Incest इंस्पेक्टर की बेटी - Page 7 - SexBaba
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बबलू की गन से निकली गोली सलोनी के चेहरे पर ज़ोर से टकराई और चारों तरफ छींटे उड़ाती हुई बिखर गयी

एक के बाद एक उसके लॅंड की पिचकारियों ने सलोनी के चेहरे को पूरा रंग दिया





उसके लॅंड की पिचकारियां उसने सीधा अपने मुँह में भी ली

क्योंकि पापा के लॅंड का पानी टेस्ट करने के बाद उसे इसका स्वाद अक्चा लगने लगा था

बबलू का टेस्ट थोड़ा अलग था पर एक अलग ही नशा था उसमें

जवानी का नशा

इसलिए वो अपने चेहरे पर लगे रस को भी उंगलियों से इकट्ठा करके चाट गयी

फिर उसने पास रखे वेट टिश्यू से अपने चेहरे को अच्छी तरह से साफ़ किया

कुछ ही देर में वो एकदम दमक रही थी उसके लॅंड से निकले पानी के तेज से

हो तो अभी बहुत कुछ सकता था

पर सलोनी ज़्यादा रिस्क नही लेना चाहती थी

बबलू आज अगर पापा के हाथों पकड़ा गया तो उसके साथ-2 वो भी बुरी फँसेगी

मॉम का तो पता नही क्या होगा

इसलिए अभी के लिए उसने अपनी सुलगती हुई चूत को दबाकर सांत्वना दी और बबलू को अपने कपड़े पहनने के लिए कहा

और खुद भी उसने टी शर्ट पहन ली और पहले जैसी हो गयी

उसके बाद उसने बबलू को समझा दिया की सामने वाला कमरा स्टोर रूम है

मॉम मों ने उसे वही छुपने के लिए कहा था और वो ही उसे निकालेगी पापा के सोने के बाद

फिर उसने धीरे से दरवाजा खोला, उसके रूम और स्टोर रूम की गॅलरी में कोई नही था

वहां से पापा का रूम भी नज़र नही आता था

वो ड्रॉयिंग रूम में होते तो नज़र आते पर आज वो अपने रूम में बैठकर पी रहे थे और टीवी देख रहे थे

ये उसके लिए अच्छा था

उसने धीरे से स्टोर रूम का दरवाजा खोला और उसे एक कोने में छुपकर माँ के आने का वेट करने की हिदायत दी और दरवाजा बंद करके वो अपने रूम में आकर लेट गयी

आज का पूरा दिन कितने एक्शन से भरा था

आज की शाम भी

और अब ये रात भी

आपने वाली रातें तो और भी रंगीन होने वाली थी

पापा के साथ और बबलू के साथ

बस यही सोचते-2 वो कब सो गयी उसे भी पता नही चला.
 
उसके बाद उसने बबलू को समझा दिया की सामने वाला कमरा स्टोर रूम है

मॉम ने उसे वही छुपने के लिए कहा था और वो ही उसे निकालेगी पापा के सोने के बाद

फिर उसने धीरे से दरवाजा खोला, उसके रूम और स्टोर रूम की गॅलरी में कोई नही था

वहां से पापा का रूम भी नज़र नही आता था

वो ड्रॉयिंग रूम में होते तो नज़र आते पर आज वो अपने रूम में बैठकर पी रहे थे और टीवी देख रहे थे

ये उसके लिए अक्चा था

उसने धीरे से स्टोर रूम का दरवाजा खोला और उसे एक कोने में छुपकर माँ के आने का वेट करने की हिदायत दी और दरवाजा बंद करके वो अपने रूम में आकर लेट गयी

आज का पूरा दिन कितने एक्शन से भरा था

आज की शाम भी

और अब ये रात भी

आपने वाली रातें तो और भी रंगीन होने वाली थी

पापा के साथ और बबलू के साथ

बस यही सोचते-2 वो कब सो गयी उसे भी पता नही चला.

**********

अब आगे

**********

सुबह जब मैं उठी तो पापा पुलिस स्टेशन जा चुके थे और माँ इधर-उधर भाग कर घर की साफ-सफाई का काम निपटा रही थी

अभी काम वाली नहीं आई थी, उस से पहले वो डस्टिंग का काम खुद ही करती थी

उन्होंने वही रात वाला गाउन पहनना हुआ था

मुझे नाश्ता करवाकर, साफ सफाई करके वो आराम से नहाती थी

यही उनकी रोज की दिनचर्या थी

मैं माँ के भरे हुए शरीर को देखकर सोचने लगी क्या मैं भी बाद में उनके जैसी हो जाऊँगी

हालांकि वो मोटी नहीं थी

पर उनके स्तन और गांड के हिस्से पर जरुरत से ज्यादा चरबी चढ़ी हुई थी





उन जगहों से वो मोटी थी

पर वही मोटे हिस्से तो मर्दों को पसंद आते हैं

और ये मर्दो का ही काम होता है उनको मसलकर, चूसकर, रगड़कर इस हालत में लाने का

मेरे शरीर पर भी मर्दो ने इसी तरह से काम किया तो वो भी ऐसी खास जगह से निखर जाएगा

ये सोच कर ही मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई

माँ: "खड़ी -2 क्यों मुस्कुरा रही है, आज कॉलेज नहीं जाना क्या...जल्दी नहा ले, मैं नाश्ता बनाती हूँ तेरा..."

मैंने सोचा, आज माँ से थोड़े पंगे के लिए जाए

इसलिए मैं बोली: “वो….माँ….कल रात को…कुछ आवाज़ें आ रही थी…।”

माँ काम करते-2 रुक सी गई, और धीरे से बोली: "आवाजें...कैसी आवाजें...कहाँ से..."

मैं "वो जैसे किसी के बात करने की...वहां ...स्टोर रूम से...।"

स्टोर रूम का नाम सुनते ही माँ के चेहरे का रंग उड़ गया

मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी दबाई

माँ: “वो….वो…..तुझे वहम हुआ होगा….ऐसा कुछ नहीं था…।”

मैं "सच में माँ...मैंने सोचा अंदर जाकर देख लू...और मैं गयी भी वहां ..."

ये सुनते ही माँ चौंक सी गयी और मुड़कर मुझे देखने लगी

दोनों की नजरें मिलीं

मैंने आंखो ही आंखो में मैंने उन्हें समझा दिया कि मुझे सब पता है...

बेचारी मां की आंख से आंसू निकल पड़े

मैं भागी-2 उनके करीब गई और उन्हें संभाला

“माँ….आप रोना मत ….ये बबलू वाली बात मैं किसी को नहीं बताऊँगी…वादा करती हूँ …पापा को भी नहीं..”

अब तो माँ को अच्छे से पता चल गया कि मैं उनका राज जानती हूँ,

ये सुनकर वो और जोर से रोने लगी

और बड़बड़ाने लगी

"आई एम सॉरी बेटा...मुझे पता नहीं क्या हो गया था...वो...मैं अपने ऊपर...कंट्रोल नहीं रख पाई...मुझसे गलती हो गई...प्लीज बेटा...ये बात किसी को नहीं बताना..."

मैं : "हाँ माँ...मैंने कहा ना, किसी को नहीं बताऊँगी...आप सही हैं अपनी जगह...पापा जिस तरह से आपको ऊपर कंट्रोल रखते हैं, आपको अपनी मर्जी से सब कुछ करने का पूरा अधिकार है"

मेरी बात अपने पक्ष में सुनकर माँ के आंसू रुक गए

वो मेरी तरफ प्यार से देखने लगी

शायद आज पहली बार उन्हें समझने वाला कोई मिला था

मैं : "माँ...मर्द बाहर निकल कर क्या करते हैं, ये कोई नहीं देखता, पर औरत पर सब पाबंदिया लगाते हैं, ये सही नहीं है, अपनी जिंदगी में आप अपनी मर्जी से कुछ भी करो, आपको जिसमें खुशी मिलती है, वो करो, और जो आपने किया है उसमें कुछ गलत नहीं है ...मैं आपके साथ हूं..."

इतना कहकर मैंने माँ को गले से लगा लिया, और उनके साथ -२ मैं भी रोने लगी

मज़ाक में शुरू हुई बात इमोशनल एंगल पर आकार ख़त्म हुई

पर ये सही था

हम मां बेटी के बीच कम से कम ये दीवार का गिरना जरूरी था

कल मैं भी उनकी जगह पर रहूंगी तो वो मुझे भी उतना ही समझेगी

खैर, मैं नहा धोकर नाश्ता करने के बाद कॉलेज के लिए निकल गई

आज तो मुझे श्रुति को बताने के लिए काफी मसाला था

बबलू वाला और फिर माँ के साथ वाली बात भी

और वो सब मैंने मसाला खाकर सुनाया भी उसे

वो भी मेरी जिंदगी में हो रहे उतार चढ़ाव की कहानी सुनकर हैरान रह गई

और बोली तेरी लाइफ पर तो एक सीरीज बन सकती है

सीरीज क्या, मैं तो पूरी फिल्म बनाने के चक्कर में हूं अब

क्योंकि मेरी चूत में अब कुछ ज्यादा ही खुजली होने लगी थी

मेरे चारों तरफ चुदाई हो रही थी

सिवाए मेरी चुदाई के

अब तो मुझे अपना सिडक्शन लेवल हाई करना पड़ेगा

और मैं पापा को अपनी तरफ आकर्षित करने के बारे में सोचने लगी थी

पर सबसे बड़ी दिक्कत तो माँ थी

उनके घर पर होते हुए मैं कुछ भी खुलकर नहीं कर सकती थी

अचानक मेरे दिमाग में एक आइडिया आया

मामू का घर

माँ को अपने मायके गये भी काफी दिन हो गये

वो वहां चली जाए तो बात बन सकती है

मेरे नाना नानी भी मामू के साथ ही रहते हैं, और उनकी एक ही बहन है, मेरी माँ

मैंने झट से अपने बंटू मामा (बलराज) को फोन लगाया, वो हमारे ही शहर में करीब 1 घंटे की दूरी पर रहते हैं

वो भी मेरी कॉल पाकर काफी खुश हुए

मैंने पहले तो इधर उधर की बातें की फिर उन्हें इमोशनल ब्लैकमेल करने लगी

मैं : "मामू , आपका तो पता नहीं पर मम्मी को आजकल आपकी और नाना नानी की बहुत याद आती है, आज सुबह भी वो रो रही थी, आपको तो कोई फ़िक्र ही नहीं है अपनी बहन की"

मामा भी एकदम सकते में आ गए

बात तो सच है

उन्होंने भी अपनी बहन से काफी दिनों से बात नहीं की थी और उन्हें मिले हुए भी करीब 4 महीने हो गए थे

वो तुरंत बोले: तू फिक्र ना कर सलोनी, मैं आज शाम ही घर आता हूँ और उसे जबरदस्ती घर लेकर आऊंगा, और वो भी पूरे हफ्ते दस दिन के लिए….पर .''

हफ्ता दस दिन...वाह

ये तो मेरे लिए बहुत है

लेकिन लास्ट में इन्होने पर क्यों बोला

“क्या हुआ मामू…..कुछ दिक्कत है क्या…”

मामू : "नहीं दिक्कत तो कुछ नहीं, असल में तेरी मामी भी अपने मायके गई हुई है कल से, और वो 5 दिन में आएगी...अगर ज्योति आई तो उसका होना भी जरूरी है ना घर पर...मैं ऐसा करता हु, उसे भी शाम तक या कल तक वापिस आने के लिए बोल देता हूँ फ़ोन करके "

मैं : "मामू, आप भी किस दुनिया में रहते हो, ऐसा कहा लिखा है कि लड़की जब अपने मायके आई तो उसकी भाभी का घर पर होना जरूरी है, वो अपने मायके गई है, उन्हें रिलैक्स करने दो, माँ अपने हिसाब से रिलैक्स करेंगी, वैसे भी 4-5 दिन बाद वो आ ही जाएगी ना , उन्हें आप अभी वहीं रहने दो और माँ को लेकर जाओ...ठीक है”

मामू: "मेरी सलोनी कितनी समझदार हो गई है, बिल्कुल अपने मामा पर गई है...है है ...ठीक है, मैं शाम को आता हूं"

मैं : "ठीक है मामू, थैंक यू , पर ये बात आप माँ को मत बोलना कि मैंने उनके रोने वाली बात कही है, वरना मेरी क्लास लगा देगी वो..."

माँ: "नहीं कहूंगी बेटी, चिंता मत करो, गलती मेरी ही है, अपने काम के चक्कर में अपनी बहन को भूले बैठा था, पर तूने मेरी आंखें खोल दी, मैं अभी निकल रहा हूं बस, फिर घर पर मिलते हैं..."
 
इतना कहकर उन्होंने फोन रख दिया

मैं ख़ुशी से उछल पड़ी

श्रुति भी भागती हुई मेरे पास आई और मेरी खुशी का करण पूछा, मैंने जब बताया तो वो भी चिल्लाती हुई मुझसे लिपट गई

उसे भी अपना फ़ायदा दिख रहा था शायद

पापा से चुदने के बाद उसकी चूत भी रह रहकर रिस रही थी





हालांकी इस बीच उसने अपने बॉयफ्रेंड के साथ भी एक बार चुदाई की थी

पर उसे वो मजा नहीं मिला जो उसे शमशेर अंकल यानी मेरे पापा ने दिया था

पापा ने उसकी चूत को खोल कर रख दिया था

अब तो उनका मोटा लंड ही वो कसावत वाली चुदाई दे सकता है जो उसे अंदर तक झंझोड़ कर रख दे

लंड जब चूत की अंदरुनी दिवारों पर रगड़ खाता हुआ अंदर बाहर होता है तो उस चुदाई का मजा ही अलग होता है

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कॉलेज खत्म होने के बाद शाम को जब मैं घर पहुंची तो मां ने दरवाजा खोला

उनके चेहरे पर एक अलग ही ख़ुशी थी

माँ: “सलोनी, पता है तेरे बंटू मामा आये हैं, और मुझे घर ले जाने की जिद्द कर रहे हैं…।”

अब मैं उन्हें क्या बोलती, ये सारा खेल मेरा ही रचा हुआ है

“बंटू मामा, वाह…।”

इतना कहकर मैं मामा -२ चिल्लाती हुई अंदर भागी

वैसा ही जैसा बचपन में भागती थी

मामा मेरी आवाज सुनते ही खड़े हो गए

और मुझे देखते ही उनके चेहरे के एक्सप्रेशन बदल गए

माँ से तो वो 4 महीने पहले मिले थे जब वो मायके गई थी, मुझे तो उन्होंने करीब 1 साल से देखा ही नहीं था

और इस बीच मेरे जिस्म में जो परिवर्तन आया था, मेरे कॉलेज पहनावे में जो अंतर आया था

उसे देखकर मामू का मुंह खुला का खुला रह गया

और तब तक मैं भागती हुई आकर उनसे लिपट गई

मेरे नन्हे अमरूद उनकी चौड़ी छाती में पिसकर रह गए

मेरे मामू थोड़े मोटे हैं, गोल मटोल से

और थोड़े से गंजे भी

पर एकदम क्लीन और चिकने बनकर रहते हैं, मुझे तो वो शुरू से ही वो बड़े क्यूट से लगते हैं





उनका मोबाइल का शोरूम है

सुबह से शाम तक बैठना और शाम को पैग लगाकर सो जाना, यहीं उनकी दिनचर्या थी

शायद इसलिए वो अपनी बहन को भूले बैठे थे

पर मैंने याद दिलाकर शायद अच्छा काम किया था

पर ये क्या

मामू ने मुझे ऐसे क्यों पकड़ा है

मैं मामू से लिपटी जरूर थी, क्योंकि उन्हें मैंने एक साल के बाद देखा था

पर उनकी बाहे मेरी कमर पर ऐसे लिपटी जैसे वो मुझे निचोड़ कर रख देंगे

मुझे वैसे तो कोई फर्क नहीं पड़ता पर मेरे पहले से बड़े हो चुके हैं बूब्स को जरूर फर्क पड़ रहा था

को उनकी छाती से पिसकर चपटे हो गए थे

ओह तेरी

अब मैं समझी

मामा के अंदर का मर्द जग रहा था शायद मेरे जवान जिस्म को देखकर

अपनी भांजी के जवान बदन की गर्मी को वो उसे निचोड़ कर महसूस कर रहे थे

माँ किचन में उनके लिए शाम का नाश्ता बना रही थी शायद, पकौड़ों की खुशबू आ रही थी

इसलिए मामा बेफिक्री से मुझे कसकर पकड़े रहे

मैं : "मामू, ये थोड़ा ज्यादा टाइट नहीं पकड़ रहे मुझे आप...।"

मामू: “तूने ये तो बता दिया कि मेरी बहन मुझसे 4 महीने से नहीं मिली तो वो मेरे लिए उदास हो गई, पर ये नहीं पूछा कि मैंने तुझे 1 साल से नहीं देखा तो मैं कितना उदास हुआ तेरे लिए …”

इतना कहकर उन्होंने मुझे हवा में उठा लिया

मैं किसी गुड़िया की तरह उनके सीने से लगकर झूल गई

ठीक वैसे ही जैसे वो मुझे बचपन में अपने गले से लगाकर झुलाया करते थे, घुमाया करते थे

मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए

उनके 50 साल की उम्र में भी इतनी ताकत है मुझे इसका अंदाज़ा भी नहीं था

पर रोंगटे खड़े होने का एक दूसरा कारण भी था

उनका खड़ा हुआ लंड महसूस कर पा रही थी अपनी चूत के सामने

यानी मेरे मामू मुझे देखकर उत्तेजित हो गए थे

ये तो होना ही था

आजकल मुझे देखकर अच्छे-अच्छों की हालत ख़राब हो जाती है, फिर इन्होने तो मुझे अपने बदन से चिपका रखा है

इनका ये हाल तो होना ही था

पापा के साथ मजे लेने के बाद रिश्तों में मुझे वैसे भी विश्वास नहीं रह गया था

एक औरत और एक मर्द में सिर्फ एक ही रिश्ता हो सकता है

जिस्म का

और इसलिए

जब मैंने अपने पापा को नहीं छोड़ा तो अपनी मामू को भला कैसे छोडूंगी

उनका भी मुझपर उतना ही हक है जितना पापा का

और यहां तो मामू ही मेरे पीछे पड़ गए हैं

इसलिए मैंने भी उनके रंग में रंग जाने का फैसला किया

और मैंने अपनी बाहें उनके गले में डाल दी

अपने होंठ उनके कानों के करीब लाई और अपनी गर्म सांसे छोड़ती हुई बोली

"मामू, मैं अब पहले जैसी नहीं रही, आपके ये बचपन वाले खेल अब मेरी समझ से बाहर है, खेलना है तो कुछ और खेलो"





इतना कहकर मैंने अपनी जीभ निकाल कर उनके कान पर लगा दी, मुंह में जितनी लार थी सब वहां उड़ेल दी मैंने

मेरी गरम जिभ उनके लाल हो चुके कान से लगी तो वो एकदम से कांप उठे

और उन्होंने मुझे नीचे उतार दिया

और तभी माँ किचन से पकौड़े और चाय की ट्रे लेकर बाहर आयी और बोली

“अब ये मामा भांजी का मिलन ख़त्म हो गया है तो चाय भी पी लो…वरना कहेगा कि ठंडी चाय पिला दी दीदी ने…”

उनकी बात सुनकर मामू खिसियाई हुई सी हंसी में हंस दिए

मैं भी उनके लंड वाले हिस्से को घूरते हुए अपने कमरे की तरफ चल दी

मामू भी मेरी भरी हुई गांड की मदमस्त चाल देखकर अपने कान पर लगी मेरी जीभ से निकली थूक साफ करने लगे

इतना रस छोड़कर आयी थी मैं उनके कान पर जो मेरे मुँह में था, वो सब उड़ेल आयी थी वहां

उन्हें शायद मुझे बच्ची समझा था पर मेरी बात सुनकर उन्हें पूरा अंदाज़ लग चुका था कि मैं कितना आगे जा चुकी हूं

पर अभी भी बेचारे और कुछ कर भी नहीं सकते

उनके पास टाइम ही नहीं था

मैं रूम में पहुंची और दरवाजा अंदर से बंद करके अपने सारे कपड़े निकाल फेंके

और नंगी जाकर शीशे के सामने खड़ी हो गई

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मेरा पूरा जिस्म जल रहा था

ख़ासकर मेरे नन्हें बूब्स

जिन्हे मामा ने अपनी छाती से रगड़कर लाल टमाटर जैसा कर दिया था

मैंने उन्हें अपने हाथों में पकड़ा और जोरों से मसल दिया

मेरे नन्हें निप्पल उभरकर फटने को आ गए

मेरा तो मन कर रहा था कि इन्हें इतने जोर से दबाऊं कि निपल निकल कर शीशे से जा चिपके पटाक से

पर ऐसा नहीं हो सकता

मैंने मुंह नीचे करके उन्हें मुंह से लगाया और मुंह में लेकर एक जोरदार चुप्पा मारा

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ये पहला मौका था जब मैं खुद का निप्पल चूस रही थी

हालांकी थोड़ी मुश्किल हुई पर मैंने स्ट्रेच करके ये कर ही दिया

दर्द भी हुआ पर मजा भी बहुत आया

काश मैं अपनी चूत भी चूस पाती खुद से ही

फिर तो मैं किसी के भरोसे ही नहीं बैठती

ख़ुद ही चूसती रोज़, और मज़े लेती

पर अभी के लिए बेसिरपेर की बाते सोचने का समय नहीं था

मैंने अपनी सुलगती हुई चूत पर हाथ रखा और उसे जोरों से दबा दिया

“सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स…….आहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह…….माआआआआअम्म्मम्म्मम्म्म्मुउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउ...

मेरी आँखे बंद हुई और मुँह से खुद ब खुद मामू निकल गया

निकलता भी क्यों नहीं

ये आग उनके हाथों की ही तो लगाई हुई है

काश मामू इसी वक्त दरवाजा खोलकर अंदर आए और मुझे फिर से निचोड़ दे

अब तो मैं भी अपना जिस्म निचुड़वाने के लिए तैयार थी

पर अब भी तो माँ खड़ी थी बीच में

ये पता नहीं मेरा पीछा कब छोड़ेगी

इनसे पीछा छुड़वाने के लिए ही तो ये मामू वाला प्लान बनाया था

और अब मामू ने ही वो आग भड़का दी जिसे बुझाने के लिए वो माँ को लेने आये थे

मामला पेचीदा हो रहा था

या शायद मेरे जिस्म की आग बढ़ती जा रही थी

जो मेरे आस-पास के हर मर्द से मजे लेने की बात सोच कर बढ़ती जा रही थी

मुझसे और सब्र नहीं हो रहा था

मैं बाथरूम में गई और शॉवर ऑन करके उसके नीचे खड़ी हो गई

ठंडा पानी मेरे जिस्म को भी शांत करने लगा

पर सिर्फ ऊपर-2 से

अंदर से तो मैं अब भी सुलग रही थी

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मैंने ढेर सारा शॉवर जेल लिया और अपने जिस्म पर रगड़ने लगी

पूरे बदन पर चिकनाहट और झाग फेल हो गई

ऐसी चिकनाहर में चूत में उंगली करने का अलग ही मजा मिलता है

मैं वहीँ फ़र्श पर बैठ गई और अपनी टाँगे खोलकर अपनी उंगली नुमा 2 सेनिक अपनी चूत से लड़ने के लिए उसके अंदर उतार दिए

अंदर जाकर वो सेनिक चिकनाहर से भरी दीवारें और बेहद संवेदनशील सी क्लिट के साथ जंग लड़ना शुरू हो गए

मेरी उंगली जितना अंदर जाकर उन्हें कुरेदती, मेरी जाँघे उतना ही दबाव बनाकर उन्हें चूत से बाहर निकाल फेंकती

इसी अंदर बाहर में मामू का प्यारा सा चेहरा मेरे सामने आ गया

और मुझे ऐसा एहसास हुआ जैसे मैं मामू के गले से झूल रहा हूं

पर वैसे नहीं जैसे कुछ देर पहले झूली थी

इस बार मैं उलटी लटक कर झूल रही थी

और वो भी पूरी नंगी

मेरी टाँगे उनके गले से लिपटी थी और मेरी चूत उनके मुंह के करीब थी

मेरा सर नीचे उनके घुटनों से थोड़ा ऊपर था जिसकी वजह से उनका मोटा लंड मेरे चेहरे के ठीक सामने था

यानि 69 का खड़ा हुआ पोज़ था वो

वो अपनी मोटी जीभ से मेरी छोटी चूत को को जोरों से चूस रहे हैं

और मैं बिलबिलाकर उनके मोटे लंड को चूसकर उनसे बदला ले रही थी

“ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह् हांस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्….माम्म्म्मुउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउ।

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और आंखें बंद करके उस पल मैंने अपनी जिंदगी का सबसे तगड़ा ऑर्गेज्म महसूस किया

मेरी चूत से मेरा रस पिचकारी बनकर सामने की दीवार से जा चिपका

जैसे स्पाइडर मैन ने अपना जाला फेंक दिया हो

ठीक वैसे ही

दीवार पर मेरी चूत से निकला जाला छप सा गया

और धीरे-2 वो शॉवर के पानी की बूंदों के साथ घुलकर बहता हुआ नाली में चला गया

और मैं वही जमीन पर लेटकर ऊपर से गिरते शॉवर की बूंदे के नीचे नंगी लेटकर अपनी सांसों पर कंट्रोल करने लगी

करीब 5 मिनट तक अच्छे से मेरी चूत का पानी जब बाहर निकल गया तो मैं बेदम कदमो से उठी और शॉवर बंद करके वापस अपने रूम में आई

मन तो नहीं था अभी बाहर जाने का पर माँ को भी शायद निकालना था

इसलिए बाहर जाना ज़रूरी था

मैं एक छोटी सी शॉर्ट और बिना ब्रा के टी शर्ट पहन कर बाहर आ गई

झड़ने के बाद भी मेरे निपल्स की हालत में कोई कमी नहीं आई थी

वो निगोड़े अभी भी टी शर्ट से झाँक कर बाहर निकलने को आतुर थे

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जब मैं बाहर आई तो माँ पापा को कॉल करके उन्हें जाने के लिए बता रही थी

पापा को भला इस से क्या परेशानी हो सकती थी, उनके लिए तो ये सुनहरा अवसर था मेरे साथ खुलकर मजे करने का

मेरी नजर मामा की तरफ गई तो वो आंखें फाड़े मुझे देखे जा रहे हैं

और वो भी बड़ी बेशर्मी से

कोई भी लड़की होती तो उनकी ऐसी हरकत देखकर सहम जाती

पर मैं नहीं सहमी

मुझे तो मजा आ रहा था

उन्हें तड़पाने में

क्योंकि उनकी गिद्ध जैसी नजरें मेरे उभरे हुए निपल्स को घूर रही थी

वही निपल्स जिन्हे कुछ देर पहले मैं उनका नाम लेकर उमेठ रही थी

काश उनको बता पाती की मैंने उनके नाम की मोहर वहां पहले से ही लगा ली है

वो जब चाहे अपने हक की चुसाई कर सकते हैं

पर पापा की तरह उनके साथ खुलने में भी समय लग्न था और उसके लिए उनका साथ रहना जरूरी था, जो हो नहीं सकता था

इसलिए उन्हें अपनी अदाओं और हरकतों से मैं तड़पा रही थी ताकि उन्हें पता चले कि मैं क्या चीज हूं

मैं जान बुझकर उनके सामने घोड़ी बनकर टेबल के नीचे से माँ की सेंडल निकाल रही थी ताकि वो उन्हें अपने साथ ले जा सके

और मेरी फेली हुई गांड उस छोटी सी शॉर्ट में देख कर मामा का लंड बगावत पर उतर आया

मैं कनखियो से उनकी सब हरकतें नोट कर रही थी और धीरे-2 मुस्कुरा रही थी

करीब आधे घंटे बाद माँ ने अपना बैग तैयार कर लिया और वो खुद भी तैयार हो गई

जाने से पहले वो मुझे जोर से गले मिली और पापा का अच्छे से ध्यान रखने की हिदायत दी

उनके बाद मामा वो सुनहरा अवसर भला कहाँ छोड़ने वाले थे

उन्होंने भी मुझे गले लगाया और मेरे गालो पर एक गहरी सी पप्पी दी

और पप्पी देने के बाद उन्होंने भी अपनी जीभ से मेरे गालों पर वही हरकत की जो मैंने उनके कान के साथ की थी

अनहोनी भी अपनी जीभ निकाल कर मेरे गाल को धीरे से चाट लिया

मैं कसमसा उठी

मेरी आँखों में लाल डोरे उतर आये

पर मैं कुछ नहीं बोली

बस उन्हें अलविदा बोला और दरवाजा बंद करके भागकर अपने कमरे में आ गई

और एक बार फिर पहले की तरह पूरी नंगी होकर अपने बिस्तर पर लेट गई और मामा के नाम की भयानक तरीके वाली मुठ मारी

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सब कुछ शांत होने के बाद मैं उसी हालत में सो गई

करीब रात के 9 बजे मेरे फोन की घंटी बजी, मैंने देखा तो पापा को कॉल किया था

वो बाहर दरवाजे पर खड़े थे

मैने जल्दी से वही कपडे पहने और दरवाजा खोला

और कोई मौका होता तो वो बरस पड़ते, क्योंकि वो काफी देर से बेल बजा रहे थे उन्होंने जो मुझे सुनायी नहीं दी

पर आज उनका रवैय्या कुछ अलग ही था

साथ में वो पैकेट में कुछ स्नैक्स और खाने का सामान लाए थे

ताकी मुझे तकलीफ ना हो

तकलीफ तो मुझे होने वाली थी

क्योंकि आज की रात बहुत लम्बी होने वाली थी
 
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