अपडेट-8
आअज खेतो पर कोई काम नहीं था तो रवि खेतो पर नहीं गया और घर में hi आँगन में डाली खत पर बैठे बैठे काम्य की उछलती हुई चूचियों को देख देख कर अनादित हो रहा था
काम्य को भी पता था की उसका भाई क्या देख रहा है वो भी बार बार झुक कर रवि को अपनी चूचियों के दर्शन करवा नहीं थी
जिसका असर सीधा रवि की धोती के अंदर हो रहा था
रवि अपने एक हाथ से अपने विशाल लुंड को दबा कर बैठा हुआ था
सुबह के 9 बज गए थे 3no भाई बेहेन नाश्ता क्र चुके थे
रेखा- रवि आज तू खेत में नहीं जायेगा क्या
रवि- दीदी आज कोई काम नहीं है खेत में गर्मी भी ज्यादा है इसलिए आज नहीं जाऊंगा
रेखा- ठीक है तू आराम कर मैं अपनी शैली नीलम के पास होकर आती हु
सुना है उसे देखने लड़के वाले आये थे पता नहीं क्या हुआ
रेखा अभी तक पेटीकोट और ब्लाउज में थी वो अंदर जाकर एक सदी लती है और वही आंगन में खड़ी होकर पहन लेती है
रेखा- काम्य म आती हु थोड़ी देर में तू खाना बना लेना
काम्य - ठीक ह दीदी जाओ तुम
ये बोलकर रेखा घर से निकल जाती है
इंट्रो टाइम----
हरिया
हटता काटता 52 सल्ल का एक मुस्टंडा आदमी
हरिया बहुत hi म्हणत काश आदमी था
इसलिए उसका शरीर भी किसी पहलवान जैसा hi था
नीलम
उम्र 29 सल्ल
ये रेखा की बचपन की शैली है
ये भी रेखा के hi जैसी सावली बल्कि उससे भी थोड़ी ज्यादा कल है
36-34-40 भरा पूरा बदन बीएस एक यही दिलक़त है की बेचारी की शादी नहीं हो प् रही है रंग की वजह से
अब नीलम भी रेखा की hi तरह अपनी जवानी की आग में जलने को मजबूर है
रामु नीलम का छोटा भाई है
उम्र 20 सल्ल
ये बहुत hi हरामी किसम का लड़का है
रामु अक्सर सेंगर आता जाता रहता है
मतलब वो वह जाकर रंडियों को भी छोड़ चूका है
लुंड- 10 इंच
ये भी अपनी दीदी की तरह ब्लैक स्किन है
अब रेखा अपनी बड़ी बड़ी गांड मटकते हुए नीलम के घर की और चल देती ह
घर के बहार hi हरिया बैठा हुआ मिल जाता है
रेखा- काका नमस्ते
हरिया- अरे रेखा बेटी तू बहुत दिनों बाद आयी सब अच्छा तो है न
रेखा- अब आप तो जानते hi हो काका की कितनी दिक्कत चल रही ह
हरिया- बेटी वो तो सब चलता रहता है
पर जिंदगी तो नहीं रूकती न
रेखा- काका सब सही हो जायेगा वक़्त के साथ साथ
अच्छा ये बताइये की नीलम खा है
हरिया रेखा को घर की और इशारा करता है और रेखा अपनी गांड मटकती हुई घर के अंदर चल देती है
रेखा की बड़ी गांड देख क्र हरिया के मुँह से एक आह निकल जाती है और उसका हाथ खुद बी खुद अपनी धोती के ऊपर जाकर अपने लुंड को मसल देता है
अंदर नीलम जैसे hi रेखा को देल्हती है भागते हुए आकर उसके गले लग जाती है और फुट फुट कर रोने लगती है
रेखा- अरे पगली रो क्यों रही ह बता न क्या हुआ
नीलम- तुझे बताया था न की लड़के वाले आने वाले है
रेखा- है आगे तो बता
नीलम फिर से रोने लगती है
नीलम- उनलोगो ने भी मेरा कला रंग देख क्र राते से मना क्र दिया
रेखा भी नीलम की बात सुनकर रोने लगती है
रेखा- तू चिंता मत कर मुझे लगता है की भगवान ने हमारे लिए कुछ बहुत hi अच्छा सोच रखा है
नीलम- क्या खाक सोच रखा है 30 सल्ल की हो गयी हु पर अब तक जवानी की आग में जल रही हु
रेखा- तेरे जैसा हॉल मेरा भी तो है
नीलम- अब बर्दास्त नहीं होती रे रेखा ये गर्मी
अब तो मन करता है की पहाड़ से कूद कर जान देदू
रेखा- पागल हो गयी ह क्या जितनी गर्मी तेरे अंदर ह न उससे कहि ज्यादा मेरे अंदर ह पर में तो मरने की बात नहीं करती
नीलम- तो तू hi बता न क्या कृ अपनी छूट को जितना रगड़ती हु वो साली उतनी hi गरम होती जा रही ह
दिन बी दिन मेरा बदन मुझे प्रहसन कर रहा ह
रेखा- तू चिंता न क्र भगवान ने कहा तो सब सही हो जायेगा
और ये बोलकर रेखा नीलम के गले लगा लेती ह
और बता रामु खा ह
नीलम- वो तो कल का hi सेहर गया हुआ ह
आज शाम तक आजायेगा
रेखा- अच्छा ठीक ह चल चाय बना
इधर दोनों सहेलियों की बाटे शुरू हो जाती hi
दूसरी तरफ
रेखा के जाते hi काम्य को मौका मिल जाता है रवि के और नजदीक आने का
रवि आंगन में पड़ी खत पर लेता हुआ था
काम्य उसके पास आकर बैठ जाती है
काम्य- रवि गर्मी कितनी बढ़ गयी ह न
रवि- दीदी अभी तो और भी बढ़ेगी गर्मी
काम्य- हाय दिया इतनी गर्मी में ये हाल हे और बढ़ेगी तो क्या होगा
रवि- होगा क्या दीदी हर सल्ल की तरह इस सल्ल भी गर्मी निकल जाएगी
काम्य- तुझे तो पता ह न की मुझे कितनी गर्मी लगती है
रवि- दीदी गर्मी तो सबको लगती है
काम्य- ऐसा नहीं ह भाई मर्दो के मुक़ाबले औरतो के अंडरगार्मी कुछ ज्यादा hi होती है
रवि- है दीदी ये बात तो तुम सही कह रही हो इसलिए रेखा दीदी भी हमेशा पसीने में डूबी रखती है
काम्य- तुझे तो सिर्फ रेखा दीदी की फ़िक्र है
नेरी नहीं
रवि- ऐसा क्यों बोल रही हो दीदी
काम्य - और क्या बोलू म इतनी देर से अपनी गर्मी की बात क्र रही हु और तू ह की रेखा दीदी की गर्मी देख रहा ह
रवि- अरे दीदी मेरा मतलब आप दोनों को hi गर्मी ज्यादा लगती है
काम्य- देख न भाई कितना पसीना आ रहा ह
ये बोलकर काम्य अपनी बड़ी बड़ी चूचिया रवि के आगे करके उसे अपना पसीना दिखने लगती है
काम्य की चूचिया हमेशा hi ब्लाउज से बहार रहती थी उसके ऊपर कुछ पसीना जमा था
रवि बड़ी गौर से काम्य की चूचियों की और देल्हता है और अपना हाथ आगे बढ़ा कर काम्य के एक चुके के ऊपर अपनी हथेली रख कर खींच लेता
रवि अपना पसीने से भीगा हुआ हाथ काम्य को दिखता है
रवि - सच में दीदी तुम्हारे अंदर भी बहुत गर्मी है
काम्य रवि की इस हरकत से अंदर तक सिहर जाती है अब उसकी फूल हुई बुर पानी छोड़ना चालू कर चुकी थी
काम्य की आँखे लाल सुर्ख हो चुकी थी
काम्य- भाई इस गर्मी का कुछ करना पड़ेगा नहीं तो म अपने बदन की गर्मी में खुद hi जल जाउंगी
रवि- नहीं दीदी परेशान मत हो थोड़े दिन म गर्मी चली जाएगी
काम्य- मतलब तू कुछ नहीं करेगा अपनी दीदी की गर्मी का
रवि कुछ टेंशन म आ जाता है काम्य की बात सुनकर
रवि- दीदी म क्या कर सकता हु आपके बदन की गर्मी का
काम्य- ये तो म बाद म बताउंगी
पर पहले तू ये बता की अपनी दीदी की मदद करेगा या नहीं
रवि- कैसी बात क्र रही हो दीदी आप जब बोलो म तब आपकी मदद को तैयार हु
रवि को लहै पता था की उसकी बेहेन उससे उसका लुंड मांग नहीं है वो तो बिचारा मासूम साडी चीज़ो म है म है मिला रहा था
काम्य इतना सुनते hi आगे बढ़ कर रवि को अपनी और खींचती है और रवि के गले लग जाती है
काम्य ने भीत hi जोरसे रवि को जकड लिए
अब रवि की नाक में काम्य के पसीने की बदबू जाने लगी जिसका असर सीधा उसकी धोती पर हुआ ेल hi झटके में उसका पूरा लुंड लहड़ा हो गया
5 मिंट बाद जब काम्य अपने छोटे भाई से अलग होती है तो उसकी नजर रवि के लुंड पर पड़ती है
काम्य के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ जाती है
जैसा जैसा वो कह रही थी सब वैसा hi हो रहा था
काम्य तिरछी नजरो से रवि के लुंड को देल्हती हुई अंदर रूम में चली जाती है
और रवि बहार आंगन में पड़े पड़े सो जाता है
काम्य इतनी गरम हो गयी थी की वो अंदर आते hi सीधा जमीन पर लेत जाती है और अपना घाघरा अपनी टैंगो को उठाते हुए अपनी कमर तक चढ़ा लेती है
अब उआकी फूली हुई छूट बहार की और आ जाती है
और रेखा अपना हाथ अपनी छूट पर रख कर 2 उंगलिया अंदर दाल देती है और तेजी से अंदर बहार करने लगती है
काम्य - हैई रवि छोड़ दे अपनी दीदी को क्यों तड़पा रहा है
किस्मत में शादी नहीं तो क्या हुआ छोटे भाई का लुंड hi सही
काम्य का हाथ बहुत तेजी से चल रहा था पुरे कमरे में पचछहहहह पछ्ह्ह्हह्ह..... की आवाजे गूंज रही थी
अब काम्य का बदन अकड़ने लगा था वो अपने भाई के लुंड को याद करके कुछ ज्यादा hi गरम हो गयी थी
काम्य- भाई जल्दी करना नहीं तो तेरी ये दीदी मर जाएगी अब मुझे सिर्फ तेरा hi सहारा है
अब मुझे सिर्फ अपने छोटे भाई के लुंड का सहारा है
जल्दी करना जल्दी करना
यही सब बड़बड़ाते हुए काम्य की छूट से बहुत सारा कॉमर्स निकलने लगता है और पूरा बिस्तर गिला होजाता है
काम्य 5 मिंट वही पड़ी अपनी सांसे दूरिस्ट करती है एयर फिर उसे अपनी स्थिति का अंदाजा होता है वो जल्दी से उठ कर बिस्तर बदल देती है
और दुबारा से एक नजर रवि पर मरती है रवि दूसरी और करवट लेकर सोया हुआ था
काम्य तेजी के साथ रवि की खत के पास जाती है और बहुत hi मासूमियत के साथ अपने होठ रवि के गलो पर रख कर एक गहरा चुम्बन लेती है
काम्य- भाई अपनी दीदी को निराश मत करना........