Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 32 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -291

गिरजा अपने कामो में लगी हुई थी पर उसके दिलो दिमाग में इस वक़्त यही चल रहा था की कैसे रवि अब भी उसकी बहु को छोड़ रहा है रात भर छुड़वाने के बावजूद उसकी बहु अब भी सोते सोते छुड़वा रही है

क्या किस्मत है मेरी बहु की जो हर वक़्त चुदाई नसीब होती है उसे

न जाने किस मिटटी का बना है ये रवि हो दिन रात उठाते बैठते सिर्फ चुदाई hi करता है क्या हाल किया है मजे ने मेरी बहु की छूट और गांड का

क्या मेरा बता ये सब समझ जायेगा जब वो अपनी बीवी के छेड़ो को देखेंगे तो या कही वो पहले hi समझ चूका है की उसकी बीवी पहले से hi चूड़ी चुदाई इस घर में आयी है

गिरजा के दिलो दिमाग में सिर्फ यही बाटे चल रही थी

इधर दूसरी और रवि अब भी अपनी दीदी की गांड में अपना लुंड घुसाए बेफिक्र होकर सोया हुआ था

करीब 6 बजे कम्मो की आँख खुलती है

रवि पीछे से उससे पूरी तरह चिपका हुआ था मनो दोनों मिया बीवी हो न की भाई बेहेन

कामो आगे की और होकर उठने की कोशिस करती है

पर रवि की पकड़ काफी मजबूत थी

कामो - रवि ोू रवि उठ जा भाई देख सूरज निकल आया है

रवि अपनी कमर को आगे की और दबाता हुआ कामो को और भी मज़बूरी से अपनी से चिपका लेता है

कामो को अहसास होता है की रवि का लुंड अब भी उसकी गांड में घुसा हुआ है और पूरा खड़ा भी है

कामो अपनी गांड को आगे की और खींचती हुई थोड़ा सा लुंड बहार निकलने में कामयाब भी हो जाती है

तभी रवि पीछे से अपनी कमर को दुबारा आगे बढ़ा देता है

उसका लुंड फिर उसकी दीदी की गांड की गहराइयो में घुस जाता है

रवि- दीदी इसे भी सोना है सोने दो न

कामो- सोना है तो क्या मेरी गांड में घुसा कर सुलाएगा तू इसे और ये साला सू खा रहा है पूरा डंडे की तरह मेरी गांड में घुसा पड़ा है

रवि - ओफ्फोुहहू दीदी कितना परेशां करती हो तुम आपको नहीं पता आपकी गांड की गर्मी इसे ऐसे रहने पर मजबूर कर रही है नहीं तो जब मेने घुसाया था तब तो ये छोटा सा बच्चा hi था

कामो - है है जानती हु हरामी तुझे तो बस मेरी गांड मरने का बहाना चाहिए कहे में जगी हुई हु या सोई हुई हु तुझे क्या फरक पड़ता है

और वैसे ये बता तूने उसे मेरी गांड में घुसाया कब

रवि- हहहहह दीदी देखा आपको पता भी नहीं चला

कामो - छोड़ छोड़ कर इतनी फैला जो दी है तूने मेरी गांड तो पता कैसे चलेगा और ऊपर से रात भर इसे मेरी गांड में ठुसे सू रहा है

रवि - पर मजा तो आया न दीदी

कामो - मजा तो आया है पर अब तो छोड़ देख दिन निकल आया है दरवाजा भी खुला है सासु माँ भी देख कर चली गयी होगी न जाने क्या सोच रही होगी

रवि- अरे दीदी वो तो दिन निकलने से पहले hi देख कर चली गयी

रवि की बात सुनकर कामो का मुँह खुला का खुला रह जाता है

रवि एक एक कर कामो को साडी बाटे बता देता है और अपनी शर्त्त के बारे में भी बता देता है

कम्मो- तो क्या सच में तूने देखा सासु माँ मेरे छेड़ो के साथ खेल रही थी

रवि- है है दीदी तुम्हारी कसम

Kaamo-aur उन्होंने तेरी मुठ्ठ भी मरी

रवि- दीदी बस मुठ hi नहीं मरी पूरा लुंड निचोड़ दिया तभी तो छोड़ने को मन कर गया आप चैन से अपनी गांड फैला कर सो रही थी मुझे काफी प्यारी लगी

में तो आपने पीछे आकर लेता पर पता नहीं लुंड कैसे आपकी गांड के भीतर घुस गया

कामो- घुस गया उससे मुझे कोई परेशानी नहीं है में तो कहती hi यही हु की मेरे छोटे भाई का लुंड दिन रात मेरी गांड और छूट में घुसा रहे मुद्दा ये नहीं है मुद्दा तो ये है की क्या सासुमा सच में तुझसे छुड़वाने के लिए तैयार हो गयी है

रवि- उसके लिए आपको काफी कुछ करना पड़ेगा

Kaamo-me तो कल से hi अपना मुद बना चुकी हु सासु माँ को अपना असली रंग दिखने का

रवि- तो देख लो दीदी आज आपके पास मौका है खुद को रेखा दीदी से भी ज्यादा चुड़क्कड़ औरत शाबित करने का

Kammo-tu बेफिक्र रह मेरे भाई आज देखता जा तेरी दीदी क्या क्या करती है बस तू इसे तैयार रखना जो इस वक़्त मेरी गांड में सोया हुआ है

रवि - अब ये गांड थोड़े hi है दीदी

Kaamo-gand नहीं है तो क्या है

रवि- अब तो ये मियाँ है जिसमे में अपनी इस तलवार को रखूँगा रोज रात को इसका काम ख़तम करके

दोनों भाई बेहेन हसने लगते है

हसने की आवाज बहार गिरजा को भी सुनाई दे रही थी वो यही सोच रही थी की आज रवि दिन भर न जाने क्या क्या करेगा उसके सामने इसी कारन सुबह सुबह hi उसने सुखिया को सफाई करने का बहाना बनाते हुए अपने कमरे में शिफ्ट कर दिया था आखिर कहती तो वो भी यही थी

कामो - अब इस तलवार को तू निकलेगा या नहीं मियाँ में से

रवि - दीदी मैं तो नहीं कर रहा इसे बहार निकलने का

कामो- तब क्या में तेरे लौड़े पर hi हैगगग दू वासी भी बड़ी जोर की हगवास लगी है

रवि - तुम ऐसे hi हगति जाओ दीदी में इसे अंदर hi रखूँगा

कामो - जब यही काम करना है तो चल खुल्ले में चल कर करते है न सासुमा के सामने वो भी तो देखे अपनी बहु को वल्कि वो छुड़वाने के मामले में किस हद्द तक्क जा सकती है

रवि- तो ठीक है चलो

कामो- कमीने इसे तो निकाल पहले

रवि अपनी पकड़ ढीली कर देता है कामो आगे की और खिसक जाती है

फुसस्स की आवाज के साथ रवि का लुंड कम्मो की गांड से बहार आ जाता है जिसेक बाद कामो एक के बाद एक कई सरे पाद मरती है जिसकी हवा कमरे का माहौल और भी कामुक कर देती है

रवि के लुंड पर पिली पिली चीज़ लगी थी जो खुद उसकी दीदी की गांड में इकठ्ठा हुई हगवास थी

रवि उसे अपने हाथो से मसलता हुआ अपने लुंड को मुठियाता है

रवि- दीदी लगता है कुछ ज्यादा hi हगवास जमा कर राखी हो अपनी गांड के भीतर

कामो अपने छोटे भाई को अपनी hi हगवास के साथ खेलते हुए देख कर शर्मा जाती है

Kammo-raat भर ऐसे लुंड ठुस्स कर सोयेगा मेरी गांड में तो तेरी तलवार पर मेरी हगवास तो लगेगी न भाई और वैसे भी अभी तो साडी की साडी अंदर hi है जो तुझे hi बहार निकालनी है अपनी ये तलवार मेरी मियाँ में दाल कर

रवि- में तो मर्रा जा रहा हु दीदी तुम्हारी हगवास बहार निकलने के लिए

कामो अब तक अपने कपडे पेहेन चुकी थी

उसने पेटीकोट नहीं पहना था और न hi ब्लाउज सिर्फ अपनी सदी को इस तरह लपेट लिया था की उसका मांसल गदराया जिस्म किसी तरह धक् जाये

Kammo-chal अब बहार चल और देख अपनी दीदी का रान्दीपना

कामो बहार आ जाती है

गिरजा अपनी बहु का रूप देख दांग रह जाती है इधर पीछे पीछे रवि भी बहार आ जाता है

कामो झुक कर रोज की तरह अपनी सासु माँ के पेअर चुटी है और उनका आशीर्वाद लेती है

पीछे से देख कर गिरजा समझ गयी थी की उसकी बहु ने सदी के निचे कुछ नहीं डाला है

Kaamo-maa जी मुझे बहुत जोर की हगवास लगी है

Girja-thik हहहह बशूऊ जोऊ पीछे कोई नहीं आएगा वह इस वक़्त

कम्मो के जाते hi रवि भी उसके पीछे जाने लगता है

गिरजा- वो तो हगने जा रही है तू खा चल दिया उसके पीछे रात भर छोड़ा है अब तो हग्ग लेने दे बेचारी को

रवि- मम्मी जी असली मजा तो अभी आने वाला है

रवि इतना बोलकर कामो के पीछे चल देता है

असल में गिरजा का घर गाओं से काफी बहार और एकांत में था झा दिन भर में शायद hi कोई आता था और घर के पिछवाड़े उन्होंने थोड़ी दूर तक्क बाउंड्री करवा राखी थी जिसमे वो सब्ज़िया उगाया करते थे तो अगर कोई आ भी गया तो देखने का कोई चांस hi नहीं था

इधर गिरजा के दिल की धड़कने बढ़ने लगती है आखिर रवि किस असली मजे की बात कर रहा था

कहि वो उसकी बहु को हगते हुए तो नहीं छोड़ने वाला

गिरजा के हाथो में झड़ी थी वो उसे वही फेक कर पीछे बानी खिड़की के पास चली जाती है

खा से उसे वो दोनों भाई बेहेन साफ़ नजर आ रहे थे ....
 
अपडेट -292

रवि - है दीदी कितनी फैले गयी है ये गांड तुम्हारी

कम्मो - चुप कर कमीने सब तेरा hi किया धरा है

रवि - लो अब इसमें भी मेरी गलती है

कामो- हम्म तेरी hi गलती है

रवि- वो कैसे दीदी

कामो- रोज रोज कोई अपनी दीदी की गांड मरता है क्या भला

रवि- अरे दीदी जब गांड ऐसी हो तो में hi नहीं बल्कि दुनिया में कोई भी भाई ऐसा नहीं होगा जो बिना चोदे छोड़ दे

कामो- है वही तो में भी कह रही हु जब तू रोज बिना रुको ऐसे hi मेरी गांड छोड़ता रहेगा तो इसका साइज तो बढ़ेगा न भाई

रवि - अब कुछ भी हो दीदी पर सच कह रहा हु इस गांड को देख कर मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है

कामो - अच्छा मेरी गांड देख कर तेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है तो मेरी सास की देख लेगा तब तो तू पानी धोती में hi झाड़ जायेगा हहहहह

अपनी बहु के मुँह से अपनी तारीफ सुनकर गिरजा के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है

भले hi वो उसके ाँगो की तारीफ कर रही थी

रवि - अरे दीदी पूछो मत साली की गांड सदी के अंदर से hi इतनी बड़ी लगती है अगर कहि सदी और पेटीकोट उतर गया तो फैले हुए पहाड़ नजर आएंगे

कामो- हहह तुझे मिलने वाली है मेरी गांड और तारीफ कर रहा है मेरी सास की गांड की

वो तेरे हाथ नहीं आने वाली बीटा तुझे तो मेरी गांड से hi काम चलना पड़ेगा

दोनों भाई बेहेन जानते थे की गिरजा उन्हें देख और सुन्न रही है इसी लिए बिना कोई जल्दबाज़ी किये दोनों गिरजा के तन बदन में चिंगारी सुलगने का काम कर रहे थे

रवि - तो आज देख hi लेना दीदी आज hi छोडूंगा और तुम्हारे सामने मेरा भी नाम रवि नहीं अगर मेने तुम्हारी सास की गांड को इन्ही हाथो से नहीं फिआलया तो

kaamo-accha मुझे तो मालूम hi नहीं था

और वो भला कैसे करेगा तू

रवि - बस देखती जाओ दीदी

kaamo-accha चल ठीक hi है एक तरह से वैसे भी बेचारी इतनी प्यारी है ऊपर से मेरी सासु माँ का शरीर ऐसा है की मुझे तो लगता है हर पल भी अगर उन्हें कोई घोड़ी बना कर छोड़ेगा तो भी उनकी प्यास नहीं बुझने वाली

रवि - बात तो सही कह रही हो दीदी पर में उसे घोड़ी बनी कुटिया बना कर छोडूंगा

कामो- जैसे मुझे छोड़ता है

रवि आगे बढ़ कर कामो के ब्लाउज के बोटों खोलना शुरू कर देता है

रवि - हां दीदी सही खा जैसे में तुझे छोड़ता हु और अब छोडूंगा

कामो भी अपने भाई के शरीर पर डाली हुई एक मात्र धोती को गांठ खोल देती है और धोती के गिरते hi अपने छोटे भाई का लुंड दोनों हाथो में थम कर अपने छोटे भाई को प्यासी नजरो से देखने लगती है

कामो - मतलब तू अपनी दीदी को भी कुटिया बनाएगा

रवि - हम्म दीदी को कुटिया बनाऊंगा और में दीदी का कुत्ता बनाऊंगा

कामो- अहह तेरा लुंड इतना कैसे खड़ा रहता है रे भाई रात भर तू इसे मेरी गांड में hi ठुस्स कर सोया था उस समय भी ये खड़ा था और अब भी खड़ा है

रवि - ये लुंड भगवन ने मुझे दिया hi तुम्हारे लिए है दीदी

ताकि में अपनी दीदी को कभी प्यासी न रहने दू

कामो- अहह इसे पकड़ कर मुझे लगता है मनो मुझे अपनी मंजिल मिल गयी हो

रवि- अभी तो मंजिल तक पहुंचने बाकि है दीदी इतनी भी जल्दी क्या है पहले नंगी तो हो जाओ

Kaamo-to तू hi कर दें न मुझे नंगी जैसे रोज रात करता है आज था खुले आस्मां के निचे भी मुझे नंगा कर दे

गिरजा- में तो सोच रही थी दोनों संदाद करने जा रहे है ये मेरी बहु कितनी बड़ी रंडी है रात भर अपनी गांड में लौड़ा भर कर सोई थी और अब देखो फिर छुड़वाने को तैयार है

गिरजा अपने शरीर से एक एक कर सरे कपडे उतर नंगी हो जाती है और अपनी एक चुकी को दबती हुई अपनी छूट मसलना शुरू कर देती है

इधर रवि अब तक अपनी दीदी का पेटीकोट उतर उसे नंगा कर चूका था

रवि अपनी घुटनो पर बैठता हुआ कामो कर एक पेअर उठा कर अपने कंधे पर रख देता है

अब उसके सामने उसकी दीदी की बिना बालो वाली फूली हुई छूट थी

जिसके बड़े बड़े लटके हुए काळा होठ देख कर रवि के मुँह में पानी आ रहा था

रवि- दीदी सच कहु तो औरत की असली खूबसूरती छुड़वाने के बाद hi निखार कर बहार आती है

कामो- तू औरत की बात कर रहा है या छूट की

रवि - दोनों की

इतना बोलते hi रवि कम्मो की छूट पर टूट पड़ता है और अपने दोनों हाथो से उसकी गांड को मसलता हुआ अपना मुँह अपनी दीदी की छूट में घुसाने लगता है

कामो सिसकिया भर्ती हुई अपने भाई का सर थम लेती है और अपने दूसरे हाथ से पास वाला पेड़ पकड़ लेती है

रवि- आह्ह्ह्ह भाई आराम से तेरी hi है ये छूट खा जाएगा क्या तू अपनी दीदी की छूट को अह्ह्ह हा ऐसे hi और अंडरर घुसा अपनी जीभ रावी अह्हह्ह्ह्ह मेरे भाई काट मत्तट अह्ह्ह्हह्हह कितना अच्छा छूट चाटता है रे तू

कामो कुछ hi पल में थरथर कम्पनी लगती है

इधर पीछे से रवि अपनी 2 उंगलिया कम्मो की गांड में पेल देता है

ये नजारा बेहद hi कामुक था

जिसे देख गिरजा पानी पानी हुई पड़ी थी और अब तक उसकी आँखों में वासना के बदल चा चुके थे उसका हाथ काफी तेजी से छूट को मसल रहा था

कम्मो- अहह रवि ऐसे hi चूस भाई अपनी दीदी की छूट अह्ह्ह म झड़ने वाली हु

हट जा रवि मेरा पेशाब निकलने वाला है

रवि - मेरे मुँह में hi मुट्ठ दो दीदी

कम्मो रवि के सर को दबती हुई उसके मुँह में hi मूतने लगती है

इधर गिरजा को अब एक और झटका लगता है दोनों भाई बेहेन का करम कांड देख कर वो सोच भी नहीं सकती थी की एक बहन हवस में इतनी पागल हो जाएगी की वो अपने छोटे भाई के मुँह में hi मूतना शुरू कर देगी पर कुछ भी हो ये सब गिरजा को पागल कर रहा था

देखते hi देखते गिरजा अपनी छूट में 3 उँगलियाँ घुसा कर पागलो की तरह अंदर बहार कर रही थी उसकी छूट से भी रह रह कर पेहसाब बहार आ रहा था

जो सफ़ेद पानी के साथ उसकी जांघो से बेहटा हुआ जमीन पर गिर रहा था

काफी देर तक कामो अपनी भाई के मुँह में hi मुट्ठी रहती है और अंतत में रवि अपनी दीदी की तंग को छोड़ता हुआ उठ जाता है

रवि को उंगलिया अब भी कामो की गांड में hi थी बस फरक इतना था की अब 2 की जगह 3 उंगलिअ थी उसकी गांड के भीतर

रवि कम्मो की गांड गिरजा की तरफ घुमा देता है और अपने होठो को कामो के होठो से मिलता हुआ उसे भी उसके पेहसाब का स्वाद कहने लगता है

गिरजा साफ़ देख रही थी कैसे रवि की तीन मोती मोती उंगलिया उसकी बहु की गांड में बड़े आराम से अंदर बहार हो रही है

गिरजा बिना किसी संकोच के अपने दूसरे हाथ को अपनी गांड पर ले जाती है और अपनी सबसे बड़ी ऊँगली अपनी गांड में घुसाने लगती है

कुछ hi पल में उसकी ऊँगली भी गांड में अंदर बहार हो रही थी

उसकी आँखे बंद थी और अब 3 उंगलिया छूट में तो एक गांड में

गिरजा गांड में ऊँगली करने भर से hi पागल हो गयी थी

गिरजा - अह्ह्ह बहु अब में समझ गयी तू क्यों इतना गांड मरवाती है अपने भाई से अह्ह्ह कितना मजा आ रहा है एक hi ऊँगली से इसकी जगह अगर लुंड जायेगा तब कितना मजा ाईएगा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में मर्डर जाउंगी अगर मुझे लुंड ना मिला तो मेरी प्यास बुझने का नाम नहीं ले रही है बहु तू बोल न अपनी छोटे भाई से अपनी सास को भी छुड़वा दे न बहु अपनी छोटे भाई से अह्ह्ह कितना मोटा लौड़ा है कमीने का तू तो उसकी रखैल बन गयी है मुझे भी बना दे अपने भाई की रखैल बहु

गिरजा के मुँह से अब अनाप स्नेप निकल रहा था वो खुद भी झड़ने के करीब थी और देखते hi देखते उसके पाऊँ भी कम्पनी लगते है और वो झड़ने लगती है

पर न तो वो गांड वाली ऊँगली बहार निकलती है और न hi छूट वाली

गिरजा की सांसे अब भी भरी थी पर हाथ लगातार अपना काम कर रहे थे मनो एक बार झड़ने भर से उसकी प्यास आज बुझने वाली नहीं थी

इधर रवि देख चूका था गिरजा को

वो उसे नजरअंदाज करता हुआ लगातार अपनी दीदी के मुँह में अपनी जीभ चला रहा था और पीछे से अपनी दीदी की गांड में लगातार उंगलिया पेल रहा था ....
 
अपडेट -293

अब तक रवि कामो को दूसरी और घुमा चूका था और गिरजा को अब अपनी बहु की फटी हुई गांड भी साफ़ साफ़ नजर आ रही थी

रवि - दीदी इसे फैलाओ

कामो अपने दूसरे हाथ से अपनी गांड की एक साइड को पकड़ कर फैलाती है

रवि दूसरी साइड को फैलता हुआ अपने हाथ को आगे पीछे चलने लगता है

कामो को इस वक़्त काफी दर्द हो रहा था

क्योंकि अब रवि की 3 नहीं 4 उंगलिया उसकी गांड के भीतर थी

पर यह अहसास उस दर्द पर हावी हो चला था जिसमे एक भाई खुद hi अपनी बेहेन को गांड को अपने पंजे से छोड़ रहा था

रवि - अह्ह्ह दीदी कितनी कासी हुई है तुम्हारी गांड

कामो - अहह आराम से भाई मेरी गांड फाटत जाएगी

रवि- फट जाने दो दीदी आज आज में नहीं रुकूंगा

कामो अपनी गांड को और पीछे की और धकेल देती है

रवि लगातार अपने पंजे से अपनी दीदी की गांड को फ़ैलाने पर तुला हुआ था

जब जब रवि अपना हाथ बहार निकलता अपनी बहु की फटी हुई गांड का छेद देख गिरजा की आँखे चौड़ी हो जाती

वो कुछ सोचती उससे पहले रवि फिर से अपना हाथ कम्मो की गांड में थुश देता

रवि- दीदी थोड़ा दर्द होगा बर्दास्त कर लेना

कामो- अह्ह्ह अब कितना दर्द देगा भाई अपनी दीदी को तब से तो बर्दास्त कर hi रही हु

रवि - बस थोड़ा और दीदी बस थोड़ा और उसके बाद मेरा यकीन करो तुम्हे काफी मजा आएगा

रवि ऊपर से hi अपनी दीदी की गांड पर थूक गिरते हुए अपने पुरे हाथ को कम्मो की गांड में धकेलने लगता है

मुट्ठी बनता हुआ

कामो का दर्द से बुरा हाल था पर उसके चेहरे के भाव लगातार बदल रहे थे

जिसे गिरजा भी देख पा रही थी मनो वो दर्द उसे और ज्यादा मजा दे रहा हो

इधर दूसरी और गिरजा का दिल जोरो से धड़क रहउसके जेहन में यही चल रहा था क्या उसकी बहु ये झेल पायेगी

क्या रवि का पूरा हाथ उसकी गांड के अंदर घुस जायेगा

क्या मेरी बहु को मजा आ रहा है ऐसे अपनी गांड में हाथ डलवाते हुए

कुछ इसी तरह से गिरजा के जेहन में उधेड़ बहन चल रही थी

इधर रवि अपना पूरा पंजे को अपनी दीदी की गांड में घुसाने में कामयाब हो गया था

कम्मो- अहह तो तूने बर्बाद hi कर दिया भाई मेरी गांड को

रवि - मेने खा था न दीदी औरत के छेड़ो की खूबसूरती फटने के बाद hi निखार कर आती है अब देखो तो जरा कितना सुन्दर लग रहा है तुम्हारी गांड का छेद

रवि अपने हाथ को बहार खींच लेता है

जिसपर काफी साडी पिली लिली हगवास लगी थी

गिरजा को समझते देर नहीं लगती की ये पिली चीज़ क्या है

जो काफी हद्द तक कम्मो की गांड के छेद पर भी फैली हुई थी

रवि बड़े गौर से अपनी दीदी की गांड का छेद देख रहा था जो काफी बड़ा हो चूका था

और बार बार बंद होता और खुलता जिससे उसकी खूबसूरती में चार चाँद लग रहे थे

रवि बिना देर किये अपना मुँह कम्मो की गांड से भिड़ा देता है

और अपनी दीदी की हगवास लगी हुई गांड को पागलो की तरह चाटने लगता

गांड पर लगी हुई हगवास रवि को किसी मिठाई की तरह लग रही थी वो किसी बच्चे की तरह अपनी दीदी की लगी हुई हगवास चाट रहा था

गिरजा यह नजारा देख कर पागल सी हो गयी थी क्या कोई भाई बेहेन इस हद्द तक्क भी जा सकते है जिसमे एक भाई अपनी hi बेहेन की गांड से निकली हुई हगवास को चासनी की तरह चाट रहा था
 
अपडेट -294

रवि पूरी गांड चाट चाट कर कामो की गांड पर लगी हगवास को छत्त कर जाता है

और अगले hi पल अपना लुंड उसकी गांड में घुसा कर उसे छोड़ने लगता है

रवि के होठ जैसे hi कामो के होठो से छूटे है उसे अपनी hi हगवास का स्वाद चख कर काफी मजा अत है उसके जिस्म में एक अजीब सा नशा चा जाता है

कम्मो ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की उसका छोटा भाई इस कदर गंदे तरिके से उसे छोड़ेगा जिसके बारे में भाई बेहेन तो क्या कोई और सोच कर hi घिन्न महसूस करे

पर उसे इस पल अपने छोटे भाई पर काफी नाज हो रहा था जिसे उसकी गांड से निकली हगवास भी मीठी लग रही थी

कम्मो भी अपना पूरा मुँह खोल कर अपनी hi गांड का प्रसाद खाने लगती है जो अब भी रवि के मुँह में थी

रह रह कर कम्मो की गांड से छोटे छोटे टुकड़ो में हगवास बहार आ रही थी

इधर गिरजा अब तक अपनी छूट के साथ साथ अपनी गांड में भी 2 उंगलिया घुसा चुकी थी शुरुवात में उसे थोड़ा दर्द महसूस हुआ पर अपनी बहु के दर्द के सामने उसे वो दर्द काफी काम लगा

जो मजा सामने उसकी बहु महसूस कर रही थी उसे पाने के लिए गिरजा अब किसी भी हद्द तक जाने को तैयारी थी

और इसमें उसे अब मजा भी काफी आ रहा था खुद की गांड को अपनी hi उँगलियों से छोड़ने में ये सोच कर hi उसका जिस्म देहल उठता था की जब ऊँगली से इतना मजा आ रहा है तो रवि का लुंड कितना मजा देगा

इधर रवि लगातार अपनी दीदी को चोदे जा रहा था

एक झटके में वो अपना लुंड बहार निकल लेता है जिसपर पूरी तरह उसकी दीदी की पिली पिली खुसबूदार हगवास लगी हुई थी

बिना देर किये रवि दुबारा से अपना हाथ कामो की गांड में पेल देता है और इस बार काफी गहराई तक अपनी दीदी की गांड को अपने हाथ से hi छोड़ने लगता है

कम्मो- अह्ह्ह रावी ऐसे hi छोड़ फाड़ दे आज अपनी दीदी की गांड अह्ह्ह कितना अच्छा लग रहा है अपने प्यारे छोटे भाई से गांड फड़वाने में अह्ह्ह कितना मजा आ रहा है भाई तू ऐसे hi छोड़ेगा न मुझे हमेशा

मेरा तो जीवन hi ध्यान हो गया तेरे जैसा भाई पकड़ जो एक पल भी अपनी दीदी के किसी छेद को खली नहीं छोड़ता में तो कहती हु तेरे जैसा भाई बेहगवां हर किसी को दे

रवि - में भी यही दवा मांगता हु दीदी आप जैसे बेहेन हो बहगवां मुझे दे हर जनम में ताकि में उसके जिस्म के हर हिस्से को मसल मसल कर छोड़ साखू

रवि अपना हाथ बहार निकल लेता है जो पूरी तरह हगवास से सना हुआ था

बिना देर किये रवि उसी हाथ से कामो की चूचियों को मसलता हुआ उसकी गांड में धक्के लगाने लगता है

अब आलम ये था की कामो की खुद की गांड से निकली हगवास उसके शरीर के साथ साथ उसके छोटे भाई के शरीर पर भी झा था लगी हुई थी जो इस गंदे खेल को और भी मादक बना रही थी

रवि बिच बिच में अपना लुंड बहार खींच लेता जिसके तुरंत बाद hi कामो की गांड से हगवास बहार आना शुरू हो जाती वो बहार आ पति उससे पहले hi वो अपना लुंड फिरसे उसकी गांड में पेल देता

लुंड के साथ साथ कामो की गांड से निकल रही हगवास फिर से गांड की गहराइयो में चली जाती पर कुछ हगवास लुंड के साइड से ृस्टि हुई बहार आयति तेरी

ठप्प ठप्प थप्प्प्प ठप्प्प

लगातार चुदाई से ऐसी आवाज आ रही थी मनो कोई इंजन चल रहा हो जिसकी रफ़्तार लगातार बढ़ती hi जा रही थी

रवि - अह्ह्ह दीदी कितना हगति हो तू

कम्मो- तू hi तो कहता था न कितनी बड़ी गांड है दीदी तुम्हारी अब देख ले तेरी दीदी ने इतनी बड़ी गांड में कितनी साडी हगवास भर्र रखी है

रवि - पर कुछ भी कहो दीदी काफी मीठा है तुम्हारी हगवास का स्वाद भी एक दम तुम्हारे थूक के समान मीठा

कामो- है ह हरामी मीठा तो होगा hi ना रात से hi तू मेरी गांड के पीछे पड़ा हुआ है रात भर लुंड दाल दाल कर मेरी गांड पहला दी फिर इसमें hi अपना लुंड दाल कर सो गया जैसे मेरी गांड कोई गुफा हो

और अब सुबह जब हगने का समय हुआ तह भी छोड़ रहा है तू hi बता में हगू न तो क्या करू

रवि - अरे दीदी तुम हगति रही में खा मना कर रहा हु तुम हगति रही और में इसे छोड़ता रहता हु

रवि अपना हाथ निचे लता हुआ अपनी 2 उंगलिया कम्मो की गांड में पेल देता है जो लुंड के साथ साथ लगातार अंदर बहार हो रही थी

कामो- हहह अहहहहह भैई ऐसे hi फैला दे इसी अह्ह्ह मेरी सासु माँ की गांड देखि है तूने उन्हें भी ऐसे hi हगते हुए छोड़ना मेने देखा है उनकी गांड में तो मुझसे भी ज्यादा हगवास भरी है एक बार तू उनकी गांड छोड़ लेगा न तो देखना तुझे कितना मजा आएगा

रवि - अरे दीदी आज hi छुड़ेगी तुम्हारी सास तुम टेंशन ना लो मुझे तो लगता है की वो अब भी हमे देख कर अपनी छूट और गांड में उंगलिया पेल रही होगी

रवि बिना खिड़की की तरफ देखे hi बोलता है

रवि की बात सुनकर गिरजा बिना किसी भाव के अपनी गांड और छूट में उंगलिया चलाये जा रही थी जैसे की उसका खुद का मन था ये सब करने के

कामो- अरे देख रही होगी तो देखने दे ना उन्हें भी तो पता चलना चाहिए की उनकी बहु कितने मजे लूट रही है

में तो उन्हें भी मजा देना कहती हु

अंतत में रवि अपना विरया कम्मो की गांड के भीतर hi गिरा देता है

लुंड निकलता hi बाहडडडड भड़ड़ भद्द्द आवाज के साथ कामो खड़े खड़े hi हगने लगती है

गांड का छेद तो पहले hi काफी चौड़ा हो चूका था बिना किसी रुकावट के साथ उसकी हगवास बहार आ रही थी लगातार

रवि थोड़ा पीछे हटाता हुआ अपना निशाना अपनी दीदी की गांड पर लगता हुआ उसकी गांड में मूतने लगता है

हगवास निकलना तो बंद ो गयी थी पर कामो को जैसे hi गर्म गर्म पानी का अहसास अपनी गांड के भीतर होता है वो वैसे hi झुकी हुई अपनी गांड का दरवाजा खोपे रहती है

इधर गिरजा अब पागल हो चुकी थी 4 बार झड़ने के बाद भी उसकी छूट का रिसाव बंद होने का नाम नहीं ले रहा था उसकी आंखे पूरी लाल हो चुकी थी इन दोनों भाई बेहेन के करम काण्ड देख कर

इधर रवि मुट्ठ मुट्ठ कर अपनी दीदी की गांड भर देता

है

कामो अपने पेटीकोट से अपने शरीर पर लगी हगवास साफ़ करती है और फिर रवि का जिस्म भी साफ़ करती है

उसने इस वक़्त अपनी गांड को काफी मज़बूरी से बंद किये हुए था जिसकी वजह से रवि का मूत अब भी उसकी गांड के भीतर hi था

गांड के अंडरर गरमा गरम मूत वो भी अपने छोटे भाई का कामो का चेहरा काफी खिला खिला नजर आ रहा था

इधर गिरजा देखती है की अब दोनों आने वाले है तो वो न कहते हुए भी उठ कर वापस आंगन में आ जाती है और वही बहार लगी चारपाई पर बैठ जाती है

इधर कामो अपने शरीर पर सदी लपेट लेती है पेटीकोट अब भी उसके हाथ में hi था

कामो- अगर उसने देखा होगा न भाई तो सच कह रही हु अब भी उसकी छूट का भाव रुकने का नाम hi नहीं ले रहा होगा

रवि - ये तो आपको hi किरपा है दीदी

kaamo-tu चिंता मत कार आज की रात तू अपनी दीदी के साथ साथ उसकी सास को भी छोड़ेगा एक hi बिस्तर पर ये वडा है मेरा तुझसे बस तू आज कहि मत जाना फिर देख में दिन भर क्या क्या कांड करती हु

वैसे तो रवि को लेले की प्यास बुझाने भी जाना था पर वो अपनी दीदी की बात मान कर हामी बाहर देता है

दोनों भाई बेहेन घर के भीतर चले जाते है

कम्मो को अपनी सास की आँखों में हवस साफ़ नजर आ रही थी जो कोई भी औरत महसूस कर सकती है

गिरजा बिना कुछ बोले दोनों को तिरछी नजरो से दकह रही थी

कामो के हाथ में उसका पेटीकोट था

सदी मुश्किल से hi उसके छुटाअड़ और चूचियों को संभाल पा रही थी

कामो- रवि तू हाथ धो ले में चाय बना कर लती हु

रवि वापस से बहार वाले हैंडपंप पर चला जाता है इधर कामो चलती हुई अपनी सास के सामने से गुजरती है

गिरजा की नाक में अपनी hi बहु की हगवास की महक जा रही थी

उसकी छूट तो पहले hi बगावत पर उतारू थी

तभी कामो कुछ ऐसा करती है की गिरजा का जिस्म अंदर तक्क झटकी खाने लगता है

कामो अपनी सास की और गांड घुमाये खड़ी थी और एक झटके में hi वो पानी फटी हुई गांड को किसी ढक्कन की तरह खोल देती है

अगले hi पल अंदर मौजूद उसके भाई का गरम गरम पेहसाब किसी फव्वारे की तरह उसकी गांड से जमीन पर गिरने लगता है

जिसमे रवि के विरया के साथ साथ कम्मो की हगवास भी थी

गिरजा एक नजर अपनी बहु का रान्दीपना देख रही थी

कामो अपनी गांड के अंदर हाथ घुसती हुई इस तरह बोलती है की गिरजा को भी उसकी बात सुनाई दे

कम्मो- कमीने ने हाथ घुसा कर पूरी गांड hi फाड़ दी अब तो लगता है इसके पेशाब की तरह मेरी हगवास भी दिन भर घर में hi गिरती रहेगी....
 
अपडेट -295

दूसरी तरफ सलमा का घर..

सुबह से hi लेले का बदन टप्प रहा था

सलमा लगातार उसके माथे पर गीली पत्तिया लगा रही थी

पर बुखार था की उतरने का नाम नहीं ले रहा था

सलमा - ये मेने क्या कर दिया क्यों लायी में उसे लेले के पास एक बार बार की चुदाई में इतना तड़प रही है

शायद सलमा समझ गयी थी की उसकी बहु को बुखार क्यों आया है

वो जानती थी की अब लेले की दवा की नहीं बल्कि लुंड की जरुरत है

शायद उसे यही एक्सपीरियंस कहते है

सलमा आंगन में बैठी हुई थी और लेले कमरे में

लेले की छूट रह रह कर पानी चोदे जाए रही थी

उसके हाथ पॉ लगातार चल रहे थे

अपनी बहु की आँखों में आज पहले बार हवस की लाली देखि थी

इधर लेले मन hi मन सोच रही थी की कब रवि आएगा और उसे इस पीड़ा से मुक्ति करेगा

असल में तो सलमा भी उसी इन्तजार में बैठी थी पर दोनों सास बहु नहीं जानती थी की आज की चुदाई का प्रोग्राम गिरजा के घर में hi है

लेले - अम्मीईई

अंतत में थक हार कर लेले अपनी दबी हुई आवाज में सलमा को आवाज लगती है

सलमा उठ कर कमरे में दाखिल होती हुई अपनी बहु पर नजरे डालती है

और उसके पास जाकर बैठती हुई उसकी माथे की पट्टी को बदलने लगती है

लैली सलमा का हाथ पकड़ लेती है

लैली - कब आएगा अम्मी रवि

आख़िरकार उसने अपने दिल की बात अपनी सास से कह hi दी थी

सलमा- में नहीं जानती बहु का आएगा वो

लैली - एक बार उसे बुलवा दीजिये न अम्मी देखिये मेरी हालत खराब हुई पड़ी है

सलमा - में जानती हुई इसवक्त तुझे दवा से ज्यादा मर्द की जरुरत है पर क्या करू बहु

लेले - अम्मी सिर्फ एक बार और उसके बाद में ठीक हो जाउंगी

सलमा समझ रही थी उसकी बहु छुड़वाने के बारे में hi बात कर रही है

सलमा - ये रोग hi ऐसा है बहु जब एक बार हो जाता है तो मरते दम तक्क नहीं छोड़ता

लेले - तो अब आप hi बताये में क्या करू अम्मी पहले तो ऐसे नहीं थी आप hi लेकर आयी थी न उसे मेरे पास अब में क्या करू मेरा पूरा बदन जल रहा है

मन तो कर रहा है की गाओं के किसी भी मर्द के सामने जाकर नंगी हो जाऊ और उसे अपने साथ जो मर्ज़ी वो करने की छूट दे दू

सलमा - नहीं नहीं बहु तू ऐसा मत करना

नहीं तो हम कहि मुँह दिखने लायक नहीं रहेंगे

लैली - तो क्या करू अम्मी में कैसे करू इस गर्मी को शांत

सलमा अपने मन में कुछ सोचती है

और उसके अगले hi पल वो पानी बहु के जिस्म पर पड़ी चादर हटा देती है

अंदर लेले एक दम नंगी थी मनो वो पहले से hi रवि के इन्तजार में थी

लेले - आप क्या करने वाली है अम्मी

सलमा - तेरा इलाज अब घर की इजात को बचाना है तो मुझे hi कुछ करना पड़ेगा वो मुवा अपनी दीदी और गिरजा की छूट में मुँह डेल पड़ा होगा न जाने कब आएगा तब टक्क में तुझे ऐसे तड़पती हुई नहीं देख सकती बहु

सलमा लेले की दोनों टैंगो को खोल देती है

एक hi चुदाई में लेले भी काफी बेशरम बन चुकी थी

वो बिना किसी संकोच के अपनी सास को अपनी छूट दिखने लगती है

लैली की छूट काफी लाल और सूजी हुई थी उसके होठ फूल कर मोठे हो गए थे जो कल की चुदाई की वजह से hi हुआ था

सलमा - देखो तो जरा क्या हाल किया है मेरी फूल सी बहु का उस हरामी ने

लेले - इसमें उसकी कोई गलती नहीं है अम्मी बाकि उसमे तो कल मुझे औरत होने के सुख का अनुभव करवाया है में तो सोच भी नहीं सकती थी की अपने hi शरीर के इन अंगो से हम चरमसुख भी पा सकते है

सलमा अपने हाथो से छूट को फैला कर अंदर वाला हिस्सा देखती है

जो काफी लाल था छूट फट कर एक बीतते की हो गयी थी

लैली - अह्ह्ह अम्मी क्या कर रही है आप

सलमा - तेरी छूट की गर्मी निकल रही हु ताकि तू छुड़वाने के चक्कर में किसी भी मर्द के सामने अपनी टंगे न फैला दे

लैली - है अम्मी आप कितनी अछि है

सलमा बिना देर किये अपने हाथो पर थोड़ा थूक गिरती हुई अपने 2 उंगलिया लेले की छूट में सरका देती है

सलमा को अपनी बहु की गरमाहट का अंदाजा उसकी छूट के भीतर हुआ था जो किसी बहतती की तरह जल रही थी

अब सलमा अपनी उंगलियों को तेजी से अंदर बहार कर रही थी

इधर लेले से भी ज्यादा देर बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था

वो सलमा का हाथ पकड़ कर अपनी छूट पर दबा रही थी लगातार सिसकिया ले रही थी

लैली - अह्ह्ह्ह अम्मी कितना अच्छा छोड़ रही हो अप्प आह्हः और अंदर डालो न अम्मी अपनी उंगलिया अह्ह्ह्ह में झरने वाली हु

लेले तेजी से बीएड पर ऊपर निचे हो रही थी

इधर सलमा अपनी पूरी रफ़्तार में अपनी उंगलिया उसकी छूट में चला रही थी

अंततः में लेले झड़ने लगती है और अपनी सास के ऊपर अपना गरमा गरम पानी गिरती हुई लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है

सलमा को अपनी बहु के चेहरे पर शुकुन के भाव देख कर खुसी होती है

वो खुद को अपने दुपट्टे से साफ़ करती हुई उसके ऊपर चादर दाल देती है और कमरे से जाने लगती है

लैली - अम्मी

सलमा पलट कर उसकी और देखती है

लैली - अम्मी उसे जल्दी बुलाना नहीं तो मुझे नहीं लगता की आपकी ये उंगलिया मेरे अंदर की उस रंडी को रोक पाएंगी जिसे खुद आपने hi बहार निकला है ......
 
अपडेट-296

रवि से छोड़ने के बाद कामो और भी मस्ता गयी थी इधर गिरजा आंगन में बैठे बैठे उन दोनों के इस घिनोने खेल के बारे में सोच रही थी क्या सच में भाई बेहेन अपने बिच के प्यार को इस हद्द टक्क ले जा सकते है की उन्हें अच्छा बुरा सब एक समान लगे न कोई चीज़ गन्दी हो उस प्यार में और न hi किसी भी बात की रुकावट क्या इन सब में उन दोनों को इतना मजा आता है

तब तक रवि बहार से नहा कर घर के भीतर आता हुआ गिरजा के बाजु में बैठ जाता है

गिरजा अपनी तिरछी निगाहो से रवि को देख रही थी

रवि गिरजा से थोड़ी दुरी पर बैठा था उसके धोती में उसका अधखड़ा लुंड गिरजा को धोती के गीलेपन की वजह से साफ़ नजर आ रहा था

रवि- मम्मी जी

गिरजा बिना उसकी और देखे हम्म करती है

रवि - आपने देखा न बहार क्या हुआ

गिरजा- नहीं मेने कुछ नहीं देखा

रवि - क्या आपने सच में नहीं देखा जब में आपकी बहु को हगते हुए छोड़ रहा था

गिरजा चुप थी क्योंकि वो खुद भी जानती थी की वो अब शर्त हरने वाली है

छूट तो उसकी अब भी बह रही थी

रवि - पर मेने तो आपको देखा था खिड़की से बहार झाकते हुए

गिरजा - हां तो क्या हुआ बाबू है वो मेरी

रवि - अच्छा तो क्या आपको इतना मजा आटा है अपनी बहु को छुड़ता हुआ देख के की उसे देखती हुई अपनी छूट सहलाती हो

गिरजा - फालतू की बकवास मत कर रवि

रवि - अरे पहले पूरी बात तो सुनो में तो बस इतना बता रहा हु की दीदी ने भी देख लिया था आपको

कामो की बात आते हुए गिरजा आश्चर्य से रवि की और देखती है

रवि - हां मम्मी जी बल्कि उन्होंने खुद ने मुझे बताया था की सासुमा देख रही है और फिर तो आपने देखा न वो आपको देखने के बाद और भी मस्त होकर अपनी गांड छुड़वा रही थी

गिरजा- तुझे अच्छा लगता अपनी दीदी के साथ ऐसे गंदे काम करते हुए

रवि - बड़ा मजा आता है मम्मी जी

सच खु तो मेरे लिए ये लुंड और छूट का रिश्ता है जिसे भाई बेहेन के रिश्ते की चादर ुधा दो तो वो और भी खूबसूरत और कामुक हो जाता है

और बाकि तो आप खुद भी देख चुकी है कैसे दीदी अब मेरी निजी रंडी बन चुकी है

अभी गिरजा कुछ बोलती उससे पहले कामो आ जाती है

कामो- लीजिये मम्मी जी चाय ले रवि तू भी

गिरजा अपनी नजर उठा कर अपनी बहु को देखती है जो बिलकुल रोज की hi तरह सामान्य थी उसके चेहरे पर किसी भाव का बदलाव नहीं था

कामो दोनों को चाय देकर वापस जाती है

रवि - देख रही हो मम्मी जी अपनी बहु की गांड कितनी फैजल गयी है

गिरजा- कमीने तूने hi ये हाल किया है बेचारी का

रवि - अब इसमें मेरी क्या गलती है

गिरजा - गलती तेरी hi है औरत का क्या है उसके तो नसीब में hi छुड़वाना लिखा है जब तू अपना ये गधे जैसा लुंड किसी को भी दिखा दिखा कर उसका दिमाग खराब कर देगा तो वो खुद hi अपनी टंगे खोल देगी तेरे सामने

रवि - अच्छा तो क्या आप भी मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने के लिए टंगे खोल डौगी

गिरजा इस बार का कोई जवाब नहीं देती पर अपनी बहु के छोटे भाई से ऐसी गन्दी बाटे करते हुए उसकी छूट में झुरझुरी जरूर हो रही थी मन तो उसका कर रहा था की अभी अपनी टंगे उसके सामने खोल दे पर वो भी मजबूर थी

कैसे एक पतिवर्ता नारी अपनी जीवन भर के संस्कारो को भूल कर एक पल में hi किसी लड़के के सामने रंडियो की तरह अपनी टंगे खोल सकती है

रवि - कोई बात नहीं मम्मी जी अभी तो पूरा दिन बचा है शर्त्त के मुताबिक़ आप आराम से सोचिये तब तक बहने दीजिये अपनी छूट से काम रास की नदिया में भी तो देखु एक औरत कब तक खुद पर काबू रख सकती है

रवि उठ कर कामो की और जाने लगता है जो सामने hi बनी छोटी सी रसोई में बैठी खाना बना रही थी

रवि - अब जो होगा उसे देखने के बाद तो आपको छुड़वाना hi पड़ेगा

गिरजा - तू जो कहे कर ले मेरा फैसला नहीं बदलेगा

रवि - वो तो वक़्त hi बताएगा

रवि अपनी दीदी की और बढ़ता हुआ अपनी धोती को शरीर से अलग कर पूरा नंगा हो जाता है

कम्मो के पास पहुंचते hi वो अपनी दीदी से पीछे से लिपट जाता है

कामो तो हर वक़्त छुड़वाने को तैयार रहती थी कहे समय कोई भी हो और आज का दिन तो उसके लिए और खास था उसे अपने भाई के निचे लिटाने के लिए खुद अपनी सासुमा को उकसाना जो था

कामो- मन नहीं भरा तेरा

रवि - तुम्हारी जैसे रंडी दीदी हो तो किसका मन भरेगा

दोनों बिना किसी लोक लाज के रह आवाज में बात कर रहे थे जिसे गिरजा भी सुन्न सकती थी

रवि - दीदी मन कर रहा है छोड़ने का

कम्मो- मम्मी जी यही है

रवि - उससे क्या हुआ भूल गयी आज मेने उनसे शर्त्त लगती है आज का दिन आपकी चुदाई फ्री है झा कहे छुड़वा सकती हो

कामो- अच्छा तो क्या तू अब मेरी सास की मौजूदगी में hi मुझे छोड़ेगा

रवि - हम्म दीदी चुदाई का मजा तो इसमें hi है जब कोई अपना खास आपको रंडियो की तरह छुड़वाते हुए देख रहा हो

कामो- मम्मी जी जरा दरवाजा बंद कर दीजिये न में खाना बना रही हु

गिरजा- रंडी खाना बना रही है या छुड़वाने जा रही है

गिरजा उठ कर दरवाजा बंद कर देती है और वपा से बेशर्मो की तरह चारपाई पर बैठ जाती है

रवि अपनी दीदी के बाजु में खड़ा था

कामो एक हाथ से अपने भाई का लुंड सेहला रही थी तो दूसरे से सब्जी चला रही थी

रवि - दीदी मजा नहीं आ रहा इसे गिला करो न

कामो एक नजर अपनी सास को देखती है दोनों की नजरे मिलती है

कामो अपने पल्लू को उठा कर अपने सर पर दाल लेती है और अगले hi पल अपने मुँह को खोलती हुई अपने भाई के लुंड पर दबाने लगती है

गिरजा- कितनी संस्कारी बहु लायी हु में अपने hi छोटे भाई से छुड़वा रही है पर घूँघट का बराबर ध्यान है इसे

गिरजा की बात रवि और कामो दोनों सुन लेते है पर बिना कुछ बोले दोनों अपने काम में वयस्त रहते है

रवि अपने दोनों हाथो से कामो का सर पकडे हुए उसे मजे से अपनी दीदी का मुखछोडन कर रहा था

इधर गिरजा सामने चल रहे इस कामुक नजारे को देख एक बार फिर गरम हो रही थी

उसका हाथ उसकी छूट को फिरसे कुरेदने लगा था

तभी दरवाजा बजता है

दोनों भाई बहनो को तो मनो इससे कोई फरक hi नहीं पड़ता था

पर गिरजा को डर था की इस वक़्त कौन आ सकता है

उसे दर था की कहि किसी ने अगर उसकी बहु को इस हालत में देख लिया तो उसके घर की इजात का क्या होगा

गिरजा उठ कर दरवाजे के पास जाती है पर उसका मन नहीं मंटा वो वापस रसोई की और आती है

कामो अपने मुँह से लुंड निकलती हुई अपनी सास की और देख कर कहती है

कामो- क्या हुआ मम्मी जी कौन आया है इतनी सुबह

गिरजा को अपनी बहु के मुँह से गिरती हुई थूक की मोती परत नजर आ रही थी जो उसे और मस्त बना रही थी गिरजा एक नजर रवि के लुंड पर डालती है जो उसकी hi बहु के थूक से पूरा सना हुआ था

गिरजा बिना कुछ बोले रसोई में लगा पर्दा खींच देती है

रवि एक बार फिर अपनी दीदी का मुँह छोड़ने में लग जाता है

इधर गिरजा दरवाजा खोलती है सामने सलमा खड़ी थी

गिरजा- अरे क्या हुआ सलमा आज तू यहां

सलमा - तुझे खेतो से hi ढूंढ़ती हुई आ रही हु तू वह भी नहीं थी तो घर hi आ गयी

गिरजा- अच्छा तो बता क्या काम था

सलमा- असल में मुझे काम था रवि से

गिरजा- रवि से रवि से कैसा काम

सलमा गिरजा को साडी सच्चाई बता देती है की कैसे उसकी बहु एक hi चुदाई के बाद अपने संस्कारो को भूल कर गाओं भर से छुड़वाने की बात कह रही है

सलमा- में तेरे हाथ जोड़ती हु गिरजा तू एक बार उसे बुला दे नहीं तो मेरे घर की इजात नीलम हो जाएगी

गिरजा- मेने तो तुझे पहले hi समझाया था की उसका अंजाम क्या हो सकता है पर तुझे hi जल्दी थी न दादी बनाने की तो अब भुगत और वैसे भी अभी रवि नहीं आ सकता

असल में तो गिरजा खुद भी नहीं कहती थी की इस वक़्त वो अपनी दीदी को छोड़ कर उसके साथ जाये

सलमा - ठीक है पर एक बार मुझे उससे बात तो करने दे तू बेहेन है मेरी हमेशा तुझे अपनी बेहेन मन है एक बार बुला दे उसे बस में बात कर लू तो मेरे दिल को सुकून मिल जायेगा

गिरजा सलमकी बचपन की शैली थी उसकी बातो में उसे डर सैफ महसूस हो रहा था

गिरजा- रवि ोोू बीटा रवि देख तो जरा सलमा काकी आयी है तुझसे मिलने

kaamo-ye छिनाल क्यों आ गयी इस समय

रवि - रुको दीदी में देख कर आता हु किस लिए बुला रही है ......
 
अपडेट -297

रवि रसोई से निकल कर वापस से अपनी धोती लपेटता हुआ दरवाजे के पास पहुंच जाता है

रवि - हां मम्मी जी क्या हुआ

गिरजा- देख तो जरा तुझे ढूंढती हुई सलमा आयी है

रवि- है खला बोलिये क्या बात है

सलमा इस पल एक तक रवि को देख रही थी उसकी धोती के अंदर खड़ा उसका विकराल रूप साफ़ पता पड़ रहा था

उसे समझते देर न लगी की अंदर क्या खिचड़ी पाक रही है

सलमा - बीटा अभी मेरे घर चल न एक बार

Ravi-abhi तो में नहीं आ सकता खला

सलमा- में तेरे हाथ जोड़ती हु एक बार चला कर उसे समझा दे नहीं तो अब तो वो मुझे धमकी देने पर उतारू हो चली है

रवि - हहह वैसे क्या धमकी दी लेले भाभी ने आपको

सलमा- अब क्या बताऊ बीटा तुझसे एक बार छुड़वाने के बाद वो ऐसी बदल गयी है की पूछ मत जो पहले मुझसे मुँह उठा कर बार नहीं करती थी आज गाओं भर में घूम कर छुड़वाने की धमकी दे रही है

रवि - अब देखो खला इसमें मेरी गलती तो कोई है नहीं जो हुआ आप की मर्ज़ी से hi हुआ और में मना नहीं कर रहा हु आखिर मुझे भी तो भाभी की चढ़ती जवानी का रस पीना है पर अभी नहीं अभी तो में अपनी दीदी के साथ हु और वैसे भी मम्मी जी ने तो आपको हमारे बारे में बता hi रखा है न

अब आपकी बहु की प्यास बुझाने के लिए में अपनी दीदी को प्यासी छोड़ कर कैसे जा सकता है

रवि - आप hi बताइये मम्मी जी क्या ये सही होगा

गिरजा कुछ नहीं बोलती

सलमा - में तुझे ऐसा नहीं कह रही की अभी चल कर मेरी बहु पर साध जा बस तू चल के एक बार उसे बोल दे तू उसे छोड़ने दुबारा आएगा बस फिर तू आजाना अपने घर

रवि- अब आप को कैसे बताऊ की अभी में कैसे बहार आया हु

गिरजा - एक बार जाकर बात कर ले न बीटा लेले से फिर वापस आकर कर लेना हो करना है अपनी दीदी के साथ

गिरजा की इन खुली बातो से सलमा को समझते देर नहीं लगी की गिरजा भी इस खेल में शामिल हो चुकी है

रवि गिरजा के गलो को सहलाता हुआ चुम लेता है

गिरजा खड़ी की खड़ी रह जाती है

इधर सलमा भी देखती रह जाती है

रवि - अब मेरी प्यारी दीदी की प्यारी सासु माँ कह रही है तो में मना कैसे कर सकता हु पर मेरी कुछ शर्ते है अगर मंजूर हो तो बोलो

सलमा - मुझे तेरी हर एक शर्त्त मंजूर है बीटा तू बस एक बार मेरे घर चल कर मेरी बहु से बात करले

रवि - अरे अरे खला पहले शर्ते तो सुन्न लो फिर मनुर न मंजूर कहना

सलमा - कहि ऐसा न हो बीटा की तू मुझे यह अपनी शरती गिनवाता रहे और वह मेरी बहु गाओं में किसी के सामने अपनी टंगे खोल दे

रवि - पहली बार तो ये की में इस वक़्त लेले भाभी से सिर्फ बात hi करूँगा

और दूसरी ये की जब शाम को में तुम्हारे घर आऊंगा तो मुझे एक साथ तुम दोनों सास बहु को छोड़ना है

रवि की बाटे सुनकर सलमा के चेहरे की तो मनो हवइया hi उड़द जाती है

गिरजा भी रवि की बात सुनकर हैरान थी पर वो जानती थी की रवि कितना बड़ा वाला छोड़ू है उसे औरत को छोड़ने से ज्यादा रिश्तो को छोड़ने में मजा आता है

रवि- अब अगर मंजूर है तो बोलो नहीं तो अपनी बहु और अपने घर की इजात खुद hi बचा लो

सलमा- बीटा तू ये क्या कह रहा है ये कैसे हो सकता है की में अपनी बहु के साथ एक hi बिस्तर पर तुझसे छुड़वाओ

रवि - हो सकता है खला बिलकुल हो सकता है वैसे भी में तो तुम दोनों सास बहु को छोड़ चूका हु अब अगर एक साथ छोड़ लूंगा तो कोनसा पहाड़ टूट पड़ेगा

सलमा हैरानी से गिरजा की और देख रही थी की शायद वो उसकी कुछ मदद करेगी पर था तो गिरजा खुद अपनी बहु के साथ बिस्तर बाटने की तैयारी कर चुकी थी

गिरजा - मुझे ऐसे मत देख ये सब किया धरा तेरा hi है मेने आगाह किया था तुझे पर तू नहीं मणि अब बात तेरे ऊपर है अपने सास बहु के रिश्ते की गरिमा को बचाना कहती है या फिर तू अपनी बहु की इजात को बचाना कहती है देख सलमा में खुद नहीं कहती की तेरी बहु का नाम गाओं की रंडियो में शुमार हो जाये पर छूट चीज़ hi ऐसे है जब एक बार अच्छे से चुद जाये न तो बिना लुंड होते नहीं मानती अब कहे वो लुंड किसी का भी हो

सलमा गिरजा के मुँह से यु खुली खुली अश्लील बाटे सुनकर डांग्ग रह जाती है

रवि खुस था की गिरजा उसके सपोर्ट में बात कर रही थी

सलमा - ठीक है मुझे मंजूर है अब चल जल्दी मेरे घर चल

रवि - ये हुई ना बात खला चलो

गिरजा- अरे रुकक्क ये खड़ा लुंड लेकर ऐसे hi जायेगा क्या तू बहार जाकर कपड़े तो पेहेन ले

रवि- अरे है मम्मी जी में तो भूल hi गया था की लौड़ा खा है

रुको में अभी आता हु खला

रवि चुपचाप अपनी दीदी से बचता हुआ कमरे में चला जाता है

गिरजा- देख सलमा अब जो हो रहा है होने दे नहीं तो कहि अगर सच में लेले ने कोई ऐसा वैसे कदम उठा लिया तो तू कहि मुँह दिखने लायक नहीं रहेगी

सलमा - वो तो ठीक है साली कुटिया पर तेरा क्या तू मुझे अपनी बहु के साथ बिस्तर बाटने को कह रही है पर कहि ऐसा तो नहीं की तू खुद अपनी बहु के साथ उसके hi छोटे भाई का लुंड बात रही है

गिरजा इस बार पर हस्स देती है

गिरजा- वैसे बात तेरी कुछ हद्द तक सही भी है और रही मरी बहु के भाई के और सास बहु के एक साथ छोड़ने छुड़वाने की तो वो दिवार भी आज की रात टूट जाएगी

अब क्या करे औरत है न हम तो कब तक इस बेचारी छूट को उँगलियों से ठंडा करे में तो बस इतना कहती हु की दिल खोल कर छुड़वाना रवि से नजाने वो कब तक यह रहेगा

तब तक रवि भी आ जाता है और एक बार गिरजा की और देखते हुए उसके होठो को चुत्स हुआ उनपर जीभ फिरता हुआ सलमा के साथ चल देता है ....
 
अपडेट -298

थोड़ी hi देर में दोनों सलमा के घर पहुंच जाते है

सलमा घर में घुसते hi दरवाजा बंद कर देती है

सलमा- लेले बहु देख तो कौन आया है

लेले को समझते देर नहीं लगती की उसकी सास रवि को ले आयी है

लैली चादर को फेकती हुई नंगी hi बहार भाग कर आती हो और जैसे hi उसकी नजर रवि पर पड़ती है उसकी खुसी का ठिकाना नहीं था

वो भाग कर रवि के गले लग जाती है और पागलो की तरह उसके मुँह को चूमती हुई अपने होठो को रवि के होठो से मिला देती है

लेले का बुखार अभी तक उतरा नहीं था उसके गरम होठो से रवि को उसके अंदर की गर्मी का अहसास हो रहा था

रवि लेले के नंगे जिस्म को अपनी बहो में लेलेता है

करीब 10 मिनट तक्क दोनों ऐसे hi बेशर्मो की तरह एक दूसरे के मुँह को चूसते रहते है

लेले - अब और इन्तजार नहीं होता रवि एक बार और छोड़ो न मुझसे

एक बार बस एक बार अपना लुंड मेरी बुर्र में दाल दो में भीख मांगती हु

लेले पीछे हटती हुई रवि की पंत खोलने लगती है

इधर सलमा के होने न होने का लेले पर कोई असर नहीं हो रहा था

सलमा समझ गयी थी की अगर वो थोड़ी और देर करती तो पक्का उसकी बहु ऐसे hi नंगी गाओं में छुड़वाने को निकल जाती

रवि- भाभी रुक्कु रुकुओवो रवि अपने कदम पीछे हटा लेता है मन तो उसके भी कर रहा था अभी लेले को छोड़ने का पर घर पर उसकी दीदी और सास उसके इंतजार में थी

लेले- क्या हुआ रवि मेने कुछ गलत खा क्या तुम्हे कल जो तुम मुझे अपने से दुर्र कर रहे हो

बोलते बोलते लेले की आँखों में आंसू आ जाते है

रवि - अरे भाभी मैट रोऊ मेने ऐसा तो नहीं खा की आप मुझे पसंद नहीं हो

लेले - पसंद हु तो छोड़ो ना मुझे मेरी छूट तड़प रही है तुम्हारे लुंड के लिए

रवि - मेरा भी मन कर रहा है भाभी छोड़ने को पर अभी मुझे दीदी के साथ कुछ काम है

लेले - में जानती हु तुम्हे अपनी बेहेन के साथ क्या काम है आज के लिए मुझे hi अपनी बेहेन बना लो भाई और जो तुम अपनी बेहेन के साथ करने वाले हो वो सब करो मेरे साथ में तुम्हे नहीं रोकूंगी में तुमहसृ गुलाम बन कर रहूंगी बस एक बार ये लौड़ा मेरी बुर्र में घुसा दो

लैली रवि से छोड़ने के लिए तड़प रही थी

रवि - तो आपको सब बता दिया खला ने

लैली - मुझे कोई फरक नहीं पड़ता रवि तुम अपनी दीदी के साथ को करते हो उससे बल्कि में तो खुदा से ये hi दुआ करुँगी की अगले जनम में मुझे तुम्हारे जैसा भाई दे ताकि दिन रात वो मेरी छूट छोड़ता और मुझे औरत होने का असली सुख दे

सलमा - बेटी इसे अभी जाने दे अगर इसकी दीदी को पता चल गया की ये यह भी यही सब कर रहा है तो वो आज के आज जलहि इसे यह से भेज देगी

अपनी सास की बात सुनकर लैली फिर भावुक हो जाती है

लैली - नहीं नहीं में रवि को अपने से दुर्र नहीं जाने दूंगी

रवि - अरे तो में खा कह रहा हु भाभी की में आज hi जा रहा हु अभी काफी समय है पर है अगर में सही समय पर घर न पहुंचा तो पक्का आज hi जाना पड़ेगा

लैली मायूस थी वो लगातार रो रही थी उसकी छूट का पानी उसकी जांघो से बेहटा हुआ निचे जमीन पर गिर रहा था

लैली - तो फिर कब आओगे तुम अपनी इस बेहेन की प्यास बुझाने

रवि - बस शाम तक्क का इन्तजार कर लो भाभी उसके बाद देखना ऐसा छोडूंगा की सांसे हलक में अटक जाएँगी तुम्हारी

लैली - में भी तो यही कहती हु तुम मुझे ऐसे छोड़ो की जिंदगी भर में इस चुदाई को याद रख सखु

रवि - और एक खास बात भी है भाभी आज

लेले - वो क्या

रवि - आज शाम को हमारे साथ सलमा खला भी रहेंगी

लैली हैरानी से -क्या सच में

लैली अपनी सास की और पलट जाती है

लेले - क्या सच में अम्मी आप भी हमारे साथ रहेंगी शाम को

अपनी बहु के खूबसूरत चेहरे को एक बार फिर चमकता देख सलमा का दुःख गायब हो जाता है

सलमा - हां मेरी प्यारी बहु आज की शाम हम दोनों सास बहु एक hi बिस्तर पर रवि से छोड़ेंगी

लैली भाग कर सलमा के गले लग जाती है

लैली - खुदा करे आप जैसे सास हर किसी को मिले

सलाम - वो तो ठीक है पर अभी इसे जाने दे शाम को वापस भी तो आना है ना

लैली - है है रवि अभी तुम जाओ और शाम को समय से आना ताकि ज्यादा देर तक हम दोनों सास बहु को रगड़ रगड़ कर छोड़ साखो

रवि - चुदाई तो आज ऐसे करूँगा की तुम दोनों सास बहु याद रखोगी अभी के लिए में जाता हु

रवि बहार निकल कर घर की और जाने लगता है

इधर सलमा लेले को दवाई देकर आराम करने की हिदायत देती है

सलमा - अभी आराम करले बहु शाम को तेरी पलंग तोड़ चुदाई होने वाली है

लैली - अम्मी चुदाई तो आपकी भी होगी पलंग तोड़ लुंड hi ऐसा है कमीने का

सलमा - चुप बेशरम खिन की

सलमा मुस्कुराती हुई बहार वाले कमरे में आकर लेट जाती है .....
 
अपडेट -299

अब तक्क रवि वापस से अपनी दीदी के घर पहुंच चूका था

अंदर घुसते hi उसे अपनी दीदी दिखाई पड़ती है जो उसे hi गुस्से में घर रही थी

कम्मो- क्यों रे कमीने खा चला गया था रे तू

तब तक गिरजा भी बहार आ जाती है और बार को संभालती हुई कहती है

गिरजा - अरे बहु मेने hi तेरे भाई को भेजा था कुछ काम आ गया था खेत में इसी लिए नाराज़ है क्या तू मुझसे

कामो- मम्मी जी में आपसे भला क्यों नाराज होने लगी और मेरा भाई है तो क्या हुआ आपका भी तो पूरा हक़्क़ है न उस पर

गिरजा रवि को देखती है जिसके चेरे पर अजीब से भाव नजर आ रहे

गिरजा - है भाई अधिकार है तभी तो भेज दिया था इसे बिना तुझसे पूछे चल कोई बात नहीं अब तो आ गया है न तेरा भाई

रवि घर के भीतर आते hi अपनी दीदी पर टूट पड़ता है

इधर कामो तो सुबह से hi गरम हो राखी थी

उसे तो बस चिपकना था अपने छोटे भाई से सासु माँ की लोक लाज तो वो पहले hi छोड़ चुकी थी

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे को पागलो की तरह चूमने चाटने लगते है

बगल में खड़ी गिरजा फ़ौरन hi भाग कर दरवाजा बंद कर देती है ताकि उसके घर में हो रहा करम कांड कोई बहार वाला न देख ले

कामो - क्यों रे हरामी खा चला गया था मेरी बुर्र में आग लगा के

रवि - दीदी बताया तो सासु माँ ने आपको उन्होंने hi मुझे भेजा था अब मुझे क्या पता उनकी बहु यह लुंड लेने के लिए तड़प रही है नहीं तो एक राउंड चुदाई के बाद hi जाता

kaamo-accha बड़ी बाटे करने लगा है तू रात से hi छोड़ रहा है मेने तुझे एक बार भी रोका क्या तुझे पता है जब रोटी बना रही थी तो उस वक़्त मेरा कितना मन था लुंड चूसने का और एक तू है अपनी दीदी का गला सूखा hi छोड़ गया

दूसरी और दोनों भाई बेहेन की बेशर्मी देख गिरजा के चेहरे पर भी मुस्कान आ चुकी थी भले hi दोनों उसे नजरअंदाज कर रहे थे पर सब जानते थे घर में वो 3 लोग है

 गिरजा को जिसका इन्तजार था वो पल अब आने वाला था

रवि - अरे तो अभी कोनसी देर हुई है दीदी तुम भी यही हो में भी यही हु और लौड़ा भी खड़ा है अभी किये देता हु तुम्हारा मुँह गीला

रवि एक बार फिर अपनी दीदी के मुँह में अपनी जीभ घुसता हुआ उसका मुँह अंदर से चाटने लगता है

गिरजा खड़ी खड़ी दोनों को देख भले hi रही थी पर उसके जिस्म में भी अब छुड़वाने की लालसा जग चुकी थी

Kaamo-ahhhh रवि मुझसे दुर्र मैट जाता कर तू भाई में नहीं रह सकती बिना तेरे और बिना तेरे लुंड के

कामो एक झटके में रवि की धोती अलग कर देती है और अपने घुटनो पर बैठती हुई अपने भाई के लुंड को पागलो की तरह चूसने लगती है

रवि - अह्ह्ह दीदी क्या मस्त चुस्ती हो तुम लगता है पूरा लुंड hi खा जाओगी

कामो- मेरा बस चलता तो सच में hi खा जाती

गपपपपप गपपपपपप गपपपपपपपप

कामो लगातार लुंड पर अपना मुँह आगे पीछे कर रही थी देखते hi देखते आधे से ज्यादा लुंड उसके मुँह में अंदर बहार होने लगा था

इधर गिरजा के मुँह में भी पानी आ रहा था उसने आज तक कभी लुंड नहीं चूसा था पर अपने बहु के मुँह से गिरती हुई लार देख कर मनो उसका भी मन कर रहा था इस तरह लुंड चूसै का

रवि प्यार से अपनी दीदी के सर को पकड़ता हुआ उसके बालो को सहलाने लगता है

रवि - अह्ह्ह दीदी सच में जब जब तुम लुंड चुस्ती हो तो रंडियो को भी पछाड़ देती है

कामो बिना कुछ बोले एक नजर अपनी प्यारी सासु माँ पर डालती हुई अपने छोटे भाई की आँखों में आँख डालती हुई अपने मुँह को और भी ज्यादा अंदर की और धकेलने लगती है

रवि - अह्ह्ह डीडीडीईई कितना गरम है तुम्हारा मुँह और उससे भी गरम है तुम्हारा ये थुकककक मजा आ गया

रवि एक झटके में लुंड निकलता हुआ जमीन पर बैठ जाता है और अपनी दीदी के मुँह से बेहटा हुआ थूक गत्त गत्त कर पिने लगता है

नजारा बेहद hi कामुक था एक भाई अपनी बेहेन के मुँह से गिरता हुआ थूक पी कर अपनी प्यास बुझा रहा था

इधर गिरजा अपनी सांसो को जैसे तैसे काबू में रखे हुई थी

रवि वापस से खड़ा होता है और एक झटके में अपना मुँह कामो के मुँह में पेलता हुआ अपने दोनों हाथो को उसके सर पर रखता हुआ ताबड़तोड़ झटके लगाने लगता है

अबतक झा गिरजा की बहु लुंड चूस रही थी अब वही उसकी बहु अपने भाई से अपना मुँह छुड़वा रही थी

कामो को अपनी मुँह चुदाई काफी पसंद थी खास कर के जब छोड़ने वाला उसका सगा छोटा भाई हो

कामो का जोश भी बढ़ता hi जा रहा था वो बैठे बैठे hi अपना ब्लाउज खोल देती है और पेटीकोट का नाडा भी खोल देती है

रवि वापस से लुंड बहार निकल कर अपनी दीदी को खड़ा कर उसकी चूचियों को मसलता हुआ एक बार फिर अपनी दीदी के गरम और मीठे थूक का लुफ्त उठाने लगता है

रवि - बहुत बड़ी रंडी बन गयी हो दीदी तुम तो

kaamo-haa हरामी पर रंडी बनाया भी तो तूने hi है न दिन रात अपनी hi सही दीदी को छोड़ेगा तो रंडी नहीं बेंगी तो क्या बनेगी रे हरामी

रवि - पर अपनी रांदड़ दीदी को दिन रात छोड़ने का मजा भी तो अलग hi है ना रात भर छोड़ो दिन भर छोड़ो फिर रात को छोड़ो

kaamo-isi लिए तो में भी खुसी खुसी तेरे लौड़े की दीवानी हो गयी हु रे एक औरत का सबसे बड़ा सुख hi है चुदाई और खास कर जब छोड़ने वाला छोड़ू छोटा भाई हो तो इस रणदीपाने का मजा दोगुना हो जाता है

रवि- ज्यादा बात मैट कर रंडी चल उधर घूम अपनी गांड दिखा मुझे

कामो- है रे हरामी रात दिन गांड hi मरेगा क्या तू मेरी बेहेन हु तेरी कुछ तो रहें कर मुझ पर और मेरी गांड पर

रवि - अब ऐसे गांड लेकर घूमेगी तो में क्या कोई कुत्ता भी तुझ पर रेहम नहीं करेगा झा मिलेगी वही पटक कर छोड़ देगा साली गांड hi तेरी जबरदस्त है एक दम रंडियो के जैसी

वैसे गांड तो तुम्हारी सासुमा की भी जबरदस्त है

कामो एक नजर फिर अपनी सास को देखती है जो उसे देखती हुई अपनी बूत को सदी के ऊपर से hi दबा रही थी

कामो- तो छोड़ दे ना मेरी प्यारी सासु माँ को भी बना ले न उन्हें भी अपनी रखैल फिर एक साथ दो दो रंडिया छोड़ने को मिलेगी तुझे ....
 
अपडेट -300

अब तक्क कामो घोड़ी बन चुकी थी और रवि पीछे से उसकी गांड छत्त रहा था कामो खड़ी खड़ी hi इस तरह झुकी थी की उसकी गांड खुल कर बहार आ चुकी थी

पीछे से रवि लगातार अपनी दीदी की छूट और गांड पर अपनी जीभ फेर रहा था

कामो- अह्ह्ह मेरे प्यारे भाई कितना अच्छा चाटता है रे तू अपनी दीदी के छेड़ो को अह्ह्ह माआ अंडरर घुसआए मेरी छूट में अपनीई जीभहहहह अह्ह्ह भईईई अह्ह्ह मेरिइइइइ गंड़द क्या तुझे इतनी पसंद हैईईई

रवि बिना किसी रोक रुकावट के अपनी दीदी के दोनों छेड़ो का स्वाद ले रहा था

इधर गिरजा भी अब तक कामो के करीब पहुंच गयी थी असल में उसे अपनी बहु के छेड़ो से ज्यादा पानी बहु के चेहरे के बदलते भाव देखने में मजा आता था

गिरजा बेशर्मो की तरह अपनी बहु के सामने hi चारपाई पर बैठ जाती है

दोनों सास बहु एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे दोनों की hi आँखे हवस के नशे में डूबी थी दोनों जानती थी की दोनों को अब इस लुंड को बाटना है पर बिना बोले hi ये सब बाटे हो रही थी

कामो एकदम से कभी हसने लगती तो कभी रोने जैसा मुँह बना लेती तो कभी एक दम से चीखने लगती

कम्मो- अह्ह्ह माआआ सासुमम्मा में झड़ेनेई वाली हु मेरे भाई तू पियेगा अपनी दीदी की छुटत का पनीई अह्ह्ह रावी हॉट जा भाई मेरी छूट से मलाई निकलने वलियी है कहा जा साडी की साडी अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

कम्मो का जिस्म एक के बाद एक झटके खाने लगता है कामो गिरने hi वाली थी की ताहि गिरजा अपनी बहु को सहारा देती हुई पकड़ लेती है

कामो का जिस्म अब भी लगातार झटके खा रहा था

कम्मो बेसुध होकर अपनी सास के गले में अपनी बहे गाल देती है और उसकी छाती पर अपना सर रखती हुई लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है

इधर रवि अपनी दीदी की छूट से निकला पानी छत्त कर जाता है

और अगले hi पल खड़ा होता हुआ एक झटके में अपना लुंड सेट करता हुआ कामो की छूट छोड़ने लगता है

कामो अचानक हुए इस हमले से लड़खड़ा जाती है हलाकि गिरजा ने उसे थमा हुआ था पर झटका इतना जोरदार था की दोनों सास बहु hi गिरते गिरते बचती है

गिरजा संभालती हुई खत पर जा बैठती है और अब उसकी बहु का सर उसकी गॉड में था जिसे पीछे से उसका hi छोटा भाई छोड़ रहा था

कामो - अह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह भईईई आखिर तुझे अपनी दीदी की छूट की याद आ hi गयी

इस वक़्त रवि और गिरजा एक दूसरे को देख रहे थे गिरजा की छाती से सदी का पालू कब का गिर चूका था रवि को उसकी पपीते जैसी चूचिया ऊपर निचे होती हुई नजर आ रही थी

रवि अपनी पूरी रफ़्तार में अपनी दीदी को छोड़ रहा था

इधर कामो अपना सर सीधा अपनी सासुमा की छूट के ऊपर ले जाती है और अपने सर को दबती हुई उसकी छूट को अपनी सांसो से और गरम करने लगती है झा पहले से hi भट्टी जल रही थी

गिरजा को एक झटका लगता है वो अपनी टैंगो को थोड़ा खोल देती है उसका हाथ अपने भी अपनी बहु के बालो को सेहला कर उसे छुड़वाने की सकती दे रहा था

कामो लगातार अपने मुँह को आगे पीछे कर अपनी सास की छूट को कुरेद कुरेद कर गिला कर रही थी हाल तो उसका पहले hi खराब था अब ऊपर से खुद की बहु का इस तरह चुना गिरजा को पागल कर रहा था

देखते hi देखते कामो अपने हाथो से उसकी सदी को घुटनो से ऊपर तक उठा चुकी थी

रवि कामो को छोड़ता हुआ अपना हाथ आगे बढ़ा कर एक बार गिरजा की चुकी मसल देता है

गिरजा इस बार का कोई जवाब नहीं देती बल्कि रवि के चुने से उसकी तड़प और बढ़ जाती है

रवि इशारो hi इशारो में उसे अपना ब्लाउज उतरने को बोलता है

गिरजा बिना देर किये एक एक कर अपने ब्लाउज के सरे हक्क खोल उसे उतार अलग कर देती है

अपनी सास की इस हरकत को देख कम्मो भी खुद थी वो तुरंत hi एक झटके में अपने हाथ को सदी के अंदर घुसती हुई अपनी सास की खुली हुई मस्त गीली छूट पर रख देती है

गिरजा एक झटका सा कहती है जब तक वो संभाल पति तब तक कम्मो की 2 उंगलिया उसकी छूट के भीतर था

वो अपनी बहु को प्यार से सहलाती हुई उसे अपना काम जारी रखने का इशारा करती है

करीब आधे घंटे चली इस चुदाई में रवि न जाने कितनी hi बार गिरजा की चूचियों को मसलता है जिसके कारण वो लाल पद जाती है पर गिरजा उसे रोकती टोकती नहीं है बल्कि हर बार अपनी चूचियों को और आगे की तरफ धकेल देती ताकि रवि और अच्छी तरह से उन्हें मसल सखे

इस बिच कामो लगभग 3 बार खुद और 3 बार अपनी सास का पानी गिरा चुकी थी

रवि खत पर पड़ा आँखे बंद किये लेता था कम्मो का हाथ अब भी अपनी सासु माँ की सदी के अंदर hi था

पर गिरजा की नजर अब भी रवि के खड़े लुंड पर थी जिसकी फूली हुई नशे देख कर उसे अलग hi नशा साध रहा था

गिरजा लालच भरी नजरो से लुंड देख रही थी कामो सदी के अंदर से हाथ निकलता हुई अपनी सास का हाथ पकड़ कर अपने भाई के लुंड पर रख देती है

जैसे hi लुंड पर हाथ पड़ता है गिरजा का दिल जोरो से धक् धक् करने लगता है मनो अभी फट जायेगा

इतनी देर चुदाई के बाद भी रवि का लुंड ढीला होने का नाम नहीं ले रहा था

कम्मो अपनी सास का हाथ पकडे हुए उसकी हथेली को जड़ तक ले जाती है जिससे की रवि के काळा लुंड का लाल सूपड़ा बहार आकर चमकने लगता है

गिरजा के मुँह में पानी आ रहा था कम्मो के चेहरे पर अपनी सास की लार गिरती है वो तुरंत hi उठ कर अपनी सास का चेहरा पकड़ कर रवि के लुंड की और दबाने लगती है

गिरजा एक नजर अपनी बहु की और देखती है पर इस नजर में न तो सासु माँ वाला समान था और न hi एक संस्कारी बहु की कोई शर्म थी तो बस हवस जो सरे रिश्ते नाते भुला कर सिर्फ अपनी छोड़ने की कहह को पूरा करना कहती थी

कम्मो अपने मुँह पर ऊँगली रखती हुई गिरजा को चुप रहने का इशारा करती है और अगले hi पल सास का मुँह अपने भाई के लुंड पर लगा देती है

गिरजा का ये पहली बार था और लुंड काफी मोटा जैसे तैसे बेचारी थोड़ा सा टोपा मुँह में भर का चुस्ती है

रवि उसकी हरकतों को लेता लेता देख रहा था वो अगर कहता तो अभी एक झटके में पूरा लुंड उसके मुँह में पेल सकता था पर शायद उसमे वो मजा नहीं आता जितना की गिरजा जैसी मस्त गदराई घोड़ी को प्यार से छोड़ने में आटा

कुछ देर बाद गिरजा अपना मुँह हटा लेती है उसके मुँह से भी अपनी बहु की hi तरह ठीक गिर्र रहा था सास फुल्ल रही थी

कामो बिना देर किये एक अच्छी बहु का फ़र्ज़ अदा करती हुई अपना मुँह अपनी सास के मुँह से चिपका देती है

जो कुछ भी हो रहा था गिरजा के लिए एक दम न्य था पर मजा उसे काफी आ रहा था काफी देर तक दोनों सास बहु एक दूसरे को चूमती रहती है अंतत में कामो खड़ी होती हुई अपने भाई के ऊपर आती है और अपनी सास को उसका लुंड थम कर सीधा करने का इशारा करती है

गिरजा लुंड को सीधा रखती है ताकि उसकी बहु उसकी सवारी कर सखे

कम्मो एक hi बार में पूरा लुंड अपनी छूट में ले लेती है और ऊपर निचे होती हुई अपनी सास के गले में बहे डालती हुई उसके होठो को चूसने चबाने लगती है

इधर रवि भी लेता लेता गिरजा की चुकी पीना शुरू कर देता है

अब दोनों भाई बेहेन गिरजा के जिस्म के अलग अलग हिस्से को चुम छत्त रहे थे उसे जीवन में इससे ज्यादा मजा कभी नहीं आया था

चुदाई काफी लम्बी चलती है जिसमे कई बार रवि गिरजा की छूट को भी छूटा है कामो एक बार अपनी सास की छूट को चाटती भी है

इस बिच एक पल तो ऐसा भी आया था की तब गिरजा ने रवि के सामने अपनी दोनों टंगे खोल दी थी

पर रवि छठा था की गिरजा खुद अपने मुँह से उससे छुड़वाने का इजहार करे

खैर शाम होने को थी तो रवि गाओं में घूमने का बोल कर घर से निकल कर सलमा के घर की तरफ जाने लगता है

इधर घर में पूरा घर मादक चुदाई की महक से महक था था

कामो - मम्मी जी आप चिंता मत कीजियेगा आज की रात हम आपकी इस प्यास को खुद बुझी देंगे अपने भाई के जरिये

गिरजा नंगी लेती लेती अपनी बहु को प्यार से सहलाती हुई अपनी छाती से चिपका लेती है ....
 
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