अपडेट 53
महिमा ने कहना शुरू किया ………
फ़्लैश बैक स्टार्ट
वो शाम मेरे जीवन की सबसे भयानक शाम थी , मैं अपने पति और बेटी के साथ एक रेस्टोरेंट खाना खाने गयी थी , तभी मेरे पति {इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश (सत्य ) } का मोबाइल बज उठा , खाना आर्डर किया जा चूका था ……
“जी .. जी सर जी जी .. “
उनका चेहरा पीला हो रहा था , वो कभी मुझे देखते तो कभी बेटी नेहा को ..
अचानक उनके चेहरे का भाव बदलने लगा ..
“नहीं सर , मैं ऐसा नहीं कर सकता , मैं नहीं डरता सर जो गुनहगार है उसे तो सजा मिलनी hi चाहिए , है मेरे पास पर्याप्त सबूत है … ोकक सर , जय हिन्द”
उन्होंने फ़ोन रखा तो उनके चेहरे में एक तेज था ..
“क्या हुआ जी ..”
मैं उनकी इस दशा को देखकर थोड़ी घबरा गयी थी
“कोई बात नहीं मला तिवारी का फ़ोन था , मैंने जो करीम और जीवा के काळा कारनामो के खिलाफ सबूत इकठ्ठा किया है बस उसी के बारे में बोल रहे थे ..”
जीवा और करीम का नाम सुनकर मेरे चेहरे में पसीना आ गया था, ये दोनों तब तक शहर के सबसे ताकतवर गुंडे थे , दोनों के गैंग में आये दिन लड़ाईया होते रहती थी , सकती को गायब हुए लगभग 7-8 साल हो चुके थे , सकती के जान से जीवा गैंग कमजोर तो हुआ था लेकिन तिवारी के चुनाव जिएने से उसे ताकत मिली थी , तिवारी अब मला बन चूका था लेकिन उसे और पावर चाहिए थी , उसे मंत्री बनने का भूत चढ़ा हुआ था , इसलिए वो सीधे सीधे करीम का भी खत्म नहीं कर रहा था, चालबाजी तो तिवारी के खून में थी , जीवा की मदद से मला बनने के बाद भी वो करीम से भी मिला हुआ था, वो जनता था की किसी एक गैंग को पावरफुल बनाने के मतलब है की उसकी ताकत का काम होना ..
इसीलिए उसने प्रदेश के सबसे ईंमानदार लोगो में कुछ को अपने इलाके में इकठ्ठा किया जिनमे मेरे पति भी थे , और उन्हें करीम और जीवा के खिलाफ सबूत इकठ्ठा करने के लिए कहा और सहायता भी प्रदान की , इसका मकसद उस समय मेरे पति को नहीं पता था, वो तो यही सोचते थे की तिवारी अच्छा आदमी है और जीवा और करीम के गैंग को ख़त्म करना चाहता है .. लेकिन असल बात तो ये थी की तिवारी असल में जीवा और करीम गैंग के ऊपर एक नियंत्रण चाहता था और ये उन सबूतों के माध्यम से सम्भव हो सकता था …….
तिवारी की जीवा से खटपट तो चल hi रही थी साथ hi साथ करीम का दर भी उसे लगा hi रहता था इसलिए एक तीर से दोनों शिकार को साधना की सोची थी , लेकिन उसने गलती कर दी , गलती यही हो गयी की सबूत हाथ में आते hi मेरे पति ने उसे अदालत में पेश करना चाहा, वो इन सबूतों को तिवारी को नहीं देना चाहते थे , तिवारी ने फ़ोन करके उन्हें समझाया भी और ये भी चेतावनी दी की इससे उनकी जान को खतरा भी हो सकता है , अगर जीवा या करीम को पता चल गया तो वो उनके लिए खतरा बन सकते है ..
लेकिन मेरे पति तो अपने वसूलो के पक्के थे …….
उन्होंने मुझे न घबराने के लिए कहा और हंसी मजाक करते रहे , लेकिन ना जाने मेरा दिल आज क्यों घबरा रहा था ……….
हम खाना खाकर बहार निकले hi थे की किसी ने हमरे ऊपर हमला कर दिया , मेरे सर पर छोट लगी थी जिससे मेरी आंखे बंद होती गयी …..
जब आंखे खुली तो सामने का नजारा देख कर मेरी रूह hi काँप गयी थी ..
सत्य जी को एक चेयर पर बांध दिया गया था वही नेहा कही भी दिखाई नहीं दे रही थी , मैंने खुद की स्तिथि पर गौर किया तो मैं और भी चौक गयी थी , मैं एक टेबल में झुकी हुई थी , मेरे हाथ सामने की और बंधे हुए थे , सामने मेरे पति को बांध कर रखा गया था मेरा चेहरा उनकी और hi था , उनकी आँखों में आंसू थे और पूरा चेहरा खून से सना हुआ था , मुझे समझते देर नहीं लगी की उनके दुश्मन हमें उठा कर ले आये है …..
“जल्दी से बता दे की वो सबूत तूने कहा छुपाये , क्यों खुद को तकलीफ दे रहा है “
ये जीवा था… उन्होंने सत्य को बहुत hi मारा था लेकिन शायद सत्य ने अभी तक उन्हें उन सबूतों के बारे में नहीं बताया था …
“तुम मेरी जान भी ले लो तो मैं तुझे वो नहीं दूंगा “
मेरे पति चिल्लाये और फिर से एक जोरो का घुसा उनके चेहरे पर जा लगा …
“सेल अपनी नहीं तो अपने बच्चे और बीवी की तो सोच .. देख उसे .. अपनी बीबी को देख बेचारी जवान है , खूबसूरत है , इसके जिस्म से पूरा मांस नोच खाएंगे ये लोग … वो भी तेरे सामने “
उसकी उस शैतानी बात को सुनकर मेरा दिल hi दहल गया था , लेकिन अब भी मेरे पति के चेहरे पर कोई भी दर का भाव नहीं आया था ..
तभी कमरा खुला और कुछ लोग और वंहा आ गए , ये क्या???
वो तो करीम था … करीम आते hi जीवा को आदाब करता है ..
“किस्मत देखो जीवा , अगर ये कोई दूसरी जगह होती तो शायद हम दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे होते लेकिन आज .. आज हम दोनों को एक होना पड़ा इस सेल के कारन “
आते hi करीम ने सत्य के मुँह पर एक जोरदार घूंसा मार दिया .. तभी उसकी नजर मुझपर गयी ..
करीम की तो जैसे आंखे hi चमक उठी थी
“यार जीवा तू सच में अभी धंधे में नया hi है , सामने माल पड़ा है और तू इसे हाथो से मार रहा है , वंहा मार जंहा इसके दिल में लगे ..”
वो मेरी और बढ़ने लगा था ..
“नहीं कुत्ते उसे अगर कुछ किया न तो तुझे कुत्ते की मौत मरूंगा “
सत्य चिल्लाये और जीवा की भी आँखों में चमक आ गयी ,
“साला अभी तक इसे इतना टॉर्चर कर रहा था लेकिन अभी तक इतना नहीं बौखलाया था …”
जीवा भी गन्दी हंसी में हंस रहा था , करीम मेरे पास आ गया और मेरी साड़ी को उठाने लगा ..
“नहीं ..” मैं और सत्य दोनों hi जोरो से चिल्लाये थे , लेकिन वंहा मौजूद सभी लोग एक साथ जोरो से हंस पड़े ..
“वाह माल तो बिलकुल मुलायम है , सबूत न भी मिले तो भी इसे खाने में मजा आएगा “
“कुत्ते .. मैं तेरा “
सत्य कुछ और बोलते उससे पहले जीवा ने उनके चेहरे पर एक जोरो का मुक्का मार दिया , उनके मुँह से खून निकल आया था , वही मैं चिल्लाती उससे पहले hi जीवा ने सत्य के गले में एक चाकू रख दिया , मैं बिलकुल hi निर्जीव hi हो गयी थी , मेरी बेटी का भी अभी कोई पता नहीं था, पति की जिंदगी खतरे में थी , इन दोनों के सामने मेरी इज्जत की क्या hi कीमत थी …
करीम ने मेरी साड़ी को मेरे खुल्हो तक उठा दिया था , साथ hi उसने मेरे पेटीकोट को भी उठा दिया था , मेरे पेअर , जंघे नंगे सबके सामने थे, मैं रो रही थी लेकिन मेरा रोना किसी के दिल में कोई भी दर्द नहीं जगा रहा था बल्कि सभी मेरी मजबूरी में बस हंस रहे थे , मेरे अंतःवस्त्र hi बचे थे जो मेरी इज्जत को ढंके हुए थे , लेकिन मैं टेबल में बंधी हुई थी , मेरी छतिया टेबल से लगी हुई थी , मेरा पिछवाड़ा उभर कर करीम के सामने था , उसने एक जोर से तमाचा मेरे नितम्भो में मार दिया ..और वो जोरो से हंसा
“नहीं ..” मजबूरी और जिल्लत से भरी हुई ये आवाज मेरे मुँह से निकल गयी थी ..
मैं और भी जोरो से रोने लगी थी , मेरे पति की आँखों में भी आंसू थे , एक तरह कर्तव्य था जिसको पूरा करने की सपथ उन्होंने उठाई थी और दूसरी तरफ वो सपथ थी जो शादी के फेरे लेते हुए उन्होंने उठाई थी , दोनों hi वचन थे जिसे उन्हें पूरा करना था , वो अपने आँखों के सामने मेरी इज्जत को लुटाता हुआ तो नहीं देख सकते थे , वो सच्चे पुलिस वाले थे जो अपने कर्तव्य के लिए मौत को तो गले लगा सकते थे लेकिन कैसे अपने पत्नी की इज्जत को लुटाता हुआ देखते ..
करीम के हाथ मेरे पंतय में घूमने लगे थे और मेरे योनि के ऊपर आ गए ,उसने उस जगह को जोरो से मसल दिया था , मैं बुरी तरह से चीखी जिससे सत्य को पता चल गया था की मेरे साथ क्या हो रहा है ……
“रुको ……….” सत्य जोरो से चिल्लाये
सभी की नज़ारे उनके ऊपर hi थी , उन्होंने फैसला कर लिया था , फैसला दोनों hi वचनो में से एक को निभाने का ..
“मैं बताता हु की सबूत कहा है , इसे और मेरी बेटी को छोड़ दो , चाहे तो मुझे मार देना “
करीम पर जैसे इन बातो का कोई असर नहीं हो रहा था , वो आगे आकर मेरे नितम्भो से अपने कमर को लगा दिया , उसका लिंग तना हुआ था जो की मेरे नितम्भो में चुभ रहा था , उसके पठानी सूट में वो लिंग तना हुआ था , मैं फिर से जोरो से रोई जिसे सुनकर सत्य जोरो से चिल्लाये ……….
“अगर मैंने नहीं बताया तो सबूत आटोमेटिक hi न्यूज़ चैनल्स, केंद्र साकार और राज्य सकरतो तक पहुंच जायेगी …तुम सब बर्बाद हो जाओगे “
“करीम रुको “ इस बार जीवा चिल्लाया था , करीम ने बुरा सा मुँह बनाया और जीवा के साथ जाकर खड़ा हो गया ,
“बताओ ..”
“पहले मेरी बीबी और बेटी को छोड़ दो “
जीवा जोरो से हंस पड़ा था …..
“मुझे चुटिया समझ कर रखा है क्या , इन्हे जाने दिया तो तू हमें कभी नहीं बताएगा “
“और अगर मैंने बता दिया तो क्या गारंटी है की तुम इन्हे जाने दोगो “
सत्य की बात सुनकर करीम भड़क गया
“सेल को यही गोली मारो और इसकी बीबी को मुझे दे दो बात ख़त्म “
लेकिन जीवा अभी भी शांत था
“तो तुम बताओ क्या करना है “ जीवा ने सत्य से कहा
“कोई ऐसा जिसे हम दोनों की चिंता हो वही गारंटी ले सकता है ..”
सत्य की बात सुनकर जीवा थोड़े चिंता में पद गया
“करीम तिवारी को फ़ोन लगाओ … और उसे यंहा बुलवा , वही इसे समझायेगा “
तिवारी का नाम सुनकर मेरे पति और मुझे दोनों को एक बड़ा झटका लगा था ..
मला इन लोगो के साथ मिला हुआ था शायद उसी ने हमारी लोकेशन और जानकारी इन लोगो को दी थी ..
“अरे तिवारी का काम ख़त्म हो गया , उसने हमें जानकारी दी और बदले में हम उसके नेक्स्ट चुआव में फंडिंग करेंगे बात ख़त्म , अब जो भी मामला है उसे हमें hi निपटना होगा “ करीम की नज़ारे मुझ पर hi तिकी हुई थी उसे ये सब सौदेबाजी बिलकुल भी पसंद नहीं आ रही थी उसे तो मेरे जिस्म को नोचना था चाहे उसके लिए वो कोई भी कीमत चुकाए ..
लेकिन जीवा नहीं मन और तिवारी को वंहा बुलाया गया , उसने जब मेरी हालत देखि तो घबरा गया
“ये तुम लोग क्या कर रहे हो , मैंने तुम्हे सिर्फ इंस्पेक्टर के लेन के लिए कहा था तुम उसके परिवार को पकड़ कर ले आये “
दया संकर चीखा ..
“हमें हमारा काम मत समझा अब इस इंस्पेक्टर से डील करवा बात ख़त्म “
करीम ने साफ साफ लब्जो में कहा था ..
“देखो सत्य मैंने तुम्हे पहले भी समझाया था की वो सबूत मुझे दे दो , ऐसे सेंसिटिव चीजों को सम्हालना तुम्हारे बस का नहीं है “
तिवारी की बात सुनकर मेरे पति के चेहरे में एक कातिल सी मुस्कान खिल गयी
“वह मला साहब खुद मुझे इनके पीछे लगाकर इनलोगो से हाथ मिला लिया , आपने अपन ईमान बेचा होगा लेकिन मैं आज भी ईमानदार हु , लेकिन मुझे अपने परिवार की चिंता है मैं उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकता “
सत्य की बात सुनकर तिवारी को थोड़ी शर्मिंदगी तो हुई थी लेकिन आखिर उसने भी अपन ईमान तो बेच hi दिया था
“सत्य ये पॉलिटिक्स है , यंहा कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता, न तुम दोस्त थे न hi ये दशम थे , और न hi अब ये दोस्त है और तुम दुश्मन हो , बा यंहा काम के और बेकार इंसान होते है , जो काम का है वो दोस्त है , और काम बिगड़े वो दुश्मन और जो बेकार है उससे कोई मतलब hi नहीं रखा जाता … तो मुझे नैतिकता का पथ मत पढ़ाओ मैं अपना काम जनता हु .. तुम अपने फॅमिली को बचाओ .. चलो मैं गारंटी देता हु की तुम्हारी बीबी और बेटी की हिफाजत का जिम्मा मेरा होगा , तुम बस वो सब बता दो जो हम तुमसे जानना चाहते है .”
“लेकिन मैं आपके बातो का यकीं कैसे करू “
सत्य की बात सुनकर तिवारी ने मनो एक गहरी साँस ली
“देखो सत्य मैं कमीना जरूर हु लेकिन इतना नहीं की सिर्फ अपने फायदे के लिए किसी ायरत के इज्जत से खेलु ….. और ऐसे भी मुझपर यकीं करने के अलावा तुम्हारे पास कोई चारा भी नहीं है ..”
सत्य ने एक नजर मुझे देखा , वो आज मेरे लिए अपने कर्तव्य की आहुति देने जा रहे थे , उनकी आँखों में आंसू थे वो मुझे आँखों से hi कह रहे थे की मुझे माफ़ करना …
“ठीक है लेकिन मुझे एक आदमी को बुलाना है , मेरी बीबी और बेटी को उसके हवाले होने के बाद hi मैं सबूतों को बताऊंगा , चाहे तो तुम लोग इन लोगो की निगरानी कर लेना लेकिन उस इंसान तक इन्हे पहुँचाओगे “
तिवारी ने कुछ सोचकर हां में सर हिला दिया था ..
थोड़ी देर के बाद मेरे आँखों में पट्टी बंधी गयी थी , मेरे पति ने अंतिम बार मेरे कानो में बस ये कहा था
“मैं तुमसे और नेहा से बहुत प्यार करता हु महिमा, और मैं जिसके पास तुम्हे भेज रहा हु उससे कहना की मुझे माफ़ कर दे मैं टूट गया “
हमें बेहोश कर दिया गया और जब हमारी आंखे खुली तो मैं डॉ. चुटिया के पास थी …….
मेरे पति की तो लाश भी बरामद नहीं हुई , डॉ. ने बताया की सौदे के मुताबिक जब मैं और नेहा उनको मिले तो उन्होंने सत्य से बात की थी और कहा था की हम दोनों उन्हें मिल गए है …
शायद उसके बाद सत्य ने सबूतों के बारे में बता दिया हो…….
फ्लैशबैक एन्ड
पुरे कमरे में सन्नाटा छ गया था , नेहा अपनी माँ के गले से लग कर रो रही थी , डॉ. चुटिया भी मायूस दिख रहे थे ……..
माहौल गमगीन था
“सत्य एक ईमानदार पुलिस वाला था, उसकी मौत जाया नहीं जायेगी ..”
डॉ. के मुँह से बस इतना hi निकल पाया