अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड) - Page 43 - SexBaba
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अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड)

वाह ये तो धमाका hi हो गया डॉ साहब. सुना मैंने भी था और अब देख भी लिया. खैर कोई बात नहीं आपकी महिमा आप hi जानिए,,,,, :हहै:

काजल ने सबको ऐसी जगह भेज दिया जहा आज कल सबसे बड़े महा पुरुष बाबा के भेष में रह रहे हैं. बस इनकी hi कमी रह गयी थी सो वो भी पूरी हो गयी. इस स्टोरी में अब एक और नया मोड़ आ गया. स्टोरी जब शुरू हुयी थी तब दूर दूर तक इस बात का अंदेशा नहीं था ऐसा कुछ होगा और ऐसे किरदारों की एंट्री होगी. खैर यहाँ पर मैं ये कहना चाहता हु की नाम से एक वेब सीरीज होनी चाहिए. :डेड:

स्टोरी को कहा से कहा ला कर रख दिया गया है. मुझे लगता है की अब इस स्टोरी में भाभी माँ और सोनू से ज़्यादा प्राथमिकता chutiyadr+kajal एंड पार्टी को hi मिलेगी. भाभी माँ और सोनू तो बस सिंपल से मोहरे बन कर रह गए हैं. यद्दपि इस स्टोरी के प्रति आपने क्या सोचा हुआ है ये तो आपको hi बेहतर पता है मगर मुझे लगता है की भाभी माँ और सोनू hi मैं करैक्टर के रूप में इस स्टोरी की साड़ी एक्टिविटीज को हैंडल करते तो ज़्यादा बेटर होता. खैर देखते हैं आगे क्या होता है,,,,,, :डेड:
 
अपनी मुँह मिया मिट्ठू ban-na कोई आप से सीखे .. ोये होये क्या बात है ...

हां सही कहा सोनू ने की is-se सुन्दर दृश्य और हो भी क्या सकता है ...

एक साड़ी तो थी न .. अब क्या उसको भी उतरवाओगे .. और वैसे भी कपडे शरीर को वातावरण से बचने के लिए होते है .. न की ठरक चढाने के लिए .. डॉ. साब

घोड़ी का ढूढ़ पी कर तो दो चार घोड़ी पर हे चढ़ेगा .. मगर कुटिया का दूध पे कर तो सब पर हे चढ़ेगा .. और साले कुत्ते तो इंसानो और बड़े जानवरो के पैर पर भी हुम्पिंग करने लग जाते है ..

ये क्या झमेला है .. ये महिमा भी इतनी सीढ़ी नजर नहीं आती जितनी दिखती है .. इसका करैक्टर भी काफी हीट अत्त्रक्ट कर रहा है ... :हम्म:

वैसे मुज़हे पूरा अंदेशा है की को भी स्टोरी पर अपनी खुन्नस निकलने का बहुत अच्छा जरिया फिर से मिल गया है ... क्यों की डॉ. साब () असल में आपकी स्टोरी की सबसे बड़ी फैन तो नैना हे है .. और इसका कुछ ज्यादा लगाव भी काजल के साथ है .. मगर मेरे समझ में एक बात नहीं आयी की को अपने चुन्नीलाल से इतनी खुन्नस क्यों रहती है .. क्यों की ये हमेशा हे डॉ. Ch***ya के पीछे हाथ धो कर पड़ी रहती है ...

एक और बात .. हां वैसे ये तो बिलकुल सही कहा की ये सब का इलाज़ करता है .. और वो भी थोड़ा अलग तरीके से .. मगर ये अलग तरीका अपना सही इफ़ेक्ट लेने तक उस मरीज़ की maa-c**d देता है ... हे हे

अब अगला नंबर इस सोनू - शिवा - उर्फ़ अंकित का है .. असली कहानी तो अभी शुरू होने जा रही है .. अब जो बकचोदी शुरू होगी उसका शाक्षी तो केवल खुद डॉ. ch***ya होगा और हम दर्शक .. मगर उसका भुगत भोगी केवल और केवल सोनू होने वाला है ...

और ये सोनू की भाबी माँ .. श्रीमती आरती देवी अभी तक तो बची हुई थी .. मगर अब जरूर इसकी तिजोरी खुलेगी ...

चलो डेरे से हे सही मगर डॉ. साब आपको हम लोगो पर और इस बेचारे सोनू पर तरस तो आया .. अटलास्ट आपने चुन्नीलाल से मुखातिब करा दिया .. अब आएगा फूल मज़ा .. अब तो ये स्टोरी फूल स्कीरोक्त की तरह उड़ेगी ... और ये किसी और हे दुनिया में ले जायगी .. वेलकम बैक .. बहुत दिनों से आपकी असली लेखन प्रतिभा खुल कर सामने नहीं आ रही थी .. मगर चुन्नीलाल की बदौलत अब आप अपने सारे नए अजीबो गरीब फंदे और एक्सपेरिमेंट इस सोनू पर आजमाओगे .. जो की बहुत हे इंटरेस्टिंग होने वाला है ...

:कॉंग्रट्स: फॉर इंट्रोडकटिंग थिस यूनिवर्सल हरामी इन थे स्टोरी ... :विंक:
 
डॉ साहब ! किसी ने सही कहां था दोस्ती और दुश्मनी दोनों नहीं करनी चाहिए डॉ से कब आपको सॉरी बोल के निकल जाए पता नहीं... :love2:

पहले कहानी बिल्कुल 'हेमा मालिनी के गाल की तरह' सड़क पर दौर रही थी फिर आप काल्पनिक मोहमाया से अवकाश लेकर सांसारिक मोहमाया में विचरण करने चले गए , वापस आए तो सीधे सड़क से उतारकर रोलर कोस्टर पर दौरा दिए....

कुछ अपडेट पहले तक एक सोच बनाए थे हम की आगे कहानी में क्या होगा आपने सारी सोच कि धज्जियां उड़ा दिए...

नेहा तक ठीक था उसकी मम्मी, ये चीटिंग है आपने एक बार भी इनके बारे में जिक्र नहीं किया तो हम इनके बारे में कहां से सोच पाते....

भाभी, क्या क्या सोचे थे हम इनके बारे में अब पता चला ये भी एक मोहरा.....

वैसे सही बताएगा कहां घूमने गए थे जो आपके दिमाग में इस तरह का बाबा बनने का ख्याल आया कसम से मजा आ गया...:vhappy1:

वैसे एक सवाल है अगर भाभी की मां इतनी तेज और खतरनाक है तो उनको तो भाभी के साथ हुए घटना के बारे में जानकारी जरुर होगी तो कहीं ऐसा तो नहीं सोनू के बड़े भाई को ...... मतलब इसी लिए आप दुबारा उनका जिक्र नहीं किए ..... आपका कोई भरोसा नहीं...:yourock:

आगे के इंतजार में बैठे है डॉ साहब( क्योंकि बाहर तो जा नहीं सकते ):injail:
 
अगर आपको यद् हो तो सोनू के भाई से जहडगा और शहर से जाना ये एक दिन में hi हुआ था वो इतने में कोई टाइम hi नहीं मिला सकती को रियेक्ट करने का .. दूसरा की क्योकि भाभी ने लव मर्रिज किया था तो घर से जयदा करीब नहीं थी वो ..

ऐसे अभी कुछ बोल नहीं सकते :ेविलग्रीन:

:थैंक्स: धन्व्यद फॉर कमेंट:)
 
अपडेट 42
कोमल शहर में थी , जिसके लिए हम यंहा आये थे वो hi गायब थी , क्या वही शिवा बनकर कतल कर रही थी ???????

मैंने अभी तक जीतनी भी चीजे देखि थी मुझे लगने लगा तह की कुछ भी हो सकता है , मुझे तो अब सब पर hi शक होता रहता था ,,

डॉ चुटिया के आश्रम में बैठे बैठे मैं बोर हो रहा था , हम लोगो के पास कोई भी काम भी तो नहीं था , तभी मेरे दिमाग में एक विचार कौंद गया ..

मैंने अपना चेहरा धक् लिया और कही निकल गया, शाम का वक़्त था ..

मैं सबकी नजरो से बचता हु अपने गांव पहुंच चूका था..

अपने घर के बहार , ये वही घर था जिसमे मैंने अपना बचपन बिताया था , जिसमे माँ बाप का प्यार मिला और फिर भाई से दुद्कार भी ,

यही वो घर था जंहा से मुझे और मेरी भाभी को बेइज्जत करके निकाल दिया गया था ..

मैं कुछ देर तक वही खड़ा रहा , सरे दृश्य जैसे मेरे आँखों में आ गए थे , जैसे कोई फिल्म चल रही हो ,मेरे आँखों में आंसू आ गए थे..

मैंने वंहा से पलटा और फिर किसी गंतव्य स्थान की और चल दिया ..

“कोण है ..??”

“मैं मुंबई से आया हु , अनुराग साहब को आपका काम इतना पसंद आया की आपको तुरंत hi मुंबई बुलाये है ..”

“क्या??”

हरिया जैसे खुद पड़ा था , मेरा चेहरा बंधा था मैं मेरे बचपन के दोस्त हरिया के घर के बहार खड़ा था , इन दिनों में मेरा शरीर भी बहुत कुछ बदल गया था और आवाज मैंने खुद थोड़ी सी बदल ली थी ..

मुझे पता था की हरिया अनुराग कश्यप की फिल्मो का बहुते बड़ा वाला पंखा था , और जैसे एक कीड़ा सबके दिलो में पलटा है वैसा hi उसके दिल में भी पल रहा था फेमस होने का , वो भी हीरो बनकर ..

वो मुझे हमेशा कठ्टा था की हम जैसे देहाती लोगो को अगर कोई चांस दे सकता है तो वो है अनुराग कश्यप ..

मुझे लगा hi था की ये साला जरूर तरय कर रहा होगा ..

“अनुराग भैया हमको बुलाये है ??”

हरिया जैसे ब्यौरा hi गया था ..

“अरे बिलकुल अपने hi गांव घर के आदमी हो तुमका देखे तो बोले की अगली फिल्मवा में हमरा हीरो यही होगा , हरिया ..”

हरिया का शरीर जैसे कपङे लगा था ..

“अरे भैया आप तनिक अंदर आओ हो .. थोड़ा बैठो “

मैं अभी अंदर नहीं आना चाहता था ..

मुझे हरिया को ऐसे देखकर बहुत hi मजा आ रहा था .. असल में मैं तो उसे जोरो से गले से लगाना छह रहा था लेकिन क्या करे जब कोई खेल शुरू हो गया हो तो फिर उसे अंजाम तक भी तो पहुंचना पड़ता है ..

“अरे हरिया भैया आपके वो दोस्त कहा है सोहन ..”

हरिया अचानक से मेरी और देखने लगा

“क्यों भैया ??”

“अरे साइड एक्टर की भी जरुरत पड़ती है न , और आपके फेसबुक में अपने उसके साथ फोटो डाली थी ..”

जैसे हरिया को सब समझ आ गया हो

“अरे है है , चलो तो उससे भी मिल आते है “

हम दोनों सोहन के घर की और निकल गए , ये सेल कैसे लोग थे दिमाग के नाम पर कुछ चलते hi नहीं , किसी की भी बात पर यकीं कर लेते है , भोले थे लेकिन दिल के बिलकुल hi साफ़ कोई कड़वाहट नहीं कोई दाग नहीं ..

बस प्रेम से भरे हुए लोग थे ..

मेरे सामने सोहन खड़ा हुआ था , सोहन , हरिया की तरह बावला नहीं था उसे थोड़ी समझ थी ..

“ये कौन है “

“अबे मुंबई से आये है”

हरिया ने पूरी कहानी बताई , रात हो चुकी थी और कहानी सुनकर सोहन के भाव चढ़ गए , उसने मुझे बहुत hi संदेह की निगाहो से देखा ..

“आप अपना चेहरा क्यों छुपाये हुए है “

मेरे सामने मेरे दोस्त खड़े थे , और मैं उन्हें साइन से लगाना चाहता था उन्हें एक साथ देखकर मेरे आँखों में आंसू आ गए जो सोहन से नहीं छुप पाया था ..

उसने बस मेरे आँखों में देखा ..

“सेल सोनू..”

उसने थोड़ा अच्छा बोलै लेकिन मेरा इशारा मिलते hi वो चुप हो गया और सीधे मेरे साइन से आ लगा ,

हरिया थोड़ा हड़बड़ाया हुआ हमें देख रहा था लेकिन जैसे hi उसे समझ आया की ये क्या हो रहा है वो भी ख़ुशी में खुद पड़ा था ..

हम तीनो खेत में बैठकर दारू पि रहे थे , जी है मेरे दोस्त मेरे आने की ख़ुशी में कही से देसी दारू और देसी मुर्गे का इंतजाम कर लाये थे, ये सोहन की सब्जी की बड़ी थी..

“भाई जब से तू गया है न वो मजा नहीं आता बे “

हरिया अभी भी इमोशनल हो रहा था ..

“और बता शहर कैसा है , सेल तू तो चमक hi गया बे , बिलकुल hi पहचान नहीं आ रहा , बिलकुल hi साहब लग रहा है ,मादरचोद ये घडी तो देख ..”

“बस भाई वंहा कुछ अच्छे दोस्त मिल गए , सालो तुम्हारी बहुत याद आती थी बे , और गांव की भी … यार भैया और उस रैंड के क्या हाल चाल मन करता है सेल को घर से निकाल कर मारु , लेकिन अभी किसी के सामने आने में खतरा है ..”

“कैसा खतरा बे , ऐसे भी तेरा भाई कब ऐसा नहीं रह गया की तेरा कुछ उखड भी पाए , वो तो खुद hi भिखारी हो गया है ..”

“क्या ..??”

“है वो साली सच में बहुत बड़ी रैंड है भाई , पहले तेरे भाई को फंसा कर भाभी और तुझे निकलवा दी , फिर खुद सारा जायजाद अपने नाम करवा लिया और अब तेरे भाई को भी घर से धक्का मार कर निकलव दिया ..”

“क्या..?”

ये मेरे लिए एक नया बम था

“अरे है तेरा भाई साला भिखारी जैसे चौराहे पर पड़ा रहता है , शायद उसके पाप की यही सजा दी है भगवन ने उसे , और जिसके लिए उसने हमारी भाभी को घर से निकला था अब वो अपने यारो के साथ मिलकर घर में बस ऐयाशी करती है, सालो ने पुरे गांव का hi माहौल ख़राब कर रखा है “

भैया के बारे में जानकर पता नहीं क्यों मुझे थोड़ा दुःख हुआ , आखिर मेरा भाई था ..

लेकिन फिर जब मेरे सामने वो रत की बात आयी जब उसने भाभी और मुझे घर से निकाल दिया था , हमारे रिश्ते को बदनाम किया था .. ये सोचकर hi फिर से उसके लिए दिल में बस गुस्सा और ग्रीन hi पैदा हुई ..

“अबे उस चूतिये को लेकर अपना मूड मत ख़राब कर , उसे जो सजा मिलनी चाहिए थी वो तो कुदरत ने hi उसे दे दी , तू सुना सेल क्या कर रहा है शहर में जो ऐसा चमक रहा है , और इन दिनों में सेल किसी की ली या अभी भी वही कुंवारा छोरा है ..बॉडी वाद्य तो सॉलिड बना लिया बे “

उनकी बात सुकर मेरे होठो में मुस्कान आ गयी ..

मैंने उन्हें बताया की कैसे मैं शहर पंहुचा और कैसे कलवा से मुलकर हुई , कैसे पाण्ड्य को मारा और सम्पत से जा मिला , कैसे कॉलेज गया और दोस्त बने फिर कैसे फिर से मर्डर हुए और मेरा नाम उसे किया गया , फिर सस जो मेरी फ्रेंड विथ बेनिफिट बानी , रानी की मैंने ली और उनकी भाभी नेहा के बारे में बताया … और फिर पार्टी और भाभी और कोमल के बारे में ..

वो कभी हांसे तो कभी आश्चर्य से उनका मुँह hi खुला गया, कभी उन्हें यकीं hi नहीं आया की मैं सच बोल रहा हु लेकिन खबर तो उन्होंने भी पढ़ी या सुनी थी …

“बाप रे भाई , यंहा से तो तू अच्छा भला निकला था बे , इतने कांड कर डाले .. “

सोहन को यकीं hi नहीं हो रहा था की उसका वो भोला भला दोस्त जो उसके सलाह के बिना कुछ भी नहीं करता था ऐसा सायना कैसे बन गया ..:)

“अरे वो सब छोड़ सेल भाभी से कब मिला रहा है “

हरिया उछाल उठा

“भाई अभी वो अपनी माँ के कारण थोड़ा परेशां है “

“अबे हम हमारी भाभी की बात कर रहे है “

मैंने उसे अजीब निगाहो से देखा

“मैं तो तेरी hi भाभी की बात कर रहा हु “

“अबे नहीं मैं शहर वाली भाभी की बात कर रहा हु “

“अबे गांडू मैं भी शहर वाली भाभी की hi बात कर रहा हु “

“अबे चूतिये मैं भाभी की बात कर रहा हु भाभी की नहीं “

हरिया की बात सुनकर सोहन जोरो से हंस पड़ा

“अबे चूतिये साफ साफ बोल न की तू आरती भाभी की बात कर रहा है या नेहा भाभी की ??”

“मैं नेहा भाभी की बात कर रहा था “ हरिया ने छिड़ते हुए कहा

“सेल गांडू मैं भी उसी के बारे में hi बता रहा था ..”

मैंने अपना सर पकड़ लिया और सभी जोरो से हंस पड़े ..

***********

हम एक गाड़ी में 3 लोग आश्रम की और जा रहे थे , जैसा हम अक्सर घुमा करते थे , दारू अच्छी खासी छड़ी हुई थी ,इतने दिनों बाद दोस्तों से मिलने की वजह से हमने बहुत मस्ती की

न जाने कितनी बाटे उनसे करनी थी , रत के 3 बज चुके थे , मैंने उन्हें बहुत मन किया लेकिन वो मुझे आश्रम तक छोड़ने पर तुले हुए थे , हम चौराहे से गुजर रहे थे तभी मेरी नजर एक भिखारी पर पड़ी ..

सोहन नशे में था और गाड़ी ले जाकर उसके सामने रोक दिया , भिखारी जैसे हड़बड़ाते हुए उठ बैठा ,

ऐसा लग रहा था जैसे कई दिनों से नहाया नहीं है न hi ढंग से खाना hi मिला है , कपडे के नाम पर शरीर में बस चिथड़े थे , शरीर दर से कैंप रहा था …

उसने तुरंत hi हमारे सामने हाथ जोड़ लिया ..

“नहीं मुझे मत मरना मुझे माफ़ कर दो , तुम उसके साथ कुछ भी करो मैं कुछ नहीं बोलूंगा .. “

“ये क्या बोल रहा है “

“उस रैंड चंचल को इसने एक दिन अपने आशिक़ो के साथ नंगे पकड़ लिया था , इसने गुस्से में आकर उसपर हाथ छोड़ दिया सोचा होगा की ये भी भोली भली आरती भाभी की तरह मार खा जाएगी और इस बार तो उसकी गलती साफ साफ सामने थी .. सभी ने इसे कमरे में बंद करके इतना मारा था की थोड़ा हिल गया .. 10 दिन तक एक कमरे में बंद रखा था , रोज कुत्तो की तरह इसे मरते थे खाने को खुछ देते नहीं थे , सुना है की वो इसके मुँह में मुट्ठी थी ..

फिर इसे घर से बहार फेक दिया , गांव वाले दया करके खाने के लिए दे देते है , लेकिन तब से ये थोड़ा पागल जैसा हो गया है .. कोई भी हलके से भी धमका दे तो दर जाता है , रत रत भर रोटा रहता है .. शायद अपने गुनाहो की माफ़ी मांगता है ..”

ये मेरा भाई था , मैंने उसकी आँखों में देखा , वो न तो मेरे दोस्तों को पहचान रहा था न hi मुझे, वो ऐसे डरा हुआ था जैसे कोई उसकी जान लेने वाला है ..

वो दर से काँप रहा था , ये सजा थी , ये सजा थी जो कुदरत ने उसे दी थी ..

ये उसके पापो की सजा थी , इस नशे की हालत में भी मेरे आँखों में पानी सा आ गया था , ये ख़ुशी था या की गम …:डेड:

खुदा की मेहर hi थी की उसने इसे इसके पापो की सजा दे दी , लेकिन इसके इस अवस्था को देखकर भी तो दिल में एक दर्द सा हो रहा था ..

मैंने जेब से कुछ पैसे निकले और उसके ऊपर फेक दिए ..

“इन्ही कागज के कुछ टुकड़ो के कारण तूने मेरी भाभी की पवित्रता पर शक किया था , हमारे सम्बन्धो की प्रेम को बदनाम किया , तेरे कारण देख आज हम क्या से क्या हो गए है , कितने दर्द झेले , एक सामान्य सी जिंदगी थी हमारी लेकिन तूने.. तूने सब बर्बाद कर दिया.. किसके कारण .. किस चीज की वाशना थी तुझे.. जिस्म की ?? दौलत की ?? देख .. देख की आज तेरे पास क्या है .. जिस्म का सुख .. नहीं , तू बीमार है , थका हुआ है विक्छिप्त होकर घूम रहा है , खाने के लिए भी तुझे भीख मांगनी पद रही है … और दौलत .. (मैं जोरो से हंस पड़ा था , लेकिन फिर भी मेरे आँखों में पानी था ) दौलत … तूने मुझे इसीलिए फसाया था न ताकि दौलत को हड़प सके … जो कुआ तूने हमारे लिए खोदा था उसमे तू खुद hi गिर गया रे .. ये ले पकड़ खा इसे … “

मैंने अपने हाथो में पकड़ा हुआ चिकन का टुकड़ा उसके सामने फेक दिया .. वो बड़ी hi लालच के साथ उसे देख रहा था ..

“सोनू जाने दे उसे कुछ समझ नहीं आएगा “ सोहन ने मुझे खिंच लिया ..

मैं जैसे hi पीछे हटा उसने वो चिकन का टुकड़ा उठा लिया वो उसे ऐसे खा रहा था जैसे कोई कुत्ता रोटी को खता है ..

अपने भाई की ये हालत देख कर मन में एक दुःख तो हुआ लेकिन फिर उसकी करनी को यद् करके मैं वंहा से हैट गया लेकिन जाते जाते मैंने अपने मोबाइल से उसका वीडियो बना लिया ……

दिल में एक अजीब सा नया विचार लेकर मैं यंहा से जा रहा था ..



शायद इस कुदरत के नियम ऐसे है की जो जैसा करेगा वो वैसा भरेगा …
 
बहुत खूब डॉ साहब......................

कुदरत और किस्मत कुछ नहीं करती....................

वही होता hai...........jo होने की अपने वजह banayi...............apke कर्म का फल

आज सोनू के भाई की हालत किसने ऐसी की................... जिसे इस लायक उसने खुद बनाया............

वर्ण चंचल की औकात कुदरत या किस्मत ने ऐसी नहीं की थी की वो किसी से तू भी कह sake...........ek रंडी जितनी औकात थी उसकी

अब सोनू को आरती ने इतनी बुरी तरह फंसा दिया है की वो छह कर भी इस जाल से बहार नहीं निकल सकता

और ये रंडी arti.........isne अब तक कुछ नहीं बताया की हवेली में पहुँचने के बाद सिलसिलेवार क्या कैसे हुआ

जिसमें से कोई सुराग भी निकल सके

और इस आरती की महामादर्चोद माँ komal...................wo अलग हो अपनी माँ चुदती फिर रही है

अब सोनू की समझदारी इसी में है........... की wo.......chutiye डॉ और उसकी नयी पुराणी रंडियों कोमल, महिमा, आरती काजल और पूर्वी सबसे पिंड छुड़ा के .............अपने गाओं आ जाये aur.............ab तक जो कुछ भी शहर में सीखा... लड़ाई, चुदाई और छंटाई...

सबका इस्तेमाल करे और चंचल से अपनी जमीं जायदाद हासिल करे................

अगर नेहा की भी समझ में ये बढ़ता, तिवारी, सुसु, जीवा छोड़कर चुपचाप घर बसने का इरादा हो तो........ उससे शादी कर ले

और...................

माँ छुड़ाए दुनियादारी

इन सब को आपस में लड़कर मरने दे,...........
 
बहोत खूब dr.sahab ....... सोनू के भाई को उसके किये की सजा मिल गई ..... अब ये देखा न है जब भाभी वो वीडियो देखे गई ...... तब उसका रिएक्शन भारतीय नारी जैसा होगा या खुश और होगा....... आप के अभी तक के बाकि स्टोरी में जो होते आया है मतलब की हीरो हीरोइन को माफ़ कर अपनाता hai......aaisa hi कुछ यहाँ भाभी करे गई या कुछ और होगा.

आगे देखते है के होता है

इंतजार रहेगा
 
दोस्तों ये एक राइटर को बोलना तो नहीं चाहिए लेकिन फिर भी सिचुएशन ऐसी आ गयी है की मुझे बोलना पद रहा है ..

मैं स्टोरी को लेकर बहुत hi कंफ्यूज हो गया हु :कंफ्यूज:

और अब कुछ समझ नहीं ा रहा है की क्या लिखू... :बंघेड:

तो आप लोगो से सहल चाहता हु की आखिर आप इस स्टोरी को आगे किस तरफ जाता देखना चाहेंगे ..


आप सभी के सलाह के इन्तजार में आप का डॉ..:)
 
भाई डॉ जी ये कहानी के मुख्या खिलाडी तो तिवारी-जीवा-कोमल-शायद मोहिनी भी है और सोनू तो वाक़ई में शरीफ लगता है क्यों की वो ही असल के जाल में फस गया है सब का कोई ना कोई कारण है लेकिन सोनू तो भाभी के मासूम प्यार और लगाव में मारा गया है

इन लफड़ों में सोनू-भाभी के दोनों प्यार खो गए एक भाभी माँ वाला प्यार और दूसरा जवानी का प्यार जो अभी चालू ही हुआ था लेकिन हरामियों सम्पत-जीवा-कोमल ने सब भसड़ कर दिया

सोनू के भाई को अच्छी सजा मिली है लेकिन उसकी वो रांड बीवी बच गयी है
 
डॉ साहब मुझे लगता है की अब सोनू को चंचल से बदला लेना चाहिए वह भी खतरनाक वाला जिसमें कोई भी दया न हो और उसके बाद आपको शीतल पैर कंसन्ट्रेट करना चाहिए क्यूंकि कहते हैं की कोई भी जर्नी पहले कदम से शुरू होती है और अब जब सोनू गाओं में है और अपने पावर का भी एहसास है तो उसे चंचल से ा बदला लेना चाहिए
 
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