसी थी

जबसे पापा के साथ चुदाई के बारे में सोचने लगी थी

तब से मैंने सोच लिया था की मेरा फर्स्ट टाइम उनके ही बेड पर होगा

और आज मेरा सपना साकार होने जा रहा था

पापा मेरे नंगे शरीर को अपनी बाँहों में उठाकर अपने बैडरूम की तरफ चल दिए

अब असली खेल शुरू होने वाला था
 
Thanks for your like

but ye kisne kaha ki ek saal me kahani khatm honi jaruri hai

wo alag baat hai ki mai pichle 3-4 mahine busy tha, par uske bavjood updates to de hi raha hu

I need real comment on my story not complaint about posting late...

ab meri life me kya chal raha hai uska dukhda mai yaha aap sabko nahi suna sakta, par meri puri koshish rehti hai update dene ki aur ye maine de bhi diya hai

Enjoy
 
Back
Top