अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड) - Page 51 - SexBaba
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अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड)

अंकित सुन रही थी :ुतफरोल:





बिना पैदा हुए hi आरती ने भुवन को बचा लिया :lol:





कमल हैं मतलब की छेड़ती जवानी कोमल की प्यार भी सिचुएशन देखके बहार निकलती है :lol:





सो चाल मस्तानी कोमल को दोनों hi चाहिए .... :lol:





जरूर अंदर खिचड़ी पाक रही होगी कोमल को फंसाने की... और कोमल ने सुन लिया....

खैर

Let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट

ब्रिलियंट अपडेट विथ अवेसमे राइटिंग स्किल डॉ साहब :डी
 
कोमल तो बहुत शातिर गैंगस्टरनि बन गयी है और अब तिवारी के बाद शायद भुवन से इश्क़ जाग गया है और ऐसे ही माँ के असर से देखो आगे चल कर इसकी बेटी आरती का इश्क़ भी सोनू के लिए इश्क़ न जाग जाये

वैसे पूरी कहानी में सेक्स की कमी बहुत भारी मात्रा में खली अब तो गैंगवार चालू है और आरती-सोनू तो कहीं खो से गए हैं :vhappy1:
 
कोमल जैसे लोगो का यही हस्सर होना चाहिए .भुवन जिसके लिए सायद दिल में सच्चा प्यार है उसे वह पहचान नहीं प् rhi.jisne उसका बचपन से इतना ख्याल रखा .और तिवारी जैसे पॉलिटिशियन को चाँद दिनों की मुलाकात में अपना प्यार समझ बेटी उससे छुड़वा भी लिया .और आरती भाभी को नाज़ायज़ संतान के रूप में पैदा भी क्र लिया. अब बाप का नाम देने के लिए भुवन है न.
 
मज़ा हे आ गया ये वाला अपडेट पढ़ कर दोस्त .. बस क्या कहु .. इस बार तो कमाल हे कर दिया .. वैसे डॉ. साब आपकी इस कहानी की ये पेस होनी चाहिए थी .. स्टार्टिंग से हे ...

जरूरी नहीं की हर कहानी में वो टच एंड मिस वाली थ्योरी उसे करि जाए .. अगर हर स्टोरी में वही करोगे तो आप भी स्टीरियोटाइप के राइटर बन जाओगे .. कुछ न कुछ नया फ्लेवर या नयी थीम तरय करते रहा करो .. मैं ये आपको हतोत्साहित करने के लिए नहीं कह रहा हु .. बल्कि इस लिए ताकि आप नेक्स्ट टाइम नयी स्टोरी में कुछ नया तरय करो .. वैसे हर लेखक का अपना एक अलग हे स्टाइल होता है .. मगर आप एक आम लेखक नहीं है .. सो अपनी प्रतिभा का पूर्ण प्रयोग करे .. भाबी माँ को कम्पलीट करने के बाद .. थोड़ा टाइम ले कर अच्छे से विचार कर के .. कुछ अलग सा धमाका करना .. ठीक है दोस्त .. :)

वैसे आपकी भाबी माँ तो है हे जबरदस्त .. अभी तक आरती के जलवे हे दिखवाए है .. कोमल के किस्से के बाद .. आरती को खुल कर सामने ला देना भाई .. बहुत अत्याचार हो चूका सोनू पर .. अब और नहीं .. बाकी करोगे तो आप अपनी हे .. ढीट जो हो .. नालायक डाक्टर :दोस्त:
 
वाह बहुत खूब डॉ साहब,,,,,, :क्लाप्स:

इधर के तीनो अपडेट पढ़ लिए. काफी दिलचश्प किस्सा रहा कोमल का. आखिर जीवा और सम्पत ने कोमल को शक्ति गैंग के रूप में इस्थापित कर hi दिया. कोमल का करैक्टर काफी दिलचश्प रहा. दोस्ती भुवन से और प्यार दया शंकर से. मगर जीवा ने जो प्लान लास्ट में बनाया उससे बहुत कुछ बदल जाने वाला था जिसका ज़िक्र आपने किया. उसी प्लान में शायद कुछ ऐसा घोल भी मिलाया गया जिसके बारे में सुन कर कोमल की आँखों में पानी आ गया. खैर देखते हैं की ये किस तरह का घोल था,,,,,, :हम्म:
 
वह इतने मीठे बोल ... :फ्लावर्स2:

मेरे आँखों में तो खुसी से आंसू hi आ गए :स्पीचलेस:

:थैंक्स: धन्व्यद फ़फ़ भाई :)

जंहा तक नया तरय करने की बात है मैं तो कुछ न कुछ नया करता hi रहता हु , लेकिन लोगो को शयद वो पता नहीं चलता :डेड:

दीद और दोस्त से लेकर अभी तक मैंने राइटिंग स्टाइल में बहुत चंगेस किये है , भाषा चंग कर डाली .. इस स्पेशल स्टोरी के लिए तो फॉण्ट , लैंग्वेज , स्टाइल सब में बहुत चेंज किया है ..

तो एक्सपेरिमेंट तो मैं करते hi रहता हु , इसीलिए तो इतनी गालिया भी खता हु :हहै:

और इस स्टोरी के बाद विचार करने की बात है तो मेरे पास ाललरेअद्य 3 स्टोरी लिखने के लिए पड़ी हुई है, बहुत से आईडिया पड़े है लेकिन उन्हें अभी लिखूंगा नहीं , अब इसके ख़त्म होते तक ये सोचना है की उसमे से किसे आगे बढ़ाया जाए .... तो वही होगा लास्ट अपडेट के साथ नई स्टोरी शुरू हो जाएगी :व्हॅप्पी1:
 
पहले देख तो लीजिये किसने ध्यान से सुन रहा था :डी

पहले मिस्टेक की स्पेलिंग तोह ठीक कर लीजिये डॉ बाबू :lol:

ऐसे एक्सप्रेशन देने की जरुरत नहीं पहले जल्दी से िश कोमल आंटी की फ्लैशबैक ख़तम कीजिये... जोह पता नहीं 5डेज वाले टेस्ट मैच तरह चले hi जा रहा है... रुक ने का नाम hi नहीं ले रहा हैं.... :डी
 
यू अरे रचेता ऑफ़ थिस मास्टरपीस. अभ एक मूर्तिकार अगर ऊपर से भाभी माँ की बहुत सूंदर मूर्ति बनाना शुरू करे और नाभि पे आके कंफ्यूज होए जाये तोए क्या कहा जाये......?

ऐसा लगता है अभ कन्फूसिओं मैं, मूर्तिकार ने भाभी की छूट की जगह भाभी की माँ की गंध फिट कर दी है वोह भी 25 साल पहले जो फैट गयी थी और भाभी की गांड की जगह छूट ( अभी तक के उपदटेस से तोए यह सस की छूट लग रही है)....??

अभ दर यह है की कुछ उपदटेस के बढ़, भाभी की माँ की गांड के निचे, कहीं सोनू के टेस्टिकल्स न धिक् जाये... और फ़ीट किस तरफ हनोगे.. फेस की तरफ या छूट की तरफ... ???

वाकई मैं एक अनोखे मास्टर पैसे की और अग्रसर...
 
अपडेट 50
“इस काम में बहुत खतरा है जीवा भाई एक बार फिर से सोच लीजिये आखिर कोमल आपकी बहन है “

ये तिवारी की आवाज थी जो की मेरे कानो में पड़ी , मैं अभी उसके कमरे में hi जाने वाले थे आज मला के घर में हमला करने का इरादा था सीधे सीधे लड़ाई आर या पार वाली कहानी थी ..

भुवन और मैं वही रुक गए थे ..

“बहन अरे कहा की बहन मेरा बाप मंदिर से उठा कर लाया था उसे ..”

“क्या ..” इधर तिवारी बुरी तरह से चौक गया था वही मेरे कानो को इस बात पर अभी भी विस्वास नहीं हो रहा था ..

“है .. इसके माँ बाप को किसी ने मार दिया था, तो पुजारी ने इसे उठा लिया … मेरे माँ बाप धार्मिक आदमी थे , पुजारी ने उसे कहा था की ये कोई खास लड़की है , बहुत ताकतवर होगी और पता नहीं क्या क्या, इसके साथ एक पुस्तक भी दिया था पुजारी ने मेरे बाप को .. इसलिए मेरा बाप उसे सकती सकती बोलता रहता था .. मुझे भी लगता था की ये कोई खास होगी लेकिन कभी समझ नहीं आया की क्या खास होगा … लेकिन जब इसने उन लावांडो को मारा तब समझ आया की ये तो साली पूरी कातिल hi है … लोगो को ऐसे कटती है जैसे कोई गाजर मूली काट रहा हो , तब अपुन समझ गया था की इसमें क्या खास है और मेरा बाप इसका इतना क्यों ख्याल रखता था ..”

“हे भगवन “

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तिवारी का मुँह खुला का खुला रह गया था ,

“आपके पास वो पुस्तक है, क्या आपने कभी वो पुरस्तक पढ़ी थी “

तिवारी जैसे कुछ सोच कर बोल उठा

“अरे कहा रे , वो तो संस्कृत में थी और हमें कोण सा संस्कृत पढ़ना आता है … ऐसे भी अभी वो कहा है मुझे नहीं पता , कभी ज्यादा ध्यान भी नहीं दिया था … ऐसे मेरा बाप बोलता था की जब सकती को उसका सच्चा प्यार मिल जायेगा तब उसकी शक्ति जागृत हो जायेगी , यही उसका भविष्य है … फिर जब मैंने तुझे देखा तो समझ गया की अब उसके साथ कुछ हो सकता है और देख ………”

तिवारी बस जीवा को आंखे फाडे देख रहा था

“और ऐसे हमें इन सबसे क्या अपना तो काम हो रहा है न , अब मला और करीम को मरकर मैं और तू इस शहर में राज करेंगे , तू बस कोमल को कण्ट्रोल कर उसे प्यार में फंसा कर रख ताकि हम जो भी बोले वो उसे बस चुप चाप करती जाए ..”

जीवा की बात सुनकर मेरे नशो का खून मेरे दिमाग में दौड़ने लगा था , चेहरा ताम तमा कर लाल हो चूका था , तभी भुवन ने मेरे कंडे पर आपने हाथ रखा …

“नहीं कोमल , बिना पूरी जानकारी के कोई भी निर्णय लेना घातक हो सकता है “

उसकी बाटे जैसे तपते हुए मारष्टाहल में पानी गिर गयी हो , मैं शांत होने लगी लेकिन अभी भी मेरे कान उनकी बाटे सुन रही थी , भाई से बिछुड़ने का गम तो था लेकिन अभी अपने प्रेम की बात भी सुनने बाकि थी ….

और तिवारी बोलै

“वो तो ठीक है जीवा भाई लेकिन … मैं सिर्फ मला बनकर नहीं रखना चाहता और अगर ऐसी बात है तो इसका मतलब ये हुआ की कोमल को सिर्फ मैं hi कण्ट्रोल कर सकता हु …..

और मेरे कारण hi उसकी ताकत है .. तब तो धंधे में मेरी हिस्सेदारी और भी बढ़नी चाहिए “

मैं दया की बातो से न सिर्फ स्तब्ध थी बल्कि ऐसा लगा की मेरे साइन में जैसे कोई गहरा झख्म कर दिया गया हो …

मैंने जिस शख्स से प्रेम किया वो मुझे महज इस्तमाल कर रहा है ……

इधर जीवा तिवारी की बात सुनकर हंसाने लगा

“वाह बीटा इतनी जल्दी अपने रंग दिखा दिया .. चल ठीक है लेकिन 2 में से एक hi चीज मिलेगी , या तो पावर ले या पैसा ले … अब तुझे ख़ुर्शी भी चाहिए और पैसा भी ये कैसे हो सकता है .. तू अपने ख़ुर्शी के डैम पर भी तो कमायेगा “

जीवा की बात सुनकर तिवारी थोड़ी देर के लिए चुप हो गया

“एक काम करते है जीवा भाई पहले इस मला और करीम को निपटा देते है फिर आगे की सोचते है “

“है ये सही रहेगा , जा जाकर कोमल को तैययर कर ..”

उनकी ये बात सुनकर मैं जार जार रो रही थी लेकिन भुवन मुझे सम्हालता हुआ मेरे कमरे में ले आया था …

वो न जाने मुझे क्या क्या समझा रहा था , मैंने उसे अपने बांहो में कास लिया था .. वो मेरे बालो को सहलाये जा रहा था मैं बस रोये जा रही थी ……..

“अभी नहीं कोमल अभी नहीं .. इन सबसे जवाब मांगेंगे लेकिन अभी नहीं “

उसने मेरे कानो में कहा और जैसे मैंने उसके बात को मान लिया , मैंने अपने आंसू पोछे ..

“आज सकती का खेल होगा, खुनी खेल “

मैं अपने तलवार निकलते हुए वंहा से निकल गयी थी…………

और फिर खुनी खेल शुरू हुआ , मैंने मला को कई टुकड़ो में काट दिया , जीवा और तिवारी का पूरा गुस्सा मैंने वंहा निकला था , देखने वाले बस देख रहे थे , गोलियों की भौछार हो रही थी और अपने तेज तलवारो से लोगो को मूली की तरह काट रही थी …

मेरे अलावा किसी ने भी कोई हथियार नहीं उठाया है … ना जाने कितनी लाशे मैंने गिरा दी थी ,मैं तो गिनती भी नहीं थी .. बस खून से लिख दिया था दिवलो पर …. सकती ………

**********

तिवारी और जीवा मला के मरने का जश्न मन रहे थे तभी मैं अपने कमरे में नाहा रही थी ….. पुरे जिस्म में खून की छींटे थी , बाथरूम के बहार भुवन बैठा हुआ था किसी सोच में डूबा हुआ था ……..

“कोमल वो पुस्तक वो तो तुम्हारे पास है न “

मैं नाहा कर निकली और भुवन की आंखे बड़ी हो गयी वो बस आंखे फाडे मुझे hi देख रहा था …..

“कोमल तुम “

भुवन इतना hi बोल पाया था , मेरा पूरा जिस्म नंगा था और अभी अभी नहाने के कारण पानी से पूरी तरह से भीगा हुआ था, बालो से पानी की बुँदे टपक रही थी .. मेरे सुडोल और नरम जिस्म में अभी भी नमी बरकरार थी ..

मैं इठलाती हुई आयी और भुवन की गॉड में बैठ गयी ..

भुवन मनो काँप गया हो , वो अभी मेरे बिस्टेर में hi बैठा हुआ था …

“ये क्या कर रही हो “

“गलती हो गयी थी मुझसे ,मैं समझ नहीं पायी की मैं किस्से प्यार करती हु “

मैंने अपनी बांहे भुवन के गले में दाल दी थी , मैंने अपने होठो को उसके होठो पर रख दिया लेकिन भुवन अभी भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था ..

“हटो कोमल .. तुम अभी परेशां हो .. ये प्यार नहीं है ये बस गुस्सा है ..”

मैंने उसकी आँखों में देखा , मेरी आंखे गुस्से से लाल हो गयी थी , ये शख्स मुझे ठुकरा रहा था … लेकिन भुवन की आँखों में मेरे लिए बस प्यार hi था , कोई दर नहीं ……..

मैंने पास पड़ा तलवार उठा लिया जो अभी भी न जाने कितने लोगो के खून से भीगा हुआ था , मैंने उसे भुवन के गले में रख दिया

“मुझे ना बोलेगा “

मैंने गुस्से में कहा , ऐसा लग रहा था जैसे मैं खुद के काबू में नहीं रह गयी हु ,

लेकिन वो हंसा ..

“तुम मुझे डरा रही हो “ मैं बस गुस्से से उसे देखते रह गयी , मेरे मुँह से कोई भी आवाज नहीं निकल रही थी ..

तभी कमरे का दरवाजा खुल गया ..

सामने तिवारी मुँह फाड़े खा था , उसके हाथो में शराब की एक बोतल थी , वो बहुत hi खुस लग रहा था… लेकिन हमें इस हालत में देखते hi उसके चेहरे की हवइया उड़ गयी …….

मैं नग्न बिस्टेर में भुवन के गॉड में बैठी हुई थी और मेरा तलवार उसके गले से लगा हुआ था …..

हम दोनों ने तिवारी को देखा , जंहा भुवन थोड़ा झेप गया था वही मुझे जैसे कोई फर्क hi नहीं पड़ा…

“ये.. ये क्या कर रही हो कोमल ..”

मनो तिवारी का पूरा नशा hi काफूर हो गया हो , वो हकलाने लगा था ..

“भाग यंहा से मादरचोद वर्ण इसी तलवार से तेरा गाला भी काट दूंगी “

मैं गरजी और असीसा मैं तब गरजती थी जब मैं शिकार करती थी ..

मेरी आवाज सुनकर hi तिवारी काँप गया था , उसके आँखों में दर उतरने लगा था .. उसके कदम पीछे होने लगे थे ..

वो दरवाजा बंद करने लगा ..

“रुक … दरवाजा खोल के रख …दुनिया को भी तो पता चले की यंहा क्या हो रहा है ”

वो कुछ भी नहीं कह पाया … वो बस पीछे हैट गया … मेरा चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था ..

लेकिन अभी भी भुवन की आँखों में कोई भी दर नहीं दिख रहा था और यही बात मुझे और भी बेचैन कर रही थी …

उसने मेरे गलो को सहलाया , मेरे बालो में अपनी उंगलिया फेरी ……और … और मेरे होठो में अपने होठो को मिला दिया ……..

मेरे आँखों से एक आंसू गिर गया ऐसा लगा जैसे मैं फिर से होश में आ गयी थी ………

“वो पुस्तक कहा है कोमल …… मेरे पिता जी ने कभी मुझे सकती परंपरा के बारे में बताया था , मुझे लग की वो पागल आदमी कुछ भी बोलता है , लेकिन मेरे पिता जी तुम्हारे और पुराजारी जी के मित्र थे , और अब मुझे भी लगता है की कोई ऐसी बात है जो हमें जानना बहुत hi जरुरी है …..”

मैंने हां में सर हिलाया ..

“पिता जी ने अपने अंतिम समय में मुझे वो पुस्तक दी थी , और कहा था की जब तुम्हे अपना प्यार मिले तो इसे पढ़ना … मैंने आज तक उसे नहीं पढ़ा था शायद आज वो समय आ गया है “



हम दोनों के होठ फिर से मिल गए थे …….
 
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